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सूमी के घर पर.......शाम के वक़्त.......
सूमी के घर इस समय महफ़िल जमी हुई थी...जिसमे सूमी के साथ सम्राट, समर, मदन, रघु और रेणु बैठे हुए थे...और सबके सब संजू के आने का इंतज़ार कर रहे थे....
जैसे ही संजू उस कमरे मे दाखिल हुआ तो सभी को देख कर चौंक गया....
समर- आओ संजू...आओ...
सूमी(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ...चौंक गये क्या....ह्म्म...चौंकने की बात भी है....क्योकि इनमे से कुछ को तुम जानते भी नही...और कुछ के यहाँ होने का तुम्हे यकीन भी नही हो रहा होगा ...क्यो है ना...
संजू(सिर हिला कर)- ह्म्म...
सूमी- ह्म्म...इसलिए तो मैने आज सबको बुलाया है...ताकि अच्छे से जान पहचान हो जाए....तो...समर, रिचा और मुझे तो तुम जानते ही हो....हाँ..ये है मदन...ये रघु...
संजू(बीच मे)- रूको....थोड़ा रूको...
सूमी(हैरानी से)- क्या...क्या हुआ....
संजू- मैं हर सक्श के बारे मे जानना चाहता हूँ....
समर- हा..वही तो बता रहे है.....
संजू(हँस कर)- आप समझे नही....असल मे....मैं सबकी पूरी डीटेल जानना चाहता हूँ...और इनकी अंकित से दुश्मनी की वजह भी....ह्म...
समर(मुस्कुरा कर)- ह्म...ज़रूर....तुम्हे सब बतायगे....ये लोग खुद अपनी कहानी बतायगे....
संजू(चेयर पर बैठ कर)- तो देर किस बात की...शुरू हो जाओ....
और फिर संजू ने एक-एक करके सबकी असलियत सुनी और अंकित से दुश्मनी की वजह भी.....
ये सब ख़त्म होने के बाद सब वहाँ से निकल गये...पर सूमी ने संजू को रोक लिया.....
संजू- तो...मुझे क्यो रोका...क्या फिर से मूड बन गया....
सूमी- मूड तो बनता ही रहता है.....पर आज तुम्हे एक गिफ्ट देने के लिए रोका है....
संजू(हास कर)- तुम्हारी बेटी....वो कोई गिफ्ट है क्या...हाँ...
सूमी- नही...वो भी नही...अंदर कोई खास है.....जिससे मिल कर तुम बहुत खुश होगे....
संजू(हैरानी से)- क्या....ऐसा कौन है....
सूमी(मुस्कुरा कर)- बाजू वेल रूम मे जाओ....और खुद देख लो....
फिर संजू हैरानी से भरा हुआ बाजू वाले रूम मे गया...और उसने जैसे ही गेट खोला तो उसकी आँखे फटी रह गई....
संजू( चौंक कर)- आप...यहाँ....वो भी ऐसे.....क्यो......????????????
संजू ने जैसे ही रूम का गेट ओपन किया तो उसे सामने रेणु दिखाई दी...जो एक सेक्सी ड्रेस पहने संजू का वेट कर रही थी.....
संजू(हैरानी से)- आप यहाँ क्या कर रही है....
रेणु(मुस्कुरा कर)- वही...जो तुम कर रहे हो....
संजू- क्या मतलब....
रेणु(आगे आ कर)- असल मे....मैं तुम्हे करीब से देखना चाहती थी...बिल्कुल करीब से.....
संजू(गुस्से से)- बकवास बंद करो....और जाओ यहाँ से....
रेणु(हँसते हुए)- अरे....ये क्या....तुम्हारा तो मूड ही कुछ और है....
संजू(गुस्से से)- हाँ...
और इतना बोलकर संजू जाने के लिए पलटा...पर रेणु की बात सुनकर वही रुक गया.....
रेणु- ओह्ह...तो नमर्द हो....हहहे....
संजू(गुस्से से)- तेरी इतनी हिम्मत....अरे मैं तो ये सोच कर जा रहा था कि तू मेरे दोस्त की बेहन है...पर तू तो...
रेणु(बीच मे)- कौन दोस्त....जिसको तुम धोखा दे रहे हो....ऐसी होती है दोस्ती...हुहम...
संजू(गेट लगा कर)- बहुत बोलती है...अब तो अच्छे से समझना ही होगा...
रेणु- ह्म्म...लगता है मर्दानगी जाग गई. ..
संजू(आगे बढ़ कर)- ह्म्म..अब ऐसी मर्दनिगि दिखाउन्गी की बाकी सारे मर्दो को भूल जाएगी....
रेणु(हँसते हुए)- अच्छा....तो देर किस बात की....ये लो...तुम्हारी मर्दनिगि को थोड़ा बढ़ा दूं...
इतना बोलकर रेणु ने अपनी ड्रेस ओपन करना शुरू की पर संजू ने आगे बढ़ कर उसे रोक लिया....
संजू(मुस्कुरा कर)- इसकी ज़रूरत नही....ये मैं देख लुगा....
संजू की बात सुन कर रेणु हैरान हो गई....
रेणु- ठीक है...तुम ही करो...पर पहले एक बात बताओ....तुम अंकित को धोखा क्यो दे रहे हो....
संजू- अपना...अपना मतलब है...और क्या...
रेणु- पर ये ग़लत है......तुम उसके दोस्त हो....
संजू(चिल्ला कर)- और तू उसकी बेहन है....बेहन...फिर भी धोखा...हाँ....
रेणु(सहम कर)- पर मेरे पास वजह है...और मैं सिर्फ़ आकाश को बर्बाद करना चाहती हूँ...अंकित को नही...
संजू(मुस्कुरा कर)- वजह तो मेरे पास भी है....और मेरी वजह तुमसे कही ज़्यादा बड़ी है...
रेणु(हैरानी से)- तुम्हारी....क्या है वो वजह....
संजू- बैठो....बताता हूँ.....
अंदर रेणु और संजू अपने काम मे मसगूल थे तो बाहर सूमी और उसकी बेटी गेट से कान लगाए अंदर की बातें सुनने की कोसिस मे थी....पर कोई फ़ायदा नही हुआ....रूम के बाहर कोई आवाज़ नही पहुँची.....
काफ़ी देर बाद जब संजू ने गेट खोला तो सूमी गिरते-गिरते रह गई....
संजू(कड़क आवाज़ मे)- ये क्या हो रहा था .....
सूमी(हँसते हुए)- अरे वो...मैं तो वो...मतलब मैं सोच रही थी कि अंदर कुछ जोरदार हो रहा होगा....पर आवाज़ नही आई...तो मैं....
संजू(मुस्कुरा कर)- तुम नही सुधरोगी.....चलो...अब हम चलते है....आओ रेणु ....
सूमी- अरे चले जाना....पर ये तो बताओ कि मज़ा आया कि नही.....
संजू(रेणु को देख कर)- ह्म्म....आज तो बहुत मज़ा आया...दिल खुश हो गया....
सूमी(इतराते हुए)- माल किसने चुना था....खैर....ये बताओ कि इतना कड़क माल होते हुए भी आवाज़े नही आई...ह्म...
संजू- कभी..कभी खामोशी मे भी इतना मज़ा आता है...जो शायद आवाज़ मे नही होता....
रेणु(आगे बढ़ कर)- सही कहा....खामोशी ने वो कर दिया जो आवाज़ नही कर सकती थी....अब चलो संजू....मुझे घर छोड़ दो...
और इतना बोल कर संजू रेणु को ले कर निकल जाता है और सूमी हैरानी से उन्हे जाता देख सोच मे पड़ जाती है......
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सूमी के घर इस समय महफ़िल जमी हुई थी...जिसमे सूमी के साथ सम्राट, समर, मदन, रघु और रेणु बैठे हुए थे...और सबके सब संजू के आने का इंतज़ार कर रहे थे....
जैसे ही संजू उस कमरे मे दाखिल हुआ तो सभी को देख कर चौंक गया....
समर- आओ संजू...आओ...
सूमी(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ...चौंक गये क्या....ह्म्म...चौंकने की बात भी है....क्योकि इनमे से कुछ को तुम जानते भी नही...और कुछ के यहाँ होने का तुम्हे यकीन भी नही हो रहा होगा ...क्यो है ना...
संजू(सिर हिला कर)- ह्म्म...
सूमी- ह्म्म...इसलिए तो मैने आज सबको बुलाया है...ताकि अच्छे से जान पहचान हो जाए....तो...समर, रिचा और मुझे तो तुम जानते ही हो....हाँ..ये है मदन...ये रघु...
संजू(बीच मे)- रूको....थोड़ा रूको...
सूमी(हैरानी से)- क्या...क्या हुआ....
संजू- मैं हर सक्श के बारे मे जानना चाहता हूँ....
समर- हा..वही तो बता रहे है.....
संजू(हँस कर)- आप समझे नही....असल मे....मैं सबकी पूरी डीटेल जानना चाहता हूँ...और इनकी अंकित से दुश्मनी की वजह भी....ह्म...
समर(मुस्कुरा कर)- ह्म...ज़रूर....तुम्हे सब बतायगे....ये लोग खुद अपनी कहानी बतायगे....
संजू(चेयर पर बैठ कर)- तो देर किस बात की...शुरू हो जाओ....
और फिर संजू ने एक-एक करके सबकी असलियत सुनी और अंकित से दुश्मनी की वजह भी.....
ये सब ख़त्म होने के बाद सब वहाँ से निकल गये...पर सूमी ने संजू को रोक लिया.....
संजू- तो...मुझे क्यो रोका...क्या फिर से मूड बन गया....
सूमी- मूड तो बनता ही रहता है.....पर आज तुम्हे एक गिफ्ट देने के लिए रोका है....
संजू(हास कर)- तुम्हारी बेटी....वो कोई गिफ्ट है क्या...हाँ...
सूमी- नही...वो भी नही...अंदर कोई खास है.....जिससे मिल कर तुम बहुत खुश होगे....
संजू(हैरानी से)- क्या....ऐसा कौन है....
सूमी(मुस्कुरा कर)- बाजू वेल रूम मे जाओ....और खुद देख लो....
फिर संजू हैरानी से भरा हुआ बाजू वाले रूम मे गया...और उसने जैसे ही गेट खोला तो उसकी आँखे फटी रह गई....
संजू( चौंक कर)- आप...यहाँ....वो भी ऐसे.....क्यो......????????????
संजू ने जैसे ही रूम का गेट ओपन किया तो उसे सामने रेणु दिखाई दी...जो एक सेक्सी ड्रेस पहने संजू का वेट कर रही थी.....
संजू(हैरानी से)- आप यहाँ क्या कर रही है....
रेणु(मुस्कुरा कर)- वही...जो तुम कर रहे हो....
संजू- क्या मतलब....
रेणु(आगे आ कर)- असल मे....मैं तुम्हे करीब से देखना चाहती थी...बिल्कुल करीब से.....
संजू(गुस्से से)- बकवास बंद करो....और जाओ यहाँ से....
रेणु(हँसते हुए)- अरे....ये क्या....तुम्हारा तो मूड ही कुछ और है....
संजू(गुस्से से)- हाँ...
और इतना बोलकर संजू जाने के लिए पलटा...पर रेणु की बात सुनकर वही रुक गया.....
रेणु- ओह्ह...तो नमर्द हो....हहहे....
संजू(गुस्से से)- तेरी इतनी हिम्मत....अरे मैं तो ये सोच कर जा रहा था कि तू मेरे दोस्त की बेहन है...पर तू तो...
रेणु(बीच मे)- कौन दोस्त....जिसको तुम धोखा दे रहे हो....ऐसी होती है दोस्ती...हुहम...
संजू(गेट लगा कर)- बहुत बोलती है...अब तो अच्छे से समझना ही होगा...
रेणु- ह्म्म...लगता है मर्दानगी जाग गई. ..
संजू(आगे बढ़ कर)- ह्म्म..अब ऐसी मर्दनिगि दिखाउन्गी की बाकी सारे मर्दो को भूल जाएगी....
रेणु(हँसते हुए)- अच्छा....तो देर किस बात की....ये लो...तुम्हारी मर्दनिगि को थोड़ा बढ़ा दूं...
इतना बोलकर रेणु ने अपनी ड्रेस ओपन करना शुरू की पर संजू ने आगे बढ़ कर उसे रोक लिया....
संजू(मुस्कुरा कर)- इसकी ज़रूरत नही....ये मैं देख लुगा....
संजू की बात सुन कर रेणु हैरान हो गई....
रेणु- ठीक है...तुम ही करो...पर पहले एक बात बताओ....तुम अंकित को धोखा क्यो दे रहे हो....
संजू- अपना...अपना मतलब है...और क्या...
रेणु- पर ये ग़लत है......तुम उसके दोस्त हो....
संजू(चिल्ला कर)- और तू उसकी बेहन है....बेहन...फिर भी धोखा...हाँ....
रेणु(सहम कर)- पर मेरे पास वजह है...और मैं सिर्फ़ आकाश को बर्बाद करना चाहती हूँ...अंकित को नही...
संजू(मुस्कुरा कर)- वजह तो मेरे पास भी है....और मेरी वजह तुमसे कही ज़्यादा बड़ी है...
रेणु(हैरानी से)- तुम्हारी....क्या है वो वजह....
संजू- बैठो....बताता हूँ.....
अंदर रेणु और संजू अपने काम मे मसगूल थे तो बाहर सूमी और उसकी बेटी गेट से कान लगाए अंदर की बातें सुनने की कोसिस मे थी....पर कोई फ़ायदा नही हुआ....रूम के बाहर कोई आवाज़ नही पहुँची.....
काफ़ी देर बाद जब संजू ने गेट खोला तो सूमी गिरते-गिरते रह गई....
संजू(कड़क आवाज़ मे)- ये क्या हो रहा था .....
सूमी(हँसते हुए)- अरे वो...मैं तो वो...मतलब मैं सोच रही थी कि अंदर कुछ जोरदार हो रहा होगा....पर आवाज़ नही आई...तो मैं....
संजू(मुस्कुरा कर)- तुम नही सुधरोगी.....चलो...अब हम चलते है....आओ रेणु ....
सूमी- अरे चले जाना....पर ये तो बताओ कि मज़ा आया कि नही.....
संजू(रेणु को देख कर)- ह्म्म....आज तो बहुत मज़ा आया...दिल खुश हो गया....
सूमी(इतराते हुए)- माल किसने चुना था....खैर....ये बताओ कि इतना कड़क माल होते हुए भी आवाज़े नही आई...ह्म...
संजू- कभी..कभी खामोशी मे भी इतना मज़ा आता है...जो शायद आवाज़ मे नही होता....
रेणु(आगे बढ़ कर)- सही कहा....खामोशी ने वो कर दिया जो आवाज़ नही कर सकती थी....अब चलो संजू....मुझे घर छोड़ दो...
और इतना बोल कर संजू रेणु को ले कर निकल जाता है और सूमी हैरानी से उन्हे जाता देख सोच मे पड़ जाती है......
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