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Adultery एक अधूरी प्यास- 2

शुभम अपनी मां के ठीक पीछे खड़ा था जहां से उसे अपनी मां की खूबसूरत बदन का हर एक हिस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा था।

अपने बेटे को अपने बेहद करीब खड़ा हुआ देखकरनिर्मला एकदम से शर्मा गई वह अपनी नजरें इधर-उधर घुमा कर अपने शर्म को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था निर्मला अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी जिससे उसकी बुर गिली होने लगी थी साथ ही उसकी पतली डोरी जैसी पेंटी भी गीलेपन के एहसास से निर्मला की खूबसूरत चिकने मखमली बदन पर से फिसलने के लिए मचल रही थी। शुभम अपनी मां को आईने में एकटक देखे जा रहा था उसे इस तरह से देखता हूआ पाकर निर्मला से रहा नहीं जा रहा था वह उत्तेजित स्वर में बोली।

ऐसे क्या देख रहा है?

मैं देख रहा हूं कि आज आप इतनी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो सच कहूं तो खूबसूरत शब्द भी आपकी खूबसूरती के आगे कम पड़ जाएगा बहुत ही ज्यादा सेक्सी लग रही हो। ( शुभम आईने में अपनी मां की आंखों में झांकते हुए बोला।)

तो क्या

मैं पहले तुझे खूबसूरत नहीं लगती थी।

नहीं मेरे कहने का यह मतलब नहीं था। मैं यह कहना चाह रहा था कि आज आप छोटे से नाईट ड्रेस में बला की खूबसूरत लग रही हो।मैंने इससे पहले कभी भी आपको इतने छोटे से ड्रेस में नहीं देखा हूं।

बिना कपड़ों के तो देखा है ना ...(निर्मला मादक स्वर में बोली)

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बिना कपड़ों में तो आप एकदम कयामत लगती हो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि दुनिया में आपके जैसी खूबसूरत औरत दूसरी कोई भी नहीं होगी। (इतना कहने के साथ शुभम अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठाकर अपनी मां के कंधों पर रख दिया और उसे हल्के से दबाते हुए) सच कहूं तो मम्मी आपके खूबसूरत बदन पर यह छोटा सा ड्रेस और भी ज्यादा फब रहा है। ( इतना कहते हुए शुभमअपनी मां के गर्दन को चुमना शुरू कर दिया और साथ ही गहरी गहरी सांसे लेकर अपनी मां के खूबसूरत बदन की खुशबू को अपने अंदर समाने लगा।अपने बेटे की हरकत की वजह से निर्मला पूरी तरह से बावली हुए जा रही थी उसके अंदर तूफान सा उठ रहा था,,उसकी हालत खराब हुए जा रही थी।

उत्तेजना के मारे निर्मला की सांसो की गति तेज हुए जा रही थी।

कई दिनों बाद आजनिर्मला और सुभम का मिलन होने जा रहा था इसलिए आज ना जाने क्यों निर्मला को शर्म सी महसूस हो रही थी सुभम पीछे से उसके कंधों को हल्के हल्के दबाते हुए अपने होंठों से उसके गरदन को चुमे जा रहा था। और निर्मल आखिर की शर्म के मारे अपने बदन को समेटे जा रही थी।

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निर्मला अपने अक्स को आईने में देखकर अपने आप पर गर्व महसूस कर रही थी छोटी सी ट्रांसपेरेंट ड्रेस में वह बला की खूबसूरत लग रही थी इस बात को वह भी मानती थी उसकी मोटी मोटी चिकनी जांघें पूरी की पूरी नंगी दिख रही थी और जिस तरह की उसने पैंटी पहनी थी उसे पहनने के बाद निर्मला अपने अंदर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस कर रही थी। वह जानबूझकर ब्रा नहीं पहनी थी ताकि सुभम उस के दर्शन एकदम आराम से कर सके... वैसे तो शुभम किसी भी तरह से उसके दोनों खरबुजो के दर्शन बड़े आराम से कर सकता था लेकिन निर्मला के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था वह आज कुछ ज्यादा ही मादक मूड में थी आज का कुछ ज्यादा ही खुद पर मजा लेना चाहती थी इसलिए तो इस तरह की छोटी सी ड्रेस पहनी हुई थी।

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धीरे-धीरे कमरे का माहौल बदलने लगा था शुभम के ऊपर अपनी मां की मदमस्त जवानी का नशा छाने लगा था इसलिए तो अपने दोनों हाथों को कंधों पर से नीचे की तरफ लाते हुए ट्रांसपेरेंट ड्रेस के ऊपर से ही अपनी मां के दोनों कबुतरो को अपने दोनों हथेलियों में थाम कर ऊन्हे खिलाने लगा। निर्मला को आईने में सब कुछ साफ साफ नजर आ रहा था अपने ही बेटे के हाथों में अपने दोनों चुचियों को देखकर निर्मला शर्म से पानी पानी होने के साथ-साथ मदहोश होने लगी।शुभम कुछ ज्यादा ही जोर लगाकर ड्रेस के ऊपर से ही अपनी मां की दोनों चूचियों को कस के पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया था मानो ऐसा लग रहा था कि जैसे आटा गूथ रहा हो। शुभम अपनी मां की चूचियों के साथ जितना अधिक शख्ती दिखाता उतना ही अधिक आनंद की प्राप्ति निर्मला को हो रही थी साथ ही उसकी गरम सिसकारी की हल्की आह सुनाई देने लगी थी।

शुभम अपनी मां के बदन से पूरा सट गया था जिसकी वजह से उसके पहचाने में तना हुआ तंबू ठीक निर्मला की मदमस्त नितंबों के बीचो बीच रगड़ खाने लगा।

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सससहहह,,,,आहहहहहह,,सुभम,,,,ऊफफफफ,,,,,, (निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी साथ ही वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेलकर अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से रगड़वाने लगी । कमरे का माहौल पूरी तरह से बदलता चला जा रहा था दोनों की तेज चलती सांसो से मादकता की खुशबू आ रही थी ,,,,, निर्मला की नाईट ड्रेस काफी छोटी होने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड अच्छे से शुभम के मौटे तगड़े लंड को महसूस कर पा रही थी। )
 
ओहहहहहह ,,,,,मम्मी छोटे से ड्रेस में आप तो जवानी की बौछार मार रही हो,,,, मैं तो आपकी मदमस्त जवानी की बारिश में पूरा का पूरा भीग गया।( शुभम उसी तरह से अपनी मां की गर्दन को चुमते हुए और उसकी दोनों छलकती हुई जवानी को अपने हाथों से दबाते हुए बोला।)

औहहहह सुभम क्या सच में मैं इस छोटे से ड्रेस में ज्यादा खूबसूरत लगती हुं? ( निर्मला ठंडी आहें भरते हुए बोली।)

बहुत खूबसूरत मम्मी इतनी खूबसूरत कि मैं बता नहीं सकता... अगर विश्वास ना हो तो यह छोटी सी ड्रेस पहन कर केवल अपने गेट पर खड़े रहना देखना आते जाते सब का लंड खड़ा ना हो जाए तो मेरा नाम बदल देना। जिस की भी नजर आप पर पड़ेगी वह तुम्हें चोदने के लिए तड़प उठेगा उसकी जिंदगी की बस एक ही ख्वाहिश होगी कि अपने लंड को बस एक बार तुम्हारी बुर में डाल कर तुम्हें चौद दे। ( इतनी गंदी बातें करते हुए शुभम अपनी मां की दोनों चुचियों को जोर जोर से दबा रहा था और अपने बेटे के मुंह से अपने लिए इतनी गंदी बात सुनकर और दूसरी तरफ अपने स्तन मर्दन की वजह से वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी।)

संसहहहहहह ,,,,आहहहहहह,,,, कितना गंदा बोलता है तू क्या कोई बेटा अपनी मां के लिए इतनी गंदी बातें करता है।

अगर तुम्हारी जैसी खूबसूरत और सेक्सी मां होती तो वह जरूर गंदी बातें करेगा।

आहहहहहहह,,,,, छोड़ मुझे कितना खड़ा हो गया और मेरी गांड में धंस रहा है।

तुम्हारी गांड में धंसाने के लिए ही तो मैंने अपना लंड खड़ा किया हूं... मेरा तो बस नहीं चलता वरना मैं पेंटिं सहीत में लंड को तुम्हारी गांड में डाल देता,,,,,( शुभमअपनी पर जाने के ऊपर से ही अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड़ पर रगड़ते हुए बोला।)

धत्,,,,, पागल हो गया है तू ,,,,।

पागल मैं नहीं हो गया हूं पागल तुम बना देती हो अपनी खूबसूरती के जाल में फंसा कर तुम्हारा मदमस्त जवानी से भरा हुआ बदन देखकर मैं पागल हो जाता हूं।आहहहहहह,,,,कसम से मेरा बस चले तो दिन रात तुम्हारी खूबसूरत बदन से खेलता रहूं तुम्हारी मस्त मस्त चूची को दबा कर अपने मुंह में भर कर पीता रहुं। ( शुभम अपने एक हाथ को अपनी मां की चूची पर से हटा कर उसे नीचे की तरफ ले जाकर निर्मला की टांगों के बीच की मखमली दरार पर रखकर ऊसे दबाते हुए बोला।)

सससहहहहह ,,,,,,आहहहहहह,,,,, पागल तो तू मुझे बना दे रहा है शुभम.... ऊफफफफ,,,,,, तु मुझे मदहोश कर रहा है मुझे पागल बना रहा है,,,,( निर्मला अपने बेटे के द्वारा अपनी बुर मसलने की वजह से पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी। और अपनी मां की हालत को देखकर सुभम और जोर जोर से अपनी मां की बुर को मसलने लगा,,,,)

आआआआआहहहहहह,,,,,,थोड़ा धीरे आज तुझ पर कुछ ज्यादा ही नशा सवार हो गया है।

् मम्मी यह सब तुम्हारे छोटे से ड्रेस का नशा है आज पहली बार तुम्हें छोटे से ड्रेस में देख कर मुझे पता नहीं क्या हो रहा है ऐसा लग रहा है जैसे कई बोतलों का नशा मुझे हो रहा है। ये ड्रेस तुमने कब खरीदी। मम्मी,,,,? ( शुभम एक साथ अपनी मम्मी के खूबसूरत बदन से खेलते हुए बोला ,,,,वह एक हाथ से उसकी चूची दबा रहा था तो दूसरे हाथ से उसकी मखमली दरार से खेल रहा था और साथ ही पीछे से अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की गांड पर रगड़ रहा था ,,,तीनों तरफ से निर्मला अपने बेटे की हरकत की वजह से एकदम चुदवासी हुई जा रही थी ,,,, निर्मला अपने बेटे की बात सुनकर कांपते हुए और मादक स्वर में बोली।)

ये ड्रेस और पेंटिं तेरे पापा लाकर दिए हैं।

लगता है यह ड्रेस और पेंटी देकर पापा रात भर तुम्हारी लेते होंगे,,,,

नहीं रे जैसा तू सोच रहा है वैसे बिल्कुल भी नहीं है तेरे पापा को एक ही बार में थक जाते हैं और दोबारा के लिए तैयार ही नहीं हो पाते तु तो अच्छी तरह से जानता है कि तेरे पापा के लंड से चुदवाने में मुझे बिल्कुल भी मजा नहीं आता क्योकी तेरे पापा का लंड तेरे से आधा भी नहीं है और मेरी तो आदत पड़ चुकी है तेरे इस (अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पर जाने के ऊपर से ही पकड़ते हुए) मोटे तगड़े लंड से चुदवाने की और सच कहूं तो ऐसा लगता है कि मेरी कसी हुई बुर में तेरे लंड का सांचा बन चुका है जो कि जब तक तेरा लंड नहीं जाता तब तक मजा नहीं आता।

( शुभम तो अपनी मां के मुंह से अपनी लिए इस तरह की गंदी लेकिन तारीफ भरी बातें सुनकर एकदम गर्व से फुलने लगा,,, आप वहां अपनी कमर को हल्के हल्के धक्के लगाते हुए बोला।)

तो पापा से बोल क्यों नहीं रही थी मेरी जान कि तुम्हारा बेटा तुम्हारी चुदाई करता है,,, और मैं तुम्हारी बेटे के लंड से चुदकर मस्त हो जाती हूं अब मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं है,,,,,।

पागल हो गया है क्या तू अगर तेरे पापा हम दोनों के बारे में जरा सी भी भनक लगी ना तो हम दोनों को घर से निकाल देंगे। ,,,,,,

कुछ नहीं होगा मेरी रानी (इतना कहते हुए शुभम फुर्ती दिखाते हुए अपनी मां की दोनों बांहों को थामकर उसे घुमा कर अपनी तरफ खड़ी कर दिया और निर्मला कुछ समझ पाती इससे पहले ही अपने होंठ को अपनी मां के गुलाबी होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया...कुछ ही सेकंड में अपने बेटे की हरकत की वजह से निर्मला के तन बदन में आग लगने लगी...वह भी अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गुलाबी होठों को खोल दि और अपने बेटे की जीभ को मुंह में भरकर चूसना शुरु कर दी.... कमरे का माहौल पूरी तरह से उन्मादक हुए जा रहा था।एक तरफ से कम अपनी मां के गुलाबी होठों को चूसने में लगा था और दूसरी तरफ से वह अपने दोनों हाथों को अपनी मां के बड़े-बड़े गांड पर रखकर उसे जोर जोर से दबाने में लगा हुआ था और वही निर्मला एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर पजामे में हाथ डालकर अपने बेटे के लंड को दबा रही थी दोनों एक दूसरे के अंगों से मनचाहा आनंद ले रहे थे।

कई दिनों बाद आज निर्मला सुभम की बाहों में थी और सुभम इस बात से काफी उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था। दोनों के नजरों से निकल रही गर्म सांसे एक दूसरे के चेहरे को और भी ज्यादा गर्म कर रहा था । निर्मला से रहा नहीं जा रहा था क्योंकि कुछ दिनों से वह अपने पति के छोटे से लंड से खेल कर वह निरूत्साह और कहीं ज्यादा प्यासी हो चुकी थी। दोनों मां-बेटे चुंबन का आनंद लेते हुए एक दूसरे के बदन को टटोल रहे थे । हर पल निर्मला की हालत खराब होती जा रही थी। उससे रहा नहीं जा रहा था। वह पजामें के अंदर ही हाथ डाल कर सुभम के लंड को जोर जोर से हिला रही थी। उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूखता जा रहा था।

शुभम निर्मला के गुलाबी होठों को चूसने में मस्त था लेकिन निर्मला के मन में कुछ और ही चल रहा था वह शुभम के मोटे लंड की गरमाहट को अपनी हथेली में महसूस करके वह खुद काफी गर्म हो चुकी थी इसलिए देखते ही देखते हो अपने घुटनों के बल बैठ गई और शुभम के पजामे को अपने हाथों से खींचकर घुटनों तक सरका कर उसके लहराते हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसे अपनी गुलाबी होठों के बीच दबा ली और उसने चूसना शुरु कर दी।,, शुभम अपनी मां की तरफ से इस तरह की हरकत के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था इसलिए वह अपनी मां को लंड चूसता हुआ देखकर एकदम मस्त हो गया और उसके मुख से ना चाहते हुए भी गर्म सिसकारी फूट पड़ी।
 
सससहहहहह,,,,,आहहहहहह,,,, मम्मी,,,,,,,,ऊहहहहह,, तुम तो मुझे पागल कर दे रही हो मुझे यकीन नहीं हो रहा है कितनी जल्दी तुम मेरा लंड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दोगी ......

क्या करूं अभी आठ-दस दिन जैसा ही हुआ है,,, तेरे लंड से नहीं चुदी हुं,,, लेकिन ऐसा लगता है कि जैसे बरसोंबीत गया हो इसीलिए तो मैं तेरे को अपने मुंह में लेने के लिए इतना तड़प रही हूं सच कहूं तो तेरे लंड को आज हाथ में पकड़ कर ही मेरी बुर में आग लग गई और मेरी बुर से पानी छूटने लगा।( इतना कहने के बाद निर्मला वापस अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, कुछ भी हो शुभम को तो इतना मजा आ रहा था कि जैसे लग रहा था कि वह सातवें आसमान में उड़ रहा हो ,,,,वह पागलों की तरह हल्के-हल्के कमर को आगे पीछे करते हुए अपनी मां के मुंह को चोदना शुरू कर दिया कई दिनों बाद आज शुभम को भी काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था हालांकि वो आठ दस दिन सरला आंटी की चुत से ही काम चला रहा था लेकिन यह बात उसे अच्छी तरह से मालूम था कि जो मजा उसकी मां की बुर देती हैं वह कीसी ओर की बुर में नहीं मिलता। निर्मला पर वासना पूरी तरह से सवार हो चुकी थी वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को आइसक्रीम कौन की तरह मुंह में लेकर चूस रही थी।शुभम भी मस्ती के सागर में गोते लगाते हुए अपनी कमर को हल्के हल्के आगे पीछे करते हुए अपनी मां के मुंह में लंड को अंदर बाहर कर रहा था। दोनों को काफी मजा आ रहा था । पंखा चालू होने के बावजूद भी कुछ ही देर में दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो गया। उत्तेजना बस निर्मला अपने बेटे के मोटे लंड को पूरा का पूरा मुंह में लेकर चूसने का आनंद ले रही थी जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी वह अपनी आनंद में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दे रही थी साथ ही अपने बेटे को भी उतना ही मजा दे रही थी जितना कि वह ले रही थी।

जैसे-जैसे निर्मला अपना मुंह आगे पीछे करके अपने बेटे के लंड को चूसने का मजा ले रही थी वैसे वैसे उसके हीलते हुए बदन के साथ-साथ उसके दोनों चूचियां पेड़ पर लटके हुए आम की तरह झूल रहे थे जिसे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया और वह नीचे झुककर अपने दोनों हाथों से दोनों चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया जिससे दोनों के आनंद में और ज्यादा वृद्धि हो गई। दोनों को इस खेल में बहुत मजा आ रहा था दोनों अपनी-अपनी तरह से आनंद ले रहे थे कुछ देर तक दोनों ऐसे ही मजे लेते रहे उसके बाद शुभम अपना लंड अपनी मां के मुंह में से बाहर खींच लिया उसे डर था कि कहीं उसका पानी उसके मुंह में ना निकल जाए। निर्मला को लग रहा था कि उसका बेटा अब उस की चुदाई करेगा लेकिनशुभम का इरादा कुछ और था शुभम निर्मला का हाथ पकड़कर उसे खड़ी किया और निर्मला कुछ समझ पाती इससे पहले ही उसे अपनी गोद में उठा लिया।शुभम का बदन बेहद गठीला और कसरती था इसलिए वह अपनी भारी-भरकम मां को बिना दीक्कत के अपनी गोद में उठा लिया वैसे भी वह काफी उत्तेजित अवस्था में था इसलिए वह उत्तेजना बस जो चाहता था वह कर लेता था लेकिन इस तरह से निर्मला डर गई और वह बोली।

अरे ये क्या कर रहा है मैं गिर जाऊंगी,,,,,,,

मुझ पर तुमको विश्वास नहीं है मम्मी मैं भला कैसे तुमको गिरने दे सकता हूं। ( वह अपनी मां को गोदी में उठाए हुए ही आगे बढ़ा और बिस्तर पर ले जाकर क्यों पटक दिया बिस्तर पर नरम गरम गद्दा बिछा हुआ था इसलिए निर्मला को बिल्कुल भी चोट नहीं लगी लेकिन वह अपने बेटे की इस तरह की हरकत और उसकी ताकत को देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और उसकी बुर पानी फेंकने लगी,, निर्मला पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी ,,,वहजल्द से जल्द अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड अपनी बुर के अंदर ले लेना चाहती थी इसलिए वह बिस्तर पर गिरते ही अपनी दोनों टांगों को फैला दि यह एक तरह का शुभम के लिए आमंत्रण था और शुभम भी इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए तुरंत बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी टीशर्ट निकाल कर फेंक दिया।,,,,शुभम भी काफी उत्तेजित और उतावला नजर आ रहा था इसलिए वह अपनी मां की दोनों मोटी मोटी जांघों को पकड़कर फैला दीया,,,,वह बिना अपनी मां की पेंटिं निकाले एक हाथ से धीरे से पेंटिं की डोरी को पकड़कर ऊसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर के एक तरफ कर दिया जिससे निर्मला की रसीली बुर एकदम शुभम की आंखों के सामने अपने गीले रस की वजह से चमकने लगी और शुभम एक पल की देर किए बिना ही अपना मुंह अपनी मां की बुर में ले दीया ब और जितना हो सकता था उतना उसके अंदर गहराई तक डाल कर उसकी बुर चाटना शुरू कर दिया।शुभम का यह अंदाज निर्मला को बेहद अच्छा लगा ऐसा वह पहले भी कर चुका है शुभम कख ऊतावलापन देखकर निर्मला की हालत खराब होने लगी।

क्योंकि यह बात निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि जब जब उसका बेटा इतना उतावलापन दिखाता है तब तक वह उस की जबरदस्त चुदाई करता है इस बात का अहसास होते ही निर्मला की रसीली बुर जिसमें उसके बेटे की जीभ घुसी हुई थी वह खुशी के मारे फूलने पिचकने लगी।

शुभम पागलों की तरहअपनी मां की बुर चाट रहा था और निर्मला बड़ी मस्ती के साथ अपनी गांड उपर उछाल उछालकर अपने बेटे का साथ दे रही थी।

सससहहहहह आहहहहहह ऊईईईईईईईई,,,ऊमममममम,,,,, ऐसे ही ऐसे ही बेटा पूरी जीभ अंदर डाल कर चाट ,,,,आहहहहहहह,,,,,,

( ऐसा कहते हुए निर्मला जोर-जोर से अपनी कमर ऊपर उछाल रही थी और अपनी मां की हरकत देखकर शुभम की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी वह एक हाथ से अपना लंड ही लाते हुए अपनी मां की बुर चाटने की मस्ती में पूरी तरह से खोने लगा। कुछ देर तक वह अपनी मां की बुर चाटकर अपनी मां की उत्तेजना को बढ़ाता रहा ,,,उसकी मां पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी अब उसे अपनी बुर के अंदर अपने बेटे की जीभ नहीं बल्कि उसका मोटा तगड़ा लंड महसूस करता हुआ देखने की इच्छा हो रही थी इसलिए वह बोली।)

आहहहहहह,,,,,,,बेटा,,,,,बस,,,, मुझसे रहा नहीं जा रहा है अब अपना मोटा लंड मेरी बुर में डाल कर चोद,,,,आहहहहहह,,,,( ऐसा कहते हुए निर्मला अपना सर दाएं बाएं पटक रही थी वह पुरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी। शुभम अपनी मां की उत्तेजना देख कर समझ गया था कि उसकी मां चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई है इसलिए वह भी मौके का फायदा उठाते हुए तुरंत अपना मुंह अपनी मां की बुर पर से हटाकर अपने लिए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच जगह बनाते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की पतली सी पेंटिं की डोरी को अपने हाथों से थाम लिया अपने बेटे की हरकत को देखते हुए निर्मला समझ गई कि अब उसे क्या करना है इसलिए बिना बोले ही अपनी भारी भरकम को गांड को ऊपर हवा में उठा दी शुभम एक पल की भी देरी किए बिना ही पेंटी को अपनी मां की गोरी गोरी चिकनी गांड पर से उतार कर नीचे फर्श पर फेंक दिया बचा कुचा काम खुद निर्मला कर दी अपनी ट्रांसपेरेंट ड्रेस को उतारकर वह भी उसे फर्श पर फेंक दि,,, अब वह बिस्तर पर अपने बेटे के सामने एकदम नंगी लेटी हुई थी अपनी दोनों टांगों को फैलाए हुए और शुभम भी अपने पजामे को उतारकर एकदम नंगा हो गया उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा जिसे देखकर निर्मला के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आ गया।

शुभम के लिए अब रास्ता साफ हो चुका था उसे अपनी मंजिल अपनी आंखों के सामने नजर आ रही थी इसलिए अपनी मंजिल की तरफ आगे बढ़ते हुएवह अपनी मां की दोनों टांगों को खींचकर अपनी दोनों टांगों पर चढ़ा दिया और अपने मोटे तगड़े लंड़ के सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी बुर के गुलाबी छेद पर रखकर हल्का सा धक्का लगाया बुर पहले से ही पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए शुभम का मोटा तगड़ा सुपाड़ा फटाक से निर्मला की बुर के अंदर समा गया,,,,, काफी दिनों बाद निर्मला को मर्दाना ताकत से भरे हुए असली लंड की गर्मी अपनी बुर के अंदर महसूस हुई थी,,, इसलिए मैं पूरी तरह से गन गना गई,,,, शुभम भी काफी दिनों बाद अपनी मां की रसीली बुर पाकर एक दम खुश हो गया। देखते ही देखते शुभम अपने मोटे तगड़े लंबे लंड को पूरा का पूरा अपनी मां की बुर की गहराई में डाल दिया और उसकी बड़ी बड़ी चूची पकड़कर अपना कमर हिलाते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया हर धक्के के साथ निर्मला के मुंह से आह निकल जा रही है अपनी मां की उत्तेजना और उसकी मस्ती देखकर शुभम कुछ ज्यादा जोर से ही धक्के लगा रहा था।

दोनों मां बेटे असली चुदाई का खेल खेल रहे थे। दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे निर्मला की गर्म सिसकारी से पूरा कमरा गूंज रहा था उसके बदन की मादक खुशबू शुभम की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रही थी दोनों लगातार एक दूसरे का साथ देते हुए चुदाई का आनंद लूट रहे थे शुभम ऊपर से धक्के लगा रहा था और निर्मला नीचे से अपनी गांड उठा कर अपने बेटे का साथ दे रही थी कई दिनों की कसर आज की रात निर्मला निकाल लेना चाहती थी ।सुभम के धक्कों की गति कुछ ज्यादा ही तेज गति से चल रही थी वह किसी मशीन की तरह अपनी कमर हिला रहा था और निर्मला को ऐसा लग रहा था कि उसकी रसीली बुर उसके बेटे के लिए ही बनी है। क्योंकि शुभम का मोटा तगड़ा लंडनिर्मला की कसी हुई बुर में एकदम रगड़ के अंदर घुसता था जिससे निर्मला को अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे के लंड की रगड़ अत्यधिक आनंद प्रदान कर दी थी।।शुभम की जांघें निर्मला की मोटी मोटी जांघों से टकराकर मधुर ध्वनि उत्पन्न कर रही थी जिसकी वजह से कमरे का पूरा माहौल मादकता से भर जा रहा था। निर्मला अपने बेटे के हर धक्के

का जवाब मादकता के भरी सिसकारी से दे रही थी। जिससे शुभम और भी ज्यादा चुदवासा होकर धक्के पे धक्के पेल रहा था। धीरे-धीरे दोनों अपनी मंजिल के करीब पहुंच रहे थे दोनों चरम सुख पाने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे देखते ही देखते निर्मला के सांसों की गति के साथ-साथ उसकी गरम सिसकारी की आवाज भी तेज हो गई शुभम को समझते देर नहीं लगी थी उसकी मां झढ़ने वाली है इसलिए उसे अपनी बाहों में कस के अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते कुछ ही देर में दोनों का पानी निकल गया दोनों झढ़कर मस्त होकर एक दूसरे की बाहों में कुछ देर तक यूं ही लेटे रहे।

लेकिन यह चुदाई का सिलसिला बस इतने से खत्म नहीं हुआ निर्मला अपने बेटे को रात भर सोने नहीं दी कभी वह उसके ऊपर तो कभी शुभम उसके ऊपर लगातार दोनों की चुदाई का कार्यक्रम चलता रहा और देखते ही देखते सुबह हो गई।

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सुबह में निर्मला की नींद खुली तो उसने महसूस की कि वह शुभम की बाहों में थी जो कि वह उसे पीछे से जकड़े हुए थे। और रात की जबरदस्त चुदाई के बाद दोनों बिना कपड़े पहने ही एकदम नंगे ही सो गए थे जिसकी वजह से निर्मला को साफ तौर पर महसूस हो रहा था कि उसकी बड़ी बड़ी गांड की दरारों के बीच शुभम का मोटा तगड़ा लंड फंसा हुआ था। निर्मला को महसूस हो रहा था कि उसके बेटे का लंड पूरी तरह से उत्तेजित अवस्था में नहीं था लेकिन फिर भी जितना खड़र में जाने के लिए काफी था। एक बार फिर से सुबह की पहली किरण के साथ ही खिड़की से आ रही शीतल हवाओं के झोंकों की वजह से और लग्न अवस्था में अपने बेटे से चिपके होने की वजह से निर्मला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उससे रहा नहीं गया और वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे से ही अपने बेटे के लंड पर रगड़ना शुरू हो गई। बड़ी बड़ी मद मस्त गांड की गर्माहट को शुभम ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया और अपनी मां की मस्त गांड की गर्मी की वजह से उसकी नींद खुल गई,,, नींद खुलते ही देखा कि उसकी मां अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे ठलते हुए उसके मोटे तगड़े बड़े लंड पर रगड़ रही है यह देखते ही उसकी मदमस्त बर्दाश्त के बाहर कर देने वाली जवानी की गर्मी से उसका पूरा बदन उत्तेजना में अकड़ने लगा,,,,,

जिस तरह से स्वर्ग की अप्सरा एक तपस्वी की तपस्या को भंग कर देती है उसी तरह से निर्मला भी अपने बेटे की नींद को अपनी मद मस्त जवानी की गर्मी से भंग कर दी थी लेकिन इसमें निर्मला के साथ-साथ उसके बेटे का भी फायदा था अपनी मां की हरकत को देखकर शुभम से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर जोर जोर से चपत लगाने लगा।

आहहहह,,,,,ऊठ गया तू ,,,, मुझे लगा कि तू सोया ही रहेगा,,,,,

ऐसा कैसे हो सकता है मेरी रानी कि तुम प्यासी रहो और मैं चैन की नींद सोता रहुं। मुझसे तुम्हारी यह तड़प देखी नहीं जाती इसीलिए तो जाग गया हूं और साथ ही देखो मेरा लंड जाग गया है। ,,,,,

जाग गया हैं तो देर किस बात की है मेरे राजा इसे इसकी गुफ़ा का रास्ता दिखाओ।( निर्मला एकदम मादक स्वर में अपने बेटे की तरफ देखते हूए बोली,,, शुभम तो अपनी मां की इस बात पर एकदम कायल हो गया,,,,, और वह पीछे से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को एक हाथ से फैलाते हुए अपने लिए रास्ता बनाते हुए बोला।,,,,, )

Nirmla or Shubham

ससससहहहह,,,,,, मेरी जान मेरा शेर तेरी गुफा में घुसने के लिए पूरा तैयार हो गया है,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाया और निर्मला भी अपने बेटे के इस इशारे को समझ गई और खुद ही अपनी टांग को घुटनों से मोड़कर ऊपर की तरफ उठा दी जिससे उसके गुलाबी रंग का गुलाबी छेद शुभम के लंड के ठीक सामने आ गया और जैसे शुभम का लंड ईसी ताक में था जैसे ही गुलाबी बुरका गुलाबी छेद नजर आया वैसे ही वह सीधा जाकर छेद पर टिक गया,,,, एक बार फिर से निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी छूट गई,,, अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शुभम की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह एक हाथ से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को थामकर हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ ठलने लगा,,,, देखते ही देखते शुभम का मोटा तगड़ा लंड एक बार फिर से उसकी मां की गुलाबी बुर के अंदर समा गया था। सुबह-सुबह निर्मला का दिन बन गया था वह नहीं जानती थी कि आज सुबह सुबह ही दिन की शुरुआत ही अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से होगी वह काफी उत्तेजित नजर आ रही थी। शुभम अभी अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर के अंदर डाला ही था कि वह खुद ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ से धकेलते हुए अपने उतावले पन को प्रदर्शित कर रही थी जिसे देखते हुए शुभम भी अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थाम कर धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया। निर्मला की सांसो की गति होले होले तेज होती जा रही थी। उत्तेजना के मारे निर्मला की कसमसाहट बढ़ती जा रही थी।

शुभम को इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि इस तरह से सुबह-सुबह ही आज उसे अपनी मां की बुर चोदने को मिल जाएगी लेकिन आज उसे उम्मीद से अधिक मिल रहा था। खिड़की से आ रही ठंडी भरी हवाएं शुभम और निर्मला दोनों के बदन को तरोताजा कर दे रही थी लेकिन फिर भी शुभम के माथे पर पसीने की बूंदें उपस रही थी क्योंकि जितनी ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी उतनी ही गरमाहट उसे अपनी मां की खूबसूरत बदन से मिल रही थी। ठंडी हवाओं के साथ साथ अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज का आनंद उठाते हुए शुभम धीरे-धीरे अपनी मां को चोद रहा था। और निर्मला थी कि अपनी कसी हुई बुर में अपने बेटे के मोटे लंड को महसूस करके गरम आहें भर रही थी। शुभम बड़े आराम से अपनी मां की चुदाई कर रहा था वह धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में डालता और आपस धीरे-धीरे उसे बाहर की तरफ खींचता ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। जैसे-जैसे शुभम का मोटा लंड रगड़ता हुआ निर्मला की बुर के अंदर तक जाता अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे के लंड की रगड़ को महसूस करके निर्मला का पूरा बदन उत्तेजना के मारे अकड़ने लगता और उसकी बुर की अंदरूनी दीवारों से नमकीन रस पानी बनकर रिसने लगता।
 
आहहहह,,,,आहहहह,,,, शुभम मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है तेरा मोटा लंड है मेरी बुर की धज्जियां उड़ा दे रहा है।आआआहहहह,,,, आज का दिन बहुत अच्छा जाएगा क्योंकि आज दिन की शुरुआत ही तेरे लंड से हुई है बस ऐसे ही मुझे चोदता रह,,,,,,आआआहहहह,,,, मेरे राजा जोर जोर से धक्के लगा फाड़ दे मेरी बुर को अंदर तक घुसा दे,,,,आहहहहह,,,,,, ससससहहहह,,,, बहुत मजा आ रहा है बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा,,,,,,( निर्मला पर चुदाई की मदहोशी पूरी तरह से छा चुकी थी वह पागलों की तरह उत्तेजना के मारे मुंह से गंदी गंदी बातें बोल रही थीं और उससे गंदी बातों को सुनकर शुभम की हालत खराब हो रही थी उसकी भी उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी हल्के हल्के धक्कों की जगह अब तेज गति और जबरदस्त धक्कों ने ले लिया। शुभम की कमर अब रफ्तार से आगे पीछे होने लगी वह इतनी जोर जोर से धक्के लगाने लगा कि पूरा पलंग चरमरने लगा,,,,,

निर्मला अपने बेटे के साथ चुदाई का असली सुख भोग रही थी। उसे मालूम था कि चुदाई का असली मजा उसके बेटे के साथ ही आता है इसलिए वह बिस्तर पर मस्त होकर अपने बेटे से चुदाई का आनंद ले रही थी उसके हर एक धक्के का स्वागत वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ धकेल कर दे रही थी। शुभम भी लगातार छक्के लगाते हो मेरे लेकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर जोर का चपत लगा दे रहा था जिससे वातावरण में मादकता और दोनों का आनंद दोनों बढ़ जा रहा था। अपनी मां की मदमस्त जवानी का सुख भोगते हुए शुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह इस तरह से लेटे लेटे ज्यादा जोर से धक्के नहीं लगा पा रहा था इसलिए वह तुरंत उठा और अपनी मां की दोनों टांगों को फैलात हुआ ऊसे कमर से पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपने लंड को एक बार फिर उसकी बुर के अंदर डालकर लगातार धक्के पर धक्के पेलता रहा। अब शुभम रुकने वाला नहीं था क्योंकि वह अपने लिए जगह बना लिया था निर्मला भी अब पुरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसे मालूम था कि इस पोजीशन में उसका बेटा उसकी जबरदस्त चुदाई करेगा,,, और उसके सोचने के मुताबिक ही शुभम अपनी कमर हिला रहा था सुबह के वातावरण में ठंडक का अहसास होते हुए भी दोनों के बदन से पसीने की बूदें टपक रही थी दोनों अपनी मदमस्त जवानी की गर्माहट में पूरी तरह से गर्म हो चुके थे ।

निर्मला अपने बेटे के जबरदस्त धक्कों को तो झेल ले रही थी लेकिन उसकी जबरदस्त मदहोश कर देने वाली चुदाई के आगे व ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और भल भला कर झड़ गई थोड़ी देर बाद शुभम भी झड़ गया।

वासना का तूफान थमते ही निर्मला बिस्तर पर से उठी और अपने बेटे के होठों पर चुंबन करके बिना कपड़े पहने उसी तरह से एकदम नंगी ही कमरे से बाहर जाने लगी। शुभम अपनी मां की मदद की जाए देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगा यह सोच कर कि वाकई में इसकी मां दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत औरत है।

शुभम को रविवार का इंतजार बड़ी बेसब्री से था वह उतावला था और उसी के घर जाकर उसे वापस लाने के लिए क्योंकि वह जानता था कि जब वह उसे उसके घर छोड़ने गया था तब वहां उसके द्वारा दिखाया गया नजारा रुचि के मन पर जरूर असर किया होगा और वह उस असर का क्या परिणाम आता है यह देखने के लिए उतावला था आखिरकार उसके सब्र का फल मीठा होता नजर आने लगा,,,, उसके इंतजार की घड़ी खत्म हुई और रविवार आ गया सुबह सुबह जल्दी से वह तैयार होकर रुचि के मायके उसे लेने के लिए चला गया।

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सुबह में निर्मला की नींद खुली तो उसने महसूस की कि वह शुभम की बाहों में थी जो कि वह उसे पीछे से जकड़े हुए थे। और रात की जबरदस्त चुदाई के बाद दोनों बिना कपड़े पहने ही एकदम नंगे ही सो गए थे जिसकी वजह से निर्मला को साफ तौर पर महसूस हो रहा था कि उसकी बड़ी बड़ी गांड की दरारों के बीच शुभम का मोटा तगड़ा लंड फंसा हुआ था। निर्मला को महसूस हो रहा था कि उसके बेटे का लंड पूरी तरह से उत्तेजित अवस्था में नहीं था लेकिन फिर भी जितना खड़र में जाने के लिए काफी था। एक बार फिर से सुबह की पहली किरण के साथ ही खिड़की से आ रही शीतल हवाओं के झोंकों की वजह से और लग्न अवस्था में अपने बेटे से चिपके होने की वजह से निर्मला के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उससे रहा नहीं गया और वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे से ही अपने बेटे के लंड पर रगड़ना शुरू हो गई। बड़ी बड़ी मद मस्त गांड की गर्माहट को शुभम ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया और अपनी मां की मस्त गांड की गर्मी की वजह से उसकी नींद खुल गई,,, नींद खुलते ही देखा कि उसकी मां अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे ठलते हुए उसके मोटे तगड़े बड़े लंड पर रगड़ रही है यह देखते ही उसकी मदमस्त बर्दाश्त के बाहर कर देने वाली जवानी की गर्मी से उसका पूरा बदन उत्तेजना में अकड़ने लगा,,,,,

जिस तरह से स्वर्ग की अप्सरा एक तपस्वी की तपस्या को भंग कर देती है उसी तरह से निर्मला भी अपने बेटे की नींद को अपनी मद मस्त जवानी की गर्मी से भंग कर दी थी लेकिन इसमें निर्मला के साथ-साथ उसके बेटे का भी फायदा था अपनी मां की हरकत को देखकर शुभम से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर जोर जोर से चपत लगाने लगा।

आहहहह,,,,,ऊठ गया तू ,,,, मुझे लगा कि तू सोया ही रहेगा,,,,,

ऐसा कैसे हो सकता है मेरी रानी कि तुम प्यासी रहो और मैं चैन की नींद सोता रहुं। मुझसे तुम्हारी यह तड़प देखी नहीं जाती इसीलिए तो जाग गया हूं और साथ ही देखो मेरा लंड जाग गया है। ,,,,,

जाग गया हैं तो देर किस बात की है मेरे राजा इसे इसकी गुफ़ा का रास्ता दिखाओ।( निर्मला एकदम मादक स्वर में अपने बेटे की तरफ देखते हूए बोली,,, शुभम तो अपनी मां की इस बात पर एकदम कायल हो गया,,,,, और वह पीछे से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को एक हाथ से फैलाते हुए अपने लिए रास्ता बनाते हुए बोला।,,,,, )

ससससहहहह,,,,,, मेरी जान मेरा शेर तेरी गुफा में घुसने के लिए पूरा तैयार हो गया है,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाया और निर्मला भी अपने बेटे के इस इशारे को समझ गई और खुद ही अपनी टांग को घुटनों से मोड़कर ऊपर की तरफ उठा दी जिससे उसके गुलाबी रंग का गुलाबी छेद शुभम के लंड के ठीक सामने आ गया और जैसे शुभम का लंड ईसी ताक में था जैसे ही गुलाबी बुरका गुलाबी छेद नजर आया वैसे ही वह सीधा जाकर छेद पर टिक गया,,,, एक बार फिर से निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी छूट गई,,, अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शुभम की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह एक हाथ से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को थामकर हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ ठलने लगा,,,, देखते ही देखते शुभम का मोटा तगड़ा लंड एक बार फिर से उसकी मां की गुलाबी बुर के अंदर समा गया था। सुबह-सुबह निर्मला का दिन बन गया था वह नहीं जानती थी कि आज सुबह सुबह ही दिन की शुरुआत ही अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से होगी वह काफी उत्तेजित नजर आ रही थी। शुभम अभी अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर के अंदर डाला ही था कि वह खुद ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ से धकेलते हुए अपने उतावले पन को प्रदर्शित कर रही थी जिसे देखते हुए शुभम भी अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थाम कर धीरे-धीरे धक्के लगाना शुरू कर दिया। निर्मला की सांसो की गति होले होले तेज होती जा रही थी। उत्तेजना के मारे निर्मला की कसमसाहट बढ़ती जा रही थी।

शुभम को इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि इस तरह से सुबह-सुबह ही आज उसे अपनी मां की बुर चोदने को मिल जाएगी लेकिन आज उसे उम्मीद से अधिक मिल रहा था। खिड़की से आ रही ठंडी भरी हवाएं शुभम और निर्मला दोनों के बदन को तरोताजा कर दे रही थी लेकिन फिर भी शुभम के माथे पर पसीने की बूंदें उपस रही थी क्योंकि जितनी ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी उतनी ही गरमाहट उसे अपनी मां की खूबसूरत बदन से मिल रही थी। ठंडी हवाओं के साथ साथ अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज का आनंद उठाते हुए शुभम धीरे-धीरे अपनी मां को चोद रहा था। और निर्मला थी कि अपनी कसी हुई बुर में अपने बेटे के मोटे लंड को महसूस करके गरम आहें भर रही थी। शुभम बड़े आराम से अपनी मां की चुदाई कर रहा था वह धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में डालता और आपस धीरे-धीरे उसे बाहर की तरफ खींचता ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। जैसे-जैसे शुभम का मोटा लंड रगड़ता हुआ निर्मला की बुर के अंदर तक जाता अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे के लंड की रगड़ को महसूस करके निर्मला का पूरा बदन उत्तेजना के मारे अकड़ने लगता और उसकी बुर की अंदरूनी दीवारों से नमकीन रस पानी बनकर रिसने लगता।

आहहहह,,,,आहहहह,,,, शुभम मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है तेरा मोटा लंड है मेरी बुर की धज्जियां उड़ा दे रहा है।आआआहहहह,,,, आज का दिन बहुत अच्छा जाएगा क्योंकि आज दिन की शुरुआत ही तेरे लंड से हुई है बस ऐसे ही मुझे चोदता रह,,,,,,आआआहहहह,,,, मेरे राजा जोर जोर से धक्के लगा फाड़ दे मेरी बुर को अंदर तक घुसा दे,,,,आहहहहह,,,,,, ससससहहहह,,,, बहुत मजा आ रहा है बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा,,,,,,( निर्मला पर चुदाई की मदहोशी पूरी तरह से छा चुकी थी वह पागलों की तरह उत्तेजना के मारे मुंह से गंदी गंदी बातें बोल रही थीं और उससे गंदी बातों को सुनकर शुभम की हालत खराब हो रही थी उसकी भी उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी हल्के हल्के धक्कों की जगह अब तेज गति और जबरदस्त धक्कों ने ले लिया। शुभम की कमर अब रफ्तार से आगे पीछे होने लगी वह इतनी जोर जोर से धक्के लगाने लगा कि पूरा पलंग चरमरने लगा,,,,,

निर्मला अपने बेटे के साथ चुदाई का असली सुख भोग रही थी। उसे मालूम था कि चुदाई का असली मजा उसके बेटे के साथ ही आता है इसलिए वह बिस्तर पर मस्त होकर अपने बेटे से चुदाई का आनंद ले रही थी उसके हर एक धक्के का स्वागत वह अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ धकेल कर दे रही थी। शुभम भी लगातार छक्के लगाते हो मेरे लेकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर जोर का चपत लगा दे रहा था जिससे वातावरण में मादकता और दोनों का आनंद दोनों बढ़ जा रहा था। अपनी मां की मदमस्त जवानी का सुख भोगते हुए शुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह इस तरह से लेटे लेटे ज्यादा जोर से धक्के नहीं लगा पा रहा था इसलिए वह तुरंत उठा और अपनी मां की दोनों टांगों को फैलात हुआ ऊसे कमर से पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपने लंड को एक बार फिर उसकी बुर के अंदर डालकर लगातार धक्के पर धक्के पेलता रहा। अब शुभम रुकने वाला नहीं था क्योंकि वह अपने लिए जगह बना लिया था निर्मला भी अब पुरी तरह से मस्त हो चुकी थी उसे मालूम था कि इस पोजीशन में उसका बेटा उसकी जबरदस्त चुदाई करेगा,,, और उसके सोचने के मुताबिक ही शुभम अपनी कमर हिला रहा था सुबह के वातावरण में ठंडक का अहसास होते हुए भी दोनों के बदन से पसीने की बूदें टपक रही थी दोनों अपनी मदमस्त जवानी की गर्माहट में पूरी तरह से गर्म हो चुके थे ।

निर्मला अपने बेटे के जबरदस्त धक्कों को तो झेल ले रही थी लेकिन उसकी जबरदस्त मदहोश कर देने वाली चुदाई के आगे व ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और भल भला कर झड़ गई थोड़ी देर बाद शुभम भी झड़ गया।

वासना का तूफान थमते ही निर्मला बिस्तर पर से उठी और अपने बेटे के होठों पर चुंबन करके बिना कपड़े पहने उसी तरह से एकदम नंगी ही कमरे से बाहर जाने लगी। शुभम अपनी मां की मदद की जाए देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगा यह सोच कर कि वाकई में इसकी मां दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत औरत है।

शुभम को रविवार का इंतजार बड़ी बेसब्री से था वह उतावला था और उसी के घर जाकर उसे वापस लाने के लिए क्योंकि वह जानता था कि जब वह उसे उसके घर छोड़ने गया था तब वहां उसके द्वारा दिखाया गया नजारा रुचि के मन पर जरूर असर किया होगा और वह उस असर का क्या परिणाम आता है यह देखने के लिए उतावला था आखिरकार उसके सब्र का फल मीठा होता नजर आने लगा,,,, उसके इंतजार की घड़ी खत्म हुई और रविवार आ गया सुबह सुबह जल्दी से वह तैयार होकर रुचि के मायके उसे लेने के लिए चला गया।

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शुभम काफी खुश नजर आ रहा था। उसे मालूम था कि जिस तरह से सरला चाची उसके हाथ लग गई उसी तरह से रूचि भी जल्द ही उसके नीचे आ जाएगी क्योंकि उसे इस बात का आभास हो गया था कि जब वह रुचि के मायके में बाथरूम के अंदर पेशाब करने गया था और जिस तरह से अनजाने में ही रुचि की नजर उसके मोटे तगड़े खड़े लंड पर पड़ गई थी और जिस तरह के भाव उसके चेहरे पर उसके तगड़े लंड को देखकर आई थी,, शुभम ने यह भांप लिया था कि जल्द ही उसकी बुर में उसका लंड होगा। इसलिए तो वह रुचि को लेने जाने के लिए इतना ज्यादा उत्साहित था।

रविवार का दिन था वह अपनी मां को जरूरी काम से जाने के लिए कि कल घर से निकल गया था सुहावना मौसम ठंडी ठंडी हवा बह रही थी और वैसे भी शुभम को सुबह सुबह अपनी मोटरसाइकिल चलाना कुछ ज्यादा ही अच्छा लगता था और आज तो उसे कम से कम 30 40 किलोमीटर दूर जाना था,,,, भले ही यह सफर 30 40 किलोमीटर के अंतराल पर ही था अगर यह तीन सौ 400 किलोमीटर के अंतराल पर भी होता तो भी शुभम वहां जाने से बिल्कुल भी नहीं जी सकता क्योंकि वहां जाने से उसका मतलब साफ था उसे एक बार फिर से मदमस्त कर देने वाली नव जवान औरत की रसीली बुर जो पाना था। उम्र दराज औरतों की बुर तो उसे बहुत बार चोदने को मिली थी आज पहली बार उसे जवान औरत की रसीली बुर की चाह जगी थी जो कि जल्द ही उसकी चाह पूरी होने वाली थी। और इतना तो वह रुचि से बात करके समझ गया था कि उसका पति उसे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता है इसलिए तो उसे अपनी राह आसान नजर आ रही थी क्योंकि जहां प्यास होती है वहां पानी की जरूरत कुछ ज्यादा ही होती है क्योंकि प्यासे लोग ही पानी की असली कीमत को पहचान पाते हैं और शुभम तो इस समय प्यासी औरतों के लिए एक कुंआ के समान था जो कि हर कोई अपनी प्यास बुझाना चाहता था और वह भी सभी प्यासों की प्यास बुझाने के लिए हमेशा तत्पर रहता था।

आज का मौसम कुछ ज्यादा ही सुहावना था हल्के हल्के बादल आसमान में छाने लगे था। ऐसा लग रहा था कि आज बारिश जमकर होगी,,, वैसे भी शुभम को बारिश का मौसम कुछ ज्यादा ही पसंद था क्योंकि ऐसे में औरतों के बेहद करीब रहने से मादकता का एहसास कुछ ज्यादा ही होता है बिना पिए ही नशा होने लगता है। वह मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि रुचि को मोटरसाइकिल पर बैठाकर लाते समय अगर तेज बारिश हो जाए तो मजा आ जाए।

मौसम का मजा लेते हुए आखिरकार शुभम रुचि के घर पहुंच ही गया ,,,,,रुचि को उसकी सास ने फोन पर सब कुछ बता दी थी और वह है शुभम का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। शुभम जब रुचि के घर पर पहुंचा तो रूचि छत पर खड़ी होकर उसी की राह देख रही थीं और शुभम पर नजर पड़ते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी अपने आप उठने लगी,,, रुचि को यह समझ में बीलकुल भी नहीं आ रहा था कि शुभम को देखते ही उसके तन बदन में अचानक बदलाव कैसा आने लगा जबकि इसका कारण साफ था रुचि ने अपनी आंखों से शुभम के नंगे खड़े बेहद मोटे लंड के दर्शन जो कर लिए थे। लेकिन रुचि का इस बारे में बिल्कुल भी ध्यान नहीं गया,,, फिर भी वह इस पल का आनंद ले रही थी।

शुभम रुचि के घर पर पहुंचकर कुछ देर तक आराम किया,,, उसके परिवार वालों वहीं रुका शाम होने वाली थी अब निकलना जरूरी था ,,, इसलिए शुभम इजाजत लेकर उसी से चलने के लिए कहा,,,,,इसके बाद रुचि तैयार होकर अपने ससुराल जाने के लिए आई उसे देख कर शुभम के तन बदन में अचानक उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी पीले रंग की साड़ी में रुचि का खूबसूरत गोरा बदन बेहद फब रहा था वह खूबसूरत होने के साथ साथ बेहद सेक्सी नजर आ रही थी। ऐसा लग रहा था मानो स्वर्ग से कोई परी नीचे जमीन पर उतर आई हो। रुचि के खूबसूरत बदन को देखते हैं शुभम के पेंट के अंदर उसका मोटा तगड़ा लंड जो कि सोया हुआ था वह अंगड़ाई लेने लगा। शुभम तो उसे एकटक देखता ही रह गया,,, शुभम को यूं टकटकी बांधे अपनी तरफ देख कर रुचि शरमा गई,,,, रुचि ही शुभम का ध्यान भंग करते हुए उसे बोली।

अब चलोगे या यहीं बैठे रहने का इरादा है,,( रुचि की आवाज सुनकर सुभम का ध्यान भंग हुआ तो वह हढ बढ़ाते हुए बोला।)

हहहह,,हांं,,,,, चलना है ना ।(और इतना कहकर वह सोफे से उठ गया और उसके घरवालों से इजाजत लेकर बाहर आ गया,,, अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट कर के वह रुची के बैठने का इंतजार करने लगा,,,, आज उसी रुचि को अपनी बाइक पर एक बार फिर से बैठ आते समय उसके तन बदन में अजीब सी हलचल मच रही थी उसका बदन उत्तेजना के मारे कसमसा रहा था जिस तरह की साड़ी और उस साड़ि में खूबसूरती की मिसाल लग रही रुचि के बदन को अपने बदन से सटने का इंतजार उसे बड़ी बेसब्री से हो रहा था। आखिरकार उसकी बेसब्री जल्दी ही खत्म हो गई और वह उसके कंधे का सहारा लेकर उसके मोटरसाइकिल के पीछे बैठ गई जैसे ही उसका खूबसूरत बदन शुभम के बदन से टकराया ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे रुचि के खूबसूरत बदन की गर्माहट और उसकी रगड़ की वजह से उसके बदन से चिंगारी निकल रही हो वह एकदम से उत्तेजना के सागर में डूबता चला गया।

शुभम अपनी मोटरसाइकिल का एक्सीलेटर देकर उसे आगे बढ़ाने लगा कुछ ही देर में शुभम की मोटरसाइकिल मुख्य सड़क पर आ गई लेकिन शुभम अपनी मोटरसाइकिल की स्पीड बढ़ा नहीं रहा था वह आराम से चला रहा था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि यह सफर इतनी जल्दी खत्म हो जाए,,,, उसे इस सफर का पूरा आनंद लेना था। शुभम रुचि से बात करना चाह रहा था लेकिन शुरुआत कहां से करें उसे समझ में नहीं आ रहा था कि तभी रुचि अपने आप को एडजस्ट करने के उद्देश्य से शुभम के कंधे का सहारा दे तभी शुभम मौके का फायदा उठाते हुए बोला।

मुझे पकड़ कर बैठ ना कहीं गिर ना जाओ,,,

मुझे इतनी कमजोर समझे हो कि मैं गिर जाऊंगी तुम चलाते रहो मैं आराम से बैठी हूं।

नहीं मैं तो यूं ही कह रहा था अगर गिर गई तो सरला चाची मुझे डालेंगे की मेरे बहु का ख्याल भी नहीं रख पाया,,,,,

तुम्हें मेरा ख्याल ज्यादा है कि सरला चाची का,,,

सच कहूं तो मुझे तुम दोनों का ज्यादा ख्याल रहता है क्योंकि तुम दोनों मेरे पड़ोसी हो और पड़ोसी का साथ देना उनकी मदद करना एक पड़ोसी का धर्म होता है,,,

बहुत धर्म कर्म की बातें करने लगा है,,,,

अब क्या करूं भाभी अब इस उमर में ज्यादा कुछ तो हो नहीं रहा है तो सोच रहा हूं कि धर्म कर्म ही कर लु,,,,

इरादा तो तेरा बहुत कुछ होता है लेकिन,,,,( शुभम की धर्म कर्म की बात सुनकर रुचि को उस दिन की बात याद आ गई जब वह बाथरूम में पेशाब कर रहा था और उसी समय वहां जाने में दरवाजा खोलकर उसका कड़क लंबा मोटा तगड़ा लैंड अपनी आंखों से देख ली थी लेकिन इतना कहने से ज्यादा कुछ बोल नहीं पाई और खामोश हो गई)

मेरे इरादे के बारे में आपको कैसे पता चल रहा है मैंने तो ऐसा वैसा कुछ किया कि नहीं कि मेरे इरादे के बारे में आपको भनक तक लगे,,,

चल अब ज्यादा बातें मत बना मैं तेरे को अच्छी तरह से जानती हूं कि तू क्या चीज है,,,,,

ओहहहहह,,, बहुत जल्दी मेरे इरादे के बारे में और मैं क्या चीज हूं इस बारे में तुम जान गई मुझे तो यकीन नहींं हो रहा है,,,,

( सुभम की यह बातें सुनकर रुचि उसके इस बात का जवाब दिए बिना खामोश रही,,, जिस तरह की हलचल को सुबह महसूस कर रहा था उससे कहीं ज्यादा हलचल रुचि अपने बदन में महसूस कर रही थी एक पराए मर्द के बगल में बैठकर राज उसे काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था और यह उत्तेजना ऐसे ही नहीं थी इसका यही कारण था कि रुचि अपनी आंखों से शुभम के दमदार हथियार के दर्शन कर ली थी जिसके आगे उसके पति का लंड कुछ भी नहीं था इसलिए तो उसे ना जाने कैसी कशमसाहट अपने बदन में महसूस हो रही थी और उसकी टांगों के बीच की उस पतली दरार में से गिले पन का रिसाव हो रहा था जो की ऋची को इसका अहसास एकदम साफ तौर पर हो रहा था।,, शुभम भी खामोश था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आगे की बात कैसे करें वैसे तो रूचि के चेहरे पर बदलती भाव को भागते हुए वह अपने आप से बातें कर रहा था कि उसे अपने दिल की बात सीधे तौर पर नहीं तो इशारों में कह ही देनी चाहिए।,,,,, तभी ऐसा लगा कि मौसम भी उसका साथ दे रहा है और बादलो की गड़गड़ाहट होने लगी,,, रुचि के मन में भी यही सब चल रहा था वह भी इस सफर को इतनी जल्दी खत्म नहीं होने देना चाह रही थी। ना जाने क्यों शुभम का साथ उसे अच्छा लगने लगा था एक तरह से वह अपने मन में शुभम को लेकर यही कल्पना करती रहती थी कि काश उसका पति शुभम ही होता तो कितना अच्छा होता,,,,, बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर उसके मन में भी यही होने लगा की काश बारिश हो जाती तो बहुत अच्छा होता पहली बार किसी गैर मर्द के साथ भीगने में कैसा आनंद आता है इसका अनुभव लेना चाहती थी ,,, और शायद भगवान भी उसके मन की पुकार को सुन लिए थे और हल्की हल्की बारिश होना शुरू हो गई,,, और शुभम को यही मौका सही लग रहा था क्योकि जिस रास्ते से वह लोग जा रहे थे कुछ देर तक गांव का कच्चा रास्ता पड़ता था जहां पर लोगों का आना जाना बहुत ही कम होता था। धीरे-धीरे दोनों भीगना शुरू कर दिए थे। शुभम मौके की नजाकत को देखते हुए बोला ,,,,।

भाभी में एक बात कहूं तुम बुरा तो नहीं मानोगी,,,

क्यों नहीं अगर बुरा मानने वाली बात होगी तो जरूर मानूंगी (रूचि ऊपर ही मन से बोली लेकिन अंदर से वह यही चाह रही थी कि शुभम कुछ इधर-उधर की बातें करें,,)

चलो कोई बात नहीं अगर बुरा मानने वाली बात होगी तो मुझे दो चार बातें कह लेना या मन में आए तो दो चार थप्पड़ लगा लेना इससे ज्यादा क्या करोगी,,,,,

बातें बहुत बनाते हो,,,,,

क्या करूं मेरी आदत ही कुछ ऐसी है ,,,,अच्छा तो मैं यह कह रहा था कि,,,, भाभी उस दिन वाली बात से कहीं आप नाराज तो नहीं हो,,,

किस दिन वाली बात से,,,, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है तु क्या कहना चाह रहा है।( रूचि को इतना तो समझ में आई गया कि शुभम कौन सी बात कर रहा है लेकिन फिर भी जानबूझकर नाटक करते हुए वह बोली)

अरे भाभी उस दिन वाली बात जब मैं तुम्हें घर छोड़ने आया था और पेशाब करने के लिए बाथरूम गया था और अनजाने में तुम बाथरुम में आ गई थी,,,( शुभम बिना रुके सब कुछ बोल दिया।)
 
तो इसमें क्या हो गया,,,(रुचि जानबूझकर इतने आराम से यह बात कह रही थी कि जैसे वास्तव में उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता हो,,, लेकिन इतना तो शुभम समझता ही था कि बाथरूम का नजारा देखकर रूचि के मन में क्या असर हुआ होगा)

क्या बात कर रही हो भाभी आपको बिल्कुल भी फर्क नहीं पढ़ा था उस वाक्ये के बाद।

नहीं तो मुझे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ा था,,,( रुचि जानबूझकर झूठ बोल रही थी यह तो वह अच्छी तरह से जानती थी कि उस नजारे को देखने के बाद से रुचि की हालत कितनी खराब होने लगी थी ,,, शुभम के मोटे तगड़े लंड को देखो करो वह अपने हाथ से ही अपनी प्यास बुझाने की नाकाम कोशिश करती रही लेकिन उसकी प्यास बुझने के बजाय और भी ज्यादा भड़कने लगी थी।)

क्या भाभी मुझे तो लगा था कि उस दिन के बाद से तुम मुझसे नाराज रहोगी मुझसे बातें नहीं करोगी इसलिए तो मुझे अंदर ही अंदर यह डर सता रहा था कि आपसे बात किए बिना मुझे अच्छा नहीं लगेगा ,,,

( शुभम की यह बातें सुनकर रुची को अंदर ही अंदर प्रसन्नता हो रहीं थी कि वह इस बात से परेशान था कि मैं उससे बात नहीं करूंगी इसका मतलब मेरे लिए उसके दिल में कुछ कुछ जरूर होता है। वह शुभम की यह बात सुनकर बोली।)

मैं भला तुमसे नाराज क्यों होने लगुंगी कोई इतनी बड़ी तो गलती कीए नहीं थे कि मैं तुमसे नाराज हो जाऊं वैसे भी मेरी ही गलती थी मैं बिना दरवाजे पर दस्तक दिए बिना ही अंदर घुस गई थी।,,, ( रुचि भले यह बात अपने मुंह से बोल रही थी लेकिन उसका दीदी जानता था कि अपनी इस गलती की वजह से वह अंदर ही अंदर शुभम के प्रति कितना आकर्षित होने लगी थी और उसे अपनी है गलती बहुत ही ज्यादा अच्छी भी लग रही थी क्योंकि उस गलती की वजह से ही उसे इस बात का अहसास हुआ कि मर्द का लैंड उसके पति की तरह नहीं करती शुभम की तरह होता है। रुचि भले यह बात अपने मुंह से बोल रही थी लेकिन उसका दील ही जानता था कि अपनी इस गलती की वजह से वह अंदर ही अंदर शुभम के प्रति कितना आकर्षित होने लगी थी और उसे अपनी है गलती बहुत ही ज्यादा अच्छी भी लग रही थी क्योंकि उस गलती की वजह से ही उसे इस बात का अहसास हुआ कि मर्द का लंड उसके पति की तरह नहीं बल्कि शुभम की तरह होता है।)

लेकिन भाभी सही कहूं तो गलती मेरी ही थी मैंने दरवाजे को लोक नहीं किया था जबकि मुझे यह करना चाहिए था और सबसे बड़ी गलती तो मेरी यही थी कि तुम मेरे सामने खड़ी हो कर देख रही थी और मैं तुम्हें देखते हुए भी अपने लंड को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था बल्कि ना जाने क्यो मैं उस समय तुम्हारी आंखों के सामने उसे हिला रहा था और तो और सामान्य तौर पर वह ढीला भी नहीं था बल्कि एकदम खड़ा था इसलिए मुझे अपनी गलती का एहसास हो रहा है।( शुभम जानबूझकर इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी बात बता रहा था जो कि इस तरह के शब्द और शुभम की गंदी बातें सुनकर रुचि के तन बदन में आग लग रही थी एक तो धीरे-धीरे बारिश की बूंदों की वजह से दोनों पूरी तरह से भीगने लगे थे और धीरे-धीरे बारिश का जोर तेज होता जा रहा था साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ती जा रही थी ।)

हां यह बात तो माननी पड़ेगी कि कुछ गलती तुम्हारी भी है मैं अनजाने में बाथरूम में घुस गई थी लेकिन तुमने अपने लंड को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं किए थे ।(रुचि जानबूझकर अब खुले तौर पर लंड शब्द का प्रयोग कर रही थी क्योंकि वह पूरी उत्तेजना ग्रस्त हो चुकी थी । इस तरह के सबके को सुनने में और कहने में अब उसे आनंद की प्राप्ति हो रही थी रुचि के मुंह से इस तरह की गंदी बात सुनकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और धीरे-धीरे बाइक आगे बढ़ा रहा था और साथ ही रह रह कर उंचे नीचे गडडो की वजह से ब्रेक लगा ले रहा था ,, ना चाहते हुए भी रुचि का बदन शुभम से और ज्यादा शट जा रहा था जिसकी वजह से उसकी दोनों गोलाईया शुभम की पीठ पर अच्छी तरह से महसूस हो रही थी इस तरह से दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी..,,,)

मैं मानता हूं भाभी की मुझसे गलती हुई थीं लेकिन सब कुछ अनजाने में ही हुआ था कोई जानबूझकर मैंने नहीं किया था।,,,,,

चलो कोई बात नहीं मैं मानती हो कि सब कुछ अनजाने में ही हुआ था तो कि मुझे यह समझ में नहीं आ रहा था कि सब कुछ सामान्य होते हुए भी तुम्हारा लंड इतना खड़ा क्यों था जैसे कि पूरा तैयार हो,,,

( रुचि के मुंह से यह सब गंदे शब्द निकलते जा रहे थे लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब शब्द उसके मुंह से निकल कैसे जा रहे हैं यह सब शुभम के साथ का कमाल था जो कि वह उसके दमदार हथियार को देखकर उसकी जबरदस्त एहसांस को अभी तक अपने अंदर महसूस कर रही थी और उसकी वजह से वह शुभम के आगे इतना खुल गई थी और इस सफर का आनंद लेते हुए गंदे शब्दों के साथ एकदम गंदी बातें कर रही थी।,,, शुभम को अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि रूसी जैसी औरत जबकि यह बात अच्छी तरह से जानता था कि रुचि बहुत ही प्यासी औरत थी लेकिन वह अभी तक पूरी तरह से संस्कार के सांचे में ढली हुई थी उससे बाहर नहीं निकली थी लेकिन इतनी जल्दी उसके मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनने को मिलेगी इसलिए उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। लेकिन जो कुछ भी हो रहा था वह अच्छा ही हो रहा था और उसी में उसकी भलाई थी और लाभ भी। लेकिन उस के ईस सवाल के साथ ही उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि जो रुचि कह रही थी वह बिल्कुल सही था सामान्य तौर पर कभी भी मर्द का लंड खड़ा नहीं होता कुछ मादक या उत्तेजनापूर्ण वस्तु देखने के बाद ही मर्द का लंड खड़ा होता है,,, और सबसे बड़ी उत्तेजनात्मक वस्तु उस समय उसकी आंखों के सामने रूचि ही थी लेकिन वह अपने मुंह से कैसे कह दें कि तुम्हें देखकर लंड खड़ा हुआ था। शुभम को इस तरह से खामोश देखकर रुचि अपने सवाल को वापिस दोहराते हुए बोली ।)

क्या हुआ चुप क्यों हो गया मेरे सवाल का जवाब क्यो नहीं देता,,

( शुभम को समझ मे नहीं आ रहा था कि क्या बोले दूसरी तरफ बारिश का जोर बढ़ता जा रहा था अब इतनी तेज बारिश हो रही थी कि उसे आगे का रास्ता ठीक से नजर नहीं आ रहा था और साथ ही तेज हवा चल रही थी और तो और बादल की गड़गड़ाहट से पूरा वातावरण डरावना होता जा रहा था शाम ढल चुकी थी बारिश की वजह से अंधेरा लगने लगा था,, ऐसे हालात में आगे बढ़ना ठीक नहीं था इसलिए वह रुचि से बोला।)

भाभी हमें कहीं जगह देख कर कुछ देर के लिए रुकना पड़ेगा जब तक की बारिश नहीं थम जाती क्योंकि बारिश कितनी तेज हो रही है और साथ ही हवा भी तेज है ऐसे में आगे मोटरसाइकिल चला कर ले जा पाना बड़ा ही मुश्किल है ऐसे में गिरने का डर ज्यादा है क्या कहती हो,,,,

रुक तो जाए लेकिन रुकेंगे कहां यहां तो कुछ नजर भी नहीं आ रहा है सब जगह केवल खेत ही खेत दिखाई दे रहे हैं,,,(रुचि को भी इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो गया था कि ऐसे में सफर करना ठीक नहीं था इसलिए मौके की नजाकत को देखते हुए वह बोली.)

बात तो तुम ठीक कह रही हो भाभी कहीं कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा है,,,

( शुभम इतना बोला घर था कि तभी रुचि की नजर पास में ही एक झोपड़ी पर पड़ी जो कि खाली ही लग रही थी उस पर नजर पड़ते ही रुचि खुशी के मारे बोली)

शुभम और रुची कुछ इस तरह से

वह देखो शुभम,,,, औ रही झोपड़ी,,,, खाली ही लग रही है चलो उसमें चलते हैं,,,( इतना सुनते ही शुभम उस तरफ देखकर तसल्ली कर लेने के बाद अपनी मोटरसाइकिल बंद कर दिया और तुरंत रुचि मोटरसाइकिल से नीचे उतरकर उस झोपड़ी की तरफ जाने लगी शुभम उसे जाते हुए देख रहा था जो कि इस समय पूरी तरह से भीग चुकी थी और उसकी पीले रंग की पतली साड़ी के साथ-साथ उसकी ब्लाउज भीग कर गोरे गोरे बदन से चिपक गई थी जिसमें से लाल रंग की ब्रा की पट्टी साफ नजर आ रही थी और साथ ही उसकी सारी पूरी तरह से खत्म होने की वजह से हल्की हल्की उसकी पैंटी की पट्टी साफ तौर पर उसकी गोलाकार नितंबो से चिपकी हुई नजर आ रही थी या देखते ही शुभम के लंदन में हरकत होना शुरू हो गया और वह अपनी मोटरसाइकिल खड़ी करके उसके पीछे पी2छे जाने लगा कुछ ही देर में वह दोनों झोपड़ी के अंदर आ चुके थे,,,।

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बरसात अपने जोरों पर थी। ऐसा लग रहा था पीछे से भगवान ने दोनों की सुन लिया हो तभी तो रास्ते में इस तरह की तूफानी बारिश शुरू हो गई। बारिश इतनी तूफानी होगी इसका अंदाजा दोनों को बिल्कुल भी नहीं था दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे रुचि की तो हालत खराब हो गई थी रूचि का पूरा बदन बरसात के पानी में भीग चुका था। उसके पीले रंग की साड़ी उसके बदन से एकदम चिपक से गई थी और पानी की वजह से उसकी साड़ी पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट नजर आने लगी थी जिसमें से उसके बदन का हर एक अंग और उसका कटाव और साफ साफ नजर आ रहा था। तभी तो मोटरसाइकिल पर से उतर कर आगे आगे जा रही रुचि की गोलाकार मदमस्त गांव और उस पर सारी चिपकने की वजह से उसमें से दिख रही उसकी पैंटी की पट्टी साफ नजर आ रही थी। और साथ ही लाल रंग की ब्रा की पट्टी के साथ-साथ उसका पूरा स्ट्रक्चर दिखाई दे रहा था यह देखकर शुभम के तन बदन में आग लग गई,,,,, औरत जितनी ज्यादा खूबसूरत सामान्य तौर पर होती है उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी भीगने के बाद हो जाती है वहीं कुछ रुचि के साथ भी हो रहा था वह जितनी ज्यादा खूबसूरत थी,, बरसात के पानी में भीगने के बाद से तो वह स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही थी। रूचि की मादकता भरी जवानी देख कर शुभम का मतवाला लंड अंगड़ाई लेने लगा। ,,,,

लगातार बादलों की गड़गड़ाहट हो रही थी जिससे रुचि को थोड़ा डर लग रहा था साथ ही बिजली की चमक और तेज हवाओं के साथ तूफानी बारिश ,,,,,सब कुछ डरावना सा था लेकिन ना जाने क्यों इस डरावने माहौल में भी रुचि को शुभम का साथ होने की वजह से अत्यधिक पूरा माहौल खुशनुमा लग रहा था बदन में मदहोशी की लहर दौड़ रही थी। एक औरत होने के नाते अपनी पूरे बदन के भूगोल से वह पूरी तरह से वाकिफ थी इसलिए उसे इस बात का भी ज्ञात अच्छी तरह से था कि बारिश के पानी में भीगने की वजह से उसकी साड़ी बदन से चिपक गई थी और जिसकी वजह से ना चाहते हुए भी उसके बदन का हर हीस्सा साफ तौर पर नजर आ रहा था जिस पर चोर नजरों से सुभम की नजर पड़ ही जा रही थी और इस बात का एहसास उसे अंदर तक उत्तेजित कर दे रहा था।

दोनों झोपड़ी के अंदर खड़े थे झोंपड़ी के बाहर का माहौल पूरी तरह से बरसात से नहाया हुआ था साथ ही तूफानी हवा सब कुछ झकझोर के रख दे रही थी। रुचि अपने साड़ी के पल्लू से पानी को लूछने का काम कर रही थी,,, वह साड़ी के पल्लू को गोल गोल घुमा का उसमें से पानी लूछ रही थी। जिसकी वजह से रुचि का ध्यान नहीं गया और उसकी छाती पर से साड़ी का पल्लू हट गया जिसकी वजह से शुभम को रुचि की चूची के ऊपर वाला हिस्सा जो कि काफी गोल सतह पर उभरा हुआ और उसमें दोनों के बीच गहरी पतली दरार एकदम साफ नजर आने लगी। यह देखकर शुभम के लंड ने रुचि की मदमस्त जवानी को सलामी भरते हुए ऊपर नीचे हरकत किया और रूचि जो कि इस बात का आभास होता है कि शुभम की नजर उसकी दोनों गोलाईयो पर है वह अंदर ही अंदर एकदम मस्त होने लगी और उसी तरह से अपनी छातियों को साड़ी से ढकने की बिल्कुल भी चेष्टा ना करते हुए उसी तरह से पानी लूछते हुए वह शुभम से बोली।,,,

तू बताया नहीं,,,,

क्या,,,,? ( एक टक बेशर्म की तरह रुचि की झांकियों को घूरते हुए बोला।)

यही की सब कुछ सामान्य होते हुए भी बाथरूम के अंदर तेरा लंड क्यों खड़ा था,,,,( रुचि अब लंड शब्द इतने सहज भाव से बोल रही थी कि जैसे कोई चरित्रवान औरत ना हो करके कोई गंदी औरत हो और शुभम उसके मुंह से लंड शब्द सुनकर हमारे उत्तेजना के फूले नही समा रहा था,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दें वह भी एक दम बेशर्म बनना चाहता था और उसके सवाल के साथ ही बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज कुछ ज्यादा ही तेज होने लगी तो,, रुचि की नजर इधर उधर आसमान में घूमने लगी उसे थोड़ा बहुत डर लग रहा था। शुभम रुचि के सवाल का जवाब देते हुए बोला।)

रुची और शुभम

क्या तुम सच में जानना चाहती हो कि सामान्य होने के बावजूद भी मेरा लंड खड़ा क्यों था,,,? ( इतना कहते हो गए शुभम की नजर रुचि के ऊपर पड़ी तो देखा की रुची नजरे नीचे करके उसके पेंट में बने तंबू को ही देख रही थी जो कि काफ़ी उभरा हुआ था। यह देखकर शुभम जानबूझकर अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड को पेंट के ऊपर से ही दबाने लगा और रूचि यह देखकर उत्तेजना के मारे एकदम गनगना गई,,,,)

हां मैं जानना चाहती हूं,,,( रुचि के तन बदन में उत्तेजना का असर साफ नजर आ रहा था क्योंकि यह जानते हुए भी कि शुभम की नजर उसके ऊपर थी जो कि वह उसके पेंट में बने तंबू को देख रही थी फिर भी वह उसी को घूरते हुए ही जवाब दी,,,, रुचिका इतना कहना था कि तभी जोर की बादल की गड़गड़ाहट हुई और रुचि एकदम से घबराकर शुभम से सट गई और शुभम भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए उसे तुरंत अपनी बाहों में भर लिया,,, रुचि इस समय पूरी तरह से शुभम की बाहों में समाई हुई थी शुभम उसे ज़ोर से अपनी बाहों में जकड़े हुए था कुछ देर तक बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज पूरे वातावरण में गूंजती रही और डर के मारे रुचि अपनी आंखों को बंद कर ली थी ,,, कुछ सेकंड के बाद बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज जब शांत हुई तो उसे इस बात का आभास हुआ कि वह शुभम की बाहों में है और शुभम उसे जोर से अपनी बाहों में जकड़े हुए हैं वह जानबूझकर ऊपर ही मन से उस से छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन शुभम अपनी बाहों का दबाव उसके बदन पर कुछ ज्यादा ही जोर से दिए हुए था।,,, रुचि की खूबसूरत बदन को अपनी बाहों में लेकर शुभम उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो गया था उसके पेंट में बना तंबू कुछ ज्यादा ही अकड़ कर खड़ा हो गया था जो कि इस समय रुचि को अपनी बाहों में लेने की वजह से उसका तंबू ठीक ऊसकी टांगों के बीच की दरार पर धंसने लगा था ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे वह रुचि के बुर के दरवाजे पर बाहर से दस्तक दे रहा हो और रुचि भी अपनी टांगों के बीच की उस पतली दरार पर शुभम के मोटे तगड़े लंड के बने तंबू की ठोकर को महसूस करके एकदम कामोत्तेजना से तृप्त हुए जा रही थी।,,,,, रूची अपने आप पर बड़ी मुश्किल से कंट्रोल किए हुए थी वरना किसी भी पल उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज निकल जाती। ,,,, कुछ ही देर में शुभम के मर्दाना ताकत भरे अंग की ठोकर से वह काम व्हीवल हो गई,,,, और अब वह शुभम की बांहों से आजाद होने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही थी बल्कि शुभम की चोरी छातियों में अपने आप को और ज्यादा छुपाने की कोशिश कर रही थी। दोनों के नथूनों से निकल रही गर्म सांसों की गर्मी दोनों के चेहरे पर महसूस होने लगी,,, झोपड़ी के अंदर का नजारा पूरी तरह से बदलना शुरू हो गया था लेकिन झोपड़ी के बाहर का नजारा और वातावरण उसी तरह से तूफानी हो चला था।,,,, रुचि को अपनी बाहों में भर कर शुभम की हिम्मत और ज्यादा आगे बढ़ने लगी थी अब वह समझ गया था कि मंजिल उसके हाथ में ही है।

धीरे-धीरे शुभम अपनी हथेली को रुचि की चिकनी पीठ पर ऊपर से नीचे फिराने लगा,,,,, शुभम की हरकत की वजह से रुचि शर्म के मारे पानी-पानी हुए जा रही थी लेकिन कर भी क्या सकती थी वह भी अपने पति से अतृप्त थी,, उसका पति उसकी काम भावना को किसी भी तरह से शांत करने में सक्षम साबित हो रहा था ना तो उसका मर्दाना अंग ही उसके काबिल था और ना ही वह खुद,, इस बात का एहसास उसे शुभम से मिलने के बाद और अनजाने में ही उसके लंड को देखने के बाद से होने लगा था। रुचि अपने आप को शुभम के गर्म जिस्म में पिघलता हुआ महसूस कर रही थी। ,,,,, शुभम को इस बात का पूरी तरह से विश्वास हो गया कि आज उसने फिर से एक उड़ती चिड़िया को पिंजरे में क़ैद कर लिया था अब वह जैसा चाहे वैसा ही होगा इस बात का उसे पक्का विश्वास हो गया था इसलिए वह धीरे से फुसफुसाते हुए रुचि से बोला,,,।

भाभी क्या तुम सच में अभी भी जानना चाहती हो कि मेरा लैंड खड़ा क्यों था,,,?
 
शुभम की बात सुनकर जवाब में रुचि के मुंह से एक भी शब्द नहीं फूटे इसलिए वह इशारों में ही अपना सिर हिलाकर हामी भर दी।,,,,

( रुचि की तरफ से इशारा पाते ही सुगम से रहा नहीं गया उसे समझ में आ गया की रुचि की तरफ से उसे हरी झंडी मिल गई है इसलिए अब देर करना अच्छी बात नहीं थी,, इसलिए वह भी पूरी तरह से काम होते जीत होकर अपने दोनों हथेलियों को रुचि की चिकनी पेट से नीचे की तरफ से लाते हो लेकर आ और कमर के नीचे के उसके नितंबों के उभार को साड़ी के ऊपर से ही अपनी हथेली में दबाते हुए अपनी तरफ खींच कर बोला,,,,।)

सच सच कहूं तो भाभी मेरा लंड सिर्फ तुम्हारी वजह से खड़ा हुआ था।,,, भाभी तुम सच में बहुत खूबसूरत हो ऐसा लगता है कि जैसे कोई अप्सरा स्वर्ग से नीचे जमीन पर उतर आई हो।,,, तुम्हारी मदमस्त कर देने वाली जवानी मुझे मदहोश कर देती है जब भी कभी तो मेरे पास मेरे करीब होती हो तो मुझे ना जाने क्या होने लगता है और ऐसा ही उस दिन हुआ था जब मैं तुम्हें तुम्हारी मार के छोड़ने गया था तुम्हें इतना करीब महसूस करके मुझसे रहा नहीं गया और मेरा लंड खड़ा हो गया।,,, और अनजाने में ही तुमने मेरे लंड को देख ली और सच कहूं तो तुम्हें उस हालात में देखकर कोई भी होता तो अपने लंड को छुपाने की कोशिश करता लेकिन ना जाने तुम्हारे बदन में तुम्हारी खूबसूरती में कैसी कशिश थी कि मैं ऐसा नहीं कर पाया और अपना लंड हिलाते हुए तुम्हें दिखाता रहा,,( शुभम रुचि की मदमस्त जवानी में पागल होकर जो भी मन में आया सब कुछ एक सांस में ही बोल दिया और साथ ही यह सब बोलते बोलते लगातार अपने दोनों हथेलियों को जितना हो सकता था उतना रुचि की मदमस्त गांड के उभार को उस में भरकर दबाता रहा जिससे रूचि के तन बदन में मादकता का सुरूर चढ़ने लगा ,, वह भी अपनी तारीफ में शुभम के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर एकदम मदहोश होने लगी और साथ ही उसकी हरकत की वजह से अब वह पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी ,,,,, शुभम की बातें सुनकर उसके पास बोलने लायक कोई शब्द नहीं थे वह खामोश रहे और उस खामोशी का फायदा उठाकर शुभम अपने दोनों हाथ को ऊपर की तरफ लाकर उसके खूबसूरत गोल चेहरे को अपनी हथेली में लेकर ऊपर उठाया और उसके लजरते हुए लाल लाल होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,

शुभम को नहीं मालूम था कि उसकी इस हरकत का रुचि पर क्या असर पड़ेगा बस वह जो मन में आया वह करना शुरू हो गया मौके की नजाकत भी यही कहती थी।,,, लेकिन रुचि की तरफ से किसी भी प्रकार का विरोध नहीं हो रहा था बल्कि वह कुछ ही देर में उसका साथ देते हुए खुद ही उसके होठों को मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी और उसके दोनों हाथ खुद-ब-खुद शुभम की पीठ पर चले गए शुभम पागलों की तरह उसके लाल लाल होंठों को चूसना शुरू कर दिया था मानो जैसे एक भंवरा खूबसूरत फूल की मीठा उसको चूसता हो।,,,, दोनों काफी उत्तेजित हो चुके थे झोपड़ी के अंदर का पूरा माहौल मादक हो चुका था और बाहर बारिश अभी भी अपना जोर दिखा रही थी।,,,, शाम के तकरीबन 5:30 का समय हो रहा था लेकिन बारिश और बादलों की वजह से अंधेरा सा होने लगा था,,, लेकिन इतना भी अंधेरा नहीं हुआ था कि एक खूबसूरत औरत के जिस्म को देखा ना जा सके शुभम को सब कुछ साफ-साफ ने दिया था रुचि के बदन का हर एक हिस्सा शुभम की आंखों में चमक भर दे रहा था।,,,, रह रह कर बादलों की गड़गड़ाहट तेज हो जा रही थी,,,, थोड़ा डरावना माहौल होने के बावजूद भी दोनों उस माहौल के बिल्कुल विपरीत होकर एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे। ,,, शुभम समझ गया था कि उस दिन लैंड खड़ा होने का जो उसने कारण बताया था उससे रुचि को किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं थी फिर भी वह अपनी मन की शंका को दूर करने के हेतु बोला।,,,

Shubham or ruchi..

भाभी जो मैंने कहा उसे से तुम नाराज तो नहीं हो,,

नननन,,, नहीं,,,,( रुचि उत्तेजना के मारे सिसकते हुए बोली,, वैसे भी भला इसमें उसे क्यों एतराज होने लगा था,,, काफी समय हो गया था किसी मर्द के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनें शुभम की बातें उसे पहले से ही अच्छी लगती थी और इस तरह की बातें सुनकर तो वह उसकी पूरी तरह से दीवानी हो गई थी इसलिए तो उसकी बाहों में एकदम मचल रही थी। रुचि का जवाब सुनकर शुभम की हिम्मत बढ़ने लगी झोपड़ी के अंदर आज अपने मन की मुराद पूरी कर लेना चाहता था इसलिए वह एक हाथ ऊपर की तरफ ले आकर ब्लाउज के ऊपर से ही रुचि की चूची को दबाना शुरू कर दिया उत्तेजना के मारे वह इतनी कसके रुचि की चूची को पकड़ा था कि रुचि के मुंह से आह निकल गई,,, रुचि के पास आज शुभम के आगे समर्पण करने के अलावा दूसरा कोई भी रास्ता नहीं था वैसे भी मन में वह भी अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी शुभम को पूरी तरह से समर्पण करने के लिए आज वह अपने मन की प्यास अपने तन की प्यास सब कुछ पूछा देना चाहती थी शादी हुई तब से वह अपने बदन की प्यास को पूरी तरह से बुझा नहीं पाई थी और उसके पति के द्वारा तो उसकी प्यास और बढ़ती जाती थी बस अपने आचरण और संस्कार की वजह से ही अपने पैर को रोके रखी थी लेकिन आज इस बारिश के माहौल में सुनसान झोपड़ी के अंदर अपने तन की प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई थी।,,,

ओहहहहह,,,, भाभी तुम्हारी गोल-गोल चूचियां इसे देखने के लिए मैं कब से तड़प रहा था ,,, तुम्हारी दोनों चुचियों को मुंह में भर कर पीना चाहता हूं इनसे खेलना चाहता हूं ,,,,( ऐसा कहते हुए सुभम अपना दूसरा हाथ भी उठा कर ब्लाउज के ऊपर से ही दोनों संतरे को दबाना शुरू कर दिया,,)

ससससहहहह,,,,,आहहहहह,,,,, कोई आ गया तो,,,(स्तन मर्दन की वजह से गुरुजी पूरी तरह से गरमाने लगी थी और गर्म सिसकारी लेते हुए शंका जताते हुए बोली.,,,, रुचि का यह कहना कि कोई आ गया तो यह इस बात का सबूत था कि वह पूरी तरह से तैयार थी शुभम से छुड़वाने के लिए पर यह बात तो हम भी उसकी बातों के जरिए जान गया था इसलिए वह ब्लाउज के बटन को खोलते हुए बोला,,,)

भाभी ये गांव है और सड़क पर इतनी तूफानी बारिश मे गांव वाले कभी नहीं आने वाले क्योंकि मैं भी गांव में रह चुका हूं मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि ऐसी बारिश में और वह भी शाम ढलने के बाद कोई गांव वाला घर से बाहर नहीं निकलता इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो यहां पर हमें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी,,,( इतना कहते हुए शुभम बात ही बात में रुचि के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया रुचि को भी इस बात का आभास नहीं हुआ कि कब शुभम ने फुर्ती दिखाते हुए उसके ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया ,,ब्लाउज के बटन खुलते ही उसकी आंखों के सामने लाल रंग की ब्रा नजर आई जिसमें रुचि की संतरे जैसी चूची बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।,,,, रुचि की ख़ूबसूरत संतरे जैसी चूची देखकर सुभम की आंखों में चमक आ गई ,,,, दूसरी तरफ रुची का दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, शुभम जिस तरह से फुर्ती दिखाते हुए उसका ब्लाउज खोला था उसे देखते हुए रुचि को लग रहा था कि वह उसकी ब्रा भी ना खोल दें लेकिन चाहतीं तो वह भी यहीं थी कि वह उसकी ब्रा भी खोल दे लेकिन फिर भी उसे डर था कि कहीं कोई आ ना जाए क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई वहां आ जाए और लेने के देने पड़ जाए ,,, लेकिन फिर भी शुभम की बात सुनकर उसे भी तूफानी बारिश देखकर यही लग रहा था कि उसे मैं वहां कोई आने वाला नहीं है लेकिन फिर भी एक औरत होने के नाते उसे डर तो लग ही रहा था लेकिन मजा भी उतना आ रहा था,,,,
 
दोनों की सांसो की गति तेज चल रही थी शुभम मदहोश होकर रूचि की लाल रंग की ब्रा के अंदर झांक रहा था और रुचि शुभम की आंखों में अपनी खूबसूरत बदन को लेकर जो चमक नजर आ रहीं थी उससे उसके अंदर काफी प्रसन्नता का एहसास हो रहा था क्योंकि उसे इस बात का अंदाजा लग रहा था कि शुभम जरूर उसकी प्यास बुझा पाएगा,,, शुभम तुरंत उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपने दोनों हाथों से उसके ब्लाउज को उसके खूबसूरत चिकनी हाथों में से निकालने लगा लो जी का दिल जोरों से धड़क रहा था जिस तरह से होगा धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था रुचि को एहसास हो रहा था कि कुछ बहुत ही अच्छा होने वाला है देखते ही देखते हैं शुभम ने रुचि के ब्लाउज को उतार कर नीचे फेंक दिया,,,,, शुभम की मदहोशी देखते हुए रुचि को एहसास हो गया कि वह उसकी ब्रा भी उतार देगा इसलिए वह पहले ही बोली,,,

नहीं सुभम मेरी ब्रा मत उतारना पहनने में दिक्कत होगी,,,

कोई दिक्कत नहीं होगी भाभी में जिस तरह से उतार रहा हूं उसी तरह से पहना भी दूंगा,,, (इतना कहते हुए शुभम पीछे से रुचि की ब्रा का हुक खोलने लगा और देखते ही देखते रुचि के बदन से ब्र कब अलग हो गई यह रूचि को भी पता नहीं चला,,,,,,, ब्रा के उतरते ही शुभम की आंखों में चमक आ गई और वह पीछे से रुचि को अपनी बाहों में भरकर अपने दोनों हथेली में उसके दोनों संतरो को पकड़कर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया इतना जोर से वह पागलों की तरह रुचि की चूची दबा रहा था कि रुचि से रहा नहीं गया और वह दर्द से कराहने लगी,,,,,

आहहहहह,,,,, शुभम दर्द कर रहा है,,,

चिंता मत करो भाभी थोड़ी ही देर में मजा आने लगेगा लगता है कि भैया ठीक तरह से आपकी चुची पर मेहनत नहीं कीए है इसीलिए आप इस तरह से चिल्ला रही हो वरना इस तरह से चिल्लाती नहीं बल्कि मजे लेकर और दबवाती ,,,,

ससससहहहह,,,,आहहहह,,,, सच कह रहा है तू शुभम अगर मेरे पति इस पर मेहनत कीए होते तो सच में मैं मजे लेकर चिल्लाती दर्द से नहीं,,,,(रुचि दर्द से कराहते हुए बोली,,,,,)

लेकिन कोई बात नहीं भाभी अाप भी थोड़ी देर में ही आपको मजा आने लगेगा और आप भी सिसकारी ले ले कर मजे लेंगी,,,,। (शुभम रुचि की चूची पर मेहनत करते हुए मजे लेने लगा,,,, शुभम के हाथों में अधिकतर अभी तक बड़ी-बड़ी चूचियां ही आई थी लेकिन आज पहली बार एकदम संतरे के साइज की गोल-गोल चूचियां आई थी जिसे दबाने में शुभम को काफी उत्तेजना और आनंद की अनुभूति हो रही थी वह पागलों की तरह रुचि के गले पर चुंबनों की बौछार करते हुए लगातार उसकी चूची से खेल रहा था और साथ ही अपने पैंट में बने तंबू को हल्के हल्के उसके नितंबों से रगड़ रहा था जिससे रुची के बदन की गर्मी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी ,,,,, शुभम की सूझबूझ के कारण थोड़ी ही देर में रुचि के मुंह से मादकता भरी सिसकारी छूटने लगी ,,,

ससससहहहह,,,,,आहहहहह,,,,,ऊऊऊऊऊहहहहह,,,,

देखा भाभी मैंने कहा था ना कि तुम्हें भी मजा आने लगेगा तो तुम्हारे मुंह से चिल्लाने की जगह गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगेगी,,,

हारे तो सच कहा था अब मुझे दर्द बिल्कुल भी नहीं हो रहा है बल्कि मजा आ रहा है इस तरह से तो मेरे पति ने आज तक मेरी चूचियों से नहीं,,खेला,,,

पागल है भैया जो ईतनी खूबसूरत औरत के साथ मस्ती भरी रात नहीं गुजारते,,, ना तो तुम्हारी खूबसूरत है जिस्म से खेलते हैं,,,,( इतना कहते हुए शुभम अपनी हरकत को जारी रखते हुए बार-बार अपने पेंट में बना तंबू उसकी मदमस्त गोल गोल गाल पर कुछ ज्यादा ही जोर जोर से रगड़ रहा था जिससे रुचि को अपनी गांड के बीचो-बीच कोई मोटी लकड़ा की तरह चुभता हुआ महसूस हो रहा था इसलिए वह बोली,,,,)

शुभम तेरा लंड है कि मुसल मेरी गांड में बहुत जोरों से चुभ रहा है।,,,,,

भाभी मेरा बस चले तो साड़ी के ऊपर से ही तुम्हारी गांड में मेरा लंड पेल दुं,, ( शुभम मारे उत्तेजना के पागल हुआ जा रहा था वह इतनी जोर जोर से रूचि की चूची को मसल रहा था कि वह एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई थी ,,, लेकिन इसमें रुचि को बहुत ही आनंद की अनुभूति हो रही थी झोपड़ी के बाहर अभी भी लगातार बारिश बहुत जोरों की पड़ रही थी देखते ही देखते खेतों में पानी नजर आने लगा जो कि बहुत ही तेजी से खेतों में पानी भर रहा था,,, रुचि स्तन मर्दन का मजा लेते हुए गरम सिसकारी की आवाज के साथ बोली।)

शुभम ये बारिश बंद होगी भी कि नहीं होगी,,,

भाभी मुझे तो लगता है कि यह बारिश तभी बंद होगी जब तक कि मैं तुम्हारी प्यास नहीं बुझा देता,,,,,

तो देर क्यों कर रहा है मेरी प्यास तो बढ़ती जा रही है बुझा जल्दी से मेरी प्यास बुझा,,,,( रुचि एकदम मदहोश होते हुए यह बात कहने के साथ ही एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर शुभम की लंड को पजामे के ऊपर से ही पकड़ कर उसका जायजा लेने लगी,,,)
 
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