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Romance Sex kahani रंडी से प्यार

अध्याय 28

मैं खुशी की लहर में सवार था ,सब कुछ ठीक ही चल रहा था,शकील मेरी बात मान रहा था,काजल का ऑपरेशन सक्सेसजफुल था और उसका पैसा भी जुगाड़ हो चुका था,थोड़ा पैसा एक मंत्री मोहोदय ने दिया था बाकी मेरे जेब से गया था,चीजे इतनी ठीक हो गई थी की मुझे कभी कभी अपने भाग्य पर भी भरोसा नही होता था.

तरुणा एक दिन मुझसे कालेज में मिली

"यार काजल वंहा होस्टल में बैठे बैठे बोर हो जाती है क्यो ना वो भी अपनी पढ़ाई पूरी कर ले "

तरुणा के बात से मैं सोच में पड़ गया

"क्या वो पढ़ी लिखी है "

"हाँ उसने 12th तक की पढ़ाई साइंस में की थी मैं सोच रही हु की उसे कालेज में दाखिला दिला दिया जाए "

"लेकिन अभी भी शकील के लड़के उसे ढूंढ ही रहे है "

"तो ढ़ंढने दो ना एक गर्ल्स कालेज में उसका दाखिला करवा देते है ,प्रिंसपल से बात मैं और भाई (अविनाश) कर लेंगे ,काजल से मैंने एक बार पूछा था की उसे क्या बनना है उसने कहा की वो वकील बन कर बेसहारा लोगो के लिए केस लड़ना चाहती है ,तो क्यो ना उसे लॉ से ही ग्रेजुएट किया जाए "

मैं अभी भी शकील के डर में था लेकिन तरुणा बहुत ही कॉन्फिडेंट दिख रही थी...

"ठीक है जैसा आपलोगो को अच्छा लगे."

"गुड ,और एक अच्छी खबर है अविनाश काजल से मिलने को तैयार हो गया है "

तरुणा की बात सुनकर मैं उछल पड़ा.

"क्या ये कैसे हुआ "

"बस तरुणा का जादू है ,भाई मेरी बात बहुत कम ही नही मानता ,मैं उसके पीछे पड़ी थी और वो मान गया "

मेरे दिल में ना जाने कितने सवाल घूम रहे थे,

"क्या हुआ मेरा भाई स्मार्ट है लेकिन तेरी काजल को लेकर नही उड़ जाएगा जो तू इतना सोच रहा है "

मुझे सोचता हुआ देख कर तरुणा ने कहा और मेरी तंद्रा भंग हुई

"नही नही ऐसी कोई बात नही है ...."

मैं हँस तो रहा था लेकिन मैं उस मोमेंट को मिस नही करना चाहता था जब अविनाश और काजल एक दूसरे से मिले..

*************

आखिर वो दिन तय कर लिया गया जब अविनाश और काजल मिलने वाले थे ,अविनाश गर्ल्स होस्टल में जाकर उससे मिलने वाला था ,मुझे खास हिदायत तरुणा और काजल दोनों ने दी थी की मैं वंहा उस समय नही आ सकता,मेरे लिये ये बात और भी चुभने वाली थी की काजल भी मुझे वंहा उस समय नही चाहती थी ..

लेकिन इससे मेरी बेताबी और भी बढ़ गई थी मैं सीधे अविनाश से मिला

"भाई थैंक्स अपने मेरे लिए इतना कुछ किया ,और आप काजल से मिलने वाले भी हो "

अविनाश मुझे देखकर मुस्कुराया

"अरे छोटे इसमें थैंक्स की क्या बात है ,और मेरी बहन ने इतना जिद किया की मुझे उससे मिलने जाना ही पड़ा,मैं तो चाहता था की तू भी मेरे साथ रहे लेकिन ....लेकिन पता नही को तरुणा मना कर रही है ,शायद वो नही चाहती की शकील को इसकी भनक लगे .."

मैं जानता था की शकील के लोग मेरा पीछा नही कर रहे थे,मैंने ये बात तरुणा को भी बताई थी लेकिन नही ..वो अब भी चाहती थी की अविनाश काजल से अकेले में मिले...

"ठीक है भाई अगर ऐसा है तो आप ही जाओ कब जा रहे हो .."

"कल सुबह 11 बजे के करीब "

"कहा मिलोगे"

"वही गर्ल्स होस्टल के मीटिंग रूम में जंहा लड़कियों के पेरेंट्स मिलते है "

"ओके."

***************

मैं वंहा से निकल तो गया लेकिन मेरे दिमाग में एक आंदोलन चल रहा था ना जाने अविनाश और कजाल का ऐसा क्या रिश्ता था जो मुझे भी आने से मना किया गया था ,काजल ने मना किया था या नही ये तो मैं नही जानता लेकिन तरुणा जरूर मेरे आने के सख्त खिलाफ लग रही थी ..

मैंने निश्चय किया था की मैं ये पता लगा कर रहूंगा,और मैं दूसरे दिन 11 बजे वंहा पहुच गया

अविनाश अंदर गया मैं भी अंदर गया लेकिन दूसरे तरीके से मैं उस कमरे के पास ही खड़ा हुआ बाहर एक खिड़की से अंदर का नजारा देख पा रहा था,अविनाश बड़े ही आराम से बैठा था ,

थोड़े देर में फिर से कमरा खुला...काजल और तरुणा अंदर आयी लेकिन तरुणा तुरंत ही वापस निकल गई अभी भी दोनों ही बस एक दूसरे को देख रहे थे..

अविनाश विस्मय से अपना मुह खोले हुआ था ,वही काजल नार्मल ही लग रही थी लेकिन थोड़ी नर्भस थी ,वही तरुणा के चहरे में ना जाने क्यो बेहद ही खुशी थी ...

"प्रिया तुम ....."

तरुणा के जाने के बाद ही अविनाश बोल उठा काजल नजर गड़ाए खड़ी थी .

"ऐसा नही हो सकता ये तुम नही हो सकती मेरी प्रिया की ये हालत नही हो सकती "

अविनाश दूर ही खड़ा था उसकी आवाज भर्रा गई थी

"वक्त का खेल है अवि ,मेरे पास आओ "

कजाल ने अपनी बांहे फैला दी ,अविनाश किसी बच्चे की तरह दौड़ता हुआ आया और उससे लिपट गया..

"प्रिया,ये क्या हो गया हे,भगवान मैंने कहा कहा नही ढूंढा तुम्हे "

दोनों के नैनो से मोती झर रहे थे ,

"इसमें तुम्हरी कोई गलती नही है अवि "

"जिसकी गलती है मैं उसे कभी नही छोडूंगा प्रिया ,उस रंडी काजल को मैं कभी माफ नही करूंगा "

काजल ने गहरी सांस ली ,उधर मेरी सांस ही रुक सी गई थी

"काजल ने जो किया उसकी सजा तो उसे कुदरत ने दे दी अवि,हमशे उसने जो धोखा किया उसकी सजा उसे वैसे ही मिली,उसने तुमसे प्यार एक झूठा नाटक किया मुझे अपनी दोस्ती के जाल में फसाया और उसे भी झूठे दोस्ती और प्यार का शिकार होना पड़ा,"

अविनाश अब काजल से दूर हट चुका था वो उसे ही देख रहा था..

"तुम्हे और कोई नाम नही मिला जो उस कमीनी का नाम रख लिया "

इस बार काजल मुस्कुराई

"ये नाम तो मुझे शकील ने दिया था ,शायद अपनी प्रेमिका की याद में जिसे उसने अपने ही हाथो से मार दिया "

अविनाश का हाथ काजल के चहरे में था,उसके चहरे का भाव अब बदलने लगा था..

"तो वो शकील था जिसने तुम्हारा ये हाल किया ,इसके लिए वो जिंदगी भर पछतायेगा "

अविनाश की आवाज में गुस्से की कम्पन साफ दिख रही थी ..

"नही अवि नही ,वो बेहद ही ताकतवर है कोई भी गतल कदम खतरनाक हो सकता है ,मैं तुम्हे फिर से नही खोना चाहती ,मैं राहुल को नही खोना चाहती "

काजल की आवाज कांप गई

"प्रिया अब मैं वो सीधा साधा लड़का नही हु जो कभी तुम्हारा दोस्त हुआ करता था "

"हा वो तो जानती हु,मेरा प्यारा अवि अब कितना खतरनाक हो चुका है,जिस दिन मुझे शकील के लोगो के बीच से उठाकर लाये थे मैं तब ही समझ गई थी की ये कोई बड़ा शातिर आदमी है लेकिन जब पता चला की ये तुम हो तो यकीन ही नही हुआ की मेरा अवि ऐसे कैसे हो गया "

"वक्त .वक्त इंसान को बदलने पर मजबूर कर देता है ,अब राहुल को ही देखो ,पहले मैं भी उसके जैसे सीधा साधा था लेकिन उस रंडी ने ."

काजल ने तुरंत ही अवि के होठो पर अपनी उंगली रख दी

"जो हुआ उसे भूल जाओ अवि अब हमारे पास इस जीवन को फिर से शुरू करने का एक अवसर है "

"शकील को उसके किये की सजा तो मिलेगी प्रिया ,मैं उसे बर्बाद कर दूंगा ,उसने तेरे ऊपर ना जाने कितने जुल्म ढाए है इसकी सजा तो से मिलेगी "

काजल बड़े ही प्यार से उसे देख रही थी

"जरूर मिलेगी लेकिन अभी नही "

काजल के चहरे में वो खुशी देखकर मेरा भी दिल झूम गया था ऐसा लगा जैसे जाकर अभी उन लोगो के बीच में कूद जाऊ और काजल और अविनाश को गले से लगा लू लेकिन ,मैं खुद ही चोरों की तरह छिपा हुआ था...

तभी कोई नुकीली चीज मेरे माथे में टकराई

"ख़बरदार जो हिले तो यही भेजा खोल दूंगा "

मैं जब पलटा तो वो होस्टल का चौकीदार था

"यंहा क्या कर रहे हो चलो इधर "उसकी आवाज बेहद ही कड़क थी

"छोड़ दो भैया अपनी अपनी महबूब से मिलने आया होगा "

ये तरुणा की आवाज थी जो मुझे बेहद ही नाराजगी से घूरे जा रही थी ,उसे देखकर मेरी और भी हालत खराब हो गई

"अरे बेटी ये साला खिड़की से ताका झांकी कर रहा था "

"अच्छा ."तरुणा ने मुझे घुरा

"वो मैं ..वो "

"चुप रहो,जब बोला था तुम्हे की तुम्हे नही आना है तो तुम यंहा जासूसी कर रहे थे "

तरुणा गरजी

"नही मैं वो.."

"क्या वो ..चलो अब अंदर तुम्हारी क्लास लेती हु "

मैं घबराता हुआ उसके साथ गया,वो मुझे लेकर उसी कमरे में ले गई जंहा काजल और अविनाश दोनों थे ..वी दोनों ही मुझे देखकर चौके ,

"ये देख काजल तुम्हारा आशिक तुम्हारी जासूसी कर रहा था "

"नही नही ऐसी कोई बात नही है "मैं सकपकाया

"ये गलत बात है राहुल ऐसा नही करना चाहिए तुझे अपने प्यार पे भरोसा नही है क्या ?"

इस बार अविनाश ने कहा

"मैंने ये कब कहा "अब मैं सच में परेशान हो गया था क्योकि काजल कोई भी रिएक्शन नही दे रही थी और ये लोग बात को कहा से कहा ले जा रहे थे ,

"सच में राहुल तू चूतिया तो था लेकिन अब शक्की भी होई गया है "

काजल के होठो में एक व्यंगात्मक सी मुस्कान थी

"अरे ऐसा कुछ भी नही है,मैं भी अविनाश सर के साथ आना चाहता था लेकिन मुझे मना कर दिया गया,अब शकील भी केशरगढ़ से है और अविनाश भी,और शकील का चहरा भी अविनाश को देखकर उतर गया था तो .. तो मैं इतने दिन से जानने को बेताब था की अविनाश सर, काजल और शकील के बीच आखिर संबंध क्या है ,बस इसीलिए "

सभी ने अपना चहरा बनावटी रूप से सोचने वाला किया

"गलत बात गलत बात "तरुणा ने सर हिलाया और सभी जोरो से हँस पड़े

"अब तो तुम सब जान गए होंगे "

काजल मुस्कुरा रही थी

"हा और अविनाश सर आप अभी शकील को कुछ भी नही करेंगे ,मेरे पास प्लान है "

"ओहो तेरा मजनू तो प्लान की खान ही है,हर चीज के लिए इसके पास प्लान पहले से तैयार रहता है "तरुणा की बात से काजल थोड़ा शर्मा सी गई ......
 
अध्याय 29

हम सब अभी गर्ल्स होस्टल के कमरे में बैठे हुए थे,अविनाश और काजल अभी भी इमोशनल लग रहे थे,

"भाई मैं तुम्हारे और काजल के बारे में बहुत ही खुश हु ,इस बेचारी ने बहुत दुख देखे है इसे हमेशा खुश रखना "

अविनाश काजल के बालो को सहलाते हुए बोला

"अरे भैया काजल इसकी लैला है और ये काजल का मजनू ..क्यो मजनू "

तरुणा ने अपने चिर परिचित अंदाज में हमे चिढ़ाया ,काजल ने झट से उसके कन्धे पर अपना हाथ मार दिया

"अच्छा मैं चलता हु कुछ जरूरी काम है "

अविनाश उठ खड़ा हुआ ,साथ ही तरुणा भी खड़ी हो गई

"अच्छा मैं भी चलती हु ,लैला मजनू को थोड़ा अकेले छोड़ दिया जाए ना जाने कितने अरमान दिल में दबाए बैठे होंगे "

तरुणा हँस पड़ी वही उसकी बात से मैं और काजल शर्मा से गए थे.

"अरे रुको ना सालों बाद मिले और अभी जा रहे हो "

काजल ने अविनाश को देखते हुए कहा

"जिसने हमारा ये हाल किया है उसको सबक भी तो सिखाना होगा ,राहुल तुम अभी प्रिया के पास रुको हम तुम्हारे प्लान पर बाद में काम करना शुरू करेंगे अभी के लिए मुझे और भी थोड़ी तैयारी करनी होगी .."

मैंने हा में सर हिलाया और तरुणा और अविनाश वंहा से चले गए ,

ये अजीब सी सिचुएशन थी आज हम दोनों इतने दिनों के बाद अकेले थे लेकिन बोलने को कुछ भी नही था,बस एक नर्भसनेश हम दोनों को ही घेरे हुए थी ,मैं भी कुछ बोलने से हिचकिचा रहा था और वो भी ,तभी फिर से दरवाजा खुला ,वो तरुणा थी

"अरे अकेले हो फिर भी दूर दूर बैठे हो ,चलो उठो अब क्या यही सुहागरात मनाने का इरादा है काजल इसे अपने कमरे में ले जा "

काजल ने अजीब निगाह से तरुणा को देखा

"अरे ऐसे क्या देख रही है ,तेरा बालम आया है आज तो कुछ हो ही जाएगा "

तरुणा की बात सुनकर काजल ने उसे झूठे गुस्से वाली आंखे दिखाई लेकिन उसके होठो में अब भी शहद सी प्यारी शर्मीली सी मुस्कान थी ,

"चलो चलो ये प्रेजेंट्स के लिए विजिटिंग रूम है और तुम दोनों एक दूसरे के पेरेंट्स नही हो बल्कि तुम दोनों को मिलकर किसी का पेरेंट बनना है "तरुणा फिर से खिलखिला उठी

"क्या मेडम आप भी "मैं पहली बार अपना मुह खोला था

"अरे ये क्या मेडम मेडम लगा के रखा है ,अब से मुझे तरुणा कहना,आखिर तुम मेरी बहन के पति देव जो हो तो मेरे तो जीजा जी हुए ना"

तरुणा के बात से तो मैं भी शर्मा गया था

"ओहो शर्मीले जीजा जी क्या दीदी के साथ अकेले समय नही बिताना ...ऐसे नही बिताना चाहते तो आप जा सकते हो "

मैं थोड़ा शर्म में था तो थोड़ा हिचक में मुझे समझ नही आ रहा था की मैं क्या जवाब दु

"तरुणा बस कर यार हम जा रहे है अपने कमरे में "

काजल उठ कर मेरा हाथ पकड़कर मुझे खड़े करती हुई बोली और मैं किसी रोबोट की तरह उसके पीछे पीछे चलाने लगा ,होस्टल की लडकिया अजीब निगाहों से मुझे देख रही थी ,इतना डर तो मुझे उस रंदीखाने में भी नही लगता था,जितना इन शरीफ लड़कियों के निगाहों से लग रहा था ..

काजल के कमरे में दो बिस्तर लगे हुए थे दोनों ही सिंगल बेड थे,पास ही में एक अलमारी सी बनी थी जिसमे कुछ किताबे थी और एक स्टडी टेबल ,ये पूरी तरह बॉयज होस्टल की ही तरह था लेकिन बस ज्यादा साफ सुधरा था चीजे अपनी सही जगह पर थी ,

मुझे एक बिस्तर में बिठा दिया गया था ,

"देखो ये काजल के कमरे के साथ साथ मेरा भी कमरा है तो जो भी करना है जल्दी जल्दी कर लेना ,ऐसे 1 घण्टे में तो काम हो जाएगा ना,नही हुआ तो कोई बात नही मैं दूसरे कमरे में सो जाऊंगी "

तरुणा के चहरे में अर्थपूर्ण मुस्कान थी

"चुप कर कमीनी हम ऐसा वैसा कुछ भी नही करने वाले ,तू अपनी फेंटेसी हमारे ऊपर मत थोप "

काजल ने तरुणा के बांहों में एक मुक्का मारा

"हाय काश मेरे पास भी इतना प्यार करने वाला मजनू होता तो मैं तो रात दिन बस .."

तरुणा इतना बोलकर खिलखिला उठी जबकि काजल का चहरा शर्म से लाल हो गया था,मैंने काजल को इतना शर्माते हुए नही देखा था,

"चुप कर कुछ भी बोलते रहती है "

इस बार काजल की आवाज भी शर्म की वजह से धीमी हो गई थी

तरुणा के काजल का चहरा अपने हाथो में पकड़ लिया

"ओह हो देखु तो मेरे लाडो का चहरा शर्म से सुर्ख हो रहा है ,कितनी प्यारी लग रही है कही किसी की नजर ना लग जाए ,"

फिर तरुणा का चहरा मेरी ओर हो गया

"ए हीरो मेरी बहन को ज्यादा परेशान मत करना ,"

मैंने हा में सर हिलाया ,तभी तुरुणा के होठो में एक शैतानी मुस्कान खिल गई

"ऐसे थोड़ा परेशान कर सकते हो "

इस बार वो खिलखिलाते हुए बाहर को गई ,

"अंदर से कुंडी लगा लेना नही तो कोई आ जाएगा "

वो बाहर जाते जाते कह गई ,उसकी बात सुनकर काजल बुरी तरह से शर्मा गई थी वही हाल मेरा भी हो गया था,हम दोनों इतने दिनों तक एक ही कमरे में कई दिन एक ही बिस्तर में साथ सोए भी लेकिन इतनी अजीब सिचुएशन हमारे सामने कभी नही आयी थी ,काजल दूसरे बिस्तर में जाकर बैठ गई थी ,

जिससे मिलने की इतनी तम्मना थी ,जिसे निहारने को मैं रातों को तड़फता था,जिससे बात करने को मैं व्याकुल रहता वही आज मेरे सामने थी और मेरे मुह से एक शब्द भी नही फुट रहे थे,मैं उससे निगाहे भी नही मिला पा रहा था ना जाने काजल कितना शर्मा रही थी लेकिन उससे ज्यादा तो मैं ही शर्मा रहा था...

"कुछ बोलोगे भी "आखिर काजल ने ही वो शर्म की दीवार गिराने की पहल की

"क्या बोलूं "

"कुछ भी "

मेरी नजर सीधे काजल पर गई वो मुझे ही देख रही थी लेकिन मेरी नजर मिलते ही उसने नजर झुका ली ,मैं उसके टमाटर से लाल हुए चहरे को देख रहा था,मुझे अपनी ओर देखता हुआ पाकर उसका चहरा और भी सुर्ख हो गया था,उसकी उन अदांओ में मैं अपनी जान लुटा सकता था आखिर मैं उठा और सके करीब जा बैठा ,वो मुझसे थोड़ा दूर सरकी जिससे मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ..

"जानती हो मुझे कैसा लग रहा है "मैंने बहुत ही हल्की आवाज में कहा

"कैसा 'उसकी नजर अभी भी नीचे थी

"जैसे आज हमारी सुहागरात हो "

"धत "वो और भी शर्मा गई और मैंने उसे अपनी बांहों में समेट लिया ,वो भी मेरे बांहों में घुलने लगी थी ..

"काजल मैं तुमसे बहुत प्यार करता हु "

"ये भी कोई कहने वाली बात है"काजल मेरे सीने में सिमटे हुए बोली

"क्या तुम मुझे अपना चहरा नही दिखाओगी "

मैं उसका चहरा नही देख पा रहा था

"नही "उसके आवाज में एक शरारत थी जरूर उसके होठो में मुसकान भी रही होगी ,वो मेरे सीने से और भी कस कर सट गई

"जानती हो मैंने इस दिन का कितना इंतजार किया है "

"मैंने भी "

"फिर भी मुझे अपना चहरा नही दिखा रही "मैंने नीचे देखने की कोशिस की उसके बाल ही मेरे सामने थे

"नही "

मैं अपनी उंगलियों को उसके गालों पर ले गया और उसके कोमल गालों को सहलाने लगा,वो मेरे सीने में ही मचली मुझे उसकी हल्की सी हंसी सुनाई दी .

"तुम्हारे गाल कितने कोमल है "

मैं अब भी उसके गालों को सहला रहा था ,उसने अपने को थोड़ा उठाकर मेरे सीने में एक किस किया और फिर से मुझे कस लिया ,

"अरे अपना चहरा तो उठाओ "

"ना "

"मुझे तुम्हारे गालों को चूमना है "

मैं अधीर हो रहा था

"ना"उसने बड़ा ही प्यारा सा जवाब दिया लेकिन उसकी ना में भी एक मदहोशी थी एक शर्म था ,मैंने उसके चहरे को अपने हाथो से उठाया वो बिना किसी विरोध के मेरे सामने थी ,उसकी आंखे बंद। थी ,उसका प्यारा मुखड़ा मेरे आंखों में भर रहा था,उसके लबो में एक हल्की सी हलचल थी जो मुझे अपनी ओर खिंच रही थी ,मेरे होठो ना जाने किस आकर्षण से उसके होठो से मिल गए..

हम दोनों ही एक दूसरे को भिच कर एक दूसरे को अपने में समाने को आतुर हो गए थे,हमारे होठ एक दूसरे के गीलेपन से भीग रहे थे,कभी हमारे दांत उसने गढ़ जाते तो कभी जीभ उसके मुह में चली जाती ,

दुनिया जैसे खो गई थी काजल मुझसे और सट गई थी मैं अपनी बांहों में उसे कसकर भरे हुए था,मैं उससे इंच भर भी दूर नही था लेकिन हम और भी पास आने को तड़फ रहे थे,हमारे होठो एक दूसरे के मुह की गहराई को नाप रहे थे वो और भी गहरे जाने को बेताब थे,कोई दीवार नही थी कोई पर्दा नही था,कोई हसरत भी नही थी ,और शायद हम भी नही थे,

जो था वो बस एक अहसास था एक प्यार का अहसास एक दूसरे का होने का अहसास एक दूसरे में घुल जाने का अहसास,और दुनिया में कुछ भी तो नही बचा था .....
 

अध्याय 30

काजल के होठो की मिठास अभी भी मेरे होठो में थी और उसका प्यार दिल में ,रह रह कर मेरे होठो में एक मुस्कान सी खिल जाती थी ,मुझे उसका प्यार भरा ये तोहफा याद आ जाता,लेकिन अभी सिर्फ खुशियां मनाने का वक्त नही था मेरे सामने एक बड़ी चुनोती थी वो था शकील के मोबाइल में सॉफ्टवेयर इंस्टाल करना और साथ ही bhadebhaiya उसकी जानकारी पहुँचाना ..

मैं एक ही झटके में शकील को बेसहारा और मजबूर कर देना चाहता था उसके सारे व्हाइट और ब्लैक पैसे का खात्मा और साथ ही पुलिस तक कुछ ऐसे ठोस सुबूत जिससे वो धोबी का कुत्ता बन जाए ..

शकील ने मेरे मांगने पर अपने मोबाइल की जांच करने के लिए मुझे दे दिया,ताकि मैं पता लगा सकू की उसके साथ धोखा किसने किया है ,साथ ही मैंने इंटरनेट सर्वर के जरिये उसके दूसरे कम्प्यूटर में भी घुस गया था मैंने सारी सेटिंग्स कर ली अब वक्त था की डार्क वेब में जाकर चैटिंग करके उस हैकर को तैयार करने का जिससे मैं बाते किया करता था ..

Rocky :हैल्लो

BadeBbhaiya:हम्म

Rocky :पूरी तैयारी हो गई है आप अपना काम चालू कर दीजिए

BadeBbhaiya:ओके मुझे एक्सेस भेज

Rocky :ओके

BadeBbhaiya:ठीक है कल सुबह धमाल के लिए तैयार रहना

Rocky :थैंक्स

BadeBbhaiya:अभी से बोलने की कोई जरूरत नही है जब काम हो जाए तब बोलना ....

मैं अब चैन से सोने वाला था जो किसी मारपीट या माथापच्ची करके नही होता वो कुछ कोडिंग के जरिये होने वाला था ये मेरी समझदारी थी या बेवकूफी ये तो वक्त ही बताता लेकिन मैं बहुत ही खुश था,मैं खुश था की शकील की आधी दौलत मेरी हो जाएगी और वो होगा जेल में और मैं अपनी काजल के साथ आराम की खुशियों भरी जिंदगी बिताऊंगा ....

*************

इधर दो कम्प्यूटर स्क्रीन पर

BadeBbhaiya:काम हो गया मुझे एक्सेस मिल गया

I_am_a_dog :गुड अब आज रात में ही उन दोनों की गांड मार दे ,और कल से अपनी जिंदगी ऐश के साथ जीने को तैयार हो जा

BadeBbhaiya:एक बात पुछू तुम इस लड़के में और शकील में इतना इंटरेस्ट क्यो ले रहे हो

I_am_a_dog :हा हा हा ...उससे तुम्हारा कोई मतलब नही होना चाहिए ,तुम अपने काम और पैसे से मतलब रखो

BadeBbhaiya:फिर भी शकील का तो समझ आता है लेकिन उस लड़के ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है

I_am_a_dog :उसने नही लेकिन उससे जुड़े कुछ लोगो ने जरूर बिगाड़ा है ,उसके जरिये मैं सब को रुलाऊंगा,अब और बात नही कल के tv चैनल में खबर मुझे दिख जानी चाहिये .

BadeBbhaiya:ओके

******************

ये सुबह मेरे जीवन की सबसे मस्तानी सुबह होने वाली थी ,जब मेरी नींद खुली तो मैं बाहर हो रहे शोर शराबे को सुनकर खुश हो गया मुझे जो करना था वो बस इतना था की वो बस इतना की मुझे अपने चहरे में दुख रखना था ताकि शकील को भनक भी ना लगे की उसकी इस तबाही के पीछे कौन है ...

मैंने अपना मोबाइल देखा जिसमे अविनाश और तरुणा के कई मिस काल थे मोबाइल साइलेंट में होने की वजह से मैं सुन नही पाया था ,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई शायद मुझे उठाने में थोड़ी देर हो गई थी ये खबर सब जगह फैल गई होगी ,लेकिन मैंने अभी उन्हें काल करने का फैसला रद्द कर दिया अभी तो मैं शकील के मजे लेना चाहता था,या हो सकता है की पुलिस ने उसे पहले ही अरेस्ट कर लिया होगा ,मैं खिड़की से बाहर की ओर झांका मैंने पुलिस की दो जीप वंहा देखी साथ ही कुछ न्यूज़ वाले भी दिखे जिन्हें पुलिस अंदर आने से रोक रही थी ,मैं मुस्कुराता हुआ अपने को सम्हाला और थोड़ी सीरियस शक्ल बना कर बाहर निकला ही था की मुझे मेरी ओर पुलिस वाले आते दिखे .

"हैंड अप बिल्कुल नही हिलना "उन्होंने मेरे ऊपर ही बंदूख तान दी थी मैंने तुरंत ही अपने हाथ उठाये की मेरे हाथो में हथकड़ी डाल दी गई और उन्होंने मुझे ऐसे दबोचा जैसे मैं कोई अपराधी हु ,

"सर हुआ क्या है??"

"ले चलो इसे गाड़ी में "

पुलिस वाले में कोई जवाब ही नही दिया ,वो मुझे हवेली से बाहर के आंगन में लाये मैंने नजर घुमाई लेकिन शकील मुझे कही नही दिखा उसके कुछ लोग ही दिखे जिन्हें पुलिस ने घुटनो के बल बिठा रखा था उन्होंने मुझे भी घुटनो के बल बिठा दिया ..

"भाई ये क्या हो रहा है "मैंने पास ही बैठे हुए शकील के आदमी से पूछा जो सर झुकाए हुए मेरे बाजू में घुटनो के बल बैठा था उसने सर उठा कर मुझे देखा और उसके चहरे का भाव तुरंत ही बदल गया मानो वो मुझे खा जाने वाली नजर से देख रहा हो ..

"मादरचोद तुझे शकील भाई कभी नही छोड़ेंगे,और जो तेरी रांड है ना जिसके लिए तूने ये सब किया देख भाई उसकी क्या हालत करते है ,अविनाश के साथ मिलकर गेम खेला था ना तूने उसे होस्टल में छिपा कर रखा था,अब देखना मादरचोद शकील भाई अब गेम खेलेगा तेरे और तेरी उस रांड के साथ ."

ऐसे लगा जैसे मेरा पूरा खून ही चूस लिया गया हो ,ये क्या हो रहा था मैंने ऐसा तो नही सोचा था,शकील को काजल का पता चल गया और ये भी की ये सब मैंने किया लेकिन शकील कहा था ..??

"शकील कहा है ?"

मेरे होठो से अनायास ही निकल गया ,जिसे सुनकर वो जोरो से हंसा

"वो तेरी मा चोद रहा है "

वो और जोर से हंसा लेकिन कुछ ही दूर खड़े पुलिस वाले ने उसे जोर से लात मार दिया

"राहुल कौन है ??"

अंदर से आते हुए एक अफसर ने कहा ,मैंने अपना हाथ उठा दिया

"इसे अलग जीप में बिठाओ और बाकियों को अलग "

वो गरजा और कुछ पुलिस वाले मुझे पकड़ कर दूसरे जीप की ओर जाने लगे ..

"लेकिन साहब मैंने किया क्या है "मैं हिम्मत करके अफसर से बोला

"मादरचोद तेरे ऊपर धोखाधड़ी का आरोप है ,अबे इतना सा तो तू है तूने मंत्री साहब के पत्नी का अकाउंट हैक किया और चूतिये पैसे अपने ही अकाउंट में डाल दिए ,तेरे कारण शकील की भी लग गई ,चलो अच्छा हुआ धरती से कुछ तो बोझ कम होगा "

मैं स्तब्ध था ,बिल्कुल ही अवाक ,हर चीज समझ के परे थी की क्या हुआ है क्या हो रहा है,मुझे अपने मोबाइल की याद आयी जिसमे तरुणा और अविनाश के मिस काल थे कही मेरी काजल तो खतरे में नही थी ,मेरी सांस ही बंद हो गई थी ....

मेरे बाहर निकलते ही न्यूज़ चेनल वालो ने मुझे घेर लिया था .

मेरी फ़ोटो उतारी जा रही थी लेकिन एक क्रिमिनल के तौर पर पुलिस ने मुझे सबसे बचा कर जीप में बिठा दिया ....

***************

"काजल ,काजल कहा है .."

मैं अविनाश को देखते ही खड़ा हो गया था ,मैं अब भी पुलिस स्टेसन में बैठा हुआ था और पुलिस मेरे खिलाफ चार्ज सीट बना रही थी ,अविनाश के साथ साथी कुछ लड़के भी वंहा आये थे और साथ ही एक वकील भी था ,

अविनाश को देखते ही मैं खड़ा हो चुका लेकिन अविनाश ने मेरे सवालों का कोई जवाब नही दिया बल्कि

'चटाक '

मेरा गाल मानो शून्य हो गया था ,अविनाश बेहद ही गुस्से में लग रहा था ..

"ये क्या तमाशा कर रहे हो यंहा पर ये पुलिस स्टेशन है "

पास खड़ा इंस्पेक्टर भड़का लेकिन फिर अविनाश के चहरे और उसके साथ आये लड़को को देखकर थोड़ा शांत हो गया .

"मादरचोद तेरे कारण मेरी प्रिया फिर से उस शकील के जाल में फंस गई ,अगर उसे कुछ हुआ ना तो तुझे मैं जिंदा जला दूंगा "

अविनाश बेहद ही गुस्से में लग रहा था ,और काजल का नाम सुनकर मैं सकते में आ गया था

"क्या???क्या हुआ काजल को "

"शकील उसे होस्टल से उठा ले गया है ,तू अपने को बहुत ही बड़ा तीसमारखाँ समझता है साले ये सब करने की क्या जरूरत थी तुझे "

अविनाश की बात सुनकर मेरे होश ही उड़ गए थे ये क्या कर दिया मैंने मैं सर पकड़कर बैठ गया था ,अविनाश ने मुझसे फिर कुछ भी नही कहा ..वो वकील के साथ इंस्पेक्टर से बात करने लगा .

"मैं मंत्री जी से बात कर चुका हु,इस लड़के को किसी साजिश के तहत फसाया गया है,उन्होंने कहा है की इसे छोड़ना है वो केस वापस ले रहे है ,"

वकील ने कुछ पेपर्स इंस्पेक्टर को दिखाया

"लेकिन "

"लो बात करो "अविनाश किसी को फोन लगाकर इंस्पेक्टर को देता है ...कुछ ही देर में इंस्पेक्टर का रुख भी बदल गया था,शकील के सारे लोगो पर कई आरोप थे वही मेरे ऊपर बस धोखाधड़ी के मामले का आरोप लगा था,शकील और उसके कुछ साथी रात से ही गायब थे ,उनके सारे काले कारनामे खुल गए थे उसका एकाउंट भी खाली कर दिया गया था,उसके पास से बहुत मात्रा में ड्रग्स ,हथियार और पैसे बरामद किये गए थे लेकिन शकील पुलिस के हाथो में नही आया ,मुझे तुरत ही पुलिस से छुड़ा लिया गया था लेकिन इन सबके बीच में मेरे दिमाग में कई सवाल खड़े हो गए थे,..

आखिर शकील को किसने काजल के बारे में सूचना दी थी ?

आखिर किसने उसे आगाह किया की पुलिस उसके हवेली और दूसरे ठिकानों पर छापा मारने वाली है ?

आखिर किसने उसे ये बताया की इन सबमे मेरा हाथ है ,फिर भी वो मुझे छोड़कर काजल को पकड़ने क्यो गया ?

सवाल तो कई थे लेकिन मेरे दिमाग में एक ही नाम घूम रहा था .

BadeBbhaiya लेकिन आखिर वो था कौन और उसने मेरे साथ ऐसा क्यो किया ?????

 
अध्याय 31

हम सब इसी सोच में डूबे हुए तब की आखिर शकील काजल को ले कर कहा गया होगा ,

"कौन सी ऐसी जगह होगी जंहा शकील को सहारा मिले,वो पुलिस से छिप सके और उसके मदद करने वाले लोग भी उसे मिल जाए "

अविनाश अपना दिमाग लगा रहा था

"ऐसी जगह हो घर ही हो सकती है "प्यारे के मुह से अचानक ही निकल गया

"घर ,शकील का घर यानी ...केशरगढ़ "

अविनाश के मुह से निकला और सभी उसे ही देखने लगे..

"यस हमे अभी वंहा के लिए निकलना होगा "मैं बोल उठा अविनाश ने एक बार फिर हिरकत वाली नजर से मुझे देखा लेकिन फिर सर हिला कर हामी भरी....

*************

हम केशरगढ़ के लिए निकलने ही वाले थे की तरुणा हमारे पास दौड़ाते हुए आयी .

"भैया,आकाश."

उसकी हालत बेहद ही खराब लग रही थी

"क्या हुआ तरुणा "अविनाश ने उसे सहारा दिया ,और उसने अपना मोबाइल अविनाश के सामने कर दिया मेरी भी आंखे मोबाइल के स्क्रीन पर जम गई थी ..

सामने जो दृश्य था वो देख कर हमारे रोंगटे ही खड़े हो गए ,वो मेरी काजल थी ,

काजल के शरीर में एक भी कपड़ा नही था उसे किसी बिस्तर में लिटा कर बांध दिया गया था ,उसकी आंखे खुली थी लेकिन मुह में एक पट्टी बंधी हुई थी ,ये एक वीडियो था ,सामने वाले शख्स का चहरा तो नही दिख रहा था लेकिन उसकी आवाज सुनाई दे रही थी .

"रंडी हमेशा रंडी ही रहती है,वो कभी भी किसी की बहन, दोस्त ,बीवी और प्रेमी नही बन सकती ...और ये तो मेरी रंडी है अब सारी दुनिया को पता चल जाएगा की ये एक रंडी है चूतिये राहुल और गांडू अविनाश तुम मेरा कुछ भी नही बिगाड़ सकते ,मैं तुम्हारी पहुच से बहुत दूर हु ,अब तुम देखना की कैसे मैं इस रंडी के वीडियो बना बना कर इसे इंटरनेट में फेमस कर दूंगा ."

इसके साथ ही एक भयावह हंसी भी थी,मैं आवाज को पहचान गया था ये शकील की ही आवाज थी ,मेरे शरीर में मानो ताकत ही नही बची थी मैं सर पकड़ कर बैठ गया था ,आखिर काजल की इस हालत का दोषी मैं ही था,उसे फिर से बलात्कार झेलना पड़ रहा था तो वो सिर्फ मेरी वजह से ..

"मुझे जिंदा रहने का कोई हक नही है मैं ही काजल का दोषी हु,मुझे मार डालो अविनाश ..तरुणा मुझे मार डालो मुझे जिंदा रहने का कोई हक नही है "

मैं रोता हुआ नीचे बैठ गया था ,मेरे कंधे में एक हाथ रखा गया ,वो अविनाश था इस पूरे वाकये में पहली बार उसने मुझपर सहानुभूति दिखाई थी वही तरुणा मेरे बगल में बैठ गई

"हिम्मत रखो राहुल अगर तुम ही ऐसी हिम्मत हार जाओगे तो काजल का क्या होगा,उसके बारे में सोचो वो सभी जुल्म सह कर भी जिंदा रहेगी क्योकि उसे तुमपर भरोसा है,वो मुझसे कहा करती थी की मेरा चूतिया मेरे लिए कुछ भी कर जाएगा ,समझो उसके विस्वास को उसे धोखा मत दो ,उसे तुमपर जान से ज्यादा भरोसा है और तुम्हे उसे छुड़ाना यही उसे तुम्हे नई जिंदगी देनी है जिसकी वो हकदार है ,तुम्हे उसे बचाना है तुम ऐसी कमजोर नही हो सकते ,तुम उसकी उम्मीद को ऐसे तोड़ नही सकते उठो ..उठो राहुल और जाओ हमारी काजल को सही सलामत वापस लेकर आओ "

तरुणा की बातों ने मुझमें जैसे एक नया जोश भर दिया मैं तो टूट ही चुका था लेकिन तरुणा ने सही कहा था मेरी काजल को मुझपर पूरा भरोसा था और मैं किसी भी कीमत में वो भरोसा तोड़ नही सकता था ...मैं उठ खड़ा हुआ और अपने आंसू पोछते हुए उस वीडियो में अपनी काजल को देखने लगा

"मैं आ रहा हु काजल मैं इस बार उस शकील को जिंदा नही छोड़ूंगा तुम्हारे गुनहगारों को सजा मिलेगी काजल ,ये वीडियो तुम्हे किसने भेजा .."

मैंने तरुणा को देखा

"पूरे कालेज के लड़के लड़कियों के वाट्सअप पर ये मेसेज भेजा गया है "तरुणा बोल उठी और अविनाश और मैंने तुरंत ही अपना मोबाइल निकाला,वो सही थी हमे भी वीडियो भेजे गए थे ..

"ये किसका नंबर हो सकता है "अविनाश सोच में पड़ गया

"देबू..देबू हमारी मदद कर सकता है "मैं बोल उठा और हम उसके कमरे की तरफ भागे ,जब हम कमरे में पहुचे तो देबू बहुत ही गंभीर मुद्रा में कम्प्यूटर के सामने बैठा हुआ था .

"देबू ????"

मैं बोल उठा

"मुझे भी ये वीडियो मिला है और मैं इतने देर से इस नंबर का पता लगाने की कोशिस कर रहा हु लेकिन ...ये कोई इंटरनेशल नंबर है और इसे ट्रेक करना मेरे तो क्या किसी एक्सपर्ट हैकर या साइबर क्राइम वाले के बस का भी नही है "हमारे बिना कुछ बोले ही देबू बोलने लगा

"और इतना ही नही जब मैंने ये वीडियो सर्च किया तो मुझे पता चला की काजल की ये वीडियो कई पोर्न साइट में भी डाली गई है,कोई हमारे साथ बड़ा गेम खेल रहा है .."देबू चिंतित था

"BadeBhaiya " मेरे मुह से अचानक ही वो नाम निकला जिसने मेरी पूरी दुनिया कुछ ही घण्टो में उजाड़ दी थी

"हो सकता है लेकिन उसका शकील से क्या कनेक्शन है समझ नही आ रहा ,उसने तो शकील को नंगा ही कर दिया फिर वो शकील की मदद क्यो करेगा "देबू फिर से बोला ,सभी के मन में ढेरो सवाल थे लेकिन उत्तर किसी के पास नही था .

"हो सकता है की ये काम शकील का ही हो ,आवाज तो उसकी ही है "अविनाश ने कहा

"नही ...उसके पास इतना दिमाग नही हो सकता की वो ऐसे इंटरनेशनल नंबर से वीडियो भेजे और उसके पास पूरे कालेज के लड़के लड़कियों के मोबाइल नंबर कहा से आएंगे,इसके लिए किसी ने कालेज का डेटा बेस हैक किया होगा,मैं शकील के पास इतने दिन तक था उसके पास टेक्नोलॉजी का इतना ज्ञान नही हो सकता "मेरी बात सुनकर सभी सकते में आ गए

"मुझे तो लगता ही की शकील ने किसी हैकर को अपने साथ रखा होगा ,वैसे भी ये काम इतना छोटा है की ये कोई भी सामान्य हैकर आराम से कर सकता है बस उसे वीडियो बना कर देंगे होगा ,मुझे लगता है की शकील ने कही से वीडियो बना कर उस हैकर को भेजा होगा और फिर हैकर ने उसे फैलाया होगा "देबू की बात में दम तो था..

"राहुल हमे जल्द ही केशरगढ़ के लिए निकलना होगा ,और देबू तुम अपना प्रयास जारी रखना अगर किसी भी तरह से हमे ये पता चल जाए की ये वीडियो आखिर कहा से भेजे गए है तो हमारा काम आसान हो जाएगा "

अविनाश ने मुझे और देबू को कहा हमने भी हामी भर दी .

"मैं इंटरनेट पर डाले गए वीडियो के जरिये भी उसे तलाशने की कोशिस करता हु ,तुम लोग अपना काम करो मैं तुम्हारे कांटेक्ट में रहूंगा ..."
देबू ने सहमति दिखाई और हम तेजी से वंहा से केशरगढ़ के लिये निकल गए ...
 

अध्याय 32

हम दोनों अविनाश की कार से केशरगढ़ के लिए निकल गए थे,साथ ही अविनाश के दो दोस्त भी थे ,राकेश और जॉनी,दोनों की ही छबि एक गुंडे की थी ,लड़ने और मरने मारने में आगे रहते थे शायद इसी लिए अविनाश ने इन्हें अपने साथ रखा था ..

केशरगढ़ प्रकृति की गोद में बसा एक शहर,वहां के सदियों पुराने महल जो की अब खण्डार हो चुके थे बेहद प्रसिद्ध थे साथ ही प्रसिद्ध था वंहा का एक इंसान नाम उनका थोड़ा अजीब था,'डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवदा वाले 'लोग उन्हें डॉ चूतिया के नाम से जानते थे,पहले वो एक डॉ हुआ करते थे ,सुना था की वो एक जासूस भी थे और अपने जीवन में कई बड़े केस उन्होंने साल्व किये थे,लेकिन अब वो सब छोड़कर केशरगढ़ में जा बसे थे और यंहा लोगो को ज्ञान बाटने के लिए एक आश्रम चलाते थे ,

खैर हमे उनसे क्या हमे तो शकील को ढूंढना था लेकिन मेरे दिल में उनसे मिलने की एक तमन्ना थी शायद वही से कुछ रास्ता मिल जाए ....

गाड़ी के बड़े घर के पास पहुची हमारा समान घर के नॉकर ने उठाया और उसे अंदर ले गया ,सभी घर के अंदर गए ये अविनाश का घर था ,घर देखकर ही मुझे समझ आ गया था की अविनाश एक बेहद ही अमीर परिवार से तालुक रखता है ,हवेली के जैसा घर था और घर में कई नॉकर चाकर थे ,उसके माता पिता भी बेहद ही मिलनसार थे और जैसे ही उन्हें प्रिया यानी काजल के बारे में पता चला उन्होंने हमे पूरी मदद करने का आश्वासन दिया,

यंहा मुझे काजल के अतीत के बारे में बहुत कुछ जानकारी मिली ,पहली ये की उसके माता पिता का देहांत बहुत पहले हो चुका था और उसके पिता अविनाश के पिता के बहुत अच्छे दोस्त थे इसलिए काजल की परवरिश अविनाश के साथ ही उसके ही घर में हुई थी,दोनों में बहुत ही अच्छी दोस्ती थी वो भाई बहन के जैसे एक दूसरे को प्यार करते थे ,जब वो जवान हुए तो अविनाश के जीवन में एक लड़की आई जिसका नाम काजल था,अविनाश के पैसों की लालच में उसने अविनाश को फसाया था,और प्रिया की अच्छी दोस्त बन गई ,लेकिन बाद में इन्हें पता चला की वो किसी और की मासूका है...आगे क्या हुआ ये तो शकील और काजल ही जानते है लेकिन इन बातो से मुझे ये जरूर समझ आ गया था की अविनाश के लिए काजल की क्या अहमियत थी.

आज भी अविनाश के घर में काजल के बचपन से जवानी तक के फ़ोटो थे उन्हेंने उसे ढूंढने की भी बहुत कोशिस की लेकिन उनकी प्रिया कही नही मिली ,और अब जब वो मिली तो फिर से ये घटना हो गई ....

हम दोपहर में ही केशरगढ़ पहुच चुके थे और शाम से ही हम शकील का ठिकाना ढूंढने निकल पड़े ,पुलिस स्टेशन से उसके पुराने क्रिमिनल रिकार्ड निकलवाये और शकिल के जितने पुराने दोस्त थे उन्हें टारगेट किया ,वंहा का इंस्पेक्टर भी हमारे साथ था अविनाश के पिता की यंहा अच्छी चलती थी शायद इसलिए इंस्पेक्टर भी हमारी पर्सनली मदद करने को राजी हो गया था ,रात तक हमारे पास पूरी जानकारी थी ,अब बात थी की उन ठिकानों पर छापे मारना,हमने तीन टीम बनाई एक में मैं ,इंस्पेक्टर और कुछ सिपाही थे,दूसरे में अविनाश और कुछ सिपाही थे और तीसरे में राकेश ,जॉनी और कुछ सिपाही थे ,तीनो टीम को एक साथ अलग अलग जगहों में छापा मरना था जंहा से जो भी मिले उसकी जानकारी वाकी टोकि के द्वारा हम सभी टीमो तक पहुचा सकते थे ,

हमने पूरी रात छापे मारे,शकील के सभी पुराने दोस्त या सहयोगी हमारी गिरफ्त में थे लेकिन शकील और काजल का कही कुछ भी पता नही लगा ना ही ये पता लगा की शकील यंहा आया है या किसी को लाया है ...

सुबह के 5 बज चुके थे जब सभी टीम फिर से पुलिस स्टेशन में इकट्ठा हुई ..

"ये ऐसी तो कुछ नही बताएंगे 3rd डिग्री देना पड़ेगा सालों को फिर मुह खोलेंगे "

अविनाश ने इंस्पेक्टर को देखते हुए कहा,हमने कुछ लोगो को गिरफ्तार भी कर लिया था जो शकील के खास सहयोगी हुआ करते थे .

"हा लेकिन तिवारी साहब शकील कई साल पहले यंहा से जा चुका है मुझे नही लगता की इन लोगो से उसका कोई संपर्क रहा होगा."

इंस्पेक्टर ने अविनाश से कहा

"कोई कितनी भी दूर क्यो आ चले जाए अपने बचपन के दोस्तो और सहयोगियों से अलग नही रह सकता,और शकील तो ऐसे बिजनेस में था की उसे इन जैसे चोर उचक्कों की जरूरत पड़ते ही रहती होगी,ट्राई करने में हर्ज ही क्या है "

अविनाश ने इंस्पेक्टर को मना ही लिया और फिर शुरू हुई कुटाई ,,,

और एक दो लोगो ने शकील से कनेक्शन होनी की बात भी कबूल ली,फिर हुई और कुटाई ,और आखिर 3-4 घण्टो की महेनत के बाद एक ने अपना मुह खोला .

"शकील भाई का सुबह फोन आया था की वो केशरगढ़ आये यही और उन्हें छिपने की जगह चाहिए लेकिन केशरगढ़ से बाहर ,वो जानते थे की अगर पुलिस उन्ह ढूंढेगी तो वो कभी ना कभी यंहा जरूर पहुचेगी इसलिए वो यंहा नही रहना चाहते थे,उन्होंने अपनी गाड़ी यंहा ठिकाने लगाई और दूसरी गाड़ी लेकर निकले,सच कह रहा हु साहब हमे नही पता की वो कहा गए लेकिन वो जंगल की तरफ बड़े है ."

उसने रोते रोते कहा

"अच्छा तो वो कितने लोग थे "

"नही पता साहब वो तो गाड़ी लेने अकेले ही आये थे शायद वो नही चाहते थे की उनके साथ कौन कौन आया है उसकी हमे भनक भी लगे ,वो उन लोगो को किसी दूसरी जगह छोड़ कर आये थे .."

उस आदमी के कबूलनामें के बाद हमारे लिए चीजे थोड़ी और सुलझ गई थी ,हमे उस गाड़ी का नंबर पता था जिसमे वो भागा था,इंस्पेक्टर ने आस पास के थानों में बात की और घेरा बंदी की बात कह दी साथ ही उस गाड़ी का पता लगाने की बात कही ,सभी लोग बहुत थक चुके थे लेकिन सच बताऊँ तो मेरे और अविनाश के चहरे से थकान जैसी कोई भी चीज कोसो दूर थी .

"हमे जंगलों की तरफ निकलना चाहिए ,हम यंहा यू की नही बैठ सकते"

मैं बोल उठा ,इंस्पेक्टर ने मुझे एक अजीब निगाह से देखा

"उन लोगो के पास हथियार हो सकता है,अगर वो मिल भी गए तो तुम 4 लोग उनका क्या ही बिगड़ लोगे "

"जितना मुझे पता है शकील के साथ 8 से ज्यादा आदमी नही हो सकते और हमारे पास ही हथियार है हम उनसे निपट लेंगे क्यो अविनाश "

मैंने वो माउजर इंस्पेक्टर को दिखाई जो अविनाश ने मुझे दी थी ,अविनाश ने भी मेरी बात पर सहमति जताई ,

"घर चलते है कुछ समान और रख लेते है और फिर निकलनेगे "

अविनाश ने मुझे देखते हुए कहा और हम घर की तरफ चल दिए ,राकेश और जॉनी की तो कार में बैठे बैठे ही आंखे लग गई थी ,अविनाश के घर जाकर हम फ्रेश हुए नाश्ता किया और अविनाश ने कुछ सामना और अपने पास रखा उसने ना जाने कहा से कई बड़ी बन्दूखे ला के कार में लोड किया और फिर हम उसके घर से जंगल की तरफ निकले ,कुछ ही दूर में हमे एक और गाड़ी मिली शायद ये अविनाश के दोस्त ही थे ,सभी लड़को को उसने गले लगाया और अपने कार से हथियार निकाल कर उन्हें दिए और मुझे उनके साथ दूसरी कर में आने को कहा ताकि मैं भी थोड़ी देर सो सकू ,अब हम 10 लोग थे दोनों गाड़िया जंगल की तरफ दौड़ाने लगी ,2 घण्टे बाद ही हम दूसरे थाने में पहुच चुके थे ,वंहा के इंचार्ज ने हमे बताया की आसपास के किसी थाने में उस गाड़ी का पता नही चल पाया है ,हो सकता है की वो यंही कही जंगलों में छिपा होगा,उसने बताया की वंहा से कुछ दूर जंगल के बीच एक छोटा पहाड़ है ,पुराने समय में डाकू उस जगह को छिपने के लिए उपयोग में लाते लाते थे ,वंहा छोटे छोटे गांव भी है शायद वही कही शकील ने शरण ले रखी हो ..

हम लोग उस पहाड़ी की ओर निकल गए ,सड़क से उतर कर कारे पगडंडियों में चलने लगी थी ,कुछ दूर बाद ही वो भी खत्म हो गई हमे एक कार के निशान दिखाई पड़े और लगभग तय हो गया की शकील हमे यही मिलेगा थोड़ी दूर तक गाड़ी गई लेकिन आगे जंगल बेहद ही घना था और कार से जाना मुमकिन नही था हमने कार को कही छिपाने का प्लान बनाया और हमारे दिमाग में आया की शकील ने भी अपनी कार यही कही छिपाई होगी,हम बेहद ही शांति से उसे ढ़ंढने लगे और हमे झाड़ियों के झुंड में उसकी कार मिल गई ,हमने उसके टायरों की हवा निकाल दी और अपनी कारो को ऐसे पोजिशन में छिपाया की हमे वंहा से निकलने में सुविधा हो,सच में मेरे लिए ये सभी काम बहुत मुश्किल थे लेकिन हमारे साथ आये लोगो के लिए ये जैसे रोज का काम हो ,पूछने पर पता लगा के अविनाश ने जिन लोगो को बाद में बुलाया था वो लोग पहले फोर्स में काम कर चुके थे या कुछ कर रहे थे और उन्होंने जंगल वॉर की ट्रेनिंग ले रखी है ...

मुझे यकीन हो गया था की अब हम काजल को आसानी से शकील के चुंगल से बचा लेंगे इतना ही नही बल्कि हम शकील को ठिकाना भी लगा देंगे ..

हमने उन लोगो को ही लीड करने दिया और उनके कहे अनुसार ही हम उनके पीछे चलने लगे ,दोपहर के 2 बज चुके थे लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे शाम हो गई हो ,घने जंगल में चलना भी दुर्भर था,पास की पहाड़ी पर चढ़कर हमे दूर एक गांव दिखाई दिया,उसे गांव बोलना भी शायद गलत होगा क्योकि वंहा महज 5-6 घर जो झोपड़ियों जैसे दिख रहे थे ,हमारा लक्ष्य था वंहा तक पहुचना हम निकल गए और 1 घण्टे में हम उस गांव के पास थे ,उन्होने पहले दूरबीन से जांच की और कन्फर्म किया की कुछ लोग एक घर के बाहर बैठे है ,उन्होंने हमे समझाया की गोली बारी से किसी मासूम गांव वाले की जान जा सकती है इसलिए जंगलों में लड़ने वाली लड़ाई लड़नी होगी,जिसे गोरिल्ला युध्द कहा जाता है एक एक कर लोगो को ठिकाने लगाना और वो भी इतने खामोशी से की किसी को पता भी नही चले ,उनमे से 4 लोग आगे आये और हमे वही छिप कर देखने को कहा अगर जरूरत पड़ती तब हमे आना था ,वो बोल बड़े ही अभ्यस्त थे पास ही पहरा दे रहे शकील के दो आदमीयो को पलक झपकते ही ठिकाने लगा दिया और कोई शोर भी करने नही दिया,मैं उन लोगो को पहचान गया था ये शकील के खास आदमी थे ,वो उस झोपड़ी के बाहर से उसका निरक्षण करने लगे ,और हमे अपना अंगूठा दिखाया मतलब की सब ठीक है ,तभी हमे पास से ही एक बुड्ढा आदमी आता हुआ दिखा,हमारे लोग उसके पास पहुचे और उसने बताया की एक मोटा आदमी पास की झोपड़ी में आया हुआ है उसने उन लोगो को बहुत पैसे दिए जिसकी एवज में वो उसकी खातिरदारी कर रहे थे...हमने उसको और उसके परिवार को झोपड़ी से दूर रहने को कहा,पता चला की उसका परिवार अभी जंगल में लकड़ियो की तलाश में गया है और शाम होने पर ही लौटेगा ,,,,अब हमारे लिए काम आसान था,हम सभी एक साथ टूट पड़े और एक एक करके शकील के आदमियों को धूल चटा दी लेकिन अभी तक एक भी गोली चलानी नही पड़ी ,अंत में बारी थी उस झोपड़ी की जंहा शकील आराम फरमा रहा था ,मेरे दिल की धड़कने जोरो से चल रही थी क्योकि शायद काजल भी वही थी ...

हमने दरवाजा तोड़ा और शकील बुरी तरह चौकते हुए उठा,उसके साथ दो लोग और भी थे वो कोई भी एक्शन ले उससे पहले ही अविनाश का पिस्तौल बोल उठा.

'धाय धाय '

शकील के दोनों आदमी ढेर थे,लेकिन शकील के चहरे में ख़ौफ़ का कोई नामोनिशान नही दिख रहा था.

"तुम साले चूतिये आखिर यंहा तक पहुच ही गए ,मुझे लगा ही था की तुम मुझे ढूंढ ही लोगे .."शकील ने मुझसे नही बल्कि अविनाश से कहा था ..

"प्रिया कहा है "अविनाश बौखला गया था और काजल को नही देख कर मैं भी

"प्रिया ...ओह वो रंडी काजल . कोई चोद रहा होगा उसे मुझे क्या पता "

शकील बुरी तरह से हंसा और अविनाश ने आगे बढ़कर उसके मुह में कई घुसे लगा दिए .

"मादरचोद एक बार तूने उसे मुझसे अलग कर दिया था लेकिन अब नही अगर मुझे उसी समय पता होता की उसके गायब होने में तेरा और उस रंडी का हाथ है तो अब तक मैं तुझे कब का मार चुका होता,बता मादरचोद कहा छिपा कर रखा है तूने ."

अविनाश बोलता रहा लेकिन शकील को जैसे कोई फर्क नही पड़ा वो हंसता ही रहा .

उसने मुझे देखा

"तू तो मुझे चोद कर काजल को बचाना चाहता था ,मेरा भरोसा जीता,जीवन में पहली बार मैंने किसी के ऊपर भरोसा किया,साला पहली बार चूतियापा किया ,लेकिन किस्मत देखो किसी ने हम दोनों को एक साथ चोद दिया ..काजल मेरे पास नही है ,हा मैंने उसे होस्टल से उठाया था लेकिन केशरगढ़ में आकर गाड़ी चेंज करने के दौरान कुछ लोग मेरे आदमीयो को मार कर काजल को अपने साथ ले गए,मुझे लगा की वो अविनाश के आदमी होंगे लेकिन फिर मैंने अपनी जान बचाने की सोची ,मुझे मेरे लोगो ने सेटेलाइट फोन के जरिये बताया की उसका एक वीडियो वायरल हो रहा है ,तब मुझे समझ आया की किसी ने मुझसे और काजल से बदला लिया है और जरिया बना तू ,मेरा सब कुछ गया,पैसे मेरी पवार ,यू जंगलों में भटकने के लिए मजबूर हो गया,लेकिन तुम दोनों से तुम्हारी काजल छीन गई ,काश वो आज मेरे पास होती तो मैं अपना सपना पूरा करता,उससे प्यार करने वालो के सामने ही उसे चोदता ."

वो फिर से शैतानों वाली हंसी हँसने लगा,हमारा दिमाग ही घूम गया था और अविनाश ने अपना पिस्तौल निकाल कर सीधे उसके सीने में गोलियों की बौछार कर दी ....

शकील ने वही दम तोड़ दिया था ,एक एक करके सभी लाशों को ठिकाने लगा दिया गया ,लेकिन हमारे दिमाग में अब भी एक बात घूम रही थी की अगर काजल शकील के पास नही है तो आखिर किसके पास है ?????????

हम फिर से केशरगढ़ पहुच चुके थे,मैंने अविनाश से रिक्वेस्ट किया की मुझे डॉ चूतिया से मिलना है क्योकि मैंने उनका नाम बहुत सुन रखा था ऐसी स्तिथि में शायद वो हमारी कुछ मदद कर पाए .

अविनाश बहुत देर तक शून्य चित्त से मुझे देखता रहा वो मानो बिल्कुल ही चुप हो गया था,शकील को मारने के बाद से अभी तक उसने एक बार भी कोई बात नही की थी,उसने बस अपना हिलाया और हामी भरी......
 
अध्याय 33

फिर से सुबह हुई हम अविनाश के घर में थे ,सुबह ही हमारे मोबाइल पे उसी नंबर से फिर से एक वीडियो आ गया था ,आवाज अब भी शकील की ही थी ,कोई लड़का काजल के मुह में अपना लिंग जबरदस्ती डाले हुए उसके बालो को अपनी ओर खिंच रहा था.

"ढूंढो चुतियो ढूंढो इसे बहुत गुमान था ना तुम्हे अपने प्यार पर अब देखो मैं कैसे इसे असली रंडी बनाता हु ,"

वो दरिंदगी से भरा हुआ हँस रहा था,मैंने काजल की आंखों में देखा एक आंसू उसके आंखों में ठहर गया था वो बह तो नही रहा था लेकिन गिर भी नही रहा था,मेरे दिल में एक जोरो की टीस उठी ,ऐसा लगा की अभी उस कुत्ते को जान से मार दु लेकिन ...

लेकिन वो मेरी पहुच के बाहर था ...

मैं और अविनाश नाश्ता करके डॉ चूतिया के आश्रम की ओर बढ़ गए .

एक दम शांति ,इतनी शांति मैंने अपने जीवन में महसूस नही की थी ..नही नही काजल के गोद में मुझे इतनी शांति मिलती थी..

लोग यंहा वंहा ध्यान में बैठे हुए थे,हम डॉ को ढूंढते हुए आगे बड़े और के पेड़ के नीचे कुछ लोगो के साथ वो ध्यान में बैठे हुए मिल गए ..

हम भी जाकर उसी भीड़ के साथ बैठ गए ,थोड़ी देर बाद जब सब उठकर जाने लगे तो डॉ की नजर अविनाश पर पड़ी .

उन्होंने हम दोनों को अपने पास बुलाया .

"तुम तिवारी जी के बेटे हो ना "

"जी .."

"तुम्हारे पिता जी से मेरे अच्छे संबंध है वो यंहा आते रहते है,मुझे पता चला उस लड़की के बारे में बहुत दुख हुआ "

डॉ की नजर मुझपर पड़ी ,उन्होंने मेरे बारे में पूछा और हमने उन्हें शुरू से लेकर अंतिम तक सभी बातें बता दी ,कैसे मैं काजल से मिला ,कैसे शकील ने मुझे अपने अपने पास बुलाया,कैसे काजल और मैं प्यार में पड़ गए और कैसे मैंने उसे अविनाश के मदद से शकील के चुंगल से बाहर निकाला ,कैसे मैं डार्क वेब में गया और कैसे शकील और मुझे लूट लिया गया,हमने ये भी बता दिया की हमने शकील को ढूंढ लिया लेकिन काजल उसके पास नही थी और शकील को जान से मार दिया ..

डॉ सब कुछ शांति से सुनते रहे फिर मेरी ओर मुड़े.

"तुम्हे अगर प्रीति उर्फ काजल को ढूंढना है तो पहले तुम्हे खुद को शांत करना होगा,जब कुछ समझ नही आये तो कुछ सोचने से अच्छा है की अपने दिमाग को शांत कर लिया जाए ,अभी के केस में यही हो रहा है ,कोई भी क्लू तुम्हारे पास नही है ,किसने किया होगा क्यो किया होगा कुछ भी नही पता,तो आंखे बंद करो और खुद को शांत करो ,शुरू से सोचो की क्या हुआ था शायद कही ना कही कोई ना कोई घटना ऐसी हुई होगी जिसे तुम मिस कर रहे हो ..हर कड़ी को ढूंढो और शुरू से शुरू करो .."

अविनाश और मैं दोनों ने आंखे बंद कर लिए और डॉ के कहे अनुसार अपने सांसों पर ध्यान लगाने लगे,धीरे धीरे मन शांत होने लगा ऐसा लगा जैसे सदियों का बोझ मिट गया हो.

मन अपने गहराई में गोते खा रहा था कई चीजे दिमाग में घूम रही थी एक के बाद काजल के साथ बिताए हुए लम्हे सामने आ रहे थे ,कुछ भी खोजने का प्रयास नही किया जा रहा था बस चीजे आ रही थी बार बार दिमाग में आ रही थी जा रही थी ..

मुझे वो रंडीखाना दिखा और उसमें दिखी हंसती हुई काजल साथ ही शबनम मौसी बनवारी ....

मैंने झट से आंखे खोली.

"मुझे एकबार फिर से वही जाना होगा जंहा से मैंने और काजल ने शुरुवात की थी "

डॉ अब मेरे सामने नही थे ना ही अविनाश ही था ,मैं कितने देर तक बैठा रहा मुझे पता नही लेकिन जब मैंने इधर उधर देखा तो डॉ को कुछ लोगो से बात करता पाया वही अविनाश एक कृत्रिम झील के पास बैठा हुआ उसे निहार रहा था.मैं उसतक पहुचा और उसके कंधे में हाथ रखा ...

उसने मुड़कर मुझे देखा और जोरो से रो पड़ा..

"सब मेरी गलती है राहुल सब कुछ मेरी ही गलती है ...मेरे ही कारण प्रिया को इतने कष्ट झेलने पड़ रहे है ,ना ही मैं उस रंडी काजल के प्यार में पड़ता और ना ही शकील प्रिया को अपने जाल में फंसा पता .."जो रोता हुआ मेरे सीने से लग गया...मैंने पहली बार इस शख्स को इतना टूटा हुआ देख रहा था,शायद हम दोनों ही प्रिया उर्फ काजल के सबसे बड़े मुजरिम थे,उसने हम दोनों से ही बहुत उम्मीद की हम दोनों से ही प्यार किया और हम दोनों की गलती के कारण उसे दुख देखने पड़े ,एक की गलती ने उसे शकील के चुंगल में फंसा दिया और मेरी गलती ने उसे फिर से उसी नरक में झोंक दिया ...अविनाष के इस प्रकार के व्यवहार से मेरे आंखों में भी पानी आ गया था ....

****************

ये दोपहर का वक्त था ,मैं उसी जगह पर खड़ा था जंहा से मैंने इस सफर की शुरुवात की थी ,वही रंडीखाना..

लेकिन आज इसकी हालत थोड़ी अलग थी ,शकील के पकड़े जाने और उसके सारे धंधों पर पुलिस की रेट पड़ने के कारण ये भी बंद कर दिया गया था,अधिकतर लड़कियों को जिस्म बेचने के इल्जाम में जेल में डाल दिया गया था कुछ एक जमानत में छूट आयी थी तो कुछ पुलिसवालों के साथ सोकर छूटी थी और अब हफ्ते में उन्हें अपना जिस्म मुफ्त में किसी सरकारी कर्मचारी को सौपना होगा ,मैं धीरे धीरे ही उस ओर बढ़ने लगा जंहा मेरे और काजल के बीच प्यार के बीज ने जन्म लिया था..

मुझे चंपा मौसी(जो पहले इस की मालकिन हुआ करती थी ) दिखाई दी मुझे देखते ही वो मेरे पास तेजी से बड़ी और 'चटाक '

मेरे गालों में एक जोरदार थप्पड़ पड़ा .

"साले तुझे काजल को ले जाना था तो ले जाता शकील को अंदर करवाना था तो करवा देता ये धंधा क्यो बंद करवा दिया,देख रहा है इन चहरो को अब ये किसके सहारे रहेंगे,जिस्म से कुछ पैसे इन्हें मिल जाते थे जिसमे कम से कम कुछ रोटी का इंतजाम तो हो जाता था अब इन भूखे शरीर को कौन रोटी देगा."

मौसी कहते कहते रोने लगी थी,मैं चारो ओर देख रहा था इस कोठे की पूरी रौनक ही गायब थी ,कुछ एक दो लडकिया कही कही खड़ी थी लेकिन बिल्कुल ही बेजान सी लग रही थी ,मैंने ऊपर देखा तो बाहर शबनम खड़ी दिखाई दी ,और मुझे देखते ही उसने नीचे थूक दिया ,मानो कुछ बेहद ही गंदी चीज देख ली हो .

मैं बिना कुछ कहे ही ऊपर जाने लगा सामने शबनम थी .

"मादरचोद मिल गई तेरे दिल को तसल्ली,साले तुझे तो तेरी महबूबा मिल गई लेकिन यंहा के लोगो की रोटी क्यो छीन ली तुमने ,साले बहनचोद यंहा क्या करने करने आया है अब हमारे हालात में हँसने आया है "शबनम इतने जोरो से भड़की थी की आसपास की औरते भी बाहर आ गई थी ,मैंने शबनम से कुछ नही कहा बस अपने मोबाइल से वो दो वीडियो जो वाट्सअप के जरिये मुझे मिले थे मैंने उन्हें खोल कर उसने सामने कर दिया .

देखते ही देखते सभी के चहरे में आश्चर्य भर गया था ,

"जो भी हुआ वो मैंने नही किया है,हा मैं शकील को बर्बाद करना चाहता था लेकिन किसी की रोटी छीन जाए या तुम लोगो को कोई परेशानी हो ऐसा कोई भी काम मैं नही करने वाला था ये इसी आदमी का काम है जिसने काजल को किडनैप किया है "

मैं पहली बार कुछ बोला

"ये तो शकील की आवाज लग रही है.."

"नही ये शकील नही है शकील को हमने कल ही मार दिया था ,ये कोई और है जिसने काजल को किडनैप किया और तुम लोगो की ये हालत कर दी."

सभी एक दूसरे का चहरा देखने लगे .उनमे से एक अधेड़ उम्र की महिला सामने आयी ..

"बेटा हमारी काजल को बचा ले ,ये जो कोई भी है ये दरिंदा है ,ये धंधा बंद हुआ तो हुआ कोई बात नही कुछ दिन रोटी नही मिलेगी तो नही सही जैसे तैसे कोई ना कोई उपाय निकाल ही लेंगे ,ऐसे भी सदियों से रंडियों की जरूरत इस समाज को पड़ते आ रही है अब भी पड़ेगी ही ,पहले ही गैरकानूनी तरीके से चल रहा था अब भी चलेगा,हमारी फिक्र मत कर ,बस हमारी काजल को बचा ले ...कोई एक लड़की भी इस दलदल से निकल जाए तो हमारे लिए ये सबसे बड़े खुशी की बात होती है ,तू कजाल को इस दलदल से निकाल कर ले गया लेकिन वो बेचारी किस्मत की मारी थी जो फिर से एक दलदल में फंस गई है उसे निकाल ले बेटा,हम लोगो से जो भी मदद लगे हम वो करेंगे ."

उस महिला की बात से मेरे होठो में के मुस्कान आ गई ,इन रंडी कहे जाने वाली महिलाओं का दिल इतना बड़ा होगा मुझे यकीन ही नही आया ,मैंने भी एक फैसला कर लिया था .

मैं चंपा मौसी की तरफ मुड़ा जो अब तक ऊपर आकर हमारी बात सुन रही थी .

"मौसी यंहा जो भी हुआ वो मैं ठीक कर दूंगा और इन सबकी जिम्मेदारी भी मेरी मैं आप लोगो के बिजनेस का नया तरीका निकलूंगा ,बिल्कुल आधुनिक टाइप ."

वो मेरी बात सुनकर हँसने लगी वही बाकी भी थोड़े खुश हो गए ..

"तो तू शकील की जगह लेना चाहता है "

"नही मौसी शकील जबरदस्ती लकड़ियों को इस धंधे में डालता था मैं ऐसा गुनाह कभी नही कर सकता लेकिन आप लोगो को एक ऐसा सिस्टम जरूर बना के दे सकता हु ताकि आप लोग ज्यादा से ज्यादा कमाई करे और सेफ रहे ,इसके लिए मैं कुछ लोगो से बात करके इन सबका इंतजाम करता हु ."

सभी के चहरे खिले हुए लग रहे थे.

"तू काजल को ढूंढ वो तेरे लिए जरूरी है "

"मुझे आप लोगो की मदद चाहिए .."

"अगर बात काजल की है तो हम सभी तैयार है "इस बार शबनम बोल उठी

"जिसे भी काजल की कुछ भी भनक लगे वो मुझे बताइएगा,क्योकि ये जो भी हो उसे शकील और कजाल दोनों से कोई खास दुश्मनी है,तभी तो उसने शकील को तो फसाया ही लेकिन काजल को भी केडनेप कर लिया और ये सब हरकत कर रहा है ,ताकि दुनिया को पता चले की काजल कौन है,और मेरे अलावा आप लोग ही ऐसे हो जो काजल और शकील दोनों से जुड़े हुए हो तो मुझे लगता है की आप लोगो को कोई तो हिंट जरूर मिलेगा "

सभी ने सहमति जताई और मैं अपना नंबर छोड़कर वंहा से आ गया.

मैं सोच में पड़ा था की आखिर मैं इन लोगो के लिए क्या करू की इनकी जिंदगी थोड़ी और अच्छी हो जाए ,और मैंने प्यारे और संजय सर को फोन लगा दिया ...
 
अध्याय 34

दिन बीत रहे थे और काजल के नए नए वीडियो रोज ही आने लगे थे अब तो लगता था की काजल को भी इन सबकी आदत सी हो गई थी उसके आंखों में पानी तो होता था लेकिन उसके दिल की उम्मीद शायद खत्म होने लगी थी साथ ही हमारी भी ..

मैंने कुछ स्वयंसेवी संगठनों के साथ मिलकर उस रंडीखाने में मुफ्त शाररिक और मानसिक इलाज की व्यवस्था करवा दी ,साथ ही मैंने उन सभी का प्रोफ़ाइल ऑनलाइन कर दिया उसके लिए एक वेबसाइड भी बना दी ,सभी का फोटोशूट करवा दिया यंहा पर बेहद ही भद्दी दिखने वाली औरते भी सजने धजने के बाद और फोटोशॉप की मदद के कारण किसी मॉडल से कम नही लगती थी,महंगी साड़ियों में उनकी फोटो उतारी गई साथ ही नकली उधारी के जेवर भी थे,सभी का प्रोफ़ाइल ऑनलाइन था और जिसे पहले एक बार के 50 रुपये मिलते थे वो अब 1000 रुपये से कम में तो बात ही नही करते थे ,मैंने उन्हें समझाया की भले ही दिन में एक ही ग्राहक मिले लेकिन अपना भाव तगड़ा रखना,मुझे इसी सिलसिले में एक और व्यक्ति मिल गया,नाम था गणपत ,वो फोटोग्राफर था,उसने मुझे आईडिया दिया की क्यो ना यूट्यूब में इन लोगो का वीडियो डाला जाए और साथ ही वेबसाइड में भी वीडियो अपलोड किया जाए ताकि इन लोगो की पहुच और भी बढ़ जाए ,मुझे आईडिया पसंद आया ,और गणपत बन गया वीडियोग्राफर साथ ही मेरा दोस्त प्यारे भी उसके साथ शूट में मदद करने लगा वो साला था ही ठरकी तो उसने कहानी लिखने और डारेक्ट करने की सोची यंहा की औरते उस हद तक जा सकती थी जंहा तक कोई सामान्य लडकिया नही जाती तो उसके लिए ये बेनिफिट था की वो कोई भी कहानी लिख सकता था ,कुछ लड़के भी मिल गए उन्हें फिल्मों में एक्टिंग करने के लिए,मैंने उन्हें सख्त हिदायत दी थी की हमे पोर्न फ़िल्म नही बनानी है बल्कि b या c ग्रेड टाइप की फिल्में बनानी है .

वो लोग उसी में भिड़े रहे और देखते ही देखते अपने खतरनाक एडल्ट कंटेंट के कारण और मजेदार स्टोरीयो के कारण वेबसाइट हिट हो गया,साथ ही यूट्यूब में भी देखने वालो की बाढ़ आ गई और साथ ही बढ़ा इन लड़कियों का रेट ,यंहा तक की कुछ ने तो धंधा ही छोड़ दिया और सिर्फ फिल्मों और शॉर्ट मूवी या वेबसिरिज में काम करने लगी ..

इधर मैने और अविनाश ने अपनी जान लगा दी लेकिन काजल या वीडियो भेजने वाले का कोई भी पता नही चल पाया ..

एक दिन मैं गनपत के स्टूडियो पहुचा जंहा वो फ़िल्म की एडिटिंग करता था प्यारे का अधिकतर वक्त अब वही बीतता था और वो अब इंजीनियरिंग छोड़कर इसी में अपना केरियर तलाशने की सोच रहा था ,मैंने गणपत और प्यारे को मैंने बड़े ही ध्यान से मोबाइल पर कुछ देखते हुए पाया ,मैं पास पहुचा तो काजल की वीडियो देख रहे थे ,उन्हें देख कर मेरा दिमाग गर्म हो गया .

"मादरचोदों तुम काजल की वीडियो देख रहे हो "

वो मुझे देखकर सकपकाए लेकिन गणपत तुरंत बोला

"राहुल भाई आप गलत समझ रहे है हा हम कजाल की वीडियो देख रहे थे लेकिन हमारा उद्देश्य वो नही था जो आप सोच रहे थे "

प्यारे भी बोलने लगा

"भाई सच में काजल तो मेरे लिए भाभी है ,लेकिन जब हम शूट कर रहे थे तो गणपत ने कुछ टेक्निकल बात बताई तो मेरे दिमाग में एक ख्याल आया "

मैं अचानक से ही शांत हो गया

"क्या ??"

"भाई जिस कैमरे से इस वीडियो को रिकार्ड किया जा रहा है ,जिस कमरे में रिकार्ड किया जा रहा है उसके बारे में हमे अगर वीडियो देखकर कुछ पता चले तो ..तो शायद हम कुछ करीब तो पहुच ही सकते है ..."

गणपत की बात सुनकर जैसे मेरा दिमाग ही खुल गया लेकिन इतने कम सोर्स से हम उस आदमी तक कैसे पहुचेंगे ये मुझे समझ नही आया लेकिन मरता क्या नही करता वाली तर्ज में मैंने हामी भर दी ..

वीडियो को अब कम्प्यूटर में डाला गया और जो चीज मैं कभी नही देखना चाहता था वो मेरे सामने फिर से चलने लगी थी ,काजल की आंखों का दर्द मुझे साफ दिखाई दे रहा था और वो कमीना मुझे और अविनाश को बार बार चेलेंज कर रहा था ,उसने काजल को एक बिस्तर से बांध दिया था काजल पहले से बहुत ही कमजोर दिख रही थी ,उसे देखकर मेरे आंखों में आंसू आ गए थे ,लेकिन गणपत ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और ध्यान से वीडियो को देखने लगा ..

"लो भाई पता चल गया ,ये **** कंपनी के *** मोडल का कैमरा होगा या फिर **** कंपनी के *** मोडल का ...अच्छी बात ये है की दोनों ही बेहद ही महंगे है कम से कम 3 से 4 लाख के बीच के तो सिर्फ घर में इस्तेमाल के लिए ये सबसे महंगे कैमरा है,बाकी इस रेंज में प्रोफेन्सल कैमरा भी आ जाते है लेकिन इन कैमरों को घर में इस्तेमाल के लिए ही लिया जाता है ,अमीरजादों के द्वारा तो स्वाभाविक है की वो ऐसे कैमरा गिने चुने ही होंगे ,अब इसमें शकील की आवाज कैसे आयी ये तो सिंपल है की शकील का वाइस सेम्पल पहले से रिकार्ड किया गया होगा और फिर किसी साफ्टवेयर के माध्यम से आवाज चेंज कर ली जाती होगी ,मेरे ख्याल से तो वाइस को वीडियो में बाद में एडिटिंग करके डाला जाता होगा,और अगर आप ध्यान से देखो तो ये बंद कमरा है और सीलन से भरा हुआ है ,क्योकि ध्यान से देखने पर पता चलता यही की इस कमरे में धूप तो आती नही होगी तो आर्टिफिसियल लाइट लगाई गई है ,और दीवारों में थोड़ी नमी भी दिख रही है ,मतलब पुराने घर का कोई कमरा जंहा आसपास थोड़ी हरियाली हो ."

"हरियाली हो ??/मलतब "

"मतलब भाई आजकल चिड़ियों की आवाज कहा सुनने में मिलती है और रिकार्डिंग में चिड़ियों की आवाज साफ आई है इतनी चिड़िया या तो चिड़ियाघर में मिलती है या किसी ऐसे जगह में जंहा थोड़ी हरियाली होगी "

गणपत ने तो अपने विचार रख दिए थे लेकिन अब इतने बातों में उस आदमी को हम कैसे ढूंढेंगे ये साला अब भी समझ नही आ रहा था ,फिर भी मैंने उन कैमरा मॉडल के कुछ फ़ोटो निकलवाये और उसे आपने साथ ले गया ,और लग गए हम तलाश में पूरे शहर में सभी दुकान मिलाकर पिछले 6 महीनों में ऐसा कैमरा बस एक दो लोगो ने ही खरीदा था,वो एक दो लोग भी ऐसे थे जो शक से पूरी तरह से बाहर थे,दुकानदार ने बताया की ये कैमरा वो रखते भी नही कोई ऑर्डर देता है तो ऑनलाइन मंगाते है,अधिकतर लोग तो इसे ऑनलाइन ही खरीद लेते है ...मतलब हमारे हाथ में कुछ नही आने वाला था ..

मैं कैमरे का फ़ोटो पकड़कर होस्टल में गया लेकिन पता नही क्या हुआ की मैं अविनाश से मिलने की बजाय तरुणा के पास चला गया ,मैं थक कर चूर हो चुका था मैं उसके कमरे में जाकर उसके टेबल में वो फोटोज फेक दी और उसके बिस्तर में धम से गिर गया,मैं आंखे मूंदे पड़ा था,तरुणा आयी लेकिन मुझसे कुछ नही कहा ,वो अब ज्यादा बाते नही करती थी उसने वो फोटोज उठाई शायद साथ कोई और लड़की थी .

"मेम ये तो बहुत महंगा कैमरा है पूरे कालेज में बस एक ही शख्स के पास है आप ले रही हो क्या इसे "

वो कोई जूनियर थी ,मैं तुरंत ही उठ कर खड़ा हो गया और उस लड़की का मुह देखने लगा मेरी अजीब हरकत से तरुणा ने मुझे अजीब निगाह से देखा

"किसके पास है ऐसा कैमरा ??"

मैंने उस लड़की से झट से कहा

"आकाश के पास ,पिछली बार वो क्लास के साथ पिकनिक में आया था तो ले के आया था "उस लड़की ने डरते हुए कहा .....
 
अध्याय 35

तरुणा ने तुरत ही अविनाश को फोन लगाया और हम एक्शन में आ गए ,मैंने अविनाश से कहा की अभी ये बात किसी को ना बताए अपने जिगरी दोस्तो को भी नही हम दोनों ही तुरत आकाश के घर की ओर बढ़े वो घर नही बंगलो था,मुझे साफ साफ वो दिन दिखाई दे रहा था जब आकाश ने काजल को देख लेने की धमकी दी थी ,शायद उसे ये भी पता चल गया था की काजल उसके साथ क्यो नही आयी थी उसका कारण मैं था ,लेकिन शकील से उसकी क्या दुश्मनी हो सकती थी ,खैर अभी तक हम इस बात को लेकर कन्फर्म नही थे की वो शख्स आकाश ही होगा बस उसके पास उन दो कैमरा मॉडल में एक था ,और उसके पास काजल से बदला लेने की भी वजह थी,लेकिन वो कम्प्यूटर में इतना भी जीनियस नही था की badebhaiya बनकर कुछ ऐसा कांड कर दे ,जरूर अगर ये आकाश ही था तो उसने इसी को हायर किया होगा,जो भी हो मुझे बस मेरी काजल मिल जाए फिर बाकी चीजे बाद में भी देखी जा सकती थी ..

"हमे पता नही की हम सही आदमी के पीछे है की नही ,आकाश का बाप यंहा का बहुत बड़ा बिजनेसमैन है अगर हम गलत हुए तो हम जेल के अंदर होंगे ,और इतने छोटे से सबूत के सहारे हम कुछ कर भी नही सकते "अविनाश ने एक स्वाभाविक सी बात कही थी

"हा लेकिन चांस तो लेना होगा,अगर हमने कैमरे की बात को माना है तो उस कमरे की बात पर भी हमे गौर करना चाहिए, गणपत ने कहा था की वो कमरा सीलन भरा होगा और हरियाली के पास होना चाहिए तो ,,इसका ये घर तो नही हो सकता ऐसे भी यंहा वो अपने पूरे परिवार के साथ रहता है तो मुझे नही लगता की उसने काजल को यंहा छिपाया होगा ."

"मतलब की इसका कोई दूसरा घर भी होगा "

"ये अमीर आदमी है शायद कोई फार्महाउस "

अविनाश थोड़ी देर सोच में पड़ गया फिर उसने अपना मोबाइल निकाला ,मैंने उसे तुरंत ही मना किया

"अगर ये शख्स आकाश ही है तो कालेज का कोई भी आदमी उससे मिला हो सकता है वो पैसे के जोर में किसी को भी खरीद सकता है "

अविनाश मेरी बात को समझ चुका था लेकिन उसके चहरे में हल्की सी मुस्कान आई

"फिक्र मत कर मैं उसे फोन लगा रहा हु जिनके लिए दोस्ती पैसों से कही ज्यादा महत्व रखती है "

अविनाश ने जॉनी को भी फोन लगाया और एक ठिकाने में राकेश के साथ आने को कहा .ये दोनों वही थे जो हमारे साथ केशरगढ़ गए थे ...

हम सभी वंहा पहुच चुके थे जंहा अविनाश ने जॉनी को बुलाया था..

"आकाश पर नजर रखना होगा वो कहा जाता है क्या करता है उसका वीडियो रोज ही आता है इसका मतलब है की वो रोज अपने घर से निकल कर उस जगह पर जाता होगा ...कोई ऐसा आदमी है जो इस काम को अच्छे से कर सके क्योकि आकाश को इसका पता नही लगना चाहिए."

जॉनी ने सर हिलाया उसके पास ऐसा आदमी था .

वो तुरंत ही काम में लग चुका था ,आज रात ना मुझे नींद आने वाली थी ना ही अविनाश को ना ही तरुणा को ,तरुणा को स्पेशल हिदायत दी गई थी की उस लड़की को जिसने हमे ये बताया की ऐसा कैमरा आकाश के पास है उसे अपने से अलग ना करे ,कही ऐसा ना हो की वो किसी और को बता दे और बात आकाश तक पहुच जाए ,सच कहु तो हम डरे हुए थे,हमे पता था की ये आदमी जो भी हो है बेहद ही चालाक ,और उसे हमारे हर एक मोमेंट की भनक थी ,

जैसे तैसे दिन बिता और सुबह की पहली किरण निकलने से पहले ही हमारे फोन घनघना उठे .

फोन जॉनी का था आकाश शहर से दूर अपने किसी फार्महाउस में गया था ,हम तुरंत ही उस तरफ निकल गए ,हम 4 लोग थे मैं ,अविनाश राकेश और जॉनी.

फॉर्महाउस शहर से कोई 10 किलोमीटर की दूरी पर था ,बाहर एक गार्ड बैठा ऊंघ रहा था,सुबह के 6 बजने को थे और रोज की तरह हमारे फोन की घण्टी बजी एक और वीडियो ..हम अभी थोड़ी दूर छिपकर देख रहे थे ,आकाश बाहर आ चुका था और वंहा से जा चुका था,हम सीधे गार्ड के पास पहुचे एक आदमी ने उसका ध्यान भटकाया और दूसरे ने उसे बेहोशी की दवाई वाला रुमाल सुंघाया ,...वो वही लुढ़क चुका था.

फॉर्महाउस को पूरी तरह छान मारने के बाद हमे एक कमरा दिखाई दिया जो की अंदर एक कोने में बना हुआ था जब हम वंहा गए तो वंहा एक कम्प्यूटर मिला और कुछ चीजे बिखरी हुई थी ,हमारे दिलो की धड़कने तेज हो रही थी,हमने उसी कमरे से लगे एक और कमरे का दरवजा देखा और उसे खोलते ही मानो आंखों का बांध ही टूट पड़ा .

हा वो मेरी काजल थी,वो बेहोश थी ,मैं जाकर उससे लिपट चुका था ,और उसका हाथ मेरे बालो को सहलाने लगा ,मैंने अपना सर उठाया ..वो मुस्कुरा रही थी .

"मुझे पता था तुम आओगे "

उसकी इस बात से ऐसा लगा जैसे कई काटे एक साथ मेरे दिल में चुभ गए हो,वो मेरे कारण ही तो यंहा थी लेकिन फिर भी उसे मुझपर इतना भरोसा था .....
 
अध्याय 36

सुनसान कमरे में दो लोगो को बांध कर रखा गया था ,हम सभी ने उन पर अपना पूरा जोर आजमाया था,मानसिक और शाररिक चोट के कारण काजल को हॉस्पिटल में रखा गया था और हम यंहा थे काजल के गुनहगारों के साथ ..

आकाश का बाप बड़ी ही पहुची हुई चीज था,वो कानूनी रूप से उसे बचा सकता था,या हमे कानूनी दांवपेचों में फंसा सकता था, इसलिए हमने उसे किडनैप करने की सोची और किसी ऐसे ठिकाने पर ले आये जो पुलिस और उसके बाप के पहुच के बाहर हो ...

हम दोनों ही लोगो को बुरी तरह मारकर अपनी भड़ास निकाल चुके थे,वो खून से लथपथ कुर्सी में बंधे हुए थे....

"भाई इनसे कुछ पूछना हो तो पूछ लो फिर इन्हें मारकर इनके लाश ठिकाने लगा देते है "

राकेश ने अपने गुंडों वाले अंदाज में अविनाश से कहा ..

"इन मादरचोदों ने मेरी प्रिया को इतना दर्द दिया है इन्हें तो मैं अभी मार के फेक दूंगा कुछ पूछने की बात ही नही है "

अविनाश मेरी ओर देखने लगा .

"हा भाई मैं भी यही चाहता हु लेकिन मैं इनसे बात करना चाहता हु ,कोई इतना दरिंदा कैसे हो सकता है मैं जानना चाहता हु की आखिर क्या ऐसी वजह थी की इन्होंने ये दरिंदगी दिखाई ."

मेरी बात सुनकर अविनाश ने हा में सर हिलाया और थोड़ा रिलेक्स होकर उन लोगो से थोड़ा दूर हो गया.

"ठीक है दिया तुझे समय ,फिर इनको हमेशा के लिए सुला देंगे "

अविनाश ने खतरनाक तरीके से कहा और कमरे से तुरंत ही बाहर निकल गया .वही राकेश और जॉनी अभी भी वही दीवार से सटे सिगरेट पी रहे थे ...

मैं एक कुर्सी खिंचकर आकाश के सामने बैठ गया था,उसका सर लटका हुआ था मुह से भी खून बन रहा था..मैंने पास रखी पानी की बोतल उसके मुह में घुसेड़ दी ,वो थोड़ा नार्मल हुआ .

"क्यो किया तुमने ऐसा "

वो बड़ी मुश्किल से अपना सर उठाया लेकिन उसके होठो पर मुस्कान थी ..

"ताकि दुनिया को पता चल जाए की काजल एक रंडी है "उसकी हर बात से ऐसा लग रहा था जैसे मैं उसे अभी मार दु लेकिन फिर भी मैं संयम बरते हुए था...

"इससे तुम्हे क्या हासिल हुआ "

"सुकून ...उस साली ने मुझे मना किया था,बड़ी सती सावित्री बन रही थी ,फिर मुझे पता चला की उसने ऐसा तेरे प्यार के कारण किया है ,रंडियों को प्यार करने का कोई हक नही होता वो साली कैसे किसी से प्यार कर सकती है ,मेरे ईगो को ठेस पहुची थी ,मैं उसे सबक सीखना चाहता था ,मैं शकील के पास गया और उसे और भी ज्यादा पैसे की पेशकश की ,मैंने उससे कहा की वो काजल को मुझे सौप दे और बदले में जितना चाहे उतना पैसा मैं उसे दूंगा,और काजल को अपनी गुलाम बना कर रखूंगा,लेकिन उस अड़ियल आदमी ने भी मुझे धक्के मार कर बाहर कर दिया,वो मुझसे बोला की काजल सिर्फ उसकी गुलाम है और उसके ऊपर हर जुल्म करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ उसे ही है ,मैं उसके घमंड को तोडना चाहता था और कुछ ऐसा करना चाहता था की वो दोनों ही मेरे घुटनो में आ जाए लेकिन इसी बीच काजल रंडीखाने से गायब हो गई ,मुझे इसने(उसने बाजू में बंधे आदमी की ओर इशारा किया ) बताया की तुमने और अविनाश ने मिलकर ये किया है,तब से ही हम ये प्लान करने लगे की आखिर हम एक तीर से दो शिकार कैसे करे,और हमे तेरी बेवकूफी का पता चला,तू डार्क वेब में घुसना चाहता है शकील को बर्बाद करने के लिए,हमने जाल बिछाया और तू उसमें फंस गया ..और फिर मैंने काजल को अपनी गुलाम बनाकर यंहा रखा ,लेकिन साली फिर भी नही टूटी ,मैं उसे तोडना चाहता था ,मैं दुनिया को और तुम्हे दिखाना चाहता था की वो मेरी कुतिया बन चुकी है मैं उसका जैसे चाहु वैसे इस्तेमाल कर सकता हु,लेकिन वो नही मानी उसे तुम्हारे और अविनाश के ऊपर कुछ ज्यादा ही भरोसा था,मैंने उसे मारा पीट लेकिन वो मेरी गुलाम बनने को तैयार नही थी ,इसलिए उसे मैंने बांध दिया उसके साथ जबरदस्ती की और दुनिया को ये बताया की देखो ये काजल है जो अविनाश की दोस्त और राहुल का प्यार है और मैं इसके साथ क्या क्या कर रहा हु ,क्यो???

क्योकि वो रंडी है और रंडियों के साथ यही होना चाहिए ,..वो इसी के लिए बनी होती है ,अपनी चुद बेचने के लिए,उन्हें प्यार करने का कोई हक नही है ,वो बस चुदवाने के लिए पैदा.."

आकाश की बात अब मेरे सहन के बाहर थी मैंने वही पास रखा एक लकड़ी का टुकड़ा उठाया और उसके गले से भोंग दिया,खून के फुहारे उसके गले से फूटने लगे और उसकी आंखे बाहर लटकने लगी ...

मैं गुस्से में पागल हो चुका था मेरी सांस मेरे ही काबू में नही था,और आखिर मैंने वो किया जो करने को मैं इतने दिनों से बेताब था...

कमरे में सिर्फ सन्नाटा था ,बस बाजू में बंधे हुए आदमी की सिसकियां ही सुनाई दे रही थी ,अब मैं उसकी ओर मुड़ा....

वो मुझे खोफ से भरी आंखों से देख रहा था,

"अब तुम्हारा क्या किया जाय"

मैंने बड़े ही ठंडे लहजे में उससे कहा,

"मुझे छोड़ दो राहुल मैंने जो किया वो पैसों की लालच में किया,मुझसे गलती हो गई ,मैं सारे पैसे तुम लोगो को दे दूंगा मुझे जिंदा छोड़ दो "

उसकी बात सुनकर मैंने राकेश और जॉनी की ओर देखा वो उसे देखकर मुस्कुरा रहे थे.

राकेश पास आया और एक जोरदार थप्पड़ उसके गालों में मार दिया.

"मादरचोद तूने दोस्ती का सौदा किया है ,हमारे बीच रहकर तूने इस आदमी का साथ दिया सिर्फ पैसों के लिए ,अबे पैसे तो तुझे राहुल भी दे देता लेकिन तूने बेचारी काजल की जिंदगी बर्बाद कर दी ,तुझे कैसे छोड़ दे साले तु तो आकाश से भी ज्यादा गुनहगार है "

राकेश की बात सुनकर वो बस रोने लगा और छोड़ने की भीख मांगने लगा था...

"मुझे बताओ देबू की आखिर तुमने ये सब क्यो और कैसे किया "

देबू मुझे ध्यान से देखने लगा और फिर उसने कहना शुरू किया .

"जब तुम मेरे पास आये थे उससे पहले ही आकाश ने मुझे पैसे का लालच दे दिया था ,मैं उसके ही कहने पर तुम्हे डार्क वेब के बारे में जानकारी दी और उस ग्रुप में ऐड किया ,वही मैंने तुमसे अपने दूसरे अकाउंट के जरिये badebhaiya बनकर संपर्क किया,तुम्हे अपने झांसे में लिया और तुम्हारी मदद की ताकि तुम्हे मुझपर पूरा यकीन हो जाए ,इसकाम को मुझसे आकाश(I_am_a_dog) ने करवाया था,उसके ही कहे अनुसार मैंने शकील के सारे धंधों की जानकारी पुलिस को दी ,उसका पूरा अकाउंट हैक करके उसे कंगाल किया और फिर तुम्हे फंसाया,मैं तो बस इतना ही करना चाहता था लेकिन आकाश की आकांक्षा और भी कही ज्यादा थी वो तो काजल को के साथ ..खैर मैं उसकी बात नही मानना चाहता था लेकिन उसने मुझे मार देने की धमकी दी,शकील का पूरा पैसा अभी भी मेरे अकाउंट में है और उसकी जानकारी अभी तक पुलिस को नही लगी है ,मेरा यकीन करो राहुल की मैं काजल के साथ ऐसा नही करना चाहता था लेकिन मैं फंस चुका था,मैं उस पैसे को नही खोना चाहता था,अगर पुलिस को पता लग जाता की किसी ने शकील के अकाउंट को खाली कर दिया है तो वो पीछा करते हुए कभी ना कभी मेरे अकाउंट तक पहुच ही जाते,ऐसे मैने ऐसा जाल बुना था की पुलिस को मुझतक पहुचने के लिए भी सालों लग जाते लेकिन फिर भी मेरे अंदर पैसों को खोने का और अपनी जान का डर हावी हो गया था,मैंने आकाश की मदद की और उसके एवज में उसने मुझे और पैसे देने का वादा भी किया,और कुछ पैसे दिए भी,मुझे वो रोज ही काजल की एक वीडियो भेजता था जो उसके आवाज में ही होती थी मुझे उस आवाज को शकील की आवाज में चेंज करना होता था और उसके बाद इंटरनेशल नंबर से सभी कालेज वालो के पास भेजना होता था,इसके लिए हमने कालेज का ऑफिशल सर्वर भी हैक किया था,मुझे माफ कर दो मैं मानता हु की मैं गलत था और गलत आदमी के साथ था लेकिन सच में काजल के साथ कुछ बुरा करने का मेरा कोई इरादा नही था."

देबू ने बोलना बंद किया,मैं उसकी बात बड़े ही ध्यान से सुन रहा था और मेरे हाथो में अब भी वो लकड़ी का टुकड़ा था जिसे मैंने आकाश के गले में घुसाया था,मेरे हाथ जोरो से चले जिनका निशाना देबू का गला था,लेकिन ..

"राहुल इसे अभी छोड़ दो ,ये हमारा पुराना दोस्त है हमे इससे निपटने दो ,तुम हमे थोड़ी देर के लिए अकेला छोड़ सकते हो "

राकेश ने मेरा हाथ पकड़ लिया था मैं उसकी आंखों में देख रहा था ,काजल के मुजरिम पर मुझे कोई भी दया नही आ रही थी लेकिन राकेश अब मेरा दोस्त था जिसने मेरी इतनी मदद की थी मैं उसकी बात को कैसे काट सकता था,मैंने बस हा में अपनी गर्दन हिलाई और वंहा से निकल गया...

मैं बाहर टहल रहा था तभी वंहा अविनाश भी आ गया था ,उसने एक सिगरेट मेरे आगे किया ,मैं इतने दिनों बाद आज सिगरेट पी रहा था,हम दोनों ही कमरे के बाहर सिगरेट के गहरे कस लगा रहे थे,

"प्रिया अब ठीक है तरुणा में मुझे फोन किया था वो तुम्हे ही याद कर रही है ,अब तुम्हे उसके पास होना चाहिए "

अविनाश की बात पर मैंने बस हा में सर हिलाया

"पुलिस का क्या ,उसे क्या कहेंगे "

"प्रिया ने बयान दिया है की वो उस मुजरिम को नही पहचानती जिसने उसे किडनैप किया था,वो बस बोर होकर उसे जंगल में छोड़ आया फिर वो जैसे तैसे रोड तक आयी ,वंहा उसको एक गाड़ी आती दिखाई दी ,सौभाग्य से उस गाड़ी में आकाश और देबू थे जो दोनों ही उसे पहचानते थे,वो वंहा से जाने ही वाले थे की उस सनकी ने उन्हें देख लिया और फिर से हमला कर दिया इस हमले में आकाश और देबू जख्मी हो गए और वही रह गए जबकि प्रिया जैसे तैसे गाड़ी लेकर वंहा से भागने में कामयाब रही ,अब पुलिस उसकी बताई जगहे देबू और आकाश को ढूंढने निकली है ."

अविनाश की बात सुनकर मुझे जोरो की हंसी आयी,और मैं हँसने भी लगा,साथ ही अविनाश भी हँस रहा था.

"अच्छी कहानी बनाई तुमने ,अब पुलिस बस उस केडनेपर को ढूंढती रह जाएगी ,जो है ही नही और आकाश और देबू की जाली हुई लाश उन्हें मिलेगी ,जिससे मामला ही क्लोज हो जाएगा."

"हा वो तो है लेकिन पहले हमे अच्छे से फिंगर प्रिंट मिटाने होंगे,मेरे ख्याल से अब तुम्हे यंहा से चले जाना चाहिए इस काम में राकेश और जॉनी पुराने खिलाड़ी है उन्हें ही ये काम करने दो "

"हा वो तो ठीक है लेकिन देबू अभी भी जिंदा है राकेश उससे कुछ बात करना चाहता था "

मेरी बात सुनकर अविनाश मुस्कुराया

"करोड़ो का मामला है राकेश ऐसे कैसे जाने देगा ,पैसे मिल जाए तो देबू खत्म "

"ह्म्म्म "

थोड़ी देर बाद राकेश और जॉनी बाहर आये उनके हाथ में एक डायरी थी ,उन्होंने उसे मुझे पकड़ा दिया ..

"हमने उससे उसके अकाउंट के सारे डिटेल्स निकलवा लिए है ,साले में विदेश में अकाउंट खुलवा के रखा है जिससे पुलिस उस तक ना पहुच पाए लेकिन ये हमारे लिए अच्छी बात है क्योकि अब उसके बाद पुलिस उस अकाउंट तक नही पहुच पाएगी ..देबू का काम तमाम कर दिया है अब लाश को ठिकाने लगते है ,तुम अकाउंट के माल को ठिकाने लगा दो "

राकेश के चहरे में एक मुस्कान थी

"कितना माल होगा "

मैंने थोड़ी उत्सुकता से पूछा

"देबू के अनुसार यही कोई 40 करोड़ "

मेरा और अविनाश का मुह खुला का खुला रह गया था...

*****************

किसी का हाथ मेरे सर को सहला रहा था,मेरी नींद टूटी सामने काजल मुस्कुरा रही थी,वो अभी हॉस्पिटल के बिस्तर में लेटे हुई थी,और मैं उसके बाजू में बैठा हुआ था,जब मैं हॉस्पिटल पहुचा तो वो सो रही थी मैं उसके बाजू में ही बैठ गया था ना जाने कब मैं नींद के आगोश में समा चुका था.

आखिर उसका हाथ सर में पड़ते ही मैं जाग गया .

"अब कैसी हो "

मैंने उसे प्यार से पूछा

"बस तुम्हे देखकर ठीक हो गई 'वो हल्के से मुस्कुराने लगी

"पता नही क्यो लेकिन अब भी मुझे डर लग रहा है कही कोई हमे फिर से अलग ना कर दे "

मैंने बेचैनी से कहा, काजल की मुस्कान और भी बढ़ गई थी ,उसने मुझे अपने हाथ उठाये और मैं उसके सीने से सर रखकर सो गया वो मेरे बालो को सहला रही थी ..

"अब किस बात का डर है ,तुमने इतने मुस्किलो के बाद भी मुझे पा ही लिया "

"नही काजल अभी नही ,अभी हम एक नही हुए है ,मैं हमेशा के लिए तुम्हारा होना चाहता हु,मैं तुमसे शादी करना चाहता हु ,करोगी मुझसे शादी "

अब मैं उसके आंखों में देख रहा था उन आंखों में जिन आंखों में मेरे लिए अपार प्रेम था और शायद वो प्रेम आंसुओ की शक्ल में बाहर झरने लगा था,वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन उसका गला भर्राया हुआ था,उसने बस सहमति में अपना सर हिला दिया और मुझे अपने पास खिंच लिया,उसके होठ मेरे होठो से मिल गए थे,उसने मुझे अपने बांहों के घेरे में जोरो से जकड़ रखा था जैसे वो कभी मुझसे अलग नही होना चाहती थी ,ये अहसास बड़ा ही अनोखा था एक होने का अहसास ,किसी का हो जाने का अहसास और हम बस इस अहसास में ही डूबते जा रहे थे जैसे कहते है ना

'मेरा मुझमें कुछ नही जो कुछ है वो तोर,तेरा तुझको सौपते क्या लागत है मोर..."
 
अध्याय 37

वो हॉस्पिटल का लक्जरी कमरा था ,किसे यकीन होगा की कुछ दिनों पहले ही कौड़ी कौड़ी को तराशते हुए लड़के के अकाउंट में आज 10 करोड़ रुपये थे,शकील से मिले 40 करोड़ को हमने 4 हिस्से में बाटा था,जिसमे राकेश,जॉनी और अविनाश के हिस्से में 10-10 करोड़ आये थे वही मैंने अपने और काजल के लिए 10 करोड़ रखे थे,ऐसे इस बात को लेकर अविनाश और उसके दोस्त नाराज हो गए थे,उसका कहना था की 4 नही 5 हिस्से होने चाहिए काजल को भी एक हिस्सा मिलना चाहिए लेकिन मैंने और काजल ने दोनों ही मना कर दिया ,हम इतने में ही खुश थे ,लेकिन वो नही माने उनका कहना था की मुझे और काजल को ज्यादा मिलना चाहिए ,लेकिन हम और पैसे नही लेना चाहते थे,जब वो अड़ ही गए तो काजल ने एक सुझाव दिया की क्यो ना वो कुछ पैसे हमारी प्रोडक्शन कंपनी में लगाए जिसे मैंने प्यारे की मदद से रंडीखाने की औरतो के मदद करने के लिए खोला था,इस बात पर सभी मान गए थे और कंपनी के अकाउंट में अब 6 करोड़ थे तीनो में 2-2 करोड़ दान किया था ,प्यारे की भी बल्ले बल्ले हो गई थी वो अब और भी अच्छी मूवी बना सकता था...

उस कमरे में आज बहुत ही खुसी का माहौल था,साथ ही आज काजल से मिलने शबनम और चंपा मौसी भी आये हुए थे,आते ही उन्होंने काजल को गले से लगा लिया ..

"तुम्हारे कारण आज हम सबकी जिंदगी आबाद हो गई काजल ,ये शबनम तो कोई बड़ी हीरोइन जैसे फेमस हो गई है ,कई लोग तो इसका ऑटोग्राफ भी लेते है और वो क्या कहते है सेल्फी लेते है "

चंपा की बात से काजल बहुत ही खुश थी ,

"ऐसे काजल ये तेरा चूतिया इतना भी चूतिया नही है क्या दिमाग लगाया इसने,इसके कारण हम शकिल के चुंगल से भी निकल गए और देख साले ने हम रंडियों को हीरोइन बना दिया ...तेरे इस चिकने पर तो सब कुछ लुटाने का दिल करता यही एक रात के लिए ले जाऊ क्या इसे "

शबनम की बात सुनकर काजल जोरो से हँस पड़ी ,बड़े दिनों बाद मैं भी इस तरह की बाते सुन रहा था,और काजल को ऐसे खिलखिलाता हुआ देखकर मेरा तो दिल ही गार्डन गार्डन हो गया था..

"ले जा ले जा लेकिन तू तो अब बहुत महंगी हो गई होगी हीरोइन जो बन गई है "

"हा पहले तो कोई साला 100 रुपये नही देता था अब तो 50 हजार लेती हु एक रात का और तुझे यकीन नही होगा फिर भी लोग मरे जाते है लेने के लिए,बाकायदा अपॉइमेन्ट लेते है "

शबनम जोरो से हंसी और साथ ही काजल भी ,वो लोग बहुत देर तक बात करते रहे ,वो उसे बताते रहे की प्यारे कैसे मूवी बनाता है और उसकी पुरानी सहेलियां कैसे उसकी मूवी में काम करती है,उनके पास कहने को बहुत कुछ था और उनकी बातों पर काजल जोरो से हँस रही थी ,उसका चहरा खिला हुआ था वो कभी कभी मेरी ओर देखती उसकी आंखे मुझसे कुछ बात कर रही थी जैसे कह रही हो की ये सब तुम्हारे ही कारण हुआ है .

हंसते हंसते उसकी आंखों में पानी आ जाता था वो उसे पोछती और फिर से बात करने लग जाती ..

,मैं बहुत खुश था काजल भी खुश थी और मुझे क्या चाहिए था..

*************

पढ़ाई चल रही थी साथ ही शेयर मार्किट और प्रोडक्शन का काम भी ,मैं अब मा पिता जी को भी शहर लाना चाहता था ,मैं काजल,अविनाश और तरुणा के साथ गांव के लिए निकल गया ,मैंने एक कार ली थी हम उसी में वंहा गए थे,जैसे जैसे गांव पास आ रहा था मेरे आंखों में पानी आते जा रहा था,मैं इसी गांव में बड़ा हुआ था,यही मैंने लोगो के मुह से सुना था जब वो पिता जी को कहते थे की इसे पढ़ाकर क्या करेगा उससे अच्छा इसे भी मजदूरी ही करवा कम से कम घर में पैसे तो आएंगे,लेकिन मेरे मा बाप ने अपने पेट की चिंता किये बिना मुझे खिलाया और हमेशा मेरे पढ़ने पर जोर दिया,आज मेरे पास इतना पैसा था की मैं पूरे गांव को ही खरीद दु,मैं अपने मा बाप को खुश देखना चाहता था,मैं उस झोपड़ी के सामने पहुचा जिसे हम घर कहते थे...

हम गाड़ी से उतरे पूरा गांव गाड़ी देखकर वंहा इकठ्ठा हो गया था,बच्चों के लिए ये कर किसी अजूबे से कम नही थी ,और बच्चे क्या बड़ो ने भी ऐसी कार शायद अपने जीवन में कभी ना देखी हो

दो हॉर्न के बाद मेरी माँ बाहर आयी मैं सामने ही खड़ा मुस्कुरा रहा था.

वो आंखे फाडे कभी मुझे देखती तो कभी मेरी गाड़ी को को तो मेरे दोस्तो को ,वो बहुत देर तक ऐसे ही खड़ी रही जैसे मुझे पहचानने की कोशिस कर रही हो ,वही मेरे पिता भी बाहर आ चुके थे,शायद अभी काम से आये थे और थककर लेटे होंगे .

"मुन्ना ये तू है क्या "

आखिर माँ ने बड़े ही संकोच से कहा और मैं दौड़ाता हुआ उनसे जा लिपटा

"हा माँ ये मैं ही हु,क्या तू भी मुझे पहचान नही पा रही है "

मेरे आंखों से आंसू बहने लगे थे

वो भी कुछ ना कह सकी थी बस मेरे कंधों में कुछ गीलेपन का अहसास हो रहा था...थोड़ी देर बाद वो मुझसे अलग हुई ,और फिर मैंने पिता जी के पैर पड़े

"आप भी नही पहचान रहे थे क्या "

मैंने माजक में कहा

"अरे कैसे पहचानते तू तो शहर से पूरा साहब बन कर आया है "

पास खड़े गांव के मुखिया ने कहा ,वही पिता जी के आंखों में बस गर्व के आंसू थे,उन्होंने बस आशीर्वाद के रूप में मेरे गालों पर हाथ फेरा ,मैने जाकर मुखिया के पैर पड़े ..

"खुश रहो बबुआ,हम जानते थे की तुम पढ़ लिखकर एक दिन बड़े आदमी बनोगे,हम कहते थे ना हरिया तुमसे की ये लड़का कुछ करेगा "

मुखिया के मुह से ये बात सुनकर मुझे हंसी आयी क्योकि ये ही वो आदमी था जिसने मेरे पिता को मेरे कालेज जाने के लिए पैसे देने से मना किया था,मेरे पिता जी इसी के खेतो में काम करते थे,और मुखिया नही चाहता था की उसके मजदूर का बेटा शहर में जाकर पढ़ाई करे .

"जी मालिक "

मुखिया की बात सुनकर मेरे पिता जी ने कहा

"अरे अब कहे का मालिक रे हरिया अब तो तेरा बेटा साहब बन गया है ,देख कितनी बड़ी गाड़ी में आया है,ऐसे कौन सी गाड़ी है हम भी लेने की सोच रहे थे,कितने की है "

मुखिया ने बड़े ही अजीब नजरो से उस कार को देखा और मेरे बोलने से पहले ही अविनाश बोल उठा

"ये ऑडी है मुखिया जी ,ज्यादा नही सिर्फ 70 लाख की है "

"70 लाख???? "

मुखिया का मुह खुला का खुला ही रह गया ,मुखिया हमारे गांव का सबसे अमीर आदमी था लेकिन ये एक कार उसकी पूरी जायजाद के आधे के बराबर थी ,वही 70 लाख सुनकर मेरे माता पिता का चहरा ही पिला पड़ गया था..

उस घर में सिर्फ एक ही कमरा था इसलिए हम सभी बाहर ही खाट पर बैठे थे,लोग अभी भी वंहा जमा था इएलिये माँ ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अंदर आने को कहा ,वो घबराई हुई लग रही थी,साथ ही मेरे पिता जी भी अंदर आ गए थे..

"क्या हुआ माँ "

"बेटा तू सच सच बता इतने कम दिनों में तूने इतने पैसे कैसे कमा लिए,तू कोई गलत काम तो नही करता ना और ये लोग कौन है बेटा जो तेरे साथ आये है सभी बड़े घर के लोग लगते है,इतने बड़े लोगो से दोस्ती करना हम जैसे गरीब लोगो के लिए ठीक नही है बेटा"

माँ सच में बहुत घबराई थी ,लेकिन उनके इस भोलेपन के कारण मुझे उनके लिए बहुत प्यार आया ..

"बेटा हम भूखे मर जाएंगे लेकिन कभी हमने हराम का नही खाया है,अगर तुमने गलत तरीके से पैसे कमाए यही तो थू है ऐसे पैसे पर,भूखे रह जाएंगे लेकिन गलत काम नही करेंगे,तू अपनी माँ की कसम खा की ये पैसे तूने किसी गलत काम से नही कमाए है बल्कि ये तेरे मेहनत के पैसे है ."

मेरे पिता ने मेरा हाथ पकड़ कर माँ के सर में रख दिया,मैं उन्हें भी प्यार भरी नजरो से देखने लगा,इन लोगो को 70 लाख सुनकर चक्कर आ गया था,अगर मैं इन्हें सच में बता देता की मेरे पास कितने पैसे है तो ये तो बेहोश ही हो जाते ,जीवन भर इन्होंने दो रोटी के लिए संघर्ष किया था ,सुख में रहने की भी इनकी आदत नही थी ,सभी बातों को सोचकर मेरे होठो में मुस्कान आ गई

"ये मेरी मेहनत के पैसे है मा,मैंने कोई गलत काम नही किया है और हा ये जो मेरे साथ आये है वो सभी मेरे दोस्त है बल्कि मेरे भाई बहन जैसे है और इनमें से एक तेरी बहु है "

माँ की आंखे फैल गई थी ,

"कौन ??"

"वो "मैंने झोपड़ी की खिड़की से काजल की ओर इशारा किया ,जबकि माँ बड़े ही हैरत से मेरी ओर देखने लगी

"इतनी सुंदर लड़की तेरे से शादी करेगी ??"

माँ की बात सुनकर मैं जोरो से हँस पड़ा था ,मैं इतना जोरो से हंसा था की बाहर बैठे लोग भी खिड़की की ओर देखने लगे थे,

मैंने इशारे से काजल को अंदर बुलाया काजल के साथ तरुणा भी आई थी ,मैंने काजल को दिखाते हुए फिर से कहा ..

"माँ ये है काजल तुम्हारी बहु "

मेरी बात सुनकर काजल थोड़ा चौकी फिर तुरंत ही माँ और पिता जी के चरण स्पर्श किये ऐसे जब काजल को पता चला की वो मेरे गांव जा रही है उसने जीन्स की जगह सलवार पहनने का फैसला किया था,और अब पैर पड़ते वक्त उसने अपनी चुन्नी ओढ़ ली थी .

मेरे माता पिता तो जैसे अभी इस दुनिया में ही नही थे वो किसी और ही दुनिया में खो गए थे,लेकिन जब काजल ने उनके पैर पड़े तो उनके मुह से अनायास ही निकल गया

"खुश रहो बेटा ."

काजल थोड़ी शर्माते हुए खड़ी थी तभी मेरी माँ ने उसे पूछ ही लिया

"बेटा क्या तुम सच में मेरे बेटे से शादी कर रही हो "

मैं और तरुणा जोरो से हँस पड़े वही काजल शर्मा गई थी ,माँ ने मुझे हंसता हुए देखकर मेरे बाजू में एक मुक्का मारा,अब मेरी मा की हालत सही हुई थी लेकिन अगले ही पल उसके आंखों में आंसू आ गए .

उसने बड़े ही प्यार से अपना हाथ से काजल के सर को सहलाया

"बहुत बहुत खुश रहो मेरी बेटी ,हम तो कभी तुझ जैसी सुंदर बहु नही ढूंढ पाते जैसा हमारे बेटे ने ढूंढ लिया है ...लेकिन बेटा मुझे माफ करो की तुम्हे देने के लिए मेरे पास कुछ भी नही है ,मैं भी कैसी अभागी हूं जो मेरी बहु मुझसे पहली बार मिल रही थी लेकिन मैं उसे कुछ भी नही दे पा रही ."

मैं माँ के दर्द को समझ सकता था असल में ये मेरी ही गलती थी मुझे माँ और पिता जी को कुछ पैसे पकड़ा देने थे ताकि वो काजल को वो दे सके ,लेकिन माँ की बात सुनकर काजल मुस्कुरा उठी

"मुझे कुछ भी नही चाहिए माँ जी अपने मुझे अपना लिया यही मेरे लिए बहुत है "

माँ ने अपने आंसुओ से भरे आंखों पर अपनी उंगली फेरी और थोड़ा काजल निकाल कर काजल के सर पर लगा दिया "

"नजर ना लगे मेरी बच्ची को "

बहुत ही एमोशनल सीन चल रहा था

"ऐसे मा जी मैं भी आपकी बेटी ही हु मुझे भी कुछ आशीर्वाद दे दो "

इस बार तरुणा थी ..

"क्यो नही क्यो नही "माँ ने फिर से अपने आंखों से काजल निकाल उसके सर पर लगाया और सभी को चौकाते हुए तरुणा माँ से लिपट गई ..कुछ ही देर में सभी घुल मिल गए थे,मैं अविनाश और पिता जी बाहर खाट में बैठे थे शाम हो चुकी थी लेकिन भीड़ जाने का नाम ही नही ले रही थी सभी शहर के किस्से कहानियां सुनना चाह रहे थे लेकिन आखिर मैं बताता भी क्या लेकिन इसका जिम्मा अविनाश ने उठा लिया था,वो सभी के सवालों के जवाब दे रहा था ,और वो भी बड़े ही मजेदार ढंग से जिससे लोगो का इंटरेस्ट और भी बढ़ रहा था ..

वही काजल और तरुणा माँ के साथ अंदर खाना बनने में लगी हुई थी .

रात होते होते लोग जाने लगे लेकिन खाना खाकर फिर से आने को कहकर .

ये तो सच है की माँ के हाथो की सामान्य सी रोटी किसी भी महंगे खाने से लाख गुना स्वादिष्ट होता है,क्योकि उसमें ममता और प्यार कूट कूट कर भरी होती है,जिन लोगो के नसीब में ये रोज ही लिखी हो उन्हें शायद इसका आभास कभी नही होता लेकिन जिनके पास ये नही होता वो ही इसकी कद्र जानते है ,उसी तरह मैं भी था,यंहा रहते हुए मुझे कभी इसकी कद्र नही हुई लेकिन आज इतने दिनों बाद जब रोटी का पहला निवाला मेरे मुह में गया तो मेरी आंखे अपने ही आप बंद हो गई थी ,मैं उस सुख में डूब ही गया था,इतना स्वादिष्ट खाना जैसे मैंने सालों से नही खाया था.

"तेरे हाथो में तो जादू है माँ"

"माँ के हाथो में तो जादू तो होता ही है लेकिन सिर्फ आज ही क्यो मैं तो रोज ही ऐसा खाना खाना चाहता हु "

अविनाश बोल उठा

"हा माँ आप दोनों कल ही मेरे साथ शहर जा रहे हो "

मेरी बात से जैसे पिता जी और माँ हड़बड़ा से गए थे..

"ये क्या बोल रहे हो बेटा हम वंहा जा कर क्या करेगें"

"अरे क्या करोगे हमारे साथ रहोगे ,मैं वंहा एक घर ले रहा हु ताकि हम सब एक साथ ही रहे "

पिता जी और माँ एक दूसरे का मुह ताकने लगे थे

"अरे इसमें सोचने वाली क्या बात है "

"बेटा हमारा जन्म इसी मिट्टी में हुआ है और हम यही रहकर मरना चाहते है ,शहर में हमे जानता ही कौन है यंहा हमारा पूरा परिवार है ,घर है "

पिता जी बोल उठे

"किस परिवार की बात कर रहे हो आप जब दुख था तब तो कोई सामने नही आता था मुझे तो पता भी नही की आप किस परिवार की बात कर रहे हो,बापू परिवार ये है आपके सामने आपका बेटा और बहु ,आप लोग साथ चल रहे हो बस "

"बेटा समझने की कोशिस करो हमने सारी जिंदगी यदि बिताई है ,हमे इस जगह की आदत सी हो गई है ,हम वंहा कैसे रह पाएंगे, तुम लोगो से मिलने आया करेंगे ना हम लोग लेकिन ...यहां सब छोड़कर वंहा रहना ...बेटा ये हमसे नही हो पायेगा "

इस बार माँ ने कहा था

"लेकिन माँ जब वंहा मेरे पास सब कुछ है तो फिर आप लोगो को यंहा दुख में रहने की क्या जरूरत है "

मैं थोड़ा चिढ़ सा गया था

"बेटा काहे का दुख ,तूने पैसा कमा लिया सुख देख लिए तो तुझे ये दुख लग रहा है वरना तू भी तो अपना बचपन यही बिताया था,इसी झोपड़े में रहकर ,तूने कभी हमे दूखी देखा था क्या,हा कभी कभी पैसों की थोड़ी दिक्कत होती है लेकिन इसे दुख तो नही कहते ना,तूने कभी मुझे और तेरी माँ को लड़ते हुए देखा ,या कभी तुझे लगा की हम तुझे प्यार नही करते नही ना.और पैसे वाले सुखी ही रहते है ये तू कैसे कह सकता है उन्हें भी तो दुख होता होगा ना "

पिता जी की बात सुनकर मैं पूरी तरह से अवाक रह गया था,पैसों से सुख नही खरीदा जा सकता ये मैंने सिर्फ सुना था लेकिन आज देख भी रहा था.

अविनाश ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और वो बोलने लगा

"ठीक है ठीक है अगर आप लोगो को यही रहना है तो एक काम क्यो नही करते ,राहुल यंहा आपलोगो के लिए एक घर बनाएगा और कुछ जमीन खरीदेगा ,आप लोग किसी और के घर काम करे ये राहुल कैसे सह पायेगा जबकि उसके पास आज सब कुछ है ,यंहा मजदूरो के जरिये आप लोग खेती कीजिए और यही रहिए लेकिन अभी तो साथ चलिए आखिर राहुल की शादी भी तो करनी है आपलोगो को "

अविनाश की बात का मैंने भी समर्थन किया पिता जी ने भी सर हा में हिला दिया लेकिन फिर बोल उठे

"बेटा क्या शादी यही नही हो सकती "

इस बार मैंने सर पकड़ लिया था

लेकिन अविनाश हँसते हुए बोलने लगा

"अरे चाचा जी यंहा भी कर देंगे शादी लेकिन अभी कोर्ट में करना है फिर जब यंहा घर बन जाए तो यंहा फिर से कर देंगे "

अविनाश की बात सुनकर माँ पिता जी दोनों ही अजीब निगाहों से हमे देखने लगे

"बेटा दो दो बार शादी "

उन्होंने अचंभे से कहा

और मेरे साथ अविनाश भी हँस पड़ा

"हा बापू फिक्र मत करो शहर में ये सब होता है और 2 नही 3 बार शादी करेंगे आखिर वंहा भी तो पार्टी देनी पड़ेगी ना "

अब वो क्या कहते बेचारे बस हमारे चहरे को अजीब भाव से देख रहे थे ...

******************

रात हो चुकी थी गपसप चल रहा था,गांव के कई लोग हमे घेरे हुए बैठे थे वही महिलाएं घर के अंदर थी आसपास की महिलाएं भी काजल को देखने पहुच गई थी ,तभी एक पुलिस की गाड़ी आकर हमारे घर के सामने रुकी सभी चौक गए थे,एक पुलिस इंस्पेक्टर कुछ सिपाही और गांव का मुखिया भी साथ था.

पुलिस वाले हमारी ही ओर बढ़ रहे थे वही मुखिया के चहरे में एक अजीब सी मुस्कान खिल रही थी....
 
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