टेंट के पीछे बैठा मोटा हलवाई भी उन दोनो के हुस्न को देखकर अपने भद्दे होंठों पर जीभ फेर रहा था....
उसे पता होता की उसकी ही बात कर रही है नेहा तो पूडी तलना छोड़कर उसके पीछे ही हो लेता वो भी..
हलवाई के छोटे टेंट को पार करके वो दोनो पिछली तरफ आ गये....
ये एक बड़ा सा ग्राउंड था, जिसके आधे हिस्से पर ही ये सब कार्यकर्म हो रहा था...
बाकी का हिस्सा सुनसान सा पड़ा था...
दूर अंधेरे में विक्की एक पेड़ के नीचे पड़ी बेंच पर बैठा उनका इंतजार कर रहा था...
उन्हें आता देखकर वो खड़ा हो गया
नेहा की आँखे चमक उठी उस नौजवान को देखकर...
उसकी हाइट और बॉडी दूर से देखकर ही उसकी चूत में पानी आ गया.....
अब ऐसा भी नही था की उसे चूत मरवाने की आग लगी हुई थी...
वो तो वैसे भी उसने अपने भाई के लिए ही रख छोड़ी थी,
पर आज के माहौल में जिस तरह से उसके जिस्म को रगड़ा गया था,
कम से कम उस खुजली को शांत करना तो बनता ही था,
और वो खुजली तो स्मूच और मुम्मे चुसवाने से ही दूर हो सकती थी...
एक अलग ही रोमांच का अनुभव कर रही थी नेहा...
इन्फेक्ट मंजू भी काफ़ी रोमांचित हो रही थी ऐसी स्थिति में नेहा और विक्की को मिलवाकर...
अब जो भी होने वाला था उसमे उन दोनो भाई बहन को तो मज़ा आने ही वाला था,
साथ ही साथ वो भी जानती थी की उसे बीच में कैसे मज़े लेने है...
अपनी प्लानिंग और अक्लमंदी पर मुस्कुराते हुए उसने नेहा से कहा : "देख....ये लड़का हमे दूर से देख रहा था, हमारी तरफ का ही है...इसलिए शरमा रहा है, वो सिर्फ़ एक ही शर्त पर यहां पीछे आने को तैयार हुआ है की जो भी होगा, अंधेरे में ही होगा...ताकि बाद में उसके लिए कोई प्राब्लम ना हो...''
नेहा : "अरे साला ...ये तो लड़कियो से भी ज़्यादा शरमाता है....जब इतना शरमा रहा है तो करेगा कैसे...हे हे''
पर नेहा को इस वक़्त उसके इस अनोखे व्यवहार से ज़्यादा अपने बदन की गर्मी की पड़ी थी....
इसलिए मंजू की बात में हाँ मिलाकर वो उसकी तरफ चल दी...
अब असली खेल शुरू होने वाला था....
जिसका विक्की धड़कते दिल से इंतजार कर रहा था.
उसे पता होता की उसकी ही बात कर रही है नेहा तो पूडी तलना छोड़कर उसके पीछे ही हो लेता वो भी..
हलवाई के छोटे टेंट को पार करके वो दोनो पिछली तरफ आ गये....
ये एक बड़ा सा ग्राउंड था, जिसके आधे हिस्से पर ही ये सब कार्यकर्म हो रहा था...
बाकी का हिस्सा सुनसान सा पड़ा था...
दूर अंधेरे में विक्की एक पेड़ के नीचे पड़ी बेंच पर बैठा उनका इंतजार कर रहा था...
उन्हें आता देखकर वो खड़ा हो गया
नेहा की आँखे चमक उठी उस नौजवान को देखकर...
उसकी हाइट और बॉडी दूर से देखकर ही उसकी चूत में पानी आ गया.....
अब ऐसा भी नही था की उसे चूत मरवाने की आग लगी हुई थी...
वो तो वैसे भी उसने अपने भाई के लिए ही रख छोड़ी थी,
पर आज के माहौल में जिस तरह से उसके जिस्म को रगड़ा गया था,
कम से कम उस खुजली को शांत करना तो बनता ही था,
और वो खुजली तो स्मूच और मुम्मे चुसवाने से ही दूर हो सकती थी...
एक अलग ही रोमांच का अनुभव कर रही थी नेहा...
इन्फेक्ट मंजू भी काफ़ी रोमांचित हो रही थी ऐसी स्थिति में नेहा और विक्की को मिलवाकर...
अब जो भी होने वाला था उसमे उन दोनो भाई बहन को तो मज़ा आने ही वाला था,
साथ ही साथ वो भी जानती थी की उसे बीच में कैसे मज़े लेने है...
अपनी प्लानिंग और अक्लमंदी पर मुस्कुराते हुए उसने नेहा से कहा : "देख....ये लड़का हमे दूर से देख रहा था, हमारी तरफ का ही है...इसलिए शरमा रहा है, वो सिर्फ़ एक ही शर्त पर यहां पीछे आने को तैयार हुआ है की जो भी होगा, अंधेरे में ही होगा...ताकि बाद में उसके लिए कोई प्राब्लम ना हो...''
नेहा : "अरे साला ...ये तो लड़कियो से भी ज़्यादा शरमाता है....जब इतना शरमा रहा है तो करेगा कैसे...हे हे''
पर नेहा को इस वक़्त उसके इस अनोखे व्यवहार से ज़्यादा अपने बदन की गर्मी की पड़ी थी....
इसलिए मंजू की बात में हाँ मिलाकर वो उसकी तरफ चल दी...
अब असली खेल शुरू होने वाला था....
जिसका विक्की धड़कते दिल से इंतजार कर रहा था.



















