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रजिया आईने में अपने बाल सँवार रही थी। अमन उसे पीछे से चिपक जाता है-“मुआह्म्मह… तू खुले बालों में बहुत अच्छी लगती है…”
रजिया-“अच्छा…” और वो बाल सँवारते हुए जूड़ा बांधने के बजाए खुला ही रख देती है-“जैसा आप कहें मालिक…” और दोनों एक दूसरे की बाँहों में मुस्कुराने लगते हैं।
अमन रजिया की होंठ पे किस करके-“एक बात बता… तुझे कैसे पता चला कि तू प्रेगनेंट है?”
रजिया मुस्कुराते हुए-“अरे बाबा, जब हम शिमला पहुँचे उसके दो दिन बाद ही मेरी एम॰सी॰ पीरियड की डेट थी, पर पीररयड्स तो आए ही नहीं। मैंने और 5 दिन इंतजार किया, क्योंकी कभी-कभी लेट हो जाती है। पर जब 5 दिन भी नहीं आए तो मैं समझ गयी कि आपका बोया हुआ बीज पौधा बनना चाहता है…”
अमन रजिया के होंठ जोर से चूमते हुए-“मेरे जान, अब तो तेरा और खयाल रखना पड़ेगा। मैंने सुना है कि जब औरत प्रेग्गनेंट होती है, तो उसे रोज चोदना चाहिए, ऐसा क्यूँ?
रजिया अमन के सीने पे काटते हुए-“क्योंकी उससे चूत चिकनी रहती है, और डिलेवरी में भी आसानी होती है…”
अमन का दिल जोर से रजिया को चोदने का कर रहा था। अमन ने एक बात नोटिस किया था खुद को लेकर कि उसे एक रात में दो औरतें चाहिए चोदने के लिये, तभी उसका लण्ड ठंडा पड़ता है।
वो अनुम को आवाज़ देता है।
रजिया-“वो सो गई है, उसे एम॰सी॰ पीरियड शुरू हो गये हैं रात से। उसे सोने दो, 7 दिन तक वहाँ नो एंट्री है…”
अमन रजिया की साड़ी खोलते हुए-“और यहाँ?” अमन रजिया को पूरी नंगी कर देता है, और उसके निपल्स को मुँह में लेकर चूसने लगता है।
रजिया अपने हाथों से निचोड़-निचोड़ के अमन के मुँह में चुचियाँ डालने लगती है। वो पूरे जोश में थी। अमन के लण्ड से चुदना उसका शौक नहीं, उसे इसकी आदत सी हो गई थी। और एक बार औरत को जिस चीज़ की आदत हो जाती है, वो उसे किसी भी कीमत पे चाहिए।
रजिया अमन के मुँह से अपनी चुचियाँ निकालकर नीचे बैठ जाती है, और अमन की पैंट उतार देती है। अमन का लण्ड उसके मुँह के सामने आ जाता है, जिसे वो बड़े चाओ के साथ चाट-चाटकर मुँह में गटकने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प उंह्म्मह…” वो किसी रंडी की तरह नीचे अपने पैर खोलकर बैठी थी, जैसे पेशाब करने बैठी हो-“गलप्प्प उंह्म्मह… ओह्म्मह… अह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प…” वो अपनी चूत को एक हाथ से सहलाये जा रही थी।
अमन-“अह्म्मह… रजिया तुझे कितनी बार कहा है कि आराम से किया कर अह्म्मह… साली सुनती नहीं अह्म्मह…”
रजिया-“उंह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प… मुझे मुँह में लेने के बाद कुछ भी समझ में नहीं आता गलप्प्प-गलप्प्प…”
अमन उसके बाल पकड़कर उसे बेड पे पटक देता है, और बिना देर किए उसके ऊपर चढ़ जाता है। रजिया हाँफ रही थी और दोनों हाथों में अमन के लण्ड को लिये मसल रही थी-“अह्म्मह… डालो ना जल्दी अह्म्मह…”
अमन-क्या मेरी जान?
रजिया-ईई।
अमन-मुँह से बोल साली, क्या चाहिए?
रजिया-“आपका लौड़ा मेरे चूत में अह्म्मह… अह्म्मह…”
उसके मुँह से अल्फ़ाज़ पूरे भी नहीं हुए थे कि अमन का लण्ड उसकी चूत के दीजारों को चीरता हुआ अंदर जा चुका था-अह्म्मह… स्शह… ऐसे ना रजिया… ऐसे ना अह्म्मह… अह्म्मह… ले मेरी जान अह्म्मह…”
रजिया-“हाँ हाँ ऐसे… आराम से… सुनिए रोज-रोज चोदने से हमारे बेबी को कुछ होगा तो नही ना? अह्म्मह… उंह्म्मह…”
अमन-“कुछ नहीं होगा। तुझे रोज चोदने से हमारा बेबी एकदम मोटा होगा… तुझे रोज चाहिए ना रजिया अह्म्मह…”
रजिया-“हाँ रोज, दिन रात… ऐसे ही… मेरी चूत में डालकर रखो… चोदते रहो अपनी रजिया को उंह्म्मह… ओह्म्मह… आह्म्मह… आह्म्मह… आह्म्मह…”
ये चुदाई तकरीबन आधी रात तक ऐसे ही चलती रही। अमन ने रजिया की चूत को पूरी तरह खोलकर रख दिया था। उसकी गाण्ड का सुराख और चूत के सुराख के बीच बहुत काम गैप था, जिससे अमन कभी उसकी चूत में लण्ड डालकर चोदता, तो कभी गाण्ड मारने लगता।
ये रजिया का ही कहना था कि उसे गाण्ड में लौड़ा बहुत अच्छा लगता है। इसीलिये अमन रात में उसकी गाण्ड एक बार ज़रूर मारता था। जब वो दोनों एक दूसरे की बाँहों में नंगे पड़े थे।
तब रजिया ने कहा-“सुनो कुछ दिनों में ख़ान यहाँ आ जायेगा, तब आप कैसे मुझे चोदोगे?”
अमन-“वही अपना पुराना फामू़ला-नींद की गोलियाँ…”
रजिया मुस्कुराते हुए-“ह्म्मम्म्म्मम…”
अमन-तुझे ख़ान ने चोदा है क्या ऐसे में?
रजिया-नहीं, जबसे वो आया था एक बार भी नहीं।
अमन-“तो तू क्या कहेगी उसे कि प्रेग्गनेंट कैसे हुई? वो तो तुझे जान से मार देगा…”
रजिया-आह्म्मह… ये आप मुझपे छोड़ दो। मैं एक औरत हूँ और मुझे अच्छी तरह पता है कि ये बात कैसे करनी है…”
फिर रजिया दिल में सोचने लगती है-“एक दो बार ख़ान का लण्ड चूत में लेना होगा और पानी चूत में गिराना होगा। उसके कुछ दिन बाद कह दूंगी कि आपके चोदने से मैं प्रेग्गनेंट हो गई हूँ। वो तो समझेगा कि उसने बीज बोया है। पर उसे क्या पता कि इस ज़मीन में पहले से ही अमन ने अपना बीज बो भी दिया है। और वो बीज कोंपल भी बन चुका है।
अमन-क्या हुआ, क्या सोच रही है?
रजिया-यही कि अब आप मेरी चूत मारोगे या गाण्ड?
अमन-“हाहाहाहा… साली तू वो कहेगी वो?”
रजिया-“मैं तो पूरी की पूरी आपकी हूँ, वहाँ चाहिए वहाँ डालो…” और अमन उसकी गाण्ड पेलने लगता है।
सुबह 10:00 बजे-
अमन फैक्टरी के लिये निकल जाता है। जब वो फैक्टरी पहुँचता है तो उसे केबिन में महक उसका बेसबरी से इंतजार करते हुए मिलती है।
महक उसे अपने सीने से लगा लेती है-“ऊऊऊऊ अमन, तुम मेरी उस बात का इतना बुरा मान गये कि मुझसे बात तक नहीं किया। तुम जानते हो मैंने तुम्हें कितना मिस किया?
अमन-“रियली आई मिस यू टू महक। अगर मुझे अर्जेंट शिमला जाना नहीं होता तो मैं तुम्हें ज़रूर इनफॉर्म करता।
महक-“जानती हूँ अमन, बैठो…” और वो अमन से अलग होकर उसे सोफे पे बैठा देती है-“तुम आज दिन भर मेरे साथ रहोगे, और रात में तुम मेरे साथ घर चलोगे। मेरी पार्टी तुम्हारे बिना अधूरी है, और मुझे तुम्हारे साथ केक भी तो काटना है…”
अमन-“ओके, जैसा तुम कहो…”
महक-“पर पहले हम जाएंगे ड्राइविंग सीखने…”
अमन-“ओके, आज तो तुम्हारा बर्थ-डे है ना? और बर्थ-डे वाले दिन बर्थ-डे गर्ल की बात कोई टाल सकता है क्या?” और दोनों ड्राइविंग के लिये निकल जाते हैं।
उसे सुनसान रोड पे वहाँ कोई नहीं होता। आज महक कुछ ज्यादा ही चहक रही थी। शायद 7 दिनों की दूरी ने उसकी चूत की आग को इस हद तक बढ़ा दिया था कि वो अमन से चुदना चाहती थी। इसीलिये तो वो बार-बार अमन के पैर को अपने पैर से छूती जाती है।
अमन उसके साथ हँस-हँस के बातें करने लगता है। जब वो उस रोड पे पहुँच जाती है, वहाँ महक ड्राइविंग करती थ। महक नीचे उतरकर ड्राइविंग सीट की तरफ आ जाती है। और जल्दी से अमन की गोद में उछलकरके बैठ जाती है। वो अपनी पीठ अमन के सीने से लगाकर ड्राइविंग करने लगती है।
अमन-“अरे वाह… तुम तो काफी अच्छी ड्राइविंग कर रही हो। मेरे पीछे लगता है कि तुमने काफी प्रेक्टिस की है…”
महक-“हाँ बोर हो जाती थे तो आ जाया करती थे यहाँ ड्राइविंग करने…” अचानक वो जोर से ब्रेक मारती है। जिससे अमन उसे पकड़ लेता है, और अपने दोनों हाथ उसकी चुचियाँ पे रख देता है।
अमन-आराम से चलाओ बाबा।
महक-हुन्न्णन्।
अमन उसकी नरम-नरम चुचियाँ मसलने लगता है।
महक-“उंह्म्मह… क्या कर रहे हो अमन?”
अमन-कुछ भी तो नहीं।
महक-मुझे पता है कि तुम क्या कर रहे हो?
अमन-क्या?
महक-मुझे मसल रहे हो।
अमन-क्यूँ तुझे बुरा लगा?
महक-नहीं।
अमन जोर से चुचियाँ मसलने लगता है।
महक-“उंह्म्मह… दर्द होता है ना…”
अमन-मसलूं नहीं क्या फिर?
महक उसके हाथ पे अपने हाथ रखकर कार के ब्रेक लगा देती है। और उसके हाथों को अपने हाथों से दबाने लगती है-“अह्म्मह… हाँ मत मसलो अह्म्मह…”
अमन उसकी गर्दन मोड़कर अपनी तरफ कर लेता है। दोनों की नज़रें एक दूसरे को देखने लगती हैं-“आई लव यू महक…”
महक-“आई लव यू टू अमन…”
पहले उनके होंठ मिलते हैं, उसके बाद जीभ। दोनों एक दूसरे का सलाइवा चाट-चाटकर किसिंग करने लगते हैं। दोनों इस खेल में मास्टर थे। अमन जानता था औरत को कैसे बस में किया जाए। वो किसिंग करते-करते महक के पैर खोलकर अपना हाथ उसकी चूत पे रख देता है, और उसे भी मसलने लगता है।
महक तड़प जाती है, और अपनी जीभ अमन के मुँह के और अंदर डालकर चूसने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प उंह्म्मह…” वो इतने जोश में थी कि उसे होश ही नहीं रहा कि अमन ने कब उसकी शलवार का नाड़ा खोला और कब अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल चुका था।
रजिया-“अच्छा…” और वो बाल सँवारते हुए जूड़ा बांधने के बजाए खुला ही रख देती है-“जैसा आप कहें मालिक…” और दोनों एक दूसरे की बाँहों में मुस्कुराने लगते हैं।
अमन रजिया की होंठ पे किस करके-“एक बात बता… तुझे कैसे पता चला कि तू प्रेगनेंट है?”
रजिया मुस्कुराते हुए-“अरे बाबा, जब हम शिमला पहुँचे उसके दो दिन बाद ही मेरी एम॰सी॰ पीरियड की डेट थी, पर पीररयड्स तो आए ही नहीं। मैंने और 5 दिन इंतजार किया, क्योंकी कभी-कभी लेट हो जाती है। पर जब 5 दिन भी नहीं आए तो मैं समझ गयी कि आपका बोया हुआ बीज पौधा बनना चाहता है…”
अमन रजिया के होंठ जोर से चूमते हुए-“मेरे जान, अब तो तेरा और खयाल रखना पड़ेगा। मैंने सुना है कि जब औरत प्रेग्गनेंट होती है, तो उसे रोज चोदना चाहिए, ऐसा क्यूँ?
रजिया अमन के सीने पे काटते हुए-“क्योंकी उससे चूत चिकनी रहती है, और डिलेवरी में भी आसानी होती है…”
अमन का दिल जोर से रजिया को चोदने का कर रहा था। अमन ने एक बात नोटिस किया था खुद को लेकर कि उसे एक रात में दो औरतें चाहिए चोदने के लिये, तभी उसका लण्ड ठंडा पड़ता है।
वो अनुम को आवाज़ देता है।
रजिया-“वो सो गई है, उसे एम॰सी॰ पीरियड शुरू हो गये हैं रात से। उसे सोने दो, 7 दिन तक वहाँ नो एंट्री है…”
अमन रजिया की साड़ी खोलते हुए-“और यहाँ?” अमन रजिया को पूरी नंगी कर देता है, और उसके निपल्स को मुँह में लेकर चूसने लगता है।
रजिया अपने हाथों से निचोड़-निचोड़ के अमन के मुँह में चुचियाँ डालने लगती है। वो पूरे जोश में थी। अमन के लण्ड से चुदना उसका शौक नहीं, उसे इसकी आदत सी हो गई थी। और एक बार औरत को जिस चीज़ की आदत हो जाती है, वो उसे किसी भी कीमत पे चाहिए।
रजिया अमन के मुँह से अपनी चुचियाँ निकालकर नीचे बैठ जाती है, और अमन की पैंट उतार देती है। अमन का लण्ड उसके मुँह के सामने आ जाता है, जिसे वो बड़े चाओ के साथ चाट-चाटकर मुँह में गटकने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प उंह्म्मह…” वो किसी रंडी की तरह नीचे अपने पैर खोलकर बैठी थी, जैसे पेशाब करने बैठी हो-“गलप्प्प उंह्म्मह… ओह्म्मह… अह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प…” वो अपनी चूत को एक हाथ से सहलाये जा रही थी।
अमन-“अह्म्मह… रजिया तुझे कितनी बार कहा है कि आराम से किया कर अह्म्मह… साली सुनती नहीं अह्म्मह…”
रजिया-“उंह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प… मुझे मुँह में लेने के बाद कुछ भी समझ में नहीं आता गलप्प्प-गलप्प्प…”
अमन उसके बाल पकड़कर उसे बेड पे पटक देता है, और बिना देर किए उसके ऊपर चढ़ जाता है। रजिया हाँफ रही थी और दोनों हाथों में अमन के लण्ड को लिये मसल रही थी-“अह्म्मह… डालो ना जल्दी अह्म्मह…”
अमन-क्या मेरी जान?
रजिया-ईई।
अमन-मुँह से बोल साली, क्या चाहिए?
रजिया-“आपका लौड़ा मेरे चूत में अह्म्मह… अह्म्मह…”
उसके मुँह से अल्फ़ाज़ पूरे भी नहीं हुए थे कि अमन का लण्ड उसकी चूत के दीजारों को चीरता हुआ अंदर जा चुका था-अह्म्मह… स्शह… ऐसे ना रजिया… ऐसे ना अह्म्मह… अह्म्मह… ले मेरी जान अह्म्मह…”
रजिया-“हाँ हाँ ऐसे… आराम से… सुनिए रोज-रोज चोदने से हमारे बेबी को कुछ होगा तो नही ना? अह्म्मह… उंह्म्मह…”
अमन-“कुछ नहीं होगा। तुझे रोज चोदने से हमारा बेबी एकदम मोटा होगा… तुझे रोज चाहिए ना रजिया अह्म्मह…”
रजिया-“हाँ रोज, दिन रात… ऐसे ही… मेरी चूत में डालकर रखो… चोदते रहो अपनी रजिया को उंह्म्मह… ओह्म्मह… आह्म्मह… आह्म्मह… आह्म्मह…”
ये चुदाई तकरीबन आधी रात तक ऐसे ही चलती रही। अमन ने रजिया की चूत को पूरी तरह खोलकर रख दिया था। उसकी गाण्ड का सुराख और चूत के सुराख के बीच बहुत काम गैप था, जिससे अमन कभी उसकी चूत में लण्ड डालकर चोदता, तो कभी गाण्ड मारने लगता।
ये रजिया का ही कहना था कि उसे गाण्ड में लौड़ा बहुत अच्छा लगता है। इसीलिये अमन रात में उसकी गाण्ड एक बार ज़रूर मारता था। जब वो दोनों एक दूसरे की बाँहों में नंगे पड़े थे।
तब रजिया ने कहा-“सुनो कुछ दिनों में ख़ान यहाँ आ जायेगा, तब आप कैसे मुझे चोदोगे?”
अमन-“वही अपना पुराना फामू़ला-नींद की गोलियाँ…”
रजिया मुस्कुराते हुए-“ह्म्मम्म्म्मम…”
अमन-तुझे ख़ान ने चोदा है क्या ऐसे में?
रजिया-नहीं, जबसे वो आया था एक बार भी नहीं।
अमन-“तो तू क्या कहेगी उसे कि प्रेग्गनेंट कैसे हुई? वो तो तुझे जान से मार देगा…”
रजिया-आह्म्मह… ये आप मुझपे छोड़ दो। मैं एक औरत हूँ और मुझे अच्छी तरह पता है कि ये बात कैसे करनी है…”
फिर रजिया दिल में सोचने लगती है-“एक दो बार ख़ान का लण्ड चूत में लेना होगा और पानी चूत में गिराना होगा। उसके कुछ दिन बाद कह दूंगी कि आपके चोदने से मैं प्रेग्गनेंट हो गई हूँ। वो तो समझेगा कि उसने बीज बोया है। पर उसे क्या पता कि इस ज़मीन में पहले से ही अमन ने अपना बीज बो भी दिया है। और वो बीज कोंपल भी बन चुका है।
अमन-क्या हुआ, क्या सोच रही है?
रजिया-यही कि अब आप मेरी चूत मारोगे या गाण्ड?
अमन-“हाहाहाहा… साली तू वो कहेगी वो?”
रजिया-“मैं तो पूरी की पूरी आपकी हूँ, वहाँ चाहिए वहाँ डालो…” और अमन उसकी गाण्ड पेलने लगता है।
सुबह 10:00 बजे-
अमन फैक्टरी के लिये निकल जाता है। जब वो फैक्टरी पहुँचता है तो उसे केबिन में महक उसका बेसबरी से इंतजार करते हुए मिलती है।
महक उसे अपने सीने से लगा लेती है-“ऊऊऊऊ अमन, तुम मेरी उस बात का इतना बुरा मान गये कि मुझसे बात तक नहीं किया। तुम जानते हो मैंने तुम्हें कितना मिस किया?
अमन-“रियली आई मिस यू टू महक। अगर मुझे अर्जेंट शिमला जाना नहीं होता तो मैं तुम्हें ज़रूर इनफॉर्म करता।
महक-“जानती हूँ अमन, बैठो…” और वो अमन से अलग होकर उसे सोफे पे बैठा देती है-“तुम आज दिन भर मेरे साथ रहोगे, और रात में तुम मेरे साथ घर चलोगे। मेरी पार्टी तुम्हारे बिना अधूरी है, और मुझे तुम्हारे साथ केक भी तो काटना है…”
अमन-“ओके, जैसा तुम कहो…”
महक-“पर पहले हम जाएंगे ड्राइविंग सीखने…”
अमन-“ओके, आज तो तुम्हारा बर्थ-डे है ना? और बर्थ-डे वाले दिन बर्थ-डे गर्ल की बात कोई टाल सकता है क्या?” और दोनों ड्राइविंग के लिये निकल जाते हैं।
उसे सुनसान रोड पे वहाँ कोई नहीं होता। आज महक कुछ ज्यादा ही चहक रही थी। शायद 7 दिनों की दूरी ने उसकी चूत की आग को इस हद तक बढ़ा दिया था कि वो अमन से चुदना चाहती थी। इसीलिये तो वो बार-बार अमन के पैर को अपने पैर से छूती जाती है।
अमन उसके साथ हँस-हँस के बातें करने लगता है। जब वो उस रोड पे पहुँच जाती है, वहाँ महक ड्राइविंग करती थ। महक नीचे उतरकर ड्राइविंग सीट की तरफ आ जाती है। और जल्दी से अमन की गोद में उछलकरके बैठ जाती है। वो अपनी पीठ अमन के सीने से लगाकर ड्राइविंग करने लगती है।
अमन-“अरे वाह… तुम तो काफी अच्छी ड्राइविंग कर रही हो। मेरे पीछे लगता है कि तुमने काफी प्रेक्टिस की है…”
महक-“हाँ बोर हो जाती थे तो आ जाया करती थे यहाँ ड्राइविंग करने…” अचानक वो जोर से ब्रेक मारती है। जिससे अमन उसे पकड़ लेता है, और अपने दोनों हाथ उसकी चुचियाँ पे रख देता है।
अमन-आराम से चलाओ बाबा।
महक-हुन्न्णन्।
अमन उसकी नरम-नरम चुचियाँ मसलने लगता है।
महक-“उंह्म्मह… क्या कर रहे हो अमन?”
अमन-कुछ भी तो नहीं।
महक-मुझे पता है कि तुम क्या कर रहे हो?
अमन-क्या?
महक-मुझे मसल रहे हो।
अमन-क्यूँ तुझे बुरा लगा?
महक-नहीं।
अमन जोर से चुचियाँ मसलने लगता है।
महक-“उंह्म्मह… दर्द होता है ना…”
अमन-मसलूं नहीं क्या फिर?
महक उसके हाथ पे अपने हाथ रखकर कार के ब्रेक लगा देती है। और उसके हाथों को अपने हाथों से दबाने लगती है-“अह्म्मह… हाँ मत मसलो अह्म्मह…”
अमन उसकी गर्दन मोड़कर अपनी तरफ कर लेता है। दोनों की नज़रें एक दूसरे को देखने लगती हैं-“आई लव यू महक…”
महक-“आई लव यू टू अमन…”
पहले उनके होंठ मिलते हैं, उसके बाद जीभ। दोनों एक दूसरे का सलाइवा चाट-चाटकर किसिंग करने लगते हैं। दोनों इस खेल में मास्टर थे। अमन जानता था औरत को कैसे बस में किया जाए। वो किसिंग करते-करते महक के पैर खोलकर अपना हाथ उसकी चूत पे रख देता है, और उसे भी मसलने लगता है।
महक तड़प जाती है, और अपनी जीभ अमन के मुँह के और अंदर डालकर चूसने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प उंह्म्मह…” वो इतने जोश में थी कि उसे होश ही नहीं रहा कि अमन ने कब उसकी शलवार का नाड़ा खोला और कब अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल चुका था।