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Romance चाहत

अगले दिन

चाहत का घर

चाहत ने अपना रोज़ का काम किया । नहाकर आईं तो उसकी नजर रुमाल पर पड़ी जो अध्यन की थी। उस रुमाल को उसने धो कर साफ़ किया। उसे सूखा कर अपने बेग में रखा । एक बार फिर अध्यन का ख्याल उसका दिल को धड़का गया।

स्कूल में

चाहत क्लास आईं उसने देखा अध्यन उसे ही देख रहा था । वो उसके पास जाती उससे पहले ही कोई लड़की दौड़ती हुई आईं और उसके गले लग गई।

चाहत जहा थी वहीं रुक गई...

कौन है ये?

स्कूल क्लासरूम

चाहत जहा थी वहीं जम गई । वो एकटक उन दोनों को देखने लगी ।

वो लड़की अध्यन के गले लगे हुए थी । अध्यन ने उसे देखा फिर लड़की से कहा - सोनिया...

सोनिया - हा ।।

अध्यन - तुमसे कितनी बार कहा है.... ऐसे क्लास में ये सब नहीं करते...

सोनिया - जानती हूं... पर इतने दिन बाद तुमसे मिली.... ना तो खुद को रोक नहीं पाई ।

अध्यन ने उसके सिर पर थपकी दी फिर उसे लेकर क्लास से

बाहर चला गया ।

चाहत जैसे जम ही गई इतने में काजल आईं और उसे कहा - कहा खोई है...

चाहत - कहीं नहीं ...

काजल - तो ऐसे बीच रास्ते में क्यू खड़ी है...

चाहत वहा से हट अपने डेस्क पर चले जाती है।

प्रेयर बेल बजी तो सब थे बस अध्यन नहीं था । चाहत की नज़र बाहर ही थी पर वो उसे नहीं दिखा । प्रेयर लाइन में उसे सोनिया दिखी जो कि अभी भी अध्यन के साथ बातो में लगी थीं । ये देख चाहत को बहुत बुरा लगा पर वो समझ ही नहीं पा रही थी उसे बुरा क्यू लग रहा है।

क्लास में जब वो पहुंची तो भी सोनिया उसकी सीट पर बैठी थी ।

जब चाहत वहा पर आईं तो अध्यन ने सोनिया को वहा से जाने को कहा और चाहत के साथ बैठ गया ।

क्लास में टीचर आए और पढ़ने लगे ।

सर - सो सॉल्व दिस इक्वेशन...

सर ने चाहत को देखा जिसका ध्यान नहीं था तो सर ने उसे जोर से पुकारा चाहत....

चाहत डर गई और अपनी जगह पर खड़ी हो गई ।

सर - ध्यान कहा है... तुम्हारा...सॉल्व करो इस इक्वेशन को ।

ये सुन चाहत गुस्से में उठी और ब्लैक बोड में जाकर इक्वेशन सॉल्व करने लगी । आंसर आ जाने के बाद वो रुकीं। सब उसे देख रहे थे।

सर ने पहली बार उसे इतने गुस्से में देखा था। वो उसे कुछ नहीं बोले । वो अपनी जगह पर बैठ गई।

अध्यन ने उसे देखा। उसे भी समझ नहीं आया कि हुआ क्या जो चाहत इतने गुस्से में है।

क्लासेस अपने हिसाब से चल रही थी काजल और अध्यन दोनो चाहत के बिहेवियर को देख हैरान थे।

सोनिया ने अध्यन को देखा और आंख मार दी । अध्यन मुस्कुराकर फिर अपना काम करने लगा। ये सब चाहत ने

देखा तो उसे और गुस्सा आ गया।

चाहत अपने में ही बड़बड़ाए जा रही थी ।

चाहत - अभी भी उसे ही देख रहा है । .. ये नहीं कि पूछ लू ... चाहत क्या हुआ...लेकिन नहीं,....कहा फर्क पड़ता है.... रहे अपनी सोनिया के साथ ... मुझे क्या..

अध्यन सोचता है पुछू या नहीं फिर हिम्मत कर के चाहत को पुकारता है ।

अध्यन बड़े प्यार से - चाहत

चाहत उतने ही गुस्से से बोलती है - क्या है?

अध्यन - वो... तुम ... तुम गुस्सा ... मेरा मतलब वो...

चाहत - ये वो ... वो क्या लगा रखा है। .... साफ़ साफ़ कहो...

तभी लंच की बेल बजती है और चाहत कहती है।

चाहत - मुझे जाना है लंच करने तो मै तुमसे बाद में बात करती हूं । तुम जाओ ... अपनी सोनिया से बाते करो ... उसके सामने वो ... वो....करो समझे ।

ये सब बोल चाहत पैर पटकते हुए निकाल जाती है।

अध्यन बिना कुछ समझे सोचता है मैंने क्या किया ,?

तभी पीछे से सोनिया आती है और उसे अपने साथ लंच

करने बोलती है।

लंच हो जाने के बाद वो सोनिया के साथ बात कर ही रहा होता है तभी उसकी नज़र पास में खड़े काजल और चाहत पर पढ़ती है वो सोनिया को बाय बोल । उनके पास जाता है।

उसे पास आता देख चाहत काजल से चलने को कहती है और वो दोनो क्लास आ जाते है । अध्यन वहीं खड़ा होकर उन दोनों को देखते रह जाता है उसे समझ ही नहीं आता की हुआ क्या है चाहत को??

इधर क्लास में आकर चाहत एक गहरी सांस लेती है। और काजल को देखती है जो उसे देख रही होती है।

काजल उसे अजीब सी नजरो से देखती हैं।

काजल - ये क्या कर रही है तू???

चाहत - मै ... मैंने क्या किया?

काजल - तू बन मत ।

चाहत - मै कहा बन रही हूं ।

काजल - ये क्या हरकत है फिर...

चाहत - क्या ... कुछ भी तो नहीं .. तू क्या बोल रही है... मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा।

काजल चाहत को बोली तो तू ऐसे नहीं बताएगी।

ये बोल के उसने चाहत को पकड़ा और गुदगुदी करने लगी । दोनों क्लास में एक दूसरे को गुदगुदी कर रहे थे । वो तो लंच टाइम था नहीं तो आज उनकी खैर नहीं होती । दोनों बहुत देर तक एक दूसरे को तंग कर रही थी । और जब थक गई तो बेंच पर बैठ कर गई फिर एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देखते है।

काजल - तू अध्यन को इग्नोर कर रही है ।

चाहत नज़रे चुराते हुए - नहीं तो

काजल - अच्छा।

चाहत उसे देखते हुए हा बस कहने ही वाली थी तभी काजल को देख वो चुप हो गई । काजल हाथ बांध कर खड़ी हुई थी फिर उसने कहा - तू उसे सोनिया के वजह से इग्नोर के रही है ना।

चाहत ने हा में सिर हिलाया।

काजल - क्यू?

चाहत अब क्या कहे क्युकी उसे खुद समझ नहीं आ रहा था । कुछ सोच के उसने कहा।

चाहत - अरे यार वो अपने दोस्त के साथ था... उस सोनिया के साथ तो... मैंने सोचा .... क्यों उनके बीच आऊ

इसीलिए ...

काजल - अच्छा.... वैसे तुझे नहीं लगता ये मि. अध्यन कुछ ज्यादा ही ध्यान नहीं दे रहे तुझ पर...

ये बोल कर उसने चाहत को आंख मारी । तो चाहत उसके पीछे भागी और बोली रुक तुझे... मै बताती हूं कौन किसके पीछे ध्यान दे रहा है ।... रुक तू....

कुछ देर बाद जब दोनों शांत हुए तो काजल ने कहा।

काजल - कुछ कहूं।।

चाहत - हा बोल ना ...

काजल - मुझे कुछ दिनों से एक बात फील हो रही ।

चाहत उसकी तरफ देखते हुए - अब घुमा मत बोल ना।

काजल - मुझे ... वो मुझे लगता है...

चाहत - क्या लगता है...

काजल - शायद .... वो

चाहत हाथ दिखाते हुए - अब नहीं बोली ना तो कान के नीचे लगाऊंगी।

काजल ने आंख बंद की और बोली - मुझे अनिल ने परपोज किया है।

काजल कुछ देर तक वैसे ही थी । उसने आंख खोल कर देखा तो पाया।

चाहत कुछ सोच रही है।

ये देख काजल ने उसे कहा - क्या हुआ ?

चाहत ने एक गहरी सांस ली और कहा - क्या तू भी उसे?

काजल ने एकदम से कहा - नहीं । वो .. मै एक्चुअली।

चाहत उसका हाथ अपने हाथ में लेकर - देख वो बुरा नहीं है पर ... लड़कियों के बारे में उसका रिकॉर्ड खराब है... वो किसी भी लड़की के साथ अच्छे से नहीं रहा है...

इतना बोलते ही काजल बोल पड़ी - मैंने उसे हा नहीं कहा है।... मै... वो बोल ही रही थी तभी

चाहत - तूने उसे हा कह दिया है ... तेरे चेहरे पर ही दिख रहा है।

काजल अब चुप हो गई । उसे पता था कि चाहत से वो कुछ नहीं छुपा सकती। उसने सिर झुका दिया।

चाहत - तू रह उसके साथ ... बस अगर कहीं कुछ गलत लगे तो... सबसे पहले मुझे बताना।

काजल ने हा में सिर हिलाया।

चाहत ने काजल को गले लगाया और कहा - congratulation

काजल - थैंक्स...नाराज़ तो नहीं है ना तू...

चाहत - बिल्कुल नहीं ... बस खुद का ख्याल रखना ... वो क्या है ना... एक ही मिस्टी है.. मेरे पास ... तुझसे ही तो मेरी लाइफ की स्वीटनेस बरकरार है।।।

काजल हा बोल उससे दूर हुई ।

चाहत - आज चले

काजल - कहा?

चाहत - अपने अड्डे पर ।

काजल - बिल्कुल ।

कोई था जिसका दिल आज टूट चुका था .... वो था अंश। गलती से उसने काजल और चाहत की अनिल को लेकर हुई बात सुन ली थी। उसने खुद को किसी तरह संभाला और क्लास में आकर बैठ गया था।

क्लास का टाइम हो चुका था।

सब क्लास आने लगे। अंश को पता था ये हो सकता है पर फिर भी एक उम्मीद थी उसे। पर शायद वो उम्मीद भी अब टूट चुकी है।

उसे बुरा भी नहीं लग रहा था। बस उसके लिए वो पहला अहसास था।

कभी कभी ऐसा होता है। लोग किसी चीज़ को बस देख के उसे पसंद कर लेते है । उसे अपने पास लाने के बारे में सोचते है ।

उसके साथ रहना चाहते और उसे पाने के लिए हर पॉसिबिलिटी अपनाते है ।

पर जब वो समझ जाते है वो चीज उनके लिए नहीं है तो उसे वो छोड़ भी देते है।

ये कुछ ऐसा था "जैसे की पहली बारिश में मिट्टी का भीग जाना और एक सौंधी खुशबू का आना।" पर ये कुछ ही समय के होता है।

अंश बस उसी खुशबू को लिए क्लास से बाहर आया ।

अपना चेहरा धोया और फिर मुस्कुराते हुए क्लास की ओर

चला गया कहीं ना कहीं उसे पता चल चुका था "पसंद कि चीज को ना पाकर भी खुश रहा जा सकता है।

ये देखते हुए की वह चीज जिसके पास है... इससे वो चीज खुश है ।"

ऐसे ही वो क्लास आया । क्लासेस खत्म हुई सब घर की तरफ निकाल गए।

चाहत हमेशा की तरह अपने साइकिल से उन पपी के पास पहुंची वहा उसे बिस्कटिट्स दे कर उसे सहलाने लगी तभी किसी की एक परछाई वहा से गुजरी। उसे पहले तो समझ नहीं आया। उसने मुड़ के देख तो हर्ष था जो उसे देख रहा था।

चाहत हर्ष को ऐसे अचानक देख थोड़े देर के लिए रुक गई फिर उसने उसे देख कर पूछा।

चाहत - तुम... यहां क्या कर रहे हो?

हर्ष - क्यू मै यहां नहीं आ सकता क्या??

चाहत - नहीं ऐसा नहीं है ... मै तो बस यूं ही ...

हर्ष पापी की तरफ इशारा कर के - ये तुम्हारे है।।

चाहत - नहीं ...

हर्ष - तो फिर ...

चाहत - मतलब

हर्ष - जब ये तुम्हारे नहीं.... तो क्यू हो तुम इनके साथ?

चाहत - हर बार जरूरी नहीं ... जो चीज हमारी हो या हमसे उससे कोई फायदा हो... तभी उसके साथ रहा जाए।

हर्ष कुछ देर के लिए चुप हो गया। फिर मुस्कुरा कर कहा।

हर्ष - शायद तुम ठीक कह रही हो ।

वो बात ही कर रहे थे। तभी एक आवाज़ गूंजी ।

"तू यहां क्या कर रहा है ... "

दोनों आवाज़ की तरफ पलट गए । उस शख्स को देख चाहत के चेहरे पर गुस्सा और हर्ष के चेहरे पर मुस्कान आ गई...

हर्ष - मै चलता हूं । बोल कर मुस्कुराते हुए वहा से चला गया।

उस इंसान ने चाहत का रुख लिया। फिर कहा - ये यहां क्या कर रहा था।

चाहत - मुझे नहीं पता । ये उसने बिना किसी एक्सप्रेशन के कहा और जाने लगी ।

उसने एक हाथ से चाहत का हाथ थाम उसे रोक लिया।

चाहत - अध्यन .......

हा ये अध्यन था जिसे चाहत और हर्ष ने देखा था।

चाहत मुड़ी और पहले अपने हाथ को फिर अध्यन को देखा ।

अध्यन - सुन तो लो .... कुछ कहना था तुमसे।।

चाहत हाथ छुड़ाते हुए - नहीं सुनना कुछ ... मुझे देर हो रही है...

अध्यन - बस थोड़ी देर...

चाहत उसे देख कर - ठीक है ... पर पहले हाथ छोड़ो।

सुन अध्यन ने उसका हाथ छोड़ दिया ।

अध्यन सामने देखते हुए - हर्ष सही नहीं है...

चाहत उसकी तरफ थोड़े से आश्चर्य से देखने लगी।

अध्यन बात जारी रखते हुए - वो अच्छा लड़का नहीं है... दूर रहना तुम उससे।

चाहत - हम्म... ठीक है .. वो अच्छा नहीं है... तो कौन अच्छा है ... तुम या ....,तुम्हारी वो सोनिया...

चाहत ने बस इतना कहा अध्यन झटके के साथ उसे देखने लगा । चाहत ने भी अपना सिर पकड़ लिया ये उसने क्या कह दिया...

अध्यन कुछ देर चुप रहा फिर बोला - वो दोस्त है मेरी... पापा के फ्रेंड की बेटी ... और मेरे बचपन की दोस्त इससे ज्यादा के कुछ नहीं...

चाहत - नहीं वो... मै ... तो

अध्यन उसके पास आ कर - हा... हा.... मै समझ गया...

चाहत ने जल्दी से कहा - मुझे लेट हो रहा है... मै जाती हूं...

ये कह उसने अपनी साइकिल पकड़ी और वहा से भाग गई।

अध्यन होठो पर मुस्कुराहट लिए उसे देखता रहा और कुछ देर बाद वो भी चला गया।

चाहत का घर

चाहत मुस्कुराते हुए घर आती है घर के बाहर गेट पर किसी बाइक को देख वो दौड़ते हुए घर जाती है....

ये किसकी बाइक थी????

चाहत घर पहुंची .... बाइक को देख वो हैरान हो गई वो बाइक चाहत के पापा की थी ।

चाहत भागते हुए अपने घर के अंदर गई वहा देखा तो शिव जी चाय पी रहे थे।

चाहत उसको देख खुद को रोक ना सकी।

चाहत उनके पास जाकर उनसे गले मिली फिर उसने धीरे से उनके पैर छुए । वो बहुत खुश थी ।

शिव जी पुलिस में थे । उनकी पर्सनैलिटी थी भी दबंग टाइप थी । शांत और सपाट चेहरा सावला रंग और उनके होठ के ऊपर की मुछे उन्हें थोड़ा सा सख्त दिखती थी पर वो थे नहीं । आर्यन और चाहत अपने पापा पर गए थे ।

चाहत के पापा चाहत से - कैसा है मेरा बच्चा।

चाहत - अच्छी हूं ।

पापा - पढ़ाई कैसे चल रहीं है ,?

चाहत - अच्छी ...

चाहत को अपने पास बैठा शिव जी उनसे बात कर रहे थे। चाहत अपने पापा के बहुत करीब थी । अगर उसका बस चलता तो उन्हें कहीं जाने ही ना देती । पर उनका काम यही तो था जिस कारण वो उनको रोक भी नहीं सकती थी।

बहुत दिनों के बाद मिलने के कारण वो उन्हें देख रही थी । और उनकी बातो का जवाब ही दे रही थी।

अपने पापा को देख उसकी आंखे भर आई थी वो बस रोने ही वाली थी तभी आर्यन - दी... हटो ना.... कब से पापा से चिपकी हो मेरा नंबर कब आयेगा....

चाहत अपने पापा से दूर होते हुए - कभी नहीं...

ये बोल उसने एक बार फिर अपने पापा को देखा फिर कहा - और ये मेरे भी पापा है...., जब तक मन ना भरे तब तक मै उनसे चिपकी रहूंगी ....

आर्यन मुंह फुलाए बैठ गया । ये देख चाहत उसके पास बैठी

और बोली - जा सिमरन जा ....जा लग जा गले उनसे.... तू भी क्या याद रखेगी....,

आर्यन मुंह बनाता हुआ उठा और बोला - हम्मम ... आपको याद रखना भी कौन चाहत है ... ये बोल वो भाग गया और शिव जी के गले लग गया।

चाहत गुस्से उसे देखने लगी । अपने शूज उतारते हुए कहती है... हा बड़ा आया।

इतने में रीमा जी चाय का कप लिए आती है और सभी को सर्व करते हुए - चाहत बेटा कार्ड्स आ गए है । तुम देख लो तुम्हे कितने चाहिए।

चाहत - जी मम्मी।

चाहत कार्ड्स देखती है। साथ ही सोचती है कि उसे किन लोगो को कार्ड देना चाहिए....,

वो सोचते हुए रूम आती है । अपना काम पूरा कर रही होती है । उसके घर में आज जश्न का माहौल था उसके पापा जो आए थे।

ये माहौल वो हमेशा मिस करती थी। जब पापा होते थे तो घर में अलग ही चहल पहल होती थी । उनके आने से घर की

रौनक और बढ़ जाती थी।

चाहत ने आर्यन को आवाज़ दी जब वो नहीं आया तो वो खुद उसे बुलाने गई ।

चाहत - आर्यन ... बाबू कहा है...

चाहत ने देखा आर्यन और पापा दोनो कैरम खेल रहे है। चाहत उनके पास गई और कहा।

चाहत कमर में हाथ रख कर - ये आप दोनो क्या कर रहे है...??

आर्यन - दी कुछ खास नहीं ।।। बस बम बना रहे है...

चाहत चौक कर - क्या... बम

आर्यन चाहत को देखते हुए - हा सोच तो रहे है... एक आपके स्कूल में और एक मेरे स्कूल में फोड़ देते है... बताओ कैसा आइडिया है...

चाहत के बोलने से पहले शिव जी बोले - अरे .... टू गुड.... मै तुम दोनों की पूरी हेल्प करूंगा... वैसे ये करना कब है... ??

चाहत ने दोनो को घुरा और कहा - पापा इसका तो हमेशा का है .... पर अब आप भी शुरू हो गए ।।

चाहत आर्यन को देख कर - और तू .... उठ अभी

आर्यन - पर क्यू...???

चाहत। - क्युकी .... तुझे तेरा होमवर्क करना है.... चल अब।।।

आर्यन का चेहरा उतर गया । तो वो शिव जी की तरफ देख कर हेल्प मांगने लगा। शिव जी कुछ बोलने ही वाले थे उससे पहले चाहत बोली।

चाहत - पापा इसका होमवर्क हो जाने के बाद ... आप इसके साथ खेल लेना।... मै भी आऊंगी आपके साथ खेलने.... पर अभी इसका होमवर्क जरूरी है.... नहीं तो कल ये स्कूल भी नहीं जाएगा।

अब शिव जी के पास भी कोई तर्क नहीं बचा उन्होंने हार मान कर आर्यन को देखा जो चाहत के साथ जाने लगा।

शिव जी ने देखा दोनो पढ़ने में बिज़ी है तो वो किचन की तरफ चले गए जहा रीमा जी कुछ मसाले पीस रही थी। शिव जी ने उन्हें देखा। वो उनको एकटक देख रहे थे।

आखिर वो भी दूर रहते थे उनसे और उनके पास ये ही समय

था जो उनको सुकून दे सकता था।

वो उनके करीब आए और खुद बाकी की सब्जी धोने लगे । फिर कड़ाई निकाल छौका लगा कर दाल फ्राई किया । और साथ साथ बाकी काम करने लगे।

चाहत पानी लेने किचन आई तो पाया उसके पापा और मम्मी दोनो मिल कर काम कर रहे थे। ये उसके लिए नई बात नहीं थी । उसने बचपन से अपने पापा और मम्मी को एक दूसरे की मदद करते हुए देखा था।

उसे ये चीज पसंद थी। जहा दूसरे घरों में लोग लड़का लड़की में भेद करते थे वहीं चाहत की फैमिली ऐसी ना थी। सब को सामान्य मानती थी। उन्होंने कभी भी आर्यन और चाहत में कोई फर्क नहीं समझा था।

उसने पानी पिया और बाहर चले आईं थोड़ी देर में चाहट पर आर्यन का होमवर्क हुआ और वो दोनो एक साथ बाहर आए। मम्मी पापा को आवाज़ दी वो दोनो भी आ गए । सब वहीं बैठ कर कैरम खेलने लगे।

हमेशा की तरह आज भी आर्यन और शिव जी की टीम जीत गई थी। चाहत मुंह फुला कर बैठ गई थी।

तभी रीमा जी ने घड़ी देखा जो 9 बजने का इशारा कर रही थी। उन्होंने कहा बाकी कल अभी खाना खा लो।

सबने खाना खाया। चाहत और आर्यन सो गए।

शिव जी रूम में आए तो रीमा जी उनको देख रही थी फिर एकदम से उनके गले लग गईं।

शिव जी उनका सिर सहला रहे थे। और वो उनके गले लगी रही थी। हर औरत जो अपने पति से दूर हो.... तो उसका भी यही हाल होता है जो इस वक़्त रीमा की का था।

रीमा जी - उनसे गले लगे हुए,... बहुत याद करती हूं आपको....

शिव जी - मै भी।

रीमा जी - एक दिन भी बात ना हो तो नींद नहीं आती...

शिव जी - मुझे भी।

रीमा जी - पता है ... आपको याद ना करने के लिए मै अपने आप को काम में बिज़ी रखती हूं।....

शिव जी उनको अपने पास बिठा लिया और कहा - अब तो सामने हूं अब बात कर लो।

रीमा जी ने देखा शिव जी उनके पास बैठे थे। थोड़े देर के लिए तो उनको समझ नहीं आया फिर जब रीमा जी ने देखा शिव जी उनको प्यार से देख रहे है ।

तो वो सब भूल उनकी आंखो में खो गई।
 
अध्यन का घर

हमेशा की तरह आज भी अध्यन चाहत के ख्यालों में गुम दाल में चम्मच घुमा कर मुस्कुरा रहा था।

वहीं दूसरी तरफ देव जी और गौरी उसे देख रहे थे।

गौरी जी - बाबू ... दाल आलरेडी घुल गई है.... तुम उसे और मत घोलो।

देव जी - हा और इससे ज्यादा पीली भी नहीं होगी ..... और ना ही गाढ़ी होगी।

अध्यन दोनो की बात सुन रुक गया । फिर मुस्कुराते हुए खाने लगा।

गौरी जी ने देवजी कि तरफ देखा तो उन्होंने इशारे से उन्हें खाने को कहा।

अगली सुबह

चाहत का घर

सुबह चाहत की नींद खुली हमेशा की तरह अपने काम को कर वो किचन गई । वहा पापा खाना बना रहे थे। चाहत वहा उनके पास गई ।

चाहत - क्या बन रहा है??

पापा - दही कचौड़ी...

चाहत - अरे वाह,... लव यू पापा।

पापा - लव यू टू..... चलो जाओ रेडी हो जाओ । जल्दी से।

चाहत - ओके

नाश्ते की टेबल

चाहत का घर

चाहत ने नाश्ता किया फिर उसके स्कूल जाने का टाइम हो गया । वो रेडी होकर बाहर जा रही थी । तभी उसकी मम्मी ने

आवाज़ दी ।

मम्मी - ये कार्ड्स तो ले जा। रीमा जी हाथ में कार्ड्स लिए बोलीं।

चाहत - ठीक है मम्मी।

चाहत कार्ड्स ले कर चले गई ।

चाहत रास्ते में सोच रही थी। उसके किन दोस्तो को वो ये कार्ड्स देगी।

स्कूल क्लासरूम

चाहत क्लास पहुंची । वहा पहले अध्यन को देखी। अध्यन हमेशा की तरह चहरे पर मुस्कान लिए उसे देख रहा था।

चाहत चलते चलते रुक गई। उसकी आंखे देख वो भी रुक कर सब कुछ भूल कर उसे देखने लगा।

क्लासरूम स्कूल

अध्यन और चाहत यू ही कुछ देर एक दूसरे को देख रहे थे । अध्यन चाहत को देख कर....

"जरूरत से ज्यादा

बेमिसाल हो तुम

थोड़ी सावली हो

पर बवाल हो तुम" ( unknown)

चाहत और अध्यन एक दूसरे में खोए ही रहते अगर प्रेयर बेल नहीं बजती ।

चाहत अध्यन से ध्यान हटा कर । प्रेयर ग्राउंड जाती है वो अपने दिल पर हाथ रख अपनी बढ़ी हुई धड़कन को काबू करने की कोशिश करती है।

इधर अध्यन भी उसे भागते हुए देखता है । और अपने सिर पर हाथ फेर कर पलटा है । अंश उसे घूरते रहता है।

अंश - क्या कर रहा है...????

अध्यन - कुछ नहीं..... कुछ भी तो नहीं ।

अंश - तो पागलों की तरह मुस्कुरा क्यू रहा है???

अध्यन उसके गले में हाथ डाल - ऐवई।।।।।

अंश सिर पर हाथ रख- होता है ..... होता है.... शुरू शुरु में ऐसा ही होता है....

अध्ययन उसे खींच कर - चल ना......

दोनों ग्राउंड में पहुंचे प्रेयर हुई और क्लास आ गए।

क्लास स्टार्ट थी चाहत ने अध्यन को देखा। और सिर झुका कर पढ़ने लगी पड़ते हुए उसने एक बार भी अध्यन की तरफ नहीं देखा था।

वहीं दूसरी तरफ अध्यन बेहद खुश था आज उसने पहली बार चाहत की आंखो में भी उस शिद्दत की झलक देखी थी जो उसकी आंखो में थी।

ये देख वो खुश था। उसने मन ही मन कहा -" अभी तो बस झलक देखी है......दीदार अभी बाकी है।"

ऐसे ही लंच हुआ । क्लास में सब बाहर जाने लगे । चाहत ने अध्यन से पूछा - क्या तुम मुझे थोड़ी देर में ग्राउंड में मिलोगे.....?

अध्यन - हा ठीक है।

चाहत काजल को लेकर चले जाती है।

काजल - तूने उसे ग्राउंड में क्यू बुलाया ।

चाहत - इसके लिए.... और कार्ड्स दिखाती है।

काजल - ये क्या है..... कह के कार्ड्स ले लेती है....

चाहत - ये मेरे न्यू घर की इनॉर्गरेशन हो रही है...... ।तो उसका कार्ड है ....। और ये तेरा कार्ड.......... । ये बोल वो कार्ड उसकी तरफ बढ़ा देती है।

इतने देर में अध्यन और अंश ग्राउंड में एक साथ आ जाते है।

चाहत - ये लड़के कहीं पर भी अकेले नहीं जा सकते क्या?

काजल - क्यू.....

चाहत - देख ना.... अब अंश को ले आया..... खुद नहीं आ सकता था।

काजल - वो वैसे क्यूट है.....

चाहत - कौन

काजल - अंश

चाहत - सच में

काजल - हा

चाहत - हा.... वो तो है।

अंश और अध्यन साथ में उनके पास आ रहे थे ।

अध्यन - तू मेरे साथ क्यू चल रहा है... जा ना अपना काम कर।

अंश - बिल्कुल नहीं. ।।

अध्यन - हा चल ना .... बारात ले कर जा रहा हूं ना ... सब जाएंगे.. दो चार लोगो को और बुला ले।

अंश दात दिखाते हुए उसे देखता है। ये देख ।

अध्यन - दांत मत दिखा ....

दोनों उनके पास पहुंचते है।

चाहत - ये तुम दोनो के लिए...

दोनों हाथ में कार्ड लेकर । उसे देखते है।

चाहत - मेरे घर का इनोर्गरेशन है .... तो मै तुम दोनो को भी इन्वाइट कर रही हूं... टाइम मिले तो जरूर आना।

अंश और अध्यन साथ में - ओके।

अंश धीरे से - इसका बस चले तो ये ( अध्यन) जहनुम में भी तुम्हारे लिए आ जाए।

चाहत - तुमने कुछ कहा ...

अंश - नहीं तो आवाज़ आईं क्या...?

चाहत - नहीं तो पर मुझे लगा.... खैर छोड़ो ... आना जरूर।

ये बोल दोनो क्लास के साइड चले गई।

काजल - चाहत तू तो बोल रही थी.... कि तू बस अध्यन को कार्ड देगी।... पर तूने अंश को भी कार्ड दे दिया।

चाहत - अब वो भी आया था तो उसे भी दे दिया...

छोड़ ना ....

काजल - एक बात पूछूं...

चाहत - हा बोल ना...

काजल - मुझे लगता है... की अध्यन तुझे पसंद करता है...

चाहत रुक गई और काजल को देखते हुए बोली

चाहत - पता है मुझे भी लगा था फिर ..

काजल - फिर क्या...

चाहत अध्यन की तरफ इशारा कर - देख उसे और मुझे देख .... लोग हमेशा अपने लिए खूबसरत पार्टनर ढूंढते है .... तो मै श्योर हूं कि वो ऐसा नहीं सोचता।

काजल - अगर मान ले इन सभी चिजो के बाद भी वह तुझे पसंद करे तो....

चाहत अब चुप हो गई ।उसकी चुप्पी देख काजल ने बात जारी रखी...

काजल - उसने जैसे तुझे समझाया ... जैसे वो तुझे देखता है ... मुझे लगता है he likes you...

चाहत अभी भी सोच रही थी क्या होगा अगर काजल की बात सच हुई तो... ये सोचते हुए दोनो क्लास चले गई।

तभी टीचर आ गए और क्लासेज चलने लगी । अध्यन और अंश आए तो सर ने उन्हें अंदर आने को कहा।

अध्यन भी चाहत को देख वहीं बैठ गया। इधर चाहत भी परेशानी में सोच रही थी। अगर ये हुआ तो वो क्या कहेगी। फिर उसने अपना सिर झटका और वापस सर को देखने लगीं।

ऐसे ही क्लासेज हुई और सब घर के लिए निकाल गए।
 
अध्यन का घर

अध्यन जब से घर आया था तब से सोच रहा था । इनोरग्रेशन है । तो उसे चाहत के लिए क्या लेकर जाना चाहिए। थक कर बैठ गया।

वो बाहर आया देखा उसके पापा लैपटॉप पर कुछ काम कर रहे थे।

वो उनके पास गया ।

अध्यन - डेड ... अगर किसी के घर इनोग्रारेशन के लिए जाना हो तो और उसे क्या गिफ्ट देना चाहिए..... ???

देव जी लैपटॉप को देखते हुए - तुम्हे किसके घर जाना है...?

अध्यन - मेरी .. मेरा मतलब है... मेरे एक फ्रेंड है उसके घर का इनोग्रेशन है तो ...

देव जी लैपटॉप बंद करते हुए बोले - डिपेंड करता है वो तुम्हारे लिए कितना खास है।

अध्यन खोए हुए - बहुत खास है.... फिर देव जी को देख कर ...., मेरा मतलब है बहुत अच्छा दोस्त है...

देव जी - गिफ्ट एक ऐसा जरिया है जिसको देकर हम सामने वाले को ये बताते है है वो कितना खास है हमारे लिए।

अध्यन - तो मै क्या दू उसे ....

फिर देव जी सामने देखते हुए - कुछ ऐसा ... जो उसके लिए खास भी हो... और जिससे उसे तुम्हारी याद भी आए ।

अध्यन - ओके मै समझ गया....

वो उठा और जाने लगा पर पता नहीं उसे क्या सूझा वो वापस आकर देव जी के सामने खड़ा हुआ और बोला।

तब तक देव जी ने लैपटॉप दुबारा ऑन कर दिया था।

अध्यन - डेड एक बात बताओ ....

देव जी अपना लैपटॉप बंद करते हुए - हा बोलो

अध्यन - मुझे वो.... मुझे कुछ बताना था ... वो...

देव जी उसे अपने पास बैठा लेते है... और प्यार से बोलते है - तुम रुक क्यों रहे हो... बोलो बेझिझक बोलो....

अध्यन एक गहरी सांस ले के - डेड मुझे किसी से कुछ जानना हो तो क्या करू... मतलब उसके देख कर लगता है जो मै सोच रहा हूं वो भी वहीं सोच रहा है... पर वो बोलता नहीं ... मुझे उसे समझना है... तो क्या उसने आप मेरी मदद कर सकते है।

देव जी - देखो बेटा मै कोई भगवान तो हूं नहीं.... पर जो तुम्हारी सिट्यूएशन है ना उसमे बस सही टाइम का वेट करो।

अध्यन - मतलब...

देव जी - मतलब किसी को भी समझना है तो उसके साथ वक़्त बिताओ उसकी बातों में छिपी बातो को समझने की कोशिश करो... इन शॉर्ट उसे समझने की कोशिश करो...

अध्यन पहले ही उनकी बात ध्यान से सुन रहा था।

ये सुन अध्यन के चेहरे पर मुस्कान आ गई। और बोला - थैंक्यू डेड .... लव यू।

देव जी - लव यू टू... ।।। देव जी उसे अपने पास बैठते हुए - अब बताओ... वो किसी... मेरा नहीं मेरी है ना

अध्यन की ये सुन सिट्टी पिट्टी गुम हो गई वो बोला- नहीं ऐसी कोई बात नहीं और वहा से भाग गया...

इधर देव जी जोर से हसने लगे।

अध्यन रूम में आया और उसने किसी को कॉल किया।

अंश का घर

अंश का रूम

अंश अपने रूम में सोया था उसके मोबाइल की घंटी बजी उसने एक बार इगनोर किया। घंटी फिर बजी। थक कर उसने कॉल उठा लिया ।

अंश अलसाई आवाज़ में - बोल .... तुझे भी दो मिनिट चैन नहीं है...

अध्यन - 10 मिनिट में चौक के पास मिल।

ये कह उसने फोन काट दिया ।

अंश गुस्से में - मेरी तो कोई वैल्यू ही नहीं है...

अंश फिर सो गया फिर उसका फोन बजा । फोन उठा कर -

आ रहा हूं .... मर मत आ रहा हूं।

अम्बेडकर चौक

इधर अध्यन घर से बाइक निकाल चौक पहुंचा जहा अंश खड़ा उसे देख रहा था।

अध्यन - चल ।

अंश उसे गुस्से में देखता हुआ बाइक में चढ़ा ।

अध्यन ने उसका गुस्सा से भरा चेहरा देख । उसे हसी आ रही थी फिर भी वो जबरदस्ती सीरियस होकर अपनी बाइक आगे बड़ा रहा था.....

अंश - हम कहा जा रहे है।

अध्यन चुप था।

अंश तंग आकर - अरे कुछ बोल भी .... या तो मुझे नीचे उतर दे....

अध्यन - चुप बैठ ना।

थोड़ी देर बाद दोनो एक गिफ्ट शॉप पर पहुंचे। जो कि बहुत बड़ा था । वहा हर तरह का सामान था और गिफ्ट भी थे...

गिफ्ट शॉप में

अंश - यहां क्यू लाया है मुझे।।।

अध्यन - चुप चाप यहां से आगे जा..... और तुझे जो गिफ्ट अच्छा लगे वो उठा कर ले आ।

अंश - ठीक है।

अध्यन - मै लेफ्ट और तू राइट .... ठीक है ओके। ये उसने हाथो के इशारे से कहा।

दोनों जाकर गिफ्ट देखने लगे।

आधे घंटे

बाद अध्यन को कोई गिफ्ट पसंद नहीं आया वह खाली हाथ बाहर आया।

अध्यन काउंटर के पास अंश का वेट कर रहा था । थोड़े देर में उसने देखा अंश और उसके पीछे दो वर्कर दो बकेट में ढेर सारा सामान लिए आ रहे थे।

ये देख अध्यन खुश था । उसे लगा शायद अंश ने कुछ अच्छा सा पसंद किया होगा। पर उसकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं रही ।

उसके पीछे से वो वर्कर निकाल कर आगे बढ़ गए।

अध्यन - तुझे भी कुछ अच्छा नहीं मिला...

अंश खुश होकर - ऐसा भी कभी हो सकता है.... ये बोल उसने अपना हाथ आगे किया ।

अध्यन उसका हाथ देख सिर पर हाथ रख कर बोला - ये क्या है।

अंश -देख नहीं रहा क्या.... सेविंग रेजर।

अध्यन गुस्से में - मैंने तुझे गिफ्ट लाने को बोला था।

अंश मासूमियत से - लाया तो हूं ... मेरे लिए.... देख मै बड़ा हो गया हूं .... मुझे इसकी जरूरत पड़ेगी....

अध्यन - तुझसे ना कुछ नहीं हो सकता .... ये बोल उसने ऊपर देखा ही था कि उसे कुछ ऐसा दिख जिसे देख उसकी आंखे चमक गई।

अध्यन ने उस और दुकानदार को उगली दिखा कर कहा - मुझे ये चाहिए......। पैक कर दो।।।
 
दो दिन बाद अध्यन का घर....

अध्यन रेडी होकर बाहर आया उसके हाथ में एक गिफ्ट था। उसकी मम्मी गौरी जी उसे देख रही थी ।

अध्यन हाथ में मोबाइल पकड़े हुए कॉल कर रहा था।

गौरी जी देव जी से - पूछो ना...... उसे कहा जा रहा है।

देव जी - नहीं वो खुद बताएगा।

गौरी जी - और नहीं बताया तो आप पूछना उससे ।

देव जी - हा ठीक है ।

तभी बाहर किसी की बाइक आकर रूकी ।

अध्यन बाहर की तरफ चला गया। कुछ देर बाद अध्यन अंदर आया उसके साथ अंश था ।

उसे देख गौरी जी जल्दी से अंदर गई और नौकरों से नाश्ते के लिए बोली।

अध्यन ने इशारे से अंश से कहा - चल खा ले साथ में।

दोनों नाश्ता करने लगे ।

गौरी जी ने प्लेट्स लगाई फिर सब को सर्व किया पर खुद नहीं खा रही थी तो अध्यन ने कहा - क्या हुआ...... मॉम आप नहीं खाओगे क्या???

गौरी जी - नहीं वो.... आप सीमा के यहां पूजा है ना तो..... मुझे वहा जाना है तो मै नहीं खाऊंगी ।

अध्यन और अंश एक साथ - अच्छा।

देव जी को गौरी जी इशारे कर रही थी तब देव जी ने आखिर पूछ ही लिया - वैसे तुम दोनो कहा जा रहे हो।

उनका इतना पूछना था और अंश को खासी आना शुरू हो गया।

गौरी जी ने उसकी पीठ सहलाने लगी।

गौरी जी - आराम से खाओ ।

अध्यन - हा भाई देख कर।

अध्यन देव जी को देख कर - डेड हम लोग एक फ्रेंड के घर इनॉर्गेशन है तो वहीं जा रहे है।

अध्यन के पापा - ओह...

अध्यन वहा से उठ बेडरूम गया और वापस आकर एक कार्ड जो चाहत ने उसे दिया था वो पापा को दें कर उसने अपनी बात जारी रखते हुए कहा - चाहत हमारे क्लास की कैप्टन है ।साथ ही साथ मेरी अच्छी फ्रेंड भी मै और अंश उसी के घर की इनोरगरेशन में जा रहे है । उसी के लिए मैंने ये गिफ्ट लिया है। शांति से अध्यन ने कहा तो अंश मुह खोलें उसे देखने लगा।

देव जी ने गौरी जी की तरफ देखा जिनके आंखो में सुकून था।

देव जी - अध्यन बेटा इसमें पूजा भी लिखा है । तुम साथ में नारियल भी ले जाना ।

अध्यन - जी पापा।

ये बोल वो बाहर की तरफ जा रहा था। तभी गौरी की ने कहा।

गौरी जी - बाबू.... तुम ये जो पहन के जा रहे हो ना इस शर्ट पर कुछ लगा है । शायद अभी ब्रेक फास्ट के टाइम लगा हो तुम जाओ और दूसरी शर्ट पहन लो।

अध्यन - ओह मैंने देखा नहीं ठीक है अभी चेंज कर के आता

हूं । ये बोल वो रूम में चले गया।

तभी एकदम से देव जी अंश से बोले - ये चाहत सिर्फ दोस्त है या..

अंश सकपकाते हुए - हा बस दोस्त ।

देव जी अपनी आइब्रो ऊपर के बस दोस्त ।

तभी अध्यन आते हुए - हा डेड बस दोस्त। ये बोल वो वहा से निकल गया।

उसके बाहर आते ही अंश भी वहा से भाग गया ।

बाहर आकर दोनों एक साथ - बच गए।

ये बोल अध्यन और अंश हसने लगे ।

अंदर देव और गौरी जी दोनो उनको जाते हुए देखती रही । फिर गौरी जी बोली - शायद आप सही कह रहे हो .... हमे उसे टाइम देना चाहिए ..... जैसे आज उसने खुद बताया वैसे वो खुद ही बता देगा।

देव जी ने कुछ नहीं कहा वो बस मुस्कुरा दिए ।

चाहत का न्यू घर

घर में आज बहुत चहल पहल थी चाहत की दादी भी अाई थी।

बाकी रिश्तेदार भी आए थे। चाहत सभी से बात कर रही थी तभी उसे बाइक की आवाज़ आती है।

वो बाहर की तरफ देखती है पर उसे कोई नजर नहीं आता।

कुछ देर में गेट खुलता है अध्यन अंदर आता है और साथ में अंश भी।

चाहत ने उन्हें देखा वो अंजान बन कर इधर उधर देख रहे थे । चाहत ने देखा अध्यन ने ब्लू जींस के साथ व्हाइट शर्ट पहनी है । और साथ में अंश ने ब्लू शर्ट के साथ ब्लैक जींस पहनी है दोनो आज बहुत अच्छे लग रहे थे ।

उसने काजल को आवाज़ दी । काजल उसके पास अाई तो उसने उसे दोनो के पास भेजा और अंदर लाने को कहा।

दोनों को लेने जब काजल पहुंची तो अंश तो उसे देखते ही गिरते गिरते बचा। काजल ने भी ब्लू कलर का लोग वन पीस पहना था कान में चमकीले इयर रिंग पहनी थी।

वो बाहर प्यारी लग रही थीं।

अध्यन ने अंश कोहनी मारी तो वो खुद को संभाल पाया था से

काजल ने दोनों से कहा - चलो अन्दर ।

दोनों ने हा में सिर हिलाया। और अंदर आ गए।

अंदर आते ही उन्होंने देखा चाहत हाथ में थाल लिए आ रही है जिसमें बहुत सारे फूल है।

अध्यन ने चाहत को देखा तो वो भी उसको देखता ही रह गया।

चाहत ने व्हाइट घेरे वाला सूट पहना था जो कि बहुत ज्यादा लॉग होने के कारण जमीन तक जा रहा था। और उस पर लाल दुपट्टा लगाया था ।कान में छोटे छोटे झुमके पहने वो बहुत प्यारी लग रही थीं । वो उसे पहली बार ऐसे देख रहा था।

उसने थाल जाकर पंडित जी को दी । फिर वापस आकर अध्यन के पास अाई और बोली कोई परेशानी तो नहीं हुए ना।

अंश - नहीं हुई... दोनो को देख कर वैसे आज तुम दोनों काफी अच्छी लग रही हो।

चाहत और काजल एक साथ - थैंक्यू।

दोनों ने थोड़े जोर से कहा तो अध्यन जैसे नींद से जागा उसने भी हाथ में पकड़ा नारियल चाहत को देते हुए कहा - ये मेरे

साइड से इसे भी चढ़ा देना।

चाहत ने नारियल लेकर वहा पर घूम रही बच्ची से कहा- ये जाओ पंडित जी को दे आओ वो बच्ची वहा से चले गईं ।

चाहत ने अध्यन और अंश को इशारा कर के एक तरफ ले गई जहां खाने की व्यवस्था की गई थी।

चाहत दोनो को वहा लगे टेबल पर बैठा कर वहा काम के रहे आदमियों से बोल - भैया दो प्लेट ईधर भी ।

वो लोग दो प्लेट नाश्ता वहा ले आए।

दोनों ने मना किया। तो चाहत ने 4 ऑरेंज जूस मगाया फिर चारो साथ में मिल कर जूस पीते है।

फिर चाहत को कोई आवाज़ देकर कहता है आओ पूजा स्टार्ट होने वाली है ।

चारो अंदर जाते है। चाहत के पापा मिल जाते हैं । चाहत अपने पापा से इंट्रोड्यूज करवाती है तो दोनों उनको विश कर करते है।

चाहत के पापा - कैसे हो आप सब ।

अध्यन और अंश - अच्छे है

तभी उनको कोई आवाज़ देता है। तो शिव जी कहते है - मुझे

कुछ काम है.... आप सब खाना खा कर जाना।

फिर सब साथ मिलकर उस कमरे में जाते है जहा पूजा हो रही होती है।

अंश अध्यन को देख - कितना देखेगा। नजर लग जाएगी उसे।

अध्यन - तू अपना मुंह ना बंद रखा कर समझा।

अंश ने देखा हवन स्टार्ट होने वाला है उसने अध्यन से कहा - तू हवन में जाएगा ना ।

अध्यन - हा।

अंश - ठीक है।

दोनों हवन के जगह पहुंचे और वहीं बैठ गए।

वहा बैठे शिव जी और रीमा जी को देख कर । अंश ने अध्यन से कहा - वो चाहत के पापा है। लगता है चाहत का रंग अपने पापा पर गया है। क्युकी उसकी मम्मी तो गोरी है।

अध्यन तो चाहत में ही खोया था । उसने बस हा में सिर हिला दिया।

ये देख अंश - इसका कुछ नहीं हो सकता।

पूजा खत्म हुई सब को आरती दी गई । पंडित जी ने कहा

एक दिया दिया और कहा इसे पूरे घर में घूमा कर बाहर रख देना । चाहत ने हा में सिर हिलाया। और दिया लेकर बाहर चले गई ।

पंडित जी अध्यन की तरफ एक लोटा बढ़ा कर बेटा जब वो आए तो इस गंगाजल को उस पर छिड़क देना।

शिव जी अध्यन की तरफ देख - हा बेटा जाओ।

अध्यन गेट के पास उसका इंतज़ार करने लगा।

चाहत आती है अध्यन ने उसे इशारा कर रुकने को कहा । और उसके पास जाकर लोटे से पानी ले कर दुबी से उस पर पानी छिड़क देता है। और दोनो साथ में आकर सबको प्रसाद देने लगते है। चाहत सब को खाना खा कर जाने को कहती है।

चाहत अध्यन को अपने साथ खाने के लिए लेकर आती है वहा वो देखती है काजल और अंश पहले ही उनका इंतज़ार करते रहते है। दोनों उनके पास जाकर ।

चाहत - तुम लोगो ने खाना खाया।

अंश - अभी तक तो नहीं।

चाहत - चलो सब साथ में खाते है।

ये बोल सब प्लेट निकलते है और खाने लगते है। खाने की

प्लेट लेकर वो एक टेबल पर बैठते है । काजल एक रसगुल्ला उठा कर चाहत को खिला देती हैं।

अध्यन भी चाहत को खिलाना चाहता था पर खिला ना सका। सब खाना कर उठे । चाहत ने उनसे कहा - चलो घर दिखती हूं तुम सब को।

चाहत आगे आगे जा रही थी। अध्यन हर रूम को देख रहा था। चाहत के रूम आते ही चाहत ने कहा - ये मेरा रूम है ।

अध्यन रुम को देखते हुए - खूबसूरत है।

चाहत सिर झुकते हुए - थैंक्यू।

अध्यन की नजर सामने लगी फोटोस पर गई जहा चाहत और आर्यन की फोटोस थी।

वो उन फोटोस को देख कर - तुम कितनी मोटी थी यार और क्यूट भी ।

चाहत - हा सब मेरे पास इसीलिए आते थे क्युकी मै मोटी थी । सब मेरे चिक्स पुल करते रहते थे।

अध्यन सोचते हुए - मेरा भी मन करता है इन्हे खींचने का।

चाहत उसे खोए हुए देख कर - कहा खो गए।

अंश उसके पास आकर - चल हमे चलना है।

अध्यन होश में आकर - हा चलो ।

काजल भी कहती है - हा मै भी चलती हूं ।

चाहत - चलो मै तुम सब को बाहर छोड़ देती हूं।

सब बाहर आते है ।

चाहत काजल को गले लगा लेती है तभी एक लड़का बाइक में उनके सामने आता है। काजल को छोड़ सबका मुंह बन जाता है।

अनिल काजल देख - बहुत प्यारी लग रही हो।

काजल उसे देख मुस्कुराते हुए उसके साथ बैठ गई। सब को बाय बोल वो चले गई।

चाहत ने अध्यन और अंश को प्रसाद का दिया । और कहा ये तुम दोनों घर के जाओ।

दोनों ने हा में सिर हिला दिया। अध्यन वहा से अपनी बाइक लेने चला गया।

इधर अध्यन ने भी अपनी बाइक निकाल ली फिर अध्यन ने अपनी डिक्की से एक गिफ्ट निकाला और चाहत की तरफ बढ़ा दिया।

चाहत ने पहले ना कहा तो अध्यन ने उसे कहा - प्लीज़.... तो

वो मान गई ।

गिफ्ट देकर एक नजर चाहत को देख अध्यन और अंश वापस चले आए।

चाहत रूम में आकर उस गिफ्ट को देखने लगी....

उसने उसे देखा जिसमें रेड कलर का रैपर लगा था और उस रैपर के साथ एक चॉकलेट भी चिपकी थी । चॉकलेट निकाल चाहत मुस्कुराई ।

रैपर खोलने लगी । उसे खोल कर उसने देखा तो उसमें एक विंड चाइम थी । जिसे देख चाहत फिर से मुस्कुराने लगी । स्टील की गोल लबी डंडी वाला वो विंड चाइम बहुत खूबसूरत था। उसने लगे व्हाइट नग उसे और खूबसूरत बना रहे थे।

उसमे से एक चिट गिरी। चाहत ने उसे खोला तो उसमे कुछ लिखा था।

"चाहत ,

जब तुमने मुझे अपने घर बुलाया । तो मुझे लगा तुम्हे कुछ स्पेशल देना चाहिए ।

तो मै ये ले आया। इसे तुम अपने रूम में रखना इसकी आवाज़ बहुत प्यारी है । जितनी प्यारी तुम हो उतनी ही ये

प्यारी हैं।"

चाहत उठी और मुस्कुराते हुए उसने वो विंड चाइम अपने रूम की खिड़की पर टांग दिया।

बाहर से चाहत को किसी ने आवाज़ दी।
 
अध्यन रास्ते में अंश के साथ जा रहा था।

वो चाहत को याद कर मुस्कुराए जा रहा था । तभी उसने देखा ।

अंश थोड़ा उदास था उसे देख अध्यन - काजल के बारे में सोच रहा है।

अंश - हा ... पता है मुझे वो लड़का ठीक नहीं लगा।

मैंने उसके बारे ने पता लगाया था। उसके और भी चक्कर है। कितनी ही लड़कियों के साथ घूमता है।

अध्यन - ऐसा है ... तो कल ही हम चाहत से बात करते हैं।

अंश - चाहत से क्यू..??

अध्यन - क्युकी चाहत ही उनके बारे में सही से बता पाएगी । और अगर वो सही नहीं है तो एक वहीं है जो उसे (काजल) समझा पाएगी।

अंश - ठीक है।

अध्यन अंश को छोड़ घर आ जाता है।

अध्यन का घर

अध्यन मुस्कुराते हुए घर आया। शाम का वक्त था । सब घर पर थे। वो आया और सबसे पहले गौरी जी के पास गया । अध्यन अपनी मॉम को पीछे से पकड़ कर - मॉम मै आ गया।

गौरी जी - दिख रहा है।।।

अध्यन अपनी मॉम को प्रसाद देते हुए।

अध्यन - मॉम ये चाहत ने दिया है।... पूजा का प्रसाद है .. आप और डेड खा लेना।

गौरी जी - अच्छा...

गौरी जी ने देखा आज अध्यन और दिनों के मुकाबले ज्यादा

खुश है ये देख वो मुस्कुरा उठी ।

अध्यन अपने रूम आया। उसने अपना मोबाइल निकला। और उसने उसे ओपन किया तभी एक तस्वीर उभरी जिसे देख उसने मोबाइल अपने सीने से लगा लिया।

ये फोटो चाहत की थी । चाहत की ये फोटो उसने तब ली थी जब वो दिया बाहर रखने गई थीं। वहा कोई नहीं था जब वो दिया रख हाथ जोड़कर आंखे बंद किए हुए बैठी थी तब ये तस्वीर अध्यन ने के की थी। उसे उसने अपने मोबाइल पर वॉलपेपर बना कर रख लिया।

चाहत का घर

सब मेहमान के चले जाने के बाद घर में बस दादी ,शिव जी ,आर्यन, रीमा जी और चाहत ही बचे थे ।

चाहत टेंट वालो को समान रखवा रही थी। वहीं शिव जी आज काम कर रहे सभी लोगो को पैसे दे रहे थे। साथ में बैठा आर्यन प्रसाद दे रहा था और रीमा जी ने सब को धन्यवाद देते हुए कहा - आप सब के कारण आज का समारोह बहुत अच्छा हुआ । आप सब का दिल से धन्यवाद।

सब मुस्कुराते हुए प्रसाद ले कर घर चले गए।

दादी अंदर थी । वो बाहर अाई और बोली - बेटा बहुत वक़्त हो गया है चलो खाना खा लो।।

सब अंदर आ गए चाहत ने सबको कहा - मै कपड़े बदल कर आती हूं । आप सब भी फ्रेश हो जाओ।

सब अपने रूम चले गए। चाहत हैरम और टी शर्ट पहनकर अाई ।

सब डायनिंग टेबल पर आए बस चाहत नहीं अाई थी। रीमा जी ने खाना सर्व किया ।

दादी शिव जी से - भगवान की कृपा से आज का काम सकुशल हो गया ।

शिव जी - हा मा। मैंने तो सोचा भी नहीं था सब इतनी आसानी से हो जाएगा।

दादी जी - सब भगवान की कृपा है।

इतने देर में चाहत भी अाई और दादी और शिव जी की बात सुनने लगीं।

दादी चाहत को देख - बेटा वहा क्यू खड़ी हो... यहां आओ ।

चाहत दादी के पास आ गई। दादी ने प्यार से चाहत की तरफ

खाने का निवाला बढ़ा दिया। चाहत ने भी बिना देर किए उसे खा लिया। वहीं आर्यन ये देख चीढ़ गया ।

वह रीमा जी से बोला - मम्मी आप मुझे खिलाओ। यहां तो किसी को मेरी कोई फिक्र ही नहीं है।

ये सुन रीमा जी ने उसे एक निवाला खिला दिया ।

दादी आर्यन की तरफ देख कर - मेरा राजा बेटा किसने कहा । की किसी को तेरी फिक्र नहीं । अरे मै तेरे पापा, तेरी मम्मी और चाहत बेटा सब को तेरी फिक्र है।

आर्यन मुंह बनाते हुए - नहीं आप झूठ बोल रही है सबको बस दी अच्छी लगती हैं। कोई मुझसे प्यार नहीं करता ।

चाहत आर्यन के पास आ कर - बात तो सही है.... तेरी... ये बोल उसने एक निवाला तोड़ा और उसे आर्यन को खिला दिया।

रीमा जी तीसरा निवाला खिलते हुए - ऐसा नहीं है..... बेटा सब तुमसे भी बहुत प्यार करते हैं ।

शिव जी चौथा निवाला खिलते हुए - खबरदार जो किसी ने मेरे भोलू को कुछ कहा तो..... मै एक एक कि खबर लूंगा।

दादी फिर से उसके पास अाई । उसे अपनी गोद में बिठाया और माथे को चूमते हुए बोली -

तुझे सूरज कहूं या चंदा ।।

तुझे दीप कहूं या तारा ।।

मेरा नाम करेगा रौशन जग मेरा राज दुलारा।।

ये गाते हुए उन्होंने अपना गाल आर्यन के गाल से लगा लिया।

ये गाना सुन आर्यन और चाहत जोर जोर से हसने लगे तो दादी ने कहा - क्या हुआ मैंने कुछ गलत गाया क्या?.,... तुम्हे पता है तुम्हारे पापा को मै यही गाना गा कर सुलाती थी ।

सबने कुछ नहीं कहा तो दादी जी चुप हो गई।

दादी जी - ठीक है अब से नहीं गाऊंगी। ये बोल वो जाने लगी। तो आर्यन ने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें अपने हाथ से खिलते हुए कहा - नहीं दादी ऐसी बात नहीं है।

चाहत भी आर्यन का साथ देते हुए - हा दादी वो आप पहली बार गाना गा रही थीं.... । वो भी ये वाला तो समझ नहीं आया कैसे रिएक्ट करे अपनों बुरा लगा क्या ?

दादी उसका चेहरा पकड़ते हुए ना में सिर हिला दिया। चाहत ने उन्हें खाने का इशारा किया फिर खुद भी खाने लगी । सब ने खाना खत्म किया।

शिव जी को कल जाना था इसीलिए रीमा जी सारा समान

पैक करने लगी। वहीं चाहत आज दादी को अपने रूम ले अाई और वो दोनो आज मिल गिफ्ट को खोल कर देखने लगी। तभी तेज हवा चली और खिड़की में लगा विंड चाइम हिलने लगा तो चाहत का ध्यान वहा चले गया। चाहत के होंठो पर अपने आप स्माइल आ गई।

चाहत ने खिड़की बंद की । सारे गिफ्ट को एक जगह रख कर दादी के पास लेट गईं ।

चाहत दादी से - दादी आप यही रह जाओ ना बहुत मज़ा आयेगा । हम सब बहुत मस्ती करेंगे। ये बोल उसने दादी के पेट पर अपना सीधा हाथ लपेट दिया।

दादी उसके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए - बेटा गांव में भी काम होते है वहा की खेती भी तो देखनी है।

तुम सब यहां सुकून से हो और मुझे सुकून मेरे उस घर में मिलती है। मै चाहूं तो भी वहा से दूर नहीं रह सकती।

मुझे वहा ही रहना है वहीं ही मर जाना है।

चाहत एकदम से उठ कर गुस्से में कहती है, - दादी आप ऐसे बोलोगी ना तो मै...

दादी मुस्कुराते हुए, - तो क्या...

चाहत अपनी उग्लियो को घूमते हुए,- मै आपको ... आपको बहुत सारी गुदगुदी करूंगी ये बोल वो दादी के पेट में गुदगुदी

करने लगती है।

चाहत दादी को गुदगुदी कर के हस्ती हुई उनसे लिपट जाती है। दादी ने भी अपने एक हाथ से उसका एक हाथ पकड़ा और उसका सिर सहलाने लगी।

वह दादी को और कर के जकड़ कर सो गई वहीं दादी भी उसे सीने से लगाए सो जाती है।

अगली सुबह

चाहत का घर

चाहत की नींद पहली बार काजल के मैसेज से नहीं बल्कि विंड चाइम के आवाज़ से खुली वो आख मसलते हुए उठी।

रेडी होकर बाहर अाई तो देखा उसके पापा वापस ड्यूटी पर जा रहे है। ये देख वो थोड़ा उदास हो गई। फिर खुद को शांत कर बाहरी तौर से खुश हो कर आगे बढ़ गई।

वो पापा के पास गई तो उन्होंने उसे गले से लगाया और बोले - खूब पढ़ना और अपने भाई मम्मी का ख्याल रखना।

चाहत ने हा में सिर हिलाया।

चाहत और रीमा जी ने शिव जी के पैर छुए । फिर शिव जी ने भी सुमित्रा जी ( चाहत की दादी ) के पैर छुए।

शिव जी मुस्कुराते हुए अपने फर्ज को निभाने चले गए।

रीमा जी खुद को रोके हुए थी। उनके जाने के ठीक बाद अपने रूम में गई और मुंह में हाथ रख रोने लगी।

चाहत को पता था उसने बचपन से देखा था उनको ऐसे रोते हुए । उसे पता था वो थोड़े देर में ठीक हो जाएंगी।

चाहत ने देखा दादी बोर हो रही है। तो उसने दादी से कहा - चलो दादी आज आपको मंदिर ले चलती हूं। ये कह कर उसने मम्मी को आवाज़ दी ।

चाहत - मम्मी मै दादी को मंदिर के जा रही हूं।

गौरी जी खुद को संभाल कर बाहर आते हुए।

गौरी जी - ठीक है ले जाओ।

चाहत और दादी मंदिर गईं ।

वहा मंदिर में

मंदिर बहुत सुंदर था। मंदिर के सामने एक गार्डन भी था।

चाहत दादी का हाथ पकड़ कर मंदिर की सीढ़ियों पर अाई। वो अंदर दर्शन करने चले गए ।

ये मंदिर राधा कृष्ण का था। दोनों की मूर्ति बहुत सुंदर थी उस मूर्ति के पास पीले कपड़ों में पंडित जी थे । दर्शन के बाद दोनो बाहर गार्डन में बैठ गई।

चाहत दादी से - यहां कितना अच्छा लग रहा है ना।

दादी ने कहा - हा बेटा।

तभी चाहत के कानों में एक भजन सुनाई दिया।

" यशोमती मैया से बोले नंदलाला...

राधा क्यू गोरी मै क्यूं काला..."

उस भजन को सुन चाहत ने दादी से कहा । दादी पहले का जमाना कितना अच्छा था ना लोग भेदभाव नहीं करते थें । पर आज तो सब को रंग , कपड़े , स्टेटस ये सब देखते है।

दादी कुछ बोलने को हुई तभी पीछे से किसी औरत की थोड़ी भारी आवाज़ गूंजी - ऐसा नहीं है बेटा।।।

चाहत ने पलट कर देखा तो एक औरत हल्के हरे रंग की साड़ी में लिपटी हुई उनके सामने थी। उनके सारी में लाल रंग

का बॉर्डर था।

वो चाहत के पास आई और बोली - रंग , कपड़े या स्टेटस मायने नहीं रखता। हमारी सोच हमे दर्शाती है।

ये बोल वो उनके पास बैठ गई। अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने कहा। " क्या जब तुम रोती हो तो तुम्हारे रंग को देख कर तुम्हारी मा तुमसे दूर चले जाती है???"

चाहत ने ना में सिर हिलाया ।

वो औरत - क्या तुम्हारी दादी के पुराने जमाने के कपड़े देख तुम्हे शर्मिंदगी महसूस होती है।

चाहत ने ना में सिर हिला दिया ।

औरत ने कहा - तो ये बाते तुम्हारे दिल की अच्छाई बताते है। तुम कैसी हो ...तुम्हारी सोच कैसी है?... ये बात ज्यादा जरूरी है। रंग बस आकर्षण है। अच्छाई और अच्छी सोच परमानेंट है जो कभी कोई आपसे छीन नहीं सकता । ना ये कम ही सकता है और ना ही कोई इसमें कुछ कर फेर बदल कर सकता है।

चाहत ने उनकी बात सुन कर कहा - पर आंटी लोग तो खूबसूरत लोगो को ज्यादा महत्व देते है । आज के जमाने में

रंग , कपड़े स्टेटस ज्यादा मायने रखता है।

वो औरत - बेटा तो ऐसे फेक लोगो से दूर रहो । ये बस पल भर के लिए हमारी जिंदगी में आते है इनको लोगो को बस दिखावे से मतलब होता है। एक सच्चा दोस्त वहीं होता है जो आप जैसे हो जो हो उसे देख कर आपके पास रहे। जो समय के अकॉर्डिंग चेंज ना हो।

चाहत सोचते हुए - अगर ऐसा कोई हमारी जिंदगी में हो तो क्या करे?

वो औरत - उनसे कोई एक्सपेक्टेशन ना रखो । और सबसे जरूरी बात उनकी बातो को दिल से ना लगाओ। बस अपना काम करो। आखिर कृष्ण जी भी कहते है ना

" कर्म करो फल , की चिंता मत करो"

चाहत ने हा में सिर हिला दिया । तभी उनकी ही उम्र का एक आदमी वहा आया । उस आदमी ने उनसे कहा - चलो नहीं तो हम लेट हो जाएंगे। शायद ये आदमी उन आंटी के पति थे।

ये बोल उस आदमी ने चाहत को देखा और स्माइल दी।

वो औरत चाहत के पास आकर - कभी खुद को कम मत समझना । अगर कृष्णा ने तुम्हे कोई कमी दी है तो साथ में

तुम्हे किसी खूबी से नवाजा भी है बस उसे पहचान लो ।

चाहत ने हा में सिर हिला दिया । उस औरत ने चाहत और उनकी दादी से विदा ली।

उस औरत की बाते चाहत पर एक गहरा असर छोड़ गई। चाहत और दादी घर आ गई।

चाहत स्कूल जाने के लिए रेडी हुई और स्कूल आ गई।

स्कूल क्लासरूम

आज चाहत जल्दी अाई थी । क्लास खाली थी। तो चाहत ऐसे ही बैठी बाकी लोगों का इंतज़ार कर रही थी।

अध्यन जैसे ही क्लास आता है । चाहत को डेस्क पर बैठा देख कर खुश हो जाता है। वो उसके पास आया दोनो बाते करने लगे।

ऐसे ही दोनो बाते करते रहते है । काजल और अंश जो कब से दोनो को देख कर मुस्कुरा रहे होते है।

उनके पास जाकर अंश उनसे कहता है - अरे हम भी यही है।.. पर किसी को तो फिक्र ही नहीं। ... लगे है अपने में...

अध्यन ये सुन कर अंश के गले में हाथ डाल उसका गला दबा कर - क्या कहा... जरा एक बार फिर बोलना।

अंश उससे गला छुड़ाते हुए - अरे यार मै तो मज़ाक कर रहा था। ये सुन अध्यन ने उसे छोड़ा । तो वो भागते हुए बोला - तुम दोनो कपल को किसी की नजर ना लगे।और वहा से भाग गया।

काजल ये सुन जोर ज़ोर से हसने लगीं अध्यन की हालत ही खराब हो गई। वो भी वहा से भाग गया। और चाहत ने भी नज़रे झुका ली

ऐसे ही चारो की दोस्ती बढ़ते गईं । अंश के साथ औपचारिक तौर पर हुई दोस्ती भी अब सच्ची दोस्ती में तब्दील हो चुकी थी। चारो का ग्रुप बहुत ही अच्छा हो गया था। जहा अंश काजल की दोस्ती में अपने मन में उठ रही भावनाओ को दबा चुका था। वहीं चाहत के मन में भी अध्यन अपनी जगह बना चुका था। ऐसे ही वक़्त गुज़रा सभी एक दूसरे के करीब आते जा रहे थे।

एक दिन स्कूल में सर आते है और सब से कहते है।

सर - हम सब टीचर्स ने मिल कर ये सोचा है । आप सभी को

पिकनिक पर ले जाएंगे। पर ज्यादा दूर नहीं यही डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी मंदिर है और पास में ही एक गार्डन और बहुत सारी घूमने की जगह है तो हम आपको वहा ले जाएंगे। सुबह निकलेंगे और शाम तक वापस आ जाएंगे । आपके खाने की व्यवस्था भी वहीं होगी।

सारे बच्चे खुश हो गए। सर ने अपनी बात जारी रखते हुए - हम सब परसो जाएंगे । आप सभी में जो जाना चाहता है । कल तक बता देना ।

वे चाहत की तरफ देख कर - कल तुम लिस्ट तैयार कर के से देना।

चाहत ने हा में सिर हिला दिया ।

काजल चाहत के पास आकर - वाओ यार .... पहली बार घर से दूर वो भी पूरा दिन के लिए.. कितना मज़ा आयेगा ना।

चाहत - हा पता है मै सोच रही थी कि क्यू ना मै घर से कैमरा ले आऊ फिर सब ढेर सारी फोटोस लेंगे।

काजल - हा ये सही है... ले आना।

अध्यन जो बगल मै खड़ा उनकी बाते सुन रहा था। उनके पास आकर कहा - चाहत तुम रहने दो मै ले आऊंगा कैमरा ।

चाहत - ठीक है।

अंश - और मै क्या लाऊ..

काजल उसके सिर पर मारते हुए - तुम खुद टाइम पर आ जाओ ना वहीं बहुत बड़ी बात है।

अंश अपनी एक आइब्रो उठा कर - अच्छा।

काजल भागते हुए - हा ।

अंश उसके पीछे आते हुए - काजल की बच्ची ... रुको तुम्हे मै बताता हूं....

ये कह दोनो लड़ने लगे । चाहत उन्हें देख कर मुस्कुराने लगी । और चाहत को देख अध्यन मुस्कुराने लगा।
 
स्कूल ग्राउंड

दो दिन बाद सब स्कूल ग्राउंड पहुंचे सब पिकनिक के लिए एक्साइटेड थे। देख कर ही लग रहा था। सब अपने साथ एक छोटा सा बेग पकड़ कर लाए थे। जिनमे उनके जरुरत का सामान था।

चाहत भी सही टाइम पर ग्राउंड आ गई। उसे काजल मिल गई। वो उसके साफ़ अंश और अध्यन का वेट करने लगती है । पर वो लोग नहीं आते थक के दोनो बस में चढ़ जाती है तभी दोनो बाइक में आते हुए दिखते है।

चाहत को बहुत गुस्सा आता है वो काजल का हाथ पकड़ एक सीट में बैठ जाती है ।

अध्यन बस में चढ़ कर चाहत को ढूंढता है पर वो नहीं दिखाई देती तो वो वहीं बैठ जाता है।

इधर चाहत और काजल अपने सीट पर सिर झुकाए बैठ जाती है। काजल चाहत को कुछ बोलने को होती है तो वो आंख दिखा कर उसे रोक देती है इसीलिए वो चुप हो जाती है।

थोड़े देर बाद सब अंताक्षरी खेलने का प्लान बनते है । बस को दो हिस्सों डिवाइड कर दिया जाता है।

तभी अंताक्षरी शुरू होती है सब मिल कर गाना गाने लग जाते हैं ।

तभी अध्यन की नजर चाहत पर पढ़ती है जो रेड कुर्ती और ब्लू जींस पहने हुई थी । उसने ब्लैक लेदर की जैकेट डाली थी क्युकी ठंड का मौसम था। काजल ने भी ब्लैक जींस में रेड टॉप पहना था। और उसने भी ब्लु कलर का जैकेट पहना था।

अध्यन ने देखा चाहत उसे इग्नोर कर रही है तो वह जल्दी से

उठा और उसके पास गया। पर चाहत वो अध्यन को अपनी तरफ आता देख जान बुझ कर अपनी आंखे बंद कर सोने का नाटक करने लगी। अध्यन उसके पास आकर उसे आवाज़ देने लगा पर वो ना सुनने का नाटक कर रही थी। जैसे सच में नींद में हो।

उसने काजल से इशारे में पूछा तो उसने मुंह हिलाते हुए बताया - गुस्सा है तुमसे....लेट आ रहे हो ना ....

अध्यन को अब समझ आया प्रोबलम क्या है। उसके दिमाग में एक तरकीब सूझी । वो आया और अपने साथियों के साथ गाने लगा।।।

मै चाहता हूं तुझको दिलो जान की तरह.....

तू छा गई है मुझपे आसमान की तरह....

मै चाहता हु तुझकोदिल ओ जान की तरह

तु छा गयी है मुझ पे आसमान तरह...

ओ हो हो मेरे यार....

सौ रब दी ओ हो हो मेरे यार सौ रब दी.....

चाहत तो जैसे नींद से जागी उसने सिर उठा कर देखा तो अध्यन उसे देख कर ही गाना गा रहा था....

आ हा आ हा आ आ आ आ

आ......

अध्यन अपनी हरकतों के बारे में सोच कर

"देखता ही रहता हु सपने तेरे ....

देखता ही रहता हु सपने तेरे ..

डरता हूँ कही मेरी आँख ना खुले

डरता हूँ कही मेरीआँख ना खुले

आँख जो खुलेंगी हो जायेगी तो परे

आँख जो खुलेंगी हो जायेगी तो परे

दूर नहीं जाना कभी दिल से मेरे....

दिल से मेरे....

इस बार अध्यन चाहत की सीट पर गया और उसकी सीट से अपनी पीठ लगा गाने लगा।

"पाक मेरा दिल है कुरान की तरह

पाक मेरा दिल है कुरान की तरह ....

तु छ गयी है मुझपे आसमान की तरह

छा गयी है मुझपे आसमान की तरह

ओ हो हो मेरे यार सौ रब दीओ हो हो मेरे यार सौ रब दी.....

इतना गाकर अध्यन ने अपना गाना ख़तम किया। चाहत बस एक टक उसे देख रही थी। अध्यन ने दोनो कान पकड़ कर सॉरी का कहा।

चाहत ने फिर अपना मुंह फेर लिया। अध्यन का मुंह ही उतर गया । वो वापस अपनी सीट पर आ गया।

इतने में टीचर आए और उन्होंने कहा। अब बस हम पहुंचने वाले है तो सब अपने बेग के साथ रेडी रहो ।

सबने साथ में यस सर कहा।

जब अध्यन का ध्यान हटा तो चाहत उसे देखने लगी। व्हाइट टी शर्ट पर उसने रेड ब्लैक कॉम्बिनेशन कि एक शर्ट डाल रखी थीं और नीचे ब्लू जींस पहने वो काफी क्यूट लग रहा था।

चाहत जो अध्यन को देखे जा रही थी उसे कोहनी मर के काजल ने कहा - बस कर कितना देखेगी।

चाहत अध्यन को देखते हुए - उसने ये गाना .... मेरा मतलब है कैसे .... क्यू....

काजल उसे पकड़ कर रोकते हुए, - अरे रिलैक्स मैंने बताया था।

चाहत हैरत से उसे देखती है तो गहरी सांस लेकर काजल

कहती है..,एक बार उसने मुझसे मेरे और तेरे फेवरेट सॉन्ग के बारे में पूछा था तो मैंने बता दिया था। और तू आज उससे गुस्सा थी तो शायद उसने सोचा हो तुझे ये सॉन्ग गाकर मना लू बस इसीलिए उसने ये सॉन्ग गाया होगा...

चाहत एक लम्बी सांस लेकर - ओ ओ ओ....

काजल और चाहत अपनी अपनी जैकेट उतार कर वहीं रख देती है।

फिर वो भी बस से उतरने लगती है।

अध्यन उसका पीछे से चाहत का हाथ पकड़ उसे रोकते हुए...

अध्यन - चाहत सुनो ना यार...

चाहत - बोलो।।।

अध्यन नज़रे झुका कर - सॉरी ...

चाहत कुछ देर तक अध्यन को देखती रही। फिर अचानक से हसने लगी। अध्यन हैरानी से उसे देख रहा था। तब चाहत ने कहा....

चाहत - अरे बुद्धू... मै तो मज़ाक कर रही थी... ये बोल कर उसने अध्यन की नाक खींची और वापस जाने लगी।

अध्यन जो उसका हाथ पकड़े खड़ा था। उसने अपने हाथ को

झटका दिया । चाहत सीधे उसके करीब आ गई। उनकी सिचुएशन कुछ ऐसी थी। जहा वो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी। उसका एक हाथ थामे अध्यन सीधे उसकी आंखो में देख रहा था। कुछ देर दोनो यूहीं खड़े रहे । फिर अध्यन ने कहा - आज के बाद ऐसा मज़ाक मत करना। तुम सोच भी नहीं सकती मुझे कैसा फील हो रहा था।

चाहत जो बस उसे देखे जा रही थी। अध्यन की ये हरकत उसे डराने लगी थीं। अध्यन को उसे देख खुद डर लगने लगा और उसने झट से कहा - सॉरी.... अब से ऐसा कुछ नहीं करूंगा।

चाहत ने कहा - हम्मम..... कहा तो उसकी आंखो में डर साफ़ नजर आ रहा था।

जिसे देख अध्यन ने कहा - वो... अम्म... हमे चलना चाहिए। ये बोल अध्यन जल्दी से बस से उतर गया।

चाहत अभी जो हुआ उसे ही सोच रही थी। वह बस से नीचे उतर गई।

काजल ने चाहत को देखा तो उसके पास आ गई । उसे देख काजल ने पूछा - क्या हुआ।

चाहत जैसे अपनी सोच से जागी उसने कहा - वो... मै... मेरा मतलब है...

काजल ने उसके सिर पर हाथ रखा फिर पूछा - क्या हुआ ... तु ठीक तो है ना।

चाहत उसका हाथ हटाते हुए - कुछ नहीं ... और मै ठीक हूं।

ये कह कर उसने आस पास देखा। उसने देखा एक खूसूरत सा शहर है यह शहर में चारो तरफ बस पहाड़ से है। यहां पर आस पास बहुत सारे मंदिर है । आस पास बहुत हरियाली है। वो यहां पहले भी आ चुकी थी । इस शहर से वो अंजान नहीं थी ।

यहां की देवी मां बम्लेश्वरी को सब बहुत पूजते हैं। ऊंचे पहाड़ पर मा का मंदिर बहुत ही खूबसूरत लगता है ।

माँ बम्लेश्वरी देवी के मंदिर के लिये विख्यात डोंगरगढ एक ऎतिहासिक नगरी है। यहां माँ बम्लेश्वरी के दो मंदिर है। पहला एक हजार फीट पर स्थित है जो कि बडी बम्लेश्वरी के नाम से विख्यात है। मां बम्लेश्वरी के मंदिर मे प्रतिवर्ष नवरात्र के समय दो बार विराट मेला आयोजित किया जाता है जिसमे लाखो की संख्या मे दर्शनार्थी भाग लेते है। चारो ओर हरी-भरी पहाडियों, छोटे-बडे तालाबो एवं पश्चिम मे पनियाजोब जलाशय, उत्तर मे ढारा जलाशय तथा दक्षिण मे मडियान जलाशय से घिरा प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण स्थान है डोंगरगढ।

यहां एक पहाड़ है जिस पर बौद्ध जी विराजमान है ।

वैसे तो ये शहर पहाड़ों से घीरा है पर यहां पहाड़ एक जी चोटी पर बौद्ध जी की बहुत ही बड़ी मूर्ति है। इस मूर्ति की खूबसूरती देखने लोग दूर दूर से आते है। ये बहुत ही प्रचलित स्थान है। यहां पर बौद्ध विहार नाम से एक मंदिर भी जो बहुत प्रचलित है।

सारे टीचर्स ने डिसाइड किया कि ये दो जगह वो बच्चो को लेकर जाएंगे। पहले सब प्रज्ञा गिरी गए और वहा से दर्शन कर सबने हल्का लंच किया ।

लंच के बाद सभी बम्लेश्वरी मंदिर के लिए निकल गए। टीचर ने सभी बच्चों को बताया वहा 1000 सीढ़ियां है। अगर किसी को कोई भी प्रॉब्लम हो तो बता दो अभी।

सब ने ना में सिर हिलाया और अपने बोतलों में पानी भर कर पहुंच गए । मंदिर के द्वार पर और मा का नाम ले कर उन्होंने चढाई स्टार्ट की। सब चढ़ते जा रहे थे। सब ने ठान लिया था कि अब उन्हें ऊपर पहुंचना ही है।

चाहत काजल अंश और अध्यन साथ चल रहे थे। जहा लोग थकते सब साथ में बढ़ते टीचर भी सबको इंकरेज कर रहे थे।

ऐसे ही आगे बढ़ते हुए । अध्यन ने चाहत को देखा जो आस

पास के दुकानों को देख रही थी। अध्यन ने चाहत से कहा ,- तुम पहली बार अाई हो।

चाहत ने ना में सिर हिलाया और कहा - नहीं मै कई बार यहां आ चुकी हूं। फिर भी सब चीजे दुबारा देखना अच्छा लगता है।

मंदिर में पहुंचने से पहले यहां पर कई छोटे मंदिर और है । जिस कारण उन लोगो को तीन घंटे लगे। सब आखिर मा के दरबार पहुंच ही गए। वहा दर्शन कर सब बाहर आए सबने फोटोस क्लिक करवाई।

अध्यन सबकी फोटोस क्लिक कर रहा था। उसने देखा चाहत कहीं जा रही है उसका पीछा कर वो मंदिर के पीछे पहुंचा जहा पर एक पेड़ पर बहुत सारे लाल कपडे की पट्टियां थी जिस पर जय मा बम्लेश्वरी लिखा था। अध्यन ने देखा चाहत वहीं पर है।

अध्यन वहा गया और वहा से नीचे की खूसूरती देखने लगा। उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसने स्वर्ग जैसा कुछ देख लिया हो वो बहुत ही सुन्दर था। नीचे सारे घर बहुत सुंदर लग रहा था वहा से देखने पर ऐसा लग रहा था जैसे वो बदलो में है। और नीचे की छोटे छोटे आयरलैंड हो।

वो ये सब पहले भी देख चुका था। पर आज चाहत के साथ ये सब देखना उसे और भी अच्छा लग रहा था। उसने चाहत को देखा जिसके बाल हवा के कारण बंधे होने के बाद भी वो चेहरे पर आ रहे थे जिसे उसने अपने हाथो से पीछे किया। सुरज की हल्की रौशनी में उसका चेहरा अलग ही तरह से दमक रहा था ।

अध्यन के चेहरे से स्माइल जाने का नाम ही नहीं ले रही थी। वो बड़े ही आराम से उसे देख रहा था।

अध्यन ने एकदम से कहा - ब्यूटीफुल ।

चाहत ने उसकी साइड देखा और उसने कहा - सच में कितना सुन्दर है ना ये सब ।

अध्ययन उसके पास आकर बोला - बेशक ये चीजे बहुत सुंदर है पर यहां मै तुम्हारी बात कर रहा हूं।

चाहत ने कहा - तुम भी ना कुछ भी बोलते हो ..

अध्यन उसके पास आकर - मैंने ऐसा क्या कहा।

चाहत - खूबसूरत तो मै हूं नहीं फिर तुम मुझे खूबसूरत क्यू कह रहे हो।

अध्यन - तुम्हे ऐसा क्यों लगता है कि तुम खूबसूरत नहीं हो ???

चाहत - खूबसूरत साफ़ चीजे होती है पर मै तो उतनी साफ़ हूं

ही नहीं । साफ़ चीजो का रंग सफेद होता है। और बेदाग भी... पर मेरा तो काला है।

अध्यन उसे देखते हुए - गलत हो तुम ... खूबसूरती रंग की मोहताज नहीं होती। उसे बस तुम्हे महसूस करना होता है।

अध्यन अपना हाथ आगे बढ़ा कर सामने इशारा करते हुए कहा - देखो उन हरे पेड़ों को क्या वो तुम्हे अच्छे लगते अगर वो सफ़ेद होते।

चाहत ने ना में गर्दन हिलाई।

अध्यन बात जारी रखते हुए - क्या ये पहाड़ , वो नदी , ये मंदिर सब सफेद होते तो क्या ये इतने ही खूबसूरत लगते जितने ये है, नहीं ना।

रंग कभी भी खूबसूरती दिसाइड नहीं करता । बल्कि खूबसूरती देखने वालो की आंखो में होती है।

तो पागल लड़की खुद को कभी कम खूबसूरत मत समझो। तुम्हारी आंखो में को मासूमियत है... तुम्हारे माथे में ये जो तिल है.... तुम्हारा मुस्कुराते वक़्त आंखो का बंद हो जाना। ये सब तुम्हे खूबसूरत बनाती हैं। हर किसी को ये खूबसूरती ना दिखे पर मै ये देख सकता हूं।

क्युकी तुम्हे वहीं आंखे खूबसूरत कहेगी जो तुम्हे समझेगी तुम्हे करीब से जानेगी। तुम बेशक दूसरों की तरह ना हो पर खास हो, अलग हो। हर चीज अपने आप में खूबसूरत है बस नजरिया चाहिए उसे देखने का।

और अब आते है तुम्हारी बात पर तो तुम हो खूबसूरत कभी मेरी आंखो से खुद को देखना। तुम्हे पता चल जाएगा।

चाहत अध्यन को देखने लगी जो उसे ये सब बड़ी ही आसानी से कह रहा था। वो उसकी बाते समझ रही थी।

तभी काजल और अंश वहा आए ।

अंश - ओह लव बर्डस चलो। या दिन भर यही रहना है।

अंश की जबसे दोस्ती उन दोनों से गहरी हुई थी तो वह हमेशा दोनो को साथ देख लव बर्डस बुलाया करता था। पहले तो चाहत को अजीब लगता था । पर अब उसे आदत सी हो गई थी।

अध्यन उसे देखते हुए - हा चलते है।

तभी काजल ने अध्यन को इशारा किया - यार मेरी अंश के

साथ फोटो लो ना और फिर मेरी और चाहत की भी एक फोटो लेना।

अध्यन ने हा कहा और उनकी फोटोस ली। एकदम से काजल ने अध्यन को कहा - तुम भी आओ ना । वो उनके पास आ गया । काजल ने अध्यन का कैमरा अंश को दिया फिर एक फोटो ली।

काजल ने कहा - अध्यन और चाहत तुम दोनो भी साथ में फोटो ले लो।

दोनों साथ में खड़े हुए और उन्होंने फोटो ली ।

कुछ देर बाद सर उन्हें नीचे चलने के लिए बुलाने लगे।

वो उस तरफ चले गए। दोनों धीरे धीरे सीढ़ियां उतर रहे थे ... आस पास कुछ भिखारी भी बैठे थे। सब ने उन्हें कुछ ना कुछ दिया।

तभी अध्यन ने वहा कुछ बंदरो को भी देखा। ये सारे बंदर एक जगह थे । अध्यन बिना कुछ सोचे उनके पास गया और उनको बिस्कुटस खिलाने लगा उसे देख बाकी बच्चे भी उन्हें कुछ ना कुछ खिलाने लगे।

अध्यन ने देखा सब कुछ ना कुछ खिला रहे है पर चाहत दूर है

। वो उसके पास गया।

अध्यन - यहां अकेले क्या कर रही हो...

चाहत - कुछ नहीं।

तभी काजल उनके पास आते हुए - ये बंदरो से डरती है। इसीलिए नहीं जा रहीं।

काजल ने कहा तो चाहत उसे खा जाने वाली नजरो से घूरने लगी ।

अध्यन ने कहा - सच में।

चाहत ने ना में सिर हिलाया ।

अध्यन ने उसे देखा फिर कहा - चलो...

चाहत - कहा।

अध्यन - बंदरो से दोस्ती करने..

चाहत - क्या... कुछ भी.... मै नहीं जाऊंगी।

अध्यन उसका हाथ पकड़ कर चलते हुए - अरे चलो भी ... अब.।

चाहत और अध्यन उनके पास पहुंचे। चाहत के तो डर के मारे पसीने छूट रहे थे। अध्यन ने उसे बिस्कुट दी और कहा - चलो खिलाओ।

चाहत ने ना कहा तो अध्यन ने उसका हाथ पकड़ कर उसमे बिस्किट्स रखी और हाथ पकड़ कर बंदरो की तरह बढ़ा दिया

ऐसे उसने चाहत के हाथो से खिलाया। वो भी बिना कुछ किए बिस्किट्स खाने लगे । ये देख चाहत बहुत खुश हुई और फिर खुद ही उन्हें खिलाने लगी।

जैसे जैसे वो बिस्किट्स खाते चाहत खुश होती । और साथ में अध्यन भी खुश होता।

वो खुश हो गई थी। जब वह बंदरो को बिस्किट्स खिला रही थी। वो हस्ते हुए बहुत प्यारी लग रही थी । अध्ययन उसके पास आया ।

अध्यन - अब बताओ....अभी भी डर लग रहा है...,?

चाहत ने ना में सिर हिलाया।

इधर काजल दोनो को देख रही थी। तो अंश ने कहा। क्या देख रही है।

काजल दोनो को देखते हुए - ये दोनो साथ में कितने प्यारे लगते है ना।।।

अंश - हा लगते तो है....

काजल उसकी तरफ मुड़ते हुए - है ना... मुझे लगता है अध्यन चाहत को पसंद करता है... और शायद चाहत भी....

बोलते बोलते वो रुक गई।।।।

अंश उसे देखते हुए - हा वो उसे पसंद करता है.... जबसे उसे देखा है तब से.... पर

काजल उसके पास आकर - पर क्या...????

इतने में अध्यन और चाहत वहा आते है। सब धीरे धीरे सीढ़ियां उतरते है। सारे टीचर्स सारे बच्चो को एक होटल में ले जाती है। सब उनको अपनी पसंद का खाने बोलते है।

अध्यन,चाहत ,अंश और काजल चारो साथ में बैठ कर खाने का सोचते है। चाहत चावल , रोटी और मिक्स वेज ऑर्डर करती है। वहीं काजल भी सेम ही ऑर्डर करती है। तो अंश भी बोलता है वो भी इतना ही खाएगा।

पर अध्यन एक चिकेने तंदूरी के साथ लच्छा पराठा ऑर्डर करता है। सबका खाना आता है । सब खाने लगते है चाहत अध्यन को देख रही होती है जो दुनिया से बेखबर अपने चिकन को खा रहा था।

अध्यन चाहत को देख - ऐसे घुरो मत खाना है तो खा लो....

चाहत उसे देख कर नाक सिकोड़ते हुए - नहीं तुम ही खाओ।

काजल अध्यन को ऐसे खाते देख - तुम शर्मा हो ना मतलब ब्राम्हण तो तुम चिकन कैसे खा रहे हो???

अध्यन चिकन के लेग को चूसते हुए - क्युकी मुझे पसंद है....

काजल उसका जवाब सुन चुप हो गई।

ये देख अंश बोला - अरे ये तो है है राक्षस ... जिंदा इंसान खा ले तो चिकन क्या चीज़ है।

काजल और चाहत ये सुन हसने लगी।

तब अध्यन ने कहा - कुछ भी ... अरे मैंने कभी किसी को नहीं रोका ना ही टोका तो ... तुझे इतनी प्रोबलम क्यू है ... तू खा अपना घास फूस.. मै तो चिकन खाऊंगा ... ये बोल उसने एक पीस उठाया। और मुंह में रख लिया। वो चाहत को देखने लगा जो बस मुस्कुरा रही थी।

उसने एक बाइट तोड़ी और उसने चिकन लगा कर चाहत की तरफ बढ़ा दिया । चाहत रुक गई। चाहत कभी चिकन को तो कभी अध्यन को देखती ।

तब अध्यन ने उसे खाने का इशारा किया । तो उसने कहा - नहीं ... मेरा हो गया। ये बोल वो उठी और हाथ धोने चले गई।

अध्यन उसे देखने लगा उसे कुछ समझ नहीं आया ।

तब काजल ने उसके उठे हुए हाथ को नीचे किया और कहा - वो वेजी है .. वो चिकन नहीं खती।

अध्यन सोचते हुए - पर वो तो सिंह है ... फिर भी।

तभी चाहत वापस आते हुए - हा क्युकी मेरी मम्मी नहीं खाती... तो मेरा भी मन नहीं हुआ खाने का।

अध्यन उसे देखते हुए - सॉरी ... मैंने ऐसे तुम्हे खाने के लिए इंसिसिट किया।..

चाहत उसे रोकते हुए - अरे ... इट्स ओके । मेरे घर में सब खाते है बस मै और मम्मी नहीं । तो मुझे तुम्हारा मुझसे पूछना बुरा नहीं लगा।

अध्यन ने सिर झुका लिया और चुपचाप खाने लगा।

ये देख अंश जोर ज़ोर से हसने लगा। काजल उसे हस्ता देख - तुम्हे क्या हुआ ... क्यू हस रहे हो।

अंश अध्यन को देखते हुए - कुछ नहीं ... बस इस सिचुएशन पर एक गाना आ गया।

वो गाने लगा...

दिल के अरमां आसूंओं में बह गए...

अध्यन ने उसे घुरा तो वह और जोर से हसने लगा।

सब होटल से बाहर आ गए । चाहत मुस्कुरा रही थी। सब खाना खाने के बाद बाहर आए ।

सामने एक गार्डन था। वहा पर बोटिंग हो रही थी । चाहत ने सब से कहा - चलो ना बोटिग करते है।

सब वहा गए वहा उन्होंने टिकट्स ली और उनको लाइव जैकेट दिए गए । रेड कलर की लाइव जैकेट पहने सारे बच्चे क्यूट लग रहे थे। एक बोट पर चार लोगो को बैठना था तो उन लोग भी एक बोट पर बैठने का सोचा।

पहले अंश आया और वो एक सीट पर बैठ गया। फिर अध्यन आया । उसने देखा चाहत को बोट में चड़ने में थोड़ी परेशानी हो रही है तो उसने उसकी ओर अपना हाथ बढ़ाया । चाहत ने भी बिना सोचे उसका हाथ पकड़ लिया । और धीरे से बोट पर बैठ गई। यही काम उसने काजल के साथ भी किया। इन सब में हमारे अंश बाबू चुपचाप बैठे पानी से खेल रहे थे। तभी काजल ने उसकी तरफ पानी उछाल दिया। अंश का चेहरा भीग गया। वो तो शुक्र है कि उसने लाइव जैकेट पहनी थी वरना उसकी शर्ट भी भीग जाती।

उसके साथ ये सब कर के काजल हसने लगी साथ साथ अध्यन और चाहत भी हसने लगे । अंश ने बुरा सा मुंह बना लिया ।

सब हस्ते हुए बोटिंग कर रहे थे। तभी चाहत ने देखा पानी में

कुछ मछलियां है । उसने अपना हाथ पानी में डाला तो सारी मछलियां उसके हाथ पर आ गई। ठीक उसी टाइम अध्यन ने उसकी एक फोटो क्लिक कर ली । जिस में वो मछलियों को देख रही थी।

सब ने वहा और ढेर सारी फोटोस खींची। फिर सब नीचे उतरने लगे। अध्यन ने पहले चाहत को और फिर काजल को हाथ देकर बोट से बाहर उतारा। सब अपनी लाइव जैकेट खोंलने लगे ।
 
जब चाहत ने अपनी जैकेट की क्लिप को खोलने की कोशिश की तो वह खोल ही नहीं पा रही थीं। बड़ी मुश्किल से उससे वो क्लिप खुली। ऐसे ही दूसरे क्लिप्स के साथ भी हो रहा था। अध्यन ने उसे देखा तो वो उसके पास आया और क्लिप्स को खोलने लगा । चाहत उसे एकटक देखने लगी वो बड़ी ही शिद्दत से उन क्लिप्स को खोल रहा था।

थोड़ी देर बाद सारी क्लिप्स खुल गईं । तो उसने वो जैकेट ली और काउंटर पर जमा करवा दी।

काउंटर से वह वापस उनके पास आ गया। अब शाम होने लगी थी। सबको वापस घर जाना था। सब घर चलने के लिए बस के पास आए।

चाहत बस के पास आकर सबका वेट कर रही थी। तभी उसकी नजर सामने वाली शॉप पर गई जहा कुछ लॉकेट , ब्रेसलेट्स जैसी चीजे थी। चाहत काजल का हाथ पकड़े उस ओर बढ़ गईं । अध्यन उसे जाते हुए देखता रहा। वहा जाकर उसने सारी चीज़े देखी जिसमे उसे एक रुद्राक्ष वाला ब्रेसलेट्स अच्छा लगा। उसने वो ले लिया।

वहा उसने झुमके देखे तो वो भी ले ली। वहा एक मोबाइल था जिसमें बटन दबाने पर सॉन्ग बजता था। वो उसने आर्यन के लिए खरीद ली। थोड़ी दूर उसे पेडे दिखाई दिए। उसे देख उसको अंश और दादी की याद आ गई तो उसने दो पैकेट पेडे लिए । वो ये सब खरीद वापस अाई।

उसने सबसे पहले झुमके काजल को दिए।

काजल ने उन झुमकों को लेकर सीधा कान में डाला और पहन कर दिखाने लगी। वो उस पर बहुत प्यारे लग रहे थे। उसके गोरे रंग पर वो झुमके और भी अच्छे लग रहे थे।

चाहत ने एक पैकेट पेडे अंश को दिए। जिसे देख अंश बहुत खुश हुआ।

अंश खुशी से - तुम ही मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो ... बाकी सब तो दिखावे वाले है...

ये सुन अध्यन , काजल उसे घूरने लगे तो उसने कहा - तुम

लोग भी अच्छे हो पर चाहत ... तुम बेस्ट हो यार...

चाहत उसे चुप करवाते हुए - बस बस... अब ज्यादा बटर ना लगाओ...

चारो हसने लगे इसी बीच सर आ गए और उनसे बस में बैठने को कहा। सब अपनी सीट पर बैठने लगे तभी अंश ने अध्यन से कैमरा लेने के लिए हाथ बढ़ाया और एक तरफ काजल ने भी हाथ बढ़ाया।

काजल - मुझे कैमरा चाहिए।।।

अंश उसे घूरते हुए - क्यों..???

काजल उसे और जोर से घूरने हुए - मुझे फोटोस देखनी है।

अंश आंखे छोटी करते हुए - मुझे भी देखनी है।

ऐसे दोनो लड़ने लगे कभी कैमरा काजल के हाथ में जाता तो कभी अंश कर हाथ में। दोनों को लड़ते देख चाहत ने कहा - रुको...

दोनों में से किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।

चाहत ने फिर एक बार जोर से चिल्ला कर कहा - रुको!!!!!

अब दोनो ने उसकी तरफ ध्यान दिया ।

तब चाहत ने कहा - बच्चो की तरह मत लडो... एक काम करो दोनो साथ में देख लो।

दोनों ने अब चाहत को देखा ।

चाहत - तुम दोनों एक साथ बैठ जाओ और साथ में फोटोस

देखो। मै और अध्यन साथ में बैठ जाते है।

काजल ने कहा - हा ये ठीक रहेगा। और दोनो साथ में बैठ गए।

इधर अध्यन भी चाहत की बगल में बैठ खुश था। थोड़े देर में बस चालू हुई सब लोगो को एक बार फिर देखा गया कहीं कोई छूट ना गया हो।

बस चलने लगी चाहत और अध्यन दोनो शांत होकर बस सीट में बैठे थे। चाहत ने अध्यन को देखा जो खिड़की से बाहर देख रहा था। उसने अध्यन से कहा - अध्यन

अध्यन उसकी तरफ देखते हुए - हा।

चाहत - अपना सीधा हाथ दो ...

अध्यन को समझ नहीं आया - क्या कहा तुमने।।।

चाहत - अरे अपना सीधा हाथ दो ना।।।

अध्यन - ओके ये लो... कह कर उसने अपना सीधा हाथ बढ़ा दिया।

चाहत ने उसका सीधा हाथ पकड़ कर रुद्राक्ष वाला ब्रेसलेट पहना दिया ।

चाहत उसका हाथ पकड़ते हुए, - ये मैंने तुम्हारे लिए लिया। कैसा है???

जब चाहत ने उसे ब्रेसलेट पहनाया तो वह थोड़े देर के लिए खो सा गया था। उसने कुछ देर तक कुछ नहीं कहा। जब

चाहत ने उससे दूसरी बार पूछा तब उसने हा में सिर हिला दिया ।

चाहत ये देख खुश हुई। चाहत और अध्यन यूहीं बैठे रहे तभी चाहत को थकान के कारण झपकी आने लगी वो बार बार गिर रही थी। अध्यन ने ये देखा तो उसका सिर अपने कंधो पर रख लिया। चाहत ने उसे पहले देखा। उसका चेहरा चाहत के चेहरे के बहुत करीब था। चाहत उसे देखे जा रही थीं ये देख अध्यन मुस्कुराया और उसने उसकी आंखो पर हाथ रख उसे बंद कर दिया ।

चाहत को अब सच में नींद आ गई उसने अध्यन के बाजुओं में अपनी पकड़ मजबूत की और बेफिक्री से सोने लगी... अध्यन भी चाहत के हाथो को अपने हाथो पर महसूस कर सोने लगा। उसका सिर भी चाहत के सिर पर आ गिरा...

दोनों काफी वक़्त तक ऐसे ही सोए रहे। तभी अचानक बस रूकी और दोनो झटके से जागे। अध्यन ने जब चाहत को देखा वो भी आंखे मसलते हुए उठीं । बस अपने स्कूल पहुंच गई थीं। सारे बच्चे धीरे धीरे उतरने लगे। चाहत भी उतरी उनको आते हुए शाम हो गई थी। चारो बस से उतरे और अंगडाई लेने लगे। अंगड़ाई लेते हुए चारो ने एक दूसरे को देखा। एक दूसरे को देख चारो जोर से हसने लगे आस पास

खड़े बाकी बच्चे हैरत भरी नज़रों से उनको देख रहे थे। और वो बेखबर हस रहे थे।

सर ने सभी को आवाज़ लगाई। सब एक जगह आ गए । सर ने सभी की काउंटिंग की फिर सभी को घर जाने को कहा । सभी मेन गेट के पास आए। तो देखा अनिल काजल का वेट कर रहा था। काजल ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए उसके पास चले गई और बाइक में बैठ कर सबको बाय किया। सबने जबरदस्ती मुस्कुराते हुए उसे बाय कहा।

इधर चाहत अपनी साइकिल निकाल कर अाई । अध्यन ने उसे देखा तो वो उसके पास गया।

अध्यन उसके पास जाकर - चाहत एक काम करो मेरे साथ बाइक पर चलो।

चाहत उसे घूरते गए - क्यों..??

अध्यन - क्युकी शाम हो रही है।... अकेले मत जाओ।।

चाहत - अरे डोंट वरी... मै चले जाऊंगी।

अध्यन - नहीं ... चलो मेरे साथ ।।

चाहत गुस्से से - नहीं।

अध्यन - देखो बात को समझो ...

चाहत - नहीं।।।।

अध्यन - ठीक है जाओ।

ये बोल कर वो पलट गया। अंश दोनो को देख चाहत के पास

आया।

अंश - वो सही बोल रहा है।

चाहत - पर मेरी साइकिल...

अंश - वो मै ले आता हूं...

चाहत सोचते हुए - ठीक है।।।

चाहत अध्यन के पास आकर दांत दिखाते हुए।

अध्यन ने कुछ नहीं कहा और चुप चाप बाइक निकली । बाइक में बैठ अध्यन ने बाइक स्टार्ट की ओर एक्सीलेटर पर हाथ घुमा कर बाइक की चलने की आवाज़ को तेज किया। ये एक तरह का सिग्नल था। चाहत के लिए।

वो भी कुछ नहीं बोली। उसके बाइक के पीछे बैठ गई।

अध्यन अंश से - तू पीछे से साइकिल ले आ।

अंश - हा ठीक है।

अध्यन बिना कुछ कहे बाइक चला। रहा थी। चाहत बाइक के लेफ्ट मिरर में उसे देख रही थीं वहीं अध्यन उसे राइट मिरर में देख रहा था। दोनों ऐसे ही घर पहुंचे।

चुकी दोनो बाइक में थे । इसीलिए जल्दी पहुंच गए। वहीं अंश को आने में अभी वक़्त था। चाहत को अध्यन का उससे बात ना करना बुरा लग रहा था। वो चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थीं।

चाहत अध्यन की तरफ देखते हुए - सॉरी..

अध्यन ने कुछ नहीं कहा। ये देख काजल को गुस्सा आया।फिर भी उसने अध्यन को देखते हुए पूछा।

चाहत - पानी लोगे ...

अध्यन ने ना में सिर हिला दिया।

अब चाहत को और गुस्सा आने लगा। चाहत अध्यन के पास आकर - क्या प्रोबलम है तुम्हे हा... सॉरी तो बोल रही हूं ... फिर भी शादी में आए जीजा की तरह नाराज़ हो रहे हो... फिर उसे उंगली दिखते हुए अगर तुमने मुझसे बात नहीं की ना ।

अध्यन - तो क्या ... क्या करोगी।

चाहत उसके हाथ से बाइक की चाबी लेकर - ये नहीं मिलेगी तुम्हे।।

अध्यन ने कहा - ठीक है रख लो..

चाहत हैरान होकर उसे देखने लगीं । इतने में अंश आ गया। चाहत ने अंश को चाबी पकड़ाई थैंक्यू कहा।

अंश अब अध्यन को देखने लगा। जो चाहत को देख रहा था। चाहत ने उसे जाने का इशारा किया। अध्यन मुस्कुराते हुए चाहत के पास आया। और कहा - जा बालिका.. तुझे माफ़ किया।

चाहत उसकी इस हरकत को देख कर मुस्कुरा दी।

अध्यन ने अंश को कहा वो बाइक चलाए। अंश ने पहले किक मारी । तब तक पीछे बैठ अध्यन चाहत को देखने लगा। चाहत को देख अध्यन और अंश ने उसे बाय कहा । वो दोनो

चले गए।

चाहत भी साइकिल अंदर रख घर आ गई।
 
चाहत का घर

चाहत अपने घर के अंदर अाई। चाहत ने अपने शूज उतरे। और मम्मी को देखते हुए किचन में आ गई। चाहत ने देखा उसकी मम्मी कुछ बना रही थीं । चाहत पीछे से उन्हें गले लगाते हुए। उसने अपना चेहरा उनके कंधो पर रख दिया।

चाहत - मम्मी...

चाहत की मम्मी उसके गाल में हाथ रख कर बोली - आ गया मेरा बच्चा..

चाहत - हा... वैसे क्या बन रहा है।।

रीमा जी - बैगन का भरता ।।।

चाहत चिल्लाते हुए - अरे वाह।। आज तो मै बहुत सारा खाना खाऊंगी।। ये बोल उसने अपनी मम्मी को गाल पर किस कर दिया।

रीमा जी - चाहत ... हटो बेटा काम करने दो...

चाहत उनसे दूर हुई और पेडे का डिब्बा निकाल कर अपनी मम्मी को से दिया। वो धीरे से उनके कान में बोली - दादी को मत बताना। सरप्राइज है।।

रीमा जी भी उसी की तरह धीरे से बोली - ओके।।।

फिर दोनो जोर से हसने लगीं । तभी चाहत ने मुंह में ऊंगली रख कर कहा - शू.... ह....

चाहत किचन से निकल कर बाहर अाई । वो अपने रूम की तरफ चले गई। वहा से कपडे चेंज कर वो बाहर अाई। बाहर देखा आर्यन टीवी देख रहा था। चाहत ने उसे देखा तभी उसे याद आया कि आर्यन के लिए वो मोबाइल ले कर अाई थी...,वो भागते हुए अपने रूम गई वहा से मोबाइल लेकर । चाहत सामने सोफे पर बैठ गई। आर्यन ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया । वो चुपचाप टीवी देखने लगा। चाहत उसके पास अाई और मोबाइल लेकर उसमे बात करने की एक्टिंग करने लगी। अब आर्यन का ध्यान गया। वो भागते हुए चाहत के पास आया । चाहत मोबाइल में जबरदस्ती बात करते हुए।

चाहत - हा काजल.. अरे नहीं ... ओह ऐसा ये तो होना ही था... अच्छा वैसे सही ही हुआ जो भी हुआ ... हा वहीं तो ...

आर्यन उसे देखते हुए - दी ...

ये आवाज़ सुन दादी वहा आ गई। चाहत उनके पास गई ।

दादी - आ गया मेरा बच्चा... कैसा रहा डोंगरगढ़ दर्शन...

चाहत उनको गले लगाते हुए - मस्त था दादी... अगली बार पापा आएंगे तो आपको भी ले जाऊंगी।

दादी उस पर अपनी बाहों को कसते हुए - ठीक है।।।

चाहत दादी से अलग होते हुए - आपके लिए भी कुछ है।

ये बोल वो किचन गई । जब वह वापस अाई तो उसके हाथ में पेडा था। उसने एक पेडा दादी को दिया । तो दादी जिद करने लगी एक और पेडा खाने की चाहत ने दादी को एक और पेडा दे दिया।

अब चाहत आर्यन के पास अाई और बोली। मेरी पपड़ी चाट चल मुंह खोल..

आर्यन उसे देखते हुए - हा ये लो... ये कह कर मुंह खोल देता है... और चाहत उसे पेडा खिला देती है।

दोनों एक दूसरे को देख कर हसने लगते है।

दादी दोनो के पास आकर उनकी बलाए लेती हुई - हाए मेरे बच्चो को किसी की नजर ना लगे... ये बोल चाहत और आर्यन के माथे को चूमती है।

थोड़ी देर बाद रीमा जी दोनो को आवाज़ लगा कर डायनिंग टेबल पर बुलाती थीं । जहा चाहत आज हुए किस्सों के बारे में सबको बताते हुए खाना खाती है।

चाहत उसे अनदेखा करते हुए - अरे नहीं तो... ओह ठीक है

अब आर्यन से सब्र नहीं हो रहा था। वो भागते हुए आया और चाहत की गोद में चढ़ उससे मोबाइल छीन ली।

चाहत इन सब के लिए तैयार नहीं थी। वो आर्यन देखने लगी ।

आर्यन ने चाहत को देखा फिर कहा - ये कितना अच्छा है। आप मेरे लिए लाए हो ना...

चाहत बनते हुए - नहीं ये तो काजल का है .. उसने लिया था अपनी बहन के लिए...

ये सुन आर्यन का चेहरा उतर गया । वो चाहत की गोद से उतरा और मोबाइल चाहत की तरफ करते हुए - ठीक है आप उन्हें दे देना...

वो वापस सोफे पर बैठ गया पर उसकी नजर अभी भी उस मोबाइल पर थी।

चाहत उसका उतरा चेहरा देख रही थीं। फिर भी उसे मज़ा आ रहा था। पर जब आर्यन एकदम से शांत हो गया तो चाहत को भी अच्छा नहीं लगा। वो उसके पास गई । उसने मोबाइल बढ़ाते हुए कहा - तेरे लिए ही लाई हूं।

आर्यन उसकी तरफ देखते हुए - सच में ।

चाहत उसके हाथ में मोबाइल देते हुए - हा मेरी सोनपापड़ी।।

आर्यन ने मोबाइल लिया और खुशी से चाहत को गले लगा लिया। और ये... ह.. कर के चिल्लाने लगा।

चाहत ने उसे माथे पर किस किया ।

अध्यन का घर

अध्यन चाहत को याद कर मुस्कुराते हुए घर में आता है। उसे दरवाजे पर ही देव जी और गौरी जी मिल जाते है। अध्यन उनको देखता है फिर मुस्कुराते हुए अपने रूम में चले जाता है।

थोड़ी देर के बाद गौरी जी अध्यन को खाने के लिए बुलाती हैं। अध्यन उनके सामने टेबल पर बैठ जाता है।

गौरी जी देखती है अध्यन आज सारी हरी सब्जी खुशी से खा रहा है। बिना ना नुकुर किए।

उन्होंने देखा अध्यन शिमला मिर्च भी खा रहा है। पर किसी को कुछ बोल भी नहीं रहा। बाकी वक़्त तो वो ऐसे नखरा करता था जैसे उसे कुछ बुरा खिला दिया गया हो...

अध्यन को देख गौरी जी उसके पास अाई और उसके माथे पर हाथ रख कर बोली - तुम ठीक हो ना..

अध्यन उनका हाथ माथे से हटाते हुए - हा मॉम मै तो ठीक हूं .. मुझे क्या हुआ ।

गौरी जी - तू जो कभी शिमला मिर्च नहीं खाता था... आज क्या हुआ जो तू इसे खाने लगा...

अध्यन चाहत को याद करता है तो उसके चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ जाती है। जिसे गौरी और देव जी दोनो ही महसूस करते है। मगर अध्यन अपनी मुस्कान छुपाते हुए - कुछ नहीं मॉम,.. बस ऐसे ही आज मन किया तो खा लिया...

गौरी जी आंखे छोटी करते हुए - अच्छा ... आज तक तो तेरा मन नहीं किया .. फिर अचानक कैसे ... हा बोल भला...

अध्यन स्पून नीचे रख कर - मॉम आप ना सीरियल मत देखा करो ... फिर आप ना उसमे रहने वाली आंटी जैसे बिहेव करने लगते तो,.. ये बोल वो वहा से चले गया।

गौरी जी उसे जाते हुए देखते रही ।

देव जी जो कब से मा बेटे का ये ड्रामा देख रहे थे । वो पेट पकड़ कर हसने लगे। उनको ऐसे खुल के हसता देख गौरी जी उनके पास वाले टेबल पर बैठ उनको प्यार से देखने लगती है।

देव जी गौरी जी को अपनी ओर देखते हुए देखते है तो वो झेप जाते है। इधर उधर देखते हुए स्पून उठा कर गलती से

मिर्ची वाला अचार खा लेते है। फिर जलन के कारण उनका मुंह लाल हो जाता है वो पानी .. कह कर जोर से चिल्लाते है ।

गौरी जी ये देख कर डर जाती है और उन्हें पानी देती हैं । साथ में उनको जल्दी से मिठाई खिलाती है।

गौरी जी उनकी पीठ सहलाते हुए - क्या हुआ ... ठीक हो ना आप ।

देव जी उनको देखते हुए - पहले तो अपने ही मुझे डिस्ट्रैक्ट किया और अब आप ही ..

गौरी जी उनको टोकते हुए - मैंने क्या किया...

देव जी - अब आप मुझे ऐसे प्यार से देखेगी तो यही होगा ना...

गौरी जी ये सुन शर्मा जाती है । जिसे देख देव जी फिर कहते है - एक तो आप खूबसूरत ऊपर से आपका यू शर्माना हाए ..

गौरी जी उनको रोकते हुए - क्या आप भी अध्यन अभी भी घर पर है... सोच समझ कर बोला करो आप।

देव जी सिर पर हाथ रख कर - कुछ कहूं तो दिक्कत ... ना कहूं तो दिक्कत ... बांदा करे तो क्या करे..

गौरी जी उनकी प्लेट में पराठा रखते हुए .. कुछ ना करो ये पराठा खाओ... चुपचाप।

देव जी चुपचाप पराठा खाते है।

अध्यन रूम में आता है। वह बेड पर लेट कर आज की फोटोस देखता है। वो सारी फोटोस को स्कीप करते हुए देखता है। तभी उसे चाहत की पहाड़ी वाली फोटो दिखती है। जिसे देख वो मुस्कुरा देता है। तभी उस पहाड़ी पर हुए बात याद करता है।

अध्यन चाहत के फोटो को देखते हुए - तुम्हे ऐसा क्यों लगता है तुम खूबसूरत नहीं हो.. मेरी नजर नहीं हटती तुम से और तुम हो की ... खैर रहने दो... तुम्हे तुम्हारी खूबसूरती का अहसास अब मै करवाऊंगा। .. तो मिस चाहत सिंह बी रेडी ... ये बोल उसने उसकी फोटो को होंठो से छुआ और सो गया।

चाहत का घर

चाहत खाना खाकर अपना काम कंप्लीट कर के बेड पर लेट गई । थोड़े देर में उसे उसके सिर पर किसी का हाथ की छुअन महसूस हुई । इस छुअन से वो अंजान नहीं थी। ये चाहत की दादी की छुअन थी। उनके हाथ को महसूस करते हुए सो गई। उसका सुकून भरा चेहरा देख दादी ने उसे माथे पर किस किया। फिर वो भी सो गई।
 
अगले दिन

चाहत उठीं। उसने देखा दादी अपना समान पैक कर रही है। उसको अचानक याद आया कि दादी आज फिर से गांव जाने वाली है। वो उदास हो गई। जिसे दादी ने देख लिया। पर कहा कुछ नहीं।

चाहत अपना काम कंप्लीट कर डायनिंग टेबल पर बैठ गई। उसकी मम्मी खाना सर्व कर रही थीं । चाहत भी उनके साथ खाना सर्व करने लगी।

आज नाश्ते ने पोहे और जलेबी बनी थी। (छत्तीसगढ़ में पोहे और जलेबी बहुत ही खास नाश्ता होता है। अगर आप छत्तीसगढ़ आए और अपने पोहा जलेबी नहीं खाया तो आपका नाश्ता अधूरा है।)

दादी को पोहा जलेबी बहुत पसंद है। पर डाइबिटीज होने के कारण उन्हें घर पर कम खाने को दिया जाता था। चाहत ने दादी को नाश्ता दिया। फिर खुद भी खाने लगी।

थोड़ी देर बाद दादी अपने बेग के साथ रूम से बाहर अाई तो चाहत ने अपनी मम्मी से कहा - मम्मी मै दादी को बस स्टैंड

छोड़ आऊ ।

रीमा जी - हा ठीक है... पर देख कर जाना ।

चाहत ने हा में सिर हिला दिया । रीमा जी ने दादी के पैर छुए । चाहत उन्हें लेकर घर से बाहर अाई।
 
अध्यन का घर

गौरी जी - अध्यन बेटा ...

अध्यन - क्या हुआ मॉम..

गौरी जी - ये फाइल पापा भूल गए है जाओ उनको दे आओ...

अध्यन - ठीक है... बोल कर उठा और अपने बाइक की चाबी लेकर आया । उसने फाइल ली और बाहर चले आया।

बस स्टैंड

चाहत ने दादी को एक बेंच पर बिठाया और उनके लिए कुछ फल लेने चले गईं । वो वापस आती है तब तक बस भी आ गई। चाहत ने दादी के पैर छुए और बोली - दादी बस में ध्यान रखना ... सो मत जाना .. और हा ये फ्रूट्स ले लो। इसमें केले है इनको ऊपर रखना नहीं तो दब जाएंगे।..और

दादी उसे रोकते हुए - बस मेरी दादी मा... मुझे ज्यादा दूर नहीं जाना... मुश्किल से आधे घंटे का रास्ता है.. तुम अपना ख्याल रखो ... और ठीक से घर जाना। ये बोलते हुए उन्होंने चाहत के गाल छुए और बस में बैठ गई।

चाहत उनको देखते हुए हाथ हिला कर बाय बोल रही थी।

बस चाहत से दूर जाने लगी । चाहत जिसने अभी तक खुद को संभाल कर रखा था। थोड़े देर के लिए उसकी पलके भीग गई। पर उसने खुद को संभाल लिया।

वो मुड़ी और बस स्टैंड से बाहर आ गई। चाहत बाहर आकर ऑटो का इंतज़ार करने लगी। तभी उसके सामने एक बाइक रूकी। उस बाइक को देख चाहत थोड़ा आगे बढ़ी । वो बाइक भी उसके साथ आगे बढ़ने लगी।

चाहत को समझ ही नहीं आया ये कौन है। वो एकदम से चलने लगी। तभी वो बाइक स्पीड बढ़ा कर चाहत के सामने आ गईं । चाहत ने डर से आंखे बंद कर दी। जब उसने आंखे खोली तो उसमे बैठा शख्स चाहत को देख रहा था।

चाहत पहले तो उसे देखने लगी । फिर मुस्कुरा दी।

चाहत - ये क्या तरीका है...

वो शख्स हेलमेट उतारते हुए - तुमने मुझे पहचाना कैसे ?

चाहत उसका हाथ पकड़ कर दिखाते हुए - इससे।

वो शक्स - ओह... ये ब्रेसलेट... अरे ...

चाहत मुस्कुराते हुए - हा।।।

अध्यन अब चाहत को।मुस्कुराते हुए देख रहा था।

अध्यन ने चाहत से कहा - चलो तुम्हे घर छोड़ दू।

चाहत - नहीं यही पास में तो है... मै ऑटो से चली जाऊंगी।

अध्यन - तुम... ना , नहीं , ये वर्ड्स तुम्हारे फेवरेट है क्या?

चाहत मुस्कुराते हुए - नहीं तो...

अध्यन सिर पर हाथ रख - फिर से नहीं...

चाहत अब खिलखिला कर हसने लगी।

अध्यन दिल पर हाथ रख के - यार ये हसी... मुझे पागल ना कर दे... यार तुम क्यों इतनी प्यारी हो...

उसने ये बोला ही था .. चाहत भी उसे देखने लगी।

चाहत अध्यन को देखते रहती है...उसे इस तरह अपनी ओर देखता पाकर अध्यन डर जाता है।

चाहत कुछ नहीं कहती वो बस उसे देखती है..., अध्यन उसकी आंखो में देखता है...जिसमें अजीब सा दर्द दिखाई देता है...

चाहत - मुझे चलना चाहिए काफी लेट हो रहा है...

अध्यन - सुनो ना तुम्हारे साथ मै...मेरा मतलब क्या हम...

चाहत उसे देख कर - मुझे देर हो रही है... और तुम

अध्यन जल्दी से - बस कुछ देर के लिए... प्लीज.. ये बोल कर वो अपने फिंगर क्रॉस कर लेता है

चाहत उसे देखती है फिर - ठीक है।।

अध्यन ये सुन खुश हो जाता है... वो उसे लेकर अपने साथ शहर से बाहर ले जाता है...

तभी चाहत के मोबाइल में उसकी मम्मी का कॉल आता है । वो कॉल अटेंड करती है ।

रीमा जी चाहत के बोलने से पहले - चाहत मै मार्केट जा रही हूं ।.... तुम घर आओगी तो चाबी वहीं मिलेगी जहा होती है।.... और आज सन्डे है तो आर्यन के साथ सीमा के घर से भी आ जाऊंगी...। बेटा तुम घर आ जाना और खाना खा लेना...

चाहत - मम्मी मै घर ही आ रही थी... वहा मुझे मेरा फ्रैंड अध्यन मिला तो उसी के साथ हूं... आप टैंशन ना ले मै आ जाऊंगी...

रीमा जी - ठीक है... अपना ख्याल रखना ... और जल्दी आ जाना।

चाहत - हा ठीक है।।।

ये बोल कॉल कट कर देती है। आज सन्डे था तो चाहत ने अपने बालों को धोया था। उसने उन्हें एक जुड़े के रूप में बांध दिया था। उससे कुछ छोटी लटे उसके चेहरे पर आ रही थीं। आज उसने ब्लू जींस और पिंक टॉप पहना था। वो बहुत प्यारी लग रही थीं । अध्यन उसे मिरर से देख रहा था।
 
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