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Guest
अनामिका-क्या मैं यहां बैठ सकती हूं..??
जय-अरे यार ये भी कोई पूछने की बात है तुम जैसी
खुबसूरत लड़की मेरे पास चलकर आई है तो मैं मना तो
करने से रहा...
अनामिका-तुम फ्लर्ट कर रहे हो..
जय-नहीं बिल्कुल नहीं.. मुझे पता है तुम बुक्ड हो...
अनामिका-हम्मम... तुम्हारी फैमिली कहां है..??
जय इधर उधर नजर दौड़ते हुए-उम्म्म ... रिंकी तो अपनी
फ्रेंड के साथ है मॉम-डैड भी यही कही अपने दोस्तों
रिश्तेदारों में बिज़ी होंगे..!! और बताओ अनय से बात
तो हो ही जाती होगी ना तुम्हारी..
अनामिका-हां... हां हो जाती है...
वो आगे कुछ और पूछता उससे पहले ही अनामिका
वहां से उठकर चली और जय जय के पास चला गया..
अनामिका के जाने के बाद जय सामने खड़े जय के
पास चला आया...
जय जय से गले मिलते हुए -और भाई क्या हाल है..??
जय मुस्कुराते हुए-बस बढ़िया है तुम बताओ कहां हो
आजकल..!!
जय -कुछ नहीं यार बस बिज़नेस के सिलसिले में बाहर
जाना पड़ता है..!! और अनय भाई कैसा है कॉल रिसीव
नहीं करता..
जय-कुछ नहीं बिज़ी होगा वहां का पूरा ऑफिस अकेले
ही संभलता है तो शायद टाइम नहीं मिल पाता हो..!!
जय कुछ सोचते हुए-एक बात पूछूं..??
जय-हां...
जय-अनय और अनामिका की सगाई का क्या चक्कर है..??
मुझे तो लगा था.. अनय और डॉली एक दूसरे को...
जय-हम्मम... पर अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता..
इधर अनामिका ने अनय को कॉल किया पर पूरी रिंग
जाने के बाद भी अनय ने कॉल रिसीव नहीं की तो उसने
झुंझला कर फोन पर्स में रख एक तरफ जाकर बैठ गई..
सब लोग जल्दी ही घर लौट आए क्युकी दोनों बच्चे अभी
छोटे से थे लगभग एक-डेढ़ महीने के..!!अभी तक उनका नामकरण भी नहीं किया गया,सब अलग अलग नामों से
बुलाया करते थे..!! बड़ी मम्मा ने सबसे बात करवा कर
दोनों बच्चों का नामकरण संस्कार का कार्य क्रम रखा
और दोनों बच्चो के लिए पूजा रखवाई..!! चुकी एंजल
बुआ थी और नाम उसने ही रखने थे तो सब उसके पास
जाकर अपनी पसंद के नामों की लिस्ट थमा आते पर
डॉली तो डॉली थी उसने पहले ही दोनों बच्चों के नाम
सोच रखे थे..!! दादू-दादी ने भी अपने मन के नाम डॉली
को बताए..!!
तय समय पर पूजा हुई उसके बाद डॉली ने दोनों बच्चों के
नाम बताए..
प्रवीण भईया-नेहा भाभी के बच्चे का स्नेह और नवीन
भईया-पूजा भाभी के बच्चे का दीप..!! सभी को वो नाम
बहुत पसंद आए..!! शाम को छोटी सी पार्टी रखी गई
क्युकी सभी जान पहचान वाले बच्चों को देखना चाहते
थे आशीर्वाद देना चाहते थे..!!
अगले दिन फिर से सब अपने रूटीन में लग गए..!!
डॉली, राज, रिंकी निखिल कॉलेज में बाकी सब अपने
ऑफिस में..!! धीरे-धीरे दिन बीते और एक बार फिर
रक्षा बंधन का त्यौहार आया पर इस बार काव्या दीदी
नहीं आई..!! अनामिका भी अपने घर नहीं गई और
अनय भी नहीं आया..!! पर डॉली ने अपना रक्षा बंधन
उसी तरह मनाया जैसे हमेशा मनाती आई थी..!!
एक दिन अनामिका की मुलाकात फिर जय से हुई काफी
देर की बातचीत में जय को पता लग चुका था कि अनय
और अनामिका का रिश्ता सही नहीं है..!! पर उसने
अनामिका से कुछ नहीं कहा..!!
कॉलेज में रिंकी ने उन तीनों से मूवी चलने के लिए कहा
तो तीनो मान गए जैसा कि उन चारों को ही कॉमेडी मूवी
पसंद थी तो उन्होंने वहीं देखी..!! और शाम होते-होते
घर लौटने लगे..!! डॉली किसी शॉप पर चल रहे उस गाने
में खो गई...
कभी यादों में आऊँ कभी ख्वाबों में आऊँ
कभी यादों में आऊँ कभी ख्वाबों में आऊँ
तेरी पलकों के साए में आकर झिलमिलाऊँ
मैं वो खुशबू नही जो हवा में खो जाऊँ
हवा भी चल रही है मगर तू ही नही है
फ़िज़ा रंगीन बनी है कहानी कह रही है
मुझे जितना भुलाओ मैं उतना याद आऊँ
हाँ जो तुम ना मिलते होता ही क्या ढूँढ लाने को
हाँ जो तुम ना मिलतेहोता ही क्या ढूँढ लाने को
जो तुम ना होते होता ही क्या हार जाने को
मेरी अमानत हो तुम मेरी मोहब्बत हो तुम
तुम्हे कैसे मैं भुलाऊं
जय-अरे यार ये भी कोई पूछने की बात है तुम जैसी
खुबसूरत लड़की मेरे पास चलकर आई है तो मैं मना तो
करने से रहा...
अनामिका-तुम फ्लर्ट कर रहे हो..
जय-नहीं बिल्कुल नहीं.. मुझे पता है तुम बुक्ड हो...
अनामिका-हम्मम... तुम्हारी फैमिली कहां है..??
जय इधर उधर नजर दौड़ते हुए-उम्म्म ... रिंकी तो अपनी
फ्रेंड के साथ है मॉम-डैड भी यही कही अपने दोस्तों
रिश्तेदारों में बिज़ी होंगे..!! और बताओ अनय से बात
तो हो ही जाती होगी ना तुम्हारी..
अनामिका-हां... हां हो जाती है...
वो आगे कुछ और पूछता उससे पहले ही अनामिका
वहां से उठकर चली और जय जय के पास चला गया..
अनामिका के जाने के बाद जय सामने खड़े जय के
पास चला आया...
जय जय से गले मिलते हुए -और भाई क्या हाल है..??
जय मुस्कुराते हुए-बस बढ़िया है तुम बताओ कहां हो
आजकल..!!
जय -कुछ नहीं यार बस बिज़नेस के सिलसिले में बाहर
जाना पड़ता है..!! और अनय भाई कैसा है कॉल रिसीव
नहीं करता..
जय-कुछ नहीं बिज़ी होगा वहां का पूरा ऑफिस अकेले
ही संभलता है तो शायद टाइम नहीं मिल पाता हो..!!
जय कुछ सोचते हुए-एक बात पूछूं..??
जय-हां...
जय-अनय और अनामिका की सगाई का क्या चक्कर है..??
मुझे तो लगा था.. अनय और डॉली एक दूसरे को...
जय-हम्मम... पर अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता..
इधर अनामिका ने अनय को कॉल किया पर पूरी रिंग
जाने के बाद भी अनय ने कॉल रिसीव नहीं की तो उसने
झुंझला कर फोन पर्स में रख एक तरफ जाकर बैठ गई..
सब लोग जल्दी ही घर लौट आए क्युकी दोनों बच्चे अभी
छोटे से थे लगभग एक-डेढ़ महीने के..!!अभी तक उनका नामकरण भी नहीं किया गया,सब अलग अलग नामों से
बुलाया करते थे..!! बड़ी मम्मा ने सबसे बात करवा कर
दोनों बच्चों का नामकरण संस्कार का कार्य क्रम रखा
और दोनों बच्चो के लिए पूजा रखवाई..!! चुकी एंजल
बुआ थी और नाम उसने ही रखने थे तो सब उसके पास
जाकर अपनी पसंद के नामों की लिस्ट थमा आते पर
डॉली तो डॉली थी उसने पहले ही दोनों बच्चों के नाम
सोच रखे थे..!! दादू-दादी ने भी अपने मन के नाम डॉली
को बताए..!!
तय समय पर पूजा हुई उसके बाद डॉली ने दोनों बच्चों के
नाम बताए..
प्रवीण भईया-नेहा भाभी के बच्चे का स्नेह और नवीन
भईया-पूजा भाभी के बच्चे का दीप..!! सभी को वो नाम
बहुत पसंद आए..!! शाम को छोटी सी पार्टी रखी गई
क्युकी सभी जान पहचान वाले बच्चों को देखना चाहते
थे आशीर्वाद देना चाहते थे..!!
अगले दिन फिर से सब अपने रूटीन में लग गए..!!
डॉली, राज, रिंकी निखिल कॉलेज में बाकी सब अपने
ऑफिस में..!! धीरे-धीरे दिन बीते और एक बार फिर
रक्षा बंधन का त्यौहार आया पर इस बार काव्या दीदी
नहीं आई..!! अनामिका भी अपने घर नहीं गई और
अनय भी नहीं आया..!! पर डॉली ने अपना रक्षा बंधन
उसी तरह मनाया जैसे हमेशा मनाती आई थी..!!
एक दिन अनामिका की मुलाकात फिर जय से हुई काफी
देर की बातचीत में जय को पता लग चुका था कि अनय
और अनामिका का रिश्ता सही नहीं है..!! पर उसने
अनामिका से कुछ नहीं कहा..!!
कॉलेज में रिंकी ने उन तीनों से मूवी चलने के लिए कहा
तो तीनो मान गए जैसा कि उन चारों को ही कॉमेडी मूवी
पसंद थी तो उन्होंने वहीं देखी..!! और शाम होते-होते
घर लौटने लगे..!! डॉली किसी शॉप पर चल रहे उस गाने
में खो गई...
कभी यादों में आऊँ कभी ख्वाबों में आऊँ
कभी यादों में आऊँ कभी ख्वाबों में आऊँ
तेरी पलकों के साए में आकर झिलमिलाऊँ
मैं वो खुशबू नही जो हवा में खो जाऊँ
हवा भी चल रही है मगर तू ही नही है
फ़िज़ा रंगीन बनी है कहानी कह रही है
मुझे जितना भुलाओ मैं उतना याद आऊँ
हाँ जो तुम ना मिलते होता ही क्या ढूँढ लाने को
हाँ जो तुम ना मिलतेहोता ही क्या ढूँढ लाने को
जो तुम ना होते होता ही क्या हार जाने को
मेरी अमानत हो तुम मेरी मोहब्बत हो तुम
तुम्हे कैसे मैं भुलाऊं