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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete



वीरेंदर ने अपने होंठो पर उंगली रख कर आशना को शांत रहने का इशारा किया.

वीरेंदर: काफ़ी देर तक मैं उनकी बहस सुनता रहा और उन बातों से जो निचोड़ निकला वो यह था कि बीना आंटी ने ही रागिनी की शादी बिहारी काका से करवाई थी और फिर बिहारी, रागिनी की मदद से मुझे फसा कर प्रॉपर्टी के काग़ज़ अपने नाम पर करवाना चाहता था.

आशना: डॉक्टर. बीना?? लेकिन वो तो मुझे फोर्स करती थी कि मैं तुम्हे अपनी सच्चाई ना बताऊ और बातों ही बातों मे वो मुझे तुमसे संबंध बनाने के लिए भी एनकरेज करती थी. हालाँकि वो जानती थी कि आप मेरे भाई हो लेकिन उन्होने ही मुझे अपना राज़ आपके सामने खोलने से मना किया था क्यूंकी आप शायद इस बात से और परेशान हो जाते जिस से आपकी सेहत को नुकसान पहुँचता.

वीरेंदर: तो मेरा शक सही निकला??

आशना: शक???कैसा शक???

वीरेंदर: यही कि बिहारी जैसा आदमी इतनी बड़ी प्लॅनिंग नहीं कर सकता. बीना पर तो हम बाद मे डिसकस करेंगे पहले मैं तुम्हे बता दूं कि उसी बहस में बिहारी के मुँह से यह बात निकली कि अगर रागिनी उसका साथ नहीं भी देती है तो उसके पास कुछ ऐसे सबूत हैं जिस से वो तुम्हे ब्लॅकमेल करके प्रॉपर्टी के पेपर्स पर साइन करवा सकता था.

आशना: सबूत???? और भला पेपर्स पर मेरे साइन करने से क्या हो जाता???

वीरेंदर: क्यूंकी बीना के कहने पर मैने अपनी सारी प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी थी. उसने मेरे आगे शर्त रखी थी कि अगर मैं तुम्हे यूज़ करके छोड़ दूं और तुमसे शादी ना करूँ तो................

आशना: शी बिच??? अच्छा हुआ वो कमीनी मर ही गयी. प्रिया ने कहा भी था कि बीना बिच है(प्रिया, आशना की बॅंगलॉर वाली एयिर्हसटेस्स फ्रेंड). उसे तो पहले ही दिन से बीना पर शक हो गया था जब मैने उसे बीना के बारे मे बताया था.

वीरेंदर: यह सब मिली भगत बिहारी और बीना की थी तभी तो बिहारी को यह बात पता थी कि मैने प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी है जबकि मुझे, बीना और आड्वोकेट के अलावा यह राज़ किसी और को पता ही नहीं था.

आशना: बिहारी के पास ऐसे कॉन से सबूत थे जो वो मेरे खिलाफ इस्तेमाल कर सकता था?

वीरेंदर: उसकी बात सुनकर तो मुझे भी बड़ी हैरानी हुई थी. जैसे ही बिहारी ने यह बात कही मैं दौड़ता हुआ उसके कमरे मे घुसा क्यूंकी उस वक्त तक तो मैं भी तुम्हारी असलियत नहीं जानता था तो एक पल के लिए मुझे तुमपर भी शक हुआ.

आशना ने आँखो की स्वीकृति से जताया कि " आइ कॅन अंडरस्टॅंड".

वीरेंदर: बिहारी के कमरे मैं जाकर मैने हर कोना छान मारा लेकिन वहाँ कुछ ना मिला. निराश होकर मैं जैसे ही अलमारी की तरफ बढ़ा तो वो लॉक थी. एक कपड़ों की अलमारी को लॉक्ड पाकर मुझे कुछ शक हुआ.

वीरेंदर: बिहारी की एक अच्छी आदत यह है कि वो सारी चाबियाँ अपने कमरे मे लगी एक हुक मे टाँग कर रखता है और उसकी यही आदत उसके लिए मुसीबत बन गयी. मैने झट से अलमारी की चाबी लेकर अलमारी खोली और फिर अलमारी मे बने सेफ को खोला तो वहाँ मुझे एक सिम कार्ड, कुछ मेमोरी कार्ड्स और एक पाउच मिला. जैसे ही मैने पाउच खोला उनके अंदर के डॉक्युमेंट्स देख कर मैं हडबडा गया.

तुम्हारी असलियत मेरे सामने ज़ाहिर करने के लिए वो डॉक्युमेंट्स काफ़ी थे मगर मेरे दिल ने फिर भी इस बात पर यकीन नहीं किया. मेरा दिल यह मानने को तैयार नहीं था कि तुम मुझे धोखा दे सकती हो.

किसी और का धोखा तो मैं बर्दास्त भी कर लूँ मगर मेरी आशना मुझे धोखा दे यह बर्दाश्त कर पाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था. मेरा सर चकराने लगा, दिमाग़ फटने लगा लेकिन मेरे दिल ने मुझे भरोसा दिलाया कि इस सब के पीछे तुम्हारा कोई स्वार्थ नहीं बल्कि एक त्याग था जो तुमने मेरी जान बचाने के लिए किया था. सच ही तो था मेरे दिल का कहना, भला कॉन इंसान किसी के लिए इतना सब कुछ करता है?

आशना ने झट से वीरेंदर के होंठों पर अपना हाथ रख दिया और नम आँखों से उसे कुछ ना कहने का इशारा किया.

वीरेंदर: मैं जानता हूँ जिस वक्त तुम्हे मेरे सहारे की ज़रूरत थी उस वक्त मैं तुम्हारा हाथ ना थाम सका बल्कि उस घटना से मैं खुद इतना गर्दिश मे डूबा था कि तुम्हारी हालत समझ ना सका.

आशना(वीरेंदर के हाथ पर हाथ रखते हुए): उस वक्त मैं भी तुम्हारी हालत समझने के काबिल नहीं थी लेकिन आज तुम्हारी हर सोच हर धड़कन को पढ़ सकती हूँ और मुझे गरूर है कि तुम मेरे जीवन साथी हो. समर्पण की जो भावना मैने तुम्हारे संपर्क मे आकर सीखी है वो मैं शायद ही कभी सीख पाती या समझ पाती मगर तुम्हारी चाहत और तुम्हारे प्यार ने तो मेरे जीने का अंदाज़ ही बदल दिया है वीर.

वीरेंदर ने अपना सर आशना के कंधे पर रख दिया और बोला.

वीरेंदर: उस रात मैं काफ़ी परेशान हो गया था. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो गया. आख़िर ज़िंदगी ने यह दिन क्यूँ दिखाया लेकिन फिर एकदम से मन मे ख़याल आया कि अगर तुम मेरी ज़िंदगी मे ना आती तो शायद आज मैं ज़िंदा ही ना..............

 


इस से पहले कि वीरेंदर अपनी बात पूरी कर पाता, आशना ने अपने होंठ उसके होंठों पर रखकर उसकी आवाज़ दबा दी. वीरेंदर ने भी आशना की कमर मे हाथ डालकर उसका सहयोग किया और दोनो एक दूसरे के होंठों का रस चूसने लगे.

थोड़ी देर बाद जब दोनो के होंठ अलग हुए तो आशना ने वीरेंदर को गले लगाते हुए कहा "आइ लव यू मोर दॅन एनितिंग इन माइ लाइफ वीर, यू आर माइ पॅशन. यू आर दा फर्स्ट मॅन इन माइ लाइफ हू गिव्स थ्रिल टू माइ बॉडी, माइ सौल".

वीरेंदर: माइ फीलिंग आर नो डिफरेंट दॅन यू. ई स्टिल अडॉर दा फर्स्ट टच ऑफ यू आंड नाउ यू आर कंप्लीट्ली माइन बट स्टिल आइ लॉंगंग्ड फॉर मोर ऑफ यू.

यह बात कहते हुए वीरेंदर का हाथ आशना के नितंब पर घूमने लगा. वीरेंदर के फेतेरिक टच से आशना भी पिघलने लगी.

आशना: मुझे लगता है कि आपका मूड कुछ शरारत करने को हो रहा है.

वीरेंदर: शरारत? कैसी शरारत? मैं तो बिल्कुल कूल मोड़ मे हूँ.

आशना:अच्छा??? तो फिर आपके हाथ गुस्ताख़ी क्यूँ कर रहे हैं.

यह कहकर आशना वीरेंदर से डोर भागने लगी लेकिन दो कदम पीछे हटते ही उसकी योनि मे पीड़ा की एक लहर उठी और आशना वहीं दोहरी हो गयी.

आशना: आउच.

वीरेंदर झट से उसके पास जाकर बैठ जाता है. वीरेंदर के चेहरे पर परेशानी के भाव सॉफ देखे जा सकते थे.

वीरेंदर: क्या हुआ? पैर मे मोच आ गयी क्या? दिखाओ, मुझे दिखाओ.

आशना, वीरेंदर की बातों से शरमा जाती है. आशना के चेहरे के बदलते रंग को देखकर वीरेंदर हैरान हो जाता है. उसे कुछ समझ नहीं आता.

वीरेंदर: मुझे बताओगी अब इस मे शरमाने वाली क्या बात है?

आशना खामोश रही.

वीरेंदर: कम ऑन, टेल मी.

आशना, वीरेंदर की आँखों मे देखती है और फिर नज़रें झुकाकर बोलती है:आपका ही दिया हुआ दर्द है वीर. आप नहीं समझोगे तो कॉन समझेगा?

वीरेंदर एकदम से सारी बात समझ जाता है.

वीरेंदर: अभी तक दर्द है? लेकिन सुबह तो तुम बिल्कुल ठीक चल रही थी?

आशना: पता नहीं अंदर कितने ज़ख़्म कर दिया है. अगर आपके साथ ऐसा होता ना तो आपको पता चलता.

वीरेंदर: वैसे आइडिया अच्छा है. एक काम करो, एक मोमबत्ती लेकर मेरे भी अंदर घुसा दो ताकि मुझे भी तुम्हारे दर्द का अहसास हो सके.

वीरेंदर की बात सुनकर आशना शरमा गयी और वीरेंदर हँसने लगा.

आशना ने सम्भल कर उठते हुए अपने कपड़े झाडे और पैर पटकते हुए किचन मे जाने लगी.

आशना को जाता हुआ देख कर वीरेंदर उसके नितंबो की थिरकन मे खो गया. जैसे ही आशना किचन मे घुसी और वीरेंदर की आँखों से मनमोहक दृश्य लुप्त हुआ वो ज़मीन से उठा और चिल्लाकर बोला: अगर ज़्यादा दर्द हो तो आज पीछे का महूरत करें?

आशना हाथ मे बेलन लेकर वीरेंदर पर झपटी लेकिन अचानक से उसे अपनी हालत का आभास होते ही वो एकदम रुक गयी. वीरेंदर हंसते हुए बाहर निकला गया.

आशना किचन मैं काम कर रही थी जब उसे अपने नितंब पर हल्का सा दबाव महसूस हुआ. उसने झट से पीछे मुड़कर देखा तो वीरेंदर उसके पीछे खड़ा था. आशना ने नीचे की तरफ देखा तो वीरेंदर ने अपने लिंग को पॅंट से बाहर निकाल रखा था और उसे आशना के नितंब पर रगड़ रहा था. आशना के चहरे पर हैरानी और शरम के मिले झूले भाव आने लगे.

आशना: क्या है यह सब?

वीरेंदर: वोही तो मैं जानना चाहता हूँ कि क्या है यह सब? तुम्हारा पति बेचारा तड़प रहा है और तुम हो कि उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दे रही.

आशना: मेरे श्रीमान जी, अगर खाना नहीं बना तो आप भूक के मारे तड़पोगे. भला बीवी के होते हुए पति भूखा रहे यह कहाँ का इंसाफ़ हुआ?.

वीरेंदर: तुम्हारे साथ तो पेट की भूख का अहसास ही नहीं होता बस जिस्मानी भूख हावी हो जाती है.

आशना: थोड़ा बहुत प्यार बुडापे के लिए भी बचा कर रखिए जनाब. सारा प्यार अभी जवानी मे लूटा देंगे तो बुडापे मे क्या करेंगे आप.

वीरेंदर: बुढ़ापे का अभी से क्या सोचना. अभी तो जवानी खर्च करना शुरू की है और यह कहकर वो आशना को अपने कंधे पर उठाकर रूम मे ले जाने लगा.

 


आशना छटपटाती रही लेकिन वीरेंदर के आगे उसकी एक ना चली. आशना को बिस्तर पर लिटाकर वीरेंदर ने अपनी पॅंट उतारी और आशना पर कूद पड़ा.

आशना: क्या खाते हैं आप वीर, जो हमेशा इस कदर बैचैन रहते हैं?

वीरेंदर: खाने को थोड़ी देर साइड मे ही रखो और जल्दी से मुझे दूध पिला दो, बहुत भूख लगी है.

आशना ने शरमाकर अपने चेहरे पर हाथ रख लिया.

वीरेंदर: हे भगवान यह लड़की कितना शरमाती है. लगता है मुझे खुद ही मेहनत करनी पड़ेगी.

आशना ने झट से अपने हाथ चेहरे से हटा लिए.

आशना: अच्छा बाबा रुकिये, प्लीज़ पहले दरवाज़ा बंद कर दीजिए.

वीरेंदर: मैं दरवाज़ा बंद करने जाउन्गा तो तुम वॉशरूम मे घुस जाओगी. मुझे उल्लू समझ रखा है क्या?

आशना: उल्लू??? आप तो पूरे घोड़े हो घोड़े. किस तरह से मुझ बेचारी पर ज़ुल्म ढा रहे हो. अगर मेरी जगह कोई और होती तो सुहागरात पर ही तलाक़ दे देती.

वीरेंदर: तलाक़? तलाक़ क्यूँ?

आशना: क्यूंकी अगर मेरी जगह कोई और होती तो मैं उसे एक पल भी चैन से जीने नहीं देती और वो बेचारी तो डर के मारे तलाक़ देने मे ही बेहतरी समझती.

आशण की बात ख़तम होते ही दोनो की नज़रें आपस मे मिली और आशना मुस्कुरा दी.

वीरेंदर: नखरे दिखाती है मुझे. ठहर तू, अभी दिखाता हूँ मुझे तड़पने की क्या सज़ा देता हूँ.

वीरेंदर आशना पर टूट पड़ता है और आशना अपनी बाहों का हार उसकी कमर मे पिरोकर अपने प्यार का आहवान करती है.

प्रेमी युगल के बीच प्रेम-द्वंद्व परवान चढ़ने लगता है और फिर जल्द ही आशना के हलक से एक आनंदकारी चीख निकलती है जो इस बात का प्रमाण थी कि अपने जीवन साथी को उसने अपने जिस्म मे समेट लिया है. वीरेंदर ने अपने होंठ आशना के दुग्ध कलशो से लगाकर अपनी दूध पीने की इच्छा को जताते हुए उन्हे ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. वीरेंदर की इस हरकत से आशना के दिल मे एक टीस उठी कि काश "एक बूँद भी निकल जाय तो मेरे प्रेमी को मेरे आगोश मे स्वर्ग का आनंद आ जाए"

कुछ देर आराम करने के बाद, आशना वीरेंदर की छाती से सर उठाते हुए बोलती है- ओह गॉड कितना लेट कर दिया आपने, अभी लंच भी तैयार करना है. चलिए उठिए और मेरी हेल्प कीजिए.

आशना जैसे ही उठने को उपर होती है, वीरेंदर उसकी बाज़ू पकड़ कर उसे अपने साथ लिटा देता है.

वीरेंदर: यार, जब देखो तुम खाने की ही बातें करती रहती हो.

आशना: श्रीमान जी अगर खाओगे नहीं तो मुझे प्यार करने की एनर्जी कहाँ से लाओगे?

वीरेंदर: ऐसा क्या?

आशना: जी हां, बिल्कुल ऐसा ही है. अब शरारत छोड़िए और मुझे किचन मे हेल्प कीजिए.

वीरेंदर: लेकिन जो थोड़ी बहुत एनर्जी बची है पहले वो तो ख़तम कर लूँ.

यह कहकर वीरेंदर आशना पर एक बार फिर से सवार हो गया और आशना छटपटाती रही.

वीरेंदर के बाहुबल के आगे उसकी एक ना चली और एक बार फिर से आशना की कोख को अपने प्यार से सराबोर कर वीरेंदर ने उसे बाहों मे कस लिया.

साँसों को नियंत्रित करके वीरेंदर उठा और वॉशरूम चला गया. आशना भी बिस्तर से उठी. उसकी योनि की टीस बढ़ गयी थी लेकिन इस टीस की उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी बल्कि एक हल्का सा गुलाबीपन लिए अद्भुत निखर था जो इस बात का प्रमाण था के उसके पति ने उसे भरपूर सुख दिया है.

फ्रेश होकर वीरेंदर ने आशना को जल्दी से तैयार होने के लिए कहा.

वीरेंदर: हम लंच बाहर करेंगे. हमारी श्रीमती जी कुछ दिन किचन नहीं संभालेगी. उसके बाद तो सारी उमर किचन और बच्चों को ही संभालना है.

आशना ने शरम से आँखें बंद कर ली और मुस्कुराते हुए बोली: हमारे हर अंश को संभालने की ज़िम्मेदारी मेरी और मुझे संभालने की ज़िम्मेदारी आपकी.

वीरेंदर: तो फिर मुझे कॉन संभालेगा?

आशना: आपको संभालने की नहीं बल्कि संभलने की ज़रूरत है. अभी भी वक्त है संभल जाइए वरना आपकी यह प्यार करने कि फ्रीक्वेन्सी मेरी जान ना निकला दे.

वीरेंदर: अभी से बस कर दी, अभी तो दूसरा गिफ्ट बाकी है.

आशना ने झट से अपने कपड़े उठाए और वॉशरूम की तरफ तेज़ी से बढ़ चली.

वीरेंदर: हाहहाहा, कब तक बचोगी मेरी जान, धीरे धीरे पूरे करूँगा सारे अरमान.

वीरेंदर की बात सुनकर, आशना बस मन ही मन मुस्कुरा दी.

थोड़ी देर बाद आशना वॉश रूम से बाहर निकली. आशना ने इस वक्त ग्रीन कलर का टॉप और डार्क ग्रे क्लर की स्ट्रिचबल जींस पहनी हुई थी जो कि उसके बॉडी की लोवर्स कुवर्व्स को और भी निखार रही थी.

वीरेंदर: हाए जानम, आज पता नहीं कितने दिलों पर छुरियाँ चलने वाली हैं.

आशना का दिल वीरेंदर की तारीफ से झूम उठा. आशना ने बालों को खुला छोड़ा और वीरेंदर से बोली- चलें?

वीरेंदर: मंगलसूत्र तो छिप गया लेकिन इस चूड़े का क्या करोगी.?

आशना: वीरेंदर इसी के बारे मे मैं भी सोच रही हूँ. सच पूछो तो इसे उतारने का मेरा बिल्कुल मन नहीं है मगर इसे पहन कर बाहर भी तो नहीं जा सकती.

वीरेंदर: अरे यार इतनी एमोशनल मत हो. शादी के बाद सारी उमर पहन लेना इसे .

आशना ने भुजे हुए मन से चूड़ा निकाला.

आशना(शीशे मे देखते हुए): अब तो कोई भी नहीं पहचान सकता कि मैं शादी शुदा हूँ.

वीरेंदर: मेडम यह आपकी चंचल आँखों का धोखा है.

सामने वाला तो आपकी बिगड़ी हुई चाल देख कर ही पहचान लेगा कि लड़की ने सुहागरात तो ताज़ी ताज़ी मनाई है लेकिन शादी शुदा नहीं लगती.

वीरेंदर की बात सुनकर आशना शरमा दी.

 


आशना: जाओ मैं नहीं जाती आपके साथ लंच पर.

वीरेंदर(हंसते हुए); अरे यार मैं तो मज़ाक कर रहा हूँ. तुम तो एकदम परफ़ेक्ट लग रही हो, डर लग रहा है कहीं कोई मनचला तुम्हे प्रपोज़ ही ना कर दे.

आशना: मेरा दिल रखने के लिए बोल रहे हो ना यह सब? मैं जानती हूँ मेरी चाल मे थोड़ी लड़खड़ाहट है. इतनी सूजन जो हो गयी है. सिकाई का भी मोका नहीं दिया सुबह से.

वीरेंदर: तुम चाहो तो मैं अपनी गरम साँसों से इसकी सिकाई किए देता हूँ.

आशना: जी नहीं, आप चलिए. जिसको जो समझना है समझ ले. बीवी हूँ आपकी मेरी रक्षा करना आपका धरम है. लोगों की नज़रों से अब मुझे क्या डर. आप मेरा कवच बनकर मेरे साथ जो होंगे.

दोनो घर को लॉक करके, होटेल की तरफ चल देते हैं. वीरेंदर उसे एक 5-स्टार होटेल मे ले जाता है. अंदर एंटर करते ही जो सबसे पहला टेबल खाली दिखा, आशना ने उसपर क़ब्ज़ा कर लिया. वो अपनी टेडी-मेडी चाल के कारण लोगो मे शर्मिंदा नहीं होना चाहती थी. वीरेंदर भी उसके पास बैठ गया. लंच के बाद दोनो मूवी देखने चले गये.

वीरेंदर: याद है तुम्हे कुछ दिन पहले भी हम मूवी देखने आए थे?

आशना: उस दिन को मैं कैसे भूल सकती हूँ.

वीरेंदर: क्या आज भी कुछ वैसा करने का इरादा है?

आशना: अगर आपने आज भी लास्ट दोनो रोस की बुकिंग करवा ली है तो आपका यह शौक भी पूरा कर देती हूँ.

वीरेंदर: तुम हुकुम तो करो जानू, मैं थियेटर ही खरीद लूँ.

आशना: जी नहीं, मुझे किसी चीज़ की कोई ज़रूरत नहीं है. इस वक्त आपको घर ना लेजाकर मैं यहाँ आपको इस लिए लाई हूँ ताकि हम कुछ देर बात तो कर सके. अकेले मे तो आप बात करने से रहे. अब तो अकेले मे आपसे डर लगने लगा है. पता नहीं क्या हशर कर दो मेरा.

वीरेंदर: ह्म्म्म इंटेलिजेंट. बोलो क्या बात करनी है?

आशना: मुझे सुबह वाली अधूरी बात जाननी है.

वीरेंदर ने उसे हर वो वाक़या बता दिया जो वो जानता था और आशना ने भी जब उसे हर उस बात से अवगत करवाया जो उसे मालूम थी तो उनके रौगते खड़े हो चुके थे. वो बिहारी और बीना की चाल समझ चुके थे.

आशना के पूछने पर वीरेंदर ने बताया कि जिस रात उसने आशना के डॉक्युमेंट्स, सिमकार्ड और मेमोरी कार्ड्स बिहारी की अलमारी से निकाले थे उस रात उसने वो मेमोरी कार्ड्स अपने लॅपटॉप पर प्ले करके देखे थे.

आशना को जब यह पता चला कि बिहारी के बीना के साथ संबंध थे और फिर बिहारी ने रागिनी के साथ मनाई सुहागरात भी रेकॉर्ड कर रखी थी तो उसे बिहारी से घिंन आने लगी. कोई इंसान अपनी पत्नी के साथ ऐसा कैसे कर सकता है. आशना की हैरानी की कोई सीमा ना रही जब वीरेंदर ने उसे बताया कि रागिनी ने आशना की ड्रेस पहन कर आशना का रॉल्प्ले करके बिहारी के साथ सेक्स किया था तो आशना ने वीरेंदर को कस कर जकड लिया. वो थर थर काँपने लगी. वीरेंदर ने उसे आश्वस्त किया कि उसके होते कोई उसे हाथ भी नहीं लगा सकता.

सबसे चौंका देने वाली बात जो वीरेंदर ने आशना को बताई वो यह थी कि एक मूवी मे बीना-बिहारी सेक्स करते हुए आशना की पॅंटीस की बात कर रहे थे.

वीरेंदर: उस रात, मैं तुम्हारे कमरे मे आया था और तुम्हे बेसूध पड़ा देखकर तुम्हारी अलमारी से वो पैंटी निकल कर पाउच मे डाल कर दोबारा उसे बिहारी की अलमारी मे रख दिया था ताकि बिहारी जब भी यह पाउच खोले तो उसके दिल मे यह डर बैठ जाए कि उसकी चोरी पकड़ी जा चुकी है. इस बात से वो यह तो जान लेता कि उसके प्लान का भंडा फुट चुका है और उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं बचा जिस से वो तुमपर कोई दबाव डाल सकता. ऐसी सिचुयेशन पर वो मुझ पर सामने से वार करता और. बिहारी आवेश मे आकर कोई कदम उठाता है तो या तो वो कोई ग़लती करता या चुप-चाप घर छोड़ कर भाग जाता.

इतना सब जान लेने के बाद आशना का सर घूमने लगा.

आशना- वो पैंटी तो मैने इस लिए संभाल रखी थी क्यूंकी मुँझे लगा कि आप मेरे कमरे मे आते थे और आपने मेरी पॅंटीस.........

आशना खामोश हो गयी.

सारी बात वीरेंदर और आशना के सामने सॉफ हो चुकी थी लेकिन अभी बिहारी के गिरेबान मे हाथ डालना मतलब अपने रिश्ते की सच्चाई को दुनिया के सामने नंगा करना हो जाता.

वीरेंदर: अब हमे उसे उसकी हे चाल से मॅट देनी है.

आशना: मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा वीरेंदर. बिहारी तो आस्तीन का साँप निकला. वो कब से तुम्हारे जिस्म मे ज़हर घोल रहा था और हमे इस बात की भनक भी नहीं हुई.

वीरेंदर: तुम उसकी चिंता मत करो, मैं सब संभाल लूँगा. बस मेरे साथ बने रहना क्यूंकी तुम्हारे साथ और हॉंसले के बिना मैं कुछ नहीं कर पाउन्गा. इस वक्त हमारे लिए सबसे ज़रूरी बीना के ऐक्सीडेंट के सच का पता लगाना है और साथ ही साथ रागिनी का विश्वास जीतना.

आशना: आपको क्या लगता है कि बीना का सच मे कत्ल हुआ है?

वीरेंदर: लगता नहीं बल्कि पूरा यकीन है. मेरा एक डीटेक्टिव दोस्त है. इस केस मे मैं उस से मदद ले रहा हूँ.

आशना: लेकिन वीरेंदर अगर आपके उस डीटेक्टिव दोस्त को हमारी सच्चाई का पता चल गया तो?

वीरेंदर: तुम बस देखती जाओ कि मैं क्या करता हूँ. अब जो भी करूँगा मैं करूँगा और बिहारी अपने ही बनाए हुए जाल मे फँस जाएगा. सबसे पहले हमे रागिनी को बिहारी के चंगुल से छुड़ाना होगा और उसे अपने साथ मिलना होगा. आख़िर बिहारी उसका भी तो गुनहगार है और हम से ज़्यादा गहरा सदमा तो उसे लगा होगा बिहारी की सच्चाई जानकर.

आशना: लेकिन रागिनी तो अपने घर गयी हुई है तो फिर वो बिहारी के चंगुल मे कैसे......?.

वीरेंदर आशना की तरफ देख कर मुस्कुराया और बोला: तुम्हे अभी भी बिहारी की बात पर यकीन है?

आशना: क्या मतलब?

वीरेंदर: रागिनी कहीं नहीं गयी बल्कि बिहारी ने उसे घर मे ही क़ैद कर रखा है.

आशना हैरानी से बिहारी की तरफ देखने लगी.

वीरेंदर: रागिनी को बिहारी ने सर्वेंट्स क्वॉर्टर मे बाँध रखा है. यह बात तो मुझे उसी वक्त पता चल चुकी थी जिस वक्त बिहारी ने हम से झूठ बोला था कि रागिनी अपने घर चली गयी है लेकिन उस वक्त मैं आवेश मे आकर कोई भी कदम उठाता तो पछताने के सिवा कुछ नहीं मिलता. बिहारी ताव मे आकर हमारे रिश्ते को दुनिया वालों के सामने उच्छालने से बाज़ नहीं आता और फिर हमे ज़िंदगी भर मुँह छुपाये फिरना पड़ता.

जिस रात मुझे बिहारी के कारनामो का पता चला, उसके अगले दिन से ही डीटेक्टिव एजेन्सी का एक आदमी 24 घंटे बिहारी पर नज़र रखे हुए है. वो लगातार मेरे कॉंटॅक्ट मे है और पल पल की जानकारी मुझे दे रहा है.

आशना, वीरेंदर से लिपट गयी.

आशना: वीरेंदर मुझे बहुत डर लग रहा है. पता नहीं इस मुसीबत से हम कैसे निकल पाएँगे? बिहारी के खिलाफ सारे सबूत होते हुए भी हम उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते.

वीरेंदर: उन सबूतो को सामने लाने से पहले हमे बिहारी के दिमाग़ से कुछ सबूत मिटाने होंगे.

आशना ने चौंक कर वीरेंदर की आँखों मे देखा.

वीरेंदर: कुछ मत सोचो बस देखती जाओ अपने वीर का कमाल.

मूवी ख़तम होते ही दोनो घर के लिए निकल पड़े. रात के लिए हल्का सा डिन्नर पॅक करवा कर वो घर पहुँचे.

 
mini wrote: bihari se badla lene se pahle uske neeche aana padega.......jab bo apne man ki kar lega,tab badla le sakte ho
 


शाम के 7:30 बज रहे थे. सूरज अपनी लालिमा बिखेरते हुए यमुना मे समा रहा था.टेरेस पर खड़े आशना और वीरेंदर हल्की हल्की ठंडी हवा का लुफ्त ले रहे थे. इस दौरान वीरेंदर के सेल पर मेसेजस लगातार जारी थे. वीरेंदर मेसेज पढ़कर सेल फिर से पॉकेट मे डाल देता.

आशना: आख़िर यह है कॉन जो आपको बार बार डिस्टर्ब कर रही है?

वीरेंदर ने आशना की तरफ स्माइल करते हुए देखा और बोला: एक ही तो लड़की है मेरी ज़िंदगी मे जिसे पूरा हक है मुझे डिस्टर्ब करने का. उसके अलावा किसी और को इसकी पार्मिशन नहीं.

आशना: तो फिर यह बार बार आपको मेसेज कॉन कर रहा है?

वीरेंदर: वोही आदमी जो बिहारी की हरकतों पर नज़र रखे हुए है.

वो मुझे हर सिचुयेशन की खबर दे रहा है.

आशना: तो इस वक्त रागिनी का क्या हाल है?

वीरेंदर: अभी कुछ देर पहले बिहारी उसके कमरे मे खाना लेकर गया है.

आशना(खुशी से): तो इसका मतलब रागिनी ठीक है और बिहारी ने उसके साथ कुछ बुरा नहीं किया.

वीरेंदर: हो सकता है लेकिन मुझे तो इस बात की हैरानी है कि इतना सब होने के बाद भी रागिनी चुप क्यूँ है और अगर चुप ही है तो फिर बिहारी ने उसे वहाँ क्यूँ छुपा रखा है? कुछ तो गड़बड़ है.

वीरेंदर का तर्क सुनकर, आशना भी कन्फ्यूज़्ड हो गयी. रागिनी ने उनके साथ जो भी किया हो लेकिन आशना ईश्वर से यही प्रार्थना कर रही थी कि वो सुरक्षित हो.

आशना: अब हमारा पहला कदम क्या होगा? मेरा मतलब के हम वापिस अपने घर कब जाएँगे?

वीरेंदर ने आशना की तरफ देखा और फिर स्माइल करते हुए उसे गले से लगा लिया.

वीरेंदर: अपने घर तो तुम्हे ले ही जाउन्गा पर पहले हनिमून तो पूरा मना लूँ.

यह कहकर वीरेंदर ने आशना को कंधे पर उठा लिया और टेरेस से नीचे आने लगा. आशना, वीरेंदर के कंधे पर पड़ी छूटने की भरसक कोशिश कर रही थी मगर वो इस मे सफल ना हो सकी. रूम मे लाकर वीरेंदर ने आशना को बिस्तर पर लिटा दिया.

आशना: वीर, टाइम तो देखो क्या हो रहा है? आप अपने अरमान डिन्नर के बाद पुर कर लीजिएगा. अभी प्लीज़ छोड़ दीजिए.

वीरेंदर: इस वक्त जो जिस्म की भूख है पहले उसे तो शांत कर लूँ, पेट की भूख तो बाद मे भी ठंडी हो सकती है. वैसे भी हमारी साली साहिबा ने स्पेशल हिदायत दी थी कि खाली पैट प्यार करने से उन्माद ज़्यादा आता है. चलो आज साली साहिबा की बात पर अमल करके देख ही लेते हैं.

आशना: आप उसकी बातों मे कहाँ आ गये. वो तो है ही ऐसी. सेक्स से रिलेटेड तो उस से कोई भी टिप्स ले लो. वो तो जो मन मे आ जाए कह देती है, आप उसकी बात मत सुनो.

वीरेंदर: अब एक ही तो साली दी है भगवान ने, भला उसकी हिदायत को नज़र-अंदाज़ कैसे कर सकता हूँ.

आशना: बीवी भी तो एक ही है. इतना सताओगे तो कहीं आपसे डर के भाग ना जाए.

वीरेंदर: तभी तो उसे अपने साथ कनेक्ट करके रख रहा हूँ कि उसे भागने का मोका ना मिले.

यह कहकर वीरेंदर आशना पर चढ़ गया. कुछ ही पलों मे फर्श पर कपड़ों का ढेर लग गया था. कमरे मे मदहोश वातावरण अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया था. इस बार वीरेंदर ने बिना किसी औपचारिकता के अपने लिंग को आशना की योनि पर रखा और दबाव बढ़ाते हुए उसमे सामने लगा.

वीरेंदर ने हैरानी से आशना की तरफ देखा और बोला: होंठों पर तो ना ही रहती है लेकिन अपने वीर के लिए तैयार हरदम रहती हो.

आशना ने शरमा कर आँखें बंद कर ली और वीरेंदर के इर्द-गिर्द अपनी बाहें कस ली.

आशना: आपको क्या लगता है, मेरे सीने मे हनिमून को लेकर कोई उमंग नहीं है.

आशना मे समा जाने के बाद वीरेंदर ने आशना को कुछ वक्त दिया और फिर दोनो मिलकर चल पड़े सेक्स के समुंदर मे गोते लगाने. तूफान काफ़ी देर तक चला और इस बीच आशना ना जाने कितनी बार एक किनारे से दूसरे छोर तक पहुँची. आख़िरकार वीरेंदर ने अपने प्यार की बूँदो से उसके तपते सेहरा को सींचा और फिर उसे बाहों मे लेकर उन पलों की सुनहरी याद मे खो गया.

डिन्नर के बाद एक बार फिर से प्यार का एक दौर शुरू हुआ. आशना की योनि की टीस उसे और ना मथने की दुहाई देती रही मगर वीरेंदर की छुअन से वो फिर से पागल हो जाती और एक बार फिर से वो नयी उमंग के साथ वीरेंदर के सहयोग मे जुट जाती. सारी रात एक दूसरे की नींद चुराने के बाद अगले दिन वो दोपहर के दो बजे तक सोते रहे. उठते ही प्यार का एक दौर और हुआ और फिर फ्रेश होकर आशना ने खाने के लिए कुछ बना दिया.

जब तक आशना किचन मे काम मे लगी थी तब तक वीरेंदर ने कुछ ज़रूरी फोन कॉल्स कर ली और आगे के बारे मे सोचते हुए बिहारी से किस तरह निपटना है उसके लिए एक छोटा सा प्लान भी बना लिया. पेट की भूख शांत करने के बाद जिस्म की भूख शांत करने का एक और दौर हुआ और उसके बाद वीरेंदर ने आशना को अपने प्लान की रूप रेखा समझाई. हालाँकि प्लान मे काफ़ी दिक्कतें थी लेकिन बहुत जल्द कुछ ना तो कुछ तो करना ही था.

इस प्लान से बिहारी को अपने किए की सज़ा भी मिलती और आशना-वीरेंदर की सच्चाई को भी दुनिया के सामने लाने से बचाया जा सकता था. उस शाम उन दोनो ने बिहारी की अलमारी से मिले मेमोरी कार्ड्स मे जो कुछ क़ैद था उसे बड़ी बारीकी से देखा. हर मेमोरी कार्ड मे दफ़न मूवी बिहारी और बीना की रास-लीला की गवाही दे रही थी. हर मूवी मे उन दोनो के बीच वीरेंदर की प्रॉपर्टी को हथियाने का प्लान बनता और फिर उस पर अमल करने के लिए एक नयी साज़िश रची जाती. यह सबूत काफ़ी थे बिहारी को जैल तक पहुँचाने के लिए लेकिन आशना और वीरेंदर के लिए सबसे ज़रूरी अपने बीच बने रिश्ते को दुनिया की नज़रों से बचाना था.

 


देर शाम को शुरू हुआ मूवी देखने का सिलसिला अगले दिन दोपहर तक चला. हर एक मूवी को बार-बार देख कर वो उसमें से ज़रूरी बातें नोट करते रहे. दोपहर तक सारा प्लान फाइनल हो चुका था.

अब सबसे ज़रूरी था इस प्लान का आगाज़ करना. होटेल मे लंच करने के बाद वीरेंदर और आशना अपने शोरुम गये और वहाँ से कुछ ज़रूरी अपने साथ लेकर फिर से नोएडा मे अपने हनिमून सूट मे आ गये. आशना, वीरेंदर के काम करने के तरीके और तेज़ दिमाग़ से काफ़ी इंप्रेस हुई थी. उसे वीरेंदर द्वारा बनाए हुए प्लान के सफल होने की पूरी उम्मीद थी. वीरेंदर का यह रूप उसने पहले कभी नहीं देखा था. इस वक्त वीरेंदर बिल्कुल एक डीटेक्टिव की तरह सोच रहा था और उसे अमल मे लाने के लिए काफ़ी मेहनत कर रहा था.

आशना भी उसका बखूबी साथ निभा रही थी. आख़िर दोनो को ज़िंदगी भर साथ रहने के लिए इस वक्त साथ होना बहुत ज़रूरी था. शाम को यमुना नदी के किनारे बैठ कर उन्होने आने वाले दिनो के हसीन ख्वाब देखे और फिर वहीं से अपने प्लान पर अमल करना शुरू कर दिया.

सबसे पहले वीरेंदर ने अपने डीटेक्टिव दोस्त को फोन करके इस मामले को यहीं पर ख़तम करने के लिए कह दिया और उस से यह वादा लिया कि फ्यूचर मे कोई प्राब्लम होगी तो वो उसकी हेल्प करेगा. उसके बाद घर आकर हल्का सा डिन्नर करके वीरेंदर और आशना निकल पड़े प्लान के पहले फेज़ के लिए जो के बहुत ही अहम था.

अगली सुबह, वीरेंदर और आशना ऑफीस चले गये और फिर दोपहर को वापिस "शरमा निवास" मे आ गये.

आशना-वीरेंदर को देखकर बिहारी की साँस अटक गयी.

बिहारी(चेहरे पर झूठी खुशी लाते हुए): मालिक आप तो एक हफ्ते के लिए गये थे तो फिर अचानक से इतनी जल्दी वापिस कैसे आ गये? सब कुशल मंगल तो है?

वीरेंदर(चेहरे पर दुख भरे भाव लाते हुए): काका, ग़लती कर ली इसे वहाँ ले जाकर. वीरेंदर ने आशना की तरफ इशारा करते हुए कहा.

बिहारी ने आशना की तरफ देखा. आशना के चेहरे को देखकर बिहारी को भी थोड़ा अजीब लगा. कहाँ वो खिला हुआ चेहरा और अब तो ऐसा लग रहा था कि इस लड़की में जान ही नहीं है. चेहरा काफ़ी उतरा हुआ था, जैसे काफ़ी दिन से बीमार हो.

बिहारी: क्या हुआ मालकिन, आप ठीक तो हैं.

आशना ने बिहारी की तरफ देखा और बोली: वो....वो यहाँ भी आएगी. नहीं छोड़ेगी वो, वो मेरा पीछा करते हुए यहाँ भी आएगी.

आशना की हालत देख कर बिहारी चौंक गया. बिहारी ने वीरेंदर की तरफ सवालिया नज़रों से देखा.

वीरेंदर: काका पता नहीं कुछ दिनो से इसे क्या हो गया है. जब से हम यहाँ से गये हैं यह खोई खोई सी रहने लगी है. अजीब अजीब सी बातें करती है. अब पिछले दो दिन से इसे यह वहम हो गया है कि डॉक्टर. बीना की आत्मा वापिस आ गयी है.

इतना सुनते ही बिहारी के पैरों से ज़मीन खिसक गयी.

बिहारी: क,क्या ....ये...यह कैसे हो सकता है?

वीरेंदर: यही बात तो मैं इसे समझा रहा हूँ कि यह सब फिल्मों में होता है, असल ज़िंदगी में ऐसा नहीं होता. इतना पढ़ने-लिखने के बाद भी अंधविश्वाश ने इसे जकड रखा है. देल्ही जैसे बड़े शहर मे रहकर डॉक्टर की पढ़ाई करने वाली लड़की इन सब बातों मे कैसे विश्वास कर सकती है.

बिहारी की आँखों मे खोफ़ सॉफ देखा जा सकता था.

वीरेंदर: काका, आप रागिनी को फोन करके जल्दी बुला लीजिए. अब रात को रागिनी इसके पास ही सोया करेगी. इसे तो अकेले सोने मे भी डर लगता है.

बिहारी को एक और झटका लगा.

बिहारी: ल..... ले..... लेकिन रागिनी का तो अभी तक कोई पता नहीं चला. जब से गयी है, उसने कोई फोन भी नहीं किया. उसका फोन भी स्विचऑफ आ रहा है.

वीरेंदर: पता नहीं यह लड़की कहाँ चली गयी.

काका: आपने अपने गाँव में ही किसी से फोन पर बात करके पूछना था कि वो वहाँ पहुँची भी है या नहीं.

बिहारी की आँखो मे डर बढ़ता ही जा रहा था.

 


बिहारी: मैने गाँव मे अपने एक दोस्त को फोन करके पूछा था मालिक, लेकिन वो वहाँ पहुँची ही नहीं.

वीरेंदर: तो कहाँ गयी होगी वो?

बिहारी: हो सकता है मालिक वो यहाँ से निकल कर कहीं और चली गयी हो. जवान लड़की है, किसी के प्यार मे पड़कर यहाँ से भाग निकलने के लिए उसने मुझसे झूठ बोला होगा.

वीरेंदर: अगर ऐसे हुआ तो आप उसके घर वालो को क्या जवाब देंगे काका?

बिहारी: भला इसमे मैं क्या कर सकता हूँ मालिक. उसकी ही मर्ज़ी नहीं थी इस घर मे रहने की तो मैं उसे ज़बरदस्ती यहाँ कैसे रख सकता था.

वीरेंदर- ह्म्म्म्म , लेकिन मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा. अचानक से जैसे हमारे घर को किसी की नज़र लग गयी हो.

बिहारी खामोश रहा.

वीरेंदर, आशना को उसके रूम मे ले गया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया. नीचे आकर वीरेंदर ने बिहारी को एक की चैन दिया.

वीरेंदर: काका इस ट्रिप पर आपके लिए कुछ ख़ास तो नहीं ला सका. यह एक की चैन ही लाया हूँ आपके लिए, आप घर की ज़रूरी चाबियाँ इसी की-चैन मे पिरो लीजिए, आपको काफ़ी परेशानी होती होगी सभी चाबियों को संभाल कर रखने मे.

बिहारी ने वीरेंदर से की चैन ले लिया और मन मे सोचने लगा: अब तो बहुत जल्द घर की तिजोरिओं की सारी चाबियाँ ही इस की चैन मे डालूँगा.

वीरेंदर ने बिहारी को आशना का ध्यान रखने को कहा और खुद ऑफीस जाने के लिए निकल गया. वीरेंदर के जाते ही उसकी साँस मे साँस आई.

बिहारी: चिंता मत कर वीरेंदर तेरे इस बेशक़ीमती छल्ले मे तो मैं घर की बेशक़ीमती तिजोरियों की चाबियाँ ही रखूँगा, बस जल्दी से आशना का वेहम दूर हो जाए और तुम दोनो एक दूसरे के इतने करीब आ जाओ कि दुनिया के सामने जब तुम्हारा सच आए तो तुम्हे मुँह दिखाने की जगह भी ना मिले. सोचा था कि काम हो जाने के बाद रागिनी को रानी बना कर रखूँगा और आशना को अपनी रखैल बनाकर लेकिन रागिनी की किस्मत मे तो कुछ और ही लिखा था शायद. अब तो बहुत जल्द ही उसे मारना होगा. अफ़सोस तो बहुत होगा उसे मारने का. तुम्हारी दौलत के लिए पहले बीना की और अब रागिनी की बलि चढ़ती है तो चढ़ जाने दो, आख़िर आशना तो बच ही जाएगी मेरी प्यास भुजाने के लिए. कसम से एक बार उसे चोद कर जन्नत का नज़ारा तो ज़रूर करूँगा.

बिहारी: आज तो रागिनी को खाना खिलाने की भी ज़रूरत नहीं, आख़िर साली को आज रात मारना जो है.

ऑफीस का काम ख़तम करके वीरेंदर शाम को थोड़ा देर से घर पहुँचा. बिहारी ने उसे बताया कि आशना सारा दिन अपने कमरे में आराम करती रही और उसने कुछ खाया भी नहीं.

वीरेंदर जब आशना के रूम मे पहुँचा तो उसे देख कर आशना उठकर बैठ गयी. वीरेंदर ने दरवाज़ा बंद किया और आशना की तरफ देख कर मुस्कुराया.

वीरेंदर: तुम तो कमाल की आक्ट्रेस हो यार. उसे अभी तक हम पर कोई शक नहीं हुआ. अच्छा है इसी बहाने आज तुमने सारा दिन रेस्ट किया, आख़िर रात को तो जागना ही है.

आशना ने शरमा कर नज़रें झुका ली और वीरेंदर की तरफ देख कर बोली: मुझे नहीं लगता कि, बिहारी पर इस बात का कोई भी असर पड़ा है कि मुझे बीना का भूत दिखाई दिया.

वीरेंदर: क्यूंकी बिहारी ने उसे खुद मारा है बस उस मर्डर को एक ऐक्सीडेंट का रूप दे दिया.

आशना: क्या, क्या कह रहे हैं आप? इस बात का तो हमारे पास कोई सबूत नहीं है कि बीना का मर्डर हुआ है.

वीरेंदर: सब समझा दूँगा डार्लिंग, रात को ज़रा गहरा तो लेने दो. बस बिहारी को सब काम निपटा लेने दो. बीना के ना सही लेकिन उसके भूत तो आज ज़रूर नाचेंगे.

आशना: मुझे बहुत भूख लगी है वीरेंदर. आपके कहने पर मैने बीमार होने का नाटक तो कर लिया लेकिन भूख के मारे जान निकल रही है.

वीरेंदर ने अपना बॅग खोला और आशना को खाने का पॅकेट थमा दिया.

वीरेंदर: जब तक तुम कुछ खा लो तब तक मैं फ्रेश होकर आता हूँ.

वीरेंदर के जाते ही आशना ने डोर लॉक कर दिया. वीरेंदर फ्रेश हो चुका था और बिहारी ने उसे चाइ भी पिला दी थी. वीरेंदर ने बिहारी को खाने के लिए मना कर दिया था. वीरेंदर जानता था कि आशना उसके बिना खाना नहीं खाएगी.

बिहारी ने सोच रखा था कि आज की रात आशना और वीरेंदर को खाने मे नींद की दवाई मिला कर खिला देगा ताकि वो निसचिंत होकर रागिनी को ठिकाने लगा सके लेकिन वीरेंदर ने उसके इस मंसूबे पर पानी फेर दिया.

बिहारी ने खाना खाया और किचन की सफाई करके अपने रूम मे चल दिया.

वीरेंदर ने आशना के रूम मे जाकर आशना के साथ डिन्नर किया और फिर वीरेंदर ने आशना को एक हेडफोन दिया कान से लगाने के लिए.

आशना: यह क्या है वीर?

वीरेंदर ने आशना के कान मे हेडफोन लगाया और अपनी जेब से एक ट्रांसमीटर निकाल कर उसका बटन ऑन कर दिया.

आशना वीरेंदर की तरफ हैरानी से देखने लगी. वीरेंदर ने आशना को खामोश रहने का इशारा किया और उसे ध्यान से सब सुनने के लिए कहा.जैसे जैसे आशना सुनती रही उसकी आँखें हैरानी से खुलती चली गयी.

सारी रेकॉर्डिंग सुनकर, आशना ने हेडफोन कान से निकाला और वीरेंदर की तरफ हैरानी से देखने लगी: छी कितना कमीना इंसान है यह वीर. मेरे बारे मे कितना गंदा सोचता है यह. इसे तो मैं अपने हाथों से मारूँगी.

वीरेंदर मुस्कुराया और आशना की तरफ देख कर बोला: इसमें उस बेचारे का भी कोई दोष नहीं, तुम हो ही इतनी खूबसूरत कि तुम्हे जो भी देखेगा, कम से कम एक बार छुने के लिए तो तडपेगा ही.

वीरेंदर की बात सुनकर आशना ने वीरेंदर की तरफ गुस्से से देखा और उसे मारने के लिए दौड़ी.

वीरेंदर ने उसे पकड़ कर अपने से चिपका लिया और बोला: चिंता मत करो गुड़िया, तुम्हारा यह वीर हर उस हाथ को काट देगा जो तुम्हे छुने के लिए उठेगा.

आशना ने भी वीरेंदर को कस कर जकड लिया और बोली: वीर मुझे बहुत डर लग रहा है. यह तो बहुत खरनाक आदमी है. बीना को इसी ने मारा है और अब रागिनी को भी मारने वाला है. तभी आशना को जैसे कुछ याद आया हो.

आशना: वीर लेकिन आपने यह रेकॉर्डिंग कब की?

वीरेंदर: तुम्हे याद है जब हम नोएडा से वापिस आने के लिए निकले थे, मैं एक शॉप पर रुका था.

आशना: हाँ लेकिन.......

वीरेंदर: पूरी बात तो सुनो जानेमन, सब समझ आ जाएगा.

उस शॉप से मैने एक की चैन लिया.

आशना: लेकिन की चैन का इस रेकॉर्डिंग से क्या संबंध है?

वीरेंदर: यार तुम सवाल बहुत करती हो. सुनो तो सही.

उस के चैन के अंदर मैने एक पॉवेरफ़ुल्ल माइक्रोफोन फिट कर दिया है और यह ट्रांसमीटर (अपने हाथ मे पकड़े ट्रांसमीटर की तरफ इशारा करते हुए) इस के चैन क आस पास हो रही सारी बातें रेकॉर्ड कर एक चिप में स्टोर कर देता है. मैने वो की चैन बिहारी को गिफ्ट कर दिया था. जिस कारण उसकी अपने आप से की हुई बातें इस में रेकॉर्ड हो गयी.

 
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