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Incest सुहागरात में बीवी की गांड और भाभी की चुत

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Administrator
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Update - 1
यह कहानी मुझे मेरे ऑफिस में काम करने वाले एक युवक ने बतायी थी.
उसी के शब्दों में सुनिए.
मेरा नाम सूरज है, मैं पटना में रहता हूँ. हम लोग गांव के रहने वाले हैं. हमारा गांव पटना से 44 किलोमीटर दूर है.
पास के ही एक गांव में भैया की शादी हो गई. भाभी बहुत ही अच्छी थीं और खूबसूरत भी थीं.


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भैया की उम्र 21 साल की थी. भाभी उम्र में भैया से 2 साल छोटी थीं. मैं भाभी से उम्र में एक साल छोटा था. भाभी की उम्र 19 साल की थी. गांव में ये उम्र शादी के लिए काफी मानी जाती है.
शादी के बाद भैया की नौकरी पटना के एक कम्पनी में लग गई. वो पटना शहर में ही रहने लगे. उधर वो अकेले रहते थे और खुद ही घर का सारा काम करते थे. अपना खाना भी खुद ही बनाते थे. जब उन्हें खना बनाने में और घर का काम करने में दिक्कत होने लगी, तो उन्होंने भाभी को भी अपने पास पटना बुला लिया. मेरे घर में मम्मी तो थी नहीं, उनका निधन काफी पहले हो चुका था. केवल पापा ही थे. कुछ दिनों के बाद पापा का भी स्वर्गवास हो गया, तो भैया ने मुझे अपने पास ही रहने के लिए पटना बुला लिया.
मैं उनके पास पटना आ गया और वहीं रह कर अपनी पढ़ाई करने लगा. मैंने बीए तक की पढ़ाई पूरी की और फिर नौकरी की तलाश में लग गया.
अभी मुझे नौकरी तलाश करते हुए एक साल ही गुजरा था कि भैया का सड़क दुर्घटना में स्वर्गवास हो गया. उस समय मेरी उम्र 21 साल की हो चुकी थी. अब तक मैं एकदम हट्टा कट्टा नौजवान हो गया था. मैं बहुत ही ताकतवर भी था, क्योंकि गांव में मैं पहले कुश्ती भी लड़ता था.
मुझे भैया की जगह पर ही नौकरी मिल गई. अब घर पर मेरे और भाभी के अलवा कोई नहीं था. वो मुझसे मुझसे बहुत प्यार करती थीं. मैं भी उनकी पूरी देखभाल करता था और वो भी मेरा बहुत ख्याल रखती थीं. भाभी को ही घर का सारा काम करना पड़ता था, इसलिए मैं भी उनके काम में हाथ बंटा देता था. वो मुझसे बार बार शादी करने के लिए कहती थीं.
एक दिन भाभी ने शादी के लिए मुझ पर ज्यादा दबाव डाला, तो मैंने शादी के लिए हां कर दी.
भाभी के एक रिश्तेदार थे, जो कि उनके गांव में ही रहते थे. उनकी एक लड़की थी, जिसका नाम शालू था. भाभी ने शालू के साथ मेरी शादी की बात चलाई. बात पक्की करने से पहले भाभी ने मुझे शालू की फोटो दिखा कर मुझसे पूछा कि बताओ लड़की कैसी है?
मैं शालू की फोटो देख कर दंग रह गया.


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मैं समझता था कि गांव की लड़की है, तो ज्यादा खूबसूरत नहीं होगी, लेकिन वो तो बहुत ही खूबसूरत थी. मैंने हां कर दी.
शालू की उम्र भी उस वक्त 18 साल की ही थी. खैर शादी पक्की हो गई. शालू के मम्मी पापा बहुत गरीब थे. एक महीने के बाद ही हमारी शादी गांव के एक मन्दिर में हो गई.


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शादी हो जाने के बाद दोपहर को भाभी मुझे और शालू को लेकर पटना आ गईं.
घर पर कुछ पड़ोस के लोग बहू देखने आए. जिसने भी शालू को देखा, उसकी बहुत तारीफ़ की. शाम तक सब लोग अपने अपने घर चले गए.
अब रात के 8 बज रहे थे. भाभी ने मुझसे कहा- आज मैं बहुत थक गई हूँ. तुम जाकर होटल से खाना ले आओ.
मैंने कहा- ठीक है.
मैंने झोला उठाया और खाना लाने के लिए चल पड़ा. मेरा एक दोस्त था, उसका नाम विजय था. उसी का एक होटल था. मैं सीधा विजय के पास गया.
विजय मुझे देखते ही बोला- आज इधर कैसे?
मैंने उससे सारी बात बता दी. वो मेरी शादी की बात सुनकर बहुत खुश हो गया. हम दोनों कुछ देर तक गप-शप करते रहे.
विजय ने मुझसे कहा- तुझे मज़ा लेना हो, तो मैं एक तरीका बताता हूँ.
मैंने कहा- बताओ.
वो बोला- तुम शालू की चुत को कुछ दिन तक हाथ भी मत लगाना. तुम केवल उसकी गांड मारना और अपने आपको काबू में रखना. कुछ दिन तक उसकी गांड मारने के बाद तुम उसकी चूत की चुदाई करना.
मैंने सोचा कि विजय ठीक ही कह रहा है. मैंने उससे कहा- ठीक है, मैं ऐसा ही करूंगा.
उसने मेरे लिए सबसे अच्छा खाना, जो कि उसके होटल में बनता था, पैक करा दिया. मैं खाना लेकर घर वापस आ गया.
हम सबने खाना खाया. भाभी ने शालू को मेरे रूम में पहुंचा दिया.
उसके बाद उन्होंने मुझे अपने रूम में बुलाया और कहने लगीं- शालू अभी छोटी है. उसके साथ बहुत आराम से करना.
मैंने मजाक किया- मुझे करना क्या है?
भाभी हंस कर बोलीं- शैतान कहीं का . तू तो ऐसे कह रहा है कि जैसे कुछ जानता ही नहीं है.
मैंने कहा- सच में भाभी मुझे कुछ नहीं मालूम है.
भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा- पहले उससे प्यार की दो बातें करना. उसके बाद अपने औजार पर ज्यादा सा तेल लगा लेना. फिर अपना औजार को उसके छेद में बहुत ही धीरे धीरे घुसा देना. जल्दीबाजी मत करना, नहीं तो वो बहुत चिल्लाएगी. वो अभी कमसिन उम्र की है . समझ गए ना.
मैंने कहा- हां भाभी, मैं सब समझ गया.
भाभी ने कहा- समझ गया, तो अब जा अपने कमरे में.
मैं अपने कमरे में आ गया. शालू बेड पर बैठी थी. मैं भी उसके बगल में बैठ गया. मैंने उससे पूछा- मैं तुम्हें पसंद तो हूँ न.
उसने अपना सिर हां में हिला दिया.
मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोल कर बताओ.
उसने शर्माते हुए कहा- हां.
मैंने पूछा- तुम कहां तक पढ़ी हो?
वो बोली- केवल 6 तक.
मैंने कहा- मेरी भाभी ने मुझे कुछ सिखाया है . क्या तुम्हें भी किसी ने कुछ सिखाया है?
इस पर वो कुछ नहीं बोली.
तो मैंने कहा- अगर तुम कुछ नहीं बोलोगी, तो मैं बाहर चला जाऊंगा.
इतना कह कर मैं खड़ा हो गया, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. मैं उसके बगल में बैठ गया.
मैंने कहा- अब बताओ.
वो कहने लगी- मेरे घर पर केवल मेरे मम्मी पापा ही हैं. उन्होंने तो मुझसे कुछ भी नहीं कहा, लेकिन मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी ने मुझसे कहा था कि तुम्हारे पति जब अपना औजार तुम्हारे छेद में अन्दर घुसाएंगे, तब तुमको बहुत दर्द होगा. उस दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश करना. ज्यादा चीखना और चिल्लाना मत, नहीं तो बड़ी बदनामी होगी. अपने पति से कह देना कि अपने औजार पर खूब सारा तेल लगा लें. लेकिन मैंने आज तक औजार नहीं देखा है. ये औजार क्या होता है?
मैंने कहा- तुमने आदमियों को पेशाब करते समय कभी उनकी छुन्नी देखी है?
उसने कहा- हां, गांव में तो सारे मर्द कभी भी कहीं भी पेशाब करने लगते हैं. आते जाते समय मैंने कई बार देखा है. लेकिन उसे तो गांव में लंड कहते हैं.
मैंने कहा- उसी को औजार भी कहते हैं.
वो बोली- मैंने तो देखा है कि किसी किसी का औजार तो बहुत बड़ा होता है.
मैंने कहा- जैसे आदमी कई तरह के होते हैं, ठीक उसी तरह उनका औजार भी कई तरह का होता है. मेरा औजार देखोगी.
वो बोली- मुझे शर्म आती है.
मैंने कहा- अब तो तुम्हें हमेशा ही मेरा औजार देखना पड़ेगा. उसे हाथ में भी पकड़ना पड़ेगा. बोलो तुम देखोगी मेरा औजार?
वो बोली- ठीक है, दिखा दो.
मैं पहले से ही जोश में था. मैंने अपनी शर्ट और बनियान उतार दी. उसके बाद मैंने अपनी पेंट और चड्डी भी उतार दी. मेरा 9″ लम्बा और खूब मोटा देसी लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया.

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मैंने अपना लंड उसके चेहरे के सामने कर दिया और लंड हिलाते हुए उससे कहा- लो देख लो मेरा औजार.
उसने तिरछी निगाहों से मेरे लंड को देखा और शर्माते हुए बोली- तुम्हारा तो बहुत बड़ा है.

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इतना कह कर उसने अपने हाथों से अपने चेहरे को ढक लिया.

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मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसके चेहरे पर से हटा दिया और कहा- शर्माती क्यों हो. जी भर कर देख लो इसे. अब तो सारी जिन्दगी तुम्हें मेरा औजार देखना भी है और उसे अपने छेद के अन्दर भी लेना है. मैंने तो अपने कपड़े उतार दिए हैं, अब तुम भी अपने कपड़े उतार दो.
वो बोली- मैं अपने कपड़े कैसे उतार सकती हूँ, मुझे शर्म आती है.
मैंने कहा- अगर तुम अपने कपड़े नहीं उतारोगी, तो मैं अपना औजार तुम्हारे छेद में कैसे घुसाऊंगा.
वो कुछ नहीं बोली.
मैंने खुद ही शालू के कपड़े उतारने शुरू कर दिए, तो वो शर्माने लगी.

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धीरे धीरे मैंने उसे एकदम नंगी कर दिया. मैं उसके संगमरमर जैसे खूबसूरत बदन को देख कर दंग रह गया. उसकी चुचियां अभी बहुत छोटी छोटी थीं.
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मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसकी चुचियों को सहलाते हुए उसके होंठों को चूमने लगा. मैंने देखा कि उसकी चुत पर अभी बहुत हल्के हल्के बाल ही उगे थे और उसकी चुत एकदम गुलाबी सी दिख रही थी.

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उसकी चुचियों को मैंने मसलना शुरू कर दिया तो वो बोली- मुझे गुदगुदी हो रही है.

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मैंने पूछा- क्या अच्छा नहीं लग रहा है?
वो बोली- बहुत अच्छा लग रहा है.
मैंने उसके निप्पलों को बारी बारी से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.

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वो गर्म सिसकारियां भरने लगी. उसके बाद मैंने उसकी चुत को सहलाना शुरू कर दिया. उसे और भी ज्यादा गुदगुदी होने लगी.

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उसने मेरा हाथ हटा दिया, तो मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- मुझे बहुत जोर की गुदगुदी हो रही है.
मैंने कहा- अच्छा नहीं लग रहा है क्या?
वो बोली- अच्छा तो लग रहा है.
मैंने कहा- तो तुमने मेरा हाथ क्यों हटाया. अगर तुम ऐसा ही करोगी, तो मैं बाहर चला जाऊंगा.
वो बोली- ठीक है, मैं अब तुम्हें कुछ भी करने से मना नहीं करूंगी.
मैंने कहा- फिर ठीक है.
मैंने उसकी चुत को सहलाना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में उसकी चुत गीली होने लगी. वो जोर जोर से कामुक सिसकरियां भरने लगी.
मैंने एक उंगली उसकी चुत के अन्दर डाल दी, तो उसने जोर की सिसकारी ली.

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मेरा लंड अब तक बहुत ज्यादा सख्त हो चुका था. थोड़ी देर तक मैं उसकी चुत में अपनी उंगली अन्दर बाहर करता रहा.
कुछ ही देर में वो अकड़ने के साथ झड़ने लगी. झड़ते समय उसने मुझे जोर से पकड़ लिया. वो सिसयाते हुए बोली- तुम्हारे उंगली करने से मुझे तो पेशाब सी आ रही है.
मैंने कहा, ये पेशाब नहीं है . जोश में आने के बाद चुत से पानी निकलता है.

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वो कुछ नहीं बोली.
मेरी उंगली उसकी चुत के पानी से एकदम गीली हो चुकी थी. मैंने उसके झड़ने के बाद भी उंगली चलाना जारी रखी.
थोड़ी ही देर में वो फिर से पूरे जोश में आ गई.
मैंने कहा- अब मैं अपना औजार तुम्हारे छेद में घुसाऊंगा. तुम पेट के बल लेट जाओ.
वो पेट के बल लेट गई.
मैंने देखा कि उसकी गांड भी एकदम गोरी थी. उसकी गांड का छेद बहुत ही मस्त और हल्के भूरे रंग का था.

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मैं अपनी उंगली उसकी गांड के छेद पर फिराने लगा. उसके बाद मैंने एक झटके से अपनी एक उंगली उसकी गांड में घुसा दी.

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वो जोर से चीख उठी.
मैंने कहा- अगर तुम ऐसे चीखोगी तो भाभी आ जाएंगी.
वो कराहट हुए बोली- मुझे दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- दर्द तो होगा ही. अभी तो उंगली डाली है, इसके बाद मैं अपना लंड तुम्हारी गांड में घुसाऊंगा.
थोड़ी देर तक मैं अपनी उंगली उसकी गांड में अन्दर बाहर करता रहा.
वो बोली- मेरा छेद तो बहुत ही छोटा है और तुम्हारा औजार बहुत बड़ा है. ये अन्दर कैसे घुसेगा?
मैंने कहा- जैसे दूसरी औरतों के अन्दर घुसता है.
वो बोली- तब तो मुझे बहुत दर्द होगा.
मैंने कहा- इसी लिए तो तुम्हारी भाभी ने तुमसे कहा था कि दर्द को बर्दाश्त करना, ज्यादा चीखना चिल्लाना मत.
वो बोली- मैं समझ गई.
मैं उसके ऊपर चढ़ गया, तो वो बोली- तेल नहीं लगाओगे क्या.
मैंने कहा- लगाऊंगा.
मैंने अपने लंड पर ढेर सारा तेल लगा लिया.


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उसके बाद मैंने उसकी गांड के छेद पर अपने लंड का सुपारा रखा और उससे कहा- अब तुम अपना मुँह जोर से दबा लो, जिससे तुम्हारे मुँह से चीख ना निकले.
उसने कहा- ठीक है, मैं दबा लेती हूँ. लेकिन तुम बहुत धीरे धीरे घुसाना.
मैंने कहा- हां, मैं बहुत धीरे ही घुसाऊंगा.
उसने अपने हाथों से अपने मुँह को दबा लिया. मैंने थोड़ा सा ही जोर लगाया था कि वो जोर से चीख पड़ी. मेरे लंड का सुपारा भी अभी ठीक से उसकी गांड में नहीं घुस पाया था कि वो रोने लगी.

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वो बोली- मुझे छोड़ दो, बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- दर्द तो होगा ही. तुम अपना मुँह जोर से दबा लो.
उसने अपना मुँह फिर से दबा लिया, तो मैंने इस बार कुछ ज्यादा ही जोर लगा दिया.
वो दर्द से तड़पते हुए जोर जोर से चीखने लगी- उई माँ दीदी, बचा लो मुझे, नहीं तो मैं मर जाऊंगी.
इस बार मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में घुस गया था. उसकी गांड से खून निकल आया था. वो इतने जोर जोर से चीख रही थी कि मैं थोड़ा सा डर गया. मैंने एक झटके से अपना लंड बाहर खींच लिया. पुक्क़ की आवाज के साथ मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड से बाहर आ गया.
मैंने उसे चुप कराते हुए कहा- अगर तुम ऐसे ही चिल्लाओगी, तो काम कैसे बनेगा?
वो बोली- मैं क्या करूं, मुझे बहुत दर्द हो रहा था.
मैंने कहा- थोड़ा सब्र से काम लो. फिर सब ठीक हो जायेगा. अब तुम अपना मुँह दबा लो, मैं फिर से कोशिश करता हूँ.
उसने अपना मुँह दबा लिया, तो मैंने फिर से अपने लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर रख दिया. उसके बाद मैंने उसकी कमर के नीचे से हाथ डाल कर उसे जोर से पकड़ लिया. फिर मैंने पूरी ताकत के साथ जोर का धक्का दे मारा. वो बहुत जोर जोर से चिल्लाने लगी. वो मेरे नीचे से निकलना चाहती थी, लेकिन मैंने उसे बुरी तरह से जकड़ रखा था. मेरा लंड इस धक्के के साथ उसकी गांड में 3″ तक घुस गया.
वो जोर जोर से चिल्लाते हुए भाभी को पुकार रही थी- दीदी, बचा लो मुझे . नहीं तो ये मुझे मार डालेंगे . बहुत दर्द हो रहा है.
तभी कमरे के बाहर से भाभी की आवाज आई- राज, क्या हुआ. शालू इतना क्यों चिल्ला रही है.
मैंने कहा- मैं अपना औजार अन्दर घुसा रहा था, लेकिन ये मुझे घुसाने ही नहीं दे रही है . बहुत चिल्ला रही है.
भाभी ने कहा- तुम दोनों बाहर आ जाओ. मैं शालू को समझा देती हूँ.
मैंने लुंगी पहन ली और शालू से कहा- बाहर चलो, भाभी बुला रही हैं.
वो उठना चाहती थी, लेकिन उठ नहीं पा रही थी.
मैंने उसे सहारा दे कर खड़ा किया. उसने केवल अपनी साड़ी बदन पर लपेट ली.
मैं उसे सहारा देकर बाहर ले आया. वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी.
भाभी ने शालू से पूछा- इतना क्यों चिल्ला रही थी?
वो रोते हुए भाभी से कहने लगी- ये अपना औजार मेरे छेद में घुसा रहे थे . इसलिए मुझे बहुत दर्द हो रहा था.
भाभी ने कहा- पहली पहली बार दर्द तो होगा ही. सभी औरतों को होता है. ये कोई नई बात थोड़े ही है.
मुझसे भाभी ने कहा- मैंने तुझसे कहा था ना कि तेल लगा कर धीरे धीरे घुसाना.
मैंने कहा- मैं तेल लगा कर धीरे धीरे ही घुसाने की कोशिश कर रहा था. जैसे ही मैंने थोड़ा सा जोर लगाया और मेरे औजार का टोपा ही इसके छेद में घुसा कि ये जोर जोर से चिल्लाने लगी. इसके चिल्लाने से मैं डर गया और मैंने अपना औजार बाहर निकाल लिया. उसके बाद मैंने इसे समझाया, तो ये राजी हो गई. मैंने फिर से कोशिश की, तो शालू फिर जोर जोर से चिल्लाने लगी. जबकि अभी मेरा औजार केवल जरा सा ही अन्दर घुस पाया था. तभी आपने हम दोनों को बुला लिया और हम बाहर आ गए.
भाभी ने कहा- इसका मतलब तुमने अभी तक कुछ भी नहीं किया?
मैंने कहा- बिल्कुल नहीं . आप चाहो तो शालू से पूछ लो.
भाभी ने शालू से पूछा- क्या ये सही कह रहा है?
उसने अपना सिर हां में हिला दिया. भाभी ने शालू से कहा- तुम कमरे में जाओ. मैं इसे समझा बुझा कर भेजती हूँ.
शालू कमरे में चली गई.

कहानी जारी है.
 
Update - 4
भाभी ने अपने कपड़े उतार दिये और शालू के बगल में लेट गई। मैं भाभी के पैरों के बीच आ गया तो भाभी ने शालू से कहा- अब तुम बैठ जाओ और देखो कि कैसे मैं इसका औजार पूरा का पूरा अन्दर लेती हूँ।

शालू भाभी के बगल में बैठ गई। मैंने भाभी की चूत में अपना लण्ड घुसेड़ना शुरु कर दिया। धीरे धीरे मेरा पूरा का पूरा लण्ड भाभी की चूत में समा गया। शालू आंखें फ़ाड़े देखती रही। उसके बाद मैंने भाभी की चुदाई शुरु कर दी। शालू मेरे लण्ड को भाभी की चूत में सटासट अन्दर-बाहर होते हुये देखती रही।

5 मिनट की चुदाई के बाद भाभी झड़ गई तो शालू ने कहा- दीदी, तुम्हारे छेद में से क्या निकल रहा है?
भाभी ने कहा- यह मेरी चूत का पानी है। अभी यह कई बार निकालेगा। जब यह तुम्हारी चूत में भी अपना लण्ड घुसा कर तेजी से अन्दर-बाहर करेगा तब तुम्हारी चूत में से भी ऐसा ही पानी निकलेगा। चूत से पानी निकलने पर बहुत मज़ा आता है। तुम खुद ही देख लो कि मुझे कितना मज़ा आ रहा है।

मैंने भाभी को लगभग 20 मिनट तक खूब जम कर चोदा। मेरी कुवारी बीवी शालू आंखें फ़ाड़े देखती रही।

लण्ड का सारा पानी भाभी की चूत में निकाल देने के बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया तो शालू बोली- तुम्हारे लण्ड पर तो जरा सा भी खून नहीं लगा है?
मैंने कहा- खून तो केवल पहली पहली बार घुसाने में ही निकालता है।
वो कुछ नहीं बोली।

भाभी ने शालू से कहा- अब तो तैयार हो इसका लण्ड अपनी चूत में लेने के लिये?
मेरी बेचारी सी दुल्हन बोली- हां, लेकिन दीदी, बहुत दर्द होगा।
भाभी ने कहा- पगली, केवल एक ही बार तो दर्द होगा। उसके बाद तो तू खुद ही इससे बार-बार कहेगी कि अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दो।
वो बोली- भला मैं ऐसा क्यों कहूँगी?
भाभी ने कहा- क्योंकि तुझे इसमें मज़ा जो आयेगा।

मैं भाभी के बगल में लेट गया। शालू मेरे लण्ड को देखती रही। थोड़ी देर बाद वो बोली- इनका लण्ड अब खड़ा क्यों नहीं हो रहा है?

भाभी ने कहा- अभी इसने मुझे चोदा है ना इसीलिये। तू इसके लण्ड को सहलाना शुरु कर दे। थोड़ी ही देर में यह फिर से खड़ा हो जायेगा।

शालू को भी भाभी की चुदाई देख कर थोड़ा जोश आ गया था। उसने अपना हाथ धीरे से मेरे लण्ड पर रख दिया। थोड़ी देर तक वो मेरे लण्ड को देखती रही। उसके बाद उसने मेरे लण्ड को सहलाना शुरु कर दिया।

15-20 मिनट के बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने देखा कि उसकी आंखें कुछ गुलाबी सी होने लगी। लण्ड खड़ा होते देख शालू जोश में आ गई और भाभी से बोली- दीदी, अब तो इनका लण्ड खड़ा हो गया।
भाभी बोली- अब तू लेट जा।

इतना कह कर भाभी उठ कर बैठ गई और शालू लेट गई।
मुझसे भाभी ने कहा- तू मेरे साथ जरा बाहर आ।
मैं भाभी के साथ बाहर आ गया।

भाभी ने कहा- इस बार शालू के ऊपर जरा सा भी रहम मत करना। पूरे ताकत के साथ धक्का लगते हुये पूरा का पूरा लण्ड अन्दर घुसा देना। ज्यादा देर भी मत करना। उसके बाद उसकी किसी दुश्मन की तरह खूब जम कर चुदाई करना। समझ गये?
मैंने कहा- ठीक है, मैं ऐसा ही करुंगा।

भाभी ने कहा- मैंने कभी तेरे भैया से गाण्ड नहीं मरवाई थी, मेरी गाण्ड कब मारेगा?
मैंने कहा- जब तुम कहो।
वो बोली- ठीक है, मैं तुझे बता दूंगी। अब चल मेरे साथ कमरे में।

मैं भाभी के साथ कमरे में आ गया। शालू बेड पर लेटी हुई थी।

मुझसे भाभी ने कहा- अब तू अपने लण्ड पर तेल लगा ले और शालू की चुदाई शुरु कर। मैं इसके पास ही बैठ जाती हूँ।
शालू के बगल में बैठ भाभी गई।

मैंने अपने लण्ड पर ढेर सारा तेल लगा लिया और शालू के पैरों के बीच आ गया।
जैसे ही मैंने अपना लण्ड शालू की चूत पर रखा तो भाभी ने कहा- ऐसे नहीं, मैं बताती हूँ।
मैंने कहा- बताओ?
भाभी ने कहा- तू अपना हाथ इसके पैरों के नीचे से डाल कर इसके कन्धे को जोर से पकड़ ले। उसके बाद अन्दर घुसा।

शालू के पैरों के नीचे हाथ डाल कर मैंने शालू के कन्धे को जोर से पकड़ लिया।
भाभी ने कहा- अब जैसा मैंने तुझे समझाया था, ठीक उसी तरह अन्दर घुसा दे।

मैंने शालू के चूत के मुँह पर अपने लण्ड का सुपारा रख दिया। जैसे ही मैंने धक्का लगाया तो भाभी ने शालू के मुँह को जोर से दबा कर पकड़ लिया। शालू के मुँह से गू गू की आवाज ही निकाल पाई।
भाभी मुझसे बोली- घुसा दे जल्दी से पूरा का पूरा।

मैं तो ताकतवर था ही . मैंने अपनी सारी ताकत लगाते हुये फिर से एक धक्का मारा। शालू की चूत से खून की धार निकलने लगी। मेरा लण्ड खून से नहा गया। वो अपने हाथों को जोर जोर से बेड पर पटकने लगी। उसकी सारी की सारी चूड़ियां टूट गई और उसका हाथ लहुलुहान हो गया।
मुँह दबा होने की वजह से उसके मुँह से केवल गू गू की आवाज ही निकल पा रही थी।

मैंने फिर से एक धक्का लगाया। इस धक्के के साथ ही मेरा लण्ड शालू की चूत में 7″ तक घुस गया। शालू तड़प रही थी। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। बेड की चादर पर भी ढेर सारा खून लग गया था।

भाभी बोली- जल्दी कर।

मैंने एक धक्का और मारा तो मेरा लण्ड 8″ घुस गया। मैंने गहरी सांस लेते हुये फिर से जोर का धक्का लगाया। इस धक्के के साथ ही मेरा पूरा का पूरा लण्ड शालू की चूत में समा गया।
भाभी ने बताया- अपना पूरा लण्ड बाहर निकाल कर एक ही झटके में फिर से अन्दर कर दे।
मैंने वैसा ही किया.

भाभी ने कहा- शाबाश . ठीक इसी तरह से 4-5 बार और कर।
मैंने 4-5 बार फिर से वैसा ही किया।

शालू तड़प रही थी, उसका सारा बदन पसीने से नहा गया थी। उसकी सांस बहुत तेज चल रही थी और सारा बदन थर थर कांप रहा था। मैंने शालू की चुदाई शुरु कर दी। भाभी अभी भी उसका मुँह दबाये हुये थी। उसके मुँह से गू गू की आवाज निकल रही थी।

उसकी चूत ने मेरे लण्ड को बुरी तरह से जकड़ रखा था। मेरा लण्ड आसानी से उसकी चूत में अन्दर-बाहर नहीं हो पा रहा था। पूरी ताकत के साथ मैं लगभग 10 मिनट तक उसकी चुदाई करता रहा। शालू अब कुछ हद तक शान्त हो चुकी थी।

भाभी ने अपना हाथ उसके मुँह पर से हटा लिया तो शालू सिसक सिसक कर रोते हुये कहने लगी- दीदी, आप दोनों ने मिलकर मुझे मार ही डाला। बहुत दर्द हो रहा है।

भाभी ने कहा- अब तो पहले जैसा दर्द नहीं है ना?
वो बोली- नहीं, अब पहले से बहुत कम है।
भाभी बोली- थोड़ा सबर कर, अभी बाकी का दर्द भी चला जायेगा।

मैं तेजी के साथ उसकी चुदाई कर रहा था। अब वो चीख नहीं रही थी केवल आहें भर रही थी। मैंने उसे 5 मिनट तक और चोदा तो शालू झड़ गई। उसकी चूत और मेरा लण्ड एकदम गीला हो गया। अब मेरा लण्ड थोड़ा आसानी से उसकी चूत में अन्दर बाहर होने लगा था।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। शालू ने धीरे धीरे सिसकारियां भरनी शुरु कर दी।
भाभी ने पूछा- अब कैसा लग रहा है?
वो बोली- अब कुछ कुछ मज़ा आ रहा है लेकिन दर्द अभी भी है।
भाभी ने कहा- अब इस दर्द को जने में समय लगेगा। उसके बाद बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा।

वो बोली- समय क्यों लगेगा?

भाभी ने कहा- जब यह तुम्हें 3-4 बार चोद देगा तब तुम्हारी चूत इसके लण्ड के आकार की हो जायेगी। उसके बाद यह दर्द अपने आप चला जायेगा।

मैंने और ज्यादा जोर जोर के धक्के लगने शुरु कर दिये थे और उसे तेजी के साथ चोद रहा था। शालू ने भी अब धीरे धीरे अपना चूतड़ उठाना शुरु कर दिया था। वो भी अब मस्ती में आ रही थी। पांच मिनट में ही वो फिर से झड़ गई।

उसने मेरे होंठों को चूम लिया और कहा- अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
मैंने उसकी चुदाई जारी रखी।

2 मिनट भी नहीं गुजरे थे कि भाभी ने कहा- शालू, अब तुम इसका लण्ड अपने दूसरे छेद में ले लो।

वो बोली- फिर से दर्द होगा?

भाभी ने कहा- अब ज्यादा दर्द नहीं होगा क्योंकि तुम इसका लण्ड पहले ही अन्दर ले चुकी हो।
वो बोली- फिर इनसे कह दो कि धीरे धीरे करें।
भाभी ने बताया- यह धीरे धीरे ही करेगा। मैं हूँ ना यहाँ पर। अगर यह बदमाशी करेगा तो मैं इसे बहुत मारूँगी।
वो बोली- ठीक है।

मैंने अपना लण्ड शालू की चूत से बाहर निकाला और उसकी गाण्ड में घुसाने लगा। मेरे लण्ड पर शालू की चूत का ढेर सारा पानी लगा हुआ था। धीरे धीरे मेरा लण्ड 7″ तक उसकी गाण्ड में घुस गया। उसके बाद जब मैंने और ज्यादा घुसने की कोशिश की तो उसे फिर से दर्द होने लगा और वो चीखने लगी लेकिन इस बार उसने मुझे रोका नहीं।

वो बोली- अब रहने दो, दर्द हो रहा है।
भाभी ने कहा- बस थोड़ा सा ही तो बाकी है, उसे भी अन्दर ले लो।
वो कुछ नहीं बोली।

भाभी ने मुझे आंख मारी तो मैंने जोर का धक्का लगा दिया। मेरा बाकी का लण्ड भी उसकी गाण्ड में समा गया।
वो जोर से चीखी तो भाभी ने कहा- बस हो गया।
उसके बाद मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरु कर दी। थोड़ी देर चीखने के बाद वो शान्त हो गई। अब उसे गाण्ड मरवाने में भी मज़ा आने लगा था।

लगभग 5 मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी तो भाभी ने कहा- अब रहने दो।
मैंने कहा- अभी तो मेरे लण्ड का पानी ही नहीं निकाला है।
वो बोली- मैं मना थोड़े हो कर रही हूँ। अब तुम इसकी चूत में अपना लण्ड डाल कर इसे चोदो।

मैंने अपना लण्ड शालू की गाण्ड से निकाल कर उसकी चूत में डाल दिया। उसके बाद मैंने पूरे ताकत के साथ जोर जोर से उसकी चुदाई शुरु कर दी। 5 मिनट में ही शालू फिर से झड़ गई। मैं इसके पहले 2 बार शालू की गाण्ड मार चुका था और 2 बार भाभी को चोद चुका था। इसलिये मेरे लण्ड का पानी निकालने का नाम ही नहीं ले रहा था।

मैं जोर जोर के धक्के लगाते हुये शालू को चोद रहा था। वो भी अपना चूतड़ उठाने लगी थी। थोड़ी देर बाद वो बोली- दीदी, अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। इनसे कह दो कि थोड़ा और जोर जोर से धक्का लगाये।
भाभी ने मुझसे कहा- तुमने सुना, यह क्या कह रही है?
मैंने कहा- हां।
वो बोली- तो फिर तुम इसका कहा मानो और अपनी ताकत दिखा दो इसे।

मैंने पूरा ताकत लगते हुये बहुत ही जोर जोर के धक्के लगने शुरु कर दिये।

भाभी ने शालू से पूछा- अब ठीक है?
वो बोली- हां, अब मुझे ज्यादा मज़ा आ रहा है।

शालू अब चूतड़ उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी। मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरा का पूरा सटा सट अन्दर बाहर हो रहा था। दस मिनट की चुदाई के बाद शालू फिर से झड़ गई। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया तो उसने मेरे लण्ड को तुरन्त पकड़ लिया और कहने लगी- बाहर क्यों निकाल रहे हो? अभी मुझे और मज़ा लेना है।

मैंने कहा- मैं तुम्हें अभी और मज़ा दूंगा। अब तुम घोड़ी की तरह हो जाओ।

वो डोगी स्टाईल में हो गई तो मैं उसके पीछे आ गया। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड में घुसा दिया और उसकी गाण्ड मारने लगा। वो जोश के मारे सिसकारियां भरने लगी।

5 मिनट तक उसकी गाण्ड मरने के बाद मैं अपना लण्ड उसकी गाण्ड से निकाल कर उसकी चूत में डाल दिया और उसकी चुदाई करने लगा। मैं उसकी कमर को पकड़ कर उसे बहुत ही बुरी तरह से चोद रहा था। वो भी अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुये मेरा साथ देने लगी थी।

दस मिनट उसकी चुदाई करने के बाद मैं झड़ गया। मेरे साथ ही साथ शालू भी फिर से झड़ गई। मैंने अपना लण्ड बाहर निकाला तो भाभी ने शालू से कहा- अब तुम इसके लण्ड को चाट लो।
वो बोली- मैं इनके लण्ड को नहीं चाटूंगी। इनका लण्ड गंदा है।
भाभी ने कहा- गंदा कहां है। इसके लण्ड पर तुम्हारी चूत का और इसके लण्ड का पानी ही तो लगा है। इसे चाटने से प्यार बढ़ता है। चाट लो इसे।
वो बोली- मैं नहीं चाटूंगी, मुझे घिन आती है।

भाभी ने कहा- मैं ही चाट लेती हूँ। फिर आगे से तुझे ही चाटना पड़ेगा।
वो बोली- ठीक है, पहले तुम चाट कर दिखाओ, बाद में मैं चाट लूंगी।

भाभी मेरे लण्ड को चाटने लगी। शालू देख रही थी।
मेरे लण्ड पर लगा हुआ थोड़ा सा पानी भाभी ने चाट लिया फिर शालू से बोली- अब बाकी का तुम चाट लो।
शालू ने शरमाते हुये मेरे लण्ड को चाटना शुरु कर दिया। उसने मेरे लण्ड पर लगे हुये बाकी के पानी को चाट चाट कर साफ़ कर दिया।

भाभी ने शालू से कहा- अब तुम्हे जब ये फिर से चोदेगा तो चिल्लाओगी तो नहीं।
वो बोली- अब क्यों चिल्लाऊंगी? अब तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा है।
भाभी ने कहा- फिर ठीक है, तुम आराम कर लो। जब तुम्हारा मन करगा तो इसे बुला लेना। मैं इसके साथ अपने कमरे में जा रही हूँ। मुझे इस से कुछ बात करनी है।
वो बोली- ठीक है, बुला लूंगी।

भाभी बोली- मैं भी इसके साथ आऊँगी तुम्हारे पास और अपने सामने ही तुम्हारी चुदाई करा दूंगी।

भाभी बाहर चली गई तो मैं भी उनके पीछे पीछे बाहर चला आया।

कहानी जारी रहेगी.
 
Update - 3
मेरी सुहागरात पर मेरी बीवी भाभी के समझाने पर चुदाई के लिए तैयार हुई. वो चोदन में होने वाले दर्द से डर रही थी.

मैंने उससे कहा- जाकर तेल की शीशी उठा लाओ और मेरे लंड पर ढेर सारा तेल लगा दो.
वो बोली- मुझे शर्म आती है.
मैंने कहा- अगर तुम मेरे लंड पर तेल नहीं लगाओगी, तो मैं ऐसे ही अपना सूखा लंड तुम्हारे छेद में घुसा दूंगा.
वो बोली- ना बाबा ना . ऐसा मत करना. जब तेल लगाने के बाद इतना दर्द होता है, तो बिना तेल लगाए तुम अपना औजार अन्दर घुसाओगे, तो मैं तो मर ही जाऊंगी. मैं तुम्हारे औजार पर तेल लगा देती हूँ.

इतना कह कर वो उठी. उसने तेल की शीशी से तेल निकाल कर मेरे लंड पर लगा दिया. उसके तेल लगाने से मेरा लंड एकदम सख्त हो गया. उसके बाद वो मेरे कुछ कहे बिना ही पेट के बल लेट गई और बोली- प्लीज़ धीरे धीरे घुसाना.

अब मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी गाण्ड के छेद पर रख दिया और फिर उसकी कमर के नीचे से हाथ डाल कर उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया। मैंने थोड़ा सा जोर लगाया तो उसके मुँह से आह निकल गई। मैंने थोड़ा जोर और लगाया उसके मुँह से हल्की सी चीख निकल गई। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 3″ तक घुस चुका था। मैंने थोड़ा सा जोर और लगाया तो वो फिर से चिल्लाने लगी और मेरा लण्ड 4″ तक घुस गया।

मैंने उसकी चीख पर जरा सा भी ध्यान नहीं दिया। मैंने जोर का धक्का मारा तो वो तड़पने लगी और जोर जोर से चीखने लगी- दीदी, बचा लो मुझे, मैं मर जाऊंगी।

इस धक्के के साथ मेरा लण्ड 5″ तक घुस गया। मैंने फिर से बहुत ही जोर का एक धक्का और मारा तो अपने हाथों को जोर जोर से बिस्तर पर पटकने लगी। उसने अपने सिर के बाल नोचने शुरु कर दिये और बहुत ही जोर जोर से चिल्लाने लगी। अब तक मेरा लण्ड शालू की गाण्ड में 6″ तक घुस चुका था।

मैंने पूरी ताकत के साथ फिर से जोर का धक्का मारा तो वो बहुत जोर-जोर से रोने लगी। लग रहा था कि जैसे वो मर जायेगी।
मैं रुक गया।
इस धक्के के साथ मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 7″ घुस चुका था। मैंने अपना लण्ड एक झटके से बाहर खींच लिया। पुक की आवाज के साथ मेरा लण्ड बाहर आ गया।

मैंने देखा कि उसकी गाण्ड का मुँह खुला का खुला हुआ ही रह गया था और ढेर सारा खून मेरे लण्ड पर और उसकी गाण्ड पर लगा हुआ था। मैंने तेल की शीशी उठाई और उसकी गाण्ड के छेद में ढेर सारा तेल डाल दिया। उसके बाद मैंने फिर से अपना लण्ड धीरे धीरे उसकी गाण्ड में घुसा दिया। जब मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में 7″ तक घुस गया तो मैंने पूरे ताकत के साथ 2 बहुत ही जोरदार धक्के लगा दिये।

वो जोर जोर से चिल्लाने लगी- दीदी, तुमने मुझे कहां फसा दिया। मैं तो मरी जा रही हूँ और तुम हो कि सुन ही नहीं रही हो, बचा लो मुझे, नहीं तो ये मुझे मार डालेंगे।
मैंने कहा- अब चुप हो जाओ। मेरा पूरा लण्ड अब घुस चुका है।
वो कुछ नहीं बोली . केवल सिसक सिसक कर रोती रही।

मैं अपना लण्ड उसकी गाण्ड में ही डाले हुये थोड़ी देर तक रुका रहा। धीरे धीरे वो कुछ हद तक शान्त हो गई।

तभी कमरे के बाहर से ही भाभी ने पूछा- काम हो गया?
मैंने कहा- अभी तो मैंने केवल अपना औजार ही पूरा अन्दर घुसाया है।
वो बोली- ठीक है, अब जल्दी से अपना पानी भी निकाल दो और बाहर आ जाओ।

मैंने धीरे धीरे धक्के लगने शुरु कर दिये तो शालू फिर से चीखने लगी। समय गुजरता गया और वो धीरे धीरे शान्त होती गई। दस मिनट में वो एकदम शान्त हो गई तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरु कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की हल्की सी आह ही निकाल रही थी।

अपनी स्पीड मैंने और तेज कर दी। तेल लगा होने की वजह से मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में सटासट अन्दर बाहर हो रहा था। मुझे खूब मज़ा आ रहा था। शालू को भी अब कुछ कुछ मज़ा आने लगा था। मैं भी पूरे जोश में आ चुका था और तेजी के साथ उसकी गाण्ड मार रहा था।

10 मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी और फिर झड़ गया। लण्ड का सारा पानी उसकी गाण्ड में निकाल देने के बाद भी मैं उसके गाण्ड में ही अपना लण्ड डाले रखा और उसके ऊपर लेट गया।

मैंने शालू से पूछा- कुछ मज़ा आया?
वो बोली- बहुत दर्द हो रहा है और तुम पूछ रहे हो कि मज़ा आया।
मैंने कहा- मेरी कसम है तुम्हें, सच सच बताओ क्या तुम्हें जरा सा भी मज़ा नहीं आया?

उसने शरमाते हुये कहा- पहले तो बहुत दर्द हो रहा था लेकिन बाद में मुझे थोड़ा थोड़ा सा मज़ा आने लगा था कि तुम रुक गये।
मैंने कहा- अभी थोड़ी देर में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो जायेगा। उसके बाद मैं फिर से तुम्हारी गाण्ड मारूंगा।
वो बोली- नहीं, अभी रहने दो।

तभी भाभी ने पूछा- क्यों राज, काम हो गया?
मैंने कहा- हां, मैंने अपना पानी इसकी गाण्ड के छेद में निकाल दिया है। अभी थोड़ी ही देर में मैं फिर से अपना पानी निकालने वाला हूँ।
भाभी ने कहा- ठीक है, जब दोबारा पानी निकाल देना तो बाहर आ जाना।
मैंने कहा- ठीक है।

मैंने अपना लण्ड शालू की गाण्ड में ही रखा और उसकी चूचियों को मसलता रहा। पन्द्रह मिनट में ही मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरु कर दी। अब उसके मुँह से केवल हल्की हल्की सी आह ही निकाल रही थी।
थोड़ी ही देर में उसे मज़ा आने लगा तो वो सिसकारियां लेने लगी।

मैंने पूछा- अब कैसा लग रहा है?
वो बोली- अब अच्छा लग रहा है।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो थोड़ी ही देर में वो जोर से सिसकारियां भरने लगी। मुझे भी उसकी गाण्ड मरने में खूब मज़ा आ रहा था। 20 मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी और फिर झड़ गया। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड से बाहर निकाला और उसके बगल में लेट गया।

मैंने उसके होंठो को चूमते हुये पूछा- कैसा लगा?
वो बोली- इस बार कुछ ज्यादा ही मज़ा आया।
मैंने कहा- धीरे धीरे तुम्हें और ज्यादा मज़ा आने लगेगा।

मैं शालू के पास से उठ कर बाहर चला आया।
भाभी बाहर बैठी थी, उन्होंने मुझसे पूछा- काम हो गया?
मैंने कहा- हां।

वो बोली- मैं गर्म पानी से उसकी चूत की सिकाई कर देती हूँ। इससे उसका दर्द कम हो जायेगा।

मैं चुप रह गया क्योंकि मैंने तो शालू की चूत को अभी तक छुआ ही नहीं था। मैंने तो उसकी गाण्ड मारी थी।

फिर मैं कुछ मिनट बाद शालू के पास चला आया। भाभी पानी गर्म कर के ले आई, वो बोली- मैं पानी गर्म कर के लाई हूँ, अन्दर आ जाऊं?
मैंने कहा- आ जाओ।

शालू बोली- मैं एकदम नंगी हूँ और तुम दीदी को यहां बुला रहे हो?
मैंने कहा- तो क्या हुआ?
वो कुछ नहीं बोली।

भाभी अन्दर आ गई, उन्होंने शालू से कहा- लाओ मैं तुम्हारे छेद की सिकाई कर दूं। इससे तुम्हारा दर्द कम हो जायेगा।

शालू ने करवट बदल ली तो भाभी ने कहा- तुमने करवट क्यों बदल ली, अब मैं कैसे तुम्हारी चूत के छेद की सिकाई करूंगी?
उसने अपनी गाण्ड के छेद की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- इसी में तो इन्होंने अपना औजार घुसाया था।
भाभी के मुँह से निकला- क्या?

भाभी की नज़र शालू की गाण्ड पर पड़ी। उसकी गाण्ड खून से लथपथ थी। मैंने अभी तक अपना लण्ड साफ़ नहीं किया था। मेरा लण्ड भी खून से भीगा हुआ था। भाभी आंखें फ़ाड़े कभी मेरे लण्ड को और कभी शालू की गाण्ड को और कभी मेरे चेहरे को देखने लगी।

भाभी ने गर्म पानी से शालू की गाण्ड की सिकाई की। उसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुये शालू से कहा- शालू तुमने तो एक मैदान मार लिया है। अब दूसरा मैदान मारना और बाकी है।
वो बोली- दीदी, मैं समझी नहीं?
भाभी ने शालू की चूत पर हाथ लगाते हुये कहा- अभी तो तुम्हें इस छेद में भी इसका औजार अन्दर लेना है।

शालू को बहुत दर्द हो रहा था। भाभी की बात सुनकर वो गुस्से में आ गई। उसने अपनी चूत की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- एक छेद के अन्दर इनका औजार लेने में ही मेरा इतना बुरा हाल हो गया और आप कह रही हो कि अभी इस दूसरे छेद में भी अन्दर लेना है। मैं अब किसी छेद में इनका औजार अन्दर नहीं लूंगी। मुझे बहुत दर्द होता है। आप खुद ही इनका औजार अपने छेद में ले लो।

भाभी ने मुस्कुराते हुये कहा- मेरे अन्दर लेने से क्या होगा। आखिर तुम्हें भी तो इसका औजार अपने इस छेद में अन्दर लेना ही पड़ेगा। जैसे एक बार तुमने दर्द को बर्दाश्त कर लिया है उसी तरह से एक बार और दर्द को बर्दाश्त कर लेना।

शालू ने भाभी की चूत की तरफ़ इशारा करते हुये कहा- पहले तुम इनका औजार अपने इस छेद में अन्दर ले कर दिखाओ। उसके बाद ही मैं इनका औजार अपने इस छेद में अन्दर लूंगी।

भाभी मुझे देखने लगी और मैं उनको।शालू बोली- क्यों अब क्या हुआ? आप मुझे फंसा रही थी लेकिन मैंने आपको ही फंसा दिया। दिखाओ इसका औजार अपने छेद के अन्दर लेकर।

भाभी ने कहा- अच्छा बाबा, अभी दिखा देती हूँ लेकिन उसके बाद तो तुम मना नहीं करोगी।

वो बोली- पहले आप दिखाओ उसके बाद मैं इनका औजार अन्दर ले लूंगी . भले ही मुझे कितनी भी तकलीफ़ क्यों ना हो।

भाभी ने मुझसे कहा- देवर जी, शालू ऐसे नहीं मानेगी। अब तुम अपना औजार मेरे अन्दर डाल ही दो।
मैंने कहा- शालू के सामने?
शालू बोली- तो क्या हुआ?
भाभी बोली- जब यह मुझे तुम्हारा औजार अन्दर लेते हुये देखेगी तब ही तो यह तुम्हारा औजार अन्दर लेगी।

कहानी जारी रहेगी.
 
Update - 2
अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी भाभी ने मेरी शादी करवा दी थी, लेकिन मेरे दोस्त की सलाह पर मैंने अपनी सुहागरात पर बीवी की गांड मारने शुरुआत की. मेरी बीवी नादान थी, उसे नहीं मालूम था कि गांड मारना क्या होता है, उसे तो बस इतना बताया गया था कि छेद में औजार घुसेगा, तो दर्द होता है, तुम थोड़ा सहन कर लेना.

इसी के चलते मैंने उसकी गांड में लंड पेलने से शुरुआत की और जब वो दर्द से चिल्लाई, तो मेरी भाभी ने हम दोनों को बाहर बुला कर पूछा. तब भी भाभी को ये नहीं मालूम चल सका था कि मैं अपनी बीवी शालू की गांड में लंड पेल रहा था.
अब आगे:

भाभी ने मुझे समझाते हुए कहा- इस बार बहुत ही धीरे धीरे उसके छेद में घुसाना, नहीं तो मैं बहुत मारूंगी.
मैंने हंस कर कहा- मैं तो बहुत धीरे धीरे ही घुसा रहा था, लेकिन इसका छेद भी बहुत तो छोटा सा है.
भाभी ने कहा- फिर तो ऐसे काम नहीं बनेगा. तुम इसके साथ थोड़ी से जबरदस्ती करना, लेकिन ज्यादा जबरदस्ती मत करना. ये अभी कमसिन उम्र की है, इसलिए इसे ज्यादा दिक्कत हो रही है.
मैंने कहा- ठीक है.

इतना कह कर भाभी मुस्कुराने लगीं.

मैं कमरे में आ गया और मैंने अपनी लुंगी उतार दी. मैंने शालू से अपनी साड़ी उतारने को कहा, तो उसने इस बार खुद ही अपनी साड़ी उतार दी. साड़ी उतारने के बाद शालू खुद ही बेड पर पेट के बल लेट गई.


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मैंने अपने लंड पर ढेर सारा तेल लगाया और उसके ऊपर आ गया. उसके बाद मैंने जैसे ही अपने लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर रखा, उसने अपना मुँह दबा लिया. उसके बाद मैंने थोड़ा सा जोर लगाया, तो इस बार वो ज्यादा जोर से नहीं चीखी. मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में घुस गया. मैंने अपने लंड के सुपारे को उसकी गांड में अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया, तो वो आहें भरने लगी.

थोड़ी देर के बाद जैसे ही मैंने थोड़ा सा और जोर लगाया, तो उसने जोर की आह भरी और इसी के साथ मेरा लंड उसकी गांड में 2″ तक घुस गया. उसकी 'उन्नह . आह..' निकली.

मैंने थोड़ा जोर और लगाया, तो वो जोर जोर से चिल्लाने और रोने लगी. मेरा लंड बहुत मोटा था ही. इसी वजह से अब तक उसकी गांड में मेरा 3″ ही लंड घुस पाया था.

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मैं कुछ देर के लिए रुक गया, लेकिन वो दर्द के मारे अभी भी बहुत जोर जोर से चिल्ला रही थी.
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मुझे गुस्सा आ गया, तो मैंने जोर का एक धक्का लगा दिया. इस धक्के के साथ ही मेरा लंड उसकी गांड में 4″ तक घुस गया.
वो और ज्यादा जोर जोर से चिल्लाने लगी- आह दीदी, मर गई . बचाओ मुझे . मैं मर जाऊंगी.
उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर भाभी ने बाहर से पूछा- अब क्या हुआ?
वो रोते हुए कहने लगी- दीदी, मुझे बचा लो . नहीं तो मैं मर जाऊंगी.
भाभी ने कहा- अच्छा तुम दोनों बाहर आ जाओ.

मैंने अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकाला और हट गया. मेरे लंड पर ढेर सारा खून लगा हुआ था. उसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और बाहर आ गए. शालू ठीक से चल नहीं पा रही थी. मैं उसे सहारा देकर बाहर ले आया.

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बाहर आने के बाद भाभी शालू को समझाने लगीं- देखो शालू, अगर तुम ऐसे ही चिल्लाओगी, तो काम कैसे बनेगा. हर औरत को पहली पहली बार दर्द तो होता ही है और उसे उस दर्द को बर्दाश्त करना पड़ता है.

शालू रो रो कर कहने लगी- दीदी, मैंने अपने आपको सम्भालने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैं दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूँ, इसलिए मेरे मुँह से चीख निकल गई. इनका औजार भी तो बहुत बड़ा है.
भाभी ने कहा- औजार तो सबका बड़ा होता है. लेकिन एक बार जब अन्दर घुस जाता है, फिर कभी भी बड़ा नहीं लगता. उसके बाद हर औरत को मज़ा आता है और तुम्हें भी आएगा.

शालू बोली- दीदी, मेरी बात पर विश्वास करो, इनका औजार बहुत ही बड़ा है. मैंने गांव में बहुत से आदमियों को पेशाब करते समय देखा है, लेकिन इनके जैसा औजार मैंने आज तक कभी नहीं देखा. आप चाहो तो खुद ही देख लो. एक बार आप देखोगी, तो आपको मेरी बात पर विश्वास हो जाएगा.

भाभी ने मुझसे कहा- सूरज, दिखा तो सही अपना औजार . जरा मैं भी तो देखूं कि ये बार बार क्यों तेरे औजार को बहुत बड़ा कह रही है.
मैंने कहा- भाभी, मुझे शर्म आती है.
भाभी ने कहा- मैं तो तेरी भाभी हूँ, मुझसे कैसी शर्म . चल अपना औजार बाहर निकाल कर दिखा मुझे.

मैंने शर्माते हुए अपनी लुंगी खोल दी. मेरा लंड पहले से ही खड़ा था. मेरा 9″ लम्बा और खूब मोटा लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया. उस पर खून भी लगा हुआ था.

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भाभी ने जैसे ही मेरा लंड देखा, तो उन्होंने अपना हाथ मुँह पर रख लिया और बोलीं- बाप रे, तेरा औजार सचमुच बहुत ही बड़ा है. मैंने भी अब तक ऐसा औजार कभी देखा ही नहीं था. अब मेरी समझ में आया कि शालू क्यों इतना चिल्ला रही थी.
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मैंने देखा कि भाभी की आंखें भी मेरे लंड को देख कर गुलाबी सी होने लगी थीं. उन्हें भी जोश आने लगा था, क्योंकि मेरा लंड देखने के बाद उन्होंने अपना एक हाथ अपनी चुत पर रख लिया था.

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मैंने लंड लहराते हुए कहा- भाभी, तुम ही बताओ मैं क्या करूं. मैं अपना औजार छोटा तो नहीं कर सकता.
भाभी ने शालू से कहा- इसका औजार तो सच में बहुत बड़ा है. तुम्हें दर्द को बर्दाश्त करना ही पड़ेगा, नहीं तो बड़ी बदनामी होगी.
भाभी ने शालू को बहुत समझाया, तो वो मान गई.
भाभी ने शालू से कहा- अब तुम अपने कमरे में जाओ. मैं इसे समझा बुझा कर थोड़ी देर में तुम्हारे पास भेज देती हूँ.

शालू कमरे में चली गई.

रात के 2 बज रहे थे. भाभी मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगीं- देवर जी, तुम्हारा औजार तो वाकयी बहुत ही बड़ा है और शानदार भी है. मैंने आज तक अपनी जिन्दगी में ऐसा औजार कभी नहीं देखा था. मेरा मन इसे हाथ में पकड़ कर देखने को कह रहा है . क्या मैं देख लूँ?
मैंने कहा- भाभी, आप ये क्या कह रही हो.
वो बोलीं- तुम्हारे भैया को गुजरे हुए एक साल हो गए. आखिर मैं भी तो औरत हूँ और जवान भी हूँ. मेरा मन भी कभी कभी इधर उधर होने लगता है. तुम तो मेरे देवर हो. हर औरत मजबूत औजार को पसंद करती है. मुझे भी तुम्हारा औजार बहुत ही अच्छा लग रहा है. अगर मैं तुमसे लग जाती हूँ, तो मेरी भी इच्छा पूरी हो जाएगी और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा.

इतना कह कर उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगीं.


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मैं भी आखिर मर्द ही था. मुझे भाभी का लंड सहलाना बहुत अच्छा लगने लगा, इसलिए मैं कुछ नहीं बोला.

थोड़ी देर तक मेरा लंड सहलाने के बाद भाभी बोलीं- तुमने अभी तक सुहागरात का मज़ा भी नहीं लिया है और मैं समझती हूँ कि तुम भी एकदम भूखे होगे. क्या तुम मेरी इच्छा पूरी करोगे?

मैंने कहा- अगर आप कहती हो, तो भला मैं कैसे मना कर सकता हूँ. आखिर मैं भी तो मर्द हूँ और आपके सिवाए मेरा इस दुनिया में और कौन है?
वो बोलीं- फिर तुम यहीं रुको, मैं अभी आती हूँ.

इतना कह कर भाभी शालू के पास चली गईं. उन्होंने शालू से कहा- अब तुम सो जाओ . रात बहुत हो चुकी है. मैं सूरज को सब कुछ समझा दूंगी. उसके बाद मैं उसे सुबह तुम्हारे पास भेज दूंगी. मैं बाहर से दरवाज़ा बंद कर देती हूँ.
शालू बोली- ठीक है, दीदी.

भाभी शालू के कमरे से बाहर आ गईं और उन्होंने शालू के कमरे का दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया. उसके बाद वो मुझे अपने कमरे में ले गईं. मेरे बदन पर कुछ भी नहीं था. लुंगी तो मैंने पहले ही उतार दी थी.

भाभी के कमरे में पहुंचते ही भाभी ने कहा- देवर जी, तुमने अपना औजार इतने दिनों तक कहां छुपा रखा था. बड़ा ही मस्त औजार है तुम्हारा.
मैंने कहा- मैंने कहा छुपाया था, यहीं तो था आपके पास.
वो बोलीं- मेरे पास आओ.

मैं उनके नजदीक चला गया. उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगीं.
भाभी लंड सहलाते हुए कहने लगीं- मैंने आज तक ऐसा औजार कभी नहीं देखा था. हर औरत अच्छा औजार पसंद करती है. मुझे तो तुम्हारा औजार बहुत पसंद आ गया है. आज मैं तुमसे चुद ही जाती हूँ. तुमसे चुदने में मुझे बहुत मज़ा आएगा. लेकिन जैसे तुमने शालू के साथ किया था, उस तरह मेरे साथ मत करना . नहीं तो मुझे भी बहुत तकलीफ़ होगी और मेरे मुँह से भी चीख निकल जाएगी. शालू पास के ही कमरे में है, तुम इसका ख्याल रखना.
मैंने कहा- ठीक है भाभी.

थोड़ी देर तक भाभी मेरा लंड सहलाती रहीं. उसके बाद उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिए और एकदम नंगी हो गईं.

भाभी भी बहुत ही खूबसूरत थीं. भाभी बेड पर चित लेट गईं और बोलीं- अब थोड़ा सा तेल अपने लंड पर लगा लो और आ जाओ.
मैंने कहा- क्या भाभी, आपने तो भैया से बहुत बार चुदवाया है, आप मुझसे तेल लगाने को क्यों कह रही हैं. बिना तेल के ज्यादा मज़ा आएगा.
वो बोलीं- फिर देर किस बात की . आ जाओ.

मैं भाभी के पैरों के बीच आ गया.

भाभी ने कहा- आराम से घुसाना, जल्दी मत करना. जब मैं रोकूं, तो रुक जाना.
मैंने लंड हिलाते हुए भाभी की चूत को देखा और कहा- ठीक है.
वो बोलीं- चलो अब धीरे धीरे अन्दर घुसाओ.

मैंने अपने लंड का सुपारा भाभी की चुत के मुँह पर रख दिया और धीरे धीरे अपना लंड भाभी की चुत में घुसाने लगा.

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जैसे ही मेरे लंड का सुपारा भाभी की चुत में घुसा, तो उनके मुँह से आह निकल गई. उनकी चुत मुझे कुछ ज्यादा ही टाईट लग रही थी. मेरा लंड आसानी से घुस नहीं पा रहा था. मैं जोर लगा कर धीरे धीरे अपना लंड भाभी की चुत में घुसेड़ने लगा. भाभी आहें भरने लगीं.

जब मेरा लंड 5″ तक अन्दर घुस गया, तो दर्द के मारे भाभी का बुरा हाल होने लगा . लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं. उन्होंने अपने होंठों को जोर से जकड़ लिया था.
मैं जोर लगाता रहा. जब मेरा लंड भाभी की चुत में 6″ तक घुस गया, तो वो बोलीं- अब रुक जाओ.
मैं रुक गया.

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भाभी बोलीं- बहुत दर्द हो रहा है. तेरा औजार बहुत मोटा है, अब मुझस बर्दाश्त करना मुश्किल है. अभी कितना बाकी है?
मैंने कहा- अभी तो तीन इंच बाकी है.
भाभी बोलीं- अब और ज्यादा अन्दर मत घुसाना. इतन से ही धीरे धीरे चुदाई करना शुरू कर दो.

मैंने धीरे धीरे भाभी की चुदाई शुरू कर दी. उनकी चुत ने मेरे लंड को बुरी तरह से जकड़ रखा था. वो आहें भरती रहीं. मुझे भी भाभी को चोदने में खूब मज़ा आ रहा था. आज मैं किसी औरत को पहली बार चोद रहा था.

पांच मिनट की चुदाई के बाद भाभी झड़ गईं. उन्होंने बहुत दिनों से चुदवाया नहीं था, इसलिए उनकी चुत से ढेर सारा रस निकला. उनकी चुत और मेरा लंड एकदम गीले हो गए.

अब उन्होंने कहा- अब धीरे धीरे बाकी का भी अन्दर घुसा दो.

मैंने इस बार थोड़ा ज्यादा ही जोर लगा दिया, तो वो अपने आपको रोक नहीं सकीं. उनके मुँह चीख निकल ही गई, लेकिन भाभी ने तुरंत ही खुद को सम्भाल लिया. मैंने इस बार एक धक्का लगा दिया.
तो भाभी दर्द के मारे तड़पने लगीं और बोलीं- अब कितना बचा है?
मैंने कहा- बस एक इंच.
वो बोलीं- अब चोदो मुझे . बाकी का चुदाई करते समय घुसा देना.

मैंने भाभी की चुदाई शुरू कर दी. मुझे खूब मज़ा आ रहा था. भाभी दर्द के मारे आहें भर रही थीं. जैसे जैसे समय गुजरता गया, वो शांत होती चली गईं.

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अब उन्हें भी लंड लेने में मज़ा आने लगा था. तभी मैंने एक धक्का लगा कर बाकी का लंड भी उनकी चुत में घुसा दिया.
वो चीख उठीं और बोलीं- पूरा घुस गया?
मैंने कहा- हां.

वो बोलीं- अब जोर जोर से चोदो. तुम तो गांव में कुश्ती लड़ा करते थे ना.
मैंने कहा- हां.
वो बोलीं- अब तुम मेरी चुत के साथ कुश्ती लड़ो. मेरी चुत को अपने लंड का दुश्मन समझ लो और मेरी चुत पर अपने लंड से खूब जोर जोर से वार करो. फाड़ देना आज इसको.
मैंने कहा- अगर फाड़ दूंगा, तो बाद में मज़ा कैसे आएगा.
वो बोलीं- तुम इसका मतलब नहीं समझे. मैं सचमुच में फाड़ने को थोड़े ही कह रही हूँ. बस तुम तो अपनी पूरी ताकत से मेरी चूत का बैंड बजा दो.

अब मैंने बहुत ही जोर जोर के धक्के लगाते हुए भाभी को चोदना शुरू कर दिया. भाभी तो बहुत ही सेक्सी माल निकलीं. वो हर धक्के के साथ अपने चुतड़ उछाल उछाल कर मुझसे चुदवा रही थीं. पूरा बेड जोर जोर से हिल रहा था. कमरे में धप धप की आवाज हो रही थी. उनकी चुत से भी चप चप की आवाज निकल रही थी.

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मैं भी पूरे जोश में लगा था और वो भी पूरी ताकत से चूत चुदवाने का मजा ले रही थीं. कोई पांच मिनट की चुदाई के बाद वो फिर से झड़ गईं, लेकिन मैं नहीं रुका . मैं खूब जोर जोर के धक्के लगते हुए उनकी चुदाई कर रहा था. वो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थीं और अपनी चुचियों को अपने हाथों से मसल रही थीं.

थोड़ी देर की चुदाई के बाद मैं झड़ गया. भाभी भी मेरे साथ ही साथ फिर से झड़ गईं.


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मैंने अपना लंड उनकी चुत से बाहर निकाला, तो मेरे लंड पर खून भी लगा हुआ था.
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भाभी ने कहा- देख ली तुमने अपने लंड की करतूत. इसने मुझ जैसी चुदी चुदाई औरत की चुत से भी खून निकाल दिया.

उन्होंने मेरे लंड को कपड़े से साफ़ कर दिया. उसके बाद मैं उनके बगल में लेट गया. वो मेरे होंठों को चूमने लगीं.

भाभी बोलीं- देवर जी, आज तो तुमने मुझे ऐसा मज़ा दिया है कि मैं क्या बताऊं. ऐसा मज़ा तो मुझे आज तक कभी नहीं मिला.

मैंने कहा- मैं शालू का क्या करूं?
वो बोलीं- मैंने तुम्हारे भैया से इतने सालों तक चुदवाया था, फिर भी मुझे तुम्हारा लंड अपनी चुत के अन्दर लेने में बहुत तकलीफ़ हुई. फिर शालू तो अभी बहुत छोटी है. जरा सोचो कि उसे कितनी तकलीफ़ होती होगी.

मैंने कहा- तब आप ही बताओ कि मैं क्या करूं. क्या मैं शालू को छोड़ कर केवल आपकी चुदाई ही करूं.
वो बोलीं- मैं ऐसा थोड़े ही कह रही हूँ. अबकी बार जब तुम शालू की चुदाई करना, तो उसके ऊपर जरा सा भी रहम मत करना. वो चाहे कितना भी चीखे या चिल्लाए, तुम अपना पूरा का पूरा लंड अन्दर घुसा देना. उसकी चीख मुझे सुनाई पड़ेगी, लेकिन तुम इसकी परवाह मत करना.
मैंने कहा- ठीक है, मैं ऐसा ही करूंगा.

वो बोलीं- थोड़ी देर आराम कर लो. उसके बाद शालू के पास जाओ. अबकी बार हार नहीं मानना. पूरा का पूरा लंड घुसा देना . भले ही वो कितना भी चीखे या चिल्लाए.
मैंने कहा- मैं ऐसा ही करूंगा.

सुबह के 5 बजने वाले थे. थोड़ी देर भाभी की बांहों में आराम करने के बाद मैं शालू के पास चला गया. शालू सो रही थी. मैंने उसे जगाया, तो वो उठ गई.

मैंने उससे कहा- जाकर तेल की शीशी उठा लाओ और मेरे लंड पर ढेर सारा तेल लगा दो.
वो बोली- मुझे शर्म आती है.
मैंने कहा- अगर तुम मेरे लंड पर तेल नहीं लगाओगी, तो मैं ऐसे ही अपना सूखा लंड तुम्हारे छेद में घुसा दूंगा.
वो बोली- ना बाबा ना . ऐसा मत करना. जब तेल लगाने के बाद इतना दर्द होता है, तो बिना तेल लगाए तुम अपना औजार अन्दर घुसाओगे, तो मैं तो मर ही जाऊंगी. मैं तुम्हारे औजार पर तेल लगा देती हूँ.

इतना कह कर वो उठी. उसने तेल की शीशी से तेल निकाल कर मेरे लंड पर लगा दिया. उसके तेल लगाने से मेरा लंड एकदम सख्त हो गया. उसके बाद वो मेरे कुछ कहे बिना ही पेट के बल लेट गई और बोली- प्लीज़ धीरे धीरे घुसाना.

मैंने इस बार उसकी बात को अनसुना कर दिया. लंड को उसकी गांड में पिरोया और तेल की शीशी से तेल टपकाना शुरू कर दिया. दो बार सुपारा घुस जाने से उसकी गांड खुल सी गई थी. मैंने धीरे धीरे उसकी गांड में लंड पेलना चालू कर दिया. वो चिल्लाने लगी, मगर अब मैं इस खेल को समझ चुका था. मैंने दो इंच लंड घुसेड़ा और उतने लंड से ही उसकी गांड बजाना चालू कर दी. उसको जब राहत सी मिली, तो मैंने फिर तेल डाल कर लंड और अन्दर पेल दिया. इस तरह से मेरा आधा लंड शालू की गांड में पेवस्त हो गया.

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उस दिन मैंने उतने लंड से ही काम चला लिया. दूसरे दिन भी मैंने दिन में चार बार उसकी गांड में लंड पेला.

दो तीन दिन में शालू अपनी गांड मराने में अभ्यस्त हो गई. उसको अभी ये नहीं मालूम था कि कौन सा छेद चुदाई के लिए बना होता है.


भाभी को भी ये नहीं पता था. लेकिन बाद में ये सब मामला खुला, तो भाभी खूब हंसीं और उन्होंने भी मुझसे इसी तरह से अपनी कुंवारी गांड का बाजा बजवा लिया.
 
Update - 5
मैंने भाभी से कहा- तुमने मुझसे शालू के सामने ही चुदवा लिया, वो क्या सोचेगी।
भाभी ने कहा- उसे कुछ भी नहीं मालूम है। अगर उसे कुछ मालूम होता तो भला वो मुझे चुदने को क्यों कहती। चलो अच्छा ही हुआ कि अब मुझे और शालू को एक दूसरे के सामने तुमसे चुदवाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। हमारा रास्ता पूरी तरह से साफ़ हो गया। मैं शालू से भी इस बार में बात कर लूंगी।

मैंने भाभी से पूछा- गाण्ड कब मरवाओगी?
वो मुस्कुराते हुये बोली- क्या मेरी गाण्ड भी फ़ाड़नी है?
मैंने कहा- हां।
वो बोली- कल फ़ाड़ देना।
मैंने कहा- थोड़ा सा आज अन्दर ले लो बाकी का कल अन्दर ले लेना।
वो बोली- जो तेरा जी कहे कर . अब तो मैं तेरी बीवी बन गई हूँ।

मैं भाभी के बगल में लेटा हुआ उनसे बातें करता रहा और उनकी चूत को सहलाता रहा। वो मुझे तरह तरह की स्टाईल में चोदना सिखा रही थी और मेरे लण्ड को भी सहला रही थी।

लगभग 1 घण्टे के बाद मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा।
मैंने भाभी से कहा- शालू ने अभी तक मुझे बुलाया ही नहीं। मैं अब तुम्हारी गाण्ड में ही लण्ड घुसाने की कोशिश करता हूँ।

भाभी और हम दोनों अभी तक नंगे ही थे। मैंने भाभी से घोड़ी बन जाने को कहा तो वो घोड़ी बन गई। मैंने अपने लण्ड का सुपारा उनकी गाण्ड के छेद पर रखा तो वो बोली- तेल तो लगा ले।
मैंने कहा- नहीं ऐसे ही।
वो बोली- फिर तो बहुत दर्द होगा।
मैंने कहा- होने दो। तुम कोई 18 साल की थोड़े ही हो।
वो बोली- ठीक है, जैसी तेरी मरजी।

मैंने अपना लण्ड उनकी चूत में डाल दिया और उनकी चुदाई शुरु कर दी।

5 मिनट में ही भाभी झड़ गई तो मेरा लण्ड गीला हो गया। अब तेल लगने कि जरूरत नहीं थी। मैंने अपने लण्ड का सुपारा उनकी गाण्ड के छेद पर रखा और थोड़ा सा जोर लगाया। भाभी के मुँह से जोर की आह निकाली और मेरे लण्ड का सुपारा उनकी गाण्ड में घुस गया।
मैंने थोड़ा जोर और लगाया तो वो तड़प उठी और बोली- जरा धीरे से।

मैंने फिर से जोर लगाया तो उनके मुँह से चीख निकल गई। मेरा लण्ड भाभी की गाण्ड में अब तक 4″ घुस चुका था। मैंने और ज्यादा अन्दर घुसाने की कोशिश नहीं की। मैंने धीरे धीरे धक्के लगने शुरु कर दिये।
2 मिनट में ही भाभी का दर्द जाता रहा तो वो बोली- थोड़ा और अन्दर कर दे।
मैंने फिर से थोड़ा जोर लगाया तो वो फिर से चीखी और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड में 5″ तक घुस गया।

तभी शालू आ गई, उसने कपड़े नहीं पहने थे, वो एकदम नंगी थी।
उसने हम दोनों को देखा तो बोली- दीदी, तुम भी मज़ा ले रही हो?
भाभी ने कहा- ये तेरा बड़ी देर से इनतजार कर रहा था लेकिन तूने इसे बुलाया ही नहीं। इसे जोश आ गया और उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसाना शुरु कर दिया। मैं इसे मना नहीं कर पाई।

वो बोली- मुझे भी फिर से चुदवाना है।
भाभी ने कहा- तो आ जा।
शालू ने कहा- लेकिन ये तो आपको चोदने जा रहा है।
भाभी ने कहा- मेरा क्या है, मैं तो कभी भी चुदवा लूंगी। पहले तू चुदवा ले। तेरा चुदवाना ज्यादा जरूरी है। मैं तो बहुत मज़ा ले चुकी हूँ।

शालू भाभी के बगल में ही घोड़ी की तरह बन गई। मैंने अपना लण्ड भाभी की गाण्ड से बाहर निकाल कर शालू की गाण्ड में घुसाना शुरु कर दिया। वो दर्द के मारे आहे भरने लगी। धीरे धीरे मेरा पूरा का पूरा लण्ड शालू कि गाण्ड में घुस गया तो मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरु कर दी।

वो बोली- आगे के छेद में घुसा कर चोदो। मुझे उसमें ज्यादा मज़ा आता है।
मैंने कहा- थोड़ी देर पीछे के छेद की चुदाई कर लूं फिर आगे के छेद को भी चोदूंगा।
वो बोली- ठीक है, जैसी तुम्हारी मर्जी।
मैं शालू की गाण्ड मारता रहा।

भाभी शालू से कहने लगी- तू तो जानती है कि सूरज के भैया का स्वर्गवास हुये बहुत दिन हो चुके हैं। मैंने बहुत दिन से चुदवाया नहीं था और मेरी इच्छा भी मर चुकी थी। लेकिन आज मैंने तेरी खुशी के लिये तेरे कहने पर इससे चुदवा लिया। इससे चुदवाने के बाद मेरी चूत और गाण्ड की आग फिर से भड़क गई है। मैं जानती हूँ कि ये बहुत ही गलत बात है लेकिन मैं अब इससे चुदवाये बिना नहीं रह सकती। अगर किसी को ये पता चल गया तो मेरी बड़ी बदनामी होगी। अब तू ही बता कि मैं क्या करूं। मैं तो अब मर जाना चाहती हूँ।

वो बोली- दीदी, तुम ऐसा क्यों कह रही हो? तुम इनसे जी भर कर चुदवाओ और खूब मज़ा लो। मुझे कोई एतराज़ नहीं है। अगर मैं तुम्हें कभी मना करूं तो तुम मुझे ही मार डालना। ये बात किसी को नहीं पता चलेगी।
भाभी ने कहा- फिर तू मेरी कसम खा कर कह दे कि तू कभी भी किसी से नहीं कहेगी।

शालू ने अपना हाथ पीछे करके मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली- मैं तुम्हारी कसम क्यों खांऊ। मैं अपने पति का लण्ड पकड़ कर कसम खाती हूँ कि मैं कभी भी किसी से कुछ भी नहीं कहूँगी। अब तो आप को मेरी बात पर विश्वास हो गया।
भाभी ने कहा- मुझे तुझ पर पूरा विश्वास है।

वो बोली- अब इनसे कह दो कि मेरी चूत में अपना लण्ड डाल कर मेरी चुदाई करें। मुझे गाण्ड मरवाने में ज्यादा मज़ा नहीं आता है।
भाभी ने मुझसे कहा- सुन रहा है ना तू कि शालू क्या कह रही है। अब इसकी इच्छा पूरी कर।

मैंने अपना लण्ड शालू की चूत में घुसा दिया और उसकी चुदाई करने लगा।
दो मिनट में ही वो एकदम मस्त हो गई। उसने पूरी मस्ती के साथ मुझसे चुदवाना शुरु कर दिया। वो तेजी के साथ अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुये मेरा साथ दे रही थी। मैं भी पूरे जोश और ताकत के साथ उसे चोदता रहा।

शालू की चुदाई करते हुये मुझे लगभग 30 मिनट गुजर चुके थे। वो अब तक 3 बार झड़ चुकी थी लेकिन मैं झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।
शालू बोली- दीदी, मैं थक गई हूँ।
भाभी ने कहा- क्यों, मज़ा नहीं आ रहा है क्या?

वो बोली- मज़ा तो बहुत आ रहा है लेकिन अभी मेरी चुदवाने के आदत नहीं है ना।
भाभी बोली- फिर मैं क्या करूं? जब सूरज झड़ जायेगा तब ही तो तुम्हारी चुदाई बंद करेगा।
वो बोली- मुझे थोड़ा सा आराम कर लेने दो। मैं बाद में चुदवा लूंगी।

भाभी ने कहा- जब लण्ड खड़ा हो तो चुदाई नहीं बंद की जाती इससे आदमी के सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
वो बोली- इनसे कह दो कि अब रहने दे। बाद में चोद लेंगे। तब तक तुम ही इनसे चुदवा लो।
भाभी ने कहा- अच्छा बाबा, मैं ही चुदवा लेती हूँ।

मैंने अपना लण्ड शालू की चूत से निकाल कर भाभी की गाण्ड में घुसाना शुरु कर दिया। मेरा लण्ड शालू की चूत के पानी से पहले से ही भीगा हुआ था। धीरे धीरे मेरा लण्ड भाभी की गाण्ड में 5″ तक घुस गया। मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिये।

थोड़ी देर बाद जब मैंने देखा कि भाभी भी मस्ती में आ गई है तो मैंने जोर का धक्का लगा दिया। इस धक्के के साथ ही मेरा लण्ड भाभी की गाण्ड को चीरता हुआ 7″ तक अन्दर घुसा गया।

एक जोर की चीख भाभी के मुँह से निकली तो शालू ने कहा- दीदी, तुम क्यों चीख रही हो? तुम तो चुदवाने कि आदी हो।
भाभी ने कहा- मैंने आज तक इस से गाण्ड नहीं मरवाई थी। तुम तो जानती ही हो कि इसका लण्ड बहुत लम्बा और मोटा है इसीलिये मुझे भी दर्द हो रहा है और मैं चीख रही हूँ। बस अभी थोड़ी ही देर में मेरा दर्द कम हो जायेगा फिर मुझे भी तेरी तरह खूब मज़ा आने लगेगा।

धीरे धीरे भाभी फिर से मस्ती में आ गई। मैंने पूरे ताकत के साथ फिर से जोर का धक्का मारा। वो फिर से चीखी और मेरा लण्ड 8″ तक घुस गया। मैंने फिर एक धक्का मारा तो वो बुरी तरह से चीखने लगी और मेरा पूरा का पूरा लण्ड भाभी की गाण्ड में समा गया।

मैंने तेजी के साथ धक्के लगने शुरु कर दिये। थोड़ी ही देर में भाभी शान्त हो गई और उन्हें मज़ा आने लगा।
तभी शालू बोली- दीदी, अब मैं तैयार हूँ। इनसे कह दो कि अब मुझे चोद दे।
भाभी ने कहा- बार बार मुझसे क्यों कहती है। तू खुद ही इस से कह दे। अब मैं इस से कुछ नहीं कहूँगी।

शालू ने मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली- अब तुम मुझे चोद दो।
मैं खुश हो गया, मैंने अपना लण्ड भाभी की गाण्ड से निकाल कर शालू की चूत में डाल दिया और उसकी चुदाई शुरु कर दी। उसने भी मेरा साथ देना शुरु कर दिया।

15 मिनट कि चुदाई के बाद मैं झड़ गया। शालू भी मेरे साथ ही साथ झड़ गई। जैसे ही मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाला तो उसने मेरा लण्ड चाटना शुरु कर दिया। मैं बहुत खुश हो गया।
भाभी ने शालू से कहा- अब घिन नहीं आ रही है?
वो बोली- बिल्कुल नहीं, अब तो मुझे भी खूब मज़ा आने लगा है।

हम सब नंगे ही सो गये।

रात के 7 बजे शालू मेरा लण्ड सहलाने लगी।
मैं जग गया तो वो बोली- एक बार फिर से चोद दो।
मैंने कहा- क्यों श्रीमती जी, अब चुदवाने में मज़ा आने लगा है?
वो बोली- हां, अब तो मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे सारा दिन चोदते रहो।

उसने कुछ कहे बिना ही मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

तभी भाभी भी उठ गई, भाभी ने मुस्कुराते हुये कहा- शालू, तू इसका लण्ड क्यों चूस रही है?
वो बोली- मुझे चुदवाना है।
भाभी ने शालू से मजाक किया- पहले तो बहुत चिल्ला रही थी, अब क्या हुआ?
वो बोली- पहले मुझे मालूम नहीं था कि इसमें इतना मज़ा आता है।

थोड़ी ही देर में मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैंने शालू की चुदाई शुरु कर दी। उसने पूरी मस्ती के साथ चुदवाया। मैंने भी उसे पूरे जोश के साथ लगभग 20 मिनट तक चोदा। वो इस बार की चुदाई के दौरान 2 बार झड़ चुकी थी।

उसके बाद भाभी और शालू खाना बनने चले गये, मैं टीवी देखने लगा।

लगभग डेढ घन्टा गुजर गया तो शालू किचन से बाहर आई। उसने मुझसे कुछ कहे बिना ही मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
मैंने पूछा- अब क्या हुआ?
वो बोली- चुदवाना है भई।
मैंने कहा- पहले मुझे खाना खा कर थोड़ा आराम कर लेने दो। बहुत थक गया हूँ।
वो बोली- बाद में खा लेना, पहले तुम मुझे एक बार और चोद दो। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

तभी भाभी आ गई, उन्होंने शालू से कहा- सुबह से ही ये हम दोनों को कई बार चोद चुका है। इसे खाना खा कर थोड़ा आराम कर लेने दे, फिर सारी रात खूब जम कर चुदवाना।
वो बोली- दीदी, मुझसे रहा नहीं जा रहा है, मेरा मन अज़ीब सा हो रहा है।
भाभी ने मजाक करते हुये कहा- अगर तू इतना ही तड़प रही है तो चल मेरे साथ किचन में . मैं तेरी चूत में बेलन घुसेड़ देती हूँ।

वो बोली- फिर घुसेड़ दो ना। मैं आप को कुछ भी नहीं कहूँगी। शादी के पहले मैं अच्छी भली थी। शादी के बाद इन्होंने मेरी चुदाई कर के मेरी चूत और गाण्ड में आग सी भर दी है। अब आप ही बताओ कि मैं क्या करूं?
भाभी ने कहा- थोड़ा सब्र करना सीख; आखिर ये भी तो इन्सान है; थक गया है बेचारा।

वो बोली- एक बार ये मुझे और चोद दे। फिर मैं कभी भी इनसे चुदवाने की ज़िद नहीं करूंगी। जब भी मुझे जोश आयेगा मैं इनका लण्ड मुँह में लेकर चूस लूंगी। उसके बाद ये मुझे चोदना चाहें तो चोदेंगे।
मैंने कहा- ठीक है, आ जाओ मेरे पास।

मैं सोफ़े पर बैठा था, शालू के चूसने से मेरा लण्ड खड़ा हो ही चुका था, मैंने उससे कहा- अब तुम खुद ही मेरे लण्ड को अपनी चूत में घुसेड़ लो और धक्के लगओ।
वो तुरन्त ही मेरी जांघो पर बैठ गई और मेरे लण्ड को अपनी चूत के अन्दर घुसेड़ लिया। उसके बाद उसने धक्के लगने शुरु कर दिये।

5 मिनट में ही वो हांफ़ने लगी और बोली- मुझे इस तरह मज़ा नहीं आ रहा है। जब तुम खूब जोर जोर के धक्के लगते हुये मुझे चोदते हो तब ही मुझे मज़ा आता है। चोद दो ना मुझे।
मैंने कहा- अच्छा बाबा, अब तुम मेरे सामने घोड़ी बन जाओ।

वो तुरन्त ही मेरे सामने घो्ड़ी बन गई। उसकी चूत मेरे तरफ़ थी। मैं थोड़ा गुस्से में था। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया और उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया। उसके बाद मैंने बड़ी बेरहमी के साथ उसकी चुदाई शुरु कर दी। भाभी कभी मुझे और कभी शालू को देख रही थी। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं शालू को इतनी बुरी तरह से भी चोद सकता हूँ।

शालू भी बहुत सेक्सी निकली। मैं उसे बहुत ही बुरी तरह से चोद रहा था लेकिन उसे तो इस चुदाई में और ज्यादा मज़ा आ रहा था। वो अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुये पूरी मस्ती के साथ चुदवा रही थी। मैंने उसे लगभग 25 मिनट तक खूब जम कर चोदा। इस बार की चुदाई के दौरान शालू 2-3 बार झड़ गई थी। भाभी और मैं उसे देख कर दंग रह गये। शालू ने मेरे लण्ड को चाट कर साफ़ किया और फिर बाथरूम चली गई।

भाभी ने मुझसे कहा- तुमने उसे उसे इतनी बुरी तरह से चोदा फिर भी उसे मज़ा आ रहा था। वो तो मुझसे भी ज्यादा सेक्सी है।

मैंने कहा- अभी वो नई है इसलिये और उसे ज्यादा जोश आ रहा है। अभी तो उसने ज्यादा बार चुदवाया ही कहां है। केवल कुछ दिन आप मुझसे मत चुदवाओ। मुझे केवल शालू की चुदाई करने दो। मैं उसे इतनी ज्यादा बार और इतनी बुरी तरह से चोदूंगा कि उसकी चूत और गाण्ड की आग ठण्डी हो जायेगी। वो मुझसे रो रो कर कहेगी कि मुझे अब मत चोदो।
भाभी ने कहा- ठीक है।

तभी शालू बाथरूम से वापस आ गई और बोली- देवर भाभी क्या बातें कर रहे हो?
भाभी ने शालू से कहा- मैं इसे समझा रही थी कि ये कुछ दिन तक मेरी चुदाई ना करे, खूब जम कर केवल तुम्हारी चुदाई ही करे।
शालू बोली- आपने तो मेरे मुँह की बात छीन ली, मैं भी यही चाहती थी।

भाभी ने कहा- मैं समझ सकती हूँ क्यों कि अभी तुम नई नई हो और तुम्हारे अन्दर जोश का ज्वालामुखी फूट रहा है। ये तुम्हारे चूत के ज्वालामुखी को अपने लण्ड के पानी से बुझा देगा उसके बाद मैं भी चुदवाना शुरु कर दूंगी।
शालू बोली- दीदी, तुम एकदम ठीक कह रही हो।

अगले 4 दिन तक भाभी तड़पती रही, उनका चेहरा एकदम उदास हो गया था। मैं केवल शालू की ही चुदाई करता रहा। शालू को चुदवाने में ही ज्यादा मज़ा आता था। मैंने भी शालू की खूब जम कर चुदाई की। उसने भी पूरी मस्ती के साथ मेरा साथ दिया और खूब जम कर चुदवाया।

मैंने इन 4 दिनों में उसे लगभग 30 बार बहुत ही बुरी तरह से चोदा था। उसकी चूत का मुँह एकदम चौड़ा हो चुका था। अब उसका जोश कुछ ठण्डा पड़ चुका था। अब तो वो कभी कभी चुदवाने से इन्कार भी करने लगी थी।

शालू की विदाई भी होने वाली थी; उसे 1 महीने के लिये मायके जाना था। पांच दिन गुजर जने के बाद वो मायके चली गई। मायके जाते समय वो मुझसे लिपट कर बहुत रोई।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
उसने कहा- 1 महीने तक मैं बिना चुदवाये कैसे रहूँगी?
मैंने कहा- तुम्हे इतना सब्र तो करना ही पड़ेगा। सभी औरतो को शादी के बाद मायके तो जाना ही पड़ता है।

वो मायके चली गई।
उसके जाने के बाद भाभी मुझसे लिपट गई और फूट फूट कर रोने लगी।
मैंने पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोली- तुम्हारे भैया के स्वर्गवास हो जने के बाद मेरा जोश एकदम ठण्डा हो गया था। मैं तुम्हारे साथ अकेली ही रहने लगी थी लेकिन मैंने कभी भी तुम्हे बुरी नज़र से नहीं देखा। मैं आराम से रहने लगी थी। तुम्हारा लण्ड देखने के बाद मुझे जोश आ गया और मैंने तुमसे चुदवा लिया। शालू को गाण्ड मरवाते हुये देख कर मैंने तुमसे गाण्ड भी मरवा ली। उसमें भी मुझे बहुत मज़ा आया। तुमने मेरी चुदाई कर के और मेरी गाण्ड मार कर मेरे सारे बदन में आग लगा दी है। पांच दिनों से तुमने मुझे चोदा नहीं और ना ही मेरी गाण्ड मारी। मैंने ये 5 दिन कैसे गुजारे हैं, मैं ही जानती हूँ। शालू तो अब 1 महीने के लिये मायके चली गई है। अब तुम मेरी चूत और गाण्ड की आग को पूरी तरह से बुझा दो।

मैंने कहा- भाभी, मैंने तो इन्कार नहीं किया है।
वो बोली- तुमने ऑफ़िस से शादी के लिये 7 दिन की छुट्टी ली थी। तुम 7 दिन की छुट्टी और ले लो; फिर मुझे 7 दिनो तक खूब जम कर चोदो। मुझे उसी तरह से चोदना जैसे कि उस दिन तुमने गुस्से में शालू को चोदा था।
मैंने कहा- तुम जैसा कहोगी मैं तुम्हे वैसे ही चोदूंगा। मैं तुम्हे पूरी तरह से संतुष्ट कर दूंगा।

भाभी ने सारे कपड़े उतार दिये और एकदम नंगी हो गई। उन्होंने मेरा लण्ड चूसना शुरु कर दिया। दो मिनट में ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया तो मैंने ठीक उसी ताह से भाभी को चोदना शुरु किया जैसे मैंने शालू को गुस्से में चोदा था। उस तरह की चुदाई से भाभी एकदम मस्त हो गई।

7 दिन तक मैं ऑफ़िस नहीं गया। मैंने इन 7 दिनों में सारा दिन और सारी रात भाभी की खूब जम कर चुदाई की। उसके बाद भी शालू के आने तक मैंने उन्हें खूब चोदा। भाभी की चूत की आग भी कुछ हद तक बुझ चुकी थी।

शालू के वापस आ जाने के बाद मैं उन दोनों की चुदाई करने लगा। अब वो दोनों ही मुझसे चुदवा कर पूरी तरह से खुश हैं और मैं भी।

समाप्त
 
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