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Romance चाहत

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चाहत

लेखिका_यामिनी_नेताम

‌स्टेशन में...

उसके सारे घर वाले उसे छोड़ने आए थे। आज से उसे नया सफर शुरू करना था मम्मी ने उसे कुछ हिदायत दी थी और अपना ख्याल रखने को कहा।

वहीं भाई आज भी उसे परेशान करने का बहाना बना उसके साथ कुछ खूबसूरत पल बिता रहा था । आखिर यही तो वो पल है जिन्हे याद कर सकेगा उसके ना होने पर..

एक हाथ से अपने पापा का हाथ थामे वो ट्रेन की सीट पर बैठ कर वो बाहर का नजारा देख रही थी तभी उसकी नज़र सामने खड़ी उस बच्ची पर पड़ी जो स्कूल बेग लिए खड़ी थी और बैठने के लिए जगह ढूंढ रही थी।

उसने उसे अपने पास बुलाया और नाम पूछा उसने प्यार से

जवाब दिया " नियति" उसे उसने अपने पास बिठाया और बोली कौन सी क्लास में हो..

नियति ने कहा - 9th

ये सुन कर वो उन पलों को याद करने लगी जब उसे भी नई कक्षा में जाना था और वो हमेशा की तरह अपनी मम्मी के आगे पीछे घूम कर उनको छोटी बनाने की कह रही थी।

राजनांदगांव, छत्तीसगढ़

पुलिस लाइन..

वो - मम्मी..देर हो जायेगी.. कर दो ना चोटी..

मम्मी - हा.. अा कर देती हूं.. तुम्हारी चोटी.. हे भगवान पता नहीं कब खुद से चोटी बनाना सीखेगी.. कब तक मै तुम्हारी चोटी करती रहूं.. खुद सीख लो बेटा..

वो - मम्मी क्या करू.. मेरे बाल ही इतने लंबे है.. की मै खुद चोटी कर ही नहीं पाती.. क्या करू.. अगले साल से खुद से कर लूंगी.. आज आप कर दो प्लीज़..

उसके इतना प्यार से बोलने पर मम्मी मान गई और उन्होंने उसकी चोटी बना दी । चोटी बन जाने के बाद उसने खाना खाया और निकाल पड़ी अपने स्कूल के लिए।

ऐसा नहीं था कि वो आज पहली बार स्कूल जा रही थी और आज उसकी शिफ्ट बदल गई थी।

जहा उसे पहले सुबह स्कूल जाना पड़ता था अब उसे दोपहर को स्कूल जाना पड़ रहा था उसे इस बात की खुशी थी वो अपना साइकिल पकड़े स्कूल पहुंची और फिर साइकिल स्टैंड पर खड़ी कर स्कूल पहुंची ।

आदर्श विद्या मंदिर..

राजनांदगांव..

तभी किसी ने उसे आवाज दी.. "चाहत"

यही नाम था उसका चाहत , दिखने में छोटी सी दो चोटी गूथे हुए सिर के बीच एक हेयर बैंड लगाए। छोटी छोटी आंखे , छोटी सी गोल नाक , होठ मीडियम साइज के, इन्द्रधनुष जैसे

भावों के बीच छोटा सा तिल , जो खूबसूरत तो नहीं था पर ये ही वो तिल था जो उसके चेहरे की रौनक था, जो उसे दूसरो से सुंदर नहीं पर अलग जरूर बनाता था , साथ ही उसके साथी था उसका सवाला रंग..

चाहत ने उसे देखा वो उसकी दोस्त काजल थी। अब आते है काजल पर ..

तो दिखने में काजल, चाहत से ज्यादा सुंदर थी.. गोरा रंग , पतले होठ, बड़ी बड़ी आंखें आई और उठा हुआ माथा.. और उस माथे और आते उसे छोटे कटे हुए बाल.. ।

काजल - कहा थी..कब से तेरा वेट कर रही थी..

चाहत - अरे यार सॉरी.. मम्मी ने चोटी ही लेट की .. तो लेट हो गया।।

काजल - चल कोई ना.. आज नए क्लास में जाना है.. और डे शिफ्ट वालो को भी तो देखना है.. ना कैसे है वो सब ..

चाहत - कैसे होंगे .. इंसान की तरह होंगे.. तू भी ना.. चल अब जल्दी ..

काजल - ठीक है..

दोनो क्लास में चले जाती है वागा पर उसकी बाकी सहेलियां होती है जो उनका वेट कर रही होती है साथ साथ कुछ नए लडके और लड़कियां उनको देख रही थीं

पर वो दोनो तो एक दूसरे में बिजी थी जब दोनों साथ होती तो किसी का डर नहीं होता था उन्हे और थी भी वो टॉपर काजल और चाहत हमेशा साथ रहती थी।

साथ में पढ़ाई करना , एक साथ धुमना सब साथ करती थी। दोनो की दोस्ती को देख कर सब कहते थे उस को भी ऐसा दोस्त चाहिए पर ऐसा तो होने से रहा वो तो अलग थी और उनकी दोस्ती भी अलग थी।

जहा काजल पर उसकी खूबसूरती के नाम पर लोग मारते थे वहीं चाहत की पढ़ाई और अच्छे नेचर ने क्लास में अलग जगह बनाई थी जो बस उसकी थी ।

जहा काजल कर पीछे लडको की लाइन लगी रहती थी ताकि वो अपना नंबर दे दे।

वहीं चाहत से लोगो को दोस्ती इसीलिए करनी था ताकि वो उनकी पढ़ाई में मदद करें।

ऐसा नहीं था लोग बस पढ़ाई के लिए इसके साथ थे बहुत सारी चीजे में वो अलग थी उसका किसी भी बात को समझना , अपनी राय देना, सभी की परेशानियों को समझना और उनकी हेल्प करना ये सब उसके गुण थे।

चाहत की हर अदा दूसरो से जुदा थी उसके यही गुण उसे दूसरो से अलग बनाते थे।

आज उनके क्लास की प्रयेर टर्न थी सब ग्राउंड में इक्कठे हुए थे काजल , चाहत मानसी तीनो प्रेयर करने लगी वो डे शिफ्ट में नई थी तो सबकी नजर उन पर थी।

काजल को इस सब की आदत थी तो वो ध्यान नहीं दे रही थी वहीं चाहत वो तो कभी ऐसा सोचती भी नहीं थी कि कोई उसे देख रहा है वो बस यही सोचती थी जो सुंदर होता है लोग उसे ही देखते है जो कि वो नहीं थी। तो उसे कौन देखेगा..

प्रेयर ख़तम कर वो वापस क्लास अा गए। क्लास स्टार्ट हुई फिर टीचर का आना हुआ जो कि सर थे। जिनको चाहत और काजल पहले आए ही जानते थे।

आते ही उन्होंने सबसे पहले तो क्लास में सभी को सही से बैठने को कहा और रोल न. के हिसाब से उनको बैठा दिया गया। जहा पर चाहत के बगल में एक लड़का बैठा वहीं काजल उसकी बगल में बैठ गई और उसके साथ उसकी क्लास मेट बैठ गई। पर दोनो के बेंच साथ होने से उनकी ज्यादा बाते हो रही थी और चाहत भी काजल से ही बात कर रही थी।

तभी उसने अचानक अपनी नजर घुमाई तो उसकी साथ बैठा लड़का उसे ही देख रहा था उसे लगा काजल को देख रहा होगा यही सोच उसने उसे देखना बंद कर दिया और चुपचाप क्लास में पढ़ाई करने लगी।
 
लंच के टाइम क्लास में सब एक दूसरे से जान पहचान बढ़ा रहे थे कि तभी सर ने क्लास में अा गए। उन्होंने कहा - हमे क्लास के कैप्टन चुनना है.. तो मै परसेंटेज को देखते हुए काजल और चाहत को क्लास कैप्टन चुनता हू।

किसी ने कुछ नहीं कहा बस हा में अपना सिर हिला दिया। पर चाहत ने कुछ लड़कियों को कहते हुए सुना था कि पहले तो वोटिंग होती थी। अब तो नंबर देख कर ही कैप्टन बना दिए..ऐसा थोड़े ना होता है।

काजल खुश थी पर जब उसने कुछ लड़कियों को ये सब कहते सुना तो वो चाहत के पास आई और उसने कहा - ये लोग ऐसे कैसे बोल सकते है..??

चाहत ने बिना किसी भाव के कहा - उनका भी कहना सही है.. ऐसे कैसे वो किसी को भी कैप्टन मान ले..अभी वो हमे जानती हो कितना है।

काजल - फिर भी यार सोचना चाहिए..अगर सर ने कहा है तो कुछ सोच कर ही कहा होगा.. और अगर प्रॉबलम है तो और सर से कहे.. या फिर हमसे बात करे..

चाहत - एक काम करते है हम इस बारे के सर से बार करते बई..

काजल - और हम उनसे क्या बोलेंगे..

चाहत - यहीं की वोटिंग कर ले..और फिर सिलेक्ट कर ले।

काजल - बिल्कुल नहीं..

चाहत - क्यों..

काजल - क्युकी वो तुझे कैप्टन नहीं बनने देंगे.. और शायद तू हार जाए..

चाहत - ऐसा नहीं होगा.. चल सर से बात करते है..

ये कहते हुए दोनो सर के केबिन की तरफ चले गए।

उन्होंने ध्यान नहीं दिया कि दो जोड़ी आंखे उनके पीछे ही चल रही थी।

सर का केबिन

चाहत और काजल - मे आईं कम इन..

सर - अरे चाहत और काजल, आओ ना.. तुम दोनों एक साथ क्या हुआ..

चाहत - सर हम चाहते है कि क्लास में वोटिंग हो और फिर आप क्लास कैप्टन चुने।

चाहत ने बिना किसी भाव के सीधे अपनी बात कह दी। ऐसी ही थी चाहत , बातो को चाशनी में डाल कर बात करना उसे आता ही नहीं था। अपनी बातो को सीधे कहना पसंद था उसे...

सर ने उसे देखा फिर कहा - तुम लोग ये बात अभी क्यों कह रहे हो..वहीं कहना था ना ..

काजल जो कब से चुप थी उसने एकदम से कहा - सर क्लास के लोग कह रहे है कि ये गलत है वो अपने क्लास का

कैप्टन खुद चुनेंगे । ऐसे आप अपने डिसिशन उन पर थोप नहीं सकते । वहा हुई सारी बाते काजल ने नमक मिर्च लगा के सर को बता दी ये सुन चाहत ने अपना हाथ सिर पर दे मारा।

वहीं सर ने कुछ सोच कर कहा - चलो क्लास..

थोड़ी देर बाद क्लास में..

सर - चाहत और काजल सामने आओ..

दोनो चुप चाप सामने चले गई

सर ने कहा - काजल चलो बताओ पिछले साल तुम्हारे परसेंट कितने आए थे।

काजल - 95%

फिर यही सवाल जब चाहत से पूछा गया तो चाहत ने कहा - 94.7%

अगला सवाल सर ने फिर से चाहत से किया - तुम दोनों कब से क्लास कैप्टन बनती आई हो..

चाहत ने धीरे से कहा - क्लास वन से..

ये सुन सर ने क्लास वालो को देख कर कहा - तुम सबने इतनी आसानी से कह दिया.. की तुम सब को इनका कैप्टन बनना पसंद नहीं.. ये तब से क्लास संभालती अा रही है जब

से तुम लोगो को क्लास कैप्टन का मतलब भी पता नहीं था.. तुम लोग बिना सोचे समझे इन दोनों को कुछ भी बोल रहे हो.. आज से ये दोनों कैप्टन है .. किसी को कुछ कहना है तो कह सकता है अभी..

किसी ने कुछ नहीं कहा तो फिर एक आवाज़ गूंजी - मुझे कुछ कहना है .. सब ने उस ओर देखा ये चाहत थी जो बोल रही थी उसने कहा - सर सभी वोटिंग चाहते है तो क्यों हम उनको रोक, उनको भी हक है अपना कैप्टन चुनने का।

चाहत की बात सुन सर ने पहले चाहत को देखा फिर क्लास की तरफ देखते हुए कहा - ठीक है तो वोटिंग करते है।

चाहत के कहने के बाद वोटिंग हुई और साथ में दो और लोग भी शामिल हुए जिनमें मानसी और सुलेखा रही । ये दोनों वहीं थी जिन्होंने कहा थी कि ये गलत गो रहा है।

सर ने सब को अपने बारे में बताने का मौका दिया और कहा कि वो क्लास में किस तरह से कैप्टन बनने के लिए सही है ये बताए।

मानसी - मै मानसी देव, मैंने कभी कैप्टन कि जिम्मेदारी नहीं ली.. पर मै आप सभी को यकीन दिलाती हूं कि मै अपना

काम बखूबी निभाऊंगी..

सुलेखा - हेल्लो एवरीवन आई एम् सुलेखा। मै पिछले साल भी कैप्टन थी और सभी चीज़े अच्छे से की थी और साथ ही मुझे लगता है कि इस साल भी मै अच्छे से ये काम कर लूंगी ..

काजल - मै काजल व्यास जैसा कि सर ने कहा.. मै और चाहत शुरू से ही कैप्टन कि सारी जिम्मेदारियों को संभालते आए है.. और हम आपको निराश नहीं करेंगे..

अब चाहत की बारी आई तो सब उसे देखने लगे। चाहत ने कहना शुरू किया - मै चाहत , चाहत सिंह मै पहले कई साल से कैप्टन थी.. साथ ही मेरी फ्रेंड काजल भी .. पर शायद आप सभी हमे नहीं जानते । मै अपनी तारीफ नहीं करूंगी मै आप सबके सामने वैसे ही रहूंगी जैसे अभी हूं ये बस एक जिम्मेदारी है.. जो मुझे उठाने के लिए आप सब की जरूरत होगी अगर आपको लगता हो की मै ये जिम्मेदारी उठा सकती हूं तो हो आप मुझे चुने..

काजल और चाहत शुरू से ही उसी स्कूल में थे। पर वो मॉर्निंग शिफ्ट में होने के कारण डे शिफ्ट वालो को उनके बारे

में ज्यादा पता नहीं था । पर उनके चर्चे सब ने सुन रखे थे वो पढ़ने में और बाकी एक्टिविटी में बहुत अच्छी थी।

फिर स्टार्ट हुआ वोटिंग का सिलसिला। अब तक सर ने सारे वोट गिन लिए थे फिर वो क्लास आते और वहा उन्होंने बताया कि सुलेखा - 10

काजल - 17

और चाहत को -33

वोट मिले है। जिसे सुन कर सबने तकिया बजाई जिनमें वो आंखे भी थी जिसने किसी की मासूमियत देख अपने होश खो दिए थे।
 
आज की पढ़ाई ख़तम हो जाने के बाद सब क्लास से निकल रहे थे। तभी किसी ने चाहत के कंधो पर हाथ रखा तो देखा अरे ये तो सुलेखा थी सुलेखा गोरी और पतली थी और लंबी थी। काफी सुलझी हुई थी क्लास में जो बाते हुई थी वो सुलेखा ने बस बचपने में कि थी जिसके लिए वो चाहत के पास आती है।

सुलेखा - सॉरी चाहत और काजल मैंने जो भी कहा वो गुस्से में कहा मेरा वो मतलब नहीं था ।

चाहत - इट्स ओके, कोई बात नही हो जाता है हमे बिल्कुल बुरा नहीं लगा।

तभी पीछे से काजल - और नहीं तो क्या हमे पता है कि तुम बस समझ नहीं पाई हमें कोई बात नही धीरे धीरे समझ जाओगी।

सुलेखा - फिर भी मैंने जो कहा अगर तुम्हें बुरा लगा हो..... वो कह ही रही थी तभी काजल ने कहा अरे यार तुम भी ना सेंटी हुई जा रही हो यार चिल ना।

चाहत - वैसे हमे एक बात बहुत बुरी लगी चाहत ने मुंह फेरते हुए कहा

सुलेखा के चेहरे पर टैंशन आ गई उसने पूछा

क्या?

इस पर काजल ने भी चाहत को देखा जहां तक उसे पता था चाहत अगर ये बोल रही है तो जरूर कोई बात है पर वो समझ नहीं पा रही थी

फिर चाहत ने कहा- ये कि तुम हमें बधाई देने नहीं आयी और हसने लगी

इस पर काजल ने कहा हा बात तो सही है।

फिर काजल और चाहत हाथ बढ़ाते हुए दोनो एक साथ बोले " फ्रेंड्स" पर दोनो ने एक दूसरे को देखा फिर सुलेखा की तरफ़ देखा जो उनको देख कर कुछ सोच रही थी फिर उसने अपने दोनो हाथों से उन दोनों के हाथ को जोड़ते हुए हा में

सर हिलाया।

फिर तीनों मुस्कुरा दिए और एक दूसरे से गले मिलते हुए मेन गेट की तरफ चले गए जहा पर सुलेखा ने दोनो को बाय कहा और अपने घर चले गई ।

काजल और चाहत साथ जा रहे थे रोज़ के मुकाबले आज काजल शांत थी और चुपचाप चल रही उसकी ये चुप्पी देख

चाहत - तु जो सोच रही है वैसा कुछ नहीं होगा ।

काजल - मै.... मै कुछ नहीं सोच रही तु भी ना।

काजल और चाहत साइकिल स्टैण्ड की तरफ बढ़ गए दोनो ने साइकिल निकली फिर काजल साइकिल निकाल रही थी वो आगे बढ़ ही नहीं रही थी तो उसने कुछ देर बाद देखा तो उसने लॉक खोला ही नहीं था अपने सर पर चपेट लगा वो चाबी लगा कर लॉक खोलने लगी वो एक बार में जल्दी से लॉक खोल कर जाने को हुई तब चाहत ने उससे पूछा।

चाहत - गुपचुप खाएगी।

काजल खुशी से - हा.....नेकी ओर पूछ पूछ।

दोनों गुपचुप वाले भैया के पास गए जहा उन्होंने गुपचुप खायी और वो दोनों घर की तरफ बढ़े एक चौक जहा पर दोनो को अपने अपने घर की तरह मुड़ना था वहा काजल को

चाहत ने आवाज़ दी ।

चाहत - सुन

काजल - हा

चाहत अपने साइकिल को स्टैंड पर रख कर काजल के पास जाती है और उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर कहती है।

चाहत - मैंने क्लास में लगभग सभी से दोस्ती की है पर मेरी बेस्ट बडी तो तू हैं ना तेरी जगह कोई नहीं ले सकता। फिर उसने उसके गाल को छू कर कहा.....मै तुझे छोड़ कर कभी भी नहीं जाऊंगी।

काजल को उसकी बात सुन रही थी अचानक से रो पड़ी और बोली - मेरा वो मतलब नहीं था मुझे बस तुझे खोने का डर था।

चाहत - हा अब मै तो हूं ही खास। ये कह कर दोनों हस पड़ी। चाहत ने प्यार से कहा मिस्टी मै तेरी माही हूं तुझे कभी नहीं छोडूंगी । काजल ने हा में सर हिलाया तो

चाहत ने कहा - ओहो छोड़ भी दें अब कोई देखेगा तो क्या सोचेगा ।

दोनों एक दुसरे से दूर हुई और घर की तरफ चल दी।

कुछ ऐसी दोस्ती थी दोनो की बिना एक दूसरे से बात किए भी एक दूसरे की हालत समझ जाते थे। चाहत को ये बात उस टाइम समझ आई जब काजल साइकिल के लॉक को ओपन नहीं कर पा रही थी और काजल ऐसा तब ही करती थी जब उसे कोई बात परेशान के रही हों।

दोनों में बहुत प्यार था इसीलिए दोनो एक दूसरे को मिस्टी और माही कह कर बुलाते थे ।

इसकी शुरुआत चाहत ने कि थी फिर काजल ने भी उसे माही बोलना शुरू कर दिया।

चाहत घर पहुंची वहां अपनी साइकिल रख वो अपने क्वार्टर आ गई।

ये एक पुलिस क्वार्टर था सही सोचा अपने चाहत के पापा पुलिस में थे जिस कारण वो ज्यादा घर पर नहीं रहते थे उनकी पोस्टिंग बार बार बदलती रहती थी इस कारण वो कभी भी उसके साथ नहीं रहते थे उस क्वार्टर में दो कमरे एक हॉल और किचन के साथ बालकनी भी थी जो कि एक कमरे से जुड़ी हुई थी और वो कमरा था चाहत का इस कमरे को उसने बड़े ही प्यार से सजाया था ज्यादा आमदनी ना होने पर भी चाहत के पापा ने कभी भी उसे कोई कमी नहीं होने दी थी पर उनकी हर जरूरत को पूरा करने के लिए उन्हें उससे दूर रहना पड़ता था पर अब काम भी जरूरी था तो वो दूर थे। फिर भी चाहत और उसके पापा दोनो एक दूसरे के बेहद करीब थे घर में चाहत अपनी मा और छोटे भाई आर्यन के साथ रहती थी आर्यन चाहत से 3 साल छोटा था दोनो भाई बहन एक दूसरे पर जान छिड़कते थे और लड़ाई भी बहुत करते थे पर फिर भी उनके रिश्ते में प्यार बहुत था।

आर्यन चाहत से हर बात करता था अपनी हर मुश्किल को बताता था वहीं चाहत भी उसकी हर बात गौर से सुनती पर अपनी राय देती।

चाहत घर पहुंची तो पाया कि घर के बाहर कोई सैंडल पड़ा है जो किसी भी एंगल से उसकी मा का नहीं लग रहा था वो अंदर आती है तो देखती है उसकी मा किसी औरत के साथ बैठी है जो दिखने मै उनकी हम उम्र थी

मा चाहत को देख कर - चाहत बेटे ये संगीता आंटी है मेरी बचपन की दोस्त

चाहत - नमस्ते । कह कर दोनो हाथ जोड़ लिए।

उसने फिर मम्मी को कहा। मम्मी मै फ्रेश हो कर आती हूं और बाथरूम में चली गई।

इधर मम्मी ने चाहत की तारीफों के पुल बांधना स्टार्ट कर दिया।

रीमा जी(चाहत की मम्मी) - हमारी चाहत तो बहुत प्यारी है घर का सारा काम कर लेती है, खाना भी बना लेती है और पढ़ाई में भी बहुत अच्छी है हमेशा फर्स्ट आती है।

संगीता जी -बिल्कुल तेरी तरह पर यार बस गोरी होती तो बिल्कुल तेरी तरह होती ।

ये सुन रीमा जी की चेहरे की रौनक थोडी कम हो गई।

तभी चाय लेकर चाहत आती है और सब को चाय देकर वापस अपने कमरे में आ गई। रीमा जी संगीता जी से बात

करते रही और थोड़े देर में वो चले गई।

यहां रूम में चाहत अपनी नोट बुक निकाल कर उसमे मैथ्स के क्वेश्चन सॉल्व कर रही थी

मम्मी हर बार की तरह रूम में आती है और चाहत से बोली चाहत बेटा आज क्या बनाऊं।

चाहत - क्या क्या सब्जी है?

मम्मी - गोभी ,पत्तागोभी ,शिमला मिर्च, गाजर, और वो बोल ही रही थी तभी चाहत ने एकदम से कहा शिमला मिर्च। चाहत की बात सुन मम्मी के चेहरे पर मुस्कान आ गई और वो मुस्कुराते हुए किचन में चले गई।

चाहत दोबारा अपने नोट बुक में देखने लगी तभी उसकी दाईं आंख से आंसू की एक बूंद गिरी और उसने नोट बुक के उस पन्ने को पर पढ़ उस पन्ने को गीला करने लगे। बस यही कम थी चाहत उसे बचपन से ये सब सुनना पड़ा था वो हर बार खुद को समझती पर हर बार वो टूट जाती कभी कभी वो भगवान से पूछती थी उनको क्या जरूरत थी दो रंगो के लोग बनाने की क्यु उसे हर बार खुद को साबित करना पड़ता है क्यू सब उसे घृणा की या फिर दया की नजर से देखते है। आखिर क्यों उसे हमेशा अलग ट्रीट किया जाता है। क्या उसे कोई हक नहीं की वो नॉर्मल तरह से जी सके।

ये सवाल उसे परेशान करता क्यू रंग के नाम पर लोगों को

तोला जाता है क्या उसका अच्छी तरह रहना और एक अच्छा इंसान होना काफी नहीं था। हर किसी को खूबसूरती के नाम पर ही जज किया जाता है क्यू उसकी काबिलियत देखने से पहले लोग उसका सावला रंग देखते है आखिर क्यों.....?

इस सब विचारो को लिए बैठी की तभी दरवाज़े के बजने की आवाज़ आती हैं उस आवाज़ को सुन चाहत के चेहरे पर मुस्कान आ गई...... ये कोई और नहीं उसका भाई आर्यन था जो खेल कर आ रहा था बड़े ही स्टाइल के साथ सोफे पर बैठ कर सिटी बजाते हुए अपने जूते खोल रहा था।बस उन जूतों को दोनो हाथों में पकड़ कर फेकने ही वाला था तभी उसके नज़र दरवाज़े पर खड़ी उसकी मम्मी पर पड़ी जो कि उसे देख रही थी उनकी ख़तरनाक आंखो और हाथ में पकड़े बेलन को देख आर्यन को याद आया कि वो घर पर है उसने मम्मी को अपनी हे हे करती हुई स्माइल दी और फिर जूतों को उठा कर शू रेक में रख कर चुपचाप बाथरूम में चला गया।

वहा से हाथ मुंह धोकर वापस आ गया फिर वह चाहत के साथ बैठ कर अपना होमवर्क करने लगा।

आर्यन छठवीं में था दिखने में बिल्कुल चाहत की तरह बस उसके माथे पर तिल नहीं था चाहत के लिए दो लोग थे जो

उसे सुकून देते थे एक उसके पापा और एक उसका ये शैतान भाई जो कि उसके सामने मासूम बन होमवर्क कर रहा था।

कुछ देर में चाहत का होमवर्क कंप्लीट हो गया और वो उठने लगी तो आर्यन ने उसे हाथ पकड़ कर रोक लिया और नोटबुक उसकी तरफ बढ़ा दी ये देख चाहत मुस्कुराई और उसकी नोटबुक को देख उसे समझ आ गया कि उसे उसकी मदद चाहिए चाहत वापस बैठी और आर्यन की मदद करने लगी ये सब करते हुए उसे तकरीबन एक घंटा लग गया था।

मम्मी ने उन दोनों के रूम में जाकर उनसे कहा पहले कुछ खा लो फ़िर पढ़ना साथ में चाय और नमकीन रख कर चले गई । कुछ देर में दोनो ने नाश्ता ख़तम किया और फिर पढ़ाने लगी वो पढ़ा लेने के बाद नाश्ते का बर्तन उठा वाशबेसिन की तरफ चले गई और उसने बर्तन साफ़ किए और चले गई अपना सीरियल देखने

"दीवाने हम"

ये नाम था उस सीरियल का जिसे आधा घंटा देख वो खुश हो जाती ये वो सीरियल था जिसे देख वो आगे के सपने बुनने लग जाती क्यूकी कहीं ना कहीं उसे ये लगता था कि जैसे सीरियल में सब सही हो जाता है वैसे ही उसकी जिंदगी में भी

सब सही होगा लोग जैसे सीरियल में लड़की के गुण देखते है वैसे ही लोग उसके गुणों को भी देखेंगे... जैसे सारी खूबसूरत लड़की को छोड़ हीरो बस हेरोइन को देखता है जो सिम्पल सी होती है उसे भी कोई ऐसा हो मिलेगा ,,,, और वो भी हर परेशानी से लड़ अपने सपनों को पूरा कर लेगी बस इसीलिए वो ये सीरियल देखा करती थी।

आज उस सीरियल में हीरो हेरोइन को चोर नजरो से देख रहा था और हेरोइन को लगा वो किसी और को देख रहा है तभी उसे भी क्लास वाला किस्सा याद आ गया जब वो लड़का उसे देख रहा था एक पल के लिए उसे लगा कि कहीं उसे ही तो नहीं देख रहा ये सोच कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गईं फिर उसने सोचा शायद उसे गलत फहमी हुई है ...... तभी मम्मी की आवाज़ आती

बेटा चाहत पानी निकाल दे और प्लेट्स लगा दो मै खाना ले कर आ रही हूं।

चाहत - हा मम्मी।

चाहत आर्यन के पास गई उसने पूछा होमवर्क हुआ उसने हा में सर हिला दिया उसने फिर धीरे से अलमारी का दरवाज़ा खोला । वहा एक छोटे से बेग में चाकलेट थी जिसमे से एक

उसने आर्यन को दिया और एक खुद खाकर मम्मी के साथ किचन में आ गई ये चॉकलेट उसे उसके पापा ने दी थी जिसका यूज वो आर्यन को होमवर्क करवाने में करती थी क्युकी आर्यन बस चॉकलेट के नाम से ही होमवर्क करता था कुछ देर बाद आर्यन भी आ गया । सबने मिल कर खाना खाया और चाहत बर्तन उठा कर उसे साफ़ कर रैक में रखने लगी बर्तन साफ होने के बाद वो अपने रूम में आ रही थी तभी आर्यन की आवाज़ आती है दी जल्दी आओ पापा की कॉल आई है। सब छोड़ चाहत पापा से बात करने जाती है।

चाहत जहा थी वहा से भागते हुए आयी मोबाईल के कर पापा से बात करने के लिए गई

शिव (चाहत के पापा)- हेल्लो।

चाहत - प्रणाम पापा।

शिव जी - कैसे हो बेटा कैसा रहा आज का दिन ।

चाहत - अच्छी हूं और आज का दिन भी अच्छा था।

शिव जी- तुमने खाना खाया ??

चाहत - हा और अपने ?

शिव जी - हा मैंने भी

चाहत - आप कब आओगे ।

शिवजी - बहुत जल्दी।

इसी तरह चाहत ने अपने पापा से कुछ देर बातें की फिर वह सोने के लिए चली गई।
 
बिस्तर पर लेटे हुए उसने अपना मोबाइल चेक किया उसके पास एक ही कीपैड मोबाइल था जिसका इस्तेमाल वह अपनी दोस्त काजल से बात करने के लिए करती थी यह एक नॉर्मल सा मोबाइल था जिसे चाहत की पापा ने उसे दिया था जिसका यूज वह मम्मी के ना रहने पर भी करती थी उसकी मम्मी एक हाउसवाइफ थी जो पापा के ना रहने पर घर की सभी कामों को करने के लिए जब बाहर जाती थी तो वह उस मोबाइल का इस्तेमाल उनसे बात करने के लिए करती थी और साथ-साथ उसने नंबर काजल को ही दिया था क्योंकि उसे ज्यादा लोगों से काम नहीं होता था जिससे उसे काम होता था वह उसी को ही अपना नंबर देती थी पर वह इस बात से अनजान थी की उसका नंबर क्लास की सभी लड़कियों के पास है।

चाहत ने अपना मोबाइल देखा उस पर मिस्टी नाम से मैसेज फ़्लैश हो रहा था चाहत ने उसे ओपन किया और उसमें मिस्टी का मैसेज था जिस पर वह उसे याद दिला रही थी की कल उसे अपने साथ कुछ पैसे लाने हैं जिससे वह चॉकलेट खरीद सकें।

चाहत और काजल दोनों की एक आदत थी जब भी वह

क्लास की कैप्टन चुनी जाती तब वह अपने सारे क्लास वालों को चॉकलेट देती थी।

इस बात को हुए तकरीबन 8 साल हो चुके थे यह आदत उसे उसके पापा ने दिलाई थी उन्होंने ही उसे बताया था की खुशियां बांटने से बढ़ती है और यह बात उसने काजल को भी बताया फिर दोनों साथ में यह काम करने लगी काजल ने जो कहा उसे याद रखते हुए चाहत सो गई

अगली सुबह 7:00 बजे काजल उठी और अपनी मोबाइल से चाहत को मैसेज किया गुड मॉर्निंग के साथ उसे यह बात याद दिलाई की उसे कुछ पैसे लानी है और सेंड कर दिया। चाहत की नींद हमेशा की तरह काजल की मैसेज से खुली उसने मैसेज देखा और स्माइल के साथ उठी और फिर अपने बिस्तर से कुछ दूरी पर दूसरे बिस्तर पर सो रहे आर्यन को उठाया और फिर उसे फ्रेश होने को भेज दिया चाहत ने अपने बिस्तर को सही कर सारी चीजें जैसे की चादर तकिया और उसका प्यारा टेडी बियर सभी चीजों को एक जगह या यूं कहें सही जगह पर रखा और फिर अपने रूम और अपने घर को साफ करने लगी घर साफ हो जाने के बाद उसने टाइम देखा घड़ी अभी 7:30 मिनट का समय बता रही थी वह उठी और जल्दी से दूध गर्म करने के लिए फ्रिज खोला और गैस में दूध चढ़ाकर मुड़ी देखा सामने से उसकी मम्मी नाश्ता बना रही थी चाहत ने उन्हें गुड मॉर्निंग कहा और दूध उबालने लगी फिर

उसने दूध को उतार कर ग्लास में लिया और बाहर भागी देखा आर्यन बस जन को था तभी उसने उसे दूध का ग्लास दिया और पीने को कहा वो दुध पीकर बाए बोल कर स्कूल चला गया ।

घर का काम खत्म कर वो स्कूल के लिए रेडी हुई और खाना खा कर स्कूल के लिए निकाल पड़ी जैसे ही वह चौंक के पास पहुंची वहा काजल उसका पहले से इंतज़ार कर रही थी। वहा के पास के दुकान उन दोनो ने चॉकलेट ली और स्कूल गए।

क्लास में सब क्लासेज हुई और लंच हुआ।

काजल और चाहत ने सब को चॉकलेट दी फिर सब का नाम पूछ कर बात करने लगी।चाहत ने देखा कि अंश को जो काजल कोही देख रहा था काजल जहा इन सबसे बेखबर अपने ही दुनिया में थी वहीं अंश उसे देख मुस्कुराए जा रहा है ।

चाहत के ये बात समझते देर न लगी कि अंश काजल को पसंद करने लगा है। वो मुस्कुराते हुए अपनी सीट पर बैठ कर अपना काम करने लगी पर दूसरों को देखने में वह इतनी बिज़ी हो गई के उसे भी कोई प्यार भरी नजरो से देख रहा था पर कौन?

वो किसकी आंखे थी जो चाहत को देख रही थी ...

ये कोई और नहीं अध्यन शर्मा था जो चाहत को बड़े प्यार से देख रहा था उसे वो कल से प्यारी लग रही थी । जब वो स्कूल आया उसके साइकिल के जस्ट सामने वो अपनी साइकिल रख रही थी उसकी वो लम्बी दो चोटी जो कमर तक थी वो छोटी छोटी आंखे जिस पर मासूमियत थीं। ऐसी मासूमियत उसने कभी नहीं देखी थी ये मासूमियत ही उसे उसकी ओर खींच रही थी वरना लड़कियों को बस बहन कि नज़र से देखने वाला अध्यन उसे ऐसे क्यों देखता।

ऐसा नहीं था कि उसे लड़कियों से परेशानी थी पर उसका दिल जिसे देख के धड़के ऐसा कोई नहीं था।

अध्यन सब भूल कर उसे देख रहा था वो साइकिल को रख अपने दोनो लंबी चोटी को एक साथ दाए और बाए तरफ कर

ठीक कर रही थी। फिर वो वहा से मेन गटे पर गई।

वहा जाकर उसने गेट के पास देखा और शायद किसी को ढूंढ रही थी उसकी टाईट चोटी होने के कारण कुछ छोटे बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे जो उसकी मासूम आंखो को परेशान कर रहे थे और वो बड़े प्यार से उसे हटा रही थी जब उसके माथे से वो बाल हटे तो उसने देखा उसके माथे पर देखा एक,... एक काली बिंदी जैसा कुछ है पहले तो उसे समझ नहीं आया कि ये बिंदी है या फिर कुछ और पर जब उसने माथे पर आते पसीने को पोछा तो उसने देखा कि वो बिंदी वहीं पर तब उसे पता चला कि वो तिल है ।

हाय ये तिल ये कह के उसने दिल पर हाथ रख लिया वो गोरी नहीं थी उसे खूबसूरती के लिए रंग की नहीं जरूरत नहीं थी वो तो उसकी मासूम आंखो से ही खूबसूरत लग रही थी । वह उसकी आंखो को ही देख रहा था उसकी होठ थोड़े से बड़े थे। उसकी गोल थोड़ी सी दबी नाक उसके गोल चेहरे को और भी खूबसरत बना रहे थे । छोटी सी तो थी वो पर बड़े से बेग को पकड़ के चल रही थी।

पता नहीं क्यू अध्यन को उसे और जानने का मन कर रहा था । वो उसे देख ही रहा था और ऊपर देखते हुए कहा कि काश इसका नाम पता चल जाए सच में भगवान अपना खून भी दे दू आपको। तभी वो अपने साइकिल की लॉक को बंद कर रहा था । उसका हाथ अचानक से काट गया घाव गहरा नहीं

था पर खून थोड़ा सब रिसने लगा ये देख अध्यन ने कहा ले लिया ना खून अब तो नाम बता दो मेरी चाहत का।

तभी पीछे से आवाज़ आती " चाहत " वो पलट गई और साथ में पलटा अध्यन जिसे नाम सुन कर पता नहीं क्या मिला वो खुशी से दोनो हाथ उठा कर नाचने लगा और उसकी पिंक साइकिल को देख कर खुश हुआ जा रहा था।

आस पास के लोग उसे देख रहे थे । अचानक उसकी नजर उन पर पड़ी तो वो चुप हुआ और स्कूल के साइड भाग गया।

चाहत पता नहीं कितनी बार उसने ये नाम लिया होगा और ये नाम लेते हुए वो क्लास आ गया। हमेशा की तरह खाली डेस्क ढूंढ कर बैठने लगा।

तभी उसने देखा कोई गेट से अंदर आया जिसे सारे लड़के मुंह फाड़ कर देख रहे है। ये काजल थी जो मुस्कुराते हुए अंदर सा रही थी उसने उसे देखा और फिर अपना बेग रखने के लिए जैसे ही ऊपर देखा...

उसकी नज़र पीछे से आती चाहत पर पड़ी जिसकी पलके

झुकी हुई थी जिस कारण उसकी बड़ी पलके साफ़ साफ़ दिख रही थी उन पलको में छिपी वो आंखे देखना चाहता था जो उसको हर बार उसे हूंअट्रैक्ट करती थी।

चाहत ने एक भी बार पलके नहीं उठाई थी वो पलके झुकाएं क्लास में आ रही थी और अध्यन उसे होश खो कर देख रहा था।

तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा ब्यूटीफुल ना....

अध्यन - या...

तभी उसने देखा फिर कहा - अंश तूने मुझे डरा दिया यार।

अंश - तुझे भी वो अच्छी लगी मुझे भी यार लव एट फर्स्ट साइट हो गया।

अध्यन - नहीं यार वो तेरे टाइप की नहीं है।

अंश - बट सी इस सो क्यूट उसके गोरे गोरे गाल आए हाय।

अध्यन - हा ... क्या... क्या एक बार फिर कहना गोरे गाल तू किसकी बात कर रहा है।

उसकी ये कह कर अंश ने काजल के तरफ इशारा किया । उसका इशारा देख अध्यन ने राहत की सांस ली और फिर कहा या शी इस । फिर अपने बेग रखने में लग गया।

अंश उसके सामने आया और बोला - देख तू स्मार्ट है और कोई भी लड़की तुझे एक बार में हा बोल देगी मेरा सोच ।

अध्यन था ही स्मार्ट गोरा रंग भुरी आंखे और अपनी उम्र के हिसाब से अच्छी पर्सनैलिटी आंखो पर आते हुए उसके बाल

उसे क्यूट बना रहे थे।

अध्यन - तू क्या बोल रहा है सीधे प्वाइट पर आ।

अंश - वो तू ... वो तू ...

अध्यन - अब बोल भी।

अंश - तू उस से दूर रह भाई वो मुझे पहले दिखी थी मुझे वो पहले मिलनी चाहिए अगर मेरे कहने के बाद उसने हा नहीं कहा तो फिर तू ट्राय कर लेना उसने कौन सा भाग जाना है प्लीज़।

अध्यन ने बेग रखा और उसकी तरफ देख कर कहा- देख मुझे उसमे कोई इंटरेस्ट ही नहीं है। जैसे ही अध्यन ने बोला अंश सीधा उसके गले लग गया और बोला थैंक्यू भाई थैंक्यू सो मच । और वहा से चला गया।

अध्यन - पागल। कह कर सोचने लगा।

अध्यन - मुझे तो बस अपनी चाहत पसंद है।

वह तब से वो उसे देख रहा था उसका क्लास में होना उसके दिल की धड़कन को बढ़ा रहा था।

उसका ध्यान तब टूटा जब सर क्लास में आए और उन्होंने काजल और चाहत नाम लिया ये नाम सुन कर क्लास में दो लोगो के चेहरे में स्माइल थी एक अंश और दूसरा अध्यन जो बस चाहत को देखे जा रहा था।

इस तरह वो जहा जाती वहा उसकी नजर जाती तभी उसने देखा सर सभी से रोल नं के हिसाब से बैठने बोला इतेफाक से दोनो का रोल नं एक साथ आ गया तो अब वो दोनो साथ ने बैठने थे।

साथ में बैठने से को खुशी अध्यन को हुई वो किसी को नहीं हुई वो वहा बैठ कर बस चाहत तो महसूस कर रहा था वहा उसे चाहत के बालो से आती भिनी खुशबू बहुत अच्छी लग रही थी और यहां चाहत ने काजल से करते हुए अचानक ही उसकी तरफ देखा ।

अध्ययन ने फिर हाथ दिल पर रखा उसे फिर वही अहसास हुआ वो दिल में हाथ रख उसे देखने लगा पर यह खुशी ज्यादा देर की नहीं थी काजल और चाहत ने कुछ बात की और क्लास से बाहर निकाल गई।

तभी उनके पीछे अंश निकाला और उसने चुपके से सारी बाते सुन ली और फिर क्लास आया और अध्यन को बताया कि कैसे दोनो वोट के लिए बात करने गए है।

सर ने दोनो को कैप्टन बनाने से लेकर क्लास में हुई बाते सब उसे बताई अध्यन चाहत को देखने में इतना बिज़ी था कि उसने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया।

अंश ने कहा कुछ कर भाई मैंने काजल को देखा वोटिंग का नाम सुन कैसे उसके चेहरे में बारह बजे थे।

अध्यन कुछ सोचते हुए रुक करता हूं कुछ।

उसने कुछ सोचा और सारे ब्वॉयस के पास आया और कहा देखो तुम लोग को एक अंदर की खबर बताता हूं।

सारे बॉयज़ ध्यान से सुन रहे थे कि पता नहीं कौन सी जरूरी बात हुई हो।

अध्यन - देखो फ्रेंड्स आज जो दो गर्ल्स कैप्टन बनी किसी को अच्छा नहीं लगा पर यार सोचो अगर उन लोगो को कैप्टन बना दिया तो हमे कितना फायदा होगा।

सारे बॉयज़ - वो कैसे ?

अध्यन - वो ऐसे की ये वहीं गर्ल्स है जो हमेशा टॉप करती है अगर ये क्लास में आ गई तो क्या होगा। ये कह कर उसने एक बड़ी सी स्माइल दी और आगे कहना जाती रखा ये हमे जानती भी नहीं तो ये दोनो हमें ज्यादा परेशान भी नहीं करेगी और उन लोगो को हम सब को जानने के बहुत टाइम लगेगा तब तक हम दूसरी क्लास में चले जाएंगे। नाम ना जानने से ये हमारी शिकायत भी नहीं कर पाएंगी सौ बात की एक बात ये फायदेमंद होगा हमारे लिए।
 
अब सब सोचने लगे तो फिर अध्यन ने कहा देखो भाईयो वो जो भी होगी सुलेखा से बेहतर होगी और याद नहीं कैसे अपने दोस्तो का नाम लिखने के बजाए हमारा नाम लिख देती थी और फिर डांट भी हमे पड़ती थी ये सब के साथ ऐसा नहीं कर पाएगी तो ब्वॉयज बदला लेना है या नहीं ।

सारे ब्वॉयज एक साथ - हा

अध्यन - तो फिर ठीक है तो फिर सारे ब्वॉयज वोट किसे देंगे।

ब्वॉयस- किसे ?

अध्यन और अंश ने सर पर हाथ रख लिया। और कहा चाहत तभी अंश ने उसे घुर के देखा तो अध्यन ने कहा चाहत और काजल को वोट देंगे किसी भी लड़के का वोट कहीं और नहीं जाना चाहिए इस दैट क्लियर ।

सारे एक साथ - यस

अध्यन - और अगर किसी ने भी एक भी वोट यहां से वहां किया तो ये कह कर उसने सबको देख जो खौफ से उसे देख रहे थे और उसने कहा ज्यादा कुछ नहीं होगा बस इतना होगा की फिर स्पोर्ट्स में मै उसकी कोई मदद नहीं और ना ही किसी लड़की से उसके लिए बात करूंगा । फिर वो भाड़ में जाए ।

सब एक साथ - क्या?

अध्यन - हा सही सुना

बॉयज़ - ठीक है सर ।

फिर सब हसने लगे और क्लास रूम में आ गए ।

वहा सर आए और उन्होंने चाहत और काजल के परसेंट पूछे बस यही पर हमारे अध्यन जी ने सिर पर हाथ रख लिया। क्युकी हमारी दोनो लड़कियों के परसेंट को आधा भी करे तो उनके परसेंट तब भी कम थे अंश तो खुश था क्युकी वो पढ़ने में अच्छा था उसे तो शुरू से पढ़ने लिखने वाली लड़की चाहिए थी और वो काजल थी उसे और क्या चाहिए था।

पर अध्यन उसके तो सारे सपने टूट गए। वो ये सोच रहा था अगर मैंने इसे बता दिया कि मै इसे (चाहत) पसंद करता हूं तो ये एक बार में ना बोल देगी फिर बेटा लग गए तेरे तो।

वोटिंग के टाइम सारे बॉयज़ ने अध्यन की बात का साथ दिया पर सबने जब चाहत को देखा तो पाया वो बहुत सीधी सी है तो सब ने सोचा इसे ही वोट दे देते है इसे हैंडल करना आसान होगा।

इस तरह वो कैप्टन बन गई।

आज जब लंच हुए तो चाहत और काजल ने सब को चॉकलेट दे दी तब अध्यन क्लास में आया शायद वो किसी काम से बाहर गया था ।

चाहत ने देखा तो भाग कर उसके पास गई और उसे चॉक्लेट दिया ।

अध्यन ने जैसे ही उसे अपने पास देखा वो उसके चेहरे को इतना पास से देखने की खुशी नहीं संभाल पा रहा था उसने धीरे से चॉक्लेट ली । चाहत वहा से मुस्कुराती हुई अपने डेस्क पर बैठ गई। ये पहली बार था जब उसने किसी लड़की से कुछ लिया था सारे बॉयज़ ये देख हैरान रह गए साथ में सब ये भी नोटिस कर रहे थे कि कैसे अध्यन उसे देख रहा था।

अध्यन अभी भी उसे देख रहा था तभी अंश आया उसने पहले उसे पुकारा और कोई जवाब ना मिलने पर वो चाकलेट ले कर भागने लगा । अध्यन उसके पीछे पीछे भागने लगा वो दोनो भागते हुए ग्राउंड आए और फिर हसने लगे ।

अध्यन - यार मेरी चॉकलेट दे।

अंश - नहीं

अध्यन - क्यू?

अंश - पहले मेरे क्वेश्चन का आंसर दे।

अध्यन - मज़ाक मत कर... दे ना।

अंश - तू चॉक्लेट खाता नहीं तो आज क्यू खा रहा है?

अध्यन ने नज़रे चुराते हुए कहा।

अध्यन - यार अब मिल गई है तो खा ही लेता हूं देखा नहीं इतने प्यार से उसने दिया है।

अंश - ओहो उसने... फिर चॉकलेट को घूमते हुए - सच बता

अध्यन - क्या?

अंश ने उसे घुरा

अध्यन हार मानते हुए - बताता हूं ।

वो लड़की यार... चाहत वो मुझे अच्छी लग गई है वो कितनी प्यारी है जब मुस्कुराती है तो उसके चमकीले दांत ऐसे लगते है जैसे मोटी ।

उसकी भावो के बीच के बीच का वो तिल हाय कसम से कितना प्यारा लगता है देख मै ये नहीं कहूंगा की प्यार हो गया है पर वो ऐसे ही सामने रही ना तो पक्का हो जाएगा।

अंश जो उसकी बाते मुंह खोल कर सुन रहा था अचानक ही हसने लगा पहले तो अध्यन कों कुछ समझ नहीं आया तो उसने उसके हाथ से चॉक्लेट ली और पूछा क्या हुआ इतना क्यू हस रहा है।

अंश - अब मज़ाक करेगा तो हसुंगा ही ना । और फिर हसने

लगा

अध्यन - अंश आईएम सीरियस।

अंश सीरियस होते हुए - तू आते टाइम कहीं गिर गया था क्या जो ऐसी बहकी बहकी बाते कर रहा है।

अध्यन - मतलब।

अंश उसका हाथ पकड़ खिड़की के पास लेकर जाता है जहा लगे कांच में उसका चेहरा दिखा कर कहता है।

अंश - देख तुझमें कोई कमी है।

अध्यन फिर समझ नहीं पाता और सवालिया नजरो से फिर अंश को देखता है।

अंश कहता है तू इतना स्मार्ट है, गोरा है और तेरी हाइट देख तू उसे कैसे पसंद कर सकता है? मतलब यार लूक एट यू... यूं आर बेटर दैन हर।

अध्यन - कुछ भी मत बोल ।

ये बोल वो रैपर खोल कर चॉक्लेट खाने लगता है। थोड़ी देर तक अंश उसे देखते रहता है फिर कहता है,

अंश - देख वो और तुम दोनों कहीं से एक जैसे नहीं हो। वो कितनी काली है और तू गोरा ।वो और ऊपर से बहन जी टाइप कैसे तेल लगा कर कंघी करती है। तेरे तो बॉल बिना

हवा के भी लहराते है। और ... वो बोल ही रहा था तभी अध्यन को बहुत तेज गुस्सा आ गया।

अध्यन - चुप हो जा... मुझे नहीं पता था तू भी भेदभाव वाली सोच रखता है। तुम जैसे पढ़े लिखे लोग ही ऐसी सोच को जन्म देते है ऐसे में क्या फायदा तेरा इतने बड़े स्कूल में पढ़ने का जब तू किसी भी इंसान को उसके कलर के बसेस पर जज कर रहा है तू मुझे बोल रहा तूने कभी देखा है उसे ... उसकी आंखो कि मासूमियत को उसका मुस्कुराहट को ... नहीं ना ... तुझे तो बस गोरा रंग पसंद है... वो भी एक इंसान है क्यू तू उसे ऐसे बोल रहा है जैसे वो कोई... इतना बोलते हुए वो थोड़े देर चुप हुआ और फिर बात जाती रखते हुए कहा मै उसे पसंद करने लगा हूं प्यार का पता नहीं पर मै तेरी तरह नहीं सोचता। तूने सच कहा कि हम बिल्कुल एक जैसे नहीं है बात तो सही है... वो टॉपर है और मै भी टॉप करता हूं बट नीचे से सही है तू भी....। पर क्या तू एक बात जनता है कि वो किस दर्द में है जब सर ने उसे कैप्टन बनाया तो उसने सब की बात सुनी उसे कहीं ना कहीं ये बात बुरी लगी और चली गई सर के पास ये कहने की वो वोटिंग चाहती है... इसीलिए ताकि उसे फेयर्ली ये पोजिशन मिले उसे सेल्फ रेस्पेक्ट प्यारी है... वो सब कुछ अपने दम पर पाना चाहती है किसी की दया नहीं चाहती... पर नहीं तुझे तो उसका रंग दिखा जिस बहन जी की तू बात कर रहा है ना आज मैंने उसे

चॉक्लेट लेते हुए देखा जिसके पूरे पैसे उसने ही दिए और फिर काजल से कहा सब से कहना ये हम दोनों की तरफ से अगर उसका अपने दोस्त के लिए ये प्यार उसे बहन जी बनाता है ना तो यही सही। अगर वो बहन जी भी है ना तो भी मुझे पसंद है । ये सब बोल वो चुप हो गया।

अंश - आते हां मै तो भूल गया उसके बाल लंबे है और तेरे छोटे...ये भी प्रॉब्लम है सो सैड। ये बोल उसने सिर पर हाथ रख लिया।

अध्यन ये सुन मुस्कुराने लगा तो अंश उसके गले लगा और कहने लगा भाई मैंने आज तक तुझे किसी भी लड़की के साथ नहीं देखा... ये पहली है जिसे तू ऐसे देख रहा था जैसे शायद ही किसी को देखा हो और मै कल से ये नोटिस कर रहा था। सोचा ऐसे पूछूंगा तो नहीं बोलेगा इसीलिए तुझसे दूसरे तरह से पूछना पड़ा । मुझे माफ़ कर दे।

अध्यन - इट्स ओके यार।

अंश - मुझे भी अब समझ आ गया तू क्या कहना चाह रहा है।

आई होप की तुझे तेरी पसंद मिल जाए।

अध्यन - थैंक्यू।

अंश - वैसे मेरे भोले भंडारी तुझे पता है उसने ये ( चॉकलेट ) क्यू दिया ?

अध्यन - क्यू?

अंश सर पर हाथ रख कर - तूने उसे रखी बंधी है ना इसीलिए।

अध्यन - क्या? मैंने कब ... मैंने ऐसा कुछ नहीं किया । सच में रुक मै उसको बता कर आया ।

अंश उसे रोकते हुए - अरे मै मज़ाक कर रहा हूं ये उन दोनों की आदत है वो जब भी कैप्टन बनाती है तो चॉकलेट बटती है ।

अध्यन मुस्कुराते हुए - ओह

अंश - हा

अध्यन - चल क्लास स्टार्ट हो जाएगी। और उसका हाथ पकड़ कर खिचने लगा।

अंश और अध्यन क्लास के बाहर पहुंचे।

अंश - सुन

अध्यन - हा

अंश - जो मैंने तुझे कहा आगे चल कर तुझसे यही सवाल कोई और भी पूछ सकता है तू तैयार रहना हर चीज के लिए।

अध्यन - हा यार

फिर दोनो क्लास में आ गए।

अध्यन फिर से चाहत के पास बैठ गया और उसे देखने लगा ।
 
इधर अंश की नजर काजल पर गई जो अपनी बुक में खोई हुई थी और उसकी नाक पर लगा चश्मा जिसे वो बार बार अपनी उगलियो से ऊपर करती और वो फिर नीचे आ जाता ऐसे ही वो बार बार करती। ये देख अंश मुस्कुरा उठा जब काजल की नजर उस पर पड़ी तो उसने इशारे से उसे पूछा क्या है.. तो उसने ना में सर हिला दिया और अपना नोट्स में कुछ करने लगा।

सर थोड़े देर में क्लास आए और बच्चो को पढ़ने लगे । क्लासेस खत्म हुई सब घर जाने को निकले। काजल और चाहत दोनो चौक तक पहुंचे वहा से एक दूसरे को बाय बोल कर अपने रास्ते निकाल गए ।

चाहत घर पहुंच अपनी साइकिल रख मेन गेट बंद कर अंदर आ गई वो जैसे अंदर गई कोई गली से निकला और उसने कहा वो तो तुम यहां रहती हो । और मुस्कुरा दिया।।।

अगले दिन

अध्यन का घर

आज अध्यन सुबह से रेडी होकर बैठा था। वह बार बार घड़ी को देखता उसकी मम्मी कब से उसे ये सब करते देख रही थी।

वह किचन में काम कर ही रही थी तभी अध्यन आया और पीछे से उनको पकड़ कर अपना सर उनके कंधो पर रख कर बोला मम्मा आपको नहीं लगता हमारी घड़ी खराब हो गई है।

गौरी जी - वो सही है ।

अध्यन - नहीं मॉम ऐसा नहीं है। देखो ना इतनी देर से देख रहा हूं पर टाइम तो वैसे ही है।

गौरी जी - अब हर मिनट में देखोखो तो यही होगा ना।

अध्यन - मॉम आप मुझे नोटिस कर रही है। यह कह वो उनसे दूर हुआ और उन्हें देखने लगा ।

गौरी जी मुड़ी और दोनो हाथ बांध कर अध्यन को घूरने लगी। उनकी आंखो को देख कर वो थोड़ा डर गया और बोला मॉम आई थिंक मुझे जाना चाहिए।

ये कह कर वो जाने के लिए मुड़ा ही था तभी....

गौरी जी - बाबू....

अध्यन आंखे बंद कर - यस मॉम

गौरी जी - तुम तो स्कूल हमेशा टाइम पर जाते थे वो भी मेरे तुम्हें टाइम बताने के बाद पर आज इतनी जल्दी क्यों । ये कह कर उन्होंने अपनी भावो को उपर की ओर किया।

सवाल से भरी निगाहें देख कर अध्यन थोड़ा सा डरा फिर हिम्मत कर के बोला - मॉम कुछ भी।

अध्यन - आज वो स्कूल में कुछ काम है इसीलिए जल्दी जाना है जैसा आप सोच रही है वैसा कुछ नहीं है।

गौरी जी - ठीक है ।

ये सुन अध्यन ने राहत की सांस ली और जाने को मुड़ा ही था।

गौरी जी - सोना सुनो...जब भी मै तुम्हे बाबू सोना बुलाती हूं तो तुम चीढ़ जाते हो पर अाज ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तुम चुप चाप जा रहे हो।

अब अध्यन फस गया और उसने कहा चाहत यार तुम ही

कुछ करो।

उसे अचानक याद आया ...उसने कहा मॉम आप अभी जैसे मुझे घुर रही थी तो मेरी हिम्मत ही नहीं हुई आपसे कुछ कहने की।

गौरी जी - अच्छा ठीक है।

अध्यन अपने शू लेस बांध रहा था। साथ में बड़बड़ाए जा रहा था हे भगवान आज तो बच गया...। कहीं मॉम को शक हो जाता तो तू बे मौत मारा जाता.... माना तू उसे देखने के ख्याल से ही आज खुश है... पर ऐसे भी उतावला ना हो ... अब से ध्यान रखना , समझा।

अध्यन खुद को समझा बाहर निकाला तभी उसे याद आया वो अपने साइकिल की चाबी तो भूल गया जैसे ही वो जाने के लिए मुड़ा गौरी जी चाबी लिए चली आ रही थी। अध्यन ने चाबी लेनी चाही तो उन्होंने अपने हाथ ऊपर कर दिए ।

ये देख अध्यन बोला - अरे मॉम आप... वो बोल ही रहा था।

गौरी जी हस्ते हुए - ये लों।

अध्यन ने अपनी साइकिल निकली और चलने को हुआ गौरी

जी का चेहरा उदास हो गया तो अध्यन वापस उनके पास आया । उनके गाल खींच कर उन्हें एक किस दी और बाय करता हुआ चला गया ।

गौरी जी के चेहरे पर स्माइल आ गई । वो अंदर घर के अंदर आ गई जो घर अभी अध्यन के चहल पहल से गूंज रहा था वहीं अब गहन शांति थी । गौरी जी वापस अपने काम में लग गई ।

बस तीन लोग रहते थे इस घर में एक अध्यन और उसके मॉम डेड ... तीन लोगों का परिवार था अध्यन के पापा देव एक बहुत बड़े इंजिनियर थे पूरे शहर के लोग उन्हें जानते थे वो बहुत अच्छे स्वभाव के थे। अध्यन को किसी भी चीज में फर्क ना करना उन्होंने ही सिखाया था इतने बड़े परिवार से होने के बाद भी उसे जरा सा भी घमंड नहीं था। उसके पापा ने उसे हमेशा डाउन टू अर्थ रहना सिखाया था ।

घर में उसके पास बाइक थी फिर भी वो साइकिल से स्कूल जाता था। उसे सब के साथ नॉर्मली रहना अच्छा लगता था। स्कूल में किसी को उसके बारे में पता नहीं था सिवाय अंश के।

गौरी जो पेशे से टीचर थी अब उनकी प्रोमोशन के बाद प्रिंसिपल बन गई थी। वो घर में सिर्फ खाना बनाती थी और बाकी काम के लिए नौकर थे।
 
चाहत का घर

चाहत स्कूल के लिए तैयार हो रही थी ।

रीमा जी - चाहत बेटा मै आज शायद लेट हो जाऊंगी ...तुम जल्दी आकर खाना बना देना।

चाहत - आप कहा जा रही है

रीमा जी - वो घर में पेंटिंग का काम कंप्लीट हो गया है उसे ही देखने जा रही हूं ।

चाहत - सच में मम्मी.... आप पूरा घर अच्छे से देख आना... और याद से आप अपनी दवाई ले लेना।

रीमा जी हाथ जोड़ते हुए - हा मेरी मम्मी और कुछ...

चाहत आशीर्वाद की मुद्रा में - अभी तो कुछ नहीं...बाकी बाते आपके आने के बाद।

रीमा जी हाथ उठा कर दिखाते हुए - अच्छा।

चाहत मुस्कुराते हुए घर से बाहर आई और स्कूल की तरफ निकाल गई।

चाहत का इस शहर नया घर बन रहा था उसकी मम्मी वहा का काम देखने आज जा रही थी। उसका घर लगभग पूरा तैयार था बस पेंटिंग का काम बाकी था।

जिसे देखने के लिए आज उसकी मम्मी वहा जा रही थी ।एक पुलिस वाले की पत्नी होने के कारण उन्हें ये सब खुद करना पड़ता था। वो अकेले ही हर काम करती थी क्युकी शिव जी ज्यादातर उनके साथ नहीं थे पर फिर भी उन्होंने उनकी कमी किसी को महसूस नहीं होने दी। हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाती आ रही थी।

शायद शुरू से ही अकेले रहने के और जिम्मेदारी उठने के कारण ही चाहत भी इतनी समझदार हो चुकी थी ।

वह हर काम करने से पहले सोचती थी और दूसरों को देखती थी अगर जरा सा भी बुरा प्रभाव उसे नजर आता था तो वो उस काम को नहीं करती थी। वो जानती थी कि पापा की पोस्टिंग अलग जगह है और मम्मी वैसे ही परेशान रहती है वो उन्हें बेवजह परेशान नहीं करना चाहती थी।

चाहत आज चौक पहुंची और काजल का इंतज़ार करने लगी। थोड़े देर इंतज़ार करने के बाद वो आ गई पर इसके साथ कोई था चाहत ने उसे दूर से पहचान लिया वो उसका जूनियर था जो मॉर्निंग बेच से था उसका नाम था अनिल। पर ये काजल के साथ क्या कर रहा था।

चाहत यही सोच रही थी तभी काजल आई और उसके सामने चुटकी बजाकर बोली कहा हो मैडम।

चाहत - कहीं नहीं तू बता... ये अनिल था ना तू उसके साथ क्या कर रही थी।

काजल - अरे कुछ नहीं ... वो रास्ते में मिल गया था तो बस नॉर्मल हाय हेल्लो कर रही थी।

चाहत ने अच्छा कहा और दोनों स्कूल आने के लिए आगे बढ़ गए।

क्लास में

अध्यन सबसे पहले क्लास में आ गया और चाहत का इंतज़ार करने लगा।

वो बार बार दरवाज़े की तरफ देखता फिर वापस बुक ने देखता। ये काम वो बहुत देर से कर रहा था।

क्लास के सारे बच्चे आ चुके पर चाहत और काजल अभी तक नहीं आए ये देखते हुए अध्यन उठा और अंश की सीट पर जा बैठ ।अंश जो उसे काफी देर से देख रहा था वो बोला।

अंश - इन्तहा हो गई इतंजार की

अाई ना कुछ खबर मेरे यार की।।

अध्यन जो उसके गाने को सुन रहा था उसने उसे घुर कर देखा तभी अंश ने कहा - देखो वो आ गई ।

अध्यन ने पलट कर देखा चाहत और काजल आ रही थी। आज चाहत खिलखिलाते हुए आ रही थी। उसकी हसी बेहद आकर्षक थीं वो बहुत ज्यादा प्यारी लग रही थी। शायद काजल ने कोई जोक मारा था ।

वो आई उसने अपना बेग रखा ही था तभी प्रेयर बेल बजी उसने सभी से कहा कि ग्राउंड में जाए पूरी क्लासेज में सब बाहर चले गए तभी उसने देखा कोई क्लास में है उसने देखा ये अध्यन था जो बेग बंद कर के उठने लगा। फिर दरवाज़े की

ओर बढ़ गया।

तभी किसी ने उसे आवाज दी उसने मूड कर देखा तो देखता ही रह गया ये चाहत थी जिसने उसे पुकारा था वो तो बस उसे देखे जा रहा था चाहत ने उसे दो तीन बार पुकारा। चाहत ने जवाब ना पाकर अपना हाथ अध्यन के सामने हिलाया। ये देख अध्यन होश में आया।

तब चाहत ने कहा _ वो अंदर कोई है और वो बेहोश हो गया। ये कहते वक्त उसके चेहरे पर घबाराहट लिए वह खूबसूरत लग रही थी अध्यन ने किसी तरह खुद को संभाला और उसके साथ चला गया ।

जहा उसने देखा कोई सर झुकाए खड़ा था उसने उसे अच्छे देखा तो गुस्से से भर गया पर चाहत के सामने कैसे बोले उसे समझ ही नहीं आ रहा था।

अध्यन की तरफ देख कर चाहत ने कहा देखो ना इसे ये कब से ऐसे ही बैठा है मैंने और काजल ने इसे उठने की कोशिश की पर ये जवाब नहीं दे रहा है।

अध्यन - मुझे लगता है ये बेहोश है तुम प्रेयर ग्राउंड जाओ मै आता हूं।

ये कह कर उसने उसका एक हाथ अपने हाथ में लिया और मेडिकल रूम में आ गया फिर उसने उस शख्स से कहा - नाटक बंद करो.....

मैडिकल रुम

"नाटक मत करो"

अध्यन ने जैसे ही कहा वो लड़का बड़ी ही मासूम सी शक्ल बना कर अध्यन को देखने लगा।

अध्यन - देखो हर्ष तुम्हे क्या लगता है....... कोई नया है तो तुम उसे बेवकूफ बना लोगे।

हर्ष जो उस की उस लड़के का नाम था वो अध्यन को देख रहा था वो एक दम से हसने लगा और बोला - यार तू तो सच में समझदार निकाला। मै तो तुझे बहुत भोला समझता था बट आई मस्ट से यूं आर वेरी कलेवर।

ये वो वहा के बेड पर बैठ गया ।

अध्यन - देख तू जो ये सब कर रहा है ना वो मत कर....

काजल बहुत अच्छी लड़की है और पढ़ने लिखने वाली भी तू उसे कुछ मत कर।

हर्ष - काजल को कौन परेशान कर रहा है मुझे तो वो चाहिए । ये बोल वो बेड पर पसर गया।

अध्यन को लगा था हर्ष को काजल पसंद आ गई होगी इसीलिए वो अपने पुराने तरीके आजमा रहा है उसकी ये आदत थी हर नई लड़की से दोस्ती और फिर उसका यूज करना और अपने काम करवाना।

उसे बस अपने आप से और अपने काम से मतलब था।

अध्यन - कौन?

हर्ष - चाहत। यार सच में वो इतनी इमोशनल है....... और टॉपर भी मेरा काम तो बन जाएगा। और उसका फिगर भी.... वो बोल ही रहा था।

अध्यन ने इतना सुन । खुद को काबू में ना रख पाया और गुस्से में आकर हर्ष का कॉलर पकड़ कर बोला।

अध्यन - चुप..... कर एक वर्ड भी नहीं । वरना मै.....

हर्ष उसकी आंखो में देखने लगा फिर मुस्कुराते हुए उसका

हाथ अपने कॉलर छुडवा कर बोला - हम्म्म.... तो क्लास में प्यार का फूल खिल ही गया ..... बहुत याराना लगता है। वो भी दो दिन की आई लड़की के लिए..... क्या बात है बेटे ..... बहुत सही जा रहे हो।

अध्यन ने कुछ नहीं कहा बस गुस्से मे उसे घुर रहा था।

हर्ष - मैंने सोचा नहीं था उस पर इतना इंटरेस्ट लूंगा पर.....

वो अध्यन के करीब आ कर।

हर्ष - पर अब तो उसे तो तुझसे दूर करना ही होगा ......किसी लड़की के लिए पहली बार कोई मुझ से लड़ रहा है मेरे कॉलर तक पहुंच चुका है..... तो करना तो पड़ेगा ही। ये बोल उसने आंख मारी।

अध्यन जो उसकी बात सुन रहा था। वो मुस्कुरा कर उसके सामने की कुर्सी पर बैठ कर बोला - ठीक है तुझे जो करना है वो कर .... पता है पहले मै कंफ्यूज था... समझ.. ही नहीं पा रहा था मुझे चाहत को लेकर को फीलिंग आती है वो प्यार वाली है या बस पसंद वाली पर अब....मुझे यकीन हो गया कि ये प्यार है..... और अब जब मुझे यकीन हो गया है तो , मै तुझे ओपनली चैलेंज दे रहा हूं ..... तू उसे छू कर तो बता ।

हर्ष हस कर - ओके चैलेंज एक्सेप्टेड..... पर

ये कह कर उसने अध्यन को देखा और बोला - अगर मैंने उसे टच भी कर लिया तो तू उससे दूर रहेगा। ..... डील.... कह कर उसने हाथ बढ़ाया।

अध्यन - डील । कह कर हाथ मिलता है।

हर्ष - तू उससे प्यार करने का दावा कर रहा है और उसके नाम से डील भी ये तेरा कैसा प्यार है?

अध्यन - मै ये डील उसे तुझ से दूर रखने के लिए कर रहा हूं और हा ......ये मेरा प्यार है तुझे समझ ही नहीं आयेगा।

तभी दरवाज़ा नॉक हुआ और चाहत अंदर आई।

चाहत हर्ष के पास जा कर तूम ठीक हो ।

हर्ष ने है में सिर हिला दिया।

फिर चाहत ने रूम में देखा वहा कोई नहीं है तो खुद ही वहा रखे ग्लास में पानी निकाल कर उसमे ग्लूकोज डाल कर घोल बना कर हर्ष को दिया।

और कहा - लो इसे पी लो...... और आराम करो। ठीक लगे तो ही क्लास आना । मैंने सर स बात कर ली है तुम आराम से रेस्ट करो ।

ये बोल कर वो उठी । तभी वहा उस रूम की इंचार्ज सा गई उसने चाहत को देख कर कहा - चाहत बेटा तुम यहां कैसे ..... कहीं फिर से बीपी तो लो नहीं हुआ ना तुम्हारा।

चाहत - नहीं मैम... मैम मै तो ठीक हूं.... ये हर्ष है..... इसे चक्कर आ रहे थे..... तो मैंने उसे ग्लूकोज घोल कर दे दिया।

मैम - ठीक किया बेटा ।

चाहत - ओके मैम अभी क्लास है तो .... हम चलते है ।

मैम - ठीक है जाओ। और हर्ष तुम यहीं रुको मै तुम्हे चेक कर लू ताकि कोई प्राब्लम ना हो ।
 
चाहत आगे बढ़ी। अध्यन के पास आकर उसे चलने को कहा वो जा ही रहा था तभी उसने पीछे मुड़ कर देखा तो हर्ष उसे इशारे से बेस्ट चॉइस बोल रहा था।

वो मुस्कुरा कर रह गया।

दोनों रूम से बाहर आए।

चाहत - थैंक्यू।

अध्यन - क्यू.....?

चाहत - मेरी हेल्प करने के लिए ...... अगर तुम ना होते

तो ...मदद के लिए हमे किसी और को बुलाना पड़ता ..... फिर शायद देर हो जाती और ..... हर्ष को प्रॉब्लम हो सकती थी।

अध्यन - हे!!! इट्स ओके..... तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे मैंने कोई बहुत बड़ा काम कर दिया हो ।

चाहत उसे देख कर हस्ते हुए - हा तो उतने बड़े लड़के को उठाना आसान काम थोड़े ना है बहुत मेहनत लगती होगी।

अध्यन - हा सच में ...... देखो मेरे हाथ भी दुख रहे है।

ये कह कर उसने अपने हाथ दिखाए।

जिसे देख चाहत और हसने लगी उसे हस्ता देख अध्यन ने सोचा - तुम्हारी इस हसी के लिए तो मै किसी को भी उठा कर ला सकता हूं।

चाहत हस्ते हुए - सुनो! तुम्हारा नाम क्या है?........ वो मैंने सब से बात कि पर तुमसे नहीं की तो.... तुम्हारा नाम मुझे नहीं पता।

अध्यन ने उसके मासूम से चेहरे को देखते हुए कहा - अध्यन।

चाहत - और मेरा चाहत......

अध्यन - जनता हूं।

चाहत मुस्करा दी।

अध्यन - वैसे तुम्हारा नाम बहुत यूनिक है......किसने रखा।

चाहत - पापा ने ।

बस इतनी ही बाते हुई दो में और दोनो क्लास पहुंच गए ।

जब दोनो ने क्लास रुम में एंट्री ली तो। सब उन दोनों को देख कर हैरान हुए जा रहे थे रंग में इतना डिफरेंस होने के बाद भी दोनो साथ में अच्छे लग रहे थे।

इन सब में अंश के चेहरे पर दोनों को देख कर स्माइल आ गई और वो मन में बोला सही जा रहे हो बेटा ।

दोनों अपनी डेस्क पर आ कर बैठ गए।

क्लासेस फिर से शुरू हुए । दो प्रियेड के बाद हर्ष आया और सब उसे घुर रहे थे। उसकी नजर चाहत पर पड़ी। वह जान बुझ कर उससे टकराने का सोच कर चला आ रहा था।

तभी अध्यन ने पुकारा - चाहत!!

चाहत - हा।

अध्यन - ये तुम्हारा पेन है क्या। ऐसा कह उसने नीचे की तरफ इशारा किया।

तभी चाहत नीचे झुकी और देखने लगी फिर उसने वह पेन उठाई और कहा ये तो मेरा ही नहीं है।

अध्यन - सॉरी मुझे लगा तुम्हारी होगी।

यह पेन अध्यन ने ही गिराई थी ताकि वह उसे हर्ष से बचा सके। यह देख हर्ष मुस्कुरा दिया और अपने डेस्क के पास चला गया ।

कलास में टीचर आए और क्लासेज फिर से स्टार्ट हो गई। सारी क्लासेज हो जाने के बाद सारे बच्चे घर जाने के लिए बाहर निकल रहे थे सबने अपनी साइकिल उठाई तभी किसी की गिरने की आवाज़ आई ।

सब ने देखा हर्ष गिर गया था और वह बुरी तरह से छटपटा रहा था ये देख अध्यन और चाहत दौड़ कर उसके पास आए उन्हें दौड़ता देख काजल और अंश भी भागे।

अंश और अध्यन ने हर्ष को उठाया और मेडिकल रूम गए वहा पर मैम ने उसे देखा फिर बताया। इसे चक्कर आ गया

था शायद अब ये ठीक है इसके फैमिली से किसी को बुला लो।

अध्यन ने सर से बात कर उसके घर पर फोन करवा दिया । फिर वापस आ कर उसने देखा । हर्ष को होश आ गया है।

अध्यन उसके पास बैठ कर - आज तुझे फिर से अटैक आया.... जिस वजह से तु फिर बोहोश हो गया था। तू डॉक्टर को दिखाता क्यू नही ?

हर्ष - दिखाता था तो.... दवाइयां दी है.... अभी टाइम लगेगा.... अभी तो स्टार्ट हुई है तो कुछ दिन असर तो रहेगा ना।

सब ने देखा हर्ष की आंखे बार बार बंद हो रही है सबने उसे लेटे रहने को कहा।

थोड़ी देर में हर्ष के पापा आ गए और उन्होंने टीचर से बात की और उसे ले गए।

टीचर ने भी सब से कहा कि सब अपने घर जाए ।

सारे बच्चे घर की तरफ निकल गए।

अध्यन ने देखा अधेरा होने को है तो उसने चाहत और काजल को रोक लिया और कहा सुनो शाम बहुत हो गया है हम दोनों तुम दोनो को घर छोड़ देते है। ये कह कर कह कर। वह मुड़ा और अंश को बोला तू काजल को छोड़ आ और मै चाहत को छोड़ आता हूं।

स्कूल ग्राउंड

अध्यन - मै चाहत को घर छोड़ देता हूं।

चाहत - नहीं... मै चली जाऊंगी... । तुम खामखां परेशान हो रहे हो।

अध्यन - देखो शाम हो रही है.... और तुम्हारा घर अकेले जाना सेफ नहीं मै छोड़ देता हूं।

इतना कह कर वो मुड़ा । अंश की तरफ देखते हुए ।

अध्यन - तू काजल को छोड़ आ।

अंश को तो ऐसा लगा जैसे उसकी मन मांगी दुआ पूरी हो गई हो । वो बिना कुछ बोले सिर हा में हिला कर काजल की तरफ मुड़ा। और उसे चलने का इशारा किया।

वे दोनो अपनी साइकिल लिए निकाल गए ।

अध्यन - चलो ।

चाहत - हा।

दोनो ने साइकिल पकड़ी और चाहत आगे आगे और अध्यन उसके पीछे पीछे । ऐसे ही दोनो चलते जा रहे थे । पर बोल कोई नहीं रहा था ।

तभी अध्यन ने देखा की चाहत ने अपने साइकिल की स्पीड थोड़ी कम कर दी है । वो कुछ समझता इससे पहले वो अपनी साइकिल से उतरी। अपनी साइकिल को स्टैंड पर लगा कर वो आगे बढ़ गई।

वहा वो पहुंची ही थी। तभी कुछ छोटे पपी (कुत्ते के बच्चे) बाहर आए और चाहत ने उन्हें अपने बेग से बिस्किट्स निकाल कर दिए । जिसे वो खाने लगे। चाहत ने उनके सिर पर हाथ फेरा और वहीं रुकी रही ।

जब सब ने सारे बिस्किट्स खा लिए तो वह अपना बेग उठा कर मुड़ी ही थी कि अध्यन उसके पीछे खड़ा उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था। पता नहीं क्यों पर जब भी चाहत अध्यन को मुस्कुराते हुए देखती तब चाहत के भी चेहरे पर मुस्कान आ

जाती थी ।

अध्यन मन में - एक ही तो दिल है.... कितनी बार लोगी।

चाहत उसके पास आकर - चले

अध्यन - हा ।

दोनों साथ चलने लगे ।

अध्यन का मन था कुछ बात करने का हो रहा था पर वो बोल नहीं पा रहा था ।

तभी अचानक चाहत ने कहा - आज जब मै स्कूल आ रही थी ना... तो ये बेचारे रो रहे थे। ...मुझे लगा उन्हें भूख लगी होगी.... जब पास गई तो देखा..... इनकी मा इन्हे छोड़ कर चली गई... किसी ने उन्हें बेरहमी से कार से कुचल दिया था। ... ये कहते वक्त उसका ग्ला भर आया था ।

फिर भी खुद को शान्त रख कर उसने आगे बताया ... वहा पर थी वो । .... ये कह कर उसने रोड की तरफ इशारा किया ।

चाहत - मुझसे इनका दुख देखा नहीं गया तो... मैंने सोचा इनको ज्यादा ना सही पर संभलते तक ही खाना खिला दू .... कम से कम ये एक टाइम का तो खाना खा पाएंगे ... ये बोल उसने अध्यन को देखा।

अध्यन - डोंट वरी... मै सुबह इनको खाना देकर चले जाऊंगा । ... और तुम शाम में ।

और हा... मुझे कोई तकलीफ भी नहीं होगी ... क्युकी मै सुबह पापा के साथ यहां जोगिंग करने आता हूं .... तो मुझे प्रॉब्लम भी नहीं होगी ।

चाहत ने उसे देखा और मुस्कुरा रही थी। उसे ये समझ ही नहीं आया की कैसे बिना कहे ही अध्यन ने उसकी बात समझ ली।

दोनों अपनी साइकिल पर आए और चलने लगे अपनी मंजिल की ओर ।

इधर अंश और काजल साइकिल चला रहे थे। अंश काजल से बात करना चाहता था। पर बात हो तो कैसे वो समझ ही नहीं पा रहा था। तभी काजल ने कहा - अंश ।

अंश जो की कब से उससे बात करने को मरा जा रहा था । उसे तो ऐसा लगा जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल गया हो। उसने खुश होकर कहा - हा बोलो ना ।

काजल - मेरी गली का मोड़ आ गया है अब मै खुद चले जाऊंगी .... बाय एंड थैंक्यू।

अंश का तो जैसे मन ही उतर गया उसने बुझे मन से कहा - इट्स ओके । ... एंड बाय।
 
अंश का तो जैसे मन ही उतर गया उसने बुझे मन से कहा - इट्स ओके । ... एंड बाय।

काजल फिर वहा से चले गई ।

अंश ने अपना हाथ सिर पर मार लिया । और कहा - इस मोड़ को भी अभी आना था।

ये बोल वो भी अपने घर की तरफ निकाल गया।

चाहत के घर के अपने घर के सामने रुक कर ।

चाहत - ये मेरा घर है ।

अध्यन - पता है।

चाहत - तुम्हे कैसे पता ,?

अध्यन सोचते हुए बोला- वो......अरे तुमने अभी तो बताया ...

चाहत - ओह.... हा ।

चाहत अध्यन को रोकना चाहती थी पर उसे अचानक याद आया मम्मी घर पर नहीं है ।

उसने उसे कहा- थैंक्यू । .... सच में तुमने आज बहुत हेल्प की ।

अध्यन - थैंक्यू से काम नहीं चलेगा । ... चलो चाय पिलाओ।

चाहत ने सिर झुका लिया और प्यार से कहा - आज मम्मी घर पर नहीं है ... और आर्यन भी नहीं होगा तो...

अध्यन को समझते देर ना लगी उसने कहा - हा मै समझ गया ... इट्स ओके ... फिर कभी ।

उसने एक बार नज़र उठा कर चाहत को देखा और हाथ बढ़ा कर कहा- फ्रेंड्स।।।।

चाहत ने सिर उठा कर कहा - फ्रेंड्स।।।

दोनों ने हाथ मिलाया और मुस्कुराते हुए एक दूसरे को बाय बोला । अध्यन के जाने के बाद साइकिल नीचे रख चाहत सीढ़ियों से ऊपर आ गई ।

चाहत का घर

चाहत दरवाज़े के पास पहुंची तभी उसने देखा की दरवाज़ा खुला है। उसे याद आया आज तो मम्मी घर का काम देखने

गई थी पर आज इतनी जल्दी कैसे आ गई तभी उसकी नजर घड़ी पर गई ।

घड़ी 7 बजने का इशारा कर रही थी । चाहत भाग कर किचन में गई । वहा देखा तो मम्मी काम कर रही थी ।

ये देख चाहत ने सोचा पहले मुंह हाथ धो कर कपड़े बदल लू फिर उनसे आज के बारे में बता दूंगी ।

ये बोल कर बाथरूम में चले गई ।

यहां रीमा जी गुस्से से लाल हो गईं थी । कोई भी उन्हें देख कर बोल सकता था कि वह गुस्सा है .......पर क्यू,,?

चाहत फ्रेश होकर आई तो देखा आर्यन वहीं अपना होमवर्क कर रहा है ।।

चाहत उसके पास बैठ अपनी नोट बुक निकाल कर बैठ गई और बोली - क्या बात है आज मेरे आने तक का भी इतेजार नहीं किया ...

ये बोल कर उसने आर्यन के गाल खींचे ओर कहा । मेरा मोटू .... मेट लड्डू .... मेरी सोनपापड़ी.... मेरा रसगुल्ला ... मेरी डेरिमिलक सिल्क ....

आर्यन - क्या है दी.....आपको भी चैन नहीं है.... होमवर्क करू तो प्रॉब्लम ना करू तो प्रॉब्लम .... तो मै करू क्या .... ये कह कर उसने सिर पर हाथ रख लिया ... फिर कहा उसके बाद आप मुझे ये सब बोलते हो .... मुझे भूख लग जाती है.... ।

चाहत उसकी बाते सुन और हसने लगी । और उसने कहा हा मेरी पपड़ी चाट.... तुझे तो पता है ... जब तक मै तुझे ये सब ना कह दू .... मुझे चैन नहीं मिलता ...

ये कह उसने फिर उसके गाल खींचे और दोनो अपना होमवर्क करने लगे ।

जब दोनो का होमवर्क फिनिश हुआ । तब चाहत ने देखा 9 बज रहे है उसने जल्दी से आर्यन को चॉक्लेट दी और बाहर आई । देखा तो डायनिंग टेबल पर सब कुछ रखा था । चाहत को थोड़ा अजीब लगा आज मम्मा ने आवाज़ क्यू नहीं दी।

वो आर्यन को भी साथ ले आई अब सब डायनिंग टेबल पर बैठ कर खाना खा रहे थे । चाहत ने खाना फिनिश किया के आर्यन को देखा उसने भी खाना खा लिया था।

चाहत ने देखा तो बर्तन उठने लगी तभी रीमा जी आई और उसके हाथ से बर्तन लेकर खुद धोने लगी । चाहत को अब समझ आया कि रीमा जी उससे गुस्सा है पर क्यू.....

वह हमेशा से यही करती थी जब भी उन्हें गुस्सा आता था तो वो घर के काम करने लग जाती थी। ताकि उनसे किसी कोई परेशानी ना हो और उनका गुस्सा भी निकाल जाए।

वो ये सोच ही रही थी । फिर उसने खुद से कहा - चाहत मम्मी खुद तुझे कुछ नहीं बताएगी.... तो तू खुद बात कर उनसे और वजह जान.... और भगवान का नाम लिया।

मम्मी के पास गई फिर उसने कहा - मम्मी क्या हुआ??? आप नाराज़ है मुझसे ।

रीमा जी ने उन्हें घुर कर देखा और कहा कुछ नहीं ।

मम्मी के घूरने पर चाहत को लगा बात बहुत ही ज्यादा सीरियस है।

इतने वक़्त में उन्होंने बर्तन साफ कर दिया । और अपने रूम में आकर चादर ओढ़ कर लेट गई । चाहत भी आ गई फिर उसने उनके पैर के पास बैठ कर कहा - क्या हुआ मा....

मुझसे कोई गलती हुई है तो मुझे बता दो.... पर यु मुझसे नाराज़ ना हो ....

रीमा जी उठ कर बैठी और कहा।

रीमा जी - वो लड़का कौन था ???

चाहत - कौन लड़का मा ???

रीमा जी - वहीं जिसका हाथ तुमने पकड़ा था .... बोलो बताओ ..... चाहत को जब पता लगा की उसकी मम्मी उस पर शक कर रह है तो वो उन्हें देखने लगी और रोने लगी ।

ये देख रीमा जी कुछ देर उनको भी बुरा लगा पर मन कठोर कर के उन्होंने अपने बात जारी रखते हुए कहा - क्यू... तुमने उसका हाथ पकड़ा था....??? और उनकी आवाज़ बहुत तेज थी ।

चाहत डर के कारण कापने लगी फिर उसने कहा मम्मी वो क्लासमेट था। मुझे छो.... वो बोल ही रही थी तभी....

रीमा जी - नहीं वो कोई और था... अगर वो क्लासमेट होता तो तू उसे घर लाती.... यू बाहर से नहीं जाने देती..... सच

बोलो चाहत

चाहत - नहीं मम्मी ... वो क्लासमेट था ये बोल उसने सारी बात रीमा जी को बता दी । और रोने लगी ।

रीमा जी ने जब ये सुना तो उन्हें अपने किए पर पछतावा हुए और उन्होंने कहा - मुझे माफ़ करना बच्चा ..... मैंने तुम्हे गलत समझा ....

ये कह कर उन्होंने उसे गले से लगा लिया चाहत उनके गले लग कर रोती रही और गले लगे हुए ही सो गई।

रीमा जी ने देखा तो उन्होंने चाहत को माथे पर किस किया और अपने गले लगा कर सो गई।।।

रीमा जी गलत नहीं थी । चाहत के पापा के जाने के बाद घर का ख्याल रखती थी । चाहत के पापा की ड्यूटी हमेशा बाहर ही रही ऐसे में उन्हें हमेशा डर लगा रहता था कि कहीं उनके बच्चे पिता के ना होने पर कहीं गलत रास्ते पर ना चले जाए। इसीलिए उन्होंने खुद को मजबूत बना कर एक पिता और मा दोनो की जिम्मदारियां निभानी थी जिस वजह से वो थोड़ी रूड हो जाती थी ।पर अपने दोनो बच्चो से बहुत प्यार करती थी।

अगली सुबह

चाहत का घर

सुबह चाहत की नींद हमेशा की तरह काजल के मैसेज से खुली वो उठी। फ्रेश होकर घर का काम किया । आर्यन को दूध दिया।

नहाकर बाहर आईं तो देखा। डायनिंग टेबल पर कुछ रखा है पास जाने पर पता लगा अरे ये तो मैगी है ।

मैगी को देख चाहत को पता चल गया ये काम उसकी मम्मी का है।

वो मुस्कुराई तभी मम्मी उसके पीछे खड़ी हो गई । और कहा - आई एम् सोरी ।.... वो कल कुछ ..... वो बोल ही रही थी तभी चाहत ने कहा - मम्मी आप ऐसे मत कहो ।

उसने मम्मी का हाथ पकड़ा और उन्हें वहीं चेयर में बिठा कर उनके हाथ को अपने हाथ में लेकर बोली । क्या हुआ था... मम्मी जो आप इतनी गुस्सा थी..... क्युकी आप कभी भी मुझसे ऐसे बात नहीं करती और इसकी वजह मै तो नहीं

हूं.....

रीमा जी सर झुका कर - बेटा कल मै घर को देखने गई थी।..... वहा पेंटिंग का काम पूरा हो चुका है..... । तो तुम्हारे पापा को बताने के लिए कॉल किया था ।.... उन्होंने मुझसे ढंग से बात तक नहीं की.....उल्टा सीधा कह दिया और जब तुम्हे उस लड़के के साथ देखा तो खुद को रोक नहीं पाई..... तुम्हे वो सब......ये कह कर वो फिर से रोने लगी.....

चाहत ने मम्मी के आंसू पोछे । उसने मैगी की एक बाइट मम्मी की तरफ बढा कर खाने का इशारा किया । फिर खुद भी उसके साथ खाने लगी । इसी तरह दोनो ने नाश्ता किया नाश्ता हो जाने के बाद चाहत ने अपना बचा हुआ होमवर्क किया। स्कूल के लिए तैयार होने लगी ।
 
अध्यन का घर

अध्यन तैयार हो कर पापा का इंतज़ार कर रहा था । उसने लोवर और टी शर्ट पहनी थी । वह बार बट घड़ी देखता इतने में देव जी आए और दोनो जोगिंग के लिए निकाल गए ।

जोगिंग करते करते दोनो उसी जगह पर पहुंचे जहा उन लोगो

ने देखा कुछ पपी खेल रहे थे । अध्यन पापा को रुकने को कहा और उन पपी को बिस्किट्स दी। बिस्किट्स देते वक्त उसका दिल धड़कने लगा।

उसे लगा जैसे चाहत मुस्कुराते हुए उसे देख रही हो वो भी हल्का सा मुस्कुरा दिया ।

देव जी भी उसके बिहेवियर में ये तब्दीली महसूस कर रहे थे पर कहा कुछ नहीं।

दोनों जॉगिंग कर के वापस घर आए तो गौरी जी ने उनको जूस दिया अध्यन बाए हाथ से जूस पीते हुए दाए हाथ को देख कर मुस्कुरा रहा था । और अपने रूम में चला गया । उसके जाते है गौरी जी जो जब से चुप थी बोल उठी।

गौरी जी - देखा अपने इसे.... अभी दो दिनों से ऐसे ही हरकते करते रहता है..... पता नहीं क्या हुआ है.....

देव जी जो अपना अखबार पढ रहे थे उन्होंने गौरी जी से कहा - प्यार हो गया है आपके बेटे को।

गौरी जी - क्या??????!!?......... आपको उसने बताया...... पर कब ..... और किससे ......????????

देव जी उनको पकड़ कर अपने करीब लाते हुए ।

देव जी - अरे!.... आप समझ नहीं रही है । शायद उसे कोई पसंद आ गई है....... तभी तो वो ऐसी हरकते के रहा है।

आप ना ज्यादा मत सोचो।

गौरी जी - अभी उसकी उम्र नहीं है ये सब करने की........ अभी तो उसको पढ़ना चाहिए..... और..... वो बोल ही रही थी तब ही ..... देव जी ने उनके होठो पर उगली रख कर कहा।

देव जी- वो आज के जमाने का लड़का है ..... और वो इतना समझदार है कि ऐसा कुछ नहीं करेगा जो सही ना हो.... अब आते है प्यार वाली बात पर ....... तो उसके लिए ये नया एक्सपीरियंस है ..... तो हमारा ये फ़र्ज़ बनता है कि हम उसे समझे..... ना कि रोक टोक करे...... अगर हमने ये किया तो वह हमसे फ्रीली कुछ शेयर नहीं कर पाएगा ......। आप समझ नहीं रही हो ना ।

गौरी जी ने हा में सिर हिलाया। तो देव जी ने उन्हें गले से लगा लिया ।

तभी अध्यन रूम से बाहर आया और दोनो को ऐसे देख कर मुस्कुराया फिर सिटी बजाते हुए पास रखे सोफे पर बैठ गया

। सिटी की आवाज़ सुन गौरी जी और देव जी दोनो अलग हुए ।

अध्यन ने ऐसे बिहेव किया जैसे उसने कुछ देखा ही ना हो और कहा - मॉम मुझे स्कूल जाना है .... नाश्ता लगा दो ।

गौरी जी हां बोल कर किचन भाग गई और देव जी अखबार रख कर अपने रूम चले गए ।

अध्यन ने नाश्ता किया और और स्कूल आ गया।

स्कूल क्लासरूम

अध्ययन आज फिर चाहत का इंतजार करने लगा उसने देखा चाहत अकेले आ रही है उसके पीछे काजल भी आ रही है उसने देखा आज दोनों ही शांत थी।

अध्यन ने चाहत को देखा उसकी आंखे लाल और सुजी हुई थी ये देख अध्यन को अच्छा नहीं लग रहा था।

वह जानना चाहता था कि क्या हुआ जो चाहत इतनी उदास है.......

क्लास रूम

चाहत का उदास चेहरा अध्यन से देखा नहीं जा रहा था।

वो उससे पूछना चाहता था। वो क्यू उदास है?

प्रेयर की बेल बजी सब क्लास से निकालने लगे । अध्यन हमेशा की तरह लास्ट में निकाला । चाहत दरवाज़े पर ही मिल गई । हमेशा की तरह चुप थी पर आज जो उसमे नया था वो था उदास चेहरा और लाल आंखे।।

ये आंखे ही तो थी जो उसे दूसरों से अलग बनाती थी । एक अजब सा सुकून देती थी ये आंखे अध्यन को। पर क्यू ये आंखे खामोशी लिए बैठी है।

उसका मन ही नहीं कर रहा था उससे एक पल के लिए भी दूर जाने का पर अभी वो समय नहीं आया था । जिस की दुहाई देकर वो उससे कुछ पूछ सके । बस दोस्ती ही थी वो भी इतनी गहरी नहीं थी। वो चाहता था वो उसे बताए और वो पल भर में उसके सारे दर्द ले ले।

पर ये मुमकिन न था ।

प्रेयर हुई और क्लासेज भी पर फिर भी चाहत ने एक वर्ड भी नहीं कहा था। ना ही वो मुस्कुराई थी ।

उसे ऐसे देख अध्यन को सबसे ज्यादा तकलीफ हो रही थी और भी कोई था जिसे ये सब तकलीफदेह लग रहा था । वो थी काजल।

वो उससे बात करने का मौका ढूंढ रही थी। लगातार क्लासेज के कारण उसे ये मौका अभी नहीं मिल रहा था।

लंच की बेल ने ये मौका दोनो को से दिया। काजल ने बिना किसी की परवाह किए लंच बॉक्स उठाया और चाहत का हाथ पकड़ कर अपने साथ ले आई ।

बाहर आकर वे लोग गार्डन के पास पहुंचे। काजल ने चाहत को देखा और गले से लगा लिया । चाहत जो अब तक चुप थी वो फूटफूट कर रोने लगी । काजल उसका पीठ सहला रही थी।

चाहत रोते हुए - मैंने कुछ नहीं किया आज तक ... फिर क्यों उनको ये लगा....। क्या मम्मी ये नहीं जानती की मै कुछ भी ऐसा नहीं कर सकती .... क्यों काजल ....

काजल - वो बस गुस्सा थी यार... तू भी ना सच में... कुछ ज्यादा ही इमोशनल है.... हो गई उनसे गलती भूल जा...

चाहत - हा.. मै मानती हूं ... गलती हो गई ... मै उन्हें बलेम नहीं कर रही.... बस मुझे बुरा लगा,... मै...,मै...

करते हुए उसने कल रात की सारी बाते बता दी। फिर वो रोने लगी।

चाहत रोते हुए - मैंने कभी भी कुछ गलत नहीं किया है ... आगे भी नहीं करूंगी .... लोग कुछ भी कहे ... उससे मुझे फर्क नहीं पड़ता .... पर अपनों की बात चुभती है .... बहुत ज्यादा चुभती है...

अध्यन जो काफी देर से वहा था और उनकी बात सुन रहा था उसने वहा आकर उन दोनों से कहा।

अध्यन - चुभती है .. तुम्हे बुरा लगता है ... उनका शक करना... गलत लगता है .. है ना...

चाहत काजल से दूर हुई और अध्यन को देखने लगी ।

अध्यन उसका हाथ पकड़ वहा पड़ी बेंच पर बिठा कर खुद उसके घुटनो के पास बैठ गया। और बोलना जारी रखा।

अध्यन - तुम्हे उनका तुम पर शक करना पहले नजर आया.... पर उसके पीछे छुपी फिक्र नहीं ... ये सब कहते हुए अध्यन ने अपना सिर उठा उसे देख कर बोलना जारी रखते हुए बोला।

अध्यन - वो तुमसे बहुत प्यार करती है... शायद इसीलिए तुम्हे कुछ गलत करते नहीं देख सकती है...

तुम खुद ही सोचो... अगर वो ये नहीं कहती ... और कोई और आकर उनके सामने ऐसे सवाल करता .... तब तुम क्या करती ,... उन्होंने तो तुम्हारी बात भी सुनी ... और अपनी गलती का अहसास होने पर माफी भी मांगी... वो तुमसे प्यार करती है ...,इसीलिए जरा ज्यादा फिक्र करती है .. तुम खामखां गलत सोच रही हो ...

इतना कह कर अध्यन ने उसे वॉटर बोतल दी और कहा चलो अब फेस धो लो । चाहत ने भी उसकी बात मान फेस धोया । अध्यन ने अपना रुमाल चाहत की ओर बढ़ा दिया जिसे लेकर उसने अपना फेस साफ़ किया।

अध्यन ने फिर से उसे बेंच पर बिठाया। उसने काजल की तरफ देखा फिर बैठने का इशारा किया। उनके हाथ से टिफिन लेकर उसे खोला । उसमे मैगी थी जिसे काजल लेकर आई थी। उसे एक चम्मच से पहले काजल फिर चाहत को खिलाया। और खिलते हुए बोलने लगा।

अध्यन - चाहत तुम्हे पता है। .. हम जिससे प्यार करते है ना ... उसकी फिक्र हमे सबसे ज्यादा होती है ... तुम्हे पता है उनको कुछ हो ... ये हम कभी नहीं चाहेंगे । ये बोल उसने फिर एक बाइट चाहत की ओर बढ़ा दिया फिर कहा।

अध्यन - इसीलिए तुम्हारी मॉम ने तुम्हे डांटा।... क्युकी.. वो तुम पर भरोसा करती है.... तभी तो उन्होंने दुबारा क्रॉस चेक करने यहां (स्कूल) आना जरूरी नहीं समझा ... और अपनी गलती होने पर सोरी भी बोल दिया ... उन्हें बस फिक्र है इसीलिए उन्होंने ये किया समझी ।

चाहत ने हा में सिर हिला कर हा कहा ।

ये देख कर वो दोनो को बारी बारी से खिलाया ओर लास्ट में एक बाइट बचा तो उसने दोनों को देखा वो सोच ही रहा था तभी एक हाथ उसकी तरफ आया उसने हैरानी से देखा तो देखता ही रह गया उसने कहा - बट ये तो... इतना ही बोल पाया था ।

तभी चाहत ने उसे एक बाइट खिला दिया । और वो उसे देखने लगा ।

ये सब हो जाने के बाद चाहत ने अध्यन को थैंक्यू कहा और फिर क्लास चली गई । अध्यन इस अहसास को संभाले क्लास वापस आ गया।

क्लासेस ख़तम हुए सब अपनी घर की तरफ चले गए। चाहत भी घर की तरफ ही जा रही थी। तभी उसे याद आया कि जल्दी में उसने उन पपि के लिए बिस्किट्स नहीं ली उसने सोचा घर से आर्यन के साथ आयेगी फिर खिला देगी ।

यह कह कर वो आगे बढ़ी फिर उसने देखा कोई उन पपी के साथ है । पास जाकर देखा तो अध्यन था जो वहीं बैठ उनको बिस्किट्स खिला रहा था। वो उसके पास गई और वहीं पर

उसे देखने लगी ।

बिस्किट्स खिलाने के बाद वह उठा और मुड़ा तो चाहत को देख खुश हो गया... उसकी आंखो में फिर वही चमक आ गई थी ।

अध्यन का दिल धड़क उठा वहीं मुस्कान देख कर।

वो आज उस मुस्कान को अपने दिल मै बसा लेना चाहता था पर चाहत ने उसे अभी इसकी इजाजत नहीं दी थी,।

अध्यन - तुम अभी यहां... घर नहीं गई ...

चाहत - तुम भी तो नहीं गए ना ।

अध्यन - वो ... मै तो इनको खाना देने आया था,। पर तुम यहां कैसे ...?

चाहत - मै घर जा रही थी .... तभी तुम्हे देखा इनके साथ तो यहां आ गई... थोड़ी देर चुप होकर बोली।

चाहत - अच्छा... आज के लिए... एक बार फिर.... थैक्यू...

अध्यन उसके करीब आ कर - बस थैंक्यू मुझे तो लगा....

चाहत दो कदम पीछे हट कर - क्या लगा??

अध्यन उसका डरा चेहरा देख कर हसने लगा और बोला - तुम कितना डरती हो यार.... तुम्हे क्या मै वैसा लगता हूं...

चाहत जल्दी से - नहीं... तुम.... वैसे नहीं हो ...

अध्यन फिर से उसे देखते हुए - अच्छा तो फिर कैसा हूं?? ये बोल वो चाहत को देखने लगा।

चाहत उसकी नज़रों को देख कर अपनी पलको को झुका कर बोली - वो .. तुम.... मेरा मतलब था....

अध्यन उसे बीच में रोक कर बोला - इट्स ओके .... मै मज़ाक कर रहा हूं।

चाहत और अध्यन साथ में चल रहे थे।

अध्यन - तुम्हारे घर में कौन कौन है?

चाहत - पापा मम्मी और भाई । ... और तुम्हारे???

अध्यन - पापा मम्मी और मै ... बस हम तीन ही है।

चाहत - ओह...

दोनों साथ में चल कर अपनी साइकिल के पास आए और एक दूसरे को बाय बोल अपने रास्ते चले गए।

चाहत ने एक बार मुड़ कर अध्यन को देखा जो बेखबर होकर साइकिल चला रहा था। उसके मुड़ने के ठीक बाद अध्यन ने

उसे देखा वो भी अपने में मगन साइकिल चला रही थी। उसे देख अध्यन के होठों में मुस्कान आ गई । और ठीक यही चाहत के साथ भी हुआ जब उसने अध्यन को देखा।

चाहत का घर

चाहत घर आई तो देखा उसने मम्मी ढेर सारे कार्डस के साथ बैठी है। वो अपने शूज निकलते हुए बोली - मम्मी ये सब क्या है ??

रीमा जी - कार्डस है बेटा... तुम्हारे पापा और मैंने सोचा है .... इस संडे ही नए घर में पूजा रखवा लेते है ... और पार्टी भी उसी दिन रख लेते है.... तुम क्या कहती हो???

चाहत - बेस्ट आइडिया मॉम... ये कह कर उसने अपनी मम्मी की गाल पर किस्सी दी फिर गले में बाहें डाल कार्डस देखने लगी । दोनों ने मिल कर एक कार्ड सेलेक्ट किया।

रीमा जी - अब यही छपने जाएगा.. तुम्हे कितने कार्डस चाहिए होंगे बता देना।

चाहत - ठीक है मम्मी।

चाहत फिर अपने रूम चली गई फ्रेश हुई और आर्यन के साथ

होमवर्क किया । होमवर्क होने के साथ बाद कब वो अपनी कॉपी बेग के डाल रही थी तभी उसके बेग से अध्यन का रुमाल गिर गया। रुमाल देख उसे अध्यन की याद आ गई । अध्यन कैसे आज उसके लिए जमीन में बैठा था और उसे समझा रहा था । उस अहसास को वो कभी नहीं भूल सकती । ये पहली बार था जब किसी ने उसके लिए ये सब किया था ।

वो मुस्कुराते हुए बेड पर बैठी । तभी उसकी नजर सामने लगे शीशे पर गई उसने सामने खुद को देखा। अपना सावला रंग देख उसने खुद से कहा - तुम ज्यादा सोच रही हो ... वो बस तुम्हे अपना दोस्त मानता है ....

खुद को वो ऐसे ही समझा रही थी । तभी मम्मी की आवाज़ आई - चाहत बेटा... चलो आओ और प्लेट लगा दो ... ।

चाहत उठते हुए - हा मम्मी....

चाहत खाना खाती है और सो जाती है।

अध्यन का घर

अध्ययन खाना खा कर रूम आया। वहा वो बिस्तर पर लेट

गया । आज जो कुछ भी हुआ उसे याद करने लगा। जब उससे रहा नहीं गया तब उसने एक डायरी निकली और उसमे लिखने लगा।।

"चाहत"

पता नहीं वो क्या है जो तुममें है... जो मुझे तुमसे दूर नहीं होने देता ... वो क्या है जो तुम्हे मेरे पास और पास ला रहा है।

मैंने हर जतन कर लिए पर तुम दिल से जाती ही नहीं...

तुम्हारा हसना तो पसंद था ही ... पर आज जब तुम रो रही थी ... तुम्हारी वो आखे ओर उन आंखो में भरा वो पानी ... दिल टूटता जा रहा था ये सब देख कर...

तुम्हारे पीछे आया था ... सच जानने ... पर जब तुम रो रही थी .... मेरा दिल भी रो रहा था... तुम सोच भी नहीं सकती ... तुम कितनी जरूरी हो गई हो ... मेरे लिए ...

मैंने किसी को आज तक नहीं समझाया पर... पहली बार लगा... तुम्हारे आसू रोकना है... तो चला आया तुम्हे समझाने ... जब तुम मेरे समझाने पर चुप हुई ... तब सबसे ज्यादा मै ही खुश हुआ.. तुमने हा में सिर हिलाया तो एक पल

के सब भूल तुम्हे गले लगा लूं।... ऐसा मन हो रहा था...

पर डरता हूं कहीं मेरे कारण तुम्हे कोई छोट ना पहुंचे ... कहीं कुछ बुरा ना हो जाए... तुम दूर ना हो जाओ मुझसे...

तुम्हे सुनना चाहता हूं .... वक़्त बिताना चाहता हूं...

तुम्हारी हर जिद पूरी करना चाहता हूं.. तुम्हे बहुत बहुत खुश रखना चाहता हूं...

पता नहीं वो दिन कब आयेगा... जब ये सब तुम्हे कब कहूंगा ... पर जब भी कहूंगा... पूरे दिल से कहूंगा .... एक एक बात कहूंगा... उस समय का बेसब्री से इंतज़ार है मुझे....

तुम्हारी यादों के साथ

तुम्हारा अध्यन....

इतना लिख वो उस डायरी को सीने से लगाए सो गया।
 
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