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और वो मुझसे चुदने चली आई

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Antarvasna, hindi sex story: मैं बस स्टॉप पर अपनी बस का इंतजार कर रहा था तभी बस भी आ गई शाम के वक्त काफी भीड़ थी क्योंकि सब लोग अपने ऑफिस से घर की तरफ जा रहे थे। जैसे तैसे मैं बस में तो घुस गया लेकिन उसके लिए भी मुझे काफी जद्दोजहद करनी पड़ी और काफी मशक्कत के बाद मैं अच्छे से अपनी जगह पर खड़ा हो पाया था। कंडक्टर ने कहा लाओ भैया पैसे दो तो मैंने अपनी जेब से 20 का नोट निकालकर उन्हें दिया और उन्होंने भी मुझे 7 रुपये वापस कर दिए। मैं कुछ देर बाद घर पहुंचा तो वहां पर मेरी मौसी आई हुई थी मेरी मौसी मुझे कहने लगी बेटा तुम ऑफिस से आ गए। मैंने अपनी मौसी से कहा हां मौसी मैं ऑफिस से अभी लौट रहा हूं, मेरी मौसी के आने से मुझे इस बात का अंदेशा तो हो चुका था कि जरूर कुछ गड़बड़ होने वाली है।

मैं अपने घर में बैठा था मेरी मां मेरे पास आई और कहने लगी तुम्हारी मौसी कह रही थी कि वह सोच रही है कि तुम कुछ दिनों के लिए उनके घर पर रहो। मैंने मां से कहा लेकिन मां मैं वहां पर क्यों रहूंगा मां कहने लगी तुम्हारी मौसी अहमदाबाद जा रही हैं वहां से वह एक महीने बाद लौटेगी और घर को ऐसे ही छोड़ना उचित नहीं है। मैंने मौसी से कहा मौसी आप घर में ताला लगा लीजिए ना तो मौसी मुझे मुस्कुरा कर कहने लगी बेटा मैं घर में ताला तो लगा दुंगी लेकिन कुछ ही दिनों पहले हमारे पड़ोस में चोरी हो गई थी इसलिए मैं नहीं चाहती कि मैं भी कुछ ऐसा ही जोखिम उठाऊं मैं अपने आस-पड़ोस में किसी पर भी भरोसा नहीं करती। मेरे पास भी अब हां कहने के अलावा कोई रास्ता ही नहीं था मैंने हां कह दिया और कहा कि ठीक है मौसी आप मुझे चाबी दे दीजिएगा। मेरे लिए तो यह बड़ी परेशानी का सबक बनने वाला था एक तो ऑफिस और ऊपर से खाना भी नसीब ना हो तो वह और मुसीबत। अब मौसी के घर पर मुझे रहना था तो खाना भी खुद ही बनाना था और मुझे खाना बनाने में बड़ी परेशानी होती है। मौसी के दोनों बेटे अहमदाबाद में रहते हैं और वह लोग वहीं सेटल हो चुके हैं मौसी ने अपने घर पर किराएदार को रखा है लेकिन उनके साथ भी मौसी की कुछ अच्छी बनती नहीं है वह लोग मौसी को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं।

मैं एक बार मौसी के घर पर गया था तो वहां पर वह अपने किराएदारो से बिल्कुल गलत तरीके से पेश आ रही थी जिस वजह से वह लोग भी अब उनकी इज्जत नहीं करते हैं। मैंने मौसी से घर की चाबी ले ली थी और फिर मौसी अहमदाबाद चली गई अब मैं मौसी के घर पर ही रहने वाला था मेरी मौसी का घर हमारे घर से करीब 15 किलोमीटर दूर है इसलिए मुझे ही घर की सारी जिम्मेदारी संभालनी थी। मैं ऑफिस से सीधा ही उनके घर चला जाया करता मेरी मां मुझे फोन कर के कहती कि बेटा खाने में कोई समस्या तो नहीं है। मैं अपनी मां से कहता की माँ आपको मालूम ही है ना कि मुझे खाना बनाना नहीं आता लेकिन मौसी की बात को मैं मना भी नहीं कर सकता था इसलिए तो मुझे मौसी के घर की जिम्मेदारी को संभालना पड़ रहा है। मां कहने लगी बेटा कोई बात नहीं तुम घर की जिम्मेदारी को संभाल लो मौसी भी तो आखिर मुझे कितना मानती है। मैंने मां से कहा मां ठीक है अभी मैं फोन रखता हूं मुझे खाना बनाने दो, मैं खाना बना रहा था लेकिन मुझसे खाना अच्छे से बना ही नहीं और आखिरकार मुझे वही खाना खाना पड़ा। जब अगले दिन मैं ऑफिस के लिए निकला तो मेरे पेट में गड़बड़ शुरू हो गई मुझे क्लीनिक में जाकर दवाई लेनी पड़ी और तब जाकर मुझे थोड़ा राहत मिली। मैंने सोचा मौसी के पड़ोस में ही कोई टिफिन बनाने वाला होगा तो उससे टिफिन हीं लगवा लेता हूं और खोजबीन के बाद मुझे एक टिफिन सर्विस वाले का नंबर मिल गया। जब मुझे उसका नंबर मिला तो मैंने उसे फोन कर के कहा कि मैं आपको एड्रेस दे रहा हूं आप यहां पर टिफिन पहुंचा दीजिएगा। वह मेंरी बात मान गया और उसने उस दिन टिफिन पहुंचा दिया तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे ना जाने कितने दिनों बाद मुझे अच्छा खाना मिल रहा है। मेरे लिए वह खाना भी कम पड़ गया था मौसी का मुझे फोन आया तो वह कहने लगी बेटा कोई दिक्कत तो नहीं हो रही।

मैंने मौसी से कहा नहीं मौसी कोई समस्या नहीं है मौसी कहने लगी बेटा मैं थोडे दिन रुक कर ही आऊंगी मैंने मौसी से कहा कोई बात नहीं मैं घर की सारी जिम्मेदारी संभाल लूंगा आप चिंता ना करें। मौसी भी मेरी तारीफों के पुल बांधने लगी और कहने लगी कि तुम नहीं होते तो घर की कौन जिम्मेदारी संभालता मुझे तो किसी पर भी भरोसा नहीं है। मैंने मौसी से कहा मौसी यह बात जाने दो और वैसे भी आपने मुझे कह दिया था तो भला मैं कैसे आपको मना कर सकता था। उसके बाद मैं सुबह अपने ऑफिस जाता और शाम को थक कर घर लौटता तो टिफिन सर्विस वाला बिल्कुल सही समय पर टिफिन रख दिया करता था। यह सिलसिला करीब 15 दिन तक चला और 15 दिन बाद मुझे मौसी का फोन आया और वह कहने लगी बेटा मेरी तबीयत ठीक नहीं है मैं अस्पताल में हूँ तो मुझे कुछ दिन और आने में लगेंगे। मैंने मौसी से कहा कोई बात नहीं मौसी आप अपनी तबियत का ध्यान रखिए मैंने उनसे कहा वैसे आपको क्या हुआ है। मौसी कहने लगी मेरे कंधे में कुछ दिनों से बड़ा दर्द हो रहा था मैं डॉक्टर के पास गई तो उन्होंने मुझे कहा कि आपके कंधे की हड्डी में दिक्कत है जिसकी वजह से आपके कंधे का ऑपरेशन करना पड़ेगा।

मैंने मौसी से कहा कोई बात नहीं मौसी आप दिखा लीजिए और फिर मैंने फोन रख दिया मेरी मां भी मेरे लिए बहुत चिंतित रहती थी। मेरी मां कहने लगी बेटा कल तुम घर पर आ जाना मैंने मां से कहा कि हां मां वैसे भी मेरी छुट्टी है तो मैं सुबह घर पर आ जाऊंगा। सुबह होते ही मैं अपने घर पर गया जब मैने मां के हाथ के बने हुए खाने को खाया तो ऐसा लगा जैसे सदियों बाद कोई अच्छा खाना मिल रहा हो। मैं मां से कहने लगा मां मेरा मन तो मौसी के घर रहने का नहीं है लेकिन यह मजबूरी ही है कि मौसी के घर पर रहना पड़ रहा है। मेरी मां मुझे कहने लगी बेटा बस कुछ दिनों की ही तो बात है फिर तो तुम घर ही आ जाओगे और मौसी भी आने वाली होंगी मैंने मां से कहा कि मौसी के कंधे का ऑपरेशन हो रहा है जिस वजह से वह कुछ दिनों बाद ही लौटेंगी। मां कहने लगी हां तुम्हारी मौसी का मुझे फोन तो आया था वह मुझे कह रही थी कि दीदी मुझे आने में कुछ समय लग जाएगा चलो मैं आज रात को ही तुम्हारी मौसी को फोन करती हूं। उस दिन तो मेरा समय अपने घर पर बड़ा ही अच्छा रहा अगले दिन सुबह मैं अपने घर से ही अपने ऑफिस के लिए निकल गया। शाम को मेरा मन मौसी के घर जाने का नहीं हो रहा था परंतु मेरी मजबूरी थी कि मुझे वहां जाना था फिर मैं ऑफिस से ही मौसी के घर चला गया। मैं अपनी मौसी के घर पहुंचा तो वहां पर उनके जो किराएदार रहते हैं उनके घर पर एक लड़की आई हुई थी उसे देखकर मैं उसे नैन मटक्का करने की कोशिश करने लगा आखिरकार मुझे उसका नाम मालूम पडा उसका नाम काजल है। काजल को देखकर में अपने अंदर की भावना को ना रोक सका और मैंने काजल को अपने पास बुला लिया वह भी आ गई। जब वह आई तो मैंने उसे अपनी बाहों में भरने की कोशिश की लेकिन वह तो मेरे हाथों से निकल गई। मुझे लगा शायद उसे अच्छा नहीं लगा इसलिए वह चली गई परंतु मुझे नहीं मालूम था कि उसके दिल में भी आग लगी हुई है।

वह मेरे पास एक रात अपने आप ही चली आई मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरी झोली में बिन बोले ही कुछ गिर गया हो। जब वह मेरे पास आई तो वह कहने लगी उस दिन मेरा सेक्स करने का बिल्कुल मन नहीं था लेकिन आज मेरी बहुत इच्छा हो रही थी तो मैं तुम्हारे पास चली आई। मौसी के यहां जो किराएदार रहते हैं वह उन भाभी की छोटी बहन है लेकिन दिखने में किसी हीरोइन से कम नहीं थी। काजल मेरे पास आकर बैठी तो मैंने उसकी जांघों को सहलाना शुरू किया जब मैं उसकी जांघ को सहलाता तो वह मेरी तरफ अपनी प्यास नजरों से देखने लगी आखिरकार मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसे मैंने अपना बना ही लिया। मैंने उसके पतले और गुलाबी होठों को जब अपने होठों से टकराना शुरू किया तो वह उत्तेजित हो गई और। मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था उसकी उत्तेजना पूरे चरम सीमा पर थी और जिस प्रकार से उसने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया तो उससे मुझे बड़ा मजा आने लगा।

मैं काजल से कहने लगा तुम ऐसे ही मेरे लंड को अपने मुंह में लेती रहो तो वह बड़े अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले रही थी और उसे चूसकर उसने बुरा हाल कर दिया था। मेरा लंड पूरी तरीके से खड़ा हो चुका था। पूरी चरम सीमा पर हम दोनों पहुंच चुके थे मैंने भी काजल की योनि पर जैसे ही अपने मोटे लंड को सटाया तो उसकी योनि से बाहर निकलता हुआ पानी बहुत ज्यादा गरम था। मैंने भी अपने मोटे लंड को उसकी चूत के अंदर धक्का देते हुए घुसा दिया और जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर घुसाया तो वह चिल्लाने लगी और उसके मुंह से बड़ी तेज चीख निकली। उसी के साथ मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर जा चुका था। वह अपने पैरों को चौड़ा करने लगी जिस गति से मैं उसे धक्के मारता तो वह पूरी तरीके से बेचैन हो गई थी। मैं भी पूरे मजे में आ गया मैंने उसे बड़ी तेज गति से धक्का मारने शुरू कर दिया। वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा मजा आ रहा है हम दोनों के अंदर से गर्मी इतनी ज्यादा बढने लगी थी हम दोनों एक दूसरे के बदन को बिल्कुल ना झेल सके और मैंने अपने वीर्य को काजल की योनि के अंदर गिरा दिया। अब मुझे लग रहा था कि मुझे मौसी के साथ ही रहना चाहिए।
 
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