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Guest
सहर के आउटर मे बने होटेल मे........
रात के अंधेरे ने जब सारी दुनिया को अपने अंधकार मे डूबा दिया...याब होटल के एक रूम का गेट खुला....
और मैं सामने खड़े सक्श को देख कर मुस्कुरा दिया.....
मैं(मुस्कुरा कर )- ह्म्म...लेट्स प्ले दा गेम......
वहाँ रिचा अभी भी अपने रूम मे नंगी बैठी हुई किसी के आने का वेट कर रही थी...
रात के करीब 11 बजे उसके गेट नॉक हुई....जिसे सुन कर रिचा का फूला हुआ चेहरा थोड़ा निर्मल हुआ...पर उसका गुस्सा अभी भी बरकरार था....
रिचा(गेट के पास जा कर)- कौन है...
बाहर से कुछ कहा गया...जिसे सुन कर रिचा ने गेट अनलॉक किया और वापिस आ कर बेड पर पसर गई .....
थोड़ी देर मे ही गेट खोल कर 2 सक्श अंदर आ गये....और आते ही रिचा को नंगा देख कर दोनो के मुँह खुले रह गये....
रिचा- ऐसे मुँह मत फाडो...पहले गेट लॉक करो और यहाँ आओ....
वो दोनो गेट लॉक कर के रिचा के नज़दीक पहुँचे और रिचा की खुली हुई चूत पर आँखे टिका ली....जब रिचा ने इस बात पर गौर किया तो ज़ोर से हँसने लगी....
रिचा(हँसते हुए)- अब ऐसे क्या देख रही हो ....तुम दोनो के पास भी यही है...इसे चूत कहते है....जानती तो होगी ही....इसी के दम पर हम औरते मर्दो को नचाते है...सही कहा ना सबनम...बोलो सादिया....सही कहा ना...
सबनम- हुह..हाँ...तुम..तुम रिचा हो...राइट...
रिचा- बहुत अच्छे...तो तुम मुझे पहचान ही गई....वेल...मैं तो तुम्हे पहले से जानती हूँ...और तुम्हे भी...तुम सादिया हो ना...सबनम की बेहन...
सादिया- ह्म्म...मैं भी तुम्हे जानती हूँ...शायद तुम्हे याद ही होगा...उस रात उस होटल मे वसीम के साथ मैं ही थी...
सबनम- होटल मे ..वसीम के साथ...तुम ये किस बारे मे बोल रही हो...मैं कुछ समझी नही...
रिचा- ऐसा बहुत कुछ है सबनम डार्लिंग...जो तुम आज तक समझ नही पाई...क्यो सादिया....सही कहा ना...
रिचा की बात सुन कर सादिया कुछ नही बोली बस अपनी नजरेझूका ली...
रिचा- हहहे....शर्मिंदगी....अपनी ही बेहन से....शायद ये शरम पहले आई होती तो आज तुम्हे नज़रें ना झुकानी पड़ती....
सबनम- बस...अभी ये बताओ कि हमे यहाँ क्यो बुलाया....क्या ज़रूरी काम था हमसे...और..तुम ऐसे क्यो बैठी हुई हो...तुम्हारे कपड़े कहाँ है....
रिचा- सब बताती हूँ...पहले मैं पेट पूजा कर लूँ...बड़ी देर से कुछ खाया-पिया नही...तुम दोनो कुछ लॉगी...
सबनम और सादिया ने ना मे सिर हिला दिया और रिचा ने उठ कर कॉल लगाया और कुछ ऑर्डर दे डाला...
रिचा- कपड़े लाई हो...लाओ दो....
थोड़ी देर बाद रिचा कपड़ो मे थी...और बियर के साथ चिकन टिक्का का मज़ा ले रही थी...सबनम और सादिया उसके सामने बैठी रिचा के बोलने का वेट कर रही थी...
सादिया- अब खा लिया हो तो पॉइंट पर आओगी....हमे जाना भी है...
रिचा- ह्म..बस हो गया...
रिचा ने लास्ट सीप मारा और फिर सिगरेट जला कर कस मारने लगी...
सबनम- तो अब बताओ...तुमने हमे यहा क्यो बुलाया...और सादिया से तुम किस होटल की बात कर रही थी...
सादिया- दीदी...वो बात छोड़ो ना...
रिचा- क्यो छोड़ो...आख़िर तुम्हारी बेहन को भी तो पता चले कि तू असल मे है क्या...और इसी के घर मे रहकर क्या-क्या गुल खिलाती है...
सबनम- बस...अब काम की बात करो...तुम हमारी फॅमिली की बात बताने वाली थी ना...
रिचा(कश मार कर)- ह्म..पर ये बात सुनने के पहले तुम दोनो कसम खाओ कि ये बात इस रूम से बाहर नही जाएगी....
सादिया- कसम किसलिए...
रिचा- बात ही कुछ ऐसी है....बोलो...खाती हो कसम...
सबनम- ओके. .मैं अपने बेटे अकरम की कसम खाती हूँ ...ये बात हम तक ही रहेगी...
रिचा- और सादिया तू...तू अपनी बेटी की कसम खा ले....गुल ..यही नाम है ना उसका...
सादिया(चौंक कर)- तुम्हे...तुम्हे कैसे पता..
रिचा- मुझे ऐसा बहुत कुछ पता है जो तुम दोनो को पता नही..और ना ही तुम सोच सकती हो...अब खाओ कसम तो मैं बताना सुरू करू...
सादिया- ठीक है...मैं गुल की कसम खाती हूँ...अब बोलो....
रिचा- ओकक..तो ये कहानी है सरफ़राज़ ख़ान की...जिसे लोग वसीम ख़ान भी कहते है....
सबनम- तुम्हे ये कैसे पता कि उनका नाम सरफ़राज़ है...
रिचा- मैने बोला ना...कि तुम सोच भी नही सकती कि मुझे क्या-क्या पता है...और हाँ...अब सुनती रहो...बीच मे टोकना मत..
रिचा ने फिर दोनो को एक कहानी सुनानी स्टार्ट की...जिसे सुन कर दोनो की आँखे बड़ी हो गई...झटके पर झटके लगे...दोनो ने रोना सुरू कर दिया....और कहानी ख़त्म होने तक दोनो की आँखो से आसू बहते रहे......
रिचा- तो ये थी असली कहानी सरफ़राज़ ख़ान के वसीम ख़ान बनने तक...बाकी तुम जानती ही हो...है ना...
सबनम(रोते हुए)- क्या ये सब सच है....
रिचा- बिल्कुल सच...
सादिया(रोते हुए)- हम कैसे मान ले...
रिचा- क्योकि झूठ बोलने से मेरा कोई फ़ायदा तो होना नही है...हाँ...
सादिया- पर तुम भी तो उसके हाथ की कठपुतली हो...
रिचा- हहहे...नही मेरी जान...ऐसा लोग सोचते है कि मैं उनकी कठपुतली हूँ...पर असल बात ये है कि मैं ही उन सब को नचाती हूँ...हाँ थोड़ा नाटक करना होता है...पर सच यही है कि सब मेरे हिसाब से चलते है ...समझी...
सबनम- नही...मैं नही मनती...ये सच नही हो सकता..
रिचा- तो 3-4 दिन रूको...मैं तुम्हे वो रास्ता बताउन्गी जिससे तुम सब पता कर सकती हो...फिर सारे डाउट क्लियर हो जाएँगे...तब बताना कि मैं सही थी या नही...ओके...
सादिया- ठीक है....हमे सबूत का इंतज़ार रहेगा...और अगर तुम्हारी बात ग़लत निकली...तो तुम भी नही सोच सकती कि हम तुम्हारा क्या हाल करेंगे...समझी...
रिचा- ह्म...ठीक है...कुछ दिन वेट करो...सच तुम्हारे सामने होगा...और हाँ...मैं चलती हूँ...यहाँ का पेमेंट कर देना....फिर मिलेगे...बाइ...
और रिचा अपनी गान्ड मटकाते हुए निकल गई....थोड़ी देर बाद सादिया और सबनम भी अपने आपको ठीक कर के और पेमेंट कर के घर निकल गई...
उनके जाने के बाद एक सक्श काउंटर पर आया और मास्टर की के साथ कुछ पैसे रख कर बोला...
"" ये लो...इतने पैसे ठीक है ना....और हाँ..इस बारे मे किसी को बताया तो..""
कॉंटरमन- बिल्कुल नही...मैने तो कुछ देखा ही नही...
""गुड...""
फिर वो सक्श बाहर निकला और कार स्टार्ट कर के बुदबूदाया.....
""रिचा...तूने जो बोला वो तो उस रूम से बाहर आ गया...और साथ मे तेरा कॅरक्टर भी और सॉफ हो गया...अब मेरी बारी....देख तेरा क्या हाल होता है...तू भी सोच नही सकती...""
और फिर वो कार धुआँ उड़ाते हुए और रात के सन्नाटे को चीरते हुए तेज़ी से निकल गई...पीछे रह गया सिर्फ़...धुआँ..धुआँ....धुआँ.....
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रात के अंधेरे ने जब सारी दुनिया को अपने अंधकार मे डूबा दिया...याब होटल के एक रूम का गेट खुला....
और मैं सामने खड़े सक्श को देख कर मुस्कुरा दिया.....
मैं(मुस्कुरा कर )- ह्म्म...लेट्स प्ले दा गेम......
वहाँ रिचा अभी भी अपने रूम मे नंगी बैठी हुई किसी के आने का वेट कर रही थी...
रात के करीब 11 बजे उसके गेट नॉक हुई....जिसे सुन कर रिचा का फूला हुआ चेहरा थोड़ा निर्मल हुआ...पर उसका गुस्सा अभी भी बरकरार था....
रिचा(गेट के पास जा कर)- कौन है...
बाहर से कुछ कहा गया...जिसे सुन कर रिचा ने गेट अनलॉक किया और वापिस आ कर बेड पर पसर गई .....
थोड़ी देर मे ही गेट खोल कर 2 सक्श अंदर आ गये....और आते ही रिचा को नंगा देख कर दोनो के मुँह खुले रह गये....
रिचा- ऐसे मुँह मत फाडो...पहले गेट लॉक करो और यहाँ आओ....
वो दोनो गेट लॉक कर के रिचा के नज़दीक पहुँचे और रिचा की खुली हुई चूत पर आँखे टिका ली....जब रिचा ने इस बात पर गौर किया तो ज़ोर से हँसने लगी....
रिचा(हँसते हुए)- अब ऐसे क्या देख रही हो ....तुम दोनो के पास भी यही है...इसे चूत कहते है....जानती तो होगी ही....इसी के दम पर हम औरते मर्दो को नचाते है...सही कहा ना सबनम...बोलो सादिया....सही कहा ना...
सबनम- हुह..हाँ...तुम..तुम रिचा हो...राइट...
रिचा- बहुत अच्छे...तो तुम मुझे पहचान ही गई....वेल...मैं तो तुम्हे पहले से जानती हूँ...और तुम्हे भी...तुम सादिया हो ना...सबनम की बेहन...
सादिया- ह्म्म...मैं भी तुम्हे जानती हूँ...शायद तुम्हे याद ही होगा...उस रात उस होटल मे वसीम के साथ मैं ही थी...
सबनम- होटल मे ..वसीम के साथ...तुम ये किस बारे मे बोल रही हो...मैं कुछ समझी नही...
रिचा- ऐसा बहुत कुछ है सबनम डार्लिंग...जो तुम आज तक समझ नही पाई...क्यो सादिया....सही कहा ना...
रिचा की बात सुन कर सादिया कुछ नही बोली बस अपनी नजरेझूका ली...
रिचा- हहहे....शर्मिंदगी....अपनी ही बेहन से....शायद ये शरम पहले आई होती तो आज तुम्हे नज़रें ना झुकानी पड़ती....
सबनम- बस...अभी ये बताओ कि हमे यहाँ क्यो बुलाया....क्या ज़रूरी काम था हमसे...और..तुम ऐसे क्यो बैठी हुई हो...तुम्हारे कपड़े कहाँ है....
रिचा- सब बताती हूँ...पहले मैं पेट पूजा कर लूँ...बड़ी देर से कुछ खाया-पिया नही...तुम दोनो कुछ लॉगी...
सबनम और सादिया ने ना मे सिर हिला दिया और रिचा ने उठ कर कॉल लगाया और कुछ ऑर्डर दे डाला...
रिचा- कपड़े लाई हो...लाओ दो....
थोड़ी देर बाद रिचा कपड़ो मे थी...और बियर के साथ चिकन टिक्का का मज़ा ले रही थी...सबनम और सादिया उसके सामने बैठी रिचा के बोलने का वेट कर रही थी...
सादिया- अब खा लिया हो तो पॉइंट पर आओगी....हमे जाना भी है...
रिचा- ह्म..बस हो गया...
रिचा ने लास्ट सीप मारा और फिर सिगरेट जला कर कस मारने लगी...
सबनम- तो अब बताओ...तुमने हमे यहा क्यो बुलाया...और सादिया से तुम किस होटल की बात कर रही थी...
सादिया- दीदी...वो बात छोड़ो ना...
रिचा- क्यो छोड़ो...आख़िर तुम्हारी बेहन को भी तो पता चले कि तू असल मे है क्या...और इसी के घर मे रहकर क्या-क्या गुल खिलाती है...
सबनम- बस...अब काम की बात करो...तुम हमारी फॅमिली की बात बताने वाली थी ना...
रिचा(कश मार कर)- ह्म..पर ये बात सुनने के पहले तुम दोनो कसम खाओ कि ये बात इस रूम से बाहर नही जाएगी....
सादिया- कसम किसलिए...
रिचा- बात ही कुछ ऐसी है....बोलो...खाती हो कसम...
सबनम- ओके. .मैं अपने बेटे अकरम की कसम खाती हूँ ...ये बात हम तक ही रहेगी...
रिचा- और सादिया तू...तू अपनी बेटी की कसम खा ले....गुल ..यही नाम है ना उसका...
सादिया(चौंक कर)- तुम्हे...तुम्हे कैसे पता..
रिचा- मुझे ऐसा बहुत कुछ पता है जो तुम दोनो को पता नही..और ना ही तुम सोच सकती हो...अब खाओ कसम तो मैं बताना सुरू करू...
सादिया- ठीक है...मैं गुल की कसम खाती हूँ...अब बोलो....
रिचा- ओकक..तो ये कहानी है सरफ़राज़ ख़ान की...जिसे लोग वसीम ख़ान भी कहते है....
सबनम- तुम्हे ये कैसे पता कि उनका नाम सरफ़राज़ है...
रिचा- मैने बोला ना...कि तुम सोच भी नही सकती कि मुझे क्या-क्या पता है...और हाँ...अब सुनती रहो...बीच मे टोकना मत..
रिचा ने फिर दोनो को एक कहानी सुनानी स्टार्ट की...जिसे सुन कर दोनो की आँखे बड़ी हो गई...झटके पर झटके लगे...दोनो ने रोना सुरू कर दिया....और कहानी ख़त्म होने तक दोनो की आँखो से आसू बहते रहे......
रिचा- तो ये थी असली कहानी सरफ़राज़ ख़ान के वसीम ख़ान बनने तक...बाकी तुम जानती ही हो...है ना...
सबनम(रोते हुए)- क्या ये सब सच है....
रिचा- बिल्कुल सच...
सादिया(रोते हुए)- हम कैसे मान ले...
रिचा- क्योकि झूठ बोलने से मेरा कोई फ़ायदा तो होना नही है...हाँ...
सादिया- पर तुम भी तो उसके हाथ की कठपुतली हो...
रिचा- हहहे...नही मेरी जान...ऐसा लोग सोचते है कि मैं उनकी कठपुतली हूँ...पर असल बात ये है कि मैं ही उन सब को नचाती हूँ...हाँ थोड़ा नाटक करना होता है...पर सच यही है कि सब मेरे हिसाब से चलते है ...समझी...
सबनम- नही...मैं नही मनती...ये सच नही हो सकता..
रिचा- तो 3-4 दिन रूको...मैं तुम्हे वो रास्ता बताउन्गी जिससे तुम सब पता कर सकती हो...फिर सारे डाउट क्लियर हो जाएँगे...तब बताना कि मैं सही थी या नही...ओके...
सादिया- ठीक है....हमे सबूत का इंतज़ार रहेगा...और अगर तुम्हारी बात ग़लत निकली...तो तुम भी नही सोच सकती कि हम तुम्हारा क्या हाल करेंगे...समझी...
रिचा- ह्म...ठीक है...कुछ दिन वेट करो...सच तुम्हारे सामने होगा...और हाँ...मैं चलती हूँ...यहाँ का पेमेंट कर देना....फिर मिलेगे...बाइ...
और रिचा अपनी गान्ड मटकाते हुए निकल गई....थोड़ी देर बाद सादिया और सबनम भी अपने आपको ठीक कर के और पेमेंट कर के घर निकल गई...
उनके जाने के बाद एक सक्श काउंटर पर आया और मास्टर की के साथ कुछ पैसे रख कर बोला...
"" ये लो...इतने पैसे ठीक है ना....और हाँ..इस बारे मे किसी को बताया तो..""
कॉंटरमन- बिल्कुल नही...मैने तो कुछ देखा ही नही...
""गुड...""
फिर वो सक्श बाहर निकला और कार स्टार्ट कर के बुदबूदाया.....
""रिचा...तूने जो बोला वो तो उस रूम से बाहर आ गया...और साथ मे तेरा कॅरक्टर भी और सॉफ हो गया...अब मेरी बारी....देख तेरा क्या हाल होता है...तू भी सोच नही सकती...""
और फिर वो कार धुआँ उड़ाते हुए और रात के सन्नाटे को चीरते हुए तेज़ी से निकल गई...पीछे रह गया सिर्फ़...धुआँ..धुआँ....धुआँ.....
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