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चूतो का समुंदर

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अंकित के घर......

एमएलए के घर से निकल कर मैं अपने घर आया ...इस टाइम घर मे सुजाता नही थी....मैं समझा कि साली ऑफीस मे होगी...पर जैसे ही मैं उपर पहुँचा तो देखा कि डॅड अपने रूम मे है...

मैं- तो क्या सुजाता अकेली ऑफीस गई...नही....वो अकेली नही जा सकती...पर अगर ऑफीस नही तो फिर कहा...ह्म्म...लगता है इसकी कुंडली फिर से देखनी पड़ेगी...

फिर मैं अपने रूम मे आया और तभी मुझे कुछ याद आया तो मैं वो पार्सल मे आई फोटोस ले कर डॅड के पास पहुँचा..

आकाश(फोटो देख कर)- ये सब तुम्हे कहाँ से मिली...

मैं- वो सब बाद मे बताउन्गा...पहले आप मुझे मेरी फॅमिली से मिलवाओ...ये पिक्स किस-किस की है...

आकाश- क्यो नही...देखो...ये मेरे पिताजी...मतलब तुम्हारे दादाजी...क्या खूब लगते है ना..हा...

मैं- हाँ डॅड....लुक्स लाइक आ रॉयल मॅन..हा...

आकाश- ह्म...और..और ये है मेरी माँ...इनके लिए मैं ही सब कुछ था....बेटा ..मैं आज भी इनको अपने करीब पाता हू...ये मुझसे दूर गई ही नही...

इतना बोलते हुए डॅड की आँखे भर आई...मैं समझ गया कि उनके दिल मे क्या चल रहा है. .पर मैने उन्हे टोका और वो आँसू पोछ कर बाकी फोटोस को बताने लगे...

आकृति ब्या, योगेंद्रा चाचा, धर्मेश, सुभाष....इन सबके बारे मे बताते रहे...

फिर मैने एक पिक उठाई और बोला...

मैं- और ये...ये कौन है डॅड...

आकाश- ये...इसे मैं नही जानता...ये पिक कहाँ से मिली...ये...नही..मैं नही जानता इसे...

मैं- ओह्ह..ये शायद ग़लती से साथ मे आ गई...कोई नही...अच्छा डॅड आप ये फोटोस रखो...मैं थोड़ा आता हूँ...

फिर मैं डॅड को सारी पिक दे आया..बस वो पिक साथ ले ली जिसे डॅड ने पहचाना नही...

मैं(मन मे)- डॅड ने इसे नही पहचाना...ये कैसे हो सकता है...ह्म्म..कुछ तो बात है ..क्या ये पिक असली है...या फिर मैं जो सोच रहा हूँ...नही...मैं कुछ ज़्यादा ही सोचने लगा...पर...पता तो करना ही होगा...आख़िर डॅड ने इसे पहचाना क्यो नही....???

फिर मैने वो पिक अपनी जेब मे रखी और बॅंक निकल गया..

बॅंक जा कर मैने पैसे निकाले...क्योकि वर्मा ने एपॉलिकेशन वापिस जो ले ली थी..तो मुझे आसानी से पैसे मिल गये...

पर जैसे ही मैं वहाँ से निकालने को हुआ तो वर्मा मेरे सामने आ गया...

वर्मा- ह्म्म..तो पैसे मिल ही गये...अब अहसान मान मेरा...मेरी वजह से तुझे पैसे मिले है...

मैं(मुस्कुरा कर)- अहसान...कैसा अहसान बे...तू यहा दुम हिलाते आया क्योकि ये तेरे मालिक का हुकुम था...और तू जानता है कि तेरे मालिक ने तुझे ऐसा हुकुम क्यो दिया...क्योकि उसके बाप ने उसे ऐसा कहने को बोला था...और उसका वो बाप मैं हूँ...समझा...

वर्मा(गुस्से से)- क्या बकता है...

मैं- बकता नही..सच यही है...जा कर पूछ ले उस एमएलए से...ओह्ह्ह...मतलब एक्स.एमएलए से....अब वो एमएलए भी नही रहा...और इसका क्रेडिट भी मुझे ही जाता है....

वर्मा(गुस्से से)- अगर ये सच भी है तो क्या...पैसे मिल गये ना..बस...लेकिन कुछ दिन मे तू और तेरा बाप रास्ते पर ज़रूर आएगा...याद रख ...वाई दा वे...कुछ टाइम मागा था तूने...है ना...भूला तो नही...हाँ...

मैं- मिस्टर.वर्मा...ये मेरी एक ख़ासियत है कि मैं कुछ भी नही भूलता...अच्छा या बुरा...मुझे सब याद रहता है....और यकीन मानो...मैं चाहू तो तुझे अभी रोक सकता हूँ...पर मैं ऐसा करूँगा नही...मैने तेरे लिए कुछ और ही सोचा है...कुछ बड़ा...

वर्मा- चल...देखते है...क्या करता है तू...

मैं- रिलॅक्स वर्मा..जो भी करूँगा...वो यादगार होगा...और हाँ..नेक्स्ट मीटिंग शायद हमारी लास्ट मीटिंग होगी...सो जस्ट वेट आंड . ...

और मैं वहाँ से निकल गया और वर्मा भी दाँत पिसते हुए निकल गया....
 
फिर मैं हॉस्पिटल गया और सोनू को सारे पैसे दे दिए..

सोनू- अंकित...मैं..

मैं(बीच मे)- अभी कुछ नही...सोनम को ठीक करा....फिर बात करेंगे...ओके...चल तू ये पैसे जमा करवा देना...मुझे थोड़ा काम है...

इतना बोलकर मैं हॉस्पिटल से निकला और थोड़ी देर बाद मैं एक रूम मे खड़ा था....

मैं(जेब से पिक निकाल कर)- ये फोटो ध्यान से देखो...

""क्या...है...ये फोटो तुम्हारे पास कैसे आई ...""

मैं- वो सब छोड़ो...ये बताओ कि ये फोटो किसकी है...

""ये..मेरी बेटी की है..मतलब..""

मैं(बीच मे)- मतलब समझ गया...अब ये बताओ कि ये पिक तुमने किसे दी थी...

और फिर जो जवाब मैने सुना..उसे सुनकर मेरे जिस्म का रोम-रोम खड़ा हो गया....और मैं दाँत पीसते हुए बोला...

मैं- नही...ये नही हो सकता......(चिल्ला कर)- ये नही हो सकता..........

मेरी हालत इस वक़्त कुछ इस तरह थी जैसे किसी मछली को गर्म रेत पर डाल दिया हो.....जो तड़फ़ड़ने के अलावा कुछ नही कर सकती.....

मैं(मन मे)- हे गॉड...ये मेरे साथ ही क्यो होता है...मैं जिस रास्ते पर सेफ महसूस करता हूँ उसी रास्ते मे आप दलदल क्यो बना देते हो...क्यो....

अपनी लाइफ मे आज मे फिर से एक बार बेबसी महसूस कर रहा हूँ....जो चाह कर भी कुछ नही कर पा रहा...और उसकी वजह...वजह सिर्फ़ एक है...कि मेरे पास कोई सबूत नही....

मैं आज जान कर भी अंजाना हूँ...मुझे लगता था कि मैं लोगो की पहचान करने लगा हूँ...पर आपने एक बार फिर से मुझे ग़लत साबित कर दिया...थॅंक यू गॉड...थॅंक यू....

तभी मेरे सामने से आवाज़ आई जिसने मुझे दुनिया मे वापिस खीच लिया....

""क्या हुआ...आपने बताया नही कि ये फोटो आपको मिली कहाँ से... ""

मैं- क्या तुम...तुम्हे पूरा यकीन है कि ये पिक तुमने उसी को दी थी....

""हाँ...और ये बहुत पहले की बात है...जब हम आपसे मिले भी नही थे....""

मैं- हुह...तुम रेस्ट करो...मैं बाद मे आता हूँ...

और मैं वहाँ से अपने दिल मे कुछ नये सवाल ले कर निकल गया .....

और सीधा अपने रूम मे क़ैद हो गया....

आज एक बार फिर से मैं अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा था....

मेरी लाइफ की तरगडी देखो...जो कुछ चाहा...कुछ ना मिला...जिसको अपना माना...वो पराया निकला....जिसको प्यार किया....वो दूर चला गया....कुल मिला कर मेरी जिंदगी मे कुछ अच्छा नही हुआ...सिबा मेरी सेक्स लाइफ के.....

मैं अपने रूम मे लेटा हुआ अपने दिल मे चल रही उलझनो मे डूबा हुआ था कि तभी मेरा फ़ोन बजा....

स्क्रीन पर नाम देख कर मेरे दिल के किसी कोने मे खुशी उमड़ पड़ी....ये रेणु दी का कॉल था....

( कॉल पर )

मैं- उः...हाई डार्लिंग....

रेणु- हाई जान....कैसे हो...

मैं- वाह...खुद ही दर्द देकर दिल का हाल पूछती हो....गुड....

रेणु- क्या...क्या कहा तुमने...मैने अपनी जान को कौन सा दर्द दे दिया...

मैं( आह भर कर)- तुम नही समझोगी....ये काफ़ी...काफ़ी उलझा हुआ है...

रेणु- तो तू समझा दे ना मेरी जान...

मैं- अच्छा...वैसे आज इतना प्यार कैसे आ गया....अब तक तो मुझे भूल ही गई थी ना....

रेणु- नही मेरी जान....जब तक इस दिल.मे धड़कन है...तब तक ये सोचना भी मत...

मैं- ओह दी...हिला डाला...वेल..इतनी ही चाहत है तो मिलने आ जाओ ना...

रेणु- ह्म...पर इस बार मैं नही...तुम मिलने आओगे ...मेरे घर ...

मैं(चौं कर)- क्या....ये कैसे हो सकता है...आप जानती हो कि..

रेणु(बीच मे)- सब जानती हूँ...इसलिए बोल रही हूँ कि अब तुम मुझसे मिलने आओगे....

मैं- पर बुआ...वो मुझे देख कर खुश नही होगी....वो तो मुझसे नफ़रत...

रेणु- वो पुरानी बात है....आज की डेट मे वो तुम्हे ही याद करती है...समझे बुद्धू...

मैं- आप मज़ाक कर रही हो ना...हाँ...

रेणु- नही मेरे सोना....रूको...मैं अभी साबित करती हूँ...तुम खुद उनसे बात करो....

मैं- क्या..पर मैं...

रेणु(बीच मे)- ह्म्म...वो खुद चाहती है....तुम बस बात करो....1मिनट...

फिर रेणु ने कुछ देर फ़ोन होल्ड पर रखा और फिर मुझे फ़ोन पर वो आवाज़ सुनाई दी जिसे सुनने को मैं सालो से बेकरार था ...मेरी बुआ की आवाज़...

आकृति- हह..हेलो...

मैं(असमंजस मे )- ह..हेलो....आप...आप कैसी हो...बुआ...

आकृति- मैं...मैं ठीक हूँ ..बेटा...

मैं- बेटा....(और बेटा शब्द सुन कर मेरी आँखो से आसू छलक गये)
 
आकृति भी मेरी सिसकी सुनकर इमोशनल हो गई थी....पर वो अपने आप को संभाले हुए थी....

आकृति- हाँ बेटा...तू कैसा है...

मैं- ठीक...मैं ठीक हूँ बुआ....बस...अब बिल्कुल ठीक....आपने बेटा बोल दिया...तो..तो मैं ...उम्म्म..बिल्कुल ठीक हूँ .....

आकृति- बेटा...मैं जानती हूँ कि ये सब सुनने मे अजीब लगेगा तुझे...पर सच यही है कि मैं हमेशा से तुम्हे बेटा बुलाना चाहती थी...पर ....मैं ..

मैं- मैं जानता हूँ बुआ....आप मेरे डॅड से गुस्सा थी...और शायद इसी वजह से....

आकृति- हाँ बेटा...पर इसमे तेरा क्या कसूर...मुझे तुम्हारे साथ ऐसा नही करना चाहिए था...सॉरी बेटा...

मैं- नही बुआ...आप सॉरी मत बोलिए...मैने आपको कभी ग़लत नही समझा...बस दिल मे एक कसक थी कि कभी आप मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरे ...मुझे अपना माने...मुझे बेटा कह कर...

(और मैं बोलते-बोलते रो पड़ा...शायद बुआ के लिए दिल मे क़ैद प्यार उमड़ पड़ा.....)

आकृति- नही बेटा...तू रो मत...तू बस घर आ जा...मैं तुझे जी भर कर प्यार करना चाहती हूँ....बस घर आ जा....

(और बुआ भी सिसकने लगी..)

थोड़ी देर तक हम दोनो बस रोते रहे....फिर रेणु ने बुआ से फ़ोन लिया और मुझे घर आने को बोला और कॉल कट हो गई.....

फ़ोन रख कर मैं बुआ के बारे मे...उनकी कही बातों के बारे मे सोचते हुए नीद की आगोश मे खो गया......

और वहाँ बुआ के घर फ़ोन कट होते ही बुआ फुट-फुट कर रोने लगी और उनके पास खड़ी रेणु और उसका बाप ठहाके मारने लगे....

आकृति(रोते हुए)- तुम लोगो का कभी भला नही होगा.. तुम लोग जो कर रहे हो...उसका अंजाम बुरा होगा...समझे....

रेणु- हहहे...तू अंजाम की फ़िक्र ना ही करे तो ठीक...तू बस वो कर जो हम कहते है...वरना...तेरा बेटा ...

आकृति- रेणु...मैने तुझे सग़ी माँ से ज़्यादा प्यार किया और तूने...

रेणु(बीच मे)- मेरी सग़ी माँ मर गई...और उसे तेरे भाई ने मारा....समझी...और मैं उसका बदला ले कर रहूगी....हर एक बात का बदला....समझी तू...

फिर रेणु ने अपने बाप से आगे का प्लान डिसकस किया और कुछ देर बाद ही उसका बाप अपने आदमी और आकृति के बेटे के साथ वहाँ से निकल गया....

रेणु- अब रेडी हो जा....मुझे यकीन है कि वो पागल तुम्हारा रोना सुन कर तुमसे मिलने भाग कर आयगा...तो...रेडी हो जा...और अब मैं भी कुछ तैयारी कर लूँ...मेरा बुद्धू आशिक़ जो आ रहा है...मज़े तो करना ही होगा ना..हहहे...

और फिर रेणु निकल गई और आकृति बैठी -बैठी आँसू बहाती रही....

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रिचा के घर.........

सुबह- सुबह जब रिचा ने आँखे खोली तो उसके सामने उसकी बेटी रिया कॉफी लिए खड़ी हुई थी....ये देख कर रिचा शॉक्ड हो गई और बैठ गई ....

रिचा- बेटा तू....तू सुबह -सुबह यहाँ...वो भी कॉफी के साथ...कही मैं सपना तो नही देख रही...

रिया(मुस्कुरा कर)- नही मोम...ये सपना नही...1 मिनट...आप ये कॉफी लीजिए..

और फिर रिया रिचा को कॉफी पकड़ा कर खिड़की पर पड़े पर्दे खोल देती है...और बाहर से आती धूप से रिचा की आँखे मे चकाचौंध छा जाती है...

रिचा(अपनी आँखे बंद कर के)- ये क्या...बंद कर बेटी...

रिया- क्यो मोम...अब समझ आया ना कि ये सुबह नही है...दोपहर हो गई है...समझी आप...

रिचा- समझ गई....अब बंद भी कर दे...मुझसे आँखे नही खोली जाती...

रिया- जानती हूँ मोम...आपको अंधेरे मे रहना ही ज़्यादा पसंद है....

रिचा- नही बेटा..ऐसा नही...वो तो मैं अभी जागी हूँ ना...

रिया- काश आप जाग जाती तो अच्छा होता मोम...

रिचा(आँखे मलकर खोल देती है)- क्या कहा...मैं जाग ही रही हूँ...अच्छा ये बता कि आज मेरी बेटी ने कॉफी कैसे बना ली...आज के पहले तो कभी नही बनाई....

रिया- क्या करूँ मोम...मुझे अब समझ मे आया कि मुझे काम करना चाहिए...अगर अब भी मैं आपके काम के भरोशे रही...तो जिंदगी खराब हो जायगी मेरी......

रिचा(मुस्कुरा कर)- शाबास बेटी..आज मैं बहुत खुश हूँ...मेरी बेटी को अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास हो गया...गुड...

रिया- हाँ मोम...अब मुझे ही ज़िम्मेदारी लेगी होगी..नही तो...छ्च...पता नही क्या होगा...

रिचा- अच्छा है....चल अब ये बता कि तू क्या खाएगी...मैं जल्दी से बना देती हूँ...फिर मुझे जाना है...

रिया- कहाँ मोम...आज तो छुट्टी का दिन है....

रिचा- हाँ...वो...वो मुझे दामिनी को देखने जाना है...

रिया- ह्म...ओके मोम...चली जाना...पर मुझे आपसे एक सवाल पूछना था...

रिचा- हाँ पूछ ना...

रिया- आपके लिए दुनिया मे सबसे ज़्यादा इम्पोर्टेंट क्या है...

रिचा- मेरे लिए...ये कोई पूछने के जैसा है...मेरे लिए तू ही सबकुछ है बेटी...

रिया(मुस्कुरा कर)- सच मे....तो ये बताइए कि कभी आपको मुझे किसी और चीज़ के बदले चुनना पड़ा तो...आप किसे चुनेगी...

रिचा(गुस्सा दिखा कर)- क्या पागलो जैसा सवाल है...मैं तेरे लिए सबकुछ छोड़ सकती हूँ...अपनी जान भी...समझी...

रिया(रिचा के गले लग कर)- ओह मोम...गुस्सा मत हो...मैं तो ऐसे ही..

रिचा(बीच मे)- ऐसे भी कभी सोचना भी मत...मेरे लिए तू ही सबकुछ है...समझी ना....

रिया- हाँ मोम....समझ गई...सॉरी ....आइ लव यू...

रिचा(रिया को बाहों मे कस कर )- लव यू 2 बेटी...

रिया(अलग हो कर)- मोम..वैसे आप अंधेरे की जगह उजाले मे देखना शुरू कर दो...ये आपके लिए और आपकी बेटी के लिए सही होगा..ओके. .

और इतना बोलकर रिया रूम से निकल गई और रिचा उसकी कही बात के बारे मे सोचने लगी...

रिचा- आज रिया कुछ बदली-बदली सी है...क्या वजह हो सकती है..कही अंकित ने इसे कुछ ...नही...अगर ऐसा कुछ होता तो रिया मुझसे पूछती ज़रूर...और सबसे बड़ी बात... मेरी बेटी मेरे खिलाफ कुछ सुन ही नही सकती..मैं भी ना...कुछ भी सोचने लगती हूँ....धत्त...

रिया(बाहर निकल कर)- चलो ये तो जान गई कि मोम के लिए आज भी मैं ही सबसे इम्पोर्टेंट हूँ....काश मोम मेरी बातों का सही मतलब समझ जाए तो ठीक...वरना कुछ और सोचना पड़ेगा....कुछ भी हो जाए...मैं मोम को सही रास्ते पर ला कर रहूगी..भले ही इसके लिए मुझे उनको हर्ट ही क्यो ना करना पड़े ...और जो ग़लती उन्होने की है...उन्हे उनकी सज़ा तो भुगतनी ही पड़ेगी...आइ प्रोमिस मोम...पक्का प्रोमिस .....

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अकरम के घर .......शाम के वक़्त.......

वसीम अपने रूम मे अकेला इधर-उधर टहल रहा था....वो बड़ा परेशान था....ये उसके चेहरे से बहते पसीने से सॉफ पता चल रहा था....

वसीम- इन कमिनो की वजह से मेरा सालो का प्लान बर्बाद हो जायगा....मेरी सारी मेहनत...सब बेकार हो जाएगी....

मैने अपने मक़सद को पाने के लिए क्या कुछ नही किया....अपनो को खोया, दुश्मनो को मारा....इतनी मेहनत से इंतज़ार कर-कर के ये साज़िशे रची...और अब....

नही...मैं इस कमीने की वजह से फैल नही हो सकता...ये मेरा प्लान है...मेरा...

मैं..मैं इनको भी ख़त्म कर दूँगा...ना रहेगा बाँस...ना बजेगी बाँसुरी ..साले मेरे लिए काम करते थे और अब मेरे बाप बनने लगे....

आज इन्हे बताता हूँ कि मेरा बाप बनने की कोसिस करने वालो का मैं क्या हाल करता हूँ....

फिर अकरम ने कवर्ड के अंदर से पिस्टल निकाली और बाहर निकल गया......

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हॉस्पिटल के एक रूम मे..........

सोनू हाथ मे पैसो से भरा बॅग लेकर सोनम के पास बैठा था...दोनो भाई-बेहन इस समय बेहद परेशान थे और सोनम की तो आँखे भी नम थी ...

सोनम- भाई...आज सब ठीक हो जायगा ना...

सोनू- हाँ सोनम...आज पैसे उन्हे देते ही हमारी मोम वापिस आ जाएगी...और फिर हम अंकित को पूरी सच्चाई बता देगे...ओके ..

सोबाम- ह्म्म ..पर अंकित हमे समझ पायगा...कही वो हमे....

सोनू(बीच मे)- वो बाद मे देखेगे...अभी पहले मोम को छुड़ा लू..फिर देखते है...जो होगा सो होगा...चल...मैं चलता हूँ...

फिर सोनू डॉक्टर के बताए रूम मे बैठ कर किसी का वेट करने लगा...और बैठा-बैठा सोचने लगा कि वो इस मुसीबत मे फसा कैसे.....

फ़्लासेबकक.........

सोनम को गोली लगने के बाद जब अंकित अकरम के पास था तो सोनू को डॉक्टर ने अंदर बुलाया....

सोनू जब सोनम से मिला तो सोनम होश मे थी......पर डरी हुई...और सोनम ने उंगली से एक तरफ इशारा किया....

सोनू ने देखा कि वहाँ 1 आदमी हाथ मे पिस्टल लिए खड़ा था...और साथ मे डॉक्टर भी था...

जब सोनू ने उससे पूछा तो पता चला कि वो 20 लाख रुपये चाहते है....सोनू ने उन्हे बोला कि उसके पास रुपये नही तो उसने सोनू की बात उसकी माँ से कराई..जो उनके कब्ज़े मे थी...

उस आदमी ने बताया कि उसकी 2 मागे है...पहली...पार्क मे हुई घटना के बारे मे मुँह बंद रखे...किसी को ना बोले कि उसने किसके कहने पर गोली चलाई...

दूसरी...20 लाख रुपये....जो कि अब अंकित देगा...

पर सवाल था कि कैसे...इसके लिए उस आदमी ने डॉक्टर को बोला...डॉक्टर पैसो मे बिक चुका था...

और फिर डॉक्टर ने ये बात अंकित के सामने कही...क्योकि वो आदमी जानता था कि अंकित पैसो की वजह से सोनम को मरने नही देगा...

और मजबूरी मे सोनू और सोनम को ये नाटक करना पड़ा...अपनी माँ को बचाने के लिए......

तभी रूम मे किसी के आने की आहट हुई और सोनू होश मे आया...

सोनू- ये लो .....पूरे 20 लाख है...जितने तुमने मागे थे.....

सोनू ने अंकित से लिए हुए पैसे एक सक्श के हाथ मे थमाते हुए कहा...

सोनू के सामने इस वक़्त 2 आदमी खड़े थे...दोनो ने ही अपने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था.....

सोनू- अब मेरी माँ को छोड़ दो...

आदमी- इतनी जल्दी भी क्या है बच्चे...आराम से...

सोनू- नही...तुमने कहा था कि पैसे मिलते ही तुम मेरी माँ को छोड़ दोगे....

आदमी- हाहाहा....तू भी बड़ा भोला है....तुझे क्या हम बेवकूफ़ नज़र आते है...हाँ...

सोनू(सहम कर)- नही...नही तो...मैने कुछ बोला क्या....

आदमी(अपनी पिस्टल को सोनू के कंधे पर रख कर)- सही किया जो बोला नही...वरना...हाहाहा....

सोनू(डरते हुए)- देखो...मैने तुम्हारा काम कर दिया है...अब मेरी माँ को छोड़ दो प्ल्ज़...

आदमी2- अरे बच्चे....अगर हम तेरी माँ को छोड़ देगे तो तू अंकित से सच नही बोल देगा....हाँ...

सोनू- नही..बिल्कुल नही...मैं उससे कुछ नही कहुगा...रहा सवाल पैसो का...तो वो मैं उसे वापिस कर दूँगा...जब मेरे पास होंगे...

आदमी2- अरे बच्चे...तू समझा नही...क्या है कि अब हमारा मूड चेंज हो गया....

सोनू- क्या मतलब...

आदमी2- मतलब ये कि तूने हमे सोने का अंडा देने वाली मुर्गी दिखा दी...तो अब तुम ही बताओ कि हम एक अंडा ले कर कैसे छोड़ दे उसे...

सोनू(थोड़ा गुस्से मे)- मतलब क्या है तुम्हारा....

आदमी2- मतलब ये कि अब हमे 20 लाख और चाहिए...तब हम तेरी माँ को छोड़ेगे....

सोनू(बौखला कर)- नही..तुम ऐसा नही कर सकते...हमारी डील हुई थी...

आदमी(बीच मे)- चुप...डील हुई थी तो क्या....अब हमे 20 लाख और चाहिए...समझे...और तुझे देना ही होगा...वरना तेरी माँ...

सोनू(बीच मे)- पर मेरे पास पैसे नही...कहाँ से लाउगा...

आदमी2- अरे...तुझसे लाने किसने बोला...अंकित लायगा....

सोनू- अंकित...पर अब मैं उसे धोखा नही दे सकता....

आदमी- तो जा...बोल दे उसे सच...पर फिर तेरी माँ को भूल जाना....ओके...

सोनू- नही..ऐसा मत करो प्ल्ज़...छोड़ दो हमे...प्ल्ज़्ज़ ..

सोनू लगभग गिडगिडाने लगा...पर सामने खड़े आदमियों पर सोनू की पुकार का कोई असर नही हो रहा था...दोनो सोनू की हालत देख कर मुस्कुरा रहे थे. .

आदमी- बच्चे ...रोना बंद कर...और एक बार और अपनी माँ के लिए झूठ बोल दे...बाकी का काम डॉक्टर कर देगे....

आदमी2- हाँ..तू फ़िक्र मत कर...डॉक्टर अंकित को बोल देगा...तू बस अपनी बेहन को समझा देना...और फिर पैसे मिलते ही हम तेरी माँ को छोड़ देगे...ओके ..

फिर वो दोनो सबसे छिप कर हॉस्पिटल से निकल गये.....पर कोई था...जिसे उनपर डाउट हुआ और उसने फ़ोन निकाल कर किसी को कॉल कर दिया...

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कुछ देर बाद.......

जब शाम के वक़्त रात का अंधेरा सूरज को ढक रहा था....उस वक़्त एक फार्म हाउस मे दो आदमी एक औरत की दमदार चुदाई कर रहे थे .....

आदमी1- आअहह....क्या मस्त रंडी है...आहह...ये ले ...

आदमी2- सही कहा सर....एक नंबर की रंडी है..चुदाई का बड़ा कीड़ा है इसमे...ये ले साली मेरा गांद ने ले...

औरत- आअहह ...आहह....चोदो...ज़ोर से...आहह...आअहह...

एक आदमी औरत की चूत मे सतसट लंड पेल रहा था और दूसरा औरत की गांद मे...और औरत भी मज़े से दोनो लंड को अपने छेदों मे पिलवा रही थी...

कुछ देर बाद तीनो झड गये और चुदाई का महॉल शांत हो गया...

औरत- अब मुझे जाने दो...तुम कहो तो मैं चुदने आ जाया करूगी...पर अभी मुझे जाने दो...

आदमी1- अरे ऐसे कैसे जाने दूं..हाँ...अभी तो मज़े करना बाकी है...और हमारा काम पूरा कहाँ हुआ....

आदमी2- और तुझे जाना क्यो है...तू यही रह..हमारी रंडी बन कर...और मज़े कर...हाहाहा...

फिर वो दोनो हँसने लगे और औरत आँसू बहाने लगी...

औरत- प्ल्ज़...छोड़ दो मुझे ...मुझे घर जाने दो..

तभी आदमी1 ने पिस्टल उठाई और औरत के सीने पर लगा दी...

आदमी1- घर जाना है...अब एक शब्द भी निकाला तो ठोक दूँगा...घर नही सीधा उपर जाएगी...समझी..

औरत(गुस्से से)- तो मार दो ...ऐसी जिंदगी से तो मौत भली...मार दो...

औरत ने पिस्टल पकड़ ली और फाइयर करने का बोलने लगी...

आदमी1- छोड़...अरे गोली चल जाएगी...छोड़...

पर औरत मानने को तैयार नही थी...वो चिल्लाती हुई बार-बार फाइयर करने का बोलने लगी और आदमी1 उससे पिस्टल च्छुड़वाने लगा...

तभी अचानक किसी ने लात मार कर रूम का गेट खोला और एक फाइयर के साथ औरत की चीख रूम मे गूँज उठी...

औरत- आआआआअहह.....

और इसी के साथ तीसरा आदमी रूम मे दाखिल हुआ.....

आदमी2- ये..ये क्या किया साले....तूने गोली मार दी...

आदमी3- अब सब मरेगे...जो भी बीच मे आया...सब मरेगे....

और आदमी3 ने एक और फाइयर किया और तभी खिड़की का काँच टूटने की आवाज़ आई...और फिर से एक चीख उस रूम मे गूँज उठी.......

""आआआअहह...आहह.....""

गोली चलने के बाद उस घर से एक आदमी तो भाग निकला , जो खिड़की तोड़ कर कूद गया था.....पर बाद मे आया आदमी वही पर ठिठक गया....और फर्श पर पड़े घायलो को देखने लगा जो कुछ समय बाद लाषो मे बदल गये.....

उसने जब अपने सामने पड़ी दो लाषो को देखा तो उसके होश उड़ गये.....और उसने गन को अंदर डाला और उन लाषो को ठीक से जमा कर वहाँ से भाग खड़ा हुआ...

अंकित के घर......

मैं बुआ से बात करने के बाद उनही के बारे मे सोचते हुए सो गया था...पर जब मेरी आँख खुली तो मेरे फ़ोन पर शीला का कॉल आ रहा था ...

जिसे देख कर मुझे याद आया कि अभी वर्मा का मामला फिक्स करना बाकी है....

बुआ से तो मिल लेगे...पर पहले वर्मा की बॅंड बजा दूं....और यही सोच कर मैने कॉल अटेंड किया....

( कॉल पर )

मैं- हेलो स्वीटी....

शीला- स्वीटी....मैं स्वीट तभी लगती हूँ जब कॉल करूँ..हाँ...बाकी तो मुझे याद भी नही करते....

मैं- आहह...ऐसा नही है...बस थोड़ा बिज़ी हो जाता हूँ तो....समझो ना....

शीला- कमाल है ना....कोई आपका बेसब्री से इंतज़ार करे और आप बिज़ी रहो....ह्म...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म...कभी-कभी होता है यार....

शीला- अच्छा...वैसे तुम्हे पता होना चाहिए कि मेरी एक झलक पाने को लोग बेकरार रहते है....समझे...

मैं- ओह हो...तो फिर तुम उन लोगो पर तरस क्यो नही खाती ...ह्म...

शीला- क्योकि मैं....

मैं- हाँ हाँ...क्योकि तुम क्या...हाँ...

शीला- जाने दो...ये बताओ कि आज थोड़ा टाइम है जनाब के पास या आज भी बिज़ी...ह्म..

मैं- अरे मेरी जान...आपके लिए तो टाइम ही टाइम है...बोलो कब आ जाउ....

शीला- अच्छा...ऐसा क्या...

मैं- सच मे...बोल कर तो देखो....

शीला- ह्म्म..तो अभी आओ....तब मानु...देखे तो आप बातें ही करते हो या फिर...

मैं- फिर क्या...चलो मैं आज प्रूव कर ही देता हूँ...फ़ोन रखो...अब सामने ही बात होगी...बाइ....

और मैने कॉल कट की और थोड़ी देर बाद रेडी हो कर घर से निकल गया......और पहुँच गया....एमएच32....

फिर जैसे ही शीला ने गेट खोला तो उसे देखते ही मेरे अरमान जागना शुरू हो गये....

मैं(मन मे)- आज तो इसका काम पूरा करके ही जाउन्गा...भले ही इसका पति आए या और कोई.....

शीला(इतराते हुए)- अब यही खड़े हुए रात निकलोगे या फिर...

मैं(मुस्कुरा कर)- नही...आज की रात वेस्ट नही होगी...आज की रात कयामत की रात होगी....

शीला- ओह हो...पर कयामत किसकी आयगी....ह्म...

मैं- ये तो वक़्त बताएगा...फिलहाल तो तुम कयामत ढा रही हो...

और मैने आगे बढ़ कर शीला के गाल पर हाथ फेरा...तभी शीला ने मेरा हाथ थाम लिया....
 
शीला- उम्म्म...इतनी भी क्या बेताबी...पहले अंदर तो आओ....

और इसी के साथ मैने गेट लॉक किया और नाइटी मे लिपटी शीला को बाहों मे कस लिया....

मैं- अब और इंतज़ार नही होता....उउउंम्म....

शीला- उउम्म्म्म...इंतज़ार तो मुझसे भी नही होता....उूउउम्म्म्मम.....

और इसी के साथ मेरे होंठ शीला के गुलाबी होंठो से जुड़ गये ..और होंठो के बीच चूसने की जंग छिड़ गई.....

शीला- आआआवउउउम्म्म्म....आहह..मैं कब्से....उूुउउम्म्म्ममम....उूउउम्म्म्म....

मैं- उूुउउम्म्म्मम...उूुउउम्म्म्म....आहह..मे तो...आओउुउउम्म्म्मममममममम......

हम एक दूसरे को किस करते हुए इतने गरम हो गये कि अपनी बॉडीस को आपस मे रगड़ने लगे.....

मुझे शीला के कड़क निप्पल नाइटी के अंदर से भी सीने पर चुभने लगे थे...और मेरे हाथ उसकी कसी हुई गांद को हाथो मे दबोचने मे बिज़ी थे...

फिर मैं एक्शिटेड हो कर शीला को पकड़ कर अपनी गोद मे उठा लिया और शीला ने भी अपनी टांगे मेरी कमर मे लपेट दी और किस करने की स्पीड अपने आप तेज हो गई....

शीला- आओउउउम्म्म्म...उउउंम्म...आअहह...अंदर चलो ना...आअहह....अब बर्दास्त नही होता....

मैं- उउउम्म्मह.....कौन कम्बख़्त बर्दास्त करना चाहता है...ह्म..चल मेरी जान....

और फिर मैं शीला को अंदर ले जाकर खड़ा कर दिया...और शीला ने तुरंत अपनी नाइटी को गले से निकाल दिया और अपने कड़क हो चुके बूब्स मुझे सौंप दिए.....

शीला- अंकित....यू लाइक इट ना...एयेए...कम ऑन ...सक देम...आअहह...

शीला ने मेरा सिर पकड़ के अपने सीने पर झुकाया और मैने भी उसके निप्पल को मुँह मे भर लिया....

मैं- उउउम्म्म्मममम...आअहह...यम्मी....उूउउंम्म...उउउम्म्म्म...

शीला- ऊओह...सक इट....सक...आअहह....

मैं- उूउउंम्म...उउउंम्म...आअहह...उउउंम्म...उउउंम....

शीला- आअहह...एस बेबी....चूसो...ज़ोर से...आअहह....

मैं शीला के बूब्स को बारी-बारी चूसने मे बिज़ी था और शीला एक हाथ से मेरे सिर को सहलाती हुई दूसरे हाथ से मेरा लंड सहलाने मे बिज़ी थी...

शीला- आअहह...चूस लो ....आअहह...और तेज...और तेज...उूउउंम्म....

मैं- उउउंम्म...उउउंम्म...आहह...मज़ा आ गया....वाउ...

और फिर मैने हाथो से पकड़ कर शीला की नाइटी को निकल फेका और उसके सीने से होते हुए उसकी नाभि तक पहुँच गया....

और कमर पकड़ कर उसकी नाभि को चाटने लगा....

शीला- ओह्ह...बेबी...ये तो अब तक...आअहह...मेरे पति ने भी नही कियाअ....उउउंम...

मैं- सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प.....सस्स्रररुउउउप्प्प्प्प.....सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....

शीला- आहह...मेरी कमर ...आहह...पूरा बदन झूम रहा जानू...उउउंम्म...करते रहो....आअहह...

मैं शीला की नाभि के साथ खेल रहा था और शीला मस्ती मे तड़प रही थी....मेरी जीभ की हर एक हरकत उसे पागल कर रही थी.....

शीला- आअहह...बस...आहह...तडपाओ मत जान...पल्लज़्ज़्ज़्ज़....

शीला की बात सुनकर मैने उसकी नाभि को छोड़ा और नीचे होता हुआ उसकी चूत तक पहुँच गया...जो कि अब पानी बहाने लगी थी....

मैं- उउंम...तेरी चूत तो रोने लगी...

शीला- आहह...ये तो खुशी के आँसू है..आज ये बहुत खुश है...

मैं- ह्म..तो चलो इसकी खुशी को बढ़ा देते है....

और इतना बोलकर मैने अपनी जीभ को चूत के फांको पर घुमाना शुरू कर दिया....

मैं- सस्स्स्रर्र्र्ररुउुउउप्प्प्प्प्प्प्प.......सस्स्स्स्स्रर्र्ररुउुुुउउप्प्प्प्प्प्प ......सस्स्स्स्स्रर्र्र्र्र्ररुउुुुउउप्प्प्प्प्प. ....

शीला- ओह माइ गॉड..आअहह....तडपाने से बाज नही आओगे ...आअहह.....

मैं- सस्स्रररुउुुउउप्प्प्प्प.....सस्स्र्र्ररुउउप्प्प....आअहह....मेरी जान...तड़पने मे ही सुख मिलता है....सस्स्स्रररुउउउप्प्प्प्प....

शीला- आअहह ....करते रहो....उूउउम्म्म्ममम.......

मैं- सस्स्स्स्रर्र्ररुउुउउप्प्प्प्प......सस्स्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प .....सस्स्स्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्ररुउुुुुुुउउप्प्प्प्प्प....

थोड़ी देर बाद मैने शीला की चूत मे एक उंगली डाल दी तो शीला तड़प उठी और अपनी एक टाँग हवा मे उठा ली....

शीला- आअहह...क्या कर रहे हो....मत तडपाओ....आअहह...

मैं- बस देख रहा था की इस पिच पर कितनी बॅटिंग हुई....हाहाहा....

शीला- सस्शह....बहुत कम...आअहह...अब तुम करो ...आअहह ..जल्दी....

मैं- हाँ मेरी जान करूँगा....थोड़ा मुआयना कर लूँ....

और मैने उंगली निकाली और फाके फैला कर जीभ को चूत मे डाल दिया.....और शीला मेरा सिर पकड़ कर सिसकने लगी....

शीला- ओह मयययययययी.....मार दोगे...आअहह....

मैं- आओउुउउंम्म....उउउंम्म...उूउउंम्म....उूुउउम्म्म्म....

शीला- आअहह....मैं नही सह पाउन्गी...आअहह....म्म्म्ममम....

मैं- उउउंम...उउउंम्म..उउउंम्म...उउउंम...

शीला- आअहह....मज़ा आ रहा....पर...पर...मायन्न्न..ऊओह.....

शीला की चूत मेरी जीभ के बार ज़्यादा नही सह पाई और तुरंत ही झड्ने लगी....

शीला- आअहह....माइन्न...आाऐययइ....ओह्ह....एसस्स....एसस्स....आआहह....

और शीला चीखते हुए अपना चूत रस पिलाने लगी...और मैने भी पूरा रस पी कर सॉफ कर गया....

मैं- उउउनम्म्म...मज़ा आया ना...

शीला- ह्म्म्म्...पहली बार किसी ने मुझे जीभ से झड़ाया है....सच मे बहुत मज़ा आया....

मैं- अभी तो शुरुआत है मेरी जान...आगे भी मज़ा आयगा....

शीला- ह्म्म...मैं इंतज़ार कर रही हूँ....

मैं- तो आओ फिर....मुँह मीठा कर लो...

और मैने शीला को अपने लंड की तरफ इशारा किया और शीला ने भी देर नही की और मेरे लंड को आज़ाद कर के उसे निहारने लगी....

शीला- उउउंम्म...वेरी नाइस...आअहह.... माइ टॉय....

मैं- अब देखती ही रहोगी क्या....

शीला- देखने तो दो....दिखने मे तो मस्त है....पर कितना टिक पायगा...

मैं- डोंट वरी....तुम्हारी धज्जिया उड़ा कर ही चुप होगा....अब शुरू हो जाओ...

शीला- ह्म्म...ये सुपाडा तो बड़ा प्यारा है....सस्रररुउउउप्प्प्प्प्प....

मैं- आअहह. ..तो फिर गटक जाओ....देर किस बात की...

शीला- मुझे अपने हिसाब से मज़ा करने दो....कई दिन बाद मुझे लंड का सुख मिला है...

मैं- क्यो..तुम्हारा पति...

शीला(बीच मे)- उसका नाम मत लो....मुझे मज़ा करने दो....

मैं- ह्म...करो जो करना है....

फिर शीला ने थोड़ी देर सुपाडे पर अपनी जीभ फिराई और फिर सुपाडे को मुँह के अंदर लिया और जीभ को लंड के छेद पर घुमाने लगी...उसकी इस हरक़त से इस बार मैं मचल उठा....

मैं- ओह्ह्ह शीला....तुम तो कमाल हो...आअहह....लगी रहो....

शीला कुछ देर तक लंड के छेद से खेलती रही और फिर उसके सुपाडे को मुँह मे दबा कर चूसना शुरू कर दिया....

शीला- उूुुुउउम्म्म्ममममममम......उूुुुुुउउम्म्म्ममममम.......उूुुुुुउउम्म्म्मम.....

मैं- आआहह....झडा देगी क्या....उउउंम...करती रहो....

शीला- उउउम्म्म्म....उूउउम्म्म्म..उउउम्म्म्म...उउउंम्माअहह....मज़ा आ रहा है ना...

मैं- बहुत....पर जल्दी कर ना....अभी बहुत काम बाकी है...

शीला- स्शहीए....चुप रहो...

और शीला ने फिर आधा लंड मुँह मे भर के चूसना शुरू कर दिया.....

शीला- आओउुुउउम्म्म्म....सस्स्स्रररुउउउगगगगग....सस्स्रररुउुऊउगग़गग....उूुुउउम्म्म्म.....सस्स्रररुउउउगगगगगग.....

मैं- आअहह....ज़ोर से ....और तेज...एस....

शीला- सस्स्र्र्ररुउुऊउगगगगग....सस्स्स्रररुउउउगग़गग....उूुउउम्म्म्ममम...आअहह....कितना बड़ा है...

मैं- हाहाहा....ज़्यादा नही...पूरा ले कर देख ले....कम ऑन बेबी....टेक इट....

शीला- एस्स....गिव इट टू मे...एयेए...एस...उउउम्म्म्म...सस्स्रररूउउगगगगगगग....सस्स्रररूउउगगगगग....सस्स्स्रररूउउगगगगगग....उूुउउम्म्म्मम.....

मैं- एस...लाइक दिस...टेक इट ऑल...एस्स....एस्स...एस....
 
धीरे-धीरे कोसिस करते हुए शीला ने पूरे लंड को मुँह मे भर लिया और मज़े से चूसने लगी......

शीला- उूुउउम्म्म्म....उूुउउम्म्म्मम....उूुुउउम्म्म्ममम....उूुुउउम्म्म्ममम....उूउउम्म्म्मम.....

मैं- एस बेबी...लाइक दिस....सक इट...फास्टर बेब..फास्टर.....

शीला- उूउउम्म्म्ममममम.....उूुुुउउम्म्म्मम...उूउउम्म्म्म...उूुुउउम्म्म्मम....

और इसी तरह शीला ने मेरा लंड चूस-चूस कर पूरा तैयार कर दिया...और लंड चुसाइ करते हुए उसकी चूत भी फिर से फड़कने लगी...

शीला- आअहह ...आहह...कसम से...इतना बड़ा पहली बार लिया....मुँह मे ये हाल है तो चूत तो फाड़ ही देगा....

मैं(मुस्कुरा कर)- अच्छा...कितने खाए आज तक...

शीला(मुझे घूर कर)- तुमने क्या मुझे रंडी समझा है...तुम दूसरे हो...मेरे पति के बाद...

मैं- अरे जान गुस्सा मत करो...अभी इस गुस्से का यूज़ सही जगह करते है...मुँह तो बाद मे भी चला सकती हो...हैं ना...

शीला- ह्म्म...अभी मेरी चूत गुस्सा है...उसे शांत करो...

मैं- बिल्कुल ...आ जाओ...मेरा लंड चूत के गुस्से को ठंडा करने मे माहिर है....

फिर मैने शीला को उठा कर बेड पर डाला और शीला ने लेट ते ही अपनी टांगे अपने हाथो से पकड़ कर उपेर उठा ली...

मैं- ये क्या...

शीला- अरे इतना बड़ा है...ऐसे चूत थोड़ी खुल जाती है...दर्द कम होगा...

मैं- ह्म...गुड थॉट...

शीला- अब बाते ही करोगे क्या...अंदर आग लगी है...जल्दी...

मैं- ह्म्म...ये लो फिर...

फिर मैने लंड से चूत पर निशाना लगाया और एक तेज धक्का मार कर आधा लंड चूत मे उतार दिया....इस बार से शीला चीखी तो पर ज़्यादा नही....

पर जैसे ही मैने दूसरा शॉट मार कर लंड को पूरा चूत मे उतार दिया तो शीला की चीख कमरे मे गूँज उठी...

शीला- आाऐययईईईईईईईईईईईईईई....म्म्माेआआ......आआआआहह.....म्म्म्मा आआ.....

मैं- श्ीईए ....बस थोड़ा दर्द है जानेमन...फिर मज़ा ही मज़ा...

शीला- आआहह...मज़ा ...आअहह...अभी तो फाड़ दी....उूुउउइई..माआ....

मैं-बस मेरी जान..थोड़ा और..बस....उउउंम्म...आओउउंम...

और मैं झुक कर शीला को किस करने लगा...और शीला भी आँसू बहाते हुए मेरा साथ देने लगी....

मैं- सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प....अब ठीक है...ह्म..

शीला- आअहह...थोड़ा सा...उूउउम्म्म्म...उउउंम...

फिर मैं शीला को किस करते हुए हल्के धक्को के साथ चोदने लगा....

और थोड़ी देर बाद जब लंड ने चूत मे जगह सेट कर ली तो शीला ने भी कमर हिलाना चालू कर दिया....

शीला- आअहह...नाउ फक मी हार्ड....फक मी...उउउंम...

मैने शीला की बात सुनते ही अपने धक्को की स्पीड तेज कर दी और उसे चूमते हुए चोदने लगा.....

शीला-आआहह..आहह..आहह..उउंम..आआ..

मैं- लाइक इट..हा....

शीला- यप...फक...फक्क...आहह...आआअहह.....

मैं- एस..टेक इट...यह...

शीला- आआहह...फक मी....फक..हार्डर...एस...एस्स....

मैं- यस बेबी...टेक इट...यह...एस..एस..एस्स...

मनीन काफ़ी देर से एक्शिटेड था इसी वजह से ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा था ...जिससे शीला की बॉडी भी उसकी गांद के साथ आगे-पीछे हो रही थी.....

शीला- एस...फक मी हार्ड...डीपर ...एस..एस्स...आअहह...उूुुुउउम्म्म्मम.....

मैं- ये ले...यह...टेक इट बेबी...हियर वी गो......

शीला- एस मॅन...फक..फक...फक......ऊऊहह...ईससस्स....आआअहह.....

मैं- यह...यीहह...

शीला- ओह..माइ...ओह...फीलिंग गुड...कोँमिंग...आहह...कोँमिननन्ज्ग....

और शीला झड गई...उसके झड्ने के बाद भी मैं उसे दम से चोदता रहा....

थोड़ी देर बाद मैने उसे छोड़ा और उसके साइड मे बैठ गया.........

शीला- अब मेरी बारी....सवारी करनी है मुझे...

मैं- ह्म्म...थकि तो नही....

शीला- आज ना मैं थकुगि और ना तुम्हे थकने दूँगी...

मैं- गुड......आ जाओ फिर...

फिर मैं बेड पर लेट गया और वो घुटनो के बल मेरे लंड को चूत मे ले कर बैठ गई और गंद घुमाने लगी....

शीला-उूउउम्म्म्मम..... यू आर सो गुड...

मैं- ह्म..अब सवारी शुरू करो...

और फिर वो उछल- उछल के लंड चूत मे खाने लगी......

शीला-हाँ मेरी जान....सवारी शुरू...आअहह.... एस..एस..एस...आ..आहह..

शीला पूरी मस्ती मे गंद उच्छाल कर चुदवा रही थी....और उसके उछलने से उसके बड़े-बड़े बूब्स हवा मे गुलतियां मार रहे थे...जिन्हे देखते हुए चोदने का मज़ा और ज़्यादा आ रहा था.....

मैने दोनो बूब्स को हाथ मे थमा और तेज़ी से दबाते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगा.......

शीला- आआहह....ज़ोर से दबाओ...एसस्स....आअहह...आहह...आअहह...

मैं- यह बेबी...जंप..जंप...

शीला- एस..एस..एस..आअहह..एस...आआआ......

मैं- हार्डर बेबी....हार्डर...जंप बेबी जंप....यह....

थोड़ी देर जोरदार चुदाई के बाद शीला उछल कर थकने लगी और मेरे उपर झुक गई...

मैने उसके बूस को चूसना शुरू कर दिया और साथ मे नीचे से धक्के मारने लगा...

शीला- एस्स..सक इट मॅन..उउंम..आहह ....एस..एस...एस्स ...

मैं- उम्म..उउंम..उउंम.आ..उउंम..

शीला- फक मी...एस...एस..श..ओह्ह....ओह्ह..

ऐसे ही थोड़ी देर तक उसे अपने लॅंड की सवारी करवाता रहा और फिर जब मुझे लगा कि मैं झड्ने के करीब हूँ तो मैने उसे वापिस बेड पर लिटा दिया ..

और शीला के दोनो पैरो को फैला कर उसे तेज़ी से चोदने लगा......

शीला- ओह माइ....आअहह....फक...एस...हार्डर...एस्स...ईीस्स...आआहह...

मैं- एस बेबी....ये लो...ईएहह...ईएहह....ईएहह.....

शीला- आआहब ...आहह ...फक..एस..आहह..आहह.....

मैं- एस..एस्स..टेक इट...यहह...

और फिर कुछ देर तक मैं शीला को फुल स्पीड मे चोदता रहा और हम दोनो झड्ने के करीब आ गये.....

शीला-एस...फक..फक युवर बिच...एस्स..ओह्ह..कमिंग...कमिंग...

मैं- यस...मी टू....कमिंग..बेबी...यह..यह...

और हम दोनो साथ मे झड्ने लगे और चुदाई का संग्राम समाप्त हो गया...

झड्ने के बाद शीला लेटी रही....और मैने हमारे कामरस से सने हुए लंड को चूत से निकाला और उसके मुँह के पास ले गया ...

मैं- जानेमन....हमारी मेहनत का प्रसाद तो चख लो....

शीला ने लंड को देख कर मुस्कुरा दिया और बिना देरी किए लंड को मुँह मे भर के चूसना शुरू किया और सॉफ कर दिया...

शीला- उम्म...यू आर सो गुड...

मैं- ह्म..अब रेस्ट करो...फिर तुम्हे जन्नत दिखाता हू....

शीला- ह्म्म...आज पूरी रात जन्नत ही देखनी है...रूको मैं फ्रेश हो कर आती हूँ...

फिर शीला बाथरूम मे गई और मैने तभी रॉनी को कॉल किया....

मैं- रॉनी...काम हुआ कि नही....

रॉनी- अरे सर...रॉनी कोई काम ले और हो ना...ये मुमकिन नही...

मैं- डाट्स गुड...अब सुनो...मेरा काम भी हो गया समझो....तो आगे का प्लान पता है ना....

रॉनी- जी सर...आपके निकलते ही सब सेट हो जायगा...और आपके घर पहुँचने के पहले मैं आपके पास पहुँच जाउन्गा....

मैं- गुड...चलो काम करते रहो...मैं भी कर लूँ..ओके..बाइ...

और फिर कॉल कट कर के मैं भी फ्रेश होने निकल गया.....

पूरी रात मैने शीला की जवानी को बहुत अच्छे से लूटा...और उसी दोरान मुझे शीला से वर्मा की प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ की कई बातें भी पता चली....

असल मे शीला भी अपने पति की ऐयाशियों और ग़लत कामो से ऊब चुकी थी...और वो भी वर्मा को सबक सिखाना चाहती थी...

मैने शीला को वेट करने का बोला और उसकी जवानी को लूट कर सुबह होने से पहले ही अपने घर पहुँच गया....
 
घर आते ही मुझे रॉनी मेरे गेट के बाहर मिल गया....

मैं(कार से निकल कर)- अरे रॉनी...तुम इस वक़्त ...

रॉनी- सर..बोला था ना कि आपके घर पहुँचने के पहले ही काम ख़त्म कर के पहुँच जाउन्गा...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म..मान गये यार....तो काम पूरा हो गया ना...

रॉनी- जो काम पूरा ना करे वो रॉनी ही क्या सर...लीजिए...ये रहा आपके काम का सामान...

फिर रॉनी ने मुझे 2 सीडीज़ पकड़ा दी...

मैं- ह्म्म..इसकी कॉपी है ना...

रॉनी- जी सर...एकदम रेडी...

मैं- ह्म्म..तो अब बताओ...पैसे कितने लगेगे...

रॉनी- ह्म...5000 उस लड़की के...और 2-3 हज़ार इस सीडी के लिए...

मैं- ओके...अंदर चलो....

फिर मैने कार पार्क की और अंदर से पैसे लाकर रॉनी को दे दिए....

रॉनी- सर ..ये तो 20000 है...मुझे तो बस....

मैं(बीच मे)- रख यार...ज़रूरत पड़ गई तो..चल अब तू निकल और रेस्ट कर...मैं भी रेस्ट कर लूँ थोड़ा...वैसे भी कल बहुत काम है तो रेस्ट बनता है ना...

रॉनी(मुस्कुरा कर)- एस सर....कल तो धमाका होगा....वेल..टेक रेस्ट सर...मिलते है...

मैं- यू टू...बब्यए....

और फिर रॉनी को भेज कर मैं भी रात की थकान मिटाने सो गया.....

मस्ती भरी रात के बाद जब मेरी आँख खुली तो एक झटके के साथ....असल मे इन्स.आलोक ने मुझे कॉल कर के जल्द से जल्द एक फार्महाउस पर बुलाया था....

मैं रेडी होकर घर से निकल कर उस फार्महाउस पर पहुँचा और सामने पड़ी लाषो को देख कर हैरान हो गया....

मैं- ये..ये तो सुषमा है...सोनू की मोम...और ये विनोद...

आलोक- विनोद ...ये वही है ना...रजनी का देवर....

मैं- जी हाँ...ये अनु के डॅड है..पर ये यहाँ...इस हाल मे...कैसे....

आलोक- अभी तक कुछ पता नही चला....वैसे ये दोनो हमे नंगे ही मिले...एक दूसरे से लिपटे हुए....शायद इनके बीच...

मैं- नही...ये नही हो सकता....ये दोनो तो एक-दूसरे को जानते तक नही थे...तो फिर इनने बीच कुछ....नही...ये पासिबल ही नही...

आलोक- ह्म्म..हो सकता है तुम सही हो...पर अभी के हालात देख कर तो यही लगता है...कि ये दोनो अपनी मस्ती मे खोए हुए थे और किसी ने आ कर इन्हे गोली मार दी....

मैं- नही...ये हो ही नही सकता सर...ज़रूर कुछ और ही बात है...यहाँ कुछ और ही माजरा है....और प्ल्ज़...आप इन्हे यहाँ से...मैं...इन्हे ऐसे नही देख सकता....प्ल्ज़..

आलोक- ओके...1 मिनट..

फिर आलोक ने हवलदार को इशारा लिया और उसने दोनो बॉडी को कवर कर दिया....

मैं(दिमाग़ को ठंडा कर के)- वैसे आपको यहाँ कुछ और मिला...आइ मीन कुछ खास...

आलोक- कुछ खास तो नही...बस लाषो के अलावा सिर्फ़ खून ही मिला....

मैं- ह्म...

आलोक- वैसे एक बात कुछ खास है...आइ मीन मुझे खास लग रही है...

मैं- वो क्या...

आलोक- वो ये कि लाषो के पास तो खून मिलना आम बात है...पर हमे गेट पर भी कुछ खून मिला है...असल मे गेट की चोखट से एक कील बाहर निकली है....जो किसी को चुभि है...तभी वहाँ काफ़ी खून पड़ा है...

मैं- ह्म...हो सकता है कि वो कातिल का हो...

आलोक- हाँ हो सकता है...क्योकि इन लाषो मे कील चुभने का कोई निशान नही है...

मैं- तो पक्का उसी का होगा जिसने इन दोनो को मारा...मतलब कातिल का....

आलोक- असल मे अंकित...जैसे यहाँ कतल भी 2 हुए और वैसे ही कातिल भी 2 ही है....

मैं- क्या....क्या मतलब....आप कहना चाहते है कि 2 लोग आए थे इन्हे मारने....

आलोक- नही...ये तो नही पता कि कितने लोग आए थे...पर इतना पक्का कह सकता हूँ कि ये दोनो कतल 2 लोगो ने किए है...

मैं- अच्छा...

आलोक- हाँ..और एक कातिल तो हमारे सामने ही है...

मैं(हैरानी से)- क्या...सामने...इसका क्या मतलब...

आलोक- मतलब ये है हीरो कि इस औरत को मारने वाला यही आदमी है...जो इस वक़्त खुद मरा पड़ा है...

मैं(चौंक कर)- क्या कह रहे है आप....मतलब विनोद ने सुषमा को मारा....ऐसा कैसे बोल सकते है आप...नही..ये हो ही नही सकता.....

आलोक-पर ऐसा हुआ है... बड़ा सिंपल है यार...देखो...विनोद के हाथ मे गन अभी भी है...और हमे यहाँ से सिर्फ़ 2 बुलेट होल मिले है...इनमे से एक इसी गन का है जो विनोद के हाथ मे है...

मैं- ह्म्म...

आलोक- और अब ये तो तुम भी जानते हो की विनोद खुद तो अपने आप को गोली मारेगा नही...तो जाहिर सी बात है कि उसने सुषमा को ही गोली मारी होगी...

मैं- शायद आपकी बात सही हो...पर विनोद सुषमा को क्यो मारेगा...और फिर विनोद कैसे मारा...किसने मारा उसे...उसे सुषमा तो मार नही सकती ना...

आलोक- मज़ाक कर रहे हो....

मैं- नही..मैं तो बस...

आलोक- रहने दो....वेल...कोई तो था यहाँ...और शायद 2 लोग थे...

मैं- 2 लोग...अब ये आप कैसे कह सकते है...क्या कोई और बुलेट होल मिला...

आलोक- नही...पर तुम ये सोचो कि अगर कातिल गेट से गया ..जैसा की हमे लगता है तो फिर ये खिड़की का काँच क्यो टूटा...

मैं- हो सकता है कि हाथापाई मे टकरा गया हो कोई...ह्म..

आलोक- हो सकता था...असल मे तुम्हे खिड़की के नीचे देखना चाहिए....वहाँ की गीली मिट्टी तुम्हे बता देगी कि मैं क्या कहना चाहता हूँ...

मैने आलोक के कहने पर खिड़की से नीचे देखा तो सॉफ दिख रहा था कि वहाँ की मिट्टी पर जूतों के निशान है...मतलब कोई सच मे कूदा है...

मैं(वापिस मूड कर)- ह्म्म...सही है...पर हो सकता है कि कातिल गेट से आया हो और खिड़की से कूदा हो...और आते हुए उसे कील लगी हो...हाँ...

आलोक(मुस्कुरा कर)- नही अंकित...ऐसा भी नही हुआ....थोड़ा गेट की तरफ गौर से देखो...शायद समझ जाओ...

 
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