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चूतो का समुंदर

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रेणु के घर............

मदन(चौंक कर)- ये क्या बोल रहे हो....ये नही हो सकता....

समर- मुझे भी यही लगा था...पर अब मैं पूरे कॉन्फिडेंट के साथ बोल सकता हूँ कि इसके पीछे ज़रूर कोई और है....

मदन- पर और कौन हो सकता है....जिसे रिचा से कोई फ़ायदा या नुकसान हो....

समर- पता नही...पर कोई तो है...जिसने रिचा को गायब किया है....

मदन- हो सकता है कि ये उसी लड़के की कोई चाल हो....

समर- ह्म..हो सकता है...पर वो ऐसा क्यो करेगा....उल्टा वो तो रिचा से सच उगलवा कर हम सबकी बॅंड बजा देता....नही...वो अपना नुकसान नही करेगा....

मदन(सोच कर)- ह्म...तो फिर कौन हो सकता है....

समर(आँखे दिखा कर)- कही कोई हमारा साथी तो नही...कोई हमे धोखा देना चाहता हो....या फिर हमे फसाना....

मदन- ऐसा कौन हो सकता है....

समर- हो सकता है कोई करीबी हो...जो अंकित से प्यार करता हो...शायद उसी ....

मदन(बीच मे)- नही...रेणु ये कभी नही करेगी....वो अंकित को मारना नही चाहती...मैं जानता हूँ...पर वो रिचा को क्यो गायब करेगी...नही....उस पर शक मत करो...

समर- ओके...मान लिया...पर अब क्या...कही अंकित को सच्चाई पता लग गई हो तो...रिचा ने सब बक दिया हो तो...फिर क्या...सब ख़त्म....

मदन- नही...तुम...तुम घबराओ मत...ये पता करने का तरीका है मेरे पास...

समर(चौंक कर)- कैसा तरीका....

मदन(मुस्कुरा कर)- ह्म....तरीका बड़ा पुराना है दोस्त....बस देखते जाओ....

और फिर मदन , समर जो वेट करने का बोल कर अंदर चला जाता है...और कुछ देर बाद बाहर आ कर समर और रघु को साथ ले कर घर से निकल जाता है.....

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यहाँ मैं अपने आपको कोस्ता बैठा हुआ था कि मुझे अपने पीछे किसी के होने का अहसास हुआ और मैं पलटा....

पलट के जब सामने खड़े सक्श को देखा तो मैं हैरान रह गया....आख़िर इसे कैसे पता की मैं यहाँ हूँ....

मैं(अपनी आँखे पोछ कर)- तुम....यहाँ...कैसे....????

""तुम्हारे लिए अभी ये जानना ज़रूरी नही कि मैं यहाँ कैसे....अभी ये जानना ज़रूरी है कि रिचा कहाँ गई....है ना...""

मैं(शॉक्ड)- क्या....तुम कैसे....और ये कैसे पता कि रिचा गायब हो गई...हाँ....

""क्योकि वो मैं ही हूँ....जिसने उसे गायब किया है....समझे....""

उसकी बात सुन कर तो मेरी हैरानी का ठिकाना ही नही रहा....

मैं(मन मे)- रिचा को इसने गायब किया....पर क्यो.....??????????

अब तक मैं सोच-सोच कर परेशान हो रहा था कि रिचा को किसने गायब किया होगा...पर अब जब उसे गायब करने वाला मेरे सामने खड़ा था...तो मुझे यकीन ही नही हो रहा था...

क्योकि मेरे सामने जो सक्श खड़ा था....उसकी रग-रग से मैं वाकिफ़ था....क्यूंकी वो और कोई नही...बल्कि मेरा खास दोस्त संजू था.....

संजू- इतना मत सोच भाई...मैं सच बोल रहा हूँ....बिलीव मी....

मैं(झटके से)- तू...पर...हुह...तूने रिचा को गायब किया....वो भी मेरे सामने से...हाँ...

संजू- हाँ बिल्कुल.....

मैं(सिर हिला कर)- नो...नो...तू नही हो सकता....मैं...आहह...तू कैसे हो सकता है....

संजू(आगे बढ़ कर)- मैं जानता हूँ कि तू हैरान है ये सब सोच कर...पर ये सच है भाई....मैने ही रिचा को गायब किया है....

मैं- ओहक...चल मान लिया...पर क्या ये बताने की जहमत उठाएगा की तूने ये सब किसके कहने पर किया....ह्म...

संजू- किसी के नही...मैने उसे गायब किया....अपने लिए...

मैं(हैरानी से)- ओह...अच्छा...तूने ये सब अपने लिए किया...हाँ....पर ये तो बता कि ये सब करने से तेरा क्या फ़ायदा...हा...

संजू मेरी बात सुन कर खामोश रहा और फिर इधर-उधर देखने लगा...

मैं(उंगली दिखा कर)- देखा...पकड़ा गया....मैं जानता था....तू झूठ बोल रहा है...बिल्कुल झूठ...पर क्यो...कोई तो है...जिसके लिए तूने मुझसे झूठ बोला...कौन ..कौन है वो....???

संजू(ज़ोर से)- अंकित....मैं सच बोल रहा हूँ....मैने ही रिचा को गायब किया...और वो भी सिर्फ़ मेरे लिए...और ये सच है....पूरा सच....

मैं(घूर कर)- तेरी आँखे बता रही है कि तू सच बोल रहा है...हुह....तब तो बड़ी प्राब्लम हो गई...है ना....तूने रिचा को गायब किया...वो भी मेरे सामने से....हाँ...

संजू(नज़रे झुका कर)- ह्म...

मैं(चिल्ला कर)- पर क्यो.....???

संजू- बताउन्गा...सब बताउन्गा...पर पहले एक वादा करना होगा....

मैं- कैसा वादा....

संजू(हाथ बड़ा कर)- अगर मुझ पर भरोसा है तो वादा कर...की जो मैं कहुगा वो तू मानेगा....बोल...वादा करता है....

मैं(हाथ मिला कर)- तुझ पर आज भी उतना ही भरोसा है...जितना पहले था....चल वादा...अब बोल....

फिर मैं संजू के साथ शाम ढलने तक वहाँ बैठा रहा....संजू ने काफ़ी कुछ बताया.....और उसकी बातें सुन कर मुझे अहसास हुआ कि क्यो संजू ने मुझे अमर की फॅमिली के बारे मे नही बताया....

संजू(नम आँखो से)- अब तू ही बता....मैं क्या करता...मेरे पास कोई दूसरा ऑप्षन था ही नही ...

मैं(संजू के कंधे पर हाथ रख कर)- आज से तू अकेला नही मेरे दोस्त....मैं तेरे साथ हूँ...

संजू- थॅंक्स...मुझे पता था कि तू मेरी बात समझ जायगा...फिर भी मुझे...मुझे डर था कि तू शायद...आइ म सॉरी....

मैं(मुस्कुरा कर)- तूने अंकित की दोस्ती को पहचाना ही नही सायद....कोई नही...अब जान गया ना....अब टेन्षन फ्री हो जा....और कर तुझे जो करना है....ह्म...

संजू(मुस्कुरा कर)- ह्म...चल अब...रात हो गई ...घर चलते है...

मैं- ह्म..रात तो हो गई...चल आज बियर पीते है...पहले की तरह...बियर वित चिकन...क्या बोलता है...

संजू(मुस्कुरा कर)- तू साला टेन्षन मे भी मज़े से जीता है...चल आजा ...

और फिर हम दोनो बियर पीने अपने पुराने अड्डे पर निकल गये.......

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अंकित के घर ..............

आकाश अपने रूम मे परेशान हो कर घूम रहा था ...और परेशानी की वजह थी सुजाता....

आकाश(मन मे)- ये अंकित ने कहाँ फसा दिया यार....अब सुजाता को कैसे मनाऊ...पता नही...पर मनाना तो होगा ही....नही तो अंकित का प्लान पूरा कैसे होगा...ह्म ..कुछ तो करना होगा....पर करू क्या....क्या उसके पास जाो...पर क्या वो मानेगी....

इसी तरह बहुत देर सोचने के बाद आकाश ने तय कर लिया कि वो सुजाता को किसी भी हाल मे मना कर रहेगा...और वो सुजाता के रूम मे पहुँच गया....

पर जैसे ही वो रूम मे पहुँचा तो सुजाता गायब थी...रूम बिल्कुल खाली था ....

आकाश(मन मे)- अब ये कहाँ गई...भाग तो नही गई ....

आकाश परेशानी मे आगे बढ़ा तो उसे कुछ आवाज़ आई और वो समझ गया की सुजाता वॉशरूम मे है...

आकाश(हिचकिचा कर)- हह..हेलो....सुजाता....

पर आकाश को कोई रिप्लाइ नही मिला...तो आकाश ने हिम्मत जुटा कर फिर से आवाज़ दी...

आकाश- सुजाता....मैं...मैं माफी माँगता हूँ...मुझसे ....ग़लती हो गई....

इस बार भी सुजाता की तरफ से कोई जवाब नही मिला तो आकाश बाथरूम के पास पहुँच गया और गेट नॉक कर के फिर से बोला.....

आकाश- प्ल्ज़ सुजाता....बस इस बार माफ़ कर दो....आयेज से ग़लती करू तो जो सज़ा चाहे वो देना...पर इस बार माफ़ कर दो...

इतना बोल कर आकाश जवाब का इंतज़ार ही कर रहा था कि तभी बातरूम का गेट खुला और सुजाता ने आकाश को अंदर खीच लिया.....

आकाश- ओह...ये...क्या....

और इतना बोलते ही आकाश की बोलती बंद हो गई और वो सामने खड़ी सुजाता को देखने लगा.....जो इस वक़्त टॉवेल मे थी...

आकाश- सुजाता...तुम...मैं तो यहाँ...माफी....

सुजाता(आकाश के होंठ पर उंगली रख कर)- सस्शह....आपके मुँह से माफी शब्द अच्छा नही लगता....बल्कि आप तो....

और अपनी बात अधूरी छोड़ कर सुजाता आकाश के सामने बैठ गई...

आकाश(घूरते हुए)- मैं बाद मे....

सुजाता(बीच मे)- सुनिए तो....बात तो पूरी कीजिए....

आकाश- वो...वो मैं तुमसे माफी....मैं माफी चाहता हूँ....

सुजाता(मुस्कुरा कर)- माफी...ह्म ....चलिए माफ़ किया....

आकाश- ठीक...तो मैं चलता हूँ...

और आकाश हड़बड़ाया सा बाहर आने लगा पर सुजाता ने उसे आवाज़ दे कर रोक लिया....

सुजाता- क्या ऐसे ही चले जायगे....मुझे मार सकते हो तो क्या थोड़ी खुशी नही दे सकते...ह्म...

सुजाता की बात सुन कर आकाश पलटा तो एक बार फिर चौंक गया...क्योकि सुजाता ने अपनी बॉडी से लिपटी टवल निकाल फेकि थी और इस वक़्त वो बिल्कुल नंगी थी.....

औरत को सामने नंगा देख कर तो कोई भी मर्द मचल उठे....बस आकाश का भी यही हाल था....सुजाता की गदराई बॉडी देख कर आकाश के जिस्म मे भी सनसनी होने लगी...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- अब माफी माग ही ली तो खुशी भी दे दो ना...ह्म...

आकाश(मन मे)- ये तो सच मे रंडी की तरह हो गई....बस चुदवाने का मौका चाहिए...छ्ची...

सुजाता- अब क्या मेरे लिए इतना भी नही कर सकते....

आकाश(झटके से)- ह्म..हा...क्यो नही...बोलो क्या चाहिए तुम्हे...हा...

सुजाता(मन मे)- अब आया ना लाइन पर...चलो ठीक ही है....मुझे तो डर था कि कही मेरा सारा प्लान चौपट ना हो जाय...पर अब लगता है कि सब मेरे हिसाब से ही चलेगा....

आकाश(आँखे फाड़ कर)- बोलो ना...क्या चाहिए.....

सुजाता(मुस्कुरा कर)- आप भी ना....एक औरत पूरी नंगी हो कर आपके सामने बैठी है और आप पूछते है कि उसे क्या चाहिए....क्या आप नही जानते कि औरत को खुश कैसे किया जाता है....

आकाश- हाँ...हाँ जानता हूँ...तुम्हे...पर अभी....यहा....

सुजाता(आकाश के पास आ कर)- लगता है मुझे ही आगे बढ़ना होगा...कोई बात नही....मैं अपनी खुशी के लिए इतना तो कर ही सकती हूँ ना...

और सुजाता ने जल्दी से आकाश की नाइट ड्रेस निकाल दी और उसके आधे खड़े लंड को हाथ मे ले कर हिलाने लगी....

आकाश(आँख बंद कर के)- उउंम्म....सुजाता....तुम सच मे....उउंम्म...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- हा मेरे राजा...मैं सच मे बेशरम हूँ...आगे-आगे देखते जाओ...

और फिर सुजाता घुटनो पर बैठ गई और आकाश के लंड को मुँह मे डाल लिया...और चुसाइ शुरू कर दी...

सुजाता आकाश के लंड को चूस-चूस कर तैयार करने मे जुट गई और आकाश आँखे बंद किए हुए मस्ती मे सिसकने लगा....

सुजाता(मन मे)- ह्म....मैं तुम्हे हाथ से कैसे जाने देती...तुम तो मेरे लिए एक ख़ज़ाना हो....जिसके पैसो से मुझे ऐश करना है...और इस लंड मे भी दम है...और क्या चाहिए.....

आकाश(मन मे)- साली...आज तूने साबित कर दिया की तू पैसो के लिए सारी हदे पार कर सकती है....अब देख...तेरा अंजाम क्या होगा...रॉयगी साली...बहुत रॉयगी....और तब तक मैं तुझे रंडी की तरह चोदुन्गा साली.....चूस....और चूस....

सुजाता- उूउउम्म्म्म....उूउउम्म्म्मम.....उूुउउम्म्म्मम....उूउउम्म्म्मम....

आकाश- आआहह....ज़ोर से रानी....ऐसे ही....पूरा लो ....उूउउम्म्म्म....

सुजाता- उउउंम्म..उूउउम्म्म्म...उूउउम्म्म्म....उउउंम...

आकाश- एसस्स.....मज़ा आ गया....करती रहो...उूउउंम्म....

और थोड़ी देर तक सुजाता ने शानदार तरीके से लंड चूसा और उसे चुदाई के लिए रेडी कर दिया....सुजाता की चूत भी चुदाई का सोच कर पानी छोड़ने लगी थी...अब बस चूत को लंड की माँग थी...

सुजाता ने चूसना बंद किया और आकाश के सामने लेट गई....आकाश समझ गया कि अब चूत लंड माग रही है...और आकाश ने देर नही की....

आकाश ने सुजाता की टांगे हवा मे उठाई और दो धक्को मे ही लंड को चूत मे उतार दिया.....

सुजाता- आआहह....अब रूको मत....ठोक दो...जल्दी...

आकाश- हाँ मेरी रानी....ये लो...

और फिर आकाश ने पूरे जोश मे धक्के मारना शुरू कर दिया और सुजाता की मस्ती भरी सिसकिया बाथरूम मे गूज़्ने लगी....

सुजाता- आ..आअहह..आहह…आहह..आहह…अहह...

आकाश-ययईएह….ययईईहह…यी…ल्ल्लीए..

सुजाता-ऊहह….म्म्मा आ…आआहह….अहहाा..उउंम्म...

आकाश-ओह्ह्ह...ईसस्स....उउउंम...यईहह......

थोड़ी देर की दमदार चुदाई ने सुजाता को झडा दिया था....और उसकी टांगे ढीली पड़ गई थी...पर आकाश पूरे जोश मे ताबड़तोड़ धक्के मारे जा रहा था....

धक्को से सुजाता की पीठ घिसट कर दर्द देने लगी...पर आकाश रुका नही....

सुजाता- आआअहह...मेरी पीठ....थोड़ा रुकिये ना....

आकाश(रुक कर)- अभी रुकने का टाइम नही मेरी जान...तू एक काम कर ....पलट जा...तुझे पीछे से चोदता हूँ...जल्दी से कुतिया बन जा...जल्दी ...

सुजाता के पास कोई ऑप्षन तो था नही...वो जल्दी से पलट गई और आकाश के सामने कुतिया बन गई...

आकाश(गांद पर थप्पड़ मार कर)- वा...तेरी गांद देखते ही लंड फनफना गया....इसे भी मारूगा...पर बाद मे...अभी तो ये ले...

और आकाश ने सुजाता की कमर पकड़ के उसकी चूत मे लंड उतार दिया....और फिर से चुदाई चालू कर दी......

सुजाता(मन मे)- अब कुतिया बना या कुछ और....कोई फ़र्क नही पड़ता...बस एक बार मेरे हाथ मे आ जा...फिर सब मंजूर....

आकाश- आअहह...मज़ा आ गया आज तो....एस्स...तेरी गांद भी क्या हिचकोले खाती है...उउउंम्म...

सुजाता- आअहह....सच मे...तो करो ना....जितना मन चाहे करो...आआहह...

आलाश- वा मेरी जान....ये ले...ईएह...ईएहह....

और एक बार फिर से बाथरूम मे चुदाई की आवाज़े शोर मचाने लगी....

सुजाता- आह..आहह…अहह...और तेज मेरे राजा....उउउम्म्म्म

आकाश-ययईएह….ये ले....ले....ईएहह.....

सुजाता-आआहह….अहहाा....क्या बात है...मस्त चोदते हो...और तेज...आअहह...

आकाश-हाँ मेरी जान....मज़ा ले...मज़ा ...यययहह.....

सुजाता- आअहह...बस...मेरा होने वाला...आअहह...

आकाश- मेरा भी....ईईएहह....ययययईहह....यईहह....

और फिर चुदाई का तूफान थम गया और दोनो तक कर बैठ गये ....

सुजाता(थोड़ी देर मे)- अभी मैं पूरी तरह खुश नही हुई राजा....

आकाश(मुस्कुरा कर)- कोई बात नही....रात बाकी है....पूरी रात खुश करूँगा....पर अब यहा नही...बेड पर चलो...

सुजाता- ह्म्म...बेड पर ही ठीक रहेगा....थोड़ा रेस्ट भी कर लेगे...

फिर वो दोनो उठ कर बेड पर आ गये...और रेस्ट करने लगे....

पर इससे पहले की इन दोनो का चुदाई प्रोग्राम दुबारा शुरू होता....डोरबेल बज गई...और दोनो चौंक गये...

सुजाता- ज़रूर अंकित होगा....

आकाश- हाँ...वही होगा सयद...और उसने मुझे तुम्हारे रूम मे देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी....मैं ...मैं अभी चलता हूँ....बाद मे आउगा....

सुजाता(मुँह बना कर)- ठीक है...आप उसे देखो...तब तक मैं नहा लेती हूँ...

आकाश(कपड़े पहनते हुए)- ठीक है...मैं चलता हूँ...

सुजाता- और हाँ...मैं कॉल करू तभी आना...ठीक...

आकाश(बाहर निकलते हुए)- हाँ ठीक...

और फिर आकाश ने मेन गेट ओपन किया तो सामने अंकित को खड़ा पाया...जिसे देख कर आकाश सहम सा गया.....
 
गेट खुलते ही मेरी नज़र सामने खड़े मेरे डॅड पर गई...जो थोड़ा घबराए से दिख रहे थे....

मैं- हाई, आप ठीक है...

आकाश- हाँ..हाँ बेटा...आओ...अंदर आओ....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म...पर पहले ये लीजिए....

और इतना बोल कर मैने उन्हे एक विस्की की बॉटल पकड़ा दी...जिसे देख कर वो खुश हो गये....

मैं- ह्म.....मैं जानता था कि आप खुश होंगे...यही ब्रांड है ना आपका...

आकाश(मुस्कुरा कर)- ह्म...

मैं- तो चलिए फिर...मेरा मतलब...आप रूम मे चलिए...मैं स्नकस ले कर आता हूँ...ह्म..

आकाश- अरे बेटा...मैं देख लुगा...तुम जाओ...

मैं- नही..आप चलिए तो...मैं लाता हूँ...

और मैने डॅड को उनके रूम मे भेज दिया और स्नकस एट्सेटरा लेकर उनके रूम मे पहुँच गया....

मैं- ये लीजिए...आप मज़े करे...मैं चलता हूँ...

आकाश- अरे बेटा...तुम भी बैठो ना...

मैं(मुस्कुरा कर)- नही....मैं अभी इतना बेशरम नही कि आपके साथ बैठ कर पी सकूँ....आप पीजिए....

और मैं वहाँ से निकल कर पारूल के रूम मे पहुँच गया...वहाँ मैने देखा कि पारूल अंधेरे मे लेटी हुई थी....और जैसे ही मैने लाइट ऑन की तो वो हड़बड़ा कर बैठ गई...और मुझे उसकी नम आँखे नज़र आ गई...

मैं(आगे बढ़ कर)- अरे...मेरी गुड़िया रो रही है...हाँ...

पारूल(आँख सॉफ कर के)- न्न्न..नही तो...मैं तो बस...

मैं(बेड पर बैठ कर, बीच मे)- बस...मुझसे झूठ बोलने की ज़रूरत नही....चलो बताओ...क्या हुआ...किसी ने कुछ कहा क्या...या कोई और प्राब्लम...ह्म..

पारूल- नही भैया....वो बस...मुझे थोड़ा...अकेलापन....

मैं- ओह्ह...अकेलापन...पर क्यो...क्या मैं मर गया...

पारूल(बीच मे)- भैया...मरे आपके दुश्मन....मैं तो बस ऐसे ही...थोड़ा सा बुरा लग रहा था....

मैं(पारूल का हाथ पकड़ कर)- किस बात का बुरा बेटा...मैं हूँ ना यहाँ....

पारूल- ह्म्म...पर आप इतने बिज़ी रहते हो की मेरे लिए टाइम ही नही...और मैं सारा दिन अकेले पड़ी रहती हूँ...

मैं(मुस्कुरा कर)- ओह्ह...ऐसा है..चलो तुम्हारे अकेलेपन को दूर कर देते है...कल से तुम रक्षा के साथ रहना....और जब मैं फ्री हो जाउन्गा तब वापिस आ जाना ...ह्म..

पारूल- भैया...आप ऐसे कौन से काम मे बिज़ी रहते हो कि मेरे लिए कुछ पल भी नही है...

मैं- बेटा...मैं सब बताउन्गा..बस एक बार काम पूरा हो जाए...ओके...

पारूल- भैया....आप नही होते तो मुझे डर लगता है...की पता नही मेरी लाइफ का क्या होगा...

मैं(पारूल को गले लगा कर)- नही बेटा....डरना मत....तेरी लाइफ मे खुशिया ही ख़ुसीया होगी...मैं रहूं या ना रहूं...ओके...

पारूल- भैया...ऐसा मत बोलिए...आप हमेशा मेरे साथ रहना....

मैं(मुस्कुरा कर)- अरे वो तो डाइयलोग था..मैं तेरे साथ हूँ....टेन्षन मत ले...और अब तू आराम से सो जा...रोना मत...

पारूल(मुस्कुरा कर)- जी भैया...

मैने फिर पारूल को लिटाया और वापिस जाने लगा...तभी मुझे कुछ याद आया...

मैं(पलट कर)- और हाँ...बहुत जल्द तुम्हे एक शानदार गिफ्ट मिलने वाला है...ओक...

पारूल(खुश हो कर)- सच भैया....पर जल्दी देना...

मैं- ह्म..पर अभी सो जा...गुड नाइट...

पारूल- ओके भैया...मुझे गिफ्ट का इंतज़ार रहेगा.....गुड नाइट....

मैं(बाहर आ कर, मन मे)- गिफ्ट का इंतज़ार तो मुझे भी है बेटा...पर पता नही मुझे गिफ्ट मिलेगा भी या नही....वेल..गिफ्ट को बाद मे देखेगे...अभी उस चुड़ेल को देख लूँ ज़रा....देखे तो साली क्या कर रही है.....

और फिर मैने डॅड के रूम मे एक नज़र मारी और उन्हे दारू के मज़े लेता देख कर चुपचाप सुजाता के रूम मे चला गया....

सुजाता(गेट खुलते ही)- ह्म...आ गये जनाब...

और जैसे ही गेट पूरा खुला तो सुजाता चौंक गई...क्योकि सामने मैं खड़ा था...और वो इस वक़्त नंगी खड़ी थी और उसके बदन से निकली टवल पीछे टेबल पर थी...

मैं समझ गया कि साली नहा कर निकली है...क्योकि उसके बदन पर पानी की कुछ बूंदे अभी भी धड़क रही थी....

मैं(घूर कर)- ओह हो...पूरी तैयारी मे हो....किसका इंतज़ार था...ह्म...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- वो...तुम्हारा ही...और कौन है इस घर मे , जिसका इंतज़ार मैं इस हाल मे कर सकती हूँ...

मैं(मन मे)- हाँ रंडी...बना ले बातें...पर सच तो मैं जानता हूँ तेरा...हुहम...

सुजाता- अब गेट तो लगा तो....कही किसी ने मुझे इस हाल मे देख लिया तो गजब हो जायगा....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म...लो लगा दिया....अब ये बताओ कि तुम्हे कैसे पता कि मैं आया हूँ...

सुजाता(मन मे)- अब क्या बोलू....सब गड़बड़ हो गई...

मैं(पास जा कर)- अब बोल भी दो...

सुजाता(मेरे सीने पर हाथ फिरा कर)- अरे..ये कोई पूछने की बात है....इस हुश्न के सरताज तो आप ही है...तो भला और कौन आ सकता है यहाँ...

मैं- ओह हो...सरताज....तो फिर सरताज को हुश्न के दीदार तो कराओ....

सुजाता- हुश्न तो आपके सामने है हुजूर....दीदार क्या...आप तो इसे चखिए...मसलिये....सब आपका ही है...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म....चखेगे भी और मसलेगे भी....पर पहले मूड तो बनाओ....ऐसे दीदार करने से मूड नही बनता हुमारा...कुछ खास पेश करो...ह्म...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- क्यो नही...खास लोगो के लिए खास नज़ारा भी है....आपका मनपसंद नज़ारा दिखाती हूँ....

और इतना बोलकर सुजाता वही टेबल पर लेट गई और अपनी टांगे खोल कर चूत दिखाने लगी...एक दम चिकनी चूत....

मैं(बैठ कर)- उउउंम...ये हुई ना बात....यही वो नशा है जो दारू को भी मात दे दे....क्या मस्त नज़ारा है...आज तो सारी रात इसका रस निकालेगे....

सुजाता- तो देर किस बात की सरकार....निकालिए ना रस....मैं तो कब से इंतज़ार मे हूँ....

मैं(चूत पर हाथ फिराते हुए)- ह्म..निकालेगे....थोड़ा सबर करो....मूड तो बनने दो...

और फिर मैने सुजाता की चूत के साथ मस्ती शुरू कर दी....कभी चूत सहलाता तो कभी चूत मे उंगली डाल देता...तो कभी जीभ फिरा कर चूत का स्वाद चख लेता...

मेरी हरक़तों से सुजाता जल्दी ही गरम हो गई और उसकी चूत पानी बहाने लगी...इधर मेरा लंड भी पेंट मे टाइट हो गया था...

मैं(खड़ा हो कर)- चल आजा...अब तू भी चख ले....

सुजाता मेरा मतलब समझ गई और तुरंत घुटनो पर आकर मेरा लंड आज़ाद कर दिया और देखते ही देखते मुँह मे डाल कर चूसना शुरू कर दिया....

सुजाता(मन मे)- कुछ भी कहो....कमीना भले ही है...पर हथियार जबर्जस्त है....पूरा मज़ा देता है....उउउंम्म...

मैं- आअहह...चूस साली...जी भर कर चूस.....

और सुजाता पूरा मन लगा कर मेरे लंड के हर हिस्से को चूसना शुरू कर दिया....

मैं- आअहह...ऐसे ही...ये ठीक है...ऐसे ही....

सुजाता- उूुउउम्म्म्मम....उूउउंम्म....उउउम्म्म्म...उउउम्म्म्म....

मैं- एस....कम ऑन...एसस्स......

सुजाता-सस्स्स्सुउउउप्प्प…ऊओंम्म….उउउंम्म….सस्स्रर्र्र्र्रप्प्प्प

मैं-आआहह….क्कक्या चूस्ति हो….और तेज…हहाअ …ऐसे ही...

सुजाता-सस्स्स्र्र्ररुउउप्प्प…..ऊओंम्म….उउउंम्म…सस्स्रररुउउप्प...उउंम्म...

मैं-आअहह…..ऐसे ही…और तेज साली.....आअहह…

आंटी-सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प….सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प…..उूुउउम्म्म्ममनममम….सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प......

मैं(सुजाता को रोक कर)- बस कर...अब आजा....कुतिया की फाड़ तो दूं....

और इतना बोल कर मैने सुजाता को सोफे पर कुतिया बनाया और एक जोरदार धक्का मार कर लंड को चूत मे पेल दिया....

सुजाता- आआअहह...धीरे.....

मैं- अभी तो बाकी है...ये ले...

और दूसरे धक्के मे पूरा लंड चूत मे समा गया...और सुजाता चीख उठी....

सुजाता- म्म्मा आअ.....मर गई रे....

मैं- नखरे बंद कर....पहली बार नही चुद रही है....

सुजाता- पर तेरा बड़ा है ना....आअहह...

मैं- बड़ा ही मज़ा देता है तेरे जैसो को...चल मज़ा ले अब....

और फिर मैने जोरदार चुदाई शुरू कर दी...

सुजाता(मान मे)- मज़ा आ गया....ये है असली लंड....अंदर तक फाड़ देता है....असली चुदाई तो अब शुरू हुई....

मैं- मज़ा आ रहा है ना....हा....यहह...ईएहह....

सुजाता-आहह….उउउफफफ्फ़..म्माआ….

मैं- बड़ी गर्मी थी ना.... मरवाने की...हा....

सुजाता-आहह…हाँ...तू बस.. मार…ऐसे ही..आहह....

मैने भी सुजाता के कहते ही उनके बूब्स को ज़ोर से पकड़ा और तेज़ी से धक्के मारने लगा……

सुजाता-आअहह….आआहह..ऊहह..मा..

मैं-मज़ा आया...

आंटी-आअहह…बहुत….मार और तेज..…अहहह...

थोड़ी देर की दमदार चुदाई मे ही सुजाता झड गई और फिर लंड पुच-पच की आवाज़ के साथ चूत की गहराइयों मे जाने लगा.....

पर ऐसे खड़े-खड़े चुदाई करने से मेरे पैरो मे दर्द होने लगा...उपेर से मैं फुल ड्रिंक किए हुआ था...तो मैने सुजाता की चूत से लंड निकाला और बेड पर जा कर लेट गया....

सुजाता(हैरानी से)- क्या हुआ...

मैं- कुछ नही...आजा तुझे लंड की सवारी कराता हूँ...आजा...

सुजाता तुरंत खुस हो कर मेरे उपेर आ गई और अपने हाथो लंड को चूत मे ले कर उछल्ने लगी...और एक बार फिर उसकी सिसकिया शुरू हो गई.....

सुजाता उछल-उछल कर लंड का मज़ा ले रही थी...और मैं आराम से लेटा हुआ उसके उछल्ते बूब्स देख कर मुस्कुरा रहा था....

फिर मुझे सरारत सूझी और मैने सुजाता को उपेर उठाकर लंड को चूत से बाहर कर लिया और फिर उसे तेज़ी से नीचे बैठा दिया...और एक बार मे पूरा लंड अंदर डाल दिया....

सुजाता-आआहह…..म्म्म्मा आररररर द्दददााालल्ल्ल्ल्ल्ल्लाआ

मैं(हँसते हुए)- अब ज़्यादा मज़ा आयगा....लगी रह.....

और सुजाता ने सिसकते हुए उछल्ना जारी रखा.....

सुजाता- अया..आअहह..आहह…आहह..आहह…अहह...

मैं-ययईएह….ययईईहह…और तेज..हाँ..

सुजाता- -ऊओ….म्म्मा आ…आआहह….अहहाा...

सुजाता पूरे मन से अपनी चूत को लंड पर पटकते हुए मज़ा ले रही थी...आज उसका जोश कुछ ज़्यादा ही था...और इसी जोश की वजह से अगले 10 मिनिट मे वो फिर से झड गई और उसका चूत रस मेरी जाघो पर बहने लगा....पर सुजाता ने उछल्ना बंद नही किया....वह तब तक उच्छलती रही...जब तक थक कर चूर नही हो गई...

सुजाता(उपेर लेट कर)- आआहह...अब नही...थक गई मैं ...आआहह...

मैं- कोई नही....मेरी कुतिया थक गई तो क्या....अब मैं कुतिया की बजाउन्गा....

और इतना बोल कर मैने उसे साइड मे कुतिया बनाया और ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी.....
 
pongapandit wrote: ↑ 22 Aug 2017 18:17
मित्र ५ लाख व्यूज पाने वाली आपकी दूसरी कहानी है पहली कहानी XYZ की मैं और मेरा परिवार है

आपकी इस कहानी को ये स्थान पार करने के लिए बधाई
 
मैं- आअहह...अब तू मेरी कुतिया बन गई....

आंटी- आअहह...हाँ..मार कुतिया की...ज़ोर से मार...आआहह....

और मैने सुजाता की कमर पकड़ कर जोरदार चुदाई स्टार्ट कर दी....

सुजाता-आअहह….माअर…बेटा…मार…ज़ोर से…आहह....आहह…बेटा…ज़ोर से…आअहह..ऊहह..ऊहह...

त्ततप्प…त्तप्प्प…आअहह…आहह..त्त्थप्प…त्ततप्प्प्प....

मैं-यस...अब फाड़ता हूँ …ये ले…

सुजाता-आआहह..आहह..आह…आ..आह..आह..ज्जोर्र..सससे..उउउम्म्म्ममम…हमम्म…आअहह.....

मेरे हर धक्के पर मेरी जाघे सुजाता की मोटी गांद से टकरा कर रूम मे तालियों की आवाज़ सुना रही थी....

सुजाता भी फुल जोश मे अपनी गांद पीछे कर के लंड का मज़ा ले रही थी...और चुदाई की आवाज़ो से रूम गूज़्ने लगा था....

मैं-आहह….थक गई क्या साली...ये ले...ईएह....

सुजाता-आअहह….हहाअ…म्माअर्ररूव…त्ट्तीएजज्ज़…ऊओ.....

मैं- और तेज ये…ये लीयी…

सुजाता-आअहह…म्माआ……आऐईयइ….हहाअ…ज्ज्जोर्र…

सस्ससे…फ़ाआड़ द्दूव…उउउम्म्म्ममम......

इस दमदार चुदाई से सुजाता एक बार फिर से झड्ने लगी....

सुजाता-आअहह…अहहह..उउउंम…ऊहह..ऊहह..ऊहह..

ऊहह…ज्ज्जोर्र…सीई…मैं..मैं….आाऐययईईई….

उूउउंम्म…आहह…आहह…आह….

मैने भी थोड़ी देर बाद ही झड्ने के करीब आ गया.....

मैं- ओह्ह.. मैं भी आया….डाल दूं अंदर…या मुँह मे लेगी.....

सुजाता-आअहह…मुँह मे.…डाल दे…म्म्म्मजमा……

ऊऊहह….…..भर दे मुँह मे.....

मैं-आहह..तो फिर ये ले..अहहह..अह्ह्ह्ह....

और मैने सुजाता को पलटाया और उसके मुँह मे लंड रस की धार मारनी शुरू कर दी....और सुजाता भी चटकारे लेते गुए पूरा रस हलक मे उतारने लगी....

जब मैं पूरा झड गया तो मैं भी सुजाता के बाजू मे लेट गया और हम दोनो रेस्ट करने लगे...

रात की मस्त चुदाई के बाद मुझे बड़ी प्यारी नीद आई...जिसकी वजह से मैं थोड़ा लेट जगा....और जब जगा तो अपने आप को सुजाता के रूम मे देख कर शॉक्ड हो गया.....

मैं(मन मे)- तेरी तो....मुझे यहा इस हाल मे डॅड ने देख लिया तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी....

सुजाता(अंदर आ कर)- अरे...जाग गये तुम...

मैं- ह्म...वैसे डॅड कहाँ है...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- घबराओ मत....वो घर पर नही है...सुबह ही ऑफीस निकल गये....

मैं(हैरानी से)- ऑफीस...किस लिए...

सुजाता- पता नही...कोई बुलाने आया था तो उसके साथ निकल गये....

मैं- ओह्ह...वैसे कौन आया था....

सुजाता- मैं नही जानती....और हाँ...तुमसे मिलने भी कोई आया हुआ है....जल्दी से रेडी हो जाओ....वो इंतज़ार कर रहा है...

मैं- ठीक है...तुम उसे बैठाओ...मैं आता हूँ....

फिर सुजाता बाहर निकल गई और मैं भी जल्दी से रेडी हो कर बाहर आ गया....जहा रफ़्तार मेरा वेट कर रहा था....

मैं- ओह...तो तुम हो...आओ रूम मे चलते है...

रफ़्तार(रूम मे आने के बाद)- तुम्हारी बात सच थी...उस रूम मे सीसीटीवी कमरे लगे थे...और ये रही उसकी रेकॉर्डिंग....(और रफ़्तार ने एक सीडी मेरे हाथ मे दे दी )

मैं- ह्म्म..तो इससे क्या पता चला...क्या हुआ था वर्मा के साथ...

रफ़्तार- मैने देखा नही...मौका ही नही मिला....

मैं- ह्म..चलो ठीक है...मैं आराम से देख लुगा....और हाँ....इस केस को जल्दी से क्लोज़ करो....ओके...

रफ़्तार- हाँ...वही कर रहा हूँ...कल तक क्लोज़ हो जायगा...चलो मैं निकलता हूँ....ओके

मैं- ओके...

फिर रफ़्तार निकल गया और मैने रूम लॉक कर के सीडी चालू कर दी....आख़िर देखे तो की वर्मा के घर हुआ क्या था....

वीडियो मे.........

वर्मा रूम मे दाखिल हुआ....वो काफ़ी परेशान और गुस्से मे दिख रहा था....और आते ही वो अपनी बीवी को बुलाने लगा....जो थोड़ी देर बाद ही बाथरूम से निकल कर आ गई....

शीला- अरे...आप यहा....आज मेरी याद कैसे आ गई....

वर्मा(गुस्से से)- चुप रहो.....मुझे कोई याद नही आई...बस एक ज़रूरी बात करनी है...

शीला- पहले मुझे नहाना है...फिर बात करूगी...

और शीला मुँह बना कर बाथरूम मे चली गई...और वर्मा गुस्से मे हाथ मरोड़ता हुआ बेड पर बैठ गया.....

थोड़ी देर बाद वर्मा का फ़ोन रिंग हुआ...और स्क्रीन देख कर वर्मा के माथे पर शिकन आ गई....
 
(कॉल पर)

वर्मा- तूने फिर से कॉल क्यो किया ...

सामने- बस ये बताने कि तुझे दिया हुआ टाइम ख़त्म हो गया....

वर्मा(बीच मे)- हे....मैं तेरी धमकियों से नही डरता....तुझे जो करना है कर ले...मैं नही डरता....

सामने- देख...लास्ट टाइम बोल रहा हूँ....मेरी बात मान....वरना....

वर्मा(गुस्से से)- वरना क्या...तू कर क्या लेगा...हाँ...

सामने- ज़्यादा कुछ नही...बस एक न्यूज़ है...तुझे ब्रेकिंग न्यूज़ पसंद है ना...तो चल...टीवी ऑन कर...तुझे एक ब्रेकिंग न्यूज़ देता हूँ...हाँ...

और वर्मा कुछ बोलता इससे पहले कॉल कट हो गई....वर्मा ने तुरंत टीवी ऑन की और न्यूज़ चन्नल देखने लगा....

वर्मा(मन मे)- साला...फालतू की बकवास...इसमे तो कुछ भी नही....

पर तभी एक ब्रेकिंग न्यूज़ फ्लश होने लगी....

""लालची इंसान ने दौलत की खातिर पत्नी को बनाया वेश्या...""

ये लाइन पढ़ते ही वर्मा की आँखे बड़ी हो गई....

वर्मा- ये..ये क्या....नही...ये कुछ और होगा...मेरे बारे मे नही हो सकता...बिल्कुल नही...

पर तभी वर्मा के मोबाइल मे एक वीडियो क्लिप रिसीव हुई...जिसे देख कर वर्मा के होश उड़ गये....

उस वीडियो क्लिप मे वर्मा की बीवी की चुदाई थी....एक रंडी की तरह....और चोदने वाला था अंकित....इसके अलावा उन दोनो की कुछ ऐसी बातें भी थी...जो वर्मा की इज़्ज़त को तार-तार करने के लिए काफ़ी थी.....

वर्मा वीडियो देख ही रहा था कि फ़ोन फिर से रिंग होने लगा....उसी नंबर. से...

वर्मा- तुम्हे ये कहाँ से मिला...

सामने(हँसते हुए)- वो छोड़...ये बता कि अब मेरी बात का यकीन हुआ ना...हाँ,...

वर्मा- कौन हो तुम...

सामने- ये जानना तुम्हारे लिए ज़रूरी नही....बस तुम 50 करोड़ का इंतज़ाम कर लो...वरना ये वीडियो दुनिया देखेगी...

वर्मा- 50 करोड़...पर मेरे पास इतनी रकम नही है...

सामने(कड़क आवाज़ मे)- मैं कुछ नही जानता...सिर्फ़ 10 मिनट है तेरे पास....या तो पैसा देने के लिए हम बोल...वरना भुग्तो....

वर्मा- हेलो...हेलो...( कॉल कट हो गया)

वर्मा(फ़ोन पटक कर)- कौन है ये...और उसे ये सब कैसे मिला....

वर्मा कुछ सोच पता उससे पहले ही टीवी पर एक वीडियो फ्लश होने लगा....जो कि उसी ब्रेकिंग न्यूज़ से रिलेटेड था....हालाकी वीडियो मे कुछ सॉफ नही दिख रहा था...पर बात-चीत सॉफ सुनाई दे रही थी....

रिपोर्टर- ये देखिए....इंसान दौलत के चक्कर मे कितना गिर सकता है...सुनिए उसकी बाते...और देखिए ये वीडियो....समाज के लिए एक बदनुमा दाग......

वर्मा देखते ही समझ गया कि ये उसकी अपनी बीवी से हुई बातचीत है..और फिर अंकित के साथ हुई चुदाई भी....

तभी वर्मा का फ़ोन फिर से रिंग हुआ...

वर्मा(गुस्से से)- ये क्या किया तूने.....

सामने- अभी तो बस बातें सुनाई दे रही है....तू नही माना ना...तो अगली बार चेहरे भी दिखाई देगे...सोच लो...बस 1 घंटा है तुम्हारे पास....समझे....

फिर से कॉल कट हो गई और वर्मा हद से ज़्यादा परेशान हो गया....वो कभी मोबाइल मे चल रहे वीडियो को देखता तो कभी टीवी मे न्यूज़.....

थोड़ी देर बाद शीला भी रूम मे आ गई...और उसके आते ही वर्मा ने उसे एक जोरदार थप्पड़ रसीद दिया....

शीला(गुस्से से)- मुझे क्यो मारा....

वर्मा- साली...तुझसे अंकित को प्यार के जाल मे फसाने बोला था...ना कि उसके साथ गुलच्छर्रे उड़ाने....

शीला(सहमी हुई)- तो मैने वही तो किया था.....और कुछ नही...समझे....

वर्मा(गुस्से से)- साली रंडी...फिर से झूठ...ये देख....फिर बोलना....

और इतना बोल कर वर्मा ने मोबाइल शीला के सामने कर दिया...जिसे देख कर शीला की हवाइयाँ उड़ने लगी....

वर्मा(चिल्ला कर)- अब बोल रंडी....

शीला(डारी हुई)- एम्म...वो तो....वो लड़का....

वर्मा(एक और थप्पड़ खीच कर)- चुप कर....साली लंड की भूखी....सब बर्बाद कर दिया...सब....

शीला(नम आँखो से)- मैं क्या करूँ...वो लड़का ही ऐसा है...जब करीब आया तो मैं खुद को रोक नही पाई...मैने सोचा कि....

वर्मा(बीच मे)- तूने सोचा ही क्यो....हट....सब बर्बाद हो गया....

शीला(रोटी हुई)- नही...कुछ भी नही हुआ...मैं..मैं उसे सम्झाउन्गी....

वर्मा(सोच कर)- ठीक है...तू जा...थोड़ी आइस ला....ड्रिंक करते है....फिर बात करेंगे....

शीला तुरंत किचेन मे चली गई और वर्मा गहरी सोच मे डूब गया...और फिर उसने 1 पेग बनाया और उसमे कुछ मिला लिया....

फिर शीला के आते ही उसने आइस को साइड मे रखा और शीला को गले लगा लिया...

शीला- क्या हुआ....

वर्मा- कुछ नही..बस आज तुम्हे प्यार करने का बड़ा मन कर रहा है...

शीला(मुस्कुरा कर)- तो कीजिए ना....

और फिर वर्मा ने शीला को जी भर कर चोदा....और जैसे ही चुदाई ख़त्म हुई तो वर्मा ने पिस्टल उठाई और शीला पर तान दी...

शीला(डरते हुए)- ये..ये क्या कर रहे हो....

वर्मा- मैने आज तक कई बुरे काम किए...पर कभी अपना सिर नही झुकने दिया....और आज तेरी वजह से मेरी इज़्ज़त सरे आम बर्बाद होने जा रही है....जो मैं नही सह सकता.....

शीला- तो क्या मुझे मार कर सब ठीक हो जायगा ...हाँ...वैसे भी मैने तो तुम्हारे कहने पर सब किया....

वर्मा(चिल्ला कर)- मैने तुझे रंडी बनने को नही बोला था....और हाँ...तेरे मरने से मुझे सुकून मिलेगा...

शीला- पर मेरी...ब्बा...आआआआअ....

इससे पहले की शीला कुछ और बोलती...वर्मा ने शीला को गोली मार दी और वो लाश बनकर फर्श पर जा गिरी....

वर्मा(रोते हुए)- तूने ऐसा क्यो किया शीला...क्यो....(आँसू पोछ कर)- मेरे जिंदा रहते मेरी इज़्ज़त को तार-तार होते नही देख सकता...कभी नही....

थोड़ी देर तक वर्मा रोता रहा और फिर उसने अपना पेग गटक लिया...जिससे कुछ देर बाद वो भी लूड़क गया.......
 
मैं वीडियो देख कर थोड़ा इमोशनल सा हो गया....वर्मा था तो कमीना ...पर इज़्ज़त की खातिर जान दे सकता था...ये आज पता चला...और शीला...उसने अपने पति के ग़लत काम मे पूरा साथ दिया...और बदले मे क्या मिला....बेदर्द मौत....हाँ...

फिर मैने रॉनी को कॉल लगाया...

( कॉल पर )

मैं - हेलो....

रॉनी- सर...आइ म सॉरी...मेरी कोई ग़लती नही...मैने वही किया जो आपने कहा था..सच मे...

मैं(चिल्ला कर)- चुप...कितना बोलेगा....मेरी भी तो सुन...

रॉनी- जी सर...पर मेरी कोई ग़लती नही....

मैं- जानता हूँ...तूने सिर्फ़ धमकी ही दी थी...पर ये नही जानता था कि वर्मा झुकने की जगह मरना पसंद करेगा....

रॉनी- ह्म्म...पर अब क्या करे सर...वो वीडियो...

मैं- उसे भूल जाओ....साला सोचा था कि वर्मा गिडगिडाते हुए मेरे पास आयगा...पर ये साला तो मर गया...और साथ मे एक गरम माल भी ले गया....

रॉनी(हंस कर)- हा...वो तो है...माल तो मस्त था....

मैं- अच्छा जो हुआ सो हुआ...भूल जाओ सब...न्ड वाई द वे...गुड जॉब...

रॉनी- थॅंक्स सर....

और फिर कॉल कट कर के मैं ऑफीस निकल गया....क्योकि मुझे पता करना था कि डॅड को ऑफीस कौन ले गया और क्यो....

और जब मैं ऑफीस पहुँचा तो मुझे पता चला कि वर्मा की मौत की वजह से वकील ने डॅड और सक्षेना को ऑफीस बुला कर वर्मा के शेयर दोनो मे बाट दिए थे...जो उनकी पार्ट्नरशिप की एक कंडीशन थी....

मैं- गुड...वैसे साक्शेणा जी कहाँ है...

आकाश- वो निकल गये...उन्हे किसी मंदिर मे जाना था...अपनी बीवी के साथ...

मैं- ह्म्म..ओके...मैं भी चलता हूँ...और आप भी घर जाइए...वो सुजाता आंटी पूछ रही थी...

आकाश(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...जाता हूँ...

और फिर ऑफीस से निकल कर मैं सीधा सीक्रेट हाउस पहुँच गया...और स के आने का वेट करने लगा......

और टाइम पास करने के लिए बाहर खेत मे निकल गया...तो थोड़ा आगे जा कर मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी...जिसकी पीठ मेरी तरफ थी....

और जैसे ही वो लड़की आगे झुकी तो उसकी गांद चौड़ी हो कर मेरे सामने आ गई ....जिसे देख कर मेरे लंड मे सनसनी होने लगी....

पर इससे पहले कि मैं आगे बढ़ कर उस लड़की से बात करता, मेरे पीछे से स आ गया....

स- हाँ अंकित....बोलो क्या बात है....

मैं(चौंक कर)- अरे...आ गये आप....असल मे आपसे एक ज़रूरी काम था...

स- हाँ बोलो...

और फिर मैने स को एक नया काम बोल दिया....

स(सब सुन कर)- ह्म...पर इसमे तो काफ़ी टाइम लगेगा ना...

मैं- ह्म..बट टेन्षन मत लीजिए...अभी हमारे पास टाइम ही टाइम है...यकीन मानिए....

स- वो तो ठीक है...पर मुझे कुछ सोचना पड़ेगा....

मैं(मुस्कुरा कर)- मैने सोच लिया.....आप बस जाने की तैयारी करो...

और फिर मैं स के साथ डिसकस कर के वहाँ से निकल आया....और जब मैं आ रहा था तो मार्केट मे मेरी नज़र रूबी पर पड़ी...जो बड़ी गुम्सुम सी दिख रही थी...

मैं(कार पार्क कर के)- रूबी...तुम यहाँ....क्या हुआ...कोई प्राब्लम....

रूबी- अरे भैया आप....

मैं- हाँ...पर तू यहाँ क्या कर रही है..और ये मुँह क्यो लटका कर रखा है....

रूबी- मैं तो एक फ्रेंड के साथ आई थी....बस...

मैं- ह्म...और ये मुँह क्यो लटका है...हाँ...

रूबी- वो...असल मे...वो..कुछ दिन से....

मैं(ज़ोर से)- सॉफ-सॉफ बोलो....क्या बात है...ह्म...

रूबी(उदास हो कर)- असल मे भैया...कुछ दिनो से डॅड को फ़ोन नही लग रहा...उनकी कोई खबर भी नही मिली...तो माँ बहुत परेशान है...और मैं भी...

मैं- ओह्ह...बस इतनी सी बात...तू टेन्षन मत ले....मैं पता कर के घर आता हूँ....ओके...फिर सब ठीक हो जायगा....

रूबी(सिर हिला कर)- ओके भैया....मैं इंतज़ार करूगी...

मैं- ह्म..और माँ को भी बोल देना....वैसे , चल तुझे घर छोड़ दूं...

रूबी- नही भैया...मेरी सहेली के पापा है साथ मे....हमें थोड़ी शॉपिंग करनी है....मैं चली जाउन्गी...

फिर रूबी की फ्रेंड आई और रूबी उसके साथ शॉप मे चली गई...और उसके जाते ही मैने एक कॉल लगाया.....

मैं(कॉल कट कर के)- पता नही ये सही होगा या ग़लत...पर सच तो सामने लाना ही होगा....

और फिर मैं कुछ सोचते हुए वहाँ से निकल गया......

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संजू के घर........

संजू भी कल रात दारू के नशे मे धुत्त सोया पड़ा था......उसकी नीद एक फ़ोन कॉल ने तोड़ी....जो काफ़ी देर से बज रहा था.....

संजू(बिना स्क्रीन देखे)ह्म..कौन....

और सामने वाले की आवाज़ सुन जर संजू झट के से बेड पर बैठ गया.....और उसकी बातें सुनने लगा....

संजू(सुनने के बाद)- मैने कहा था ना...अंकित को मुट्ठी मे करना मेरे बाएँ हाथ का खेल है....

साला इमोशनल फूल.....मुझ पर भरोसा कर के अपनी चिता खुद ही सज़ा ली साले ने.....

और फिर संजू के साथ-साथ सामने वाला भी ठहाका मार कर हँसने लगा....

""हाहहहहहहहाहाहहााअ""

रेणु के घर.........

सुबह-सुबह घर की डोरबेल बजी जिससे मदन थोड़ा घबरा गया.....

मदन(रघु से)- ये रघु....देख तो सुबह-सुबह कौन आ गया.....अगर कोई उन माँ-बेटी को पूछे तो वही से दफ़ा कर देना.....

रघु(गेट खोल कर)- ओह्ह...तुम हो....क्या यार...सुबह-सुबह ही आ गये....

मदन- कौन है रघु....

रघु- समर है सर....

मदन(बाहर आ कर)- समर....तुम सुबह-सुबह यहाँ क्या कर रहे हो....

समर(गुस्से से)- मैं तुम दोनो बेवकूफो को बताने आया हूँ कि तुम दोनो कितने बड़े बेवकूफ़ हो....

मदन(गुस्से से)- समर....ये क्या बक रहा है....

समर- बक नही रहा...बता रहा हूँ....बेवकूफ़ हो तुम दोनो...बड़े वाले बेवकूफ़...

रघु(गुस्से से)- ओये साब....ज़रा तमीज़ से....बहुत हुआ अब...वरना....

मदन(रघु को रोक कर)- एक मिनट...समर...सॉफ-सॉफ बोल...क्या हुआ...

समर- हुहम...ये बताओ कि कल रात तुम दोनो कहाँ थे....

मदन- हम ...हम तो यही थे....क्यो...

समर(हँसते हुए)- वाह...तुम यही थे और तुम्हारी नाक के नीचे से वो माँ-बेटा भाग निकले....

मदन(चौंक कर)- क्या...कौन माँ बेटे....

समर- अरे...आकृति और उसका बेटा...जिन्हे तुमने बंदी बना कर रखा था....

मदन(चौंक कर)- नही...ऐसा कैसे हो सकता है....

समर- हो नही सकता...बल्कि हो चुका है....यकीन नही आता तो जा कर देख लो....

फिर तीनो अंदर गये तो वहाँ सिर्फ़ रेणु सो रही थी....आकृति और उसका बेटा गायब था....

समर- ह्म्म..अब बोलो....हो ना बेवकूफ़.....

मदन(गुस्से से)- इन दोनो को तो मैं...

समर- बस....अब मुँह मत चलाओ....

मदन- पर अगर वो अंकित के पास पहुँच गये तो....हम दोनो बेनक़ाब हो जायगे....

समर हँसने लगा....

मदन(गुस्से से)- हँसता क्या है....कुछ करना होगा हमे...वो भी जल्दी...रघु...तू जा और...

समर- रुक जाओ....कुछ नही करना....सब ठीक है....

मदन- मतलब....

समर- मतलब ये कि वो यहा से भाग कर सीधा अपने आदमी के पास पहुँच गये...और अब हमारी गिरफ़्त मे है....

मदन- पर वो उसके पास कैसे पहुँचे....क्या तेरा आदमी उनके पीछे था....

समर- नही...वो माँ-बेटा मेरे आदमी को जानते थे....और खुद उसके पास पहुँच गये.....

मदन- ये कैसे हो सकता है....

समर- क्योकि वो आदमी और कोई नही...बल्कि अंकित का खास दोस्त संजू है....जो अब हमारे साथ काम कर रहा है...समझे...

मदन- ओह्ह...थॅंक गॉड....कोई गड़बड़ नही हुई....

समर- ह्म्म...पर आगे से साबधान रहना...वरना खुद तो मरोगे ही...हम सबको भी मरवा दोगे....हुह...चलो...अब मैं जाता हूँ....मुझे और भी इम्पोर्टेंट काम है....

और इतना बोल कर समर निकल गया और मदन ने चैन की साँस ली....

मदन- रघु...आगे से चौकन्ने रहना...और हाँ...रेणु को सब बता देना...वरना वो हड़बड़ी मे कोई गड़बड़ ना कर दे....

रघु- जी सर....

मदन और रघु तो टेन्षन फ्री हो गये...पर कोई था...जिसकी टेन्षन बढ़ गई...वो थी रेणु...जो इस तीनो की बातें सुन कर जाग चुकी थी....

रेणु(मन मे)- संजू....अंकित के खिलाफ....वैसे इसमे ताज्जुब की कोई बात नही...फिर भी संजू ....वो अंकित को धोखा देगा....ऐसा सोचा तो नही था....अब मुझे संजू से मिलना ही होगा...तभी कुछ पता चलेगा.....

और इतना बोल कर रेणु ने किसी को कॉल लगा लिया.......

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रूबी के घर.....शाम के वक़्त......

जैसे ही मैने डोरबेल बजाई तो रूबी ने गेट खोला और सामने मुझे पा कर खुश हो गई...पर मेरे साथ अकरम को देख कर हैरान भी हो गई.....

मैं- हेलो रूबी...कैसी हो....

रूबी(सहमी सी)- मैं...मैं ठीक हूँ भैया....आपके साथ ये....कौन है ये....

मैं(अकरम को देख कर)- ये...ये मेरा दोस्त है...चलो बाकी बातें अंदर चल कर करते है....आओ अकरम...चलो...

फिर मैं अकरम को ले कर रूबी के पीछे-पीछे अंदर चला आया....

अकरम(धीरे से)- आख़िर तू बताता क्यो नही कि मुझे यहाँ क्यो लाया....

मैं(धीरे से)- सब बताउन्गा....बस थोड़ा सबर कर...ह्म्म...

रूबी- भैया...आप लोग बैठिए....मैं माँ को बुलाती हूँ....और हाँ..आप लोग क्या लेगे...चाइ, कॉफी या कुछ और....

मैं(मुस्कुरा कर)- जो भी तुम्हारा दिल करे ले आओ...पर पहले आंटी को बुला दो....

रूबी हँसती हुई अंदर चली गई और कुछ ही देर मे सलमा बाहर आई...उसका भी सेम रिक्षन था...मुझे देख कर खुश हुई पर अकरम को देख कर हैरान हो गई...

सलमा- अरे अंकित...आज बड़े दिनो बाद हमारी याद आई...ह्म...

मैं(मुस्कुरा कर)- नही आंटी...ऐसी कोई बात नही...बस थोड़ा बिज़ी था...वाई द वे...ये मेरा फ्रेंड है...अकरम ख़ान....

फिर सलमा और अकरम ने एक-दूसरे को विश किया और हम सब बातें करने लगे....रूबी भी कॉफी ले कर आ गई और हम सब नॉर्मल बातों मे बिज़ी हो गये...

पर इस सब से अकरम परेशान था....उसे समझ ही नही आ रहा था कि मैं उसे किस लिए लाया हूँ....और उसकी परेशानी समझ कर मैने सलमा से सरफ़राज़ की बात छेड़ दी....

मैं- आंटी...वैसे अंकल के क्या हाल है....मैने सुना कि उनका फ़ोन नही लग रहा.....ह्म..

सलमा(रूबी को देख कर)- हाँ..ठीक सुना....पिछले कुछ दिनो से उनसे बात नही हो पा रही...और इसी वजह से मेरा मन थोड़ा घबरा रहा है....

रूबी- जी भैया....मोम तो आज-कल खाना भी ठीक से नही खाती...बस डॅड के फ़ोन का इंतज़ार करती रहती है....

इतना बोल कर दोनो माँ-बेटी उदास हो गई....

मैं(हँसते हुए)- अरे...इसमे उदास क्या होना....मैं हूँ ना....मैं पता कर लुगा....ओके...

सलमा(नज़रे उठा कर)- पर तुम कैसे....

मैं(बीच मे)- अरे मैं इसीलिए तो अपने दोस्त को साथ लाया हूँ....ये आपके पति के बारे मे बतायगा....

इतना सुनते ही हम सब अकरम को देखने लगे और अकरम खा जाने वाली नज़रों से मुझे घूर्ने लगा....

मैं(रूबी को देख कर)- रूबी....तुम ज़रा अपने डॅड की फोटो ले आओ...

रूबी(खड़ी हो कर)- जी भैया.....

अकरम(मेरे कान मे)- ये क्या नाटक है...मैं कैसे....तू..तू कर क्या रहा है...

मैं- अरे फोटो तो आने दो...फिर सब समझ जाओगे.....

और थोड़ी देर बाद जब रूबी फोटो ले कर आई ...तो उसे देख कर अकरम के होश उड़ गये.....और वो कभी मुझे तो कभी फोटो को घूर्ने लगा.....

आलराम(हैरानी से)- ये.....ये सब क्या है अंकित...

मैं- यही सच है दोस्त....ये सक्श ही रूबी के डॅड है...और सलमा के पति...

अकरम- नही....ये कैसे हो सकता है...

मैं- जानता था कि तू बिलीव नही कर पायगा....पर सच तो सच ही होता है ना....और सच यही है कि सरफ़राज़ ने सलमा से निकाह किया था..और उनके निकाह का सबूत है उनकी बेटी....रूबी....

अकरम हैरानी से हम सब को देखने लगा...और वही हाल इस वक़्त रूबी और सलमा का था...दोनो हमारी बातें सुन कर सहम सी गई थी...और अकरम की बातें सुन कर वो ज़्यादा हैरान थी....

सलमा- अंकित...तुम दोनो क्या बातें कर रहे हो...कौन सा सच...आख़िर बात क्या है....

रूबी- हाँ भैया...जल्दी बोलिए...मुझे घबराहट हो रही है....डॅड ठीक तो है ना....

मैं(मुस्कुरा कर)- देखो...तुम दोनो टेन्षन मत लो....मैं सब बताउन्गा...पर पहले रिलॅक्स हो जाओ...घबराओ मत...और अकरम...तू भी मेरी बात सुन ले...फिर कुछ बोलना...ओके...

मेरी बात सुन कर सबने हामी भर दी और फिर मैने सबको एक कहानी सुनानी शुरू की......

असल मे आंटी....ये एक ऐसे सक्श की कहानी है....जो हालातों का शिकार हो कर ग़लती पर ग़लती करता गया......

ये सक्श अपने परिवार को बहुत ज़्यादा प्यार करता था...उनकी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता था.....उसके लिए परिवार वाले और इनकी इज़्ज़त ही सबसे ज़्यादा मायने रखती थी....

पर उस सख्स की जिंदगी मे कोई और भी था...जिसे वो हद से ज़्यादा प्यार कर बैठा....वो थी उसकी प्रेमिका...जिसके साथ वो जिंदगी बिताने के सपने देख रहा था.....

वो सक्श चाहता था कि वो अपनी प्रेमिका को अपनी बीवी बना कर घर ले जायगा...और परिवार के साथ खुशाल जीवन जिएगा......

पर उसकी जिंदगी हालातों के चक्रव्यूह मे इस कदर फसि...की वो अपने दिल की ना कर पाया....

एक आक्सिडेंट मे उसका बड़ा भाई मारा गया...और पीछे छोड़ गया अपनी जवान बीवी और 3 बच्चे....जो अब बेसहारा हो गये थे.....

तब उस परिवार के मुखिया ने ये फ़ैसला लिया कि बड़े भाई की बेबा की शादी छोटे भाई से कर दी जाए...जिससे उन बच्चों को सहारा मिल जाए और वो इज़्ज़त के साथ अपनी जिंदगी जी सके....

तब उस छोटे भाई ने अपने परिवार की खातिर ये फ़ैसला मान लिया और अपनी भाभी से शादी कर ली....

पर उनकी शादी सिर्फ़ समाज़ को दिखाने के लिए थी....उनके बीच पति-पत्नी का कोई रिश्ता नही था....बस परिवार की खातिर उसने ये सब किया...

पर वो अपने प्यार को भी धोखा नही देना चाहता था...इसलिए उसने समाज़ से छिप कर अपनी प्रेमिका से भी शादी कर ली....

और फिर वो अपनी भाभी और बच्चों को ले कर दूसरे सहर मे आ गया...एक नये नाम के साथ....

साथ मे अपनी प्रेमिका...जो की उसकी बीवी हो चुकी थी...उसे भी उसी सहर मे ले आया....अपने पुराने नाम के साथ....

और इस तरह वो दो परिवारों का ख्याल रखता रहा....दो अलग-अलग नामो के साथ....

इसके लिए उसे झूठ भी बोलना पड़ा...पर वो झूठ अच्छे मक़सद के लिए बोले गये थे....

पर अब वो कोई झूठ नही बोल सकता ...क्योकि कुछ दिनो पहले वो एक आक्सिडेंट मे उपेरवाले को प्यारा हो गया....

मैने बात ख़त्म की और सबके चेहरे पर उमड़ रहे भाव को देखने लगा...

अकरम को तो मेरी कहानी समझ आ रही थी...पर सलमा और रूबी को कुछ भी समझ नही आया...वो बस मुझे घूरे जा रही थी...उनकी आँखो मे कई सवाल मुझे सॉफ नज़र आ रहे थे.....

रूबी- भैया..ये सब...ये क्या था....आप किसकी बात कर रहे हो....

सलमा- अंकित....जल्दी बताओ....मेरा दिल बहुत घबरा रहा है....प्ल्ज़ बताओ ना...

मैं(सलमा को देख कर)- आंटी....आपका शक़ सही है...मैं आपके पति की ही बात कर रहा हूँ...सरफ़राज़ ख़ान ...उर्फ वसीम ख़ान....

मेरा इतना बोलना था कि सलमा फुट-फुट कर रोने लगी...और उसे रोता देख रूबी भी सिसकने लगी....

मैं- आंटी प्ल्ज़...संभालिए अपने आप को....प्ल्ज़....

सलमा पर मेरी बात का कोई असर नही हुआ...उल्टा वो ज़ोर से रोने लगी....

रूबी(सिसकते हुए)- भैया.....पापा..पापा कहाँ है....क्या वो...(और रूबी मुझे देखने लगी....जवाब के इंतज़ार मे..)

मैं(सिर हाँ मे हिला कर)- ह्म...वो अब नही रहे....

और फिर दोनो माँ-बेटी आपस मे लिपट कर सरफ़राज़ को याद करते हुए रोने लगी.....

थोड़ी देर तक तो मैं और अकरम चुप रहे....पर फिर मैने उनको संभाला और उन्हे पानी पिला कर नॉर्मल किया....

सलमा(नॉर्मल हो कर)- ये सब कैसे हुआ अंकित...

मैं- वो...आंटी...आक्च्युयली एक आक्सिडेंट हो गया...और...बस...

सलमा(रुआशि हो कर)- मुझे आख़िरी बार देखने को भी नही मिले....कितनी बदकिस्मत हूँ मैं...

मैं- आंटी....ये सब क्यो हुआ...ये मैने आपको बता दिया है...इसलिए आप प्ल्ज़...संभालिए अपने आपको...आप टूट जाएगी तो रूबी का क्या होगा...ह्म्म...

सलमा(आँसू सॉफ कर के)- हुह....पर तुमने आज ये सब क्यो बताया....ये पहले भी बता सकते थे ना....

मैं- नही आंटी....अगर मैं पहले बताता तो शायद 2 हँसते-खेलते परिवारों मे कलह हो जाता....और मैं ये नही चाहता था...क्योकि एक परिवार मेरे खास दोस्त का था....

सलमा- दोस्त....कौन दोस्त...

मैं(अकरम की तरफ इशारा कर के)- ये...अकरम ख़ान....

फिर सलमा और रूबी अकरम को अजीब नज़रों से देखने लगे.....

मैं- आंटी...ये उन्ही 3 बच्चों मे से एक है....

सलमा(अकरम को घूर कर)- क्या तुम्हे ये पता था....

मैं(अकरम के पहले, बीच मे)-नही आंटी...इसे आज ही पता चला...इसलिए ये आप दोनो को अपने साथ लेने आया है...अपने घर...अपने साथ रहने को ....

सलमा- पर हम इसके साथ क्यो जाए....नही...हम नही जायगे....

और इतना बोल कर सलमा, रूबी को ले कर अंदर चली गई...और यहा अकरम मुझे घूर्ने लगा......

मैं(अकरम को घूर कर)- अब तुझे क्या हुआ....खैर...रुक मैं आता हूँ...

अकरम(मेरा हाथ पकड़ कर)- रुक...पहले ये बता कि तूने अभी-अभी ये क्या बकवास की...और ये ...ये दोनो है कौन...

मैं(गुस्से से)- ये कोई बकवास नही....इसमे सच्चाई भी है...और सच्चाई ये है कि ये आंटी सरफ़राज़ की बीवी है...और वो लड़की उसकी बेटी....समझे...

अकरम- तो होंगे...पर तूने ये क्यो कहा कि मैं उन्हे लेने आया हूँ....हाँ...

मैं- क्योकि मैं ये चाहता हूँ....और मैं जो चाहता हूँ...वो करना भी जानता हूँ....

अकरम(खड़ा हो कर)- अंकित...तुझे पता भी है कि तू क्या बोल रहा है...मैं उस कमीने की फॅमिली को...

मैं(बीच मे)- सस्शही...धीरे ...और वो कमीना भले ही था....पर इनके लिए वो सब कुछ था...और वैसे भी मरने के बाद किसी को बुरा कहना ग़लत है...समझा....

अकरम- चलो माना....वो हालातों का मारा था...ये भी माना कि वो अच्छा इंसान था....पर इन्हे मैं क्यो ले जाउ...ये बतायगा....

मैं- अकरम....बिना मर्द के जो घर होते है ना....उन पर समाज के दरिंदों की गंदी नज़र हमेशा होती है....शायद तुझे ये बात समझ ना आए...पर ज़रा सोच...अगर तेरी माँ को अकेले ही तुम सब को पालना पड़ता ...तो क्या होता....क्या तुम सबकी जिंदगी ऐसी होती....ह्म्म....ज़रा सोच इस बारे मे...

और इतना बोल कर मैं सलमा के पास चला गया...जबकि अकरम बैठ कर किसी सोच मे डूब गया.....

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