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Incest XXX kahani कमसिन बहन

टेंट के पीछे बैठा मोटा हलवाई भी उन दोनो के हुस्न को देखकर अपने भद्दे होंठों पर जीभ फेर रहा था....
उसे पता होता की उसकी ही बात कर रही है नेहा तो पूडी तलना छोड़कर उसके पीछे ही हो लेता वो भी..

हलवाई के छोटे टेंट को पार करके वो दोनो पिछली तरफ आ गये....
ये एक बड़ा सा ग्राउंड था, जिसके आधे हिस्से पर ही ये सब कार्यकर्म हो रहा था...
बाकी का हिस्सा सुनसान सा पड़ा था...
दूर अंधेरे में विक्की एक पेड़ के नीचे पड़ी बेंच पर बैठा उनका इंतजार कर रहा था...
उन्हें आता देखकर वो खड़ा हो गया

नेहा की आँखे चमक उठी उस नौजवान को देखकर...
उसकी हाइट और बॉडी दूर से देखकर ही उसकी चूत में पानी आ गया.....
अब ऐसा भी नही था की उसे चूत मरवाने की आग लगी हुई थी...
वो तो वैसे भी उसने अपने भाई के लिए ही रख छोड़ी थी,
पर आज के माहौल में जिस तरह से उसके जिस्म को रगड़ा गया था,
कम से कम उस खुजली को शांत करना तो बनता ही था,
और वो खुजली तो स्मूच और मुम्मे चुसवाने से ही दूर हो सकती थी...
एक अलग ही रोमांच का अनुभव कर रही थी नेहा...
इन्फेक्ट मंजू भी काफ़ी रोमांचित हो रही थी ऐसी स्थिति में नेहा और विक्की को मिलवाकर...
अब जो भी होने वाला था उसमे उन दोनो भाई बहन को तो मज़ा आने ही वाला था,
साथ ही साथ वो भी जानती थी की उसे बीच में कैसे मज़े लेने है...

अपनी प्लानिंग और अक्लमंदी पर मुस्कुराते हुए उसने नेहा से कहा : "देख....ये लड़का हमे दूर से देख रहा था, हमारी तरफ का ही है...इसलिए शरमा रहा है, वो सिर्फ़ एक ही शर्त पर यहां पीछे आने को तैयार हुआ है की जो भी होगा, अंधेरे में ही होगा...ताकि बाद में उसके लिए कोई प्राब्लम ना हो...''

नेहा : "अरे साला ...ये तो लड़कियो से भी ज़्यादा शरमाता है....जब इतना शरमा रहा है तो करेगा कैसे...हे हे''

पर नेहा को इस वक़्त उसके इस अनोखे व्यवहार से ज़्यादा अपने बदन की गर्मी की पड़ी थी....
इसलिए मंजू की बात में हाँ मिलाकर वो उसकी तरफ चल दी...

अब असली खेल शुरू होने वाला था....
जिसका विक्की धड़कते दिल से इंतजार कर रहा था.
 
नेहा की आँखे चमक उठी उस नौजवान को देखकर...उसकी हाइट और बॉडी दूर से देखकर ही उसकी चूत में पानी आ गया.....अब ऐसा भी नही था की उसे चूत मरवाने की आग लगी हुई थी...वो तो वैसे भी उसने अपने भाई के लिए ही रख छोड़ी थी, पर आज के माहौल में जिस तरह से उसके जिस्म को रगड़ा गया था, कम से कम उस खुजली को शांत करना तो बनता ही था,और वो खुजली तो स्मूच और मुम्मे चुसवाने से ही दूर हो सकती थी...
एक अलग ही रोमांच का अनुभव कर रही थी नेहा...इन्फेक्ट पिंकी भी काफ़ी रोमांचित हो रही थी ऐसी स्थिति में नेहा और विक्की को मिलवाकर...अब जो भी होने वाला था उसमे उन दोनो भाई बहन को तो मज़ा आने ही वाला था, साथ ही साथ वो भी जानती थी की उसे बीच में कैसे मज़े लेने है...

अपनी प्लानिंग और अक्लमंदी पर मुस्कुराते हुए उसने नेहा से कहा : "देख....ये लड़का हमे दूर से देख रहा था, हमारी तरफ का ही है...इसलिए शरमा रहा है, वो सिर्फ़ एक ही शर्त पर यहां पीछे आने को तैयार हुआ है की जो भी होगा, अंधेरे में ही होगा...ताकि बाद में उसके लिए कोई प्राब्लम ना हो...''

नेहा : "अरे साला ...ये तो लड़कियो से भी ज़्यादा शरमाता है....जब इतना शरमा रहा है तो करेगा कैसे...हे हे''

पर नेहा को इस वक़्त उसके इस अनोखे व्यवहार से ज़्यादा अपने बदन की गर्मी की पड़ी थी....इसलिए मंजू की बात में हाँ मिलाकर वो उसकी तरफ चल दी...अब असली खेल शुरू होने वाला था....जिसका विक्की धड़कते दिल से इंतजार कर रहा था.

******************
अब आगे
******************

विक्की तक जाते हुए नेहा के दिल की धड़कन तेज होने लगी....
उसके निप्पल कड़क होकर अलग से चमकने लगे...
उसकी जाँघो के बीच गीलापन आ गया.

मन ही मन वो सोच रही थी की आज उसकी जवानी को उसके भाई के अलावा कोई दूसरा हाथ लगाएगा...
विक्की भी धड़कते दिल और खड़े लंड के साथ अपनी बहन को अपनी तरफ आते देखकर कुलबुला रहा था...
हालाँकि वो अच्छी तरह जानता था की घर में वो नेहा से ज़्यादा अच्छी तरह से मज़े ले सकता है
पर इस स्थिति में एक अलग ही तरह का रोमांच था..
साथ ही उसने आज सोच लिया था की वो एक साथ दोनो से मज़े लेगा..

वो उसके करीब पहुँची तो चाहकर भी विक्की का चेहरा ठीक से देख नही पाई,
घुप्प अंधेरा था वहाँ, उपर से वो जिस पेड़ के नीचे खड़ा था वो भी काफ़ी घना था, इसलिए सिर्फ़ नेहा उसके शरीर को महसूस कर सकती थी, देख नही पा रही थी..
वैसे भी इस वक़्त नेहा के अंदर इतनी चुदासी भरी पड़ी थी की उसे उसकी शक्ल से ज़्यादा उसका लंड देखने की पड़ी थी...

एक अजीब सी शांति छा गयी जब तीनो एक दूसरे के सामने पहुँचे तो...
मंजू ने विक्की को कुछ भी बोलने से मना किया था क्योंकि उसकी आवाज़ से उनका भांडा फूट जाता..

चुप्पी को तोड़ते हुए मंजू ने कहा : "अर्रे यार, ऐसे ही खड़े रहना है तो अंदर ही चलते है ना...जल्दी करो जो भी करना है, ऐसा ना हो की कोई आ जाए...''

ये सुनते ही विक्की के हाथ हरकत में आ गये, वो हाथ बढ़ाकर नेहा के मुम्मे पकड़ने ही वाला था की उससे पहले ही नेहा के हाथ सीधा उसके लंड पर पहुँच गये...
विक्की ने तो सोचा भी नही था की उसकी शरीफ सी दिखने वाली बहन ऐसी हरकत या पहल कर सकती है...
वो जीन्स में फँसे उसके लंड को अच्छे से सहला रही थी,
एक अलग ही टीला सा बना हुआ था विक्की की पेंट में,
नेहा ने सिसकारी मारते हुए अपने शरीर को विक्की से सटाया और अपनी नन्ही बूबियां उसकी छाती पर रखकर ज़ोर से मसल डाली....
अब विक्की के लिए भी रुकना मुश्किल था...
उसने अपने दोनो हाथो मे उसकी चुचियों को पकड़ा और अपना मुँह नीचे करते हुए उसके लरजते हुए होंठों पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूस डाला...



एक बिजली सी कड़क गयी जब दोनो के गीले होंठ मिले तो....
हालाँकि ये पहली बार नही था जब दोनो भाई बहन एक दूसरे को चूम रहे थे, विक्की को तो पता था की वो नेहा को ही चूम रहा है, पर नेहा को दूर - 2 तक अंदाज़ा भी नही था की वो उसका खुद का भाई है जिसके साथ वो इस रोमांचक पल में मज़े ले रही है...

नेहा ने फड़फड़ाते हाथों से विक्की की जीन्स खोल डाली और उसके कबूतर को बाहर निकाल लिया....
लंड के बाहर आते ही एक अजीब सा नशा फैल गया हवा में....
नेहा की बेसब्री का आलम ये था की उसने अपनी स्मूच तोड़ते हुए नीचे फिसलना शुरू कर दिया और अपने पंजो पर बैठकर अपने भाई के लंड को एक ही बार में निगल गयी....
 
विक्की ने बड़ी मुश्किल से अपने मुँह से आआआआआहह की आवाज़ को निकलने से बचाया..
बाकी का काम मंजू ने आसान कर दिया,
वो लपक कर आगे आई और उसने अपने होंठ विक्की के होंठो पर रखकर उन्हे चूसने लगी...

उपर के होंठो पर मंजू के होंठ, नीचे लंड पर नेहा के होंठ, दो लड़कियो को ऐसे चूसने का मौका मिल जाए तो दुनिया के किसी भी मर्द को अपने आप पर गर्व होने लगेगा...

मंजू ने अपने सूट को उपर करके उसे उतार कर साइड के बेंच पर रख दिया,
ब्रा भी उसने एक ही झटके में खिसका कर अपने स्तनो से ऊपर खींच दी,
अब वो विक्की के सामने टॉपलेस होकर खड़ी थी,
विक्की ने भी देर नही लगाई और उसके मदमस्त मुम्मो को एक-2 करके चूसने लगा...



नीचे नेहा ने भी कोहराम मचा रखा था,
उसे ये तो एहसास हो चुका था की इस लड़के का लंड भी उसके भाई जितना ही है,
पर अभी भी दूर -2 तक उसके अलावा उसे कुछ और पता नही चल पा रहा था,
वो तो बस मस्त होकर विक्की के लंड की बिन बजाने में लगी हुई थी...



कुछ देर बाद दोनो ने अपनी जगह चेंज कर ली, नेहा उपर आ गयी और मंजू नीचे चली गयी...

विक्की के होंठो को चूसते हुए कुछ देर के लिए तो उसे लगा की ये होंठ वो पहले भी चूस चुकी है,
पर सैक्स की ठरक इतनी चढ़ी हुई थी उसपर की उसका दिमाग़ काम ही नही कर रहा था....
विक्की ने उसके सूट की कमीज़ भी उतार डाली, अब वो भी मंजू की तरह उपर से नंगी थी...

मंजू भी उसका लंड चूसने के बाद उपर आई और फिर वो दोनो मिलकर विक्की को बारी-2 से स्मूच करने लगी...
विक्की के दोनो हाथ में उन दोनों की रेशमी गांड थी जिसे वो जी भरकर दबा रहा था...

नेहा के मन में अंतर्द्वंद चल रहा था....
काश वो अपने भाई से पहले चुदवा चुकी होती तो आज ऐसे सुनहेरे मौके को हाथ से ना जाने देती....
वो अभी के अभी अपनी सलवार नीचे करती और घोड़ी बनकर उसके लंड को अपनी चूत में ले लेती...
पर अपना कुँवारापन उसे अपने भाई के नाम करना था, इसलिए उसने बड़ी मुश्किल से अपने जज्बातों पर काबू पाया...

वहीं दूसरी तरफ मंजू की चूत भी बुरी तरह से पनिया चुकी थी....
चाह तो वो भी रही थी की उसकी चूत का उद्घाटन आज ही हो जाए पर इस तरह से जल्दबाज़ी वाली चुदाई करवाना उसे भी पसंद नही आ रहा था...
अपनी पहली चूत चुदाई के लिए उसने काई सपने संजो रखे थे, जहाँ वो और विक्की हो होंगे, रोमांटिक सा माहौल होगा, गद्देदार बिस्तर होगा जिसपर बिछकर वो चुदाई के भरपूर मज़े ले सकेगी...

पर अभी के लिए तो कुछ ना कुछ करना ही था, और उसके लिए उन दोनो को ही अपने नाड़े खोलने की ज़रूरत थी....
मंजू ने पहले खुद का और फिर नेहा की पायजामी का भी नाड़ा खोलकर उसे घुटनो तक खिसका दिया और फिर दोनो ने एक-2 करके अपनी नंगी चूत और गांड को अच्छी तरह विक्की के खड़े लंड पर रगड़ा...

और फिर विक्की की जाँघो पर अपनी-2 गांड टीका कर उन दोनो ने विक्की के हाथो को अपनी चुतों पर रख लिया, विक्की का लंड इस वक़्त उन दोनो की कमर के बीचो बीच फँसा हुआ था, जिसपर दोनो की गांड का साइड वाला हिस्सा दबाव बनाकर उसे अलग सा एहसास दे रहा था....
इधर विक्की के हाथ हरकत में आए और उधर उसका लंड ....
वो अपनी कमर आगे पीछे करके अपने फँसे हुए लंड से उनकी कमर की चुदाई करने लगा...
और खुद उनकी चुतों में उंगली डालकर उनके दाने को रगड़कर उन्हे रोमांच के आख़िरी पड़ाव तक ले जाने लगा...
बीच-2 में वो अपने हाथ उपर करके उनकी चुचियों से भी खेलता और फिर से हाथ नीचे करके उनकी रसीली चूत में उंगली डालकर उसे चोदने लगता...
 
कुछ देर बाद दोनो ने खाना खाया और फिर मंजू के मॉम-डेड के साथ वो लोग वापिस आ गये...
वहां पहुँचने से पहले ही नेहा ने विक्की को फोन कर दिया था ताकि वो उसे घर ले जा सके..

घर जाते हुए वो आज काफ़ी खुश थी,
अपनी लाइफ का ये एडवेंचरस सैक्स एक्सपीरियन्स उसे काफ़ी पसंद आया था...
पर इस अधूरे खेल को अब वो पूरा करना चाहती थी,
उसने सोच लिया था की आज किसी भी हालत में वो विक्की के लंड को अपनी चूत में लेकर रहेगी...
इसलिए घर जाते हुए वो उसे कस कर पकड़े बैठी थी,
और रह रहकर उसका हाथ उसके कड़क होते लंड पर जा रहा था...
आज वो अपने भाई का शिकार करने के पूरे मूड में थी.

************
अब आगे
*************

विक्की भी इस एडवेंचर भरे सफ़र में काफ़ी खुश लग रहा था...
आज से पहले उसने जब भी नेहा या पिंकी को किस्स किया था, ऐसा रोमांच उसे आज तक नही मिला था....
वो अंजान बनकर अपनी ही बहन से लंड चुसवाना,
उसके बूब्स चूसना
और
उसके होंठो का रस पीना...
उफ़फ्फ़,
कयामत था वो सब...
मन तो उसका कर रहा था की इसी सुनसान रास्ते में बाइक को किनारे लगाकर वो उसकी चूत मार ले,
एक के बाद दूसरा रोमांचक एनकाउंटर हो जाता वहाँ,
ऐसी चुदाई में मज़ा भी बहुत मिलता,
पर पहली चुदाई का सवाल था, जिसे वो ढंग से ही करना चाहता था...
मन तो उसका बहुत कर रहा था आज ही नेहा को चोदने का पर उसे डर था की पता नही वो मानेगी या नही..

काश वो दोनो भाई बहन इस वक़्त खुल कर अपने दिल की बातें बयां कर लेते तो उन्हे पता चल जाता की चुदाई का आज से अच्छा मौका हो ही नही सकता..

खैर, एक दूसरे को अपने शरीर की गर्मी प्रदान करते-2 वो दोनो घर पहुँच गये,
रात काफ़ी हो चुकी थी, माँ ने ऊंघते हुए दरवाजा खोला और बंद आँखो से ही ऊँघते हुए अपने कमरे में वापिस चली गयी...

जैसे ही विक्की उपर अपने रूम में जाने लगा, नेहा ने बड़ी ही शराबी आवाज़ में कहा : "रूको ना भाई, मैं कपड़े बदल लूँ , फिर एकसाथ ही उपर चलते है...''

उसका कहने का अंदाज ही इतना नशीला था की विक्की को बिना पिए ही शराब सी चढ़ गयी.

वो सम्मोहन में बँधा हुआ सा उसके पीछे-2 उसके रूम तक आ गया,
नेहा ने उसका हाथ पकड़ कर बेड पर बिठाया और खुद अपनी अलमारी से कपड़े निकालने लगी..

फिर मुस्कुराते हुए वो उसकी तरफ पलटी और बिल्कुल उसके करीब आकर खड़ी हो गयी...
इतना करीब की उन दोनो के घुटने आपस में टकरा रहे थे..

फिर उसने अपनी कुरती को नीचे से पकड़ा और उसे धीरे-2 उपर करके अपने गले से निकाल फेंका...
नीचे कसी हुई ब्रा में उसके नन्हे बूब्स दिल की धड़कन के साथ-2 उपर नीचे हो रहे थे...
फिर उसने विक्की के हाथ को पकड़कर अपनी पायजामी के नाड़े पर रखा और उसे खोलने के लिए कहा,
विक्की ने एक झटका दिया और वो दोहरी गाँठ वाला नाड़ा खुलते ही उसकी कमर से पायज़ामी की पकड़ भी ढीली पड़ गयी और वो नीचे सरकने लगी, नेहा ने उसे भी पकड़कर नीचे किया और उसे अपनी टाँगो से निकाल फेंका..

एक अजीब सी खामोशी थी कमरे में ...
बगल के कमरे में दोनो के माँ -बाप सो रहे थे और यहाँ इन दोनो के जवान जिस्म एक अलग ही आग में जल रहे थे..

नेहा ने हाथ पीछे करते हुए अपनी ब्रा के हुक्स खोले और वो भी एक झटके से छिटककर आगे की तरफ़ लटक गयी...
नेहा ने उसे निकाल कर विक्की के गले से लटका दिया...
अब वो टॉपलेस होकर अपने भाई के सामने खड़ी थी...



उसके नन्हे बूब्स अलग ही चमक रहे थे...
उनपर लगे लाल निशान थोड़ी देर पहले हुई गुत्थम गुत्था को बयान कर रहे थे,
विक्की ने उसके बारे मे कुछ नही पूछा, बस उन्हे निहारता रहा..
पर जैसे ही वो उन्हे पकड़ने लगा तो नेहा ने उसका हाथ हवा में ही रोक दिया और बोली : "अभी नही....उपर जाकर ...''
 
फिर मुस्कुराते हुए उसने अपनी कच्छी भी उतार दी...
अब वो उपर से नीचे तक पूरी नंगी उसके सामने थी.



फिर उसने एक शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनी और अपने कपड़े उठा कर अलमारी में रख दिए...
और विक्की को उपर चलने का बोलकर खुद आगे चल दी...

विक्की से आगे चलते हुए वो कुछ ज़्यादा ही अपने चूतड़ मटका कर चल रही थी और बेचारा विक्की उसके पीछे-2 अपना खड़ा लंड एडजस्ट करता हुआ चला आ रहा था..

उपर जाते ही नेहा ने सबसे पहले दरवाजा बंद किया और बिना कुछ कहे वो विक्की पर टूट पड़ी...

विक्की बेचारा तो सोच रहा था की पहले वो भी नेहा की तरह अपने कपड़े चेंज कर ले पर उसने इसका मौका ही नही दिया..

नेहा ने ताबड़ तोड़ अंदाज में उसके सारे कपड़े निकालने शुरू कर दिए और कुछ ही पल में उसे पूरा नंगा करके ही दम लिया उसने...
उसके खुद के कपड़े तो वैसे भी नाम मात्र के थे, उन्हे भी उसने एक पल में निकाल फेंका...
आज दोनो भाई बहन पूरी तरह से जोश में थे...
विक्की का खड़ा हुआ लंड उसके हुस्न की तारीफ़ों में सलामी ठोंक रहा था उपर नीचे होकर.



फिर एक झटके से दोनो आगे आए और एक दूसरे को बाहों में भरकर अपने-2 होंठ आपस में सटा दिए...

''ओह भाई.....मुउउउउउउउचचह.....आज सब्र नही हो रहा मुझसे....आग सी लगी है मेरे अंदर ...प्लीज़ भाई....आज मना मत करना.....बुझा दो ये आग अपने इस मोटे लंड से.....बना दो मुझे कली से फूल....डाल दो इसे मेरी चूत में भाई......चोद डालो मुझे....''

जो उसके मुँह में आया वो बकती चली गयी और अनगिनत चुम्मिया उसने अपने भाई के चेहरे और होंठो पर दे डाली.....





नेहा को किस्स करते -2 विक्की ने उसकी गर्दन को चूमा, नीचे आते हुए उसके दोनो बूब्स को एक-2 करके निचोड़कर अच्छे से पिया और फिर उसे अपनी बाहों में गुड़िया की तरह उठा कर उसकी नाभि को अपनी जीभ से चाटा ...
 

ये एक ऐसा पल था जिसमें नेहा की चूत से निकलकर ढेर सारी मलाई विक्की के पैरों पर जा गिरी,
और वो मलाई और निकलकर ऐसे व्यर्थ ना जाए, इससे पहले ही विक्की ने उसे अपने बेड पर पटका और सीधा अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत पर कूद पड़ा और उसे जोरों से चाटने लगा..



अपनी करामाती जीभ से वो उसकी चूत की परतों की गहराइयाँ नाप रहा था..
शायद आज का ये आख़िरी दिन था जब वो इस कुँवारी चूत का स्वाद ले पा रहा था,
आज के बाद तो इसका स्वाद भी बदलने वाला था.
इसलिए वो जितना ज़्यादा हो सकता था उतना अंदर तक अपनी जीभ को पेलकर उसका रस पीने में लगा था..

नेहा पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी, अब वो पल आ भी चुका था जिसका दोनो भाई बहन को बेसब्री से इंतजार था....
वो उसकी आँखो मे देखता हुआ उपर उठा और अपने लंड को मसलने लगा...
नेहा ने भी मुस्कुराते हुए उसके लंड को अपने मुँह में लेकर कुछ देर तक चूसा और उसे अच्छी तरह से गीला करके चूत में भेजने लायक बना दिया...



फिर वो उसी अवस्था में पीछे होकर बेड पर टांगे फेला कर लेट गयी, और अपनी बाहें उपर करके विक्की को अपने अंदर आने का न्योता दिया...





विक्की ने अपने खड़े लंड को उसकी रसीली चूत के होंठो पर रखकर होले से दबाया तो उसके लंड का टोपा अंदर खिसक गया..थोड़ा और ज़ोर लगाया तो वो लंड अंदर सरकने लगा...
धीरे-2 उसने करीब आधा लंड नेहा की चूत में उतार दिया और अंत में उसकी सील पर जाकर वो अटक गया...
आगे जाने के दो ही रास्ते थे, झटका और हलाल,
झटका वो देना नही चाहता था, इसलिए उसने धीरे-2 उसे हलाल करना शुरू किया..

अपने लंड को उसने धीरे से पीछे किया और फिर पिछली बार से ज़्यादा आगे की तरफ खिसका दिया, ऐसा करते-2 वो इंच इंच करके उसकी सुरंग में दाखिल हो रहा था....एक पल वो भी आया जब नेहा की सील पर वो फिर से टकराया, इस बार वो रुका नहीं और धीरे से दबाव बनाकर उसे अंदर धकेलता रहा और विक्की का लंड नेहा की चूत के किले को भेदता हुआ अंदर तक जा बैठा...

''आआआआआआआअहह......उम्म्म्ममममममममममममममममममम...... मजाआाअ आआआआआआआ गय्ाआआआअ भाई................उफफफफफफफफफफफफ्फ़...... दर्द भी हो रहा है.......मीठा सा एहसास भी.......अहह....मन तो कर रहा है इस लॅंड को पूरी जिंदगी अपने अंदर लेकर लेटि रहूं .......अहह........ सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.... भाई........... अब तोड़ा ज़ोर से करो ना.......अहह.... मुझे झटके मारो......जैसा ब्लू फ़िल्मो मे होता है.............''



उसका इतना कहना था की उसने अपनी स्पीड बड़ा दी...
अब वो हुमच-2 कर अपनी प्यारी बहन को चोदने लगा..
 

और ज़ोर-2 से झटके देकर चुदाई करते हुए बड़बड़ाने की बारी इस बार विक्की की थी..

''आआअहह..... ले साली...भेंन की लोड़ी .......ले मेरा लंड .....बड़ी गर्मी भरी है ने तेरे अंदर.....अब रोज रात को पेला करूँगा तुझे...इसी कमरे में ......अहह...... मेरे लंड की गुलाम बनकर रहेगी अब तू साली.....रोज मेरे लंड को चूसेगी.....इसे अपनी चूत में लेकर मज़े लेगी......बोल....लेगी ना.....''

वो चिहुंक कर बोली : "हाँ भाई....लूँगी.....दिन रात लूँगी....जब भी मौका मिलेगा, इस मोटे लंड से चुदवाउंगी ......आहहह....इतने सालो बाद पहली बार अपनी जिंदगी का असली मज़ा मिल रहा है...आआआअहह....मैं पहले ही जवान क्यों नही हो गयी रे..........जल्दी से चोद मुझे.....''



फिर तो दोनो एक अलग ही फॉर्म में आ गये.....
विक्की ने उसके दोनो हाथ दबोच कर उसकी चूत में अपने लंड की रेल दौड़ा दी....
हर झटके से उसके नन्हे बूब्स उछलकर उपर तक जाते और नीचे आते,
विक्की उन्हे अपने मुँह से पकड़कर चूस भी रहा था बीच-2 में

और जल्द ही उन दोनो के अंदर चरम सुख का निर्माण होने लगा और वो ओर्गास्म उनके विशेष अंगो के मध्यम से बाहर आने को आतुर हो गया..

विक्की : "आआआआअहह नेहा...........मैं झड़ने वाला हूँ बस......अहह......''

नेहा ने चिल्लाते हुए अपनी टांगे उसके इर्द गिर्द बाँध दी और बोली : "मेरे अंदर भाई....मेरे अंदर निकालो अपना रस.....मैं तुम्हे अंदर तक महसूस करना चाहती हूँ ......''

विक्की : "पर ???''

नेहा : "पर वर कुछ नही...तुम करो...मैं गोली ले लूँगी....पर पहली बार मैं इसे महसूस करना चाहती हूँ ......डालो मेरे अंदर ही सारा रस भाई......''



विक्की के पास भी कुछ सोचने समझने का वक़्त नही था,
उसने एक लंबी साँस ली और अपनी गति बड़ा दी,
कुछ ही पलों में उसके लंड का गाड़ा रस निकलकर उसकी बहन की चूत में जाने लगा....

''आआआआआआआआआआआअहह.......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... मैं तो गया रे........मैं तो गया..............''

नेहा भी अपने भाई के गर्म वीर्य को महसूस करके तुरंत झड़ गयी.....
दोनो एक दूसरे के जिस्मों को रगड़ते हुए और एक दूसरे के चेहरों को चूमते हुए अंत तक हल्के-2 झटके देते रहे...

फिर जैसे ही विक्की ने अपना लंड बाहर खींचा, गुलाबी रंग लिए ढेर सारा वीर्य चूत के रास्ते बाहर आ गया....
दोनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे की तरफ देखा और फिर से एक बार एक दूसरे के होंठों को चूम लिया.

उसके बाद दोनो ने रूम की हालत ठीक की और बेड पर गिरे माल को सॉफ किया...
फिर फ्रेश होकर दोनो फिर से एक बार बेड पर आकर नंगे लेटे और काफ़ी देर तक एक दूसरे की बाहों में लिपटकर लेटे रहे...
नींद दोनो की आँखो में नही थी, मन तो और भी चुदाई करने का कर रहा था पर पहली चुदाई से नेहा की चूत सूज गयी थी, इसलिए सिर्फ़ मुम्मा चुसाई और होंठो की क़िस्सियो से काम चलाया उन्होने...




सुबह होने से पहले नेहा अपने कपड़े पहन कर नीचे अपने रूम में चली गयी और विक्की अपना अंडरवेयर पहन कर आराम से लंबी तानकर सो गया....
आज काफ़ी थक गया था वो , उसे जबरदस्त नींद आने वाली थी.


पर अगले दिन उसकी डबल शिफ्ट होने वाली थी, ये वो नहीं जानता था
 


''आआआआआआआआआआआअहह.......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... मैं तो गया रे........मैं तो गया..............''

नेहा भी अपने भाई के गर्म वीर्य को महसूस करके तुरंत झड़ गयी.....दोनो एक दूसरे के जिस्मों को रगड़ते हुए और एक दूसरे के चेहरों को चूमते हुए अंत तक हल्के-2 झटके देते रहे...

नींद दोनो की आँखो में नही थी, मन तो और भी चुदाई करने का कर रहा था पर पहली चुदाई से नेहा की चूत सूज गयी थी, इसलिए सिर्फ़ मुम्मा चुसाई और होंठो की क़िस्सियो से काम चलाया उन्होने...

सुबह होने से पहले नेहा अपने कपड़े पहन कर नीचे अपने रूम में चली गयी और विक्की अपना अंडरवेयर पहन कर आराम से लंबी तानकर सो गया....आज काफ़ी थक गया था वो , उसे जबरदस्त नींद आने वाली थी.पर अगले दिन उसकी डबल शिफ्ट वाली थी, ये वो नहीं जानता था

**************
अब आगे
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अगली सुबह जब विक्की की नींद खुली तो उसे अपने लंड पर कुछ चिपचिपा सा महसूस हुआ
उसने नीचे देखा तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी
नेहा उसके लंड को चूस रही थी और वो भी स्कूल ड्रेस में ...



उसने घड़ी देखी तो सुबह के 7:30 बज रहे थे...
बड़ी मुश्किल से उसने अपनी आंहों पर काबू करते हुए नेहा से कहा : "आअहहह....नेहा की बच्ची .....उम्म्म्मममममम.... ये ये.... क्या कर री है ...सुबह -2 ...... माँ आ गयी तो....''

नेहा ने पूकक्च की आवाज़ से उसके लंड को मुँह से बाहर निकाला और बोली : "माँ मेरे लिए लंच बना रही है....और पिताजी की तबीयत ठीक नही है, इसलिए आज तुम्हे मुझे स्कूल छोड़ने जाना है...इसलिए तुम्हे उठाने आई हूँ ....''

इतना कहते हुए एक कुटिल मुस्कान के साथ उसने फिर से अपने रसीले होंठ उसके लंड पर लगा दिए और उसे जोरों से चूसने लगी....

विक्की : ''आअहहह.......साली.....ऐसे रोज उठाएगी ना तो चुदाई करवाके ही स्कूल जाया करेगी .....'

नेहा : "तो मैं कब मना कर रही हूँ, मैं रोज इसी तरह उठाने आ जाया करुँगी ''

इतना कहते हुए उसने फिर से विक्की के सुपाडे को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया

अब विक्की की हालत नही रह गयी थी कुछ बोलने की
क्योंकि सुबह के इरेक्शन और नेहा के सैक्सी होंठों ने उसके लंड को जल्दी झड़ने पर मजबूर कर दिया और वैसे भी नेहा को स्कूल भी जाना था, इसलिए भी उसका मुँह कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से चल रहा था...

एक मिनट भी नही लगा विक्की को झड़ने में..
और झड़ते हुए वो बड़ी ही बेदर्दी से उसकी गर्दन और बालों को पकड़कर अपने लंड को उसके मुँह में ढूस रहा था...

''आआआआआआआआआहह ...... नेहााआआआआआ.... मेरी ज़ाआआअनन् उम्म्म्मममममममममममममम....''

उसने नेहा की चोटी पकड़ कर उसके मुँह में पूरा लोढ़ा घुसेड डाला....
इतनी बेदर्दी से वो अपने लंड को उसके मुँह में रगड़ रहा था की बेचारी की आँखो में आँसू आ गये...
पर मज़ा भी दुगना मिला उसे...
विक्की ने उसके खुले मुंह में अपने लंड का सारा डिपोसिट डाउनलोड कर दिया

नेहा को तो पसंद आया विक्की का ये वहशिपन, इसे विस्तार से महसूस करेगी रात को, ये सोचकर वो अपनी सैक्सी हँसी में मुस्कुरा दी...

फिर जल्दी से अपना मुँह सॉफ करके, शीशे में देखकर अपने बाल ठीक करके वो नीचे भाग गयी...
कुछ ही देर में विक्की भी अनमने मन से उंघता हुआ सा नीचे आया और नेहा को अपनी बाइक पर बिठाकर स्कूल की तरफ चल दिया...

स्कूल जाते हुए वो पूरे रास्ते उसके लंड को सहलाती रही, और अपनी नन्ही बूबियाँ उसकी पीठ पर रगड़ती रही..

उसे स्कूल छोड़कर जब वो वापिस जा रहा था तो उसे दूर से मंजू भी एक रिक्शे पर स्कूल की तरफ आती हुई दिखाई दी...विक्की को देखकर उसने रिक्शा वहीं रुकवा लिया और उसे पैसे देकर रिक्शे से उतर गयी....

जैसे ही विक्की उसके करीब पहुंचा वो बोली

"कुछ थेंक्स वेंक्स भी कहना होता है किसी को, कल रात कितनी अच्छे से खातिरदारी करवाई तुम्हारी....''

विक्की : "तुम्हे तो स्पेशल थेंक्स कहना पड़ेगा..पर उसके लिए एकांत की ज़रूरत पड़ेगी मुझे...''

उसकी बात का मतलब समझकर मंजू का चेहरा लाल पड़ गया...और उसने आँखे नीचे कर ली..

विक्की : "देख मंजू, अब मुझसे सब्र नही हो रहा है, मुझे जल्दी से जल्दी वो करना है बस...''

उसकी बात सुनकर मंजू मुस्कुरा दी और इतराते हुए अपनी कमर मटका कर आगे चलने लगी...
और बोली : "क्या करना है विक्की भैय्या ...ज़रा विस्तार से समझाइये मुझे...''
 
विक्की ने भी अपनी बाइक वहीँ खड़ी की और उसके पीछे-2 चलने लगा,
वो समझ गया था की वो मज़े लेने के मूड में है...
पर सामने ही उसका स्कूल था, वो ज़्यादा देर तक रुक भी नही सकती थी, गेट बंद होने का टाइम हो गया था..

पर फिर भी उसकी चूत गीला करने का पूरा इंतज़ाम कर दिया विक्की ने अपनी एक ही लाइन में ..

वो बोला : "वही...तेरे साथ सैक्स करने का मेरी जान....तेरे ये मोटे मुम्मे चूसने का...तेरी चूत चाटने का, अपना मोटा लंड तेरी गीली चूत में घुसाने का....तेरी चूत मारने का......''

एक के बाद एक ऐसी बाते सुनकर मंजू की साँसे धोंकनी की तरह तेज चलने लगी...
उसकी आँखो में लाल डोरे तैर गये...
उसकी छाती तेज़ी से उपर नीचे होने लगी....
बिना ब्रा की छातियों पर निप्पल उभर कर उजागर हो गये और सफेद शर्ट के उपर दूर से ही चमकने लगे...
एक गीलेपन का एहसास उसे चूत में भी होता महसूस हुआ, और एक हल्का सा गाड़े पानी का झरना उसकी नन्ही चूत में से निकलकर कलकल करता हुआ नीचे की तरफ गिरने लगा...

अब उसकी आँखे बोझल और पैर भारी से हो गये थे...
उसकी हालत देखकर लग नही रहा था की वो स्कूल तक चलकर सही ढंग से जा पाएगी....
विक्की भी अपने हरामीपन पर काफ़ी खुश था, उसकी हालत देखकर वो भागकर अपनी बाइक उठा लाया और उसे उसपर बैठने को कहा...
मंजू भी धड़कते दिल से उसके पीछे बैठ गयी..

विक्की : "चल अब, आज स्कूल की छुट्टी मार, और अपनी इस हालत पर तरस खा और मुझपर भी...''

मंजू मुस्कुरा दी, पर कुछ बोली नही..

विक्की ने बाइक घुमाई और चल दिया...
अब उसके दिमाग़ में कमरे के जुगाड़ का आइडिया गूँज रहा था...
किसी दोस्त से बोले या किसी होटल में जाए ...

पर उसकी परेशानी को मंजू ने एक ही पल में सुलझा दिया.

वो बोली : "एक काम करो, मेरे घर ही चलो...आज माँ पिताजी नही है घर पे...''

ये सुनते ही विक्की का मन किया की बाइक पर खड़ा होकर नाचने लगे...
भला इतना अच्छा मौका था तो वो पहले क्यों नहीं बोली

विक्की : "अरे वाह, इस से अच्छी बात तो हो ही नही सकती...कहाँ गये वो दोनो इतनी सुबह ..''

मंजू : "जहाँ शादी थी, उनके घर पर नयी बहू के लिए कुछ रस्में होती है, रात भर उन लोगो से वहां रुका नही जाता, इसलिए रात को आराम किया और सुबह -2 फिर से उनके घर की तरफ निकल गये....तुम्हे बताने का मौका नही मिला, दिन में नेहा और मुझे लेने आते तब शायद बता पाती, पर अच्छा हुआ की तुम सुबह ही मिल गये....अब शाम तक का टाइम हमारा है...''

इतना कहते हुए वो उस से बुरी तरह से लिपट गयी..

विक्की ने तो अपनी बाइक की स्पीड फुल कर दी, लंड उसका खंबे की तरह अकड़ कर खड़ा हो चुका था, जिसे अब मंजू ही ठंडा कर सकती थी...

कुछ ही मिनट में विक्की की बाइक उसके घर के सामने पहुँच गयी...
उस से इतना भी सब्र नही हो रहा था की मंजू अपनी कमर मटकाते हुए दरवाजे तक जाए और ताला खोले,
उसने झट से उसके हाथ से चाबी छीनी और एक सेकेंड में ताला खोलकर उसे अंदर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया...

मंजू उसके इस उतावलेपन पर हँसती रह गयी...
पर उसकी हँसी उसी पल गायब हो गयी जब विक्की उसकी तरफ पलटा और उसके होंठो पर होंठ लगाकर उसे जोरों से किस्स करने लगा...



मंजू के कंधे से उसने स्कूल बेग लेकर एक कोने में रख दिया और उसके पूरे जिस्म पर हाथ फिराते हुए उसे सहलाने लगा और उसके रसीले होंठों का रसपान करता हुआ उसके मुम्मो को शर्ट के उपर से ही मसलने लगा..

किस्स करते-2 दोनो नीचे बने बेडरूम में आ गये, जो मंजू के माँ पिताजी का था..

वो तो इतना आतुर था की वो खींच कर उसकी शर्ट फाड़ने पर आ गया, वो तो मंजू ने बड़ी मुश्किल से उसके हाथो को पीछे किया और खुद ही अपनी शर्ट के बटन खोलकर अपने मुम्मे उसके आगे परोस दिए, वरना उसकी स्कूल की शर्ट की धज्जियाँ उड़ जानी थी...

मुम्मे बाहर निकलते ही कमरे में जैसे 100 वॉट के 2 बल्ब जल गये,
उनकी दूधिया रोशनी से पूरा कमरा जगमगा उठा..
उसने गोर से उसके मोटे मुम्मो को देखा और फिर धीरे से अपनी जीभ निकाल कर उसके निप्पल को गीला कर दिया...
कड़क निप्पल उसकी थूक में नहा कर और ज्यादा अकड़ गये..



और फिर उसने अपना पूरा मुँह खोलकर उसके दाँये मुम्मे को मुँह में लिया और उसे जोरों से चूसने लगा...

''म्‍म्म्ममममममममममममम...... अहह.......... मजाअ आआआआआआअ गया विक्कीईईईईईईईईई''
 
आज शायद पहली बार था जब उसने भैय्या ना बोलकर सिर्फ़ उसे विक्की नाम से बुलाया था...
और ये उसे पसंद भी आया.

और उसे डबल मज़ा देने के लिए उसने दूसरे मुम्मे को भी अपने मुँह में लेकर उसी अंदाज में चूसा, चुभलाया.....

विक्की के पैने दाँत अपने मुम्मो पर महसूस करते हुए वो उसके सिर को पकड़ कर बुरी तरह से कराह रही थी....
और साथ ही साथ वो अपनी चूत वाला हिस्सा उठाकर उसके खड़े लंड पर भी मार रही थी,
शायद उसे नीचे कुछ ज़्यादा तकलीफ़ थी जिसका इलाज इस वक़्त सिर्फ़ विक्की के पास ही था...

विक्की भी उसका इशारा समझ कर उसके मुम्मो को छोड़कर नीचे की तरफ हो लिया,
कमर पर बँधी उसकी स्कर्ट को उसने खोलकर नीचे खिसका दिया,
कच्छी तो दोनो सहेलियाँ ही नही पहनती थी, इसलिए अगले ही पल उसकी चूत पूरी नंगी होकर उसके सामने आ गयी

अपने ही रस में नहाई हुई उसकी कच्ची चूत अलग ही लिश्कारे मार रही थी..



विक्की को उसे एकटक निहारते देखकर मंजू ने खुद ही पहल करते हुए उसके सिर को पकड़ा और उसे नीचे करते हुए अपनी कमर उठा कर अपनी चूत उसके मुँह से लगा दी....

''आआआआआआआआआआआआआहह.................. सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स...... विक्ककीईईईईईईईईईईईईईईई........ प्लीईईईईईईईस....... ख़ाआ जाओ मुझे...................... सक्ककककक मिईईईई हाआररर्र्र्र्र्द्द्द्द्दद्ड''

वो विक्की को ये बाते ना भी बोलती तब भी शायद वो यही करता.....

अपनी नुकीली जीभ से वो उसकी चूत के होंठों को कुरेदता हुआ उसे एक अलग ही दुनिया में ले गया...
और अंदर से निकल रही चाशनी को जीभ से इकट्ठा करते हुए निगलने लगा...

सच में दोस्तो, कच्ची चूत की चाशनी का स्वाद अलग ही होता है....
जिसने ये मज़ा ले लिया उसे दुनिया का हर दूसरा स्वाद फीका लगेगा इसके सामने..



मंजू उसके सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर उपर से नीचे तक रगड़ रही थी....
ऐसा करते हुए वो बुरी तरह से बड़बड़ा भी रही थी...

''आआआअहह विक्की......चूस इसे.......आआआआहह......खा जा मेरी चूत को.....पी ले इसका रस.....आआआअहह......जीभ घुसेड नाआआआअ...अंदर तक...........आआआहह.......और अंदर नही जाएगी ये.......लंड निकाल लंड ......वो डाल इसके अंदर विक्की.....लॅंड डाआआआाालल्ल्ल इसके अंदर....''

उसकी अधीरता देखते ही बनती थी.....
एक लड़की इतने साल तक जिस चूत का कुँवारापन संभाल कर रखती है, उसके चुदने का समय जब आता है तो वो समय से आगे निकल कर , सारे बंधन तोड़ कर उस पल को जी लेना चाहती है जो उसे इस दुनिया का सर्वश्रेष्ठ आनंद दे सके...
और वही इस वक़्त मंजू महसूस कर रही थी.....

विक्की जल्दी से खड़ा हुआ और आनन फानन में उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके...
और जल्द ही वो उसके सामने उसी की तरह पूरा नंगा खड़ा था....

उसके लंड को देखते ही वो भूखी बिल्ली की तरह उसके उपर झपट पड़ी और अपना मुँह खोलकर उसके लंड को पूरा मुँह में लेकर चूसने लगी..



विक्की बेड के किनारे खड़ा हुआ उसके सिर को पकडे हुए अपना लंड उसके मुँह में अंदर बाहर करने लगा....
और जब वो पूरी तरह से गीला हो गया तो उसने मंजू को धक्का देकर बेड पर फिर से लिटा दिया....
 
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