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चूतो का समुंदर

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सूमी के घर पर.......शाम के वक़्त.......

सूमी के घर इस समय महफ़िल जमी हुई थी...जिसमे सूमी के साथ सम्राट, समर, मदन, रघु और रेणु बैठे हुए थे...और सबके सब संजू के आने का इंतज़ार कर रहे थे....

जैसे ही संजू उस कमरे मे दाखिल हुआ तो सभी को देख कर चौंक गया....

समर- आओ संजू...आओ...

सूमी(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ...चौंक गये क्या....ह्म्म...चौंकने की बात भी है....क्योकि इनमे से कुछ को तुम जानते भी नही...और कुछ के यहाँ होने का तुम्हे यकीन भी नही हो रहा होगा ...क्यो है ना...

संजू(सिर हिला कर)- ह्म्म...

सूमी- ह्म्म...इसलिए तो मैने आज सबको बुलाया है...ताकि अच्छे से जान पहचान हो जाए....तो...समर, रिचा और मुझे तो तुम जानते ही हो....हाँ..ये है मदन...ये रघु...

संजू(बीच मे)- रूको....थोड़ा रूको...

सूमी(हैरानी से)- क्या...क्या हुआ....

संजू- मैं हर सक्श के बारे मे जानना चाहता हूँ....

समर- हा..वही तो बता रहे है.....

संजू(हँस कर)- आप समझे नही....असल मे....मैं सबकी पूरी डीटेल जानना चाहता हूँ...और इनकी अंकित से दुश्मनी की वजह भी....ह्म...

समर(मुस्कुरा कर)- ह्म...ज़रूर....तुम्हे सब बतायगे....ये लोग खुद अपनी कहानी बतायगे....

संजू(चेयर पर बैठ कर)- तो देर किस बात की...शुरू हो जाओ....

और फिर संजू ने एक-एक करके सबकी असलियत सुनी और अंकित से दुश्मनी की वजह भी.....

ये सब ख़त्म होने के बाद सब वहाँ से निकल गये...पर सूमी ने संजू को रोक लिया.....

संजू- तो...मुझे क्यो रोका...क्या फिर से मूड बन गया....

सूमी- मूड तो बनता ही रहता है.....पर आज तुम्हे एक गिफ्ट देने के लिए रोका है....

संजू(हास कर)- तुम्हारी बेटी....वो कोई गिफ्ट है क्या...हाँ...

सूमी- नही...वो भी नही...अंदर कोई खास है.....जिससे मिल कर तुम बहुत खुश होगे....

संजू(हैरानी से)- क्या....ऐसा कौन है....

सूमी(मुस्कुरा कर)- बाजू वेल रूम मे जाओ....और खुद देख लो....

फिर संजू हैरानी से भरा हुआ बाजू वाले रूम मे गया...और उसने जैसे ही गेट खोला तो उसकी आँखे फटी रह गई....

संजू( चौंक कर)- आप...यहाँ....वो भी ऐसे.....क्यो......????????????

संजू ने जैसे ही रूम का गेट ओपन किया तो उसे सामने रेणु दिखाई दी...जो एक सेक्सी ड्रेस पहने संजू का वेट कर रही थी.....

संजू(हैरानी से)- आप यहाँ क्या कर रही है....

रेणु(मुस्कुरा कर)- वही...जो तुम कर रहे हो....

संजू- क्या मतलब....

रेणु(आगे आ कर)- असल मे....मैं तुम्हे करीब से देखना चाहती थी...बिल्कुल करीब से.....

संजू(गुस्से से)- बकवास बंद करो....और जाओ यहाँ से....

रेणु(हँसते हुए)- अरे....ये क्या....तुम्हारा तो मूड ही कुछ और है....

संजू(गुस्से से)- हाँ...

और इतना बोलकर संजू जाने के लिए पलटा...पर रेणु की बात सुनकर वही रुक गया.....

रेणु- ओह्ह...तो नमर्द हो....हहहे....

संजू(गुस्से से)- तेरी इतनी हिम्मत....अरे मैं तो ये सोच कर जा रहा था कि तू मेरे दोस्त की बेहन है...पर तू तो...

रेणु(बीच मे)- कौन दोस्त....जिसको तुम धोखा दे रहे हो....ऐसी होती है दोस्ती...हुहम...

संजू(गेट लगा कर)- बहुत बोलती है...अब तो अच्छे से समझना ही होगा...

रेणु- ह्म्म...लगता है मर्दानगी जाग गई. ..

संजू(आगे बढ़ कर)- ह्म्म..अब ऐसी मर्दनिगि दिखाउन्गी की बाकी सारे मर्दो को भूल जाएगी....

रेणु(हँसते हुए)- अच्छा....तो देर किस बात की....ये लो...तुम्हारी मर्दनिगि को थोड़ा बढ़ा दूं...

इतना बोलकर रेणु ने अपनी ड्रेस ओपन करना शुरू की पर संजू ने आगे बढ़ कर उसे रोक लिया....

संजू(मुस्कुरा कर)- इसकी ज़रूरत नही....ये मैं देख लुगा....

संजू की बात सुन कर रेणु हैरान हो गई....

रेणु- ठीक है...तुम ही करो...पर पहले एक बात बताओ....तुम अंकित को धोखा क्यो दे रहे हो....

संजू- अपना...अपना मतलब है...और क्या...

रेणु- पर ये ग़लत है......तुम उसके दोस्त हो....

संजू(चिल्ला कर)- और तू उसकी बेहन है....बेहन...फिर भी धोखा...हाँ....

रेणु(सहम कर)- पर मेरे पास वजह है...और मैं सिर्फ़ आकाश को बर्बाद करना चाहती हूँ...अंकित को नही...

संजू(मुस्कुरा कर)- वजह तो मेरे पास भी है....और मेरी वजह तुमसे कही ज़्यादा बड़ी है...

रेणु(हैरानी से)- तुम्हारी....क्या है वो वजह....

संजू- बैठो....बताता हूँ.....

अंदर रेणु और संजू अपने काम मे मसगूल थे तो बाहर सूमी और उसकी बेटी गेट से कान लगाए अंदर की बातें सुनने की कोसिस मे थी....पर कोई फ़ायदा नही हुआ....रूम के बाहर कोई आवाज़ नही पहुँची.....

काफ़ी देर बाद जब संजू ने गेट खोला तो सूमी गिरते-गिरते रह गई....

संजू(कड़क आवाज़ मे)- ये क्या हो रहा था .....

सूमी(हँसते हुए)- अरे वो...मैं तो वो...मतलब मैं सोच रही थी कि अंदर कुछ जोरदार हो रहा होगा....पर आवाज़ नही आई...तो मैं....

संजू(मुस्कुरा कर)- तुम नही सुधरोगी.....चलो...अब हम चलते है....आओ रेणु ....

सूमी- अरे चले जाना....पर ये तो बताओ कि मज़ा आया कि नही.....

संजू(रेणु को देख कर)- ह्म्म....आज तो बहुत मज़ा आया...दिल खुश हो गया....

सूमी(इतराते हुए)- माल किसने चुना था....खैर....ये बताओ कि इतना कड़क माल होते हुए भी आवाज़े नही आई...ह्म...

संजू- कभी..कभी खामोशी मे भी इतना मज़ा आता है...जो शायद आवाज़ मे नही होता....

रेणु(आगे बढ़ कर)- सही कहा....खामोशी ने वो कर दिया जो आवाज़ नही कर सकती थी....अब चलो संजू....मुझे घर छोड़ दो...

और इतना बोल कर संजू रेणु को ले कर निकल जाता है और सूमी हैरानी से उन्हे जाता देख सोच मे पड़ जाती है......

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रूबी के घर........

यहाँ मैं रूबी और उसकी माँ सलमा को मनाने मे लगा था कि वो अकरम के साथ उसकी फॅमिली के पास चले...और अब उन्ही के साथ रहे....पर सलमा मानने को तैयार नही थी...

मैं- पर आंटी...आप मेरी बात तो सुनो....

सलमा- नही अंकित....इस बात को यही ख़त्म करो...मैं...मैं ऐसा नही कर पाउन्गी....कभी नही....

मैं(ज़ोर से)- पर क्यो...आख़िर आपको तकलीफ़ क्या है....कुछ तो बोलो....

सलमा(नम आँखो से)- तकलीफ़....क्या तुम्हे कोई तकलीफ़ नही दिखाई देती....क्या तुम्हे ये भी नही दिखाई दिया कि वो लड़का...जिसे तुम सरफ़राज़ का बेटा बोल रहे हो....वो सच जान कर कैसे देख रहा था...जैसे मैं उसके बाप की र....

मैं- ओह्ह...चुप क्यो हो गई...बोलो...बोलो ना...हुह....आपने बिना कुछ सोचे-समझे अकरम को ग़लत बना दिया...हाँ...क्या उसने कुछ बोला....बोला कुछ....हाँ...

इस बार मेरी आवाज़ मे गुस्सा था....जिससे सलमा सहम गई और नज़रें झुका ली....

मैं- सॉरी....मैं जानता हूँ कि आपके दिल की हालत इस समय बहुत खराब है.....पर इसमे ग़लती किसकी....आपकी...अकरम की...हाँ...नही आंटी....अगर ग़लती किसी की है तो बस हालात की है....जिसने आज आप लोगो को इस कंडीशन मे ला कर खड़ा कर दिया....

सलमा(चुप चाप मुझे देखती रही....)

मैं- आंटी...मैं बस ये चाहता हूँ कि आप खुश रहे....रूबी की अच्छी परबरिश हो...और आप दोनो समाज मे इज़्ज़त के साथ सिर उठा कर जिंदगी गुज़ारे...बस इसलिए मैं आज अकरम को यहाँ लाया और उसे सब सच बता दिया....

सलमा(धीरे से)- मैं जानती हूँ कि तुम हमारा भला ही सोच रहे हो...पर उनके साथ रहना....क्या ये मुमकिन है...क्या तुम्हे ऐसा लगता है कि अकरम और उसका परिवार हम दोनो को अपना मानेगा....ये जानते हुए भी कि मैं सरफ़राज़ की बीवी हूँ...और रूबी हमारी बेटी....बोलो अंकित....क्या वो सब इस सच को अपना पायगे....जवाब दो...

अकरम(रूम मे दाखिल हो कर)- जवाब मैं देता हूँ अम्मी....

अकरम की आवाज़ सुनकर हम तीनो चौंक गये....और सबसे ज़्यादा चौंकने की बात ये थी कि अकरम ने सलमा को अम्मी बोला....

सलमा(अकरम को देख कर)- आ..आम्मि...??

अकरम(आगे बढ़ कर)- हाँ अम्मी...आज से आप मेरी अम्मी ही है....बिल्कुल मेरी अम्मी की तरह....मेरी छोटी अम्मी.....

मैं(खुश हो कर)- सुना आंटी....मेरा दोस्त आपके बारे मे क्या सोचता है....

सलमा(आँसू बहते हुए)- बेटा...मैं...मैं कैसे.....

अकरम(बीच मे)- मैं समझ सकता हूँ कि आपके सिर पर इस वक़्त दुखो का पहाड़ टूट पड़ा है....पर यकीन मानिए....मैं आपके हर दुख मे आपके साथ हूँ....और आपके हर दुख को खुशी मे बदलने की पूरी कोसिस करूँगा....ये वादा रहा....

अकरम की बातों से सलमा और रूबी भाबुक हो कर रोने लगी ....तभी अकरम आगे बढ़ा और देखते ही देखते सलमा ने अकरम को सीने से चिपका लिया और ज़ोर से रोने लगी....

रूम मे इस वक़्त आँसुओ का शैलाब आ चुका था...पर हर आँसू खुशी का था....जो दिल के दर्द को बहा कर बाहर निकाल रहा था.....

अकरम, सलमा और रूबी....एक दूसरे से गले मिले....आँसू बहाए...और सबने मुझे थॅंक्स बोला...और मैने भी सबको मुस्कुराने का बोला....

मैं- अब चलिए....आपके घर....जहाँ आपको अपनी जिंदगी बितानी है...आओ चले....

फिर हम सब अकरम के घर पहुँच गये....और उसके घर आते ही अकरम ने सबको हॉल मे बुला लिया....

जूही के अलावा सब हॉल मे आ गये और सलमा और उसकी बेटी को अजीब नज़रों से देखने लगे....क्योकि किसी को भी समझ नही आ रहा था कि वो दोनो है कौन....

सबनम(मुझे देख कर)- ये लोग....ये कौन है बेटा....

मैं- ये तो आपको अकरम ही बतायगा...अकरम....बोलो...बताओ सबको कि ये लोग कौन है.....

फिर अकरम ने सबको एक नज़र देखा और मैने उसे इशारे से आगे बढ़ने को बोला तो अकरम ने सबको बता दिया कि सलमा और रूबी से सरफ़राज़ का क्या रिश्ता है....

अकरम की बात सुन कर सब हैरान रह गये....वो कभी अकरम को तो कभी सलमा को देखते और कभी एक-दूसरे को देख कर कुछ समझने की कोशिस करने लगे.......

सबनम(अकरम से)- बेटा...ये...ये क्या बोल रहा है.....हाँ...

मैं- सबनम आंटी...अकरम वही बोल रहा है...जो सच है.....

सबनम- पर अकरम को ये सब जैसे पता चला....और वो भी अचानक...सरफ़राज़ की मौत के बाद...ये कैसे हो सकता है.....

मैं- नही आंटी...ये सब अचानक नही हुआ.....असल मे....मैं बहुत पहले ही इस सच को जान चुका था....पर मैने ये बात बताना ठीक नही समझा....

सादिया- क्या...तुम जानते थे फिर भी चुप रहे....क्यो....

मैं(ज़ोर से)- क्योकि मैं नही चाहता था कि मेरे एक सच बोलने से 2 परिवार तवाह हो जाए.....समझे आप लोग....

मेरी आवाज़ मे गुस्सा देख कर सब सहम गये.....

मैं(सबनम से)- आंटी...आप एक बार मेरी पूरी बात सुन लीजिए....फिर आप ही डिसाइड करना कि मैने सही किया या ग़लत ....

मेरी बात सुन कर सबने चुपचाप हामी भर दी...और मैने अपनी बात शुरू की.....और उन्हे सब बता दिया...सिर्फ़ सलमा और रूबी की चुदाई को छोड़ कर.....

मेरी बात सुन कर किसी के पास कहने को कुछ नही था.....सब के सब चुपचाप खड़े थे.....

मैं(सबनम से)- अब आप ही बताइए आंटी....क्या मैं ग़लत हूँ...हाँ...

मेरे सवाल का किसी के पास कोई जवाब नही था...सबकी नज़रे झुकी हुई थी...

मैं- आप लोगो के लिए सरफ़राज़ ने अपनी मोहब्बत को कुर्बान कर दिया ...यहाँ तक कि अपनी बेटी से भी दूर रहा....वो भी सिर्फ़ इसलिए कि आप लोग खुशी-खुशी जिंदगी गुज़ार सके....तो क्या अब आप लोग इन्हे अकेला छोड़ देगे....ताकि इनकी जिंदगी नरक हो जाए....हाअ.....

मेरी बात ख़त्म होने के कुछ देर बाद सबनम आगे बढ़ी और सलमा को अपने गले से लगा लिया....

सबनम- नही....आज से सलमा मेरी बेहन है...बिल्कुल सादिया की तरह.....और अब से ये हमारे परिवार का अटूट हिस्सा है....

सबनम की बात सुन कर सादिया और ज़िया भी आगे बढ़ी...और फिर सब सलमा और रूबी से गले मिलने लगे....

सबनम(मेरे पास आकर)- थॅंक्स अंकित.....तुमने मुझे बहुत बड़े पाप से बचा लिया....सच मे....

मैं(मुस्कुरा कर)- नही आंटी...मैने सिर्फ़ वही किया...जिससे सरफ़राज़ की आत्मा को शांति मिले....

सबनम(धीरे से)- अपने दुश्मनो का भी भला करते हो...तुम सच मे ग्रेट हो.....

मैं- बस..बस...अब बातें बहुत हो गई....आप सलमा आंटी और रूबी को सम्भालो....मैं चलता हूँ.....

सलमा- अंकित....थोड़ा रुक जाओ ना...

रूबी- हाँ भैया....रुक जाइए...

मैं(मुस्कुरा कर)- डरो मत...और हाँ...डर लगे तो ये है ना....अकरम ख़ान ...ये तुम्हारा पूरी तरह ख्याल रखेगा....और मैं तो हूँ ही...जब मन करे कॉल कर देना...ह्म.....

अकरम(सलमा और रूबी के पास जा कर)- सही कहा अंकित...अब ये मेरी ज़िम्मेदारी है....

मैं- ह्म...हॅपी फॅमिली....चलो सबको बाइ...सी यू सून...

और फिर मैं वहाँ से निकल गया.....

अगले कुछ दिनो तक कुछ खास नही हुआ.....एक तरफ अंकित , संजू के कहने पर बिल्कुल शांत तो दूसरी तरफ संजू ने अपनी चाल के हिसाब से सबको शांत रहने को बोल दिया था....इस बीच बस सूमी के घर 1-2 बार मीटिंग्स ज़रूर हुई....

अंकित के घर आकाश और सुजाता अपनी मस्ती मे बिज़ी थे...तो अंकित का खास आदमी स किसी काम से सहर से बाहर गया हुआ था....

अंकित रोज संजू और अकरम के घर जाता और उनके घर का महॉल सही करने की कोसिस करता....

संजू के घर का महॉल ठीक हो चुका था ...पर अकरम के घर जूही गुस्सा थी...वो सलमा और रूबी को नही अपना पाई थी....बाकी सारे लोग उसे अपना चुके थे...और इससे सलमा और रूबी भी खुस थी.....
 
कुछ दिन बाद अकरम ने सबको खुश करने के लिए एक प्लान बनाया...वैसे प्लान तो पारूल को खुश करने के लिए था...पर अंकित ने इस बहाने सबको खुश करने का सोच लिया......

अंकित के घर.....

मैं- ओह रक्षा....आ गई तुम....आओ...आओ...

रक्षा(गले लग कर)- क्या बात है भैया...इतना अर्जेंट क्यो बुलाया....आज क्या मूड बन गया...

मैं- हुह...चुप कर पागल...जब देखो तब...ये बताओ कि अनु नही आई...क्या वो अब तक मुझसे गुस्सा है....

अनु(अंदर आते हुए)- नही...आज तो बिल्कुल नही....

मैं- ओह हो......आप आए तो दिल मे बहार आ गई.....शुक्रिया...सुक्रिया....शुक्रिया....

अनु(शरमाते हुए)- बस कीजिए...आप तो बस....अच्छा...आपने बुलाया क्यो....

रक्षा- हाँ भैया....ऐसा क्या काम पड़ गया जो हम दोनो को ही बुला लिया...ह्म....

मैं- काम ही ऐसा है....आओ बताता हूँ....पर यहा नही...मेरे रूम मे....

और फिर हम मेरे रूम मे आ गये.....और सबके आते ही मैने गेट लॉक कर दिया.....

अनु(घूर कर)- गेट लॉक क्यो किया....ऐसा क्या काम है....

मैं- अभी पता चल जायगा.....

फिर लगभग 1 घंटे के बाद अनु और रक्षा , पारूल को अपने साथ ले कर घर निकल गई....

और आंगल दिन जब वो पारूल को ले कर आई तो पारूल परी की तरह तैयार थी....उसे देख कर मेरा दिल खुश हो गया....

मैं(घर के बाहर)- अरे पारूल....तू तो आज....वाउ....बिल्कुल परी की तरह लग रही है....

पारूल(खुश हो कर)- थॅंक्स भैया...पर आज है क्या....और आप सब भी इतने तैयार है...आख़िर बात क्या है...

मैं- वो...असल मे...रूको...अंदर चलो और खुद देख लो....

और जैसे ही पारूल ने मैं गेट खोला तो घर एक दम से जगमगा उठा.... घर के बाहर आतिशबाजी शुरू हो गई.....और सब एक साथ चिल्ला पड़े.....

""हॅपी बर्तडे पारूल.....""

ये सब देख कर पारूल की खुशी का ठिकाना नही रहा...मारे खुशी के उसकी आँखो से आँसू छलक उठे और वो मेरे गले लग गई...

पारूल- भैया....मैं...मैंन.....

मैं- अरे पगली...आज के दिन एक भी आँसू नही....

और मैने पारूल के आँसू सॉफ कर दिए और उसे ले कर अंदर आ गया.....

पारूल- भैया...आज मैं बहुत खुश हूँ..बहुत ज़्यादा.....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म..पर अभी तो तेरा सर्प्राइज़ बाकी है....

पारूल- सार्प्राइज़....वो क्या है....

मैं- एक मिनट....आँखे बंद ...और ये हम चले...बस....अब...हाँ...अब अपनी आँखे खोलो.....

और जैसे ही पारूल ने आँखे खोली तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गई.......

पारूल के लिए आज का दिन खुशिया ले कर आया था....पर दिन अभी बाकी है....और एक ऐसा दर्द भी...जो पारूल के साथ-साथ सबको हिला कर रख देगा.........

पारूल मारे शॉक्ड के कभी सामने देखती तो कभी मुझे....उसे यकीन ही नही हो रहा था कि उसकी माँ ही उसके सामने खड़ी हुई है....

मैं(पारूल को हिला कर)- ऐसे मत देखो....ये तुम्हारी माँ ही है....ह्म...

पारूल(खुशी से)- भैया....माँ...माँ यहाँ ....कैसे....

मैं(मुस्कुरा कर)- बस...तेरे भाई का जादू है..ह्म..अब जा...माँ वेट कर रही है....

यहाँ पारूल जितनी हैरान थी....उससे ज़्यादा उसकी माँ (प्रेमा ) खुश थी...और उसकी खुशी उसकी आँखो से आँसू बन कर निकलने लगी थी......

पारूल(आगे बढ़ कर)- माँ...म्म..

और इससे ज़्यादा कोई कुछ नही बोल पाया.....पारूल दौड़ कर अपनी माँ की बाहों मे समा गई और प्रेमा ने भी अपनी बेटी को अपने आँचल मे छिपा लिया....

और माँ-बेटी का मिलन उनकी आँखो मे आँसुओं की बाढ़ ले आया....पर उनका हर एक आँसू उनके दिल की खुशी बयान कर रहा था....

ये सुंदर नज़ारा देख कर वहाँ खड़ा हर सक्श भाबुक हो गया...और कई लोगो की तो आँखे भी नम हो गई.....

थोड़ी देर तक माँ-बेटी यू ही एक-दूसरे को बाहों मे कसे रहे...और फिर दोनो मेरे पास आए और पारूल मेरे सीने से लग गई.....

पारूल- भैया....थॅंक यू....नही...थॅंक्स से भी ज़्यादा....

मैं- बस क्या...मुझे थॅंक्स बोलेगी...हाँ....

पारूल- नही....पर मैं क्या बोलू...आपने मेरे दिल को इतनी खुशी दी है कि...

मैं(बीच मे)- बस...तू खुश है ....यही मेरे लिए बहुत है....चल अब पार्टी शुरू करे...बाकी के गेस्ट को भी खुश होना है ना...हाहाहा.....

पारूल(मुस्कुरा कर)- जी भैया....

फिर क्या था....केक काटा गया...खाया गया...और फिर सारे गेस्ट म्यूज़िक पर थिरकने लगे.....

कुछ डॅन्स मे मगन हो गये तो कुछ गुप-सूप मे.....कुछ खाने को टेस्ट करने मे बिज़ी थे...तो कुछ हवसियों की तरह पार्टी मे आए शानदार माल को आँखो से ही चोदने लगे....

पार्टी फुल सवाब पर थी...और पार्टी मे आए हर सक्श को खुश देख कर मैं ज़्यादा ही खुश था...क्योकि यही तो मेरा मक़सद था.....

तभी मैने देखा कि सुजाता मेरे डॅड से कुछ बात करने की कोसिस कर रही थी....पर मेरे डॅड ने उसे अवाय्ड किया और मेरे पास आ गये....

मैं- ओह डॅड....आ गये आप....

आकाश- ह्म्म...अब मुझे बताओगे कि ये सब क्या चल रहा है....

मैं- क्या मतलब...इट्स पारूल बर्थ'डे डॅड.....

आकाश- मैं बर्थ'डे की बात नही कर रहा...मैं सुजाता और....

मैं(सामने कुछ देख कर, बीच मे)- डॅड....अभी बात करना ठीक नही होगा......

आकाश- ओके....पर अब तुम उस सुजाता से सॉफ बात कर ही लो....वैसे भी जो तुम चाहते थे वह हो ही चुका है....तो देर किस बात की...हाँ....

मैं- डॅड....अभी शायद जल्दबाज़ी होगी....थोड़ा और वक़्त देते है ना....

आकाश- ठीक है....करो जो करना है....मैं चलता हूँ....

मैं- डॅड...पारूल को आशीर्वाद भी नही देगे क्या....

आकाश(मुस्कुरा कर)- उसे मैने आशीर्वाद और गिफ्ट दोनो दे दिए.....डोंट टीच युवर फादर...हाउ टू विश आ स्वीट गर्ल...

मैं(कान पकड़ कर)- सॉरी डॅड....

आकाश(मुस्कुरा कर)- चलो...मैं चलता हूँ.....टेक केर....

आकाश के जाने के कुछ देर बाद ही सुजाता मेरे पास आ गई और मुझसे आकाश के बारे मे पूछने लगी...

मैं- क्या बात है...आज-कल डॅड की बड़ी चिंता है आपको....

सुजाता(सकपका कर)- नही...ऐसा तो कुछ नही....वो तो मैं...मैं बस....

मैं(मुस्कुरा कर)- अरे...ऐसे डरो मत....ऐश करना ही तो जिंदगी है....डोंट वरी....वो यही होंगे....वेट करो...ह्म...

और मैं सुजाता को स्माइल देकर निकल गया और बाकी गेस्ट से मिलने लगा.....तभी मुझे संजू मिल गया....

संजू- और भाई...बड़ा बिज़ी है तू....

मैं- अरे नही यार...बस होस्ट का काम कर रहा हूँ....

संजू- ह्म्म..वैसे तेरी रेणु दी...वो आई नही क्या....

मैं(मुस्कुरा कर)- अब कॉल तो किया था....बट कॉल ही नही लगा....

संजू- ह्म...होता है....वाई द वे....ये पारूल की मोम मस्त माल है....है ना...

मैं- ओये...उसे छोड़....और काम पर ध्यान दे....तेरे कहने पर ही मैं चुप बैठा हूँ....याद है ना....

संजू- ओह हाँ...सब याद है...डोंट वरी....बस थोड़े दिन मे सब ख़त्म हो जायगा....

मैं- ह्म...चल थोड़ा अकरम से मिल लूँ...एंजओए...

फिर मैं वहाँ से निकल गया और मेरे जाते ही संजू का फ़ोन बजने लगा....

संजू(कॉल ले कर)- आपने कॉल क्यो किया....

सामने- अंकित से क्या बात हो रही थी....

संजू- ओह्ह...तो मुझ पर नज़र रखी जा रही है ...

सामने- ऐसा नही है...बस सावधानी बरती जा रही है....

संजू- अच्छा....ओके...तो सुनो...अंकित पूछ रहा था कि काम का क्या हुआ...तो मैने बोल दिया कि बस कुछ दिनो मे सब ख़त्म हो जायगा...बस यही बात हुई...ओके...

सामने(हँसते हुए)- गुड....कुछ ही दिन मे सब ख़त्म होगा....और साथ मे अंकित का खानदान भी...

संजू(गुस्से से)- ह्म...मुझ पर भरोशा किया है तो मरना ही होगा....

और फिर संजू कॉल कट कर के ड्रिंक काउंटर पर पहुँच गया और बियर पीने मे लग गया...पर उसकी आँखे पार्टी मे मौजूद हर सक्श पर टिकी हुई थी....

यहा मैं हर गेस्ट को अटेंड करते घूम रहा था...तभी मेरी नज़र सुजाता पर पड़ी...जो संजू के डॅड से गप-शप कर रही थी....

तो मैं तुरंत रजनी आंटी के पास पहुँच गया....

मैं- आंटी...देखी ज़रा...आपके माल पर डाका पड़ रहा है...संभाल कर....

रजनी(मुस्कुरा कर)- अरे बेटा...मेरा असली खजाना तो तू है....वैसे भी...उस औरत को संजू के पापा से कुछ खास नही मिलेगा...लगा रहने दो...बेचारी को...

और फिर हम एक-दूसरे को देख जर ठहाका मार कर हँसने लगे....पर अचानक से रजनी सीरीयस हो गई....

मैं- अरे आंटी...क्या हुआ आपको ....

रजनी(एक तरफ देख कर)- कुछ नही बेटा...बस मेघा को देख कर हँसी थम गई...

मैं(मेघा को देख कर)- ओह्ह...ये अभी भी नॉर्मल नही हुई क्या....

रजनी- कहाँ बेटा...थोड़ी बहुत नॉर्मल होती है...और बाकी तो...बस उदासी ही इसकी जिंदगी बन गई...

मैं(मन मे)- और उसकी इस हालत का ज़िम्मेदार कही ना कही मैं ही हूँ....सॉरी मेघा...रियली सॉरी....

रजनी- क्या हुआ बेटा...कहाँ खो गये....

मैं- कुछ नही...मैं बस सोच रहा था कि...कि काश मैं मेघा आंटी को खुस कर सकूँ....

रजनी- चाहती तो मैं भी यही हूँ....पर ये सब कैसे करे...क्या करे...कुछ समझ नही आता....

मैं(कुछ सोच कर)- एक प्लान है....सुनिए....

और फिर मैने रजनी को प्लान समझा दिया और फिर रजनी ने सबको पकड़-पकड़ कर डॅन्स के लिए बुला लिया....

रजनी- तो अब सब पैर बना कर डॅन्स करेंगे....एक रोमॅंटिक सॉंग पर...कम ऑन...

रजनी की बात सुन कर सब लोग पैर बना कर डॅन्स करने लगे....ये पैर गर्ल-गर्ल के भी थे....और गर्ल-बॉय के भी....
 
तभी मौके पर चौका मार कर मैने मेघा को खीच लिया...और उसके कुछ करने से पहले ही उसे बाहों मे खीच कर डॅन्स का पोज़ बना लिया....

मैं- लेट्स प्ले दा सॉंग....

और फिर एक रोमॅंटिक सॉंग प्ले हो गया और सभी पैर मंद रोशनी मे अपने साथी को बाहों मे ले कर डॅन्स एंजाय करने लगा.....

""तेरे हाथ मे, मेरा हाथ हो, सारी जन्नतें, मेरे साथ हो......""

क्या सॉंग बज रहा था....जिसके बजने से मेरे हाथ मेघा की कमर पर कसते जा रहे थे और मेरे होंठ उसके होंठो की गर्मी महसूस करने लगे थे ...

मैं इस गर्माहट मे गरम होने लगा और मैने मौका देख कर मेघा के होंठो पर किस कर दिया...

मेघा मेरी हरक़त से चौंक गई और उसकी आँखे बड़ी हो गई.....पर तभी मैने सिर झुका कर उसके बूब्स पर एक चुंबन दे दिया....जिससे मेघा सकपका गई...पर कुछ बोल नही पाई....

पूरे डॅन्स के दौरान मेरी हरक़ते जारी रही...पर मेघा कुछ नही बोली...बस चुपचाप मेरा साथ देती रही....

और जैसे ही डॅन्स ख़त्म हुआ...तो मैने मेघा के कान मे कुछ कहा और फिर उसे छोड़ कर निकल गया.......

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रेणु के घर.......

रेणु इस समय अपने घर मे परेशान बैठी हुई थी....और उसके सामने बैठा था मदन....जो उसे लगातार घूरे जा रहा था.....

रेणु(झल्ला कर)- आप मुझे घूर्ना बंद करेंगे प्ल्ज़....

मदन(सिगार निकाल कर)- इतना परेशान होने की ज़रूरत नही....समझी...

रेणु(खड़ी हो कर)- अच्छा...तो क्या करूँ....खुशिया मनाऊ...हाँ...

मदन(सिगार जला कर)- नाचने का वक़्त भी आयगा....पर फिलहाल तो रिलॅक्स रहो....यही ठीक होगा...

रेणु(गुस्से से)- नही...मैं रिलॅक्स नही हो सकती....क्योकि...क्योकि ये बात मुझसे जुड़ी है...सिर्फ़ मुझसे....

मदन- जानता हूँ...पर तुम्हारे परेशान होने से कुछ नही होने वाला...उल्टा तुम्हारा ही मूड खराब होगा ....

रेणु- आप जानते भी हो कि मेरी परेशानी क्या है...हाँ....

मदन(धुआँ छोड़ कर)- यही ना कि तुम्हे अंकित के घर नही जाने दिया...यही बात है ना....

रेणु(आगे बढ़ कर)- हाँ...और ये कोई मामूली बात नही....बहुत बड़ी बात है....खास कर अंकित के लिए....

मदन- अच्छा....पर मुझे नही लगता कि उसे कोई फ़र्क पड़ा है...नही तो अब तक 1 कॉल तो करता तुम्हे...है ना...

रेणु(ज़ोर से)- मेरी परेशानी की वजह यही है....आख़िर उसने मुझे कॉल क्यो नही किया...क्यो नही पूछा कि मैं क्यो नही आई....

मदन(खड़ा हो कर)- इसमे परेशान क्या होना...ये तो अच्छा ही हुआ ना....ह्म..

रेणु- नही...बिल्कुल नही....इससे तो यही लगता है कि शायद उसे मेरे बारे ने कुछ पता चल चुका है...शायद वो जान गया है कि मैने उसे धोखा दिया है....पक्का यही बात है...वरना अंकित....आआहहााआ....

रेणु अपनी बात पूरी करती उससे पहले ही उस रूम की खिड़की का ग्लास टूटने की आवाज़ आई और उस आवाज़ से मदन और रेणु चौंक गये.....

दोनो ही कुछ साँझ पाते उससे पहले ही घर की बिजली ऑफ हो गई और रूम मे रेणु की चीख गूँज उठी......

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अंकित के घर......

डॅन्स के बाद पार्टी अपने लास्ट इवेंट की तरफ मूड गई और सबलॉग खाने-पीने मे बिज़ी हो गये.....

इसी बीच मैने अनु से बात करके उसे समझाने की कोसिस की...पर कोई ना कोई बीच मे आ कर मेरा काम बिगाड़ जाता था....

खाने के बाद सब गेस्ट धीरे-धीरे विदा लेते गये....लास्ट मे सिर्फ़ 3 लोग बचे....रजनी, संजू और रक्षा....

रजनी आंटी मुझसे कुछ बात करना चाहती थी...पर बाकी सब को देख कर रुक गई और मुझे बाद मे मिलने का बोल दिया....

रक्षा ने आज मेरे घर रुकने की इक्षा ज़ाहिर की और मेरे रूम मे चली गई...जबकि संजू ने कोई बात नही की...बस अपनी माँ को ले कर निकल गया....तभी मेरे पास पारूल आ गई....

पारूल- भैया....इस सब के लिए एक बार फिर से थ्ह्हा....

मैं(पारूल का मुँह बंद कर के)- बस...और कुछ नही....वैसे तुम्हारी मोम कहाँ है....

पारूल(मुस्कुरा कर)- मोम...वो शायद सुजाता आंटी के साथ होगी....

मैं- ह्म्म..थक गई होगी....रेस्ट करने दो....वैसे तुम भी थक गई होगी...जाओ रेस्ट करो...

पारूल- नही भैया...मैं आज की रात आपके साथ रहना चाहती हूँ...प्ल्ज़...

मैं- ह्म्म...मेरे साथ....पर मेरे साथ ख़तरा है...समझ रही हो ना...

पारूल(शरमा कर)- आपने आज का दिन मेरी जिंदगी का बेस्ट दिन बनाया है भैया....क्या मेरी रात भी....

इतना बोल कर पारूल चुप हो गई और शरमाने लगी....पर मैं उसकी बात का पूरा मतलब समझ गया...और उसके कान मे फुसफुसाया.....

मैं- आज की रात कत्ल की रात है...कोई कातिल है तो कोई कत्ल होने वाला...ह्म...

पारूल(कान मे)- मुझे कत्ल करवाना ही अच्छा लगेगा....पर कातिल आप होगे तो...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म..तो जाओ....कातिल, कत्ल करने आ जायगा......

इसके बाद पारूल खुशी-खुशी अपने रूम मे चली गई...और मैं अपने रूम मे आ गया....

पर जैसे ही मैं अपने रूम मे दाखिल हुआ तो रक्षा के तेवेर देख कर खामोश हो गया....

रक्षा पूरी तरह से चुदाई के लिए रेडी थी....पूरी नंगी बेड पर लेटी हुई मुस्कुरा रही थी ....

मैं(गेट लगा कर)- तू पागल है क्या....गाते लॉक तो कर लेती...कहीं और कोई आ जाता तो....

रक्षा(मुस्कुरा कर)- मैं जानती थी कि यहाँ सिर्फ़ आप ही आयगे...इसलिए टेन्षन नही थी....अब आ भी जाइए ना....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..तो इसलिए रुकी थी तुम...हाँ...

रक्षा(मेरे पास आ कर)- जी हाँ...अब देर मत कीजिए....कुचल डालिए मेरे जिस्म को...बड़ा मचल रहा है....

मैं- ओह्ह..हे...1 मिनट....रूको तो....

रक्षा- क्या हुआ...मूड नही क्या...

मैं- मूड है...क्यो नही होगा...और तुम्हे देख कर तो मूड बन ही जाता है...

रक्षा(गले मे बाहें डाल कर)- तो आओ ना.. मुझे अपनी बाहों मे पीस डालो...

मैं(रक्षा को दूर कर के)- पिसता हू....पर पहले 1 जाम हो जाए...फिर सारी रात तुम्हे मसलुगा...और पूरा निचोड़ दूँगा...ह्म...

रक्षा(खुश हो कर)- क्यो नही...मैं पेग बनाती हूँ....

मैं- नही...मतलब...पेग मैं बनाता हूँ...तब तक तुम फ्रेश हो आओ...और चूत को अच्छे से सॉफ करना....मुझे आज चूत के साथ बहुत मस्ती करनी है...ह्म्म..

रक्षा- आपके लिए ही तो इसका ख्याल रखती हूँ...अभी आई...

थोड़ी देर बाद रक्षा वापिस आई और मेरा बनाया पेग गटक गई...पेग पीने के बाद हम किस करने लगे...और थोड़ी ही देर मे रक्षा बेसूध हो कर गिर गई....

मैं- सॉरी यार...आज पारूल की रात है....तुम रेस्ट करो....

और मैने रक्षा को बेड पर लिटाया और रूम लॉक कर के पारूल के रूम मे निकल गया......

मैं जैसे ही रूम मे पहुँचा तो मैने देखा की पारूल ने ड्रेस चेंज कर ली है और इस वक़्त शॉर्ट्स मे बैठी हुई मेरा वेट कर रही है…..

मेरे जाते ही वो उठ कर मेरी तरफ लपकी और मुझे अंदर की तरफ खीच कर तुरंत गेट लॉक कर दिया और पलट कर मेरे सीने से चिपक गई….

पारूल – ओह्ह भैया , आ गये आप….कितनी देर करदी…हाँ

मैं(मुस्कुरा कर)- अरे पगली देर कहाँ हुई….वैसे तू तो बहुत बेताब दिख रही है…हाँ

पारूल – ह्म….आज आपकी बाहों मे समा जाने को बेताब हूँ भैया…

मैं ( पारूल को गले लगा कर) – ह्म्म....तो आजा बेटा...आज तुझे जन्नत की सैर पर ले चलता हूँ....

और इतना बोल कर मैने पारूल को कस के अपने गले लगाया और अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए और दोनो एक दूसरे के होंठो का स्वाद लेने लगे....

मैं- उउउम्म्म्म.....उूुुउउम्म्म्मम....सस्स्सुउउउर्र्रप्प्प...आहह...

पारूल....आअहह...उउउंम्म...उूउउम्म्म्म....उउउम्म्म्मम...आआहह...सस्रररुउउप्प्प...उूउउम्म्म्म...

हम दोनो एक दूसरे को इतनी बेताबी से किस कर रहे थे की हमे साँस लेने की भी फ़ुर्सत नही थी....हमारा किस तब ख़त्म हुआ जब हमे साँस लेने की ज़रूरत पड़ गई....

और हम किस ख़त्म कर के ज़ोर-ज़ोर से हाफने लगे….और नॉर्मल होते ही पारूल शरमाने लगी….

मैं- अब शरमाना कैसा बेटा….अब तो बेशर्मी करने का टाइम है….

और इतना बोल कर मैने पारूल का टॉप उसके जिस्म से अलग कर दिया और उसके कड़क बूब्स को हाथो मे थाम लिया….

पारूल- सस्स्शहीए…भैया…..

मैं- कितने मुलायम है ये…..जी करता है इन्हे चूस के निचोड़ दूं….

पारूल- आअहह….तो रोका किसने है भैया….चूसिए ना….आअहह…

और पारूल की बात ख़त्म होने के पहले ही मैने उसके बूब्स को मुँह मे दबा लिया और दूसरे बूब को हाथो से मसल्ते हुए एक बूब्स का स्वाद चखने लगा…..

पारूल- उउउंम्म…भैया…आअहह….ईसस्स…आअहह…

मैं- उउउंम्म…उउउंम्म…उउउंम्म…आअहह..सस्रररुउउप्प्प…उउउम्म्म्म..

पारूल- आअहह…ज़ोर से…उउउंम..आअहह…बह..ईय्याअ…उउउंम

मैं बारी-बारी पारूल के सॉफ्ट बूब्स को रस चख रहा था और पारूल मस्ती मे मेरे सिर को अपने सीने मे दबाते हुए सिसक रही थी…..

थोड़ी देर तक उसके बूब्स चूसने के बाज़ मैं रुक गया और पारूल को फिर से किस करने लगा….

पॉल- उूउउम्म्म्माआहह….भैया….उूउउम्म्म्ममम…..

मैं- उउउंम..आहह…मज़ा आया मेरी जान….

पारूल- हाँ…बहुत….पर अब मुझे मज़ा करने दो ना…ये मेरी रात है…है ना…

मैं- ह्म्म…तुम ही करना …बस तुम्हारी चूत चख लूँ…फिर सब तुम्हारे हाथो मे….

और पारूल के कुछ बोलने से पहले मैने उसे बेड पर लिटाया और पेंट निकाल कर उसे पूरा नंगा कर दिया…

पारूल(टांगे खोल कर)- भैया,….ये आपकी याद मे बहुत तडपी है…..आज इसकी तड़प मिटा देना….

मैं- हाँ बेटा…आज की रात इसकी सारी तड़प पानी बन कर बह जाएगी….डोंट वरी…..

और फिर मैने आगे झुक कर पारूल की चूत पर अपना मुँह टिका लिया….और चूत के दाने को छेड़ते हुए पारूल को मज़ा देने लगा…….
 
मैं- सस्र्र्ररुउउप्प…आहह….मस्त चूत है तेरी…

पारूल-आहह…भैयाअ....आपके लिए ही है...उूउउंम्म.........

फिर मैने पारूल की चूत को चाटना और चूसना चालू कर दिया और पारूल मस्ती मे तड़पने लगी...ओर मेरे सिर को चूत पर दबाने लगी...

मैं- सस्रररुउउप्प...उउउम्म्म्मम...सस्रररुउउप्प्प....सस्र्रुरुउउप्प...

पारूल-आहह..अहहह....ऊहह..म्मूऊम्मय्यी

मैं- सस्रररुउउप्प्प...सस्ररुउउउप्प्प...सस्रररुउउप्प...

पारूल-आहह...भैया....मज़ा ..आआहह...आ...गयी...आहह

मैं-उम्म्म..उउउंम्म..उउंम...उउंम्म

पारूल-बब्बहाइियय्य्ाआ...आअहह....ऊहह....ऊहह....आहह

मैने पारूल की चूत को मुँह मे भरके चूसा और पारूल इस आनंद मे झड्ने लगी…

पारूल- भैया..….आहह…मेरा…पानी..अहहह…मैं आऐईयईईईईई…..

मैं- स्ररुउउप्प..सस्ररुउउप्प…सस्ररुउउप्प्प….उूुउउम्म्म्मम….

जब मैने सारा चूत रस पी लिया तो पारूल के उपर से अलग हो कर बैठ गया….और पारूल मस्ती मे आँखे बंद किए सासे भरने लगी….

थोड़ी देर बाद जैसे ही पारूल नॉर्मल हुई तो उसने मुझे जल्दी से लिटाया और मेरे कपड़े निकालने लगी…..और मेरे लंड को जल्दी से आज़ाद करके हाथो से सहलाने लगी….

पारूल- अब मेरी बारी….आप वही करेंगे जो मैं कहूँ…ओके

मैं(मुस्कुरा कर)- हाँ बेटा…..जो तू कहे…चल लब टाइम खराब मत कर…..शुरू हो जा….

और इतना बोलते ही पारूल ने मेरे लंड ज़ोर-ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया….और कुछ देर हिलाने के बाद लंड पर झुक कर अपनी खुरदरी जीभ को सुपाडे पर फिराने लगी….

मैं- उूउउम्म्म्म….गुड़िया….तू तो….आहह…

पारूल जीभ को सुपाडे के चारों तरफ घुमाती और फिर छेद के उपर होंठ रख कर चूस्ति तो मेरा रोम-रोम खड़ा हो जाता…..

मैं- ऊओह….मार दिया….आहहह….एस गुड़िया…करती रहो….एसस्स…..

थोड़ी देर तक पारूल लंड से खेलती रही और फिर उसने लंड को अपने नाज़ुक होंठो मे दबा कर चूसना शुरू कर दिया....

मैं- ओह यस….तेरे होंठ भी ना…आअहह…लंड को कितना मज़ा दे रहे है…..कम ऑन…एसस्स…

पारूल- उूउउम्म्म्म…उूुुउउम्म्म्म…उउउम्म्म्मम,….

मैं- एस्स बेटा….एसस्स……और तेज…..पूरा लो…आहह….

पारूल-उम्म्म…उउंम्म..उउंम..उउंम्म..उउंम

मैं-आहह…बहना…ऐसे ही…अच्छा कर रही हो…आहह

पारूल-उउंम..सस्ररुउउउप्प्प…उउउम्म्म्म

मैं-हा..तेज करो…जल्दी पूरा लो…तेजज….और तेज….

पारूल-उउंम..उउंम्म..उउंम्म..उउउंम्म

मैं-आहह…मेरी प्यारी गुड़िया…भैया के लंड अच्छा है ना…उूउउम्म्म्मम….

अब मेरा लंड पूरे उफान पर था….उसे अब एक छेद चाहिए था….चूत हो या गांद या फिर मुँह….लंड बस ज़ोर से धक्के मार कर अपने अंदर का लावा निकालना चाहता था…

शायद ये बात पारूल भी समझ गई और खुद ही लंड चूसना छोड़ कर मेरे उपर आ गई…..

पारूल- अब मुझे सवारी करना है….वो भी आपके इस बड़े से घोड़े की….

मैं(मुस्कुरा कर)- तो आओ ना…आज बेटा…

और फिर पारूल ने लंड पर चूत सेट की और आहिस्ता से लंड को चूत मे उतारने लगी…..

पारूल- अओउूच.....कितना बड़ा हो गया भैया....

मैं- तेरी चूत के लिए तो सही है ना गुड़िया...बड़ा खाओगी तो जल्दी बड़ी हो जाओगी....हाहाहा..

पारूल- हाँ..आहहहह.....

और तभी मैने पारूल की कमर पकड़ कर उसको नीचे कर दिया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे समा गया....

पारूल- आआईयैयाीईईईईईई...भैया...आअहह.....मार दिया...आअहह...

मैं- कोई नही बेटा....चल..अब सवारी कर.....घोड़ा दौड़ने को बेकरार है....

मेरे कहते ही पारूल ने अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया....और कुछ देर बाद ही स्पीड से उपेर नीचे होते हुए चुदवाने लगी......

मैं- ले...मेरी गुड़िया..भैया का ले..

पारूल-हाँ...भैया......आहह..आहह

मैं- ये ले......मज़ा आया...

पारूल- आहह..भैया…बहुउत्त्..अया..अहहह….

पारूल पूरी स्पीड से अपनी गांद उछाल कर लंड का मज़ा ले रही थी…. और वो थोड़ी देर बाद ही मज़े मे झड्ने लगी और उसका चूत रस मेरी जाघो पर बहने लगा….

पारूल-भैया…आहह..मैम्म्म…मैं गई…उउउम्म्म्मम….आआअहह..

मैं- एस्स….बेटा..कम ऑन…ईएससस्स….

जैसे ही पारूल झड गई तो मैने लंड को चूत से बाहर निकाला…और पारूल को बेड पर लिटा कर उसकी चूत मे लंड पेल दिया….इस बार लंड को बड़ी जल्दी मे चूत मे उतरा था..पर चूत गीली थी तो पारूल मज़े से कुछ अंदर ले गई…और मैने उसकी कमर पकड़ कर ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी…..

मैं- ये ले मेरी गुड़िया ….भाई का बर्थ’डे गिफ्ट....कैसा लगा...हाँ…

पारूल-आअहह..भैया...मस्त है....ज़ोर से....डालूओ

मैं- हाँ..ये ले...

पारूल-आहह..आह..भैया...फाड़ दो....मज़ाअ...आहह....आ...गायाअ...आआहह....

मैने पूरी स्पीड मे 5 मिनिट पारूल को चोद्ता रहा और पारूल फिर से झड्ने लगी…

पारूल- भैया…..मेरा…पानी,…आहह…..आहह....गग्ग्गाऐयईईईईई.....

पारूल झड्ने लगी और उसकी चूत मे पानी के साथ मेरा लंड अंदर बाहर होते हुए फुकच्छ करने लगा….और चुदाई का महॉल गरम हो गया…

पारूल-ओह्ह..भैया…अह्ह्ह्ह…आहह

मैं- एस्स..बेटा…मैं भी आया….ईएहह…..यीहह…ईएससस्स…एस्स..एस..…

पारूल-भैया.आआ…..आहह..आहह…आहह….

पूरे रूम मे अब आवाज़े गूंजने लगी

फ़फफूूककचह..फ़फफूूक्चह्त…….त्त्त्थ्ह्प्प्प….त्ततप्प्प…त्तप्प..आहह…उउउंम..हमम्म..भीयाअ……आहः….आहह..उउफ़फ्फ़…ऊहह

…ऊहह….फ्फक्च्छ..फ़फफुक्चह…..भीया….त्तप्प…त्तप्प्प..आहहह..अहहहह…एस्स..एस्स……आहह…उउउंम्म…उउंम्म..ईएहह….बेटा..…ये ले…ये..बेटा…ओर ज़ोर से…ले..…आहहह..

फ़्फुूक्च..फ़्फुऊूउक्च…...ताआप्प्प…आहह….उउम्म्म्मह…आहह..आहह…

पारूल की दमदार गर्मी की आगे मैं भी ढेर हो गया और झड्ने लगा….

मैं- येस्स..बेटा…मैं भी आया….ईएहह…..यीहह…ईएससस्स…एस्स..एस..…

हम दोनो झड कर शांत हो गये और एक-दूसरे की बाहों मे लिपट कर रेस्ट करने लगे….

मैं- आहह…मज़ा आया ना गुड़िया…

पारूल- बहुत….पर मेरा मन नही भरा….

मैं(मुस्कुरा कर)- कोई नही….आज की रात तुम्हारी है….जितना चाहे मज़ा लो….

पारूल- सच मे……आइ लव यू भैया….लव यू….

और फिर पारूल ने मुझे बाहों मे भर कर प्यार करना शुरू कर दिया……

इसके बाद हम ने एक और राउंड चुदाई की और करीब सुबह के 5 बजे पारूल तक कर सो गई....

पारूल के सो जाने के बाद मैने चैन की साँस ली और उसे ठीक से लिटा कर अपने रूम मे आ गया....
 
पर रूम मे आते ही मुझे एक और झटका लगा....

मेरे सामने रक्षा खड़ी थी...जो फुल गुस्से मे थी....

मैं(मुस्कुरा कर)- अरे रक्षा....तुम जाग गई....

रक्षा(गुस्से से)- अच्छा...तो मैं सो गई थी...हाँ...

मैं- हाँ बिल्कुल....तुम पेग लगाते ही सो गई....और फिर मैं...

रक्षा- बस करो....मैं जानती हूँ कि ये सब आपकी करामात है....बस मैं इतना जानना चाहती हूँ कि आपने मेरे साथ ऐसा क्यो किया...हाँ....

मैं- ओके...सुनो..

फिर मैने रक्षा को पारूल के साथ हुई बात बता दी...कि क्यो मुझे पारूल के साथ जाना पड़ा....पर रक्षा अभी भी गुस्से मे थी....

तभी मैने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और लंड को हाथ से मसल्ने लगा....

ये देख कर रक्षा की आँखो मे हवस जागने लगी और उसने भी अपनी नाइटी निकाल दी...और पूरी नगी हो कर घुटनो पर बैठ गई.....

रक्षा- आप ना....बहुत बेकार हो....सच मे....

मैं- अरे नही ....मैं बस दूसरों की कमज़ोरी जानता हूँ...जैसे इस वक़्त तुम्हारी कमज़ोरी मेरा ये हथियार है...है ना...

रकसा- बस ..बस...आप मुझे मज़े करने दो....और हा...अब पूरा हिसाब चुकता करूगी...

और इतना बोल कर रक्षा ने मेरे लंड को मुँह मे ले कर चूसना शुरू कर दिया....

रक्षा बड़े प्यार से मेरे सुपाडे को चूसने लगी...और साथ ही साथ मेरी बॉल्स को उंगलियों से छेड़ने लगी.....

मैं- ओह्ह्ह...रक्षा....तुम भी ना....एस बेबी....

रक्षा- सस्स्स्र्र्ररुउउउगग़गग....सस्स्स्रररुउउउप्प्प्प...सस्स्स्रररुउउउप्प्प्प....उूउउम्म्म्मम.....

मैं- ओह यस....गो ऑन बेबी....एस्स....एसस्स...

रक्षा - सस्स्स्रररुउउउप्प्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प्प...उूुउउम्म्म्म...उूउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म...

और थोड़ी देर बाद रक्षा ने लंड को छोड़ा और मेरी बॉल्स को जीभ से चाटने लगी....

वो कभी बॉल्स को छत ती तो कभी मुँह मे दबा कर चूसने लगती...तो कभी लंड से ले कर बॉल्स तक थूक लगाते हुए मूठ मारती.....

रक्षा की इन हरक़तों से मेरा लंड फुल फॉर्म मे आ चका था...और रक्षा की चूत भी पानी बहाने लगी थी....

मैं- ऊहह..बस कर रक्षा...अब कुतिया बन जा....मुझे तेरी गांद मारनी है....

रक्षा- उउउंम्म..आअहह...अभी कुछ नही मिलेगा...ना गांद...ना चूत....आपने मुझे तडपाया...अब मेरी बारी....चुपचाप लंड चूसने दो मुझे......

और इतना बोल कर रक्षा ने लंड चूसना शुरू कर दिया....

मैं(थोड़ी देर बाद)- ओके...ना गांद , ना चूत....तो मुँह ही सही....अब मुँह ही चोदुन्गा....

और मैने रक्षा का मुँह पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया....

रक्षा के मुँह से अब कोई आवाज़ नही निकल रही थी....और मेरा लंड उसके गले मे जा कर टकरा रहा था....उसके मुँह से बाद घहूओन्न..घहूनन्न..की आवाज़ सुनाई दे रही थी.....

रक्षा- उूुुुउउ...उउउन्न्ञन्...उूउउन्न्ं....

मैं- गांद नही...चूत नही...तो ले साली....मुँह चुदा....यीहह...ईएह....

रक्षा- उूउउंम्म...उूउउंम्म..उउउंम्म...

मैं- बस...थोड़ा और...एस्स...बस...ये हुआ...बस थोड़ा....ईएहह...ईएहह...एररह....एसस्स....

और मैं पूरी स्पीड मे रक्षा का मुँह चोदते हुए उसके मुँह मे ही झड गया.....

रक्षा(लंड निकलते ही)- कक्खहूओ....कक्खहूऊ...आआहह....म्म्माहआ. ..आआहह.....

तभी मेरा फ़ोन बजने लगा....ये डॅड का कॉल था....

मैं- रक्षा...तू बाथरूम मे जा कर ख़ास.....डॅड का कॉल है....

फिर रक्षा बाथरूम मे चली गई और मैं डॅड से बात करने लगा....

मैं- आअहह...हाँ..क्या हुआ...

आकाश- सो रहे थे क्या...

मैं- हमम्म...कहिए क्या हुआ...

आकाश- तुम जल्दी से घर के पीछे वाले गार्डन मे आ जाओ....स्विम्मिंग पूल के पास....

मैं(थोड़ा हैरानी मे)- पर हुआ क्या ......

आकाश- यहाँ आओ तो...सब जान जाओगे...जल्दी आओ...

और इससे पहले कि मैं कुछ और पूछता, कॉल कट हो गया....और मुझे टेन्षन दे गया...

मैं(मन मे)- सला सुबह-सुबह क्या हो गया....कहीं सुजाता के साथ कुछ...चलो देखता हूँ...

और मैं कपड़े पहन कर गार्डन मे पहुँच गया..वहाँ आकाश के साथ गार्डन का माली भी था...जो बहुत घबराया हुआ सा दिख रहा था....

मैं- क्या हुआ....और ये माली काका इतने परेशान क्यो है...

आकाश- तुम देखोगे तो तुम भी परेशान हो जाओगे....

मैं(हैरानी से)- पर क्या...क्या देखना है मुझे...हाँ...

आकाश(एक तरफ इशारा कर के)- वहाँ देखो.....

और जैसे ही मैने उनकी बताई हुई जगह पर देखा तो मेरी आँखे भी फटी की फटी रह गई...

मैं- प्रेमा आंटी...इन्हे...इन्हे क्या हुआ....

मैं भाग कर प्रेमा के पास पहुँचा जो ज़मीन पर बेहोश पड़ी थी...

मैं- क्या हुआ इन्हे...ये बेहोश कैसे हो गई...

आकाश- ये बेहोश नही है....इसे किसी ने मार दिया...और लाश यहाँ फेक दी....

मैं(शॉक्ड)- क्या.....???....मार डाला.....पर किसने....और किस लिए....
 
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