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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete



आशना: मैं रोक नहीं पाउन्गी अपने आप को वीर, मैं पागल हो जाउन्गी.

वीरेंदर: मत रोको अपने आप को आज गुड़िया. सब बंधन खोल दो, आज मिलन की रात है. आज कोई रुसवा नहीं होगा.

यह कह कर वीरेंदर ने फिर से अपनी जीभ को मखमली जोड़ से भिड़ा दिया. इस बार आशना ने अपने हाथ वीरेंदर के बालों में फिरा कर सहलाना शुरू कर दिया. आशना की मौन स्वीकृति पाकर वीरेंदर ने अपने हाथ आशना की जाँघो मे नीचे की तरफ से पिरोकार जाँघो की डोरी को बढ़ाने का प्रयास किया. आधे अधूरे मन से आशना की संगमरमरी जांघे खुलने लगी.

वीरेंदर ने अपने शरीर को उठाकर आशना की टाँगों के लिए जगह बनाई और खुद उकड़ू होकर उसकी जाँघो के बीच बैठ गया.

आशना की मांसल जांघों के बीच बैठते ही उसे जो नज़ारा देखने को मिला उस से उसकी उत्तेजना मे एक वहशिपन आ गया. वीरेंदर ने बिना पलक झपकाए अपने होंठ उन बंद गुलाबी होंठों से चिपका दिए. वीरेंदर के होंठो का स्पर्श अपनी योनि के होंठो पर महसूस करते ही आशना की टाँगें हवा में उठ गयी और घुटनों के बल दोहरी होकर वीरेंदर के लिए उपर जगह बना दी.

वीरेंदर ने मयखाने से एक बार अपने होंठ जो लगाए तो वो साँस लेना ही भूल गया और वहीं आशना भी साँसों की प्रक्रिया को जैसे भूल ही चुकी थी. उसकी आँखें बाहर आने को उबल रही थी. उसके चहरे से छलकता असीम आनंद उसे एक अलग ही नूरानी रूप प्रदान कर रहा था.

आशना के हाथ कभी वीरेंदर के बालों को भींचते तो कभी बेडशीट को कस कर जकड लेते, कभी उसके हाथ खुद ब खुद अपने उभारों को कस लेते तो कभी वो तकिये को भींच कर अपनी व्याकुलता कम करने की कोशिश करती.

आख़िर आशना जैसी गुड़िया इस तूफान को कब तक बाँधे रखती. बाँध टूटा और अपने साथ साथ ना जाने कितने ही जज़्बात बहा ले गया. वीरेंदर ने अपने अथाह प्रेम का प्रमाण देते हुए आशना की योनि से छलकते अमृत को बिना रुके पीना शुरू कर दिया. ना जाने कब तक जाम छलकता रहा और कब तक वीरेंदर अपनी प्यास भुजाता रहा.

आख़िर कार सुहाग सेज पर आया प्यार का तूफान थमा और आशना की कमर धडाम से बेड पर गिर पड़ी जिस से अनायास ही वीरेंदर के होंठो का संपर्क अमृत कलश से टूटा. आशना की टाँगो के बीच से निकल कर वीरेंदर उसकी बगल में लेट गया और ज़ोर ज़ोर से हाँफने लगा. आशना की स्थिति भी कोई बहुत अच्छी नहीं थी. उसके शरीर में जान ही नहीं बची थी. वीरेंदर ने जैसे उसके जिस्म से सारी जान चूस चूस कर ही निकाल दी थी.

साँसों को नियंत्रित करके आशना वीरेंदर की तरफ पलटी और अपना कोमल हाथ वीरेंदर के चेहरे पर फिराने लगी. वीरेंदर ने आशना की आँखो मे देखा. आशना की आँखो में संतुष्टि के भाव देख कर वीरेंदर के दिल को परमानंद की अनुभूति हुई.

वीरेंदर के गाल को सहलाते हुए आशना धीरे से बोली: थॅंक्स वीर.

वीरेंदर ने आशना की आँखो में देखा और बोला "इट्स ऑल माइ प्लेषर गुड़िया". वैसे एक बात पूछूँ??

आशना ने आँखों से मौन स्वकृति दी.

वीरेंदर: यार तुम्हारे नीचे के होंठ भी एकदम पिंक हैं, क्या लगाती हो वहाँ पर??

वीरेंदर का सवाल सुनकर आशना एक दम शरमा कर सिकुड गयी.

वीरेंदर: बताओ ना??

आशना ने अपना हाथ वीरेंदर के चेहरे से फिराते हुए मर्दाना छाती की तरफ बढ़ा दिया और धीरे धीरे उसकी कमर तक ले गयी. वीरेंदर के बदन में करेंट दौड़ना शुरू हो गया.

वीरेंदर: अयाया, बताओ ना गुड़िया.

आशना ने काँपते हाथों से वीरेंदर के लिंग को पकड़ लिया और धीरे से उसके कान में बोली: यकीन मानिए इस प्यारे से खिलोने के सिवा कभी किसी चीज़ को वहाँ लगाने की कल्पना भी नहीं की मैने भैया. मेरे यह होंठ आपके इस खिलोने की ताक में गुलाबी हुए बैठे हैं भैया. मेरे पाक जिस्म को आज अपने पाक अंग से पवित्र कर दीजिए और मुझे एक ऐसा दाग दे दीजिए जिसकी कल्पना मैने हर उस पल की है जब भी आप मेरे पास से गुज़रे हो.

आशना के कोमल हाथ में आकर वीरेंदर का लिंग फूला नहीं समा रहा था. वो जान चुका था कि मंज़िल करीब है. हर रास्ते को पार करने की मंशा लिए हुए वीरेंदर का लिंग बिल्कुल सीधा खड़ा हुआ छत को घूर रहा था.

आशना: बोलिए ना भैया, यह मेरे लिए ही तैयार खड़ा है ना???

बताइए क्या मेरा जिस्म इस काबिल है कि आपके पौरुष को जागृत कर सके??

 


क्या आप भी हमारे संगम की अपने दिल मे इतनी ही लालसा रखते हैं जितनी कि मेरे दिल में है???

क्या आप भी मुझे बाहों मे भर कर टूट कर प्यार करना चाहते हैं????

क्या आप भी मुझे वो मीठा सा दर्द देना चाहते हैं जिसकी कल्पना मैं कयि बार आपको ज़हन में लेकर कर चुकी हूँ????

क्या आप भी अपने ज़हन में मुझे निर्वस्त्र कर चुके हैं????

आशना के सवालों का सिलसिला शायद ही कभी ख़तम होता अगर वीरेंदर ने अपने होंठ उसके होंठो पर रखे ना होते. आशना के होंठो का एक ज़ोरदार चुंबन लेकर वीरेंदर बेड से उठा.

आशना: क्या हुआ????

वीरेंदर: तुम्हारे सवालों का जवाब लेने जा रहा हूँ.

वॉशरूम में जाकर वीरेंदर वहाँ से एक टवल उठा लाया. आशना हैरानी से कभी वीरेंदर को तो कभी वीरेंदर के हाथ में टवल को देख रही थी.

आशना के मन में उमड़ रहे सवाल को पढ़ते हुए वीरेंदर बोला: बहुत जाम छलकाया है तुम्हारे गुलाबी होंठों ने. सोच रहा हूँ इन्हे पोंछ कर सॉफ कर दूं ताकि तुम्हारे सवालों का जवाब देते हुए कहीं फिसल ना जाउ.

वीरेंदर की बात का मतलब समझते हुए आशना उठकर बिस्तर पर घुटने मोड़ कर बैठ गयी. नग्न अवस्था में आने के बाद पहली बार दोनो प्रेमी एक दूसरे को इतनी दूर से देख रहे थे.

{ यकीन मानिए अपने साथी के साथ नग्न अवस्था में लिपटने में इतनी शरम महसूस नहीं होती जितनी कि एक दूसरे को दूर से देखने में होती है }

आशना के चेहरे के बदलते रंग को देख कर वीरेंदर बोला: एक तो भगवान ने मुझे सनम बहुत ही शर्मिला दिया है.

आशना ने शरमा कर नज़रें झुका ली और बोली: आप तो यही चाहते हैं कि मैं भी आपकी तरह पक्की बेशरम बन जाउ.

वीरेंदर: लो जी अब हम पक्के बेशरम हो गये. या अल्लाह आज की रात और क्या क्या सुनना पड़ेगा हमे अपनी बेगम साहिबा से.

आशना(हंसते हुए): ठीक ही तो कह रही हूँ, ज़रा देखिए अपने इस नाग को कैसे उछल उछल कर हवा में लहरा रहा है.

वीरेंदर: तो अब क्या इतने हॉट "माल" के आगे भी यह दुबक कर पड़ा रहे.

आशना ने शरमा कर वीरेंदर की तरफ देखा और बोली: कब से इसे लहरा लहरा कर इस "माल" का जी ललचा रहे हो कम से कम इसे टवल से तो ढक दीजिए ताकि मेरी बेकरारी को विराम मिल सके.

वीरेंदर के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ जाती है. आशना के पास पहुँच कर वो टवल को बेड पर रखता है और अपनी कमर को आगे की तरफ मोड़ कर अपने लिंग को आशना के करीब करके कहता है: लो पकड़ लो इसे और अपने दिल की तड़प को मिटा लो.

आशना के हाथ अनायास ही अपने चेहरे पर चले जाते हैं.

वीरेंदर: आए हाए, कोशिश तो बहुत कर रही हो लेकिन बेशर्मी में मेरा कोई तोड़ नहीं.

आशना(चेहरे पर रखे हाथों की उंगलियों को आँखों पर से खोलते हुए): आप इसे छुपा कर ही रखिए वीर, कहीं इसे मेरी ही नज़र ना लग जाए.

वीरेंदर: अरे नज़र का डर तो तुम जैसी हासेनाओं को रहता है, इस नाग को तो भगवान ने पहले ही काले रंग में रंगा है, भला इसे किसी की नज़र का क्या डर.

आशना ने अपने हाथ अपने चेहरे से हटा लिए और अपने घुटनों के पास लपेट लिए.

आशना: उई माँ, मैं तो बहुत हल्का फील कर रही हूँ और नींद भी मस्त आ रही है अब तो. मैं तो लगी सोने.

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए): सो जाओ, तुम भी क्या याद करोगी, तुम्हारे वीर ने सोते सोते ही तुम्हे कली से फूल बना दिया. वैसे सोचा जाए तो बड़ी अनोखी सुहागरात होगी हमारी.

आशना: सुहाग रात??? इसे आप सुहाग रात कहते हैं??? पिछले एक-डेढ़ घंटे से आपके सामने एक दम निर्वस्त्र बैठी हूँ और आप हैं कि छेड़खानी के अलावा कोई काम ही नहीं. (वीरेंदर के लिंग की तरफ इशारा करते हुए) आपको दर्द नहीं होता क्या वहाँ????

वीरेंदर: अरे, इसे इस रूप मे लेकर तो कयि रातें काट चुका हूँ मैं, अब तो इसकी आदत सी हो गयी है. मुझे तो टेन्षन हो जाती है जिस दिन यह मुँह लटकाए बैठा होता है.

तभी आशना के ज़हन में बॅंगलॉर में डॉक्टर. की कही हुई बात आ गयी. एक पल के लिए तो उसके मुँह से वो बात निकल ही गयी थी लेकिन उसकी बेकरारी ने उसके होंठ सिल दिए.

वीरेंदर: क्या हुआ जानेमन, कहाँ खो गयी?? क्या यह तो नहीं सोच रही कि मैं आगे बढ़ने से डर रहा हूँ.

आशना: अब आप चाहे डरो या चाहे कुछ भी सोचो, मैं तो आपकी बाहों मे ही सुकून पाना चाहती हूँ.

वीरेंदर: सीधे सीधे बोला ना.

आशना का चेहरा शरम से लाल हो उठा.

आशना(धीरे से): क्या???

वीरेंदर: यही कि तुम क्या चाहती हो???

आशना: मैं तो बस आपको ही चाहती हूँ.

वीरेंदर: तो लो फिर खुला पड़ा हूँ तुम्हारे सामने, चाह लो जितना चाहना है.

आशना की नज़रें झुक गयी.

वीरेंदर: सॉफ सॉफ बोलो यार, क्या इरादा है??? मुझे और भी काम हैं.

आशना: जैसे?????

वीरेंदर: उसकी लिस्ट मैं तुम्हे बाद में दूँगा, अभी तो एक खास मुद्दे पर बात हो रही है.

आशना(गर्दन हिलाते हुए): मुद्दा, तो मुद्दा क्या है आपका?

वीरेंदर: क्या तुम बता सकती हो कि हम इस वक्त इस कमरे में एक दूसरे के सामने एकदम नंगे क्यूँ खड़े हैं.

आशना के चेहरे की लाली ने इसका जवाब दे दिया लेकिन वीरेंदर अभी उसे और चिडाना चाहता था.

वीरेंदर: कम ऑन, बी क्विक बेब.

आशना: मुझे क्या पता, मेरे कपड़े तो आप ने ही निकाले हैं.

वीरेंदर: ओह तेरी!!! यह मैने क्या कर दिया.

आशना खिलखिलाकर हंस दी. वीरेंदर उसे हंसते हुए देखने लगा. आशना ने जब देखा कि वीरेंदर प्यार भरी नज़रों से उसे देख रहा है तो उसकी हँसी एक दम बंद हो गयी और चेहरे पर एक बार फिर से शरम के भाव आ गये.

वीरेंदर: चलो तुमसे नहीं बोला जाता तो मैं ही बोल देता हूँ.

वीरेंदर( बेड पर आशना के पास बैठते हुए): हम दोनो यहाँ इस कमरे में एक दम नंगे होकर एक खेल खेलने वाले हैं.

आशना ने सवालिया नज़रों से वीरेंदर की तरफ देखा.

वीरेंदर: आज की रात मैं तुम्हे गुड़िया से आशना बनाने जा रहा हूँ. कल से दुनिया की नज़रों में गुड़िया का वजूद ही ख़तम हो जाएगा लेकिन मुझे हर रात अपने बिस्तर पर आशना के साथ साथ गुड़िया भी चाहिए.

वीरेंदर की बात सुनकर आशना की आँखें छलक आई. भरी आवाज़ में आशना बोली: मेरे साथ आपकी हर रात सुहागरात होगी भैया और आपकी यह गुड़िया हमेशा आपके आगे बिछ जाएगी. आप इसे चाहे आशना समझ कर भोगिए या गुड़िया बनाकर लेकिन मेरे दिल मैं आप हमेशा एक देवता के रूप में रहेंगे.

आपके साथ बिताए हर एक पल को दिल में बसा कर आपको इतना प्यार दूँगी कि आपको दोनो में से कभी किसी की भी कमी नहीं खलेगी. इतना सुनते ही वीरेंदर ने आशना को गले से लगा लिया और उसकी भी आँखें छलक आई. आज 12 साल बाद वीरेंदर की आँखो में नमी आई थी. अपने परिवार के गम में वो इतने आँसू बहा चुका था कि पूरे 12 साल लग गये उसे अपने आँसुओं के भंडार को भरने में.

 


आशना ने वीरेंदर की आँख से निकले मोती को जैसे ही अपने कंधे पर महसूस किया, उसके अंतर्मन से एक हूक उठी. इस से पहले के कोई भाव आशना पर हावी होता, आशना ने बेड पर पड़ा टवल उठाकर वीरेंदर के हाथ मे देते हुए कहा: यह लीजिए.

वीरेंदर ने एक बार आशना को कस कर गले लगाया और फिर आशना से पीछे हटते हुए उसकी आँखो मे देख कर बोला: यह टवल आँसू पोछने के लिए नहीं लाया हूँ मैं.

आशना ने सवालिया नज़रों से वीरेंदर की तरफ देखा और फिर जैसे ही उसे वीरेंदर की मनोदशा का आभास हुआ उसने शरमा कर धीरे से स्वीकृति मे गर्दन हिलाई और आँखें बंद करके बिस्तर पर पीठ के बल लेट गयी. वीरेंदर भी आशना की बगल मे लेट गया और टवल को उठाकर आशना की जाँघो के जोड़ मे रखकर आशना की नमी को सोखने लगा.

आशना(एकदम आँखें खोलते हुए): आउच.

वीरेंदर: क्या हुआ????

आशना(शिकायती लहज़े मे): टवल बहुत खुरदुरा है???

वीरेंदर: टवल तो मुलायम ही है लेकिन लगता है वो जगह कुछ ज़्यादा ही सिल्की टच लिए हुए है.

आशना की आँखें मुस्कुराते हुए फिर से बंद हो गयी. टवल को बेड की एक तरफ रख कर वीरेंदर उठा और आशना के सामने आकर बेड पर खड़ा हो गया. आशना ने शरमा कर एक नज़र वीरेंदर की तरफ देखा और फिर आँखों मे डर के भाव लिए उसके विकराल लिंग की तरफ़ देखा. वीरेंदर मुस्कुराते हुए अपनी टाँगो को मोड़ कर घुटनो के बल बैठने लगा. स्वीकृत भाव दिल मे लिए धीरे धीरे आशना की जाँघो की दूरी बढ़ती गयी और वीरेंदर के लिए जन्नत के द्वार खुल गया. वीरेंदर इस वक्त आशना की टाँगो के बीच घुटनों के बल बैठा हुआ था.

आशना के नूरानी चेहरे पर शरम और डर के मिले जुले भाव आ रहे थे. जहाँ शरम से उसका चेहरा लाल सुर्ख हो चुका था वहीं डर के मारे उसकी आँखें एक दम कस कर बंद हो चुकी थी. वीरेंदर ने धीरे से आशना की जाँघो के जोड़ मे अंदरूनी हिस्से को छुआ तो आशना ने अपने हाथों से कमर के पास बेड शीट को कस कर पकड़ लिया.

वीरेंदर: गुड़िया.

आशना (धीरे से मदहोश आवाज़ मे): जी.

वीरेंदर: खोलो ना.

आशना ने झट से आँखें खोल कर वीरेंदर को देखा और उसे हैरानी से देखते हुए धीरे से पूछा: क्या???

वीरेंदर: बस अब ठीक है, आँखें खोलने के लिए ही बोल रहा था.

आशना के होंठो पर मुस्कान आ गयी.

आशना(शरमाते हुए): आँखे क्यूँ खुलवाई आपने.

वीरेंदर: मैं चाहता हूँ कि जब मैं तुम्हे अपनी बनाने के लिए आगे बढ़ूँ तो तुम्हारी आँखो मे अपने लिए "निस्चल प्रेम" देख सकूँ.

आशना ने इस बार बिना आँखे झुकाए वीरेंदर की तरफ मुस्कुरा कर देखा और बोली: आज की रात तो आपके लिए सब कुछ दिल से खोलने को बेकरार हूँ वीर.

वीरेंदर(महॉल को नॉर्मल बनाने के लिए): ऐसा क्या???तो चलो फिर डॉगी स्टाइल मे आ जाओ. सबसे पहले उसी को खोलता हूँ जिसने मेरा चैन छीना है.

आशना ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए वीरेंदर की जाँघ पर एक चपत लगाई.

वीरेंदर: अरे तुमने ही तो कहा था कि सब कुछ खुलवाने के लिए तैयार हो.

आशना बस शरमा दी.

वीरेंदर ने बिना देर किए आशना की मखमली मांसल टाँगो को उठाकर कर अपनी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिया. आशना के दिल की धड़कन एकदम तेज़ हो गयी.

आशना(सहमी हुई): भैया, प्लीज़ आहिस्ता कीजिएगा.

वीरेंदर के पूरे बदन में एक सिहरन सी दौड़ गयी. उसके लिंग मे और भी कड़ा पं आ गया जब उसने देखा कि उसकी आँखों के सामने उसकी गुड़िया एक दम निर्वस्त्र अवस्था मे अपने दिल मे अपने भाई के प्रति समर्पण भाव लिए अपना सब कुछ खोले हुए उसे आगे बढ़ने को उत्साहित कर रही थी.

वीरेंदर(रोमांचित होते हुए): डॉन'ट वरी, तुम्हे थोड़ा भी दर्द नहीं होगा.

आशना हैरानी से वीरेंदर की तरफ देखती है.

वीरेंदर(चेहरे पर गंभीरता लाते हुए): स्स्सोररी, म्म्मेतरा मतलब है कि , आइ आइ मीन टू से कि तुम्हे दर्द तो होगा लेकिन होश मे आने के बाद. जब तक बेहोश रहोगी तब तक तुम्हे कुछ भी फील नहीं होगा.

वीरेंदर ने अपनी बात पूरी करने की गरज से बिना कुछ सोचे समझे यह कह दिया. उसे पता ही नहीं लगा कि उसके मुँह से क्या निकल गया.

आशना ने अपनी आँखो को बड़ा करके वीरेंदर की तरफ रोते अंदाज़ मे देखा और बोली: मुझे हिम्मत देने की बजाए आप और भी डरा रहे हो.

वीरेंदर(अपने आप को संभालते हुए): कम ऑन गुड़िया, यू आर आ बिग गर्ल नाउ. आइ नो यू कॅन टेक मी ऑल अप टू दा हिल्ट इन वन गो. यू हॅव टू गुड़िया, यू हॅव टू. आइ कॅन'ट रेज़िस्ट नाउ. यू आर सच आ टीज़ इन ऑल दीज़ डेज़. अब मैं तुम्हारे अंदर समा जाना चाहता हूँ. तुम्हारे हर अंग को अपने हाथ से अपने होंठो से और अपने इस खिलोने (अपने लिंग की तरफ इशारा करते हुए) से प्यार करना चाहता हूँ गुड़िया.

आशना(हैरानी से एक दम चीखते हुए): क्या????? इन वन गो????नो भैया, आइ वॉंट टू फील यू इंच बाइ इंच, नो नीड टू हरी. मैं खुद भी अब बर्दाश्त करने की हालत मे नहीं हूँ मगर डरती हूँ आपके इस जानवर से. आइ लव टू टेक इट अप टू दा हिल्ट बट प्लीज़ बी जेंटल, आइ आम ऑल युवर्ज़.

टेक माइ चर्री आस स्लोली ऐज पासिबल, आइ वॉंट टू सवौर दा मोमेंट फॉर होल ऑफ माइ लाइफ. मुझे गुड़िया से आशना बनने की प्रक्रिया को खूब एंजाय करना है भैया.(यह बात पूरी करते करते आशना की आवाज़ मे मदहोशी बढ़ चुकी थी)

वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के होंठो को चूमा और बोला: डॉन'ट वरी, युवर वीर ईज़ हियर टू प्रोटेक्ट यू आंड टू केर ऑफ ऑल यू वॉंट..

यह कह कर वीरेंदर ने अपने लिंग को अपने हाथ से डाइरेक्षन देकर आशना की योनि के मुँह पर रखा. आशना की योनि की गर्माहट पाकर वीरेंदर के जिस्म मे प्रवाहित लहू उसके लिंग में एकत्रित होने लगा. वीरेंदर के गरम सुपाडे को अपनी योनि के मुख पर महसूस करते हे आशना के दिल को भी ठंडक पहुँची और उसके दिल-ओ- दिमाग़ से दर्द के बादल एक दम छाँट गये.

वीरेंदर ने हल्का सा धक्का लगाया तो आशना एक दम चिहुन्कि और वीरेंदर का लिंग नीचे की तरफ खिसक गया. आशना की साँसें तेज़ चल रही थी. वीरेंदर की साँसों के शोर से ऐसा लग रहा था कि जैसे वो बहुत दूर से भाग कर आया हो. वीरेंदर ने अपने हाथ से एक बार फिर से अपने अस्त्र को निशाने पर रखा लेकिन इस बार का बार भी चूक गया.

आशना, वीरेंदर की आँखों में बढ़ रही हवस को देख कर व्याकुल हो उठी थी. वो वीरेंदर को जल्द से जल्द इस तपिश से मुक्त करवाना चाहती थी. आख़िर उसके जिस्म मे बढ़ रही ज्वाला भी चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी. प्यार के भूखे दो नग्न जिस्म एक दूसरे से अपने जिस्म को ठंडक पहुँचाने के लिए प्रयासरत थे मगर यह विलंब उनकी बेकरारी को बढ़ा रहा था. तीसरी बार के असफल प्रयास के बाद तो वीरेंदर खीज उठा.

वीरेंदर: यार बहुत टाइट हो तुम, अंदर जा ही नहीं रहा. मैं तो थक गया हूँ.

आशना ने झट से अपना एक हाथ नीचे लेजाते हुए वीरेंदर के सुलगते लिंग को पकड़ लिया. आशना का नरम कोमल हाथ अपने लिंग पर महसूस करते ही वीरेंदर के जिस्म मे एक बार फिर से उत्तेजना हावी हुई. आशना ने वीरेंदर के लिंग को अपनी योनि से सटा कर आँखों के इशारे से आगे बढ़ने को कहा. वीरेंदर ने आशना की जाँघो को पकड़ कर धक्का लगाया लेकिन नतीजा इस बार भी वही. वीरेंदर के लिंग का सुपाडा आशना की तंग दरार मे समा ही नहीं पा रहा था.

वीरेंदर का लिंग फिसल कर एक बार फिर से आशना के नितंभो की दरार से जा टकराया.

वीरेंदर ने खीजते हुए कहा: यार तुम्हारी गान्ड है ही इतनी मस्त कि मेरे लंड को अपनी तरफ बार बार खींच रही है.

वीरेंदर के मुँह से इस प्रकार के शब्द सुनकर आशना को ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उसके शरीर से सेक्स का ज्वालामुखी फूट पड़ा हो.

आशना(उत्तेजना की चरम सीमा पर): अया वीर, आपको जो पसंद है ले लीजिए. मैं आपकी हूँ, आपका हक़ है मेरे जिस्म के हर हिस्से पर.

वीरेंदर ने भी सॉफ महसूस किया कि आशना उसकी बात से और भी ज़्यादा गरम हो उठी है. आशना ने झट से वीरेंदर के लिंग को पकड़ा और एक बार फिर से अपनी योनि पर दबा दिया. वीरेंदर ने सॉफ महसूस किया कि आशना की योनि से आग दहक रही है.वीरेंदर के लिंग को अपनी योनि पर सेट करके इस बार आशना ने आँखो की बजाए होंठो का सहारा लिया.

आशना : आ जाइए भैया, समा जाइए अपनी गुड़िया के अंदर.

वीरेंदर ने इस बार धक्का लगाया तो वीरेंदर का सुपाडा कुछ हद तक अंदर जाकर फिर से फिसल गया.

आशना(वीरेंदर की तरफ देख कर): मेरे दर्द की परवाह मत कीजिए भैया, इसी दर्द के लिए ही तो मैं तड़प रही हूँ. अब यह दूरी बर्दाश्त नहीं कर पाएगी आपकी यह गुड़िया वीर. मैं चाहे चीखू-चिल्लाऊ, चाहे छटपटाऊ लेकिन आप रुकिएगा मत. यकीन मानिए आपका दिया हुआ यह दर्द मुझे एक ऐसी जन्नत मे ले जाएगा कि मैं ज़िंदगी भर के लिए आपकी कायल हो जाउन्गी. मैं आपके हर दर्द को बाँट लूँगी भैया बस अपनी गुड़िया को यह दर्द दे दीजिए.

इस बार जैसे ही आशना ने वीरेंदर के लिंग को पकड़ना चाहा, वीरेंदर ने आशना के हाथ से अपना लिंग छुड़ाया और बिना कुछ बोले उसे आशना की योनि पर सेट कर दिया. आशना साँस रोके आने वाले पल के लिए दिल-ओ-जान से तैयार थी. वीरेंदर के इस रौद्र रूप को देख कर उसकी आँखें चमक उठी थी.

सच ही तो है हर लड़की बिस्तर पर अपने पति का यही रौद्र रूप ही तो चाहती है.

वीरेंदर ने अपने लिंग को आशना की योनि से सटा कर अपनी कमर पर दबाव बना कर एक करारा धक्का मारा तो गुड़िया के गले से एक ज़ोरदार चीख निकली. इस से पहले कि उसकी चीख कमरे से बाहर जाकर कहीं गुम हो जाती, वीर ने अपने होंठ गुड़िया के होंठो पर रख दिए. गुड़िया की चीख वीर के गले मे ही घुट कर रह गयी. वीर का सारा सुपाडा करीब करीब 1.5" तक गुड़िया मे समा चुका था. गुड़िया के हाथ बिस्तर मे धन्से हुए थे.

गुड़िया दर्द से बहाल हो चुकी थी. वीर को पीछे धकेलने की लाख कोशिशों के बावजूद उसे सफलता नहीं मिली. वीर ने उसकी कमर को कस कर बेड से दबा रखा था जिस कारण गुड़िया हिल भी नहीं पा रही थी.

 
वो कुछ पल ऐसे होते हैं जिन्हे सहन करना हर लड़की के जीवन का एक खास हिस्सा होते हैं. उन कुछ पलों मे वो अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दर्द झेलती है. इस दर्द के लिए वो अपनी जवानी मे तड़पती रहती है और जब वो पल आता है तो उस दर्द मे लिप्त वो अपने साथी की ज़िंदगी की ना जाने कितनी दुआएँ माँग लेती है.

जैसे ही गुड़िया के बदन मे थरथराहट कम हुई, वीर ने अपने हाथ झट से गुड़िया के उभारों पर रख दिए और उन्हे मसल्ने लगा. कुछ देर बाद गुड़िया की कमर मे हुई हलचल को भाँप कर वीर ने गुड़िया के निपल्स को अपने होंठो मे ले लिया और उसे जीभ से चुभलने लगा.

वीरेंदर की इस हरकत से आशना की योनि मे नमी आने लगी और आशना के दर्द मे कुछ राहत हुई. वीरेंदर ने मोका देखते हुए अपनी कमर का दबाव बढ़ाया, करीब आधा इंच ही लिंग और अंदर गया था कि आशना ने वीरेंदर की कमर पर अपने हाथ रखकर उसे रुकने का इशारा किया. आशना: अयाया, ब्बबाअस्स्स भैया, होल्ड ओन्न्णाणन्.

वीरेंदर एक दम रुक गया और अपने चेहरे को उठाकर आशना के चेहरे की तरफ देखने लगा. आशना के चेहरे पर आए पीड़ा के भाव देखकर वीरेंदर ने उसके गाल को चूम लिया. आशना की आँखो की नमी उसके गालों तक आ चुकी थी. वीरेंदर ने बारी बारी दोनो गालों को चूमा और पूछा बहुत दर्द हो रहा है.

आशना ने अपनी आँखें छत की तरफ कर रखी थी. वीरेंदर की तरफ बिना देखे ही उसने गर्दन हिलाकर हां मे जवाब दिया.

वीरेंदर: निकल लू.

आशना ने इस बार कस कर अपनी बाहें वीरेंदर की कमर से बाँध ली.

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए): अच्छा छोड़ो, बाकी का जो बचा है वो भी तो डालने दो.

इस बार आशना बोली(सूखे गले से): इस पॉइंट से ठीक आगे आपके लिए एक गिफ्ट है भैया और यह गिफ्ट मैं आपको इस लिए दे रही हूँ क्यूंकी मैं आपसे हद से ज़्यादा प्यार करती हूँ और आपके बिना जी नहीं पाउन्गी. ले लेजिए अपना गिफ्ट और अपनी गुड़िया को अपनी आशना बना लीजिए.

वीरेंदर ने अपने वज़न को अपनी कोहनियों और घुटनों पर रखा और आशना की आँखो मे देखा. इस वक्त आशना की नज़रें वीरेंदर के चेहरे पर थी. वो अपने देवता के चेहरे पर अपने तोहफे की खुशी देखना चाहती थी.

वीरेंदर ने कमर को थोड़ा पीछे ले जाते हुए एक ज़ोरदार प्रहार किया और वीरेंदर का ख़ूँख़ार लिंग आशना की योनि के नाज़ुक पर्दे को चीरता हुआ आधे से ज़्यादा उसमें समा गया. प्रहार होते ही आशना की रूह से एक ठंडक भरी आह निकली और उसके गले से एक ज़ोरदार चीख जो इस बात के प्रमाण के लिए काफ़ी थी कि गुड़िया ने अपना कोमार्य अपने भैया को प्रदान कर दिया है.

इस बार की चीख इतनी ख़तरनाक थी कि उसकी आवाज़ सारे घर मे गूँज उठी. वीरेंदर ने इस बार उसे चीखने से नहीं रोका बल्कि एक और ज़ोरदार प्रहार कर डाला. इस बार के धक्के से आशना की साँस ही अटक गयी और साथ ही उसकी चीख भी गले मे ही दब गयी. एक और धक्के के साथ वीरेंदर जड तक आशना की योनि मे समा चुका था. आशना की योनि के निचले भाग से जैसे ही वीरेंदर के आंडों का जादुई चुंबन हुआ उसके दिल से एक हुंकार निकली और उसकी साँसों की गति एक बार फिर से सुचारू रूप से चलने लगी. आशना की आँखो से मोती झर झर कर बह रहे थे और उसके गले से घुटि घुटि चीखें निकलने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया. वीरेंदर ने आशना की चीखों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया. वो जानता था कि चारो दिशाओ मे उनके प्रेम मिलन का कोई गवाह नहीं है.

वीरेंदर ने अपने होंठ आशना के उभारों पर रख दिए और उसके निपल्स को मुँह मे लेकर एक छोटे बच्चे की तरह चूसने लगा. आशना तड़प उठी, उसके हाथ अनायास ही वीरेंदर की पीठ पर अपने नाख़ून गढ़ाने लगे. वीरेंदर पागलों की तरह आशना के शिखरों से दूध निकालने की असफल कोशिश करता रहा और आशना पागलों की तरह उसकी पीठ नोचती रही.

बिस्तर पर पड़ी बेडशीट खून के रिसाव सेलाल रंग मे रंगने लगी और दो प्रेमियों के मिलन की गवाही देने लगी. कुछ देर बाद आशना के हाथ सिथिल पड़ गये और उसकी आँखों मे छलकती पीड़ा एक खुमारी का रूप लेने लगी. आशना की कमर मे एक हलचल हुई तो वीरेंदर ने चेहरा उठा कर आशना की तरफ देखा. आशना के चेहरे पर आए नूवर को देख कर वीरेंदर अपनी मर्दानगी पर फूला नहीं समा रहा था.

आशना की आँखो मे आई खुमारी को देख कर वीरेंदर ने अपनी कमर को थोड़ा पीछे करके एक झटका दिया तो आशना का मुँह "ओह" करते हुए खुल गया. वीरेंदर ने एक बार फिर से कमर चलाई तो इस बार आशना के मुँह से "आह" निकला. आशना की आँखो मे देखते हुए वीरेंदर ने पूछा: अब ठीक हो???

आशना ने हां मे गर्दन हिलाई.

वीरेंदर: दर्द तो नहीं है अब??

आशना ने हां मे सिर हिलाया और धीरे से होंठ खोल कर कहा:थोड़ा थोड़ा है.

वीरेंदर: तो क्या उठ जाऊ???

आशना ने शरमा कर "ना" मे गर्दन हिलाई. वीरेंदर ने एक बार फिर से कमर हिलाई तो जवाब मे आशना की कमर मे भी हरकत हुई.

वीरेंदर(आशना की आँखो मे देखते हुए): अब क्या करूँ??

आशना की आँखें शरम से बंद हो गयी पर होंठ मुस्कुरा उठे.

वीरेंदर: अब तो बोलो यार, आइ हॅव टू सम एक्सपेक्टेशन्स फ्रॉम यू.

आशना ने धीरे से आँखें खोली और अपनी कमर को हिलाकर बोली: फक मी वीर, फक युवर गुड़िया.

वीरेंदर के पूरे शरीर मे बिजली का संचार हुआ और उसके चेहरे से खुशी झलक उठी. वीरेंदर के चेहरे पर आई नूरानी खुशी को देख कर आशना भी उत्साहित हुई और बोली: फक मी ऐज यू लाइक माइ वीर, माइ जान, माइ हब्बी आंड ऐबव ऑल माइ भैया. युवर गुड़िया ईज़ लॉंगिंग फॉर युवर स्ट्रोक्स. मेक देम हार्ड आंड फास्ट फॉर मी. आइ वॉंट टू मेल्ट इन युवर आर्म्स माइ लव.

आशना की मदहोश बातें सुनकर वीरेंदर ने अपनी कमर को धीरे धीरे चलाना शुरू कर दिया. हर धक्के के साथ आशना की दर्द भरी आह निकल जाती. धीरे धीरे आशना की दर्द भरी आहें सुकून भरी आह उफ्फ मे बदलने लगी. आशना की कमर मे भी गति आने लगी. आशना की खुमारी बढ़ते ही उसके मुँह से वीरेंदर को उत्साहित करने के लिए शब्दों की भरमार निकलने लगी. वीरेंदर ने आशना की खुमारी को देख कर तेज़ी से कमर चलाना शुरू कर दिया.

बिस्तर पर तूफान धीरे धीरे उग्र रूप ले रहा था.जिस्मों के टकराने का मधुर संगीत कमरे मे गूँज रहा था.ठप तह्प की आवाज़ के साथ आशना के गले से बीच बीच मे निकलती घुटि घुटि चीखे इस संगीत को और भी मधुर बना रही थी.

तूफान शुरू हुआ तो अंजाम तक भी पहुँचा. आशना की टाँगे वीरेंदर की कमर से इस कदर लिपटी कि जैसे वो उसमे समा जाना चाहती हो. आशना का जिस्म जैसे ही आकड़ा ठीक उसी वक्त वीरेंदर की बेकरारी भी सैलाब तोड़ती हुई अपनी मंज़िल की ओर बढ़ चली. दो नदियों का संगम समुंदर मे होना शुरू हो गया. संगम इतना कामुक और प्यारा था कि आशना के जिस्म की हर नदी छलक गयी और समुंदर मे आकर मिलने लगी.

समुंदर के भरते ही सैलाब महासागर तक पहुँचा और आशना की वीरान कोख के महासागर मे एक बार फिर से सन्गमित रस एकत्रित होने लगा. सैलाब इस कदर उफानित था कि उसके छींटे दोनो अपने जिस्म के बाहर भी महसूस कर रहे थे. काफ़ी देर तक नदियाँ बहती रही और जैसे ही बिस्तर पर आया "निस्चल प्रेम" का तूफान थमा, आशना और वीरेंदर का एक जिस्म स्थिल होकर बिस्तर पर सुषुप्त अवस्था मे गिर पड़ा.

पसीने से लथपथ दो बदन एक दूसरे से लिपट कर अपने अपने चरमसुख को भोग रहे थे. इस वक्त वीरेंदर की विशाल देह आशना की नाज़ुक देह को पूरी तरह से अपने आगोश मे लिए हुए थी. अगर आशना की टाँगे वीरेंदर की कमर से लिपटी ना होती तो उसे वीरेंदर के नीचे ढूँढ पाना बहुत मुश्किल होता. उसका सारा जिस्म वीरेंदर के नीचे दबा पड़ा था.

रह रह कर वीरेंदर के नितंबों मे कंपन हो रही थी और वो अपने वीर्य की हर बूँद आशना की प्यासी कोख मे उतार रहा था. जैसे ही वीरेंदर के नितंबों मे सिकुड़न होती, आशना के जिस्म मे एक कंपन उजागर होती और गरम वीर्य का एहसास उसके कोमल बदन को झिकजोड देता.

साँसों की गति थमते ही आशना ने वीरेंदर के चेहरे को अपने हाथों मे लेकर चूमना शुरू कर दिया. प्रेमावेश मे आकर आशना ने वीरेंदर के गाल को काट लिया. वीरेंदर की भी तंद्रा टूटी.

वीरेंदर: सस्स्स्स्सिईईईई, जंगली बिल्ली कहीं की.

आशना ने उसकी बात को अनसुना करते हुए उसे चूमना जारी रखा.. वीरेंदर ने आशना का साथ देने के लिए अपनी कोहनियों के बल होकर अपने चेहरे को उठाया. आशना बंद आँखो से वीरेंदर को लगातार चूमे जा रही थी. वीरेंदर की नज़र आशना के दमकते चेहरे पर पड़ी तो उसे यकीन ही नही हुआ कि यह उसकी गुड़िया है जिसे उसने अभी कुछ देर पहले ही आशना मे परिवर्तित किया है.

आशना का चेहरा किसी अद्वितीए तेज सा चमक रहा था. आशना के गुलाबी चेहरे पर इस वक्त जो सुकून था वोही सुकून वीरेंदर अपने दिल मे महसूस कर रहा था. कुछ वक्त तक आशना की हरकतों मे उसका साथ देते हुए वीरेंदर ने कोई हरकत नहीं की और फिर धीरे से आशना को पुकारा.

वीरेंदर: आशना.

आशना ने सर हिलाकर उस से सवाल किया.

वीरेंदर(बड़ी आत्मीयता से): अपनी आँखें खोलो ना गुड़िया.

आशना ने शरमा कर ना मे गर्दन हिलाई.

वीरेंदर: मैं तुम्हारी आँखो मे सुकून देखना चाहता हूँ गुड़िया. तुम्हारी आँखों मे देखता हूँ तो एक अलग ही खुशी मिलती है मुझे.

आशना( गुड़िया से आशना बनने के बाद पहली बार बोलते हुए): आआहह, वीर, आइ लव यू, आइ लव यू और यह कहते ही आशना ने एक बार फिर से वीरेंदर के चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी.

वीरेंदर: खुश हो ना????

आशना ने होंठ खिल उठे.

आशना ने आँखें खोली और शरमाते हुए बोली: "मेरी आँखो मे झाँक कर खुद ही देख लीजिए".

आशना की आँखो की चमक देख कर वीरेंदर के पूरे शरीर मे खुशी की एक अजब सी लहर दौड़ गयी. आशना की आँखे ऐसे मुस्कुरा रही थी जैसे उसे दुनिया की सबसे नायाब चीज़ मिल गयी हो.

वीरेंदर: आइ आम सो हॅपी फॉर अस गुड़िया.

आशना: मी टू भैया. वैसे आपको गिफ्ट कैसा लगा????

वीरेंदर( आशना की आँखों मे देखते हुए): माइंडब्लोयिंग और बहुत ही प्यारा गिफ्ट था तुम्हारा. बहुत मज़ा आया मुझे उसका रपर फाड़ने मे. लेकिन दुख है कि अब दोबारा उसे फाड़ नहीं पाउन्गा. यह बात वीरेंदर ने शरारती मुस्कान के साथ कही.

 


आशना ने शरमा कर वीरेंदर की छाती मैं चेहरा छुपा लिया और बोली: काश ऐसा हो सकता भैया तो मैं हर दिन आप को अपना एक नया गिफ्ट देती.

वीरेंदर: डॉन'ट वरी, अभी एक और गिफ्ट है तुम्हारे पास.

वीरेंदर का इशारा समझते ही आशना के चेहरे पर एक बार फिर से गुलाबी पन आ गया. वीरेंदर ने नीचे झुक कर आशना के निपल्स को अपने मुँह में ले लिया.

आशना:आअहह, क्या कर रहे हो?? क्यूँ तंग कर रहे हो अपनी गुड़िया को????

वीरेंदर: अभी दिल ही नहीं भरा तो क्या करूँ????यह कह कर वीरेंदर ने अपने लिंग (जो कि अभी तक आशना की योनि मे ही था) को अंदर की तरफ दबा दिया.

आशना की आँखें हैरानी से खुल गयी.

आशना: ओह माइ गॉड, यह तो अभी भी वैसा का वैसा ही है. इसे तो कोई फरक ही नहीं पड़ा.

वीरेंदर: इसे इतने दिन बाद अपनी प्रेमिका मिली है, यह तो इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा.

आशना: अपनी प्रेमिका का क्या हश्र किया है इसने, यह जानता भी है???

वीरेंदर: यह सब तो एक ना एक दिन तो होना हे था मेरी जान. सच पूछो तो तुम्हारे साथ कुछ ज़्यादा ही मज़ा आया. एक अलग ही रोमांच फील हुआ तुम्हारे साथ. ऐसे लगा कि जैसे कोई कोई............

आशना: मेरी भी फीलिंग्स कुछ ऐसी ही हैं वीर. मैं बयान नहीं कर पा रही हूँ इस सुख को, इस एहसास को. दिल करता है कि बस हम दोनो रहे और बाकी दुनिया में कोई ना हो.

वीरेंदर: सच गुड़िया.

आशना ने गर्दन हां में हिलाते हुए कहा: जी भैया.

वीरेंदर ने अपनी कमर को थोड़ा सा झटका दिया.

आशना: आआहह, वीर बहुत दर्द हो रहा है अभी.

वीरेंदर: रपर भी फट चुका है और एक दूसरे के गिफ्ट का मज़ा भी लूट चुके हैं तो अब कैसा दर्द????

आशना: पता नहीं लेकिन एक दर्द की लकीर अभी भी उमड़ रही है.

वीरेंदर: कहाँ???

आशना ने शरमा कर नज़रें झुका ली.

वीरेंदर: बोलो ना यार.

आशना ने अपना काँपता हुआ हाथ अपने और वीर की टाँगो के बीच मिलन वाली जगह रखा और बोली: यहाँ.

वीरेंदर: इंजेक्षन लगा दिया है कुछ देर मे दर्द दूर हो जाएगा.

आशना ने अपने हाथ को वीरेंदर की पीठ पर धीरे से दे मारा.

आशना: यह इंजेक्षन इलाज का नहीं है जानू यह तो आपने अब एक ऐसा रोग लगा दिया है कि इस इंजेक्षन के बिना एक पल भी गवारा ना होगा.

वीरेंदर ने अपनी कमर को झटका दिया और बोला: तो चलो एक डोस और ले लो शायद कुछ आराम आ जाए.

आशना: अया, धीरे वीर. अभी भी थोड़ा सा दर्द बाकी है. प्लीज़ धीरे धीरे से यह दर्द भी ख़तम कर दीजिए.

यह कह कर आशना की नज़र जैसे ही अपने हाथ पर पड़ी(जिसे अभी कुछ देर पहले उसने अपनी योनि के पास लगाया था), आशना की आँखें फटी की फटी रह गयी. आशना की आँखों मे डर के भाव देख कर वीरेंदर ने तुरंत उस से पूछा: क्या हुआ गुड़िया????

आशना ने बिना कुछ कहे अपनी खून से सनी उंगलियाँ वीरेंदर की आँखों का आगे कर दी. एक पल के लिए तो वीरेंदर भी घबरा गया लेकिन जैसे ही उसे इस बात का अंदाज़ा हुआ कि यह खून कहाँ से निकला है, वो मुस्कुरा कर बोला: एकदम परफ़ेक्ट गिफ्ट था तुम्हारा.

आशना: वीर उठो उपर से, पता नहीं कितनी ब्लीडिंग हो चुकी है.

वीरेंदर: घबराओ मत जान, पहली बार में होती है.

आशना: मैं भी जानती हूँ, बच्ची थोड़े ही हूँ. लेकिन इतना खून!!!! पता नहीं क्या हश्र किया होगा आपने मेरी उसका.

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए): अरे यार जब जानती हो कि ब्लीडिंग होती है तो फिर काहे का डर. चिंता मत करो मैं सुबह उसकी सिलाई कर दूँगा लेकिन अभी मुझे मत रोको.

आशना: बेदर्दी कहीं के, मेरी जान निकली जा रही है और इन्हे मज़ाक सूझ रहा है.

वीरेंदर: देखो आशना, तुमने आज तक कभी सुना है कि कोई लड़की अपनी सुहाग रात पर चुदने से दम तोड़ चुकी हो.

वीरेंदर के मुँह से "चुदना" शब्द सुनते ही आशना के बदन मे एक लहर दौड़ गयी और उसकी कमर ने एक झटका खाया.

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए): मैने फील किया है कि तुम्हारे साथ खुलकर बात करने पर तुम्हारी उत्तेजना दौगुनी हो जाती है.

आशना: प्लीज़, ऐसी बातें मत कीजिए मुझे बहुत शरम आती है वीर.

वीरेंदर: लंड लेने में शरम नही आती, बात करने/सुनने में शरम आती है.

आशना के बदन ने एक और झटका खाया. वीरेंदर ने धीरे धीरे कमर चलाना शुरू कर दिया. आशना का दर्द भी खुमारी में बदलने लगा. वीरेंदर ने अपने घुटने आगे करते हुए आशना की कमर के पास रख दिए और खुद घुटनो के बल होकर आशना की जाँघो को पकड़ लिया. इस अवस्था मे वीरेंदर अपने लिंग को आशना की योनि मे चलते हुए देख रहा था.

वीरेंदर ने जब आशना की योनि मे फसे अपने लिंग की तरफ देखा तो एक पल के लिए उसके भी होश उड़ गये. आशना की योनि से सच मे बहुत ही ज़्यादा मात्रा मे खून निकला था. वीरेंदर की नज़रों मे अजीब सा डर देख कर आशना ने भी अपना सर उठाकर अपनी योनि की तरफ देखा तो उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी.

आशना के चेहरे पर आई मुस्कान देख कर वीरेंदर असमंजस में पड़ गया.

वीरेंदर: अजीब लड़की हो यार तुम. जिस बात को लेकर मैं परेशान हूँ, तुम्हे उसमे खुशी हो रही है.

आशना ने वीरेंदर को पास आने का इशारा किया तो वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के उभार पर अपने होंठ रख दिए जिस कारण वीरेंदर का लिंग आशना की योनि मे अंदर तक धँस गया.

आशना : आआहह वीर आआआहह, धीरे. आपने शायद बहुत अंदर तक घुसा दिया है तभी इतनी पेन हो रहा है.

वीरेंदर ने चिंता भरे स्वर मे आशना की तरफ देखा और पूछा: आर यू स्योर, यू आर ओके???

 


आशना ने मुस्कुरा कर वीरेंदर के बालों मे उंगलियाँ फसाई और बोली: मेरे भोले सनम, मैं बिल्कुल ठीक हूँ. आपने तो मेरे अंदर वहाँ तक चोट की है जहाँ तक मेरे अंदर जगह भी नहीं थी. सब ठीक है.

वीरेंदर: एक बात बताओ, तुमने मुझे अपने पास आने को क्यूँ कहा????

आशना: अपना कान लाइए मेरे पास.

वीरेंदर ने आसमंजस्ता मैं अपना दाया कान आशना के होंठों के पास रख दिया.

आशना: वीर, आज मैं बहुत खुश हूँ, आपने मेरे जिस्म को एक ऐसा दाग लगा दिया है कि मेरी आत्मा मेरी रूह बेदाग हो गये हैं. मैं ज़िंदगी भर आपकी आभारी रहूंगी.

वीरेंदर ने उत्तेजित होकर अपने लिंग को आशना के अंदर दबा दिया तो आशना सीत्कार उठी.

आशना: आह धीरे धीरे मेरे निरदयी भैया, कुछ ही दिनो में यहाँ इतनी जगह बन जाएगी कि आप जितना मर्ज़ी दबा दबा कर अपने लिंग को मेरी गहराइयों मे उतार सकते हैं, मैं उफ्फ तक ना करूँगी.

आशना के मुँह से पहली बार "लिंग " शब्द सुनकर वीरेंदर के जोश मे बढ़ोतरी हुई. उसने आशना के उपर से उठ कर आशना की जांघे पकड़ ली और धीरे धीरे अपने लिंग को आगे पीछे करने लगा. एक बार के सखलन से अब उसका लिंग आसानी से अपना रास्ता तय कर रहा था.वीरेंदर खास ध्यान रख रहा था कि वो ज़्यादा गहराई में चोट ना करे जिस से कि आशना को तकलीफ़ हो. आशना वीरेंदर की इस भावना से मन ही मन बहुत खुश हुई और उसने अपने बदन को वीरेंदर के हवाले कर ढीला छोड़ दिया.

वीरेंदर कभी आशना की जाँघो को सहलाता तो कभी उसके उपर गिरकर उसके वक्षों से खलेता और कभी उसके होंठ चूम लेता. आशना के जिस्म को अपने हाथों से सहलाते हुए वीरेंदर उसे उत्तेजना के शिखर तक ले जाता और फिर एक दम अपने हाथों को पीछे खींच कर उसे वापिस धरती पर ले आता. आशना का बदन सखलन के लिए तड़पने लगा. आशना ने अपनी कमर को गति देना शुरू कर दिया. जैसे ही आशना का सखलन करीब आया, उसकी कमर बेड पर ऐसे उछलने लगी जैसे कि वो किसी आलोकिक शक्ति से खुद ब खुद गतिमान हो गयी हो.

सखलित होते हुए आशना ने अपनी टाँगें वीरेंदर की कमर पर कस ली और उसे अपने उपर गिरा लिया. सखलन शुरू होते ही आशना एक बार फिर से अपने आप पर नियंत्रित ना रख सकी और उसके मुँह से निकला: आअहह, वीर, आइ आम कमिंग, आह फक मी, फक मी वीर. अया आइ आम सो क्लोज़, फक मी हार्ड आंड फास्ट. मेक मी कम माइ मॅन, मेक मी कम. आइ बेग यू जस्ट गिव मी रिलीस. आअहह, आआहह ववीरर, आइ आम सो सो स्ससो क्लोशसीईईईईईईईईईईईईईई, अयाया आआआः अया उउुफ़ुुफ्फुफ्फाहहाहाआआआआआआः, वीएर, कम इन मीईईईईई, कम वीर्ररर कूम्म्म्मम. मेक मी युवर वमेन्न्नन्न्न्न वीएरर.प्लीज़ कम इन म्म्म्म मेमएंमेमएंमेम्मीईईईईईई.

करीब 2 मिनट तक चले इस सखलन में आशना कई बार सुख के समुंदर मे गोते लगाकर बाहर आई और कई बार उसमे डूबी. आशना के सखलन की प्रक्रिया करीब 2 मिनट तक चली और इस दौरान वो 5-6 बार चरम सीमा पर पहुँची. इस मल्टी-ऑर्गॅज़म के बाद आशना का शरीर निश्चल पड़ गया. वीरेंदर भी उसपर गिर गया और तेज़ तेज़ साँसें लेने लगा.

आशना को निश्चल पाकर थोड़ी देर बाद वीरेंदर ने अपनी कमर को झटका दिया.

आशना: अयाया वीर बस करो. मैं मर जाउन्गी.

वीरेंदर: ऐसे कैसे बस करूँ, 4 दिन की छुट्टी ली है, वसूल नहीं करूँ क्या???

आशना(मरियल आवाज़ मे): आपने तो एक ही रात मे मेरी यह हालत करे दी है वीर, 4 दिन तो क्या मैं तो 4 मिनट भी अब बर्दाश्त नहीं कर पाउन्गी.

वीरेंदर: तो फिर लगी शर्त.

आशना: कैसी शर्त?????

वीरेंदर: अभी कुछ ही मिनटों मे तुम फिर से ज़ोर ज़ोर से चिल्लाओगी " फक मी वीर, फक मी".

यह सुनकर आशना का चेहरा लाल हो गया.

 


आशना: बड़े बेशरम हैं आप वीर.

वीरेंदर: अब तो आपका यह इल्ज़ाम भी मज़ूर है बेगम साहिबा.

वीरेंदर: तो क्या कहती हो, लगाती हो शर्त???

आशना(शरमाते हुए): शरत मैं क्या माँगोगे???

वीरेंदर: ज़्यादा कुछ नहीं बस यह 4 दिन मेरे कहने पर चलना होगा.

आशना: मैं तो सारी उम्र आपके कहने पर चलना चाहती हूँ वीर, 4 दिन क्या चीज़ हैं.

वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के होंठों को चूमा और फिर अपने होंठ आशना के उभार पर रख दिए. आशना मचल उठी, उसके जिस्म की आग बढ़ने लगी. वीरेंदर ने धीरे धीरे अपनी कमर मे भी हरकत जारी रखी और कुछ ही देर मे आशना एक बार फिर से वीरेंदर को उकसाने लगी. वीरेंदर ने इस बार अपनी गति तेज़ कर दी.

कमरे मे एक बार फिर से तप थप की आवाज़ गूंजने लगी. फॅक फॅक और थप थप की आवाज़ के साथ वीरेंदर और आशना की कामुक आहों का संगीत सारे वातावरण को कामुक बनाए हुए था. इस बार के सखलन से दोनो प्रेमी इस कदर चूर होकर बिस्तर पर गिरे कि दोनो को कुछ होश ही नहीं रहा. एक दूसरे के जिस्म से रस निचोड़ कर उसे एक अलग रूप मे परिवर्तित करके दोनो सुकून से एक दूसरे को जकडे बिस्तर पर गिर पड़े और गिरते ही बिस्तर के मखमली एहसास ने उन्हे अपनी आगोश मे जकड लिया.

आशना की योनि से मिश्रित द्रव्य रिस रिस कर बिस्तर पर एकत्रित होता रहा और प्यार के अटूट बंधन की तरह समय के साथ और भी सख़्त होता चला गया.

प्यार की खुमारी उतरने के बाद जैसे ही आशना के जिस्म का खून सर्द हुआ उसकी नींद खुली. वीरेंदर की मज़बूत बाहों मे अपने आप को पाकर उसके दिल को सुकून आया. आशना को याद आया कि शरीर पर लेने वाली चद्दर को तो उसने आवेश मे आकर दूर उछाल दिया था. अपने मन मे चददर उठाने का विचार लिया वो जैसे ही बिस्तर से उठने को हुई, उसके शरीर मे दर्द की एक तेज़ लहर दौड़ी और अनायास ही उसके मुँह से निकला "वीर".

वीरेंदर ने आशना की दर्द भरी आवाज़ सुनी तो वो झट से उठ कर बैठ गया.

वीरेंदर(बौखलाया हुआ):क्या, क्या हुआ आशना????तुम ठीक तो हो???

वीरेंदर की बौखलाहट देख कर आशना के होंठो पर मुस्कुराहट आ गयी और बोली: इतनी चिंता मत करो जान, मुझे आदत हो जाएगी.

आशना को नार्मल देख कर वीरेंदर बोला: अब इतनी दर्द भरी आवाज़ मे पुकारोगी तो चिंता तो होगी ही ना, वैसे भी एक ही तो बीवी है मेरी.

आशना , वीरेंदर की बात सुनकर मुस्कुरा दी.

आशना: तो एक काम करिए, आपकी एकलौती बीवी को ठंड लग रही है, आप प्लीज़ वो चद्दर उठाकर उसे ओढ़ा देंगे.

वीरेंदर: बस इस काम के लिए मुझे जगा दिया. यार यह काम तो तुम खुद भी कर सकती थी.

आशना ने अपनी योनि की तरफ इशारा करते हुए कहा: इसकी जो हालत की है आपने, मैं तो उठ भी नहीं पा रही हूँ. देखो अभी भी कितना दर्द हो रहा है, मुझे तो लगता है सूजन भी हो गयी है.

एक दम से यह बात कहकर आशना को अपने नग्न होने का एहसास हुआ. आशना का शरीर सिकुड़ने लगा.

वीरेंदर भी उसके असमंजस को भाँप गया.

वीरेंदर: तुमने ही तो कहा था " मैं चाहे चीखू-चिल्लाऊ, चाहे छटपटाऊ लेकिन आप रुकियगा मत. यकीन मानिए आपका दिया हुआ यह दर्द मुझे एक ऐसी जन्नत मे ले जाएगा कि मैं ज़िंदगी भर के लिए आपकी कायल हो जाउन्गी. मैं आपके हर दर्द को बाँट लूँगी भैया बस अपनी गुड़िया को यह दर्द दे दीजिए".

वीरेंदर के मुँह से यह सब सुनकर आशना एक दम शरमा गयी. आशना ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए दर्द के बावजूद अपने आप को वीरेंदर से दूसरी ओर पलट कर अपनी पीठ वीरेंदर की तरफ कर दी. वीरेंदर की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना पाकर आशना को वीरेंदर पर गुस्सा आया.

कुछ देर बाद आशना के ज़हन मे अनायास ही एक ख़याल आया और अपने शक़ की पुष्टि करने के लिए जैसे ही उसने अपने चेहरे को मोड़ कर वीरेंदर की तरफ देखा, वीरेंदर की बाहर को निकल आई आँखो से उसे अपने शक को यकीन मे बदलने में वक्त ना लगा.

आशना के पलट जाने की वजह से आशना के नितंब वीरेंदर की आँखों के सामने आ गये थे. वीरेंदर पहली बार आशना के नितंबों को निर्वस्त्र देख रहा था. आशना के उभरे हुए भारी नितंब देख कर वीरेंदर मन्तर्मुग्ध हो गया था और उसकी आँखें इस नज़ारे को देख कर बाहर निकलने को उतारू हो गई थी.

आशना ने झट से टवल उठाकर अपने नितंबो को ढकने का प्रयास किया. अपनी आँखो के आगे त्रिलोकिक नज़र पर परदा पड़ते ही वीरेंदर की तंद्रा टूटी औट उसकी नज़रें आशना से मिली. आशना की आँखों मे शरम और गुस्से के मिले जुले भाव थे.

 


आशना: बड़े बेशरम हैं आप वीर.

वीरेंदर: अब तो आपका यह इल्ज़ाम भी मज़ूर है बेगम साहिबा.

वीरेंदर: तो क्या कहती हो, लगाती हो शर्त???

आशना(शरमाते हुए): शरत मैं क्या माँगोगे???

वीरेंदर: ज़्यादा कुछ नहीं बस यह 4 दिन मेरे कहने पर चलना होगा.

आशना: मैं तो सारी उम्र आपके कहने पर चलना चाहती हूँ वीर, 4 दिन क्या चीज़ हैं.

वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के होंठों को चूमा और फिर अपने होंठ आशना के उभार पर रख दिए. आशना मचल उठी, उसके जिस्म की आग बढ़ने लगी. वीरेंदर ने धीरे धीरे अपनी कमर मे भी हरकत जारी रखी और कुछ ही देर मे आशना एक बार फिर से वीरेंदर को उकसाने लगी. वीरेंदर ने इस बार अपनी गति तेज़ कर दी.

कमरे मे एक बार फिर से तप थप की आवाज़ गूंजने लगी. फॅक फॅक और थप थप की आवाज़ के साथ वीरेंदर और आशना की कामुक आहों का संगीत सारे वातावरण को कामुक बनाए हुए था. इस बार के सखलन से दोनो प्रेमी इस कदर चूर होकर बिस्तर पर गिरे कि दोनो को कुछ होश ही नहीं रहा. एक दूसरे के जिस्म से रस निचोड़ कर उसे एक अलग रूप मे परिवर्तित करके दोनो सुकून से एक दूसरे को जकडे बिस्तर पर गिर पड़े और गिरते ही बिस्तर के मखमली एहसास ने उन्हे अपनी आगोश मे जकड लिया.

आशना की योनि से मिश्रित द्रव्य रिस रिस कर बिस्तर पर एकत्रित होता रहा और प्यार के अटूट बंधन की तरह समय के साथ और भी सख़्त होता चला गया.

प्यार की खुमारी उतरने के बाद जैसे ही आशना के जिस्म का खून सर्द हुआ उसकी नींद खुली. वीरेंदर की मज़बूत बाहों मे अपने आप को पाकर उसके दिल को सुकून आया. आशना को याद आया कि शरीर पर लेने वाली चद्दर को तो उसने आवेश मे आकर दूर उछाल दिया था. अपने मन मे चददर उठाने का विचार लिया वो जैसे ही बिस्तर से उठने को हुई, उसके शरीर मे दर्द की एक तेज़ लहर दौड़ी और अनायास ही उसके मुँह से निकला "वीर".

वीरेंदर ने आशना की दर्द भरी आवाज़ सुनी तो वो झट से उठ कर बैठ गया.

वीरेंदर(बौखलाया हुआ):क्या, क्या हुआ आशना????तुम ठीक तो हो???

वीरेंदर की बौखलाहट देख कर आशना के होंठो पर मुस्कुराहट आ गयी और बोली: इतनी चिंता मत करो जान, मुझे आदत हो जाएगी.

आशना को नार्मल देख कर वीरेंदर बोला: अब इतनी दर्द भरी आवाज़ मे पुकारोगी तो चिंता तो होगी ही ना, वैसे भी एक ही तो बीवी है मेरी.

आशना , वीरेंदर की बात सुनकर मुस्कुरा दी.

आशना: तो एक काम करिए, आपकी एकलौती बीवी को ठंड लग रही है, आप प्लीज़ वो चद्दर उठाकर उसे ओढ़ा देंगे.

वीरेंदर: बस इस काम के लिए मुझे जगा दिया. यार यह काम तो तुम खुद भी कर सकती थी.

आशना ने अपनी योनि की तरफ इशारा करते हुए कहा: इसकी जो हालत की है आपने, मैं तो उठ भी नहीं पा रही हूँ. देखो अभी भी कितना दर्द हो रहा है, मुझे तो लगता है सूजन भी हो गयी है.

एक दम से यह बात कहकर आशना को अपने नग्न होने का एहसास हुआ. आशना का शरीर सिकुड़ने लगा.

वीरेंदर भी उसके असमंजस को भाँप गया.

वीरेंदर: तुमने ही तो कहा था " मैं चाहे चीखू-चिल्लाऊ, चाहे छटपटाऊ लेकिन आप रुकियगा मत. यकीन मानिए आपका दिया हुआ यह दर्द मुझे एक ऐसी जन्नत मे ले जाएगा कि मैं ज़िंदगी भर के लिए आपकी कायल हो जाउन्गी. मैं आपके हर दर्द को बाँट लूँगी भैया बस अपनी गुड़िया को यह दर्द दे दीजिए".

वीरेंदर के मुँह से यह सब सुनकर आशना एक दम शरमा गयी. आशना ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए दर्द के बावजूद अपने आप को वीरेंदर से दूसरी ओर पलट कर अपनी पीठ वीरेंदर की तरफ कर दी. वीरेंदर की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना पाकर आशना को वीरेंदर पर गुस्सा आया.

कुछ देर बाद आशना के ज़हन मे अनायास ही एक ख़याल आया और अपने शक़ की पुष्टि करने के लिए जैसे ही उसने अपने चेहरे को मोड़ कर वीरेंदर की तरफ देखा, वीरेंदर की बाहर को निकल आई आँखो से उसे अपने शक को यकीन मे बदलने में वक्त ना लगा.

आशना के पलट जाने की वजह से आशना के नितंब वीरेंदर की आँखों के सामने आ गये थे. वीरेंदर पहली बार आशना के नितंबों को निर्वस्त्र देख रहा था. आशना के उभरे हुए भारी नितंब देख कर वीरेंदर मन्तर्मुग्ध हो गया था और उसकी आँखें इस नज़ारे को देख कर बाहर निकलने को उतारू हो गई थी.

आशना ने झट से टवल उठाकर अपने नितंबो को ढकने का प्रयास किया. अपनी आँखो के आगे त्रिलोकिक नज़र पर परदा पड़ते ही वीरेंदर की तंद्रा टूटी औट उसकी नज़रें आशना से मिली. आशना की आँखों मे शरम और गुस्से के मिले जुले भाव थे.

 
वीरेंदर(आशना की आँखो मे देखते हुए): वाउ, सो एरॉटिक. आइ आम सो लकी यू ऐज माइ वाइफ गुड़िया. तुम नहीं जानती मैं कितना पागल हो गया हूँ तुम्हारे लिए. तुम्हारी गान्ड इतनी मस्त है कि मैं तो बस खो ही गया था. वीरेंदर के मुँह से "गान्ड" शब्द सुनकर आशना की योनि ने एक लहर छोड़ दी.

आशना, हैरान सी हुई वीरेंदर को देखे जा रही थी.

वीरेंदर:तुम्हारे जिस्म के हर अंग का एक अलग ही नशा है. मैं इस नशे मे डूब चुका हूँ गुड़िया. जानता हूँ कि तुम मेरी ज़िंदगी मे शायद किसी और मकसद से आई थी लेकिन तुम्हे अपनी बीवी के रूप मे पाकर मैं अपने आप को बहुत खुशनसीब समझता हूँ.

वीरेंदर की प्यार भरी बातें सुनकर आशना का गुस्सा काफूर हो गया.

आशना ने वीरेंदर की तरफ देख कर बड़ी मासूमियत से कहा: मुझे ठंड लग रही है वीर.

वीरेंदर ने बेड से उतरने की बजाए अपने आप को आशना के करीब किया और उसे अपने आगोश मे ले लिया. वीरेंदर ने आशना को अपनी तरफ पलटा तो दर्द के मारे आशना आह कर उठी.

वीरेंदर: अभी भी दर्द है क्या???

आशना(क्यूट सा फेस बनाकर गर्दन हिलाते हुए): हुउऊन्ण.

वीरेंदर ने उसके भोलेपन को देखा तो उसे और कस कर अपने से सटा लिया.

आशना: आउच.

वीरेंदर: सो सॉरी जान. तुम सामने होती हो तो कंट्रोल ही नहीं होता.

आशना मुस्कुरा दी और बोली: अपनी छुट्टी कॅन्सल कर दीजिए.

वीरेंदर(हैरानी से आँखे फाड़ते हुए): क्यूँ???

आशना(नज़रें झुका कर): मुझे नहीं लगता कि मैं अब 3-4 दिन तक उठ भी पाउन्गी तो आपको सर्विस कैसे दे पाउन्गी.

वीरेंदर: डॉन'ट वरी, तुम्हारे पास अभी एक और गिफ्ट है मुझे देने के लिए और वो गिफ्ट मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेंट रहेगा.

आशना ने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा: बेशरम कहीं के. यहाँ मेरी जान निकली जा रही है और इन्हे अपने दूसरे गिफ्ट की पड़ी है.

वीरेंदर(खुशी से चहकते हुए): तो इतना तो मानती हो ना कि यह दूसरा गिफ्ट भी मेरे लिए है.

आशना, वीरेंदर की बात सुनकर शरमा गयी.वीरेंदर ने आशना के होंठ चूम कर कहा: वाह सोनिये तेरी यह हामी पाकर तो यह मुंडा बल्लियों उछलने लगा है.

आशना: प्लीज़ अभी चद्दर ओढ़ा दीजिए ना, सारा बदन दुख रहा है ठंड के मारे.

वीरेंदर: जो हुकुम बेगम साहिबा, आपके दूसरे गिफ्ट के लिए तो सारी उमर आपकी नौकरो भी कर सकता हूँ और यह कह कर वीरेंदर बेड से उतर कर चद्दर उठा लाया.

आशना के दिल मैं एक सुकून था कि उसका जिस्म वीरेंदर को रिझाने मे कामयाब हुआ है.

{ आख़िर हर लड़की यही तो चाहती है कि उसका पति उसके जिस्म का कायल हो जाए }

आशना को बिस्तर पर छोड़कर वीरेंदर वॉशरूम में चला गया. करीब 5 मिनट बाद फ्रेश होकर वीरेंदर वॉशरूम से बाहर निकला तो उसने देखा कि आशना ने अपने बदन को चद्दर से ढका हुआ था और वो उसी की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी.

वीरेंदर(अपने लिंग की तरफ इशारा करते हुए): कितना देखोगी इसे, क्या अभी तक मन नहीं भरा.

आशना ने क्यूट सा फेस बनाकर वीरेंदर की तरफ देख कर "ना" मे गर्दन हिलाई.

आशना की इस मनमोहक अदा से वीरेंदर के लिंग मे एक झटका लगा और वो फिर से फन उठाने लगा. आशना, वीरेंदर के लिंग के बढ़ रहे आकार को देख कर हैरान हो उठी.

आशना: इसे क्या हुआ???

वीरेंदर: अरे हमारी बेगम साहिबा को इसकी ज़रूरत है तो भला यह कैसे पीछे हट सकता है.

आशना(शरमाते हुए): इसे कह दीजिए कि अपनी बेगम साहिबा की इसने जो दुर्गति की है उसके लिए इसकी यही सज़ा है कि अब कुछ दिन तो इसे बूखा ही सोना पड़ेगा.

वीरेंदर: ऐसा ज़ुल्म ना कर इस "नन्हे से प्राणी" पर आए ज़ालिम, यह तुझे बद-दुआ दे देगा.

आशना की हँसी छूट गयी.

आशना(हँसी को रोकते हुए): यह आपको "नन्हा सा प्राणी" दिख रहा है. आपके इस नन्हे से प्राणी ने मेरी "नन्ही सी चिड़िया" की जो हालत की है वो मैं ही समझ सकती हूँ.

 
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