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आशना ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए वीरेंदर को मारना चाहा मगर वीरेंदर ने आशना को बाहों से पकड़ कर अपने सीने से चिपका लिया.
वीरेंदर: तू तो खुद मेरा बच्चा है मेरी गुड़िया.
आशना ने भी वीरेंदर को कस कर जकड लिया.
आशना: आप के हर बच्चे का ख़याल रखना मेरी ज़िम्मेदारी है वीर.
इस से पहले कि वीरेंदर आगे कुछ बोलता, कॅबिन डोर नॉक हुआ. आशना झट से वीरेंदर से दूर हटी और सोफे पर बैठ गयी. वीरेंदर भी अपनी चेयर पर बैठा और बोला " यस, कम इन". होटेल से खाने की डेलिवरी आई थी.
खाना खाने के बाद आशना बोली: वीरेंदर, यहाँ बहुत बोर फील हो रहा है, मैं घर जा रही हूँ.
वीरेंदर: आज हम लोग घर नहीं जाएँगे.
आशना: क्या मतलब????
वीरेंदर: मतलब यह कि मैने रीसेंट्ली ही नोएडा में एक बंगलो खरीदा है. अभी तक वहाँ जाने का मोका नहीं मिला. आज का दिन खास है तो सोच रहा हूँ कि आज "ग्रह परवेश" भी कर लून और वहाँ जाकर अपने दिल की हसरतें भी पूरी कर लून.
आशना का चहरा एक दम गुलाबी हो गया.
आशना(शरमाते हुए): वैसे आज क्या ख़ास है????
वीरेंदर: आज, मैं एक प्यारी सी गुड़िया को हमेशा हमेशा के लिए अपनी बनाने वाला हूँ.
आशना(शरमाते हुए): अगर वो गुड़िया मेंटली प्रिपेर नहीं हुई तो???
वीरेंदर: फिज़िकली तो बहुत खिली हुई है अगर मेंटली प्रेप्रेशन थोड़ी कम भी हो तो चलेगी, मैं उसे इतना पागल कर दूँगा कि मेरे प्यार मे कुछ भी कर जाएगी.
आशना: ऐसा मत कीजिए ना उस के साथ, कहीं मर ही ना जाए.
वीरेंदर: जिस लड़की ने मेरी ज़िंदगी की खातिर इतने ख़तरे उठाए हैं उसे तो मैं एक आँच भी नहीं आने दूँगा.
आशना एक दम भावुक हो उठी. आशना की आँखो की नमी देख कर वीरेंदर का दिल भी भर आया.
वीरेंदर(सिचुयेशन को नॉर्मल बनाते हुए): यार तुम तो अभी से रोने लगी, रात को क्या करोगी.
आशना का चेहरा एक दम सुर्ख हो उठा शरम के मारे और रोनी सी सूरत बनाकर उसके होंठ मुस्कुरा उठे.
आशना: मेरा राजकुमार मुझे कभी तकलीफ़ नहीं पहुँचाएगा.
वीरेंदर: चलो आज रात तुम्हारा यह भरोसा भी टूट जाएगा.
आशना(कमर पर हाथ रखकर): व्हाट डू यू मीन???
वीरेंदर: यही कि तुम चीखोगी भी और चिल्लाओगी भी लेकिन आज मैं तुम्हे मेरी बनाए बिना नहीं छोड़ूँगा.
आशना: धत्त, निर्दयी कहीं के.
वीरेंदर खिलखिलाकर हंस दिया और आशना भी उसके गले लग कर मुस्कुरा दी.
कुछ देर बाद, आशना: वीर मुझे थोड़ी देर के लिए मार्केट जाना है.
वीरेंदर: मैं भी फ्री हूँ, चलो साथ ही चलते हैं.
आशना: जी नहीं, मैं अकेली ही चली जाउन्गी. वैसे भी आज कल आप ऑफीस के काम में ध्यान काम देते हैं तो आप ऑफीस में ही रहेंगे.
वीरेंदर: अब तुम्हारे सिवा कहीं दिल ही नहीं लगता.
आशना(बड़ी अदा से): चल हट, आवारा आशिक कहीं का.
वीरेंदर: आवारापन तो आज दिखाउन्गा तुझे.
आशना: जा जा, मैं नहीं डरती इन धमकियों से.
वीरेंदर: अपने शब्द वापिस लेले जानेमन, वरना रात तो बहुत पछताएगी.
आशना(आँखें बड़ी करते हुए): धमकी !!! अपुन को धमकी. जाओ आज रात का प्रोग्राम ही कॅन्सल.
वीरेंदर(कान पकड़ते हुए): माफ़ कर दे मेरी माँ, तू तो एक दम दिल पे ले लेती है यार.
आशना (मुस्कुराते हुए): अब आए ना सही लाइन पर, चलो निकालो.
वीरेंदर(हैरानी से आँखें फाडे हुए): अब इस वक्त!!!!.
आशना ने बुरा सा मुँह बनाया और बोली: कॅश निकालो जनाब, अब शादी करने का वादा किया है तो नखरे भी उठाने पड़ेंगे मेरे.
वीरेंदर: क्या बात है, यह हुई ना बीवियों वाली बात और जेब में हाथ डालकर 500 -500 के नोटो की एक गड्डी आशना के हाथ में थमा दी.
आशना: इतने ज़्यादा नहीं चाहिए.
वीरेंदर: क्या यार एक बार तो बीवी बनकर हुकुम चलाती हो और फिर जल्द ही बेहन की हसियत से भाई के पैसो की परवाह भी करती हो.
आशना: क्या करूँ, अब रिश्ते तो दोनो हे निभाने पड़ेंगे ना.
वीरेंदर: बिल्कुल नहीं, तुम बस मेरी बीवी बनकर ही रहोगी.
आशना ने अपनी जेब में पैसे डाले और दरवाज़े की तरफ जाते हुए कहा " जी भैया".
वीरेंदर: रुक तो.
आशना तेज़ी से कॅबिन डोर से बाहर निकल गयी.