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भैया का ख़याल मैं रखूँगी complete



वीरेंदर ने आगे झुक कर आशना के नितंब के पास हाथ रखा तो आशना की साँस एकदम रुक गयी. वीरेंदर ने आशना के नितंब के पास पड़े टवल को झट से उठा लिया और हाथ पोंछते बोला: यहाँ पर किसी को अपने आप पर गुमान हो गया है और उन्हे लगता है कि हम उनके बिना रह नहीं पाएँगे.

वीरेंदर की इस हरकत पर आशना मुस्कुरा दी.

आशना: एक काम बताऊ, करोगे????

वीरेंदर की आँखे चमक उठी.

वीरेंदर: नेकी और पूछ पूछ. बोलो क्या करवाना हैं, मेरा मतलब क्या करना है????

आशना: मुझे सहारा देकर वॉशरूम तक ले चलिए.

वीरेंदर(मुस्कुराते हुए अपनी कमर पर हाथ रख कर): इस काम का मेहनताना क्या मिलेगा??

आशना: तो आप मेरी मजबूरी का फ़ायदा उठाएँगे?

वीरेंदर: ज़रूर उठाउंगा. जब तुम मेरी शराफ़त का भरपूर फ़ायदा उठा रही हो तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है कि मैं तुम्हारी मजबोरी का फ़ायदा उठाऊ.

आशना: मैने कब उठाया आपकी शराफ़त का फ़ायदा???

वीरेंदर: यह मेरी शराफ़त ही तो है कि अभी तक तुम्हारे साथ कुछ किया नहीं. अगर अपनी करने पर उतर आउ तो अभी के अभी तुम्हे यहीं दबोच कर अपने अरमान पूरे कर लूँ.

आशना: ओह, अब बात समझ मे आई, तभी मुझे इस सुनसान जगह लेकर आए हो कि अपने मन की भी कर लो और किसी को मेरी चीखें भी ना सुनाई दे, बड़े आए शरीफ कहीं के.

वीरेंदर: यही तो चाल थी जानेमन, अच्छा हुआ तुम पहले नहीं समझी वरना आज भी मेरी रात ऐसे ही गुज़रती.

आशना: प्लीज़ जानू ले चलिए ना वॉशरूम, आइ वॉंट टू रिलीव माइसेल्फ.

वीरेंदर: तो मुझे कब रिलीव करोगी?

आशना: सोचती हूँ ना. प्रेशर के कारण तो दिमाग़ भी काम नहीं कर रहा.

वीरेंदर ने झट से आशना के उपर से चद्दर हटाई और पलक झपकते ही उसे अपनी मज़बूत बाहों मे उठा लिया. आशना ने वीरेंदर के मसल्स पर हाथ फेरते हुआ कहा: इंप्रेस्ड.

वीरेंदर: बहुत ताक़त हैं इन बाज़ुओं मे जानेमन.

आशना: आइ नो, जब आपने मुझे अपने नीचे दबा रखा था तभी पता चल गया था कि मेरा तो हिलना भी बेकार है.

वीरेंदर: चलो अच्छा है कि तुम जान गयी कि " तुम्हारा मुझ से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है".

वॉशरूम के दरवाज़े के पास पहुँचकर वीरेंदर ने पूछा "यहीं उतार दूं या अंदर ले चलूं"?

आशना: शरमा क्यूँ रहे हो जानू, अंदर चलो ना. प्लोमिश, मैं आपके साथ कुछ ग़लत नहीं करूँगी.

मुस्कुराते हुए वीरेंदर, आशना को लेकर वॉशरूम मे दाखिल हुआ.

आशना(टाय्लेट सीट के पास): बस यहीं उतार दीजिए, आगे मैं मॅनेज कर लूँगी.

वीरेंदर ने उसे नीचे उतारा और बोला: आइ आम ऑल्वेज़ अट युवर सर्विस मॅम, और बताइए क्या हुकुम है मेरे लिए.

आशना: ओह, टवल तो मैं बेड पर ही भूल आई हूँ, आप प्लीज़ मेरे लिए टाउल लेकर आइए.

वीरेंदर: जो हुकुम बेगम साहिबा. आख़िर मेवा खाना है तो सेवा तो करनी ही पड़ेगी.

वीरेंदर बातरूम से बाहर निकल कर बेड के पास पड़े हुए टवल को उठाकर जैसे ही मुड़ने को हुए, उसके कानो मे क्लिक की आवाज़ आई. वीरेंदर जब तक दौड़ कर दरवाज़े के पास पहुँचा तब तक आशना उसे अंदर से लॉक कर चुकी थी.

वीरेंदर: तिस इन नोट फेयर गुड़िया.

आशना: मेरे शरीफ सैयाँ, आप तो सच मे ही बहुते सीधे हैं और यह कहकर वो ज़ोर से हँसने लगी.

वीरेंदर(उखड़े स्वर् मे): यार गाली दे रही हो या तारीफ कर रही हो?

आशना बस खिलखिलाकर हँसती रही.

वीरेंदर: बाहर तो आओ, जितना हंस रही हो उतना ही ना रुलाया तो मेरा नाम भी वीरेंदर शर्मा नहीं.

आशना: जानू, अब तो मैं आराम से एक डेढ़ घंटे के बाद ही आउन्गि तब तक आप बोर होकर या तो सो जाएँगे या आपकी उत्तेजना आपकी खीज बढ़ने के साथ कम हो जाएगी.

वीरेंदर बुरा सा मुँह बनाकर वापिस मुड़ा ही था कि उसके कदम ठिठक गये.

वीरेंदर: लेकिन एक डेढ़ घंटे तुम वॉशरूम मे करोगी क्या???

आशना: पानी गरम होने मे आधा घंटा तो लग हे जाएगा ना.

वीरेंदर: तो????

आशना: इसका जवाब भी अपनी प्यारी साली साहिबा से ही ले लीजिए.

वीरेंदर: गॉड आइडिया, वाह यार तुम मेरा कितना ख़याल रखती हो.

आशना बस मुस्कुरा दी.

 


वीरेंदर ने ज़मीन पर पड़ा अपना पाजामा और अंडर शर्ट उठाई और उसे लेकर बेड के पास आगया. पाजामा और अंडर शर्ट पहन कर वीरेंदर ने मोबाइल मे टाइम देखा तो रात के डेढ़ बज रहे थे. वीरेंदर ने अपने मोबाइल से एक नंबर पर टेक्स्ट मेसेज किया और फिर अपने बॅग (जो कि उसने ऑफीस से चलते हुए साथ ले लिया था) से लॅपटॉप निकाल कर उसे ऑन कर लिया. टाटा फोटॉन डोंगल को स्लॉट पर कनेक्ट करके वीरेंदर ने अपना ई-मैल आकाउंट खोला और मेल्स चेक करने लगा. जिस एक मैल का उसे इंतज़ार था वो मैल अभी तक नहीं आई थी. वीरेंदर ने अपना मोबाइल उठाकर एक बार फिर से टेक्स्ट मेसेज किया और फिर थोड़ी देर बाद अपने आकाउंट को रेफ्रेश किया.

आकाउंट धीरे धीरे रेफ्रेश होने लगा.

वीरेंदर (मन में): यह साले टाटा वालो की भी कितनी घटिया सर्विस हो गयी है आज कल. साला पेज रेफ्रेश होने मे भी इतना टाइम लग रहा है.

तभी उसके सेल पर एक मेसेज आया. उसने झट से मेसेज ओपन किया.

मेसेज --> " चेक युवर मैल इन 10 मिनट्स सर".

वीरेंदर ने मोबाइल को लॅपटॉप के पास रखा और पीठ के बल लेट गया. लेटते ही वीरेंदर की नज़र चद्दर पर लगे खून के धब्बों पर पड़ी तो उसके दिल मे रोमांच की एक लहर दौड़ गयी. आशना के साथ बिताए हुए पल उसके ज़हन मे घूमने लगे.

आशना का शरमाना, वीरेंदर की असफल कोशिश के बाद उसे उकसाना और फिर असहनीय पीड़ा के बावजूद वीरेंदर को रुकने ना देना यह सब सोच कर वीरेंदर के दिल मे आशना के लिए बेन्तेहा प्यार उमड़ने लगा. अपने ही ख़यालों मे खोए हुए उसे ना जाने कितना वक्त हो गया.

उसके ख़यालों की ट्रेन तब रुकी जब उसके सेल पर मेसेज बीप बजी. वीरेंदर ने सेल उठाकर मेसेज ओपन किया. "डन सर, यू कॅन चेक इट".

वीरेंदर ने बेड पर बैठते हुए आकाउंट को एक बार फिर से रेफ्रेश किया और पेज री-ओपन होने का वेट करने लगा. वॉशरूम की तरफ ध्यान जाते ही उसे आशना की याद आई.

वीरेंदर: गुड़िया पानी गरम हो गया क्या??

आशना: जी भैया, बस थोड़ी देर मे हो जाएगा.

वीरेंदर: ओके ठीक है, जल्दी करना. आइ आम वेटिंग फॉर यू.

आशना: जानती हूँ कि आप मेरा वेट क्यूँ कर रहे हैं.

वीरेंदर: जानती हो फिर भी इतना तड़पाती हो.

आशना: आपने भी तो इतना तडपाया है, अब थोड़ा सा आप भी तड़प लो.

वीरेंदर: अब तो यह तड़प तुम ही मिटा सकती हो मेरी जान.

आशना का चेहरा खिल उठा. वीरेंदर की नज़र स्क्रीन पर पड़ी तो मैल आ चुकी थी. वीरेंदर ने लिंक ओपन किया और बेसब्री से मैल खुलने का वेट करने लगा.

जैसे ही मैल खुली, वीरेंदर की नज़र के लंबी चौड़ी डीटेल पर पड़ी. वीरेंदर ने जैसे ही पढ़ना स्टार्ट किया, उसके दिल की धड़कनें बढ़ने लगी और उसके चेहरे के भाव बदलने लगे.

एक डीटेक्टिव दोस्त द्वारा भेजी गयी इस मैल मे ऐसे कयि सारे खुलासे थे जिन्हे पढ़कर वीरेंदर का सर चकरा उठा. उसे यकीन ही नहीं हुआ कि उसके साथ एक बहुत ही बड़ा षड्यंत्र रचा गया था. पिछले कुछ दिनो से वो जितना कुछ जान पाया था और इस मैल में जो जानकरी थी उन सब को जोड़कर वो एक नतीजे पर पहुँच चुका था मगर अपने अगले कदम के बारे मे वो अभी भी कन्फ्यूज़्ड था. वो जानता था कि बिहारी पर सीधा हमला करना मतलब अपने और आशना के रिश्ते को दुनिया के सामने लाना हो जाएगा. वो बहुत सावधानी से काम लेना चाहता था. इस सिलसिले मे वो किसी दूसरे की मदद भी नहीं ले सकता था.

इसी उधेड़बुन मे उसका ध्यान आशना की तरफ गया. आशना को वॉशरूम मे घुसे हुए काफ़ी वक्त हो चुका था. वीरेंदर ने देखा के रात के 3:15 हो रहे हैं.

वीरेंदर ने घबराहट मे आशना को आवाज़ लगाई.

आशना: आप अभी तक जाग रहे हैं, मुझे तो लगा कि आप सो गये होंगे.

वीरेंदर: जब तक यह नहीं सोएगा तब तक मुझे भी नींद कहाँ आएगी.

आशना, वीरेंदर की बात का मतलब समझ गयी.

आशना: इसे ना तो खुद चैन है और ना ही किसी और को चैन लेने देता है.

वीरेंदर: जल्दी करो ना जान, और कितना वेट करवाओगी?

आशना: बस हो गया. आप प्लीज़ मुझे वो बॅग पकड़ा दीजिए.

वीरेंदर: खुद ही ले लो, मैं नहीं करता तुम्हारी कोई मदद.

आशना: प्लीज़ जानू पकड़ा दो ना, मुझे कुछ लेना है उसमे से.

वीरेंदर: मुझे बता दो क्या चाहिए, मैं निकाल कर देता हूँ तुम्हे.

आशना: नहीं ना जानू, प्लीज़ मान जाओ. मैं आपको पहन कर दिखाना चाहती हूँ.

वीरेंदर: तुम कुछ भी पहन लो लेकिन तुम बिना कुछ पहने ज़्यादा हॉट और सेक्सी लगती हो.

आशना: थॅंक यू माइ लव बट मुझे यह ड्रेस भी आपको पहन कर दिखानी है.

वीरेंदर ने बॅग उठाया और नॉक किया. आशना ने धीरे से डोर खोलकर अपनी गोरी बाज़ू बाहर निकाली. वीरेंदर ने बिना कोई शरारत किए बॅग उसे थमा दिया. उसके ज़हन मे अभी भी बिहारी से निपटने को लेकर असमंजस था.

आशना को भी हैरानी हुई जब वीरेंदर ने बिना कोई छेड़खानी किए उसे बॅग थमा दिया. आशना ने दरवाज़ा लॉक किया और बोली: वीर, क्या सोच रहे हैं?

वीरेंदर का ध्यान एकदम आशना की तरफ गया. उसने अपने हाथ मे देखा उसे तो याद भी नहीं था कि उसने आशना को बॅग कब पकड़ा दिया.

वीरेंदर(संभालते हुए): कुछ नहीं बस बोर हो गया हूँ यार.

आशना:क्या???? इतनी जल्दी मुझसे बोर हो गये???

वीरेंदर: अरे मेरी तोबा, ऐसा तो मैं सोच भी नहीं सकता. मैं तो बस तुम्हारे बिना बोर हो गया हूँ.

आशना(झूठा गुस्सा दिखाते हुए): जाइए हम आपसे बात नहीं करते, आप ने तो सुहाग रात पर ही हमारा दिल तोड़ दिया.

वीरेंदर ने एकदम से अपने दिमाग़ मे चल रही सारी परिशानियों को झटका और बोला: ऐसा मत कहो गुड़िया, मैं तो तुम बिन जीने का सोच भी नहीं सकता. मैं तो उसी दिन मर जाउन्गा जिस दिन मेरे कारण तुम्हारा दिल दुखेगा.

 


वीरेंदर के इतना कहते ही आशना ने झट से वॉशरूम का दरवाज़ा खोला और उस से लिपट गयी.

आशना: खबरदार अगर कभी आगे से ऐसे मरने की बात की तो. मैं जान दे दूँगी आपको कुछ होने से पहले.

वीरेंदर ने भी आशना को कस कर गले लगा लिया.

वीरेंदर: चलो इसी बहाने तुम बाहर तो निकली, मैं तो तुम्हारे बिना एकदम अकेला ही हो गया था.

आशना(वीरेंदर की आँखों मे देखते हुए): अब तक तो सारी रातें अकेले ही काटी हैं????

वीरेंदर: अब तो ऐसा सोच कर भी डर लगता है.

आशना: अपने दिल से हर डर निकला दीजिए मेरे सरताज, आज के बाद आपकी कोई भी रात अकेले नहीं कटेगी.

वीरेंदर ने आशना को अपनी गोद मे उठा लिया.

आशना: आउच.

वीरेंदर: ओह सॉरी, मैं तो भूल ही गया था. अब कैसा है तुम्हारा पेन???

आशना(शरमाते हुए): अब काफ़ी आराम है. गरम पानी मे काफ़ी देर तक बैठ कर सेक दिया है, थोड़ा आराम मिला है.

वीरेंदर: तो गरम पानी का यह राज़ था???

आशना ने मुस्कुरा कर वीरेंदर के गाल पर हल्के से काट लिया.

वीरेंदर: एक बात तो बताओ यार, क्या तुम मुझे यह ड्रेस दिखाना चाहती थी????

आशना ने इस वक्त डार्क यल्लो कलर का एक टाइट टॉप पहन रखा था जो कि उसकी कमर से थोड़ा उपर तक था. नीचे आशना ने एक ब्लॅक - नेटेड स्टाइलिश पैंटी पहन रखी थी.

आशना(बुरा सा मुँह बनाते हुए): आपने पूरी ड्रेस पहनने ही कहाँ दी.

वीरेंदर: चलो अच्छा है, जितनी पहनी है वो भी तो उतारनी ही है.

आशना ने शरमा कर अपना चेहरा वीरेंदर के सीने मे छुपा दिया और वीरेंदर आशना को लेकर बेड की तरफ बढ़ गया. आशना को बिस्तर पर लिटाकर वीरेंदर उसकी बगल मे लेट गया. वीरेंदर ने अपनी एक टाँग आशना की टाँग पर चढ़ा दी और उसके सर को अपनी बाज़ू पर रख कर उसे अपने से चिपका लिया.

वीरेंदर के कड़क लिंग को अपनी नाभि से उपर की तरफ महसूस करते ही आशना के बदन मे भी खून का बहाव तेज़ होने लगा.

आशना(शरारत भरी नज़रों से): क्या चाहिए इसे अब??

वीरेंदर: शायद यह फिर से तुम्हारी गहराइयों मे गोता लगाने को उतावला है.

आशना: धत्त. कितनी बेशर्मी से आप अपनी बात बोल देते हैं. यह भी नहीं सोचते कि सामने वाला क्या सोचेगा??

वीरेंदर: मेरे आगोश में आकर किसी लड़की के सोचने की ताक़त ही ख़तम हो जाती है.

आशना: अच्छा जी, तो इतना गरूर अपनी मर्दानगी पर?

वीरेंदर: क्यूँ तुम्हे कोई शक है क्या???

आशना: ना बाबा ना, यह जो चद्दर पर खून के धब्बे है ना उसे देख कर तो कोई शक रहा ही नहीं.

वीरेंदर: यह तो मुझे तुमपर दया आ गयी वरना आज तुम्हारा सारा जिस्म ही लहू लुहान कर देता.

आशना: सारी ही आपकी तो हूँ. जब चाहे छल्नी कर दीजिएगा मेरे जिस्म को.

आशना के समर्पित भाव को देख कर वीरेंदर के लिंग मे तरंगे उठने लगी.

वीरेंदर: क्या इरादा है???

आशना: इच्छा तो बहुत है मगर डर लगता है आपके नाग से. पता नहीं अंदर कहाँ तक जाकर कितने ज़ख़्म कर दिए हैं इसने. अभी थोड़ी सी राहत मिली है मगर दिल तो कर रहा है कि यह रात कभी ख़तम ही ना हो.

वीरेंदर: मेरे ख़याल से तुम्हे अब थोड़ी देर रेस्ट कर लेनी चाहिए.

आशना ने एकदम से वीरेंदर के लिंग को पाजामे के उपर से ही पकड़ लिया और बोली: इस शैतान का क्या करोगे???

वीरेंदर: कुछ देर बाद खुद ही नाराज़ होकर बैठ जाएगा.

आशना: आए ज़ालिम, ऐसा तो ना बोल. नकाबिल है फिर मेरी यह जवानी, मेरा यह हुस्न अगर मेरा आगोश मे आकर भी इसे बेचैनी ना हो.

वीरेंदर: तो फिर तुम ही बताओ कि क्या किया जाए?

आशना ने अपने होंठो पर जीब फेरी और बोली: सोचती हूँ कुछ.

आशना के मन की बात पढ़कर वीरेंदर के लिंग ने ज़ोर से उछाल लिया.

आशना ने अपने आप को वीरेंदर की पकड़ से छुड़ाया और उसकी कमर के पास बैठ गयी. आशना की नज़र जब वीरेंदर के पाजामे मे बने हुए टेंट पर पड़ी तो आशना के दिल मे खुशी की एक लहर दौड़ गयी.

सच ही तो है हर लड़की अपने साथी को रिझाने का भरसक प्रयास करती है और जब उसके साथी मे कामोत्तेजना का संचार होता है तो उसे अपने हुष्ण पर गुरूर हो जाता है.

आशना ने अपने कोमल हाथ से वीरेंदर के लिंग पर एक चपत लगाई और धीरे से मुस्कुरकर बोली: इसे ज़रा भी सबर नहीं है. संभाल कर रखा कीजिए इसे.

वीरेंदर: जब इसे प्यार करने वाली साथ हो तो भला यह तो खुशी से अंगड़ाई लेगा ही.

आशना: हां हां क्यूँ नहीं, आज तो इसके लिए बड़ा खुशी का दिन है, एक बेचारी नन्ही सी चिड़िया की जान जो ली है इसने.

वीरेंदर: जान???? अरे इसने तो उसे जीवन दान दिया है. बेचारी कब से तड़प रही थी, अगर आज यह उसे गले ना लगाता तो बेचारी बिरहा की आग मे जल जाती.

आशना: बातें बनाना तो कोई आप से सीखे.

वीरेंदर: मुझे तो और भी बड़ा कुछ आता है, बस सीखने वाली मे श्रद्धा होनी चाहिए.

आशना: आपकी यह गुड़िया तो आप से आपका हर हुनर सीखने तो तैयार बैठी है, आप बस इशारा करते जाइए मैं आपके नक्श-ए-कदम पर चलकर आपकी हर तमन्ना मे आपका साथ देने को तैयार हूँ.

 


वीरेंदर ने आशना के टॉप मे हाथ डाल कर उसे उतारने का इशारा किया.

आशना: बड़े चालाक हैं आप, ग्यान देने से पहले ही गुरुदक्षिणा माँग रहे हैं.

वीरेंदर: तुम गुरु दक्षिणा तो दो, तुम्हे ग्यान अपने आप ही मिल जाएगा.

आशना: बहुत ही अजीब गुरु जी हैं मेरे. चलो अब अपने आप को इनके सुपुर्द कर ही दिया है तो फिर गुरु दक्षिणा देने से क्या परहेज़.

यह कह कर आशना ने अपने जिस्म से टॉप को उतार कर एक ओर उछाल दिया. आशना के जिस्म के कटाव देख कर वीरेंदर के बदन मे खून की गति बढ़ गयी.

वीरेंदर: ऐसी शिष्या को तो एक ही रात मे सारे गुर सीखा देने का मन करता है.

आशना: गुरुदेव, मैं तन और मन से आपको समर्पित हूँ. आप मुझे जो भी दीक्षा देंगे मैं उसे अपने दिल मे बसा लूँगी. आपकी दी हुई विद्या प्राप्त करने के बदले मैं आपको गुरुदक्षिणा के रूप मे अपना तन सौंपती हूँ.

आशना ने वीरेंदर के पाजामे मे हाथ डाल कर पाजामे की डोरी पकड़ ली और एक ही झटके मे उसे खींच दिया. डोरी के खुलते ही वीरेंदर की कमर से पाजामा ढीला पड़ गया. आशना उठकर वीरेंदर के पैरों के पास चली आई. आशना के मांसल नितंबों की थिरकन वीरेंदर को और भी पागल बना गयी. वीरेंदर ने अपनी टाँगो को खोल कर आशना के लिए जगह बनाई.

आशना,वीरेंदर की आँखो मे देखते हुए घुटनो के बल उसकी टाँगो के बीच बैठ गयी. शरारती मुस्कान लिए उसने वीरेंदर के पाजामे मे हाथ डाला और उसे नीचे को सरकाने लगी. वीरेंदर ने अपनी कमर उठा कर आशना को सहयोग किया. वीरेंदर की टाँगो से पाजामा उतार कर आशना ने उसे भी दूर उछाल दिया और अपनी गर्दन हवा मे घूमाकर अपने बाल बिखरा दिए.

वीरेंदर: वाउ, लुकिंग वाइल्ड आंड सेक्सी टाइग्रेस.

आशना ने एकदम आगे को झुक कर वीरेंदर की अंडरशर्ट पकड़ ली और उसे ज़ोर से खींचने लगी.

वीरेंदर: हाई दैया, इतना उतावला पन. लगता है आज तो मेरा रेप होकर रहेगा.

वीरेंदर ने उठ कर आशना को अपनी अंडरशर्ट उतारने मे मदद की. वीरेंदर एक दम नंगा हो चुका था.

वीरेंदर: यह तो ना इंसाफी है. मुझे पूरा नंगा कर दिया और तुम अभी भी बर्तडे सूट मे नही हो.

आशना(मदहोश आवाज़ मे):गुरुदेव, आपके लिंग ने मेरी योनि की जो हालत की है उसे देख कर कहीं आपका कलेजा ना फट जाए, इसी लिए उसे आपकी आँखो से छिपा रखा है.

वीरेंदर: प्रिय, एक ना एक दिन तो उसका यही हाल होना था. तुम चिंता ना करो, अतिक्रमण की वजह से इसका यह हाल हुआ है. सुबह तक यह फिर से अपने आकार मे आ जाएगी.

आशना(भोला सा चेहरा बनाते हुए): तो क्या गुरुदेव सुबह तक दोबारा इसका भोग ही नहीं लगाएँगे???

आशना का प्रश्न सुनते ही वीरेंदर की आँखों मे चमक आ गयी.

वीरेंदर: हम तो सारी उमर तुम्हारे जिस्म को अपने लिंग से मथते रहें लेकिन प्रिय तुम्हारा कष्ट देख कर हमारा हृदय पसीज जाता है.

आशना: कितने निर्दयी हैं आप देव, आपकी दासी आपके सामने निर्वस्त्र होकर आपको सहवास के लिए प्रोत्साहित कर रही है और आप उसकी पीड़ा का सोच कर उसके हृदय को पीड़ित कर रहे हैं.

वीरेंदर: तो आओ प्रिय मेरे लिंग को अतिउत्तेजित कर दो ताकि हम अपने होश खो बैठें और आपकी योनि का मर्दन कर आपकी पीड़ा को हमेशा हमेशा के लिए दफ़न कर दें.

आशना, वीरेंदर के लिए एक बार फिर से उत्तेजित हो चुकी थी. आवेश मे आकर उसने वीरेंदर के लिंग को अपने होंठो से चूम लिया और फिर उसे अपने मुँह मे लेकर उसे अधिक से अधिक अपने गले मे उतारने की चेष्टा करने लगी. आशना की जीभ और नरम होंठो के प्रभाव से वीरेंदर स्वर्गिक आनंद मे डूबने लगा. उसके मस्तिष्क मे सिर्फ़ और सिर्फ़ वासना भरने लगी.

वीरेंदर( अत्यधिक मदहोशी मे): गुड़िया यहाँ मेरे उपर आओ, मैं भी अपने दिल मे तुम्हारे लिए बसे प्यार को जताना चाहता हूँ.

पता नहीं क्यूँ इतना सब कुछ हो जाने के बावजूद भी आशना को वीरेंदर के साथ 69 पोज़िशन मे आने मे काफ़ी शरम आ रही थी. वो वीरेंदर को मना कर उसका दिल दुखाना नही चाहती थी मगर आगे के पलों को सोचने मात्र से ही आशना के दिल की धड़कनें बढ़ गयी.

वीरेंदर ने हाथ बढ़ा कर आशना की पैंटी की डोरियों को खींचा तो वो हवा मे लहराती हुई बिस्तर पर गिर पड़ी. आशना वीरेंदर का लिंग मुँह मे लिए एकदम सकपका गयी. वीरेंदर ने आशना के नितंबों पर हल्की सी चपत लगा कर उसे अपने उपर आने का इशारा किया और अपने हाथों को अपने सर की तरफ कर लिया.

 
आशना ने वीरेंदर का लिंग मुँह से निकाले बिना अपने आप को वीरेंदर की छाती पर घुमाया और अपनी दोनो टाँगे उसकी कमर के इर्द गिर्द कर दी. खुमारी के कारण वीरेंदर की आँखें बंद थी. जैसे ही आशना की योनि की खुश्बू उसके नथुनो मे समाई उसने धड़कते दिल से आँखें खोली. सामने के नज़ारे को देख कर उसके लिंग ने एक झटका खाया जिसे आशना ने अपने मुँह के अंदर महसूस किया.

इस एहसास से कि उसकी यह अदा वीर के मन को रोमांचित कर गयी, आशना के जिस्म मे एक चिंगारी उठी और उसे भुजाने के लिए उसने अपनी योनि वीरेंदर के तपते होंठो के हवाले कर दी. जैसे ही वीरेंदर के होंठो का स्पर्श उसे अपनी योनि पर महसोस हुआ, आशना की कमर ने एक झटका खाया और खुद ब खुद उसकी कमर वीरेंदर की छाती पर रगड़ खाने लगी.

करीब 5 मिनट तक एक दूसरे को मुख मैथुन का सुख देने के बाद वीरेंदर ने अपने हाथों से आशना के नितंबों को उपर की तरफ उठाया. आशना ने वीरेंदर के संकेत को समझा और उसके उपर से हट कर एक ओर लूड़क गयी. उसकी साँसों की गति बहुत ही संवेदनशील हो चुकी थी.

वीरेंदर( मदहोशी मे): इस बार तुम उपर आओ गुड़िया.

आशना: मुझे शरम आती है वीर.

वीरेंदर: मैं तुम्हारे उभारों से खेलना चाहता हूँ जब तुम तुम मेरी सवारी करो.

वीरेंदर के दिल की चाहत को जान कर आशना ने कोई विरोध नही किया और पलट कर वीरेंदर के उपर आ गयी. एक हाथ से वीरेंदर के लिंग को दिशा देकर वो लिंग को अपनी योनि मे उतारने लगी. आशना के चेहरे पर आई पीड़ा के भाव देख कर वीरेंदर के दिल मे उसके लिए अपार प्रेम उमड़ आया.

आशना के समर्पित भाव को देख कर उसे आशना पर और भी प्यार आने लगा. वीरेंदर ने अपने लिंग को थोड़ा सा सिकोड कर उसे फिर से फुलाया तो आशना ने हैरानी से वीरेंदर की तरफ देखा.

वीरेंदर: आइ कॅन डू दट.

आशना ने बिना कोई जवाब दिए अपनी योनि के मसल्स को फ्लेक्स किया तो वीरेंदर के गले से एक मधुर आह निकल गयी.

इस बार वीरेंदर ने आशना की तरफ हैरानी से देखा तो आशना बोली " आपकी ही बेहन हूँ, यह तो मैं भी कर सकती हूँ".

आशना के ऐसा कहते ही वीरेंदर ने आशना के उभारों को पकड़ लिया और उसे अपने पास खींच लिया. ऐसा करने से वीरेंदर का लिंग आशना की योनि मे और भी समा गया. आशना ने अपने घुटनों के बल होकर वीरेंदर के लिंग को जड तक जाने से रोक दिया.

वीरेंदर: क्या हुआ???

आशना: अंदर दर्द होता है जब आपका यह सारा जाता है. प्लीज़ इतना ही रहने दीजिए.

वीरेंदर ने मुस्कुरा कर आशना को गले से लगा लिया.

वीरेंदर: तुम मेरे लिए इतना कर रही हो तो क्या मैं तुम्हारे लिए इतना भी नहीं कर सकता.

आशना ने वीरेंदर की बात पूरी होते ही अपनी योनि को संकुचित करकरे ढीला छोड़ दिया.

वीरेंदर: उूवो, अया मज़ा आ गया जान.

वीरेंदर ने भी अपने लिंग को संकुचित किया तो फिर तो जैसे उन दोनो मे होड़ सी लग गयी. बिना किसी धक्के के उनमे उत्तेजना बढ़ने लगी और बिना किसी शारीरिक परिश्रम के वो दोनो मंज़िल के करीब पहुँचने लगे. सखलन करीब आते ही आशना ने वीरेंदर के लिंग पर तेज़ी से उछलना शुरू कर दिया. वीरेंदर का लिंग जड तक आशना की योनि मे जाकर चोट कर रहा था. खुमारी मे किसी को भी यह एहसास नहीं हुआ कि वीरेंदर का लिंग आशना की योनि की अंदुरूनी दीवारों की धज्जियाँ उड़ा चुका है.

शायद, प्यार का खुमार इसे ही कहते हैं. सखलन होने तक दोनो की स्पीड इस कदर बढ़ चुकी थी कि बेड भी उनके साथ हिलने लगा था. सखलन होते ही आशना, वीरेंदर पर झुक गयी और वीरेंदर ने उसका एक वक्ष पकड़ कर आवेश मे आकर उसे अपने दाँतों से काट लिया. आशना ने प्रेमावेश मे आकर उफ्फ तक ना की.

अपनी अपनी मंज़िल पर एक साथ पहुँच कर उनके शरीर स्थिर हो गये. रह रह कर आशना के जिस्म मे तरगे चलती तो उसका सारा बदन हिल जाता. इस बार भी वीरेंदर के लिंग ने आशना की योनि का साथ नहीं छोड़ा और मुँह लटकाए उसी मे छुपा रहा.

होश मे आते ही आशना दर्द से बिलख कर बोली: आह वीर, आपने तो मुझे बहाल कर दिया है. टाँगे तो पहले से ही जवाब दे चुकी थी और अब यहाँ पर काट कर तो आपने अपने जंगली होने का प्रमाण भी दे दिया.

वीर ने देखा के उसने आशना के वक्ष पर दाँत गढ़ा दिया है जिस कारण वहाँ पर खून जमा हो गया है.

वीरेंदर: सॉरी गुड़िया, मैं पागल हो गया था.

आशना, वीरेंदर की घबराहट देख कर मुस्कुराइ और बोली: थॅंक्स फॉर दा सौविनीएर माइ लव.

वीरेंदर ने आशना की बात सुनकर उसे कंधे से पकड़ कर अपने उपर से उठाया और उसके दूसरे वक्ष को भी काट लिया.

इस बार आशना तड़प उठी. आशना की आँखो मे आँसू आ गये. आँखो मे नमी लिए आशना बोली: यह किस लिए????

वीरेंदर: मैं किसी के साथ अन्याय नहीं करता. एक बेचारा मेरी निशानी पाकर फूला नहीं समा रहा था तो भला दूसरे को दुखी कैसे कर सकता था.

आशना ने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा: और इस बच्ची के साथ जो अन्याय हुआ है उसका क्या?????

 


वीरेंदर ने आशना को कस कर गले लगाते हुए कहा: उसके साथ तो अब हर रात ऐसे ही अन्याय होता रहेगा. वो मुझसे रहम की अभिलाषा ना ही करे तो अच्छा.

आशना ने भी वीरेंदर को कस लिया और बोली: आपका यह अन्याय तो मैं हमेशा सहने तो तैयार हूँ. वीरेंदर ने आशना को अपनी बगल मे लिटाया और उसे चद्दर ओढ़ा कर अपने से सटा लिया.

आशना: आपको ठंड नहीं लगती क्या???

वीरेंदर( धीरे से मुस्कुराते हुए): लगती तो है लेकिन अभी तो मेरी हॉट हॉट बीवी मेरी बाहों मे है तो भला चद्दर क्यूँ ओढूं. ज़रूरत पड़ी तो उसे ही ओढ़ लूँगा.

आशना(चीखते हुए): नहियीईईईई.......... और वीरेंदर खिलखिलाकर हंस दिया.

वीरेंदर, आशना को अपनी बाहों मे लेकर सुकून की नींद सो रहा था. वीरेंदर के सेल पर मेसेज बीप बजी. आशना ने अल्साते हुए वीरेंदर को जगाया लेकिन वीरेंदर तो घोड़े बेच कर सो रहा था.

 


आशना ने टाइम देखा तो सुबह के 6:30 बज रहे थे. वीरेंदर को गहरी नींद मैं देखकर आशना के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गयी. वीरेंदर के मासूम चेहरे को धीरे से चूम कर सबसे पहले तो उसने वीरेंदर की बाज़ू को अपने सीने से हटाया और फिर उसकी टाँग को अपनी कमर से नीचे उतारा.

वीरेंदर की पकड़ से आज़ाद होकर वो जैसे ही उठने को हुई उसके बदन में दर्द की एक लहर उठी और उसके मुँह से हल्की सी आह निकल गयी.

आशना(मन मे): मेरी यह हालत बनाकर जनाब चैन की नींद सो रहे हैं और फिर चेहरे पर प्यार भरे भाव लाकर धीरे से बोली: आपका दिया हुआ हर दर्द एक मीठा अहसास दे रहा है वीर. भगवान आपके सारे दुख मेरे हिस्से में दे दे.

दर्द सहते हुए आशना बेड से टाँगें लटका कर बैठ गयी. आशना को अपनी जांघे के जोड़ मे जकड़न महसूस हो रही थी और उसकी आँखो मे बार बार अंधेरा छा रहा था. थोड़ी देर इसी तरह बैठने पर उसे दर्द मे राहत महसूस हुई. अपने बदन को आगे की तरफ झुका कर उसने धीरे से उठना शुरू किया लेकिन उसकी आँखो के आगे अंधेरा छा गया और वो एकदम से बेड पर बैठ गयी.

बेख़बर सो रहे वीरेंदर की तरफ मुँह करके उसने असहाय नज़रों से देखा और फिर जैसे उसके दिल मे वीरेंदर के लिए कुछ करने का जुनून एक बार फिर से सवार हो उठा. जुनून मे आकर इंसान वो सब कर देता है जो उसके वस मे नही होता.

आशना ने भी दिल में जुनून भर कर उठने का भरसक प्रयास किया और इस बार वो अपने प्रयास मे कामयाब रही. धीरे धीरे चल कर वो वॉशरूम तक पहुँची और अंदर आते ही उसने वॉशरूम का दरवाज़ा लॉक किया और एक बार फिर से हॉट वॉटर ट्रीटमेंट लिया. करीब 15-20 मिनट की सिकाई के बाद आशना ने अपने शरीर को सॉफ किया और बाथ ली. नहाने के बाद वो काफ़ी तरोताज़ा फील करने लगी. धीरे धीरे उसका दर्द भी जाता रहा.

आशना ने बॅग(जो के रात को वॉशरूम में ही रह गया था) से एक शाइनी रेड कलर की ब्रा-पैंटी निकाली और उसे पहन लिया. कमर पर एक क्रीम कलर की छोटी सी स्कर्ट पहन कर उसने डार्क ब्राउन कलर का टॉप पहनने के लिए जैसे ही उठाया तो एकदम से अपने माइंड को चेंज करते हुए उसने टॉप को वापिस बॅग मे डाल दिया.

अपने गील बालों को एक झटका देकर आगे की तरफ करके आशना शीशे मे अपने आप को देखने लगी. अपने चेहरे पर आए नूवर को देख कर वो खुद से ही शरमा गयी. जानती थी कि यह सब वीरेंदर के प्यार का असर है.वॉशरूम का दरवाज़ा खोल कर आशना ने वीरेंदर की तरफ देखा. वीरेंदर अभी भी उसी अवस्था मे सो रहा था.

आशना: मेरा चैन चुराकर, चैन की नींद सो रहे हैं जनाब. अभी देखती हूँ कि मेरे हुस्न के वार से कैसे बच पाते हैं.

अपने तरो-ताज़ा महकते अधनंगे जिस्म के साथ आशना वीरेंदर के पास पहुँची. आशना के किस्म का दर्द एक दम गायब हो चुका था. दर्द की जगह अब मीठी मीठी मदहोशी उसपर हावी हो रही थी. आशना ने देखा कि 7:15 बाज चुके हैं. धीरे से बिस्तर पर लेट कर आशना ने अपने शरीर को चद्दर से कवर कर लिया और वीरेंदर की बाज़ू उठाकर आराम से उसे फिर से अपने उपर रख लिया.

अपनी तरफ से आश्वस्त होकर आशना ने आँखें बंद की और सोने का नाटक करने लगी. आशना ने अपने शरीर को एक झटका दिया जिस से वीरेंदर का शरीर मे भी हलचल हुई मगर वीरेंदर की नींद नहीं टूटी. धड़कते दिल से आशना ने आँखें बंद कर रखी थी और वीरेंदर की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करने लगी लेकिन वीरेंदर तो अभी भी गहरी नींद मैं था. आशना ने अपनी टाँग उठा कर वीरेंदर के पेट पर रखी और उसे दबा दिया.

वीरेंदर की नींद अचानक टूटी और आशना के चेहरे पर उसकी नज़र सबसे पहले पड़ी. आशना के बदन को चद्दर मे लिपटा देख कर वीरेंदर के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. आशना के दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. उसने चोर नज़रों से वीरेंदर को जागते हुए देख लिया था. वीरेंदर ने धीरे से अपना हाथ आशना के बदन से उठाया और फिर आराम से उसकी टाँग अपने पेट से नीचे उतारी.

बेड से उठकर वीरेंदर सबसे पहले वॉशरूम गया और अपने ब्लॅडर को हल्का करके फिर से बेड की तरफ आ गया. आशना को निसचिंत सोया हुआ पाकर उसने आशना के उपर पड़ी हुई चद्दर को पकड़ा और एक झटके मे उसे खींच दिया.

आशना को हैरान करने की गर्ज से वीरेंदर ने यह हरकत की लेकिन चद्दर हटते ही वीरेंदर के सामने आशना के जिस्म का जो नज़ारा आया उसे देख कर वीरेंदर की हैरानी का कोई ठिकाना ना रहा. आशना की हँसी छूट गयी और वो उठ कर बेड पर बैठ कर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी.

वीरेंदर ने अपने सर के पीछे की तरफ अपना हाथ मार कर कहा: मैं तो सच मे बहुत ही बुद्धू हूँ यार, हर बार मेरा पोपट हो जाता है.

आशना ने मदहोशी भरी आँखो से वीरेंदर की तरफ देखा और बोली: आपके पोपट ने तो मुझे आपकी गुलाम बना दिया है.

वीरेंदर अभी भी बिल्कुल नंगा था. आशना की मदहोश आवाज़ सुनकर उसने एक झटका खाया. आशना ने झट से डॉगी पोज़िशन ले ली और वीरेंदर की तरफ अपना चेहरा घूमाकर बोली: कम आंड टेक युवर गिफ्ट माइ मॅन.

वीरेंदर के बदन मे खून का परवाह अचानक तेज़ हो गया. आशना की मांसल लहराती हुई गान्ड उसकी आँखो के समये एक छोटी सी स्कर्ट और पैंटी से धकि उसे अपनी तरफ आमंत्रित कर रही थी. वीरेंदर झट से बिस्तर पर आ गया और एक झटके मे उसकी पैंटी और स्कर्ट उसके घुटनों पर कर दी. आशना ने एक एक करके उसे अपनी टाँगो से निकाला और फिर से डॉगी पोज़िशन मे आकर वीरेंदर की नज़रों के सामने अपनी गान्ड को लहराने लगी.

वीरेंदर की लिए यह मंज़र बहुत ही सुखदायक था. आशना के पीछे घुटनों के बल बैठ कर उसने अपने लिंग को हाथ मे लिया और उसे आशना की योनि से भिड़ा दिया.

आशना के गले से एक आह निकली. अभी आशना पूरी तरह से संतुलित भी नहीं हो पाई थी कि वीरेंदर ने अपने हाथ आशना के नितंब पर कसकर एक ज़ोरदार प्रहार कर दिया. खच्छक से वीरेंदर का लिंग आधे से ज़्यादा आशना की गहराई मे उतर गया. आशना ने अपनी कमर को नीचे की तरफ करके अपने सर को उपर की तरफ उठा लिया.

 


वीरेंदर ने ताबड़तोड़ धक्कों के साथ अपने पुर लिंग को आशना की योनि मे उतार दिया. इस बार वीरेंदर ने वाइल्ड रूप इकतियार कर लिया और बिना रुके ताबड़तोड़ धक्कों के साथ आशना की योनि का मंथन करने लगा. आशना के गले से आवाज़ निकलना बंद हो चुका था. वो बिना किसी आवाज़ के अपने होंठ हिलाए जा रही थी. करीब 10 मिनट की तबाद तोड़ चुदाई के बाद आशना और वीरेंदर सखलित हुए.

वीरेंदर ने आशना की कमर को कस कर पकड़े हुए अपने लिंग से सारा लावा आशना की कोख मे उगल दिया और इस ज़ोरदार चुदाई से आशना बहाल हो उठी. जैसे ही आशना आगे की तरफ गिरी, वीरेंदर भी उसके साथ उसके उपर गिर पड़ा जिसे से वीरेंदर का लिंग और भी गहराई मे उतर गया . निढाल होकर दोनो बेड पर पड़े रहे.

कल रात से पहली बार ऐसा हुआ कि वीरेंदर का लिंग सिकुड कर आशना की योनि से बाहर निकल गया जिस कारण आशना को एक अपने अंदर ख़ालीपन का अहसास हुआ. आशना के जिस्म से उतार कर वीरेंदर एक तरफ गिर पड़ा और आशना की तरफ देख कर बोला: तुम ठीक तो हो???

आशना ने मुस्कुरा कर उसे बस होंठ हिलाकर एक किस दी और अपनी आँखें बंद कर ली. दोपहर करीब 11:00 बजे दोनो की नींद खुली जब वीरेंदर के सेल पर एक कॉल आई. वीरेंदर ने कॉल पिक की और थोड़ी देर सामने वाले की बात सुनकर बोला: आइ विल कॉल यू लेटर.

आशना ने सवालिया नज़रों से वीरेंदर की तरफ देखा.

वीरेंदर: विल टेल यू लेटर, फर्स्ट आइ हॅव टू गो टू रिलीव माइसेल्फ.

आशना: पहले एक बात का जवाब दीजिए.

वीरेंदर: बोलिए.

आशना(मासूमियत से): क्या आपको मेरा दूसरा गिफ्ट पसंद नहीं है क्या????

वीरेंदर: व्हाट??????

आशना: तो फिर आपने दूसरा गिफ्ट लिया क्यूँ नही?????

वीरेंदर: शादी की पहली रात के लिए संभाल रखा है. आख़िर हनीमून पर भी एक ब्रांड न्यू गिफ्ट तो बनता ही है. तब तक इस फटे हुए गिफ्ट से ही काम चलाउन्गा.

यह कहकर वीरेंदर वॉशरूम की तरफ भागा.

आशना उसे मारने के लिए उसके पीछे दौड़ी लेकिन उस से पहले वीरेंदर वॉशरूम मे घुस चुका था.

आशना: बदतमीज़्ज़्ज़्ज़.......... . देख लेना बच्चू अब तो शादी के बाद भी तरसते रह जाओगे.

वीरेंदर: नो टेन्षन बेब, मैं तुम्हारी कमज़ोरी जान गया हूँ. मेरे हाथ लगते ही तुम पागल हो जाती हो. देखता हूँ कब तक बचोगी.

आशना के होंठ मुस्कुरा उठे हैं लेकिन झूठा गुस्सा दिखाते हुए वो बोलती है: बेशरम कहीं के, जाओ मैं आपसे बात नहीं करती.

वीरेंदर वॉशरूम से गुनगुनाने लगा: तू लड़की पपपा, मैं लड़का पपप्पा. हम दोनो मिले पपपप्प्पाााआआअ.

वीरेंदर का गाना सुनकर आशना की हँसी छूट गयी.

फ्रेश होकर आशना ने ब्रेकफास्ट तैयार कर दिया( वीरेंदर रात को ही ब्रेकफास्ट का समान ले आया था).

ब्रेकफास्ट के बाद वीरेंदर आशना से बोला: आशना, मुझे तुम से एक ज़रूरी बात करनी है.

कल रात से पहली बार वीरेंदर के मुँह से "आशना" नाम सुनकर आशना ने नज़रें उठा कर वीरेंदर की तरफ देखा.

वीरेंदर ने उसकी आँखो मे उठ रहे सवाल को पड़ते हुए कहा: "गुड़िया" सिर्फ़ रात को बिस्तर पर.

बेडरूम से बाहर तुम आशना और मैं वीरेंदर.

आशना ने नज़रें झुककर कहा: जी भैया और ज़ोर से हंस दी.

वीरेंदर भी उसकी इस हरकत पर हंस दिया.

वीरेंदर: गुड़िया ज़रा यहाँ मेरी गोद मे आकर बैठो तुमसे एक ज़रूरी काम है.

आशना: मैं जानती हूँ कि आपको क्या काम है लेकिन मैं अभी फ्री नहीं हूँ.

वीरेंदर: ओह हो तो अब पॉइंटमेंट लेनी पड़ेगी????

आशना: जी हां और मिन्नतें भी करनी पड़ेगी.

वीरेंदर: यह लो हाथ जोड़ कर तुमसे आग्रह करता हूँ कि मेरे पास आओ गुड़िया.

वीरेंदर के ऐसा करने से आशना झट से अपनी जगह से खड़ी हुई और वीरेंदर की गोद मे बैठ कर उस से चिपक गयी.

आशना: प्लीज़ ऐसा मत कीजिए, मैं तो मज़ाक कर रही थी.

वीरेंदर: यह लो, हो गया ना सेम पिंच.

आशना(हैरानी से): मतलब????

वीरेंदर: मतलब यह कि मैं भी तो मज़ाक कर रहा था. तुम्हे अपनी गोद मैं बिठाना तो मेरे लिए दो मिनट का काम है भला इस काम के लिए मिन्नतें क्या करनी.

आशना ने बुरा सा मुँह बनाते हुए वीरेंदर की पीठ पर मुक्का मारा और बोली: आप बहुत सताते हो मुझे.

आशना को अपने गले से अलग कर कर वीरेंदर ने उसकी आँखो मे देख कर बोला: आशना मैं तुम से कुछ शेयर करना चाहता हूँ. वीरेंदर का संजीदा रूप देख कर आशना के दिल की धड़कने बढ़ गयी.

आशना: क्या बात है वीरेंदर, बताइए आप मुझसे क्या कहना चाहते हो?

वीरेंदर(आशना की आँखो मे देखते हुए): समझ नहीं आ रहा कि कहाँ से शुरू करूँ???

आशना: आप शुरू से शुरू कीजिए जानू, मैं आपके दिल की हर बात सुनना चाहती हूँ.

वीरेंदर ने चेहरे पर कठोरता लाते हुआ कहा: जानती हो हमारा रिश्ता शायद नियती की उपज नहीं बल्कि यह एक सोची समझी साज़िश का नतीजा है.

इतना सुनते ही आशना की आँखो के आगे अंधेरा छा गया. वीरेंदर ने आशना को कंधे से पकड़ा और उसे अपने सीने से चिपकाते हुए बोला " आज हम जिस अटूट रिश्ते में बँधे हैं उस रिश्ते को अंजाम देने का सिलसिला काफ़ी पहले शुरू हो गया था और इसे अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि हमारा ही वफ़ादार नौकर बिहारी है".

 


आशना ने झट से अपना चेहरा वीरेंदर की तरफ करके उसकी आँखों मे देखा और बोली: तो क्या आप मुझसे रिश्ता नहीं जोड़ना चाहते थे????

वीरेंदर(आशना की आँखों मे देखते हुए): मैं मानता हूँ कि कल रात हमारे बीच जो कुछ हुआ वो हम दोनो की मर्ज़ी से हुआ और अगर यह सब ना होता तो ना तो मैं चैन से जी पाता और ना तुम ही कहीं खुश रह पाती.

आशना के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गयी.

आशना: तो फिर यह सब बाते करने से क्या फ़ायदा?

वीरेंदर: सच ही कहा है किसी महापुरुष ने.

आशना ने मुस्कुराते हुए वीरेंदर की तरफ सवालिया नज़रों से देखा.

वीरेंदर: यही कि लड़कियों की अकल घुटनो मे होती है.

आशना ने बुरा सा मुँह बनाकर वीरेंदर की तरफ देखा और बोली: तो आपके कहने का मतलब यह है कि मैं दिमाग़ से नहीं सोचती.

वीरेंदर: मैने तो लड़कियों के लिए कहा था यार तुम तो मेरी होने वाली बीवी हो.

आशना: अच्छा??? अब बात तो पलटो मत और बताओ कि यह सब आपको कैसे पता और बिहारी काका ने ऐसा क्यूँ किया?

वीरेंदर: सारा सच तो मैं भी नहीं जानता, जितना जानता हूँ वो मैं तुम्हे बता दूँगा, लेकिन सबसे पहले तुम यह बताओ कि तुम्हारे डॉक्युमेंट्स और आइडी कार्ड्स तुमने कहाँ रखे हैं.

आशना के बदन मे एक दम से एक सिहरन दौड़ गयी वीरेंदर के इस सवाल से.

आशना: वो तो मिसप्लेस हो गये है. पता नहीं लेकिन जब मैं शर्मा निवास मे पहली बार आपके साथ आई थी उसके बाद से वो डॉक्युमेंट्स मुझे मिले ही नहीं.

वीरेंदर: क्यूंकी वो सब बिहारी ने चुरा लिए थे.

आशना एकदम से चौंक कर वीरेंदर की तरफ देखती है.

आशना: बिहारी काका ने चुराए थे???लेकिन क्यूँ????

वीरेंदर: बताता हूँ पहले आराम से बैठ जाओ.

आशना ने वीरेंदर के साथ वाली कुर्सी को सरका कर वीरेंदर के सामने किया और उस पर बैठ गयी. वीरेंदर ने भी अपना रुख़ आशना की तरफ किया.

आशना: लेकिन यह सब अगर आप को पता था तो आपने उन्हे पूछा क्यूँ नहीं??

वीरेंदर: यह सब तो मुझे उस रात पता लगा जिस रात तुम मुझे मेरे कमरे मे सोता हुआ छोड़ कर अपने कमरे मे चली गयी थी. याद है ना तुम्हे वो रात जब हम लॉन मे बैठे थे और तुम त्रिवेणी से फोन पर बात कर रही थी.

आशना को जब उस रात की याद आई तो वो बोली: आप एकदम घोड़े बेच कर सो रहे थे तो आपको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा. अगर आप उस दिन नींद मे नहीं होते तो मैं तो उस दिन ही आपसे मिलन के लिए बेकरार हो उठी थी.

वीरेंदर: उस दिन मैं नींद मे था और तुम बेकरार थी, उसका भी एक कारण है. मैं तुम्हे शुरू से सब बताता हूँ.

आशना, कन्फ्यूज़्ड सी वीरेंदर की तरफ देख रही थी.

वीरेंदर: उस रात जब तुम अपने रूम मे चली गयी तो कुछ देर बाद अचानक से मेरी नींद खुली. आक्च्युयली मुझे रात को सोते हुए कपड़े पहन कर सोने की आदत नहीं है. घुटन होने के कारण मेरी नींद खुली तो मैं पसीने से भीगा हुआ था. पानी पीने की इच्छा हुई तो देखा कि जग मे पानी ही नहीं है. पहले तो मैने बिना पानी पिए ही सोने का फ़ैसला कर लिया लेकिन गला एकदम सूख चुका था तो जग लेकर नीचे किचन की तरफ आ गया.

किचन के पास पहुँच कर देखा कि रागिनी के कमरे का दरवाज़ा आधा खुला है और लाइट भी जल रही थी. मैं उस तरफ बढ़ा लेकिन फिर ना जाने क्या सोच कर वापिस मुड़ने ही वाला था कि मुझे उसके कमरे से सिसकने की आवाज़ आई. मैं अनायास ही उसके कमरे की तरफ बढ़ गया. कमरे तक पहुँचते पहुँचते मैं समझ गया था कि रागिनी की सिसकियों की वजह क्या थी.

आशना ने सवालिया निगाहों से वीरेंदर को देखा. शायद अंदाज़ा वो भी लगा चुकी थी मगर वो यह सब वीरेंदर के मुँह से सुनना चाहती थी.

वीरेंदर: हल्के कदमों से कमरे के दरवाज़े के पास जाकर देखा तो जो नज़ारा देखा उसे देख कर तो मेरे होश ही उड़ गये. रागिनी बिल्कुल नग्न अवस्था मे किसी आदमी के नीचे पड़ी हुई थी और वो आदमी उसपे सवार होकर उसे रौंद रहा था. तभी अचानक रागिनी की हल्की सी नज़र दरवाज़े पर पड़ी तो मैं झट से वहाँ से भागा.

पकड़े जाने के डर से मैं पास पड़े सोफे के पीछे जाकर छुप गया जहाँ से वो मुझे नहीं देख सकते थे.

आशना: लेकिन वो आदमी कॉन था?

वीरेंदर ने उसके सवाल को अनसुना करते हुए कहा: थोड़ी देर तक कोई कमरे से बाहर ना निकला मगर उसके बाद रागिनी की सिसकियाँ तो बंद हो गयी लेकिन उस आदमी और रागिनी की आवाज़ें आना शुरू हो गयी. जिस जगह पर मैं था वहाँ से दोनो को सॉफ नहीं सुन सकता था.

आशना: आख़िर कॉन था वो आदमी?

वीरेंदर ने आशना की आँखों मे देखा और फिर चेहरे पर गुस्से के भाव लाते हुए कहा: "बिहारी काका".

आशना: व्हाट?????ल.....लेक......लेकिन काका अपनी ही भतीजी के साथ यह सब???? ओह माइ गॉड. यह कह कर आशना ने अपने मुँह पर हाथ रख लिया.

वीरेंदर: भतीजी नहीं बल्कि रागिनी, बिहारी की बीवी है.

इस बार आशना की आँखें फटी की फटी रह गयी. अपने सिर पर हाथ रख कर उसने कहा: यह सब क्या हो रहा है वीर, मैं पागल हो रही हूँ, मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा.

वीरेंदर: अभी कुछ मत सोचो बस सुनती जाओ.

आशना ने लंबी लंबी साँसें लेकर अपने आप को नॉर्मल करने की कोशिश की.

वीरेंदर: कुछ ही देर मे मुझे रागिनी और बिहारी के झगड़ने की आवाज़ सॉफ आने लगी. वजह क्या थी मैं नहीं जानता था लेकिन वो दोनो ही एक दूसरे पर ऐसे गरज रहे थे जैसे वो एक दूसरे से काफ़ी नाराज़ हो. हिम्मत करके मैं फिर से उनके कमरे के पास पहुँचा और दरवाज़े की आड़ मे खड़ा होकर उनकी बातें और ध्यान से सुनने लगा.

आशना: आख़िर यह सब हो क्या रहा है??

 
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