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गांड मारना अच्छा रहा

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Hindi sex story, antarvasna मैं अपने घर पर ही था तभी दरवाजे की डोर बैल बजी मैंने अपनी पत्नी से कहा देखना कौन है तो जब वह अपने दरवाजे की तरफ गई और उसने दरवाजा खोला तो दरवाजे पर मेरी बहन और उसके बच्चे थे। मेरी बहन का नाम मीना है और वह लखनऊ में ही रहती है मैंने मीना से कहा आज तुम कैसे आ गई तो मीना कहने लगी बस ऐसे ही आप लोगों से काफी समय से नहीं मिली थी तो सोचा मिल लेती हूं इसलिए आपसे मिलने के लिए मैं यहां पर आ गई। मीना और मैं एक साथ बैठ कर बात करने लगे उसके बच्चे मेरे बच्चों के साथ खेल रहे थे मैंने मीना से पूछा तुम्हारे पति कहां है तो वह कहने लगी कि वह आजकल अपने प्रोजेक्ट के सिलसिले में जयपुर गए हैं।

मीना के पति घर पर कम ही होते हैं वह अक्सर कहीं बाहर जाते हैं तो मीना हमारे पास आ जाया करती है, मैंने अपनी पत्नी सुधा से कहा कि तुम कुछ नाश्ता बना दो मुझे भी काफी भूख लग रही है। सुधा ने हम सब के लिए नाश्ता बना दिया मीना ने भी सुधा की मदद की मेरा कुछ काम था तो मैं अपने लैपटॉप में अपने ऑफिस का काम करने लगा तभी मीना मेरे पास आई और कहने लगी क्या भैया आज आप फ्री हैं। मैंने उसे कहा हां मैं आज फ्री हूं तुम बताओ क्या कुछ जरूरी काम था मीना कहने लगी हां काम तो था दरअसल मैं सोच रही थी कि बच्चों को कहीं लेकर चलते हैं मैंने मीना से कहा तो हम लोग हमारे घर के पास ही एक बड़ा पार्क है हम वहां पर चलते हैं। हमारे घर के पास में ही एक बड़ा सा पार्क है वहां पर बच्चों के खेलने की पूरी व्यवस्था है मीना कहने लगी ठीक है हम लोग वहीं पर चलते हैं। हम लोग पैदल ही पार्क में चले गए क्योंकि हमारे घर से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर वह पार्क है वहां पर बच्चे आराम से झूला झूल रहे थे मीना और सुधा आपस में बात कर रहे थे मैं भी मीना से कभी-कभार बात कर लिया करता। बच्चे तो बहुत ज्यादा खुश थे क्योंकि उन्हें खेलने के लिए जो मिल गया था वहां पर और भी बच्चे थे और उस दिन पार्क में काफी ज्यादा भीड़ थी।

तभी आगे से मैंने एक बच्चे को देखा वह बड़ी तेजी से दौड़ता हुआ आ रहा था वह झूले से टकराने वाला था तभी मैं उठा और मैंने उसे पकड़ लिया मैंने इधर उधर देखा लेकिन मुझे कोई दिखाई नहीं दिया। मैंने उस बच्चे को अपने पास बैठा लिया आगे से एक पति पत्नी आ रहे थे वह मेरे पास आये और कहने लगे भाई साहब यह हमारा बच्चा है मैंने उन्हें कहा दरअसल यह झूले से टकराने वाला था तो मैंने सोचा कि मैं बच्चों को पकड़ लेता हूं। उन्होंने मुझे धन्यवाद दिया और कहने लगे आप कहां रहते हैं मैंने उन्हें अपने घर का पता बताया और कहा मेरा घर यहीं पर है तो वह लोग कहने लगे कि हम लोग भी यहीं रहते हैं। उन व्यक्ति का नाम राजेश था और उनकी पत्नी का नाम शालिनी था वह लोग भी हमारे साथ बैठ गए राजेश ने मुझे बताया कि वह स्कूल में अध्यापक हैं और शालिनी हाउसवाइफ हैं। राजेश हमारे साथ अच्छे से घुल मिल गए थे और मुझे तो ऐसा लगा भी नहीं की उनसे मेरी पहली बार मुलाकात हो रही है लेकिन उनसे बात करना अच्छा रहा। कुछ देर बाद वह वहां से चले गए जाते-जाते उन्होंने कहा कि आप घर पर जरूर आइएगा उन्होने मेरा नंबर भी ले लिया था और हम लोग वहीं पार्क में बैठे हुए थे। मैंने मीना से कहा क्या हम लोग अब चलें मीना कहने लगी बस भैया थोड़ी देर बाद चलते हैं लेकिन बच्चे तो जैसे घर जाने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वह खेलने पर लगे हुए थे उन्हें झूला झूलने में बड़ा मजा आ रहा था और जब बच्चे थक गए तो हम लोगों ने उन्हें कहा अब घर चलते है और फिर हम लोग घर चले आए। मीना हमारे पास ही दो-तीन दिन रुकने वाली थी क्योंकि उसके पति घर पर नहीं थे तो वह हमारे घर पर ही रहने वाली थी अगले दिन मैं अपने ऑफिस के लिए सुबह ही चला गया था और उसके बाद मैं अपने काम पर ही लगा रहा। एक दिन मुझे राजेश मिले वह कहने लगे अरे भाई साहब आप कहां जा रहे हैं तो मैंने उन्हें बताया कि मैं अपने ऑफिस जा रहा हूं राजेश ने मुझे कहा की आकाश भैया आप घर पर आए ही नहीं।

मैंने कहा तुम्हें तो मालूम है कि समय ही कहां मिल पाता है लेकिन मैं जरूर तुमसे मिलने के लिए आऊंगा जब मैंने राजेश से यह कहा तो वह कहने लगे मैं आपको फोन पर जरूर याद दिला लूंगा और आप लोगों को हमारे घर पर आना है। रविवार के दिन मैं घर पर था तो मेरे फोन की घंटी बजी मैं उठकर अपने कमरे में गया तो मैंने देखा उस पर राजेश का फोन आ रहा है। मैंने राजेश से कहा हां राजेश कैसे हो तो वह कहने लगे क्या आज आप लोग घर पर ही हैं तो मैंने राजेश से कहा हां हम लोग घर पर ही हैं। वह कहने लगे की दरअसल शालिनी कह रही थी कि आज आप लोग हमारे घर पर डिनर के लिए आ जाइए। मैंने राजेश से कहा कि ठीक है हम लोग तुम्हारे घर पर आ जाएंगे मैंने अपनी पत्नी से कहा तो वह कहने लगी कि हां ठीक है हम लोग तैयार हो जाते हैं और शाम के वक्त उनके घर पर चल पड़ेंगे। सुधा ने बच्चों को तैयार किया और उसके बाद हम लोग शाम के वक्त उनके घर पर चले गए। जब हम लोग राजेश के घर पर गए तो हम लोगों ने उनके लिए गिफ्ट भी ले लिया था और हम लोगों को उनके घर पर काफी अच्छा लग रहा था हम लोगों ने वहां अच्छा समय बिताया। राजेश और शालिनी में हमारी बड़ी अच्छे से खातिरदारी की, उस दिन हम लोग अपने घर वापस आए तो सुधा कहने लगी कि राजेश और शालिनी बहुत ही अच्छे हैं उन दोनों का व्यवहार और बात करने का तरीका बहुत ही अच्छा है।

मैंने सुधा से कहा हां तुम बिल्कुल सही कह रही हो तो सुधा कहने लगी कि क्यों ना हम लोग भी उन्हें डिनर पर इनवाइट करें मैंने सुधा से कहा लेकिन इस हफ्ते तो तुम रहने देना मैं जब फ्री हो जाऊंगा तो मैं तुम्हें बता दूंगा। सुधा कहने लगी ठीक है तुम्हे जब समय मिलेगा तो तुम मुझे बता देना सुधा ने मुझसे कहा मैं आप से पूछूंगी आप मुझे बता देना आप किस दिन फ्री हैं। मैंने सुधा से एक दिन कहां कि आज मैं घर पर ही हूं तो आज क्या हम लोग राजेश और शालनी को घर पर बुला ले तो सुधा कहने लगी हां ठीक है हम लोग उन्हें आज इनवाइट कर लेते हैं। मैंने राजेश को फोन किया और कहा कि क्या आज आप लोगों के पास समय है तो राजेश कहने लगे आज हम लोग घर पर ही हैं मैंने राजेश से कहा आज आप हमारे घर पर आ जाइए। हम लोगों ने राजेश और शालिनी को अपने घर पर बुला लिया वह लोग भी हमारे घर पर आए और हम लोगों ने अच्छा समय बिताया अब हम लोगों के परिवार के बीच में काफी नजदीकियां बढ़ चुकी थी। राजेश को कोई मदद की जरूरत होती तो वह मुझसे फोन पर बात कर लिया करते हैं मुझे भी कभी ऐसा लगता कि मुझे राजेश की जरूरत है तो मैं राजेश को फोन पर बता दिया करता। हम लोगों के परिवार के बीच काफी नजदीकियां हो चुकी थी शालिनी और सुधा के बीच में भी बहुत अच्छी दोस्ती थी। शायद शालिनी मुझे भी पसंद करने लगी थी और एक दिन मैं जब राजेश से मिलने के लिए मै गया हुआ था तो उस दिन राजेश घर पर नहीं था। मैंने शालिनी से कहा राजेश घर पर है तो वह कहने लगी नहीं आज वह घर पर नहीं है वह किसी काम से गए हुए हैं शायद बहुत देरी से लौटेंगे। शालिनी मुझे कहने लगी आप आइए ना अंदर बैठिए। हम दोनों साथ में बैठ गए लेकिन शालिनी की नजरे कुछ ठीक नहीं लग रहे थे वह अपने स्तनों को मुझे दिखाई जा रही थी।

मैंने भी उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाना शुरु किया तो उसे कोई आपत्ति नहीं थी उसने मुझे कहा राजेश और मेरी बीच कभी सेक्स नहीं होता है मुझे लगता है कि आप मेरी इच्छा को पूरा कर पाएंगे। वह मेरी गोद में आकर बैठ गई जैसे ही वह मेरे गोद में आई तो वह अपनी गांड को मुझसे टकराने लगी, उसने मेरी छाती को सहलाना शुरू किया। वह मेरे छाती को अपनी जीभ से चाटती तो मेरे अंदर उत्तेजना बढ़ जाती। मैंने भी उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें बड़े अच्छे से मैं चूसने लगा मुझे उसके स्तनों को चूसने में बहुत आनंद आ रहा था। उसके अंदर की गर्मी भी बढ़ती जा रही थी मैंने जैसे ही उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई और उसकी योनि से तरल पदार्थ बाहर की तरफ को निकलने लगा। मैंने भी अपने लंड को उसकी योनि पर सटा दिया और अंदर की तरफ धकेलते हुए अपने लंड को उसकी योनि में घुसा दिया।

मेरा लंड जैसे ही उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह पूरे जोश में आ गई और वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी की हम दोनों एक दूसरे के शरीर की गर्मी को महसूस नहीं कर पा रहे थे लेकिन उसके बावजूद भी मैं उसे धक्के दिए जा रहा था। शालिनी मुझे कहती आपके मोटा लंड को मुझे अपनी चूत में लेने में बड़ा मजा आ रहा है लेकिन यह बात आपके और मेरे बीच में ही रहे इसका ध्यान रखिएगा। मैंने शालिनी से कहा तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं किसी को भी इस बारे में पता नहीं चलने दूंगा। मैंने उसे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया उसे बड़ा मजा आ रहा था। मैं उसकी योनि से निकलती हुई आग को बर्दाश्त ना कर सका और मेरा वीर्य पतन हो गया। शालिनी और मेरे बीच अब भी सेक्स होता रहता है एक दिन शालीनी ने मुझसे अपनी गांड मरवाने की इच्छा जाहिर की तो मैंने शालिनी की गांड भी मारी जिससे कि उसे बहुत खुशी हुई और उसकी इच्छा की पूर्ति भी हो गई। शालिनी मुझे कहने लगी आपने मेरी गांड मारकर मेरी इच्छा पूरी कर दी मुझे बहुत खुशी हुई।
 
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