S
StoryPublisher
Guest
आज दिन भर इतना कुछ हो चुका था कि मैं थक भी गया था।
फिर मोबाइल निकाला और मीनल की वीडियो और फ़ोटो देखने लगा।
"क्या देख के मुस्कुरा रहा है मेरा बेटा;"पापा की आवाज़ आयी।
"पापा. मैं मीनल की फ़ोटो देख रहा हूँ. " मैं शरमा गया था, हम कितने भी खुले विचारों वाले थे लेकिन पापा से थोड़ी शरम आ ही जाती है।
"पापा ने मेरे हाथ से मोबाइल लिया और फ़ोटो देखीं ,पहले थोड़ा गंभीर हुए फिर मुस्कुरा के बोले. मेरी बेटी को खूब खुशियां देना. हमेशा, चाहे उस के साथ रहना चाहे दूर. और अपने गुस्से को थोड़ा काबू में रखना सीख बेटा।"
पापा ने ऐसा क्या देख लिया. आज तो लगातार 3 बार एक से बढ़ कर एक हादसे हुए.
"आप किस बारे में कह रहे हैं पापा. " मैं डर गया कहीं नव्या को घर आए तो नहीं देख लिया।
"मैंने; नव्या से तेरी बहस होते देखा. " जो डर था वोही हुआ, लेकिन ये अच्छा था कि वो घर आए आयी ,ये बात नहीं पता चली पापा को।
लड़की चाहे कैसी भी हो, उसके चरित्र के बारे में बुरा कहना मुझे पसंद नहीं, और अगर आज की बात खुली तो निश्चित ही उसे गलत ठहराया जाएगा। जो मैं नहीं चाहता।
"पापा मैं बस उसे समझाना चाहता था कि मैं उस शादी नहीं कर सकता, वो थोड़ी ज़िद्दी है. वक़्त के साथ सम्हल जाएगी।"
"हम्म्म्म. चलो अच्छा है वो समझ जाएं तो. मुझे मेरे घर मे सिर्फ़ मीनल चाहिए" पापा हंस के बोले।
"पापा एक बात बताऊँ!! मैंने एक गलत काम किया. "
" अच्छा!! मैं भी तो जानू ऐसा क्या गलत किया.."
मैने पापा को मीनल की वीडियो दिखाई. पापा खूब हंसे पहले. " फिर बोले, मेरी बच्ची का मज़ाक बनाता है शैतान!!" मैं भी मुस्कुरा दिया ,जनता था अब क्या होने वाला है। पापा ने वीडियो डिलीट कर दी और मेरा सिर सहला के बोले.
" जब कोई मन मे बसा हो तो वीडियो की ज़रूरत नहीं"
मैंने पापा को मीनल की अगले दिन टैन्ट हटवाने वाली बात बताई तो पापा बोले वो करवा देंगे, हम आराम से घूमे।
मैं उनके गले लग गया।
पापा गुड नाईट बोल कर चले गए और मैं कपड़े बदल के
सोने की कोशिश करने लगा।
मीनल के साथ घूमने जाने का सोच के ही पेट मे तितलियां उड़ रही थीं. कल का दिन मीनल के लिए बहुत खुशियों भरा हो, और मुझे कुछ नहीं चाहिए था।
वो घर पे क्या बोल के आएगी, उसकी दादी कुछ हंगामा न कर दे इस बात का भी डर था।
सोचते सोचते कब नींद आयी पता नहीं.
मैंने देखा मैं और मीनल किसी बहुत ऊंची जगह पे हाथ पकड़े बैठे हैं. चारों तरफ नीली हरी पहाड़ियां दिख रही हैं, उनके पीछे सफेद संगेमरमर से भी ज्यादा सफेद हिमालय की चोटियां धूप में चमक रही हैं।
मैं मीनल की कमर पे हाथ रख कर उसे अपने बेहद करीब बिठा लेता हूँ. वो मेरे कंधे पे सिर टिका लेती है. कोई शरम, कोई झिझक अब बाकी नहीं हमारे बीच।
उसकी खुशबू से मदहोश हो कर मैं उसके माथे को चूम लेता हूँ और वो आंखें बंद कर के स्वीकृति दे देती है। मैं बैठे बैठे उसे बाहों में भर लेता हूँ फ़िर कुछ देर में अलग होता हूँ, अपनी आंखें बंद कर के मैं फिर उसे चूमने के लिए आगे झुकता हूँ और मीनल भी आँखें बंद कर लेती है लेकिन मेरे होंठ उसे छू नहीं पाते।
मुझे किसी और के होने का आभास होता है, मैं आंखें खोल के देखता हूँ मीनल अब भी आँखें बंद किये बैठी है और उस के बगल में नव्या बैठी मुस्कुरा रही है. मैं जब तक कुछ समझ पाता वो मीनल को धक्का दे देती है।
मैं हाथ बढ़ाता के चिल्लाता हूँ लेकिन मीनल मेरी आँखों से ओझल हो गयी.
मैं डर के उठ गया. कितना भयानक सपना था. टाइम देखा तो पौने 5 बज गए थे। ऐसे सपने ना जाने मुझे क्यों आने लगे थे, ये किसी अनहोनी का अंदेशा थे या मेरे मन का डर मात्र।।
सुबह का सपना सच होता है मम्मी कहती हैं, एक अनजाना सा डर मुझे सताने लगा।
फिर मोबाइल निकाला और मीनल की वीडियो और फ़ोटो देखने लगा।
"क्या देख के मुस्कुरा रहा है मेरा बेटा;"पापा की आवाज़ आयी।
"पापा. मैं मीनल की फ़ोटो देख रहा हूँ. " मैं शरमा गया था, हम कितने भी खुले विचारों वाले थे लेकिन पापा से थोड़ी शरम आ ही जाती है।
"पापा ने मेरे हाथ से मोबाइल लिया और फ़ोटो देखीं ,पहले थोड़ा गंभीर हुए फिर मुस्कुरा के बोले. मेरी बेटी को खूब खुशियां देना. हमेशा, चाहे उस के साथ रहना चाहे दूर. और अपने गुस्से को थोड़ा काबू में रखना सीख बेटा।"
पापा ने ऐसा क्या देख लिया. आज तो लगातार 3 बार एक से बढ़ कर एक हादसे हुए.
"आप किस बारे में कह रहे हैं पापा. " मैं डर गया कहीं नव्या को घर आए तो नहीं देख लिया।
"मैंने; नव्या से तेरी बहस होते देखा. " जो डर था वोही हुआ, लेकिन ये अच्छा था कि वो घर आए आयी ,ये बात नहीं पता चली पापा को।
लड़की चाहे कैसी भी हो, उसके चरित्र के बारे में बुरा कहना मुझे पसंद नहीं, और अगर आज की बात खुली तो निश्चित ही उसे गलत ठहराया जाएगा। जो मैं नहीं चाहता।
"पापा मैं बस उसे समझाना चाहता था कि मैं उस शादी नहीं कर सकता, वो थोड़ी ज़िद्दी है. वक़्त के साथ सम्हल जाएगी।"
"हम्म्म्म. चलो अच्छा है वो समझ जाएं तो. मुझे मेरे घर मे सिर्फ़ मीनल चाहिए" पापा हंस के बोले।
"पापा एक बात बताऊँ!! मैंने एक गलत काम किया. "
" अच्छा!! मैं भी तो जानू ऐसा क्या गलत किया.."
मैने पापा को मीनल की वीडियो दिखाई. पापा खूब हंसे पहले. " फिर बोले, मेरी बच्ची का मज़ाक बनाता है शैतान!!" मैं भी मुस्कुरा दिया ,जनता था अब क्या होने वाला है। पापा ने वीडियो डिलीट कर दी और मेरा सिर सहला के बोले.
" जब कोई मन मे बसा हो तो वीडियो की ज़रूरत नहीं"
मैंने पापा को मीनल की अगले दिन टैन्ट हटवाने वाली बात बताई तो पापा बोले वो करवा देंगे, हम आराम से घूमे।
मैं उनके गले लग गया।
पापा गुड नाईट बोल कर चले गए और मैं कपड़े बदल के
सोने की कोशिश करने लगा।
मीनल के साथ घूमने जाने का सोच के ही पेट मे तितलियां उड़ रही थीं. कल का दिन मीनल के लिए बहुत खुशियों भरा हो, और मुझे कुछ नहीं चाहिए था।
वो घर पे क्या बोल के आएगी, उसकी दादी कुछ हंगामा न कर दे इस बात का भी डर था।
सोचते सोचते कब नींद आयी पता नहीं.
मैंने देखा मैं और मीनल किसी बहुत ऊंची जगह पे हाथ पकड़े बैठे हैं. चारों तरफ नीली हरी पहाड़ियां दिख रही हैं, उनके पीछे सफेद संगेमरमर से भी ज्यादा सफेद हिमालय की चोटियां धूप में चमक रही हैं।
मैं मीनल की कमर पे हाथ रख कर उसे अपने बेहद करीब बिठा लेता हूँ. वो मेरे कंधे पे सिर टिका लेती है. कोई शरम, कोई झिझक अब बाकी नहीं हमारे बीच।
उसकी खुशबू से मदहोश हो कर मैं उसके माथे को चूम लेता हूँ और वो आंखें बंद कर के स्वीकृति दे देती है। मैं बैठे बैठे उसे बाहों में भर लेता हूँ फ़िर कुछ देर में अलग होता हूँ, अपनी आंखें बंद कर के मैं फिर उसे चूमने के लिए आगे झुकता हूँ और मीनल भी आँखें बंद कर लेती है लेकिन मेरे होंठ उसे छू नहीं पाते।
मुझे किसी और के होने का आभास होता है, मैं आंखें खोल के देखता हूँ मीनल अब भी आँखें बंद किये बैठी है और उस के बगल में नव्या बैठी मुस्कुरा रही है. मैं जब तक कुछ समझ पाता वो मीनल को धक्का दे देती है।
मैं हाथ बढ़ाता के चिल्लाता हूँ लेकिन मीनल मेरी आँखों से ओझल हो गयी.
मैं डर के उठ गया. कितना भयानक सपना था. टाइम देखा तो पौने 5 बज गए थे। ऐसे सपने ना जाने मुझे क्यों आने लगे थे, ये किसी अनहोनी का अंदेशा थे या मेरे मन का डर मात्र।।
सुबह का सपना सच होता है मम्मी कहती हैं, एक अनजाना सा डर मुझे सताने लगा।