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चूतो का समुंदर

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सहर के आउटर मे बने होटेल मे........

रात के अंधेरे ने जब सारी दुनिया को अपने अंधकार मे डूबा दिया...याब होटल के एक रूम का गेट खुला....

और मैं सामने खड़े सक्श को देख कर मुस्कुरा दिया.....

मैं(मुस्कुरा कर )- ह्म्म...लेट्स प्ले दा गेम......

वहाँ रिचा अभी भी अपने रूम मे नंगी बैठी हुई किसी के आने का वेट कर रही थी...

रात के करीब 11 बजे उसके गेट नॉक हुई....जिसे सुन कर रिचा का फूला हुआ चेहरा थोड़ा निर्मल हुआ...पर उसका गुस्सा अभी भी बरकरार था....

रिचा(गेट के पास जा कर)- कौन है...

बाहर से कुछ कहा गया...जिसे सुन कर रिचा ने गेट अनलॉक किया और वापिस आ कर बेड पर पसर गई .....

थोड़ी देर मे ही गेट खोल कर 2 सक्श अंदर आ गये....और आते ही रिचा को नंगा देख कर दोनो के मुँह खुले रह गये....

रिचा- ऐसे मुँह मत फाडो...पहले गेट लॉक करो और यहाँ आओ....

वो दोनो गेट लॉक कर के रिचा के नज़दीक पहुँचे और रिचा की खुली हुई चूत पर आँखे टिका ली....जब रिचा ने इस बात पर गौर किया तो ज़ोर से हँसने लगी....

रिचा(हँसते हुए)- अब ऐसे क्या देख रही हो ....तुम दोनो के पास भी यही है...इसे चूत कहते है....जानती तो होगी ही....इसी के दम पर हम औरते मर्दो को नचाते है...सही कहा ना सबनम...बोलो सादिया....सही कहा ना...

सबनम- हुह..हाँ...तुम..तुम रिचा हो...राइट...

रिचा- बहुत अच्छे...तो तुम मुझे पहचान ही गई....वेल...मैं तो तुम्हे पहले से जानती हूँ...और तुम्हे भी...तुम सादिया हो ना...सबनम की बेहन...

सादिया- ह्म्म...मैं भी तुम्हे जानती हूँ...शायद तुम्हे याद ही होगा...उस रात उस होटल मे वसीम के साथ मैं ही थी...

सबनम- होटल मे ..वसीम के साथ...तुम ये किस बारे मे बोल रही हो...मैं कुछ समझी नही...

रिचा- ऐसा बहुत कुछ है सबनम डार्लिंग...जो तुम आज तक समझ नही पाई...क्यो सादिया....सही कहा ना...

रिचा की बात सुन कर सादिया कुछ नही बोली बस अपनी नजरेझूका ली...

रिचा- हहहे....शर्मिंदगी....अपनी ही बेहन से....शायद ये शरम पहले आई होती तो आज तुम्हे नज़रें ना झुकानी पड़ती....

सबनम- बस...अभी ये बताओ कि हमे यहाँ क्यो बुलाया....क्या ज़रूरी काम था हमसे...और..तुम ऐसे क्यो बैठी हुई हो...तुम्हारे कपड़े कहाँ है....

रिचा- सब बताती हूँ...पहले मैं पेट पूजा कर लूँ...बड़ी देर से कुछ खाया-पिया नही...तुम दोनो कुछ लॉगी...

सबनम और सादिया ने ना मे सिर हिला दिया और रिचा ने उठ कर कॉल लगाया और कुछ ऑर्डर दे डाला...

रिचा- कपड़े लाई हो...लाओ दो....

थोड़ी देर बाद रिचा कपड़ो मे थी...और बियर के साथ चिकन टिक्का का मज़ा ले रही थी...सबनम और सादिया उसके सामने बैठी रिचा के बोलने का वेट कर रही थी...

सादिया- अब खा लिया हो तो पॉइंट पर आओगी....हमे जाना भी है...

रिचा- ह्म..बस हो गया...

रिचा ने लास्ट सीप मारा और फिर सिगरेट जला कर कस मारने लगी...

सबनम- तो अब बताओ...तुमने हमे यहा क्यो बुलाया...और सादिया से तुम किस होटल की बात कर रही थी...

सादिया- दीदी...वो बात छोड़ो ना...

रिचा- क्यो छोड़ो...आख़िर तुम्हारी बेहन को भी तो पता चले कि तू असल मे है क्या...और इसी के घर मे रहकर क्या-क्या गुल खिलाती है...

सबनम- बस...अब काम की बात करो...तुम हमारी फॅमिली की बात बताने वाली थी ना...

रिचा(कश मार कर)- ह्म..पर ये बात सुनने के पहले तुम दोनो कसम खाओ कि ये बात इस रूम से बाहर नही जाएगी....

सादिया- कसम किसलिए...

रिचा- बात ही कुछ ऐसी है....बोलो...खाती हो कसम...

सबनम- ओके. .मैं अपने बेटे अकरम की कसम खाती हूँ ...ये बात हम तक ही रहेगी...

रिचा- और सादिया तू...तू अपनी बेटी की कसम खा ले....गुल ..यही नाम है ना उसका...

सादिया(चौंक कर)- तुम्हे...तुम्हे कैसे पता..

रिचा- मुझे ऐसा बहुत कुछ पता है जो तुम दोनो को पता नही..और ना ही तुम सोच सकती हो...अब खाओ कसम तो मैं बताना सुरू करू...

सादिया- ठीक है...मैं गुल की कसम खाती हूँ...अब बोलो....

रिचा- ओकक..तो ये कहानी है सरफ़राज़ ख़ान की...जिसे लोग वसीम ख़ान भी कहते है....

सबनम- तुम्हे ये कैसे पता कि उनका नाम सरफ़राज़ है...

रिचा- मैने बोला ना...कि तुम सोच भी नही सकती कि मुझे क्या-क्या पता है...और हाँ...अब सुनती रहो...बीच मे टोकना मत..

रिचा ने फिर दोनो को एक कहानी सुनानी स्टार्ट की...जिसे सुन कर दोनो की आँखे बड़ी हो गई...झटके पर झटके लगे...दोनो ने रोना सुरू कर दिया....और कहानी ख़त्म होने तक दोनो की आँखो से आसू बहते रहे......

रिचा- तो ये थी असली कहानी सरफ़राज़ ख़ान के वसीम ख़ान बनने तक...बाकी तुम जानती ही हो...है ना...

सबनम(रोते हुए)- क्या ये सब सच है....

रिचा- बिल्कुल सच...

सादिया(रोते हुए)- हम कैसे मान ले...

रिचा- क्योकि झूठ बोलने से मेरा कोई फ़ायदा तो होना नही है...हाँ...

सादिया- पर तुम भी तो उसके हाथ की कठपुतली हो...

रिचा- हहहे...नही मेरी जान...ऐसा लोग सोचते है कि मैं उनकी कठपुतली हूँ...पर असल बात ये है कि मैं ही उन सब को नचाती हूँ...हाँ थोड़ा नाटक करना होता है...पर सच यही है कि सब मेरे हिसाब से चलते है ...समझी...

सबनम- नही...मैं नही मनती...ये सच नही हो सकता..

रिचा- तो 3-4 दिन रूको...मैं तुम्हे वो रास्ता बताउन्गी जिससे तुम सब पता कर सकती हो...फिर सारे डाउट क्लियर हो जाएँगे...तब बताना कि मैं सही थी या नही...ओके...

सादिया- ठीक है....हमे सबूत का इंतज़ार रहेगा...और अगर तुम्हारी बात ग़लत निकली...तो तुम भी नही सोच सकती कि हम तुम्हारा क्या हाल करेंगे...समझी...

रिचा- ह्म...ठीक है...कुछ दिन वेट करो...सच तुम्हारे सामने होगा...और हाँ...मैं चलती हूँ...यहाँ का पेमेंट कर देना....फिर मिलेगे...बाइ...

और रिचा अपनी गान्ड मटकाते हुए निकल गई....थोड़ी देर बाद सादिया और सबनम भी अपने आपको ठीक कर के और पेमेंट कर के घर निकल गई...

उनके जाने के बाद एक सक्श काउंटर पर आया और मास्टर की के साथ कुछ पैसे रख कर बोला...

"" ये लो...इतने पैसे ठीक है ना....और हाँ..इस बारे मे किसी को बताया तो..""

कॉंटरमन- बिल्कुल नही...मैने तो कुछ देखा ही नही...

""गुड...""

फिर वो सक्श बाहर निकला और कार स्टार्ट कर के बुदबूदाया.....

""रिचा...तूने जो बोला वो तो उस रूम से बाहर आ गया...और साथ मे तेरा कॅरक्टर भी और सॉफ हो गया...अब मेरी बारी....देख तेरा क्या हाल होता है...तू भी सोच नही सकती...""

और फिर वो कार धुआँ उड़ाते हुए और रात के सन्नाटे को चीरते हुए तेज़ी से निकल गई...पीछे रह गया सिर्फ़...धुआँ..धुआँ....धुआँ.....

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NISA.jpg
 
नेक्स्ट मॉर्निंग.......अंकित के घर..........

जब मैं सुबह घर पहुँचा तो घर के सब लोग हॉल मे बैठे मेरा ही वेट कर रहे थे......

पारूल, डॅड, सविता , सुजाता....सब थोड़ा परेशान दिख रहे थे....जब मैने परेशानी की वजह पूछी तो पता चला कि वजह मैं ही हूँ....

मैं- ओह्ह...सॉरी एवेरिवन...आप सब को मेरी वजह से जो टेन्षन हुई ...उसके लिए सॉरी....

आकाश- पर ये तो बताओ कि तुम थे कहाँ...और कॉल क्यो नही किया...बता तो सकते थे कि रात को नही आओगे....

मैं- डॅड...सॉरी...मैं सच मे भूल गया था...और जब याद आया तब काफ़ी लेट हो गया था...आइ मीन आज सुबह ही याद आया था....

आकाश- अंकित...ये ग़लत बात है...आइन्दा याद रखना....कही भी जाओ...हमे इनफॉर्म कर देना...ओके...

मैं- ओहक डॅड..

आकाश- ओके ..अब नाश्ता करो और पारूल को स्कूल छोड़ दो...आज उसका कोई टेस्ट है...

पारूल- हाँ भैया...जल्दी करो...

मैं- ओके गुड़िया...बस 5 मिनट...

फिर मैने नाश्ता किया और रेडी हो कर पारूल को स्कूल ड्रॉप किया....और वहाँ से सीधा संजू के घर पहुँच गया....

संजू के घर पर अभी काफ़ी हलचल थी...मेघा, रजनी , और रक्षा बातें कर रही थी....

मैं- हेलो एवेरिवन...कैसे है सब...

रजनी- अरे अंकित..आओ बेटा...आज सुबह-सुबह...

मैं- क्या करूँ आंटी...मेघा आंटी जिम नही आई तो मैं ही आ गया....

मेघा- ओह..सॉरी अंकित...आज-कल जाग नही पाती...कल से पक्का आउगि...

मैं- कोई नही....अरे आंटी...कॉफी तो पिलाओ...और रक्षा...तू स्कूल नही गई...

रक्षा- नही..आज नही जाना...वैसे कल रात कैसी रही भैया....वो प्रॉजेक्ट पूरा हो गया....

मैं(मुस्कुरा कर)- हाँ बेटा..थॅंक्स टू यू....

रक्षा- थॅंक्स से काम नही चलेगा...मुझे इनाम चाहिए...

मैं- ओहक..तू चल मैं कॉफी पी कर रूम मे आता हूँ...

मेघा- ये किस बारे मे बात हो रही है...

मैं- अरे आंटी...एक प्रोजेक्ट था..जिसमे रक्षा ने मेरी हेल्प की ..बस वही...

मेघा- वाह रक्षा...तुझमे भी दिमाग़ है..

रक्षा- यस मोम...मेरा दिमाग़ कुछ ज़्यादा ही चलता है ऐसे प्रॉजेक्ट्स मे...क्यो भैया....हहहे...

मेघा- अरे वाह...वैसे प्रॉजेक्ट था क्या...

मैं- आंटी...मैं आपको बता दूँगा...रक्षा...तू चल...मैं आता हूँ...

फिर थोड़ी देर तक मैं कॉफी पीते हुए मेघा से बातें करता रहा...रजनी आंटी किसी काम से किचन मे बिज़ी थी...

मैं- तो आंटी...नेक्स्ट सेशन कब करना है...

मेघा(शरमा कर)- तुम भी ना....

मैं- अब बोल भी दो...मैं कब्से तड़प रहा हूँ...

मेघा(शरमाते हुए)- जब तुम कहो...पर ...वो...

मैं- डोंट वरी...उसकी क्लास मैं ऐसी लूगा कि उसके साथ आपका भी दिमाग़ चकरा जायगा....

मेघा- क्या करोगे...

मैं- सब बताउन्गा...बताउन्गा क्या...डाइरेक्ट शो दिखाउन्गा....बस वेट करो...वैसे अनु कहाँ है...दिखाई नही दे रही...

मेघा- वो रूम मे है...

मैं(कॉफी ख़त्म कर के)- ओके...मैं अनु से मिल लूँ...और आपका नेक्स्ट सेशन जल्दी होगा....वो भी फुल...

और मैं मेघा को आँख मार कर उपेर निकल गया और जैसे ही अनु का रूम खोला तो मैं वही का वही खड़ा रह गया...और सामने का नज़ारा देखने लगा.....

सामने अनु खड़ी थी...उसका चेहरा दूसरी तरफ था....उसने बदन पर एक टवल लपेट रखी थी और दूसरा टवल उसके हाथ मे था....वो अभी नहा कर निकली थी....

अनु एक तरफ गर्दन झुकाए अपने रेशमी बालो को टवल की फटकार से सूखा रही थी....हर एक फटकार के साथ उसके बालों से बूंदे निकल कर पूरे रूम मे उड़ रही थी...

फिर उसने गर्दन को झटका..बालो को लहराते हुए दूसरी तरफ ले गई और फिर से टवल की फटकार....

उसकी गर्दन के साथ उसकी पतली कमर भी हिल रही थी....और मुझे अपनी तरफ खीच रही थी कि आओ और मुझे बाहों मे भर लो...

टवल मे कसी उसकी गान्ड मेरे जिस्म मे गर्मी भरने के लिए काफ़ी थी...उपेर से उसकी आधी नंगी जाघे मेरे अरमानो को हवा दे रही थी....

पर असलियत ये थी कि अनु को देख कर मुझे उस पर प्यार ही आता था...ना की बस हवस ही उमड़ती थी....

मैं कुछ देर तक यू ही अनु को निहारते रहा...तभी अचानक से अनु पलटी और सहम कर अपने दोनो हाथो से अपना सीना ढक लिया....

तब मुझे यकीन हुआ कि लोग सच कहते है...""लड़कियो को ये अहसास हो जाता है की कोई उन्हे देख रहा है...पता नही कौन से सेन्सर लगे होते सी उनकी बॉडी मे....जो नज़रे पकड़ लेती है...""

अनु(सहमी हुई )- आ...आप...आपने तो डरा ही दिया...

मैं- अनु..रिलॅक्स...मैं तो बस...ओक...मैं जाता हूँ...

मैं पलटा ही था कि अनु ज़ोर से चिल्लाई...

अनु- नही...रुकिये....

मैं(पलट कर)- तुम्हे कोई प्राब्लम तो नही ना...नही तो मैं...

अनु(बीच मे)- गेट बंद कर दीजिए....

मैं अनु की बात सुनकर शॉक्ड हुआ बट मैने गेट लॉक किया और अनु के थोड़ा पास पहुँच गया...

मैं- अनु...वो...मैं क्या बोलू...उस दिन...

अनु(बीच मे)- नही....उस दिन मेरी ही ग़लती थी....

मैं- नही...तुम्हारी ग़लती नही थी...शायद मैं ही ग़लत था...मुझे ही ध्यान रखना चाहिए था....

अनु- नही...आपने कुछ ग़लत नही किया...मैं ही ग़लत समझी...और फिर ...

अनु बोलते-बोलते सुबकने लगी...

मैं- अनु...नही...तुम रो मत...तुम ग़लत नही हो...ये सब हालात की ग़लती है...हम बस हालातों का शिकार हुए है...

मैने आगे बढ़ कर अनु के गालो को पकड़ा और अंगूठो से उसकी नम आँखो को सॉफ करने लगा....

मैं- अनु...मैं बताता हूँ कि उस दिन असल मे हुआ क्या था...

अनु(मेरे हाथ थाम कर)- नही...उसकी ज़रूरत नही ...पारूल ने मुझे सब कुछ बता दिया है...

मैं- क्या...तुम सब जानती हो...और फिर भी तुम...

अनु(बीच मे)- क्या करती...आपका सामना करने की हिम्मत ही नही होती थी....आपसे इतना ग़लत बिहेव किया था तो...

मैं- ओह्ह...तो शर्मिंदा थी...पर मुझसे कैसी शर्मिंदगी...हाँ...

अनु- पता नही...पर हिम्मत ही नही हुई...इसलिए हमेशा आपसे झूठ बुलवाया कि मैं फ्रेंड के घर गई...जबकि मैं रूम मे ही थी...

मैं- ओह्ह..तो मेरी अनु होशियार हो गई...

अनु(सुबक्ते हुए)- आइ एम सॉरी....

मैं(अनु को गले लगा कर)- नही...कोई सॉरी नही....इट्स ओके...अब कुछ मत सोचना...बस मेरी अनु मुझे वापिस मिल गई...ये काफ़ी है मेरे लिए...

अनु- आइ लव यू...मैं आपको खोना नही चाहती...सॉरी...

मैं- बस अनु....बस...

फिर मैने अनु को कुछ देर तक बाहों मे भरे रखा और अपने आपसे बोला...

मैं(मन मे)- अनु...काश मैं भी तुम्हे प्यार कर पाता...पर मेरे दिल मे वो हिस्सा ही नही जो प्यार के अहसास को समझता है.....वो हिस्सा तो कब का टूट चुका है...सॉरी अनु...मैं तुम्हे वो प्यार नही दे सकता....जो तुम डिजर्व करती हो....सॉरी....

फिर थोड़ी देर तक मैं अनु के साथ प्यार भारी बातें करता रहा...तभी मुझे एक कॉल आया और मैं संजू के घर से निकल गया......

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पोलीस स्टेशन मे...........

मैं पोलीस स्टेशन पहुँचा तो आलोक मुझे बाहर ही खड़े मिल गये.....

मैं- हाँ सर ...कहिए....कोई सुराग मिला क्या ...

आलोक- सुराग...तुम क्या मोहिनी/मोना मर्डर की बात कर रहे हो...

मैं- हाँ सर...मैने सोचा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई होगी और आपको कोई क्लू मिल गया होगा...

आलोक- नही...पोस्टमार्टम रिपोर्ट तो नही आई अभी तक...

मैं- तो..आपने...मतलब कोई काम था क्या....

आलोक- ह्म्म...तुम्हारे एक दोस्त की बात करनी थी...

मैं- दोस्त...कौन सा दोस्त...

आलोक- रफ़्तार सिंग...हाहाहा....

मैं- ओह्ह....वो...हाहाहा...कहिए...क्या हाल है उसके..चर्बी कम हुई की नही ....

आलोक- नही...

मैं- कोई नही..कुछ टाइम अंदर रहेगा तो सारी अकड़ निकल जाएगी...

आलोक- नही..ऐसा कुछ नही होगा...

मैं- पर क्यो...

आलोक- आओ बताता हूँ...

और फिर आलोक मुझे स्टेशन के अंदर ले गये और हवालात का खुला हुआ गेट दिखा कर बोले....

आलोक- वो अभी-अभी बाहर हो चला है...

मैं(चिल्ला कर)- क्या...ये क्या बोल रहे आप...ऐसा कैसे...किसने...किसने किया बाहर...

आलोक- और कौन...उसका सरपरस्त ...एमएलए...वही उसे निकाल ले गया....

मैं- ओह्ह...ये एमएलए...इसकी तो आज ...

आलोक(बीच मे)- अंकित...भूलो मत वो एमएलए है...पवर उसके पास है....

मैं- ह्म..जानता हूँ...

आलोक- वो सब छोड़ो...मैं ये बोल रहा हू कि अब उस लड़की का ख्याल रखना....रफ़्तार उसके पीछे ही आएगा...

मैं- डोंट वरी सर...मैं उसे कुछ नही होने दूँगा....और हाँ...ये हवालात का गेट खुला ही रखना...थोड़ी देर मे, मैं रफ़्तार को फिर से अंदर भेजता हूँ....

और फिर मैं वहाँ से निकल गया और आलोक हैरानी से मुझे जाते हुए देखता रहा......

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एमएलए के बंग्लो पर.....

गार्ड- आप अंदर जा सकते है...सर वेट कर रहे है...

मैने फिर मोबाइल से एक मसेज किया और सनग्लास निकाल कर अंदर चला गया...

अंदर एमएलए और रफ़्तार बैठ कर दारू पी रहे थे....और मुझे देख कर दोनो हँसने लगे...

रफ़्तार- लड़के..बोला था ना...मैं ज़्यादा देर अंदर नही रह पाउन्गा...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..वैसे मैं यहाँ एमएलए साब से बात करने आया हूँ...तुमसे बाद मे निपटलूँगा...

रफ़्तार- साले..इतनी अकड़...

रफ़्तार उठने वाला था पर एमएलए ने उसे रोक दिया...

एमएलए- ह्म्म...तो बता...है कौन तू...हाँ...

मैं- एमएलए साब...अभी आपको एक मसेज मिला होगा...पहले उसे खोल कर देख ले..और इस रफ़्तार को यहाँ से बाहर कर दे...फिर मैं बताता हूँ कि मैं कौन हूँ....

एमएलए(गुस्से से )- क्या बोला...लड़के तू मुझे...

मैं(बीच मे)- कुछ भी बोलने से पहले मसेज ओपन करो सर...कहीं आपको अपने कहे पर पछताना ना पड़े...प्ल्ज़...ओपन दा मेसेज....

एमएलए ने मुझे घूरते हुए गुस्से मे अपना मोबाइल निकाला और मसेज ओपन किया....जिसके बाद उसकी आँखे फटी की फटी रह गई...और वो मोबाइल बंद कर के मुझे देखने लगा...

मैं(मुस्कुरा कर)- गुड...अब इस कुत्ते के साथ अपने बाकी कुत्तो को बाहर का रास्ता भी दिखा दो...शायद अकेले मे आपको ज़्यादा अच्छा लगेगा....

मेरी बात सुन कर रफ़्तार और एमएलए के बॉडीगार्ड गुस्से से मेरे पास बढ़ने लगे पर एमएलए ने उन्हे रोक दिया और बाहर जाने को बोला...

ये बात किसी को अच्छी नही लगी पर एमएलए का ऑर्डर था...तो सब मुझे घूरते हुए बाहर निकल गये...

मैं- अब मैं बताता हूँ कि मैं हूँ कौन...हाँ....

फिर मैने रूम का गेट अंदर से लॉक किया और एमएलए के पास जा कर उसकी चेयर पर पैर रख कर बोला....

मैं- रिश्ते मे तो हम तुम्हारे बाप होते है...नाम है अंकित........

 
मेरे बोलते ही एमएलए मुझे घूर कर देखने लगा...उसकी आँखो से सॉफ पता चल रहा था कि वो बहुत गुस्से मे है...पर वक़्त की नज़ाकत को देख कर वो सिर्फ़ चुप रह सकता था.....

मैं- क्या....मस्त डायलॉग था ना....हाहहाहा......

और मैं हँसते हुए एमएलए के सामने घूम गया और अचानक उसकी तरफ झुक कर उसकी चेयर के दोनो तरफ हाथ रख दिए और उसकी आँखो मे देखते हुए बोला.....

मैं- ""आज खुस तो बहुत होगे तुम...हायन्न्न...""".......

मैं एमएलए को थोड़ी देर देखता रहा....पर एमएलए के चेहरे पर सिर्फ़ परेशानी के भाव थे....

मैं- आअहहहहाहा......ये वाला कैसा था...मस्त ना...असल मे ...मैं बिगबी का बहुत बड़ा फॅन हूँ...सोचा कि थोड़ा उनकी तरह डायलॉगे बोल दूं...वैसे....वीडियो कैसा लगा....मस्त है ना ....एक दम...

एमएलए(बीच मे)- बस करो....मुझे ये बताओ कि ये सब ...कैसे..क...

मैं(बीच मे)- कैसे...कब...क्यो...किसलिए...कहाँ....मैं जानता हूँ ऐसे कई सवाल तुम्हारे दिमाग़ मे होंगे...पर उन सब सवालो का अब कोई मतलब नही....सबका जवाब ये वीडियो है....वैसे मैं तुम्हे सब बताउन्गा...पर...पर उसके पहले मुझे कुछ सवालो के जवाब चाहिए.....

एमएलए- ठीक है...पूछो क्या पूछना है...

मैं- ह्म्म..तो एमएलए साब...पहले मैं ये जानना चाहूँगा कि आप मेरे डॅड के पीछे क्यो पड़े थे....कोई पर्सनल बात या कुछ और...

एमएलए- असल मे ..मेरा आकाश से कोई पर्सनल मॅटर नही था...मैं बस ये चाहता था कि वो मेरे एलेक्षन कंपियन मे पैसे लगाए...पर उसने मना कर दिया...

मैं- ह्म ...मतलब कोई पर्सनल दुश्मनी नही...ह्म...तो अब दूसरा सवाल....वर्मा को आपने कैसे खरीदा...

एमएलए- वर्मा को...मैने उससे बोला कि अगर वो मेरा साथ देगा तो मैं मार्केट से आकाश का नाम मिटा दूँगा...और फिर एलेक्ट्रॉनिक्स मे वो ही राज करेगा...बस यही लालच उसे फसाने मे कामयाब हुआ....

मैं- गुड...इंसान की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाया...जैसे मैं करता हूँ...वेल...अब लास्ट सवाल.....सक्षेना को कैसे फसाया....आइ मीन उसकी बीवी को...क्योकि मुझे नही लगता कि वो औरत अपने पति को धोखा दे देगी...बिना कोई वजह...सही कहा ना...

एमएलए- ह्म..सही कहा...वो बहुत अच्छी औरत है...पर एक औरत अपने पति को किसी और औरत की बाहों मे बर्दास्त नही कर पाती...यही उसके साथ हुआ...और उस समय वो बदले की आग मे जल रही थी...और तभी वर्मा ने उसे झूठा प्यार दिखाया और सक्षेना से बदला लेने के चक्कर मे वो बेचारी वर्मा के साथ सो गई...और फिर ये सिलसिला बढ़ता गया...

मैं- इहह...पर जहा तक मुझे याद है...साक्शेणा अयाश इंसान नही...वो किसी औरत के साथ...नही..मैं नही मानता....ज़रूर कुछ गड़बड़ है...है ना...

मेरे सवाल के जवाब मे एमएलए अपनी नज़रें चुराने लगा..जिससे मेरे सवाल को और बल मिल गया.....

मैं- ह्म..आपकी कंडीशन काफ़ी कुछ बोल रही है....अब अपने मुँह से भी बता दीजिए कि असली मॅटर क्या था...जल्दी सर...मेरे पास टाइम कम है...और आपके पास भी....

एमएलए(लंबी सास ले कर)- हम्म...तुमने सही कहा...सक्षेना अच्छा आदमी है...पर हम ने उसे धोखे से ऐसा शो किया कि वो अपनी बीवी की नज़रों मे गिर गया...और फिर उसकी बीवी को हम ने इस्तेमाल किया....और इसकी वजह ...

मैं(बीच मे)- वजह मैं जानता हू...तुम और वर्मा दोनो मिलकर साक्शेणा को अपने साइड करना चाहते थे...ताकि मेरे डॅड का बिज़्नेस टूट जाए...और जब साक्शेणा सीधे नही माना तो तुम लोगो ने उसकी खुशहाल जिंदगी तवाह कर दी...सही कहा ना...

एमएलए(सिर झुका कर)- ह्म...

मैं- तब तो ये वीडियो देख कर तुम्हे बुरा नही लगा होगा ना....

एमएलए(मुझे घूर्ने लगा)

मैं- ऐसे घूरो मत...मैने भी वही किया जो तुमने साक्शेणा के साथ किया...तुमने उसकी बीवी को यूज़ किया और मैने तुम्हारी बेटी को...है ना...बस यही फ़र्क तो है....

एमएलए- अंकित...मेरी बेटी ही क्यो...

मैं(एमएलए के पास जा कर)- क्योकि तुम्हारी बेटी को अपने नीचे सुलाने मे ज़्यादा मेहनत नही करनी पड़ी...तेरी बीवी होती तो थोड़ी मेहनत करनी पड़ती ना...हाहाहा...

एमएलए(गुस्से मे)- ये तुमने सही नही किया अंकित...मैं तुम्हे...

मैं- बस...अब कोई धमकी नही...क्योकि धमकी देने की तुम्हारी अभी औकात नही...अभी सिर्फ़ तुम मेरी सुनोगे....और वही करोगे जो मैं कहुगा...वरना...

एमएलए- वरना..वरना क्या...तुम जानते हो ना कि मैं यहाँ का एमएलए हूँ...पूरा सिस्टम मेरे हाथ मे है...तो तुम मेरा उखाड़ क्या लोगे..और रही बात इस वीडियो की ..तो ये तुम्हारे साथ यही दफ़न हो जायगा...मैं अभी...

मैं- हाहहहाहा...सच मे...हाहाहा...क्या तुम सच मे...आआहहाहा....क्या मुझे बेवकूफ़ समझा है..जो मैं बिना बॅकप प्लान के यहा मरने आ जाउन्गा...ह्म...सो सॅड...मैने तुम्हे होसियार समझा था....पर तुम तो...
 
मुझे हँसता हुआ देख कर एमएलए खड़ा रह गया...जो कुछ देर पहले खड़ा होकर किसी को आवाज़ देने वाला था....

मैं- मिस्टर.एमएलए...मैं बेवकूफ़ नही...मैं यहाँ आने से पहले ही सब सेट करके आया हू...अगर मैं यहाँ से 1घंटे मे वापिस जाकर अपने आदमी से नही मिला...तो समझ लो कि ये फिल्म..जो तुम अभी देख रहे हो...पूरी दुनिया देखेगी....और इसका टाइटल होगा..""एमएलए की बेटी की गर्मी.....बाइ अंकित...""...अच्छा है ना...ह्म...

एमएलए(खीज कर)- तुम चाहते क्या हो...

मैं- ह्म..ये हुई ना होशियारी...तो सुनो...सबसे पहले इंस्पेक्टर.आलोक को कॉल करो....उनसे बोलो कि रफ़्तार को अंदर डाले....अभी करो...फास्ट...

एमएलए- ठीक है....कर देता हूँ...

फिर एमएलए ने आलोक को कॉल कर के बुला लिया....

एमएलए- हो गया...

मैं- गुड...दूसरा काम...वर्मा से बोलो कि वो बॅंक मे दी हुई अप्लिकेशन वापिस ले....साथ मे साक्शेणा की भी....अभी....करो...उसे भी कॉल करो...बोलो अभी...

एमएलए ने फिर से मजबूरी मे कॉल किया और वर्मा को बोल दिया...कुछ ना-नुकर के बाद वर्मा को मानना पड़ा...उसके बाप का जो ऑर्डर था....

एमएलए- वो अभी बॅंक जायगा....

मैं- वेरी गुड....अब सबसे इम्पोर्टेंट काम...जो तुम्हारी लाइफ बदल देगा....

एमएलए- क्या मतलब...

मैं- तुम अभी अपने पद से इस्तीफ़ा दो...

एमएलए(गुस्से मे चिल्ला उठा)- क्या बकता है....

मैं- बक नही रहा...फर्मा रहा हू....तू अब एमएलए नही रहेगा...वैसे अगर मैं ये वीडियो जनता को दिखा दूं तो तुम्हारी कुर्सी भी जायगी और इज़्ज़त भी...और मेरी बात मनोगे तो सिर्फ़ कुर्सी जायगी...कम से कम इज़्ज़त तो बरकरार रहेगी....सोच लो...आराम से फ़ैसला करो...

एमएलए- पर मैं तुम्हारी सब बातें मान रहा हूँ ना...फिर क्यो...

मैं- क्योकि मैं बेवकूफ़ नही...मैं अच्छी तरह से जानता हू कि अभी तेरे पास पॉवर है...तू मेरे यहाँ से जाते ही फ़ोन घूमायगा और मेरा नुकसान कर देगा...मुझे मजबूर भी कर सकता है वीडियो देने को...मेरी फॅमिली को चोट भी पहुँचा सकता है...और मैं ये सब टेन्षन चाहता ही नही ...तो वही करो...जो मैं कह रहा हूँ...वरना 30 मिनट मे पार्टी तुम्हे खुद बेइज्जत करके निकाल देगी...समझे...

एमएलए- लड़के...ये तू अच्छा नही कर रहा....

मैं- ह्म..मैं बुरे के साथ बुरा करने की ताक़त रखता हूँ एमएलए...अब अपना इस्तीफ़ा भेजो...जल्दी...वरना मैं फिल्म रिलीज़ करवाता हूँ....

एमएलए- नही...मैं भेजता हूँ ..भेजता हूँ...

मैं- गुड...लिखना स्टार्ट करो...

फिर एमएलए ने इस्तीफ़ा लिख कर अपने आदमी से भिजवा दिया और पार्टी ऑफीस मे भी कॉल कर के सब बता दिया....पार्टी वालो ने उसे समझाया पर वो कैसे मानता...आख़िरकार पार्टी वालो ने इस्तीफ़ा मंजूर कर लिया....
 
मैं- ये हुई ना बात...अब सही है....उउफ्फ...टेन्षन ख़त्म...अब मैं चलुगा...बब्यए....

एमएलए(पीछे से)- लड़के...आज तू बोला और मैने सुना...पर टाइम बदलते देर नही लगती....समझे...

मैं- ह्म..मैं जानता था कि तू ये बकवास ज़रूर करेगा....वेल..मैने इसका इंतज़ाम कर रखा है...तू चाह कर भी मेरा घंटा नही उखाड़ सकता...

एमएलए- क्क़..क्या मतलब...

मैं- तेरी बेटी अभी घर नही आई ना...डोंट वरी..वो मेरे पास सुरक्षित है....और तब तक रहेगी जब तक तू आम आदमी नही बन जाता....समझा...

एमएलए- आम आदमी...

मैं- नही समझा...कोई नही...कल सुबह तक समझ जायगा....चल बाहर चलते है...और हाँ...मुस्कुराहट के साथ...

फिर हम दोनो मुस्कुराते हुए बाहर आए...ये देख कर रफ़्तार को आग लग गई.....

रफ़्तार कुछ बोलता उससे पहले आलोक वहाँ आ गये और एमएलए के कहने पर रफ़्तार को ले जाने लगे....

रफ़्तार- लड़के...मैं तुझे छोड़ूँगा नही...याद रखना...

मैं- डोंट वरी...तेरा इंतज़ाम भी कर दिया है...तू अभी अंदर जा...कल तुझे भी गुड न्यूज़ दूगा....ओके...

फिर रफ़्तार मुझे घूरते हुए चला गया और मैने अपना सनग्लास निकाल कर फूक मारी और आँखो पर चढ़ा कर एमएलए की तरफ हाथ बढ़ाया....

मैं- वेल...नाइस टू मीटिंग यू मिस्टर.एमएलए....ऊओफफ्फ़...आइ मीन एक्स.एमएलए...होप यू एंजाय इट....सी यू अराउंड....बब्यए...

और मैं कार से निकल आया और एमएलए बस दाँत पीसता रह गया.......

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अकरम के घर..........

जबसे सबनम ने रिचा की बातें सुनी थी तभी से उसका रो-रो कर बुरा हाल था....वो सबसे अपने आसुओं को छिपाए रो रही थी....

इस टाइम भी वो अपने रूम मे बैठी पुरानी यादो मे खोई अपने आँसू बहा रही थी....तभी सादिया रूम मे आ गई....

सादिया- सबनम...तुम...ये क्या....सम्भालो अपने आप को. ..

सबनम(रोते हुए)- कैसे संभालू....आज तक मैं सोचती रही कि शायद मेरी किस्मत ही खराब थी..जो अनवर मुझे छोड़ कर चले गये...पर अब....नही सादिया....मैं इन आँसुओ को नही रोक सकती ...

सादिया- मैं समझती हूँ....पर ये भी तो सोचो कि अगर बच्चो ने देख लिया तो...क्या जवाब दोगि उन्हे...और बचे अब बड़े हो गये है ...उन्हे टालना भी आसान नही होगा...जानती हो ना...

सबनम- हाँ जानती हूँ....और तू भी ये जानती है कि इन्ही बच्चो की खातिर मैने सरफ़राज़ से शादी की थी....और वही ...(सबनम रोने लगी)

सादिया(सबनम के कंधे को सहला कर)- सबनम...हम दोनो ही इस मुसीबत के मारे है...हम दोनो ही नही समझ सके कि सरफ़राज़ ऐसा होगा....पर ये सोचो...कि क्या एक औरत के कह देने पर हम उसकी बात सच समझे...क्या हम सरफ़राज़ को नही जानते...तुम ही बताओ...क्या इतने सालो मे कभी सरफ़राज़ ने हमारे साथ कुछ ग़लत किया...

सबनम- ग़लत...ग़लत की बात तो तू कर ही मत....पहले उसने तुझे अपनी हवस का शिकार बनाया....गुल पैदा हुई....मैं वो झेल गई...पर फिर उसने मेरी बेटी के साथ....थू...अब भी वो ग़लत नही...हाँ...

सादिया(चौंक कर)- तो क्या तुम ज़िया और सरफ़राज़ के बारे ने जानती हो...

सबनम- हाँ...और जब मैने ये घिनोना नज़ारा देखा...बस उसी दिन से मैने भी सारी बंदिशे तोड़ दी...और मैं उस सरद के साथ सोने लगी....

सादिया- ओह माइ गॉड...मुझे पता ही नही था कि तुम सब....

सबनम- मैं ये भी जानती हूँ कि तू सरफ़राज़ की रखेल बन कर रहती थी...और उसके कहने पर कितनो के साथ सोई...सब जानती हूँ...फिर भी मैं दिल पर पत्थर रख कर जीती रही...पर जिन यादों के सहारे जी रही थी...आज वो उस कमीने की वजह से बिखर कर रह गई....

सादिया(सुबक्ते हुए)- आइ म सॉरी दी...मुझे माफ़ कर दो...मैं ग़लत हूँ...पर मेरा यकीन मानो...अगर सरफ़राज़ ग़लत है तो मैं उसे अपने हाथो से सज़ा दूगी...भले ही मुझे जैल जाना पड़े...

सबनम- सादिया....क्या सच मे वो ऐसा है...उसने ही सब किया....हाँ..

सादिया- दी...सब्र रखो...हमे जल्दी ही सच और झूठ का पता चल जायगा...तब तक हमे खुद को संभालना होगा...प्ल्ज़ दी..अब चुप हो जाओ...प्ल्ज़्ज़...

और फिर दोनो बहने आपस मे लिपट कर अपने आसुओ को संभालने लगी....

एक तरफ एक रूम मे दोनो बहनो की रोने की आवाज़े गूँज रही थी तो दूसरी तरफ अकरम के रूम मे चुदाई की आवाज़े शोर मचा रही थी....

अकरम- ओह्ह...ईीस्स...ज़िया....उउफ्फ...क्या चूस्ति हो...आअहह...

ज़िया- सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प....सस्स्ररुउउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउउप्प्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प.....उूउउम्म्म्मम....आहह...उउउम्म्म्मम...उउउंम्म...

अकरम- ईसस्स....कम ऑन ज़िया...फास्ट....फास्ट....ओह्ह्ह.....

ज़िया- उउउंम्म...उूउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म...उूउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म...उउउम्म्म्म...

अकरम- ओह ज़िया...अब नही..आहह...अब आ भी जा...उउंम...

ज़िया-आहह...हाँ भाई...मैं आती हूँ...तुम लेटे रहो...

फिर ज़िया अपने कपड़े निकाल कर अकरम के उपेर आई और लंड को चूत मे ले कर उछलने लगी...

ज़िया- आअहह.....भाई...कैसे लगी बेहन की चूत...उउंम...

अकरम- आहह...बहुत मस्त....गरमा-गरम...एसस्स ..

ज़िया- ओह..भाई...आपका लंड भी...ओह्ह...आहह...आहह...आअहह...

अकरम- एस ...येस्स...ज़ोर से उछालो...आहह...

ज़िया- हाँ भाई ..एस....एस्स..उउंम..आअहह..आहह..आहह...

अकरम- आहह....ज़िया.....मज़ा आ रहा है ना...

ज़िया- हाँ भाई...आअहह....बहुत...उउंम..ओह एस्स...आअहह....

थोड़ी देर बाद ज़िया झड गई और झडते ही वह वापिस नीचे आ कर अकरम का लंड चूसने लगी. ...

अकरम- ज़िया...मेरा होने वाला है...

ज़िया- उउंम...आ...हा भाई...मेरे मुँह मे झड़ना...उउउंम्म...उउउंम्म...

अकरम- ओह ज़िया...यू आर आ स्लट....उउउंम्म...

ज़िया- उउउंम्म...उूउउंम्म...उउउम्म्म्म...उूउउंम्म...उूउउम्म्म्म...

अकरम- एस...ज़ोर से ...मैं...मैं आया...आआहह....

ज़िया- उूुुउउम्म्म्ममम...उूुउउम्म्म्म...उूुउउम्म्म्मम...

अकरम झड़ने लगा और ज़िया उसका लंड रस पी गई और फिर लंड सॉफ कर के अपने कपड़े पहन लिए ..

अकरम- ज़िया...तुम तो एक्सपर्ट हो ..बहुत लिए लगता है ...

ज़िया(मुस्कुरा कर)- छोड़ो ना भाई..आपको मज़ा आया ना...

अकरम- ह्म..और तुम्हे..

ज़िया- बहुत..आपका स्वाद मस्त है....डॅड से भी अच्छा....

ज़िया अपनी बात बोलते हुए सन्न रह गई और मुँह पर हाथ रख लिया...और अकरम उसे घूर्ने लगा....इससे पहले कि अकरम कुछ पूछता रिया दौड़ कर रूम से निकल गई....

अकरम- ज़िया...

पर ज़िया नही रुकी...वो जा चुकी थी...

अकरम- इसका मतलब वसीम ने ज़िया को भी...साला कमीना....बस अंकित हाँ बोल दे तो मैं इसका काम तमाम कर दूँगा....हुह...

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