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Non Veg Story - बीवी के कारनामे

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मैं वापस आकर बीडीओ को देखने लगा ,कुछ खास था ही नही काजल की वही बात पर वो आज दिन भर से कमरे में ही थी ,यानी वो प्यारे के पास नही गयी ये बात दिल को बहुत ही सुकून देने वाली थी..काजल आकर मुझसे लिपट गयी,
"जान तुम्हे वो साइट कैसी लगी"
"अरे जान मुझे तो इसके बारे में कुछ भी नही पता मैं क्या बताऊ "
काजल के आंखों में शरारत थी मुझे पता था की क्या होने वाला था,वो मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी,
"अच्छा सुनो ना मेरा काम करना आपको पसंद है ना ,आप बोलोगे तो मैं इस प्रोजेक्ट को बन्द करवा दूंगी "
वो सच में बहुत ही सीरियस थी
"पागल हो गयी हो क्या,तुम यहां बैठे बैठे ऐसे भी बोर हो जाती होगी वहां तुम्हारा टाइम पास भी हो जाएगा ,और ऐसे भी रॉकी भी तो तुम्हारे साथ बहुत ही हेंडसम है साला ,देखो कही उससे प्यार ना हो जाय तुम्हे "
मैं तो मजाक में कहकर हसने लगा लेकिन जब मेरी नजर काजल पर पड़ी तो मेरा दिल घबरा गया उसकी आंखे लाल थी जैसे वो मुझे गुस्से से घुरि जा रही हो,

"क्या हुआ जान "
"आप ऐसे सोच भी कैसे सकते है की मैं आपके सिवा किसी से भी प्यार करूँगी ,मेरे ऊपर आपका बिल्कुल भी भरोसा नही है क्या."वो रोने लगी मैंने तो बस मजाक किया था और वो लड़की ऐसे बोल रही थी जो कभी मेरे ही नॉकर से साथ ...
"अरे नही जान मैं तो बस मजाक कर रहा था तुम तो "मै काजल के होठो को चुमने लग उसके गालो से गिरने वाले एक एक बून्द आंसुओ को पीने लगा.
"सॉरी मेरी जान "मैंने काजल के होठो में अपने होठो को भरकर एक जोरदार किस किया और तबतक किया जबतक की उसका रोना बंद नही हो गया वो भी मेरे बालो पर अपना हाथ रखकर उसे सहलाने लगी...
थोड़ी देर में जब हम दोनो अलग हुए
"जान एक बात पुछु इसबार बुरा मत मानना "
"हा बोलो पर याद रखना प्यार तो आपसे ही किया है और हमेशा आपसे ही करूँगी "
"अच्छा लेकिन अगर मानो वो पसंद आ गया तो "
"पसंद तो वो मुझे अब भी है ,पसंद और प्यार में बहुत फर्क होता है समझे "
काजल ने मेरे नाक को पकड़कर हिला दिया ,पर मैं थोड़ा गंभीर था
"और सोचो अगर तुम्हारे बीच कुछ हो गया तो "
काजल ने मुझे घूर कर देखा ,
"जान मैं आपकी बीबी हु,और मैं सिर्फ और सिर्फ आपसे ही प्यार करती हु,और रही कुछ होने की बात तो मैं भी एक इंसान हु हो सकता है की मुझसे कुछ गलती कभी हो भी जाय तो भी मैं आपसे ही प्यार करूँगी कभी भी आप ये मत सोचना की मैं आपसे प्यार नही करती .......मैं आपकी हु जान सिर्फ आपकी हो सकता ही कोई मेरा जिस्म ले ले पर मेरा मन हमेशा आपका ही रहेगा और वो आपसे कोई भी नही छीन सकता ...."काजल मुझसे ऐसे लिपट गयी जैसे किसी पेड़ से कोई लता लिपटी हो.वो मेरे सीने से अपने सर को रगड़ने लगी.
मेरा मन उसकी बातो से बहुत हल्का हो चुका था पर एक सवाल मेरे दिल में था..काजल की बात का मतलब क्या हुआ,क्या वो अब भी किसी के साथ .मतलब की वो मुझसे दिल से प्यार करती है पर वो सो किसी के भी साथ सकती है ..
मेरा दिमाग फिर से काम करना बन्द कर रहा था मैंने सोचा की छोड़ो यार पहले तो खुद अपनी जान का मजा लिया जाय बाद में जो लेता है लेने दो ऐसे भी अगर उसे कुछ परेशानी नही है तो मैं उसे क्यो रोकू ऐसे भी प्यार तो वो हमेशा मुझसे ही करती है ......
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दिन बीते पर प्यारे और काजल के बारे में कोई भी सुराग हाथ नही आया,प्यारे के चहरे पर ऐसे तो कोई दुख का भाव नही दिख रहा था वो भी मेरे सामने अच्छे से ही व्यवहार करता था,और काजल भी सुबह से शाम तक काम मे ही व्यस्त रहती थी।
सुबह मेरे जाने से पहले ही रॉकी के साथ निकल जाती ,कभी जल्दी आ जाती तो कभी मेरे आने के बाद आती,थोड़ी थकी सी भी दिखती थी पर जो चीज उसमे नही बदली थी वो था उसका मेरे प्रति प्यार और समर्पण,,,,

कुछ दिन बीते थे कि डॉ का काल आया,
"कैसे हो दोस्त आ गयी भाभी"
"हा यार वो तो उसी दिन आ गयी थी जब मैं वहां से आया था,"
"अच्छा है साले तभी मैं बोलू साल कोई फोन कैसे नही कर रहा है,अभी क्या हालत है ,सब कुछ ठीक ही होगा तभी तो तेरा कोई पता नही है अभी तक,,"
"हा भाई सब ठीक ही लग रहा है,कोई भी ऐसी बात तो नही हुई जिससे मुझे कुछ शक हो,"
मैंने पूरी बात डॉ को बता दी,,,
"हूमममममम ये तो अच्छा है कि तू भी समझ गया कि प्यार तो तुझसे ही करती है ,ऐसे मैं उसके कॉलेज इसे कुछ इनफार्मेशन निकले थे ,शायद अब तुझे उसकी जरूरत नही है,"
साला चुतिया फिर से दिल की धड़कने बड़ा गया
"क्या पता चला तुझे"
"वही तेरे बीबी के कारनामे"
अब मेरे माथे में पसीना था पता नही ये डॉ क्या बताने वाला था,मैंने मन मे सोचा की यार ठीक है वो मुझसे ही प्यार करती है ,और हिम्मत कर कह गया
"बता दे यार अब मुझे डर नही वो मुझसे ही प्यार करती है और अब जो भी हो जाय,मैंने फैसला कर लिया है,उसकी खुसी में ही मेरी खुशी है"
मुझे डॉ की जोरो की हँसी की आवाज सुनाई दी,
"मादरचोद तू भी आखिर बन ही गया ना cuckold ,मुझे तो बहुत ही ज्ञान दे रहा था"
डॉ की बात का मुझे बिलकुल भी बुरा नही लगा,
"बे चुतिया,तू चूतिया ही रहेगा..मुझे नही पता कि मैं क्या था और क्या बन गया हूं .पर भाई अब उसके चहरे पर बस खुशी देखना चाहता हु,चाहे वो कुछ भी करे ,फर्क तो मुझे पड़ेगा ही पर क्या पता शायद मुझे भी इसमें वैसे ही मजे आने लगे जैसा उस क्लब वाले बंदे को आया था"
मैंने एक गहरी सांस छोड़ी साथ ही डॉ ने भी ..अब हम दोनों के मन शांत थे,,,
"अच्छा है यार ऐसे भी तेरा दुख देखा नही जा रहा था,तो सुन क्या पता चला है मुझे"
मैं उसकी बातों को ध्यान से सुनने लगा,उसकी हर बात के साथ मेरी आँखें नाम होते जा रही थी और काजल के लिए सम्मान और भी बढ़ने लगा था ,मुझे अब पता था कि वो ये सब क्यो कर रही है,लेकिन फिर भी वो मुझसे इतना प्यार करती है इस अहसास से मेरा दिल बाग बाग हो गया..
"चुतिया तूने जो बात मुझे बताई है उससे मेरा दिल बहुत ही हल्का हो गया है मेरे दोस्त,मेरी काजल का प्यार सच्चा है पर सेक्स की आग उसकी मजबूरी है,कोई बात नही मेरे दोस्त मैं अपनी जान का पूरा ख्याल रखूंगा,पर ये कब तक रहेगा."
"मुझे नही पता पर मैं काजल से बात कर रहा हु इस बारे में ,मैं उसे नही बताऊंगा की तुझे पता है,अगर वो मेरा साथ दे तो शायद जल्द ही हम किसी ठोस नतीजे में पहुच सकते है"
मेरे दिल का एक बड़ा बोझ हल्का हो गया था ,अब मुझे पता था कि काजल मुझे कितना प्यार करती है और उसकी क्या मजबूरी है,पर एक अजीब सी झुनझुनाहट भी मेरे शरीर मे दौड़ गयी ये सोचकर कि काजल दूसरे मर्दो के साथ..साला क्या मैं सच मे cuckold हो रहा हु.
डॉ से बात करके काजल के लिए दिल मे इज्जत जागी, पर साथ ही एक डर भी था,क्या मैं काजल को संतुष्ट नहीं कर पा रहा,शायद हा भावनात्मक रूप से तो काजल मेरी है पर शायद शारिरिक रूप से उसे और ज्यादा की जरूरत है जो मैं उसे नही दे पाता,या शायद कॉलेज के वो दिन जिसमे काजल ने बहुत ही मजे किये थे या दर्द झेला था (वो तो वही जानती है) ने उसे इस कदर सेक्स के प्रति पागल बना दिया है कि वो अपनो मर्यादाओ से बाहर जाने से नही कतराती.
आखिरकार डॉ ने मुझे फिर से टोका
"क्या हो गया बे किस सोच में पड़ा है"
"यार काजल की खुशी में मेरी खुशी है पर..."
"पर अब क्या चाहिए तुझे"
"मैं चाहता हु की वो जो भी करे वो कम से कम मुझे पता तो रहे,मैं नही चाहता कि वो किसी मुसकिल में पड़े"
"अच्छा मुश्किल में न पड़े इसलिए या .मजे लेना चाहता है."
डॉ की तो जोरो से हँसी छूट गयी और मुझे भी बड़ी शर्म महसूस हुई..
"साले मादरचोद "मैंने धीरे से कहा पर डॉ ने इसे सुन के अनसुना कर दिया,
"सुन एक काम कर मैं तुझे कुछ लिंक्स भेजता हु वहां से तू कुछ एप्प्स डाऊनलोड कर ले और ***** इन तरीकों से तू उसके अपने मोबाइल पर पड़ पायेगा,और अपने लेपटॉप से उसके मोबाइल की एक्टिविटी भी देख पायेगा "
वाह ये तो मेरे लिए कमाल ही हो गया
"थैंक्स यार डॉ"
"कोई बात नही बेटा तू भी मजे ले अपनी बीवी के.."
इतना कहकर डॉ जोरो से हसने लगा,साला बड़ा कमीना था पर आज ना जाने क्यों उसके कमीनेपन में मुझे गुस्सा नही आ रहा था,,,,
डॉ के रखने के बाद से ही मैं काम मे भीड़ गया मुझे वो एप्पस अपने मोबाइल लेपटॉप और काजल के मोबाइल में इंस्टॉल करने थे ,काजल के आने के बाद चुपके से सभी काम पूरे कर लिए और उन्हें रन कर दिया,मैंने चेक भी कर लिया कि सभी कुछ ठीक काम कर रहा है या नही,
अब कल की सुबह से ही मुझे मेरी बीवी के कारनामो की खबर रहेगी,सोच के ही मैं बहुत उत्तेजित ही गया और सीधे काजल पर जैसे हमला बोल दिया,आज मेरे उतावले पन से काजल भी चकित थी पर उसे भी इसे देख बहुत मजा आ रहा था..
 
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मैं अपने एडवेंचर से बहुत खुश था है ये मेरे लिए किसी एडवेंचर से कम भी नही था कि अपनी ही बीवी की जासूसी करना वो भी ये जानते हुए की वो किसी और के साथ अपने जिस्म का मजा ले रही होगी या लेने वाली होगी ये अजीब सी चुभन थी और अजीब सा नशा मेरे अंदर भर रहा था मुझे नही पता कि मैं क्या और क्यो कर रहा हु पर ये तो बात पक्की थी कि मुझे इसमें बहुत ही मजा आ रहा था ,
अभी तक जो बात मुझे जल रही थी आज वही बात में मैंने खुशी और खुशी से बढ़कर मजा खोज लिया था ,

ये बदलाव एक दिन में नही आया था इसके लिए कई दिन लगे थे और खासकर डॉ ने जो मुझे दिखाया और समझाया था और काजल की वो प्यार भरी बातें और उसका अतीत ये अभी एक साथ मिलकर मुझे मजबूर कर दिए कि मैं ऐसा ही जाऊ और अपने प्यार को दूसरों के साथ मजे लेते देखु,
शायद उस लड़के की बात सच ही थी कि जब उसे कोई प्रॉब्लम नही है तो आपको क्यो हो रही है,
काजल का मेरे लिए प्यार और सम्मान भी एक कारण था ,अगर वो ये सब ना भी करे तो भी क्या फर्क पड़ता अगर वो मुझे वो प्यार और सम्मान नही देती,मैने अपने कई दोस्तो के मुह से सुना था कि शादी के बाद जिंदगी झंड हो जाती है,पत्नियां प्यार की जगह बात बात पर झगड़े करतीं है,कई तरीकों से मर्द को बांधने की कोसिस करती है और मर्दो का भी इंटरेस्ट अपनी पत्नी पर से उठाना शुरू हो जाता है,और वो दोनो बाहर मुह मरते है,शायद समाज के बंधनों की फिक्र के कारण वो एक दूसरे से जुड़े रह भी जाय तो क्या ,,जिंदगी तो उनकी नरक की तरह हो जाती है,
लेकिन मेरे साथ ऐसा नही था ,बड़ी अजीब बात थी कि जिसे समाज शायद रंडी का दर्जा देता को मेरी पत्नी थी,जिसे बदचलन कहता वो मुझे इतना प्यार और सम्मान देती हैं जो मैंने कभी बजी किसी औरत को अपने पति को देते नही देखा,वो फूल सी खिली हुई और अपनी खुसबू सब तरफ फैला रही थी,मेरे पास दो ही ऑप्शन थे या तो उस फूल को कुचल कर अपना बना कर रखु और उसकी खुसबू को खो जाने दु या उसे युही महकने दु,,,
हा उसकी खुसबू सिर्फ मेरी नहीं रह जायेगी पर वो सदा ही महकेगी,,,, मैंने तो चुन लिया मैं उसे सदा महकता देखना चाहता हु.
काजल के जाते ही मैं ऑफिस पहुचा ज्यादा काम तो नही था इसलिए अपने मोबाइल में उस एप्प को खोलकर देखने लगा कि काजल क्या कर रही है,उसके मोबाइल का एक डुप्लीकेट मेरे मोबाइल में था जिसे मैं चला सकता था,मैं पहले उसके वाट्सअप मेसेज पड़ने की सोची,
प्यारे के कुछ मेसेज थे ,प्यारे से तो पता नही क्यो मुझे छिड़ सी थी पर साले की किश्मत बहुत ही बुलंद थी कि काजल जैसी हसीन परी उसे लाइन दे रही थी,
प्यारे रोज काजल को मनाने की कोसिस कर रहा था पर काजल कोई भी जवाब उसे नही दे रही थी,आख़िरकार उसने अपना दुखड़ा रोना सुरु कर दिया और काजल भी थोड़ी पिघल गयी पर काजल ने उसे सेक्स के लिए साफ मना किया हुआ था,काजल आज रात ही उससे मिलने जाने वाली थी,इसकी मा का साली काजल भी क्या चुतिया वाले काम कर रही है,मेरे दिमाग ने कहा पर साला चड्डी के नीचे से कुछ और ही आवाज आई एक जोरदार झटका मेरे लिंग ने मारा और मेरे होठो में एक मुस्कुराहट सी आ गयी.
दूसरा msg था रॉकी का अभी तो उसके साथ ही था पर ये msg उसने रात में और सुबह किये थे ,कोई प्रॉब्लम वाली बात तो कही दिखाई नही दी पर काजल की तारीफों के पुल उसने बांधे थे,जैसे आप बहुत सुंदर हो,आपका काम करने का तरीका बहुत अच्छा है वगैरह ,मतलब साफ था उसने काजल को लाइन मरना शुरू कर दिया है बस बात थी काजल के हा की ,काजल रिप्लाई में बस कुछ स्माइल लिखकर भेज देती या बस कल मिलते है,..
अब आगे क्या होगा ये तो मुझे नही पता था बस आज शाम का इंतजार जरूर था..
काजल और प्यारे की रंगीन शाम देखने को मैं बेताब हो रहा था मैंने लेपटॉप काजल के आने से पहले ही अपने कमरे के बाहर लेकर उसे ड्राइंगरूम में ऐसे रख दिया कि मुझे किचन का भी कुछ नजारा दिख जाय, लेकिन अगर काजल उसके कमरे में गयी तो..तब तो बस बाते ही सुन पाऊंगा.
जो भी हो मुझे मजा आ रहा था और यही सबसे चौकाने वाली बात थी.
 
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एक दूजे के प्यार के नशे में बेताब से हम दोनो ही घर पहुचे आज तो प्यार की इंतहा हो गयी थी ,जाने कब ये आग शांत हो ,बिस्तर में पहुचते ही मैं काजल पर टूट पड़ा,वो भी मुझे पागलो की तरह किस किये जा रही थी शायद उसकी भी आग आज ठंडी नही हुई थी जो रॉकी ने लगा तो दी थी पर बुझाना भूल गया था,मेरे लिए तो काम बहुत आसान हो गया था,लोहा पूरी तरह से गर्म था मुझे तो बस हथौड़ा मरना था,
काजल को बिस्तर पर पटकते ही मैं अपने कपड़े खोल कर फेक दिया और काजल के गालो को खाने लगा,उसके गुलाबी से गाल जो रस से भरे हुए थे ,मेने उसके गालो को पूरी तरह से भिगो दिया था,मेरे थूक से गिला हुआ उसका गाल अपनी नरमी से मुझे सुख दे रहा था और मैं और भी टूटकर उसके गालो को खा रहा था,अपने दांतो से मेने उसके गालो में निशान ही बना दिए जिसपर काजल ने मुझे एक शिकायत भरे निगाहों से देखा पर उसकी आंखों में अब भी वही प्यार था जो मैं हमेशा से ही मेरे लिए महशुस करता हु......
उसके बालो को अपने हाथो में फसाकर मैं उसे सहलाने लगा,और वो भी बेहद कामुक अंदाज में मेरे होठो पर टूट पड़ी,दो जिस्मो की गर्मी ने हमारे बदन में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया था,
मैं काजल के कपड़ो के तरफ रुख किया और उसके कपड़ो को धीरे धीरे उतारने लगा ,वो अभी भी वही कपड़े पहनी थी सुबह ही मैं उसे देखकर उत्तेजित हो गया था ,मैं उसके भरे हुए नितंबो को अपने हाथो से भरकर उसे मसलने लगा,काजल और भी गहरे से मुझे चूमने लगी ,मैं उसका शर्ट खोलकर फेक चुका था,शायद अब काजल को सहन नही हो रहा था और वो जल्दी से ही अपने कपड़े खोलने लगी,लेकिन मैंने उसको उसकी पेंटी खोलने से मना कर दिया वो मुझे फिर से शिकायत के भाव से देखने लगी ,मैं अपने पूरे कपड़े खोल कर नंगा हो कर उसके सामने खड़ा हो गया ,मेरे लिंग को देखकर वो हल्के से हँसी और उसे पकड़कर उसे इतने प्यार से चूसने लगी जैसे की वही वो चीज थी जिसके लिए वो इतनी प्यासी थी,...
मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुच रहा था और मैं झरने को बिल्कुल भी तैयार नही था,मुझे तो अभी जितनी देर हो सके अपनी जान के साथ खेलना था,मैं काजल के मुह से अपना लिंग निकल कर अलग किया ,वो जल्दी से अपनी पेंटी निकालने को हुई पर मैंने उसे फिर से रोक दिया वो मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगी ,और मेरे होठो में एक शरारती सी मुस्कान उभर आयी .,..
"नही ना जान करो ना "
उसने लगभग रोते हुए कहा ,वो आमतौर पर इतनी बेताब नही होती पर आज तो उसकी जगह पर कोई भी होता तो वो भी बेताब सा हो जाता,जब वो चरम के करीब पहुची थी तो मैं आकर उसके मजे का सत्यानाश कर दिया था ,और फिर से उसे भड़काकर छोड़ दिया रो ऐसे में कोई भी बेताब सा हो जाय,वो मछली जैसे तड़फने लगी और मुझे उसकी तड़फन बहुत ही मजेदार और मनमोहक लग रही थी ,मैं उसके पास जाकर उसे लिटा दिया और खुद उसके पेंटी के पास अपनी नाक ले जाकर जोरो से सूंघ लिया,उसके कामरस से भीगा वो अंतःवस्त्र इतने मादक खुसबू से भरा था की मैं फिर से उसे जोरो से सूंघने से अपने को नही रोक पाया,लेकिन मेरी इस हरकत से काजल की हालात और भी खराब हो गयी उसे होने वाले का अंदेसा हो चुका था और उसका शरीर छटपटाने लगा था वो अपनी कमर ऊपर कर मुझे आमंत्रण दे रही थी और जब मैं अपना नाक उसके योनि के भाग से लगाया वो अपने कमर को ऊपर कर मेरे नाक से अपनी योनि को रगड़ने लगी,काजल की योनि से बहता हुआ गिला गिला से प्यार की धार ने मेरे नाक को भी भिगो दिया और मेरे मुख से एक मुस्कान सी निकल गयी ..
वो बस झरने ही वाली थी और मैं उसे यू बेताबी में झरने नही देना चाहता था उसे भी वो मजा मिले जिसके लिए वो इतनी तड़फ रही थी ,मै उसकी पेंटी को उसकी योनि के ऊपर से हटा कर अपनी जीभ से उसे चाटने लगा,काजल का हाथ मेरे सर पर था और वो पूरे ताकत से उसे अपने अंदर लेने की चेष्टा कर रही थी पर शायद उसे वो आनंद नही मिल पा रहा था जिसके लिए वो तडफ रही थी और आखिर में वो हारकर मुझे अपने ऊपर खिंच ही लिया ,आज मैं काजल की ताकत देखकर दंग ही रह गया वो मुझे बिल्कुल ही आराम से उलटा कर के मेरे ऊपर चढ़ गयी ,अपने हाथ मेरे लिंग पर रख उसे अपने आग की उस भट्ठी में डाल दी जो पानी से भरी थी,....
काजल अंदर से इतनी गर्म होगी मुझे पता नही था आज तो उसकी योनि मानो कोई भठ्ठी ही हो,मेरे लिंग के अंदर जाते ही काजल को ऐसे सुख का अहसास हुआ जैसे सालो से प्यासे को कोई अमृत ही पिला दे,
"aaaahhhhhh जाआआआआन लव यु बेबीईईईईई "
वो अपनी रफ्तार तेज करने लगी उसकी सिसकियों से ही मैं झट जाता इतनी मादकता अपने अंदर लिए है मेरी रानी काजल ..
"आह आह आह आह आह आह ,ओ ओ ओ आह जआआआननन आह जाआआआआआआनननन "
वो किसी पम्प की तरह मेरे ऊपर कूद रही थी और मेरे होश ही उड़ा रही थी मुझे पता था की काजल इतनी गर्म हो चुकी थी की वो ज्यादा समय तक नही टिकने वाली ,मेरी अकड़ को आज काजल शायद तोड़ ही देती वो बिल्कुल भी आराम के मूड में नही थी ,वो लगातार ही कूद रही थी ,
"लव यू बेबी ,लव यू ,फ़क मि जान आह आह आह ,"
"लव यू मेरी रानी "
हमारी सांसे कब उखाड़ जाती इसका कोई भी भरोषा ही नही था,पर आनद के उस सागर से मैं कभी भी बाहर नही निकलना चाहता था,लेकिन शायद काजल को जल्दी से ही झरना था वो अपनी बेताबी के इंतहा पर थी और वो उस ज्वाला को निकाल देना चाहती थी जो उसके अंदर भरी हुई थी ,काजल ने अपने स्तनों को मेरे मुह में ठूस दिया और मैं भी किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उसके स्तनों का पान करने लगा मुझे उसमे कुछ लाल रेसेस दिखाई दिए शायद वो रॉकी की दें थे साले ने मेरी जान को बहुत ही निचोड़ा होगा,उसका चहरा मेरे दिमाग में आने पर मैं और भी उत्तेजित हो गया और उसे नीचे से ही और जोरो के धक्के देने लगा पर शायद वो जोर नही बन पा रहा था ,काजल भी अब कूदना बन्द कर जोरो से धक्के मारे जा रही थी मेरे अंडों में एक दर्द भर गया पर उसी दर्द का तो मजा था,,..
हम दोनो ही अपने तरफ से पूरी ताकत से धक्के दे रहे थे.
"आह वो आह आह आह आह जान जान आह "
दोनो के धक्के एक साथ मिलकर और भी तेज और प्रभावशाली हो जाते और दोनो के मुह से ही एक सिसकारी फुट पड़ती थी.उसके योनि से रगड़ते हुए मेरे लिंग की चमड़ी से उठाने वाला वो आनद मैं कभी भी खोना नही चाहता था पर वो एक धारा सी मेरे वृषनकोशों से आती हुई मुझे प्रतीत हुई और काजल भी अपने चरम के नजदीक ही थी हम दोनो ही अंतिम धक्कों पर अपनी पूरी की पूरी ताकत खर्च कर रहे थे ,और वो ज्वाला फूटा और काजल मेरे ऊपर झरने सी धार छोड़ती हुई लेट गयी,मेरा भी हाल उससे अन्यथा नही था और मैं भी उसके अंदर ही एक तेज फुहारे को छोड़ता हुआ हाँफने लगा,.....
दोनो ही हाफ रहे थे और दोनो ही उस आनंद में डूबे थे जो हमे अभी अभी मिला था.वो गीलापन हमारे यौन अंगों से बाहर आ रहा था,चिपचिपे वीर्य में मिला काजल का कामरस मुझे इच्छा तो हुई की उसे पी लू पर उठाने की हिम्मत ही नही जुटा पाया और मुझे पूरा यकीन था की यही हाल काजल का भी हो रहा होगा उसे भी मेरा वीर्यपान करना बहुत ही पसंद था ,खासकर जब गहरे संतोष की दशा हमे घेरे हुए हो .......

उखड़ती सांसो में मेरा प्यार काजल के अंदर जा रहा था और वो भी मेरे वीर्य को अपनी योनि सिकुडकर अपने अंदर ही रखने का प्रयाश कर रही थी ,मैं उसे और भिगोना चाहता था पर मेरे अभी का कोटा पूरा हो चुका था ......
गर्माहट के अहसास से भीगे हुए हम लेटे हुए थे,अब भूख भी लगनी शुरू हो गयी थी,दोनो उठकर तैयार हुए,रेणु ने खाना बना कर रखा हुआ था,दोनो खाना खा कर फिर से बिस्तर में जाने का प्लान कर रहे थे,तभी मुझे याद आया की प्यारे की तबियत खराब थी चलो हाल चाल पूछ लेते है,काजल भी साथ गयी,प्यारे ने काजल को ऐसे निगाहों से देखा की मुझे थोड़ी सी हँसी आ गयी,उसकी निगाहों में डर साफ था...
"कैसे हो काका "
"अब ठीक हु साहब"
"हम्म ज्यादा काम मत किया कीजिये ,अब तो रेणु भी आ गयी है आपका हाथ बटाने के लिए "
"जी जी"
"चलिए ठीक है आराम कीजिए "
हम दोनो वापस आ गए ,
वॉयस आकर काजल बाथरूम में चले गयी ,मैं अपने मोबाइल से काजल का वाट्सअप चेक करने लगा,
थोड़ी देर पहले ही उसने प्यारे से बात की थी,मेरा माथा ठनका अच्छा जब हम खाना खा रहे थे तो काजल मोबाइल पकड़े हुए थी शायद उसी समय कुछ बात हुई थी ,.
'मेडम मुझे माफ कर दीजिये '
'कोई बात नही काका तबियत कैसी है आपकी और आप मुझे बहुरानी ही कहा कीजिए'
'अब थोड़ी अच्छी है पर.."
"पर क्या'
'छोड़िए '
'बोल भी दो '
'आप मिल जाती तो ...'
'अच्छा क्या करोगे मिलकर "(शायद ये लिखते समय काजल के होठो में एक शरारती सी मुस्कान आयी होगी ,और प्यारे का दिल भी खिल गया होगा}
'जो करते थे '
'वो तो नही हो पायेगा '
'ठीक है तो मिल बस लेने दीजिये '
'ह्म्म्म ठीक है पर जल्दी से चले जाना ,'
'ओक्के '
'आ जाना मैं दरवाजा बंद नही करूँगी ,ये भी आज जल्दी ही सो जाएंगे "
"ओककक "प्यारे ने बहुत सी स्माइल भेजी..
अच्छा तो काजल को लगता है की मैं जल्दी ही सो जाऊंगा.काजल की ये बहुत बड़ी भूल थी आज तो मैं पूरे मूड में था ...
काजल के बाहर आने पर मैंने उसे फिर से जकड़ लिया ,मुझे पता था की प्यारे अब आने ही वाला होगा,या थोड़ी ही देर में आ जाएगा,क्योकि काजल को भी सुबह जल्दी जाना होता है.
"क्यो मन नही भरा क्या आपका "
"अरे मेरी जान तुझसे कैसे मेरा मन भर जाएगा ,तू तो मेरी रानी है"
काजल भी मेरे सीने में अपना सर रखकर मुझे जकड़ ली ,
"सोने दीजिये ना कल जल्दी ही जाना होगा,बहुत काम होता ही वहां भी ,"
"सो जाओ ना मैं कब मना कर रहा हु मेरी रानी,"
मैं उसके सर पर अपना हाथ फेरने लगा और तभी मुझे एक हल्की सी आहट हुई मैं और काजल दोनो ही समझ चुके थे की प्यारे अंदर आ गया है,उस आहट पर हम दोनो ही अनजान बनने की कोसिस कर रहे थे ,काजल मुझे जल्दी से सुलाना चाहती थी और मैं इन दोनो को सतना....
मैं काजल को फिर से नीचे लाकर उसके होठो में अपने होठो को डाल दिया,मुझे पता था की काजल कभी भी मुझे मना नही करेगी..काजल ने एक प्यार भरी नजर मुझ पर डाली और मेरा साथ देने लगी दोनो के होठो के मिलन से एक चपचपाने की ध्वनि सी उत्पन्न हुई ,और वही आनद....
काजल मेरे लिये हमेशा ही नई सी थी वही अदा वही समर्पण जो के नई नवेली दुल्हन में होता है मैंने उसमे हमेशा से वही बात पाई थी ,आज भी मुझे कभी ऐसा नही लगा की मैं इस लड़की के साथ इतना समय बिता चुका हु .वो किसी फूल सी ताजा लगती थी और उसकी खुसबू से मेरा मन हमेशा ही महक सा जाता था..
"आप भी ना "
काजल थोड़ा अलग होती हुई मुझे देखने लगी ,उसके फोन पर एक हल्की सी वाइब्रेशन हुई ,उसने msg टोन बन्द कर रखा था,पर मुझे क्या फर्क पड़ने वाला था,
"मैं पानी पीकर आता हु "मैं बिस्तर से खड़ा हुआ ,काजल की तो सांसे ही रुक गयी ,
"अरे पानी तो यही रखी है ",उसने एक बोतल मुझे देते हुए कहा
"अरे जान आज थोड़ा सर्दी सा है ना मुझे थोड़ा कुनकुना करके पियूँगा पानी "मैं जाने लगा
"आप रुकिए ना मैं ले आती हु "काजल भी उठ चुकी थी
"अरे मेरी जानेमन इतना भी खयाल ना रखा करो की आपकी बुरी आदत ही लग जाय,कुछ काम मुझे भी कर लेने दिया करो तुम रुको मैं अभी गया और अभी आया ,"
लेकिन काजल फिर भी जल्दी से खड़े हो कर मुझसे पहले हो ली ..
"आप भी ना मैं गर्म कर रही हु पानी "वो जोरो से बोलते हुए बेडरूम से निकल कर कीचन में चले गयी ,वो हाल को क्रोस करके बेडरूम में गयी थी पर उसने हाल की लाइट नही चालू की थी ,मैं उसके पीछे आया और हाल की लाइट चालू कर दिया काजल जैसे घबरा गयी ,वो मुझे देखने लगी पर मैं मुस्कुराते हुए उसे ही देखता हुआ किचन में चला गया और पीछे से उसको पकड़ लिया ,वो अपनी सांसो पर काबू करने की कोशिस तो कर रही थी पर उसकी उखड़ी हुई सांसो का आभास मुझे साफ हो रहा था,उसने जैसे तैसे पानी हल्का सा कुनकुना किया और मैं एक गिलास पकड़कर वहां से बाहर आया काजल की आंखे हाल को निहार रही थी मैने भी एक नजर पूरे हाल ने घुमाई प्यारे कही नही दिखा ,लेकिन मैंने सोफे के नीचे से उसकी परछाई की झलक पा ली,वो साला चुतिया सोफे के नीचे छुपा बैठा था,मुझे हल्के से हँसी आयी मैने काजल से कुछ पानी रूम में लाकर रखने को कहा वो एक बर्तन में पानी पकड़कर बैडरूम में चली गयी और किचन की लाइट बन्द कर दी ,मैं हाल की लाइट चालू रखकर बैडरूम में चला गया ,काजल पानी रखकर पलटने ही वाली थी की मैंने उसे दबोच लिया ,
"अरे हाल की लाइट तो चालू है "
"तो रहने दो ना "
"मैं बन्द करके आती हु ना ,"
"अरे जाने दो जान "
मैं उसे बेड में गिरकर उसके ऊपर चढ़ गया...
काजल के मुह से आउच निकल गया जिसे शायद प्यारे भी सुन पा रहा होगा,मुझे बहुत ही एक्सएटमेंट की फीलिंग हो रही थी और मैं काजल पर ऐसे टूट पड़ा जैसे की कोई भूखा खाने पर,या कोई शेर अपने शिकार पर.
काजल को बेतहाशा चूमने लगा और जैसे ही मैंने अपनी जीभ उसके जीभ से मिलाई काजल भी प्यार की उस आग में किसी मोम की तरह पिघलने लगी,मुझे हल्की सी आहट सुनाई दी और मैंने काजल को अपने ऊपर कर लिया मैं उसके होठो को अपने होठो में भर कर चुम ही रहा था की मेरी नजर दरवाजे पर पड़ी और मेरी योजना सफल हो गयी ,मुझे पता था की प्यारे साला अपना कमीनापन नही छोड़ेगा और जरूर दरवाजे से झांकने की कोशिस करेगा इसलिए मैंने हाल की लाइट जलने दी थी ताकि उसकी परछाई से मुझे ये समझ आ जाए की वो दरवाजे में आ चुका है ,हुआ भी वही एक परछाई दरवाजे के नीचे से मेरे बैडरूम ने प्रवेश कर रही थी और मेरे चहरे पर एक मुस्कान खिल गयी ,ना जाने प्यारे ने काजल के साथ कितनी बार क्या किया है पर आज तो साले को मैं बताऊंगा की प्यार करना क्या होता है ,ये सोच कर ही मेरे लिंग में ऐसी अकड़ हुई की काजल के मुह से एक आह सी निकल गयी ,मैं अनजाने में ही उसके कपड़े के ऊपर से ही उसकी योनि में आघात कर रहा था,जब मुझे ये समझ आया तो मुझे हल्के से हँसी आ गयी ,काजल के ऊपर लेटे हुए मैं इतना धक्का देने में तो असमर्थ था की काजल की चीख निकल जाय मैंने उसे अपने नीचे पटक दिया और उसके कपड़ो को एक ही झटके में खोल दिया वो भी बहुत ही उत्तेजित हो चुकी थी ,मैं उसे चूमता हुआ ही अपने हाथो को बिस्तर के किनारे पर ले आया और वहां पड़े एक दर्पण को ऐसे सेट किया ताकि मैं दरवाजे से आते हुए उस प्रतिबिम्ब को देख सकू ,लाइट की वजह से प्यारे की परछाई का आभास मुझे हो पा रहा था लेकिन कुछ समझ नही आ रहा था की वो क्या कर रहा है,शायद काजल को भी उसके होने का आभास हो चुका था उसकी आंखों में एक अजीब सी मादकता उतर रही थी वही मैं उसके नजर को देख ही समझ चुका था की वो भी प्यारे की उस परछाई को देख चुकी है,वो मेरे बालो को अपने उंगलियों में ऐसे जकड़े हुए थी मैं सर ही ना हिला पाउ ,काजल के कोमल से वो गीले गीले से दोनो टांगो के बीच की नाजुक पंखुड़िया मेरे मोठे से लोहे की रॉड की तरह अकड़े हुए लिंग को अपने अंदर बुला रही थी और दोनो के गुप्तांगों के चमड़ी में वो खुजली होने लगी थी जिसे लोग कभी कभी प्यार का अहसास भी कहते है...
मैंने देर किये बिना अपने प्यार के अहसास की खुजली से काजल की खुजली को मिटाने के लिए उसके अंदर तक चला गया ,
"आआहहहहहहह मेरी जान "
काजल की आवाज पहले से थोड़ी तेज थी शायद वो भी प्यारे को हमारे प्यार की गहराई से अवगत कराना चाहती थी ,
"मजा आ रहा है मेरी रानी "
मैंने धक्कों को और जोर से किया और काजल की आहे पूरे कमरे में गूंजने लगी
"हाँ जान आह आह आह और जोर से और जोर से "
काजल कमर उठकर मेरे साथ ताल से ताल मिलाने लगी थी,दोनो की कमर के टकराव से एक ताल सी उत्पन्न हो रही थी और वो संगीत शायद ही किसी को पसन्द ना हो ,वो चिपचिपे से द्रव्यों के मिलान से उत्पन्न होने वाला संगीत जिसमे कमर के टकराने की आवाज भी मिली हो उस मादकता का क्या कहना ,साथ ही मिला हो एक सौदर्य की प्रतिमा की आहे और सिसकिया ..
बिस्तर भी हमारे प्यार को सलाम करता हुआ आवाजे करने लगा था ,आज मैं जानवर हो गया था और काजल भी जानवरो की तरह मुझे अपने अंदर ले रही थी ,वो सिसकिया नही बल्कि दहाड़ सी थी ,,,
प्यारे का क्या हाल हो रहा था ये तो मुझे नही पता पर मुझे तो बहुत ही मजा आ रहा था और फिर वो धार निकली जिसका निकल जाना प्यार का अंत होता है ,मेरे वीर्य ने किसी जवालामुखी की तरह काजल की गुफा को भिगो दिया वही काजल भी एक जोरो की धार छोड़ते हुए मुझे कसकर पकड़ ली ,
"आआहहहहहहह मेरी जान,आह ओ."
काजल के नाखून मेरी पीठ पर गहरे से निशान छोड़ चुके थे वही काजल के वक्षो को मैंने अपने दांतो से लाल कर दिया था...
काजल और मैं एक दूजे को जोरो से पकड़े हुए बस उस गीलेपन के अहसास में दुबे हुए थे ,सांसे अब भी तेज थी और मन में एक अजीब सा सुकून था,दोनो एक दूजे से जुदा होना ही नही चाहते थे ,वीर्य और काजल के प्यार के रस की धार मिलकर बिस्तर पर फैल रही थी ...
मैंने हल्के से दरवाजे की ओर देखा प्यारे शायद वहां से जा चुका था ,हम ऐसे मगन हुए थे की हमे उसका आभास भी नही रहा .और मैंने मन में सोचा .
"माँ चुदाये "
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ख्वाब जैसे मेरी बांहो में सोई थी काजल,जब मेरी आंखे खुली..उसके मासूम से चहरे को देखता हुआ मैं उसके नाज़ुकता को छूने लगा,वो हल्के से कसमसाई और अनजाने ही उसके चहरे पर एक मुस्कान सी खिल गयी.
बेहद प्यारी ,बेहद नाजुक पर मेरी..शरीर से नही जिस्म के इस्तमाल से नही ,बल्कि वो मेरी थी अपने मन से अपने दिल की गहराइयो से.
उसके नरम होठो को छुते ही मुझे एक झुनझुनी का अहसास हुआ और मेने उसके होठो पर अपने होठो को रख कर एक हल्की सी चुम्मन दे दी ,उसको जल्दी से उठाकर हम गार्डन की ओर चल पड़े,वो अपने स्किन टाइट कपड़ो को देख रही थी ,
"क्या हुआ जान पहन भी लो ,आज लेट हो गए है चलो जल्दी "
"वो इसे पहन कर गार्डन जाना थोड़ा अजीब लगता है,लेकिन इसमें एक्सरसाइज करना कंफेटेबल होता है,"
"तो पहन लो ना ,और जैसे कल ऊपर जैकेट पहना था वैसे ही आज भी डाल लेना,"
उसने हाँ में सर हिलाया,
फिर वही अंकल आंटी और बाकी वही लौण्डे,वही काजल को सबका रुककर देखना,लड़को का वही आहे भरना,
कभी कभी तो मुझे गुस्सा भी आता वही कभी अपने को मैं इतना नाशिबवाला मानता था की मुझे ऐसी लड़की मिली है जिसपर कितने लोग फिदा हो गए .कभी तो जलन होती तो कभी मैं उत्तेजित हो जाता ,
काम का इतना प्रेसर बढ़ रहा था की मैं परेशान ही हो गया,ऐसे तो मैं कोई भी गपला नही किया था ,पर अधिकारियों के गपलो को छुपाना पड रहा था,उनकी सभी बकचोदी मुझे सहनी पड़ रही थी ,दो दिन बीत गया और मैं काजल से ढंग से बात भी नही कर पता,दिमाग में इतना टेंशन हो रहा था की मैं घर पहुचते बहुत ही थक जाता था,वही हाल काजल का भी था ,पता नही वो रॉकी से कुछ करा रही थी या नही पर ये तो है की उसके भी चहरे पर वही थकान दिखती थी जो मेरे चहरे पर ,कुछ ही दिनों की बात थी,चलो देखते है,लेकिन तीसरे दिन काजल से रहा नही गया,
मैं जब आफिस से आया तो वो पहले से ही आ चुकी थी ,अधिकतर वो मेरे बाद ही आती थी ,वो आज थोड़ी कम थकी हुई लग रही थी ,आज रेणु को भी उसने जल्दी ही भेज दिया था.
जैसे ही हम बैडरूम में गए उसने मुझे जोरो से भीच लिया..
"जान थक गया हु ,सोते है ना "
"सुनिए ना मैं ये इनॉगरेशन का प्लान केंसिल करना चाहती हु "
मुझे एक झटका लगा ,
"क्यो जान "
"अरे देखो ना आपका भी अभी इतना वर्क लोड हो जा रहा है और मेरा भी ,क्या मतलब की हम ऐसे घर आये और मैं आपकी कुछ सेवा भी नही कर पा रही हु ."उसका चहरा सचमे उदास हो गया था,
"अरे क्या सेवा करना चाहती हो मेरा तुम ,.....अरे यार तुम पागल हो गयी हो क्या ,तुम्हे इतना अच्छा मौका मिला है वो तुम कैसे जाने दे सकती हो ,मेरे कारण तुम्हे ऐसे जगह पर रहना पड़ रहा है,जहा तुम्हारा कोई भी अच्छा फ्यूचर नही है ,अब अगर तुम ये भी नही की तो मुझे भी बुरा लगेगा ,मैं तुम्हे खुश देखना चाहता हु मेरी जान ...और उसके लिए मैं कोई भी सेक्रिफाइस कर सकता हु."मेरे बोल मेरे दिल से निकल कर सीधे काजल के दिल तक पहुच रहे थे.
 
उसकी आंखों में भी मेरा ये प्यार देखकर आंसू आ गए और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया,थका होने के बावजूद भी हमने प्यार भरा एक राउंड लगा ही लिया ,उसके बाद तो सोने का मजा ही अलग होता है..
10 दिन पूरे हो चुके थे,आखिरकार मुख्यमंत्री को आना था,काजल के तीनो भाई और भाभियां काजल के स्पोर्ट के लिए एक दिन पहले ही आ गए थे मैं भी अपने काम से खुस था ,कम से कम मैं तो अपने आफिस से डांट नही खाने वाला था,
पहले मेरे आफिस का काम हो गया और मुख्यमंत्री जी शाम तक काजल के होटल पहुचने वाले थे ,मेरे पास बहुत टाइम था की मैं इनॉगरेशन में पहुच सकू.मुख्यमंत्री जी ने मेरी सबके सामने बहुत ही तारीफ की जिससे मेरे कुछ ऑफिसर भी जल गए ,खैर मुझे कुछ फर्क नही पड़ना था क्योकि वो मेरा कुछ भी नही उखाड़ने वाले थे ,और मंत्री जी के तारीफ की असली वजह भी मुझे पता चल चुकी थी वो थी ,काजल के बड़े भी और मिश्रा साहब की मेरे लिए की गयी सिफ़ारिशें,मुझे आज ही मिश्रा जी और भैया ने कहा था की हमने तेरे बारे में मंत्री जी से बात कर ली है हो सके तो तेरा प्रमोशन भी हो जाएगा,और हुआ भी वही मुझे प्रमोशन का वादा भी मिल गया.अब मैं शहर में बैठने वाला था ,मतलब जिस शहर में काजल का होटल था ,वही मेरा ऑफिस भी होने वाला था,मुझे इसकी खुसी थी ,लेकिन शायद मुझे उसी बंगले में रहना था जहा मैं अभी रहता हु .मेरे लिए कोई भी परेशानी नही थी क्योकि सरकारी गाड़ी भी थि और सरकारी ड्राइवर भी ,और बंगाला भी बहुत अच्छा था,
इधर मैं जल्दी से काजल के होटल पहुचा,मुझे वहां देखकर सभी बहुत खुश हो गये खासकर काजल ,वो तो मुझे देखकर रो ही डाली और मेरे बांहो में खुद को डालते हुआ बहुत इमोशनल हो गयी ,
"मुझे तो लगा था की आप नही आ पाओगे "
"अरे जान मंत्री जी तो शाम तक आएंगे ,और ये मिश्रा जी और भइया के कारण हुआ है की उन्होंने मेरी बहुत सिफारिश कर दी तो मुझे जल्दी से छुट्टी मिल गयी आज "
काजल ने मुझे और जोरो से कसा और फिर उसे जगह की नजाकत समझ आयी और वो मुझसे अलग हो गयी ,सभी भाभियां उसका मजाक उड़ाने लगी और भइया थोड़ा मुस्कुराने लगे,वही काजल शर्मा गयी और रॉकी ,,,,,,,,,,वो बेचारा क्या करता चुप चाप खड़ा देख रहा था.
मिश्रा जी अपनी मंडली के साथ पहुच चुके थे ,और फिर मंत्री जी भी आ गए ,ये न्यूज़ लोकल अखबारों की हेड न्यूज़ बन चुकी थी ,इसलिए बहुत संख्या में लोग भी जुट गए और कल भी ये मुख्यपृष्ट की खबर होनी थी इसलिए बहुत से पत्रकार भी वहां मौजूद थे मंत्री जी तो आधे घंटे में ही अपना काम निपटा कर चले गए माहौल तो अभी गर्म हुआ था,पत्रकार काजल और रॉकी का इंटरव्यू ले रहे थे ,वो अपने होटल और खासकर हेल्थसेन्टर की जोरो से खुबिया गिना रहे थे,और मैं खड़ा बोर हो रहा था ,क्योकि वहां सभी भैया या मिश्रा जी या काजल और रॉकी के इन्विटेड गेस्ट थे,और सभी अपने गेस्ट के साथ बाते कर रहे थे , तभी एक शख्स की इंट्री हुआ और उसे देखकर मेरे चहरे पर भी एक मुस्कान सी आ गयी ,वो थे डॉ चुतिया ,
मैं उसके पास जाकर उनसे गले मिला .
"साले अभी आ रहा है"
"हां यार वो ."उसने एक नजर घुमाई
"साला क्या होटल बनाया है बे तूने,इतना पैसा कहा से आया बेटा"
"अरे यार काजल के भइया ने इन्वेस्ट किया है ,"
मैं उसे काजल की फेमिली से मिलने ले गया ,डॉ उसके भाइयो को पहले से जानता था वो भी उसे अच्छे से जानते थे तो उसे वहां घुलते हुई ज्यादा समय नही लगा ,लेकिन डॉ फिर से मेरे पास आ गया ,
"अपने घर से किसी को नही बुलाया है क्या "
"बुलाया तो था यार पर मैं ही फ्री नही था वरना जा कर ले आता ,माँ आना चाहती थी पर उसे पता चला की काजल के मां बाप नही आ रहे है तो वो भी नही आयी ."
"ह्म्म्म "डॉ ने रॉकी को देखा
"ये हेंडसम को है ,लग तो ऐसे रहा है की यही होटल का मालिक हो "
मुझे हँसी आ गयी और मैंने रॉकी के बारे में सब कुछ बता दिया बस उसके और कजल के रिलेशन को छोड़कर
"हम्म यानी ये भी काजल की ले रहा है ,"
मैंने डॉ को घूर के देखा
"साले मेरी बीवी को तू समझता क्या है ,"
डॉ कुछ नही बोला पर हसने लगा
"क्या हस रहा है"
"कुछ नही लगता है उसे भी देखकर तू बहुत मजे ले रहा है ..साले तेरे चहरे पर लिखा है की तू उनके रिलेशन से खुस है,"
मेरे चहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी ,...
 
29
सब कुछ खुशहाली से चल रहा था,होटल का काम जोरो में था काजल की खुशी बिस्तर में भी दिखाई देती थी,उसका गार्डन में योगा क्लास भी चालू हो चुका था,और लोग रॉकी और काजल को ही कपल समझते थे ,क्योकि दोनो ही सबको सिखाते थे ,मैं तो सीखने वालो के साथ ही खड़ा रहता था,योग,एरोबिक,आदि आदि की थोड़ी मोड़ी जानकारी वहां दी जाती थी और इससे वहां से कई लोग उसके हेल्थसेन्टर को भी जॉइन कर रहे थे,खासकर के नवजवान लड़के ,रॉकी को देखकर सबको बॉडी बनाने की हसरत पैदा हो जाती और काजल का मस्ताना और मादक शरीर उन्हें सेंटर जॉइन करने पर मजबूर कर देता ये बात मुझे पता चली जब मैं शहर में अपनी ड्यूटी जॉइन की ,वहां मुझे कोई भी नही पहचानता था ,हा काजल के चर्चे तो फैले ही हुए थे ,लेकिन कोई उसे रॉकी की गर्लफ्रैंड कहता तो कोई उसकी वाइफ और मुझे भी इसमें कोई भी इंटरेस्ट नही था की कोई क्या कहता है ,मेरे लिए तो यही अच्छा था की मैं किसी के नजर में ना आउ,.
शहर बड़ा था,लेकिन काजल की चर्चा हर जगह हो रही थी ,उसके और रॉकी के बड़े बड़े पोस्टरों से पूरा शहर लदा हुआ था,खासकर उन जगहों पर जहा पर युवकों की भीड़ हो.
एक दिन मैं जब ऐसे ही अपने ऑफिस से कुछ दूर टहलता हुआ चाय पीने चला गया ,ऐसे भी वहां काम तो कुछ खास होता नही था,जो भी काम हो वो वहां के छोटे कर्मचारी करते थे ,फील्ड का काम अब मेरा रह नही गया था और मैं दिन भर कुर्सियां तोड़ता हुआ बोर हो जाता था,
पास के ही चाय ठेले काम टापरी में पहुचा वहां वो टापरी वाला मुझे पहचान लिया..
"अरे सर आप, आप तो नए साहब हो ना वन विभाग वाले "
"हा एक चाय पिलाओ ,और एक सिगरेट" मैंने मुस्कुराते हुए कहा,
"साहब आप क्यो तकलीफ की हमे बुला लिया होता,छोटू को बोल कर" छोटू वहां का एक चपरासी था ,जिसका काम ही था लोगो के लिए समान लाना,सरकारी ऑफिस का एक टिपिकल सा चपरासी.मुह में पान और रिस्वत लेने को हमेशा तैयार .
"क्यो मैं आ गया तो तुम्हे पसंद नही आया क्या "
"अरे नही सर बैठिए ना "
उसने एक ख़ुर्शी आगे की ,वहाँ अधिकतर सभी सरकारी कर्मचारी चाय पीने आते थे ,पास में ही एक दो कॉलेज भी था ,जिसके अधिकतर लड़को के लिए वो अड्डा हुआ करता था,इसलिए वहां थोड़ी भीड़ भी होती थी,चाय वाला भी मेरी ही उम्र का रहा होगा शायद मुझसे कुछ कम ही रहा होगा और उसकी कमाई शायद मुझसे भी ज्यादा ,
वहां का माहौल देखकर मुझे मेरे कॉलेज के दिन याद आ गए,कॉलेज गोइंग लड़को की वहां भीड़ लगी थी ,जो लगभग हमेशा लगी रहती थी ,इसलिए उसे पोलिश और नगर निगम के लोगो को भी पैसे खिलाने पड़ते थे,
"यार मेरे लिए तू लेमन टी बना ,अच्छी मसाला वाली "
"जैसा आप कहे सर "
मैं चाय और सिगरेट पीता हुआ फिर से उन्ही कालेज के दिनो में पहुच गया ,की मेरी नजर रोड के उस पर लगे एक बड़े से फ्लेक्स पर पड़ी,बड़ा सा बेनर लगा था जिसमे काजल के होटल की एडवरटाइजिंग थी,साथ ही रॉकी और काजल का वही पोश जो मैंने उस दिन होटल के बाहर देखा था,आदित्य इंटरनेशनल एंड फ़इटनेश सेंटर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था,आदित्य काजल के बड़े भैया का नाम था ,पूरा पैसा उनका ही लगा था और काजल को 50% का शेयर मिला हुआ था,ऐसे तो भैया अपना नाम नही यूज़ करना चाहते थे और साथ ही 100% शेयर काजल के नाम से रखना चाहते थे पर काजल माने तब ना ,उसकी जिद थी की होटल का नाम बड़े भईया के नाम से ही होगा और वो बस 50% शेयर लेगी,बाकी के 40% आदित्य भैया के नाम से और 10% मेरे नाम से था,रॉकी को रेगुलर पेमेंट में रखा गया था,जो मेरी सेलरी से भी ज्यादा थी ,पर ये फैसला मुझे सही लगा क्योकि इससे वो हमारे कंट्रोल में ही रहता ,शेयर में हिस्सेदारी देने से वो आज नही तो कल हमारे ऊपर चढ़ने की कोशिस करता ,काजल के पास बिजनेस का दिमाग तो बहुत जायद था,उसने मुझे भी 10% दिला के रखा था जबकि मुझे इससे कोई भी मतलब नही था.इसका रीजन मुझे कुछ समझ नही आया पर ठीक है,क्या फर्क पड़ता है.
,मैं काजल के फ़ोटो को निहार रहा था की वो चायवाला बोल पड़ा ,
"अरे सर इसने तो तबाही ही मचा दी है यहां आकर जो लौण्डे कभी जिम के नाम सुनकर भी मुह बनाते थे साले सजधज कर जिम जाते है ,और साथ ही लडकिया भी जाती है ,इसने तो यह बवाल ही मचाया हुआ है ,साली रांड कही की "
मेरा दिमाग फिर गया ,इस मादरचोद की इतनी औकात की ये मेरे सामने मेरी ही बीवी को ..लेकिन थोड़ी ना पता होगा की ये मेरी बीवी है नही तो ये हिमाकत वो नही करता..
"तमीज से बात करो ,एक औरत है वो ."मेरे चहरे पर गुस्से के भाव साफ जिसे देखकर वो डर ही गया .
"अरे साहब आप तो गुस्सा हो गए मेरा वो मतलब नही था ,असल में मैं एक छोटे से जगह से आया हुआ हु और यहां इतने सालो से मैं ये काम कर रहा हु पहली बार ये हुआ है की कोई लड़की ऐसे कपड़ो में देखा हु,और इसके जिम में तो बाकी लडकिया भी ऐसे ही कपड़ो में जाती है,अब आप ही बताओ ना साहब ,सभी लड़के उसे गुरते रहते है ,कोई कही टच कर रहा है तो कोई कही ,सब कुछ तो इसके कपड़ो से दिखता है ,इतना ज्यादा फीस लेती है फिर भी साले मेरा उधारी तो देते नही लेकिन वहां पहुच जाते है,सिर्फ उसे देखने .लड़कियों को क्या ये सब सोभा देता है और साथ में ये और लड़कियों को भी बिगड़ रही है ,जिम नही साला रंडी खाना बना के रखा है "
उसकी इतनी छोटी सोच ने मेरा दिमाग ही घूम दिया ,मैं वहां से उठा और उसका कांच का गिलास जोरो से फोड़ दिया,उसके पसीने छूटने लगे,वो भी जनता था की मैं एक सरकारी अधिकारी हु,,और उसका ये टपरी सरकारी महकमे के कृपा से ही चल रहा है ,मैं अगर चाहू तो एक कंप्लेन से ही उसका ये टापरी उखाड़ सकता था,
"साहब गलती हो गयी ,दो जूते मार लो पर माफ कर दो ऐसे गुस्सा मत हो साहब "
"गुस्सा मैं तुझपर नही तेरी सोच पर हु,इसीलिए हमारी औरते अपनी मर्जी से कही जा नही सकती ,कुछ पहन नही सकती ,वो तो अच्छा काम करना चाहती है पर तुम जैसी सोच के लोगो के कारण बेचारियों को हर जगह बस ताने मिलते है और साथ में छेड़छाड़ का शिकार होती है ,वो जो भी पहने मुझे ये बाता जो वहां देखने जाते है वो गलत हुए या जो पहनती है वो ..साले देखना ही बन्द कर दो ना तुम्हे देखना भी घूर कर है और साथ ही दोष भी तुम लड़कियों पर ही लगते हो .आज के बाद तेरे मुह से ऐसे शब्द सुना तो तू और तेरा टपरी दोनो उठवा दूंगा "
मेरे इस कदम से वहां लोगो की भीड़ इकठ्ठा हो चुकी थी ,मैंने आगे कहा,इस बार मेरी आवाज थोड़ी धीरे और समझने वाले लहजा था ,

"देखो लड़की को देखना गुनाह नही है ,ये तो स्वाभाविक है,लेकिन ऐसी धरना बहुत गलत है.हमे अपने को देखना चाहिये की हम क्या करते है.हा यार उसकी फिगर सेक्सी है (मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,वो भी मुझे अजीब नजरो से देखन लगा ) लेकिन इसका मतलब ये नही की वो रंडी है ,और हा हो सकता ही की वो लड़को को उत्तेजित कर देती हो ,और उन्हें टीस करती हो पर यार अपनी भाषा सुधारो और कम से कम लड़कियों का सम्मान करना सीखो ,क्योकि तुम्हारी भी बेटी, माँ ,बीवी,बहन होगी .जब तुम ही लड़कियों का सम्मान नही करोगे तो तुम दुसरो से कैसे आशा कर सकते हो की वो सम्मान करे ,,और इसी सोच के कारण तुम अपनी बहनों को भी अच्छा काम करने से रोकते हो क्योकि तुम्हे लगता है की दूसरे उन्हें इन्ही नामो से बुलाएंगे जबकि तुम्हे भी पता है की वो गलत नही है,,तो पहले खुद को सुधार लो फिर दुसरो से उम्मीद करना ,चल अब एक और चाय बना और एक सिगरेट दे "
मैं हल्के से मुस्कुरा दिया ,किसी का धंधा खराब करना मेरा मकसद बिल्कुल भी नही था ,मेरे चहरे पर मुस्कान देख कर वो भी थोड़ा सा रिलेक्स हुआ और डरते हुए मुझे एक चाय दी..
"तेरा नाम क्या है " मै उससे पूछा
"साहब भुवन "
"हम्म अच्छा है ,डरने की जरूरत नही है ,और यार बात तो तेरी सही है ऐसी सेक्सी लड़की बवाल तो मचा ही देगी "
वो हल्के से हँसा पर अभी भी थोड़ा सा डर रहा था .
मैं फिर से चाय पीता हुआ काजल को निहारने लगा......
तभी मेरा फोन बजा ,
"हलो "
"हलो विकास मैं ,मिश्रा बोल रहा हु "
मिश्रा जी की आवाज तो मैं पहचान गया था,पर उनका नम्बर मेरे पास नही था,
"प्रणाम मिश्रा सर "
"अबे क्या सर सर लगा के रखा है अब मैं कोई अधिकारी नही हु "
मैं हल्के से मुस्कुराया ,
"जी कहिए "
"हम्म असल में मैंने तुझे इसलिए फोन किया है क्योकि मेरी एक पुरानी जान पहचान की बंदी आ रही है यहां पर मैं चाहता हु की तुम उसे पिकउप कर लो ,वो वही ट्रेन से उतरेगी वहां से मेरे घर छोड़ देना ,मैं रॉकी को कहने वाला था पर वो लोग देर से आते है और वो लड़की अभी कुछ देर बाद 4:30 को ही पहुच जाएगी ,"
"पर सर मेरा ऑफिस "
"अबे मैं जानता हु की तू कितना काम करता है,"
मिश्रा जी की बात तो सही थी और हम दोनो ही हँस पड़े ,
"अब बड़ा अधिकारी बन गया है ,बड़े अधिकारी काम करते नही करवाते है ,मेरे साथ रह मैं सब सीखा दूंगा."
"जी ठीक है सर ,लेकिन मैं उसे पहचानूंगा यानी नाम या नम्बर "
"अरे ये स्टेशन कितना बड़ा है,ऐसे नाम है उसका मलीना और पहचानना आसान होगा क्योकि वो एक विदेशी है महिला है ,तो तुझे स्टेशन में जो भी विदेशी महिला दिखे उसे उठा लेना "
मिश्रा जी फिर जोरो से हँसे मैं भी हस पड़ा ,
"जी ठीक है मिश्रा जी "
मिश्रा जी थे बड़े ही कमाल के आदमी और ऐसे आदमी की दोस्ती कौन छोड़ता ,बड़े ही पावरफुल थे पर बड़े ही खुशमिजाज ,जिनके नाम से कभी बड़े बड़े अधिकारियों की हालात खराब हो जाया करती थी पर जिनसे वो दोस्ती निभाते उसे कभी कोई भी प्रॉब्लम नही आने देते ,चाहे वो अधिकारी हो या कोई मंत्री उनकी इज्जत सभी करते थे ,और ऐसे आदमी को ना बोलना मेरी औकात से बाहर था,और जब वो प्यार से बोले तो क्या फर्क पड़ता है,चलो आज जल्दी ही चल देंगे ..
मैं 4:15 को ही स्टेशन पहुच गया ,गाड़ी रुकते ही मैंने देखा की एक नवजवान सी युवती ,भूरे रंग की लेकिन काले बाल हाथ में बड़ा सा बेग लिए मैं और रघु दौड़कर उसके पास पहुचे ,उसके पास और भी लगेज था,मुझे पता नही था की ये इतना लगेज ले की आई है वरना किसी और को भी लाता अब सारा लगेज मुझे और रघु को ही पकड़ना पड़ता ..
"हैल्लो मेडम " मैं उसके पास पहुचा
"विकास राइट "
"या वेलकम वेलकम "
"मिश्रा जी ने मुझे बताया था,प्लीज् ये समान उतारने में मेरी मदद करो "वो बड़े ही प्यार से लेकिन मुश्किल से इतना बोल पाई ,मुझे लगान के कैप्टन की याद आ गयी ,'दुगुना लगान देना पड़ेगा '
"ओह स्योर " मैं और रघु जल्दी से सारा समान उठा कर चलने लगे वो एक छोटा सा पर्श पकड़े आगे आगे चल रही थी ,
"सर ये तो हिंदी बोलती है "
"हा तो क्या हुआ होगी विदेशी रहती इंडिया में होगी ,या आती जाती होगी ,या और कुछ होगा छोड़ ना यार जल्दी से चल साला समान बहुत भारी है ,एक अधिकारी को कुली बना दिया है ."
रघु मेरी बात को सुनकर हसने लगा ,मैंने ध्यान से उसके पिछवाड़े को देखा साला मिश्रा इसे महिला कह रहा था,ये तो कातिल सी जवानी थी ,24-25 की उम्र थी लगभग पतले स्कर्ट में उसकी जाँघे बहुत चमकीली लग रही थी ,सुडौल और मध्यम आकर के उसके उजोरो की खाई बड़ी ही प्यारी लग रही थी ,चहरा मासूम सा था,वो सेक्सी नही प्यारी लग रही थी जो उसका आकर्षण था ,
कार में समान लोड कर मैंने उसे पीछे बैठाया और रघु के साथ सामने बैठ गया .
"आप कहा से है मेडम .यानी वेयर."
वो हँस पड़ी ,
"मुझे हिंदी आता है "
मैं हल्के से मुस्कुराया हा समझ आ गया की तुझे कितना हिंदी आता है ..
"मैं इटली से हु ,मैं एक एंथ्रोपोलॉजिस्ट हु और यहां कुछ असिएंट चीज को ढूंढने आया हु "
"ओह ."मैं मन में सोच रहा था की यहां कौन सी पुरानी चीज है जिसे ये ढूंढने आ गयी
रघु मुझे प्रश्नवाचक नजर से देखा
"ये पुरानी चीजो को खोजती है ,"मैंने रघु को बताया
"मतलब "अब मैं इसे कैसे समझता
"गाइड फ़िल्म देखी है देवानंद की "
"जी देखी है "
"तो जो हीरोइन का पति होता है ना वैसे ही ये भी है "
"ओह ..पर सर इससे इन्हें मिलता क्या होगा "
मुझे उसपर हल्के से गुस्सा आ गया
"तू अपना काम कर बे लौड़े "
रघु झेप कर आगे देखने लगा .
"हे विकाश ये लौड़े क्या होता है ."मलीना ने प्रश्न दाग दिया और रघु की हँसी निकल गयी पर मैंने जैसे ही उसे घूर कर देखा वो अपनी हँसी दबा कर आगे देखने लगा ,पर उसके चहरे पर मुस्कान अब भी थी .
"वो मेडम "
"मेडम नही हमे तुम मलीना ही बोलना ,और हमशे हिंदी में बात करो हम हिंदी सिख रहा है "
"ओक्के मलीना जी उसका मतलब होता है लड़का या बॉय .वो एक संबोधन है ."
"क्या है ???"
"वो its like addressing वर्ड .लड़को को प्यार से लवंडे बोल देते है या लौड़े ."
मैं झेंपते हुए बोल पाया लेकिन मन में यही सोच रहा था की मेरी बात को वो जल्दी से भूल जाय.
तभी रघु ने कहा ,
"शायद मेडम केशरगढ़ के किले को देखने आयी होगी "
"हो सकता है पर वहां तो केवल खण्डर है वहां क्या मिलेगा "
"एक्सीटॉली मैं वही देखने आयी हु .विकाश तुम भी मेरे साथ चलना "
"लेकिन मेडम सॉरी मलीना वहां आपको क्या मिलेगा वो तो बस खण्डर है "
मलीना के होठो पर एक मुस्कान सी आ गयी
"वही तो मेरा काम है "
हम मिश्रा जी के घर पहुच गए,मिश्रा जी का घर नही बंगाल था जहा वो अकेले ही रहते थे ,पता चला था की शादी के कुछ साल बाद ही उनका डिवोश हो गया था ,बाल बच्चे थे नही .
नॉकरो ने दौड़ाते हुए आकर कार से समान निकल लिया,,
वही मिश्रा जी आगे बड़े ,और मलीना भी उनके गले से लग गई .
"कैसे हो लौड़े ,बहुत पतले हो गए हो"
मलीना के बोल से मिश्रा जी तो संट हो गए और मैं अपना चहरा छिपने लगा ,मिश्रा जी ने मुझे घूर के देखा ,वही रघु हल्के हल्के हस रहा था .
"बेबी ये तुम्हे किसने सिखाया ,"
मिश्रा जी मुझे देखते हुए बोले,मलीना भी बहुत एक्साईटेड होकर बताने लगी
"विकाश ने मुझे आते हुए बताया ,देखो मैं कितनी जल्दी सिख गयी ,"
"ह्म्म्म 'मिश्रा जी उसके साथ अंदर को चलने लगे और मुझे भी साथ बुला लिया उन्होंने नॉकर से उसका कमरा दिखाने को बोल दिया और उसे फ्रेश होने को ऊपर भेज दिया,एक महंगी सी शराब की बोतल बाहर निकाली,
"क्यो मेरे मेहमान को तुम ये सब सीखा रहे हो "
मैं शर्मिंदा हो गया
"सर वो गलती से मुह से निकल गया था ,ड्राइवर के लिए ,मलीना बार बार उसका मतलब पूछने लगी तो बताना पड़ा ."
मिश्रा जी हस्ते हुए एक ग्लास में विस्की भरकर मुझे बढ़ाया.
"कोई बात नही सुनो यार तुम यहां पर रहे हो और ये लड़की तुम्हारे ही उम्र की है तुम शायद इसकी मदद कर सकते हो ,इसे यहां के किले विले घुमा दो ,ये कुछ शोध करने आयी है ,इसके पिता मेरे भाई के अच्छे दोस्त है वो भी इटली में ही रहते है ,लड़की आधी इंडियन और आधी इटालियन है ,मा इसकी इंडियन है .."
"ओह "
"तुम साथ चल दोगे तो मेरा एक टेंशन खत्म हो जाएगा "
"सर ऑफिस "
"वो फिकर मत करो मैं सम्हाल लूंगा ,तुम इसे सम्हालो ..जरूरत पड़ी तो चले जाना ऑफिस भी कभी कभी वरना अब तुम्हे इसीलिए वहां डलवाया है की तुम्हे भी आराम मिले ऐसे भी तुम रिस्वत तो लेते नही तो कम से कम आराम से तो रहो ."
"ओके सर "मैं हस्ते हुए बोला .
 
30
रात जब मैं घर पहुँचा तो रॉकी और काजल बैठे बाते कर रहे थे,वहां जाते ही काजल मुझसे लिपट गयी,
"कहा थे आप आज ,फोन भी नही उठाया,"
मेरे मुह से आती शराब की हल्की बदबू को भी वो ताड गयी.
"आप शराब पिये हुए हो "
मैं थोड़ा घबरा गया क्योकि मैं कभी भी काजल के सामने नही पीता था ना ही कभी पी के घर आया था,
"अरे वो आज ..."
मैं सोफे में जा बैठा और सारी बात काजल को बताया,
"अच्छा तो मिश्रा जी ने आपकी ड्यूटी लगा दी "
इसबार रॉकी था वो हल्के से मुस्कुरा रहा था ,
"हा यार ,तुम जानते हो मलीना को "
"नही जानता तो नही पर मिश्रा जी के पास तो कई फॉरेनर आते रहते है,"
"हम्म कोई नही कल मिल लेना कल उसे भी मिश्रा जी के साथ ही गार्डन बुलाया हु ."
काजल और रॉकी ने बस एक मुस्कान दी और रॉकी ने हमसे बिदा लिया,
शराब के थोड़े सुमार में मैंने काजल को पकड़ा ,और उसके होठो को किस करने की कोशिस की वो हल्के से मुस्कुराई ,और अपना मुह हटा लिया ,
"पहले फ्रेश तो हो जाओ और खाना खा लो ,कैसी बदबू आ रही है आपके मुह से ,"
ये शायद पहली बार था की काजल ने मुझे यू मना किया पर मुझे बिल्कुल भी बुरा नही लगा और मैं उसके गालो में एक चुम्मन देकर अपने कमरे में चला गया.
सुबह मलीना और काजल मिले ऐसा लगा जैसे की वो बहुत पुराने दोस्त हो ,इतनी आत्मीयता से दोनो एक दूसरे से मिल रहे थे,आज मुझे मलीना के साथ ही उन खण्डरहो को देखने जाना था जहा मैं कभी भी नही गया था,इतने दिनों के बाद भी ,मुझे मिश्रा जी ने अपनी जिप्सी ले जाने को कहा था जंगल थोड़ा घना और रोड की हालात बहुत खराब तो मैंने रघु को छुट्टी दे दी लेकिन उसे आगाह कर दिया था की जब भी काल करू तुरंत उपस्थित हो जाय,,,..
मलीना एक छोटा से स्कर्ट और टीशर्ट पहने निकली

,उसके प्यारे से मम्मे और नीचे की गोलियां बहुत ही प्यारी लग रही थी ,वो नई नई सी जवान कन्या की तरह लग रही थी ,उसकी उम्र यू तो ज्यादा थी पर फिगर बहुत ही तरसा हुआ और कोमल था,ज्यादा उभर कही भी नही थे ,जैसा की वो अभी अभी जवान हुई हो .शरीर से वो बस 16-20 साल की लगती थी,बहुत प्यारी सी ..उसे देखकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गयी ,उसने अपने साथ एक बड़ा सा बेग भी रखा था,स्वाभाविक था की वहां तो कुछ मिलता नही तो कुछ खाने पीने की चीजे भी रख ली थी जिसमे एक पूरा बियर का बास्केट था,ऐसा लग रहा था जैसे की हम कही पार्टी करने जा रहे है ,
वो खण्डर बहुत ही पुराना था,सुना था की कोई 1500 साल पहले कोई राजा यहां पर राज करता था उसके बाद उसने अपनी राजधानी कही और बसा ली और ये इलाका वीरान होता गया .ऐसे तो इसका बहुत ही ऐतिहासिक महत्व था पर बस यहां खण्डर और कुछ भग्न मूर्तिया ही बची थी ..
यहां शायद ही कोई आता हो ,जाने के लिए कच्ची सड़क थी और आसपास बस सुनसान घना जंगल,लेकिन मलीना के लिए ऐसा नही था वो तो उसे देखकर बहुत ही खुस हो गयी .
"वाओ ."मुझे समझ नही आया की इसमें वाओ क्या है.
वो अपने हथियार वगेरह निकल कर बस काम में भीड़ गयी ,और मैं एक लाचार सा बस उसे देखता रहा ,मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं यहां क्या कर रहा हु,साला रघु को भी साथ ला लेना था,कम से कम बैठ के बियर पीते,ये रेणु को बियर पीकर उसे जंगलो में ले जाता..सोचकर मेरा लिंग एक अकड़ मारा .और मैं एक बियर निकल के पीने लगा..धूप खिली हुई थी और थोड़े सरूर के बाद वो शांत जगह मुझे बहुत ही सुहावनी लग रही थी ...लगभग एक घंटे बाद पूरी जगह घूम कर वो मेरे पास आयी उनके हाथ में भी एक बियर था.
"विजय यार .क्या जगह है,यहां कोई पहले खोज करने नही आया क्या "
मैंने अपने कंधे उचकाए .
वो एक गहरी सांस लेती है ,
"1500 साल ...ना जाने यहां क्या हुआ होगा की राजा को अपनी राजधानी ही बदलनी पड़ी .मैं यहां पर खुदाई करवाउंगी .."
ख़ुदाई करवा या चुदाई करवा पर मुझे छोड़ दे .मैंने मन में ही कहा .
"ह्म्म्म ऐसे तुम्हे यहां का पता कैसे लगा ."
"मेरे पापा से ."वो बेफिक्र सी बोली
"अरे वाह वो यहां कब आये "
उसने मुझे देखा,इसबार उसकी आंखों में खुशी गायब था,पता नही क्यो मुझे एक गहरे दर्द का अहसास हो रहा था,मैं उसके कंधे पर अपना हाथ रखा .
"are u ok "
"ya "
वो मेरे कंधे पर अपना सर रख ली ,कुछ तो बात जरूर थी जो वो बताना नही चाह रही थी ,
"क्या हुआ पापा का नाम सुनकर तुम इतनी उदास क्यो हो गयी ,."उसके आंखों से टपकते आंसुओ का आभास मुझे हुआ,मै उसका चहरा उठाया,किसी बच्ची की तरह वो प्यारी सी लकड़ी यू रोये मुझे बिल्कुल भी अच्छा नही लगा,पता नही क्यो मुझे उसपर इतना प्यार आया की मैं उसके आंसुओ को अपने होठो से पी गया,.वो पहले तो मुझे एक आश्चर्य भरे नजरो से देखी ,पर मेरे चहरे पर कोई भी वासना का भाव ना पाकर वो एक मुस्कान से मेरा आभार व्यक्त किया ,लड़कियों की ये खासियत होती है की वो वासना और प्यार में आसानी से अंतर कर सकती है,अगर वो चाहे तो ..
"you are so cute ,ऐसे रोया मत करो "
"थैंक्स "वो किसी बच्चे की तरह मेरे गले से लग गयी ..
"पापा ने सही कहा था की तुम एक बहुत ही अच्छे इंसान हो इसीलिए उन्होंने तुम्हे मेरे साथ भेजा "
अब शॉक मुझे लगा ,
"वाट पापा ने "मैं आश्चर्य से भर गया था ,और वो बड़ी ही मनमोहक मुस्कान से मुझे देख रही थी .
"हा पापा ने ..मिश्रा जी मेरे पापा है ,मेरे मम्मी के पहले पति और मेरे असली पापा ..."
मेरा दिमाग अब और भी ज्यादा घूम गया ,साला ये कैसे हो सकता है ..एक इंडियन कपल की औलाद गोरी कैसे.मेरे नजरो की कसमकस को वो समझ चुकी थी ,
"वो मेरी मा इंडियन थी और एक एयर होस्टेज थी ,पापा (मिश्रा ) उन्हें बहुत प्यार करते थे पर उन्होंने मेरे पापा को चिट किया और एक इटालियन के साथ ...जब मैं पेट में थी तो उन्होंने ये सब पापा को बताया ,पापा उन्हें इतना प्यार करते थे की उन्होंने इसके बाद भी मेरी मॉम को अपनाया और बहुत प्यार दिया पर वो फिर भी चुपके से उनसे मिलती रही ,जब मैं 2 साल की हो चुकी थी तब उन्होंने डिवोर्स ले लिया ,पापा मुझे बहुत प्यार करते थे और मेरे लिए उन्होंने कानूनी लड़ाई भी लड़ी,पर उस समय वो एक बिजनेस मेन थे और उनके फैमली लाइफ के कारण बहुत ही लॉस में चल रहे थे मेरी कस्टडी मेरी मा को मिल गयी पर मेरी नानी ने मुझे अपने पास रखा वो मेरी मा के इस किये से बहुत दुखी थी वो मेरे पापा को बहुत ही प्यार करती थी ,इस फैसले के बाद ही पापा का मन सबसे उठ गया वो कभी कभी मेरी नानी से और मुझसे मिलने आते थे,उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी समाज के नाम करने का फैसला किया और वो एक IAS ऑफिसर बने और अपनी ईमानदारी के बल पर इतना नाम कमाया..."मलीना के आंखों में फिर से आंसू थे और मैं बस उसकी बाते सुन रहा था.
"जब मैं 12 साल की थी तो मेरी नानी चल बसी और मा ने मुझे पापा को बिना बताये ही इटली ले गयी ,लेकिन मैं कभी भी उसे अपना पिता नही मान पाई ,,,,पापा ने मुझे ढूंढने की बहुत कोसिस की,मैं भी उन्हें ढूंढने की कोशिस करती रही और जब मैं 20 की थी और कॉलेज में थी तो मैंने पापा को इंटरनेट से ढूंढ ही लिया,उन्हें कोई सम्मान मिला था जिसकी खबर में उनका फ़ोटो भी था,मैं सालो बाद उनसे मिली और अब मैं अपना छोड़कर उनके पास रहने चली आयी ,लेकिन पापा अब भी मा से बहुत प्यार करते है,और उन्होंने मुझे समझा कर वापस भेज दिया ,लेकिन इस बार नही इस बार मैं सबसे झगड़कर आयी हु और अब मैं नही जाने वाली ."
उसके रोते हुए आंखों में आयी चमक ने मुझे खुस कर दिया ,जाने क्यो मुझे उसका ये कहना की अब वो नही जाने वाली बहुत अच्छा लगा और मै फिर से उसके गालो पर लुढक रहे आंसुओ को चुम लिया ,उसके होठो में मुस्कान और भी गहरी हो गयी,इतने कम समय में ही उसके और मेरे बीच एक अजीब सा संबंध बन गया जैसे की हम एक दूसरे को सालो से जानते हो ,मेरे मन में उसके लिए कोई भी बुरे खयाल तो नही थे पर ना जाने क्यो वो मुझे इतनी अच्छी लगने लगी थी की मन करता था की बस उसके पास बैठा मैं उसकी प्यारी बाते सुनता रहू,वो उठाकर खड़ी हुई एक ही घुट में अपना बियर खत्म किया और अपने काम में भीड़ गयी,और मैं बस उसकी बातो को सोचता रहा ,...
आज मुझे मिश्रा जी के दर्द का अहसास हुआ,इतना जिंदादिल आदमी,इतना पावरफुल क्यो दूसरी शादी नही किया,क्यो वो ऐसे अकेले में रह रहा है,क्यो वो पूरा समय बस समाज के लिए देते है.उनके प्रति मेरा सम्मान और भी बढ़ गया था,लेकिन एक चीज ने मुझे चुभो दिया क्या मेरी काजल भी मुझे यू छोड़कर चली जाएगी ,मिश्रा जी भी अपनी बीवी की गलतियों को नकारते हुए उसे अपना लिए थे ,यहां तक की किसी दूसरे के बच्चे को अपने बच्चे की तरह प्यार दिया पर फिर भी वो चली गयी ,क्या काजल को भी मेरे प्यार की कोई कदर नही होगी...
"काजल "मेरे मुह से अनायास ही निकल गया..
मुझे नही पता था की मलीना इसे सुन लेगी .
वो मेरे पास आकर मेरे कंधे पर अपना हाथ रखती है.
"वो तुम्हे नही छोड़ेगी ,वो तुमसे बहुत प्यार करती है."
जैसे उसने मेरे मन की बात पड़ ली हो,मैं अपना सर ऊँचा किये उसे देखा वो बस मुस्कुरा रही थी..
31
आज रात काजल को मिश्रा जी के बारे में सब बताया वो भी उसे सुनकर बहुत दुखी हुई पर मुझसे कहा की तुम मलीना का धयन अच्छे से रखना वो बड़ी ही प्यारी है,मैंने भी ये बात मान ली..
वक़्त के काटने के साथ ही मेरे और मलीना के रिस्ते में एक मधुरता आ गयी,उसके साथ रहना बाते करना मुझे बड़ा ही अच्छा लगता था,हम खंडरो में बैठे रहते,घंटो एक दूजे के बांहो में..ना जाने वो क्या क्या कहती पर मुझे कई चीजे समझ ही नही आती ,बस इतना समझ आता था की वो यहां बहुत ही खुस है..एक दिन मुझे ऑफिस जाना था ,मैंने मलीना को कहा वो भी मेरे साथ ही शहर आ गयी उसे कुछ समान खरीदना था साथ ही वो हमारे होटल को भी देखना चाहती थी ,मैंने उसे काम निपटाकर आने को कहा ,मुझे एक मीटिंग लेनी थी जो बहुत देर चलनी थी ,मैंने रघु को उसके साथ भेज दिया .लगभग शाम 4 बज चुके थे,इतने दिनों की गैरमौजूदगी में जो काम बचा था वो तो पूरा कर ही लिया बल्कि कुछ दिनों बाद करने वाले साइन भी आज ही कर दिया,सभी को इंस्ट्रक्सन देकर मैं कुछ और दिनों के लिए फुर्सत हो गया,मैं रघु को गाड़ी ले के आने के लिए काल किया ,लेकिन ये क्या वो तो मेरे ही ऑफिस के बाहर खड़ा था.
मैं बाहर निकला
"अरे तू यहां क्या कर रहा है,काजल ने भेजा क्या."
"नही सर वो मलीना मेडम घर चले गयी ,उन्हें छोड़कर यहां फिर से आया हु .."
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ ,
"तो वो होटल नही गयी "
"गयी थी सर पर बहुत ही जल्दी वापस आ गयी ,और सीधे घर चलने को कहा .."
मुझे मामला कुछ समझ नही आ रहा था,मैंने काजल को काल किया,
"काजल क्या मलीना आयी थी "
"नही क्यो आने वाली थी क्या ..."
मेरा माथा ठनक गया
"कुछ नही बस यू ही ,तुम चल रही हो क्या साथ या मैं निकलू घर "
"आप जाइये मुझे अभी समय लग सकता है"
"ओके जान घर में मिलते है जल्दी से आना "
काजल की हल्की हँसी सुनाई दी
"लव यू जान ,जल्दी से आ रही हु "और वो हस ही पड़ी
साथ ही मैं भी हस पड़ा ...
ये आखिर हुआ क्या था की मलीना इतने जल्दी होटल से चली गयी ..मैंने सीधे उसे ही काल लगा लिया
"मैं आपसे बात में बात करती हु .कल मिलकर बात करते है मुझे अभी थोड़ा काम है "उसने फोन उठाते ही कहा .
"ओके "
कुछ तो गड़बड़ तो थी.ये मुझे तुम से आप बुला रही है ,अचानक इसे क्या हो गया .मैं बस अपने ही सोच में था सोचा चलो क्या होता है कल तो मिलेगी ही .
मैं आज जल्दी घर आ गया ,बड़े दिनों बाद ऐसा हुआ की मैं इतनी जल्दी घर आया था,रघु अपने घर चले गया मैं फ्रेश ही हुआ था की रेणु काम करने आयी ,प्यारे कही दिखाई नही दिया शायद अपने रूम में हो ,वैसे भी साला आजकल कम ही दिखाई देता है.
आज तो मौका भी था और दस्तूर भी इतने दिनों से मैं रेणु के ऊपर कुछ भी ध्यान नही दे पाया था,
आज वो मुझे भी अकेला देख थोड़ा सा शर्मा गयी,उसके बदन को देख कर ऐसे भी मेरा सांप अकड़ने लगा था ,

पतले से साड़ी में वो गदराया हुआ देसी बदन कौन नही भोगना चाहेगा ,उसके उजोर तो बस उसके कसे हुए ब्लाउज़ से बाहर आने को छटपटा रहे थे,और कमर का वो हिस्सा जो साड़ी से नही ढका था वो मुझे उसे मसलने को आमंत्रित कर रहा था,वो चुपचाप किचन में जाकर बर्तन धोने लगी,मैं अपने कमरे में जाकर अपने अंडरवियर निकाल फेका मुझे पता था की अभी काजल के आने में बहुत समय है,मेरे पास आराम से 2 घंटे है,इतने समय में तो दो बार उसे भिगो देता,लेकिन आज तो बस मुझे उससे खेलना था,ताकि वो तैयार तो हो सके,मैं अपना लोवर पहन कर किचन में चला गया,.
इतने दिनों से दौड़ाने और योग से मेरी बॉडी में कुछ निखार सा आ गया था,और वो स्टेमिना बिस्तर में भी दिखाई देती थी,कुछ गठीला तो मेरा बदन पहले भी था पर दौड़ाने और योगा से थोड़ी मोड़ी बची चर्बी भी जाती रही ,वो भी जानती थी की मैं उसके पीछे ही खड़ा हु पर वो भी ठहरी एक शादीशुदा नारी ,अपनी मर्यादा को वो कैसे लांघ सकती थी,मैं उसके पास गया मुझे उसकी तेजी से चलने वाली सांसे महसूस हो रही थी ,वो उत्तेजित थी ,किसी अनजान भय से शायद उसकी सांसो की रफ्तार भी बड़ी हुई थी,मैंने उसे दबोचा नही जैसा मेरा दिल कर रहा था ,बल्कि मैं उससे थोड़ा सट गया,मेरा लिंग तो तनकर फूल गया था,वो उसके नितंबो के दीवारों को रगड़ने लगा,वो इससे अनभिज्ञ बनते हुए अपना काम करती रही पर उसकी सांसे उसके मन की स्थिति का बयान कर रही थी ,उसका सीना भी अब ऊपर नीचे होने लगा था,मुझे उसकी ये स्थिति देख बड़ा ही मजा आ रहा था,आजकल मुझे लोगो को तड़फने में बड़ा ही मजा आने लगा है...
मैं उससे पूरी तरह सट के खड़ा हो गया ,वो अब भी अनजान सी अपना काम कर रही थी ,हालांकि उसके हाथ अब काँपने लगे थे,मैंने बेसिन से पानी की कुछ बूंदे ली और उसके खुले पीठ पर छोड़ दी .
"हाय साहब,क्या कर रहे है ."उसकी आवाज में वासना की मादकता गुली हुई थी ,वो लगभग फुसफुसाने की तरहः बोली ,
मैं अब भी चुप था,वो बूंदे लुढ़कती हुई उसके पीठ से उसके कमर तक आ पहुचा था और उसके साड़ी के बंधन के बीच जाकर समाप्त हो गया..
मैंने} हल्के उंगलियों से उसके पीठ को छूना शुरू किया और जितने आराम से वो बून्द नीचे आया था उतने ही आराम से अपनी उंगलियों को नीचे ले जाने लगा,,,,,
"हाय ,साहब नही ..ओफ़ .साआ आ आ आ हा आ आ ब ."
उसकी आंखे बन्द हो चली थी सांसे तेज थी और धड़कनों की आवाज मुझतक पहुच रही थी ,और वो हल्के हल्के मादक आहे भर रही थी,मैं भी उसके कमर पर आकर रुक गया ,और अब अपनी उंगलियों को उसके नाभि की ओर ले जाने लगा,वो जैसे जम गई थी पता नही मेरे उंगलियों में इतना जादू कहा से आ गया की वो अवाक सी बस खड़ी हो गयी थी ,बेसिंग का नल चल रहा था और बर्तन धुलने को रखे के रखे रहे पर वो नही हिल पा रही थी ,मेरी उंगलिया जब उसकी नाभि की गहराइयों का मंथन कर रहे थे तब मैंने उसके चहरे को देखा वो आंखे बंद किये शायद मेरे अगले हमले की तैयारी कर रही थी ,पर मैं भी ठहरा घाघ मैं बस वही रुक गया,कुछ ही देर में मुझे कुछ भी ना करता पाकर वो मुड़ी उसका सर मेरे सीने से टकराया,वो हल्के से अपना सर उठाकर देखी मैं हल्के हल्के मुस्कुरा रहा था जिसे देख कर वो बुरी तरह शर्मा गयी ,लेकिन थोड़े पलो में ही उसके चहरे पर भी एक शर्म भारी मुस्कान फैल गयी..
वो नारी सुलभ झूठे गुस्से से मुझे मुक्के से मारी और जैसे ही उसने अपने बर्तनों को हाथ लगाया मैं अपने कमर को नीचे ले जाकर फिर से उसके नितंबो में एक हल्का सा झटका दे दिया .
"आह साहब काम करने दीजिये ना मेडम आ जाएंगी,अभी पूरा काम पड़ा है."
मैंने अपना हाथ से उसका चहरा आगे किया वो अब भी शर्म से नीचे देख रही थी ,उसके होठो पर एक किस किया पर वो झट से पलट गयी.मैं उसके बड़े मांसल और भरे हुए उजोरो को अपने हाथो में भरकर भरपूर ताकत से दबाया ,की उसकी एक हल्की सी चीख निकल गयी .
"आआआआआआहहहहहह साहब आप बड़े जुल्मी हो .."
उसकी ये अदा इतनी सेक्सी थी की मेरे लिंग ने एक और जोर का झटका दिया और मैं फिर से उसे एक धक्का लगा दिया ,मुझे पता था की अगर मैं इस पटक के पेल भी दु तो कोई प्रोबलम नही है पर उससे वो मजा मुझे नही मिलता जो अभी मिल रहा था.मुझे काजल ने आजतक कभी जुल्मी नही कहा था,ये देशी शब्द मुझे बड़ा भाया.देशी माल को भोगने का मतलब ही क्या हुआ जब वो देशी शब्द ना बोले .
मैं अब भी अपने हाथो को उसके उजोरो पर हल्के हल्के फिरता रहा और वो बर्तन साफ करती रही ,हल्के हल्के अपनी लिंग को भी उसके नितंबो पर रगड़ता रहा,जिससे मेरा लिंग और अकड़ रहा था और उसे और चहिये था,लेकिन वो साड़ी में थी और मुझे कोई भी काम जल्दबाजी में करना पसंद नही था..
पता नही क्यो पर उसे किस करने का दिल ही नही कर रहा था सच बताऊ तो बस उस पटक के चोदना चाहता था,काजल से मुझे इतना प्यार मिला था की मुझे किसी और की जरूरत ही महसूस नही होती थी,मैं भावनात्मक और शारीरिक तौर पर पूरी तरह से संतुष्ट था,तो ये मैं क्यो कर रहा हु...इसका जवाब मेरे पास नही था,शायद इसके पीछे वही कारण है जो कारण काजल के वो सब करने के पीछे था,एक नशा सा है ये जिसे जितना करो उतना कम बस तलब बढ़ती जाती है.
काजल की याद आते ही मेरा खड़ा हथियार कुछ मुरझा सा गया,जिसका पता अब रेणु को भी चल चुका था,मैं वहां से निकालकर सोफे में आकर बैठगया ,रेणु मुझे जानती थी जब मेरी शादी नही हुई थी तबसे ,और वो इतना तो समझती ही थी की मैं काजल से दिलोजान से प्यार करता हु,और शायद यही वजह है की मैं सिग्नल क्लियर होने के बावजूद भी रेणु के साथ आगे नही बढ़ रहा था,,,,,
अपना काम खत्म कर वो मेरे पास आयी ,लगभग एक घंटा बीत चुका था ,और मैं बस खयालो में ही खोया था,रेणु उस समय में पूरा खाना बना चुकी थी,वो सभी तैयारी पहले ही करके रखती जो बाख जाय उसे बहुत जल्दी निपटा देती फिर गैरजरूरी कामो में वक़्त देती थी,वो मेरे पास आकर खड़ी हो गयी,उसके चहरे पर कोई भी खुसी के भाव नही थे,उसका गंभीर चहरा देखकर मुझे भी अच्छा नही लगा,मैं एक झूटी मुस्कान में मुस्काया और वो भी वो जाने को हुई शायद उसे यहां और रुकना गवारा नही था .
"रेणु "
वो जाते जाते रुक गयी
"जी साहब "
"यहां आ "
वो मेरे पास आकर खड़ी हो गयी और मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखने लगी ,मैंने उसे देखा उसका वो मुरझाया चेहरा जो कुछ देर पहले आनंदित था,मैं उसका हाथ पकड़ा और सीधे अपने कमरे में ले गया ,वो मेरे साथ ही खिंची चली आयी ,मैं उसे अपने बिस्तर पर फेक दिया ,वो भी अपने हाथो को फैलाये पड़ी रही ,मैं उसके यौवन को निहार रहा था यही सोचकर की वासना की कोई लहर मेरे शरीर में दौड़े और मैं उसके ऊपर कूद जाऊ पर कोई लहर नही थी ..मैं सचमे एक अजीब से उलझन में था की ये क्या हो रहा है..
उसने मुझे देखा और एक हल्की सी मुस्कान उसके चहरे पर आयी.
"साहब अच्छाई इतनी आसानी से पीछा नही छोड़ती,मुझे पता है की आप मेडम से बहुत ज्यादा प्यार करते है,छोड़िए साहब आप अच्छे ही रहिए क्यो अपने को बिगड़ रहे हो .."
रेणु की बाते मेरे दिमाग के कोने कोने को हिला कर रख दी ये अजीब सी सच्चाई से उसने मुझे अवगत करा दिया मुझे खुद भी नही पता था की मैं काजल से इतना प्यार करता हु..अबतक रेणु उठकर बैठ चुकी थी मैं भी बिस्तर के एक किनारे पर बैठा हुआ था,वो बड़े ही प्यार से मेरे गालो को सहलाने लगी .
"कितनी भाग्यवान है काजल मेडम की आप सा मर्द मिला उन्हें "
मैं उसे देखा मुझे थोड़ी हँसी आ गयी
"और तू नही है क्या भाग्यवान ,रघु भी तो कितना अच्छा है और तू है की यहां वहां मुह मार रही है ."
वो मुझे अजीब निगाहों से देखने लगी
"मुझे पता है तेरे और प्यारे के बारे में ,अरे क्या रखा है उस साले बुड्ढे में जो रघु में नही है "
रेणु की आंखे आश्चर्य से फैल गयी और वो मुझे घूर कर देखने लगी लेकिन अगले ही पल उसके आंखों में एक पीड़ा सी छा गयी..
"साहब आप इतने अच्छे हो की आपको कोई भी बुराई दिखाई नही देती,आपको क्या पता की रघु क्या क्या नही करता ..".उसकी आंखे भीग चुकी थी ,मैं उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे सहानभूति देने की कोसिस कर रहा था.
"साहब वो सभी कमीने है "
सभी ये किनकी बात कर रही है .
"क्या आपको लगता है की रघु को ये नही पता की मैं प्यारे के साथ सोती हु ."
ये मेरे लिए जानलेवा था ..मैं तो अपना मुह फाडे उसे ही देख रहा था.लेकिन कहते है ना की एक अच्छाई आपको बहुत देती है शायद मेरे साथ भी वही होने वाला था ..मैं बस उसे सुनता रहा,आज रेणु मेरी अच्छाई से खुश थी और वो मुझे वो बताने वाली थी जो मैं शायद अपने से कभी भी जान नही पाता .
"साहब ये तीनो एक ही है ,रघु ,प्यारे और रवि (मेरा माली ) तीनो को बस दारू और लड़कियों का शौक है ,और इसी शौक में के लिए वो मेरा भी इस्तमाल करते आ रहे है,रघु से शादी के बाद ही मुझे समझ आ गया था की वो ना सिर्फ नशाखोर है बल्कि वो रंडीबाज भी है,,..पहले जितने भी अधिकारी यहां आये वो सभी के सभी एक जैसे ही थे ,सभी को बस दारू और लड़की चहिये थी ,ये तीनो मिलकर इसका इंतजाम करते यहां तक की रघु ने तो मुझे भी नही छोड़ा,आप पहले नही हो जिसके पास इसने मुझे भेजा है.."
मेरा दिमाग ही चकरा गया ,भेजा है.साला मुझे लगा की मैंने इसे बुलाया है.
"वो ना सिर्फ अपने दोस्तो का बिस्तर मुझसे गर्म करवाता है,बल्कि यहां रहने वाले साहब लोगो के पास काम करने भेज कर मुझे उनके नीचे भी लाने की कोशिस करता है ताकि उनको खुली छूट मिल जाय पर जब सेआप आये इनकी एक ना चली ,आप ऐसे भी बहुत ही सीधे साधे हो ,और अपने कभी भी मुझे गलत नजरो से नही देखा था,ये लोग तो आपके आने से जैसे छटपटा गए थे.इनकी पूरी ऐयासिया धरि की धरि ही रह गयी..लेकिन मेडम के आने से .."
वो इतना ही बोलकर रुक गयी,शायद उसे ये अहसास हो गया की उसने कुछ ज्यादा ही बोल दिया ..
"साहब मैं गरीब घर की लड़की हु,रघु ने मुझसे शादी करके मेरे मा-बाप पर एक अहसान किया है आप उसे नॉकरी से मत निकालिएगा,वो मेरे परिवार को भी पलता है,मेरे मा-बाप का खर्च भी वही चलता है.साहब उसे माफ कर दीजिएगा ."
उसकी ये दशा और उसके अतीत को सुनकर मेरी आंखों में आंसू आ गए ,जिस औरत को मैंने गलत समझ वो अपने पति की ही मारी निकली ,
"नही निकलूंगा,काजल के बारे में तुम कुछ बोल रही थी ."
वो मानो पत्थर सी निश्चल हो गयी थी ..
"देखो जो भी सच है मुझे बताओ ,मेरा यकीन करो की तुम्हे या तुम्हारे परिवार को मैं कुछ भी होने नही दूंगा."
"साहब वो ."
उसके लिए बोलना कितना मुश्किल था वो मुझे पता था,लेकिन मेरे लिए ये जानना भी जरूरी था की कही तीनो ने तो काजल के साथ ..
"साहब वो जब आपकी शादी हुई और काजल मेडम घर आयी तो तीनो बहुत खुश हुए,मेरे घर में वो दारू पीते और मुझे चो.'वो फिर रुक गयी ,मैं उसके बालो को अपने हाथो से सहलाया और उसके होठो पर एक चुम्मन जड़ दिया ,वो मुझे आश्चर्य से देखने लगी .
"समझ ले की आज से रघु नही मैं तेरा पति हु.तेरा पूरा खयाल रखने की जिम्मेदारी मेरी है,मैं तुझे प्यारे की जगह नॉकरी भी दिलाऊंगा,और तेरे ऊपर वो जो भी अत्याचार किये है सबकी सजा उन्हें दिलाऊंगा ,तीनो को जेल भिजवा दूंगा,बस तू जैसा मैं कहु वैसा कर .बता की सच क्या है ..खुलकर बता ."रेणु को तो मानो समझ ही नही आ रहा था वो फैसला ही नही कर पा रही थी की क्या करे ,ऐसे उसके लिए फैसला करना आसान था की वो अपने पति को छोड़े और मेरे साथ हो ले,मैं उसे सब देने को तैयार था,लेकिन ये इतना भी आसान नही था ..
"वो मुझे चो..ओ.."वो क्या बोलना चाहती थी वो तो मुझे पता था पर उसकी झिझक मेरी जान ले रही थी
"चोदते थे ,और मेडम का नाम बार बार लेते थे ..मुझे वो बना कर करते थे."वो इतना बोलकर अपना सर झुका ली .
"और "
"आपको भी फसाने के लिए मुझे यहां भेजा था की आप को फसा कर आपको ब्लैकमेल कर सके."
अच्छा तो मैं सोच रहा था की मैं खेल खेल रहा हु पर साला पूरा बिसात तो इनका बिछाया हुआ था.
"और "
वो कुछ बोलने ही वाली थी की बाहर के गेट के दरवाजे की आवाज से हम चौकन्ने हो गए.वो जल्दी से उठाकर बाहर चले गयी शायद किचन में और मैं अपनी चड्डी लेकर बाथरूम में ...
 
32
रात ही काजल को मैंने रेणु का मामला बात दिया ,बस ये छोड़कर की किस परिस्थिति में उसने मुझे अपने बारे में बताया था,मैंने उसे कहा की जब तुम नही थी और वो अकेले थी तो वो अपना अंग प्रदर्शन कर रही थी और मुझे ललचाने की कोशिस कर रही थी ,मैं रेणु को इतने दिनों से जनता हु वो कभी भी मेरे साथ ऐसा नही की,मुझे कुछ तो अटपटा लगा और मैंने उसे सीधे ही पूछ लिया की तुम ठीक तो हो ना,वो जोरो से रो पड़ी और सब बता दी,वो मुझे हमेशा स बहुत इज्जत से देखती थी और जब रघु और प्यारे ने उसे मेरे साथ ऐसा करने को कहा तो उससे बर्दास्त नही हुआ पर उसे बस अपनी मजबूरी के कारण ऐसा करना पड़ा ,वो मुझसे सच नही छुपा पाई..
काजल को ऐसे मैंने बिस्तर में ये सारी बातें बताई थी पर वो गुस्से से आगबबुला हो गयी ,उसका ये रूप तो मैंने पहले कभी भी नही देखा था वो चंडी की तरह क्रोधित हो गयी थी .
"उनकी इतनी हिम्मत की मेरे पति के खिलाफ साजिस रचे ,मैं उन्हें जान से मार दूंगी ."उसकी गर्जना सुनकर मेरा भी दिल कांप गया और मैंने जैसे तैसे उसे शांत करना चाहा पर वो कहा रुकने वाली थी ,मैंने उसे समझाया की उन्हें उनके किये की सजा जरूर मिलेगी,और मेरे खिलाफ षडयंत्र रचना कोई बड़ा जुर्म नही है ,असली जुर्म तो है एक लड़की को जबरदस्ती वैश्यावृत्ति में घसीटना..सालो को सालो की सजा होगी ,लेकिन हमे धैर्य से और समझ से चलना होगा हमे ,कानूनन चलना होगा.और हमे रेणु की जिंदगी के बारे में सोचना है,अगर वो ही इस बात से मना कर दे तो हम कैसे उनको सजा दिला पाएंगे ,तुम कल उससे बात करो उसे समझाओ की इस नरक से निकले और जिंदगी में आगे बढ़े ,मैं मिश्रा जी से बात करके कल जी तीनो को गिरिफ्तार करा दूंगा बाकी का प्रोसीजर पोलिश कर लेगी. "
मेरी बात से काजल थोड़ी शांत हो गयी उसकी आंखों में अब आंसू थे ,वो मुझसे लिपट के रोने लगी.
"किसी को जबरदस्ती ये काम करना हैवानियत है जान ,.उन्हें नही छोड़ना है उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ."
मुझे डॉ की बातें याद आने लगी जो उसने काजल के बारे में कही थी ,उसका वही दर्द अब भी उसकी बातो में झलक रहा था,वो गहरी पीड़ा मुझसे छुप नही पाई ..मैं उसके बालो को सम्हालता हुआ उसे चुप करा रहा था,
"ऐसे एक बार को तो मैं भी बहक ही गया था ,रेणु के भी अच्छे बड़े बड़े है"
मैंने शरारती अंदाज में काजल से कहा .वो बड़ी बड़ी आंखों से मुझे घूरने लगी,मेरे होठो में शरारती मुस्कान देख वो समझ गयी की मैं उसे चुपकराने के लिए ये सब बोल रहा हु.उसने मुझे एक मुक्का मारा .
"मुझमे कुछ कमी है क्या जो आपको किसी और के पसन्द आ रहे है,"
उसने अपने को मेरे सीने में गाड़ दिया ..
"मेरी जान तेरा प्यार ही तो है जो मुझे कभी बहकने नही देता.."मैं काजल को अपने से अलग किया और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया,उसके होठो के रस में वो सुख था की मैं दुनिया की सारी परेशानी भुलकर उसमे खो जाता था.हमारी आंखे बन्द हो चली थी और हम एक दूजे में डूबने को तैयार थे,अब दुनिया की कोई परवाह हमारे बीच नही रही .
उसके नाजुक अंगों से खेलता हुआ मैं बहुत अधीर हो चला था ,आज मैं उसके अंदर ही रहना चाहता था ,वो भी अपने गीले योनि से मेरा स्वागत करने को तैयार थी ,मैं उसके योनि के गर्मी को अपने लिंग में महसूस करता हुआ बस ऐसे ही रहना चाहता था,वो गर्मी मुझे मेरी जान के प्यार का अहसास देती थी ,वो भी अपनी कमर को नही हिला रही थी और मैं भी नही ,आज हम दोनो को झरना नही था बस साथ रहना था,हमने अपने बचे हुए कपड़ो को भी उतार फेका और एक दूसरे के जिस्म की गर्मी के अहसास में खो गए.इससे ज्यादा हमे एक दूसरे से और क्या चहिये था.वो प्यार का अहसास हो ना केवल तन को बल्कि मन की गहराई को भी संतुस्ट कर देता हो ..
आज सुबह रोज की तरहः नही थी ,रेणु के आते ही काजल ने उसे अपने साथ कमरे में बुला लिया आज हम गार्डन भी नही गए ,काजल ने सुबह ही रॉकी को फोन कर दिया और मैंने मिश्रा जी को सारी बात बता दी ,वो इस बात को बहुत ही गंभीरता से लिए क्योकि इसमें वो तीन बल्कि रेणु के जिस्म का सुख भोगने वाले सारे अधिकारी भी शामिल थे और सभी को सजा दिलाना मिश्रा जी का प्रण बन गया .रेणु के हा बोलते ही मिश्रा जी ने SP को फोन लगाया .तीनो की गिरफ्तारी थोड़ी ही देर में होने वाली थी जिसका उन्हें इल्म ही नही था,काजल और रेणु अभी भी हमारे बैडरूम में थे और मैं बाहर था .मैं किचन की तरफ गया तो मुझे रेणु की आवाज सुनाई दी .
"दीदी फिर सोच लीजिये ,वो आपका नाम भी उछाल सकते है."
ये वही बात थी जो रेणु मुझे बताती हुई रह गयी थी ..
"उनकी इतनी औकात नही है की वो मेरा नाम उछाले उसे मैं सम्हाल लुंगी पर मेरे पति के खिलाफ ऐसी साजिस करने वालो को मैं बिल्कुल नही बक्स सकती,चाहे मैं बदनाम भी क्यो ना हो जाऊ "
काजल की बात सुनकर मुझे फिर से उसपर बेहद प्यार आया...वो मेरे लिए दुनिया से भी लड़ सकती थी ,मुझे पता था की वो काजल को भी बदनाम कर सकते थे,काजल भी ये बात अच्छे से जानती थी पर उसे मेरा सम्मान ज्यादा प्यार था.
कुछ ही देर में मिश्रा जी और SP वहां पहुचे साथ ही दो गाड़ियों में पोलिश के जवान भी थे ,तीनो को सोते से उठाकर गिरिफ्तार कर लिया गया.मिश्रा जी बहुत गुस्से में दिख रहे थे,ना जाने कहा कहा फोन लगा रहे थे,रेणु का बयान लेने भी महिला पोलिश की टीम आयी थी साथ ही महिला आयोग के सदस्य भी थे,,मिश्रा जी ने उन्हें वही बयान लेने को कहा पर काजल और महिला अधिकारियों के कहने पर रेणु को स्टेशन ले जाया गया,साथ ही काजल भी हो ली,काजल ने जाने की जिद की जिसे ना मैं मना कर पाया ना ही मिश्रा जी.

मिश्रा जी ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे शाबासी दी.
"विकास मुझे माफ करना की मैं उन अधिकारियों के बारे में कुछ नही कर पाऊंगा .सरकार अपना नाम खराब नही करना चाहेगी "
"लेकिन सर जब हम यही नही साबित कर पाएंगे की रेणु ने किसके साथ वेश्यावृत्ति की तो चार्ज कैसे लगेगा."
"उसकी फिकर मत कीजिये हम इन्हें वेश्यावृत्ति करने नही बल्कि बलात्कार का चार्ज लगाएंगे ."इसबार SP बोला
"लेकिन" मैं कुछ बोल पता उससे पहले मिश्रा जी बोल पडे
"तुम फिकर मत करो,साले जिंदगी भर कभी जेल से बाहर नही आ पाएंगे,बलात्कार के साथ और भी कई धाराएं इनपर लगेगी ,जैसे घरेलू हिंसा और सामूहिक बलात्कार,और इसी को हम वेश्यावृत्ति से भी जोड़ देंगे..कोई एक दो अधिकारी होते तो बात अलग थी पर इतने अधिकारियों के खिलाफ केस को टिका पाना मुश्किल हो जाएगा,और अगर उनका केस नही टिका तो ये आसानी से छूट सकते है ,तो हम क्यो अपना केस कमजोर करे ,"
मिश्रा जी की बातो में तो लॉजिक था,
"सर मैं चाहता हु की रेणु को यही नॉकरी मिल जाय ,वो हमारे सानिध्य में रहेगी तो उसके लिए अच्छा होगा ,और उसके गरीब माता-पिता भी है उनका भार भी इसी के कंधे पर आएगा."
"ह्म्म्म उसकी चिंता मत करो हम करवा देंगे ,तुम्हारे ऑफिस में उसे भृत्य की नॉकरी दिला देंगे,लेकिन काम वो तुम्हारे बंगले में ही करेगी."
मुझे एक बड़ी तसल्ली हुई .SP के जाने के बाद मैं और मिश्रा जी बस अकेले बच गए ,
"सर मलीना कैसी है,कल अचानक ही चली आयी और फोन करने पर कहा की जब मिलोगे तो बात करूँगी अभी काम है."
मिश्रा जी मुझे देखकर हँसने लगे.
"अरे ये लड़की है ही पागल,"
वो थोड़े सीरियस हो गए,
"विकास तुम्हे तो पता चल ही गया है की वो मेरी बेटी है,पर मैं उसके भविष्य को लेकर चिंतित हु पता नही क्या होगा उसका ,पगली सब छोड़कर यहां चले आयी है ,वहां उसका कैरियर था,सब था यहाँ उसका क्या है"
मैं उनके कंधे पर हाथ रखा .
"सर यहां आप है,और उसके भविष्य की चिंता आप छोड़ दिजीये ,वो इतनी टैलेंटेड है की कुछ अच्छा कर ही लेगी,और सर बुरा ना माने तो एक बात कहु,अब समय आ गया है की खुलकर आप सबको बता दे की वो आपकी बेटी है ."
मिश्रा जी ने मुझे थोड़ी देर देखा और अपना सर हा में हिलाया .
 
33
काजल के स्टेशन से ही अपने काम में जाने वाली थी,मैं अपनी गाड़ी लेकर मलीना के पास चला गया,,मिश्रा जी भी कही काम से गए थे,मैंने दरवाजे की बेल बजाई कुछ ही देर में नॉकर ने दरवाजा खोला और मलीना को मेरे आने की बात बताई,मलीना ऐसे दौड़ती हुई मेरे पास आयी जैसे वो मेरा ही इंतजार कर रही हो,वो एक हाफ पेंट और टीशर्ट में थी ,उसके भोले से स्तन उसके दौड़ाने से उछल रहे थे जो इस बात का सबूत थे की उसने उन्हें कैद में नही रखा है,वो ऊपर से बेताबी से दौड़ती हुई नीचे उतरी,उसके चहरे में एक बेताबी साफ दिख रही थी,जैसे वो मुझसे मिलने को बेताब थी,वो आकर सीधे मेरे गले से लग गयी,मुझे थोड़ा अजीब लगा,मैं उसके बालो को सहलाने लगा,
"अरे ये क्या हो गया इतनी बेताब क्यो हो"
उसके आंखों में कुछ बूंदे नाच रही थी,मैंने प्यार से उसके चहरे को अपने हाथो से उठाया,
वो मेरे आंखों में देखे बिना ही मेरा हाथ पकड़कर ऊपर ले जाने लगी ,वो मैं भी उसके साथ बस खिंचता गया...
उसका कमरा ऊपर था,देखने से वो कोई गेस्ट रूम नही लग रहा था,वो ऐसे बनाया गया था जैसे की उसे उसके लिए ही बनाया गया हो,ऊपर के फ्लोर से बस एक उसका ही कमरा था,बाकी सबके कमरे नीचे ही बने थे..
बड़ा सा कमरा जिसमे बीचो बीच एक गोल बिस्तर था,पूरा कमरा पिंक कलर से पेंट था,बड़े बड़े टेडीबियर वहां पर रखे थे,अधिकतर लाल कलर के थे,बिस्तर में भी फूलो वाली बेडसीट लगी थी,और दीवाल पर उसकी बड़ी सी तस्वीर शायद जब वो 16-17 की रही होगी तब की लग रही थी,सलीके से जमे उस कमरे में एक बहुत ही अच्छी गंध फैली हुई थी,वो एक टिपिकल टीनएज लड़की का कमरा ही था,
वो मुझे खिंचती हुई बिस्तर पर ले गयी और मुझे बिठाकर खुद भी मेरे बाजू में बैठ गयी..
उसके चहरे पर हल्का गुस्सा साफ दिख रहा था,पर आंखों में आंसू और मासूम सा बड़ा ही प्यारा चहरा मुझे उसके गालो में किस करने को आकर्षित कर रहा था..मैंने वही किया ,और वो मेरे गालो को सहलाने लगी.

"क्या हुआ ही तुझे ."
"तुम इतने दिनों से मुझे काल क्यो नही किये."
मेरी हँसी छूट गयी ..
"अरे क्या इतने दिन अभी तो मिली थी ना मुझसे और वहां से यू बिना बताये क्यो आ गयी..कितना परेशान हो गया था मैं."
अब उसका चहरा कुछ गंभीर हो गया .
"तुम बहुत अच्छे हो विकास .."
वो कुछ देर मेरे गालो को अपने हाथो से सहलाने लगी ,उसकी आंखों में मेरे लिए एक अजीब सा अपनापन और प्यार था,जो की इन कुछ ही दिनों के साथ में ही विकसित हो गया था,
"क्या हुआ मेरी जान कुछ बताओगी "
मैने उनके हाथो को अपने हाथो में लेते हुए कहा ,
"वो काजल अच्छी नही है,..."वो अब बहुत ही गंभीर हो गयी
"वो तुम्हे धोका दे रही है....वो रॉकी के साथ .छि मैं उसे कितनी अच्छी लड़की मानती थी और वो तुम्हारे जैसे इंसान के साथ ऐसे कैसे कर सकती है.."
उसकी गंभीरता अब गुस्से का रूप ले रही थी .मुझे मामला कुछ समझ में आ रहा था,वो होटल काजल को बिना बताये गयी थी और हो सकता हो उसने कुछ ऐसा देख लिया हो जो उसे नही देखना चहिये था..
"तुमने ऐसा क्या देख लिया "
"वो काजल और रॉकी ..मुझे तो बताने में भी शर्म आ रही है ..मैंने उन्हें किस करते देखा .."
मैं जोरो से हस पड़ा .
"तो क्या हुआ मैं भी तो तुम्हे किस करता हु ना "
"अरे ऐसे वाला नही वो होठो में किस कर रहे थे एक दूसरे के और वो रॉकी काजल की वहां दबा रहा था"
उसने अपने स्तनों को दिखाते हुए कहा ,उसका भूरा चहरा शर्म और गुस्से से लाल हो गया था,उसकी आंखों में से ऐसे भी एक अजीब लालिमा झांक रही थी,जो मेरे लिए उसके प्यार का अहसास करा रहा था,वो मुझे अपना मानती थी और इसलिए वो इतने फ़िक्र में थी..मैं उसके गालो पर अपने हाथो को ले गया और उसे सहलाने लगा.मैंने उसे अपनी ओर खिंच लिया और उसे अपने गले से लगा लिया ,वो मुझे कसकर पकड़ रखी थी ,मैं उसके बालो को सहला रहा था,उसका ये प्यार देखकर मेरे भी आंखों में आंसू आ गया,
मैं उसे अपने से अलग किया ,मैं उसे सच बताना चाहता था पर कैसे ये तो मुझे नही पता था,मेरे सच बताने से ना जाने वो मेरे बारे में क्या सोचे और हो सकता है की वो सभी को ये बात बता दे .ऐसे भी उसका दिमाग एक बच्चे की तरह ही लगता था,हा वो बहुत बड़ी हो चुकी थी पर शायद मेरे लिए वो बच्ची ही बन जाती थी ,
"मैं जानता हु की तुम क्या कह रही हो ,लेकिन सच बताऊ तो मुझे इससे कोई भी प्रॉब्लम नही है,मैं काजल से बहुत ही प्यार करता हु और वो मुझसे ,शायद उसे ये करना अच्छा लगता हो इसलिए मैं उसे मना नही करता ..."
वो मेरे आंखों में घूर कर देख रही थी
"विकास तुम वो गलती मत करो जो मेरे पापा ने किया ,इतने सालो से वो अकेले है,ना जाने वो अपनी जिंदगी कैसे बिताते होंगे,,,उन्होंने अपने सभी अरमानो को छोड़ दिया,सिर्फ प्यार के खातिर ..मैं कभी नही चाहूंगी की तुम भी पापा की तरह अकेले हो जाओ.तुम काजल को समझाओ ,अगर ना माने तो उसे तलाक दे दो और दूसरी शादी कर लो."
मुझे उसकी बात से थोड़ी सी हँसी आ गयी.
"अरे मेरी जान काजल मुझे बहुत प्यार करती है ,वो मुझे नही छोड़ेगी और अगर मैं उसे छोड़ दिया तो मुझसे कौन शादी करेगी,इतनी अच्छी लड़की मैं कहा से लाऊंगा ."
वो मुझे देखने लगी,मेरे होठो में एक मुस्कान थी.
"मुझसे शादी कर लेना ,मैं तुमसे शादी करूँगी ."
मुझे पहले तो हँसी आयी पर मलीना का चहरा बेहद गंभीर था,वो मजाक तो बिल्कुल ही नही कर रही थी.
"तुम ऐसे क्यो कह रही हो,मैं तो तुम्हारे बारे में ऐसा नही सोचता,"
मेरे मुह से अचानक ही निकल गया,
"तो क्या हुआ मैं भी नही सोचती पर जब ऐसी बीवी हो न तो एक गर्लफ्रैंड भी बना लेनी चाहिए,"
वो थोड़ी मुस्कुराते हुए कह गयी और खुद ही शर्मा गई....
मुझे उसकी प्यारी बातो पर बहुत प्यार आया और मैं उसके गालो में एक प्यार भरा किस कर लिया,
"अच्छा चलो अब साइट में नही जाना है क्या,"
"नही आज बस तुम्हारे साथ रहना है ,"
"तो वहां भी तो मेरे ही साथ रहोगी ना "
"नही यही रहना है ,तुम्हारे साथ ,"
वो मुझे कसकर पकड़ कर बिस्तर में ही पटक दी और मेरे ऊपर मेरे सीने से लग कर सोने लगी.मैं भी उसे अपनी बांहो में भरकर अपनी आंखे बंद कर लेट गया.
ना जाने कितना समय हो गया था,जब मेरी आंखे खुली तो मैं मलीना के बांहो में था,मेरी नींद मेरे फोन के बजने से खुली,देखा तो डॉ का नम्बर था,
"हैलो "
"भाई काजल के कॉलेज में कुछ पता लगाया है उसके बारे में ,"
"क्या"
"मिल कभी "
"अबे बता ना "
डॉ ने बोलना शुरू किया..
 
34
"भाई जो बताऊंगा उसपर तुझे यकीन नही आएगा"
मेरा माथा गर्म हो गया,ये साला डॉ हमेशा ही बातो को घूमता बहुत था,मैं उठकर रूम की गैलरी में चला गया,
"अबे भोसडीके जो हो रहा है वो भी क्या यकीन करने लायक है जो अब मैं यकीन नही करूँगा बोल तो सही की क्या बोल रहा है."
डॉ की फिर से हल्के हँसने की आवाज आयी मेरी झांट सुलग गयी ,जिसका आभास उसे हो गया ,
"बता रहा हु भाई ,मैंने काजल के बारे में जो बताया था वो तुझे याद है,"
"हा याद है की उसे ड्रग्स दिया गया था और कुछ लोग उसे यूज़ कर रहे थे,"
"हा वो पूरा सच नही है,सच ये है की वो अपने को यूज़ करा रही थी,"
"यानी उसे ये सब करने में मजा आ रहा था"
"नही बे साले बात इससे भी बड़ी है,तू मिश्रा जी को जानता है ना जो तेरे यहां पार्टी में आये थे,"
"हा क्यो "
मेरे माथे में पसीना आने लगा,..
"जब मैंने उसे तेरे पार्टी में देखा तो मुझे कुछ समझ नही आया ,क्योकि वो ऐसा आदमी नही है जो किसी पर इतना मेहरबान हो जाय,तेरी पोस्टिंग से लेकर ये सब.काजल और तेरे ऊपर वो इतना मेहरबान है तुझे कुछ अजीब नही लगा..."
अब तो मेरे चहरे पर सचमे पसीने की धार बढ़ चली थी..ये तो मुझे भी कुछ अजीब सा लगा था की मिश्रा जैसा आदमी मुझपर इतना कैसे मेहरबान हो रहा है.
"हा अजीब तो लगा था,"
"जानता है उसकी एक बेटी भी है"
"हा जानता हु "
अब डॉ थोड़ा चौका
"क्या तू कैसे जानता है "
"साले वो अभी मेरे बगल में सोई थी "मुझे खुदपर थोड़ी हँसी आयी
"क्या?????"डॉ जोरो से चौका ,मैंने उसे सारी बात बताई जो मुझे पता थी.
"ह्म्म्म तो बेटा कुड़ी तुझसे पट गयी "डॉ की हँसी मुझे सुनाई दी
"भाई जो बोल रहा था वो बोल ना "
"ह्म्म्म तो बात ये है की मिश्रा काजल को पहले से जानता है,काजल के कॉलेज के समय से ,वही है जो काजल का यूज़ कर रहा था,"
मेरी तो सांसे ही रुक गयी ,
"क्या "

"हा जब काजल स्कूल में थी तो काजल के घर मिश्रा का जाना आना था,वो उसके भाइयो को जानता था,बिजिनेस के सिलसिले में काजल के भाई और मिश्रा का मिलना होता था ,वही पहली बार उसने काजल को देखा था,फिर वो मुख्य सचिव बन गया,उसकी पावर बढ़ गयी और इज्जत भी ,बहुत कम लोग जानते है की वो आईएएस क्यो बना ."
"लोगो की सेवा के लिए "
"घंटा "
"तो "
"अपने पत्नी के आशिक बिज़नेस को खत्म करने के लिए "
"मतलब "
"उसकी पत्नी किसी इटालियन के साथ संबंध रखती थी और उसके साथ ही वो इटली चली गयी,जिसकी लड़की को वो बहुत प्यार करता है,जो तुझे भी पता है ,पर उस इटालियन का बिज़नेस क्या था ये तुझे नही पता होगा "
"क्या था "
"वो यहां पर ड्रग्स का बड़ा डीलर था,मिश्रा उसके झांट के बराबर भी नही था ,आज भी नही है,पर उसने कुछ ऐसा किया की उसका कारोबार लगभग तबाह हो गया."
मैं ध्यान से सुन रहा था मुझे तो ये जानना था की आखिर इन सबमे काजल कहा से आयी .
"उसने एक लड़की को तैयार किया,खुद की अच्छी पहचान और रुतबा बनाया,और उस लड़की के सहारे से उसके बिज़नेस की वाट लगा दी."
मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा था,मुझे जिस चीज का डर था वो बस ये था की क्या वो लड़की .????
"तूने सही सोचा मेरे भाई वो लड़की ..काजल ही थी.जिसके चहरे पर मासूमियत और बदन की कटाव से अच्छे अच्छे उसके दीवाने हो जाते .मिश्रा ने पहली ही बार में उसे पहचान लिया ,और उसके कहने पर ही उसके भाइयो ने उसे पढ़ने के लिए शहर भेजा था,तू सच में भोला है मेरे भाई ,उस दिन पार्टी में भी तुझे ये समझ नही आया की मिश्रा कैसे काजल के घरवालों से खुलकर बातें कर रहा था..
कहानी ये थी की मिश्रा की इमेज लड़कियों के मामले में बहुत ही अच्छी थी ,पर हकीकत कुछ और ही थी,उसे कलियों का शौक हमेशा से रहा है,ये बात कुछ ही लोग जानते है जो उसे लडकिया सप्लाय करते थे,जैसे की मेरा खास टाइगर."
टाइगर वही शख्स है जिसके क्लब में मैं गया था,मैं सुनता जाता हु .
"मिश्रा की अच्छी इमेज के कारण ही उसके भाई ने मिश्रा को उसका देखभाल करने को कहा था,काजल जहा रहती थी वो जगह असल में मिश्रा के नाम से ही किराए में थी,अब सुन काजल को पहला ड्रग्स का डोस देने वाला मिश्रा ही है ,और शायद तेरी काजल को काली से फूल बनाने वाला भी मिश्रा ही है.."
मेरा मुह सुख चुका था,मेरे साथ इतना बड़ा धोका होगा ये मुझे पता नही था,ये क्या हो रहा है मेरे साथ ,लेकिन मुझे इन सबसे कोई भी फर्क नही पड़ता मुझे बस फर्क पड़ता है तो काजल से ,क्या काजल का प्यार एक दिखवा है ...
डॉ ने बोलना शुरू रखा .
"काजल असल में मिश्रा के प्यार में थी ,लेकिन तू फिक्र मत कर जब उसे मिश्रा की असलियत का पता चला तो वो इन सबसे दूर हो गयी .."
मैंने एक चैन की गहरी सांस ली ..
"लेकिन मिश्रा कभी काजल को नही भुला उसके पास ऐसे तो लड़कियों की कमी नही थी पर काजल की बात और थी ,काजल ने उसके लिए वो किया जो शायद और कोई लड़की नही करती ,काजल ने पूरे एक गैंग का सत्यानाश करने में मिश्रा की मदद की और यही कारण था की वो काजल पर बहुत ही भरोषा करता है,साथ ही उसे काजल की मर्दो को आकर्षित करने की काबिलियत का भी अंदाजा है..लेकिन ड्रग्स के डोस ने काजल के अंदर कुछ कमजोरियां पैदा कर दी ,वो सेक्स के नशे में है,माना की ये पहले से बहुत कम है पर ये एक आदत सी हो गयी है,तेरा उसके जिंदगी में आना काजल के लिए एक वरदान साबित हुआ ,तेरे प्यार ने उसे बहुत सम्हाल लिया,लेकिन उसे भरम था की वो तुझसे इत्तफाक से मिली है उसे भी सच्चाई का पता नही था ,पूरा गेम तो मिश्रा का बिछ्या हुआ था..वो जब रिटायर होकर वहां बसने आया तो उसने तुझे स्पॉट किया,देखा की तू एक सीधा साधा सा लड़का है,और इत्तफाक से तू काजल के जाति का भी है,जो की काजल के भाइयो के लिए बहुत मायने रखता है,उसने ही किसी जुगाड़ से तेरे और काजल के घरवालों के बीच संबंध बनाया ,वो खुद आगे नही आया क्योकि वो जानता था की काजल उसका नाम सुनकर ही ये शादी नही करेगी.वो फिर से काजल को अपने पास ले आया,उसका इरादा तो ऐसे काजल को बस अपने पास रखने का था लेकिन एक गलती हो गयी.
लेकिन उसे ये नही पता था की जिस काजल ने ड्रग्स का धंधा बंद कराया था वही उसके फिर से चालू होने की वजह बन जाएगी .."
मुझे डॉ की बात कुछ समझ नही आयी .
"मतलब "
"मतलब ये की ये वही ड्रग्स है जिसे मैंने तेरे कारण ,या ये कहु की तेरे और काजल के बीच के रिस्ते को हसीन बनाने के लिए टाइगर से सौदा किया था.मैंने ही वो ड्रग्स फिर से बनवाया और उसे इंडियन मार्किट में पहले टाइगर को दिया ,ये उसके बहुत काम का होने वाला है,अब ऐसे भी टाइगर और मिश्रा की बनती नही,मिश्रा रिटायर हो चुका है टाइगर सोचता होगा की अब वो आसानी से इसका उपयोग कर लेगा लेकिन मिश्रा को इसका पता चल गया.उसे फिर इस गहराई से इसका सफाया करने के लिए काजल जैसे किसी लड़की की जरूरत थी,लेकिन काजल जैसी तो सिर्फ काजल है ना.
लेकिन काजल अब घर में ही रहती थी इसलिए उसने रॉकी को इस गेम में शामिल किया.और शहर में एक होटल खुलवाया,होटल का मालिक असल में मिश्रा का पुराना दोस्त है जो अब अमेरिका में सेटल हो रहा है,वो अपनी प्रोपटी आननफानन में बेच रहा है जिसका फायदा मिश्रा ने उठा लिया,अब काजल घर से बाहर थी,मिश्रा अब उसके सामने आया लेकिन काजल अब उसी इतना भाव नही दे रही ,इसलिए उसने रॉकी का सहारा लिया,बेचारे रॉकी को भी नही पता की वो तो बस एक मोहरा है,असली खिलाड़ी तो मिश्रा है,रॉकी ने फिर से काजल को वही अदा दिखाने को मजबूर किया और अब काजल की बड़ी आग का फायदा मिश्रा उठाना चाहता है..लेकिन बेचारा मिश्रा ,उसकी बेटी वहां आ टपकी.और उसे तुझसे प्यार हो गया.मिश्रा उसे तेरे साथ बिजी कर दिया और खुद काजल को पटाने में लग गया .बेटा विकास एक चीज याद रख की अभी तक तूने जो भी देखा है वो बस एक ट्रेलर है,अगर मिश्रा काजल को फिर से ये काम करने को माना लेगा तो तुझे तेरी बीवी के कारनामे फिर से देखने को मिलेंगे तैयार रहना.."
मैं उसे क्या बोलता मेरी तो खुद ही हालत खराब हो गयी थी,डॉ फोन रख देता है और मैं बस सर पकड़कर बैठ जाता हु,मुझे समझ ही नही आ रहा था की अब मैं क्या करू,रॉकी और कोई तक तो ठीक था लेकिन ड्रग्स जिसका नाम सुनकर ही मैं कॉप जाता था,उसके डीलर जो एक गलती में लोगो की हत्या तक कर देते कैसे काजल उनसे निपटेगी ..और वो ऐसा क्यो करेगी,मेरे लिए एक सवाल था जिसका जवाब तो मुझे डॉ ने नही दिया लेकिन मैं इससे बहुत परेशान होने वाला था.
तभी मेरी नजर पीछे गयी ..मलीना मुझे बड़े प्यार से देख रही थी और उसके चहरे पर एक चिंता के भाव आ गए थे,ये वही लड़की है जिसका बाप ..मुझे उसपर गुस्सा आया लेकिन इस बेचरी को तो पता ही नही की ये सब क्या हो रहा है.लेकिन मेरे आंखों का दर्द वो शायद समझ गयी ,
वो मेरे पास आकर बैठ गयी .
"विकास आई एम सो सॉरी ."
"तूने सचमे रॉकी और काजल को देखा या .मिश्रा जी.????"
मेरे इतने बोलने पर ही उसका चहरा पूरी तरह से उतर गया .वो पीली पड़ गयी .मैंने उसका हाथ थमा
"मैं जानता हु तुम मुझसे प्यार करती हो और मुझसे झूट नही बोलोगी.जो सच है वो मुझे बताओ .."
"मैंने काजल के साथ रॉकी को नही पापा को किस करते देखा था.इसीलिए मैं इतनी अपसेट हो गई थी"
वो दबे आवाज में बोली ,उसके आंखों में आंसू था,लेकिन मेरी आंखों में नही क्योकि मुझे तो बस एक ही चिंता सता रही थी.
 
35
मेरी हालत क्या थी ये मैं किसे बताता और कैसे बताता,मेरे सामने मलीना ही थी ,पर मैं उसपर कितना भरोषा कर सकता था,मलीना भी रोये जा रही थी.
"मैंने पापा को क्या समझा था पर वो क्या निकले."
मुझे उसके भोले चहरे पर प्यार आ गया,इस हालत में भी साला प्यार का कीड़ा मरा नही था,मैं उसे अपने सीने से लगा लिया,
"तेरे पापा ने जो किया वो शायद अपने गुस्से के लिए किया पर इससे समाज की भी भलाई हुई,लेकिन इन सबमे बेचारी काजल की जिंदगी ही खराब हो गयी."
मेरी बात उसे समाझ ही नहि आयी ,वो मुझे प्रश्नवाचक नजर से देख रही थी,वो तो अपने पापा और काजल के बारे में बोल रही थी उसे पूरी कहानी का क्या पता था.मैंने उसके आंखों में देखा,
"तुम क्या सचमे मुझसे प्यार करती हो"
"अपनी जान से भी ज्यादा "
"लेकिन कब से "
"जबसे तुम्हे पहली बार देखा ,पता नही क्या हुआ लेकिन तुम्हारे अंदर कोई तो बात थी जो मुझे आकर्षित करती थी,मैंने आते ही पापा से तुम्हारे बारे में बोलना शुरू कर दिया और पापा को बताया की मैं तुम्हे बहुत पसन्द करती हु,लेकिन जब मुझे पता चला की तुम शादी शुदा हो तो मैं उदास हो गयी,लेकिन मैं काजल से मिलकर बहुत खुस हुई वो इतनी अच्छी लगी की मैं तुम दोनो के बारे में बहुत ही खुश थी,जब मैं तुम्हारे साथ बाहर गयी तो मुझे अहसास हुआ की तुम काजल से कितना प्यार करते हो और तुम कितने अच्छे हो तुमने मेरा कोई भी फायदा उठाने की कोशिस नही की ,लेकिन जब मैंने काजल और पापा को देखा तो मेरा दिल ही टूट गया,मैं पापा से तुम्हारे बारे में हमेशा बात करती थी की तुम कितने अच्छे हो और काजल दीदी कितनी अच्छी है,लेकिन उस दिन से ..तब मैंने ये सोच लिया की मैं तुम्हे सबकुछ बता दूंगी और अपने प्यार का इजहार भी कर दूंगी..I LOVE YOU विकास ."
वो मेरे सीने से लग गयी और पहली बार मुझे उसके प्रति एक आकर्षण का भाव उमड़ा.मैं भी उसे इतना भिचा की उसके स्तन मेरे छाती में ही धस गए .और उसके होठो को अपने होठो के पास लाकर मैंने उसके होठो को अपने होठो में भर लिया.
प्यार एक अदन सी चीज होती है ,और साथ ही बहुत ही मूल्यवान भी,अदन सी इसलिये क्योकि साला पता ही नही चलता की कब किससे हो जाए और मूल्यवान इसलिए की जब हो जाय तो बस एक अहसास ही रह जाती है,वो बड़ी सुखदायी है,जो आपको सामने वाले के लिए कुछ भी करने को मजबूर कर देती है,जैसे मैं हो गया ,कजल के लिए सब सहने को ,जैसे काजल हो गई मिश्रा के लिए सब करने को ,जैसे मिश्रा हो गया अपने पत्नी के आशिक से बदला लेने को,और शायद जैसे मलीना मेरे लिए सब कुछ छोड़ने को तैयार दिख रही है,ये सब ही प्यार की ताकत है..
मैं प्यार से मलीना को नीचे बैठाया और उसके सर पर हाथ फेरता हुआ उसे शुरू से सब बताने लगा,मुझे उसपर भरोसा होने लगा था,शायद इतनी तो समझ मुझमे प्यार को समझने की थी,जैसे जैसे मैं उसे बताता गया वो और भी गंभीर होते गई उसे समझ आने लगा की आखिर उसके पापा उसे अपने पास रखने से इतना क्यो कतराते थे,लेकिन इससे उसके मन से अपने पिता के लिए नफरत कुछ कम भी होने लगी,जो भी हो एक लड़की की कुर्बानी से मिश्रा ने वो कर दिखाया था जो अभी तक किसी ने करने की हिम्मत नही की थी,इससे शायद कई जिंदगियां बच गई होंगी जो शायद उस ड्रग्स के नशे से बर्बाद हो जाते.........
उसकी आंखों में एक चमक सी आ गयी वो मुझे कसकर जकड़ ली और मेरे माथे को बेतहासा चूमने लगी,मैंने उसे ये भी बता दिया की मैं काजल के बारे में सब जानता हु लेकिन फिर भी मैं उसे बहुत प्यार करता हु और मैं हमेशा अपने प्यार से ही उसे ठीक करने की कोसिस करँगा,और लास्ट में मैंने उसे रेणु का वो डायलॉग चिपका दिया जो उसने मुझे कहा था,
"अच्छे लोगो के साथ कभी बुरा नही होता.."

मलीना के लिए इसका मतलब समझना जरूरी नही था पर ये अवधारणा मेरे मन में घर कर गयी थी की अगर मैं किसी के लिए बुरा नही सोचु तो मेरे साथ भी कोई बुरा नही करेगा,लेकिन ये सिर्फ सोचने तक ही सीमित नही था,असल में इसे अपनी जिंदगी में उतारना था,कैसे ये तो मुझे नही पता ..
इधर मेरा फोन बजने लगा.
नंबर मिश्रा जी का था,मलीना ने भी स्क्रीन में देखा और मुझे देखने लगी.मैंने उसे इशारे से चुप रहने को कहा और फोन रिसीव किया ..
"हैल्लो सर "
"यार विकास आज मलीना को लेने गया है की नही,"
"जी सर उसी के साथ बैठा हु,"
"अच्छा कहा हो अभी "
"अभी तो आपके ही घर पर है,अभी सोच रहे है कही घूम आये क्योकि आज इसे वहां जाने का मन नही किया तो यही रुक गए "
"अच्छा अच्छा ठीक है कोई बात नही,वो मैं तुम्हारे लिए नए ड्राइवर का इंतजाम कर दिया है वो कल तक आ जाएगा,और माली की शायद ज्यादा अभी जरूरत नही है तुम्हे ,काम तो रेणु ही देख लेगी .ठीक है ना और कोई जरूरत हो तो बताना "
मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गयी साला मिश्रा ऐसे बात कर रहा है जैसे मेरा सबसे बड़ा शुभचिंतक ये ही है..
"जी सर धन्यवाद ,आप कहा है .."
"मैं शहर आया था आज .ठीक है मिलता हु सुबह ."
"जी सर .."
फोन रखते ही मलीना ने पूछा ,
"क्या बोले "
"शहर गए है"
उसका मुह बन गया
"गए होंगे काजल के पास ,आपकी ही बीवी है कुछ तो करो "
मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गयी
"अच्छा तुम से आप में आ गई "
उसके चहरे पर भी मुस्कान आ गई,वो मेरे बांहो में हाथ डालकर बैठ गयी .
"अब तुम नही आप हो गए हो ,अब आप कुछ तो करो,आपकी बीवी को वो ना जाने क्या कर रहे है."
मैं उसके चहरे को देखता हु,वही मासूमियत वही उज्जवलता ,निखरा हुआ चहरा ..
"अगर वो मेरी बीवी को चोदेगा तो मैं भी उसकी बेटी चोद दूंगा ."
मैं हल्के से मलीना के कानो में कहा .
"छि इतना गंदा बोलते हो."
उसके चहरे पर एक झूठा गुस्सा आया और मैं उसे उठाकर सीधे उसके बिस्तर में पटक दिया..
"अच्छा तुझे कैसे समझ आ गया की मैं गंदा बोल रहा हु या अच्छा "
मैं लगभग उसके ऊपर लेटते हुए कहा,
"इतनी भी भोली नही हु मैं,सब जानती हु समझे इतनी हिंदी आती है मुझे"
"अच्छा "
मैं उसके ऊपर टूट गया ,सच बताऊ तो मैंने कभी सोचा ही नही था की मैं इस लड़की के साथ कुछ भी करूँगा,लेकिन मैं जाने अनजाने ही मिश्रा से बदला लेना चाहता था,मन के किसी कोने से एक आवाज आयी की जब साला सब कर रहे है तो तू क्यो नही..और मैं बस टूट पड़ा,लेकिन मैं क्या करता मन में कुछ गलत करने की दुविधा भी थी ,कजल के अलावा मैं किसी से ये करने की हिम्मत नही की थी,रेणु से की भी थी तो कर नही पाया था,और वो इस मासूम सी बच्ची के साथ ,हा ये कोई बच्ची नही थी पर वो इतनी मासूम थी की मेरे लिए उसे प्यार करना तो आसान था लेकिन सेक्स करना शायद कठिन होने वाला था,मुझे इतने हवस से भर जाने की जरूरत थी की मैं इसकी मासूमियत को ,इसके प्यार भरे स्पर्श को अपने मन से निकल पाउ,ये मेरे लिए बस एक शरीर ही बनकर रह जाए जिसे मुझे भोगना था,लेकिन मेरे जैसे इंसान के लिए ये उतना भी आसान नही था,मैंने वही किया जो अब तक करता आया था,मैंने प्यार भरे स्पर्श से शुरू किया ,उसके कोमल अंगों को हल्के हल्के से सहलाता हुआ मैं आगे बड़ा ,वो नरम अहसास मुझे गर्म कर रहा था,और उसकी सांसे मुझे उसकी ओर आमंत्रित कर रही थी,आखीर मैं उसके होठो पर आया वो तो अपने को मुझपर समर्पित करने को तैयार बैठी थी उसके होठो के कोमल स्पर्श से ही मुझे उसके प्यार का अहसास हो गया ,मैं अपने में एक ग्लानि की भावना से जुंझने लगा,मैं उसके होठो को छोड़कर खड़ा हो गया ,मेरा मुड़ देखकर शायद उसे कुछ समझ आ गया उसे भी पता था की मैं अपनी जान काजल से कितना प्यार करता हु ,और उसे ये भी अहसास हो चुका था की मैं उसे कितनी इज्जत से देखता हु,,,..वो मेरे गालो में हल्के से किस कर वहॉ से उठी .
"आप यही रुको मैं अभी आती हु " ,मैंने हा में सर हिलाया
वो उठकर अपने कुछ कपड़े पकड़कर सीधे बाथरूम में घुस गयी मुझे कुछ समझ नही आया लेकिन जब वो निकली तो उसे देखकर मेरा मुह खुला का खुला ही रह गया..
वो एक नाइटी में थी ,एक पतली सी सफेद रंग की नाइटी जिसके अंदर उसका सफेद पेंटी देख रहा था ,मुझे लगा की उसने अपनी ब्रा भी नही पहनी है .
उसका चहरा वाह..वो अब मासूम नही सेक्सी लग रही थी शायद यही कारण था की वो अपने कपड़े चेंज करने चले गई ,लेकिन मेरे लिए वो इतनी मेहरबान कैसे हो रही थी,.??????
वो शर्माते हुए मेरे पास आयी और फिर से बिस्तर में लेट गई ,इसबार वो खुलकर कुछ भी नही कर रही थी,लेकिन मुझे उसके इस रूप को देखकर कुछ हिम्मत सी आयी,मैं फिर से उसके ऊपर आया और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया ,उसकी सांसे उखड़ी हुई थी मेरे हाथ नीचे गए और उसकी पेंटी के गीलेपन से ही मैंने उसके मन को पढ़ लिया,
वो मेरी हर छुवन पर सिसकिया ले रही थी,..
"हमारे बीच की सभी दीवारे थोड़ दो विकाश ,मैं तुम्हारी होना चाहती हु.."
उसके काँपते हुए होठो ने मुझसे कहा .और मैं उसके रसभरे होठो को अपने होठो में लेकर उसका रस निचोड़ने लगा..वो और भी मुझे अपनी ओर भिच लेती वो अपने चरम पर थी ,
प्यार की यही खासियत है की जिस्म के मिलान से बढ़कर भी मजा उसमे आता है,वो अहसास ही वो सुकून दिला देता है,सबकुछ दूसरे के ऊपर छोड़ देना,अपने को किसी और का कर देना,पूर्ण समर्पण यही वो प्यार है जिसमे जिस्मो की मिलान की जरूरत नही होती,,,,.वो खुद को मेरे ऊपर छोड़ने लगी ,शायद ये उसका पहला अनुभव रहा हो ,क्योकि मेरी हर छुवन से उसके जिस्म में एक हलचल सी पैदा हो जाती थी,वो एक नशे में थी जो धीरे धीरे मुझे भी घेर रहा था.
मैं भी कब अपने कपड़ो को त्याग कर उसके बांहो में समा गया मुझे पता नही चला..जब मेरा नंगा लिंग उसकी योनि की दीवारों पर उसके पेंटी के ऊपर से रगड़ाया तो मुझे भी उसके गीलेपन का अहसास हुआ,
"आह जान "उसने मुझे कस लिया,मैंने अपने हाथ को नीचे कर उसके योनि को पेंटी के बंधन से आजाद किया ,उसका गोरा बदन एक उमंग से नाच रहा था वो लाल हो चुकी थी ,अभी तो उसे बहुत कुछ सहना बाकी था पर वो कभी भी चरम पर पहुच सकती थी,उसकी गीली योनि में एक उंगली घुसते ही मुझे उसके कौमार्य (वर्जिनिटी) का अहसास हो गया..
मेरे मन में एक बात अनायास ही उभर कर आयी,कि मैंने अभी तक किसी भी लड़की का कौमार्य नही लूटा है,और इत्तफाक से मैं उसी शख्स की बेटी का कौमार्य लूटने जा रहा हु जिसने मेरी बीवी का कौमार्य भंग किया था ,मिश्रा और काजल का ख्याल आते ही मेरे मन का वो राक्षस जाग गया जिसे मैंने इतने समय से खुद से भी छिपा के रखा था.मैं उसके ऊपर टूटा और एक ही झटके में अपना पूरे का पूरा लिंग उसके अंदर पूरी ताकत से घुसा दिया ..
"नहीईईईईई "एक जोर की चीख उसके मुह से निकली पर मेरे जागे हुए शैतान ने उसके मुह पर अपना हाथ रख दिया और फिर से झटका दिया ,अभी भी पूरा लिंग अंदर नही गया था,ऐसे तो उसकी योनि बहुत गीली थी पर फिर भी वो पहली बार का अहसास था और मेरे अंदर शैतान सवार हो चुका था,उसके आंखों से आंसू की कुछ बूंदे गिरी उसके मुह में मेरा हाथ था और वो थोडा छटपटा कर शांत भी हो गयी थी ,उसकी आंखे मुझे साफ कह रही थी उसे दर्द हो रहा है और उसे आराम चाहिये लेकिन मेरे सामने काजल की तस्वीर घूम गयी ,शायद मिश्रा ने ऐसे ही उसका कौमार्य लिया होगा,मैं एक जलन से जल उठा और मेरा अगला धक्का और भी तेज हो गया ,मैंने एक साथ ही 3 धक्के लगाए और वो छटपटाते हुए निढल हो गई उसकी गु गु की आवाज मेरे हाथो में ही दबकर रह गई,जब मैंने उसके आंसुओ और उसके चहरे को देखा तब जाकर मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन तब तक शायद देर हो चुकी थी मैंने उसके मुह से अपना हाथ हटाया .
वो रोने लगी ,लेकिन उसके गीले नयन मुझे ही देखे जा रहे थे .
"आप शैतान हो ."
"सॉरी जान सॉरी .."
मैं उसके गालो से ढलते हुए आंसुओ को अपने होठो में लेकर पीने लगा,कुछ ही देर में वो मेरे बालो को पकड़कर मुझे अपनी ओर खिंची और मेरे होठो को अपने होठो से मिला लिया,मैं जैसे ही अपने लिंग में हरकत की वो फिर से मुझे रोक दी .
"रुको ना दर्द में मार ही डालोगे क्या,आदमी हो की शैतान हो ,"
वो लगभग रोते हुए बोली ,लेकिन उसकी ये बात इतनी प्यारी थी की मैं उसके होठो को अपने दांतो में भर कर भिच लिया.
"नही ना "
मैंने अपनी जीभ उसके जीभ से मिला दी और वो मेरे प्यार के अंतहीन खाई में गिरने लगी ,हम एक दूजे को बेतहाशा चूमने लगे,हमारे हाथ एक दूजे के सर पर थे और उंगलिया बालो में फंसी थी...
मेरे कमर ने भी धीरे धीरे से चलना शुरू किया पर इस बार मलीना बस सिसकिया ले रही थी और उसके योनि में एक रस का रिसाव होने लगा था जिसे हम कामरस कहते है,उससे उसकी योनि मेरे लिंग के लिए रास्ता आसान कर रही थी और हम दोनो को मजे के सागर में उतारने लगी थे जिसकी गहराई हमे भी नही पता थी,हमे एक दूजे को कहा चुम रहे थे ,कहा चाट रहे थे ,हमारे दांत कहा गड रहे थे ,थूक कहा छोड़े जा रहे थे ,हाथ किस जगह को निचोड़ रहे थे ,हमे कुछ भी आभास नही था,बस वो मजा बस वो अहसास ,बस वो जिस्म और वो कोमलता ,वो गर्मी ,वो नरमी .
वो सिसकिया और वो पसीने की फिसलन.बस यही रह गया था,मुझे तो पता भी नही चला की कब मैंने उसे अपने वीर्य की धार से भर दिया और कितने बार भर दिया हम लगभग बेहोश से थे ,या उन्मादी से ..कभी हम तेज होते तो कभी इतने धीरे ही पता ही नही चलता की कुछ हो रहा है.ये प्यार का नया अहसास था मेरे लिए भी और शायद मलीना के लिए भी .वीर्य और कामरस मिलकर चादर को गिला कर रहे थे और साथ ही मलीना के कौमार्य की निशानी कुछ खून की बूंदे भी थी ,लेकिन किसे परवाह थी और किसकी परवाह थी..उसी गीले योनि में मैंने उसे दुबारा भीगा दिया.आंखे भी बंद हो रही थी पर कमर की चलन रुक नही रही थी,ना जाने वो कब खत्म हुई ना मुझे कुछ पता चला ना ही उसे बस हमारी आंखे बंद हो गई.....
 
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