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चूतो का समुंदर



जब हमारी चुदाई का संग्राम ख़त्म हुआ तो मैं जा कर बेड पर लेट गया..ऑर सुषमा और रिचा भी आ कर मेरे दोनो साइड लेट गई….

ऑर हम बातों मे मस्त हो गये…

रिचा- तो मान गये ना…लंड को निचोड़ दिया…क्यो सुषमा..???

सुषमा- ह्म्म..पर हमारे भी जोरदार बज गई…

रिचा- वो तो होना ही था...आख़िर लंड है किसका..

मैं- ह्म्म…तो हम सब जीत गये,…कोई नही हारा…क्यो…???

सुषमा- हाँ…ओर मज़ा तो इतना आया कि क्या कहूँ..

रिचा- सच मे …अब खड़े होने की भी हिम्मत नही रह गई…

मैं- सही कहा..अब रेस्ट करते है…

और मैं उठ कर बाथरूम गयी ओर फ्रेश होकर वापिस बेड पर लेट गया….

सुषमा और रिचा भी फ्रेश हो कर आई ऑर मेरे साइड मे लेट गई ऑर मैं दो मस्त नंगी औरतो के साथ लिपट कर सो गया….

हम इतना थक चुके थे कि हमे पता भी नही चला कि हम कब सो गये…..हम सब नंगे ही सो रहे थे , वो भी बेहोश होकर…

सुबह जब मेरी आँख खुली तो मेरे कानो मे किसी की आवाज़ आ रही थी….ये आवाज़ दीपा की थी….

दीपा- उठो…अब उठ भी जाओ….कब तक सोना है…दोपहर होने आई…

मैं(आँख खोल कर)- ह्म्म्म ..कौन…ओह दीपा…क्या हुआ…

दीपा- मेरे राजा..उठ जाओ…सुबह हो गई…ऑर कुछ देर मे दोपहर होने वाली है…

मैं- क्या…सच मे….और मैं उठ कर बैठ गया…

मैं अभी भी नंगा ही था, बस चद्दर से ढका हुआ….पर मेरे साथ तो दो नंगी भी थी वो कहाँ गई..

मैं-दीपा…मैं..अकेला…???

दीपा(मुस्कुरा कर)- हाँ…मेरे हीरो…वो दोनो तो सुबह ही उठ कर चली गई…काफ़ी खुश थी..हहहे

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म्म ..ऑर तुम अब आई मुझे उठाने…

दीपा- नही मेरे राजा …तीसरी बार आई हूँ…दो बार तो तुम उठे ही नही…

मैं- अच्छा..ऑर आंटी कहाँ है…

दीपा- वो भी आई थी …पर उठा नही पाई…

मैं- ओह हो..अभी कहाँ है…???

दीपा- सब लोग कामिनी के मॅंगो गार्डन जाने वाले है..बस उसी की तैयारी कर रही है…

मैं- मॅंगो गार्डेन..???

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दीपा- हाँ..आज रुक रहे है तो सोचा कि पिक्निक हो जाय…

मैं- ह्म्म्मा..तो कामिनी का मॅंगो गार्डेन भी है..???

दीपा- हाँ..बट वो छोटा ही है..बाकी नॉर्मल गार्डेन है…

मैं-ह्म्म, कैसा भी हो…पिक्निक मस्त होनी चाहिए…

दीपा- वो तो होगी ही..ओर चान्स मिला तो मस्ती भी..हहहे

मैं-तुम तो बस मस्ती के पीछे पड़ी रहो..

दीपा- क्यो…कल रात भी तुम भूल गये मुझे…

मैं- अच्छा..इतनी चुदाई की फिर भी …???

दीपा- पर सुषमा के साथ रिचा को बुला लिया पर मुझे क्यो नही बुलाया..???

मैं- अरे मेरी रानी, मैं गया था बट तू सो गई थी…मैने सोचा कि तुम्हे रेस्ट करने दूं बस , इसी लिए…

दीपा- ओह माइ स्वीटहार्ट....कितना ख्याल है तुम्हे मेरा..

मैं- हाँ मेरी जान …मैं हमेशा ख्याल रखुगा…

दीपा- सच…???

मैं-सच …

दीपा मेरे गले लग गई ऑर थोड़ा इमोशनल भी हो गई..थोड़ी देर गले लगने के बाद वो बोली…

दीपा- अब उठ भी जाओ…हमें निकलना है…

मैं- ओके…तुम चलो मैं रेडी हो कर आया…

दीपा –ओके..जल्दी आना..मैं नाश्ता लगवाती हूँ…

और दीपा मुझे बाइ बोल कर निकल गई..ऑर मैं बाथरूम मे घुस गया…

मैं जब नहा रहा था तो अपना लंड देखते हुए सोचने लगा…

मैं(मन मे)- साला मेरा लंड कितनी चुदाई कर रह रहा है आज कल..ऑर उपर से वो टॅबलेट भी खा गया…नही बाबा..अब मैं टॅबलेट नही खाउन्गा..चाहे जो भी हो ….मैं अपने दम पर ही चुदाई करूगा….बॅस...

ऑर मैं अपने आपको बोल कर नहाने लगा…..मैं फिर नहाने के बाद रेडी हुआ ऑर नीचे आने लगा…तभी मेरे सामने मेरी मोहब्बत फिर से आ गई…वो भी नाश्ता करने रूम से निकली थी…

मैं- हेलो मनु…

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मनु(मेरी आवाज़ सुनकर रुक गई …पर पलटी नही)

मैं( मनु के सामने जा कर)- मैने कहा हेलो...अब क्या हेलो भी नही बोल सकती..

मनु-ओह..सॉरी मैने सुना नही…हेलो

मैं- मनु, जब झूट बोलना नही आता तो मत बोला करो ना..

मनु-ज्ज्ज..झूट..कैसा झूट..???

मैं- तुम्हारी आँखे बता रही है कि तुम झूठ बोल रही हो…तुमने सुन लिया था..है ना..???

मनु- वो ..नही..नही सुना…

मैं- ओके..ओके…अच्छा..बताओ…मेरी बात का क्या हुआ…

मनु- मुझे उस बारे मे कोई बात नही करनी…

मनु मेरी बात का जवाब दे रही थी पर मुझे देख नही रही थी,,,मैने नॉर्मल करने को बोला…

मैं- ओके..नही करता,,,अभी की बात करूँ...

मनु-ह्म्म्मब

मैं- तुम पिक्निक पर आ रही हो ना...*???

मनु- नही..वो मेरी तबीयत ठीक नही..

मैं- क्या ना आने की वजह मैं हू…

मनु..नही तो…तुमसे क्या…

मैं- तो साबित करो…

मनु- क्या साबित करूँ..???

मैं- पिक्निक पर आओ..तो मैं समझ लूगा कि मुझसे प्राब्लम नही..वरना…???

मनु- वरना..क्या….???

अब मनु मुझे देखने लगी…

मैं- वरना मैं भी नही जाउन्गा….

मनु- ( चुप रही )

मैं- सोच लो…बोलो आओगी कि नही….??

मनु- वो मैं…मुझे जाना है…

और इसके आगे कि मैं कुछ कहता , मनु नीचे जाने लगी…तेज़ी से…मैने पीछे से ज़ोर से बोला…

मैं- मनु....आज नही तो कल...तुम मुझे समझ जाओगी...ओर पिक्निक ज़रूर आना ..वरना मैं भी यही रुक जाउन्गा....

मनु मेरी बात सुन कर रुकी ऑर पीछे देख कर वापिस चली गई....उसकी आँखों मे आज भी कुछ छिपा था..बट मैं समझ नही पाया...

मैं भी मन मार कर नीचे आ गया..ऑर नाश्ता करने बैठ गया.....

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नाश्ते की टेबल पर मेरे साथ दीपा थी…ऑर हम नाश्ता कर ही रहे थे कि मेरे सामने से सोनम निकली…वो मुझे देख रही थी..पर मैं समझ नही पाया कि ये चाहती क्या है…ना ही इसने मेरे प्रपोज़ल को आक्सेप्ट किया ऑर ना ही उस दिन के बाद से मुझसे बात की….पर मैने सोच लिया था कि जाने के पहले तो इस से बात करके ही जाउन्गा…

मैं सोच ही रहा था कि तभी मेरे साइड से सोनू आ गया ऑर हमारे साथ ही बैठ गया…..

सोनू- हेलो भाई….गुड”मॉर्निंग…

मैं- मॉर्निंग भाई ..

सोनू- वैसे मॉर्निंग तो काफ़ी पहले हो चुकी है…हाहाहा

मैं(मुस्कुरा कर)- क्या करूँ यार मेरी नाइट थोड़ा लेट हो गई थी…

सोनू मेरा मतलब समझ गया था ऑर दीपा भी…

सोनू- हाँ भाई…रात को काफ़ी बिज़ी थे आप…क्यो दीपा आंटी…??

दीपा(मुस्कुरा कर)- ह्म्म…पर बिज़ी तो तुम भी थे ना…

सोनू-अरे हम तो थोड़े ही टाइम के लिए थे …पर भाई की बात कुछ और है…बहुत बिज़ी रहते है..

दीपा- हाँ सोनू , सही कहा..हहहे….और सोनू भी हँसने लगा…

मैं- अब बस भी करो यार तुम दोनो...सोनू पिक्निक पर आ रहा है ना...*???

सोनू- हाँ भाई, मैं वही पूछने आया था...तुम मेरी कार से चलो ना...

मैं- ओके , नो प्राब्लम...

दीपा- नही..तुम मेरे साथ चलोगे...

सोनू- तो आप भी साथ मे चलिए ना..मज़ा आयगा..

दीपा- पर सोनू बेटा….कार सब की ले जानी पड़ेगी….तो तुम दोनो अपनी कार ही ड्राइव करना ऑर हम सब को ले जाना..

सोनू- पर..मस्ती का क्या…???

दीपा(सोनू के गाल खीच कर)- मस्ती, हाँ..तू चल आज तेरी मस्ती निकलती हुँ…

हम बातें ही कर रहे थे कि आंटी हमारे पास आ गई…

आंटी- उठ गया बेटा…अब चलो तुम्हे कामिनी का गाँव घूमते है..

मैं- जी आंटी…चलिए..

आंटी- हम बस अभी आते है…दीपा तू चल मेरे साथ…कुछ काम है…

इसके बाद आंटी, दीपा को साथ ले कर निकल गई ओर मैं सोनू से बात करने लगा…..

सोनू- भाई रात मे क्या हुआ..???

मैं(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ मतलब...तेरी माँ की चुदाई हुई…ऑर क्या

सोनू- अरे यार वो तो मैने देखी थी..उसके बाद...*???

मैं- उसके बाद फिर से चुदाई हुई…ऑर पूरी रात तेरी माँ, मेरा लंड खाती रही..कभी चूत मे , कभी गंद मे ओर कभी मूह मे…

सोनू- वाह भाई..मेरी माँ को एक ही रात मे रंडी बना दिया..मान गये भाई…

मैं- अरे भाई तू कहे तो तेरी बेहन को भी रंडी बना दूं…

सोनू- अरे उसे अभी छोड़ो…पहले मेरा काम कर्वाओ..

मैं- तेरा काम हो जायगा..डोंट वरी….बस तू घर पहुच…

सोनू- ओके…पर आज पिक्निक पर क्या प्रोग्राम है..

मैं- ह्म्म्मम..सोचा तो कुछ नही..वहाँ देखते है..क्या होता है…

सोनू- भाई…अगर हो सके तो मेरा कुछ करवा देना..

मैं- ओके…अगर मौका मिला तो तुझे भी खुश कर दूगा…

सोनू-थॅंक्स भाई…अब मैं चलता हूँ..थोड़ा पापा ने बुलाया था…फिर मिलते है..

मैं-ओके

इसके बाद सोनू अपने पापा के पास चला गया ओर मैने नाश्ता फिनिश किया ऑर उठ कर बाहर आ गया....

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वहाँ मुझे सोनम किसी लड़की के साथ दिखाई दी…मैने थोड़ा पास पहुचा तो पता चला कि ये तो काजल है जिसने मुझे कामिनी की चुदाई करते हुए देखा था….मतलब कामिनी की बेटी…

काजल ने भी मुझे पहचान लिया ओर खा जाने वाली नज़रो से मुझे देखने लगी…दूसरी तरफ सोनम मुझे प्यार भरी नज़रो से देख रही थी…मैं दोनो की आँखो को देख कर परेशान था…

काजल की आँखे बोल रही थी कि , अकेले मे मिलो फिर तुम्हे देखती हूँ….मेरी माँ को चोद रहा था…ऑर सोनम की नज़रे कह रही थी कि, तुमने प्रपोज कर दिया ऑर फिर बात भी नही की…यहाँ तक कि पूछा भी नही दुवारा….

मैं दोनो की आँखो को देखता रहा ऑर फिर किसी ने उनको आवाज़ दी ऑर दोनो घूम कर अंदर निकल गई….

मैने सोचा कि जब तक पिक्निक पर जाने मे देरी है तो क्यो ना कॉल कर लिया जाय…

फिर मैने , डॅड, सविता, रेखा, रश्मि को काल किया..ऑर सबका हाल चाल पूछ लिया बारी-बारी…मैने सोचा कि संजीव को कॉल करू…फिर सोचा की कल मिल कर ही बात करूगा उससे…फिर मैने रेणु दी को कॉल करने का सोचा पर उसके पहले ही एक आवाज़ आई , मेरे पीछे से ऑर मैं रुक गया…

आंटी- बेटा..चलो..सब रेडी है….

मैं-ओके आंटी..चलिए..

कामिनी के बहुत से रिश्तेदार ऑर घरवाले हमारे साथ पिक्निक पर जा रहे थे…वहाँ कई कार थी ऑर सब कार्स से ही जा रहे थे…कुछ लोग निकल गये थे ऑर कुछ निकल रहे थे…

सबका तो मैं देख नही पाया ..क्योकि सब निकल गये थे , सिर्फ़ हम लेट हो गये थे…वो भी शायद मेरी वजह से…मैं लेट जगा था ना…

हमारे साथ दो कार और भी थी…एक सोनू की कार….उसमे सोनू, सोनू के पापा, काजल और सोनम थे, दूसरी कार कामिनी की थी..उसमे कामिनी, दीपा और मनु ऑर सुषमा थी, कामिनी खुद ड्राइव कर रही थी….मैं मनु को देख कर खुश हो गया कि चलो, इसने मेरी बात तो मान ली....आगे भी मान जाय बस...

ऑर मेरी कार मे…रिचा ऑर दो लड़किया थी…जो मुझे दामिनी की चुदाई के बाद मिली थी…हाँ , ये यहाँ काम करने वाली थी…पर आज इन्हे देख कर कोई नही कह सका था कि ये नौकरानी है…वो दोनो मस्त ड्रेस मे थी ओर फुल मक-अप के साथ…..

फिर हम सब कामिनी के मॅंगो फार्म के लिए निकल गये…जो गाओं से बाहर 5-6 किमी की दूरी पर था…

पूरे रास्ते मे हम बाते करते रहे…ऑर रिचा मेरे लंड को भी छेड़ देती थी…वो दोनो लड़किया पीछे की शीट पर थी …उनमे से एक तो बोल रही थी पर दूसरी चुप ही थी….और मैं मिरर मे उसे देखता तो वो शरमा जाती थी…

मैने उन दोनो का नाम पूछा तो पता चला कि उनका नाम ममता ओर पारूल है…..

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रास्ते मे रिचा तो बेशरम हो कर मेरा लंड सहला रही थी और ममता ये देख कर मुस्कुरा रही थी..पर पारूल शरमा के आँखे नीचे लिए हुए चुप थी…पूरे रास्ते रिचा मस्ती करती रही और हम आख़िर कार पहच ही गये…कामिनी के मॅंगो फार्म पर…

वहाँ जा कर मैने कार पार्क की तो ममता ऑर पारूल अंदर निकल गई कामिनी के पास…और ममता मुझे देख कर स्माइल कर गई ऑर अंदर मिलने का इशारा कर दिया…

मैं और रिचा भी कामिनी ऑर आंटी लोगो के साथ अंदर जाने लगे…

मैं- वाउ कामिनी जी…मस्त फार्म है आपका…

कामिनी- आपको पसंद आया…???

मैं- बहुत ..सच मे…सहर मे ये सब कहाँ मिलता है…

कामिनी- ह्म्म्मं, ये तो है…अंदर चलिए…ऑर भी पसंद आयगा…

और हम ऐसे ही बाते करते हुए अंदर जाने लगे….

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अंदर जाते हुए मैने देखा कि यहाँ भी छोटे-छोटे घर बने हुए थे...जो गिनती मे 5 थे...ऑर एक तरफ घने आम के पेड़ थे ऑर दूसरी तरफ अलग तरह के पेड़....

मैं- तो कामिनी हमारी पिक्निक कहाँ होगी...*???

कामिनी- यहाँ तो हर जगह पिक्निक हो सकती है..जहा आप चाहे….पहले वहाँ तो चलिए जहाँ बाकी के लोग है…

थोड़ा आगे जाने के बाद हमे बाकी के लोग मिल गये ….हम सब एक घर के पास थे…उनमे से कुछ लोग खाना बनाने वाले ऑर वेटर भी दिख रहे थे…शायद यहाँ भी कामिनी ने मस्त इंतज़ाम किया है…पूल पार्टी की तरह..

मैने देखा कि यहा भी सब वेस्टर्न ड्रेस मे आए हुए है…ऑर कुछ अजनबी मस्त माल भी दिखाई दिए….सच मे मस्त चान्स है यहाँ चुदाई के….

कामिनी- सुनिए..सब सुनिए….आप सब गार्डन घूमे …जहाँ भी जाना हो जाए…पर ड्रिंक ऑर खाने का इंतज़ाम वहाँ होगा…ऑर कामिनी ने इशारे से एक जगह दिखाई…

कामिनी- ऑर हाँ…जो लोग पूल का मज़ा लेना चाहे, उन्हे बता दूं कि उस घर मे ऑर उस घर मे ..अंदर पूल भी है….( ऑर कामिनी ने दो घरो को इशारे से दिखा दिया)…अब अप सब एंजाय करे…

कामिनी की बात सुन ने के बाद ..सब लोग आपस मे ग्रूप बनाते हुए गार्डन मे घूमने लगे…

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मैं आज आंटी लोगो के साथ नही घूमना चाहता था ..मैं चाहता था कि सोनम या मनु मुझे मिल जाय…बट वो दोनो ही अलग ग्रूप मे निकल गई….सोनू भी दीपा के साथ निकल गया…रिचा मेरे पास आई..पर मैने उसे वेट करो कह कर टाल दिया…

मैं सोच ही रहा था कि किसके साथ जाउ…मुझे किसी न्यू माल के साथ जाना था..पर फिलहाल सब बिज़ी थे….

फिर मैने सोचा कि क्यो ना पहले घूम लूँ..फिर मस्ती की सोचुगा…ऑर यही सोच कर मैं मन्गो के पेड़ो की तरफ निकल गया….

थोड़ा आगे जाकर…मैं ऐसी जगह पहुचा जहाँ पर आम के घने पेड़ लगे हुए थे और रोशनी भी बहुत कम आ रही थी…महॉल थोड़ा डरावना था…सिर्फ़ चिड़ियो की आवाज़े ऑर हवा के चलने की आवाज़े ही आ रही थी..

मैं भी थोड़ा सा डर रहा था ऑर आगे जा ही रहा था कि किसी ने पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रखा…मैने 1 मिनिट के लिए तो डर ही गया ऑर मैने चिल्लाते हुए पीछे देखा….

मैं-कौन है…कौन है..??

और जब मैं पूरा पलटा तो देखा कि वो तो दामिनी थी….जो मुझे देख कर हँसने लगी…

मैं- ओह..तुमने तो …डरा ही दिया….

दामिनी(हँसते हुए)- बस इतनी जल्दी डर गये…वैसे तो बड़े मर्द बनते हो…

मैं- तो क्या…मर्द भी डरता है….समझी

दामिनी- ओके….ओके..आइ एम सॉरी…

मैं- कोई नही…पर तुम यहाँ …???

दामिनी- हाँ, वो मैने तुम्हे यहा आता देख लिया था तो पीछे -पीछे आ गई...

मैं- अच्छा…वैसे कुछ काम था या ऐसे ही…

दामिनी- काम तो तुमसे बहुत से है…और आगे भी रहेगे…

और दामिनी ने मुझे बाहों मे जाकड़ लिया…

मैं- ओके...पर यहाँ ...*कंट्रोल करो...

दामिनी- मैं आज फुल कंट्रोल मे हूँ...वरना अभी तक तो तुम्हारा लंड मेरी चूत मे होता..

मैं- ओह..ऐसा क्या..तो फिर मेरे पीछे आने की कोई ख़ास वजह…या घूमने ही आई हो…???

दामिनी- वजह है…मेरा प्रोमिस...

मैं- प्रोमिस..????....क्या…????

दामिनी- भूल गये , मैने कहा था ना कि यहा से जाने के पहले तुम्हे फ्रेश चूत दूँगी…

मैं- ओह , हाँ…तो फिर…कब दोगि..???

दामिनी- आज ही….अभी ऑर यही..

मैं- यहाँ...*????

दामिनी- हाँ, यहाँ

मैं- पागल हो क्या....यहाँ कैसे...*???

दामिनी- तुम टेन्षन क्यो लेते हो...वैसे भी सब अपनी मस्ती मे बिज़ी है...तुम जब तक न्यू चूत को फाड़ दो....

मैं- ह्म्म्म ..वो तो ठीक है , पर कहाँ फाडू…ऑर है कौन वो..

दामिनी- है कौन , ये तो मिल कर पूछ लेना…ऑर फाड़ने की जगह मैं बताती हूँ…

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मैं- तो फिर चलो….आइ एम रेडी

दामिनी- जानती हूँ….तो तुम उस घर मे जाओ…वहाँ वो वेट कर रही है…

मैं- जाओ मतलब क्या…तुम नही चलोगि…

दामिनी- अरे यार हम साथ मे जायगे तो ठीक नही होगा…तुम जाओ ना…वैसे भी वहाँ मेरा क्या काम…

मैं- ओके…बट पहले तुम जाओ..फिर मैं आता हूँ..ऑर उसके बाद तुम निकल..जाना…

दामिनी- पर मेरी ज़रूरत क्या है..???

मैं- यार फ्रेश माल है...थोड़ी जान-पहचान करवा दोगि तो वो कंफर्टबल हो जायगी , समझो ना

दामिनी-ह्म्म..ठीक है मैं जाती हूँ…तुम जल्दी आना..ओके..

मैं- हाँ..तुम चलो , मैं आया…

इसके बाद दामिनी आगे जाती हुई साइड मे बने एक छोटे से घर मे चली गई…ऑर थोड़ी देर बाद मैं भी आजू-बाजू देखते ही घर मे पहुच गया…

मैने जैसे ही अंदर पहुचा तो देखा कि दामिनी के साथ एक लड़की खड़ी हुई थी…उसका चेहरा दूसरी तरफ था..शायद शरमा रही होगी…

दामिनी- अब मैं चली..तुम मस्ती करो..ऑर हाँ..थोडा प्यार से…उंगली भी नही गई इसकी चूत मे…..इसलिए यहाँ क्रीम ऑर आयिल भी रख दिया है है ..वो रहा..

दामिनी ने मुझे इशारे से आयिल ओर क्रीम दिखा दी…

मैं-ह्म्म..पूरा इंतज़ाम....क्या बात है…

दामिनी- ऑर नही तो क्या..वरना तुम्हारे लंड से इसकी फट जायगी..हहेहहे

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मैं- ह्म्म्म्म ..मैं जानता हूँ…पहले भी शील तोड़ी है मैने कई….इसकी भी प्यार से तोड़ुगा…

दामिनी फिर बाहर चली गई ओर मैने गेट को अंदर से लॉक किया ओर उस लड़की के पास आ गया….

वो लड़की अभी भी मेरी तरफ नही पलटी थी ऑर अपनी आँखे ज़मीन मे गढ़ाए हुए थी…

मैने पीछे से जाकर उसके कंधो को हाथ से पकड़ा तो वो सिसक उठी…और जैसे ही मैने उसे पलटाया तो देख कर चौंक गया….

ये तो वही लड़की थी जो कामिनी के घर काम करती है…पारूल..हाँ, ये वही है…

मैं- पारूल …तुम…

पारूल- हुम्म

मैं- ओह ..तुम तो जानी-पहचानी , निकली

पारूल- ( चुप रही..ऑर नज़रे नीचे किए हुए थी..)

मैं- अब देख भी लो….ऐसे नज़रे चुराने से मज़ा नही आयगा…

मेरे कहने से पारूल ने मुझे देखा तो उसकी आँखो मे शर्म और एक्साइट्मेंट सॉफ दिखाई दे रहा था...शायद पहले सेक्स का वेट कर रही थी....

मैं- ओह पारूल..उस दिन तुम्हे देख कर मन हुआ था कि कभी तुम्हारे साथ मस्ती करूँ...देखो आज मौका मिल ही गया...

पारूल- (फिर से चुप रही...शायद शरम के मारे चुप थी...)

मैं- देखो अगर तुम बोलोगि नही तो मैं जा रहा हूँ....

और जैसे ही मैं मुड़ा तो पारूल ने मुझे पकड़ के अपनी तरफ पलटा दिया ऑर मेरे गले से कस कर लिपट गई…

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पारूल- मत जाओ ..शाब..मत जाओ…

मैं- ओके..नही जाता पर मुझे साहिब मत बोलो….

पारूल- तो क्या कहूँ...

मैं- ह्म्म...एक काम करो...तुम मुझे भैया कहो..

पारूल- भैया...नही ...भाई के साथ ऐसा नही कर सकते...

मैं- ओह हो...तुम भैया ही कहो...इसमे ज़्यादा मज़ा आयगा...खून का नही सही...मुँह बोला भाई तो बना ही सकती हो ना..

पारूल- पर कामिनी मेडम...आप तो उसके मेहमान हो...ऑर हम छोटे लोग...

मैं- चुप करो…इंसान , सब बराबर होते है…तुम मुझे भैया ही कहो…

पारूल- ह्म्म..पर भैया के साथ ये करना ठीक होगा…

मैं- अरे उसमे क्या…मेरे दोस्त की बहन भी मुझे भैया कहती है..और मैं उसे भी चोदता हूँ…

पारूल- हाय राम..आप अपने दोस्त की बहन के साथ…

मैं- तो क्या हुआ…चूत ओर लंड की भूख ऐसी ही है….ओर वैसे भी जब अपने भूख मिटाने को मिले तो मज़ा दोगुना बढ़ जाता है..

पारूल- सच मे..

मैं- हाँ…तू मुझे भैया कह कर चुदना ..फिर देख कितना मज़ा आता है….

पारूल-ह्म्म....ठीक है…

मैं- तो अब अपने भाई को खुश कर…

और मैने अपने होठ पारूल के होंठो पर रख दिए..ऑर उसके निचले होठ को मूह मे भर कर चूसने लगा…पारूल अभी अनाड़ी थी इसलिए वो ठीक से किस भी नही कर पा रही थी…

मैं(किस तोड़ कर)- पहली बार किस कर रही हो

पारूल-जी सर…अरे..जी भैया..

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मैने- ओके..देखो जैसे मैं तुम्हारे होठ चूस रहा था ऐसे ही तुम मेरे चूसो ..ओके

पारूल -जी भैया

फिर मैने पारूल को किस करना सुरू कर दिया ऑर इस बार पारूल ने मेरे होंठो को मूह मे भर के चूसना सुरू कर दिया….

मैने थोड़ी देर तक पारूल को किस करता रहा ..ऑर पारूल भी मेरी तरह नकल करते हुए ..मुझे किस करती रही..ऑर पूरी तरह गरम होने लगी…थोड़ी देर मे पारूल ने मुझे बाहों मे जाकड़ कर किस करना सुरू कर दिया….फिर मैने किस ख़त्म किया तो पारूल हाँफने लगी…

मैं-आहह क्या हुआ..

पारूल- आहह…पता नही…कुछ –कुछ हुआ है…गर्मी लग रही है…

मैं- ह्म्म..तो एक काम करो..अपने कपड़े निकाल दो…

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पारूल- मुझे शर्म आती है….

मैं- अपने भैया की बात नही मनोगी…

पारूल- आप से ही तो शर्म आ रही है..

मैं- लेकिन तुम भैया को खुश करने आई हो ना...तो निकालो जल्दी...

पारूल(शरमा कर)- भैया आप ही उतार दो ना...

मैं- ओके मेरी गुड़िया…अभी निकालता हूँ…

और उसके बाद मैने पारूल की ड्रेस निकाल दी…अब वो मेरे सामने ब्रा –पैंटी मे थी…ओर मैने उसे गौर से देखने लगा….

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पारूल थोड़ी सावली कलर की मस्त जवान लड़की थी पर अब तक किसी ने उसे छुआ भी नही थी…उसके बूब्स ऑर गंद देख कर सॉफ पता चल रहा था कि वो फ्रेश माल है…

पायल मुझे ऐसे घूरते हुए देख कर शरमा गई ऑर अपनी ब्रा ऑर पैंटी पर हाथ रख कर बूब्स और चूत को छिपाने लगी….

मैं- अरे मेरी बहना..अब भैया से कैसी शरम …भैया को बॉडी दिखाओ अपनी..

पारूल- नही भैया …शर्म आ रही है…

मैं(पायल के कंधे पर हाथ रख कर)- अब भैया की बात नही मनोगी…

पारूल- भैया ..मानूगी …पर

मैं- पर वर कुछ नही...दिखाओ जल्दी...

पारूल- ह्म्म...ये लो..देख लो…

और पारूल ने अपने हाथों को हटा दिया..

मैं- ऐसे नही बहना...थोड़ा खोल कर दिखाओ...

पारूल- भैया..आप ही खोल लो ना…

मैने देखा कि इस घर मे भी कामिनी ने बेड ऑर सोफा रखवाया हुआ था..तो मैने पारूल को गोद मे उठाया ऑर बेड पर लिटा दिया ऑर मैं भी उसके साइड मे लेट कर उसे किस करने लगा….

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थोड़ी देर मे किस करते हुए मैने पारूल के बूब्स को ब्रा से निकाला ऑर उस पर किस कर दिया…फिर दूसरे बूब को निकाल कर किस किया…अब पारूल ने भी अपनी ब्रा को पीछे से खोल दिया ऑर उसके बूब्स मेरे सामने आ गये…पारूल की शर्म ख़त्म हो रही थी….इसी बीच मैने पारूल की पैंटी को साइड करके उसकी चूत को सहलाना भी सुरू कर दिया,,,

और मैं फिर से उसे किस करने लगा ओर साथ मे उसकी चूत को हाथ से सहलाने लगा….

थोड़ी देर किस करने के बाद मैने किस तोड़ा ओर पारूल के बूब्स देख कर कहा…

मैं- ओह मेरी गुड़िया…इतने मस्त बूब्स , अपने भैया से छिपा रही थी…अब भैया को दूध पिलाओगी..

पारूल-आहह..हाँ भैया..पी लो….

मैं- पीता हूँ गुड़िया…अभी लो…

और मैने पारूल के बूब्स को चाटना शुरू कर दिया..ऑर पारूल मस्त हो कर सिसकने लगी...

मैं-सस्ररुउउप्प्प..आअहह…सस्रररुउउप्प्प

पारूल-आहह..भैया….आअहह

मैं-सस्स्रररुउप्प्प….सस्स्रररुउउप्प….सस्स्ररुउउप्प्प

पारूल- आहह…आहह…ऐसे…हहह

थोड़ी देर बाद मैने पारूल के एक बूब को पूरा मूह मे भर लिया ऑर चूसने लगा…

मैं- उम्म्म्म…उउंम..उूउउम्म्म्मम

पारूल- ओह्ह…माँ…..क्या…कर…राह्ह्ही…..आहह

मैं- उउंम्म..उउंम्म..उउंम्म…

पारूल- आअहह…आहह…ऊहह…ऊहह..भैयाअ….आहह

मैं- उउम्म्म्म..उूउउम्म्म्मममह..उउम्म्मह

पारूल-हहाअ..भीयाअ…ऐसे…..हीईिइ..आहह…..आहह

मैने पारूल के बूब को बारी-बारी मूह मे भर कर चूस्ता रहा और साथ मे उसकी चूत को सहलाता रहा …ऑर पारूल…पूरी मस्त हो कर सिसकती रही…फिर मैने बूब को चूसना छोड़ा ऑर कहा…

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मैं- आहह..मज़ा आया, गुड़िया…

पारूल-आहह..हाँ..भैया…बहुत मज़ा..आहह…

मैं- और मज़ा करेगी ना…भैया के साथ….

पारूल-हम भैया..करूगी…इतना मज़ा कभी नही आया…

मैं- तो देखना..आज तुझे कितना मज़ा कराता हूँ…

और उसके बाद मैं पारूल की चूत की तरफ आ गया ऑर पैंटी की पट्टी को साइड किया ऑर उसके पैरो को फैला कर , पारूल की चूत पर जीभ फिरा दी….जो पानी- पानी हो रही थी…

मैं- सस्र्र्ररुउउप्प…आहह….मस्त चूत है तेरी…

पारूल-आहह…भैया…नही…वहाँ…गंदा है…

मैं- चुप...चुदाई मे गंदा नही होता कुछ...सब मस्त होता है...तू बस मज़े कर....सीख जायगी...सस्स्रररुउउप्प्प्प...

पारूल- भैयाअ....आहह....तीएकक....हाइी...जो..आहह..कहो...

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फिर मैने पारूल की चूत को चाटना और चूसना चालू कर दिया ऑर पारूल मस्ती मे तड़पने लगी...ऑर मेरे सिर को चूत पर दवाने लगी...

मैं- सस्रररुउउप्प...उउउम्म्म्मम...सस्रररुउउप्प्प....सस्र्रुरुउउप्प...

पारूल-आहह..अहहह....ऊहह..म्मूऊम्मय्यी

मैं- सस्रररुउउप्प्प...सस्ररुउउउप्प्प...सस्रररुउउप्प...

पारूल-आहह...भैया....मज़ा ..आआहह...आ...गे...आहह

मैं-उम्म्म..उउउंम्म..उउंम...उउंम्म

पारूल-बब्बहाइियय्य्ाआ...आअहह....ऊहह....ऊहह....आहह

]

मैने पारूल की चूत को मूह मे भरके चूसा ऑर पारूल को चूत चुस्साई का पहला आनद दिया…ऑर इस अनद मे पायल झड़ने लगी…

पारूल- भैया..हॅट जाओ….आहह…कुछ हो रहा है..मेरा…पानी..अहहह

मैं- स्ररुउउप्प..सस्ररुउउप्प…सस्ररुउउप्प्प

पारूल मस्ती मे झड़ने लगी ओर मुझे हटने को बोलने लगी..पर मैने उसके चूत रस को पीने लगा…

पारूल- आहह..नही…भैया..मत ..करो…आहह..गंदा…है…ह

मैं-उम्म्म्म…सस्ररुउउप्प..उउउम्म्म्म..उउंम

जब मैने सारा चूत रस पी लिया तो पारूल की चूत से मूह हटा लिया…जब पारूल नॉर्मल हुई तो बोली

पारूल- भैया…ये क्या…आपने गंदा पानी पी लिया…

मैं- नही बेटा वो तो टेस्टी होता है..सब पीते है....लड़का लड़की का और लड़की लड़के का...

पारूल- पर भैया ..वो गंदा होता है…

मैं- नही बेटा...तुम पी कर देखना...पहले गंदा लगेगा...पर बाद मे पीने का मज़ा आने लगेगा....

पारूल-ह्म्म्म्म

मैं- अब तुम मेरे लंड को प्यार करो...

पारूल- ह्म्म्मम

और मैने अपने कपड़े निकाल दिए ओर सोफे पर रख कर वही खड़ा हो गया…परुल मेरे पास आ कर खड़ी हुई तो मैने उसकी पैंटी निकाल दी और उसे नीचे बैठा दिया….

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मैं- देखो पारूल आप इसे चूसो…

पारूल- इतना बड़ा….है भैया…ये मूह मे नही जायगा..ऑर चूत मे तो बिल्कुल्ल नही,….

मैं- अरे बेटा ये मूह मे भी जायगा ऑर चूत मे भी…तुम बस शुरू करो…

पारूल- ठीक है…

इसके बाद पारूल ने मेरे लंड को हाथ मे लिया ऑर कुछ देर बाद मेरे लंड के टोपे को मूह मे भर लिया..ऑर फिर आधा लंड उसके मूह मे घुस गया

मैं- आह..शाबाश…आप जितना हो सके…अंदर-बाहर करो….

पारूल ने थोड़ा –थोड़ा करके मूह को आधे लंड के साथ ही आगे पीछे करने लगी....पहली बार मे पूरा लेना तो सही नही होता ना....

मैं बड़े प्यार से पारूल से अपना लंड चुसवाने लगा…उससे जितना हो सकता था उतना अंदर लेती ऑर चूस्ति रही….

पारूल-उम्म्म…उउंम्म..उउंम..उउंम्म..उउंम

मैं-आहह…बहना…ऐसे ही…अक्चा कर रही हो…आहह

पारूल-उउंम..सस्ररुउउउप्प्प…उउउम्म्म्म

मैं-हा..तेज करो…जल्दी पूरा सीख जाओगी…तेजज

पारूल-उउंम..उउंम्म..उउंम्म..उउउंम्म

मैं-आहह…मेरी प्यारी गुड़िया…भैया का लंड अच्छा है ना…

पारूल- उउंम…सस्ररुउउप्प्प…उउंम्म..उउंम

मैं- ओह्ह्ह…हां बेटा तेज ऑर तीज..

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मेरी बात सुन कर पारूल पूरी स्पीड से लंड को आगे –पीछे कर रही थी….ऑर पहली बार मे ही वो मस्त चूस रही थी…

थोड़ी देर तक पारूल से लंड चुसवाने के बाद मैने उसे रोक लिया….अब मेरा लंड तैयार था पारूल की चूत खोलने के लिए…

मैने पारूल को देर ना करते हुए सोफे पर लिटाया और एक तकिये को उसकी कमर के नीचे रख दिया…और पारूल के पैर फैला कर उसकी चूत को चाटने लगा….

थोड़ी देर तक मैने पारूल की चूत को चाट कर गीला कर दिया और फिर उसकी चूत मे उंगली डाल दी ओर पारूल तड़प उठी

पारूल-आहह..भैया….

मैं- दर्द हुआ बेटा…???

पारूल-आहह…थोडा…

मैने फिर क्रीम उठाई ऑर ढेर सारी क्रीम उंगली से पारूल की चूत मे भरने लगा….

थोड़ी देर तक क्रीम के साथ उंगली डालने से पारूल की चूत अंदर से चिकनी हो गई थी….अब मैने क्रीम को लंड पर लगया और पारूल की चूत मे सेट करते ही एक धक्का मारा….पर लंड फिसल गया…..

मैने फिर हाथ से लंड पकड़ कर धक्का मारा ओर इस बार मेरा आधा सुपाडा पारूल की चूत मे घुस गया…..ऑर वो फिर तड़प गई…

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पारूल-आअहह…आअहह..नाहहीी….

मैने थोड़ा सा धक्का और मारा ओर सुपाडा पारूल की चूत मे घुस गया….पारूल की चूत खुल गई ऑर खून निकलने लगा ओर पारूल तड़प कर चीखने लगी…

पारूल-म्मगम्मूऊउम्म्मय्यययययी……हुहुहुहू…..मार्र..गाइइ…..णिीिकककाआल्लूओ..आहह..मम्मूऊउम्म्मय्यी

मैने पारूल के बूब्स को सहलाना चालू किया ऑर उसे किस करने लगा ऑर तुरंत ही एक धक्का मारा जिससे थोड़ा लंड अंदर चला गया…

पारूल-उउंम..उउंम..उउउंम्म

]

मैं पारूल को किस कर रहा था तो उसकी आवाज़ भी नही निकल पाई..पर वो तड़प ही रही थी…मैं थोड़ी देर रुका ऑर उसके बूब्स को दावाते हुए उसे किस करता रहा…तो पारूल नॉर्मल हुई थोड़ा…करीब 2 मिनिट बाद मैने ज़ोर से धक्का मारा ऑर आधा लंड पारूल की चूत मे चला गया….

पारूल-नाहहीी….मम्मूऊम्म्म्मय्ी…णिीिककाल्लूओ…आहह….आहह

मैं- बस बेटा…हो गया…अब दर्द नही होगा..ऑर मैने बूब्स दबाना ऑर किस का काम जारी रकाहा….

थोड़ी देर बाद मैने आधे लंड को ही धीरे-धीरे आगे पीछे करना सुरू किया ओर पारूल दर्द से सिसकने लगी..

पारूल-भैया…आहह..दर्द हो रहा…आहह’’

मैं- बस बेटा..थोड़ा रूको..सब ठीक होगा…

मैं अपना काम करता रहा और 5 मिनिट के बाद पारूल नॉर्मल हो गई…उसकी आँखे आँसुओं से भर गई थी…मैने फिर धक्का मारा ऑर पूरा लंड अंदर डाल दिया….

पारूल-हुहुहू..म्मूऊउम्मय्ययी….म्मार्र..आहह..गगाइइइ….म्मूऊम्मय्यी

मैने पारूल के बूब्स सहलाते हुए उसे किस करने लगा ओर धीरे –धीरे लंड को हिलाने लगा….

करीब 10 मिनट की मेहनत के बाद पारूल नॉर्मल हुई ऑर बोली..देखो ना भैया आपने मेरी फाड़ डाली

.मैने लंड को निकाल कर पारूल की चूत देखी तो वो लाल हो गई थी....

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पारूल- भैयाया…अब करो…दर्द कम है…

मैं- ठीक है बेटा ..मैं आराम से करता हू…

पारूल-ह्म

मैने फिर से लंड डाला और प्यार से पारू को चोदना सुरू किया ऑर थोड़ी देर के बाद स्पीड बधाई…अब पारूल भी दर्द के साथ मस्ती मे सिसक रही थी…

मैं- बेटा..अब ठीक है…

पारूल-आहह..हाँ..भैया…करो…आहह

मैं- ये लो…..प्यार से…यीहह

पारूल- हाँ..भैया…डालो….आहह

मैने अपनी स्पीड थोड़ी और बढ़ा दी…

मैं- ये लो बेटा…अब मज़ा करो..

पारूल-आहह..भैया…डालो…ज़ूर से…आहह…

मैं- मज़ा आ रहा है…

पारूल- हहा….भैया…बहुत..आहह…डालो

मैने थोड़ी देर बाद फुल स्पीड मे पारूल को चोदना सुरू किया ऑर पारूल ने भी अपनी गंद को उछाल कर लंड का स्वागत करना सुरू किया….

मैं- ये ले. मेरी बहना..भैया के ले..

पारूल-हा...भैया...फाड़ दो....अब...ज़ोर से...आहह..आहह

मैं- ये ले......मज़ा आया...

पारूल-आहह..भैया…ज़ोर से..र..तीजेज्ज

मैं तेज़ी से पारूल को चोद रहा था ऑर पायल झड़ने लगी ऑर उसके चूत रस के साथ खून मिक्स हो कर बहने लगा….

पारूल-भैया…आहह..मैम्म्म…पानी…निकला….आअहह

मैं- एस्स….बेटा..निकाल..दे….ऑर निकलेगा….ये ले….

जैसे ही पारूल झड गई तो मैने लंड को चूत से बाहर निकाल लिया तो देखा की चूत खून से लाल हो गई थी ऑर पूरी खुल चुकी थी…पारूल भी अब थोडा नॉर्मल थी….

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मैने पारूल को कुतिया के पोज़ मे आने को कहा ऑर उसके पीछे से उसकी चूत मे लंड डाल दिया….इस बार मैने दो धक्को मे ही पूरा लंड चूत मे डाल दिया….

पारूल-आहह..भैया…आअराम से…

मैं- अब आराम हो गया बेटा…अब बस मज़े कर…

और मैं स्पीड से पारूल को कुतिया की तरह चोदने लगा…

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पारूल भी अब मस्त हो कर सिसकने लगी थी…

मैं- ये ले मेरी बहना ….भाई का अच्छा लगा…

पारूल-आअहह..भैया...मस्त है....ज़ोर से....डालूओ

मैं- हाँ..ये ले...

पारूल-आहह..आह..भैया...फाड़ दो....मज़ाअ...आहह....आ...गायाअ...

]

मैं- अभी ऑर मज़े कर्वाउन्गा..आयेज...

पारूल-आहह……मैं…..भी करना..चाहती…आहह….हुउऊउ

मैने पु=री स्पीड मे 5 मिनिट पारूल को छोड़ता रहा ऑर पारूल फिर से झड़ने लगी…

पारूल- भैया…..मेरा…पानी,…आहह…..आहह…निकल….रहा हाईईईई.....

पारूल झड़ने लगी ऑर उसकी चूत मे पानी के साथ मेरा लंड अंदर बाहर होते हुए फुकच्छ करने लगा….ऑर चुदाई का महॉल गरम हो गया…

पारूल-ओह्ह..भीया…अह्ह्ह्ह…आहह

मैं- येस्स..बेटा…येस…

पारूल-भैया.आआ…..आहह..आहह…आहह….

पूरे रूम मे अब आवाज़े गूंजने लगी

फ़फफूूककचह..फ़फफूूक्चह्त…….टत्त्तप्प्प….त्ततप्प्प…त्तप्प..आहह…उउउंम..हमम्म..भीयाअ……आहः….आहह..उउफ़फ्फ़…ऊहह…ऊहह

….फ्फक्च्छ..फ़फफुक्चह…..भीया….त्तप्प…त्तप्प्प..आहहह..अहहहह…एस्स..एस्स……आहह…उउउंम्म…उउंम्म..ईएहह….बेटा..…ये ले…ये..बेटा…ओर ज़ोर से…ले..…आहहह..

फ़्फुूक्च..फ़्फुऊूउक्च…...ताआप्प्प…आहह….उउम्म्म्मह…आहह..आहह…

मैं- बेटा अब मेरा पानी निकालो…

पारूल- भैया..मुझे गंदा लगा तो…

मैं- तो मत पीना ..टेस्ट कर ले….पसंद आया तभी पीना…

पारूल –ठीक है भीया…

उसके बाद पारूल ने मेरे लंड को हाथ से झड़ना चालू कर दिया…तो मेरा लंड रस पारूल के मूह पर धार मार के गिरने लगा..ऑर बहता हुआ उसके सीने पर जाने लगा….

पारूल ने थोड़ा लंड रस चखा ऑर बाकी का उसके सीने पर फैल गया…

मैं- कैसा लगा…

पारूल-पता नही भैया…पर गंदा न्ही है..

मैं- ह्म्म...आगे पीना सीख जायगी...अभी इतना ही काफ़ी है...

पारूल-ह्म

उसके बाद पारूल ने अपने को सॉफ किया ओर बेड पर लेट गई ओर मैं भी उसके बाजू मे लेट गया ओर पारूल ने मेरे सीने पर सिर रख दिया….

मैं- पारूल….मज़ा आया..

पारूल-ह्म…पर दर्द हो रहा है….

मैं- ह्म्म…पहली बार होता है…तुम आराम करो…मैं टॅबलेट पहुचाता हूँ,,उससे आराम मिलेगा…

पारूल-जी भैया…

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उसके बाद हम बाथरूम जा कर फ्रेश हो गये ऑर अपने कपड़े पहन लिए…

मैने पारूल को रेस्ट करने को बोला ऑर मैं जाने लगा......

तभी मुझे कुछ ख्याल आया ऑर मैने मूड कर पारूल से कहा…

मैं- पारूल, एक बात बताओ..

पारूल- जी भैया

मैं- तुमने मेरे साथ ये सब क्यो किया…

पारूल- वो भैया…पैसो के लिए…

मैं- क्या…पैसो के लिए….तुम रंडी हो क्या…

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मेरी बात सुनते ही पारूल की आँखो से आँसू आ गये और वो सुबकने लगी...

पारूल-(रोते हुए)- नही भैया….मैं रंडी नही…पर इसके लिए दामिनी जी मुझे पैसे देगी…ऑर मेरे लिए पैसे बहुत ज़रूरी है..तो

मैं- ऐसी भी क्या ज़रूरत आ पड़ी जो पैसो के लिए ये काम करने लगी…

पारूल- भैया , मेरे घर की हालत तंग है और मैं पढ़ना चाहती हू , इसलिए …

मैं- अच्छा…रो मत….ये बताओ कि तुम्हारे घर मे कौन-कौन है…???

पारूल- मैं ओर मेरी माँ…

मैं- और तुम्हारे पापा...*????....नही है..???

पारूल- नही…वो हमें छोड़ कर चले गये थे….

मैं- और वो ममता कौन है…

पारूल वो मेरी रिश्तेदार है..मौसी की लड़की…

मैं- तो ये सब पैसो के लिए कर रही हो…क्यो

पारूल- ह्म्म

मैं- क्यो तुम्हारी माँ कहती है क्या, ये वो घर नही चला सकती…???

पारूल- भैया..मेरी माँ काम करती है…पर उससे गुज़ारा ही हो पाता है बस ..ऑर मैं पढ़ना चाहती हूँ…इसलिए कामिनी जी कि घर काम करने लगी , कि पैसे जोड़ कर पढ़ाई कर सकूँ…

मैं- तो आज ये सब क्यो किया…

पारूल- इससे मुझे एक साथ पैसे मिल जाते ऑर मेरे घर मे काम आते ..ओर मैं पढ़ाई शुरू कर पाती….

मैं- बस इसी लिए

पारूल- जी भैया…

मैं(कुछ सोच कर)- ओके…अगर तुम्हे ये सब मिल जाय तो…..

पारूल- मतलब....मैं समझी नही भैया

मैं- देखो , अगर तुम्हारी माँ ऑर तुम्हारा खर्च अच्छे से चलने लगे ऑर तुम पढ़ाई भी करने लगो तो फिर… ये सब करोगी...*???

पारूल- कभी नही भैया....पर ऐसा कैसे होगा...

मैं- देखो पारूल..अगर तुम चाहो तो तुम अपनी माँ के साथ मेरे घर आ जाओ..वहाँ तुम पढ़ाई करना ऑर तुम्हारी माँ को मैं अपने घर काम दे दूँगा...ओर पैसे भी अच्छे मिलेगे..पढ़ाई भी अच्छे से कर पओगि...पर ये सब मत करना...

पारूल- भैया..मैं माँ से बात करूगी....ऑर मैं ये सब किसी के साथ नही करूगी

मैं- ओके...तुम्हारी माँ से मैं बात कर लूँगा...तुम कल मेरे साथ मेरे घर चलोगि..ऑर तुम्हारी माँ भी....ठीक है

पारूल-ठीक है...पर ये सब आप करोगे क्या मेरे साथ...

मैं - ये सब...मतलब...???

पारूल(शरमाते हुए)- वही जो आज किया है....

मैं- अगर तुम खुशी से चाहो तो…पैसो के लिए नही…ऑर हाँ…मैं तुम्हारे लिए जो कर रहा हूँ वो सेक्स के लिए नही…समझी

पारूल- जी भैया..पर आपके साथ करने मे अच्छा लगा…

मैं- तो कभी-कभी कर लेना…पर पढ़ाई करना ओककक

पारूल-जी भैया…

मैं- बाकी मैं दामिनी को बोल दूँगा , वो तुम्हारी मां को मना लेगी…तुम रेस्ट करो..मैं टॅबलेट पहुचाता हूँ…

पारूल- जी भैया…

मैने जाने लगा तो पारूल ने फिर से मुझे टोक दिया…

पारूल- भैया , एक बात पूछ सकती हूँ...*???

मैं- हाँ, पूछो

पारूल- आप मेरे लिए इतना सब क्यो कर रहे है….???

मैं- सच बोलू तो मुझे भी नही पता ….बस तुम्हे देख कर दिल किया ऑर करने का मन हो गया,….अब रेस्ट करो..ओके

पारूल- भैया..आपका दिल भी बहुत बड़ा है…

मैं(मुस्कुरा कर)- हो सकता है…मैं नही जानता…अब कोई बात नही…रेस्ट करो…ओके

पारूल – जी भैया…

इसके बाद मैं पारूल को छोड़ कर उस घर से बाहर आया और दामिनी को कॉल करके सब बता दिया…दामिनी ने कहा कि पारूल ऑर उसकी माँ कल मेरे साथ आ जायगी ऑर पारूल को टॅबलेट भी पहुच जायगी ऑर बाद मे दामिनी पारूल को अपने साथ घर ले जायगी….अभी रेस्ट करने दो...

जब मैने पारूल का मामला सेट कर दिया तो मुझे भूख सी लगने लगी और मैं लंच की जगह पर वापिस आने लगा…जहा लंच रेडी हो रहा था…..

मैने वापिस आते हुए पारूल के सवाल के बारे मे सोचने लगा कि, क्यो कर रहा हूँ मैं इतना सब पारूल के लिए….पर मेरे पास कोई जवाब नही था…पता नही क्यो, मुझे पारूल की मजबूरी देखी नही गई…..वो सिर्फ़ पैसो के लिए मेरे साथ सेक्स करने को राज़ी हुई थी….ऑर यही बात मुझे दिल मे लग गई…क्योकि मैं सिर्फ़ मस्ती के लिए सेक्स को अच्छा मानता हूँ…किसी की मजबूरी का फ़ायदा उठा कर सेक्स करना ,,,मुझे अच्छा नही लगता,….खैर जो भी हो…शायद मेरे दिल ने सही डिसिशन लिया…पारूल का भला करने का….

फिर मैं सोचते हुए उस जगह आ गया , जहाँ पर लंच का प्रोग्राम था…वहाँ मुझे सब लोग दिखाई दे रहे थे ….

मुझे देखते ही आंटी ने आवाज़ दी….ऑर मैं आंटी के पास पहुच गया…

आंटी- कहाँ था तू…भूख नही लगी क्या…???

मैं- बहुत भूख लगी है आंटी …इसी लिए तो आया…ऑर मैं तो बस ऐसे ही घूम रहा था…

आंटी- ह्म्म..अब कुछ खा ले , फिर घूमते रहना….

फिर आंटी ने मुझे प्लेट लगा के दी ऑर कहा…

आंटी- देख..आज तू ड्रिंक ना ही करे तो अच्छा..ऑर करना भी हो तो 1-2 पेग ही लेना…ओके

मैं- ओके आंटी ..वैसे भी दिन मे मेरा मूड नही होता…नही लूँगा..

आंटी- अब तू बैठ के खाना खा….मैं आती हूँ…

इसके बाद मैं वहाँ लगी हुई टेबल पर बैठ गया ऑर खाना खाने लगा….यहाँ भी खाने मे नोन-वेग था और मैं भूख भी थी..फिर क्या मैं मगन होकर खाना खाने लगा.....

मैं खाना खा ही रहा था कि तभी मेरी टेबल पर दीपा ऑर सोनू भी आ गये…

सोनू- ऑर भाई ..खाना हो रहा है..???

मैं- ओह, सोनू…हाँ यार भूख लग रही थी

सोनू- यार भूख तो मुझे भी लगी है..

दीपा- क्यो, अभी मुझे ख़ाता रहा था तो पेट नही भरा…

मैं- क्या…तुम लोग यहाँ भी सुरू हो गये….

सोनू- क्या करूँ भाई...दीपा आंटी इतनी मस्त है कि जब भी देखो तो मन हो जाता है...

मैं- ओके..तो दोनो ने खूब मज़े किए…

सोनू – हाँ..भाई आज तो खुले आसमान के नीचे मज़े किए…

मैं- ग्रेट यार…लगा रह…ऑर दीपा तूने भी फुल मस्ती की…हाँ

दीपा- हाँ , सच मे ..आज खुले मे चुदने का मज़ा आ रहा था…

मैं - हाँ साली , तुझे तो मज़ा आयगा ही...अब रंडी बन गई तू...है ना

दीपा - नही...सिर्फ़ तुम्हारे लिए रंडी हूँ...तुम ना कह दो तो इसे छुने भी ना दूं...

सोनू- अरे आंटी....ए के भाई ऐसा मत करना प्ल्ज़्ज़

मैं - अरे दीपा मैं जानता हूँ...तुम इसे मज़ा करवाओ..मैं तो बस मज़ाक कर रहा था...

दीपा- ऐसा मज़ाक मे भी मत कहना...मैं सिर्फ़ तुम्हारी रंडी हूँ...

मैं - ओके...सॉरी अब तुम दोनो मज़े करो ओके

सोनू- भाई खाने के बाद हम वहीं जा रहे है…तुम भी आओ ना..

दीपा- हाँ…चलो ना..दोनो मेरी चूत ऑर गान्ड को खुले मे फाड़ना…

मैं- अरे दीपा…तुम दोनो मज़े करो ना…मैं अभी थोड़ा बिज़ी हूँ…कुछ काम है

दीपा- खूब जानती हूँ तेरे काम को…किस पर दिल आ गया…

मैं- अरे …ऐसा कुछ नही..बस देखता हूँ…कोई मिल जाय तो बताउन्गा..

दीपा- ओके…तुम जैसा कहो…पर मुझे मत भूलना…चलो मैं कामिनी के पास जा रही हूँ…तुम लोग खाना खा लो…ऑर सोनू खाना खा कर मुझे बता देना

मैं- ओके..

सोनू-ओके आंटी...जल्दी आना

इसके बाद दीपा चली गई ऑर सोनू बोला...

सोनू- भाई मेरा काम आगे बढ़ा किया...

मैं- अरे यार...बोला ना हो जायगा...अभी खाना खा और मुझे भी खाने दे..

सोनू - ओके भाई ..सॉरी..खाना खाते है..

 
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