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Vasna Story मिस्टर & मिसेस पटेल (माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना)

मैने मेरी होनेवाली बीवी के लिए कुछ गिफ्ट ख़रीदे. मैं जितने दिन से जॉब कर रहा
हु तब से मेरे सारा पैसा बैंक में जमा हो रहा है. मुझे सैलरी भी अच्छी मिलति है. पिछले कुछ महीनो से मेरे अकाउंट में काफी पैसा भी जमा हुआ है. हा..मुझे मालूम है की में अब फॅमिली स्टार्ट करने जारहा हु तो मुझे पैसे की जरुरत है. फिर भी में माँ के लिए कुछ अच्छे अच्छे गिफ्ट परचेस किया.. एक नेकलेस लिया. आज कल की ट्रेंड में जैसे सब लड़कीया एक पैर में पतली चेन जैसी पायल पहनती है, वैसे में एक पायल ख़रीदी. उनके गुलाबी पैरों में वो एक पायल बँधेगी तो वह उनको और सेक्सी बना देगी. फिर में कुछ साड़ी भी लिया. सब में हमारी नई स्टील की अलमारी में रख दिया उनके लिये. वह यहाँ आकर जब आलमारी खोलेगि, तब यह सरप्राइज उनके लिए है.

इन सब व्यस्तता के बीच पूरा हप्ता कैसे निकल गया मालूम नहीं पडा शायद शादी का दिन जितना आगे आ रही था , मन उतना चंचल हो रही था इस लिए शायद मेरे मन ने समय का ख्याल ही नहीं किया. मुझे बस यहाँ एमपी में माँ आने से पहले सब कुछ ठीक करके रखना था वह अब हो गया. अब उनका मैयका और ससुराल दोनों ही एक है. इस लिए में एमपी के घर को उनके ससुराल जैसा बनाने की कोशिश किया. यही उनके पति का घर होगा.

मैं ऑफिस में सिग्नेचर करके घर जाकर बैग वगेरा उठाया और दौड के स्टेशन जाकर ट्रैन पक़डी. हालां की मैं टिकट पहले से बुक करके रखता हु. मैं मेरे कुछ कपडे और जरुरी कुछ सामान लेकर बैग पैक किया. मुझे तीन चार दिन रहना है. मुंबई में भी जाना है. शादी का शेरवानी तो बन गया. बाकि में कुछ नये कपडे भी ख़रीदे थे. शादी में माँ के लिए जो भी चाहिए सब नाना नानी खरीद रहे है. मुझे बस जाना है, शादी करनी है और अपनी बीवी को लेकर आना है. और इस बात पे मैं माँ दुल्हन के भेष में कैसी लगेगी यह सोच के आँख बंध करके उनको सोचने लगा. आज तक मैं केवल उनका खूबसूरत प्यारा चेहरा, लम्बा गला , सूडोल गर्दन, गोलगोल हाथ, गुलाबी मुलायम छोटे छोटे पैर, और फ्लैट सेक्सी पेट ही देखा. बार बार उन सब की झलक भी दिमाग में आने लगी. मुझे उन सब में प्यार भरा चुम्बन लेने के लिए तरस रही हु. मैं पिछले ६ साल से उनको कितनी बार मेरी बाँहों में, मेरे पास, मेरे शरीर के साथ मिलाकर कल्पना कि है. और आज हमारा नसीब हम दोनों को पति पत्नी बना के ज़िन्दगी गुज़ार ने का एक सुनहरा मौका दे रही है. मेरे मन इस लिए ज़ादा माँ को प्यार करने लगा क्यों की वह भी यह चाहती है अपनी मन से. वह भी अपनी ज़िन्दगी केवल मेरी पत्नी बनके ही गुज़ारना चाहती है. हम दोनों के नसीब में यह लिखा हुआ था. और इस वजह से क़ुदरत ने भी उनको शायद ऐसे बनाया है. आज भी उनको देखके लगता है वह एक कुवारी जवान लड़की हो उनका शरीर का गठन ही ऐसा करके भेजा क़ुदरत ने. देख के कोई नहीं बोल सकता की वह मेरी माँ है. और वह अब ३६ साल की है. मैं २० का होकर भी मेरे गठन और शरीर का मजबूत गठन मुझे उमर से ज़ादा म्याचुर्ड लगता है. माँ जब मेरे साथ होती है, तब आजतक कोई कभी भी बोल नहीं पाया की वह मेरी माँ है. कोई कोई उनको मेरी बहन समझता है. अब हमें यह एक फ़ायदा क़ुदरत ने दे के रखा है. शादी के बाद हमारी उमर का जो फरक है, वह लेके किसीके मन में कोई सवाल पैदा होनेवाला नहीं है. यहाँ नई जगह पे नए लोग और ऑफिस कलीग में से कोई भी कुछ नहीं समझ पाएँगे. यह एक बड़ा भार छाती के ऊपर से निकल गया.

क़ुदरत ने सब तोह ठीक से दिया, लेकिन एक चीज़ से में हमेशा मन ही मन परेशान रहता हुं.

स्कूल लाइफ से आज तक जितने सारे फ्रेंड थे, वह लोग हमेशा लड़किओं के बारे में बात करते थे मुझे मालूम नहीं वह लोग कैसे और कहाँ से यह सब जान के आते थे पर वह लोग बोलते थे की जिस लड़की की हिप्स चौड़ी होती है और पेट के नीचे वाला हिस्सा यानि की कोख और ग्रोइन एरिया चौडा होता है, वह लड़की को गर्भ धारण करने के बाद पेट् में बच्चा धरण करने में आसान होता है. और उन लड़किओं की पुसी भी बडी होते है. मैं आज तक कोई लड़की से कोई सम्बन्ध नहीं बनाया. सो मुझे प्रक्टिकली कुछ पता नहीं था इस लिए मन में डर था माँ का बदन मध्यम स्ट्रक्चर की है. फ्लैट पेट के बाद पतली कमर है. और उनके नीचे ऊँचा ऊँचा हिप्स के साथ उनका वह पूरा एरिया पर्फेक्ट्ली शेप्ड है. ज़ादा चौड़ी या ज़ादा पतला नही उसदिन फ़ोन पर माँ उन की उमर के वजह से दोबारा माँ बनने के बारे में अपनी दुविधा जतायी थी. मैं जानता हु उनके पास भी कम टाइम है. इस लिए हमें शादी के बाद ही बेबी के लिए कोशिश करनी पडेगी. अगर नसीब में है तो ठीक है. अगर नसीब साथ न दे तो माँ के प्रति मेरे प्यार में कोई कमी नहीं आएगी. मैं उनसे प्यार करता हु. मैं उनको खुश रखना चाहता हु. इस लिए मालूम है की वह अगर फिर से माँ बनी तो वह बहुत बहुत खुश होंगी. मुझे उनकी ख़ुशी के लिए सब कुछ करना है. पर एक चीज़ जो मेरे मन को काटे जा रही है की क्या में उनके साथ ठीकसे शारीरिक सम्बन्ध बना पाउँगा!! क्या में उनको परिपूर्ण संतुस्टि दे पाउँगा!! क्यूँ की में जानता हु मेरे लिंग बाकि लोगों से मोटा और थोड़ी लम्बा तो है हि, पर प्रॉब्लम मेरे लिंग कैप को लेकर. उत्तेजना से वह फूल के एक गोल बॉल जैसा बन जाता है और बहुत बड़ा हो जाता है. क्या में माँ के नरम और छोटे शरीर के अंदर उनको बिना कस्ट देकर मेरे यह लिंग ठीक से अंदर डाल पाउँगा!! यहि सब बातें मेरे मन को काट ता है. क़ुदरत ने न जाने क्या रखा है हमारे नसीब मे
 
मैं जानती थी , कोई भी लड़की आप को पति के रूप में पाएगी तो वह दुनियाकी सबसे ज़ादा खुश नसीब होगी. आप का प्यार पाकर , मेरा यह जनम सार्थक हो गया. यह प्रार्थना करती हु, की में आप को हमेशा खुश रख पाऊँ . आप की ख़ुशी में ही मेरी ख़ुशी है. आप मुझे आप के साथ अगर पेड़ की छाव में घर बसा ने के लिए भी कहेंगे तोह में वहां भी मेरा प्यार देके आप को सारी खुशियां देना चाहती हु. ज़िन्दगी की आखरि सांस में भी आप की बाँहों में रहना चाहती हु. मैं आप का दिया हुआ सिन्दूर मांग लेकर मरना चाहती हुं.....??
बोलकर माँ फिर रो पडी मैं बिचलित हो गया. मैं उनको कैसे सान्तवना दूंगा वह समझ नहीं पाया. मेरी सारी बातें, सारा कहना, सारा प्यार उठके आकर गले में अटका हुआ है. मैं भी भाबुक हो गया. मैं धीर से उनको बोला
?? अरे??.दुनियाकी सबसे ज़ादा खूबसूरत और प्यारी लड़की जब रोती है, तब मुझे सबसे ज़ादा कस्ट होता है और वह लड़की अगर मेरी बीवी है तोह उसी कस्ट से मेरा दिल टूट पडता है. फिर भी तुम रोओगी???
मेरी इन बातों से वह थोड़ा खुद को कण्ट्रोल करवाया. और फिर सिसकि लेके थोड़ा हास्के सिचुएशन को हल्का करने लगी खुद ही. प्यार भरी आवाज़ में थोड़ा फेक गुस्सा दिखाके बोली
??बस ..हमेशा झुट बोलके मुझे खुश करने की जरुरत नही मैं जानती हु.. में इतनी खूबसूरत नहीं हु. और में अभी भी आप की बीवी नहीं बनी????
मैन समझ गया वह धीरे धीरे सहज हो रही है. हालां की अभी भी थोड़ा थोड़ा सिसकि की आवाज़ आ रही है , फिर भी खुद को संभाल रही है. मैं भी सिचुएशन को लाइट करने लगा. मेरे दिल की बात, मेरी अन्तरात्मा की बात आसान तरीके से बताने लगा, मैंने कहा
??मैं सच मुच लकी हु..ऐसी सुन्दर प्यारी लड़की को खुद के बीवी के रूप में पाकर. क्या तुम खुद की छाती पे हाथ रख के कह पाओगी की तुम मेरी बीवी नहीं हो????
इस बार वह थोड़ा ज़ादा हास् पडी. और शरमा भी गई. फिर एक सिसकि लेके रोना एकदम बंध करके धीरे से बोलि
?? अगर में आप की बीवी होती तो आप मुझे मेरे नाम से बुलाते??.
मै इस बात पर खुद ही हस पडा मैं माँ से बात करते वक़्त कुछ नहीं बुलाता हु. इस लिए कभी कभी एक अजीब सिचुएशन में पड़ जाता हु और वह लेकर माँ मुझे हमेशा बोलती है. वह नहीं चाहति की में उनका बेटा बनके रहू. वह चाहती है में उनका पति बनके खुद को उनके पति के रूप में स्वीकार कर लु. मैं उन्हें कहा
??मुझे नाना नानी के सामने नाम से बुलाने में शर्म आएगी??.
वह बोली
??तो ठीक है . मम्मी पापा के सामने न बोलिये, लेकिन जब वह लोग नहीं है, तब तोह कह सकते है.??
मैने थोड़ा रुक रुक कर कहा
??हाँ ??वह कह सकता हु??????
बोलके दोनों चुप हो गये, एक दूसरे को फ़ोन के उस तरफ रहके प्यार जताने लगे खामोश बनके. थोडे टाइम बाद में धैर्यपूर्वक बोला
??तो अब बताओ??.??
वह गले में एक मिठास और प्यार लेकर धीरे से कहि
??क्या??????
मै आँख बंध करके फुसफुसाकर बोला
??मेरी मंजु कहाँ जाना पसंद करेगी हमारे हनीमून पे???
उनको पहली बार नाम से बुलाके खुदको एक अलग नशे में डुबा हुआ मेहसुस कीया. वह भी मेरे जैसे प्यार के नशे में बंध होकर फुसफुसाकर बोली
??आप जहाँ लेकर जाएंगे, आप की मंजु आप के साथ जाने के लिए तैयार है????
ऐसे ही एक इमोशनल मोमेंट्स से में उनको नाम से बुलाना चालू किया. और पिछले दो दिन से ऐसे ही चल रहा है. और अब माँ खुद को ज़ादा मेरी पत्नी महसुस कर रही है, और में भी उनको ज़ादा मेरी पत्नी मेहसुस कर रहा हु.
 
लंच ऑवर में माँ का फ़ोन आया. वह मुझे पूछि की में मकान मालिक से मिलके आया की नही पर मैं बिलकुल भूल गया था एक्चुअली पिछले हप्ते में जो पर्दा ख़रीदा था , वह अभी तक लगा नहीं पाया. मैं जिस घर पे रहता हु, वह नया बना हुआ घर है. पार्टीशन करके दिवार वगेरा बनाया. पर विंडोज और दरवाजे पे पर्दा लगाने का बंदोबस्त नहीं किया. सो में जब दुकान से लोग बुलाये पर्दा लगाके फिट कर देणे के लिए तो वह लोग बताया की सारे खिड़की और डोर के ऊपर प्यानल बनाना पड़ेगा . फिर पाइप लगाके पर्दा फिट करना पडेगा. पर में मकान मालिक को बताया था जब घर लिया था की में उनका घर पर कोई कील या कुछ नहीं ठोकूंगा. या तो उनकी नयी पार्टीशन वाली दीवार ख़राब नहीं करुन्गा. सो मुझे उनके पास जाके उनको बताना है और परमिशन लेके आना है. फ़ोन पे कर सकता था पर एकबार सामने जाकर सब प्रॉब्लम सोल्व करना बेटर समझा. और इस बात को लेके काल रात माँ से बात हुआ था आज मुझे जाना था पर गया नही सो उन्होंने अभी फ़ोन पे याद दिलाया. मैं बोला की आज घर लौट ते वक़्त मिलके आउंगा.

ओर उस चक्कर मे मैं रात को लौटने में भी लेट हो गया. वह मकान मालिक आदमी अच्चा है. पर बोलता ज़ादा है. वह मुझे देख के ही बोलने लगा की मेरे नानाजी कैसे है, कब आएंगे यहां, वह कितने अच्छे इंसान है. उनसे दोबारा मिलना चाहते है वगेरा वग़ैरा. मैं यह भी बताया की में शादी करके बीवी को लेकर आ रहा हु, इस लिए घर का यह सब ठीक करना चाहता हु. मेरी शादी सुनके हज़ारों सवाल सुरु किये. मुझे किसी प्रकार से वहां से छुटकारा मिला. रात में डिनर के बाद फिर माँ को फ़ोन किया. मैं दिन भर माँ से उस रिसोर्ट के बारे में बात करना चाह रहा था पर सही तरह से मौका नहीं मिला. इसलिए अभी में उस बात को छोड़ दिया. रिसोर्ट वालो से क्या क्या बात हुआ सब बताया. वह सब सुन के चुप हो गई. उनकी सांस की आवाज़ मिल रही है. मैं थोडे टाइम बाद चुप्पी तोड़के पूछा की क्या वह उसदिन रात में वहां रहना पसंद करेगी? वह यह बात सुनके फ़ोन के उपर ही शर्मा गई. मैं मेहसुस कर पा रहा था वह कितनी शरमाई हुई है. यह सुनके भी जवाब नहीं दिया. मैं फिर पुछा. वह धीरे से, शर्म के साथ बोली की वहां उनके मम्मी पापा के सामने शर्म आयेगा. वह सीधा मेरे साथ हमारे नये घर पे आना चाहती है. मैं समझ गया की वहां नाना नानी के रह्ते हुए, मेरे साथ यानि की उनके खुद के बेटे के साथ सुहागरात मनाने में शर्म और लाज उनको घिरके रखेगी. इस लिए वह यहाँ आ जाना चाहती है. इसी घर पर, जो बस हम दोनों का घर बनेगा, वहां से हमारे नए रिश्ते में कदम रखना चाहती है. मैं उनकी हर खवाइश पूरा करना चाहता हु. वह ऐसे चुप होकर रह गई. मेरा मन ख़ुशी से काँप रहा है. मैं मन में कुछ शक्ति एकठ्ठा करके धीरे से पूछ
??ठीक है. हम मुंबई से दोनों यहाँ आजायेंगे??.
फिर में थोड़ा रुक के बोला
??मैं एक बात पुछ सकता हूँ?????
वह- धीरे से बोली
??पूछिए??
मैने प्यार से एकदम धीरेसे पुछा
??तुम हनीमून नहीं जाना चाहती हो???
मुझे लगा यह बात सुनके वह थोड़ा काँप उठि. शायद अंदर से वह हिल गई. क्यूँ की उन्होंने मुझे जिस तरह कंपकंपाती हुई आवाज़ से जवाब दिया, उसमे से मालूम करना कठिन नहीं की शायद एक दो आँसू भी गिर गया होगा. उन्होंने काँपती हुई आवाज़ से फुसफुसाकर बोली
??मैंने कभी सोचा नहीं था ??की मुझे ज़िन्दगी में दोबारा इतना सुख, इतनी ख़ुशी मिलने का सौभाग्य मिलेगी. मुझे इतना प्यार मिलेगा ??.??
बोलके माँ रुक गई. वह चुपके से रो रही है. मेरे छाती में एक कस्ट होने लगा. मैं उनको रोते हुए नहीं देख सकता. वह ख़ुशी के आँसू हो या दुःख के में उनकी आँखों से एक भी बून्द आँसू निकलने नहीं देना चाहता हु. वह फिर खुदको थोड़ा कण्ट्रोल करके बोली
??मैं जानती थी , कोई भी लड़की आप को पति के रूप में पाएगी तो वह दुनियाकी सबसे ज़ादा खुश नसीब होगी. आप का प्यार पाकर , मेरा यह जनम स्वार्थक हो गया. यह प्रार्थना करती हु, की में आप को हमेशा खुश रख पाऊँ . आप की ख़ुशी में ही मेरी ख़ुशी है. आप मुझे आप के साथ अगर पेड़ की छाओं में घर बसा ने के लिए भी कहेंगे तोह में वहां भी मेरा प्यार देके आप को सारी खुशियां देना चाहती हु. ज़िन्दगी की आखरि सांस में भी मैं आप की बाँहों में रहना चाहती हु. मैं आप का दिया हुआ सिन्दूर मांग मैं लेकर मरना चाहती हुं.....??
बोलकर माँ फिर रो पडी मैं बिचलित हो गया. मैं उनको कैसे सान्तवना दूंगा वह समझ नहीं पाया. मेरी सारी बातें, सारा कहना, सारा प्यार उठके आकर गले में अटका हुआ है. मैं भी भाबुक हो गया. मैं धीर से उनको बोला
?? अरे??.दुनियाकी सबसे ज़ादा खूबसूरत और प्यारी लड़की जब रोती है, तब मुझे सबसे ज़ादा कस्ट होता है और वह लड़की अगर मेरी बीवी है तोह उसी कस्ट से मेरा दिल टूट पडता है. फिर भी तुम रोओगी???
मेरी इन बातों से वह थोड़ा खुद को कण्ट्रोल करके बोली
 
ट्रेन में सब लाइट ऑफ करके सोगये. मैं भी अपने सीट पर एक बेड शीट बिछाके और दुसरेवाला ओढ़कर आंख बंध करके सोया हु. गर्मी का टाइम है लेकिन अंदर का माहौल एकदम ठण्डा है. मैं आखरी बार इस तरह यानि की एक बैचलर आदमी की तरह एमपी में वापस जा रहा हु. अगली बार जब वापस जाउँगा तब में एक मैरिड मैन बनके जौंउगा, अपनी बीवी के साथ वापस लौटुंगा.
पर में तभी भी जानता नहीं था की यह सप्ताह मेरे लाइफ का सबसे बिजी हप्ता बन जाएगा. ऑफिस के काम का प्रेशर सँभालने के साथ साथ मेरा ज़िन्दगी का नया सफर सुरु करने के लिए सारे इन्तेज़ाम में लग पडा मैं घर की सारी जरुरी चीज़ें को एक एक करके अरेंज करके लाकर रख रहा हु. अभी तक में एक सिंगल बेड पे सोता था अब हम दोनों के लिए एक डबल बेड भी ख़रीदा. मुझे एक अच्छा पलंग जैसा बेड पसंद था उसके दोनों साइड में ऊँचा ऊँचा लकड़ी के पैनल में सुन्दर सुन्दर डिज़ाइन किया हुआ. और चारों कोनो में स्टैंड लगा हुआ है . उसमे मच्छर दानी लगाने के लिये. मुझे पसंद था मैंने माँ को फ़ोन करके बताया तो माँ ने बोला की उस टाइप पलंग स्पेसियस घर के लिए अच्छा है. छोटे साइज के घर पर तोवो इन कोने टाइप बेड ज़ादा काम का होता है. मुझे एक्चुअली यह सब मालूम नहीं था तो माँ ने बताया की जब हमारा बड़ा घर होगा तब वह ख़रीदेंगे. लेकिन अब के लिए बॉक्स खाट लेना ठीक रहेगा. सो मैंने उनके कहने पर एक बॉक्स खाट ख़रीदा.उसके नीचे कैबिनेट बना हुआ है. उसमे सामान रखने के लिए अच्छी तरह से बना हुआ है. साथ में नए गद्दे और पिल्लोस वगेरा सब डीप कलर में लिया. और वह छोटा बेड को बाहर हॉल में रख दिया.

मै एक दुविधा में था मुझे शादी के लिए कम से कम तीन चार दिन का छुट्टी चाहिए थी मैंने ऑफिस में नया नया ज्वाइन भी किया. काम का प्रेशर भी है . और मुझे दिखाने के लिए जो रीज़न है वह में कह नहीं सकता. ऑफिस में ज़ादा लम्बा छुट्टी का अप्लाई करूँगा तो मेरा टीम मेम्बर्स कलीग्स तोह पुछेंगे ही में किस लिए छुट्टी ले रहा हु. और में उनको कैसे बताऊँ की में शादी करने जार रहा हु. अगर यह बता दिया तो उनसब को इनवाइट करना पडेगा. और अगर उनमे से कोई मेरी शादी अटेंड करना चाहे तो फिर सब गड़बड़ है. मुझे यह सब छीजें क़ायदे से सम्भालना है. शादी के बाद जब आउँगा तब तो मालूम पड़ेगा की में शादी करके बीवी लेके आया. पर तब में कुछ भी बता के मैनेज कर सकता हु. यह बोल सकता हुन की मुझे जबरदस्ती लड़की दिखाने लेके गये और वहां लड़की पसंद आगयी तो तुरंत एक दिन के अरेंजमेंट में शादी करवा दिये मेरे घरवाले. यह सब बोलके उनलोगों को एक छोटा रिसेप्शन दे दूँगा. बस झमेला खतम. इस लिए में केवल ३ दिन अप्लाई किया . और अगर एक दिन एक्स्ट्रा लगे तो फ़ोन पे बताके लीव ले लुंगा.

नानाजी से जब फ़ोन पे बात हो रही थी तब वह यह सुनके बोल रहे थे अगर कुछ दिन ज़ादा छुट्टी मिलति तो अच्छा होता. पर अब क्या करे. फिर उन्होंने मुझे रिसोर्ट बुकिंग के बारे में सब बताया. ऐसे कम लोगों का शादी सुनके रिसोर्ट वाले चोंक गये. बाद में नानाजी अपने हिसाब से एक स्टोरी बनाके तो बोल दिया था , लेकिन वह लोग पैसे ज़ादा मांगे. रजिस्टर्ड साहब, पण्डितजी, दुल्हन सजाने के लिए ब्यूटीशियन, शादी का समान वग़ैरा, स्टेइंग एंड लॉजिंग..सब मिलाकर ज़ादा लिया. नानाजी मुझे कुछ बोलने के लिए झिझक रहे थे. मैं समझ गया वह कुछ बोलना चाहते है. लेकिन बोल नहीं पा रहे है. मैंने पूछा की क्या हुआ नानाजी , क्या वह लोग और कुछ मांगते है. तो नानाजी बोले नहीं पर, वह लोग तो ऐसा सुन्सान शादी देखके संमझा शायद हम लड़की भगाकर लाक़े शादी करवा रहे है. कोई गेस्ट या रिलेटिव्स अटेंड नहीं कर रहा शादी. इस लिए वह लोग जान बुझके सब ज़ादा रेट लगाया. और भी बहुत कुछ अवेलेबिलिटी है रिसोर्ट मे. वह लोग बोलना चाह रहे थे . पर मैंने तो यह सब सुनके ही और आगे बात नहीं बढाया. फिर वह लोगों ने कहा की अगर दूल्हा या दुल्हन से एकबार बात होता तो वह लोग कुछ एमेनिटीज के बारे में बात कर सकते है. हो सके तो तुम पता करलो. क्या कहना चाहते है या क्या कुछ है. मैं नंबर. एसएमएस कर देता हु.
थोड़ि देर बाद नानाजी का एसएमएस आया तो मैंने रिसोर्ट के नम्बर में कॉल किया. मेरा परिचय दिया की अगले ट्यूसडे को एक शादी बुकिंग हुआ. हम बस ४ लोग आयेंगे. मैं ही दूल्हा हु. आप लोग कुछ एमेनिटीज के बारे में बोलना चाहते है. वह लोग मुझे विश किया पहले. फिर मेरे लाइफ का ऐसा एक महतपूर्ण अध्याय उन लोगों के रिसोर्ट से सुरु हो रहा है, इस लिए भी अभिनन्दन जताया. फिर बताया वह लोग शादी के सब बंदोबस्त के साथ शादी के बाद का कुछ फैसिलिटीज भी प्रोवाइड करते है. उन लोगों का रिसोर्ट मुंबई में एक खाड़ी के पास है. जो खाड़ी आगे जाकर अरब सागर में मिला. यह लोग शादी के बाद दूल्हा दुल्हन के सुहागरात के लिए सुन्दर सुन्दर स्टीमरप्रोवाइड करता है. यह स्टीमर रिसोर्ट के पास खाड़ी में एक जेति बनाया प्रायवेट, वहां है. पार्टी चाहे तो रात भर वहां खड़ा रख सकते है, या तो खाड़ी में उनलोगों का आदमी चला सकता है. छोटा छोटा प्राइवेट स्टीमर. ऊपर के डेक में छोटा सिटींग अरेंजमेंट. और एक कमरा. चारों तरफ से हवा आने के लिए बडी बड़ी ओपन खिड़कियाँ है. और डेक से सीधा एक सीडी नीचे गया. वहाँ नीचे एक रूम है. अच्छा बेड, टॉइलेट, टीवी, फ्रीज, कपबोर्ड़, का बंदोबस्त है. इसी रूम को वह लोग सुहागरात के रूम जैसा फूलोसे सजाके देते है. नीचे जाकर ऊपर का डोर लॉक करदेने में से, और कोई डिस्टर्ब नहीं कर सकता. रात भर अपने हिसाब से सुहागरात मनाव. मैंने फ़ोन पर ऐसे सब खबर लिया और रेट भी पूछ लिया था
 
मैं मेरे मुह को अब उनके दूसरे कान के पास लेके जाके चूमा तो वह उनके सर को घुमाके मेरे दूसरे कंधे के ऊपर लेके गई. और गर्दन को थोड़ा हिलाकर मुझे और जगह बना दि. मैं मेरा हाथ उनके कमर को छोड़के उनके पीठ पे लाया और मेरी उँगलियाँ उनके ब्लाउज के नीचे से अंदर घुस गई. मुझे मेरी उँगलियाँ को उनके ब्रा का स्पर्श मिला. मैं पागल हो गया. और मेरा मुह खोलके उनके गोरे और मुलायम कंधे पे एक हल्का बाईट कर दिया. माँ तभी एक तेज सिसकी के साथ उनके जननांग को खुद मेरे लिंग के ऊपर प्रेस कर दिया.में समझ गया अब वह क्या चाहती है. मैं झट से मेरा मुह और नीचे करके फ़ाटक से उनके क्लीवेज में मेरा नाक डूबो दिया और जोर से एक सांस लिया. तभी उनके हाथों की उँगलियाँ मेरे पीठ के ऊपर ज़ोर से दबके बैठ गई. मेरे गले में उनके नरम नरम बूब्स का हल्का हल्का टच लग रहा है दोनों तरफसे. ऐसे होनेसे लग रहा है मेरे पाजामे के अंदर ही में झर जाऊंगा. लेकिन में यह नहीं चाहता था. में उनके अंदर झरना चाहता हु. मैं खुद को थोड़ा कण्ट्रोल करके सीधा होकर खड़ा हो गया और दोनों हाथ से उनकी पीठ पकड़ के उनके चेहरे को देखा अब मेरे आँखों में नशा उतर गया. मैं उसी नशीली नज़र से उनके चेहरा को देख रहा था. उनके नरम नरम पतले गुलाबी होठ काँप रहे थे. वह भी आंखे खोलकर मुझे देखि. उनको भी नशा हो गया. हम दोनों एक दूसरे की आँखों के अंदर देख रहे है. दोनों की सांस तेजी से बह रही है. मैं मेरे बॉल्स के अंदर की खलबली को कण्ट्रोल करने के लिये, मेरे होठो को धीरे धीरे नीचे ले जाकर उनके माथे के पास ले गया और उनके माथे को चुमा. फिर उनके नाक को धीरे से चुमा. फिर उनके ठोड़ी को. हर चुम्बन के टाइम वह कुछ पल के लिए अपनी आँख मूंद के मेरे प्यार को महसुस कर रही है. दोनों की गरम साँसें दोनों के चेहरे के ऊपर महसुस कर रहे थे. उनके गुलाबी होठ अब मुझे अपनी तरफ खीच रहे है. मैं मदहोश होकर मेरी आँखे बंद करके धीरे धीरे मेरे होठ उनके होंठो के ऊपर ले गया. मेरे होठ टच हो गये . वह एरिया बहुत नरम और गरम है.. मैं और अच्छी तरह से महसुस करने के लिए मेरे होंठो को हल्का खोलते ही अचानक मेरे दिमाग में कुछ संकेत गया. मैं तुरंत आंख खोला. और देखा की मेरे होठ और माँ के होंठो के बीच उनका हाथ रखा हुआ है और में उनकी नरम हथेली पर चूम रहा था उनसे नज़र मिलतेही उनके आँखों में एक शर्म और मुस्कराहट दिखाइ दिया. मैं रुक गया. समज नहीं आया अचानक उन्होंने ऐसा क्यों कर दिया. मैं अपनी सांस को कण्ट्रोल करते करते फुसफुसाकर कहा
"क्या हुआ!??
वो अपनी हथेली को वैसेही रखकर अपना चेहरा आधा छुपाके नज़र झुका ली और फुसफुसाकर बोलि
??और नही...बस??
मै थोड़ा निराश हो गया. अचानक ऐसे रुक ने के कारन मुझे थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था मेरा लिंग उसकी पसन्दीदा जगह पे घूसने के लिए बेताब हुआ है. फिर भी धीरे से पुछा
??क्यों!!??
वो अब नज़र उठाके मेरी तरफ देखा और रुक रुक के बोली
??आप को....मैं..आपके पास चाहिए थी ना!! पास ही तो आगयी...??
मैन शाम को जो एसएमएस किया था ?? मुझे मेरी बीवी मेरे पास चाहिए??, उसी बात को लेकर यह कही है. पर मुझे और रुका नहीं जारहा है. मैं उनके अंदर घुसाकर मेरे लिंग के फुले हुये बडे कैप को डीप में ले जाकर मेरे बॉल्स का सारा बीर्य उनके अंदर छोड़ के शांत होना चाहता हु. मैं आवाज़ में और प्यार और पैशन लेकर फिसफिसाया
??नही....और पास चाहिए??
बोलके मेरे दोनों हाथों से उनको मेरी तरफ खिचता. हु अपनी हथेली वैसे ही हम दोनों के होंठो के बीच रख़कर, थोड़ा नट्खट सा बनके आँखों में और मुस्कराहट लेकर एक दम फुसफुसाकर बोली
??तो?? और टाइम आने दीजिये....??
मै समझ गया अब हु किसी भी हालत में कुछ करने के लिए तैयार नहीं है. शायद उनको खुद को और वक़्त चाहिए उनके बेटे के पास जो अब उनके पति बनने जारहा है, उसके पास खुद को पूरी तरह सोपनेके लिये. मैं उनकी इच्छा के खिलाफ कुछ भी कदम उठाके उनको दुःख नहीं पहुचाना चाह्ता था वह अपना तन मन पिछले १८ सालों से और किसी को दिया नही. नाहीं और किसी को अपने दिल में पति के रूप में बिठाना चाहा. लेकिन आज वह अपनी सब चीज़ें मुझे??..केवल मुझे देनेके लिए तैयार है. मेरी पत्नी बनने के लिए तैयार है. और मुझे इसका सम्मान देना चहिये. मुझे मालूम है वह तो अब बस मेरी है. ज़िन्दगी भर उन्हें प्यार करने को मिलेगा. और में भी केवल उनको ही प्यार करना चाहता हु. अपनी बीवी के रूप में पाना चाहता हु, केवल इस जनम में नही, अगले सात जनम तक.
 
कह के कुछ पल ऐसे खडी होने के बाद वह मुड़ी और जाने के लिए कदम रख. जैसे वह मुड़ी और आगे बढ्ने की कोशिश किया, में फट से मेरा लेफ्ट हैंड से उनका राईट हैंड पकड़ लिया. और वह रुक गई. लेकिन मुझे घूमके देखा नही. उनको टच करते ही मेरा शरीर काप उठा और वह भी हल्का सा काप गई. मैं एकदम धीरे से कहा
" मुझे नीद कैसे आयेगी....तुमने अपना हाथ मेरे बालों में जो फिराया नही"
वह कुछ जवाब भी दिया नहीं और जानेके लिए हाथ भी नहीं छुडवाया.. बस मेरी तरफ पीठ करके खड़ी रहि. उनके सांस के साथ साथ पीठ हल्का हल्का फूल रहा है. मैं चेयर छोड़के धीरे से उठा. उनका हाथ मेरे हाथ में रख के ही उनके सामने गया. वह मेरे से हाइट में छोटी है. उसके ऊपर नज़र झुकाने के साथ थोड़ा सर भी झुक गया उनका. मैं उनका चेहरा नहीं देख पा रहा हुन ठीक से हमारे बीच फासला बहुत ही कम है. जैसे की दोनों अगर जोर से सांस लेके छाती फुलाए तो दोनों का छाती टच हो जाएगा. ऐसी पोजीशन पे खड़े होकर मुझे उनका नाक दिख रहा है, नाक के सामने वाला भाग साँस के साथ साथ फूल रहा है और थोड़ा थोड़ा काँप भी रहा है. और उनके क्लीवेज का पैसेज क्लियर नज़र आरहा है. . मख्खन जैसे मुलायम दोनों बूब्स का ऊपर का भाग ब्लाउज के ऊपरवाले हिस्से से थोड़ा नज़र आरहा है. मुझे और रुका नहीं गया. मेरा हाथ उनका हाथ छोड़ दिया. फिर में दोनों हाथ से उनका पेट् टच करके, रगड के ले जाके कमर की तरफ पक़डा. उनके पूरे बदन में एक कम्पन महसुस कर रहा हुन और उनकी साँसें भी बदल रही है. मेरी छाती में एक तूफ़ान जैसा चल रहा है. मेरा एक हाथ उनके पेट् के ऊपर की साड़ी के ऊपर है. लेकिन दूसरे हाथ उनके नरम, मांसल पेट को छु के कमर के पास पकड़ा हुआ है. मेरी नज़र उनके ऊपर झुका हुआ है. मैं हम दोनों के बीच वाले गैप से देख पारहा हुन मेरा लिंग पाजामे के अंदर रहके भी फूल के ऊँचा हो गया. मेरे ग्रोइन एरिया में एक तम्बू जैसा हुआ है. मेरी भी साँसें धीरे धीरे तेज हो रही है. मैं मेरे हाथों को उनके कमर से रब करके पेट के तरफ लाया और फिर कमर पे ले गया. साथ ही साथ मेरा सर नीचे करके मेरा फोर हेड उनके फोर हेड के ऊपर जहाँ से सर के बाल सुरु होटे है, वहां टच करवाया. धीरे धीरे हमारे बीच का फसला कम होते जा रहा था हम में से कोई भी आगे नहीं जा रहा है , फिर भी हम दोनों का शरीर एक दूसरे की तरफ बढ्ने लगा. मैं पहले मेरी छाती पे उनके नरम बूब्स का स्पर्श महसुस कीया. फिर उनका नाक मेरी छाती पे टच किया. फिर उनके पूरा शरीर मेरे शरीर से मिल गया. उनकी नाक अब मेरी छाती पे जहाँ टी-शर्ट का बटन खुला हुआ था, उसी एरिया में चिपकाके रखदी. उनकी गरम सांसे मेरी स्किन पे टच हो रही है. वह उनके दोनों हाथो को मेरे आर्म्स के नीचे से पीछे ले जाकर ऊपर की तरफ मोड़ के मेरा कन्धा पकड़ लिया .. मैं उनके मुठ्ठी का ग्रिप मेरे कंधे पे महसुस कीया. मेरा चिन उनके सर के ऊपर रखा हुआ है. मैं उनके पेट् से रगड के दोनों हाथ पीछे पीठ के ऊपर लेके गया. और एक हाथ से उनके ब्लाउज और कमर में बढ़ा हुआ साड़ी के बीचवाले ओपन एरिया में मेरी उँगलियाँ रगड़ने लगा. और दूसरे हाथ से ब्लाउज के ऊपर कंधों के पास वाले एरिया को सहलाने लगा वह बस बीच बीच में अपनी मुठ्ठी की ग्रिप लूज़ कर रही है और फिर टाइट करके मेरे कंधो को पकड़ रखी है. हम दोनों की सांस अब बहुत तेज चल रहा है. ऐसे हम दोनों एक दूसारे को अपने शरीर के ऊपर मिलाके कुछ टाइम एक दूसरेको महसुस करने लगे. मैं लम्बाई में भी उनसे ज़ादा था और शरीर के गठन में भी. इस लिए ऐसा लग रहा है की मेरे लंबे चौडे शरीर के ऊपर उनका हलका फुलका नरम छोटा शरीर आराम से पड़ा हुआ है. मुझे मालूम है मेरा सख्त लिंग उनके पेट् पे लगा हुआ है. और वह जरूर उसको महसुस किया. फिर भी मेरा लिंग क्या चाहता है यह बताने के लिए में मेरे हाथों से उनकी पतली कमर पकड़के थोड़ा और अपनी तरफ खिचा. वह अब बिलकुल मेरे बदन में चिपक के लग गयी और उनका ग्रोइन एरिया मेरे साथ टच करके मुझे कसके पकड़ली. वह अपना नाक थोड़ा थोड़ा मेरे गले के पास स्किन पे रगड रही है. उनके बूब्स की गर्मी मेरा शर्ट क्रॉस करके मेरी छाती पे महसुस हो रहा है. मेरा तना हुआ लिंग उनके नरम पेट के ऊपर और जोरसे प्रेस होने लगा. मैं पागल सा हो गया. मुझसे और रुका नहीं गया. मैं उनके बालों के अंदर अपना नाक डूबो के उनके बालों की महक लेने लगा. और अपने दोनों हाथ उनके पूरा पीठ पे सहलाने लगा. वह भी धीरे धीरे उत्तेजित हो रही थी. उनके हाथ अब मेरा कन्धा छोड़के मेरा पीठ के ऊपर घूम घूम के मेरे शरीर को महसुस करनेलगी. मैं थोड़ा दूर हो गया और हमारे बीच थोडि जगह बनाके मेरी नाक बालों में से रगड के उनके लेफ्ट कानन को स्पर्श करके गरदन पे लेके आया. और मेरे होंठो से उनकी गर्दन को छुने लगा. इस पोजीशन पे वह अपना मुह मेरे लेफ्ट कंधो के ऊपर ले जाकर उनकी चिन को ऊपर की तरफ कर दिया. मैं अब मेरी नाक और होठो को रगड ते रगडते उनके गले में गया. मैं जैसे ही इतना नीचे तक झुका , मेरा लिंग का तम्बू अब उनके ग्रोइन एरिया में टच हो रहा है. मैं उनके गले को चूम ते छूते मेरी कमर को बंद करके आगे बढ़ाके, मेरा सख्त लिंग को उनके ग्रोइन में प्रेस कर दिया और दोनों हाथों से उनकी पतली कमर कस के पकड़ के मेरे लिंग के ऊपर खीच लीया. उनके मुह से सिसकारियां निकलने लगी.
 
मैने रूम में आके दरवाजा लॉक नहीं किया , ऐसे ही बंध कर दिया. माँ मेरा बिस्तर बराबर फटाफट करके गई. मैं डिनर से पहले जब टीवी देख रहा थ, शायद तब आकर यह सब कर गयी होगी. पिछले कुछ दिन से जैसा चल रहा था, आज थोड़ा अलग लग रहा है. कुछ दिन से रात को डिनर के बाद में माँ से फ़ोन पे बात करते आरहा हु. सो आज मुझे वह चीज़ मिसिंग लगा सोने से पहले. पर माँ को अब कॉल नहीं कर पाऊंगा. दोनों रूम में बात होगी तो नाना नानी को जरूर पता चलेगा सो में स्टडी टेबल पे बैठा और मोबाइल पे एसएमएस टाइप किया
" क्या कर रही हो?" फिर माँ को सेंड कर दिया. तुरंत रिप्लाई आया. शायद माँ भी मेरे जैसी शर्म फील कर रही है. उन्होंने लिखा
" सोने की तैयारी"
मै अब क्या लिखुं सोचते सोचते टाइप किया
" लेकिन में नहीं सो पाउंगा"
इस बार थोड़ा टाइम लिया उन्होंने. समझ नहीं पाई में ऐसे क्यों लिखा. इस लिए उन्होंने पुछा
" क्यूं....क्या हुआ"
मैने होठो पे थोड़ा मुस्कराहट लाकर लिखा
" क्यूँ की सोने के टाइम मेरी जो आदत थी, वह आज कल नहीं हो पा रही है, इस लिए तो आज कल नीद नहीं अति ठीक से"
उनहोने लिखा
" वह क्या..!!!."
मैन लिखा
" सोने से पहले गरम दूध पीने की और तुम्हारे हाथ से मेरे सर के बालों में स्पर्श पाने की आदत पड़ गई"
मै वेट करते रहा की वह क्या रिप्लाई देगी मुझे ज़ादा इंतज़ार नहीं करना पडा उन्होंने लिखके भेजा
" तो अब....!!! "
मैने कुछ सोचा और टाइप किया
" अब क्य...मुझे नीद नहीं आएगी. मैं जागा रहूंगा और मेरी तबियत ख़राब हो जाएगी. तुम्हे क्या?. तुम आराम से सो जाओ "
मेरे में बदमाशी चढ़ गई. मैं सेंड कर दिया. पर वह कैसे रियेक्ट करेगी पता नहीं था पर जब उनका रिप्लाई आया तब पता चला वह मेरी बदमाशी पकड़ लिया. उन्होंने लिखा
"उफ्फ्फफ्.... ठीक है. मैं दूध लेके आती हु"
यह पड़के मेरे अंदर खुन दौडने लगा. मैं सोचा नहीं था की माँ इतनी आसानी से मेरे मन की इच्छा जान जाएगी. जिस तरीके से आज आने के बाद से वह मुझे दूर रख रही है, उसी को सोचके में कल्पना नहीं किया था की वह अभी मुझसे मिलने आएगी. मैं आने के बाद से चाह रहा था की माँ के साथ एकानत में एक मुलाकात हो. और पूरी शाम माँ मुझे जो गुस्सा दिला रही थि, तभी से उनको मेरे बाँहों में पाने के लिए मन चंचल हो रहा था मैं स्टडी टेबल से उठके एकबार बेड पे जाके बैठा. फिर एक बेवकूफी सा लगा. तोह फिर में चेयर में जाके बैठा. चेयर था विथाउट हैंडल. सो में टेबल की तरफ न बैठके यानि की अंदर की तरफ पैर न घुसाके, साइड वाइस में बैठा हु, सो लेफ्ट साइड में टेबल और राईट साइड में चेयर का बैक रेस्ट है. मैं सोच में डुबा था अभी तक हमारी शादी हुई नही. शास्त्र सम्मति से अभी तक हम पति पत्नी नहीं बने. पर यह भी सही है की अब हम माँ बेटे भी नहीं रहै. हम एक दूसरे को मन से पति पत्नी मान ना शुरू कर दिया. मन एक दूसरे को पति पत्नी के हिसाब से ग्रहण कर लिया. मैं एक हप्ते से मस्टरबैट किया नही. मेरे बॉल्स के अंदर सारा बीर्य जमा होकर हमेशा भरा रहता है. कभी कभी निकल जाना चाहता है. मैं हमारी सुहाग रात में एक दूसरे को परिपूर्ण तृप्ति देणे के लिए इंतज़ार कर रहा था लेकिन अब शरीर के अंदर एक ऐसा कम्पन हो रहा है, की अगर आज मेरा बॉल्स खाली होकर सब माँ के शरीर के अंदर चला जाये तोह कोई खेद नहीं होगा. मेरे इसी सोचके अंदर अचानक माँ डोर खोलके अंदर आयी. हाथ में दूध का गिलास है. साड़ी पहनी हुई है लेकिन साड़ी का आँचल पीछे से घुमा के लाकर सामने कमर में घुसाया हुआ है. इस में उनके एक साइड का फ्लैट गोरी मुलायम पेट् और ज़ादा नज़र आरही है. आँचल घुसाने ने के कारन साड़ी टाइट होकर छाती के ऊपर से गयी और उसमे उनके गोल गोल मध्यम साइज की बॉब्स और सामने की तरफ उठके दिखाइ दे रहा है. उन्होंने बाल को एक क्यजुअल जुड़ा बना के रखी है, जो ढीला होकर पीछे गर्दन के ऊपर पडी है. उनको देखतेही मेरा लिंग एकदम सख्त होकर अंडर वियर के अंदर फूलने लगता है. जैसे की अभी वह कपडा फाड् के बाहर आना चाहता है और सही जगह पे घूसने के लिए तैयार है. पर में खुद को कण्ट्रोल किया. बैठे बैठे पैर क्रॉस था, तोह उसको दबाके रख दिया. माँ अंदर आकर रुख गई. मेरे से नज़र मिलाके शर्मा गई. और नज़र झुकाके मुस्कुरा दि. फिर वह वहि खड़े खड़े पीछे हाथ ले जाकर धीरे से डोर बंध करती है. और स्टडी टेबल के तरफ चलके आने लगती है. मैं उन्ही को देख रहा हु. यह महसुस करके वह नज़र उठाके मुझे देख नहीं रही है. मेरे नजदीक आकर टेबल के पास खड़ी हो गई. और फिर गिलास टेबल पर रख दिया. एक हफ्ते से हम जितना सारा इंटिमेट और सीक्रेट बात कही थि, वह मेरे दिमाग में झलक दे दे के जा रहा है. मैं कुछ न बोलके केवल देखे जारहा हु. वह चुप होकर वहां खड़ी रहि. लेफ्ट हैंड की उँगलियाँ से टेबल का किनारा स्पर्श की. वह धीरे से होंठो पे मुस्कराहट क़ाएम रखते हुए बोली
" अब दूध पी लीजिये और सो जाइये"
 
ट्रैन में सो सो के माँ के बारे में सोच रहा था अगर हमारी तक़दीर हमें आज ज़िन्दगी के इस मोड़ पे नहीं लाती, तोह बहुत कुछ मालूम नहीं पडता. माँ को बचपन से माँ के रूप में ही देखते रहा हु. वह हमेशा एक अच्छी माँ थी और साथ ही साथ एक अच्छी बेटी. फादर के डेथ के टाइम वह केवल १८ साल की थी. तभी इस दुनिया में खाली एक बेटे को सहारा करके जीने की कसम खाई दोबारा और किसीको उनके दिल में बिठाने के बारे में कभी सोचा नही. एक आदर्श माँ बनके, एक आदर्ष बेटी बनके रह गयी अपनी खुद की सारी खुशीओ को विसर्जन देकर. मुझे बड़ा करने में और खुद की मम्मी पापा के साथ रहके उनके देखभाल करने के अंदर ही वह अपना ख़ुशी ढूँढ़ती थी. नानी कितना बार कह चुकी है की घर का खाना बनाने के लिए एक बाई रख लेते है. पर माँ हमेशा कहती है की जब वह है ही तो बाहर के लोगों से खाना पकाने की क्या जरूरत और वह भी चाहती थी घर के काम काज में जुटे रहे तो अपना टाइम भी बित जायेगा और शरीर भी एक्टिव और फिट रहेगा. वह दिन भर कुछ न कुछ करती है लेकिन देखके लगता नही. उनका पूरा शरीर, हाथ, पैर इतना सुन्दर है, लगता है जैसे की वह उनके पापाकी लाडली बेटी है और आराम से ज़िन्दगी बिताती है, यानि की फिल्में देख के, नावेल पढ़कर, दोस्तोँ के साथ घूम फिरके, ब्यूटी पारलर और स्पा में टाइम बिताके, खुद को प्रोपरली मेन्टेन करके रखी है. उनके स्किन अभी भी टीनएज गर्ल जैसी है, देख के पता नहीं चलता वह ३६ की है. उनके हाथों की, पैरों की उँगलियाँ और नेल्स कितना सही तरीके से खुद ही मेन्टेन किया है. देखके लगता नहीं इन्ही हाथों से दिन भर कितना काम करती है. उनका पूरा शरीर कितना नरम और मुलायम है, यह कल रात मुझे पता चल गया. शायद नेचर ने उनको यह गिफ्ट दे रखा है. शायद उनके नसीब में यह शादी लिखी हुई थि, इस लिए वह आज भी एक नौजवान कुंवारी लड़की जैसी दीखती है. पहले से ही उनके सब चीज़ें मुझे अच्छी लगता थी पसंद थी पर जब से शादी की बात चल रही है, तब से उनके वह सब चीज़ें मुझे और खुबसुरत, प्यारी और सेक्सी लगती है. पहले नानी साथ में मिलके घर का काम काज करती थी, पर नानी की उमर बढ़ रही है. अब माँ अकेले ही पूरा घर का सब कुछ सँभालते आरही है. आज भी दोनों टाइम माँ प्यार से सब के लिए खाना बनाती है. और उनके हाथ का खाना मुझे दुनिया का सबसे स्वादिस्ट लगता है. और नसीब के फेरे में मुझे अब पूरी ज़िन्दगी उनके हाथ का खाना खाने का सौभाग्य हो रहा है.
इतना सैक्रिफाइस किया. शायद इस लिए आज उनको फिर से एक नई ज़िन्दगी मिलने जा रही है. केवल तीन ही साल उनको अपने पति का प्यार मिला. कितनी ख्वाहिशे, कितने सारे सपने सब दिल में दफ़न कर करके रख दिये थे लेकिन में चाहता हु उनकी सारी ख्वाइशे, सारे अधुरे सपने पूरे करनेका समय आया है. अभी वह एक माँ नही, एक पत्नी बन चुकी है. अपने बेटे को जो अब उनका पति बनने जा रहा है, उसको अपना तन मन सब कुछ सोंप ना चाहती है. वह भी पति के प्यार को प्यासी है. ज़िन्दगी का हर पल पति के प्यार से गुज़ार ना चाहती है. अपनी हर खुशी, हर ग़म पति से शेयर करना चाहती है. मैंने मन में कसम खा लिया. एक पत्नी को अपनी पति से जो जो मिलना चाहिये, में सब कुछ उन्हें देना चाहता हु. वह हमेशा से एक घरेलु औरत है. अपने घर संसार की देखभाल करना, पति सेवा करना, बच्चों का ख़याल रखना--इन सब में ख़ुशी से जीना चाहती है. मैं भी हमेशा जिस बीवी का ख्वाब देखता था, वह ऐसे ही एक घरेलु खूबसूरत लड़की का था मैं भी खुद को अब उनको बीवी के रूप में पाके दुनिया का सबसे खुश नसीब इंसान समझता हु.
आज ट्रैन में डिनर के लिए टिफ़िन में वहि मेथी पराठा बनाके दिया माँ ने. कल शाम मेथी का पराठा और दही खाया था फिर टीवी देखते देखते माँ को एसएमएस किया था की " मेरी सारी थकान तुम्हारे हाथ का बना हुआ मेथी पराठा खाके दूर हो गई."
तब तोह वह किचन में डिनर बना रही थी. मोबाइल चेक नहीं पर पायी. लेकिन बाद में भी उसका कोई रिप्लाई दिया नहीं था पर अब टिफ़िन खोलके पता चला वह उस बात को पढ़ा और मन में रख दिया था
काल शाम को नानाजी से यहि बात हुआ की आज जाके शेरवानी और अंगूठी का मेज़रमेंट देना है. नज़दीकी कोई भी दुकान में नही. सब नानाजी को जानते है. सब का शक़ होगा क्यों और किस लिए यह ले रहा हु. इस लिए अहमदाबाद सिटी में जाके लेना पडा फिर डिनर के बाद नानाजी और कुछ बाते किये नही. क्यूँ की वह जानते थे में थका हुआ था फिर सुबह उठके निकल ना है उनके साथ. इस लिए जल्दी वह भी सोने चले गए और मुझे भी सोने के लिए बोल दीये. सब जल्दी डिनर करके अपने अपने रूम में चले गये.
 
आज संडे का दिन था पर आज सबसे ज़ादा बिजी दिन था सुबह घर से निकले थे और आधा दिन पूरा बाहर गुजार के जब घर लौटा, तब लंच टाइम ओवर हो चुका था इसलिए आज का खाना भी लेट हुआ. माँ और नानी पहले खा लिया था मैं और नानाजी खाने बैठे तो नानी पास में बैठके देखभाल करने लगी लेकिन माँ ही खाना परोस रही थी. कल रात डिनर टेबल पे भी ऐसा हुआ था माँ अब सब के सामने सहज होकर सब कुछ कर रही है. लेकिन सब के सामने मुझे एक भी बार नज़र उठाके डायरेक्टली देख नहीं रही है. एक्चुअली इस बार घर पर में और माँ दोनों ही एक अजीब सिचुएशन में पड़ गये. हम फ़ोन पे तो बहुत सारी बातें करते है. हमारे आनेवाले फ्यूचर को लेके दोनों एकसाथ सोच ने भी लग गये. हम एक दूसरे के पास सहज होगये थे. पर लॉन्ग डिस्टेंस में जितना कम्फर्टेबले थे, आमने सामने वैसा हो नहीं रहा था स्पेशली नाना नानी की प्रेजेंट मे. हम छुप छुप के दोनों प्रेमिओं की तरह मिलजुल गए थे फ़ोन पे. पर उनलोगों के सामने वैसा होने में एक शर्म आया. लास्ट टाइम से अचानक ऐसा बदल उनलोगों का नज़र में जरूर आयेगा. सो माँ और में दोनों ही शायद अलग अलग ऐसा ही सोचा. इस लिए वह मेरे सामने तो आरही है पर मेरे से नज़र घुमाके रखी है. या तो वह मेरे सामने नाना नानी से बात कर रही है, नहीं तो नज़र हटाके कुछ काम कर रही है. पर जब नाना नानी दूसरी तरफ बिजी है तब वह मुझे छुप के देखति है. फिर नज़र मिलने के कुछ टाइम बाद शर्मा के झुका लेती है. उनके नरम गुलाबी पतले होठो पे मुस्कान मुझे पागल कर देती है. उनको मेरे सामने ऐसा चलते फिरते, बातें करत, हस्ते हुए देखके मेरे छाती में हरपल एक हल्का सिरसिरानी अनुभुति होता है. मेरा पेनिस मेरे अंडरवियर के अंदर सख्त होकर रह रहा है. मैं यह चीज़ बहुत ध्यान से छुपा रहा हुँ. मैं ऐसे तो थका था और साथ में आज नानाजी के साथ अहमेदाबाद जाके शादी की शेरवानी पसंद करके मेज़रमेंट वगेरा देके आया. फिर जेवेलरी दुकान में मेरी ऊँगली का नाप दिया अंगूठी बनाने के लिये. फिर हमने दो बड़े ट्रेवल बैग ख़रीदे. फिर और कुछ इधर उधर का घर का सामान ख़रीदते ख़रीदते लेट हो गया था हम टैक्सी से सब सामान लेके घर आगया. इतने सब के वजह से जब खाना खाके में थोड़ा आराम करने के लिए लेट गया तो तब पता नहीं कब नीद आगई. और शाम को नानी जी मुझे जगाया तो में फ़टाफ़ट उठके रेडी होकर निकल पडा. निकलते वक़्त माँ ड्राइंग रूम में डोर पे खड़ी थी. मैं नाना नानी से बीदा लेके एक बार कुछ पलों के लिए माँ की तरफ देखा. उनकी आँखों में हरबार माँ का प्यार और ममता देख के जाता था, इस बार वह नहीं था इस बार ऐसा लगा की पति जब पत्नी को छोड़के दूर जात है, तब पत्नी के नम आँखों में जो प्यार और दर्द रहता है, जिसके जरिये वह अपनी दिल की सारी बातें बिना कहके बता देती है, वह नज़र से मुझे देख रही थी. और मेरा मन भारी हो गया.
 
आज उनके मन में मेरे ऊपर जो बिस्वास और भरोसा की बिल्डिंग बनना सुरु हुआ,
में खुद अपने हाथों से उसमे एक एक ब्रिक जोड़के उसको और स्ट्रांग और ऊँचा बनाना चाहता हु.
हमारे रिश्ते को और मजबुत और मेहफ़ूज़ बनाना चाहता हु.
वह उनकी तरफ से गाँठ बांध लिया.
अब मेरा बारी है उसकी सही तरह से हिफाजत करके आगे बढाने की.
मेरा बहुत मन कर रहा है माँ को, मेरी बीवी को उसी भीगी अबस्था में देखने के लिये.
फिर भी में मन को शांत करने की कोशिश करके बाहर हॉल में अटैच्ड बाथरूम में चला.
बाज़ार से आते टाइम मुझे बहुत एक नंबर वाली प्रेशर आरही थी. अब फिर से वह प्रेशर आई तो में टॉयलेट में जाकर सुसु करने लगा.
मेरा पेनिस को एक हाथ से पकड़ के रखा था मुझे मेरा पेनिस बहुत गरम मेहसुस हुआ.
कुछ दिन से मेरा पेनिस हमेशा थोड़ा थोड़ा फुला हुआ रह रहा था.
और आज तो शाम से एक दम सख्त होकर रह रहा था. मुझे उसकी तरफ देखके माँ के भीगे चेहरे पे गाल के ऊपर भीगे ज़ुल्फ़ों और गोरे शोल्डर पे थोडे पानी की बुन्दे , साथ में टॉवल लपेटके स्तन के ऊपर पकड़के रखने वाली तस्वीर नज़र के सामने आ गई. और मेरा पेनिस अचानक मेरे हाथ के अंदर ही तेजी से फुलने लगा.
मैं बस और थोडे वक़्त के इंतज़ार के लिए मन को समझाकर बाहर आया.
टॉयलेट से बाहर कदम रखतेहि बैडरूम से मेरे मोबाइल की रिंगिंग आवाज़ सुनाई दि.
मैं परदे के पास जाकर माँ को पुछा
"मेरा मोबाइल रिंग हो रहा है"
मै सीधे तरीके से अंदर जाने के लिए न बोलकर ऐसे पुछा.
माँने अंदर से जवाब दिया
"आके उठा लीजिये"
मै अंदर जाते ही माँ को देखा. वह ड्रेसिंग टेबल की मिरर के सामने खड़ी होकर उनके बाल कँघी कर रही थी.
उनके बाल बहुत लम्बे भी है घने भी.
बाल को सामने की तरफ ले जाकर वह प्यार से कँघी कर रही है.
मिरर के थ्रू मेरे से नज़र मिलते वह मुझे स्माइल देकर नज़र झुकाके कँघी करते रहि.
वह एक लाल रंग की ब्लाउज और मेरून-येलो-गोल्डन रंग का एक साड़ी पहनी हुई है.
माँ को डीप कलर के कपडे में देख के और उनके नहाये हुये फ्रेश चेहरे को देख के मुझे एक नयी कोई लड़की जैसी लग रही थी.
लग नहीं रहा था की वह मेरी माँ है,
जिसको बचपन से मेरे पास देखते आरहा था. उनके गले में मंगल सूत्र और उनके मन की ख़ुशी के रंग से उंनका बदन पूरी तरह अलग लग रहा है.
मैं स्माइल करके जाकर मोबाइल लिया.
मेरा मकान मालिक है.
मैं सरप्रीईसड हो गया. बूढ़े ने आज तक कभी फ़ोन नहीं किया.
हमेशा में ही फ़ोन करता था. रेंट भी ऑनलाइन ट्रांसफर करके में बता देता था. और आज किसलिये फ़ोन कर रहा है.
इस चिंता के साथ में फ़ोन रिसीव किया
"हल्लो" उधार से आवाज़ आया
"बेटा तुम आगये" मैने बोल "हान जी". आज ही आया" उनहोने कहा
"बहु भी आयी है न साथ में?
"मुझे अब समझ में आया.
उनको पता था में शादी करके बीवी को लेके आरहा हु.
मैंने बोल "हान जी वह भी आयी है" "अछछ..च्चा...बढिया है".
"मेरी शुभ कामनायें है तुम लोगों के लिए बेटा,कुछ चीज़ का जरुरत है तो बता देना". और पटेल साहब कैसे है"?
येह अंकल तो नानाजी का फैन बन गया एकदूम.
मैंने कहा."थैंक यू अंकल और नानाजी ठीक है."
"अच्छा अच्छा...वह आये तो मुझे मिलने के लिए जरूर कहना. चलो बेटा रखता हु, खुश रहो"
"जी अंकल"
बोलकर मेंने फ़ोन कट कर दिया.
माँ बालों को कँघी करते करते मुझे देख रही थी फ़ोन पे बात करते हुए. फ़ोन कट ने के बाद उन्होंने आँखों के इशारे से पूछि कौन था.
मैने मोबाइल रखते रखते बोल
" लैंड लॉर्ड"
माँ आँखों में एक सवाल को लेकर पुछी
"उनको मालूम है"
मैने कहा "हा..घर का कुछ काम करवाने के टाइम बोल दिया था की मेरी बीवी आरही है"
फिर माँ होठो की स्माइल दबाते हुये नज़र घुमा लि और मिरर में खुद को देखते रहि.
मैं माँ को एक सरप्राइज देणे के लिए धीरे से अलमारी के पास गया और लाकर खोल के मेरा उनके लिए ख़रीदा हुआ नेकलेस निकल के अलमारी बंद किया.
यहाँ से माँ ऐसे पोजीशन पे खड़ी है की ना वह डायरेक्टली मुझे देख पा रही है , न मिरर के थ्रू.
मैंने नेकलेस के केस को पीछे छुपाकर उनकी तरफ मुडा.
माँ तब झुक के ड्रेसिंग टेबल से कुछ उठा रही थी.
मैं धीरे धीरे उनके पास जाने लगा.
माँ मिरर में देखति हुई मांग में सिन्दूर लगा रही थी.
 
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