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Romance चाहत

चाहत और आर्यन उसे देखने लगे। ये देख इशांत मुस्कुराने लगा और कहा - दोनो भाई बहन एक जैसे है... कुछ बोलते ही नहीं... पता नहीं घर में कैसे रहते होंगे... जब उसने ये कहा तो चाहत उसे गुस्से में घूरने लगीं। तो इशांत ने कान पकड़ कर सॉरी कहा ये देख चाहत ने उसे घुरा और मुस्कुराने लगी। फिर चाहत ने एड्रेस बता दिया।

थोड़ी देर में दोनों चाहत के घर के बाहर थे। चाहत नीचे उतरी फिर आर्यन भी को भी उतार दिया। उसने मुड़ कर इशांत को देखा फिर चाहत - थैंक्यू भैय...

इशांत उसे टोकते हुए - ना बिल्कुल भी नहीं... नो भैया... इट्स इशांत...

चाहत ने फिर हा में सिर हिला दिया।

चाहत ने इशांत को बाय बोला।

आर्यन बस मुंह फुलाए इशांत को देख रहा था। तभी इशांत ने आर्यन को चॉकलेट दी और कहा - सॉरी यार... मेरी मिनी को वो डॉल बहुत पहले से पसंद थी...तो मुझे लेना पड़ा... मेरा कोई इरादा नहीं था...तुम्हे हर्ट करने का...आई एम् सॉरी...

आर्यन ने चाहत को देखा तो उसने पलके झपका कर इशांत को माफ करने को कहा। आर्यन ने चॉक्लेट ली फिर इशांत को देख - इट्स ओके...

इशांत ने आर्यन को देखा फिर उसके गाल खींचे और बाय बोल कर बाइक आगे बढ़ा दी। चाहत मेन गेट की तरफ आ गई और उसे खोल अंदर जाने लगी। इशांत गली के पास आकर रुक गया और बैक मिरर से चाहत को घर जाते हुए देखने लगा।

चाहत का घर

चाहत अंदर अाई तो रीमा जी डायनिंग टेबल पर बैठ कर उनका वेट कर रही है। आर्यन उन्हें देख भागते हुए उनके पास आया।

रीमा जी उसे गले लगाते हुए - आ गया मेरा बच्चा...कैसी रही पार्टी...

आर्यन रीमा जी से - बहुत अच्छी थी...आपको भी जाना चाहिए था...

रीमा जी उसके बाल ठीक करते हुए - ठीक है...अब खाना खा लो...

आर्यन उनके गोद से उठते हुए - नहीं भूख नहीं है... मै नहीं खाऊंगा.... आप और दी खा लो...ये बोल वो अपने रूम की तरफ चला गया।

चाहत - मम्मी मै फ्रेश होकर आती हूं...

चाहत वहा से रूम चले गई वहा से फ्रेश होकर अाई फिर रीमा जी के साथ खाना खा कर रूम आ गई।

चाहत रूम में आकर बेड में लेट गई वो बेड में लेटे हुए विंड

चाइम को देखने लगीं उसकी आवाज़ हमेशा चाहत को सुकून देती थी वो अध्यन के बारे में सोचने लगी। फिर मुस्कुराते हुए सो गई।

अगली सुबह

चाहत ने अपने काम कंप्लीट किए और नाश्ता कर स्कूल की तरफ निकल गई। स्कूल पहुंच कर चाहत क्लास में अाई और अपना बेग रख कर प्रेयर के लिए बाहर की तरफ जाने लगी।

तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ा चाहत ने मुड़ कर देखा तो वहा काजल खड़ी थी उसने सिर झुकाए हुए कहा - सॉरी.....मैंने तुझे गलत समझा ..... वो तुम दोनों ऐसी सिचुएशन में थे तो मुझे समझ ही नहीं आया...आई एम् सोरी ....आगे से ऐसा कुछ नहीं करूंगी....

चाहत कुछ देर तक ऐसे ही खड़ी रही फिर आगे बढ़ काजल को गले लगा लिया काजल ने भी उसे कस कर पकड़ लिया।

चाहत उसके गले लगे हुए ही - इट्स ओके तुझे तेरी गलती पता चल गई वहीं काफी है...

दोनों कुछ देर तक ऐसे ही खड़ी रही फिर अलग हुई तो देखा

अंश अपने गाल पर हाथ रख उन्हें देख रहा था। अंश का ऐसे देखना चाहत और काजल को अजीब लगा ।

तभी काजल अंश से - क्या हुआ ......ऐसे क्यू देख रहे हो???

अंश मुस्कुराते हुए - देख रहा हूं....तुम लड़कियां कितनी चिपकु होती हो.....मतलब कहीं भी शुरू हो जाती हो....

काजल और चाहत ने उसकी बात सुनी फिर एक दूसरे को देखा।

चाहत अंश से - क्या कहा...जरा फिर से कहना...ये बोल वो अंश के पीछे दौड़ने लगी काजल भी चाहत का साथ देने लगी । अंश कभी टेबल पर चढ़ता तो कभी दरवाज़े के पीछे छुपता ऐसे ही तीनो इधर उधर हो रहे थे। तभी चाहत का पैर फिसला और वो नीचे गिरने लगीं तभी किसी ने उसे कमर से पकड़ा और अपने पास खींचा। चाहत डर के कारण बस आंखे बंद किए वैसे ही उसकी तरफ खींची चली गई।

अब चाहत के दोनो हाथ उस शख्स के सीने पर थे और उसने हाथ चाहत के कमर के इर्द गिर्द थे। चाहत को उसकी धड़कन महसूस हो रही थी। चाहत ने सिर उठा कर ऊपर देखा तो उसकी नज़रे उस शख्स के नज़रों से जा मिली। उसने उस शख्स को देख कर कहा - अध्यन...

अध्यन जो उसे पकड़े खड़ा था उसे इतने देर बाद चाहत की

आवाज़ सुन सुकून आया उसने कुछ पल के लिए अपनी आंखे बंद कर ली और चाहत को महसूस करने लगा ।

तभी अंश और काजल उसके पास आकर जोर से चिल्लाते है। दोनों झटके से अलग हो जाते है। अंश उन दोनों के इर्द गिर्द घूमते हुए - शर्म नहीं आती तुम दोनों को....क्लास में ऐसी हरकतें करते हुए ...

काजल भी उसका साथ देते हुए - हा सच में...18+ तो हो जाओ कम से कम..

अंश सिर पर हाथ रख - वहीं तो....नाक कटवा देनी है तुम लोगो ने मेरी ...

अंश की बात सुन चाहत - कोई ना...हम प्लास्टिक की नाक लगवा देंगे..

ये सब अंश हैरानी से उसे देखता है ।और उसके माथे पर हाथ रख कर कहता है - तुम ठीक तो हो ना... मै इतनी बकवास कर रहा हूं और तुम हो की मस्ती में जवाब दे रही हो....

चाहत उसका हाथ हटा कर - हा मेरे झींगुर मै ठीक हूं..और अगर अब तुम बाहर नहीं गए ना तो शायद तुम ठीक नहीं रहोगे...

अंश और काजल एक साथ - वो क्यू..???

चाहत उन दोनों को घूरते हुए - क्युकी प्रेयर बेल बज गई है...और तुम दोनों अभी तक यही हो..

अंश और काजल एक साथ - पर तुम भी तो हो...

चाहत - हा मै तो हूं... बट मै हूं कैप्टन ...अगर लेट हुई तो भी चलेगा...पर तुम दोनों लेट हुए तो ...

अंश और काजल - तो..

चाहत - तो पूरे प्ले ग्राउंड के 10 चक्कर...

अंश और काजल ने पहले चाहत को देखा फिर प्रेयर ग्राउंड की तरफ भाग गए।

अब रूम में बस चाहत और अध्यन थे। चाहत जैसे ही जाने को हुई तभी अध्यन - चाहत ..

चाहत रूकी और मुड़ कर अध्यन को देखने लगी तभी अध्यन - मै भी तो यही हूं ...चलो साथ में ग्राउंड चलते है...

चाहत ने कुछ नहीं कहा बस हा में सिर हिला दिया। और साथ चलने लगे।

चाहत को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या बोले ....?

तभी अध्यन और चाहत एक साथ - कैसे हो...??

दोनों ने अजीब तरह से एक दूसरे को देखा फिर दोनो साथ में - मै ठीक....

अब दोनो मुस्कुराने लगे। चाहत का मुस्कुराता चेहरा देख

अध्यन को सुकून मिल रहा था। आज पूरे दो दिन बाद वो चाहत को देख रहा था । उसकी एग्जिस्टेंस फील कर पा रहा था। इसके बाद दोनों ने कुछ नहीं कहा बस एक खामोशी से चलने लगे।

अध्यन उसके पास आया और दोनो साथ में ग्राउंड की तरफ आने लगे।

प्रेयर ग्राउंड में आकर चाहत अपने क्लास की लाइन पर लास्ट में खड़ी हो गई। तभी उसे किसी की आवाज़ सुनाई दी। कोई जूनियर लड़की थी शायद वह । उसने अपने साथ वाली फ्रेंड से कहा - अरे यार...ये अध्यन को हो क्या गया है...जब देखो तब इस चाहत के साथ घूमते रहते है...

दूसरी लड़की - हा यार...पता नहीं उनका टेस्ट इतना खराब कैसे हो गया है...

पहली लड़की - वहीं तो ...इतने स्मार्ट है...स्कूल की कोई भी लड़की पसंद करेगी पर नहीं ...इनको तो इस चाहत के साथ घूमना है...

दूसरी लड़की - मुझे तो लगता है..रहम कर रहे होंगे चाहत पर...ताकि बेचारी अकेले ना रहे....

पहली लड़की - हमे क्या...चलो छोड़ो....

ये बोल वो प्रेयर करने लगी।

उनकी बात सुन कर चाहत वहीं जड़ हो गई। उसके दाए आंख से एक आंसू गिरा और उसने तुरन्त साफ़ कर अपना ध्यान प्रेयर में लगाया। पर दिल को तो चोट पहुंच ही चुकी थी ।

प्रेयर कब शुरू हुई और कब ख़तम चाहत को तो पता भी नहीं चला उसका मन तो यही सोच रहा था कहीं अध्यन उसे रहम की नज़रों से तो नहीं देखता ना ये सोच कर ही उसका दिल रों रहा था। उसे ये सब सुनने की आदत थी पर रहम ये वर्ड उसके कानों में चोट कर रहे थे। चाहत ने किसी तरह खुद को संभाला और क्लास आ गई।

वहा अंश और अध्यन मुस्कुरा रहे थे। चाहत ने एक पल के लिए रुकीं उसने अध्यन को देखा जो मुस्कुराते हुए बहुत प्यारा लग रहा था मुस्कुराते हुए उसकी छोटी आंखें बंद हो जाती है उसके गालों पर पड़ने वाले डिंपल उसके चेहरे पर बहुत प्यारी लग रही थी। खिड़की से आतीं धूप में उसका चेहरा और भी दमक रहा था।

को आवाज़ दी - चाहत

चाहत रुक गई और पलट कर अध्यन की तरफ देखने लगी। अध्यन ने उसे रुका हुआ देखा तो वो उसके पास जाने लगा। तभी वहा सोनिया अाई और अध्यन के गले लग गईं। थोड़ी देर बाद उससे दूर हुई।

सोनिया - तुम ठीक तो हो ना...मैंने सुना था कि तुम्हे पैर पर मोच आ गईं थीं..

अध्यन - हा मै ठीक हूं... बस छोटी सी मोच ही तो थी।

ये बोल उसने सामने देखा तो चाहत वहा नहीं थी।

अध्यन उसे इधर उधर देखने लगा उसने चारो तरफ अपनी नज़रे घुमाई पर वो उसे कहीं नहीं दिखीं।

सोनिया उसके कंधे पर हाथ रख - किसे ढूंढ रहे हो??

अध्यन - किसी को नहीं ...ये बोल वो सोनिया के साथ क्लास आ गया।

चाहत वहीं पिलर के पीछे छुपी थी । वो बाहर निकली कुछ देर तक जाते हुए अध्यन को देखा फिर बच्चो की क्लास चले गई वालंटियर होने के नाते उसे आज उसे वहा का कॉम्पटीशन देखना था आज उसके साथ कोई टीचर भी थे।

चाहत अपने दिमाग से सारी बाते निकाल देना चाहती थी इसीलिए उसने खुद को काम में बिजी रखना जरूरी समझा।

चाहत उसे देख रही थी तभी किसी ने उसे धक्का दिया चाहत थोड़ी देर के लिए लड़खड़ा गई तभी धक्का देने वाली लड़की ने उसे संभालते हुए सॉरी कहा। चाहत ने भी उठते हुए उसे इट्स ओके कहा। चाहत ने सिर उठा कर सामने देखा तो उसकी नज़र क्लासरूम में रखे अलमारी की तरफ गई जिसके दरवाज़े पर शीशा लगा था। ये एक लोहे की अलमारी थी। जिसमे नोट बुक और चॉक डस्टर रखा जाता था। क्लास टीचर भी अपनी जरूरत की चीज़े यही रखते थे।

चाहत ने उस शीशे में जब खुद को देखा तो अपने अश्क को देख कर वो सोचने लगी - सही तो कह रही थी....वो गर्ल्स ....मेरे अंदर तो ऐसा कुछ है ही नही.....तो अध्यन क्यू मेरे साथ है.....कहीं सच में वह मेरे ऊपर ....रहम ..उसने जैसे ही ये सब सोचा उसके आंखो से फिर आंसू निकाल पड़े ।

चाहत अब क्लास में नहीं रुकना चाहती थी वो पहले अपने डेस्क के पास पहुंची और नोटपैड और पेन निकाला फिर क्लास से बाहर आ गई ।

अध्यन चाहत को बहुत पहले से नोटिस कर रहा था। वो जैसे ही बाहर जाने लगी अध्यन भी उसके पीछे बाहर निकला चाहत जल्दी जल्दी आगे बढ़ रही थी। तभी अध्यन ने चाहत

वो वहीं सभी बच्चो के बीच बैठ गई। वहा उसने उनका नाम लिख कॉम्पिटिशन स्टार्ट किया ।

इधर क्लास में अध्यन अपनी डेस्क में बैठा था और सोनिया उससे बात किए जा रही थी। जिसका जवाब वो हा हूं में दे रहा था वो डेस्क में बैठे दरवाज़े को देखे जा रहा था। अचानक सोनिया को कुछ याद आया वो बाय बोल कर क्लास से चले गई। अध्यन को अब मौका मिल गया वो बाहर जाने के लिए उठा ही था तभी किसी ने अध्यन को आवाज़ लगाई। अध्यन ने पहले अपनी आंखे बंद की फिर पलट कर देखा तो अंश हाथ बांधे उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था ।

अंश अध्यन के पास आते हुए - कहा जा रहा है तू?

अध्यन - कहीं नहीं...वो मै बस

अंश उसे टोकते हुए - हा हा.. सोच ले बहाना तब तक मै यही हूं..

अध्यन उसे देखते हुए - कोई बहाना नहीं...मै बस चाहत के पास जा रहा था..प्रेयर के बाद उसे देखा ही नहीं तो...

अंश - ओहो...इतनी बेकरारी.... ये बोल उसने अध्यन को आंख मारी...

अध्यन ने अपने दोनों हाथो को झटका दिया और उसकी तरफ बढ़ते हुए - बेकारार तो मै बहुत हूं.. रुक अभी तुझे मेरी बेकरारी बताता हूं...

ये बोल अध्यन ने अंश को पकड़ लिया फिर शुरू हुई असली बेकरारी । अध्यन और अंश बच्चो की तरह लड़ रहे थे।

थोड़े देर बाद दोनो शांत हुए और पास रखी डेस्क पर बैठ गए और हाफने लगे। अंश मुस्कुराते हुए अध्यन को देखने लगा। फिर अचानक से उसने अध्यन को गले से लगा लिया ।

अंश - ये दो दिन बहुत भारी थे यार ....मैंने तुझे बहुत मिस किया।

अध्यन उससे दूर होते हुए - मैंने भी...

अंश मुस्कुराते हुए - और चाहत को..

अंश की बात सुन अध्यन मुस्कुराने लगा फिर उसने कहा - मिस उसे किया जाता है...जिसे भुला दिया गया हो...पर वो तो मेरे जहन से कभी दूर गई ही नहीं...तुझे पता है...पहले यकीन नहीं था..पर इन दो दिनों में मुझे इस बात का यकीन हो गया है...की वो मेरे लिए कितनी जरूरी है...ये जो मै फील करता हूं ...ये प्यार ही है...आज जब उसने मेरा नाम लिया....जब उसका हाथ मेरे सीने पर था...मै ..मै बता नहीं सकता यार ...दिल किया उसे ऐसे ही रखु अपने पास अपने करीब ...उसकी काली बड़ी पलकों वालीं आंखे जब मुझे देखती है ...तब मुझे यही लगता है...बस यही एक पल है ...जब वो मेरे लिए...सिर्फ मेरे लिए है....

अंश उसकी बाते गौर से सुन रहा था । उसने अध्यन के कंधे पर हाथ रखा फिर कहा - तो तू उसे कब बता रहा है...अंश की बात सुन अध्यन ने उसे देखा तो अंश अपनी बात जारी रखते हुए - देख मुझे पता है...तेरे दिल में उसके लिए प्यार है...पर प्यार को दिल में रख कर कुछ नहीं होगा..उसे एक्सप्रेस भी तो करना पड़ेगा ना...

अंश ने कहा तो अध्यन कुछ देर खामोश हो गया।

थोड़े देर बाद अध्यन - ठीक है ...मै उसे जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी बता दूंगा...पर

अंश उसकी तरफ देखते हुए - पर

अध्यन - पर अगर उसने ना कह दिया तो...

अंश अपने सिर पर हाथ रख कर - तू जब भी बोलेगा ...अशुभ ही बोलेगा... उसे देख कर तुझे नहीं लगता कि वो भी तुझे पसंद करती है...जिस तरह तुझे देखती है...तुझसे मिल कर ही उसके चेहरे पर अलग ही नुर आ जाता है...तेरी फिक्र करती है...तुझे दर्द हो तो आंख उसकी भी नम हो जाती है..इतना सब के बाद अब भी तुझे लगता है...वो तुझे ना कहेगी।

अध्यन ने अंश की बात सुनी फिर उसे देखते हुए कहा - वहीं तो...वहीं तो दिक्कत है...

अंश अब हैरान सा अध्यन को देखने लगा ।

अध्यन बात जारी रखते हुए - वो दूसरी लड़कियों की तरह नहीं है...अगर मैंने उसे अभी बता दिया तो..उसके मन में मुझे लेकर सेम फीलिंग हो या नहीं भी हो...पर फिर भी वो मुझे हा बोल देगी...और एक फ्रेंड की तरह भी ट्रीट नहीं करेगी...वो मुझसे दूर हो जाएगी...जो मै नहीं चाहता ...मै बस उसके दिल की बात जानना चाहता हूं... अगर उसके मन में मेरे लिए कुछ हो तब ही मुझे वो हा बोले...और अगर उसके मन में प्यार नहीं होगा तो मै उस...

अंश उसे टोक कर - तो तू क्या उसे भूल जाएगा...

अध्यन उसे घूरते हुए - नहीं ...उसे अपने प्यार का अहसास करवा दूंगा...उसे ये बताऊंगा वो कितनी जरूरी है...और एक ना एक दिन उसे मान ही जाना है...

अंश उसे देखते हुए - अरे वाह ...मुझे लगा तू मुझे भूल जाएगा...पर नहीं तूने तो दिल जीत लिया...

अध्यन - अरे ऐसे कैसे भूल जाऊंगा....पहला प्यार है...भाई चाहूं तो भी भूल नहीं सकता ....और हार भी नहीं मान सकता...

अंश - अरे वाह मेरे शेर ....मुझे तो लगा था तू बहुत ज्यादा सीधा बंदा होगा ...पर नहीं तू तो टेडी खीर निकला...

अध्यन उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए - हूं तो मै सीधा ही ...पर जब बात चाहत की हो तो थोड़ा टेडा होना जरूरी

है...

अब दोनो मुस्कुराने लगे।

इधर चाहत ने अपना काम कंप्लीट कर सीधे क्लास आ गई। वो अपनी डेस्क के पास आ गई उसने नोटपैड बेग में रखा तभी लंच की बेल बजी चाहत का मन कुछ खाने का नहीं कर रहा था वो क्लास रूम से बाहर चले गईं । अध्यन ने जब उसे ऐसे जाते देखा तो उसने चाहत को आवाज़ लगाई पर चाहत तो अपने धुन में ही बाहर निकल गई । अध्यन भी उसके पीछे जाने लगा ।

चाहत गार्डन की तरफ चलें अाई वहा वो हमेशा की तरह पेड़ के पास बैठ गई। उसका दिमाग अभी भी सुबह की बाते ही सोच रहा था। वो बाते रह रह कर चाहत की आंखो को नम कर रहा था। चाहत खुद में ही खोई हुई थी। उसे पता ही नहीं चला कब अध्यन वहा आया । अध्यन वहीं चाहत के बगल बैठ कर उसे देखने लगा चाहत उसे तो जैसे होश ही नहीं था। अध्यन ने चाहत को पुकारा पर चाहत ने कोई जवाब नहीं दिया।

अध्यन ने चाहत के कंधे पर हाथ रखा तो उसने झट से नजर उठा कर अध्यन को देखा। अध्यन ने जब उसकी आंखो को

देखा जिसमे आंसू ऐसे रुके थे जैसे काले बादल जो बरसने को बेकरार हो..अध्यन उसे एकटक देख रहा था। उसे कुछ दर्द महसूस हुआ पर पता नहीं ये दर्द किस चीज का था शायद वो चाहत की आसुओं से भरी आंखे बर्दास्त नहीं कर पा रहा था । चाहत ने कुछ नहीं कहा बस वो वहा से उठ कर जाने लगी।

अध्यन को अब लगने लगा कोई उससे उसकी जान खींच कर ले जा रहा है वो भागते हुए चाहत के पास पहुंचा और उसने सामने खड़ा हो गया। चाहत ने फिर अपनी पलको को उठा कर उसे एक नजर देखा और साइड से जाने लगी। अध्यन ने उसका हाथ पकड़ भरे गले से कहा - क्या हुआ...? तुम ऐसे क्यू..? वो इससे आगे कुछ कह पाता उससे पहले ही चाहत ने आगे जाना चाहा ।

अध्यन ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली और उसे झटके से खुद के करीब खींचा । चाहत उसके करीब आ गईं उसने चाहत की आंखो में देखते हुए गुस्से से कहा - क्या हुआ???

चाहत ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की मगर छुड़ा ना सकी उसकी इस हरकत ने अध्यन का गुस्सा और बढ़ा दिया उसने अपनी पकड़ चाहत के हाथो पर और मजबूत कर के पूछा - क्या हुआ????

चाहत ने कुछ नहीं कहा बस उसके आंखों से आंसू गिरने

लगे। इन आंसुओ ने अध्यन की बेचैनी और बढ़ा दी उसने चाहत का हाथ छोड़ कर उसके चेहरे को अपने हाथो में पकड़ा और अपना सिर उसके सिर से लगा कर बोला - कुछ तो बोलो ...ऐसे चुप मत रहो...तुम्हारी ये खामोशी मेरी जान ना ले ले...

चाहत थोड़े देर वैसे ही रही फिर से उसके दिमाग में रहम ये शब्द गूंज गया । उसने अध्यन से कहा - छोड़ो मुझे... अध्यन ने उसकी बात सुनी पर तब भी उसे नहीं छोड़ा । चाहत को अब गुस्सा आने लगा वो एक झटके में अध्यन से दूर हुई । अध्यन उसे देखने लगा ।

चाहत की आंखे गुस्से में लाल थी फिर उसने कहा - दूर रहो मुझसे ....कोई रहम नहीं चाहिए मुझे ....समझे तुम।

ये बोल चाहत जोर जोर से रोने लगी। अध्यन को समझ ही नहीं आ रहा था। वो आगे बढ़ उसके पास जाने लगा तभी चाहत - कहा ना दूर रहो...ये बोल चाहत झट से मुड़ी और अपने आंसू पोछते हुए क्लास की तरफ आ गई। अध्यन वहीं बैठ गया उसे अब समझ नहीं आ रहा था आखिर उसकी गलती क्या है। उसे रह रह कर चाहत का रोना याद आ रहा था। चाहत के आंसू तो वो बर्दास्त कर ही नहीं पा रहा था। वो वहीं उसके कहे हुए शब्दों को समझने की कोशिश कर रहा था।...

अध्यन जो वहीं बैठ गया था वो एकदम से उठा और कहा - तुम अगर चाहो भी ..तब भी मै तुमसे दूर नहीं जाऊंगा.. ये बोल वह चाहत को ढूंढने लगा।

थोड़े देर तक यूं ही ढूंढते रहने के बाद उसे चाहत क्लास की तरफ जाते हुए दिखी वो चाहत के पीछे क्लास जाने के लिए आगे बढ़ा ही था। तभी अंश उसके पीछे से आवाज़ दी अध्यन ने पलट कर देखा तो अंश उसके पास आ कर - चल तुझे कोच ने बुलाया है।

अध्यन वहा से सीधा कोच के ऑफिस गया।

इधर चाहत क्लासरूम में पहुंची तो लंच के कारण पूरी क्लास खाली थी वो अपनी डेस्क के बैठ गई और मुंह पर हाथ रख कर रोने लगी। उसे ऐसा लग रहा था मानो किसी ने कोई बड़ा सा पत्थर उसके सीने पर रख दिया हो.... वो ना जाने कितने ही देर तक रोती रही फिर उसने अपने सिर पर दर्द महसूस किया वो वहा से सीधा कॉमन रूम गई वहा उसने अपना चेहरा साफ किया और बाहर आ गई। वो चल ही रही थी तभी उसे चक्कर आने लगे । उसका सिर उसे भरी लगने लगा। वो क्लास गई और अपना बेग लेकर सीधे टीचर के पास गई।

अध्यन जब दोबारा क्लास आया तो उसे चाहत कहीं नहीं दिखी वो चाहत को ढूंढने लगा तो चाहत उसे कहीं जाते हुए दिखीं अध्यन ने उसे कुछ नहीं कहा बस उसके पीछे चलने लगा।

मेडिकल रूम

चाहत - मैम ... मे आई गेट इन..?

मैम - ओह चाहत ..कम ना।

चाहत रूम में इंटर करते हुए - मैम मुझे headache हो रहा है...आपके पास कोई मेडिसिन होगी??

मैम - हा है ना....ये लो..

चाहत ने मेडिसिन ली और जैसे ही खाने वाली थी वैसे ही किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया । चाहत ने जब मुड़ कर देखा तो अध्यन उसे गुस्से से घुर रहा था।

चाहत ने जैसे उसे देखा वो रुक गई। अध्यन मैम से - मैम मेडिसिन हमेशा खाने के बाद लेनी चाहिए ना .....ये बोल उसने चाहत को घुरा।

मैम जो अभी रजिस्टर में कुछ एंट्री कर रही थी उन्होंने कहा -

हा अध्यन... फिर चाहत को देखते हुए - तुमने कुछ खाया तो है ना .... चाहत कुछ बोलने को हुई तभी अध्यन - यस मैम ...इसने तो कुछ ज्यादा ही खा लिया है।

चाहत अध्यन की बात सुन कर उसे घूरने लगीं तभी अध्यन ने भी उसे घुरा चाहत अध्यन का घूरना देख थोड़े देर के लिए डर गई फिर उसने मेडिकल रूम से बाहर जाना ही सही समझा। चाहत आगे जाने लगी तो वो दो कदम से ज्यादा आगे बढ़ ही नहीं पाई उसने मुड़ कर देखा तो अध्यन ने उसका हाथ मजबूती से पकड़ रखा है। चाहत को अब समझ नहीं आ रहा था वो क्या कहे क्युकी सामने मैम थी तो वो ज्यादा बोल भी नहीं सकती थीं।

अध्यन ने चाहत की उंगलियों में अपनी उंगलियां फसाई चाहत उसे हैरानी से देखने लगी।

अध्यन मैम से - गुड डे मैम।

मैम ने उन दोनों को देख कर बस मुस्कुरा दी।

उन्होंने चाहत को देख कर कहां - अपना ख्याल रखना। अध्यन और चाहत दोनो मेडिकल रूम से बाहर आ चुके थे। अध्यन चाहत का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लेकर चलने लगा। चाहत ने पहले हाथ छुड़ाने की कोशिश की पर छुड़ा नहीं पाईं। चाहत ने कुछ कहना चाहा तो अध्यन उसकी

आंखो में देखते हुए - यहां कैमरा लगा है ...अगर यहां तुमने कुछ किया..तो प्रिंसिपल तुम्हे तो कुछ नहीं बोलेंगे पर मुझे पक्का सुना देंगे।

अध्यन की बात सुन चाहत ने कुछ नहीं कहा बस उसके साथ चलने लगी। दोनों कुछ देर में गार्डन में थे। अध्यन ने चाहत को पास रखे टेबल पर बैठाना चाहा पर चाहत नहीं बैठी अध्यन ने जबरदस्ती उसे कंधो से पकड़ कर बैठाया।

अध्यन उसे बैठाते हुए - हर बात पर जिद करना अच्छी बात नहीं....ये कह कर उसने चाहत के बेग से टिफिन निकला और उसे खोलने लगा। चाहत उसे ऐसा करते देखते रही फिर उसने कहा - तुम क्यू ये सब कर रहे हो....मै इस लायक नहीं हूं...?

अध्यन टिफिन खोलते हुए - तुम किस लायक हो....मुझे बताने की जरूरत नहीं। ये बोल उसने टिफिन खोला। आज चाहत के टिफिन में सुजी का उपमा था। अध्यन ने चम्मच लिया फिर उसमे उपमा लेकर चाहत की तरफ बढ़ा दिया। चाहत ने जब ना में सिर हिलाया तो अध्यन ने आंखें दिखा कर कहा - दोस्त हूं तुम्हारा...इतना हक तो रखता हूं..

अब चाहत ने कुछ नहीं कहा वो बस खाने लगीं। जब खाते हुए गलती से चाहत को मिर्ची लगी तो अध्यन ने उसे झट से

पानी पिलाया। थोड़े देर में उनका खाना ख़तम हुआ। चाहत को मेडिसिन खिला लेने के बाद अध्यन ने कुछ नहीं कहा। वो अपनी चेयर से उठ कर जाने लगा।

चाहत उसे जाते हुए देखने लगी वो कुछ पल के लिए रुका और बिना पल्टे ही कहा - कल मेरा फुटबॉल मैच है तुम आना ...मै.....तुम आओगी तो मुझे अच्छा लगेगा... ये बोल अध्यन वहा से चला गया। चाहत बस उसे देखती रही।

कुछ देर बाद छुट्टी भी हो गई। चाहत रास्ते भर आज जो हुआ उसके बारे में सोच रही थी कहीं ना कहीं उसे अपनी गलती का एहसास हो गया था। जो भी बाते हुई थी वो बस उन लड़कियों की थिंकिंग थी अध्यन ने तो उनसे कुछ कहा भी नहीं था। चाहत को अब अपने किए पर गुस्सा आने लगा। वो घर पहुंची और अपनी साइकिल रख कर अंदर आ गई।
 
चाहत का घर

आज सारा काम किया फिर खाना खा कर रूम आ गई रह रह कर उसे अध्यन की मासूम आंखे याद आ रही थी। उसने

आंखे बंद की तो अध्यन मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था । अब उसकी नींद उड़ चुकी थीं। उसने अपना मोबाइल निकाला और अध्यन को कॉल करने का सोचा पर शायद वो भूल चुकी थीं कि उसके पास तो अध्यन का नम्बर ही नहीं है ये सोच कर ही उसने मोबाइल अपने सिर पर दे मारा।

चाहत अब बेशब्री से सुबह होने का इतज़ार करने लगीं। उसे अध्यन से माफी जो मांगनी थी।

अगली सुबह

चाहत सुबह उठ अपना काम कर रही थी तभी ऐसा लगा जैसे कुछ गिरा चाहत भागते हुए उस तरफ गई। वहा जाकर देखा तो रीमा जी नीचे गिरी हुई थी। अपने पैर पर हाथ रख कर वो वैसे ही गिरी हुई थी....

चाहत ने उन्हें उठा कर सोफे में बिठाया और पानी दिया

चाहत ने फैमिली डॉक्टर राव को कॉल किया और उन्हें जल्द से जल्द आने को कहा। चाहत अब रीमा जी के साथ सोफे में बैठ गई थी। उसने रीमा जी के चेहरे को अपने हाथ में लिया और फूंक मारने लगीं। फिर वो भाग कर किचेन गई। वहा उसने पहले एक ग्लास में पानी लिया और उसमे

एनर्जीवाला पाउडर डाल दिया फिर उसे घोल कर रीमा जी के पास ले अाई उन्होंने उसे रीमा जी को दिया। वो वहीं रुक कर उन्हें देखने लगी ।

चाहत को कुछ देर बाद घर के बाहर एक हॉर्न सुनाई दिया । चाहत भागते हुए वहा पहुंची उसने देखा डॉ.राव आ चुके है। उसने पहले डॉ.राव को अंदर बुलाया ।

डॉ राव अंदर आते हुए - रीमा कहां है..?.

चाहत अंदर की तरफ इशारा करते हुए - अंदर है।

दोनों अंदर आते है वहा रीमा जी सोफे पर लेटी हुई थी। चाहत साइड में रखे सोफे में बैठ गई।

डॉ. राव रीमा जी को चैक करते हुए - रीमा तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। तुम हमेशा ऐसे ही करती हो....अभी चाहत थी तो सब ठीक था.... नहीं तो दिक्कत हो जाती।

चाहत रीमा जी को घूरते हुए - हा डॉ अंकल.... जब देखो तब अपनी ही चलानी होती हैं... इन्हे.....कभी भी खुद का ख्याल नहीं रखती..

डॉ राव मुस्कुराते हुए - हा बेटा सही कह रही हो....

रीमा जी बेचारा सा मुंह बना कर - अरे नहीं बेटू... वो हो

जाता है ......कभी कभी तो तुम ज्यादा टैंशन मत लो.....

चाहत रीमा जी की बात सुन उन्हें घूरने लगीं इस पर डॉ राव हस्ते हुए चाहत से कहते है - चाहत बेटा..ज्यादा कुछ नहीं बस बी पी थोड़ा सा लो हो गया था.....शायद काम के कारण......

चाहत ये सुन कर रीमा जी को और घूरने लगीं। तो रीमा जी ने अपने कान पकड़ कर सॉरी बोला ।चाहत रीमा जी को ऐसी हरकतें करता देख मुस्कुराने लगी।

तभी चाहत डॉ राव से - अंकल कोई ज्यादा दिक्कत वाली बात तो नहीं है ना....

डॉ राव चाहत के सिर पर हाथ रख कर - नहीं बेटा....बस बीपी लो है.. होता है कभी कभी ......

चाहत उन्हें देख कर मुस्कुरा दी फिर उसने कहा - आप बैठो मैं चाय बना कर लाती हूं........

ये बोल चाहत किचेन में आ गई। उसने चाय गैस पर रखी फिर दो प्लेटो में नाश्ता निकालने लगीं। उसने नाश्ता निकाला और साथ में चाय को भी देखने लगी।

इधर हॉल में रीमा जी को थोड़ा ठीक लगा तो वो सोफे पर बैठ गई। डॉ राव भी दूसरे सोफे पर बैठ गए।

डॉ राव - रीमा अपना ख्याल रखा करो....शिव तुम्हारे भरोसे

वहा है....और तुम हो की..

रीमा जी - जानती हूं...पर क्या करू......कितना खुद को मजबूत रखू.....कोशिश तो करती हूं....पर हर बार सफल होऊ ये जरूरी तो नहीं...

डॉ राव - देखो रीमा अगर तुम सही रही तो ही तुम्हारे बच्चे अच्छे से रह पाएंगे ......चाहत को देखो उसके बारे में सोचो .....तुम्हारी ये हालत देख ..... वो कितना डर गई थी....तुम्हे पता है....किस तरह कांपते हुए उसने हुए उसने मुझे कॉल किया...एक पल को तो मैं भी डर गया था।

रीमा जी - जानती हूं .....पर

डॉ राव उनकी बात काटते हुए - पर वर कुछ नहीं..तुम अपना ख्याल रखना और साथ में बच्चो का भी.....समझी

रीमा जी ने हा में सिर हिला दिया। इतने में चाहत बाहर आ गई।

चाहत नाश्ते की प्लेट डॉ राव की तरफ बढ़ा कर - लीजिए अंकल .....गरमा गरम मिर्ची के पकोड़े...

डॉ राव प्लेट हाथ में लेकर - थैंक्यू बेटा।

चाहत अब एक प्लेट रीमा जी की तरफ कर - और ये आप खाएंगी..

रीमा जी ने प्लेट को देखा फिर बुरा सा मुंह बना कर कहा - बेटा ये तो...

चाहत अपनी आई ब्रो उठा कर रीमा जी को टोकते हुए - जी कुछ कहा अपने..

रीमा जी प्लेट देख कर कुछ बोलने को हुई उसी टाइम चाहत ने उन्हें कहा - ये दलिया है और आप अभी यही खाएंगी ....और जूस पीकर आराम करेंगी...

रीमा जी - पर बेटा...मै तो....??

चाहत ने चम्मच से थोड़ा सा दलिया लिया फिर उसे रीमा जी के मुंह में दलिया को खिलाते हुए - अब आप कुछ नहीं कहेंगी बस दलिया खाएंगी। ये बोल चाहत ने उन्हें दलिया खिलाया फिर जूस पीने को दे दिया।

रीमा जी ने भी जूस पिया और सामने देखा तो चाहत डॉ राव से दवाइयां ले रही थीं।

चाहत ने सारी दवाइयां ली फिर रीमा जी की तरफ देखा जो उन्हें ही देख रही थीं चाहत उनके पास गई फिर पानी का ग्लास और दवाइयां उनकी तरफ बढ़ा कर उन्हें खाने का इशारा किया। रीमा जी ने भी बिना किसी ना नूकुर के चुपचाप दवाइयां खा ली।

डॉ राव ये देख कर मुस्कुरा रहे थे फिर उन्होंने चाहत से कहा - अब मुझे चलना चाहिए...

चाहत उनकी तरफ देखते हुए - चलो मै आपको बाहर तक छोड़ दू....

ये बोल चाहत और डॉ राव बाहर आ गए उन्होंने चाहत के सिर पर हाथ रखा तो चाहत आंखो में आंसू लेकर डॉ राव से - डॉ अंकल मम्मा ठीक तो है ना...

डॉ राव चाहत के सिर से हाथ हटा उसके चेहरे को छूते हुए - हा बेटा वो ठीक है...तुम ज्यादा सोचो मत...बस उन्हें दवाई टाइम से लेने को कहना ...और उनका ख्याल रखना...। चाहत ने ये सुन हा में सिर हिलाया

थोड़ी देर बाद चाहत ने उन्हें बाहर खड़ी उनकी गाड़ी तक छोड़ा फिर खुद अंदर आ गई। वो हॉल में अाई तो देखा रीमा जी हाल में नहीं थीं चाहत ने इधर उधर देखा और फिर उनके रूम की तरफ बढ़ गई जहा रीमा जी बेड पर लेट कर सोने की कोशिश कर रही थी। चाहत ने देखा तो वो रीमा जी के पास गई उसने ब्लैंकेट उठाया और रीमा जी को ओढ़ा दिया।

तभी रीमा जी चाहत को आवाज़ लगाती है चाहत रुक जाती है तब रीमा जी चाहत को अपने पास बिठा कर - मै ठीक हूं...तुम टैंशन ना लो..

चाहत ने आंखो में आंसुओ के साथ कहा - मम्मा मै डर गई थी..जब मैंने आपको वहा वैसे गिरे हुए देखा तो ...जान ही निकल गई थी मेरी... फिर रीमा जी का हाथ अपने हाथ में ले कर - आप प्रोमिस कीजिए...आप कभी भी ऐसा नहीं करेंगी..अपनी दवाई टाइम पर लेंगी..और अपना ख्याल भी

रखेंगी...

चाहत की बात सुन रीमा जी ने भी उसके हाथो में अपना हाथ रख दिया फिर हा में सिर हिला दिया।

चाहत उठते हुए:- अब आप सो जाओ मै यही हूं....कोई भी काम हो तो आवाज़ लगा देना।

चाहत की बात सुन रीमा जी - क्यू तुम स्कूल नहीं जा रही क्या.?

चाहत - हा आपको ऐसे छोड़ मै नहीं जा सकती..

रीमा जी उठते हुए - चाहत बेटा मै ठीक हूं...तुम जाओ स्कूल...

चाहत उन्हें वापस सुलाते हुए - हा दिख रहा है...कितना ठीक हो आप

रीमा जी - देखो बेटा मुझे कुछ नहीं हुआ...ठीक हूं तुम जाओ स्कूल... मैंने दवाइयां भी ले ली है...थोड़े देर में मुझे आराम भी मिल जाएगा...ये बोल रीमा जी ने चाहत की तरफ देखा जो किसी सोच में गुम थी

चाहत उन्हें देखते हुए - पक्का ना ...

रीमा जी पलके झपकाते हुए - हा पक्का...

चाहत ने फिर से रीमा जी को ब्लैंकेट ओढ़ाया फिर बाहर आ गई वो जल्दी से रेडी हुई और नाश्ता कर स्कूल के लिए निकल गई।
 
स्कूल

चाहत स्कूल पहुंची और अपना बेग क्लास में रख कर बाहर आ गई उसने देखा आज उसे लेट हो गया था तो वो सीधे प्रेयर में चले गई। वो प्रेयर कर के लौटी ही थी तभी एक टीचर ने चाहत को आवाज़ दी ।

टीचर - चाहत बेटा ....ज़रा यहां आना...

चाहत उनके पास आ कर - हा सर....

टीचर - तुमने जो भी कॉम्पटीशन करवाए है....उनमें पार्टिसिपेट करने वालो और जितने वालो के नाम मुझे बताओगी..वो certificates के लिए नाम देना है....

चाहत ने हा में सिर हिलाया फिर टीचर से - यस सर...मैंने नोट किया है...आप चलिए मै नोटपैड लेकर ऑफिस आती हूं...ये बोल चाहत क्लास आ गई।

वहा अंश उसका इंतजार कर रहा था। अंश चाहत को देख रहा था जो जल्दी में क्लास रूम अाई और अपने बेग में से

नोटपैड निकाल कर बाहर जाने को हुई तभी अंश उसके सामने आ कर उसे रोकते हुए - चाहत कहा जा रही हो???

चाहत उसे देखते हुए - वो सर ने बुलाया है...उनको कॉम्पिटिशन में भाग लेने वालो का नाम चाहिए... तो देने जा रही हूं...

ये बोल चाहत अंश के साइड से निकल कर जाने लगी तभी अंश - आज फुटबॉल मैच है...याद है ना तुम्हे...

चाहत मैच के बारे में सुन दरवाज़े के पास रुक जाती है अंश अपनी बात जारी रखते हुए - अध्यन ने कहा तुम्हे एक बार बता दू..

चाहत ने कुछ नहीं कहा वो वहा से सीधे टीचर के ऑफिस आ गईं ।

अंश ने गहरी सांस ली फिर वो भी क्लास से बाहर आ गया।

टीचर ने उसे देख कर कहा - चाहत अच्छा हुआ आज तुम आ गई...

चाहत नोटपैड उनकी तरफ बढ़ाते हुए - सर इसमें पार्टिसिपेट करने वालों के साथ जितने वालो के भी नाम है..

टीचर चाहत को देख कर कहते है - ओके ....अब इस डाटा को कंप्यूटर में एंट्री कर दो ...

चाहत ये सुन कर शॉक्ड हो गई कहा उसे ग्राउंड जाना था और कहा वो यहां फस गई पर अब कर भी क्या सकती थी

चाहत ने कुछ नहीं कहा वो सीधे कंप्यूटर के पास बैठकर डाटा एंट्री करने लगी।

चाहत बहुत जल्दी जल्दी काम कर रही थीं उसे किसी भी तरह से ये काम कर के जल्दी से अध्यन से मिलना था।

फुटबॉल ग्राउंड

इधर सारे ब्वॉयज चेंज कर के प्रेक्टिस कर रहे थे क्युकी थोड़े देर में उनका मैच था । अध्यन वार्मअप करते हुए अंश से - तूने चाहत से बात की...?

अंश भी वार्मअप करते हुए - बताया तो था ही...पर अब देखते है....ये सुन अध्यन थोड़ा सा उदास हो गया।

फिर वार्मअप करने लगा तभी अंश - तुझे क्या लगता है....

अध्यन अपनी बॉडी स्ट्रेच करते हुए - किस बारे में ..

अंश - यही की ...चाहत आयेगीं या नहीं....?

अध्यन ने एक गहरी सांस ली फिर कहा - वो आयेगी जरूर आएगी..

अंश अपनी आइब्रो उठा कर - और नहीं अाई तो...?

अध्यन उसके कंधे में हाथ रख कर - मेरा दिल कहता है.. वो आयेगी....जरूर आएगी.....ये बोल अध्यन ने एक नजर अंश को देखा फिर वार्मअप करने लगा।

अंश ने भी कुछ नहीं कहा वो भी अध्यन के साथ वार्मअप करने लगा।

थोड़ी देर बाद विसल बजी ये एक तरह का सिग्नल था जिसका मतलब था तैयार रहे अब उनका मैच है....

अंश ने अध्यन को देखा जो स्पोर्ट्स रूम की तरफ जा रहा था।

अंश अध्यन को देख कर- तू कहा चला...

अध्यन ने उसे देखा फिर कहा - आता हूं ..पानी पी कर प्यास लग रही है...फिर रूम की तरफ एक नजर देख कर - आता हूं थोड़े देर में.. संभाल लेना थोड़ा सा....

ये बोल वो रूम के अंदर जाता है और वहा से अपनी बोतल ढूंढ कर पानी पीने लगता हैं। पानी पी लेने के बाद पास रखे टेबल पर बैठ गया उसने बोतल को साइड में रखा और अपने दोनों हाथ को सिर पर रख कर सोचने लगा - चाहत आयेगी...या फिर....नहीं वो जरूर आएगी...पर अगर नहीं अाई तो...ये बोल उसने सिर पर रखे हाथ से अपने बालों को मजबूती से पकड़ लिया और फिर अपनी नज़रे झुका ली।

थोड़े देर में किसी के आने की आहट हुई अध्यन ने आवाज़ सुनी पर सिर उठाने की जहमत भी नहीं उठाई उसे बस किसी के क़दमों की आहट खुद की तरफ आती सुनाई दी। उसके बावजूद अध्यन ने सिर उठाना जरूरी नहीं समझा ।

थोड़ी देर बाद अध्यन के कानों में एक जानी पहचानी आवाज़ सुनाई पड़ी - अध्यन

ये आवाज़ सुन अध्यन का चेहरा खिल गया उसने खुशी से अपना सिर को अपने हथेलियों से ढक लिया फिर थोड़े देर बाद अध्यन ने सिर उठा कर सामने देखा जहा चाहत खड़ी उसे पुकार रही थी । चाहत को देख अध्यन को कुछ पल के लिए यकीन ही नहीं हुआ पर जब उसने अपने हाथो से अपनी आंखे मली और फिर भी उसे चाहत वैसे ही मिली तब जाकर उसे यकीन हुआ...

उसने चाहत से कहा - तुम सच में हो ना...

चाहत ने जब ये सुना तो उसे हसी आने लगी उसने अपना एक हाथ आगे कर के कहा - हा...चाहो तो छू कर देख लो...

अध्यन ने चाहत के हाथ को हल्के से पकड़ा और देखा वो गायब नहीं हुई तो वो बहुत खुश हो गया उसने आव देखा ना ताव सीधा उठा और चाहत को गले से लगा लिया। उसकी खुशी का आलम कुछ यूं था कि उसने वैसे ही चाहत को उठा

लिया और कस के गले लगाए रखा।

इधर अध्यन के यू अचानक गले लगा लेने से चाहत थोड़े देर के लिए शॉक्ड हो गई उसके दोनो हथेलियां खुली की खुली ही रह गईं । जब अध्यन ने उसे अपनी बाहों में कसते हुए ऊपर उठाया तो वो बिना किसी अड़चन के आसानी से उठ गई। इस पर उसकी पैरो की एड़ियों ने भी ऊपर उठ कर अध्यन का साथ दिया।

कुछ देर दोनो यू ही खड़े रहे तभी एक बार फिर विसल की आवाज़ अाई जिससे दोनो का ध्यान हटा और चाहत झटके से अध्यन से अलग हुई और उसे देखने लगी। अध्यन को अपने किए पर गुस्सा आया उसने तुंरत ही चाहत से कहा - आई एम् सॉरी ....वो पता नहीं कैसे...

चाहत को तो कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था वो बस अध्यन को देखने लगीं इस पर अध्यन ने कहा - सॉरी ना यार...आज के बाद ऐसा कभी नहीं करूंगा..वो इससे ज्यादा कुछ बोल पाता उससे पहले ही विसल की आवाज़ हुई और अध्यन बाहर की तरफ जाने लगा।

चाहत को दूसरी विसल से होश आया उसने अध्यन को पीछे

से आवाज़ दी - अध्यन...

अध्यन ने जब चाहत की आवाज़ सुनी तो तुरंत ही पीछे पलट गया और चाहत को देखने लगा चाहत ने उसे देखते हुए कहा - ऑल द बेस्ट.. और फिर मुस्कुरा दी।

चाहत की मुस्कुराहट देख अध्यन ने भी मुस्कुराते हुए - थैंक्यू कहा और रूम से बाहर आ गया।

चाहत भी रूम से बाहर आने लगी और रूम में जो भी हुआ उस बारे में सोचने लगी - अध्यन जब भी मुझे गले लगाता है....या मेरे करीब आता है...मै क्यू सब भूल जाती हूं...ये सब क्यों होता है...उसका करीब आना क्यू अच्छा लगता है....ओह गॉड मै पागल ना हो जाऊ...

ये बोल चाहत ग्राउंड की तरफ आ गई जहां मैच होने वाला था चाहत वहा बैठने के लिए जगह ढूंढ रही थीं।

तभी सामने से काजल ने चाहत को आवाज़ लगाई फिर चाहत ने काजल की तरफ देखा और आवाज़ की दिशा में चले गई। चाहत काजल के साथ बैठ गई । कुछ ही देर में दोनो ने देखा ब्वॉयज की टीम दायी ओर से आ रही है उनके आने की आहट से ही पूरा ग्राउंड शोर करने लगा। एक अलग ही तरह का माहौल बन गया था। इसी बीच चाहत की नजर पड़ी अध्यन पर जो सबसे पीछे अंश से बात करते हुए आ रहा था। अध्यन ने ब्लू टीशर्ट और ब्लैक शॉर्ट्स पहन रखी थी

सब ने वैसे ही कपडे पहने थे। चाहत उसे देखने लगीं वो उस ड्रेस में भी काफी अच्छा लग रहा था।

अध्यन को जब लगा वो ग्राउंड पहुंच गया तो उसने आस पास देखना शुरू किया। अंश उसे ऐसे देखते हुए देख कर - क्या देख रहा है???

अध्यन उसकी बात सुन सकपकाते हुए - कुछ नहीं...बस यूं ही ..

अंश ने उसे देखा फिर हस्ते हुए कहा - वो आगे से दाई तरफ बैठी है।

अध्यन ने झट से दाई तरफ देखा वहा कोई नहीं था ये देख उसने खा जाने वाली नज़रों के साथ अंश को देखा तो अंश उसकी तरफ देख मुस्कुराते हुए - अरे बाबू ...अच्छे से देखो ये बोल उसने अध्यन का चेहरा अपने हाथों से पकड़ कर सामने किया जहा चाहत और काजल बैठी थी।

चाहत को देख अध्यन के चेहरे पर अलग ही तरह की मुस्कुराहट आ गई वो एक टक उसे देखने लगा इस तरह से जब अध्यन की नजरो को चाहत ने खुद पर जमा हुआ महसूस किया तो उसने अध्यन को देखा फिर अपना एक हाथ उठा कर अध्यन को अपना अंगूठा दिखाते हुए एक बार

फिर ऑल द बेस्ट कहा।

अध्यन ने भी उसे थैंक्यू कहा अब कोच ने फिर विसल बजाईं और गेम स्टार्ट हुआ। दोनों टीम बहुत अच्छा खेल रही थी । चाहत की नजर बस अध्यन पर ही टिकी हुई थीं । वो जैसे ही गोल करता चाहत जोरो से ताली बजा कर हूटिंग करने लगती । सारी क्लास अपने क्लासमेट्स को सपोर्ट कर रही थीं। उनकी हूटिंग से ही टीम का हौसला बढ़ा और टीम जीत गई इस तरह टीम फाइनल में पहुंच गई। टीम में सब खुश ने और साथ में एक घेरा बना कर चिल्ला रहे थे।

सारे बच्चे टीम को congratulate कर रहे थे और टीम भी सभी को थैंक्यू बोल रही थी। इसी तरह ये celebration भी ख़तम हुआ। पूरी टीम इसके बाद कॉमन रुम गई वहा से फ्रेश होकर सब बाहर आने लगे। चाहत और काजल ने उन्हें विश किया और वो लोग भी वहा से चले गए। चाहत और काजल को अब अध्यन और अंश का इंतज़ार था। पर दोनो ही गायब थे। थक हार कर चाहत और काजल दोनो क्लासरूम आ गए उन्होंने अपना बेग निकाला और बाहर जाने लगे।

तभी उन्होंने देखा सामने से अध्यन और अंश आ रहे है उन्होंने पहले एक दूसरे को देखा फिर सामने देखने लगे अंश

और अध्यन जब उनके करीब पहुंचे तो चाहत और काजल ने हाथ बढ़ाते हुए congratulations कहा । अंश ने देखा दोनो का हाथ अध्यन की तरफ था तो उसने दोनों के हाथो को अपने दोनो हाथ से मिलाते हुए कहा - बहुत बहुत धन्यवाद आपका....आपके मुख से ये सुन मै तो धन्य हो गया। ये बोल अंश ने अपना सिर उनकी तरफ झुका दिया और उनके हाथो को छोड़ दिया।

चाहत और काजल उसकी बात सुन हसने लगे और अध्यन चाहत को देखने लगा। जिसके चेहरे में मुस्कान को देख उसे अजीब तरह का सुकून मिला। चाहत की मुस्कान में खोकर अध्यन भी मुस्कुराने लगा।

काजल ने मुंह बनाते हुए कहा - सिर्फ धन्यवाद से काम नहीं चलेगा....

ये सुन अध्यन और अंश ने एक साथ कहा - तो..

ये बोल दोनो एक दूसरे को देखने लगे फिर अंश ने कहा - धन्यवाद से काम नहीं चलेगा तो... फिर किस्से चलेगा....

काजल ने चाहत की तरफ देखा फिर मुस्कुराते हुए कहा - वी वांट पार्टी.....

ये सुन अंश ने अपने सीने पर हाथ रखा और कहा - थैंक गॉड....मै तो डर ही गया था....

अध्यन ने ये बात सुन कर हस्ते हुए कहा - तू क्यों डर गया था...

अंश ने कहा - अरे इन लड़कियों का कोई भरोसा नहीं....ये कुछ भी मांग लेती है।

ये सुन काजल और चाहत ने एक साथ कहा - अच्छा..और उसे घूरने लगीं।

अंश ने अध्यन को देख और हाथ जोड़ बेचारों की तरह मुंह बना कर कहा - चल भाई दे दे इनको पार्टी....नहीं तो....ये हमे ही खा जाएंगी....

अंश की ऐसी हरकत और बात सुन चाहत, अध्यन और काजल हसने लगे। कुछ देर हस लेने के बाद अध्यन ने कहा - चलो सब मिल कर आइसक्रीम खाते है....सब ने ये सुन हा में सिर हिलाया और अध्यन के साथ चलने लगे।

स्कूल के बाहर

चाहत , अध्यन ,अंश और काजल चारो आईसक्रीम शॉप आ गए । अध्यन ने सबकी पसंद का ख्याल रखते हुए सभी के लिए आइसक्रीम ले आया। चारो आईसक्रीम खाने लगे तभी किसी ने चाहत को आवाज़ लगाई। चाहत ने पलट कर देखा तो वहा इशांत खड़ा था। इशांत चाहत के पास आ कर - मिस टॉपर कैसी हो....

चाहत इशांत को देखते हुए - अच्छी हूं इशांत आप बताओ....

इशांत चाहत को देखते हुए - पहले ठीक था पर तुम्हे देख और भी अच्छा हो गया हूं...

चाहत उसकी बात सुन मुस्कुराते हुए - इशांत आप भी

ना...कभी कभी कुछ भी बोलते है...

इशांत भी मुस्कुराने लगा। फिर उसके किसी दोस्त ने इशांत को बुलाने लगते है तो इशांत वहा से चला जाता है..

चाहत इशांत को बाय करते हुए जैसे ही मुड़ी काजल,अंश,और अध्यन उसे घुर रहे थे। चाहत उनकी तरफ देख कर फीका सा हस दी सब फिर भी उसे घुर रहे थे। तो उसने अपनी बड़ी पलको को झपका कर कहा - क्या??

अध्यन एक बार फिर उसकी इस अदा में खो सा गया। अध्यन बस चाहत को देख रहा था और चाहत क्या बोल कर फिर इनोसेंट बन कर आइसक्रीम खाने लगी। काजल उसे घूरते हुए - ये कौन था???

चाहत ने आइसक्रीम खाते हुए - मिनी का कजन ....

अंश - मिनी कौन है...???

चाहत वैसे ही - आर्यन की फ्रेंड ..

अंश - ओके ...

तभी काजल - पर तुम इसे कैसे जानती हो...???

चाहत ने गहरी सांस ली और कहा - मै मिनी की बर्थडे पार्टी में गई थी.....तो ये मुझे वहीं मिल गए थे....थोड़ी सी बात हुई थी हमारी....

काजल अपनी आइसक्रीम का लास्ट बाइट खाते हुए -

ओह...तो ऐसा

चाहत उसके सिर पर टप्ली मारते हुए - हा ऐसा ही...

काजल आह भरते हुए - हाए कितना स्मार्ट था..

काजल ने जैसे ये कहा अंश और चाहत काजल को देखने लगे फिर अंश - अच्छा....वो स्मार्ट है.....बताऊं अनिल को ......?

काजल उसे घूरते हुए - तुम्हे बुरा क्यू लग रहा है... अब स्मार्ट है तो है....क्यू चाहत....

चाहत एक नजर अध्यन पर मार कर - वो तो है ही.....

अंश ने जब ये सुना तो अध्यन को देखने लगा। जो बस चाहत को देख रहा था उसे तो कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। अंश ये देख मुस्कुराने लगा। और सोचने लगा - प्यार में पागल है पूरा का पूरा...

अध्यन जो बहुत देर से शांत था उसने चाहत से कहा - चाहत ...मुझे तुमसे बात करनी है..

चाहत - हा ठीक है...बोलो

अध्यन उसकी आंखो में देखते हुए - अकेले में...ये बोल वो आगे बढ़ गया। चाहत भी मुंह खोल कर उसे देखती रही तभी काजल ने उसे धक्का देते हुए कहा - जाना...

चाहत मासूम सी शक्ल बना कर - गुस्सा हो गया क्या???

अंश उसे घूरते हुए - और करो दूसरे लडको की तारीफ.....

काजल अंश को देख कर - क्यू डरा रहे हो उसे....

फिर चाहत की तरफ देख कर - जाना

चाहत डरते हुए - पक्का......

अब काजल ने चाहत को घुरा तो चाहत ने अपना हाथ साफ कर साइकिल निकाल ली।

चाहत ने अपनी साइकिल पकड़ी और अध्यन के पीछे जाने लगी । उसने पलट कर देखा तो अंश और काजल उसे बाय कर रहे थे। अध्यन साइकिल को धीरे धीरे चलाते हुए आगे बढ़ा रहा था। चाहत भी उसके पीछे ही जा रही थी। थोड़े देर यूं ही चलने के बाद चाहत ने देखा अध्यन ने साइकिल एक जगह रोक ली और सामने पेड़ के पास आकर रुक गया। चाहत भी वहीं रूकी। अपनी साइकिल स्टैण्ड पर रख चाहत अध्यन के बगल में आकर खड़ी हो गई।

चाहत कुछ देर यूं ही खड़ी रही तभी अध्यन ने कहा - कुछ पूछना था तुमसे...

चाहत भी वैसे ही खड़े होकर अध्यन से नजर ना मिलाते हुए कहा - हा पूछो ना....

अध्यन अब पलट कर उसकी तरफ देखते हुए बोला - जो भी पूछु....क्या मै उम्मीद कर सकता हूं कि तुम सच कहोगी..

चाहत पहले तो कुछ बोल नहीं पाई बस एक टक अध्यन को देखने लगीं और फिर कहा - हा पूछो....

अध्यन ने एक गहरी सांस ली फिर कहा - कल तुम क्यों रो रही थी....? चाहत ने जैसे ही ये बात सुनी उसकी धड़कने तेज़ हो गई वो बस अध्यन को देखने लगी....

अध्यन अपनी बात जारी रखते हुए - तुमने कहा मै रहम ना करू..पर तुम कैसे ये कह सकती हो..की मैंने तुम पर.. अध्यन अपनी बात पूरी कर पाता उससे पहले ही चाहत वहा से जाने लगी।

चाहत धीरे धीरे कदम पीछे कर रहीं थीं उसे ऐसा करते देख अध्यन ने अपने कदम जल्दी जल्दी बढ़ाते हुए उसके पास गया वहा पहुंच कर देखा चाहत बस अपने कदम पीछे ले जाते हुए अध्यन को देखे जा रही थी अध्यन ने उसे कंधो से पकड़ा और अपने करीब खींच कर उसकी आंखो में एकटक देखने लगा चाहत भी उसे देखने लगी तो अध्यन ने वैसे ही आंखो में देखा जिसमें अभी भी आंसू थे चाहत ने जब अध्यन की आंखो को देखा तो वो खुद को रोक नहीं पाई और रोने लगीं। अध्यन उसकी आंखो में अभी भी देखे जा रहा था उसका रोना जब ना रुका तो अध्यन ने चाहत को अपने तरफ खींच कर गले से लगा लिया।

चाहत जिसकी आंखो से आंसू बह रहे थे। उसने अध्यन को मजबूती से बाहों में जकड़ते हुए रोना जारी रखा। अध्यन ने भी उसे रोकना जरूरी नहीं समझा अध्यन भी उसे पकड़ कर खड़ा रहा । अध्यन के सीने से लगे चाहत का रोना सिसकियों में तब्दील हो गया। उसने हिचकी लेते हुए कहा - वो कल जब....जब मै और तुम क्लास से बाहर आ रहें थे .....तो कुछ गर्ल्स जो शायद तुम्हे पसंद करती थी....उन्होंने कहा कि तुम...इतना कह चाहत फिर रोने लगी और अध्यन से दूर होने को हुई तो अध्यन ने अपनी पकड़ ढीली ना करते हुए उसे और ज्यादा मजबूती से सीने से लगाए रखा।

चाहत ने वैसे ही अपनी बातें जारी रखते हुए कहा - उन्होंने कहा तुम मुझ पर रहम कर रहे हो....तुम ऐसा इसीलिए कर रहे हो ताकि मुझे अकेलापन फील ना हो.....अब चाहत फिर सिसकते हुए बोली - तुम ....क्या तुम ये कर रहे थे...क्या तुम भी मेरे सावले रंग पर तरस खा कर ...ये सब.... चाहत ने बस इतना ही कहा था तभी अध्यन ने उससे कहा - तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो...ये बोल उसने चाहत को खुद से दूर किया मगर उसे छोड़ा नहीं।

अध्यन चाहत की आंखो में देखते हुए बोला - तुम ये सोच भी कैसे सकती हो... तुम्हें क्या लगता है मै जब भी तुम्हारे पास

नहीं ....दूसरो से स्पेशल समझोगी.....खुद से प्यार करोगी....खुद की रेस्पेक्ट करोगी..... ये बोल अध्यन उसे छोड़ थोड़ा दूर जा कर खड़ा हो गया।

चाहत अब उसकी बात समझने लगीं चाहत सीधा अध्यन के पास पहुंची और उसका चेहरा अपने हाथों से पकड़ अपनी तरफ करते हुए कहा - सॉरी अध्यन वो .....आज के बाद मै कभी भी ऐसा नहीं करूंगी..बस एक बार..एक बार मुझे माफ कर दो.... जब अध्यन ने कुछ नहीं कहा तो चाहत ने उसका हाथ अपने हाथ पर लिया।

चाहत उसके हाथो पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए - मै प्रोमिस करती हूं..... अध्यन ने चाहत के हाथ पर अपने दूसरे हाथ को रख कर कहा - साथ ही तुम ये भी प्रोमिस करो...आज के बाद ....अगर किसी ने भी तुम्हारे रंग को लेकर कुछ कहा.....तो तुम उस बारे में सोच कर खुद को दुखी नहीं करोगी ... बल्कि ऐसे लोगो को जवाब दोगी....

चाहत ने अध्यन की बात सुनी और हा में सिर हिला कर कहा - मै प्रोमिस करती हूं...इसके बाद दोनों यू ही खड़े रहे।

चाहत ने मुस्कुराते हुए अध्यन को देखा और अपना हाथ उसके हाथ से छुड़वाते हुए कहा - चलो अब घर चले या यही रहना है..यू ही मेरा हाथ थामे...

रहता हूं...तुम पर रहम करने के लिए....नहीं चाहत ऐसा नहीं है....तुम .. ये बोल अध्यन कुछ पल के लिए रुक गया फिर अपनी बात तो जारी रखते हुए कहा - तुम बहुत स्पेशल हो मेरे लिए.... बहुत ज्यादा.....तुम्हे पता है तुम ही हो जिसके कारण मै पढ़ने लगा....घर पर सब खुश रहने लगे.... और साथ में मै भी खुश था....तुम्हारे साथ ने ही मुझमें changes लाया है..पहले मै ये अध्यन नहीं था जो अब हूं....तुम्हारा साथ ही था जिसने ये सब किया है....तुम्हारा सावला रंग ही तुम्हारी पहचान है....ये ही तुम्हे दूसरों से अलग बनाती है... तुम्हें मैंने कई बार कहा है....आज फिर कहता हूं....रंग कभी भी खूबसूरती डिसाइड नहीं करती...लगभग हर बार मैंने तुमसे ये बात कही है....पर तुम ....तुम तो जैसे कुछ सुनना ही नहीं चाहती.....चाहत लाइफ बहुत छोटी है... इस छोटी सी लाइफ में तुम ऐसे लोगो की बाते सुन रोने लगी तो ......

आधे से ज्यादा लाइफ तो इन्हीं चीजों में वेस्ट हो जाएगी...तुम एक पढ़ी लिखी समझदार लड़की हो..तुम ऐसा सोच भी कैसे सकती हो....मैंने तुमसे ये एक्सपेक्ट नहीं किया था...चाहत रंग और खूबसूरती बस कुछ पल के लिए साथ होती है... काबिलियत और एक अच्छा दिल इंसान को बनाता है....सब तुम्हे तब एप्रिशिएट करेंगे जब तुम खुद को एप्रिशिएट करोगी...जब तुम खुद को दूसरों से अलग

अध्यन ने खोए हुए अंदाज में कहा - मै तो जिंदगी भर ऐसे रह सकता हूं...अगर तुम साथ हो तो.....

चाहत ने सुना फिर भी अनजान बनते हुए कहा - क्या....तुमने कुछ कहा...एक बार फिर बोलना..... वो क्या है ना मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया...

अध्यन उसकी बात सुन सकपकाते हुए बोला - नहीं कुछ नहीं...अब घर चलते है ये बोल वो आगे बढ़ गया चाहत भी मुस्कुराते हुए उसके पीछे चलने लगी। अध्यन उसके आगे चल रहा था और चाहत उसके पैरो की छाप पर अपना पैर जमाए चले जा रही थी। वो ऐसे करते हुए खुश थी.....साथ ही चाहत ने अपना सिर नीचे किया हुआ था।

अध्यन ने जब चाहत को मुड़ कर देखा तो वो बच्चो की तरह उछल उछल कर चल रही थी अध्यन रुक कर उसे देखने लगा। चाहत इससे बेखबर बस यहां से वहा उछल रही थी। थोड़े देर में उसने अपना सिर उठा कर सामने देखा तो अध्यन उसे ही देख रहा था ये देख उसने अपना सिर एक बार फ़िर झुका लिया और मुस्कुराने लगी। अध्यन ने चाहत को देखा और मुस्कुराते हुए मन में बोला - इतनी प्यारी तो हो तुम... कैसे किसी को तुमसे प्यार ना हो ....

चाहत वैसे ही सिर झुकाए अध्यन के पास अाई और कहा -

तो उसे याद आया कि आज उसने लंच तो किया ही नहीं। चाहत ने टिफिन को पकड़ा और बाहर आ गई तभी उसे किचेन से कुछ खटपट की आवाज़ सुनाई पड़ी।

चाहत उस खटपट को सुन किचेन की तरफ गई जहा उसने देखा आर्यन टेबल पर चढ कर ऊपर रखें डिब्बे को निकालने की कोशिश कर रहा है चाहत ने जैसे ही उसे ये सब करते हुए देखा वो तुरंत उसके पास गई उसने पहले आर्यन का हाथ पकड़ कर उसे नीचे उतारा फिर उसे गुस्से से देखने लगी।

आर्यन उसे गुस्से में देखते हुए देखा फिर कहा - दी.....वो भुख लगीं थीं....तो....

आर्यन को ऐसे बोलते सुन चाहत का गुस्सा जैसे गायब ही हो गया उसने पहले डिब्बे में से कुछ स्नैक्स निकले और उन्हें प्लेट पर रखा और आर्यन को दे दिया ।

आर्यन भी प्लेट लेकर किचेन से बाहर आ गया । चाहत ने देखा शाम होने को है तो उसने सबसे पहले सब्जी काटी और आटा निकाल कर मलने लगी।

आटा मल उसने कड़ाई चड़ाई और सब्जी पकाने के लिए उसने कड़ाई में तेल डाला ऐसे ही उसने सारा खाना बनाया घड़ी में शाम के सात बज रहे थे। वो फटाफट किचेन से बाहर चले....

अध्यन जैसे नींद से जागा उसने हड़बड़ाहट के साथ कहा - हा हा चलो...

दोनों ने अपनी अपनी साइकिल पकड़ी और अपने घर की तरफ मुड़ गए। हमेशा की तरह कुछ दूर चल कर अध्यन मुड़ा और चाहत को देखा जो अपने ही धुन में साइकिल चला रही थी। अध्यन मुस्कुराया और आगे बढ़ गया। थोड़ी देर में चाहत भी रूकी और उसने भी मुड़ कर देखा तो अध्यन भी साइकिल चलाते हुए आगे जा रहा था उसने अध्यन को देखते हुए कहा पागल और मुस्कुराते हुए अपने घर की तरफ आ गई।
 
चाहत घर आई और अपना बेग पकड़े सबसे पहले रीमा जी के रूम गई। रूम का दरवाजा उसने हल्के से खोल कर अन्दर झांका तो देखा रीमा जी बेड पर सोई हुई थी चाहत ने धीरे से दरवाजा बंद किया और अपने रूम आ गई उसने अपना बेग स्टडी टेबल पर रखा और फ्रेश होने चले गई।

उसने मुंह हाथ धोया और पूजा रूम चले गई। उसने वहा जाकर पहले पुराने फूल हटाए और दिया जला कर पूजा करने लगीं । थोड़े देर में जब उसकी पूजा ख़तम हुई वो हाथ जोड़ कर पीछे मुडी तो देखा रीमा जी हाथ जोड़े वहीं खड़ी थी।

चाहत ने मुस्कुराते हुए रीमा जी को देखा फिर वो उनके पास आई और उनके पैर छूते हुए उनको प्रसाद दिया। रीमा जी ने भी प्रसाद लिया और चाहत के गालों को अपनी उंगलियों से छूते हुए कहा खुश रहो।

चाहत मुस्कुरा दी फिर उसने पास खड़े आर्यन को भी प्रसाद दिया और कुछ प्रसाद खुद खाकर बाहर आ गई।

रीमा जी वहीं बैठ गई चाहत रीमा जी से - अभी तबीयत कैसी है..

रीमा जी - पहले से बेहतर हूं....ये बोल वो उठीं और किचेन की तरफ जाने लगी

ये देख चाहत ने कहा - आप कहा जा रही हैं?

रीमा जी मुस्कुराते हुए - किचेन.....

चाहत उन्हें देखते हुए - पर क्यू....?

रीमा जी - क्या क्यू?....खाना बनाने..

चाहत - वो तो मैंने कब का बना लिया....

रीमा जी चाहत को देखने लगी तो चाहत ने हा में सिर हिलाया। अब रीमा जी भी आराम से सोफे पर बैठ गई और टीवी देखने लगी।

चाहत वहा से अपने रूम आई और खिड़की के पास खड़े हो गई वहा बाहर से ठंडी हवा अंदर आ रही थी। उसने अपने बाल खोले और बाहर से आती ठंडी हवा को महसूस करने लगी। उसने अपनी आंखें बंद की उस ठंडी हवा से उसे कुछ पल सुकून मिला और वह उस सुकून में ही गुम हो गई। थोड़े देर बाद उसने अपनी आंखें खोली तो देखा सामने अध्यन खड़ा है।

व्हाइट शर्ट और ब्लू जींस पहने वो चाहत को देख मुस्कुरा रहा था। चाहत ने अपनी पलके झपकाई तो वहा कोई नहीं था। चाहत ने खुद के सिर पर थपकी मारी और अपने बाल बांध कर हॉल में अा गई।
 
"वर्तमान समय"

ट्रेन की सिटी के साथ ही चाहत की तंद्रा टूटी चाहत ने मुड़ कर देखा। उसकी बगल में बैठी लड़की अब उठ चुकी थी उसने चाहत की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोली - दीदी मेरा स्टेशन आ गया.....मै चलती हूं......Happy journey

ये बोल वो मुस्कुराते हुए - थैंक्यू ....वो लड़की वहा से सीधा बाहर चले गई। चाहत उसे बाहर जाते हुए देखने लगी वो लड़की जब गेट के बाहर पहुंची तो पता नहीं क्या सोच वो वापस चाहत के खिड़की के पास आई और उसने मुस्कुराते हुए कहा - आप बहुत प्यारे हो.... ये बोल उसने अपना हाथ उठा कर बाय कहा चाहत ने भी मुस्कुराते हुए बाय कहा।

बाय बोल वो लड़की अपने स्कूल बेग के साथ उछलते हुए वहा से चले गई। चाहत उसे जाते हुए देखती रही। थोड़ी देर बाद चाहत ने अपने बगल में देखा जहा शिव जी बैठे ऊंघ रहे थे। चाहत ने उन्हें मुस्कुराते हुए देखा और खिड़की से बाहर देखने लगी। ट्रेन ने फिर अपनी रफ़्तार पकड़ी और आगे बढ़ने लगी। बाहर से आती ठंडी हवा ने चाहत के चेहरे को छुआ तो चाहत ने अपनी आंखे बंद कर दी। बंद आंखो से उसे अध्यन का चेहरा दिखने लगा।

चाहत ने उसी तरह अपनी आंखे बंद रखे हुए कहा - कितने अच्छे दिन थे वो...जब हम साथ थे...आज भी ये ठंडी हवा मुझे तुम्हारा अहसास करवाती है...

चाहत ये सोच ही रही थी तभी ट्रेन अपनी रफ्तार से चलने लगी। चाहत ने देखा उसकी मंजिल आने को है। उसने अपने सामान को साइड रख लिया। फिर उसने शिव जी की तरफ देखा और हाथ आगे बढ़ा कर शिव जी के कंधो को छुआ तो शिव जी उठ गए। उन्होंने चाहत की तरफ देखा फिर वाशबेसिन की तरफ चले गए। शिव जी वाशबेसिन के पास आ गए फिर उन्होंने अपना चेहरा धोया और वापस चाहत की तरफ आए।

चाहत ने उन्हें देखा उसने अपने बेग से एक स्कार्फ निकाल कर उनकी तरफ बढ़ा दिया। शिव जी ने भी अपने हाथ आगे कर के स्कार्फ ले लिया। उस स्कार्फ से अपना चेहरा साफ किया। और स्कार्फ दुबारा चाहत की तरफ बढ़ा दिया। चाहत ने भी स्कार्फ लेकर उसे बेग में रख लिया। शिव जी ने सारे सामान को एक साइड किया। शिव जी बर्थ पर बैठने लगे तभी ट्रेन को झटका लगा और शिव जी गिरने लगे। चाहत ने अपना हाथ बढ़ा कर उन्हें पकड़ लिया। और शिव जी संभल गए अगर चाहत ने उन्हें पकड़ा ना होता तो शायद वो गिर ही जाते।

चाहत शिव जी का हाथ थामे मुस्कुराने लगी। शिव जी ने जब चाहत को मुस्कुराते हुए देखा तो उन्होंने अपनी आंखो को बड़ा कर उसे घुरा तो चाहत चुप हो गई। और अपना सिर नीचे झुका लिया। चाहत की इस हरकत को देख शिव जी मुस्कुराने लगे। फिर उन्होंने चाहत के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा - चलो हमारी मंजिल आ गई। चाहत ने भी हा में सिर हिला दिया।

चाहत और शिव जी दोनो ट्रेन से नीचे उतर गए। चाहत ने अपना हैंड बैग लिया और एक ट्राली बेग भी उसी हाथ में पकड़ लिया। शिव जी ने भी अपने बाए हाथ से एक ट्राली बेग पकड़ा और दाए हाथ से चाहत का हाथ पकड़ लिया और

अब अपनी नजर खिड़की से बाहर की और रास्तों को देखने लगीं। उसने बाहर देखते हुए अपनी नज़रे उठाया जहा एक जगह लिखा था "मोर रायपुर"(मेरा रायपुर) चाहत ये पढ़ कर मुस्कुरा दी।

रायपुर शहर छत्तीसगढ़ की राजधानी है यह छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे विकसित शहर है यहां हर जाति और हर धर्म के लोग रहते है। इस शहर ने अपने अंदर कई तरह की संस्कृति को समेटे रखा है।

हर सुविधा से युक्त इस शहर को छत्तीसगढ़ के स्मार्ट सिटी के नाम से जाना जाता है। इस शहर में हर तरह के स्कूल और कॉलेज है। खूबसूरती और आधुनिकता दोनो का अनूठा संगम है यहां।

चाहत खिड़की के बाहर देख रही थीं वो इस शहर की खूबसूरती को अपने आंखो में कैद लेना चाहती थी। मिरर से जब सरदार जी ने चाहत को बाहर देखते हुए पाया। तो उससे पूछा - कैसा लगा रायपुर...

चाहत ने उस समय खिड़की से बाहर देखा अभी वो एक चौक के पास थे जहा ट्रैफिक सिग्नल था ये चौक एक चौराहा था जहा चारो तरफ गाड़ियों ही गाडियां थी। सब लोग अपनी गाड़ी में बैठ सिग्नल ग्रीन होने का वेट कर रहे थे।

मुस्कुराते हुए शिव जी की तरफ देख कर बोले - महाराज .. क्या देख रहा है...चल अंदर आ जा...

शिव जी भी मुस्कुराते हुए हा में सिर हिला कर चाहत की तरफ आते है शिव जी चाहत के हाथो से बेग लेकर उसे डिक्की में रखा और साथ में दोनो ट्राली बेग को भी रखा और डिक्की बंद करते हुए उन्होंने चाहत को देखा जो बस कन्फ्यूज होकर कभी कार को तो कभी शिव जी की तरफ देख रही थी। शिव जी ने उसे कंधो से पकड़ा और कार में बैठने का इशारा किया। वो पीछे की सीट पर बैठ गईं । और शिव जी आगे जाकर ड्राइवर के बगल में बैठ गए।

अंदर बैठ कर चाहत ने उन ड्राइवर अंकल को देखा वो ड्राइवर सरदार थे उन्होंने भूरे रंग की पगड़ी पहनी थी और मेहरून रंग का कुर्ता पैजामा पहन रखा था।

सरदार जी ने शिव की तरफ देखा और उनके गले लग गए उन्होंने गले लगे हुए कहा - और महाराज जी... की हाल चाल??

शिव जी उनसे अलग होकर बोले - सब चंगा ... तू बता..

सरदार जी - अपन भी चंगे ही है...

चाहत जो पहले ही कंफ्यूज थी उसने जब सरदार जी और शिव जी को गले लगते हुए देखा तो उसे अच्छा लगा उसने

में छोटे व्यक्ति बाहर आए। उन्होंने अपने पीले दांत दिखाते हुए शिव जी और सरदार जी की तरफ देखा उन व्यक्ति ने अपना हाथ जोड़ कर नमस्ते कहा।

शिव जी और सरदार जी ने भी अपने हाथ जोड़ते हुए उनका अभिवादन किया। उन व्यक्ति ने सरदार जी को लगेज पकड़े हुए देखा फिर कहा - अरे ....आप इतनी तकलीफ क्यू कर रहे हैं ... ये बोल वो पीछे मुड़े और आवाज़ देते हुए - अरे..राजू ..कहा है भाई तू..

उनके इतना बोलते ही एक पतला लड़का बाहर आया उसने ब्लैक पैंट और व्हाइट शर्ट पहने हुआ था। उसने सरदार जी के हाथ से लगेज लिया और उन मोटे व्यक्ति के पास खड़े हो गया।
 
उन मोटे व्यक्ति ने उस लड़के राजू से कहा - रूम नं. 13

वो ये सुन आगे बढ़ गया । अब उन मोटे अंकल ने शिव जी की तरफ देखा फिर कहा - चलिए मि. सिंह ..

सरदार जी वहीं खड़े थे उन्हें देख शिव जी बोले - मै सारी फॉर्मेलिटी पूरी कर के आता हूं। सरदार जी ने हा में सिर हिलाया।

शिव जी और चाहत उन मोटे व्यक्ति के साथ ऑफिस के

चाहत ने उन लोगो को देख कर कहा - काफी भीड़ भरा..

थोड़े देर में सिग्नल ग्रीन हुआ और चाहत की कार आगे बढ़ गई । चाहत ने देखा कार एक चौक के पास से मुड़ रही है। उस चौक के पास एक बोर्ड था जिस पर " संतोषी नगर " लिखा था। चाहत ने देखा उनकी कार चौक से होते हुए एक गली में जा रही हैं गली में जाते हुए उनकी कार एक बिल्डिंग के सामने रुकती है जहा लिखा था "गर्ग गर्ल हॉस्टल" चाहत ने बोर्ड की तरफ देखा फिर घर का मुआयना करने लगी। चाहत ने देखा कार वहीं रूकी हुई हैं चाहत यहां पहले भी आ चुकी थी....

शिव जी और सरदार जी अपनी सीट बेल्ट खोल कर उतरने लगे। चाहत ने भी अपनी साइड का गेट खोला और बाहर आकर उस बिल्डिंग को देखने लगी। ये बिल्डिंग एक प्राइवेट हॉस्टल था इस बिल्डिंग में चार फ्लोर थे नीचे के फ्लोर में ऑफिस था दूसरे में हॉस्टल के मालिक और उनकी फैमिली रहा करती थी। बचे दो फ्लोर में हॉस्टल था। चाहत यहां पहले भी आ चुकी थी शायद इसीलिए यहां के हर हिस्से से वाकिफ थी।

चाहत ने देखा सरदार जी कार की डिक्की से सामान निकाल रहे थे। तभी वहा का मेन गेट खुला और एक मोटे और हाइट

अंदर चले गए। सरदार जी कार को पार्क कर के वहीं खड़े थे तभी राजू उनके पास आया उसने सरदार जी को अपने साथ चलने का इशारा किया। सरदार जी भी राजू के साथ ऑफिस आ गए।

चाहत और शिव जी ऑफिस पहुंचे ये एक सिम्पल सा ऑफिस था जो ब्लू और व्हाइट के कॉम्बिनेशन में पेंट किया गया था वहा बीच में टेबल रखा था। टेबल के दोनो तरफ चेयर रखे हुए थे। वो मोटे व्यक्ति एक चेयर पर बैठ गए । उन्होंने शिव जी और चाहत को भी बैठने का इशारा किया। शिव जी और चाहत वहीं बैठ गए। उन मोटे व्यक्ति ने शिव जी को कुछ डॉक्यूमेंट दिए शिवजी उन्हें फील अप करने लगे।

चाहत उनका साथ दे रही थी तभी एक छोटी और जरूरत से ज्यादा मोटी औरत बाहर आई उसने हाथ में व्हाइट कलर का ट्रे रखा था जिसमें चाय के कप थे और स्नैक्स थे। उन औरत ने एक एक कर सबको चाय दिया और फिर वो चाय का कप लेकर आई और चाहत की तरफ बढ़ाया। चाहत ने ना में सिर हिलाया और कहा - मै चाय नहीं पीती....

वो औरत हस्ते हुए अपनी आवाज़ में मिश्री घोल कर बोली - अरे ..चलो कोई नहीं मै ही पी लेती हूं.. ये बोल बिना चाहत की बात सुने वो वहीं चेयर पर बैठ गई और चाय पीने लगी।

चाहत ने एक नजर उन्हें देखा फिर शिव जी की तरफ देखा ।

शिव जी ने अपना हाथ आगे किया और डॉक्यूमेंट मोटे व्यक्ति की तरफ कर दिया। डॉक्यूमेंट लेकर उन व्यक्ति ने अपने ड्रार में रख दिया फिर अपने चेयर से उठते हुए बोले - चलो मै आपको रूम दिखा देता हूं...

शिव जी और चाहत आगे बढ़ गए।

शिव जी चलते हुए मोटे व्यक्ति से बोले - मि. गर्ग बाकी बच्चियां भी आ गई क्या...

मि. गर्ग ये थे इस हॉस्टल के मालिक । उन्होंने शिव जी की तरफ देखा फिर कहा - जी मि. सिंह लगभग आधी लड़कियां आ चुकी है.. बाकी बची लड़कियां शाम तक आ जाएंगी..

चाहत उन दोनों की बाते सुन रही थीं थोड़े देर में सीढ़ियां आ गई। मि. गर्ग और शिव जी आगे आगे चल रहे थे और चाहत उनके पीछे चल रही थी। दो फ्लोर चढ़ने के बाद तीसरे फ्लोर पर वो रुक गए और साथ में चाहत भी रुक गई।

मि. गर्ग ने दरवाज़ा खोला तो चाहत ने देखा सामने पिंक कलर में पुता एक रूम था उस रूम में दो बेड थे और उन बेड के ठीक सामने अलमारी थी अलमारी से लग कर एक स्टडी टेबल था। दीवार से लग कर एक वॉशरूम था। चाहत का लगेज वहीं साइड में रखा था। चाहत अपने लगेज के पास

पहुंची और उसे उठा कर उसमे से अपना सामान निकालने रखी ये देख मि. गर्ग - आप चाहत की हेल्प कर दीजिए मै तब तक नीचे जाता हूं।

शिव जी ने ये सुन हा में सिर हिलाया। और चाहत के पास आ गए। मि. गर्ग रूम से बाहर चले गए। चाहत अपना सामन जमाने लगी। उसने अपनी साथ लगीं कॉपी को स्टडी टेबल पर रखा और कपड़ों को अलमारी में रख कर मुड़ी । चाहत ने देखा शिव जी उसे एक टक देख रहे है तो चाहत उनके पास गई उसने शिव जी को बेड पर बिठाया और मुस्कुरा दी।
 
तभी शिव जी ने चाहत का हाथ पकड़ कर सामने बिठाया और कहा - चाहत बेटा ...मै भले ही तुम्हे यहां अकेला छोड़ रहा हूं...पर इसका मतलब ये नहीं कि तुम खुद को अकेला समझो...मै तुम्हारे साथ हमेशा से हूं.... हर जगह ...कभी भी कोई भी प्रोबलम हो तो ....तुम सबसे पहले मुझे बताओगी...

चाहत ने ये सुन हा में सिर हिलाया तो शिव जी मुस्कुराते हुए बोले - चलो बाहर चलते है....

ये सुन चाहत ने अपना हैंड बैग निकाल कर उसे खोलते हुए कहा - हा जरूर चलेंगे..पर पहले इन्हे स्थापित तो कर दू...

चाहत ने अपने हाथ में गणेश जी की मूर्ति निकलीं और उन्हें स्टडी टेबल पर साइड में रख दिया और साथ में एक

अगरबत्ती स्टैंड भी निकाला और उसे भी साइड में रख दिया। और हाथ जोड़ कर थोड़े देर तक वहीं चुप खड़ी रही । शिव जी अभी भी चाहत को देख रहे थे।

थोड़ी देर बाद उन्होंने चाहत के कंधो पर हाथ रख कर चलने का इशारा किया। चाहत ने भी हा में सिर हिला कर सहमति जताई। दोनों बाहर आए तो मि. गर्ग उन्हें मिल गए अपने पीले दांत दिखाते हुए चाहत ने जब उन्हें देखा तो मुस्कुरा दिए।

शिव जी मि. गर्ग से - मै चाहत को बाहर घुमा कर लाता हूं.. मि गर्ग ने हा में सिर हिलाया और अपना हाथ आगे कर दिया। शिव जी ने भी उनके हाथ से हाथ मिलाते हुए उनकी तरफ देखा। फिर वो सरदार जी के पास आ गए। और उनसे कहा - चल वीरे ...बच्ची नू घुमा के लाते है....

सरदार जी ने हा में सिर हिलाया । फिर तीनो बाहर आ गए।

सरदार जी बार बार चाहत को देख रहे थे वो चुप चाप चले जा रही थी। सरदार जी एक जगह रुक गए ये देख चाहत और शिव जी भी रुक गए।

सरदार जी हाफ़ते हुए - ओय महाराज .... तू क्या ड्यूटी पर है....

शिव जी थोड़े कंफ्यूज होकर - नहीं तो...

सरदार जी - तो ऐसे उटो की तरह चले क्यू जा रहा है...

शिव जी ये सुन हस्ते हुए बोले - अब क्या करू...ड्यूटी की आदत हो चुकी है....तो ऐसे ही

सरदार जी शिव जी को टोकते हुए - मै कुछ सुनना नहीं चाहता .....पहले तो स्टेशन से सीधे यहां ले आए....और अब बिना रुके चला रहे हो... मै भी इंसान हूं मुझे भी भूख लगती है... तेरी तरह पुलिस वाला नहीं हूं ..जिसे जब देखो तब ....काम काम काम .... ये बोल सरदार जी ने अपना पसीना साफ किया।

सरदार जी की बात सुन शिव जी मुस्कुराते हुए - अच्छा तो ये बात है... तुझे लगी है भूख..तो सीधे बोल ना ऐसे घुमा फिरा कर क्यू बोल रहा है....

सरदार जी शिव जी के कंधो पर हाथ रख कर - वाह... महाराज तुसी तो छा गए...

चाहत उन दोनों को ऐसे देख हस्ते हुए - हा वो भी बिना बादल के...

चाहत ने ये कहा तो शिव जी और सरदार जी भी मुस्कुराने लगे। चाहत को यू मुस्कुराता देख शिव जी को सुकून मिला। थोड़े देर बाद चाहत रूकी और फिर अपना हाथ आगे कर इशारा करते हुए बोली - वहा चलते है..

शिव जी और सरदार जी ने सामने देखा जाता एक होटल था। सरदार का चेहरा होटल देख कर ही खिल गया। तीनो होटल चले गए।

चाहत ने एक टेबल देखा और तीनो उस टेबल पर बैठ गए। थोड़े देर में उस टेबल के पास वेटर आया तो चाहत ने अपने लिए छोले भटूरे ऑर्डर किए ये देख सरदार जी ने भी सेम ऑर्डर किया अब शिव जी की बारी थीं तो सरदार जी तपाक से बोले - इसके लिए डोसा....

शिव जी मुस्कुराते हुए सरदार जी को देखने लगे। तभी चाहत ने उस वेटर से तीन लस्सी लाने को कहा। चाहत अब शिव जी को देखने लगी फिर उनसे शिव जी को सरदार जी की तरफ इशारा करते हुए पूछा - आप इनको कैसे जानते है...??

शिव जी ने जैसे कुछ बोलने के लिए मुंह खोला उससे पहले ही सरदार जी बोले - तुम्हारे पापा की ट्रेनिंग माना कैंप में थी... वहां से कुछ दूरी पर मेरा होटल था.... सुबह जब ये सब जॉगिंग के लिए वहा आते थे तो ...तो महाराज जी भी वहीं आते थे ....तभी हमारी दोस्ती हुई ।

तभी शिव जी बीच में बोले - और इसने मुझे फंसा लिया...

तभी सरदार जी - ओय झूट ना बोल बच्ची दे नाल...उल्टा तूने मुझे फंसाया ... पता है जब से हमारी दोस्ती हुई थी तब से मजाल है जो इसने कभी मुझे चाय के पैसे दिए हो ..... यहां तक कि जब इसे पता चला कि तुम्हारा जन्म हो गया है....इसने मुझे ये खबर मेरे ही होटल के गुलाब जामुन को मुझे ही खिला कर सुनाई.....

तभी शिव जी - हा वो तो मैंने किया ही था... पर तेरा क्या हा... तू बता.....फिर चाहत की तरफ देखते हुए जब से इसने तुम्हे देखा था.. तब से बस यही रट लगाए हुए रखता था..... तुम्हे देखना है तुम्हे गोद में उठाना है....

सरदार जी - हा महाराज ....मेरी शुरू से इच्छा थीं कि.. मेरी भी कुड़ी हो....फिर चाहत की तरफ देख कर बिल्कुल इसकी तरह .... पर रब नू ये मंज़ूर नहीं था ...उन्होंने मुझे दो उल्लू के पट्ठे दे दिए।

ये बोल सरदार जी कुछ देर के लिए रुके फिर बोले - पर जब तुम्हारे नामकरण पर ...महाराज ने जब तुम्हे उठा कर मेरी गोद में रखा... तो तुम्हें देख ऐसा लगा...की किसी अपने को ही पकड़ा हो ...जब तुम्हारी छोटी उंगलियों ने मेरी उंगली को थामा...उसी पल जो सुकून मिला.. आज तक मै भूल नहीं पाया हूं...
 
चाहत उनकी आंखो में आई नमी को देख मुस्कुराने लगीं। सरदार जी ने अपनी आंखे साफ़ की और हाथो से आकर बना कर कहा - इतनी सी थी ....मेरी गुड़िया जब तुम मेरा हाथ पकड़े अपनी छोटी छोटी आंखो से मुझे देखते रहती थी....और अब देखो इतनी बड़ी हो गई है कि मुझसे कंधा से कंधा मिला कर चलती है...और अभी .....ये बोल वो मुस्कुराए फिर बोले - और अभी यहां आई है.. अकेले रहने ... इंजीनिरिंग करने वो भी इतने बड़े कॉलेज में....

चाहत ये सुन मुस्कुराने लगीं तभी वहा वेटर आ गया उसने ऑर्डर किया हुआ सामान टेबल पर रखा और वहा से चले गया। चाहत ने पहले प्लेट्स को देखा और अपना हाथ बढ़ा कर सरदार जी के हाथ को पकड़ा और कहा - हा ..और इतनी बड़ी हो गई हूं कि ...आपके हिस्से की लस्सी भी पी सकती हूं....

ये सुन सरदार जी मुस्कुराने लगे और उन्होंने कहा - बिल्कुल...सारी पी लो.... इन सब बातो से पूरा माहौल थोड़ा हलका हुआ।

सब नाश्ता कर रहे थे तभी सरदार जी चाहत से - बेटा तूमने तो बताया ही नहीं...तुम्हारा यहां आना...

चाहत ने भटूरे तोड़ते हुए कहा - कुछ नहीं अंकल ...वो बस

12th के बाद cgpet ( chhatishgarh pre engineering test ) पेपर दिलाया फिर यहां सिलेक्शन हो गया....पहले सोचा था ड्रॉप लेकर jee की तैयारी करू फिर सोचा एक साल वेस्ट करना ठीक नहीं..तो यहां आ गई...

चाहत की बात सुन सरदार जी बोले - ये तो बहुत अच्छा हुआ...फिर एक नजर शिव जी पर मार कर बोले - तुम्हारे पापा बहुत प्यार करते है तुमसे....शुरू से ...बेटा खूब पढ़ना और ....एक अच्छे मुकाम पर पहुंचना ... और हमारा भी नाम रौशन करना..

चाहत ये सुन कर मुस्कुरा दी और हा में सिर हिलाया।

सरदार जी - मै यही रहता हूं.... मेरा घर इसी शहर में है...अगर तुम्हे कोई भी प्रोबलम हो तो मुझे बताना...

चाहत ने कहा - ठीक है....और जब बोर हुई तो भी आपको ही बताऊंगी...फिर आप आ जाना और मुझे पंजाबी सिखाने...

सरदार जी ये सुन बोले - हांजी बिल्कुल....

सबने नाश्ता किया और बाहर आ गए। शाम हो रही थी और शिव जी की ट्रेन थी तो शिव जी ने सरदार जी से कहा - वीरे चल अब चाहत को उसके हॉस्टल छोड़ कर ....मुझे भी

स्टेशन निकलना है..मेरी भी ट्रेन है..

चाहत ये सुन उदास हो गई। तभी सरदार जी बोले - अरे जाएंगे ...बिल्कुल जाएंगे... पर उससे पहले...

चाहत उनकी तरफ देखते हुए - उससे पहले क्या....

सरदार जी मुस्कुराते हुए अपना मोबाइल निकाल कर कहते है - सेल्फी...

चाहत और शिव जी ये सुन मुस्कुराने लगे। सरदार जी ने सेल्फी ली और फिर बोले - रुको महाराज मै बस अभी आया ....वो ये बोल बिना किसी की बात सुने वो होटल की तरफ चले गए।

चाहत ने उन्हें जाते देख मुस्कुराते हुए कहा - कितने अच्छे है ना ये...

ये सुन शिव जी गंभीर होकर - हा ये तो अच्छे है... पर यहां हर कोई अच्छा नहीं होगा...बेटा तुम्हे हर किसी पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करना है क्या पता कोई कुछ भी बोल....तुम्हारा फायदा उठा ले.. चाहत ये सुन शिव जी की तरफ देखने लगती जिसे देख शिव जी मुस्कुराए और फिर चाहत के उड़ते बालो को ठीक करते हुए - इसीलिए किसी पर भी आंख मूंद कर भरोसा नहीं करना है....समझे बेटा...

चाहत ने हा में सिर हिलाया।

तभी सरदार जी बाहर आए उनके हाथ में दो पैकेट थे जिसे लहराते हुए वो आगे आए और चलते हुए बोलें - चलो महाराज ...

चाहत और शिव जी चलने लगे।

कुछ ही देर में दोनों हॉस्टल की गेट में मिल गए। वहा बाहर के गार्डन में चेयर लगा कर मि. एंड मिसेज गर्ग बैठे थे। चाहत वहा रूकी तो सरदार जी ने अपने हाथ में रखा पैकेट चाहत की तरफ बढ़ते हुए कहा - ये ले लो चाहत ....

चाहत रुक गई वो कभी पैकेट तो कभी सरदार जी को देखती वो कंफ्यूज थी कि पैकेट ले या नहीं थक कर उसने अपना सिर शिव जी की तरफ किया शिव जी ने मुस्कुराते हुए हा में सिर हिलाया तो चाहत ने पैकेट ले लिया ।

शिव जी ने सरदार जी की तरफ देख कर कहा - मै ये रख कर आता हूं...तु तब तक कार निकाल ले..

ये सुन सरदार जी चाहत की तरफ मुड़े और कहा - ये मेरा कार्ड कभी भी जरुरत हो...कॉल कर लेना....

चाहत ने हा में सिर हिलाया और कार्ड ले लिया ।

सरदार जी चाहत के सिर पर हाथ रखते हुए - ख्याल रखना.... चाहत मुस्कुरा दी...
 
शिव जी और चाहत वापस रूम आए चाहत ने सारा सामान अलमारी में रखा उसने अलमारी में लगे मिरर से शिव जी की तरफ देखा शिव जी वहीं खड़े अपनी आंखे साफ़ कर रहे थे शायद उनको भी पता था कि अब उनके अलग होने का समय आ गया है...चाहत की भी आंखे गीली होने लगी उसने अपने आंसू को रोका और पलट कर शिव जी की तरफ देखा फिर मुस्कुराते हुए उनके सीने से लग कर बोली - अपना ख्याल रखना....और मम्मी का भी ।

चाहत के सिर पर अपना हाथ रख शिव जी बोले - हा और तुम भी अपना ख्याल रखना बेटा.. कुछ देर उनके गले लगे चाहत ने राहत महसूस की। वो शिव जी से दूर हुई अब शिव जी आगे आगे चल रहे थे और चाहत उनके पीछे पीछे थोड़ी देर चलने के बाद दोनो गेट पर आए जहा सरदार जी उनका वेट कर रहे थे चाहत ने उनकी तरफ देखा वो चाहत के पास आए और उसके गाल को छूकर कहा - ख्याल रखना बेटा...

चाहत ने भी हा में सिर हिला दिया। शिव जी भी चाहत के गाल पर हाथ रख कर कार में बैठ गए....

शिव जी खिड़की के पास आए और अपना सिर बाहर निकाल कर चाहत को बाय कहा चाहत भी उनको बाय करने लगी सरदार जी ने कार आगे बढ़ा दी चाहत उनको जाते हुए देखने लगीं। चाहत ने कार को तब तक देखा जब तक वो

आंखो से ओझल ना हो गई हो...

अब चाहत की दाईं आंख से एक आंसू गिरा जिसे चाहत ने तुरंत साफ़ कर लिया। चाहत अपनी पलको को झपकते हुए अपने रूम की तरफ जाने लगीं तभी उसकी नजर मि. एंड मिसेज गर्ग पर पड़ी दोनो ने चाहत को देखा और फीकी स्माइल दी। चाहत भी मुस्कुरा दी।

इधर गाड़ी में शिव जी बहुत देर तक चुप बैठे थे तब सरदार जी ने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा तो शिव जी भी फफक कर रों पड़े। सरदार जी ने कार रोकी और शिव जी का कंधा सहलाने लगे....

गर्ग गर्ल्स हॉस्टल

संतोषी नगर

रूम नं 13

शिव जी के जाने के बाद चाहत रूम आ गई थी और वहीं बेड पर लेट गई सीलिंग में लगे फैन को देखने लगी। उसे ऐसा करते हुए थोड़ा ही वक़्त आ होगा तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई चाहत बेड से उठी वो दरवाज़े के पास पहुंची और दरवाज़ा खोला उसने देखा सामने 5 लोग है जिसमें एक वृद्ध उम्र की , एक 2627 की औरत थी....जिनके साथ दो लड़के थे जिनकी उम्र लगभग 2930 उनके साथ एक लड़की थी तकरीबन 1617 साल की । चाहत को ये समझते देर न लगी कि ये उसकी रूम मेट है और उनकी फैमिली है वो दरवाज़े से हटी सारे लोग अंदर आ गए चाहत वापस अपने बेड पर बैठ गई। चाहत को देख उस लड़की ने अपना हाथ चाहत की तरफ बढ़ाया और कहा - हाए.....मै निशा .....निशा टंडन...

चाहत ने भी उससे हाथ मिलाते हुए कहा - चाहत .....चाहत सिंह.....

निशा चाहत का नाम सुन खुश होती हुई बोली - वाओ.. नाइस नेम...

चाहत बदले में मुस्कुरा दी तभी मि. गर्ग अंदर आए उन्होंने उन दो लड़कों को देख कर कहा - अरे आप यहां ऐसे नहीं रुक सकते ......चलिए नीचे....ये बोल वो उन दोनों को नीचे ले गए।

उनके जाने के बाद निशा अपना सामान निकाल कर उसे जमाने लगी तभी उस 2728 साल की लड़की ने निशा से कहा - तुम रेस्ट करो ....मै जमा देती हूं.....ये बोल उसने बेडशीट निकाल कर बेड में बिछा दी । उस बेड पर निशा और वो वृद्ध औरत बैठ गई। निशा ने उंगली से उस औरत की तरफ इशारा करते हुए कहा - चाहत ये मेरी मम्मी है.....और वो भाभी ...दोनो ने चाहत को देखा और मुस्कुरा दी बदले में चाहत भी मुस्कुरा दी। निशा ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - और जो लोग नीचे गए.....वे मेरे भैया थे.....

ये बोल निशा अपनी मम्मी की गोद में सिर रख लेट गई चाहत ने ये देखा तो उसे रीमा जी की याद आ गई उसकी आंखे में नमी ने जगह ले ली जिसे चाहत ने बड़ी ही सफाई से छुपा लिया। चाहत बस उन लोगो को देखने लगी तभी निशा की

भाभी ने निशा से कहा - सब सामान तो जम गया अब बस यही रह गया है... ये बोल उन्होंने शिव जी की मूर्ति निकल कर निशा को दिखाया।

निशा ने वो मूर्ति अपने हाथो में ली और उसके लिए कोई सूटेबल जगह ढूंढने लगी तभी उसकी नज़र चाहत के स्टडी टेबल पर गई वो उठी और चाहत की तरफ देख कर बोली - क्या मै इन्हे वहा रख दूं...

चाहत ने निशा को देखा फिर मुस्कुराते हुए हा में सिर हिला दिया। निशा ने भी मूर्ति टेबल पर रखी फिर उसने अपने हाथ जोड़ लिए।

थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद निशा मुड़ी और पीछे देखा तो उसकी भाभी और मम्मी अपना हैंड बैग पकड़ कर बेड से उठ गई थीं। उन्होंनेआज छोले और आलू की मसाले वाली सब्जी बनी थी। साथ में रोटी ,चावल , फ्राई डाल ,अचार और सलाद भी था।निशा की तरफ भरी आंखो से देखा निशा भागते हुए उनके पास आई और उसने अपनी मम्मी को गले से लगा लिया।

उसकी मम्मी ने पहले निशा के सिर पर हाथ रखा फिर उसके माथे को चूम लिया । उन्होंने निशा के गाल पर हाथ रख कर अपना ख्याल रखने को कहा । और निशा से दूर हुई इतने में

निशा अपने भाभी के भी गले लग गई। निशा की मम्मी चाहत के पास आई उन्होंने चाहत के गाल पर हाथ रखा और कहा - बेटा मुझे नहीं पता मेरी निशी रूम मेट कैसी होगी ...पर ये दिल से बहुत अच्छी है.....कोई भी प्रोबलम हुई तो तुम दोनों बात कर के सॉल्व कर लेना ..पर बिना मतलब लड़ना मत..और रूम मेट होने के नाते एक दूसरे की मदद भी करना.....

चाहत ने ये सुन मुस्कुराने लगी और हा में सिर हिला दिया। निशा की मम्मी मूड कर निशा के पास आ गई। निशा ने चाहत की तरफ देखा फिर कहा - मै इन्हे नीचे तक छोड़ कर आती हूं...चाहत ने हा में सिर हिला दिया। वो तीनो बाहर निकाल गए । अब चाहत रूम में अकेली थी दरवाज़े के बंद होते ही चाहत अपने मुंह में हाथ रख रोने लगी। उसे बस रीमा जी की याद आ रही थी। थोड़े देर रों लेने के बाद चाहत ने अपने आंसू साफ़ किए । और नॉर्मल होकर बेड पर बैठ गई।
 
कुछ देर बाद निशा ऊपर आईं और सीधे वॉशरूम में चले गई वहा जाकर निशा बाहर आई और अपना मुंह टावेल से पोछटे हुए बोली - तुम कितने टाइम यहां आई.....

चाहत - शाम 4 बजे....

निशा ने टावेल साइड में रखा फिर कहा - तुम कहा से हो...

चाहत - राजनांदगांव से और तुम..

निशा - मै दुर्ग से....

ऐसे ही दोनो बात करने लगे। दोनों ने अपने घर ,परिवार ,शहर सबके बारे में एक दूसरे को बताया । दोनों मुस्कुराते हुए बात कर रहे थे।

निशा अपने नाम की तरह ही प्यारी थी गोरी सी कंधो तक आते सीधे बाल जिसे उसने एक पोनीटेल के रूप में अपने सिर पर सजा रखा था। भूरी आंखे थी उसकी जिसे वो बात बात पर बड़ी किया करती थी।

चाहत और निशा बात कर रही थी तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई और एक लड़की मुस्कुराते हुए अंदर आई उसने निशा और चाहत को देखा फिर हाए बोला। चाहत और निशा ने भी उसे हाए कहा।

वो लड़की चाहत की ही उम्र की थी उसने अपना हाथ पहले निशा की तरफ किया और कहा - मै डॉली ..... डॉली सिंह.....

निशी ने एक नजर चाहत को देखा फिर डॉली को देख कर कहा - निशा टंडन.... दोनों ने हाथ मिलाया ।

वो थोड़े देर बाद चाहत के पास आई और उसकी तरफ हाथ बढ़ाया उसके बोलने से पहले चाहत ने कहा - हाए डॉली..मै

चाहत ...... चाहत सिंह......

डॉली ये सुन मुस्कुराते हुए बोली - अरे वाह हम तो सेम कास्ट के है.....चलो ये भी अच्छा है.....

चाहत ने ये बात सुनी फिर मुस्कुराते हुए उसने डॉली को बैठने का इशारा किया । इशारा पाकर वहीं बैठ गई।

उसने कहा - मै बालोद से हूं..... तुम दोनों कहा से हो....

चाहत ने ये सुन निशा की तरफ इशारा करते हुए कहा - ये दुर्ग से है.....और मैं राजनांदगांव से..

डॉली ये सुन खुश होते हुए बोली - अच्छा है...हमारा रूट तो सेम है...हम साथ में जाया करेंगे.....

चाहत ने उसे हा कहा। पता नहीं उसमे ऐसा क्या था जिससे चाहत को वो अपनी सी लगी। चाहत को उसकी बात मानने में देर नहीं लगी।

डॉली एक खुशमिजाज और बेहद खूबसूरत लड़की थी। उसकी आंखे चोटी थी और गाल पर तिल था उसका साफ़ रंग और घुघराले बाल उसकी खूबसूरती को बढ़ा रहा थे।

वो चाहत के पास बैठी और उससे बात करने लगी। चाहत और डॉली इतना ज्यादा प्यार से बात कर रहे थे कि लग ही नहीं रहा था वो पहली बार मिले हो।

चाहत और डॉली यू ही बात करते हुए बैठे थे तभी एक बेल बजी चाहत , निशा, डॉली तीनो उठ गए ये रात के डिनर की बेल थी। चाहत उठी और उसने कहा - लगता है डिनर टाइम हो गया.....मै कपडे चेंज कर के आती हूं...

ये सुन डॉली भी उठ गई और उसने कहा- हा मै भी आती हूं.....फिर साथ में चलेंगे ......

चाहत ने हा में सिर हिला दिया। चाहत अपने कपड़े लेकर वॉशरूम चले गई। निशा भी वहीं कपडे चेंज कर वापस आई । जब दोनो ने एक दूसरे को देखा तो मुस्कुरा दी क्युकी दोनो जब आए थे तो उन्होंने जरूरत से ज्यादा कपडे पहने थे और अब बस टी शर्ट और शॉर्ट्स पहन रखी थी दोनो ने ।

दोनों रूम से बाहर आए और रूम लॉक कर लिया दोनो ने। जब पलट कर देखा तो सामने डॉली भी टी शर्ट और शॉट्स पहन कर मुस्कुरा रही थी। पर वो अकेली नहीं थी उसके साथ एक लड़की भी थी जिसने प्लेन ग्रीन कुर्ती के नीचे व्हाइट लेगी पहन रखी थी। वो हाइट में उन तीनों से लंबी थी साथ ही वो उन तीनों से बड़ी लग रही थीं।

चाहत और निशा डॉली को आंखो से सवाल कर पूछ रहे थे। तभी उस लड़की ने अपने हाथ बढ़ाते हुए कहा - हाय मै

शिखा.... लाकड़ा..... अंबिकापुर से......तुम दोनों के बारे में डॉली ने बताया।

उसने चाहत की तरफ इशारा कर के कहा - तुम ......शायद चाहत हो...फिर निशा की तरफ इशारा कर बोली - और तुम निशा हो...

ये सुन निशा ने हैरानी के साथ कहा - वाओ.....तुम्हे कैसे पता..

शिखा ने खुश होते हुए कहा - वो ऐसे क्युकी....डॉली ने बताया था...जो गोरी है उसका नाम निशा है..और जो काली.....ये बोल शिखा रुक गई फिर बात संभालते हुए जैसे ही कुछ बोलने को हुई वैसे ही चाहत ने कहा - जो काली है वह चाहत है.. चाहत ने जैसे ये कहा तीनो उसे देखने लगे ।

चाहत ने मुस्कुराते हुए कहा - अरे मुझे ऐसे मत देखो ....जैसे खाने की जगह मुझे ही खा जाओगे..

चाहत की ये बात सुन निशा और शिखा तो हसने लगे पर डॉली वो बस चाहत को देख रही थीं जिसके आंखो में अपने रंग को लेकर ज़रा सी भी असहजता नहीं थी। डॉली ये देख मुस्कुरा दी फिर उसने कहा - अरे चलो भी...नहीं तो खाना बचेगा नहीं.....

तीनो ने हा में सिर हिलाया और चलते हुए सेकंड फ्लोर में आ गए।

जहां एक बड़ा सा हॉल था जिस पर एक बड़ा सा टेबल रखा था और उसके इर्द गिर्द चेयर रखे थे। हालाकि ये एक प्राइवेट हॉस्टल था फिर भी बाकी हॉस्टल की तरह यहां पर भी मेस की सुविधा थी और सभी को एक साथ खाना खाना पड़ता था। चाहत, निशा, डॉली और शिखा चारो उस टेबल के पास आ गए।
 
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