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शुभम अपनी मां के ठीक पीछे खड़ा था जहां से उसे अपनी मां की खूबसूरत बदन का हर एक हिस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा था।
अपने बेटे को अपने बेहद करीब खड़ा हुआ देखकरनिर्मला एकदम से शर्मा गई वह अपनी नजरें इधर-उधर घुमा कर अपने शर्म को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था निर्मला अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी जिससे उसकी बुर गिली होने लगी थी साथ ही उसकी पतली डोरी जैसी पेंटी भी गीलेपन के एहसास से निर्मला की खूबसूरत चिकने मखमली बदन पर से फिसलने के लिए मचल रही थी। शुभम अपनी मां को आईने में एकटक देखे जा रहा था उसे इस तरह से देखता हूआ पाकर निर्मला से रहा नहीं जा रहा था वह उत्तेजित स्वर में बोली।
ऐसे क्या देख रहा है?
मैं देख रहा हूं कि आज आप इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो सच कहूं तो खूबसूरत शब्द भी आपकी खूबसूरती के आगे कम पड़ जाएगा बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रही हो। ( शुभम आईने में अपनी मां की आंखों में झांकते हुए बोला।)
तो क्या
मैं पहले तुझे खूबसूरत नहीं लगती थी।
नहीं मेरे कहने का यह मतलब नहीं था। मैं यह कहना चाह रहा था कि आज आप छोटे से नाईट ड्रेस में बला की खूबसूरत लग रही हो।मैंने इससे पहले कभी भी आपको इतने छोटे से ड्रेस में नहीं देखा हूं।
बिना कपड़ों के तो देखा है ना ...(निर्मला मादक स्वर में बोली)
]
बिना कपड़ों में तो आप एकदम कयामत लगती हो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि दुनिया में आपके जैसी खूबसूरत औरत दूसरी कोई भी नहीं होगी। (इतना कहने के साथ शुभम अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठाकर अपनी मां के कंधों पर रख दिया और उसे हल्के से दबाते हुए) सच कहूं तो मम्मी आपके खूबसूरत बदन पर यह छोटा सा ड्रेस और भी ज्यादा फब रहा है। ( इतना कहते हुए शुभमअपनी मां के गर्दन को चुमना शुरू कर दिया और साथ ही गहरी गहरी सांसे लेकर अपनी मां के खूबसूरत बदन की खुशबू को अपने अंदर समाने लगा।अपने बेटे की हरकत की वजह से निर्मला पूरी तरह से बावली हुए जा रही थी उसके अंदर तूफान सा उठ रहा था,,उसकी हालत खराब हुए जा रही थी।
उत्तेजना के मारे निर्मला की सांसो की गति तेज हुए जा रही थी।
कई दिनों बाद आजनिर्मला और सुभम का मिलन होने जा रहा था इसलिए आज ना जाने क्यों निर्मला को शर्म सी महसूस हो रही थी सुभम पीछे से उसके कंधों को हल्के हल्के दबाते हुए अपने होंठों से उसके गरदन को चुमे जा रहा था। और निर्मल आखिर की शर्म के मारे अपने बदन को समेटे जा रही थी।
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निर्मला अपने अक्स को आईने में देखकर अपने आप पर गर्व महसूस कर रही थी छोटी सी ट्रांसपेरेंट ड्रेस में वह बला की खूबसूरत लग रही थी इस बात को वह भी मानती थी उसकी मोटी मोटी चिकनी जांघें पूरी की पूरी नंगी दिख रही थी और जिस तरह की उसने पैंटी पहनी थी उसे पहनने के बाद निर्मला अपने अंदर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस कर रही थी। वह जानबूझकर ब्रा नहीं पहनी थी ताकि सुभम उस के दर्शन एकदम आराम से कर सके... वैसे तो शुभम किसी भी तरह से उसके दोनों खरबुजो के दर्शन बड़े आराम से कर सकता था लेकिन निर्मला के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था वह आज कुछ ज्यादा ही मादक मूड में थी आज का कुछ ज्यादा ही खुद पर मजा लेना चाहती थी इसलिए तो इस तरह की छोटी सी ड्रेस पहनी हुई थी।
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धीरे-धीरे कमरे का माहौल बदलने लगा था शुभम के ऊपर अपनी मां की मदमस्त जवानी का नशा छाने लगा था इसलिए तो अपने दोनों हाथों को कंधों पर से नीचे की तरफ लाते हुए ट्रांसपेरेंट ड्रेस के ऊपर से ही अपनी मां के दोनों कबुतरो को अपने दोनों हथेलियों में थाम कर ऊन्हे खिलाने लगा। निर्मला को आईने में सब कुछ साफ साफ नजर आ रहा था अपने ही बेटे के हाथों में अपने दोनों चुचियों को देखकर निर्मला शर्म से पानी पानी होने के साथ-साथ मदहोश होने लगी।शुभम कुछ ज्यादा ही जोर लगाकर ड्रेस के ऊपर से ही अपनी मां की दोनों चूचियों को कस के पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया था मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे आटा गूथ रहा हो। शुभम अपनी मां की चूचियों के साथ जितना अधिक शख्ती दिखाता उतना ही अधिक आनंद की प्राप्ति निर्मला को हो रही थी साथ ही उसकी गरम सिसकारी की हल्की आह सुनाई देने लगी थी।
शुभम अपनी मां के बदन से पूरा सट गया था जिसकी वजह से उसके पहचाने में तना हुआ तंबू ठीक निर्मला की मदमस्त नितंबों के बीचो बीच रगड़ खाने लगा।
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सससहहह,,,,आहहहहहह,,सुभम,,,,ऊफफफफ,,,,,, (निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी साथ ही वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलकर अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से रगड़वाने लगी । कमरे का माहौल पूरी तरह से बदलता चला जा रहा था दोनों की तेज चलती सांसो से मादकता की खुशबू आ रही थी ,,,,, निर्मला की नाईट ड्रेस काफी छोटी होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड अच्छे से शुभम के मौटे तगड़े लंड को महसूस कर पा रही थी। )
अपने बेटे को अपने बेहद करीब खड़ा हुआ देखकरनिर्मला एकदम से शर्मा गई वह अपनी नजरें इधर-उधर घुमा कर अपने शर्म को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था निर्मला अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी जिससे उसकी बुर गिली होने लगी थी साथ ही उसकी पतली डोरी जैसी पेंटी भी गीलेपन के एहसास से निर्मला की खूबसूरत चिकने मखमली बदन पर से फिसलने के लिए मचल रही थी। शुभम अपनी मां को आईने में एकटक देखे जा रहा था उसे इस तरह से देखता हूआ पाकर निर्मला से रहा नहीं जा रहा था वह उत्तेजित स्वर में बोली।
ऐसे क्या देख रहा है?
मैं देख रहा हूं कि आज आप इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो सच कहूं तो खूबसूरत शब्द भी आपकी खूबसूरती के आगे कम पड़ जाएगा बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रही हो। ( शुभम आईने में अपनी मां की आंखों में झांकते हुए बोला।)
तो क्या
मैं पहले तुझे खूबसूरत नहीं लगती थी।
नहीं मेरे कहने का यह मतलब नहीं था। मैं यह कहना चाह रहा था कि आज आप छोटे से नाईट ड्रेस में बला की खूबसूरत लग रही हो।मैंने इससे पहले कभी भी आपको इतने छोटे से ड्रेस में नहीं देखा हूं।
बिना कपड़ों के तो देखा है ना ...(निर्मला मादक स्वर में बोली)
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बिना कपड़ों में तो आप एकदम कयामत लगती हो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि दुनिया में आपके जैसी खूबसूरत औरत दूसरी कोई भी नहीं होगी। (इतना कहने के साथ शुभम अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठाकर अपनी मां के कंधों पर रख दिया और उसे हल्के से दबाते हुए) सच कहूं तो मम्मी आपके खूबसूरत बदन पर यह छोटा सा ड्रेस और भी ज्यादा फब रहा है। ( इतना कहते हुए शुभमअपनी मां के गर्दन को चुमना शुरू कर दिया और साथ ही गहरी गहरी सांसे लेकर अपनी मां के खूबसूरत बदन की खुशबू को अपने अंदर समाने लगा।अपने बेटे की हरकत की वजह से निर्मला पूरी तरह से बावली हुए जा रही थी उसके अंदर तूफान सा उठ रहा था,,उसकी हालत खराब हुए जा रही थी।
उत्तेजना के मारे निर्मला की सांसो की गति तेज हुए जा रही थी।
कई दिनों बाद आजनिर्मला और सुभम का मिलन होने जा रहा था इसलिए आज ना जाने क्यों निर्मला को शर्म सी महसूस हो रही थी सुभम पीछे से उसके कंधों को हल्के हल्के दबाते हुए अपने होंठों से उसके गरदन को चुमे जा रहा था। और निर्मल आखिर की शर्म के मारे अपने बदन को समेटे जा रही थी।
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निर्मला अपने अक्स को आईने में देखकर अपने आप पर गर्व महसूस कर रही थी छोटी सी ट्रांसपेरेंट ड्रेस में वह बला की खूबसूरत लग रही थी इस बात को वह भी मानती थी उसकी मोटी मोटी चिकनी जांघें पूरी की पूरी नंगी दिख रही थी और जिस तरह की उसने पैंटी पहनी थी उसे पहनने के बाद निर्मला अपने अंदर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस कर रही थी। वह जानबूझकर ब्रा नहीं पहनी थी ताकि सुभम उस के दर्शन एकदम आराम से कर सके... वैसे तो शुभम किसी भी तरह से उसके दोनों खरबुजो के दर्शन बड़े आराम से कर सकता था लेकिन निर्मला के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था वह आज कुछ ज्यादा ही मादक मूड में थी आज का कुछ ज्यादा ही खुद पर मजा लेना चाहती थी इसलिए तो इस तरह की छोटी सी ड्रेस पहनी हुई थी।
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धीरे-धीरे कमरे का माहौल बदलने लगा था शुभम के ऊपर अपनी मां की मदमस्त जवानी का नशा छाने लगा था इसलिए तो अपने दोनों हाथों को कंधों पर से नीचे की तरफ लाते हुए ट्रांसपेरेंट ड्रेस के ऊपर से ही अपनी मां के दोनों कबुतरो को अपने दोनों हथेलियों में थाम कर ऊन्हे खिलाने लगा। निर्मला को आईने में सब कुछ साफ साफ नजर आ रहा था अपने ही बेटे के हाथों में अपने दोनों चुचियों को देखकर निर्मला शर्म से पानी पानी होने के साथ-साथ मदहोश होने लगी।शुभम कुछ ज्यादा ही जोर लगाकर ड्रेस के ऊपर से ही अपनी मां की दोनों चूचियों को कस के पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया था मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे आटा गूथ रहा हो। शुभम अपनी मां की चूचियों के साथ जितना अधिक शख्ती दिखाता उतना ही अधिक आनंद की प्राप्ति निर्मला को हो रही थी साथ ही उसकी गरम सिसकारी की हल्की आह सुनाई देने लगी थी।
शुभम अपनी मां के बदन से पूरा सट गया था जिसकी वजह से उसके पहचाने में तना हुआ तंबू ठीक निर्मला की मदमस्त नितंबों के बीचो बीच रगड़ खाने लगा।
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सससहहह,,,,आहहहहहह,,सुभम,,,,ऊफफफफ,,,,,, (निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी साथ ही वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलकर अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से रगड़वाने लगी । कमरे का माहौल पूरी तरह से बदलता चला जा रहा था दोनों की तेज चलती सांसो से मादकता की खुशबू आ रही थी ,,,,, निर्मला की नाईट ड्रेस काफी छोटी होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड अच्छे से शुभम के मौटे तगड़े लंड को महसूस कर पा रही थी। )