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मामी के साथ बस का मस्ती भरा सफर-1

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(Mami Ke Sath Masti Bhara Safar-1)

मैं मामा मामी के घर रहता था. मैं अपनी ममेरी बहन की चूत चोदना चाहता था. एक बार मैं मामी के साथ स्लीपर बस में था. हम दोनों साथ लेटे थे और मुझे बहन की याद आ रही थी.

दोस्तो, मेरा नाम अभि है. मैं अपने मामा मामी के साथ भोपाल में रहता हूं. मेरी उम्र 26 साल है दिखने में आम लोगो जैसा ऊँ। मेरी लंबाई 5'4 है मेरा औजार औसत है में यह नही कहुगा किया बहुत बड़ा है मोटा है पर ठीक ठाक है ये मेरे जीवन की सच्ची घटना है जो आपके सामने पेश कर रहा हूँ कोई गलती हो तो माफ करना ।

यह घटना मेरे साथ थोड़े दिन पहले ही हुई थी. कुछ दिनों पहले की ही बात है जब मैं अपनी मामी के साथ सोया था.

मैं अपने मामा मामी और उनकी बेटी के साथ भोपाल में रहता हूं. मेरी मामी का नाम जया है और वह दिखने में बहुत सुंदर है. यूं तो लगता ही नहीं कि उनकी उम्र करीब 35 साल के आसपास होगी. 34-32-36 की फिगर के साथ गजब की शेप मे है
मामी मुझे अपने बेटे जैसा ही मानती है और उनके अपने बच्चे की तरह ही मेरा खयाल भी रखती है. मेरे मामा बीमा कंपनी में बीमा एजेंट है जिसके कारण वह कई बार शहर से बाहर रहते हैं। मेरी मामी एक हाउसवाइफ है और उनकी बेटी अभी पढ़ रही है.

वैसे तो वह उम्र में काफी बड़ी है 19 साल की . लेकिन कुछ साल पूर्व बीमार हो जाने के कारण वह दसवीं कक्षा में है. मामी और उनकी बेटी दोनों ही दिखने में बहुत मस्त हैं.

पहले तो मैं सिर्फ मेरी सेक्सी बहन पर अपनी आंख जमाए बैठा था क्योंकि वह दिखने में काफी सुंदर है और वह काफी माल लगती है. मैं अक्सर उसके नाम की मुठ मारा करता हूं।

दोस्तो, मैं अब आपको अपनी अलग ही कहानी के बारे में बताता हूं जो कि मेरे साथ हुई एक सच्ची घटना है. यह घटना मेरे साथ कुछ दिन पहले ही हुई है. दरअसल मैं अभी कुछ दिनों पहले ही मेरी मामी के साथ इंदौर आया हुआ था.

यह सिलसिला तब शुरू हुआ था जब मामा ने कहा था कि मामी को लेकर इंदौर जाना है. दरअसल मामी के भाई की लड़की की शादी इंदौर में थी और उनकी बेटी भी उनके साथ चले लेकिन मेरी बहन के एग्जाम होने के कारण वह नहीं आ पा रही थी.

मेरे मामा भी किसी काम में व्यस्त थे तो मामा ने मुझसे कहा- तुम मामी के साथ इंदौर चले जाना।
पहले तो मुझे भी जाने का मन नहीं था, फिर बाद में मैंने सोचा कि ठीक है, वैसे भी मैं घर पर बोर हो रहा हूं. इस बहाने ही थोड़ा घूमना हो जाएगा. इसलिए मैंने मामी को आने के लिए हां भर दी.

अब ट्रेन की टिकट नहीं मिल रही थी. बहुत बार ट्राई करने के बाद भी ट्रेन की टिकट कन्फर्म नहीं हो पा रही थी. इसीलिए मैंने सोचा कि अब कैसे भी करके इंदौर तो जाना ही है इसलिए मैंने मामी से कहा कि हम ट्रेवलर (बस) से इंदौर चले जाते हैं तो चाची ने भी हां कर दी।

जब मैं टिकट निकालने अपने दोस्त की दुकान पर गया तो उसने बताया कि उसमें सिंगल सिंगल सीट उपलब्ध नहीं है केवल जुड़वा सीट ही उपलब्ध हैं जबकि मैं नहीं चाहता था कि मामी मेरे साथ एक ही सीट पर सोए.

इसका कारण यह था कि मैं रात को मोबाइल पोर्न फिल्म देखने का आदी था. रात को पोर्न सेक्स वीडियो देखकर ही मुझे चैन मिलता था. मुझे मुठ मारने की आदत थी.

अपनी ममेरी बहन की भी कई सारी फोटो मैंने फोन में सेव कर रखी थी इसलिए मैं नहीं चाह रहा था कि मामी को उसके बारे में पता चले. मेरे पास मेरी बहन की कई सारी नंगी फोटो थी जो मैं रोज रात को देखता था. मुझे रात को लंड हिलाए बिना नींद नहीं आती थी.

टिकट बुक करवाते हुए पता लगा कि सिंगल सीट उपलब्ध नहीं हो पायेगी. दूसरी परेशानी ये थी कि ज्वाइंट सीट भी केवल एक या दो ही बची हुई थी. हमें किसी भी हाल में नागपुर पहुंचना था. मौके की मजबूरी थी इसलिए हां करनी पड़ी. टिकट और सीट बुक हो गयी.

मैं अभी भी उदास था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि चमामी मेरे साथ सोए. मामी के साथ सफर का सारा मजा खराब होने वाला था. मुझे बहुत अजीब ही लग रहा था. मैं घर आ गया और मामी को कह दिया कि आज रात में ही निकलेंगे।

रात के करीब 9:00 बजे थे और हमारी पैकिंग पूरी हो चुकी थी। 11 बजे के करीब हम लोग गाड़ी से इंदौर के लिए निकल गए। मेरा मूड ऑफ था क्योंकि मामी साथ में ही बैठी थी. मुझे नंगी फिल्म देखने की तलब लगी हुई थी. मुठ मारने का मन कर रहा था.

मैं बहुत उदास सा बैठा हुआ था. बोर हो रहा था. ऐसे ही दो घंटे बीत गये थे. रात के करीब 1:00 बजे थे और मुझे नींद नहीं आ रही थी. रोज की मेरी मुट्ठ मार कर सोने की आदत मुझे आज बहुत तकलीफ दे रही थी.

ऐसे ही मैं लेट गया. मामी भी लेट गयी थी. मरे मन से मैं बार बार करवट बदल रहा था. फिर भी मैं सोने की कोशिश कर रहा था और मेरी बाजू में मेरी मामी आराम से सो रही थी. एकदम से पता नहीं मेरे दिल में क्या हुआ लेकिन मेरा दिल कर रहा था कि मैं अपनी मामी को देखता ही रहूं।

मामी ने पीले रंग की साड़ी पहन रखी थी जिसमें वह काफी अच्छी लग रही थी. उनका पल्लू उनकी छाती पर से थोड़ा सा सरक गया था और इस वजह से मैं उनके ब्लाउज के हुक देख पा रहा था.

मेरी मामी का वो रूप देखकर मुझे अजीब सा फील होने लगा. दिल कर रहा था कि एक ही बार में उनकी सारी हुक निकाल दूं। लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि मामी मुझे अपने बेटे जैसा मानती थी.

उनके स्तनों को नंगा देखने की चाहत में मेरा लंड खड़ा होने लगा था. मन ही मन मुझे हुक निकालने की इच्छा होने लगी। मैंने पर्दे लगा दिये. अब बाहर से कुछ दिख नहीं रहा था. थोड़ी सी हिम्मत जुटाकर मैंने मामी के ब्लाउज का सबसे नीचे वाला हुक निकाल दिया और चुपचाप से उनके बाजू में पड़ा रहा.

थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि मामी को इस बात की भनक तक नहीं लगी थी. फिर तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैंने धीरे से मामी का नीचे से दूसरा वाला हुक भी निकाल दिया. अब उनकी ब्लाउज थोड़ी सी ढीली हो गई थी. मेरा लंड टाइट हो गया था. उत्तेजना में तन गया था.

धीरे धीरे करके मैंने चार हुक में से 3 हुक निकाल दिए. फिर मैंने एक साइड का ब्लाउज हल्के से उठा दिया. ब्लाउज को हटा दिया जिसकी वजह से मामी का एक स्तन बाहर आ गया था.

नंगा स्तन देख कर मैं बहुत उत्तेजित हो गया. मामी को इस हालत में मैंने पहली बार ही देखा था. मेरी इच्छा होने लगी कि मैं मामी के स्तन को पकड़ कर चूस लूं.

मैं चाह रहा था कि उनका स्तन दबाते हुए मैं उसको दबोच दूं और उसका दूध निकाल दूं. उसके स्तन का दूध पी जाऊं. धीरे से मैंने मामी के स्तन को हाथ में पकड़ लिया. फिर हल्के से उनके करीब हो गया.

मेरी धड़कनें तेज हो रही थीं. मैंने पहली बार मामी के स्तन को छुआ था. फिर मैं अपने मुंह को उनके चूचे के पास ले गया. मैंने अपनी जीभ को धीरे से बाहर निकाला और मामी की चूची को जीभ से छूने लगा. मुझे मस्त सी फीलिंग आने लगी.

मेरा 7 इंची लंड अब फटने को हो गया. मेरी पैंट से बाहर आने की कोशिश कर रहा था. मैंने दूसरे हाथ से अपने लंड को पैंट के अंदर से मसलना शुरू कर दिया. मैं मामी की चूची पर जीभ चला रहा था.

जब मुझसे रुका न गया तो मैंने मामी की टांग पर अपने लंड को टच करवाना शुरू कर दिया. मैं अपने लंड को उसकी जांघ पर धकेलने लगा. मुझे डर भी लग रहा था मगर उत्तेजना भी बहुत ज्यादा हो रही थी. मैं खुद को रोक ही नहीं पा रहा था.

मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मामी जाग न जाये. इसलिए मैं धीरे धीरे अपने लंड को मामी की जांघ से सहला रहा था. कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो रहा था.

मैं हल्के हल्के मामी के स्तन को पीता रहा. फिर मैंने कुछ देर तक मामी के स्तन को पीने के बाद उसके ब्लाउज के बंद बचे हुए आखिरी हुक को भी खोल दिया. अब मामी के दोनों ही स्तन उनके ब्लाउज से बाहर आ गये थे.

हिम्मत करके मैंने धीरे से मामी की चूचियों अपने दोनों हाथों में थाम लिया. मामी के दोनों स्तन बिल्कुल बाहर आ गये थे. अब मैं धीरे धीरे मामी के दोनों स्तन मसलने लगा।

बारी बारी से अब मैं खुद को रोकते हुए आहिस्ता से दोनों ही स्तनों को चूस रहा था.
तभी अचानक से मामी ने अपनी आंखें खोल दीं.
मेरी तो जैसे जान निकल गई. मेरी तो गांड फट गयी थी. सोच रहा था कि पता नहीं मामी अब क्या करने वाली है.

मगर वो बहुत ही लचीले अंदाज से नर्म से लहजे में बोली- राहुल, बहुत गर्मी हो रही है.
इतना बोल कर मामी ने अपनी साड़ी को भी ऊपर कर लिया. उनकी जांघें नंगी हो गयीं. उन्होंने अपने नंगे पैर को उठा कर मेरी टांग पर रख दिया.

अब मैं मामी की पैंटी को भी देख सकता था। मामी दरअसल मुझे हरी झंडी दिखा रही थी. वो चाह रही थी कि मैं उनके साथ और आगे बढूं. मुझे ये बात समझ में आ गयी थी.
मैंने अपना हाथ उनकी साड़ी के अंदर डाल दिया और मामी की गांड को सहलाने लगा.

मैंने मदहोशी भरे से स्वर में कहा- जाया, आपके बदन में सच में बहुत गर्मी हो गयी है. आपकी पैंटी काफी गीली हो गई है.
उन्होंने ने गर्दन हिलाकर हां कहा।

फिर मैंने उनकी पैंटी को पीछे की तरफ से पकड़ कर धीरे धीरे नीचे सरका दिया और उसे निकाल दिया। अब वो मेरे आगे करीब करीब नंगी हो गई थी।

अब तो मुझसे रुका ही नहीं गया और मैंने उनकी की सहमति के बिना ही उनकी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया. पहली बार मुझे उनके के जिस्म की ओर इतना आकर्षण महसूस हो रहा था. मैं बहुत ज्यादा उत्तेजना महसूस कर रहा था.

मेरा लंड मेरी पैंट के अंदर से ही मामी को चुभ रहा था. लंड की हालत भी बुरी हो गयी थी. इतनी देर से खड़ा होकर वो दर्द करने लगा था. मैं चाह रहा था कि अब मेरा लंड आजाद हो जाये.

आगे जारी रहेगी
 
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