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चूतो का समुंदर



पारूल-ओह्ह..भैया…अह्ह्ह्ह…आहह

मैं- येस्स..बेटा…यस…

पारूल-भैया.आआ…..आहह..आहह…आहह….

पूरे रूम मे अब आवाज़े गूंजने लगी

फ़फफूूककचह..फ़फफूूक्चह्त…….टत्त्तप्प्प….त्ततप्प्प…त्तप्प..आहह…उउउंम..हमम्म..भीयाअ……आहः….आहह..उउफ़फ्फ़…ऊहह

…ऊहह….फ्फक्च्छ..फ़फफुक्चह…..भैया….त्थ्ह्प्प…त्तप्प्प..आहहह..अहहहह…एस्स..येस्स……आहह…उउउंम्म…उउंम्म..ईएहह….बेटा..…ये ले…ये..बेटा…ओर ज़ोर से…ले..…

आहहह..फ़्फुूक्च..फ़्फुऊूउक्च…...

ताआप्प्प…आहह….उउम्म्म्मह…आहह..आहह…

और मैने भी झड़ने लगा…..

मैं- मैं भी आय्या....बेटा...

पारूल-आअहह..भैया...डाल्ल..दो....आहह..अंदर..हीईीईई..आहह

मैं-यीहह...यीहह..यीहह..ये..ले...

पारूल-आअहह..भैया....अंदर ही...आह....भर...दो..उउउफ़फ्फ़...ऊहह..ऊहह...ऊहह

मैं फाइनली पारूल की चूत मे झड़ने लगा ऑर पायल की चूत को अपने लंड रस से भर दिया...

जब मैं पूरा झड गया तो बेड पर जा कर लेट गया ऑर पारूल सोफे पर ही पड़ी रही….

थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद मैं बाथरूम जा कर फ्रेश हुआ ऑर बपस बेड पर लेट गया…

पारूल भी उठ कर फ्रेश हो आई ऑर बेड पर आ कर मेरे सीने पर चढ़ कर मुझे किस करने लगी….

जब उसने मुझे मन भर के किस कर लिया तो वो मेरे उपर ही लेट गई ऑर बोली….

पारूल- भैया…मज़ा आ गया…आप बहुत अच्छा करते हो..

मैं- क्या करता हूँ…

पारूल- चुदाई…(ऑर शर्मा गई)

मैं- ह्म्म…चुदाई करती हो तो शरमाना छोड़ दो…

पारूल- जी भैया…पर…

मैं- क्या हुआ…

पारूल- भैया…वो आपने मेरी चूत मे ही पानी डाल दिया….कुछ हो गया…तो..???

मैं- कुछ नही होगा…तुम्हे टॅबलेट दे दूँगा..खा लेना…ओके

पारूल- जी भैया...

मैं- अब खुश हो ना...खुजली मिट गई...

पारूल- जी भैया…पर इतनी खुजली क्यो हो रही थी आज…???

मैं- तुम्हारी चूत आज ही खुली थी ना..तो शुरू मे ज़्यादा मन होता है बार-बार करने का…

पारूल- तो मेरा मन होगा तो..

मैं- अरे तुम्हारा भैया है ना…

पारूल- मतलब आप रोज करोगे ना…

मैं- ह्म्म..कुछ दिन बस…उसके बाद खुजली कम हो जायगी ऑर फिर तुम पढ़ाई करना ओके..

पारूल- जी भैया..

मैं- अब सो जाओ..कल निकलना है हमें…

पारूल- ठीक है ..मैं जाती हूँ…

मैं- अब कहाँ जाती हो…यही सो जाओ..सुबह निकल जाना…

पारूल- किसी ने देख लिया तो…

मैं-तो बोल देना कि जगाने आई थी ऑर रूम का गेट ओपन था..समझी..

पारूल- जी भैया…

मैं- अब आजा अपने भैया की बाहों मे…मस्त नीद आ रही है मुझे…

पारूल- भैया ..मैं आपको सुलाती हूँ…आप मेरी बाहों मे आ जाओ…

मैने फिर पारूल के सीने पर मुँह रखा ऑर उसके एक बूब को मुँह मे भर लिया…

पारूल-आहह..भैया…ये क्या…सोना नही है…

मैं- ऐसे ही सुलाओ ना…दूध पिलाते हुए…

पारूल- ठीक है भैया…आप पी लो…ये आपके लिए ही है…जितना चाहे पियो..ऑर सो जाओ..

मैं फिर पारूल के एक बूब को मुँह मे भर कर आँख बंद करके लेट गया ..ऑर पारूल मेरे सिर को सहलाते हुए मुझे सुलाने लगी….

 


मैं इतना थक गया था कि पता ही नही चला कि कब नीद आ गई ऑर मैं दूध पीते-पीते सो गया…...

सुबह मेरी नीड आंटी के जगाने से टूटी …उनका कॉल आ गया था…

जब मैने आँखे खोली तो देखा कि मैं अभी भी पारूल के बूब को मुँह मे भरे लेटा था ऑर पारूल मस्ती मे सो रही थी…

मैं तुरंत उठा ऑर कॉल पिक की…

( कॉल पर)

मैं- हेलो आंटी

आंटी- गेट खोल ना बेटा…कब्से खड़ी हूँ….

मैं- ओके..पर आप अकेली हो या कोई साथ मे है.??

आंटी- अकेली हूँ…क्यो…

मैं- कुछ नही ..अभी आया…

मैने कॉल कट की ऑर अपना बॉक्सर पहन कर गेट खोल दिया…जैसे ही आंटी अंदर आई तो मैने जल्दी से गेट बंद किया….

आंटी- क्या हुआ..

मैं – कुछ नही…

आंटी ने मुझे गले लगा लिया ऑर बोली…

आंटी- और कितना तडपाएगी बेटा..

मैं- क्या हुआ आंटी

आंटी- पता है कितने दिन से तूने मुझे चोदा नही

मैं- अरे आंटी …अब आप घर चलिए…आपको इतना चोदुन्गा..की आपकी चूत ओर गान्ड फट जाएगी…

आंटी- सच मे…चल ना फिर…मैं इसी लिए तो जगाने आई…

मैं- ह्म्‍म्म..तो चलिए…

जैसे हूँ आंटी ने मुझे छोडा ऑर पलटी तो सामने पारूल को देख कर ….शॉक्ड रह गई…

आंटी-ओह्ह..तो इस बच्ची को बड़ा कर दिया…

मैं(मुस्कुरा कर)- जी आंटी…और अब ये बच्ची मेरे साथ मेरे घर मे रहेगी…

आंटी- अच्छा…रखेल बना लिया क्या…

मैं- नही आंटी…बहन बना लिया…ऑर इसको पढ़ना है तो मैं हेल्प करूगा…

आंटी- मेरा प्यारा बेटा…ये तूने अच्छा काम किया…पर इसकी माँ …???

मैं- उसको भी अपने घर मे जॉब दे दूँगा…दोनो का ख्याल रखूँगा…

आंटी- ह्म्म..ऑर ये तेरी बहन , तेरे लंड का ख्याल रखेगी..हहहे

मैं- ह्म्म..कभी-कभी…पर आप जितना नही...

आंटी- ह्म्‍म्म..तो मुझे भूल मत जाना …

मैं- कभी नही…आप तो मेरी हो..आपको तो हमेशा चोदता रहूँगा,,,

आंटी- ओके..अब इसे उठा..ऑर रेडी कर ..हमे चलना भी है…

मैं- हाँ..पर आप निकलो पहले…इसको पता नही चलना चाहिए कि आपको कुछ पता है ओके

आंटी- ओके..मैं जाती हूँ तुम जल्दी करना…

मैं - अरे आंटी 1 और बात...

आंटी- क्या..बोलो

मैं - आंटी वो इसके लिए प्रेगञेंसी रोकने की टॅबलेट चाहिए...वो मैं इसकी चूत मे ही झाड़ गया था...

आंटी- ह्म्म..ठीक है , नीचे आएगा तो दे दूँगी...ऑर कुछ हुंकुम...

मैं- ह्म्म...अभी तो और कुछ नही...मेरी रानी...हाहाहा

आंटी- तो मेरे राजा...मैं चलूं...तू भी जल्दी आना...

मैं –ओके..

इसके बाद आंटी चली गई ऑर मैं गेट बंद करके पारूल के पास गया ओर उसके सॉफ्ट-सॉफ्ट होंठो को चूसने लगा…

थोड़ी देर मे ही पारूल जाग गई ऑर मेरे गले मे बाहें डाल कर किस का रेस्पॉन्स देने लगी….

फिर मैने किस ख़त्म किया ऑर पारूल को कहा…

मैं- कैसी है मेरी गुड़िया…

पारूल- बहुत अच्छी हूँ..भैया….आपकी बाहों मे मस्त नीद आई…

मैं-ह्म्म..तो अब उठ जाओ..ऑर रेडी हो जाओ…हमे जाना है ओके…

पारूल- जी भैया…

इसके बाद पारूल उठी ऑर कपड़े पहन कर अपने रूम मे निकल गई…मैने उसे रेडी हो कर नीचे मिलने का बोल दिया ऑर मैं बाथरूम मे घुस गया…रेडी होने को….

फिर मैं रेडी हो कर नीचे जाने लगा…ऑर जाते हुए मुझे सोनम दिख गई….वो आज बिल्कुल अकेली थी…

मैने सोचा कि आज सही मौका है इससे बात करने का....और मैने उसके सामने जा कर खड़ा हो गया…

मैं- हाई सोनम

सोनम- जी कहिए..कुछ काम था क्या…???

मैं- आक्च्युयली ..वो..मैने कुछ पूछा था तो..

सोनम- तो..क्या…???

मैं- कुछ अन्सर तो दे दो…

सोनम- देखिए…मुझे काम है..मेरे पास टाइम नही…आप रास्ता छोड़ेगे…प्ल्ज़्ज़...

मैं- हाँ..बस हाँ या ना बोल दो…बस..

सोनम(गुस्से मे)- मुझे काम है..समझ नही आता क्या…

मैं सोनम के ऐसे तेवर देख के डर ही गया…ऑर साइड हो गया…सोनम तुरंत ही निकल गई..ऑर मैं उसे देखता रह गया…

फिर मैं नीचे आने लगा ऑर सोचने लगा कि ये क्या हो गया..इतनी गुस्सा…..समझ मे नही आया….सिर्फ़ हाँ या ना ही बोलना था…पर गुस्सा क्यो…पता नही….

ये साली ऐसे रंग बदल देगी सोचा नही था...चलो...ये तो गई हाथ से..अब कोई और सही….

मैं सोचते हुए नीचे आ गया तो मेरे सामने मनु और आंटी बैठी हुई थी…मैं भी वही चल गया…ऑर हम साथ मे कॉफी पीने लगे…

मैने आज फिर मनु की आँखो मे उदासी सॉफ देख रहा था पर वजह आज भी पता नही थी….इसके साथ भी कुछ नही हुआ…..

साला मेरी किस्मत भी अजीब है...चोदने को ज़माने की चूत मिल जाती है ऑर प्यार करू तो नखरे….भाड़ मे जाए ये प्यार…ऑर मैने अपने टूटे हुए दिल को तसल्ली दे दी…

मैं अपनी दुनिया मे ही खोया था कि दामिनी मेरे पास आ गई…

दामिनी- अरे आप रेडी हो गये..

मैं- हाँ..आज निकल रहा हूँ…और आप

दामिनी- मैं कुछ दिन बाद आउन्गी…

मैं- ओक..ऑर कामिनी

दामिनी- वो भी साथ मे ही आयगी…

मैं- अच्छा ..तो अब आपसे वही मुलाक़ात होगी..

दामिनी(धीरे से)- हाँ बिल्कुल..अभी एक साइड बाकी है मेरी….

(दामिनी का मतलब चूत से था..उसकी गान्ड तो मार ही ली थी)

मैं- ह्म्म..डोंट वरी…अब तो आप मिलती ही रहेगी…

दामिनी- हाँ बिल्कुल

इतने मे कामिनी ऑर रिचा भी आ गई ऑर दूसरी तरफ से दीपा भी

कामिनी- तो अब जाने का मूड बना ही लिया..

मैं- वैसे दिल तो नही कर रहा बट एग्ज़ॅम है मेरे तो जाना ही होगा…

कामिनी- ओह..तब तो रोक भी नही सकती…वैसे आपको हमारा गाओं पसंद आया …???

मैं- बहुत ..खास कर यहाँ के लोग…

कामिनी- तो अब भूल मत जाइएगा…टच मे रहना…

मैं-अरे बिल्कुल…हर वीक आपसे मिलुगा ओके

और हम सब हँसने लगे….

ऐसे ही हँसते ऑर बाते करते हुए हमने नाश्ता किया ऑर अब हम चलने को रेडी थे…

पारूल भी रेडी हो कर आ गई ऑर हमारा सामान भी…

हमारे साथ रिचा दीपा ऑर मनु भी आ रहे थे…साथ मे सोनू ओर उसकी फॅमिली भी…

हम 3 कार्स मे थे…एक मेरी थी जिसमे मैं , पारूल, आंटी ऑर मनु थे…

दूसरी कार दीपा के पति ने भेजी थी..जिसमे दीपा रिचा ऑर उनका ड्राइवर था…एक कार सोनू की थी …जिसमे सोनू , सोनम ऑर उसके मोम-डॅड थे…

हम सभी कामिनी दामिनी ऑर बाकी सब को बाइ कह कर निकलने लगे…..तभी मेरी नज़र काजल पर पड़ी….जो आज भी मुझे घूर रही थी पर आज खा जाने वाली नज़र से नही बल्कि प्यार की नज़र से…जैसे कह रही हो कि मत जाओ…मुझसे बात करो…मुझे तो समझ ही नही आई ये लड़की…..

पर अब कर भी क्या सकते थे…कार स्टार्ट थी ऑर हम निकल रहे थे..

मैने काजल को देख कर बाइ कहा तो उसने कुछ नही कहा बस घूरती रही..ऑर मैं कई सवाल दिल मे लिए हुए कार को बढ़ने लगा….

 


जल्दी ही हम गाँव से निकल कर मैन रोड पर आ गये और घर की तरफ जाने लगे....

कार मे मेरे बाजू मे पारूल थी ऑर पीछे आंटी ऑर मनु थी…वो दोनो अपनी बातों मे लगी थी ऑर पारूल मेरे साथ हल्की-फुल्की बाते कर रही थी….

मैं ड्राइव करते हुए सोच रहा था कि काजल अचानक चेंज कैसे हो गई ऑर सोनम तो बिल्कुल ही बदल गई…आख़िर क्या बात है….मैने जैसा चाहता था वैसा कुछ नही हुआ…

पर सवाल ये है कि आख़िर सोनम ऑर काजल को हुआ क्या है….पता नही इन सवालो के जवाब मिलेगे भी या नही…

और मैने सोचते हुए ऑर बाते करते हुए घर आने लगा….

हमने रास्ते मे सिर्फ़ एक जगह रुक कर कॉफी पी ऑर फिर सहर की तरफ आने लगे…और 6-7 घंटे के बाद आख़िर कार हम पहुँच ही गये..

हम जब सहर मे एंटर हुए तो सब लोग बाद मे मिलने का बोल कर अपने-अपने घर निकल गये..ऑर मैं मनु के घर निकल गया उसे ड्रॉप करने…

जब मैने मनु का घर देखा तो देखता ही रह गया…कमाल का घर था उसका…आइ मीन बंग्लो ….

मनु ने हमे अंदर बुलाया पर मेरा मूड ऑफ था तो मैने सॉफ मना कर दिया…मनु को मेरा यू मना करना अच्छा तो नही लगा पर वो कुछ नही बोली…और मेरी वजह से आंटी भी अंदर नही गई…

पर आंटी मनु को छोड़ने कार से उतर गई ऑर थोड़ी देर बात करने के बाद वापस आ गई…..हमने मनु को ड्रॉप किया तो मैने आंटी से कहा..

मैं- आंटी , अब कहाँ चले…

आंटी- पहले अपने घर ले चल..ये ड्रेस निकाल कर साड़ी पहन लूँ…वरना कोई देख लेगा तो बवाल हो जायगा…

मैं- ओके..

और मैने अपने घर की तरफ कार घमा दी...वैसे आज आंटी साड़ी ही पहन रही थी पर मैने उन्हे ड्रेस ही पहनाई …ऑर बोल दिया था कि घर पहुँचने से पहले चेंज करवा दूँगा…

फिर हम मेरे घर गये और मैने कार पार्क की ऑर हम अंदर आ गये…

अंदर आते ही पता चला कि सब लोग सहर मे आए हुए सर्कस मे गये है…सिर्फ़ चोकीदार ही था घर पर…

फिर आंटी ने जल्दी से चेंज किया ऑर पारूल ने अपना सामान रख दिया…

अब प्राब्लम ये थी कि मैं आंटी के घर रहने वाला हूँ ऑर पारूल यहाँ अकेली है...घर मे कोई था भी नही तो...

मैं-आंटी , अब क्या करे..रूपाल अकेली हो जयगी…

आंटी- अकेली क्यो…इसे साथ ले चल ..मेरा घर तुम्हारा ही घर है समझे…

मैं- वो तो ठीक है पर अंकल…

आंटी- कुछ नही…वो मैं देख लूगी…पारूल हमारे साथ ही चलेगी ..ठीक

मैं-ओके…

इसके बाद मैं चोकीदार को कल आता हूँ बोल कर आंटी के घर निकल गया…

आंटी के घर जा कर हमने कार पार्क की ऑर अंदर एंटर हुए ही कि हमारी नज़र अंकल पर पड़ी......

अंकल हमारे सामने खड़े थे…जो बहुत ही गुस्से मे दिख रहे थे…..

अब अंकल को क्या हुआ......??????

मैं (मन मे)- अब अंकल को क्या हुआ…घर मे कोई बात हो गई क्या…बट अगर ऐसा कुछ होता तो संजीव कम से हम मुझे नही तो आंटी को तो कॉल कर के बता ही देता……जो भी हो देखते है …आख़िर हुआ क्या है…

मुझे लगा था कि होगी कोई बात..पर उन्होने जो कहा वो सुनकर तो मैं चौंक ही गया..ऑर शायद आंटी की तो फट ही गई होगी…….

जैसे ही आंटी और मैं अंदर जाने लगे तो अंकल बोले….

अंकल- आ गई तुम…हो गई अय्याशि...??

आंटी- जी..पर इतनी गुस्सा किस बात की है आपको…और अय्याशि कैसी...मतलब क्या है आपका....???

अंकल- गुस्सा, अच्छा तुम अपनी मर्ज़ी का करती रहो ऑर मैं गुस्सा भी नही कर सकता…

मैं- अंकल…हुआ क्या….

अंकल(बीच मे ही बोल पड़े)- बेटा तुम चुप रहो….बीच मे मत बोलना

मैं अंकल का गुस्सा देख कर चुप हो गया…

आंटी- आख़िर हुआ क्या है , ये तो बताओ..

अंकल- तुमने जो किया है …वो सब पता है मुझे….

ये बात सुनकर तो मेरी गान्ड भी फट गई…आंटी की तो फट के बिखर ही गई होगी….

आंटी(डरते हुए)- क्क्क..क्या….पता..चला…???

अंकल- वही जो तुमने किया है…

आंटी- आईईससा..कय्या…कििय्या..मैने...???

अंकल- अब मुझसे पूछ रही हो…इसलिए ही गई थी ना शादी मे…कर ली मन की…

आंटी-प्पारर..म्मैने…

आंटी तो डर के मारे शब्द ही नही बोल पा रही थी और मैं भी डरा हुआ सबको देख रहा था…अब वाहा पर घर के सब मेंबर आ गये थे और सब के सब आँखे नीचे किए हुए बातें सुन रहे थे…जैसे उन सब को शर्मिंदगी हो किसी बात पर…

आंटी- पल्लज़्ज़…बताइए ना…क्क्या किया..मैने…

अंकल- रजनी मुझे तुम से ऐसी उम्मीद नही थी….छी

आंटी(सुबक्ते हुए)- ऐसा क्या किया मैने…बताओ तो…प्लज़्ज़्ज़

अंकल- मुझे तो कहने मे भी शर्म आ रही है…

मैं(मन मे)- अरे बाप रे..लगता है अंकल को आंटी की चुदाई का प्रोग्राम पता चल गया…पर कैसे…????.... और अगर ऐसा हुआ भी तो मेरी तो मर ही गई समझो….हे भगवान बचा लो…

आंटी(रोते हुए)- प्ल्ज़्ज़…बताओ ना …ऐसा मैने क्या किया …???

अंकल- मुझसे सुन ना चाहती हूँ…तो सुनो….मैने तुम्हे मनु के घर के बाहर देख लिया था…क्या पहना था तुमने…ऑर अब ये साड़ी कैसे पहन ली…

मैं(मन मे)- ओह..तो ड्रेस की बात है…थॅंक गॉड….बच गया…इसमे ज़्यादा लफडा नही है…

आंटी(आँखे नीची किए हुए)-आपने देख लिया..??

अंकल- हाँ…कैसी ड्रेस पहनी थी…पता भी है तुम्हे…

आंटी- माफ़ कर दो…वो कामिनी…

अंकल- कामिनी क्या….????

 


मैने सोचा कि चलो अच्छा है ये चुदाई का मॅटर नही है ..रही ड्रेस की बात तो मैं अंकल से बात करता हूँ…हाँ यही सही रहेगा..आंटी तो बोल ही नही पा रही…

मैं-अंकल ..

अंकल- बेटा तुम कुछ मत कहो…

मैं-अंकल प्ल्ज़्ज़…1 मिनिट मेरी बात सुन लीजिए फिर मैं कुछ नही बोलुगा….

अंकल- ओके..क्या कहना है तुम्हे…

मैं- अंकल ,आप इसी बात से गुस्सा है ना कि आंटी ने वैसी ड्रेस पहनी थी…

अंकल-ह्म्म…

मैं- अंकल पर आंटी की कोई ग़लती नही …सारी ग़लती उनकी फ्रेंड की है..

आंटी मुझे देखने लगी..जैसे कह रही हो कि तू कहने क्या वाला है…

अंकल- फ्रेंड की..वो कैसे..???

मैं- अंकल कामिनी के घर शादी मे वेस्टर्न ड्रेस की थीम थी…आंटी ने मना भी किया पर सब औरतें ऐसी ड्रेस पहने हुई थी तो फिर आंटी को भी पहन नी पड़ी….

अंकल-वो ठीक है..मान लिया…पर साड़ी के बाद तो..

मैं- अंकल- वो मेरी ग़लती है…

आंटी फिर मुझे देखने लगी….

अंकल- तुम्हारी ग़लती…वो कैसे…

मैं- सॉरी अंकल पर मैने ही आंटी को कहा था कि आप इसी ड्रेस मे चलो…ऑर घर जाते ही साड़ी पहन लेना…

अंकल- पर क्यो…???

मैं- अंकल मुझे लगता है कि आंटी इस ड्रेस मे ज़्यादा अच्छी लगती है..ओर मैं ये नही चाहता था कि मेरी आंटी किसी के सामने गाँव वाली की तरह साड़ी मे रहे…

अंकल- पर बेटा…इसमे गाँव ऑर सहर की बात कैसे आ गई…

मैं- अंकल…आप सही है शायद …फिर भी आज –कल साड़ी पहन ने वालो को गाँव की ही समझते है ज़्यादातर लोग…

अंकल- ये सही नही है…

मैं- अंकल …अगर मेरी माँ होती तो भी मैं यही करता…

आंटी ऑर अंकल के साथ सब लोग मेरी बात को ध्यान से सुनते हुए सहमत होते जा रहे थे…

अंकल- ठीक है बेटा पर मुझसे छिपाने की क्या ज़रूरत थी..

आंटी(बीच मे )- क्योकि आपसे डर लगता है..आपको ये सब पसंद नही ना…

अंकल- ऐसा नही है..मुझे पसंद नही था..पर अब मैं भी चेंज हो रहा हूँ जमाने के साथ…

आंटी- मतलब…

अंकल(मुस्कुरा कर)- अरे मैं गुस्सा नही हूँ…बस मज़ाक कर रहा था..

मैं ऑर आंटी ये सुन कर शॉक्ड हो गये ऑर बाकी सारे लोग हँसने लगे……

आंटी- आप लोग...हँस क्यो रहे हो...??

मैं समझ गया कि ये सबकी मिलीभगत है...और ये सब ड्रामा कर रहे है...

मैं- अंकल ..इतना ड्रामा किस लिए….???

अंकल- सॉरी बेटा…मैं तो यही चाहता हूँ कि रजनी ऐसी ही ड्रेस पहने …ऑर आज मैने देखा तो मुझे लगा कि मेरी बीवी मुझसे छिप कर ये कर रही है ऑर मुझे दुख हुआ…तो मैने तुम्हे भी सबक सिखाने को थोड़ा ड्रामा किया…

आंटी- पर क्यो…आप ऐसे भी बोल सकते थे ना

अंकल- ये सब प्लान तुम्हारी देवरानी ऑर बच्चों का था…

मीयन- ओह ये बात है…अंकल पर आपने तो आंटी को रुला ही दिया…

अंकल- सॉरी रजनी…मैं बस यही चाहता हूँ कि तुम सब अपनी मर्ज़ी से लाइफ जियो और जैसी ड्रेस चाहो पहनो पर छिप के नही...

आंटी- मतलब

अंकल- मतलब ये कि आज से इस घर मे सब लोग जैसे चाहे वैसी ड्रेस पहन सकते है..ओके

मैं- क्यो आंटी ओके ना

आंटी(मुस्कुरा कर)- थॅंक यू संजू के पापा…

जब सब बात क्लियर हो गई तो हम सब आपस मे मिले ऑर हँसते हुए बाते होने लगी…आंटी ने पारूल को भी सबसे मिलवा दिया …फिर हम सब कॉफी पी कर अपने –अपने रूम मे आ गये ऑर मैं संजीव के साथ उसके रूम मे जाने लगा…पारूल भी अनु लोगो के साथ उसके रूम मे चली गई…

मैं सोच रहा था कि अंकल अचानक बदल कैसे गये..ऑर ये सब प्लान किसका था…खैर जो भी हो….अंकल ने सही फ़ैसला किया…आज के बाद सब अपनी मर्ज़ी के ड्रेस मे रहेगे..ऑर मुझे गान्ड देखने मे ज़्यादा मज़ा आयगा….ऑर ये भी सही हुआ कि आंटी की चुदाई का अंकल लोगो को कुछ भी नही पता चला..

ऐसे ही सोचते हुए हम संजीव के रूम मे आ गये…ऑर आते ही संजीव ने गेट अंदर से बंद किया ऑर मुझसे कहा…

( यहाँ संजीव को संजू लिख रहा हूँ ..मेरा फ्रेंड…ताकि कन्फ्यूषन ना हो..)

संजू- भाई काम हुआ कि नही…

मैं- अबे चुप कर यार…काम हो जायगा …पहले एक बात बता…

संजू- हाँ बोल…

मैं- ये सब जो ड्रामा हुआ…वो किस का प्लान था…

संजू- भाई वो हम सब का प्लान था…..पर शुरुआत आंटी ने की थी….(आंटी मतलब सोनू की आंटी)

मैं- मुझे पूरी बात बता…

संजू- तो सुन …हुआ ये कि पापा ने माँ को उस वेस्टर्न ड्रेस मे देखा था मनु आंटी के घर के बाहर…

मैं- हाँ वो पता है…अब आगे..

संजू– तू सुन तो…

मैं- हाँ बोल

फिर संजू ने मुझे सारी बात बताई…कि हुआ क्या था….हुआ ये था कि…

संजू के पापा उसकी माँ को इस ड्रेस मे देख कर गुस्सा हो गये ऑर घर पर आए…घर पर जब उनसे गुस्से का रीज़न पूछा तो उन्होने सब बता दिया…

तो संजू की चाची ने आंटी का बचाव किया ये कह कर कि आज कल ये सब चलता है…ऑर उसकी चाची के साथ सोनू, पूनम,अनु ऑर रक्षा भी थी….यहाँ तक कि संजू के चाचा ने भी कहा…कि हमारे घर मे भी सबको वेस्टर्न ड्रेस पहन ने देना चाहिए…

सबकी बात को सुन कर अंकल भी पिघल गये ऑर उन्होने डिसाइड किया कि अब सब अपनी मर्ज़ी से ड्रेस पहनेगे…

सब अंकल के डिसिशन से खुश थे और फिर संजू की चाची ने सबके साथ मिल कर आंटी को डराने के लिए ये सब प्लान किया ऑर सबने साथ दिया….

जब मैने सारी बात सुन ली तो मुझे संजू की चाची पर बहुत गुस्सा आया…क्योकि उन्ही की वजह से आंटी को इतना सुनना पड़ा ऑर साथ मे रोना भी पड़ा…

मैं- यार तुम सब ने ये ग़लत किया…आंटी को डराना नही चाहिए था…

संजू- यार मैं क्या करता..सब का प्लान था..

मैं- कुछ भी हो..तुम्हारी चाची ने ग़लत किया….

संजू- भाई भूल जा...जो हुआ सो हुआ..अब अपनी बात करे...

 


मैने मन मे सोचा कि संजू की चाची को इसकी कीमत तो चुकानी पड़ेगी..ऑर कैसे चुकानी है ..ये मैं तय करूगा...फिलहाल इसे छोड़ते है ऑर संजू पर ध्यान देते है...

संजू- ओह, हेलो ..कहाँ खो गया..

मैं- कही नही ..बोल क्या कह रहा था…

संजू- भाई मेरे लिए कुछ किया कि नही…

मैं- यार तेरी माँ मुझसे पट तो गई पर पूरी तरह नही..

संजू- मतलब

मैं- मतलब अभी चुदाई तक बात नही पहुँची…

संजू- अरे यार...कब पहुँचेगी..

मैं- डॉन’ट वरी..तेरे घर से जाने के पहले सेट कर दूँगा…

संजू- ओके..पर अपने एग्ज़ॅम भी है…याद है ना..

मैं- हाँ…बिल्कुल…ऑर मैं रेडी भी हूँ..

संजू- तेरा दिमाग़ तेज है पर मुझे पढ़ना पड़ेगा…

मैं- तो तू पढ़ाई कर...ऑर मैं तेरी माँ को चुदाई के लिए मनाता हूँ..ओके

संजू- ओके..पर यार अभी क्या करूँ...बहुत मन हो रहा है...

मैं- ह्म्म..तू उसकी टेन्षन भी मत ले...एक चूत का इंतज़ाम करवा दूँगा...कल.

संजू- किसकी..???

मैं- ये तो जब मिलेगा तब देख लेना..

संजू- यार बोल तो…

मैं- अब कोई सवाल नही ..मुझे सोना है…

संजू- ओके तू रेस्ट कर ..मैं पढ़ाई करता हूँ…

ये कह कर संजू अपनी बुक्स ले कर नीचे पढ़ाई करने चला गया ऑर मैं आँखे बंद करके रेस्ट करने लगा….

फिर मुझे पता नही क्यो…नीद आ गई ऑर मैं सो गया….मेरी नाद तब खुली जब अनु मुझे जगाने आई…

अनु- उठिए भैया…बहुत सो लिया…

मैं(आखे खोल कर)- ह्म्म्म ..क्या है…सोने दे ना..

अनु(मेरे सिर पर हाथ फेर कर)- नही..उठिए ...डिन्नेर रेडी है..सब आपका वेट कर रहे है...

मैं- ओह…डिन्नर..ठीक है…उठ जाता हूँ…

और मैं बेड पर बैठ गया और अनु से बात करने लगा….

अनु- भैया..आप तो साड़ी मे जा कर हमे भूल ही गये...

मैं- ऐसा क्यो बोल रही है…

अनु- भैया याद है ना…आपने मत पढ़ने का बोला था…

मैं-ओह हाँ…सॉरी बेटा..कल से तुम्हारी ट्यूशन स्टार्ट…

अनु- कल से क्यों..आज से क्यो नही..

मैं- यार आज थक गया हूँ ना..इसलिए..कल फ्रेश माइंड से शुरू करेगे ना...

अनु- ओके…अब आप रेडी हो कर नीचे आ जाओ…मैं चलती हूँ…

इसके बाद अनु चली गई ऑर मैं भी फ्रेश हो कर नीचे आ गया…और हम डिन्नर करने लगे…

डिन्नर के बाद हम सब शादी ऑर यहाँ –वहाँ की बाते करते रहे ऑर फिर अपने-अपने रूम मे आ गये…

रूम मे आते ही संजीव पढ़ने लगा ऑर मैं लेट कर सोचने लगा कि क्या आज वो लंड चूसने वाली आयगी या नही…ह्म्म्म देखते है…और यही सोचते हुए मैने कपड़े निकाल कर लेट गया……

मुझे अब भी बड़ी तेज नीद आ रही थी बट संजू पढ़ाई कर रहा था और लाइट मे मुझे नीद नही आती….

और मुझे ये टेन्षन भी थी की अगर संजू जागता रहा तो मेरा लंड चूसने वाली नही आ पाएगी…इसलिए संजू को या तो सुलाना पड़ेगा या फिर रूम से बाहर भेजना होगा…यही सोच कर मैने थोड़े गुस्से मे संजू से कहा….

मैं- यार संजू…ये लाइट बंद कर ..मुझे सोना है…

संजू यार लाइट बंद कर दूँगा तो पढ़ाई कैसे करूगा..

मैं- वो मुझे नही पता ..सुबह पढ़ लेना…अभी सो जा…

संजू- भाई मैने कुछ भी नही पढ़ा और एग्ज़ॅम आने वाले है….प्लीज़ पढ़ने दे ना…

मैं- तो कहीं और जा कर पढ़ाई कर...मुझे सोना है बस...

संजू- यार आज लाइट मे सो जा ना...

मैं- नही…मुझे नीद नही आती…तू या तो सो जा या फिर कहीं और जा…

संजू- तुझे समझाना बेकार है..अच्छा मैं नीचे जाता हूँ…गेस्ट रूम मे…

मैं- हाँ जल्दी जा…मुझे सोने दे..

संजू ने अपनी बुक्स ली और नीचे जाने लगा..और जाते हुए कहा...

संजू- अब सो जा..मैं जा रहा हूँ....वही सो जाउन्गा..तू रूम बंद कर ले , करना हो तो...

मैं- हाँ तू निकल ,, मैं कर लुगा…

संजू के जाने के बाद मैं मन मे खुश हो गया कि अब कम से कम लंड की चुसाइ तो हो ही जायगी....पर क्या वो आज आयगी...आना तो चाहिए....इतने दिन से वो भी तड़प रही होगी...आ जाए तो मज़ा है...नही तो संजू को भगाने का मतलब नही निकलेगा...

यही सब सोचते हुए मैं लेटा था कि पता ही नही चला कि कब आँख लग गई ऑर मैं सो गया...

मेरी नीद तभी खुली जब मुझे अपने लंड पर कुछ हरकत महसूस हुई….

मैं(मन मे)- किस्मत ने साथ दे दिया….आ गई लंड चूसने ….पर है कौन….???

मैने अपने मन मे बाते कर रहा था और वो लड़की या औरत जो भी थी…मेरा लंड पूरा मुँह मे आगे पीछे करती हुई चूस रही थी….

मैं(मन मे)- इसका पता तो लगाना ही है…ये लंड मस्त चूस्ति है…तो चुदाई भी अच्छी होगी इसकी…..

मैं आराम से लंड चुसवाते हुए शांत ही लेटा रहा और वो मेरे लंड को पूरे प्यार , और तसल्ली से चूस्ति रही…

उसकी मस्त चुसाइ से मेरा लंड झड़ने के करीब आ गया था…अब देखना ये था कि आज ये मेरा लंड रस पीती है या नही…

मैं झड़ने लगा तो वो मेरे लंड को मुँह मे ही भरे हुए लंड रस गटा-गट पी गई ऑर मेरे लंड को चुंसना जारी रखा …

 


जब मेरे लंड का पूरा रस वो पी गई ऑर लंड चूज़ के सॉफ कर दिया तो फिर उसने बड़ी सराफ़त से मेरे लंड को अंडरवर मे डाला और चुप-चाप बाहर निकल गई….

मैं आज भी उसका पता नही लगा पाया…फिर सोचा कि यहा से जाने के पहले इसका पता लगा कर रहूँगा…

वो तो मेरे लंड का रस पान करके चली गई पर मेरे लंड मे खुजली पैदा कर गई…अब मुझे ऐसा लग रहा था कि किसी को चोदने मिल जाय बस…पर किसे चोदुन्गा….???

पूनम के कमरे मे तो पारूल भी है…..मैं दोनो को चोद चुका हूँ पर…अभी ये बात उन्हे पता नही चलना चाहिए….और आंटी तो अंकल के साथ होगी…क्या करूँ…

मैं सोच रहा था कि कामिनी के घर मस्त था ..इतनी चूत थी कि किसी को भी बुला कर चोद लो…पर यहाँ तो चूत होते हुए भी कुछ आइडिया नही आ रहा…क्या करूँ…??

यही सोचते हुए मैं आइडिया ढूँडने लगा कि कैसे अपने लंड की खुजली मिलाई जाय…

कुछ सोचने के बाद मैने टाइम देखा तो अभी सिर्फ़ 11.30 ही हुए थे रात के…मैने सोचा कि सब या तो सो गये होगे या सोने वाले होगे…इससे पहले कि सब सो जाए कुछ करना होगा….यही सोच कर मैने अपना सेल निकला ऑर मेसेज करने लगा…...

ये मेसेज मैने आंटी को किया था...मैने मेसेज मे एक जोक भेजा...ताकि अगर अंकल भी पढ़ ले तो प्राब्लम ना हो....

थोड़ी देर वेट करने के बाद आंटी का रिप्लाइ आया कि, हाँ मैं ही हूँ बेटा..अब बात करो...

आंटी मेसेज पढ़ के ही समझ गई कि मैने जोक सिर्फ़ ये जान ने को भेजा कि फ़ोन किसके पास है और मेसेज किसने देखा...

जब कन्फर्म हो गया कि आंटी ने ही मेसेज देखा...तो मैने मसेज से बात शुरू कर दी....

( मसेज से चॅट)

मैं- आंटी..जाग रही हो…??

आंटी- हाँ..तूने मेसेज क्यो किया ..नीचे आ जाता कोई काम था तो…

मैं- काम ही ऐसा था कि नीचे नही आ सकता था…

आंटी- ऐसा क्या काम है बेटा..बोल ना..??

मैं- आंटी आपसे इतनी रात मे क्या काम होगा ..समझ जाओ

आंटी- हाँ..समझ रही हूँ…आदत पड़ गई है ना रोज-रोज की..

मैं- हाँ..आंटी …नीद नही आ रही …कुछ करो ना…

आंटी- बेटा तेरे अंकल साथ मे है..

मैं- अंकल जाग रहे है क्या…??

आंटी- नही अभी-अभी सोए है…

मैं- तो अब क्या करूँ..आपसे उम्मीद थी और आप भी नही आ सकती..

आंटी- ऐसा मत बोल…मैं तेरी हूँ…तू कहे और मैं ना आउ..ऐसा सोचना भी मत..

मैं- पर अंकल..*???

आंटी- उनकी चिंता मत कर...वो सो जायगे घोड़े बेच कर..मुझे तो सोनू की टेन्षन है....

मैं- मतलब…

आंटी- तेरे साथ सोनू होगा…तो करेगे कही….

मैं- आंटी सोनू की टेन्षन मत लो…वो गेस्ट रूम मे पढ़ाई कर रहा है ऑर रात मे वही सो जायगा…आप आ जाओ…

आंटी- तो फिर थोड़ा रुक मैं 10 मिनिट मे आती हूँ…

मैने सेल को साइड मे रखा और सोचने लगा कि..आंटी जैसी माल मेरी रंडी बन गई ..क्या बात है…अपने ही घर मे अपने परिवार के होते हुए भी वो मुझे चुदने आ रही है..सच मे अब वो मेरी हो चुकी है….

फिर मैने सोचा कि जब तक आंटी आती है तब तक एक पेग लगा लिया जाय…..

मैं जानता था की संजीव अपने रूम मे विस्की छिपा कर रखता है…और संजीव के अलावा सिर्फ़ मुझे वो जगह पता है...

मैने फिर विस्की का एक स्ट्रॉंग पेग बनाया ऑर चिप्स लेकर सोफे पर बैठ गया…ऑर विस्की का मज़ा लेते हुए आंटी का वेट करने लगा…

थोड़ी देर मैं आंटी धीरे से रूम का गेट खोल कर अंदर आई ऑर गेट को बंद करके मेरे बाजू मे आ कर बैठ गई…

मैं- काफ़ी देर लगा दी…

आंटी- क्या करूँ..सबको देख के आना पड़ा..ये घर है..कामिनी की हवेली नही..

मैं(मुस्कुरा कर)-अच्छा...तो आज आप अपने घर मे , अपने बेटे के बेडरूम मे चुदने आ गई....

आंटी(मेरे सीने से लग कर)- बेटा, तुमसे से तो मैं बेटे के सामने भी चुद जाउ…फिर बेटे का बेडरूम तो चीज़ ही क्या है…

मैं(एक हाथ आंटी की पीठ पर रख कर)- ह्म्म..मेरी प्यारी आंटी…ऐसे ही रहना…

आंटी(कस कर सीने से लग कर)- हाँ बेटा…हमेशा…

इसके बाद आंटी ने मुझे छोड़ा और बोली…

आंटी- पर ये क्या..तुम ड्रिंक क्यो कर रहे हो…कहा था ना कि कम पिया करो…ऑर ये मिली कहाँ से…??

मैं- वो आंटी ..मैं लाया था..ऑर हाँ ये तो आपकी जुदाई मे पी रहा था…

आंटी-अच्छा…तो अब पीना बंद करो..मैं आ गई ना…

मैं- ह्म्म्म …ख़त्म करने दो बस…वैसे आपकी नाइटी मस्त है…

आंटी- अरे ये नाइटी तो आते हुए पहन ली..आज तो तेरे अंकल ने कुछ और ही पहनाया था…

मैं-क्या..हमे भी बताओ…

आंटी- बताओ क्या..अभी दिखाती हूँ….

 


ये कह कर आंटी मेरे सामने खड़ी हुई ऑर अपनी नाइटी निकाल दी….अंदर आंटी ने सिर्फ़ पैंटी ओर मॅचिंग टॉप पहना हुआ था …जो टॉप बिल्कुल आंटी के बूब्स तक ही था…

मैं-वाउ आंटी..आप ऐसे सोती हो…ये पहन कर…

आंटी- अरे नही बेटा..वो आज तेरे अंकल ने बोला है ना कि वेस्टर्न ड्रेस पहन सकती हूँ..तो पहन लिया..

मैं- पर आपके पास आई कहाँ से …

आंटी- वो तेरे अंकल ने दिलाया था बहुत पहले जब हम घूमने गये थे...पर घर आने के बाद कभी पहन ने ही नही दिया...

मैं- वाउ आंटी..अब तो आप खुश है ना...आप अपने मन की ड्रेस पहन सकती है...

आंटी- हाँ बेटा..ऑर ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है…थॅंक यू बेटा…

मीयन- तब तो आज अंकल ने आपको चोदा होगा..क्यो..??

आंटी- क्या खाक चोदा बस खुंद ठंडे हो गये ऑर मुझे गरम छोड़ दिया…

मैं- कोई बात नही मैं हूँ ना..आपका ख्याल रखने…

आंटी- हाँ बेटा..तू ही मेरा ख्याल रखना हमेशा…

मैं- ओके आंटी..पर अब आप मेरा ख्याल तो करो…

आंटी- इसी लिए तो आई हूँ…तुम ही पीने मे बिज़ी हो…

मैं- ह्म्म..तो आज मैं एक नया ड्रिंक पीता हूँ….

आंटी- क्या..???

मैं- आप पैंटी निकाल दो फिर दिखाता हूँ…

मेरे कहते ही आंटी ने अपनी पैंटी निकाल फेकि ऑर मेरे सामने नंगी खड़ी हो गई…मैने सोफे पर बैठे हुए आंटी को अपने सामने किया ऑर अब उनकी चूत मेरे मुँह के जस्ट सामने आ गई….

मैने फिर विस्की की एक सीप मुँह मे भरी ओर आंटी की चूत मे मुँह लगा कर उस पर विस्की उगल दी और आंटी की चूत चाट ते हुए विस्की पीने लगा…

मैं- सस्ररुउउप्प..सस्ररुउउप्प..सस्ररुउउप्प्प्प..सस्ररुउउप्प

आंटी-आहह आहह..बेटा..तू तो..आहह

मैं-सस्ररुउपप..सस्ररुउपप..सस्ररुउउप्प्प..सस्ररुउपप

आंटी-आहह..बेटा…कहा से..आहह..सोचता है..आहह…

मैं-स्ररुउपप..आहह…सस्ररुउउप्प…सस्ररुउउप्प…

आंटी- आहह बेटा..छ्छूस्स..आहह..पी ले…आअहह

मैने बार-बार विस्की को मुँह से आंटी की चूत पर डालता ऑर चूस्ता रहा ...और आंटी खड़े-खड़े चूत चुसाइ का मज़ा लेते हुए सिसकती रही…

फिर मैने आंटी को पकड़ कर झुंका दिया और आंटी की गान्ड खुल कर मेरे सामने आ गई....

आंटी की गान्ड देखते ही मेरे मुँह मे पानी आ गया और मैने जल्दी से आंटी की गान्ड को चाटना शुरू कर दिया...

मैं- सस्स्र्र्ररुउउप्प...सस्स्रररुउउप्प

आंटी- ओह्ह बेटा आअहह...आअहह..चाट बेटा..आहह

मैं- सस्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउपप...

आंटी- ओह बेटा आअहह...अंदर डाल आहह

मैने- ह्म्म्मउ...उउंम्म...उउउम्म्म्म

मैने आंटी के बोलते ही मैने जीभ नुकीली कर के आंटी की गान्ड मे डाल दी....ऑर गान्ड को जीभ से चोदने लगा....

आंटी- ऊहह...म्म्माकआ....आअहह

मैं- उउंम...उउंम्म...सस्स्ररुउपप..सस्सूउपप

थोड़ी देर गान्ड चाट कर मैं रुक गया और मैने विस्की की लास्ट सीप को मुँह मे भर कर आंटी की चूत को खोला ऑर चूत मे ही विस्की थूक कर अपनी जीभ भी घूँसा दी…और जीभ को चूत मे अंदर डालके चूत चाटने लगा…

आंटी-आहह..आह..आ..ऊहह..म्मार.आ.आहह..बीतता…आअहह..

मैं-उउंम..सस्ररुउपप,उउंम्म..उउम्मह

आंटी-आहह..अंदर चूस आहह...बेटा…आहह…

मैं-उम्म्म…उउंम..उउंम्म

आंटी-आअहह..मैइयैईंन…आइईइ..अहहह….श..आऐ…बीताअ…आअहह

आंटी मेरे मुँह को चूत मे दवा कर झड़ने लगी.....

आंटी मेरे मुँह को चूत मे दवा कर झड़ने लगी और मैने आंटी का विस्की मिला हुआ चूत रस पीने लगा….

 


जब मैने आंटी की चूत खाली कर दी तो आंटी को छोड़ दिया और आंटी भी मेरा सिर छोड़ कर मेरे बाजू मे बैठ गई…

मैं- क्या आंटी…इतनी जल्दी झड गई…

आंटी- अरे बेटा..आहह..बोला था ना कि तेरे अंकल ने गरम कर दिया ऑर सो गये…

मैं-हाँ..तो आप झड़ी नही थी क्या…

आंटी- अरे तेरे अंकल की चुदाई मे अब झड़ती ही नही…इसी लिए

मैं- ह्म्म्मे..अब खुश हो ना..

आंटी- हाँ बेटा…तेरे अंकल का लंड झड नही पाया ऑर तूने तो जीभ से ही झडा दिया…

मैं- ह्म्म..आपको खुश जो रखना है…

आंटी- तभी तो अब मैं तेरी हो गई…तू ही मुझे अच्छे से चोद बस…

मैं-ओके आंटी..पर आअज आपकी गान्ड मारने का मन है…

आंटी- मेरा भी बेटा..उस दिन से गान्ड मे खुजली होने लगी...आज अच्छे से मिटा दे..

मैं- तो अब आप देखो ..आज मैं कैसे आपकी गान्ड फाड़ता हूँ,,,,

आंटी- फाड़ दे बेटा..जैसी मर्ज़ी चाहे फाड़…पूरी रात चोद बस…

मैं- पूरी रात …कोई आ गया तो..

आंटी- कोई नही आयगा..सब सोए हुए है…ऑर आता है तो आए..तू तो बस गान्ड फाड़ ..बाकी सब भाड़ मे जाने दे…

मैं- तो आजा मेरी रानी …

और मैने आंटी को अपनी गोद मे बैठा लिया ऑर हम जोश के साथ एक दूसरे के होंठ चूसने लगे,,,,,

आंटी नीचे से नंगी थी ऑर मैने आंटी का टॉप बूब्स के उपर कर के बूब्स दावाना शुरू कर दिया ऑर साथ मे हम होंठो की चुसाइ मे बिज़ी हो गये….

थोड़ी देर बाद हम अलग हुए ऑर मैने आंटी के बूब्स दबाते हुए बोला…

मैं- तो अब आप शुरू हो जाओ…और मैने आंटी की गान्ड पर थप्पड़ मार दिया…

आंटी- आह…ऐसे ही गान्ड फाड़ना…

आंटी मेरा इशारा समझ गई ऑर मेरी गोद से उतर कर मेरा अंडरवर उतारा….और कुतिया के पॉज़ मे आई ऑर मेरी टांगे फैला कर लंड को मुँह मे भर के चूसने लगी…

आज आंटी तेज़ी के साथ मेरे लंड को चूस रही थी जैसे जन्मो की प्यासी हो..शायद कुछ दिन से चुदाई नही की इसलिए….

आंटी-सस्स्स्सुउउउप्प्प…ऊओंम्म….उउउंम्म….सस्स्रर्र्र्र्रप्प्प्प

मैं-आआहह…अओंती….क्कक्या चूस्ति हो….ऑर तेज,…हहाअ …ऐसे ही

आंटी-सस्स्स्र्र्ररुउउप्प्प…..ऊओंम्म….उउउंम्म…सस्स्रररुउउप्प

मैं-आअहह…..ऐसे ही….ओर तेज…मेरी रानी…आअहह…

आंटी-सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प….सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प…..उूुउउम्म्म्ममनममम….सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प

मैं-आंटी …मज़ा आ गया…आअहह

थोड़ी देर की लंड चुसाइ मे मेरा लंड अपनी औकात पर आ गया और अब मैं आंटी की गान्ड को सहलाते हुए इशारा करने लगा की बस करो..अब गान्ड फाड्नी है….

आंटी भी मेरी बात समझ कर रुक गई और लंड को मुँह से निकाल के बोली….

आंटी- आहह ..कितने दिन बाद…मज़ा आ गया…

मैं- ह्म्म्म ..अब आओ…आपकी गान्ड की खुजली मिटा दूं…

आंटी मेरे कहते हुए कर मेरी गोद मे आई ओर अपनी गान्ड पर लंड सेट कर के बैठ गई...

आज आंटी पूरे जोश मे थी ....आंटी ने दो झटके मे ही मेरा पूरा लंड गान्ड मे घूँसा लिया ...

आंटी-आहह….उउउफफफ्फ़..म्माआ….

मैं- बड़ी जल्दी है ना…

आंटी-आहह…हाँ..बेटा…तू बस..गान्ड मार…ऐसे ही..आहह

मैने भी आंटी के कहते हूँ उनकी गान्ड को पकड़ा ऑर तेज़ी से दहक्ते मारते हुए उन्हे उपर नीचे उछालने लगा……ऑर गान्ड मारने लगा...

आंटी-आअहह….आआहह..ऊहह..माँ..

मैं-मज़ा आया

आंटी-आअहह…बहुत….मार बेटा…अहहह

आंटी बोल ही रही थी कि मैने लंड बाहर तक निकाल कर एक जोरदार झटका मारे ऑर आंटी की गान्ड मारने लगा…

आंटी-आआहह…..म्म्म्मा आररररर द्दददााालल्ल्ल्ल्ल्ल्लाआ

मैं-यीहह…ऑर तेज मारू,….हाँ..

आंटी-अया..आअहह..आहह…आहह..आहह…अहह

मैं-ययईएह….ययईईहह…यी…ल्ल्लीए…ऑर टीज़्ज..हा..

आंटी-ऊओ….म्म्माूआ…आआहह….अहहाा

 
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