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अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ complete

***** *****वेलेनटाइन डे

सुबह के 8:00 बजे-

अमन और अनुम नाश्ता कर रहे थे। आज उनका दिल-ओ-दिमाग़ किसी खाने पीने की चीज़ में नहीं था। क्योंकी उन्हें शिमला जाना था और जल्दी जाना था। इसलिये वो जल्दी जल्दी नाश्ता खत्म कर रहे थे।

रजिया-“अनुम, मैं ज़रा रेहाना को बताकर आती हूँ की हम अमन के दोस्त की शादी अटेंड करने शिमला जा रहे हैं, घर का खयाल रखे।

अनुम-“जी अम्मी, जल्दी आइए हम आपका कार में इंतजार कर रहे हैं…”

रजिया रेहाना की तरफ चली जाती है। उसे पता था कि अगर उसने अमन को रेहाना की तरफ भेजा तो वो पहले उससे चुदवाएंगे और फिर शिमला आने की जिद करेंगे। ये रजिया कभी नहीं चाहती थी। रेहाना को इनफाम़ करने के बाद रजिया घर बंद करके कार में आकर बैठ जाती है। वहाँ पहले से अमन और अनुम उसका इंतजार कर रहे थे।

अमन-चलें स्वीट हार्ट?

दोनों औरतें-“चलिये…” और कार अपने स्पीड से शिमला की तरफ रवाना हो जाती हैं।

अनुम-“अम्मी, लाओ आपके हाथों में मेंहदी लगा दूं…” और वो रजिया के हाथों में मेंहदी लगाने लगती हैं।

दो घंटे का सफर था। इस दौरान अनुम पहले रजिया को और फिर खुद के हाथों पैरों में मेंहदी लगा चुकी थी। उसके सारे अरमान आज पूरे होने वाले थे। एक लड़की जब औरत बनती है, तो ये खुशी सिर्फ़ वही जानती हैं,

जिसके साथ ये सब होता है। हम और आप नहीं। शिमला पहुँचकर अमन कार एक ‘लाडली दुल्हन’ नाम की शाप के सामने रोक देता है। इस शाप में शादी की सारे चीज़ें मिलती थीं।

अमन-“तुम दोनों यहीं बैठो, मैं तुम दोनों की चीज़ें लेकर आता हूँ…”

अनुम-मैं चलूं?

रजिया-“नहीं, आज सब इनकी पसंद से होगा यहीं बैठो…”

फिर अमन मुस्कुराते हुए शाप में चला जाता है। करीब एक घंटा बाद वो 5 बैग्गस भरकर वापस आता है। और कार में रख देता है।

अनुम और रजिया एक-एक बैग खोल-खोलकर देखने लगती हैं। रजिया बोली-“सभी चीज़ें बहुत अच्छी हैं। पर आप लहंगा और ब्लाउज लेना भूल गये। सिर्फ़ लाल रंग से साड़ी है, इसमें ना ब्रा है, ना पैंटी…”

अमन-“तुम दोनों को मैं जिस चीज़ में देखना चाहता हूँ, बस वही लाया हूँ। और जैसे भी होटेल के रूम में तुम दोनों ये भी उतारने वाले हो…”

दोनों औरतें बुरी तरह शरमा जाती हैं।

अमन अनुम और रजिया को होटेल के रूम में पहुँचाकर काजी की तरफ चल देता है। अमन शिमला कई बार आ चुका था, इसलिये उसे यहाँ के सारे रोड मालूम थे। वो एक काजी से मिलता है, जिसका नाम मिर्ज़ा असद बेग था।

अमन-“काजी साहब हम लोग बिहार के रहने वाले हैं। हमारे गाँव में बढ़ आ गई थी सभी घर बह गए कई जाने गयीं। हम किसी तरह यहाँ तक पहुँच सके। मेरे साथ मेरी मंगेतर और एक गाँव की औरत है, वो अब बेसहारा है। मैं इन्हें ऐसे अपने साथ नहीं रख सकता, इसलिये मेरा इन दोनों से आप निकाह करवा दें, ताकी मैं इन्हें अपने साथ रख सकूँ…”

उस वक्त बिहार में सच में बाढ़ आई हुई थी।

काजी असद इस बात से बहुत खुश हुए कि अमन एक जिम्मेदार इंसान की तरह रहना चाहता है। वरना आजकल के जमाने में कौन इतनी अच्छी सोच रखता है।

काजी साहब-“ठीक है बेटा चलो…” और काजी साहब अपने साथ दो और आदमियों को लेकर जिनकी निकाह में ज़रूरत पड़नी थी, अमन के साथ होटेल पहुँच जाते हैं।

इधर रजिया बाथरूम में अनुम की चूत के सारे बाल निकालने के बाद उसकी तेल से मालिश करती है।

अनुम-“अम्मी आप भी तैयार हो जाओ, वो लोग आते ही होंगे…”

रजिया अनुम की चिकनी चूत को देखते हुए उसे अपने होंठों से छूना चाहती थी। तभी अनुम रजिया को रोक देती है-“नहीं अम्मी, इसपे सबसे पहला हक उनका है…” और वो रजिया को अपने सीने से चिपका लेती है।

30 मिनट बाद अमन काजी और दो आदमियों के साथ रूम में दाखिल होता है। रजिया और अनुम ने अभी नॉर्मल ड्रेस पहना हुआ था ताकी काजी को शक ना हो जाये।

काजी साहब रजिया और अनुम से निकाहनामे पर दस्तखत लेते हैं, और फिर पहले अनुम से पूछते है-“क्या आपने अमन ख़ान को अपने निकाह में कुबूल किया?”

अनुम की आँखों के सामने अपने बचपन से अब तक का सारा मंज़र कुछ सेकेंड में घूम जाता है। वो धीमी आवाज़ में काजी से कहती है-“कुबूल है…”

उसके बाद रजिया से काजी साहब पूछते हैं-“क्या आपने अमन ख़ान को अपने निकाह में कुबूल किया?”

रजिया-“जी हाँ, कुबूल किया…”

उसके बाद काजी साहब अपनी सारी जरूरी फामेलिटी पूरी करते है। वो अमन से भी अनुम और रजिया को कुबूल करवाते हैं।

और अमन भी खुशी-खुशी दोनों को अपने निकाह में कुबूल कर लेता है।

काजी साहब और वो दोनों आदमी अमन को मुबारकबाद देते हुए चले जाते हैं।

उन दोनों के जाने के बाद अमन रूम का दरवाजा बंद कर देता है। रूम का दरवाजा बंद होते ही अनुम और रजिया भागते हुए आकर अमन से चिपक जाती हैं।

रजिया-“मुबारक हो मेरे सरताज मुआहन्ह…”

अनुम-“मुबारक हो मेरी जान मैं बहुत बहुत-बहुत खुश हूँ आज कि आपने अपना वादा पूरा किया। मैं आज से आपकी हुई मुआह्म्मह…”

अमन दोनों को अपने से कसकर चिपका लेता है। अच्छा सुनो-“अभी रात के 7:00 बज रहे हैं। तुम दोनों तैयार हो जाओ और वो मैं तुम्हारे लिये ड्रेस लाया हूँ, उसे पहन लो और मैं भी फ्रेश हो जाता हूँ…”

अमन-“रजिया, तुझे मैंने वो कहा था याद है ना?”

रजिया-“जी आप बिल्कुल फिकर ना करें…”

और अनुम अपना चेहरा शरमाकर रजिया के सीने में छुपा लेती है। दोनों औरतें एक रूम में चली जाती हैं। रजिया पूरे रूम में स्प्रे मारती है। बेड पे गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछा देती है, और अनुम का हल्का-हल्का मेकअप करती है। उसके बाद वो खुद भी लाल साड़ी पहन लेती है, बिना ब्रा-पैंटी के और लहंगे ब्लाउज के अलाजा सिर्फ़ एक लाल साड़ी अपने जिस्म पे लपेटने में उसे आज एक नया खुशगवार एहसास हो रहा था। उसके जिस्म से बार-बार साड़ी निकल जा रही थी। वो अपने काँपते हाथों से साड़ी पहन ही लेती है।

वो खुद से ज्यादा अनुम को तैयार कर रही थी। वो जानती थी कि ये रात अनुम की जिंदगी की ना भूलने वाले रात बन जाएगी, जिसे वो पूरी तरह खूबसूरत बनाने वाले थे।

अनुम-“अम्मी, मैं कैसी लग रही हूँ?” अनुम खुद को आईने के सामने देखते हुए कहा।

रजिया-“एकदम आसमान की परी जैसे…” अब चलो यहाँ बेड पे बैठ जाओ ऐसे, और वो अनुम को बेड पे बिठा देती है, उसके सर पे घूँघट डाल देती है। फिर खुद भी उसके बगल में घूँघट डालकर बैठ जाती है।

रजिया जोर से आवाज़ लगते हुए-“सुनिये, आप आ जाइए…”

अमन वो उस रूम से अटैच्ड रूम में एक नई नवेली शेरवानी पहने खुद को आईने में देख रहा था, रजिया की आवाज़ से खुश हो जाता है। जाने कितने दिनों से उसके दिल में एक ख्वाइश थी कि वो अपनी अम्मी और बहन को दुल्हन के रूप में एक बेड पे लाल साड़ी पहने घूँघट डाले देखे। आज वो पल आ गया था। वो धड़कते दिल के साथ रूम में दाखिल होता है।

अमन रूम में पहुँचकर दरवाजा बंद कर देता है। आज उसका दिल उसके बस में नहीं था। ऐसा नज़ारा उसकी आँखों ने पहली बार देखा था। एक बेड पे उसकी अपनी सगी अम्मी और बहन उसका बेसबरी से इंतजार कर रही थीं। अमन जाकर बेड पर बैठ जाता है।

 
अनुम का दिल जोरों से धड़क रहा था। वो नहीं जानती थी कि अमन उसके साथ क्या-क्या करने वाला है? वो तो बस अपने दिल की धड़कनों को संभालने की कोशिश में लगी थी।

अचानक अमन उसका घूँघट उठा देता है, और उसका चेहरा ऊपर उठाते हुए-“मेरी तरफ देख अनुम…”

अनुम अपनी पलकें ऊपर उठाती है। सामने अमन का दमकता चेहरा उसे साफ नज़र आ रहा था। अमन के चेहरे पे खुशी, जोश और मोहब्बत के कई असर नज़र आ रहे थे।

अमन अनुम के नाज़ुक होंठों को चूमकर दूर हो जाता है। अभी उसे एक और काम करना था। रजिया उसकी पहले बीवी, वो अनुम की तरह है। उसका बेसबरी से इंतजार कर रही थी। यूँ तो रजिया कई बार अमन से चुद चुकी थी, पर न जाने आज क्यूँ वो खुद को एक नई नवेली दुल्हन की तरह महसूस कर रही थी।

अमन रजिया का भी घूँघट उठा देता है।

दोनों औरतें अमन के चेहरे को देखे जा रही थीं। पूरे माहौल में सिर्फ़ खामोशी पसरी हुई थी। अमन की आवाज़ दोनों को इस दुनियाँ में वापस ले आती है।

अमन अपने कमीज़ उतारने लगता है। जब वो अपनी कमीज़ उतार देता है। तो वो सामने बैठी दोनों दुल्हनों को वो उसे ही देखकर दिल में मुस्कुरा रही थीं, अपने सीने से चिपका लेता है।

अनुम तो जैसे इसी पल के इंतजार में थी। वो अमन से किसी छोटे बच्चे के तरह चिपकी हुई थी। अमन की चौड़ी छाती और उसपे घने बाल उसकी नाज़ुक चुचियों से रगड़ने लगते हैं।

रजिया अमन के कान में धीरे से कहती है-“आपको दोनों दुल्हनें बहुत-बहुत मुबारक हों जानू…”

अमन से अब रुकना मुश्किल था। वो रजिया के नरम गुलाबी होंठों को चूमने लगता है, और एक हाथ से अनुम की साड़ी वो सिर्फ़ दो वपन से अटकी हुए थी, खोल देता है।

रजिया के जिस्म से साड़ी अपने आप ही खुलती चली जाती है। वो और अमन एक दूसरे को खा जाने वाले अंदाज में चूमे जा रहे थे। आज रजिया की चूत में चुदने से पहले ही धीरे-धीरे पानी आ चुका था।

अमन अपनी नई नवेली दुल्हनों को बेड पे लेटा देता है, जिनके जिस्म पे अब कोई चीज़ नहीं थी। अनुम का जिस्म किसी गुलाब के फूल की तरह महक रहा था उसके जिस्म की खुशबू अमन को पागल बनाने लगी थी, और वो अनुम के चेहरे पे झुकता चला जाता है।

अमन सबसे पहले अनुम की पेशानी, फिर गाल, फिर नाक, फिर होंठ, फिर गर्दन, फिर हल्के गुलाबी निपल को मुँह से चूमे चाटे चला जा रहा था। उसकी इस हरकत से वहाँ अनुम के जिस्म में कंपकंपी मची हुई थी, वहीं रजिया अपनी चूत को रगड़े बिना नहीं रह पा रही थी।

रजिया अमन के पायजामे का नाड़ा खोल देती है। और अमन का तना हुआ लण्ड उसके मुँह के सामने आ जाता है। वो बिना डरे उसके लण्ड को अपने गले तक उातरती चली जाती है-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प उंन्ह… गलप्प्प-गलप्प्प…”

हैरत केी बात तो ये थी कि इस सबके दौरान कोई भी किसी से बातें नहीं कर रहा था। वो सिर्फ़ पूरे जोश के रंग में रंगना चाहते थे। उन्हें किसी चीज़ की कोई फिकर नहीं थी।

अमन अनुम के पेट तक पहुँच चुका था, वो उसकी छोटी सी नाभी में अपनी जीभ डाले उसे कमर उठाने पे मजबूर कर रहा था।

अनुम जानती थी कि अमन आगे क्या करने वाला है? और वो इसके लिये तैयार भी थी। जैसे ही अमन के लबों ने अनुम की कुँवारी चूत को पहली बार छुआ, अनुम के रोम-रोम में बिजली की लहर दौड़ गई। वो अपने दोनों हाथों से अमन के सिर को अपनी चूत पे दबाने लगती है।

अमन पहली बार ये सब कर रहा था और उसे इस सब में बहुत मज़ा आ रहा था। एक तरफ रजिया अमन के लण्ड को अपने मुँह में से निकालने को तैयार नहीं थी।

वहीं दूसरी तरफ अमन अनुम की चूत को अपनी जीभ से चाटे जा रहा था। इस सब बातों से दूर कि बेचारी अनुम जिसकी चूत को वो खुद भी कभी कभार ही छूती थी, क्योंकी उसकी चूत बहुत सेंसटिव है। जब भी अनुम नहाते वक्त अपनी चूत को छूती तो दो मिनट में ही उसका पानी निकलने लगता था। और यहाँ तो अमन किसी भूखे कुत्ते की तरह अनुम की चूत को चाटे जा रहा था-“गलप्प्प हगलप्प्प-गलप्प्प…”

पूरे रूम में अनुम की सिसकारियों की आवाज़ गूँज रही थी।

अमन का लण्ड एक झटका मारता है, और उसका गाढ़ा पानी रजिया के मुँह को भरने लगता है।

दूसरी तरफ अनुम अपने पहले प्यार को अपनी चूत का पानी पिलाने के करीब थी-“उंन्ह… आह्म्मह… सुनिए ना उंह्म्मह… अम्मी मरी उंन्ह…” वो जोर के झटके के साथ उछली और अपनी कमर दो-तीन बार बेड पे पटक के निढाल हो जाती है। उसकी चूत के पानी ने अमन के पूरे चेहरे को भिगो दिया था।

अमन लेट जाता है, और अनुम उसके ऊपर चढ़ जाती है। आज उसने ठान लिया था कि चाहे चुदते-चुदते उसे मौत क्यूँ ना आ जाये वो अमन को आज रात भर नहीं सोने देगी।

रजिया अपने चेहरे से अमन के पानी को साफ करने वाली थी कि अनुम रजिया के चेहरे को अपनी जीभ से चाटने लगती है।

अनुम-“अम्मी, मुझे भी अपने शौहर का पानी चखने दो ना…”

रजिया और अनुम अमन के पास बैठे एक दूसरे को जीभ से चाटने लगते हैं। अमन ये सब देख रहा था जिससे उसके लण्ड में जान आने लगी थी।

अमन अनुम के बाल पकड़कर उसका चेहरा अपने लण्ड पे झुका देता है-“अह्म्मह… चूस मेरी जान… अपने शौहर का लौड़ा अह्म्मह… आज ये तुझे जन्नत की सैर कराएगा अह्म्मह… अह्म्मह…”

अनुम-“हाँ… जानू आंह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…” वो अपने सर को ऊपर-नीचे जोर-जोर से करने लगती है, और 5 मिनट में ही अमन के लण्ड को खड़ा कर देती है।

अमन अब किसी भी किस्म की देर नहीं करना चाहता था। वो अनुम को बेड पे लेटा देता है, और उसकी कमर के नीचे एक तकिया रख देता है, जिससे अनुम की चूत ऊपर की तरफ आ जाती है।

अनुम-“अम्मी, मैं कैसे ले पाऊँगी इतना बड़ा?”

रजिया अनुम की चुचियों को अपने मुँह में लेती हुए-“कुछ नहीं बेटा, वो तुझे प्यार से करेंगे। बस तू थोड़ा बर्दाश्त कर ले…” और रजिया अनुम के होंठों को खोलकर अपनी जीभ उसके मुँह में डाल देती है, और इशारे से अमन को अपना लण्ड अनुम की चूत में डालने के लिये कहती है।

अमन अनुम के पैरों को और खोल देता है, और अपने भीगे हुए लौड़े को अनुम की कुँवारी चूत पे रगड़ने लगता है।

अनुम-“उंघह उंह्म्मह… घूंग उसके मुँह से सिसकारियाँ ही निकल सकती थीं। वो आने वाले लम्हे का इंतजार भी कर रही थी और उसे डर भी था कि कहीं अमन…”

अमन-“अह्म्मह… अनुम्म्म्म…”

अनुम-“उंन्ह… घूँन् घूँन् अम्मी जी…” वो इतने जोर से चीखी कि अमन को अपने हाथों से उसके मुँह को बंद करना पड़ा। अमन का आधे से ज्यादा लण्ड अनुम की चूत में था और उसकी चूत का परदा फट चुका था। अनुम की आँखों से लगातार आँसू निकल रहे थे। उसका पूरा जिस्म कांप रहा था, उसकी चूत जैसे किसी अंगरों पे रख दी गयइ थी।

अमन एक और झटका देता है, और अपना पूरा का पूरा लण्ड अनुम की चूत में उतार देता है। अमन जानता था देर से दुर्घटना भली-“अह्म्मह… बस मेरी जान हो गया ना… अब रोना बंद कर दो…” वो अपने होंठों से अनुम के निपल को चूसने लगता है, और धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाता चला जाता है।

रजिया ये सब बैठी देख रही थी। आज उसके दोनों खून फिर से एक हो रहे थे।

अनुम का दर्द कम होता जा रहा था और उसे अमन का लण्ड अपनी चूत में अच्छा लगने लगा था-“उंन्ह… जानू, आखिर अपने मुझे औरत बना ही दीया उंन्ह… उंन्ह… अम्मी देखो ना उंन्ह…”

अमन-“हाँ मेरी जान… देख मैंने तुझे चोद हैी दिया अह्म्मह… ओऊऊ…” वो दोनों अपनी अलग दुनियाँ में पहुँच चुके थे, वहाँ उन्हें किसी की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी। अमन अपने लण्ड को किसी पिस्टन की तरह अनुम की चूत में पेले जा रहा था।

वहीं अनुम अपनी कमर उठा-उठाकर उसका साथ दे रही थी-“अह्म्मह… उंन्ह…” दोनों भाई-बहन एक ऐसे रिश्ते में बँध चुके थे जिसे अब दुनियाँ की कोई भी ताकत जुदा नहीं कर सकती थी।

अमन-“अह्म्मह… अनुम, मेरा पानी ले ले अह्म्मह… उंन्ह… और अमन अपना पानी अनुम की चूत में उतारने लगता है।

अनुम अपनी चूत में गर्म-गर्म पानी के एहसास से सिहर उठती है, और उसकी चूत भी पानी छोड़ने लगती है-“अह्म्मह… अह्म्मह… जानू मुझे भी लो ना उंन्ह… उंन्ह…”

दोनों भाई-बहन एक दूसरे से चिपके अपनी सांसें संभालने लगते हैं।

 
वहीं रजिया अपनी बारी का इंतजार करने लगती है।

अमन बेड पे लेटा हुआ था और रजिया उसके लण्ड को एक गीले कपड़े से साफ करने लगती है। क्योंकी उसपे अनुम की चूत का खून लगा हुआ था।

अनुम उठकर बाथरूम में चली जाती है, अपनी चूत को साफ करने।

रजिया की आँखें लाल हो चुकी थीं, वो तो बस एक जबरदस्त चुदाई चाहती थी। वो अमन के सिर के पास जाकर बैठ जाती है, और उसका सिर अपनी नंगी जाँघों पे रख लेती है। फिर उसके बालों में हाथ फेरने लगती है।

रजिया की चूत की भीनी-भीनी खुश्बू अमन के दिमाग़ में कुछ करती है, और वो अपना सिर मोड़कर उसे रजिया की जाँघ के अंदर घुसा देता है। फिर अपनी जीभ बाहर निकालकर रजिया की चूत चाटने लगता है।

रजिया-“अह्म्मह… अमन… उह्म्मह… ऊऊऊह्म्मह…”

अमन -“अम्मी क्या कर रही हो? अह्म्मह… मैं उह्म्मह…”

रजिया पहली बार अपनी चूत में इतना खिचाव महसूस कर रही थी। उसकी चूत आग उगलने को तैयार थी-“अह्म्मह… चोदो मुझे, मैं चुदना चाहती हूँ अह्म्मह… प्लीज़्ज़ज्ज्ज चोदो मुझे अह्म्मह…”

अमन रजिया को डोगी स्टाइल में कर देता है, और पीछे अपना लण्ड उसकी गाण्ड में डालने लगता है।

रजिया-“उंह्म्मह… वहाँ नहीं अह्म्मह… चूतत्त में उंन्ह… अह्म्मह…”

अमन का लण्ड रजिया की गाण्ड में जा चुका था और वो अपनी स्पीड बढ़ाने लगा था, तभी बाथरूम से अनुम बाहर आती है। उसके सामने रजिया अपनी गाण्ड आगे पीछे करते हुए अमन का मूसल लण्ड अपनी गाण्ड के छोटे से सुराख में ले रही थी और सिसकारियाँ भर रही थी। ये सब देखकर अनुम की चूत में भी चीटियाँ रेंगने लगती हैं, और वो रजिया के पास आकर बैठ जाती है।

अमन-“देख क्या रही है? साली, अपनी चूत रजिया के मुँह के पास ले जा। वो चाटेगी तेरी चूत को अह्म्मह… इसकी गाण्ड बहुत टाइट है…”

रजिया-तो जैसे दूसरी दुनियाँ में थी। अमन की जबरदस्त चुदाई से उसकी हल्की-हल्की सांस निकल रही थी। वो अपना मुँह अनुम की चूत के पास ले जाती है, और उसकी अभी-अभी चुदी चूत को चाटने लगती है-गलप्प्प-गलप्प्प अह्म्मह… आराम से अह्म्मह… गलप्प्प…”

अनुम अपने दोनों पैर खोलकर अमन की आँखों में देखते हुए अपनी चूत रजिया को चुसवा रही थी। वो इतनी उत्तेजित हो चुकी थी कि अभी रजिया की गाण्ड से लण्ड निकालकर खुद की चूत में लेना चाहती थी।

अमन अपने लौड़े को बाहर निकालकर रजिया के संभालने से पहले ही उसकी चूत में पेल देता है-“अह्म्मह… बहुत अच्छा लग रहा है। रजिया तेरी चूत में मेरा लण्ड अह्म्मह…” वो भी अनुम की आँखों में देखते हुए रजिया को चोद रहा था। ये एहसास उसके लिये एकदम नया और सुखद था कि अपनी अम्मी को अपनी बहन के सामने चोदे।

अमन के सांसें बढ़ चुकी थीं, क्योंकी रजिया झड़ चुकी थी और वो भी अपना पानी निकालने के करीब था। वो जोर-जोर से रजिया को चोदे जा रहा था और एक चीख के साथ वो अपना पानी रजिया की चूत में निकाल देता है। वो जानता था कि अभी उसे सारी रात इन दोनों को चोदना है। वो निढाल सा बेड पे लेट जाता है।

वहाँ तीनों अपना पानी निकलने से थोड़े ठंडे पड़ चुके थे। वो दोनों अमन के पास आकर उसे चिपक के लेट जाती हैं। अनुम अमन के ऊपर लेट जाती है। और रजिया अमन के साइड में। रात के 2 बज रहे थे, अमन की आँख लग जाती है।

पर रजिया और अनुम जाग रही थीं। रजिया अनुम की आँखों में देख रही थी और अपनी चूत रगड़ रही थी। अनुम अमन के ऊपर से उतरकर रजिया की पास आ जाती है।

रजिया अनुम को अपने से चिपका लेती है-“आज तू भी औरत बन गई मेरी बच्ची…”

अनुम-“हाँ अम्मी, और मुझे ये खुशी उस इंसान ने दी है, जिसे मैं बहुत चाहती हूँ…”

रजिया-“हाँ मेरी बच्ची, आज से हम दोनों अमन का बहुत खयाल रखेंगे…” अनुम रजिया से इतनी चिपकी हुई थी कि उसकी जाँघ और चुचियाँ रजिया से रगड़ खा रही थी-“हाँ… बेटा, पर तुझे टैबलेट खाने होंगे कुछ दिन, जबतक अमन का बिजनेस सेट नहीं हो जाता।

अनुम-“अम्मी, और आप?”

रजिया मुस्कुराते हुए-“वो मुझे जल्द से जल्द प्रेग्गनेंट करना चाहता है बेटा…”

अनुम-“अम्मी, मुझे भी प्रेग्गनेंट होना है ना…” और वो ये बोलते-बोलते रजिया के ऊपर चढ़ जाती है।

दोनों माँ बेटी एक दूसरे से चिपक चुके थे, और अब वो एक दूसरे की आँखों में देखते हुए अपनी चूत को रागड़ने लगती है। अनुम अपने होंठ रजिया के होंठों पे रखकर उसके निचले होंठ को चूसने लगती है।

रजिया भी मचल जाती है-“उंन्ह… बेटा अह्म्मह… अह्म्मह…” दोनों बस एक दूसरे को खा जाने वाले अंदाज में रगड़ने, चाटने और चूसने लगे थे। वो ये भूल गये थे कि अमन उन्हें देख रहा है, और उसका लण्ड भी तना हुआ है।

जब ये दोनों औरतें अपनी चूत की आग एक दूसरे की चूत से रगड़कर बुझाने में लगी हुइ थीं, तभी अमन पीछे से आकर अपना लण्ड अनुम की चूत में पेल देता है।

अनुम-“अह्म्मह… अम्मी…” एक तेज धारदार चाकू अचानक से उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर घुस चुका था उसे ऐसा ही महसूस होता है। क्योंकी उसकी चूत अभी इतनी खुली नहीं थी इसलिये ये दर्द उसे बर्दाश्त करना था। वो सिसक उठती है। पर अमन अपना लण्ड उसकी चूत में जड़ तक पेलने लगता है।

आनुम रजिया की छाती से चिपकी हुई थी और अमन उसकी गाण्ड पकड़कर दनादन अपना लण्ड चूत में पेलते जा रहा था, वो तेज-तेज अपने कमर रजिया की चूत पे पटकने लगती है। रजिया समझ जाती है कि अनुम झड़ने के नज़दीक है, और वो अनुम के होंठों को अपने मुँह में लेकर उसकी जीभ चूसने लगती है।

अनुम-“उम्म… उंघह… उंन्ह…” और उसकी चूत से ढेर सारा पानी रजिया की चूत से होता हुआ बेडशीट भिगोने लगता है।

अमन अपना लण्ड निकालकर अनुम को साइड में कर देता है। क्योंकी वो अभी झड़ा नहीं था और उसे चूत चाहिए थी, वो उसका साथ दे। वो रजिया के पैर हवा में उठाकर अपना लण्ड जल्दी से उसकी चूत में डाल देता है-“अह्म्मह… रजिया तेरी ही चूत है वो मेरा साथ देती है… मेरी जान्न…”

रजिया-“अह्म्मह… जानू आपकी ही चूत तो है… चोदो अपनी रजिया को अह्म्मह… मेरी चूत में बीज बो दो जानू उंन्ह… अह्म्मह… मेरी जान ऊओह्म्मह…”

 
करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ जाते हैं। और अमन एक तरफ लेट जाता है। वो बस अब सोना चाहता था। अनुम और रजिया भी काफी थक चुके थे, इसलिये वो भी ऐसे ही नंगी अमन से चिपक के सो जाती हैं।

शिमला की ठंडी-ठंडी हवाएं जब इन जवान नंगे जिस्मों से टकराईं तो एक अजीब से खुशगवार एहसास ने रजिया की आँखें खोल दीं। वो अमन से बिल्कुल चिपकके सोई हुई थी और अनुम उसके ऊपर। अपने सगे बेटे के बीवी बनना और उससे रात भर अपनी बेटी के सामने चुदना… ये एहसास, ये अनुभव हर किसी को नहीं मिलता। ये सिर्फ़ खुकिस्मत लोग ही हाँसिल कर पाते हैं।

रजिया अमन के होंठ पे किस करते हुए-“जिंदगी की नये सुबह मुबारक हो आपको, मेरी जान…”

अमन भी उठ चुका था। वो रजिया को वापस किस करते हुए-“तुझे भी रजिया…”

अनुम अभी तक बेसुध अमन के ऊपर सोई हुई थी

रजिया बेड पे बैठ जाती है। उसकी आँखें थोड़ा दर्द कर रही थीं, क्योंकी कल रात वो एक पाल के लिये भी सो नहीं पाई थी। वो अपने पैंटी उठाकर पहेनने लगती है। पर अमन उसका हाथ पकड़ लेता है तो रजिया सवालिया नज़रों से अमन की तरफ देखने लगती है।

अमन-“जब तक हम यहाँ हैं… ना तू कपड़े पहनेगी और ना अनुम। पूरे 7 दिन तुम मेरे साथ इस रूम में पूरे नंगे रहने वाले हो, तो ये सब बैग में रखो और चलो मैं भी फ्रेश हो जाता हूँ…”

अनुम अपनी आधी खुले पलकों से अमन को देख रही थी। उसने भी अमन का फरमान सुन लिया था। वो तो बहुत खुश थी। उसके हाथों की मेंहदी बेड के चादर पे गिरी हुई थे और एक ख़ून का छोटा सा धब्बा भी दिखाई दे रहा था, वो अनुम के कुँवारीपन के टूटने की निशानी था।

रजिया और अमन बाथरूम में नहाने घुस जाते हैं। शावर ओन करके वो दोनों एक दूसरे से चिपक के नहाने लगते हैं।

तभी अनुम भी वहाँ आ जाती है-“ह्म्मम्म्म्म… अपनी पहली बीवी के चक्कर में कहीं नई नवेली बीवी को मत भूल जाना मेरे जानू…” और वो भी उन दोनों के साथ नहाने लगती है।

अमन का लण्ड खड़ा होने लगता है। आख़िरकार साथ में दो नंगी औरतें नहा रही हों तो किसका लण्ड आवाज़ नहीं देगा।

रजिया नीचे बैठकर अमन के लण्ड को साबुन लगाने लगती है। और उसे पानी से साफ कर देती है।

एक ही पल में अमन उसे कुछ कहने वाला था। उससे पहले ही रजिया अमन के खड़े लण्ड को अपने गले तक ले चुकी थी-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…”

अनुम अमन की छाती से चिपकी अपनी दोनों चुचियाँ उससे मसलवाते हुये होंठ चूस रही थी। माँ लण्ड चूसे और बेटी चुचियाँ दबवाए तो मर्द बेचारा क्या कर पाए। यही हालत अमन की थी। उसके लण्ड का ज्जालामुखी आग उगलना चाहता था।

अमन रजिया के मुँह से लण्ड बाहर निकालकर उसे खड़ा कर देता है। और अनुम के साथ-साथ रजिया के भी होंठ चूसने लगता है। दोनों औरतें पूरी तरह गरम हो चुकी थीं और हिस की आग उनके चेहरे से साफ बयान हो रही थी।

अनुम और रजिया अमन के सामने खड़े। उसके लण्ड को अपने नरम-नरम हाथों में लेकर सहला रही थी, और उसके होंठों को बारी-बारी चूस रही थीं। आज अमन को एहसास हो रहा था कि उसकी अम्मी और बहन कितनी चुदक्कड़ औरतें हैं।

अमन अनुम को दीवार से खड़ा कर देता है, और उसकी चुचियों से चिपकाके रजिया को। वो दोनों आमने सामने खड़ी थीं और एक दूसरे की चुचियों से चुचियाँ रगड़ रही थीं। अमन रजिया की कमर को थोड़ा सा पीछे की तरफ करता है, जिससे उसकी गाण्ड और चूत उसे आसानी से दिखाई देने लगती है। वो बिना देर किए अपने लण्ड को रजिया की चूत में पेलने लगता है।

 


उसका झटका इतना जोर का था कि रजिया सीधा अनुम की चुचियों से चिपक जाती है। और उसके होंठ अनुम के होंठ से चिपक जाते हैं। रजिया अनुम के होंठ चूसने पे मजबूर हो जाती है, क्योंकी अमन पूरी ताकत से पीछे से चोद रहा था, जिससे उसका मुँह खुला का खुला रह रहा था। उसकी जीभ बाहर निकल रही थी और चूत के अंदर तक लण्ड जाने से वो पूरी तरह तड़प रही थी।

अपने अम्मी को ऐसे चुदते देखकर अनुम की चूत भी पानी छोड़ने लगी थी। वो रजिया के मुँह में मुँह डालकर उसकी जीभ को अपने मुँह में खींच रही थी। जब अमन रजिया की चूत में धक्का मारता तो, रजिया सीधा अनुम की चूत से जाकर टकराती। दोनों माँ-बेटी एक वक्त में एक साथ पानी छोड़ने लगती हैं। रजिया की चूत से पानी निकल चुका था और वो नीचे बैठ जाती है।

वो अमन के लण्ड और अनुम की चूत के बीच बैठी हुई थी। वो अपना बड़ा सा मुँह खोलकर अमन का लण्ड अपने मुँह में ले लेती है, वो अभी तक झड़ा नहीं था और जल्द से जल्द चूत चिल्ला रहा था। रजिया अपनी चूत का स्जाद अमन के लण्ड से चखने के बाद लण्ड को थोड़ा खींचकर अनुम की चूत के पास लाती है। और अमन बिना देर किए लण्ड अनुम की चूत में डालने लगता है।

अमन अनुम को रजिया की तरह चोद रहा था। वो ये भूल गया था कि रजिया की चूत थोड़ी खुली हुई है, और अनुम तो बेचारी कल रात ही औरत बनी है। एक कच्ची कली को भँज़रा जब बेरहमी से चूसे, उसका सारा रस एक साथ पीकर उड़ना चाहे तो उस कली की वो हालत होती है, वही इस वक्त अनुम की थी।

अनुम हिल नहीं सकती थी क्योंकी रजिया उसके पैर के पास बैठकर नीचे से अमन के आंड और अनुम की गाण्ड को चाट रही थी। और बेरहम अमन सटासट अपने लोहे के रोड जैसे लण्ड को उसकी चूत में लगातार अंदर-बाहर कर रहा था। वो बस चिल्ला सकती थी, पर उसे भी अमन बीच-बीच में रुक देता, अपने होंठ उसके मुँह में घुसाकर, उसकी आवाज़ भी निकलने से रुक जा रही थी।

अनुम-गूँन्… उंन्ह… गूँन्न…” एक घुटी-घुटी सी आवाज़ के साथ चुदे जा रही थी-“उंन्ह… अह्म्मह… मुझे सांस तो लेने दो जी उंन्ह… अह्म्मह… अम्मी प्लीज़ मेरी गाण्ड को… मेरे चूत… भाई रहम करो मैं अह्म्मह… अह्म्मह… और वो तेज धार के साथ मूतने लगती है। उसका पेशाब सीधा रजिया के मुँह में गिरने लगता है, जिसे रजिया बड़े चाव से किसी अमृत के तरह पी जाती है।

रजिया-“गलप्प्प-गलप्प्प अह्म्मह… मेरे शौहर और बेटी का पानी…” उसके पेशाब में अमन के पानी की भी खुश्बू आ रही थी क्योंकी अनुम का पेशाब अमन के लण्ड से होता हुआ गुजर रहा था, वो अनुम की चूत में सटासट अंदर-बाहर हो रहा था।

अनुम अब थोड़ी खुल चुकी थी। इतना गंदा उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी चूत का पानी उसकी अम्मी पिएंगी और वो खड़े-खड़े अमन के लण्ड के दबाव से चुदते हुए मूतने लगेगी। ये एहसास ही उसे पानी छोड़ने पे मजबूर कर देता है। और वो अमन से चिपकके झड़ने लगती है-“अह्म्मह… उंह्म्मह… जोर से जड़ तक अह्म्मह… ऐसे ही एक बार अह्म्मह…” वो झड़ते-झड़ते बस यही चिल्ला रही थी।

अमन भी उसकी चूत में झड़ने लगा था। दोनों का पानी नीचे बहने लगता है। जिससे रजिया चाटती जा रही थी-“गलप्प्प-गलप्प्प अह्म्मह…” रजिया का चेहरा पूरी तरह अनुम के पेशाब और अमन के पानी से भीग चुका था।

अमन उसे खड़ा करता है, और शावर के नीचे दोनों के साथ नहाने लगता है। उस दिन से अमन ने रजिया और अनुम को कपड़े पहनने नहीं दिया। ये सिलसिला पूरे 7 दिन तक चला। वो हर वक्त रूम में नंगे रहते, और अमन किसी ना किसी को चोद रहा होता।

जब उन्हें भूख लगती, वो खाना ऑर्डर करते। अमन वेटर से खाना कपड़े पहनकर लेता और दरवाजा बंद करके फिर से नंगा हो जाता। रूम के हर एक कोने में, सोफे पे, गैलरी में, बेड पे, फश़ पे, नहाते हुए, मूतते हुए, हर जगह अमन ने रजिया और अनुम को चोदा।

वो इतनी बार चुदाई कर चुके थे कि अनुम की पूरी शरम-ओ-हया गायब हो चुकी थी। वो रात में उठकर अमन का लण्ड चूसती और उसपे चढ़कर लण्ड अपनी चूत में लेकर चुदती और अमन भी किसी वफ़ादार पति के तरह उसे चोदता।

इन 7 दिनों में उसने सबसे ज्यादा रजिया को चोदा। उसे रजिया हमेशा ही से पसंद थी। वो जब भी उसे चोदता, उसे यही लगता कि वो अपनी अम्मी को चोद रहा है। जिसकी चूत से वो निकला था और उसे रजिया को जल्द से जल्द प्रेग्गनेंट भी तो करना था।

रजिया भी अपने बेटी के सामने अमन से चुदते-चुदते बेशरम हो चुकी थी कि वो किसी भी वक्त अमन के लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगती। कभी-कभी तो अमन अनुम को चोद रहा होता तो वो अनुम की चूत से लण्ड को खींचकर अपने मुँह में और फिर अपनी चूत में ले लेती।

अनुम अपनी अम्मी से इन 7 दिनों में कितने बार चूत चूसा चुकी थी, ये भी उसे याद नहीं था। वो दोनों माँ-बेटी पूरी तरह लेज्बियन बन चुकी थीं। अमन के सोने के बाद वो 69 की पोजीशन में कितने देर एक दूसरे की चूत को मुँह में लेकर चूसती रहतीं, एक दूसरे की चूत का पानी पीते-पीते उन्हें दूसरी कोई चीज़ अब अच्छी नहीं लगती थी
 
जिस तरह अनुम ने रजिया को अपना पेशाब पिलाया था, उसे तरह रजिया भी अनुम को अपना पेशाब पिला चुकी थी। ये 7 दिन उनकी आने वाली जिंदगी को बदल चुके थे। अब वो एक माँ-बेटी या बहन नहीं थी, बल्की सिर्फ़ और सिर्फ़ एक औरत थी, जिसे खाना दो या ना दो पर लण्ड ज़रूर चाहिए। और वो भी सिर्फ़ अमन का और किसी का भी नहीं।

आज उनकी वापसी थी। अमन होटेल का बिल पे करके कार में रजिया और अनुम के साथ घर की तरफ निकल जाता है। वो ड्राइविंग कर रहा था और रजिया अनुम के साथ पीछे बैठी हुई थी।

रजिया-“सुनिए, एक मेडिकल शाप से प्रेगा नेवज (प्रेग्गनेन्सी चेक करने की पट्टी) ले लेना…”

अमन-क्यूँ?

रजिया मुस्कुराते हुए-“मुझे लग रहा है कि मैं शायद आपसे प्रेग्गनेंट हो गई हूँ…”

अमन जोर से ब्रेक लगाते हुए मारे खुशी के-“क्या सच कह रही है तू?”

रजिया अपना चेहरा हाथों से छुपाते हुए-“हाँ…”

अमन तो जैसे सातवें आसमान पे था। बस उसे कन्फर्म करना था कि रजिया की बात सही हो जाये।

अनुम भी ये ख़बर सुनकर खुश हो जाती है, और रजिया के पेट पे हाथ फेरते हुए-“मेरा छोटा सा बच्चा इसमें आ चुका है…” और वो रजिया की होंठों को चूस लेती है।

अमन मेडिकल से किट ले लेता है, और तीन घंटे बाद वो घर पहुँच जाते हैं। घर पहुँचकर रजिया सबसे पहले बाथरूम में जाकर किट से चेक करती है, और खुशी के मारे उछल पड़ती है। वो इतने जोर से चीख मारती है कि अमन और अनुम भागते हुए उसके पास आ जाते हैं।

अमन-क्या हुआ?

रजिया अमन की छाती से चिपकते हुए-“आप पापा बनने वाले हो मुआह्म्मह…”

तीनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। वो बस बारी-बारी एक दूसरे को गले लगाते, चूमते जा रहे थे। उन्हें तब होश आता है, जब कोई दरवाजे की बेल बजाता है।

अमन दरवाजा खोलता है तो सामने फ़िज़ा खड़ी थी। उसकी आँखों में एक चमक सी थी अमन को देखकर। रजिया और अनुम रूम में थे। अमन फ़िज़ा को अपने से चिपकाकर उसकी चुचियाँ मसलते हुए-“तेरी अम्मी कहाँ है?

फ़िज़ा-“उंह्म्मह… घर पे है, तुमसे बहुत नाराज है। जाओ जाकर मना लो, मैं अभी आती हूँ…” और फ़िज़ा रजिया की रूम में चली जाती है।

वो रजिया से कहता है की इमरान से मिलकर आता हूँ और रेहाना की तरफ चला जाता है। उसे भी रेहाना की चूत याद आ रही थी।

रेहाना अपने रूम में सोई हुइ थी। उसे पता नहीं था कि अमन वापस आ चुका है। वरना वो उसे मिलने सबसे पहले आती। 7 दिन से वो अपनी चूत की आग फ़िज़ा की गरम चूत पे रगड़-रगड़कर ठंडा करने की नाकाम कोशिश कर रही थी। वो गरम लोहा उसकी चूत को चाहिए था, वो तो शिमला जाकर बैठा था। इसी बात से नाराज थी रेहाना।

अमन रेहाना के बेडरूम में जाकर अपनी पैंट और शर्ट उतारकर हँगर में टांग देता है। अब वो बिल्कुल नंगा था। उसे रजिया ने एक बार चुदते हुए कहा था कि तुम अंडरवेअर पहनना छोड़ दो, तुम्हारा लण्ड हमेशा टाइट रहता है। और अंडरवेअर से उसे मुश्किल होती होंगी, सांस लेने में।

अमन अपने खड़े लण्ड को लेकर रेहाना के मुँह की तरफ बढ़ता है। वो बेसुध गहरी नींद में थी। अमन उसके होंठों के पास अपने लण्ड का सुपाड़ा लगाकर अंदर करने लगता है। इस हरकत की वजह से रेहाना की आँखें खुल जाती हैं, और वो अमन को पूरा नंगा देखकर चौंक जाती है।

जैसे तो उसने अमन को कई बार नंगा देखा था, पर जब कोई सोया हो और कोई शख्स उसके मुँह में लण्ड डाले तो वो तो चौंकेगा ही, यहे हाल रेहाना का था।

रेहाना-“ऊऊऊओ… तुम हो, मैं कितना डर गई हूँ देखो मेरे हार्ट-बीट… और तुम वापस कब आए? जाओ मैं बात नहीं करती तुमसे…” वो बनावटी गुस्सा दिखा रही थी। सच तो ये था कि वो अमन को देखकर अपना सारा गुस्सा भूल चुकी थी।

अमन-“ओके… मैं चलता हूँ फिर…”

रेहाना-“रुको… ऊऊऊ… क्यूँ कोई नई लौंडीयाँ मिल गई है क्या शिमला में? वो मेरे मज़ाक को भी सच समझ रहे हो ह्म्मम्म्म्म…”

अमन उसके बाल पकड़कर-“हाँ मिल गई है तो?”

रेहाना-“जान से मार दूंगी हरामज़ादी को और फिर खुद भी मर जाऊँगी… अगर कोई बाहर वाली की तरफ देखे भी तो…”

अमन-“साली धमकी देती है? रुक ज़रा…” और वो रेहाना की गर्दन दबाता है, जिससे उसका मुँह खुलता चला जाता है। और अमन अपने लण्ड को उसके नरम मुँह में पेलता चला जाता है-“अह्म्मह… साली बहुत नाज़ुक हैं तेरे होंठ अह्म्मह… ज़रा आराम से चूस अह्म्मह… धीरे कर साली अह्म्मह…”

रेहाना-“नहीं उंन्ह… गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प मेरा है, कुछ भी करूँ गलप्प्प उंन्ह… 7 दिन से सूखी है मेरे चूत गलप्प्प-गलप्प्प और ये मुँह भी गलप्प्प-गलप्प्प…” और वो लोलीपोप की तरह जोरों से लण्ड को मसल-मसलकर चूसे जा रही थी।

आख़िरकार अमन का लण्ड अपनी औकात में आ चुका था। उसके लण्ड के नशें पूरे तरह तन चुकी थीं। अमन इस दौरान रेहाना की नाइटी उतारकर उसे नंगा कर चुका था। वो रेहाना के पैर खोल देता है, और अपनी जीभ उसकी चूत पे रखकर चाटने लगता है। अब अमन को भी चूत चाटने में मज़ा आने लगा था। जबसे उसने शिमला में अनुम की कुँवारी चूत का स्जाद चखा था, तबसे उसे चूत चाटने में इंटरेस्ट बढ़ गया था। वो जीभ को रेहाना की चूत के अंदर तक घुसा-घुसाकर रस पी रहा था।

रेहाना बुरी तरह सिसकारियाँ भर रही थी उसे अमन की जीभ की ठंडक अपने पूरे जिस्म में महसूस हो रही थी-उंह्म्मह… आह्म्मह… प्लीज़्ज़ज्ज्ज चोदो ना मेरी चूत को, लण्ड दो ना… मैं चुदना चाहती हूँ अह्म्मह… डाल दो मूसल ओखली में अह्म्मह…”

अमन भी उसके बात मान लेता है, और अपना लण्ड उसकी चिकने चूत के मुँह पे लगाकर जोर से अंदर पेल देता है। उसके लण्ड के धक्के से रेहाना की चूत अंदर तक खुलती चली जाती है-“अह्म्मह… उंन्ह… साली याद आई थी तुझे मेरी अह्म्मह…”

रेहाना-“हाँ हर रोज… हर पल… मुझे याद आती थी… और सबसे ज्यादा मेरी चूत को अह्म्मह… बोलती थी जानू कब आएंगे? मुझे उनकी याद आ रही है… मुझसे नहीं मानती ये चूत… अब आप ही मनाओ इसे उंह्म्मह… आराम से जी उंन्ह…”

अमन-“हाँ मेरी जान अह्म्मह… देख कैसे खुश हो गई है तेरी चूत अह्म्मह… अंदर तक जाने दे रही है मुझे अह्म्मह…”

वो दोनों अपने बातें किए जा रहे थे, और एक दूसरे के अंदर समाते चले जा रहे थे। अमन रेहाना को 20 मिनट तक ऐसे ही ऊपर रहकर चोदता रहा। और फिर एक चीख के साथ अपना पानी उसकी गरम भट्ठी में उड़ेल दिया, जिससे रेहाना की चूत के अंगारों पे जैसे किसी ने पानी डालकर बुझा दिया हो। वो भी अब खुश हो चुकी थी। वो और चुदना चाहती थी, पर अमन उससे बहाना बनाकर और कल आने का वादा करके उसके घर से निकल जाता है।

अमन अपने घर पे फ्रेश होने के बाद अलमारी से अपना सेल-फोन निकालता है। जब वो लोग शिमला गये थे तब अमन ने अपना सेल-फोन यहाँ रख दिया था ताकी उसे कोई परेशान ना कर सके। जब वो काल रेकाड़ चेक करता है तो हैरान रह जाता है।

उसके सेल-फोन पे टोटल 200 मिस-काल्स थीं जिनमें से 179 महक की थीं। वो काल-बैक करता है, और एक ही रिंग में काल रिसीव हो जाती है।

महक चिल्लाते हुए-“कहाँ हो तुम? तुम्हें ज़रा सी भी परवाह है कि नहीं मेरी? पूरे 7 दिन हो गये हैं। अपना सेल फोन चेक करो कितनी बार कल की हूँ मैं। तुम समझते क्या हो खुद को? और किस चीज़ का घमंड है तुम्हें? तुम अभी के अभी मुझसे मिलने आ रहे हो। पहले मुझे तुम ये बताओ कि तुम थे कहाँ?”

अमन-“बाप रे इसकी गाण्ड में कितना दर्द छुपा है। कहीं इस साली को भी तो मुझसे प्यार नहीं हो गया?” वो धीमी आवाज़ में बोलना शुरू करता है-“आई एम सो सारी महक। असल में मेरे एक दोस्त की मम्मी की मौत हो गई थे शिमला में। मैं वहीं था…”

महक-“ओह्म्मह… आई एम सो सारी अमन, मुझे पहले बताना चाहिए था ना तुमने खामखाह ही मैं तुमपे भड़क गयी। प्लीज़… मुझे माफ कर दो…”

अमन-“इट्स ओके महक, गलती मेरी भी है। मुझे आपको इनफॉर्म करके जाना चाहिए था। पर सब इतने जल्दी में हुआ कि मुझे कुछ नहीं सूझा…”

महक-“मैं समझ सकती हूँ अमन, सारी… अच्छा तुम एक काम करो। कल मेरे घर आ जाओ मेरा बर्थ-डे है। इसीलिये मैंने एक छोटी सी पार्टी अरेंज किया है, कुछ खास दोस्तों में। तुम आओगे तो मुझे अच्छा लगेगा, वरना मैं समझूंगेी कि तुमने मुझे माफ नहीं किया…”

अमन-“ओके… आई विल ट्राइ…” और वो फोन बंद कर देता है-“आह्म्मह… बच गया बेटा अमन, वरना ये तुझपे टूट पड़ी थी…” वो मुस्कुराता हुआ रजिया के रूम की तरफ बढ़ जाता है।

 
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