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परिवार का प्यार ( रिश्तो पर कालिख) complete

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StoryPublisher

Guest
परिवार का प्यार ( रिश्तो पर कालिख)

दोस्तो बहुत आराम हो गया अब आपके लिए एक और कहानी शुरू करने जा रहा हूँ जिस तरह आपने अब तक मेरा साथ दिया है उम्मीद करता हूँ इस कहानी को भी आपका भरपूर प्यार मिलेगा
 
राजस्थान एक ऐसा स्टेट जो अपने रंगो के लिए मशहूर है यहाँ एक ओर तो रेत का समंदर एक तरफ़ अरावली की विशाल पहाड़िया ऑर एक ओर मेरा शाहर है उदयपुर.

यहाँ की फ़िज़ा अपने अंदर वो सारे रंग समेटे हुए है जो किसी भी मौसम को ख़ुशगवार बना देता है.

यहा मेरा एक प्यारा सा घर है जिसके पेड़ो जिसके आँगन में खेलते हुए मेरा बचपन बीत रहा है..

में अपने बारे में बता डूब मेरा नाम जय गुप्ता है थोड़ा सावला हूँ लेकिन दिखने में बुरा नही हूँ.,मैने अभी अपना स्कूल ख़तम किया है ओर उदयपूर के एक प्राइवेट कॉलेज में दाखिला लिया है.

मेरे पापा किशोर गुप्ता एक बिज़नेस मॅन है हमारा डाइमंड्स का बहोत बड़ा बिज़्नेस है जो कि अलग अलग सिटीज में फैला हुआ है.

मेरी मम्मी संध्या गुप्ता वो एक हाउसवाइफ है लेकिन वो एक हाउसवाइफ के साथ साथ एक एनजीओ भी चलाती है.

मेरे बड़े भैया. राज गुप्ता जो कि पापा के साथ उनके बिज़्नेस में हाथ बटाते है, काफ़ी खुश मिज़ाज है.. मुझे आज भी वो एक बच्चे की तरह ट्रीट करते है.

मेरी भाभी नेहा गुप्ता जितनी वो सुंदर है उस से ज़्यादा उनका दिल सुंदर है वो हमेशा मेरा ख्याल रखती है वो पहले एक डॉक्टर थी लेकिन शादी के बाद उन्होने वो बंद कर दिया.

मेरी बड़ी बहन रूही गुप्ता बिल्कुल एक बार्बी डॉल की तरह वो मेरे ही कॉलेज में है मुझ से एक साल सीनियर , वो मेरे बिना एक पल नही रह सकती चाहे जब वो घर के बाहर हो या घर के अंदर वो हमेशा मेरे साथ रहती है.

मेरी छोटी बहन नीरा गुप्ता मासूम इतनी कि गुस्से से आप उसकी तरफ़ देख नही सकते उसको देखते ही गुस्सा हवा हो जाता है , ऑर जितनी वो मासूम है उस से कही ज़्यादा वो शैतान है,एक बार उसने एक छिपकली पकड़ के मेरी टी शर्ट में डाल दी जब में सो रहा था...खूब उत्पात मचाती है लेकिन सब से ज़्यादा वो मुझे प्यारी है, में अपनी जान से भी ज़्यादा अपनी छोटी बहन को प्यार करता हूँ उसकी आँखो में आँसू का एक क़तरा मेरे पूरे वजूद को हिला देता है.

सवेरा...... एक ऐसा शब्द जो अहसास दिलाता है,रात के ख्तम होने का.

ऐसा ही एक दिन सवेरे सवेरे.

ज़य....जय...उठ भी जा कितना सोएगा , जल्दी से उठ आज बहोत काम है.

में..रूही दीदी सोने दो ना आज तो सनडे है क्यो मुझे उठा रही हो.

रूही..उठ जा गधे.. आज नीरा का बर्त डे है उसको लेकर मंदिर जाना है.

में नीरा का नाम सुनते ही तुरंत खड़ा हो जाता हूँ.

में ..क्या दीदी पहले नही उठा सकती थी क्या? नीरा कहाँ है क्या वो उठ गयी?

रूही..गधे इसीलिए तुझे उठाया है वो महारानी अभी तक सो रही है..जाक्र उसे बर्तडे विश कर ऑर उठा उसको.

में तुरंत भाग के नीरा के कमरे में पहुँचता हूँ.

उसे देखते ही में वही रुक जाता हूँ कितनी मासूमियत झलक रही थी नीरा के चेहरे से आज वो 19 साल की हो गयी है,ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो, में उसे अपनी गोद में उठाए उठाए पूरे घर में भागा करता था.उसकी एक मुस्कुराहट पर में नाचने लगता था आज पूरे 19 साल हो गये नीरा को मेरे जीवन में आए हुए.

में धीरे से उसके बेड की तरफ़ जाता हूँ उसके सिरहाने बैठ के उसके चेहरे पर आए उसके बाल हटा कर प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरने लगता हूँ.

रूही ये सब दरवाजे पर खड़ी होकर देख रही थी . फिर रूही ने धीरे से मुझे आवाज़ लगाई जय....

 
मैने उनकी तरफ़ देखा तो वो आपनी आँखे गुस्से से बड़ी बड़ी करके मुझे इशारे से नीरा को उठाने को कह रही थी..मैने उनको रुकने का इशारा किया ऑर नीरा के माथे को चूम कर धीरे से उसके कान में कहा,... हॅपी बर्त डे माइ स्वीट एंजल ऑर नीरा ने अपनी आँखे खोल कर मुझे अपने गले से लगा लिया ऑर कहने लगी .

नीरा..भैया बर्तडे तो विश कर दिया लेकिन मेरा गिफ्ट कहाँ है.

में..पहले तैयार हो जा मंदिर जाना है उसके बाद तू जो बोलेगी वो लेकर दूँगा तुझे गिफ्ट में.

नीरा..भैया गिफ्ट आप को देना है इसलिए पसंद भी आप करोगे ऑर लेने भी जाओगे अकेले आप.

में..ठीक है महारानी जी जैसी आपकी इक्षा.

उसके बाद हम सभी मंदिर जाने के लोए तैयार होने में लग गये....

हम लोग मंदिर जाने के लिए तैयार हो गये में अपने रूम से सीढ़िया उतर कर हॉल में आया तो नीचे मम्मी ऑर पापा हॉल में ही थे. पापा ने एक वाइट कुर्ता ओर चूड़ीदार पाजामा पहना था ऑर मम्मी ने एक लाल रंग की बँधेज वाली साड़ी पहनी थी वो इस साड़ी में बहोत खूबसूरत लग रही थी. थोड़ी देर में भाभी ऑर भैया भी वहाँ आगये भैया ने भी कुर्ता ओर चूड़ीदार पहना था. जबकि भाभी ने गोल्डन रेड कलर की साड़ी ऑर उसके मॅचिंग का ब्लाउस पहना था जो कि उनकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था.

फिर रूही ऑर नीरा नीचे उतरी वो दोनो ही जन्नत. से आई परी की तरह खूबसूरत लग रही थी.

रूही ने जीन्स ओर एक पिंक कलर की कुरती पहनी थी.

ऑर नीरा ने एक येल्लो कलर की फ्रोक

में दोनो की खूबसूरती में लगभग खो सा गया .

तभी पापा की आवाज़ से मेरा ध्यान भंग हुआ .

पापा..जय हम सभी लोग एक कार में तो आ नही पाएँगे तू एक काम कर या तो दूसरी कार उठा ले या फिर बाइक से हमारे साथ चल.

में..पापा मुझे कार चलाना पसंद नही है वेसए भी सुबह सुबह ताज़ी हवा में बाइक चलाने का मज़ा कुछ ऑर ही है में बाइक से आ जाउन्गा पापा,

पापा..तो फिर ठीक है हम लोग कार में आते है तू तेरी बाइक संभाल.

रूही..पापा में भी जय के साथ बाइक पर ही आउन्गि.

पापा..ठीक है चलो फिर जल्दी नही तो मंदिर में भीड़ ज़्यादा हो जाएगी.

ऑर उसके बाद हम मंदिर के लिए निकल पड़ते है मेरे पास रॉयल एनफील्ड. बाइक थी.

रूही अपने पैर एक तरफ़ करके मेरे कंधे पर हाथ रख कर बैठ गयी बीच रास्ते में ऐसी काई जगह आई जहाँ मुझे तेज़ी से ब्रेक लगाने पड़ते थे.

ऑर इसी वजह से रूही मुझ से बिल्कुल चिपक जाती थी..मुझे काफ़ी अजीब लग रहा था एक तो सुबह सुबह की ठंड ऑर उस पर रूही के बदन की गर्मी मेरी सोच बदल रही थी मेने अपनी सोच पर शर्मिंदा होते हुए अपने सिर को झटका दिया ऑर गाड़ी सीधा मंदिर की पार्किंग में लगा दी...

 
मंदिर में पहुँच कर हमने पूजा करवाई ऑर वहाँ सभी ग़रीबो को नीरा के हाथ से मिठाई फ्रूट ऑर पैसे बटवाए सभी को वो स्नेह से देती जा रही थी ऑर बदले में उनका आशीर्वाद लेती जा रही थी.

में उस के पीछे पीछे सब सामान का टोकरा उठाए घूम रहा था वो उस टोकरे में से खुल्ले हाथो से दान कर रही थी.

फिर हम भगवान का आशीर्वाद ले कर निकलने लगे ऑर पापा ने अपनी जेब में से चेक बुक निकाल कर उसमें 5 लाख का अमाउंट भर के मंदिर की दान पेटी में डाल दिया.उसके बाद हम घर की तरफ़ निकल पड़े इस बार रूही की जगह. मेरे साथ बाइक पर नीरा बैठी थी वो बिल्कुल मुझ से चिपक कर बाते कर रही थी.

नीरा...भैया शाम को क्या गिफ्ट दोगे मुझे

में...गिफ्ट बता के थोड़े ही लाउन्गा अब..तूने ही तो कहा था कि आप अपनी पसंद से लेकर आना.

नीरा...भैया ऐसे तो आप कुछ भी उठा कर ले आओगे , मुझे ऐसी चीज़ चाहिए जो हमेशा मुझे आपकी याद दिलाती रहे.

में--हाँ मेरी स्वीटू में ऐसा हे कुछ लाउन्गा तो गिफ्ट के बारे में ज़्यादा सोच मत.

ओर फिर हम घर पहोच गये...

घर पहोच कर मम्मी किचन में घुस गयी क्योकि पापा ओर भैया के शोरुम जाने का टाइम हो गया था. में भी मम्मी के पास किचन में चला गया मम्मी ने मुझे भाभी को बुलाकर लाने के लिए कहा.

में फट से भागते हुए भाभी के रूम की तरफ़ चला गया भाभी के रूम का दरवाजा खोलते ही मेरे होश उड़ गये भाभी इस समय एक रेड पेटिकोट में थी ऑर उपर एक वाइट ब्रा में खड़ी थी,

में उनको बस देखता ही रह गया उनका ध्यान अपने मोबाइल में था उनके उभार ब्रा को फाड़ कर आने के लिए तड़प रहे थे तभी भाभी ने मेरी तरफ़ देख लिया ऑर वहाँ पड़ी साड़ी उठा कर अपनी चुचियों को ढकने लगी.

मैने उन से सॉरी कहा ऑर वहाँ से चुप चाप निकल गया ...मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था आज सुबह से ही सब कुछ गड़बड़ हो रहा रहा था ...

पहले रूही का चिपकना फिर नीरा का बिल्कुल चिपक कर बात करना ऑर ये अब भाभी को इस हालत मे देख लेना .

मेरा सिर फटने लगा था मन में इतनी ग्लानि आ गयी थी कि में भाग कर अपने रूम में चला गया.....

उधर भाभी किचन में आकर मम्मी का काम में हाथ बटा रही थी.

भैया ऑर पापा नाश्ता कर के शोरुम के लिए निकल गये .

इधर रूही मेरे कमरे में आ जाती है.

रूही--क्या हुआ तेरे चेहरे पर 12 क्यो बजे हुए है किसीने कुछ कह दिया क्या.

रूही मुझ से बिल्कुल सॅट कर बैठी थी उसकी जांघे मेरी जाँघो से टच हो रही थी.

में--कुछ नही दीदी बस ऐसे ही सिर दुख रहा था.

रूही--अरे मेरे भाई सुबह सुबह ठंडी हवा लग गयी तेरे सिर में रुक में तेरा सिर दबा देती हूँ .

फिर रूही मेरे सिर को खेंच के अपनी गोद मे रख लेती है मेरा मूह रूही की नाभि के पास आगया था ऑर मेरे कानो के उपर रूही के दोनो बूब्स का दबाव पड़ने लगा.

रूही के बदन को खुसबू मेरी मर्यादा की नीव हिला रही थी मेरे पूरे बदन में तूफान उठ रहा था रूही के जिस्म की गर्मी मेरे होश उड़ा रही थी...

तभी मैने खूद को काबू में रख कर रूही की गोद में से सिर हटा लिया ऑर बेड पर सीधा लेट गया उसके बाद रूही मेरे सिर को धीरे धीरे दबा रही थी ऑर अब जाकर मेरी सांस में सांस आई थी. थोड़ी देर मे मुझे नींद आगयि....

रूही मेरा सिर दबा रही थी ऑर उसके कोमल हाथो के जादू से कब मुझे नींद आगयि मुझे पता ही नही चला.

ज़य भैया उठ जाओ शाम के 4 बज गये है कब तक सोते रहोगे ये आवाज़ में लाखो लोगो की भीड़ में भी पहचान सकता हूँ ये नीरा की आवाज़ थी...

में तुरंत उठ के बैठ जाता हूँ.

नीरा--भैया शाम को घर में पार्टी है ऑर आप अभी तक सो रहे हो , मेरे लिए गिफ्ट लाओगे या नही.

में--अरे मेरी गुड़िया तेरे लिए गिफ्ट भी लाउन्गा ऑर तेरी पार्टी की तैयारी भी करूँगा ऑर ये कह कर में बाथरूम में घुस गया.... फ्रेश होने के बाद में रूम में चॅंग कर रहा था... नीरा अब रूम में नही थी मैने अपना, टवल हटा दिया ऑर वहाँ लगे मिरर में अपने शरीर को देखने लगा.

 
मेरा शरीर पूरी तरह से फिट था 5 11 की हाइट के साथ मेरी शरीर की बनावट बिल्कु शानदार लग रही थी मेने अपने लिंग की तरफ़ देखा वो अभी सोया हुआ था लेकिन अभी भी वो काफ़ी बड़ा लग रहा था.तभी अचानक मेरे रूम का दरवाजा खुल गया वहाँ नेहा भाभी खड़ी थी ऑर में उनके सामने पूरा नंगा खड़ा था .

मैने तुरंत टवल उठाया ओर अपनी कमर पर बाँध लिया.

में--क्या करती हो भाभी कम से कम दरवाजा तो बजा देती.

भाभी--तुमने बजाया था क्या सुबह , ऑर मुझे क्या पता था क तुम बिल्कुल नंग धड़ंग रूम में घूम रहे होगे , अब जल्दी से अपने कपड़े पहनो मम्मी बुला रही है नीचे.

भाभी चली गयी ऑर मैने जेसे ही अपने लिंग की तरफ़ देखा उसने टवल में टेंट बना रखा था मेने टवल हटाया ऑर वो बिल्कुल सीधा खड़ा था जो कि लगभग 7 इंच से ज़्यादा का लग रहा था .

मैने अपने लिंग पर धीरे से चाँटा मारते हुए कहा ...साले जगह देख कर खड़ा हुआ कर.

ओर फिर में कपड़े पहन कर रूम से बाहर निकल आया ,नीचे उतरते ही भाभी ने मम्मी को बोला मम्मी जय भैया आगये.

मम्मी --तू बस सोता रहा कर सारे दिन... अभी जा मार्केट ऑर में कुछ सामान मंगवा रही हूँ वो लेकर आ ऑर नेहा को भी साथ लेजा इसको भी थोड़ी शॉपिंग करनी है....

नेहा भाभी ऑर में बाइक पर मार्केट के लिए निकल गये.

भाभी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा हुआ था.

भाभी..जय सॉरी आज जो कुछ भी हुआ वो नही होना चाहिए था..

में...भाभी आप उस बारे में ज़्यादा सोचो मत,बस मुझ से कभी नाराज़ मत होना...आप लोगो का प्यार ही मेरे लिए सब कुछ है.

भाभी...पागल में तुझ से कभी नाराज़ नही हो सकती , ऑर ना ही घर का कोई ऑर आदमी तुझ से नाराज़ हो सकता है.

फिर हम यही सब बाते करते करते मार्केट में पहुँच गये, वहाँ से शाम की पार्टी के लिए खाने पीने का सामान लिया...ऑर घर की तरफ़ चल दिए.

भाभी...जय कहीं गाड़ी रोक ना आज पानी पूरी खाने का मन कर रहा है.

में...हाँ भाभी अभी थोड़ा सा आगे एक पानी पूरी वाला है हम वहाँ रुकते है.

थोड़ी दूर चलने पर वो स्टाल आ गई ऑर में ऑर भाभी वहाँ जा कर खड़े हो गये.

भाभी....पानी पूरी वाले से....भैया थोड़ा तीखा ज़्यादा रखना

फिर उसने हम दोनो को एक एक प्लेट दी लेकिन मैने उसे सिर्फ़ भाभी को खिलाने के लिए कहा.

में भाभी को पानी पूरी खाते हुए देख रहा था उन्होने होंठो पर डार्क रेड कलर की लिपस्टिक लगा रखी थी ऑर उनके होंठ बिल्कुल रस से भरे हुए लग रहे थे जैसे कोई स्ट्रॉबेरी हो..

में उनको लगातार देखे ही जेया रहा था. भाभी ने इशारा किया ऑर इस तरह से देखने का कारण पूछा.

मैने धीरे से कहा..

में--भाभी आप आज बहुत ब्यूटिफुल लग रही हो , मन करता है बस ऐसे ही देखे जाउ.

भाभी मुस्कुरा देती है ऑर मेरी पीठ पर एक चपत लगा कर बोलती है.

भाभी...अच्छा में तुझे बस आज ही ब्यूटिफुल लग रही हूँ क्या , बाकी दिन में अच्छी नही लगती??

में...ऐसी बात नही है भाभी लेकिन तीखा खाने के बाद आपका चेहरा बिल्कुल लाल हो गया है ऑर ये बिल्कुल इस तरह से लग रहा है जैसे सुबह सूरज निकलते वक़्त की लालिमा हो.

भाभी...हट पागल हर कुछ भी बोलता है....ले ये एक पतासी मेरे हाथ से खा.

 
भाभी ने वो पतासी मेरे मूह की तरफ़ बढ़ा दी मेने अपना पूरा मूह खोल दिया भाभी की सॉफ्ट सॉफ्ट उंगलिया मेरे होंठो से लगती हुई ...मेरी जीभ से टच होने लगी.

ये मेरे लिए पहला अनुभव था ऑर मुझे काफ़ी अच्छा भी लगा.

भाभी...क्यो बच्चू कैसा लगा...मज़ा आया.

में...भाभी आपकी फिंगर बड़ी टेस्टी है ऑर ये कह कर में हँसने लगा.

भाभी ने मेरी पीठ पर मुक्का मारते हुए कहा.

भाभी...मैने तुझे पतासी टेस्ट करने के लिए खिलाई थी ना कि मेरी उंगलिया टेस्ट करने के लिए , चल अब घर काफ़ी पतासी खाली .

फिर उसके बाद हम दोनो घर की तरफ़ निकल गये.

घर पहुँच कर मैने वो सारा सामान किचन में रखा ओर बाहर आकर हॉल में बैठ कर टीवी देखने लगा.

बाहर गार्डन में पार्टी की तैयारी चल रही थी. वैसे तो पापा पार्टी बहुत बड़ी करना चाहते थे लेकिन नीरा ने उन्हे ऐसा करने से मना कर दिया था क्योकि फिर बर्त दे पार्टी तो साइड में रह जाती है ऑर बिज़्नेस पार्टी शुरू हो जाती है .

इसीलिए पार्टी में सिर्फ़ ख़ास ख़ास लोग ही आए थे ऑर कुछ रिश्तेदार...

में अपने रूम में रेडी हो रहा था मैने आज सूट पहना था , जिसमें में काफ़ी अच्छा लग रहा था .

फिर में जाकर नीरा के कमरे की तरफ़ बढ़ गया . मैने दरवाजा नॉक करा तो नीरा ने अंदर आने के लिए कहा.

अंदर नीरा रेडी हो रही थी.

नीरा--भैया आपको मेरे रूम में आने के लिए नॉक करने की क्या ज़रूरत है.

में--अरे यार आज सारे दिन से गड़बड़ हो रही है इसलिए नॉक करना ज़रूरी समझा.

नीरा--कैसी गड़बड़ भैया क्या हुआ मुझे भी तो बताओ , ऐसा क्या देख लिया जो आप दरवाजा नॉक करने लगे.

में...कुछ नही नीरा ऐसी कोई बात नही है वो तो बस नोर्मली मैने डोर नॉक किया था..मुझे लगा शायद तू तैयार हो रही होगी इस लिए.

नीरा...भैया अभी में इतनी बड़ी भी नही हुई हूँ कि आप मुझ से शरमाने लगो ...मुझे याद है जब मम्मी अपने एनजीओ के कारण बाहर चली जाती थी तो आप मुझे कितने प्यार से नहलाते थे , इसलिए मेरे रूम में आपको आने के लिए कभी नॉक ना करना पड़े इस बात का ध्यान रखना.

में--ओके स्वीटी में आगे से ऐसा नही करूँगा , अब तू कितनी देर में बाहर निकलेगी.

नीरा--भैया में तो रेडी हूँ चलो चलते है बाहर.

उसके बाद वो मेरे सामने से होती हुई बाहर निकलने लगी ऑर में उसके पीछे.

तभी मेने देखा नीरा के ड्रेस के पीछे वाले हुक नही लगे हुए थे पिछे से उसकी पिंक कलर की ब्रा नज़र आ रही थी.

 
मैने उसको आवाज़ लगाई.

में--नीरा रुक ड्रवाजा बंद कर के इधर आ.

नीरा--क्या हुआ भैया आप इतने परेशान क्यो दिख रहे हो.

में--नीरा वो तेरी ड्रेस पिछे से......

नीरा--क्या हुआ भैया मेरी ड्रेस को क्या हुआ ये अच्छी नही लग रही.

में नीरा को ये बताते हुए झिझक रहा था कि उसकी पूरी पीठ दिख रही है.

नीरा--अब कुछ बोलो भी या ऐसी ही खड़े रहोगे ये ड्रेस अगर अच्छी नही लग रही तो अभी इसको चेंज कर लेती हूँ.

में--घबराते हुए .....नीरा ये ड्रेस तुझ पर बहुत अच्छी लग रही है पर...

नीरा--क्या पर पर लगा रखा है सॉफ सॉफ बोलो क्या बात है....अगर नही बोलना तो में बाहर जा रही हूँ.

में उसके कंधे पर हाथ रखता हूँ ऑर ड्रेसिंग टॅबेल की तरफ ले जाता हूँ उसका चेहरा मेरी तरफ था ऑर पीठ मिरर की तरफ़ .

में--अब यहाँ से मूड कर देख में क्या बोलना चाहता हूँ.

नीरा मूड कर देखती है ऑर बोलती है.

नीरा--ओहूओ भैया आप भी ना... सीधे सीधे नही कह सकते थे कि तेरी ड्रेस के हुक खुले हुए है.

में--में कहना तो चाहता था लेकिन कह नही पा रहा था.

नीरा--चलो अब अपना मूह बंद करो मेरी ड्रेस के हुक लगा दो , में रूही दीदी का ही वेट कर रही थी क्योकि ये हुक मुझ से नही लग रहे थे अब आप इनको लगा दो.

में--पर में कैसे....

नीरा---ज़्यादा होशियार बनने की ज़रूरत नही है चलो जल्दी लगाओ फिर बाहर भी जाना है.

ऑर ये कह कर मेरी तरफ अपनो पीठ कर के खड़ी हो गयी ऑर मिरर में से मुझे देखने लगी.

में घबराते घबराते उसके हुक लगाने लगा...मेरा ध्यान बार बार उसकी ब्रा पर चला जाता जिसका भी बस 1 ही हुक लगा हुआ था...

में--नीरा ये तेरे अंदर....भी हुक ढंग से नही लगा हुआ.

नीरा--भैया आप लगा दो जहाँ भी नही लगा हुआ.

मैने हिम्मत करके नीरा की ब्रा पकड़ ली उसकी ब्रा पकड़ते वक़्त मेरे हाथ काँप रहे थे.

अचानक मेरा हाथ उसकी नंगी पीठ से टच हो गया ...मुझे ऐसा झटका लगा जैसे कोई बिजली के नंगे तार को छु लिया हो.

नीरा--भैया जल्दी करो ना क्या कर रहे हो आप.

में--रुक में कर रहा हूँ.

किसी तरह मेने हिम्मत करके उसकी ब्रा के हुक लगा दिए ऑर ड्रेस के भी हुक लगाने के बाद मैने चैन की साँस ली....

हम दोनो बाहर हॉल में आ गये वहाँ हमे रूही भी मिल गयी.

रूही--कहाँ रह गये थे तुम दोनो?? बाहर सारे मेहमान आ चुके है अब जल्दी बाहर चलो.

फिर हम बाहर गार्डन में आ गये वहाँ काफ़ी सजावट की हुई थी सभी पेड़ो पर रंग बिरंगी लाइट जल रही थी एक तरफ खाने की टॅबेल लगी हुई थी ऑर गार्डन के बीच में एक टॅबेल ऑर पड़ी थी जिस पर एक बड़ा सारा केक रखा हुआ था.

वहाँ आए सभी मेहमान एक एक कर के नीरा को बर्त डे विश करने लगे .

फिर नीरा को पापा ने बुलाया..,

पापा--नीरा बेटा इधर आओ हम लोग कब से तुम्हारा इंतजार कर रहे थे...अब जल्दी से केक काटो ऑर पार्टी को शुरू करो.

नीरा--जी पापा.

उसके बाद नीरा वो केक काटती है, ऑर सभी मेहमान तालियाँ बजाने लगते है ...फिर वो सबको अपने हाथो से केक खिलाती है

फिर वहाँ आए लोग नीरा को एक एक करके अपने साथ में लाए गिफ्ट्स देने लगते है. लेकिन नीरा को जिस चीज़ का सब से ज़्यादा इंतजार था वो था मेरा गिफ्ट,पापा ने उसको एक बेशक़ीमती डाइमंड्स का नेकलेस दिया जिसे नीरा ने वही पहन लिया फिर सभी परिवार वालो ने कुछ ना कुछ गिफ्ट्स नीरा को दिए.

लेकिन उसके चेहरे पर उदासी सॉफ दिखाई दे रही थी क्योकि अभी तक मैने जो उसे गिफ्ट नही दिया था.

 
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