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Incest सपना-या-हकीकत

सोनल का फोन का रख कर मैं निकल गया दुकान की तरफ और वहा का काम खतम कर वापस पढाई मे लग गया ।

4 दिन बीते और मै अपनी रूटीन के हिसाब से निकल गया चंदू के साथ एग्ज़ाम के लिए आज सरला रास्ते मे नही दिखी बल्कि कमरे मे मेरे से पहले ही बैठी थी और मेरे आने से काफी खुश थी

आज उसने वाइट कुर्ती और क्रीम कलर की लेगी पहना हुआ था और साइड से दुपट्टा की थी ।

मै भी उसको देख कर उस दिन उसके घर हुई घटना को याद कर उत्तेजित हो गया और एक गहरी आह भर कर उसके पास बैठ गया ।

सरला जो कि आज काफी खुश थी बोली - आज तो तुम लेट हो गये

मै ह्स कर उसे छेड़ने के अंदाज मे - मुझे नही पता था कि कोई मेरा इन्तजार कर रहा था नही तो जल्दी आ जाता हिहिही

सरला मेरी बात से शर्मा गयी

मै एक और एक्का फेकते हुए - बहुत अच्छी लग रही हो क्या बात ह

सरला शर्माते हूए अपने बालो के लट को कान मे खोस्ते हुए मुस्कुराकर नीचे देखने लगी तो मै उसके थोडा और करीब हुआ

सरला थोडा हिचक मह्सुस कर अपनी कमर को सिधा कर इधर उधर देख कर फुसफुसा कर

सरला तिरछी नज़र से मुझे देख कर एक मुस्कुराहट के साथ - ये तुम क्या कर रहे हो राज कोई देख लेगा

मै ह्स कर - तो परिक्षा के बाद ऐसी जगह चले जहा हमे कोई देखे ना

सरला मेरी बातो से अपने होठो को आपस मे दबाते हुए मुह फेर के हसने लगी और फिर जब हसी ना रोकी गयी तो मुह पर हाथ रख लिया

और उसका एक हाथ अभी भी बैठने वाली सीट पर मेरी तरफ था तो मैने हिम्मत कर उसकी ऊँगली को छुआ तो वो झट से अपना हाथ खिच ली

फिर मै भी सीधा होकर इधर उधर देखने लगा

और मैने अपना पेन खोला और वही सामने ब्रेन्च पर लिखा दिया " बाग मे "

और फिर पेन को सीट पर ठक-ठक कर सरला को इशारा किया तो सरला बडे ध्यान से गरदन आगे कर पढने के बाद मुस्कुरा कर ना मे सर हिला कर मुह फेर कर हसने लगती है

फिर परीक्षा का समय होता है और हम दोनो ने मिल कर परीक्षा देने के बाद वाप्स सीट पर लिखे शब्द पर इशारा करता हू और वो इतरा कर मुस्कराने लगती है ।

आखिरी घंटी बाजी और हमारे पेपर जमा हुए और मै जल्दी से चंदू को लिवा कर घर की ओर गया और उसे उसके घर भेज कर वापस से नारायणपुर की ओर

और जैसे ही पुलिया पर आया तो मुझे सरला बाग की ओर जाती दिखी जो घूम घूम कर पुलिया की ओर देखते हुए मेरे आने का इंतजार कर रही थी

मै वही दौड़ कर उसके पास गया और वो मुझे देख कर हसने लगी

मै झट से उसका हाथ पकड कर सड़क से दुर बाग मे ले गया

सरला चौक कर अपनी कलाई छुड़ाने की हल्की सी कोसिस करते हुए - अरे राज ये तुम क्या कर रहे हो कोई देख लेगा हमें छोड़ो मुझे घर जाना है

मै भी तुनक के - क्या करोगी घर जाकर , मुझसे बात नही कर सकती थोडा

सरला इतरा कर मुस्कुराते हुए - मै जानती हू तूम क्या बात करना चाहते हो राज

मै उसके करीब जाकर उसकी कमर मे हाथ डाल कर खिचते हुए - तो बताओ ना प्लीज

सरला शर्मा के नजरे नीची कर ली उसकी तेज सांसे उसकी चुचियो को और फुला रहे थे जिसका आभास मुझे मेरे सीने के निचले हिस्सो पर हो रहा था ।

सरला का कद मेरे कन्धे तक ही था और उसे चूमने के लिए मुझे झुकना पड़ा लेकिन वो भी मानो इसके लिए तैयार थी और उसने बिना किसी रोक के मुझे आगे बढ़ने दिया और मैने उसका चेहरा थाम कर उसके होठो को चूसने लगा

सरला भी मेरा साथ देते हुए मेरे होठो को चुसने लगी

धीरे धीरे मेरे हाथ उसके कूल्हो की ओर जाने लगे और मैने उसकी कुर्ती उठा कर लेगी के उपर से उसके कूल्हे की उभरी चर्बी को दबोचने लगा

जिसका आभास होते ही सरला ने मुझसे अलग हो गयी और अपने सासे बराबर कर - नही राज , मुझे घर जाना है

और वो अपना मुह पोछ कर अपना दुपट्टा सही करते हुए सड़क की ओर जाने को हुई

मै लपक कर एक कदम आगे बढ़ कर वापस से पीछे से सरला को पेट से पकड कर थोडा झुक उसके कन्धे पर सर रख कर - क्या हुआ बाबू हम्म्म

और उसके गाल और कान के सम्वेदनशील हिस्से पर किस्स किया

सरला मेरे दुलार से पिघलने लगी और बोली -

तूम जो चाह रहे हो वो मै नही अह्ह्ह उम्म्ं नही राआआअज अह्ह्ज इस्स्स उम्म्ंम्ं उफ्फ्फ आराम से अह्ह्ह मा

सरला तो पहले से ही तैयार थी बस वो इतना जल्दी खुलना नही चाहती थी इसलिए मैने उसकी बात खतम होने से पहले ही उसकी चुचियो को कुर्ती के उपर से मिज्ने लगा और उसकी नारियल जितनी मोटी चुचिया का वजन बहुत था और काफी मुलायम भी थी

मै सरला की चुचियो को मिज्ते हुए उसके कान काटने लगा और धीरे से कहा - तुम बहुत सेक्सी हो सरला और तुम्हारे नारियल बहुत मोटे है अह्ह्ह

सरला कसमसा के - ओह्ह राज मत करो ऐसा आह्ह और प्लीज ऐसी बाते आह्हा अह्ह्ह मा प्लीज ऐसी बात ना करो मुझसे

धीरे धीरे मैने सरला की चुचिया मिज कर उसे एक मोटे महुए के पेड़ के पास लाकर घुमा कर खड़ा कर दिया और पीछे उक्डु बैठ कर उसकी कुर्ती उठा कर झट से उसकी लेगी नीचे खिच दी और लॉन्ग सलेटी पैंटी मे कैद उसकी मोटी गाड़ देख कर मै उन्हे दबोचने लगा जिस्से सरला और भी सिस्कने लगी ।

मै झट से उसकी कच्छी को खिच कर उसके गाड के पाट फैलाते हुए उसके गाड के सुराख को चाटने लगा और सरला पेड़ पकड़े खडे खडे कसमसा कर एठने लगी ।

थोडी देर बाद मैने उसको घुमाया और सामने कर उसकी झाटो से भरी चुत मे मुह पेल दिया जिस्से सरला सिस्क गयी और मेरे सर को दबाने लगी । उसकी चुत तो पहले से ही पनियाई थी जिसका चटक नमकीन स्वाद पाकर मेरा जीभ और जोर से उसकी गुलाबी गली मे घुसने लगा

सरला - ओह्ह मा राज आराम से मै गिर जाऊंगी आह्ह अहआह्ह उम्म्ंम

मै यहा बाग मे ज्यादा समय नही बिता सकता था क्योकि आये दिन यहा प्रेमी युगल जो कि ज्यादतर स्कूली बच्चे होते थे यहा रंगरेलिया मनाते देखे जाते थे ।

फिर मैने देर ना करते हुए उसे वापस घुमा कर पेड़ पकड़ा कर झुका दिया और अपना पैंट खोल कर लण्ड बाहर निकाला और मुह से थूक लेके सुपाड़े पर लगा कर गिला किया ।

फिर सरला के गाड़ को खिच कर थोड़ा और झुका दिया और खुद भी झुक कर एक बार हाथ से उसकी चुत को टटोला और अपना लण्ड उसके चुत के मुहाने पर लगा कर ग्च्च से आधा लण्ड पेल दिया

वही सरला मेरे धक्के से अपना मुह दबा के अपनी चीख को दबाते हुए सिस्कने लगी

मैने धक्के तेज कर जल्द ही पूरा लण्ड उसके खुले चुत मे अंदर बाहर करने लगा

मेरे मोटे लण्ड से लगातार चुद्ने से सरला जल्द ही झड़ने लगी और उसकी पानी से मेरा लण्ड और भी लय बना कर अंदर बाहर होने लगा तो मैने सरला के कुल्हो को थाम कर उसकी चुतड मे जांघ लड़ाते हुए तेजी से पेलने लगा । मै जल्दी से जल्दी झड़ना चाहता था इसिलिए उसकी चुत मे तेजी से घपाघप पेले जा रहा था और मेरी गति इतनी तेज थी की उसके बदन का पुर्जा पुर्जा हिल रहा था और उसकी सिसकियो मे भी झंझनाहट आ गयी थी । जल्द ही मेरे लण्ड मे खुन गरम होने लगा और उसका आकार चुत के बढने लगा

जिससे सरला की आवाज सिसकी तेज हो गई और वो मुह पर हाथ कर दर्द सह्ती रही और मै जल्द ही झड़ने के कारिब आया और मैने उसे खिच कर नीचे कर उस्के मुह पर लण्ड हिलाने लगा और उसके मुह पर झड़ने लगा और उसके मुह मे जबरजस्ती लण्ड को पेल दिया और उसने बडे चाव से मेरे लण्ड को चुस कर साफ किया

फिर हमने अपने कपड़े पहने और मैने जेब से अपना रुमाल दिया तो उसने गरदन और चेहरा पर लगा मेरा पानी साफ कर मुझे रुमाल देने लगी

मै ह्स कर - कोई बात नही रख लो उधर कही फेक देना

फिर मैने उसको पकड कर उसके होठो को चूसा और उसकी मोटी गाड दबाई

फिर वो बिना कुछ बोले निकल गयी और मै उसकी मतकती गाड देख के फिर उत्तेजित मह्सुस करने लगा ।

लेकिन यहा रुकना ज्यादा देर तक मेरे लिये सही नही था तो मै वहा से निकल के वाप्स घर की ओर आ गया

घर आके मैने खाना खाया और सो गया ।

फिर मैने आगे के परीक्षा की तैयारी मे लग गया ।

और अगले बाकी 2 परीक्षाओ के दिन मैने सरला को उसी बाग मे ऐसे ही शार्ट टाईम चोदा और इधर कोमल ने अलग विषय लिये थे तो जिस दिन उसका एग्ज़ाम रहता उस दिन दोपहर को विमला मेरे पास फोन करती और फिर मै विमला के साथ अनिता की भी जम कर चुदाई करता ।

खैर समय बीता और 2 मई को मेरी आखिरी परीक्षा समाप्त हुई । अब अगले दो तीन महिने मै पूरी तरह फ्री था ना कोई पढाई ना कोई कोचिंग बस मस्ती मजा और सेक्स का धमाल होना ।

आखिरी एग्ज़ाम के बाद मुझे सरला से मिलने जाने का मौका नही मिल पाया

क्योकि मै और चंदू स्कूल से निकल कर सबसे पहले उसके चौराहे वाले घर गये और रास्ते मे हमने कोक की दो बॉटल ली और सबसे उपर की छ्त के जीने के दरवाजे के पास बैठ कर हम दोनो ने अपनी कोक की कैन को खोला और एक एक सिप लेने के बाद

चंदू - भई भाई अब कोई टेन्सन नही है अब बस घर जाकर सबसे पहले मा को चोदूंगा

और अगले हफते दीदी भी आ रही है एग्ज़ाम खतम कर ,,फिर उसकी भी मोटी गाड़ मे अपना लौडा डालूंगा

मै भडकते हुए शब्दो मे - तो जा ना साले मुझे क्या सुना रहा है , भाग यहा से

चंदू थोड़ा सहम कर - सॉरी भाई ,,यार भडक मत

मै चिल्ला कर - तो क्या करु भाई ,,तू साले रोज अपनी मा बहन को चोद लेता है और मुझे हिलाकर काम चलाना पड़ता है ।

चंदू अपनी सफाई मे कुछ बोलता उससे पहले ही मै वाप्स भड़के स्वर मे - भाई प्लीज कुछ बोल मत मै सफाई नही सुनना चाहता कुछ जब तेरे बस का है ही नही तू मेरे लिए कुछ कर सके तो बेकार है तेरी दोस्ती

चंदू अकड के - भाई अब तू दोस्ती को बिच मे मत ला ,,, मै तेरे लिए कुछ भी कर सकता हू

मै चिल्ला के - तो कर ना भाई ,,,मै परेशान हो गया हू हिला हिला कर

चंदू कोक की बोतल को खाली करते हुए - ठीक है अगले हफते दीदी आ रही है और मुझसे पहले तू उसकी चुत मारेगा ये मेरा वादा है भाई

मै खुशी से चंदू को देख्ते हुए - सच कह रहा है भाई

चंदू - हा रे , वैसे भी सालि हमेशा रट लगाती है की काश मेरे जैसा दो लण्ड होता तो उसको एक साथ लेती ,,,अब तेरे मोटे खूटे से उसकी गाड़ फड़वाउंगा। आने दे

फिर मै खुश होकर उसको शाबसी दी और वो अपने घर चला गया और मै बगल मे अपने घर

चंदू के साथ काफी समय बिच चुका था तो मुझे सरला से ना मिलने का अफसोस था

फिर घर आकर देखा कि दीदी आ चुकी है फिर भी मैने खाना खाया उसको लेके घुस गया एक बेडरूम मे

सोनल ह्स्ते हुए - ओह्ह भाई अरे इतना उतावला मत हो भाई

मै सोनल को पीछे से कस कर उसकी चुचियो को सूट के उपर से मसलते हुए - आह्ह दिदी आज मत रोको उम्म्ं बहुत दिन से रोका हुआ है खुद को

सोनल कसकसा कर - उह्ह्ह भाई रुक जा मै नही कर सकती ना आज ना ही अगले 3 4 दिन

मै चौक कर - क्यू आपका मन नही है क्या

सोनल घूम कर मेरे गाल सहलाते हुए - भाई मेरा भी बहुत मन है लेकिन अभी मेरा महीना आया हुआ है

मै उदास मन से - अब फिर क्या करु तब

सोनल हस कर - निशा को बुला ले हिहिहिही

मै एक कातिल हसी से सोनल को अपनी तरफ खिच कर - वाहह जान क्या आइडिया है , मै अभी फोन लगाता हू उसे

फिर मैने झट से जेब से फोन निकाला और लगाया 3 रिंग के बाद फोन उठा

मै कुछ बोलता कि उस्से पहले ही चाची की आवाज आई - हा हैलो राज बेटा बोलो

मै चौक कर अपनी भावनाओ को दबाते हुए - अरे चाची आप ,, निशा दिदी कहा है

चाची - बेटा अभी तो वो परिक्षा देने गयी है ,, उसकी दुसरी शिफ्ट मे 2 से 5 परिक्षा है ना

चाची की बात सुन कर मेरा मूड फिर से बिगड़ गया मै गिरे मन से - ओह्ह ठीक है चाची

चाची - और बता बेटा तेरा और सोनल का परीक्षा कैसा गया

मै मुह बना कर - लो दिदी है उसी से बात कर लो

फिर मै फोन दीदी को दे कर वही बिस्तर पर मुह गिराये बैठ गया ।

थोडी देर बाद सोनल चाची से बात कर फोन रख दी और मेरे पास आई - क्या हुआ भाई ऐसे उदास ना हो मेरे पास एक और आइडिया है मेरे जानू

मै उखड़े मुह से - अब क्या है बोलो

लेकिन सोनल बिना मेरे सवालो का जवाब दिये मेरे पैरो के पास नीचे घुटनो के बल खड़ी हो के मेरे पैंट खोलने लगी और फिर मेरे सोये लण्ड को अंडरवियर के उपर से छुआ

जिससे मेरे तन मे एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गई

जल्द ही सोनल ने मेरा लण्ड को बाहर आधे खडे लण्ड को हाथ मे पकड कर मुह मे भर लिया और उसके होठो के मुलायम घिसायि से मेरे लण्ड की नसो मे जान आने लगी और उनमे खुन की गति तेज होने लगी । धिरे धीरे दीदी ने मेरे पुरे लण्ड को गिला कर अच्छे से सहलाते हुए खड़ा के दिया और सुपाडे पर अपने जीभ की कला दिखाने लगी ।

मेरे चेहरे के भाव बदल गये और मन मे एक गजब की शान्ति छाने लगी और एक सिसकी से मेरे गले से बाहर आने लगी ।

कुछ ही पलो मे दिदी ने लण्ड को पूरा मुह मे लेना सुरु कर दिया और गूऊऊऊऊ गुउउउऊ कर खास्ते हुए लण्ड गले मे उतार कर सारा लण्ड लार से गिला कर दिया

सोनल के गले मे की घुंडी मे सुपाडे को छूने लगी और धीरे धीरे मेरे आड़ो की थैली कसने लगी और उनमे एक्थ्था वीर्य अपनो जगह बदलने लगा और लण्ड के नसो मे प्रेशर बढाने लगा और मै अपने गाड़ को सख्त कर सुपाडे की नश पर जोर देके अन्त तक वीर्य को बाहर निकलने से रोके रहा । नतिजन उस दबाव से मेरे चेहरे के हाव भाव बदल गये और तपन बढ़ गयी । वही सोनल लगातार गले मे लण्ड गुउऊ गुउऊ गुऊ कर उतारे जा रही थी ,,,, और मेरे सांसे फूलने लगी वही लण्ड की नशो मे वीर्य भरने से वो और भी मोटा हो गया और सुपाड़े मे जलन होने लगी ,,,जिससे मेरे नशो की पकड ढीली पड़ने लगी और एक तेज अह्ह्ह के साथा मैंने लण्ड की नश से अपना दबाव छोड दिया और एक भलभ्ला कर लण्ड ने पिचकारी सोनल के गले की दिवारों पर जाने लगी और बाकी मुह भरने से वीर्य उसके मुह से निकल कर मेरे लण्ड और आड़ो पर रिसने लगा ।

जल्द ही सोनल ने वापस से मेरे लण्ड को चुसना शुरु कर दिया और अच्छे से जीभ फिरा कर लण्ड को साफ कर छोड दिया और बेड से टेक लगा कर हाफने लगी । वही मै चित होकर बिस्तर पर गिर गया ।

परीक्षा की थकान और दीदी से अपना लण्ड निचोडवाने के बाद मैने अपने कपड़े ठीक है वही बेडरूम मे ही सो गया ।

शाम 4 बजे तक मेरी निद मा के जगाने से खुली

मै उठती आँखो से - उह्ह्ह हा मा बोलो क्या हुआ

मा हस कर - अरे उठ जा बेटा , चल कुछ खा पी ले

मै एक जोर की अंगड़ाई लेके उठा और जाकर फ्रेश हुआ और फिर मा ने चाय नासट दिया

फिर मै निकल गया दुकान के लिए

मै दुकान पर गया

और आज दुकान पर ऐसी हस्ती आई थी जिनको देख कर दिल बागबाग हो गया ।

अंगुरी रंग के बेस पकड़े लाल हरा और गहरे नीले की चौकोर चित्तीयो वाली सिफान की साडी जिसमे उनका पारदर्शि यौवन दिख रहा था । सीने पर मैचींग ब्लाउज मे कसा उनका 34DD का गोल कड़ा जोबन , हल्की चर्बीदार पेट से 4 इन्च उभरा हुआ था ।

डार्क मैट मे मरून लिपस्टिक उनके होठो की मुस्कुराहट को और भी कामुक बना रहे थे । ब्ड़ी ब्ड़ी गोल मटोल नेचुरल सुरमई आंखे के बीच एक छोटी सी बिंदीया ।

कमर के नीचे के क्या कहने अन्दाजन 36 का उभार लिये सिफान की साडी मे चिपके दो अर्ध गोले

अह्ह्ह ये हुस्न

इसको देख कर मह्सूस होने लगा मानो दिल ने अपना काम मेरे लण्ड को सौप दिया हो और पुरे शरीर का खुन वही से फिल्टर होने के लिए एकठ्ठा हो रहा हो

मैने एक गहरी सास लेके पैंट मे आये उभार को दबा कर ह्स्ते हुए दुकान मे चढा और मुझे देख कर वो रसिली छैलछ्बिली हस कर बोली - आओ देवर जी आओ

उसके मुह मे सफेद मोतियो जैसे दाँत के बीच सुर्ख गुलाबी जीभ मेरे सांसो को भारी करने लगी और मै एक नयी कलपना मे खो गया । उसके बदन से आती एक परफ्युम की महक मुझे अध्यात्मिक शान्ति के साथ उसकी ओर मुझे एकाग्र करने मे मानो मेरी मदद करने लगी

वो कल्पना मुझे एक बंद कमरे के सोफे मे ले गयी जहा हर तरफ ब्लैक डीप अंधेरा था और कोई फोक्स लाईट हमारे कृत्य को उजागिर कर रही थी मै खुद को हवा मे उडते हुए मह्सूस कर एक परम आनन्द के मजे ले रहा था मेरे पैरो मे बैठी वो हसिना मेरे लण्ड के सुपाड़े पर अपनी गीली गुलाबी जीभ नचा रही थी

तभी मुझे वापस उसकी आवाज आई - मै कबसे तुम्हारी ही राह देख रही थी ।

और मानो मै किसी गहरे दिवास्वप्न से जगा हू और वापस उसी मे डूब जाना चाहता हू

एक गहरी सास के साथ मुस्कुरा कर उखड़ी हुई आंखो से - अरे पंखुड़ि भाभी आप

वो अपने प्यारी सी मुस्कान देने के बाद इतरा कर - शुक्र है हमरे किसी देवर ने हमको पहचाना तो

फिर अनुज की ओर इशारा कर - और ये है इनकी बहिनीया को घोड़ा चोदे , हमसे शरमा ऐसे रहे है जैसे इनके भसुर आ गये हो सामने

मै उनकी बातो से ह्स के - अरे अनुज पहचाना नही ,,,ये हमारे गाव वाले जमुना ताऊ की पतोह है पंखुडी भौजी हिहिहिही

अनुज शर्मा कर ह्स्ते हुए - हा जानता हू भैया ,,लेकिन ये हमको परेशान कर रही थी

पंखुडी भौजी - अरे अब अपने छोटकन भतार से मजाक ना करे तो का ससुर से करे , हा बोलो

मै उनकी बाते सुन के हस कर - हा हा काहे नही भौजी ,,

मै अनुज से - अरे तुम ये सब छोडो और जाकर कल्लु काका के यहा से कुछ खाने के लाओ , ये ग्राहक बाद मे है अपनी मेहमान पहले है

पंखुडी अनुज को छेड़ते हुए - अरे हम तो कबसे राह देखत रही कि कब हमार छोटका भतार हमको आपन गुलाबजामुन खिलैहिन

पंखुडी भौजी की डबल मिनिग बात मै और अनुज बखूबी समझ रहे थे ।

अनुज जल्दी से पैसा लेके निकल गया कल्लु की दुकान की ओर

मै हस कर - आओ भौजी बैठो , और बताओ कैसी हो और घर मे सब कैसे है

पंखुडी खुशि भाव से - घर मे तो सब ठीक है बाबू लेकिन तुम कभी नही आते अपना भौजी के हालचाल लेने

मै - बस थोडा बिजी हू भौजी ,, और बताओ अकेले आई हो का

पंखुडी भौजी - अरे नही वो तो हम अम्मा के साथ आई थी तो वो गयी है तोहार बाऊजी के दुकान पर कुछ सामान के लिये और हमको यहा से काम था ,,

मै हस कर- अरे कोई शादी वादी है क्या भौजी

पंखुडी भौजी - हा वो हमारे बनारस वाली बुआ के लडकी की शादी है वही जाना है , ले मै तो भूल ही गयी । मुझे तो बहुत समान लेना है जल्दी जल्दी तू निकाल दे लल्ला

मै खड़ा होकर - जी भौजी बोलो

फिर पंखुडी भाभी ने समान की लिस्ट मुझे दी

मैने एक नजर समान के पर्ची पर डाली और उसमे ब्रा पैंटी भी था लेकिन साइज़ नही था

मै हस कर भौजी को पर्ची मे ब्रा पैंटी वाली लाईन दिखा कर - अरे भौजी ये कौन सी साइज़ मे रहेगी

पंखुडी भौजी हस कर मुझे छेड़ते हुए - इतनी ब्ड़ी पर्ची मे सिर्फ़ उहे नाही समझ आया तुमको हा , मेरे नाप का निकाल दियो दो सेट

मै थोडा मुस्कुरा कर - जी भौजी साइज़

पंखुडी हस के - धत्त मतलब कौनौ काम के भतार ना हो तुम सब

मै ह्स कर - मतलब

पंखुडी- अरे साइज़ पुछा जात है कि मापा जात है

मै उन्के छेड़ने की अदा से शर्मा गया

पंखुडी - दो 34DD की ब्रा और दो 36 की पैंटी निकाल देना ,,,

मै कुछ बोलने को हुआ की वो वापस मुझे छेड़ी जिससे मै झेप गया - अब ई ना पुछना कि इतना बड़ा साइज कैसे है हमार हिहिही

मै उनकी बातो से शर्मा गया और काम लग गया ।

नया परिचय

जमुना ताऊ - मेरे पिता के चचेरे भाई

पत्नी - रंजू ताई , सावला रन्ग भरा जोबन और फैले हुए कुल्हे । शुध्द फुहर पूर्वांचली बोली ,,, मजाक के मामले इनसे सब 19 ही है

बेटा - कमलेश 28 साल , बडे शहर मे प्राइवेट जॉब करता है

पतोह - पंखुडी, कमलेश की पत्नी 25 साल , कायाकल्प का विस्तार तो ही गया है और अपनी सास की संगत मे ये भी मजाकिया पदो के बिच खुल कर मजाक करती है । जैसा सुन्दर सुरत वैसी ही अच्छी सीरत । बड़ो के साथ अदब , छोटो के साथ प्यार और हसी मजाक

पोती - सलोनी , कमलेश और पंखुडी की बेटी काफी छोटी है । ( कोई रोल नही )

ये सारे लोग चमनपूरा से लगे हमारे पुस्तैनी गाव फुलपुर मे रहते है जहा मेरे स्व बाबा के समय मे पापा का बचपन गुजरा था ।

खैर मैने जल्दी से सारा समान निकाला थोडी देर मे अनुज भी समोसा लेके आया और फिर पंखुडी भौजी और हम सबने मिल कर खाया ।

फिर पंखुडी भौजी को रंजू ताई फोन आया की उनको समय लगेगा बाजार मे वो घर चली जाय भैस दुहने का समय हो गया है ।

पंखुडी - ला लल्ला सामान दे मुझे जाना है

मै - क्या हुआ भौजी अकेले काहे जा रही हो

पंखुडी - अरे लल्ला वो शाम होने को है और भैसिया के दूहने का समय हो गया ना

मै हस कर - अरे वाह आपको दूध दुहने आता है क्या

पंखुडी भौजी हस कर - कभी आना तुमको भी सिखा दूँगी दूध दुहना , आखिर कुछ साल बाद काम आयेगा ही हिहिहिही

मै उनकी बाते सुन कर अनुज के सामने झेप सा गया क्योकि मै और अनुज दोनो उनकी डबल मिनिग बाते समझ रहे थे ।

ऐसी ही तो थी मेरी पंखुडी भौजी , सेक्सी चंचल और रन्गीली। किसी का भी मन मोह ले ऐसी

थोडी देर मे हम खाली हुए और यहा अनुज थोडे देर पहली हुई पंखुडी भाभी की छेड़छाड़ से शर्मिंदा मह्सुस कर रहा था

मै मन मे - यार ऐसे नही चलेगा इसकी शर्म कम करनी ही पड़ेगी , जल्द ही कूछ ना कुछ करना ही पडेगा इसके लिए ।

मै अनुज से - और बता भाई कैसी चल रही है लाइफ

अनुज ह्स कर - ठीक है भैया

मै - और कोई दिक्कत तो नही

अनुज - नही भैया कोई दिक्कत नही

मै - फिर कोई प्लान बनाया कि नही छुट्टीयो मे घूमने का

अनुज मायुश होकर - कहा भैया दुकान से फुरसत ही नही है तो क्या करु

मै ह्स कर - अरे अब मै आ गया हू ना , जा कही घूम टहल आ

अनुज - हा लेकिन किसके साथ जाऊ और कहा

मै - अरे कही क्या ,,मामा या बुआ के यहा चला जा या फिर मौसी के यहा घूम आ कुछ दिन

अनुज मेरे बातो से इंकार करने के भाव मे - भक्क भैया पिछ्ले साल भी तो गया था बुआ के यहा ,,, मामा के यहा गाव मे जाने का मन नही करता और मौसी के यहा कोई होता ही नही जिसके साथ घुमू बात करु

मै हस कर - तब कहा जायेगा

अनुज - भैया वो राहुल अपनी मौसी के यहा जा रहा है बडे शहर मे और मुझे भी बोल रहा था ,, लेकिन मा जाने नही देगी मुझे पता है

मै हस कर - तू बता तेरा मन है जाने का

अनुज हा मे सर हिलाया

मै खुशी से - ठीक है फिर फिर तू जाने की तैयारी कर मै मा को मना लूंगा

अनुज खुसी से - थैंक यू भैया

मै - अरे कोई नही रे तू भाई है अपना

फिर थोडी देर ऐसे ही बाते चली और अनुज को बिठा कर चल दिया पापा के पास

जारी रहेगी

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मै अनुज को दुकान पर बिठा कर निकल गया पापा के पास क्योकि पिछ्ले काफी समय से मै परीक्षा की वजह से पापा से कोई खास बात चित नही कर पाया था और वही मुझे करीब 3 महिने का खाली समय था तो सोच रहा था कि सोनल की शादी को लेके ही कुछ बाते फाइनल हो जाये ।

टहलते हुए पापा की दुकान पर गया तो दुकान पर बबलू काका बैठे ।

मै अचरज से - अरे काका , पापा कहा है दिख नही रहे

काका - छोटे सेठ , वो सेठ जी से मिलने कोई जान पहचान के आये है तो वो अन्दर कमरे मे है ।

मै सोचते हुए - ऐसा कौन ही सकता है अंदर , कही पंखुडी भाभी की सास मेरी रंजू ताई तो नही , हा वही होगी और वैसे भी पापा मेहमानो को अन्दर ही लिवा जाते है ।

मै मुस्कुरा कर - ठीक है काका आप बैठो मै वही मिल लेता हू

काका - जी छोटे सेठ

फिर मै धीरे धीरे पीछे गोदाम की तरफ बने रेस्ट रूम के पास गया और देखा कि रेस्टरूम का तो दरवाजा बाहर से बन्द है फिर पापा कहा गये होगे ।

फिर मैने सोचा एक बार फोन कर लू लेकिन फिर लगा कही उपर के तो नही चले गये बात करने के लिए

तो मै मस्त पीछे आगन मे बने सीढी से उपर छत के गोदाम मे चला गया और आस पास देखा तो सब शांत नजर आया

तभी मुझे साम्ने हाल मे परछाई हिल्ती दिखी और मै बिना किसी आहट के गलियारे से होकर उस तरफ गया और जैसे जैसे मेरे पाव हाल की तरफ बढ़ रहे थे मुझे कुछ सिसकिया और थप थप की अवाजे आने लगी

मै समझ गया कि मेरा बाप किसी को चोद रहा है , लेकिन किसे ??? कही ताई तो नही ,, मेरे दिल की धडकनें तेज हुई

मेरे चेहरे पर मुस्कान और लण्ड मे कसावट आनी शुरु हुई और गलियारे के छोर से पहले मै हाल मे झाका और मेरा अन्दाजा सही निकला

पापा हाल मे एक चौकी पर किसी सावली औरत को झुकाये खडे खडे पेल रहे थे ।

उस औरत की साड़ी और पेटिकोट कमर तक चढ़ी थी उसके सावले रंग के चुचे खुले ब्लाउज से लटक रहे थे और इतने मोटे थे मानो भैस के थन जैसे हो । वही उसकी मोटी काली गाड़ बहुत चर्बीदार थी और काफी फैली हुई थी जिसको थाम कर पापा अपना मुसल उस्के काले भोस्दे मे पेले जा रहे थे और झडने के करीब थे ।

पापा हाफ्ते हुए स्वर मे - आह्ह भौजी अब निकलेगा मेरा ओह्ह्ह

तभी वो औरत की आवाज आई - ओह्ह देवर बाबू रुका तनी अह्ह्ह हा लाओ हमार मुह मे भर दो आपन माल उम्म्ंम्म्ं उम्म्ंम्म्ं उम्म सृउउऊऊऊपपपपप सुउउउर्र्र्रुउऊऊऊप्प

जैसे वो औरत पलती मै उसे पहचान गया क्योकि वो औरत रंजू ताई ही थी

साला मेरा बाप इतनी आसानी से सबको लपेट कैसे लेता है हिहिहिही

यहा ये लोग अपना काम खतम करे उस्से पहले ही मै सरक लिया और दुकान मे आकर बैठ गया ।

थोडी देर बाद पापा और रंजू ताई भी दुकान मे आये ।

फिर मैने रंजू ताई के पाव छू कर आशीर्वाद लिया और वो पापा से कुछ बात कर निकल गये ।

पापा बबलू काका से - काका जरा पानी लाना अन्दर से

फिर काका अन्दर पानी लेने चले गये

पापा - और बेटा तुम कब आये

मै हस कर - मै तो तभी आया जब आप ताई को उपर योगा करवा रहे थे ।

पापा मेरी बात समझ गये कि मै उनको ताई को चोदते हुए देख लिया है और वो थोडा मुझसे हिचक रहे थे ।

मै खुशी भाव मे - कोई बात नही पापा मै जानता हू आपको शुरु से इनसब की आदत हो गई लेकिन

पापा - क्या बेटा बोल ना

मै संकोचवश- लेकिन पापा ताई तो अपने घर की है ना और रिश्ते मे भी तो ये आपको गलत नही लगता

पापा मेरी बातो पर कुछ बोलते उस्से पहले बबलू काका पानी लेके आ गये ।

फिर पापा पानी पी के मुझे लिवा कर रेस्टरूम मे चले गये ।

मै थोडा जिज्ञासू मन से - पापा बताओ ना

पापा मुस्कुराये और बोले - बेटा इस मामले में जाने से पहले मै तुझसे कुछ सवाल करूँगा तू जवाब देना फिर मै इसपे आता हू

मै खुसी भाव से - जी पापा पुछो

पापा - ये बता बेटा क्या तुने अब तक किसी के साथ सेक्स किया है या नहीं

मै शर्म के भाव लाते हुए - जी नही पापा , मै किसके साथ

पापा - अच्छा लेकिन क्या तेरा मन नही होता

मै शर्मा कर हा मे सर हिलाया

पापा - अच्छा तुझे कैसी लडकी के साथ सेक्स करना पसंद है

मै - मतलब , मै तो कभी किया नही तो क्या बताऊ

पापा ह्स कर - अरे मेरे कहने का मतलब ,,किस तरह की औरत से तू पहली बार करना चाहेगा ,, कोई है तेरी नजर मे

मै थोडी देर सोचते हुए जानबुझ कर तीन नाम लिये जो पापा के बहुत करीब थे - जी पापा मुझे रज्जो मौसी और शिला बुआ की तरह और मा के जैसी कोई औरत हो

ये बोलकर मै मुह दबा कर शर्मा कर हसने लगा

पापा मेरे चॉइस की दाज देते हुए थूक गटक कर बोले - हम्म्म अच्छा तो राज ये बताओ जब तुमने सोचा कि तुम अपनी मा , मौसी और बुआ जैसी औरतो के साथ सेक्स करना चाहते हो तो क्या तुम्हारे मन मे एक पल के लिए भी आया कि नही ये मेरी मा , बुआ और मौसी है मै इनके बदन के बारे मे ऐसे कैसे सोच सकता हू

मै पापा के बात घुमाने के अंदाज का फैन हो गया और एक संकोच भरे लहजे मे - हा पापा आपकी बात तो ठीक है मैंने उस समय बस उनके जिस्मो के बारे मे सोचा ना की हमारे रिश्ते के बारे

पापा ह्स के - बस यही मै सोच रहा था जब रंजू भाभी के साथ उपर था ,,मुझे उनका गदराया बदन बहुत पसंद है और उनको मेरा मुसल तो हिह्हिहिही समझ गये ना

मै हस कर शर्म से - जी पापा लेकिन

पापा अचरज से - क्या लेकिन बेटा , क्या सोच रहे हो

मै संकोचवश- तो इस हिसाब से हम अपने घर मे ही सेक्स कर सकते है क्या

पापा मेरे दिल की बात समझ कर मुस्कुराते हुए - हा बेटा कर सकते है लेकिन एक बात हमेशा याद रखना कि सामने वाली रजामंदी के साथ ही कुछ करना चाहिए। वैसे तू किसके साथ करना चाहता है अपनी मा या दीदी के साथ

मै पापा से ऐसे सीधे प्रश्नो की उम्मीद नही थी तो मै सकपका गया - म म मै तो बस पुछ रहा था ,,और वैसे भी दीदी अमन से प्यार करती है

पापा हस कर - और तेरी मा , वो तो तुझे मुझसे भी ज्यादा चाहती थी ।

मै हस कर - मार खिलाओगे क्या पापा आप हिहिहिही , मै बस ऐसे ही पुछ रहा था

पापा - हमम्म कोई नही , तब हो गये तेरे सवाल पुरे

मै थोडा हिचक - नही बस एक और है

पापा हस कर - भाई वो भी पुछ ले अब शर्मा क्या रहा है ।

मै संकोच करते हुए - पापा क्या आप भी अपने घर मे किसी के साथ , मतलब दादी या बुआ के साथ

इतना बोल के मै चुप हो गया

पापा मेरे सवाल से मुस्कुराये - मुझे लगा ही था कि तू ऐसा ही कुछ पूछेगा , मा के साथ कभी ऐसा नही हो पाया क्योकि वो काफी दुबली पतली थी और समय से पहले ही गुजर गयी थी । हा लेकिन अभी जो रंजू भौजी गयी है उनकी सास यानी मेरी चाची के साथ जरुर किया था ।

मै पापा की बाते सुन कर पैंट मे लण्ड अद्जेस्ट कर बोला - और बुआ लोगो मे किसी के साथ

पापा मुझे एक मुस्कान देकर बोले - हा बस शिला दिदी के साथ

मै जानबुझ कर चौकने का भाव लाता हुआ - क्या सच मे पापा ,लेकिन कब कैसे

पापा मुस्कुरा कर - वो लम्बी कहानी है बेटा फिर कभी

मै उदास मन से - हमम ठीक है पापा

पापा - अरे मन छोटा ना कर और ये बता तू खुद कुछ अपने लिये इन्तेजाम करेगा कि मै करु तेरे लिए

मै शर्मा कर - नही उसकी जरुरत नही है समय आयेगा तो मै ही कुछ कर लूंगा

पापा ह्स के - अरे वाह शाबाश बेटा और बता कुछ

मै - लो मेन बात बताना ही भूल गया हिहिही

पापा ह्स के - वो क्या बेटा

मै - अरे वो मेरे एग्ज़ाम खतम हो गये है और अनुज कह रहा था कि वो राहुल के साथ उसके मौसी के यहा बडे शहर जाना चाहता है

पापा खुसी से - अरे तो क्या हुआ कौन सा वो लोग गैर है सब अपने ही तो है ,,जाने दे, बेचारा घूम टहल लेगा

मै खुसी से - ठीक है पापा , तब मै चल्ता हु घर

पापा घड़ी देख के - देख बातो ही बातो मे 6 बज गया ,,चल मै भी चलता हू घर ही आज तेरे साथ

फिर पापा बबलू काका को दुकान बढ़ाने का बोल कर मेरे साथ नये घर के लिए निकल गये ।

रास्ते मे

मै - पापा एक बात पूछू

पापा हस कर - हा बोल ना बेटा

मै - क्या मा आपके इन सब रिश्तो के बारे मे जानती है

पापा ठहरते हुए लफ्ज मे - हा बेटा जान्ती है वो और वो एक बहुत ही अच्छी पत्नी है । उसने हमेशा मेरी कमजोरियो और जरुरतो को समझा है ।इसिलिए मै भी उसके साथ कोई बात नही छिपाता

मै थोडा संकोची भाव मे - तो क्या मा ऐतराज नही करती इनसब के लिये

पापा ह्स कर मेरे करीब आकर - एक मजे की बात बताऊ बेटा

मै हसकर - जी पापा बोलो ना

पापा मेरे कान के पास आकर - वो शिला दीदी को मेरे लिए तेरी मा ने ही पटाया था , नही तो मै पूरी जींदगी कोसिस करता लेकिन सफल नही हो पाता हिहिहिही

मै चौककर पापा को देखता हू - हा सच मे पापा

पापा हस के हा मे गरदन हिलाये

मै थूक गटक कर - तो क्या आप मा और बुआ दोनो को एक साथ किये थे

पापा एक गहरी सास लेके - आह्ह बेटा मत याद दिला वो हसिन पल जब दो गदराई मालो को एक साथ चोदा था मैने अह्ह्ह , उफ्फ्फ क्या मस्त फुली हुई गाड़ है दिदी की उम्म्ंम

मै पापा की इस हरकत से हसने लगा और फिर उनहे भी समझ आया कि हम सड़क पे है ।

फिर हम दोनो ह्स्ते हुए घर आ गये

जहा मा किचन मे खाना बना रही थी और दीदी कही दिख नही रही थी ।

हम दोनो गलियारे से किचन मे देखते है और पापा मुस्कुरा कर मेरे कान मे - देख कैसे मजा लेता हू तेरी मा से

मुझे पापा की बात से हसी और पापा धीरे से मा के पास खडे होकर मैकसी के उपर से उनके गाड़ सह्लाते हुए बोले - आह्ह जान क्या बना रही हो

मा ने कुछ खास रिएक्ट नही किया लेकिन पापा मुझे मा की गाड़ दबाते हुए दिखा रहे थे

मा - ओफो क्या कर रहे है जी बच्चे सब घर मे है

पापा - तो क्या हुआ वो लोग भी जानते है हम मा बाप के अलावा पति पत्नी भी है तो रोमांस होना चाहिए ना

फिर पापा मा को पीछे से उनके गले मे हाथ डाल कर पकड लिये

मा पापा को धकेल के - ओहो हतिये जी कितनी गर्मी है उहू

फिर पापा मा से अलग होकर बैठ गये और मुझे चिपकने का इशारा किया

मै किचन मे मा को आवाज लगाते हुए उनको पीछे से हग कर लिया और बोला - मम्मीईई

मा खुशी भाव से - अरे मेरा बच्चा आ गया तू ,,और बता कुछ खाया पिया की नही

मै पीछे से ही मा के गालो को चूम कर - अब आपसे दुर था तो कौन पुछता मुझे

मा हस कर - अरे मेरा बच्चा बैठ तू मै कुछ देती हू

पापा - ओहो बड़ा प्यार आ रहा है इसपे ,,मै कर रहा था तो ब्ड़ी गर्मी लग रही थी

मा ह्स कर - आपके प्यार और मेरे बेटे के प्यार के फर्क है जी हिहिहिही

पापा ह्स के - किस चिज का भई

मा ह्स कर - नियत का हिहिहिहिही

मै भी वही टेबल पर बैठे हुए हसने लगा फिर मा ने मुझे और पापा को चाय नमकीन दीये ।

फिर पापा अपनी चाय से एक सिप लेने के बाद मा के पास गये और बोले - लो जानू तुम भी पीयो

मा एक नजर मुझे देख के - नही जी आप पीयो गरमी है बहुत

फिर मा मेरे पास आई और बोली - और कुछ दू बेटा

मै ना मे से हिला कर बोला - नही मा ,, आओ बैठो ना चाय पीयो आप भी

फिर अपनी जूठी चाय मा को पिलात हू

पापा - देखा बेटा मै कह रहा था ना कि तेरी मा मुझसे ज्यादा तुझे प्यार करती है ।

मा इतरा के मेरे चेहरे को अपने मुलायम चुचे मे छिपाते हुए - तो फिर मेरा राजा बेटा है

पापा हस के - अरे मेरी रानी वो राजा बेटा भी इस राजा की देन है कुछ प्यार से तो हमे भी नवाजो हीहिहिही

मै ह्स कर - हा मा पापा का भी तो थोडा बहुत हक बनता है आप पर हिहिहिही

फिर मा पापा के पास आई लेकिन पापा उनको गोद मे उठा लिये और बोले - बेटा मै अभी अपने हिस्से का प्यार लेके आता हू ठीक है हिहिहिही

मा पापा की गोद मे छटपटाने लगी लेकिन पापा ने मजबूती से मा को थामा हुआ था और झट से बगल के गेस्टरूम मे चले गये और मै भी अपनी चाय खतम कर हाल मे सोफे पर बैठ कर उन्के बाहर आने का इन्तजार करने लगा

करीब 8 10 मिंट बाद वो दोनो बाहर आये और मा झट से हस्ती हुई किचन मे चली गयी और पापा हाफ्ते हुए मेरे बगल मे बैठ गये

मै हस कर - मिल गया प्यार लग रहा है ,,

पापा हस कर मेरे हाथ पर हाथ रख थपथपाते हुए हस कर तेज सांसे ले रहे थे जिस्का मतलब था कि मैने जो बोला वो सही था

मै पापा के पास जाके - क्या किये इतनी जल्दी आप लोग हिहिही

पापा खुसफुसा कर - तेरी मा लण्ड बहुत ही मस्त चुस्ती है बेटा ब्स निचोड लिया अभी को

मै शर्म से ह्सते हुए - ओह्ह हिहिहिजी

पापा - एक बार चुसवा लेगा ना बेटा जो जन्नत है जन्नत

मै हस के - क्या पापा आप भी जाईये हाथ मुह धुल लिजीये

पापा हाफ्ते हुए - नही बेटा गर्मी बहुत है। बिना नहाए काम नही चलेगा

फिर पापा अपने बेडरूम मे नहाने चले गये और मै झट से लपक कर मा के पास गया

मा मुझे देख के इशारे से की पापा कहा है

मै - वो नहाने गये और दिदी नही दिख रही

मा - वो उस्का महीना आया है तो सोयी है

मै ह्स कर - मम्मी मुझे आपको कुछ बताना है ।

मा खुश होते हुए - हा बोल ना बेटा

फिर मैने गोदाम से लेकर घर आने तक के एक एक वाकये को मा को बताया

मा हस कर - ओहो अब आगे क्या सोचा है

मै खुशी से - बस मा जल्द ही हमारे सपने पुरे होगे ब्स आप पापा को कोई शक ना होने देना और हो सके तो आज रात पापा जरुर इस मुद्दे पे बात करे आपसे किसी तरह घुमा फिरा कर लेकिन आप ध्यान रखना और आदर्श बीवी बने रहना

मा ह्स कर - ठीक है मेरे लाल जैसे तू बोल

तभी हमे मेन गेट के खूलने की आवाज आई और हम सतर्क हो गये

वो अनुज था और फिर वो सीधा नहाने का बोल के छ्त पर चला गया और अनुज के आने से मुझे उसकी बात याद आई

मै - मा मै कह रहा था कि अनुज बेचारा डेढ़ महिने से दुकान सम्भाल रहा है और अब मै खाली हो गया हू और उसकी भी छुट्टिया चल रही है तो उसे कही घूमने जाने दिया जाय

मा खुश होकर - हा बेटा कहा जाने को बोला है इस बार

मै - इस बार वो राहुल के साथ उसकी मौसी के यहा बडे शहर जाना चाहता है घूमने , कह रहा था कि कभी बडे शहर गया नही

मा थोडे सोच के - ठीक है मै शालिनी से बात कर उसे भी भेज दूँगी और कुछ

मै एक कातिल मुस्कान के साथ लण्ड सह्लाते हुए - हा

मा मुसकी मारते हुए सब्जी चलाते हुए इतराने लगी और बोली - धत्त बदमाश जा तू भी नहा ले मेरा भी खाना हो गया है ,,फिर मै भी नहाने जा रही हू

फिर नहाने के लिए अपने बेडरूम मे चला गया

नहाने के बाद मैने एक तिशर्त और हाफ लोवर डाला और बाहर आया , जहा पापा और अनुज नहा कर बैठे थे वो लोग भी बनियान और चढ़ढे मे थे ।

दिदी किचन मे खाना लगा रही थी और अनुज को आवाज दी तो अनुज किचन मे चला गया इतने मे मा अपने कमरे से एक सूती हल्के गुलाबी रंग ब्लाउज मे बिना ब्रा के और उसी रंग का पेटिकोट पहने बाहर आई

ब्लाउज मे कसे चुचे देख कर मेरा लण्ड अपने सर उठाने लगा वही पापा भी बडे ध्यान से मा को निहार रहे थे

फिर मा वही से सीधा किचन ने गयी और पापा मेरे तरफ झुक कर मुस्कुराते हुए - तो बेटा अब क्या ख्याल तेरी मा के बारे मे हम्म्म्म

मै शर्माने लगा

पापा - बेटा तू शर्मा रहा है लेकिन तेरा ये छोटा शेर अपनी गरदन उठा के तेरी मा के भैस जैसे मोटे मोटे दूध देखने के लिए परेशान हो रहा है

पापा मेरे लोवर मे बने टेन्ट की तरफ इशारा कर बोले

मै मुह फेर कर हसने लगा

पापा - मै तो आज रात जम कर चोदने वाला हू तेरी मा को ,,, अगर तुझे देखना हो तो चूपके से आ जाना

मै आवाक होके पापा को देख्ते हुए - लेकिन मै क्या करुगा पापा

पापा ह्स के - अरे बेटा मुझे देख सिख तभी ना आगे काम आयेगा हिहिही

मै पापा की बात पे ह्सने लगा

पापा - तेरी मा आ रही है देख कैसे उसके चुचे मिजता हू

मै मुह पे हाथ रख के हसने लगा इत्ने मे मा आई और पापा के बजाय मेरे बगल मे आकर बैठ गई जिस्से मेरी हसी छूटी

मा - क्या बात है बेटा हस क्यू रहा है

मैने सोचा जब सब कूछ खुला हुआ ही है तो क्यू ना मजा लिया जाय

मै हस के - मम्मी पापा ने आपको अभी भैस बोला हिहिही

मा अचरज से - भैस , वो क्यू

मै हस कर - पता नही

मा हसते हुए - बेटा जरा रूम से मेरा दुपट्टा लेके आना ,,मै समझ रही हू मुझे भैस क्यू बोला गया है

मै - क्यू मा बताओ ना

मा हस कर अपने छाती को दिखाते हुए - ये देख रहा है बेटा क्या है

मै मासूम बच्चों के जैसे - हा मा ये तो दूध है

मा हस के - और ये कैसे है

मै मा को हग कर अपना मुह उसके चुचे पर रख कर - मा ये तो बडे बडे और मुलायम है हिहुही

मा ह्स कर - हम्म्म तो बडे बडे दूध कीस जानवर के होते है बेटा बताओ तो

मै मा के चुचे हल्के हाथो से पकड कर मासुम बच्चो के जैसे - भैस के

फिर चौकने के भाव मे मा से हटते हुर - ओह्ह इस लिए पापा ने आपको भैस बोला

मा ह्स के - हा बेटा ,,अब ये भैस तेरे पापा को लात भी मारेगी सोते समय

मै ह्स्ते हुए - हिहिहिहीही क्या मा आप भी

तब तक किचन से दिदी ने सबको बुलाया और हम सब खाना खाने के लिए चले गये । खाने के दौरान पापा बार बार मुझे इशारे कर मा को दिखाते थे और मै हस्ता था ।

फिर खाना खतम कर सब अपने कमरो मे चले गये

कमरे मे जाने के बाद मैने अपना मोबाईल चेक किया तो देखा सरोजा जी के तीन मिस्काल आये हुए थे और दो काजल के भी

मै झट से पहले काजल को फोन किया

फोन पर

मै - हाय बेबी

काजल - हाय के बच्चे कहा थे कबसे फोन लगा रही थी

मै ह्स कर - अरे मोबाईल चार्ज मे था और मै खाना खा रहा था

कोमल - और बताओ कब आ रहे हो मिलने मुझसे

मै - क्यू फिर खुजली हो रही है क्या हममम

कोमल मायुस हो कर - तब क्या कितने दिन हो गये राज ,,,तुमको नही मन होता क्या कभी

मै कोमल की बातो से उत्तेजित होकर - बहुत मन है दोस्त और जल्द ही आउँगा मिलने ,,,तब तक तू मनोज को भी मौका दे ना

कोमल शर्मा कर - धत्त पागल भाई है वो मेरा

मै ह्स कर - हा लेकिन वो तो तेरे नाम से हिलाता है ना

कोमल ह्स कर - नही अब उसको जरुरत ही नही पड़ती , मा है ना

मै जानबुझ कर - क्या मतलब

कोमल हस कर - राज मुझे तुमको कुछ ब्ताना है हिहिहिही

मै जिज्ञासा दिखाते हुए - हा हा बताओ ना कोमल

कोमल इतरा के - पता है मनोज अब रोज रात मे मा के साथ सोता है हिहिही

मै - तो उसमे क्या है

कोमल - अरे बुधु वो मा के साथ वो सब भी करता है हिहिहिही

मै चौकाने के भाव मे - क्या सच मे कोमल , मनोज , मौसी मतलब अपनी मा को चोदता है

कोमल - हा यार

मै - तुमको कब पता चला

कोमल - जब मै जौनपुर से वापस आई तभी के बाद से देख रही थी कि मा और मनोज के बीच काफी नजदिकिया आ गयी है और फिर एक रात मैने जासूसी की और सब कुछ पता चल गया ।

मै - अरे यार इसके तो मजे है मौसी जैसी गदराई माल को चोद रहा है

कोमल तुनक कर - हुह तुम सब लडके एक जैसे हो ,, हर जगह लार टपकाते फिरते हो

मै हस कर - ओह्हो चलो कोई बात नही जो हुआ अच्छे के लिए हुआ ,, अब इसी बहाने विम्ला मौसी के बाहर जाके मस्ती करने वाले प्रोब्लम से निजात हो गयी है

कोमल - हा सो तो है ,,

मै - फिर तुमने क्या सोचा है , तुम कब शामिल हो रही हो उन्के साथ

कोमल शर्मा के - धत्त मै कैसे पागल कही के

मै - अब तुम देखो कि क्या करना है मै तो रोज नही आ सकता ना तुम्हारे पास लेकिन अगर मनोज से तुम कर ली तो

कोमल ह्स कर - धत्त तुम रहने दो आज तुम्हारा मूड ही अलग लग रहा है ,, मै सोने जा रही हू बाय

मै - ठीक है सो जाओ लेकिन इस बारे मे विचार करना

फिर कोमल ने फोन रख दिया

मै भी ह्स कर बिस्तर पे लेट गया ।

तभी मेरे मोबाइल पे एक मैसेज बिप हुआ जो सरोजा जी ने किया था

मैने भी उनका हाल चाल लिया और फोन साइड रख दिया ।

क्योकि इस वक़्त सरोजा या और किसी से भी ज्यादा मुझे पापा के बाते रोमांचित कर रही थी और आज खाने से पहले वो बोले थे कि आज वो दरवाजा खुला रखने वाले है ।

मै कुछ सोचा और मोबाईल रख कर झट से उठा और बिना किसी आहट के

आराम से दरवाजा खोल के एक नजर हाल मे देखा और फिर दबे पाव सामने पापा के कमरे की तरफ बढ़ा जहा मुझे हल्की फुल्की खुस्फुसाहत सुनाई दे रही थी

जो पापा ने हल्का सा भिड्का रखा था और मैने हल्का सा जोर देखे बीते भर का गैप बना दिया और अन्दर कमरे मे देखा

जहा पापा बेड पर टेक लगाये बैठे थे और मा उनके सामने झुक कर उनका लण्ड चूसे जा रही थी ।

पापा मा से बाते किये जा रहे थे और सिस्क भी रहे थे ।

पापा - रागिनी एक बार सोच के देखो ना उस मजे को

मा लंड को मुह से निकालकर - लेकिन राज के पापा वो मेरा बेटा है मै कैसे उसके सामने ऐसे पेश आ सकती हू , उस रात वो सोया था तो मैने आपकी बात मान ली लेकिन अब ये ना हो पायेगा हमसे

पापा - अरे मेरी जान मैने आज परखा है उसे और वो भी तुम्हारे साथ मजे करना चाहता है ,,,

मा परेशान होने के भाव मे - ओहो लेकिन

पापा मा के गाल को छू के - ओह्ह रागिनी मेरी जान क्या तुम मेरी इस इच्छा को नही पूरी करोगी ,,,,मै तुम्हे अपने सामने किसी से चुदते हुए देखना चाहता हू एक रन्दी के जैसे ,,माना की तुम किसी गैर को ये सब नही करने दोगी तो क्या अपने राज के साथ तो कर सकती हो ना ,,,आखिर वो भी बड़ा हो रहा है और समय के साथ उसे भी सिखना जरुरी है ये सब ,,,कही किसी गलत रास्ते पर ना चला जाये वो इसिलिए मै कह रहा हू

मा एक कातिल मुस्कान के साथ- मै सब समझ रही हू आपकी गोल मतोल बाते ,,, आपको राज की नही अपनी भावनाओं की चिंता है हिहिहिही

पापा ह्स कर - तो कर दो ना मेरे लिये मेरी जान प्लीज

मा पापा की आन्खो मे देखते हुए उन्के सुपाडे को मुह मे भर कर गले तक उतार के निकाल देती है और मुस्कुरा कर लण्ड मुठीयाते हुए - ठीक है मै कोसिस करूंगी एक बार लेकिन अगर मुझे लगा कि वो इनसब नही रुचि ले रहा है तो मै कुछ नही करूंगी ऐसा

मै मा की चालाकी भरी बातो पर हस रहा था और उन्के कामुक अन्दाज पर लण्ड भी सहला रहा था

मुझे खुसी थी एक बार फिर मा और मेरा मिलन होगा लेकिन इस बार जिसका गवाह पापा खुद बनेंगे ।

एक तरफ मुझे पापा को जताना भी था कि मै उनको देख रहा हू वही दुसरी तरफ मा की गाड़ देख के उनको चोदने का भी मन था इसिलिए मैने कूछ सोचा और झट से अपने कमरे मे गया और वापस कर पापा के दरवाजे पर खटखट किया

जारी रहेगी

................................
 
मै एक योजना के तहत अपने कमरे मे गया और फिर वापस आकर पापा का दरवाजा खटखटाया

जिससे कमरे मे खुसफुसाहाट और हड़बड़ी की आवाजे आई और थोडी देर बाद

पापा - कौन है अन्दर आजाओ

मैने बडे आराम से दरवाजा खोला और कमरे मे गया जहा अभी भी ब्लाउज पेटिकोट मे थी और पापा सिर्फ़ अंडरवियर मे थे जिसमे उनका उभरा लण्ड दिख रहा था

पापा - अरे बेटा क्या हुआ तू सोया नही

मा भी चिन्ता के भाव मे - अरे बेटा क्या हुआ सब ठीक है ना

मै थोडा परेशान होने का नाटक करते हुए - मा वो मेरे कमरे का पंखा नही चल रहा है पता नही क्या हो गया है तो सो नही पा रहा हू

पापा बिस्तर से उठते हुए - ओह्हो , ठीक है , रुको मै देखता है बेटा

मा पापा को डांट कर - कहा जा रहे हो जी रात मे परेशान होने , कल सुबह किसी बिजली वाले को बुला कर दिखा देना । राम जाने क्या खराबी हो ,,,

पापा हस के - हिहिही ठीक है मालिकन जैसा आप कहो

मा - बेटा ऐसा कर तू भी हमारे साथ ही सो जा , आ

मै मा के जवाब से बहुत खुश हुआ वही पापा ने भी मुझे एक स्माइल दी

मा - उधर ख्स्को जी ,, आ बेटा इस बगल तू सो जा आ

फिर मैने दरवाजा बंद किया और मा के बाई तरफ जाकर सो गया , जबकि मा के दाई तरफ पापा थे ।

फिर पापा उठे और कमरे की लाईट बुझा कर नाइट बल्ब जला कर वापस बिस्तर पर आकर लेट गये ।

मा - क्या हुआ बेटा अभी शाम को सही था पंखा मैने देखा

मै - हा मै अभी थोडी देर पहले अचानक से बंद हो गया पता नही क्यू

पापा बात को समान्य रखने के भाव मे - अरे रागिनी कोई फ़्यूज़ उड़ा होगा ,,ये गर्मी मे अक्सर बिजली हाफ़ फुल होती है इसिलिए, चिन्ता ना करो सुबह मै देख लूंगा , सो जाओ बेटा तुम आराम से

कमरे का माहौल चुप्प था

इस वक़्त हम तीनो पिठ के बल उपर पंखे की तरफ देखते हुए सोये थे लेकिन नीद किसी को नही थी ।

हम तीनो आपस मे मिल के एक साथ मस्ती करना चाहते थे लेकिन एक अंजान सा छिपे रिश्ते की डोर ने हम सब को रोके हुआ था ।

एक तरफ जहा पापा मम्मी से मेरी बात कर चुके थे लेकिन फिर भी मेरे सामने वो इस बात की पहल करने से घबरा रहे थे कि मै और मा आपस मे क्या रियक्ट करेंगे । उनके मन मे था कि मा मेरे लिए पहल करे

वही मा भी पापा को बोल चुकी थी कि वो मेरे साथ संबंध बनाने को तैयार है लेकिन वो पापा के रहते मेरे साथ अगर कुछ करने मे हिचक मह्सूस हो रही थी और वो हम दोनो के पहले के बने रिश्ते को पापा के सामने जाहिर नही होने देना चाहती थी । इस लिए वो चाहती थी कि शुरुवात मै ही करू पापा के सामने

वही मै पापा के साथ खुला तो था ही लेकिन मै अब भी उन्के सामने खुल के सामने आने मे हिचक रहा था कि वो ये समझे की मुझे मा की प्रतिक्रिया का डर है और वैसे भी मै मा के साथ मेरे रिस्ते के बारे मे कोई भनक नही लगने देना चाहता था , इसलिए मै चाह रहा था कि पहल पापा ही करे ।

गजब की ट्रेजीडी थी हमारे बीच ।

मै इन्ही विचारो मे खोया ही था कि मा के कसमसाने की आहट आई और मैने हल्की आंखे तिरछी कर देखा तो पाया की पापा ने अब मा की तरफ करवट ले ली है और उनके हाथ मा के नंगे पेट पर रेंग रहा था । जिससे मा की सांसे तेज हो गयी थी ।

वही मा ने अपना दाहिना हाथ पापा के लण्ड पर रख कर सहला रही थी जिससे पापा की दबी हुई आहह सुनाई दे रही थी ।

मै तिरछी नज़र से ज्यादा समय तक नही देख सकता था इसिलिए

आंखे बंद कर सीधा लेट कर उनकी मादक सिस्कियो से उनके बिच हो रहे कामुक हरकतो का अंदाजा लगा रहा था ।

तभी मुझे स्मूचिंग होने और होठो के चूसने की मधुर आहट सुनाई दी और मैने एक बार फिर उनकी तरफ नजरे तिरछी कर देखा तो मा गरदन घुमा कर पापा के होठो से होठ जोड़े हुए थी और पापा मा के बाये चुचे को ब्लाउज के उपर से मसल रहे थे ।

मै पापा की मनोभावना को बखूबी समझ रहा था कि वो जान बुझ कर मेरी उपस्थिति मे ही मा के साथ कामलिला कर रहे है ताकी मै इस पर कोई टिप्पणी करू

वही मा पापा का साथ इस लिए दे रही थी क्योकि वो पापा से किये वादे से मजबुर थी और वो भी चाह रही थी कि मै खुद से उनके हरकतो पर पहल करू

मुझे हसी आ रही थी इनसब के ड्रामे को देख कर लेकिन कोई भी कहानी बिना ड्रामा के शुरु हो तो कैसे हो और मुझे ये कहानी लम्बी ले जानी थी ।

इसिलिए मै एक अन्ग्दाई ली जिससे वो दोनो झट से अलग हो गये और मुझे दिखाने लगे कि वो सो रहे है जबकि मै जान रहा था कि वो बस इनलोगो का नाटक है और वो ब्स मेरे बोलने का इन्तजार कर रहे है ।

इस लिए मै भी उन्के ड्रामे मे खुद को शामिल करते हुए बोला - पापा मैने आप लोगो को कही डिस्टर्ब तो नही किया ना ,,कहिये तो मै हाल मे चला जाऊ

बस मेरे सुरुवात की देर थी और पापा ने अपना नाटक शुरु किया

पापा थोडा हसने के भाव मे - अरे रे न न नही बेटा ऐसा कोई बात नही है , वो तो हम लोग बस

मा तुनक कर - मै बोल रही हू कबसे की रहने दिजीये बेटा सोया है यही लेकिन आप ना ,,जग गया ना वो अब हुउउह

मै ह्स कर मा की तरफ करवट लेते हुए - अरे मा आप पापा को क्यू डांट रही हो , आप लोग मेरी मम्मी पापा होने के साथ साथ एक पति पत्नी भी हो और मै आपकी भावनाये समझ सकता हू इसमे कोई बुराई नही है ,, हा मेरी गलती जरुर है मुझे हाल मे ही सो जाना चाहिए था

पापा - देखा रागिनी , कितना समझदार है हमारा बेटा और तुम फाल्तू का परेशान हो रही हो ।

मा हस कर - चुप रहिये आप हा नही तो

फिर हम सब हसने लगते है

पापा - बेटा सॉरी , अगर तुझे कूछ अजीब लगा हो तो

मै हस कर - ओह्हो पापा ऐसा कुछ नही है ,,और आप लोग चाहे तो फिर से कंटिन्यू कर सकते है , मै घूम जा रहा हू । हा लेकिन प्लीज ज्यादा शोर मत करना हिहिहिहिही

पापा मेरी बातो से हसते हुए - हाहहहा सुन रही हो रागिनी ये कह रहा है हम फिर से चालू कर सकते है तो क्या विचार है तुम्हारे

मा शर्म से पापा का हाथ अपने उपर से झटक कर उठी और बोली - आप सठिया गये है मा बाहर जा रही हू सोने हिहिही

फिर मा बाहर भागी और पीछे पीछे पापा उनको पकडने के लिए भागे ।

मै हस कर उठ के बिस्तर पे बैठ गया और थोडी देर तक उन लोगो के आने की राह देखी लेकिन ना उनकी कोई आहट थी ना आवाज

मै भी झट से बिस्तर से उतर कर धीरे धीरे कमरे से बाहर आया और हाल मे देखा तो कोई नही था और गेस्टरूम भी बाहर से ही बंद था । तभी मुझे मेन गैलरी से मा के खिलखिलाने की आवाज आई और मै दबे पास उसी तरफ गया और गलियारे मे झाका तो देखा कि गैलरी के दरवाजे के पास पापा मा को पीछे से दबोचे हुए और कस कस कर चुचिया मसल रहे है

हालाकी गैलरी मे कोई बलब नही जल रहा था लेकिन हाल मे जल रही लाईट की रोशनी की दमक वहा तक जा रही थी जिससे बहुत हल्का हल्का दिख रहा था ।

तभी पापा ने मा को दिवाल से लगा कर उनका ब्लाउज खोल दिया और झुक कर उनकी चुचिया चूसने लगे ।

मैने भी सही मौका देखा और जानबुझ कर नाटक करते हुए गैलरी की दीवाल पकड कर उनकी तरफ जाते हुए आवाज दी - माआआआ पापा कहा गये आप लोग दिख नही रहा है कुछ

इससे पहले वो लोग मेरी बात सुन कर मेरी बातो का जवाब देते या खुद को स्तर्क करते तब तक मै उनके पास पहुच गया और जानबुझ कर ये नाटक किया कि मै फिर से अनजाने मे उन लोगो को डिस्टर्ब कर दिया

मै - स स सॉरी सॉरी पापा

पापा हड़ब्ड़ी दिखते हुए - अरे बेटा तू यहा

मै जुबान को लडखडाकर पापा के सामने मा के खुले चुचे को निहारते हुए - वो वो वो मुझे लगा कि आ आ आप मा को लिवा के आओगे रूम मे ,,नही आये तो मै खोजते हुए आ गया

मा मुझे पापा के सामने अपनी चुचिया घुरता देख झट से ब्लाउज को चढा लेती है

मै उदास हो कर - सॉरी मम्मी पापा मुझे नही पता था कि आप लोग यहा कमरे के बाहर ऐसा कुछ करने जा रहे हो

मा मेरा उदास चेहरा देख के - ओफो बेटा कोई बात नही इसमे तेरी गलती नही है

पापा भी मा की बात मे हा मिला कर - अरे कोई बात नही होता है ऐसा ,,आओ चलो कमरे मे जाते है ।

फिर हम सब कमरे मे वापस आये और अपने अपने जगह पर लेट गये ।

मा ने अभी तक अपना ब्लाउज का दोनो सिरा पकदा हुआ था शायद पापा ने जोर जबरजस्ती मे उन्के ब्लाउज के बटन तोड़ दिये थे ।

मै मा की तरफ़ करवट लेके - सॉरी मा ,,,मुझे सच मे मे बुरा लग रहा है

फिर मा मुझे एक हाथ से दुलारते हुए बोली - कोई बात नही बेटा सो जाओ अब

मै मा के पेट पे हाथ रख उसके बाई तरफ की कन्धे के पास सर रख कर सोने लगा ।

मा हस दाये हाथ से ब्लाउज के सिरे को पकडे बाये हाथ से ही उल्टा कर मेरे गालो को छूने की कोशिश करती है लेकिन नही कर पाती

मै हस कर - क्या हुआ मा आप अपना ब्लाउज पकड़ी क्यू है हिहिही ऐसे ही सोवोगी क्या आप

मा ह्स कर - नही बेटा वो ब्लाउज के बटन टुट गये है तो बंद नही होगा ये

मै चौक के गरदन उठा कर - टूट गये लेकिन कब

मा हस कर एक नजर पापा की ओर देखती है जो मुस्कुरा रहे थे फिर मुझे देखते हुए - वो एक बच्चे ने दूध पिने की जिद मे फाड़ दिया हाहहहा

मै अंदाजा लगाने के भाव मे - मतलब मम्मी

मा हस कर - भक्क , जा अपने बाप से पुछ वही फाडे है हिहिही हा नही तो

मै मा की बात सुन कर हसने लगा और वापस उसी पोजिसन मे लेट गया

पापा सफाई देने के भाव - अब ब ब मैने जान बुझ कर थोडी किया

मा हस कर - हा हा आप जानबुझ कर कभी कुछ करते कहा हो

मै उनकी बाते सुन कर हस रहा था

मा तुनक कर - तू क्यू हस रहा है भाई

मै हस कर - वो मा आपने पापा को दूध पीने वाला बच्चा बोला ना तो हाहाह्हा

मा हस कर - हा नही तो इस उम्र मे भी अब दूध पियेंगे तो क्या कहूँगी हिहिहिही

पापा - अरे बेटा इस उम्र क्या दूध तो हर उम्र मे पीने का मजा आता है

मै ह्स कर - भक्क अब कहा इसमे दूध आता होगा ,,है ना मा

मा मेरी बात से ह्स रही थी

पापा - अरे बेटा इसमे दुध नही एक अलग ही मिठास होती है जो चुसने पर मिलती है

मै जिज्ञासु भाव मे - मतलब

पापा - रुक बताता हू बेटा

पापा मा से - जानू जरा ये ब्लाउज खोलना तो अपने बेटे को डेमो देना है

मा ह्स कर - धत्त आपको शर्म नही आ रही है कि अपने ही बेटे के सामने मुझे नंगा कर रहे है

पापा ह्स कर - नंगा थोडी कर रहा हू जानू ,,वो तो बस राज को दिखा रहा हू कि कितना मजा आता है इनको चूसने मे ,,वैसे भी वो इनको बहुत बार देख चूका है बचपन मे , क्यू राज

मै हस कर - हिहिहिही हा वो तो है

फिर पापा मा का हाथ हल्का सा जोर लगा कर उनका ब्लाउज खोल दिया और मा के चुचे दोनो तरफ फैल गये वही चुचो के खुलते ही मा की सांसे तेज हो गयी ।

मै एक तक मा के भारी चुचे को पापा के सामने देखने लगा ।

तभी पापा ने मेरे सामने मा की दाई चुची को पकड़ा और मेरी आँखो मे देखते हुए उस्का मोटा निप्प्ल मुह मे लेके चुसने लगे ,,जिससे मा सीसक पड़ी

फिर पापा ने मा की चुचि मुह से निकाल कर अपने मुह एक्थ्था लार को घोट कर बोले - बेटा तू भी पकड उसे और जैसे मै कर रहा हू कर

मै थूक गतकते हुए एक नजर मा को देखा वो आंखे बन्द किये पापा की तरफ गरदन घुमाये सिस्कते हुए तेज सांसे ले रही थी और वही पापा ने वापस मुह मे चूची को भर लिया

मै भी उठ कर बैठ गया और घुटनो के बल बैठ कर झूककर बडे धीरे धीरे काप्ते हाथो से मा के बाई चुची को नीचे से थामा - हिहिही पापा ये तो भारी है और बहुत मुलायम भी ,,जैसे पानी से भरा गुब्बारा हिहिही

पापा - अब अपना मुह उस काले वाले घुंडी पर लगा और उसे चुस

मै एक नजर पापा को देख कर हामी भरा और मा को देखा जो पापा के आवाज सुन कर गरदन मेरी तरफ कर मुझे अपनी चुचियो की तरफ बढ़ते देख कर तेज सांसे ले रही थी

मै झुक कर मा की आँखो मे देख्ते हुए उन्के निप्प्ल को अपने होठो से टच किया जिस्से मा सिसिक उठी और मैने धीरे से पूरा निप्प्ल वाला हिस्सा मुह मे भर लिया

जिससे मा एक तेज आह्ह भरते हुए अपनी सीने को फूला कर अपने कन्धे उचका कर तडप उठी

और मैने बडे हौले से मा के चुचे को थामते हुए निप्प्ल पर अपने होठो को सिकोड़ कर उसे चुस्ते हुए मुह के अंदर निप्प्ल की घुंडी पर जिभ घुमाने लगा और वही पापा उम्म्ं उम्म्ं कर मा के दाई चुची को गार गार कर हवसी ढग से चुस रहे थे ।

नतिजन मा अपने पाव की नशो को फैलाने लगी और सिहरन भरे आह लेते हुए अपनी कमर को झटकने लगी

इधर काफी देर तक मै और पापा मिल कर मा की चुचिया चुस्ते रहे और मा हमारे सर पर हाथ फिरा कर उत्तेजना मे सिहरती रही और अपनी गाड़ उचकाती रही

मा - ओह्ह्ह राज के पापा उम्म्ंम आराम से उम्म

मै मुह से मा चुची निकाल कर - क्या हुआ मा दर्द हो रहा है क्या

मा सिस्क कर - सीई उम्म्ं तेरे वजह से न्हीईई आह्ह उम्म्ंम ये तेरे पापा अह्ह्ह उम्म्ंम आह्ह

मैने नजर पापा की तरफ की तो देखा पापा मा की चुची को ज्यदा से ज्यादा मुह मे भर रहे थे और उन्के दाँत मा के मक्खन से मुलायम चुचो के त्वचा मे गड़े हुए थे ।

मा - ओह राज के पापा उम्म बस करिये ऊहह उम्म्ं आह्ह मा उम्म्ं

पापा ने फिर मा को छोडा और हसने लगे ।

मा ह्स कर - क्या जी आप तो लग रहा था कि काट ही लेंगे मेरा

पापा वापस से हथेली को मा के निप्प्ल पर फिराते हुए मा के होठो को चुस्ते हुए बोले - जानू मेरा बस चले तो इनको खा ही जाऊ

मा शर्मा कर पापा को अपने उपर से हटाते हुए - हटीए अब , शर्म नही आती है जवान बेटे के सामने बीवी के दूध पीने मे लगे है

मा की बातो से हम सब हसने लगे

फिर मै वापस मा की तरफ करवट लेके लेट गया और पापा भी करवत लेके मा के पेट पर हाथ रख लेट गये । फिर हम दोनो की आंखे मिली तो मुझे शर्म आने लगी तो मै मुस्कुरा दिया और मा के कांख मे सर छिपा लिया ।

थोडी देर शान्ति रही और तभी मुझे पापा मा की कान मे फुसफुसा कर बोले जिसका जवाब मा ने तेज आवाज मे दिया

मा - नही !!! पागल हो गये क्या आप

पापा मा के पेट को सहलाते हुए - प्लीज ना रागिनी प्लीज मान जाओ ना

जारी रहेगी ...

............................
 
अब तक

फिर मै वापस मा की तरफ करवट लेके लेट गया और पापा भी करवत लेके लेट गये । फिर हम दोनो की आंखे मिली तो मुझे शर्म आने लगी तो मै मुस्कुरा दिया और मा के कांख मे सर छिपा लिया ।

थोडी देर शान्ति रही और तभी मुझे पापा मा की कान मे फुसफुसा कर बोले जिसका जवाब मा ने तेज आवाज मे दिया

मा - नही !!! पागल हो गये क्या आप

पापा मा के पेट को सहलाते हुए - प्लीज ना रागिनी प्लीज मान जाओ ना

अब आगे

मै गरदन उठा कर मा और पापा की तरफ देख कर - क्या हुआ मा

मा मुझे देखकर शांत होते हुए मुस्कराकर - कुछ नही बेटा तू सो जा

पापा - रागिनी प्लीज

मै सोचने के भाव मे - क्या हुआ पापा किस बात के लिए मा को मना रहे हो

पापा मा के सामने थोडा हिचक कर - अब वो वो बेटा

मा ह्स्ते हुए - हा अब बोलो ना हिहिहिही

मै अपने चेहरे पर हसी के भाव लाकर मामले को समझने की कोसिस मे - क्या बात है मा आप ही बता दो ना

मा हस कर - बेटा तेरे पापा का बहुत मन है कि मै वो करू

फिर मा ह्स्ते हुए पापा को देखती है

मै - मतलब वो क्या

मा हस कर - अरे बुधु वो ..

और मा मुह पर हाथ रख कर हसने लगी

पापा मुझे परेशान होता देख - देख बेटा राज अब तू बड़ा हो गया है तो तुझसे क्या झुठ बोलना और तु तो समझता ही है सब ,,बात दरअसल ये कि काफी समय से जो मस्ती तेरे मा और मेरे बीच हो रही थी उससे मेरे लिंग मे तनाव हो गया है और ये तभी कम होगा जब या तो हम दोनो सेक्स करे या फिर तेरी मा वो कर दे

मै अचरज के भाव मे - अब ये वो क्या है

पापा हिचक कर - पता नही बेटा तुझे कैसा लगेगा और तू क्या प्रतिक्रिया देगा मेरे बात पर ,, लेकिन फिर भी बता रहा हू कि मुझे तेरी मा से अपना लिंग चुसवाना बहुत पसंद है बस उसी के लिए मै रागिनी को बोला

मै अजीब सा मुह बना कर - ओह्ह्ह सॉरी , शायद मुझे आज यहा सोना ही नही चहिये था ,, खामखा आप लोगो को मेरे वजह से दिक्कत हो रही हैं

मा पापा से - क्या जी आप मेरे बेटे को परेशान कर रहे है

मा - नही बेटा ऐसी कोई बात नही है , मुझे तेरे वजह से कोई परेशानी नही है

मै मा की तरफ देख कर - तो मुझे भी कोई दिक्कत नही है , आप लोग इंजॉय करिये ना । मेरी चिन्ता छोडिए

मा मेरी तरफ देख के ह्स देती है - तू भी तेरे पापा पे ही गया है बेशर्म एकदम

मै हस कर - अब उन्ही का बेटा हू ना मा ,, प्लीज आप लोग इंजॉय करिये

मा मेरी बातो से चुप होकर मुस्कुरा रही थी

पापा - अब तो करो ना जान , अब तो राज ने भी बोल दिया

मा बिस्तर से उठते हुए - चुप रहिये आप,, आपकी आदत बहुत खराब हो गयी है ।

फिर मै सीधा होके लेट गया और उनकी बाते सुन के हसने लगा और धीरे से अपना लोवर मे तना लण्ड सहला दिया ।

थोडे ही देर मे मा की गुउऊ गुउऊ गुउउऊ की आवाजे आने लगी और मैने नजर नीचे की तरफ कर देखा तो मा ने अपना ब्लाउज निकाल दिया था और पापा के अंडरवियर से उनका लण्ड निकाल कर चुस रही थी । जिससे मेरे लण्ड मे खुन तेजी से दौड़ने लगा ।

और मै सोचने लगा काश मा मेरा भी लण्ड चुस ले

तभी पापा की सिसकिया शुरु हुई और फिर वो बोले

पापा - थैंक यू राज बेटा

पापा की बात सुन के मुझे एक मौका मिला की मै उनकी तरफ देखू

मै उनकी तरफ करवट लेके एक नजर मा को लण्ड चुस्ते हुए अच्छे से देखा और बोला - थैंक यू क्यू पापा

पापा सिस्क कर - देख नही रहा है कितने मस्त तरीके से तेरी मा मेरे लिंग को चुस रही है अह्ह्ह रागिनी और अन्दर लो

मै थूक गटकते हुए मा को पापा का मोटा काला लण्ड चुस्ते हुए देख रहा था जिसे वो अपने गले तक ले जा रही थी और उनको देख कर मै पापा के सामने ही अपना लण्ड का सुपादा लोवर के उपर से ही मुथियाने लगा

पापा मुझे लण्ड मुथियाता देख - क्या हुआ बेटा तुझे खुजली हो रही है क्या

मै चौकने के भाव मे लण्ड को दबाते हुए - अब ब नही पापा वो आप लोगो को मस्ती करता देख मेरा भी लिंग खड़ा हो गया लोवर मे , और थोडा दर्द हो रहा है ।

पापा चिन्ता के भाव - ओफ्फो बेटा , ऐसा कर तू अपना लोवर निकाल दे

मै संकोच - क क क्या लेकिन क्यू

पापा मुझे समझाते हुए - अरे अपना लिंग बाहर निकाल उसे थोड़ा खुला रख अभी आराम हो जायेगा

इधर मा हमारी बाते सुन कर लागातार कनअखियो से देखते हूए पापा का लण्ड चूसे जा रही थी और हमारे संवाद में जानबुझ कर उसने कोई टिप्पणि नही की

फिर मैने झट से पापा के कहे अनुसार अपना लोवर अंडरवियर सहित निकाल कर नंगा लेट गया और मेरा लण्ड तन कर छ्त की ओर मुह उठाए खड़ा हो गया ।

पापा सिस्क के - अब कुछ आराम हुआ बेटा

मै - नही पापा देखो ये बहुत टाइट है

पापा चिन्ता के भाव - ओह्ह हा ,,, रागिनी सुनो जरा अह्ह्ह रुको ना

मा पापा का लंड मुह से निकाल कर पापा से चुदासी भाव - क्या हुआ जी

तभी उसकी नजर मेरे खडे लण्ड पर गयी जो पापा से भी मोटा था

मा हस के - अरे पागल ऐसे क्यू सोया है

पापा - वो मैने बोला उसको ,, दरअसल वो हमदोनो को मस्ती करते देख उसके लिंग मे भी तनाव आ गया और दर्द होने लगा था इसिलिए मैने कहा

मा ह्स कर - तो सही हो गया बेटा

मै क्समसा कर - उम्म नही मा

पापा चिन्ता के भाव मे - रागिनी देखो ना कित्ना परेसान है बेचारा ,,मै क्या कह रहा हू तू थोडा उसका भी चुस कर ढिला कर दो ना

मा चौक के - ये क्या कह रहे है आप , कुछ समझ है आपको

पापा थोडा रुआब मे - ओहो रागिनी तुम कैसी मा हो ,,देख नही रही बेटा अपना परेशान है और उसकी परेशानी की वजह भी तो हम दोनो ही है ना ,

मा पापा की भडकता देख- ऐसा ना बोलिये जी ,,मै भी उससे प्यार करती हू लेकिन मै उसकी मा हू ,,,,अच्छा ठीक है

फिर पापा मुझे देख के मुस्कुराये

मै हिचक के - मा रहने दो सही हो जायेगा अभी

मा - अब तू नौटंकी ना कर आ इधर खसक अपने पापा के बगल मे

फिर मै मुस्कुरा कर एक ताजगी से भर गया कि मा अब पापा के सामने मेरा खड़ा लण्ड चुसेगी और मै सरक पर पापा के बगल मे आ गया ।

मा पापा के सामने थोडी हिचक दिखा रही थी और धीरे से मेरे खडे तपते लण्ड को बिच से पकड़ा

जिससे मा गनगना गयी - ओह्ह्ह राज के पापा इसका तो बहुत गरम है

मै भी मा के हाथो का स्पर्श पाकर सिहर उठा

पापा मुझे अकडता देख - आराम से बेटा पहली बार मे ऐसा होता है जब कोई औरत ऐसे लिंग को थामती है ।

इधर धीरे धीरे मा ने मेरा लण्ड सहलाना शुरु किया और चमडी को नीचे कर सुपाडे को सूंघते हुए मुह खोला , जिससे मा के मुह की गरम सांसो से मेरे सुपाडे की जलन बढ़ गयी और ज्यो ही मा ने अपने मोटे मुलायम होठो को रिंग बना कर मेरे लण्ड पर घिसते हुए लण्ड को निगला , एक मजेदार ठन्डक ने मेरे लण्ड की सहतो पर मह्सूस होने लगी और मुझे राहत होने लगी ।

मै सिसक कर - ओह्ह्ह पापा सच मे बहुत आराम मिल रहा है उम्म्ंम अह्ह्ह

जैसे जैसे मा लण्ड को चुस्ती मै अकडने लगता

थोडी देर की चुसायि के बाद

पापा - ओह्ह जानू थोडा थोडा मेरे लिंग को भी दुलार दो ना कबसे सुख रहा है

मै पापा की बात सुन कर सिस्कते हुए मुस्करा दिया

और वही मा ने मेरा लण्ड चुस्ते हुए अपना दुसरा हाथ से पापा का लण्ड थाम कर उसे सहलाने लगी

और फिर मेरे लण्ड को मुह से निकाल कर गप्प से पापा का लण्ड मुह मे भर लिया

पापा - अह्ह्ह जान उफ्फ्फ क्या मस्त चुस्ती हो जानू उम्म्ंम अह्ह्ह और अन्दर लो जान आह्ह हा ऐसे ही अह्ह्ह

फिर मा ने उनका लण्ड थोडा चुस कर मेरे लण्ड को गले मे उतारने लगी जिससे मेरी नशे मानो फट सी जायेगी

फिर थोडी देर चुसकर वो दोनो हाथो मे लण्ड को पकड कर सह्लाते हुए घुटनो के बल बैठी रही और तेज सासे उनकी खुली छातियो को उपर नीचे कर रहे थे ।

मा इस वक़्त किसी पेशवर रन्डी जैसे लग रही थी । उस्के चेहरे की कामुकता और लण्ड के सुपाडे को मुठियाने की अदा से साफ पता चल रहा था कि वो काफी ज्यादा चुदासी हो गयी है

पापा - आह्ह जान इधर आओ मेरे मुह पर अपनी रसिली चुत को रखो मै भी उनको निचोडना चाहता हू

पापा की बात सुन कर मा हिचक कर मुझे देखती है और मै - कोई बात नही मा आप लो इंजॉय करिये ना मुझे कोई आपत्ति नही है , बस मेरा ये छोटा कर दिजीये आह्ह

मा मेरी बात सुन कर बिना कुछ बोले मुस्करायी और झट से पापा के मुह के पास गयी और अपना पेटिकोट उथाते हुए 69 की पोजीशन मे आ गई

ओह्ह गाड क्या नजारा था

मा अपनी फैली हुई गाड़ बड़ी ही बेशरमी से पापा ने मुह पर रख कर घुटनो के बल झुके हुए पापा का लण्ड सहला रही थी वही पापा मा के भारी मुलायम कूल्हो को थामे अपनी गरदन उथाये मा के भोस्डी मे अपना नथुना रगड़ते हुए उसको चाट रहे थे ।

वही मा भी पापा का लंड मुह मे भर कर गुउउऊ गुउऊ कर सिस्क कर कमर उचका रही थी और पापा लपालप मा के चुत पर जीभ चला रहे थे

मै वही इनदोनो को देख कर करवट लिये लण्ड को सहला रहा था कि तभी मा ने मेरे लण्ड एक हाथ से पकड कर अपनी तरफ खीचा और मै झट से सरक कर मा के मुह के अपनी गाड़ उचका कर लण्ड को ले गया वही मा ने झट से मेरा लण्ड मुह मे भर कर चूसना शुरु कर दिया ।

उधर पापा मा की चुत से जीभ हटा कर उनकी गाड़ को गिला करने लगे जिससे मा और भी उतेजीत हो गयी और पापा का लण्ड भी खिच कर एक साथ दोनो लण्ड के सुपाडे को होठो पर रगड़ने लगी ।इस दौरान पहली बार मेरा सुपाडा पापा के सुपाड़े को छुआ और उस स्पर्श के रोमांच से मै गनगना गया वही मा दोनो लण्ड को थामे हमारे सुपाडे को सुरक रही थी और जल्द ही उसकी कमर से झटका देना शुरु कर दिया और वो हमारा लण्ड छोड पापा की जांघो को पकड कर अपनी गाड़ और चुत पापा ने मुह पर घिसने क्गी

मा - आह्ह राज के पापा और तेज चुसो आह्ह ओह्ह्ह हा मै आ रही हू आह्ह आह्ह उफ्फ़ उम्म्ंम आह्ह मा ओझ

यहा मा पापा के मुह मे झडने लगी जिससे मै और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगा

फिर पापा ने अच्छे से मा की चुत को चाता और मा उन्के उपर से ह्ट कर पापा के बगल मे बैठ गयी जहा पापा अपना हाथ आगे कर मा के चुचे सहलाने लगे ।

पापा - आह्ह जान मजा आ गया आज तो काफी सारा पानी बहाया तुमने आज तो

मा शर्मा कर - भक्क चुप रहिये और अब सो जाईये

पापा - क्या !! और इसका क्या

मा - ओह क्या करू इसका अब पता नही क्यू आज ना आपका ना ही उसका छोटा हो रहा है

पापा ह्स कर - कैसे छोटा होगा जानू तुम्हे पता है ना

मा शर्मा कर एक नजर मुझे देखा तो मै अपना खड़ा लण्ड सहलाते हुए मा को ही देख रहा था ।

पापा वापस मा का हाथ पकड कर खिच्ते हुए - आओ ना जानू अब

मा शर्मा कर ह्स्ते हुए - धत्त मुझे शर्म आयेगी और राज भी तो है न

पापा गरदन घुमा कर मुझे देखते हुए - बेटा तुझे कोई दिक्कत तो नही है ना अगर मै तेरी मा के साथ सम्भोग करु तो

मै पापा की बात सुन कर हस दिया और मा की तरफ देख कर मुस्कराकर ना मे सर हिलाया

पापा - देखा जानू उसे कोई दिक्कत नही है अब आ जाओ ना

फिर पापा ने झट से मा को खिच कर अपने बगल लिताया और उन्के होठो को चूसना शुर कर दिया और धीरे धीरे हाथ नीचे ले जा कर मा की एक जांघ को अपने उपर कर उनसे चिपक गये जिसमे मा भी ब्ड़ी बेशर्मी से उनका साथ देने लगी

जल्द ही पापा ने मा का पेटिकोट निकाल दिया और वो भी पूरी नंगी हो गयी

और फिर पापा ने मा को नीचे लिता कर उनकी जांघो को थामे अपना लण्ड उनकी चुत पर लगाते हुए घ्प्प्प से एक धक्के के साथ पूरा लण्ड मा के गीले चुत मे उतार दिया

मा आन्खे ब्न्द कर - अह्ह्ह राज के पापा उम्म्ं उफ्फ्फ आराम से अह्ह्ह आह्ह आह्ह

इधर पापा ने मा के जांघो को फैला कर घपाघ्प धक्को को तेज कर उन्के उपर चढ़ गये और मा की चुचियो को चुस्ने लगे

मा एक मादक मुस्कान के साथ पापा का लण्ड अपने चुत की दिवारो पर रगड़ता पाकर और सिस्कने लगी - अह्ह्ह राज के पापा उम्म और तेज और तेज अह्ह्ह

फिर पापा वाप्स उपर होकर मा की जांघो को अपने कन्धे पर चढा कर तेज धक्के लगाने लगे जिस्से मा का पूरा जिस्म हिल जा रहा था और उनकी फैली मोटी चुची गागर मे भरे पानी जैसे झटके पाने पर छलक जाती ठीक वैसे ही हिल रही थी और मै उत्तेजित होकर थोडी हिम्मत दिखाते हुए मा के पास गया और मा के बाई चुची को थाम लिया और तभी मा ने आंखे खोल कर मुझे देखा और एक स्माइल दी

मैने स्माइल पाकर झुक कर मा ने निप्प्ल पर मुह लगा कर उनकी चुचियो को दबाते हुए चूसने लगा और वही मा हाथ नीचे ले जाकर मेरे लण्ड को टटोलने लगी और फिर मैने अपनी कमर को उपर सरकाया जिस्से मा ने लपक कर मेरे लण्ड को थामा लिया

वही पापा हमारी हरकतो पे नजरे गड़ाये हुए थे

पापा हाफ्ते हुए - क्यू जान मजा आ रहा है ना

मा सिहर के मेरे बालो मे हाथ फिराते हुए - अह्ह्ह हा राजा बहुत मजा आ रहा है

पापा - तो बोलो ना कौन हो तुम मेरी आह्ह

मा सिसक कर - मै आपकी रानी हू मेरे राजा आह्ह और अन्दर करो आह्ह आहा

पापा मा के चुत की गहराई मे लण्ड उतारते हुए - और क्या हो मेरी जान

मा झटके खाते हुए - म म मै आ आ आपकी बीवी हू जान

पापा - कैसी बिवी हो जानू बोलो ना

मा थोडा चुप रही

पापा थोडा मा को मनाने के भाव मे अपना लण्ड मे चुत मे घुमाते हुए - ओह्ह जान बोलो ना कैसी बीवी ही तुम मेरी

मा सिस्क कर मजबुर होते हुए - अह्ह्ह राज के पापा मै आपकी चुद्क्क्ड बीवी हू उम्म्ंम और चोदिये ना मुझे अह्ह्ह आह्ह

पापा मा के मुह से ये बात सुन कर और उत्तेजित हो गये । फिर वो और भी मस्त तरीके से मा के चुत मे लण्ड घुमाने लगे ।

पापा नशे मे - ओह्ह जानू फिर से बोलो ना कैसी बीवी हो तुम मेरी अह्ह्ह

मा मेरे सर को अपने चुची पर दबाते हुए मेरे लण्ड की चमडी को खिच कर काफी ज्यादा उत्तेजित होकर अपनी गाड़ पटकते हुए - ओह्ह मेरे राजा मै आपकी रन्डी बीवी हू चोदो मुझे, चोदो अपनी चुदक्क्ड बीवी को अह्ह्हह अह्ब और अन्दर तक पेलो आह्ह आह्ह

मै मा की उत्तेजना देख थूक गटकने लगा और मेरा लौडा बहुत ही ज्यादा खड़ा हो गया था मन कर रहा था कि अभी पेल दू का की चुत मे पापा को हटा कर

इधर पापा और मा काफी गाली गलौज भरे शब्दो मे घ्प घप चुदाई किये जा रहे थे

पापा सिहरते हुए - आह्ह मेरी रन्डी जान और निचोड ले मेरा लण्ड आह्ह आह्ह ऐसे ही

मा भी पापा की बातो पर अपने दाँत पिस्ते हुए अपनी गाड़ उचका कर पापा का लंड अप्नी चुत मे कस रही थी ।

मै मा के अलग हो कर सीधा लेट गया क्योकि मेरे बाई बाजू मे काफी समय से करवट लेने के कारण दर्द होने लगा और मै गर्दन घुमा कर पापा और मा की चुदाई देखते हुए लण्ड हिला रहा था

पापा फिर पापा घपाघप मा की चुत मे लण्ड उतारते हुए - तू मेरी चुद्क्क्ड बीवी है ना मेरी रन्डी है ना तू आह्ह बोल ना जानू मेरी आह्ह

मा पापा के तेज झटके खाते हुए - अह्ह्ह आह्ह ह ह हा मेरे राआआजाआह्ह मै तुम्हारी रन्डी हू और चोदो

पापा हाफ्ते हुए - तो फिर जैसा मै कहुगा करोगी ना मेरी रन्डी

मा सिस्कते हुए - आ

ह ह हा मेरे राआअजाअह्ह आह्ह सब करनगी उम्म्ंम ऐसे ही चोदो मुझे और तेज आह्ह मजा आ रहा है

पापा धक्को को थामते हुए - तो जा मेरे बेटे के लण्ड पर बैठ जा और उसे भी अपनी गर्म चुत का सुख दे ,,देख कबसे तुझे चोदने के लिए तडप रहा है अह्ह्ह

मा पापा की बात सुन कर हैरत मे थी लेकिन मन उसका भी था कि वो पापा के सामने मेरे साथ चुदे इसिलिए

मै - पापा ये क्या कह रहे है आप

पापा मा की चुत ने हल्के धक्के लगाते हुए - बेटा तू चिन्ता ना कर इससे तेरी तकलीफ कम हो जायेगी

फिर पापा ने मा की चुत से लण्ड को निकाला और उनकी गाड़ को पकडकर मेरी तरफ घुमाने का इशारा किया

और मा बिना कुछ बोले झट से उठी और मेरे जांघो के दोनो तरफ पैर कर झुकी और मेरे लण्ड को थाम कर चुत के दिवारो पर लगाने लगी

मा के चुत की चमडी का मेरे सुपाडे पर स्पर्श मुझे हिला दिया

मै सिस्क कर - आह्ह मम्मी आह्ह

फिर मा घ्प्प से अपनी चुत मे लण्ड घुसाते हुए उसे लगभग पूरा निगल गयी और मेरे जड़ तक बैठ गयी

मै मनो पागल सा होने लगा ऐसा लग रहा था कि मा के चुत की गर्मी से मेरा लण्ड पिघल जायेगा

मेरा जीवन का स्ब्से बड़ा सपना जो मैने बचपन मे देखा था ।

उस कमरे मे जब पहली बार पापा मा को चोदते देखा था उसी समय मैने तय किया मै भी मा को पापा के साथ चोदूंगा ।

और आज मेरा वो सपना हकीकत बन रहा था और मै परम आनन्द की उचाईयो को छू रहा था ।

इधर मा बड़ी कामुकता से मुझे सिस्कता देख मेरे लण्ड पर उछलना शुरु कर दी और उसके चुतड मेरे जांघो से टकरा कर थप्प थप्प की आवाज करने ल्गे ।

हमारी चुदाई देख पापा को भी रहा नही गया और वो खडे होकर अपना लण्ड मा के मुह मे पेलने लगे ।

इधर कमरे का माहौल बहुत गर्म हो गया तो मैने अपना टीशर्ट भी निकाल दिया

जिससे मा ने उछलना धिमा कर दिया तो मै खुद पहल कर नीचे से अपनी कमर को उचकाने लगा और लण्ड को मे चुत मे बच्चेदानी तक लेके जाने लगा

जिस्स्र मेरे हर धक्के से मा के मुह लण्ड उन्के गले तक चला जाता और उनको परेशानी होने लगी तो पापा खुद हट कर मा को मेरे उपर लिटा दिये और मैने भी लपक कर मा को अपनी तरफ खीच लिय

मा की नंगी चुची मेरे सिने पर दब गयी और मै झटकों को तेज कर घपा घ्प लण्ड को तेजी से मा के चुत के पेलने लगा जिस्से मा ही आहे तेज हो गयी

मा मेरे कन्धे मे दबाए - अह्ह्हह्जआह्ह आह्ह बेटा आराम से आह्ह ओह्ह आह्ह उम्म्ं उम्म्ं

वही पापा मुझे मा को कसकर चोद्ता देख - वाह बेटा और तेज चोद अपनी मा को बहुत चुद्क्क्ड औरत है ये अह्ह्ह मजा आ रहा है देख

इधर मै पापा की बाते सुन कर और उत्तेजित होकर घपाघ्प मे की चुत मे पेल्ने लगा

और फिर धक्को को हल्का करने लगा क्योकि कमर मे भी दर्द होना शुरु हो गया था । इधर धक्को की रफ्तार कम होने से मा खुद अपना बदन मेरे जिस्म पर घिस्ते हुए उपर नीचे होकर लण्ड को चुत मे भरने लगी

मा - आह्ह बेटा रुक क्यू गया चोद ना मुझे आह्ह

पापा हस कर - लग रहा है मेरा बेटा थक गया है रुको मै भी आता हू

यहा मै अप्नी सांसे बराबर कर रहा था और वही पापा भी मेरे पैरो के दोनो तरफ पैर कर घुत्नो के बल खडे होकर मा के गाड़ के छेद पर अपनी थूक लगाने लगे

मा गरदन घुमा कर सिस्क्ते हुए - आह्ह मेरे राजा मेरे चुत मे खुजजी है वहा नही

पापा अपने लण्ड मा के थूक से भरे गाड़ की छेद पर लगाकर दबाते हुए - हा पता है जान लेकिन तेरे इस मोटी गाड़ को देख कर मेरे लण्ड मे इसको चोद्ने की खुजली है

ये बोलते हुए पापा ने अपना लण्ड मा की गाड़ मे घुसेड़ दिया

मा तेज से सिसक के - आह्ह मा उफ्फ्फ आराम से मेरे राजा

मै ये जानकर की पापा ने मा की गाड़ मे अपना लौडा घुसेड़ दिया है इससे मेरे लण्ड मे तनाव और बढ़ गया और फिर से जोश मे आकर नीचे से लण्ड को मा के भोस्दे मे पेलने लगा

मा दर्द और सिहरन से बेजुबान हो गयी क्योकि इस वक़्त उसकी गाड़ और चुत मे दो मोटे मुसल घुसे थे

पापा - बेटा हम दोनो मे से किसी एक को ही धक्का लगाना पडेगा नही तो चोदने मे मजा नही आयेवा

ये बोल कर पापा ने मा की गाड़ मे पेलना सुरु कर दिया

जिस्का आभास मुझे नीचे चुत के अन्दर मेरे लण्ड पर पता चलने लगा था

मा मुझे पकड कर दर्द से कराह उठी और मै उन्के कमर के पास हाथ ले जाकर सहलाने लगा

मा - ओह्ह राज के पापा उम्म्ं

ओह्ह आह्ह आह्ह म्जा आ रहा है आह्ह और तेज करो और तेज्ज्ज आह्ह मजा आ रहा उम्म्ं

पापा मा की गाड़ मे धक्के लगाते हुए - क्यू मेरी रन्डी जान मजा आ रहा है ना एक साथ दो लण्ड लेके

मा सिस्कते हुए - आह्ह हा मेरे राजा बहुत ज्यादाआआ आह्ह और तेज

इधर थोडी देर पापा मा की गाड़ मारने के बाद अप्ने धक्को को थाम्ते हुए लण्ड को मा के गाड़ की जड़ ले जाकर रोक दिया - हा बेटा अब तू नीच से पेल

मै तो इसी इन्तेजार मे था और मा के कुल्हे थाम्ते हुए थप थप्प थप्प तेजी मा के चुत मे पेलने लगा

मा - ओह्ह्ह बेटा हा बहुत मस्त चोद रहा है आह्ह और चोद और चोद और मै फिर से झड़ने वाली हू अह्ह्ह

इधर मै और पापा बारी बारी से इधर मै और पापा बारी बारी से मा की गाड़ और चुत मे धक्के लगाते रहे वही मा झड़ चुकी थी और हम भी झडने के करीब थे

मै - आह्ह पापा दर्द हो रहा है वहा मेरा पेसाब आयेगा

पापा हस कर - निकाल दे बेटा अन्दर ही मै भी आने वाला हू

मा सिस्क कर हफ्ते हुए मेरे उपर से उठने लगी - नही नही मुझे मुह मे चाहिये आह्ह छोदिये अब आप

फिर वो पापा को हटा कर घुटने के बल बैठ जाती है और पापा खडे होकर मा के मुह पर लण्ड हिलाने लगते है

पापा - आजा बेटा तू भी और भर अपने माल को अपनी इस चुद्क्क्ड मा के मुह मे

मै भी उत्तेजित होकर झट से खड़ा हुआ और लण्ड को मा के मुह पर हिलाने लगा

वही मा हम दोनो के आड़ो को सहलाते हुए जीभ बाहर निकाल हमारे झडने का इन्तजार करने लगी

इधर मै लण्ड हिलाते हुए पहली बार अपनी भावनाये दोनो के सामने रखता हुआ - अह्ह्ह मा आप बहुत मस्त हो बहुत मजा आया आपको चोद के क्या मै रोज चोद सकता हू आपको

पापा मेरे कंधे पर शाबशू देने के अन्दाज मे - हा बेटा क्यू नही हम दोनो अब रोज मिल कर तेरे मा को चोदेंगे और तेरा जब भी मां करे तू अपनी मा को चोद लेना

इधर हमारी बात ज्यादा नही हो पाई और हम अपनी एड़ियो के बल आकर सारा माल सुपाड़े एक रोक के एक बार मे मा के उपर छोड दिया और दोनो तरफ से लगभग एक सेकण्ड के अन्तर पे पिचकारी छूटी मा के आख और नाक कर गयी और बाकी की धीमी पिचकारी मा के जीभ और मुह मे जाने लगी ,,,

फिर हमने अपने मोटे लण्ड को मा के मुह पे पटक कर झाड़ा और

फिर मा ने हम दोनो के लण्ड को चाट चाट कर बारी बारी से साफ किया और उसको मुह मे लेके वाप्स से चुस कर निचोड़ लिया और फिर अपने चेहरे पर लगा माल ऊँगली से चाट गयी

फिर पापा ने मा को खड़ा कर उन्के होठो को चुसा और मा ने वाप्स मेरे होठो को चुस ली

फिर हम सब आपस मे एक दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे ।

जारी रहेगी

..................................
 
पापा के साथ मिलकर मा की चुदाई के बाद हम वापस बिस्तर पर लेट गये और आपस मे हुए थोडी देर पहले के ड्रामे को सोच कर ह्स रहे थे फिर उस रात मैने और पापा ने मिल कर 2 बजे तक 3 बार मा को चोदा फिर थक कर आपस मे लिपट कर सो गये ।

अगली सुबह 8 बजे हमारी निद सोनल के दरवाजा खटखटाने से खुली तो मा झट से अलग हुई और मुझे बाथरूम मे भेज दिया और खुद मेक्सि पहन ली । वही पापा ने टीशर्ट चढ़्ढा पहन लिया

मा ने दरवजा खोला

सोनल झल्लाते हुए - क्या मा कबसे सो रही हो और ये राज सुबह सुबह कहा चला गया

मा उबासी लेते हुए - सॉरी बेटा आज तो पता ही नही चला कब 8बज गये

सोनल - ठीक है आप लोग नहा लो मैने नास्ता बना दिया और मै चाची के यहा जा रही हू निशा ने बुलाया है

मा उत्सुकता से निद की उबासी लेते हुए - हा वो ठीक है बेटा लेकिन सुबह सुबह

सोनल - मा मेरे एग्ज़ाम खतम हो गये है तो सोच रही थी कि अगले 2 3 महीने मै निशा के साथ सिलाई सेन्टर जाऊ

मा - ठीक है बेटी आराम से जाना ओके

फिर सोनल जाने को हुई कि

मा कुछ सोच कर - अरे हा याद आया , वो जरा वहा जाकर शालिनी से मेरी बात करवा देना । ये अनुज भी कह रहा था की वो राहुल के साथ उसकी मौसी के यहा जायेगा

सोनल - ठीक है मा

फिर सोनल एक थैली लेके निकल गयी चाचा के यहा और मा ने अंदर से दरवाजा बन्द कर - चलो जी जल्दी से नहा धो लो और फिर आपको भी आज लेट हो गया

पापा मा को पकड कर उन्के होठ चुस कर - कहो तो आज नही जाता दुकान

मा उनको धकेल कर - धत्त हटो मै नहाने जा रही हू

फिर मै वहा से निकल कर अपने कमरे मे गया और नहा धो कर चाय नास्ता किया और निकल गया दुकान पर

दोपहर तक मा और अनुज दोनो एक बड़ा बैग लेके दुकान पर आये और फिर मा ने उसे पैसे दिये । फिर वो चाचा के यहा निकल गया क्योकी 2 बजे की बस से राहुल और अनुज बडे शहर के लिए जाने वाले थे ।

फिर अनुज के जाने के बाद मैने और मा ने काफी बाते की रात मे हुई चुदाई के उपर और फिर दुकान मे लगे रहे । शाम को 4 बजे तक मा वापस घर चली गयी और मै दुकान मे बैठा मोबाइल चला रहा था ।

तभी दुकान पर एक औरत आई जिसे देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई और मैने उन्हे बडे सम्मान से बिठाया

सामने कोई और नही बल्कि काजल भाभी की सास थी उनको देख कर मुझे उस दिन सुबह के उस नजारे की याद आ गई जब मैने उन्की खुली झुल्ती चुचिया देखी थी ।

मै हस कर - अरे चाची आप , आईये बैथिये

काजल की सास - अरे ठीक है बेटा , वो कह रही थी कि तेरी अम्मा नही है क्या

मै मुस्करा कर - अरे अभी अभी तो वो उस वाले घर गयी है ,,बोलिए क्या काम है

काजल की सास थोडा संकोच करते हुए - अब तूझसे क्या बोलू बच्वा पता नही तू उनसब के बारे मे जानता भी होगा की नही

मै हस कर - अरे चाची ये दुकान मै ही देखता हू मा तो कभी कभी आती है ,,आप बोलिए क्या चाहिये आपको

काजल की सास थोडा हिचक कर बोली - अच्छा फिर वो कोई भीट क्रीम आता है वो देदे एक पैकेट

मै ह्स कर - अरे चाची वो वीट होता है

फिर मैने veet हेयर रेमोवर क्रीम उसको दिया

काजल की सास हस कर - धत्त पता नही कौन कौन सा क्रीम होता है मुझे क्या पता, ये तो मेरी बहुरिया मगायि है

काजल भाभी का नाम सुन कर मेरे दिल मे शहनाई बजने लगी , कि काजल भाभी हेयर रेमोवर का यूज़ करेंगी

मै हस कर - और कुछ चाची

काजल की सास थोडा हिचक कर - वो बेटा एक 34 नं की ब्रा और 34नं की पैंटी देदे बढिया वाली

मै समझ गया कि ये भी काजल के लिए ही है

तो मैने बडे चाव से बेस्ट क्वालीटी की स्ट्रॉबेरी कपड़े ब्रा दिखाये और उसमे से काजल की सास ने दो ब्रा ले लिये

फिर मैने - चाची वो पैंटी फुल वाली दी की कट वाली

काजल की सास मेरी बातो को शायद समझ नही पाई - मतलब बिट्वा

तो मै ह्स कर एक सेक्सी मॉडल वी शेप पैटी पहने हुए थी उसकी बॉक्स पर छ्पी तस्वीर उनको दिखाते हुए - देखो चाची इसमे का देदू या इससे जो ब्ड़ी वाली आती है ,, हा ये वाली

फिर मैने उसे ब्लूमर के बॉक्स की तस्वीर दिखाई

काजल की सास बॉक्स पे छ्पी त्सवीर को देख कर हसने लगी - अरे बिटवा तुझे जो सही लगे देदे , मै क्या बताऊ हिहिही

मै थोडा विचार किया और

फिर मैने वीशेप वाली पैंटी दिखायी और उसमे से दो रंग निकाल दिया

मै हस कर - और कुछ दू चाची

काजल की सास हिचक कर बार बार उस प्रिंटेड ब्रा के बॉक्स पर जा रही थी - अच्छा बिट्वा इसमे की कोई मेरे साइज़ की होगी क्या

मै मुस्करा कर - हा हा क्यो नही ,, अपना साइज़ बताओ मै दे देता हू

काजल की सास मेरे साइज़ पुछने पे झेप गयी और शर्म से मुस्कुरा कर - अरे बिटवा बात ये है कि मैने पहले कभी पहना नही है वो तो बहू कह रही थी तो

मै हस कर - लेकिन चाची बिना साइज़ के कैसे देदू

काजल की सास - अरे तू तो दुकान वाला है ना देख के पता नही कर सकता

मै उसकी बात पर हस कर - ठीक है आप अन्दर चलिये मै देख लेता हू

फिर वो उठ कर अन्दर गयी और मै भी उसके पीछे एक इंचीटेप लेके गया क्या मतकती गाड थी सालि की

अन्दर जाकर उसने अपना पल्लू हटा कर सीधा खड़ी हुई मानो किसी भर्ती मे सीना नपवाने गयी हो । उसकी ब्लाउज मे लटकी चूचिया देखकर लग रहा था कि काफी ज्यादा मिजी गयी है तभी इतनी ढीली हो गयी है लेकिन ब्लाउज मे पूरी फैली हुई

फिर मैने फीता लिया और उसकी लटकी चूचियो के नीचे से उसके सीने का माप लिया और उसे 36C की ब्रा दी

काजल की सास - ब्स बेटा पैक कर दे सब और हिसाब बना दे

मै अंदाजे मे - और चाची आपको नही चाहिये पैंटी

काजल की सास शर्मा कर ह्स्ते हुए - धत्त बदमाश अब क्या मेरे कुल्हे मापेगा ,,

मै अचरज से - क्यू ऐसा

काजल की सास - वो मै नीचे नही पहनती कुछ

उसकी बात सुन कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया

और एक नजर मैने उसके सामने से उसकी चुत वाली जगह पर देख कर थूक गटका

मुझे ऐसा करते देख वो मुस्कुराने लगी

फिर मैने बिल बना दिया और उसने पैसे दिये और वो चली गई लेकिन जाने से पहले सालि लण्ड को खड़ा कर गई ।

थोडी देर तक उसका असर रहा और फिर मै बाकी के ग्राहको मे व्यस्त हो गया ।

फिर शाम को 6 बजे तक पापा दुकान पर आये और उनके हाथ मे एक झोला था ।

मै पापा को देख कर खुश हो गया ।

मै पापा से - अरे पापा आप आईये बैठीये

पापा हस कर - और बेटा क्या हो रहा है

मै ह्स कर - ब्स पापा यही दुकान पर हू , आज दोपहर को ही अनुज चला गया बडे शहर

पापा - हा वो सोनल ने फोन करके बताया मुझे,,,

मै - ओह्ह फिर ये झोले मे क्या है पापा

पापा हस कर मेरे पास होकर - ये तो हम दोंनो की जान के लिए सरप्राइज गिफ्ट है ,,आज रात मस्त मस्ती होने वाली है बेटा

मै भी खुश होते हुए - लेकिन क्या है मुझे तो बताओ

पापा हस कर - वो तो तेरे लिए भी सरप्राइज है , आज रात के लिए मैने बहुत तगडा इन्तेजाम करवा दिया है बेटा

मै ह्स कर - अरे पापा लेकिन सोनल दीदी रहेगी ना उपर

पापा ठहाका लगाते हुए - अरे बेटा वो नही रहेगी इसिलिए तो आज का प्लान बनाया है

मै अचरज से - मतलब

पापा - दरअसल बेटा आज राहुल और अनुज के साथ तेरी चाची भी चली गयी है बडे शहर और अकेले रहना की वजह से निशा ने सोनल को रोक लिया है

मै - लेकिन चाचा तो थे ना वहा फिर अकेली कैसी

पापा ह्स कर - अरे जो भी हो बेटा हमको क्या ,,हम तो आज रात खुलकर मजे करने वाले है ना हाहहहहा

पापा की बात सुन कर मै भी काफी एक्साईटेड हो गया

पापा - चल मै घर जा रहा हू मुझे बाकी की तैयारिया भी करनी है और तू भी 7 बजे तक दुकान ब्न्द करके आजाना

फिर पापा चले गये घर और मै

यहा काफी रोमांचित होकर जल्दी से जल्दी घर जाने की तैयारी मे लग गया ।

और 7 बजे के पहले ही दुकान बंद कर निकल गया नये घर की तरफ और रास्ते भर सोचता रहा आखिर पापा ऐसा क्या इन्तेजाम कर रहे होगे

खैर मै घर पहुचा तो सब नोर्मल दिखा मा किचन मे मैकसी पहने खाना बना रही थी और पापा कही नजर नही आ रहे थे तो मै किचन मे जाकर मा को चिपक कर बोला - मा पापा कहा गये

मा - बेटा वो पता नही बेडरूम मे क्या उल्टा सीधा कर रहे है और कमरा अन्दर से बंद किया हुआ है

मै हस के - मतलब पापा ने अभी तक आपको सरप्राइज़ के बारे मे ब्ताया नही

मा चौक कर ह्स्ते हुए - कैसा सरप्राइज़ , मुझे तो वो कुछ नही बताया ,,,वो तो बोले की तेरे कमरे का पंखा ठीक किया है और हमारे कमरे की लाईट सही करनी थी वही कर रहे होगे

मै ह्स कर मा को हग करते हुए - कोई नही मा, पापा ने कुछ तो धमाके दार प्लान किया है हिहिही

मा - ठीक है तब का तब देखेंगे अभी हट गर्मी लग रही है

मै हस कर - तो निकाल दो ना ये कपडे

मा मुझे धकेलते हुए - हट बदमाश कही का

फिर पापा थोडी देर मे बाहर आये

पापा - और बेटा आ गया तू आ बैठ

फिर हम दोनो वही सोफे पर बैठ गये

मै - पापा अब तो बताओ क्या सरप्राइज़ है

पापा हस कर - बेटा सबर रख सब पता चलेगा

इधर हम दोनो बाते कर रहे थे कि तभी मेन गेट पर खटखट हुई

और मै उठ कर दरवाजा खोलने गया तो देखा कि ये तो काजल की सास है

फिर मै उनको अंदर लिवा के आया और उन्हे हाल मे बिथाया

फिर मा भी किचन से आई

मा हस के - शकुन्तला दीदी आप , इत्नी रात मे यहा कैसे

मै काजल की सास का नाम सुन कर मन मे - ओ ये नाम है फिर

शकुन्तला- हा वो आज दुकान पर गयी थी तुम्हारे , ये बिट्वा था तो उसने मेरे साइज़ का ब्रा है वो छोटा दे दिया है

मा हस के - अरे तो आपको अपने नाप का ही लेना चाहिए था ना

शकुन्तला- धत्त इसने तो खुद मेरा नाप लिया था फिर भी

शकुन्तला की बात सुन कर पापा और मा दोनो मेरे तरफ ऐसे देख रहे थे कि मानो मैने क्या उखाड़ लिया हो ।

शकुन्तला- वो मै ये कहने आई थी कि ये ब्रा लेते जाना और कल इससे एक नं ब्ड़ी साइज़ लेते आना और

फिर वो एक नजर पापा को देखते हुए

मा ह्स कर - और क्या दीदी

शकुन्तला- वो एक कच्छी भी मेरे नाप की लेते आना

मा मुस्कुरा कर - वो अपना साइज़ बता देती तो थिक होता

तभी मै तपाक से बोल दिया - अरे नही मा वो चाची बोली थी कि वो नीचे कूछ नही पहनती

मेरे बोलते ही इस बार तीनो की निगाहे वापस से मेरे उपर थी और मुझे अभास हो गया था कि मुझे नही बोलना चाहिए था

मै अपनी जीभ को दाँत मे दबाते हुए - सॉरी

शकुन्तला हस कर - बड़ा नटखट है तुम्हारा लड़का ,, वैसे ये सही कह रहा है मै कभी पहनती नही हू नीचे ,, लेकिन

मा बात को आगे ना बढ़ा कर - जी ठीक है दीदी मै कल ही आपके लिए लेते आउन्गी

फिर वो निकल गयी अपने घर

पापा उन्के जाने के बाद - देख रही हो जान अपना बेटा अब बड़ा हो रहा है, मतलब इतनी गदराई माल के चुचो का माप ले लिया इसने हम्म्म

मै पापा की बात सुन कर शर्माने लगा

मा - अब बस भी करिये कितना भी है लेकिन आपके जितना शरारती है ,,उसने तो बस नाप लिया । आप होते तो चुस भी लेते हीहिही

फिर ऐसे हो थोडी मस्ती हुई और हम सब ने खाना खाया ।

खाने के बाद मा ने बर्तन धुलने लगी और मै पापा के साथ हाल मे बैठ गया

मै हस कर - पापा अब तो बोलो क्या है सरप्राइज

पापा हस कर - अरे रुक जा भाई ब्स अपनी मा को आने दे ,,बड़ा बेसबरा है तू तो हाहाहा

फिर थोडी देर मे मा आई और पापा बेडरूम से दो गिफ्ट पैकेट लेके आये

मा खुशी - ओह्जो तो ये है वो सरप्राइज़ हिहिही लाईये देखू तो

फिर पापा ने एक ब्लू रैपर वाली गिफ्ट मुझे दी और रेड रैपर वाली मा को

मा पापा के हाथ से गिफ्ट लेके खोलने बैठ जाती है

पापा उनको रोकते हुए - आं आं यहा नही जानू

मा और मै रुक गये

मा हैरत से - फिर

पापा मुस्कुरा कर - राज बेटा तूम इसे अपने कमरे मे लेके जाओ वही खोलो और जानू तुम गेस्ट रूम मे जाकर खोलोगी

मै और मा दोनो हैरान थे की ऐसा क्या है इसमे

मै कूछ बोलता उससे पहले ही पापा बोले - और कोई सवाल जवाब नही ,,तूम्हारी उलझन इस गिफ्ट को खोलने पे दुर हो जायेगी ,,अब जाओ मै अपने कमरे मे तुम दोनो का वेट कर रहा हू ।

फिर हम सब अपने तय कमरे की ओर निकल गये ।

मै कमरे मे गया और दरवाजा बन्द किया और झट से रैपर खोला तो एक वाइट बॉक्स के साथ एक लिफ़ाफ़ा टेप से चिपकाया हुआ था और उसपे लिखा था । FIRST OPEN ME

मै थोडा ताजुब कर बडे आराम से उस लिफाफे को खोला और उसमे से एक नोटस निकला और उसपे पापा ने कुछ लिखा था

बेटा राज मैने आज रात के लिए एक सरप्राइज़ पार्टी अपने रूम मे रखी है , उम्मीद करता हू उसके लिए तैयार रहोगे । उस पार्टी का महोल तब बनेगा जब मेरी दी हुई गिफ्ट मे तूम नहा के तैयार होकर आओगे । सिर्फ मेरे दिये हुए कपडे ही पहनना और थोडा ट्रिम शेव भी कर लेना जहा जहा जरुरत हो और फिर तैयार होकर सीधे मेरे कमरे मे आजाना

मै खुशी से उत्सुक होकर झट से बॉक्स खोला और देखा की उसमे तो एक मस्त पार्टी लूक चश्मा था जिसका फ्रेम चुचियो के जैसा था और उसका ग्लास रेड और ब्लू मे था मैने झट से उसे पहना तो कमरे का माहौल ही अलग दिखने लगा ।

फिर एक ब्लैक कलर मे नियोन प्रिन्टस मे बॉक्सर था जिसपे लण्ड चुचियो और सेक्सी गर्ल्स के प्रिन्ट्स थे ।

फिर एक फिलिप्स का ट्रिमर था और साथ मे एक लूब्रिकेंट भी । एक मेल परफ्युम की छोटी कैन भी थी जिसको खोलते ही मादक सी खुस्बु मेरे नाको को छु गई ।

मै एक जोर की अन्गडाई लेते हुए झट से उठा और ट्रिमर लेके बाथरूम मे गया और अपनी कांख , जांघ , चेहरे और हल्के फुल्के नाभि के पास आये रोवो को ट्रिम किया और फिर अच्छे से साबुन शैम्पू से नहाया और फिर खुद को साफ कर कमरे मे आया और पापा का दिया वो लूब्रिकेंट अपने लण्ड और झान्ट के हिस्से और कांख के पास लगाया , फिर वो परफ्युम स्प्रे किया और बॉक्सर पहन कर चश्मा लगा कर रेडी हो गया ।

सारी फीलिंग ऐसी थी मानो कोई ग्रैंड पोर्न पार्टी का इनविटेशन मिला हो मुझे

मै झट से इसी सेक्सी पोज मे दो चार सेल्फी ली और मोबाईल वही रख कर कमरे से बाहर निकल आया और पापा के कमरे का दरवाजा खटखटाया

जारी रहेगी

.........................
 
मै तैयार होकर सीधा कमरे से बाहर आकर पापा का कमरे मे ठक-ठक किया

जब तक पापा दरवाजा खोलते तब तक एक नजर गेस्टरूम पर मारा जो अभी अंदर से बंद था ,जिसका मतलब था मा अभी तैयार नही हुई थी औए मुझे मा के ड्रेस को लेके बहुत एक्साईटमेन्ट हो रही थी ।

तभी दरवाजा खुला और कमरे मे गजब का महोल था ।

पापा ने कमरे की सारी वाइट बलब निकाल कर उनकी जगह पिक्सल वाली घूमने वाली लाईटस लगा दी और दो रेड नाइट बलब जल रहे थे ।

कमरे मे वाइट बेडशिट पर तीन बडे रेड कवर वाले तकिये सेट थे । कमरे के एक किनारे पापा ने खुद पर्सनल टेबल को बार टेबल बना रखा था और वहा बियर की दो बोतल थी । कुछ स्नैक्स भी थे । उसी टेबल के नीचे पापा ने एक म्यूज़िक सिस्टम सेट कर रखा था जिस्पे DDLJ फिल्म का उदित नारायण का सुपरहिट गाना "रुक जा ओ दिल दिवानी " बज रहा था ।

मै तो कमरे के decoration मे खोया हुआ था कि पापा ने मुझे कन्धे से पकड़ा और उनका खुला सीना मेरे कन्धे से टच हुआ और मै होश मे आया तो देखा पापा ने सेम मेरे जैसा ही गेटअप ले रखा है ।

पापा - क्यू बेटा पसंद आया ना , सरप्राइज़

मै हस कर - वॉव पापा , बहुत मस्त है और ये सब आप कैसे किये

पापा - तू मजे कर देख क्या क्या होता है आगे हिहिही , अभी अपनी मा को आने दे ,, आ बैठ यहा

फिर हम दोनो कमरे की सोफे पर बैठ गये और मेरा सोच सोच कर ही लण्ड झटके खा रहा था कि आखिर मा क्या पहन के आने वाली है और क्या मजे होने वाले है ।

इधर मै बैठा सोच रहा था कि कमरे का दरवाजा खुला और

ओह्ह्ह माय गॉड

मेरी आंखे बड़ी हो गयी और मुह खुला रहा गया , कोसिस करके एक बार मैने थूक गटक कर एक नजर मा को देखा उफ्फ्फ क्या सेक्सी अदा से वो खड़ी थी उस शाइनि रेड सेक्सी ड्रेस मे

20211016-195045

मा इस वक्त एक प्योर रेड ट्रांसपैरंट नाईटी मे खड़ी थी ।

उसने अंदर कोई ब्रा भी नही पहनी थी और नीचे एक पतली सी धागे वाली पैंटी जो मुस्किल से चुत के हिस्से को ढक पा रही थी

उस शार्ट पारदर्शि नाईटी मे मा की चिकनी वैक्स की हुई जान्घे चमक रही थी और हाथ पैर मे रेड कलर की मैचींग नेल पालिश , होठो पर डार्क मैट रेड लिपस्टिक और हल्का सा मेकअप ।

उफ्फ्फ उन्के कमरे मे आते ही एक ताजगी का अह्सास हुआ और एक अलग ही खुस्बु फैल गयी । जिसकी महक पाते ही मेरा लण्ड झटके लेने लगा और एक बार मैने बॉक्सर के उपर से खडे लण्ड को दबाते हुए पापा को देखा तो वो भी मा को देखते हुए थूक गटक रहे थे और उनका हाथ भी उनके फन्फनाते लण्ड पर था ।

फिर मा एक अपने खुले वालो को ब्ड़ी ही सेक्सी अदा से झटक कर एक तरफ से दुसरे तरफ लाई इस दौरान हम दोनो की नजर मा की हिल्ती चुचियो पर गयी जो उस पारदर्शी नाईटी से झाक रहे थे और उन्के निप्प्ल तो फाड कर बाहर आना चाह रहे थे ।

फिर मा एक हिल वाली रेड सैन्ड्ल पहने कमरे मे हमारे तरफ आती है तो मै और पापा सोफे पर बैठने के थोडी जगह खाली करते है और मा ब्ड़ी कामुक अदा से मुस्कुरा कर घूम जाती है और जान बुझ कर अपनी मोटी फैली हुई गाड़ को और बाहर की तरफ कर बिच मे बैठती है। इस दौरान मै और पापा दोनो मा के गाड के दरारो मे गायब उस पैंटी की डोरी को देख रहे थे की कहा फसी होगी वो और कितनी गहराई मे गयी होगी ।

खैर मा बैठी और बारी बारी मेरे और पापा की ओर एक मुस्कान से देख कर थोडा रिलैक्स हुई और बोली - लो जी मै तो आ गयी अब बोलिए सरप्राइज़

पापा मा की तरफ मुह करते हुए एक हाथ से मा की सेक्सी चिकनी जांघ पर हाथ फेर कर बोले - जानू यही तो है सरप्राइज़ ,, आज हम लोग खुल के मजे करेंगे जैसे किसी कलब पार्टी मे लोग करते है

मा - हमम वैसे कमरा अच्छा सजाया है पूरा पार्टी वाला फील है हम्म्म

मै खुशी से- तो पापा शुरु करे पार्टी

पापा हस कर - हा बेटा क्यू नही

और फिर मा को इशारे से सामने के टेबल पर रखे बियर और स्नैकस के लिये इशारा करते है ।

तो मा भी मुस्कुरा कर हम दोनो के जांघो को सहलाते हुए उठती जिससे हम दोनो हिल जाते है और मा अपनी भारी चुतडो को मटका कर आगे जाती है और 3 ग्लास मे वियर और स्नैक्स एक ट्रे मे लेके आती है और फिर वापस बैठ जाती है ।

फिर मा ही हमे एक एक ग्लास बियर की देती है और खुद एक ग्लास लेके हम लोग चीयर्स करते है

पापा - बेटा तुझे कोई दिक्कत तो नही है वैसे ये लो पावर वाली ही है मान के चल सोडा जितना

मै हस कर - जी पापा कोई दिक्कत नही होगी

फिर हम सब ने एक एक घुट लेने के बाद वापस ग्लास ट्रे मे रखा लेकिन वही मा अपना ग्लास लेके पापा की ओर घूमी और अपनी हाथो से उन्हे बियर पिला कर उन्के होठो को जकड़ लिया और शुरु ही गयी उन लोगो की किसिंग ।

मा ने पापा के होठो को चुस्ते हुए ही अंदाजा लगाकर ग्लास टेबल पर रखा और वापस पापा पर टुट गयी और वही पापा ने भी मा को खिच कर अपने उपर कर लिया और मा की गाड पर हाथ फेरते हुए मा के होठ चूसे जा रहे थे ।

इधर इन लोगो का सीन देख कर मै वापस से बियर का ग्लास लेके एक हाथ से लण्ड सह्लाते हुए बियर की सिप लेने लगा ।

इधर मा पापा को किस्स करते हुए अपनी चुत को पापा के बॉक्सर पर रगड़ रही थी और पापा के हाथ मा की गाड को फैलाने मे लगे थे ।

थोडी देर मे वो अलग हूए और पापा ने मेरे तरफ इशारा किया और मै मा को लेके खड़ा होकर कमरे मे बिस्तर के बगल मे खाली जगह पर लेके मा को डान्स करते हुए उन्के होठो को अपने मुह मे भर लिया और उन्के चुचे मेरे सीने पर छूने लगे वही मा भी ब्ड़ी जोर से मुझे अपने तरफ खिच ली और मेरे भी हाथ मा की कमर और गाड पर रेंगने लगे ।

मै थोडा झुक कर बॉक्सर के उपर से ही मा के चुत वाले हिस्से पर अपना खड़ा लण्ड रगड़ने लगा ।

इधर पापा भी बेसबर होकर मा के पीछे चिपक गये और हमने शरारत मे बारी बारी से झुले की पेंग मारने के स्टाइल मे धक्का देने लगे ।

एक बार मै मा को सामने उन्के चुत पर धक्का देता तो वही पापा मा को पीछे से उनकी मोटी मोटी गाद के दरारो मे ध्क्का देते ।

जल्द ही मा सीधी हुई तो पापा ने मा का चेहरा पकड कर उन्के होठो को चुसने लगे वही मा ने अपने हाथ ह्मारे बॉक्सर के उपर रख कर सहलाने शुरु कर दिये । वही मै मौका देख कर एक हाथ को साम्ने से मा की बाई चुची पर रख दिया और सह्लाते हुए मसलने लगा और मुझे ऐसा करता देख का पापा ने भी मा की दाई चुची को पकड लिया और उधर मा मदहोश होने लगी तो हम दोनो मा को क्मर के पास से पकड कर अच्छे से उनकी चुची को नाईटी के उपर से सहला रहे थे वही मा ने उत्तेजित होकर हमारे बॉक्सर मे हाथ डाल दिया और अंदर ही लण्ड को पकड कर मुठियाने लगी ।

इधर मुझसे रहा नही गया तो मा के नाइटी का फीता खोल दिया और झुक कर बाई चुची को मुह मे भर लिया और दुसरा हाथ अभी भी मा की गाड के दरारो का जायजा ले रहा था ।

वही पापा भी दुसरी चुची को खुला पाकर झपट पडे और झुक कर मा की चुची को चुसने लगी

यहा मा की हालत दोहरी चुसाई से खराब होने लगी और उनसे हाथ ह्मारे बॉक्सर से निकाल कर हमारे सर को अपनी चुचीयो पर दबाने लगी

थोडे देर तक अपनी चुचियॉ मिज्वा चुस्वा कर मा ने एक एक बार हम दोनो की किस किया और बॉक्सर के उपर से ही हमारे लण्ड को सहलाते हुए एक कातिल मुस्कान के साथ हमारी आन्खो मे देखते हुए घुटनो के बल बैठ गयी और वापस पापा के जांघो को सहलाते हुए बॉक्सर के उपर से ही पापा के लण्ड को मुह मे भरने लगी ।

मा के हवस से भरे इस रूप से मै अलग ही दुनिया मे उड़ रहा था वही पापा भी आहे भरने लगे । फिर मा मेरे तरफ घूमी और मेरी आन्खो मे देख्ते हुए लण्ड को बॉक्सर के उपर से ही मेरे आड़ो के पास से उपर तक सहलाया और एक झटके मे बॉक्सर नीचे खीच दिया जिससे मेरा खड़ा मोटा लण्ड फंनफना कर मा के मुह के ठीक सामने झुलने लगा और मा एक शरारत भरी हसी के साथ गप्प से मुह मे भर मेरी आंखो मे देख्ते हुए बहुत ज्यादा होर्नी साउंड करते हुए मेरे लण्ड को चूसना शुरु कर दी

मा के मुह मे लण्ड जाते ही मेरा लण्ड और मोटा होने लगा और फिर मा ने मुह से मेरा लण्ड निकाल कर एक हाथ से मुथियाते हुए दुसरे हाथ से पापा के बॉक्सर मे हाथ डाल कर उनका लण्ड बाहर निकाला और ग्प्प्प से मुह मे भर और चुस्ना शुरु कर दी ,,,इस दौरान वो मेरा लण्ड मुठ्ठि मे कस कर सहला रही थी ।

फिर वापस से उसने मेरे लण्ड को मुह मे भर लिया और पापा का लण्ड मुथियाने लगी ।

ऐसे ही बारी बारी से उसने हमारे लण्ड को काफी समय तक चूसा और इस दौरान मा किसी पोर्न स्टार से कम नही थी ।

फिर मा उठी और एक एक बार हमे किस्स किया और मा ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और अपना नाइटी निकाल दिया और मै भी अपना बॉक्सर निकाल दिया

वही मा बिस्तर पर चढ़ कर मेरे मुह पर बैठ गयी और अप्नी चुत को पैन्ती के अन्दर से ही मेरे मुह और नथुने पर तेजी से रगड़ने लगी ।

फिर थोडी देर मे अपनी पैंटी को थोडा साइड कर अपना खुला गिला चुत मेरे मुह पर लगा कर दबाने लगी ।

वही पापा भी बिस्तर पर चढ़ कर मा के सामने खडे हो गये और अपना लण्ड मा के मुह मे घुसा दिया

इधर मा काफी कामुकता से पापा के लण्ड को मुह मे उतारने लगी और यहा मैने अपनी जीभ को मा की चिकनी चुत पर फेरते हुए जीभ को अंदर घुसेड़ कर घुमाने लगा

जिससे मा पापा का लंड मुह मे भरे भरे ही अपनी गाड को और जोर से मेरे मुह पर दरने लगी मानो झडने के करीब हो गयी थी ।

वही पापा भी मा के चेहरे को थाम कर तेजी से मुहपेलाई चालू किये थे और यहा मैने मा की गाड को फैलाते हुए जीभ को चुत मे नचा रहा था।

तभी पापा की अह्हे तेजी से आने लगी

शायद वो मा गले मे लण्ड उतारे झड़ते हुए उन्हे गाली दे रहे थे और सिस्क रहे थे

पापा - अह्ह्ह्ह मेरी जान मेरी रन्डी और ले अह्ह्ह आह्ह मै झड़ रहा हू उह्ह्ह अह्ह्ह ले सालि बहनचोद चुस ले पूरा हा ऐसे ही

वही मा बड़ी ही मादकता से अपनी गाड को मेरे नाथनो पर घिसते हुए पापा की आंखो मे देखते हुए लण्ड को निचोड रही थी ।

वही पापा को झडता देख मै वापस और तेजी से अपनी जीभ को मा के चुत पर च्लाने लगा ,,नतिजन थोडी ही देर मे मा मेरे मुह मे झडने लगी और

वही पापा बिस्तर पर टेक लगा कर थोदा आराम फरमा रहे थे लेकिन यहा मा का जोश झडने के बाद भी कम नही हुआ और वो झट से उलट कर नीचे लेट गयी और उनका इशारा मै समझ गया और बिना किसी देरी के उन्के उपर आकर जांघो को फैलाते हुए घ्प्प्प से लण्ड को पनियायि चुत मे एक साथ उतार दिया

मा - अह्ह्ह्ह बेटा उह्ह्ह्ह आह्ह मा ऐसे ही आह्ह बहुत गरम है तेरा लण्ड रे अहहह और चोद आह्ह

मै जोर शोर से मा की जांघो को थामे गचागच पेले जा रहा था लेकिन अभी भी मा की पैंटी वही थी जिससे मुझे दिक्कत हो रही थी चोदने मे

तो मै थोदा रुक गया और मा मुझे सवालिया नजरो से देखने लगी तो मैने झट से उनकी पैंटी को पकड़ा तो वो मुस्कुरा कर अपनी गाड को उठा दि और मैने झट से वो छिनी सी पैंटी निकाल के पापा की ओर फेक दी जिसे पापा ने अपने नाक पर लगा कर सुन्घ्ते हुए अपना लण्ड सहलाने लगे और य्हा मै वापस मा की चुत की गहराई मे उतर गया और जोर दार धक्को से पच पच्च्चच पच्च्च की आवाजे आ रही थी

वही पापा मुझे मा को चोद्ता देख वापस अपना लण्ड खड़ा कर चुके थे ।

मै - आह्ह पापा आप भी आओ ना

मा - हा जी आप भी आओ ना मुझे कल की तरह दोनो मे लेना है अह्ह्ह बेटा और तेज्ज्ज आह्ह

पापा हसते हुए उठे और एक सोफे के पास रखी हुई बियर की ग्लास को उठा कर वापस मा के सर के पास बैठते हुए बोले - अभी मुझे मेरे सपने को हकीकत बनते देखने दो मेरी रानी ,,,बरसो बाद मेरा सपना आज हकीकत बन रहा है ,,,आज तुझे कोई मेरे सामने बेरहमी से चोद रहा है । यही तो मै चाहता था ,,और तेज फाड बेटा अपनी मा के भोस्दे को , मै भी ये ड्रिंक खतम कर तुझे जॉइन करता हू ।

इधर मैने थोडी देर बाद मा को डॉगी पोज मे किया और तेज धक्के मा की चुत मे लगाने लगा और वही मा सामने बैठे पापा के लण्ड को वापस चुस कर अपनी गाड़ के लिये खड़ा करने लगी ।

जल्द ही पापा और मै एक साथ मा की सेवा शुरु कर दी और मै वापस से नीचे गया और पापा ने पीछे खडे होकर गाड मे पेल दिये मा के

और वही कल के अंदाज मे झूले के पेंग जैसे एक एक जोर जोर एक झटके हम दोनो ने बारी बारी से देने लगे और आज बियर का असर था की स्पीड भी बढ़ गयी

जल्द ही मा झड़ने लगी और कल के जैसे आज हम काफी ज्यादा खुल के बाते कर रहे थे और शोर मचा कर जोरदार चुदाई चल रही थी

फिर मैने और पापा थोडी देर मे पोजीशन की अदला बदली की और मैने भी मा की गाड के छेद को मोटा करना शुरु कर दिया ।

और जल्द ही हम दोनो वापस झडने के करीब आये और इस बार मा थक गयी थी तो वो बिस्तर पर सीधे लेट गयी और हम दोनो अपना लण्ड की पिचकारी मा के चुचो और मुह के पास छोडी और मा के मुह मे डाल कर साफ करवाया ।

वही मा ने अपनी चुचियॉ और चेहरे पर लगे माल को चाट कर साफ किया ।

थोडी देर तक हम तीनो वाप्स बिस्तर पर लेते रहे और शान्ति छाई रही , म्यूज़िक सिस्टम ना जाने कबका खुद ही बंद हो गया था और उसकी परवाह भी किसे थी ना किसी लाईटस या ड्रेस कोड की ,, एक राउंड चुदाई के बाद तो सारी तैयारीया बोरियत थी ,,बस चाह थी तो बस सेक्स की और ब्स सेक्स की

फिर मैने पहल की

मै - आज सच मे मजा आ गया पापा ,

पापा - अरे बेटा मजा तो मुझे आया देख कर जब मेरी जान मेरे सामने ही मेरे बेटे का लण्ड ले रही थी । मेरा बरसो का सपना आज हकीकत बन गया ।

मै अचरज भाव से - मतलब

पापा हस कर - रुक बताता हू , बात ये थी कि सुहागरात से ही मुझे पता चल गया था कि तेरी मा बिल्कुल मेरे टक्कर की माल है और बहुत ही ज्यादा प्यासी है । वही मै शादी के पहले से ही आवारा था और शादी के बाद धीरे धीरे जब हम दोनो आपस मे खुलने लगे तो तेरी मा को मेरे मन की भावनाये समझ आने लगी कि मुझे गदराई और मोटी गाड वाली औरतो की चाह है और वो भी इसका फाय्दा उठा कर मुझे उत्तेजित कर भरपुर सेक्स का मजा लेती थी । फिर उसने मुझे छूट भी दे दी कि मै बाहर मस्तिया कर सकता हू अगर मेरी इच्छा है तो उसे कोई ऐतराज नही है ब्स उसे उसके हिस्से के प्यार मे कोई कमी नही मिलनी चाहिए थी,,,क्यू जान सही कह रहा हू ना

मा शर्मा कर - धत्त आप भी ना क्या क्या बाते लेके बैठ गये

मै ह्स कर - नही पापा आप बताओ फिर

पापा हस कर - फिर मैने थोडे बहुत बाहरी औरतो से सम्बंध बनाये , इससे मेरे दिल मे एक इच्छा होने लगी की तेरी मा को भी एक बार गैर लण्ड से चुद्ते देखू कि कैसे वो चुदेगी , लेकिन ये मेरी जानू ने तो जिद कर ली कि वो कभी किसी गैर का लण्ड नही लेगी लेकिन समय के साथ मैने इसके मानसिक रूप से बहकाया और फिर तुझे अपने प्लान मे शामिल किया और फिर ये तैयार हो गयी ।

मै पापा की बाते सुन कर हसने लगा वही मा मुझे देख कर हसने लगी ।

क्योकि मा और मै दोनो जानते थे कि पापा खुद मे कितने भी डीन्गे हाक ले लेकिन ये प्लान हम दोनो का ही था जो आज हकीकत हुआ है ।

खैर ऐसे ही चटपति बाते चलती रही और पापा ने अपने शादीशुदा जीवन के बाद से जितने के साथ सेक्स किया था उनके बारे मे कबूला यहा तक की विमला को भी और रज्जो मौसी के बारे मे अपना दिवानापन भी बताया ।

जितने लोगो के बारे मे पापा ने बताया उनसब के बारे मे मै जानता ही था ।

इनसब वार्ता के दौरान ना मैने ना ही मा ने अपने राज खोले बस मस्ती और मजे किये और उस रात 3 बजे तक 4 राउंड मा की चुदाई और सुबह 9 बजे तक सोये हम लोग ।

देखते है दोस्तो आगे क्या होता है

जारी रहेगी

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सुबह 9 बजे के करीब मेरी निद मा के जगाने पर खुली तो पता चला की पापा नहा कर दुकान पर निकल गये और मा खाना बनाने की तैयारी कर रही थी ।

मै भी उठा और अपने कमरे मे गया तो देखा मेरा मोबाईल मे कुल 17 मिस्काल और 12 मैसेज है और डाटा ओपेन करते ही भर भर के notification की बिप कुछ सेकेण्ड तक आती रही ।

फिर थोडा देर मे जब मोबाईल थामा तो देखा की सरोजा के अकेले 12 मिस्काल और 4 sms थे । बाकी के सोनल और कोमल के थे ।वही whatsaap पर एक दो मैसेज सरोजा के थे लेकिन सोनल ने तो अपनी और निशा के साथ रात मे की गयी मस्तीयो की तस्वीरे भेजी थी और एक वीडियो भी जिसमे निशा रिकॉर्ड कर थी सामने से सोनल उसकी चुत चुस रही थी ।

देख कर ही सुबह सुबह मूड बन गया । समझ ही नही आया कि क्या करु किसको रिप्लाई करू ।

फिर थोडा विचार कर सोनल से बाद मे बात करने का बोल कर एक दो तस्वीरो पर हार्ट रिएक्शन की एमोजी भेज दी और गुड मॉर्निंग लिख दिया ।

वही सरोजा जी को गुड मॉर्निंग का sms किया और रात मे कोई रेपोंस ना देने के सॉरी भी लिख दिया ।

फिर कोमल को भी गुड मॉर्निंग विश कर दिया ।

फिर मै फ्रेश होने चला गया और जब नहा कर वापस आया तबतक सरोजा जी का मैसेज आ चूका था और वो फुल गुस्से मे रिप्लाई की थी कि,,,मै समझ गया कि ये काफी समय से भुखी है और कल रात बात ना करके मैने कुछ ज्यादा ही इसे नाराज कर दिया । जल्द ही इसको चोदने का प्लान करना पडेगा नही तो इस गर्म तवे पर कोई और ना अपनी रोटी सेक ले ।

खैर इस बार मैने सीधा काल किया और थोडा बहुत बहाना बना कर कि अनुज बडे सहर गया और दीदी चचा के यहा है तो काम का दबाव ज्यादा है और थोडी बहुत सफाई देने के बाद वो मान गयी तो मैने जल्द ही उससे मिलने को मिला और फिर फोन रख दिया ।

फिर मै नहा धोकर तैयार हुआ और मा ने नाश्ता करने को दिया , फिर मै उनको बोल कर दुकान के लिए निकल गया ।

थोड़ा देर काम करने के बाद वापस से मोबाईल चेक किया तो कल रात मे हुए निशा और सोनल के बीच की मस्तीयो की तस्वीरे याद आई और मैने वापस से व्हाटसअप खोल कर एक एक तस्वीर को खोलकर ध्यान से देखा जिससे मेरा लण्ड खड़ा हो गया ।

मन तो करने लगा की अभी जाकर इनदोनो की खुजलाती चुत को बल भर पेलू

लेकिन इस वक़्त दुकान पर कोई था भी नही ।

और अभी सुबह के 10 बज रहे थे इसका मतलब था की वो दोनो सिलाई सेंटर गयी होगी । फिर दुकान भी देखना था

खैर समय बिता और 11 वजे तक मा खाना लेके आई और फिर हमने खाना खाया और मैने जब पापा के बारे मे पुछा तो मा ने बताया कि उनका खाना बबलू काका लेके गये थे ।

फिर मा और मैं दुकान मे आये ग्राहको को डील करने लगे और करिब 12 वजे मै मा को एक काम का बहाना कर निकल गया चाचा के यहा और उनके यहा गया तो शटर आधा गिरा हुआ था ।

मै सोचा कि घर पर चाची और राहुल नही है और निशा दुकान पर बैठती नही है तो शायद खाना खाने गये होगे ।

तो मै भी बिना किसी रोक तोक के झट से झूक कर अन्दर दुकान मे घुस गया और गलियारे से हाल की तरफ गया तो सब खाली था मुझे लगा कि शायद चाचा दुकान बंद कर बाहर तो नही गये कही । और ये निशा - सोनल भी नही नजर आ रही थी ।

क्योकि किचन नीचे ही था और चाचा चाची का कमरा भी भिड्का हुआ था तो मै ज्यादा ताक झाक ना करते हुए वापस दुकान की ओर जाने को हुआ कि, तभी चाचा के कमरे का दरवाजा खुला और चाची बाहर आई , जो इस समय सिर्फ पेटिकोट मे थी उनकी 36 की झुल्ती हुई चुची लटक रही थी और वो हस कर कमरे देख रही थी ।

मै झट से गलियारे की दीवाल से चिपक गया और तभी चाचा बाहर आये ।

चाचा - आजाओ ना जानू प्लीज , कल जबसे गयी हो तब से पूरी रात नींद नही आई

मेरी नजर चाचा पर गयी तो वो इस समय सिर्फ शर्त मे थे और नीचे उनका झूलता करीब 6-6.5" लण्ड था ।

वो लपक कर वापस से चाची को पीछे से पकड कर दीवाल से लगाते है और झट से उनकी पेटिकोट उठा कर अपना लण्ड उन्की चुत मे उतार देते है । ऐसे खडे खडे लण्ड लेने मे चाची को बहुत दिक्कत हो रही थी और चाचा बडे जोश मे पेल रहे थे ।

मै समझ गया कि अब ये लोगो का लम्बा चलेगा लेकिन एक बात नही समझ आई चाची इतनी जल्दी क्यो चली आई ।

खैर मै इस बात को इग्नोर किया और थोडा देर तक उनकी चुदाई देखी और वापस बाहर आ गया क्योकी मै जिस मकसद से आया था वो होने नही वाला था ।

फिर मै वापस अपने दुकान की ओर जाने लगा तभी मेरे जहन मे चंदू के मा की याद आई और मै एक कातिल मुस्कान के साथ उसके घर में घुसा और बिना कोई

आहट किये और एक नजर नीचे के कमरे मे देखा तो सब बंद पडा था तो मै झट से उपर की ओर गया वहा हाल मे भी कोई नही था फिर मै लपक कर बेडरूम की ओर गया जो भिड्का हुआ था और हलका सा गैप से अन्दर देखा जा सकता था ।

मैने धीरे से दरवाजे पर लगा तो कुलर चलाने की आवाज आ रही और थोड़ी बहुत सिस्कियो की भी । एक बार फिर मै अपनी किस्मत को कोसते हुए सोचा कि इस समय चंदू का बाप अपने काम पर जाता है और दोपहर मे लग्भग रोज चंदू अपनी मा को चोदता है ।

रामवीर दरअसल संजीव ठाकुर के अनाज के गोदाम पर मुनिबी करता है । तो रोज दोपहर मे चंदू को मौका मिल ही जाता है ।

खैर मैने थोडा सा अन्दर झाका तो रजनी वही बेड पर घोड़ी बनी थी और चंदू पीछे से तेज गति से अपनी मा को पेल रहा था ।

मै तो सुबह से चुत के लिए तडप रहा था और पहले चाचा के यहा निशा नही मिली और अब यहा इन लोगो को मै छेड़ना नही चाहता था क्योकि चंदू ने बोला था कि इसी हफते उसकी बहन चंपा आयेगी और वो मुझे उसके साथ मौका देगा ।

तो मै फिर उतरे हुए मन से वापस नीचे आया और चंदू के घर के बाहर निकला तो सामने करीम खां की दुकान पर सब्बो दिखी और मै झट से उसकी दुकान पर चला गया ।

करीम खां , इसका परिचय हो चुका है पहले भी । ये काफी मजाकिया मिजाज का आदमी है हालाकि उम्र हो गयी है लेकिन मजे लेता रहता है चाहे किसी भी उम्र के लडके हो ।

मै भी झट से करीम की दुकान मे घुसा और सब्बो मुझे देख कर मुस्कुरा दी ।फिर मैने भी एक मुस्कान दी उसको ।

मै - कैसे हो करीम काका

करीम - अच्छा हू सेठ तुम बताओ

मै ह्स कर - मै भी मस्त हू , ये क्या सिलवाने आई हो सब्बो दीईईइदीईईई

मैने जानबुझ कर सब्बो को दीदी बूलाया जिसका मतलब तो बखूबी समझ रही थी और मुझे झूठ के इशारे मे गुसस भी किया

स्ब्बो इतरा कर - ये ब्लाउज ठीक करवाने लाई थी

मै करीम से - क्या काका , अरे कम से कम साइज़ बराबर नाप लेते दीईइदीईई का

मेरे फिर से दीदी बुलाने पर सब्बो मुह ब्नाने लगी

मै उसके बगल मे काउंटर से लग कर खड़ा था तो थोड़ा आड़ देख कर उसके चुतडो को दबा दिया जिससे वो हिचक गयी । लेकिन खुद को स्म्भाल भी लिया और बडे गुस्से से मुझे देख रही थी ।

ऐसा भी नही था कि करीम खा सब्बो और उसकी मा के हरकतो से अंजान था बल्कि रुबीना के तालाब मे वो भी तैर चुका था ।

करीम खां एक कातिल मुस्कान के साथ- सही कर रहे हो सेठ आज सब्बो बिटिया का नाप ले ही लेता हू ,

फिर करीम खां अपने गले से फीता निकालता है

करीम - थोड़ा सही से खड़ा हो बिटिया ,,,, हा ,,, जरा हाथ खोलो ,,हा अब सीना फुलाओ

सब्बो इस समय एक टीशर्ट और लोवर मे थी लेकिन बिना ब्रा के टीशर्त मे उसके निप्प्ल सख्त थे ही लेकिन सीने मे सास भरने पर मानो गुब्बारे जैसे फुल गये हो ।

करीम खा भी सब्बो की जवानी के गुब्बारो का नजारा आंखो मे भरते हुए इंचीटेप के फिते को एक चुची के निप्प्ल के ठीक उपर ही रख कर फिते को कसता है जिससे सब्बो की सिसकी निकल जाती है और वही करीम नाप लेने के बाद भी सब्बो के निप्प्ल पर से अंगूठा नही हटाता है बल्कि उसे वही दबाते हुए घुमाता भी है ।

जिसे देख कर मुझे वापस से तनाव होने लगता है और एक बार फिर मेरे हाथ सब्बो की गाड़ पर घूमने लगते है ।

इधर सब्बो हमारे दोहरे अटैक से खुद को ढिला करने लगती है कि तभी सड़क पर एक गाड़ी की होर्न से हम तीनो का ध्यान भांग होता है और हम तीनो असहज महसूस करने ल्गते है ।

सब्बो हड़बड़ा कर - हो गया ना काका , शाम को मा आयेगी लेके जायेगी ब्लाउज, मै जाती हू

फिर वो झट से निकल जाती है

मै मस्ती भरे अंदाज मे - ओह्हो काका आज तो मनमानी कर ही ली हा

करीम थोडा खुद पर घमंड दिखाते हुए - अरे सेठ मैने तो ना जाने कितनी मनमानीया की है ये तो सालि एक नं की छिनार है , दोनो मा बेटी ,,,अब देखना शाम को आयेगी इसकी अम्मा रुबीना और पैसे के बदले अपना भोस्डा देके जायेगी

मै ह्स कर - ओहो काका , मतलब इस उम्र मे भी काकी की दबा कर लेते होगे फिर हा

करीम - अब तुमसे क्या छिपाना , मेरी पहली बेगम तो नही रही शादी के 5 बाद ही गुजर गयी । लेकिन दुसरी जो उसी की छोटी बहन थी , अल्लाह कसम बहुत गरम औरत है आज भी बडे जोश से निचोड लेती है अह्ह्ह

मै करीम की बाते सुन कर उत्तेजीत मह्सूस कर रहा था - फिर तो आज दो दो नदी नहाओगे काका मतलब

करीम - हा वो तो है हिहिहिही

फिर मै थोडी मस्ती किया और वापस दुकान पर आया एक दो बार कोसिस की मा ही राजी हो जाये तो वो नही मानी और शाम को घर निकल गयी ।

रात को 8 वजे तक मै भी दुकान बन्द कर घर गया जहा पापा और मम्मी पहले ही हाल मे बैठे बाते कर रहे थे वही दीदी किचन मे खाना बना रही थी ।

मै भी थकान से चुर मा के पास उन्के चुचो पर लदते हूए बैठ गया , मम्मी इस समय ब्लाउज पेटिकोट मे थी ।

मा - ओह्ह मेरा बच्चा कितना थक जाता है , जा जाकर नहा ले फिर खाना बन गया है साथ मे मिल कर खाते है ।

मै थोडा इशारे मे मा से दीदी के बारे मे पुछा की ये आज कैसे आ गयी और हमारी मस्ती का क्या होगा

पापा हलके आवाज मे - वो तेरी चाची बस उनदोनो को शहर छोडने गयी थी और एक दिन रुक कर वाप्स आ गयी तो आज ये

मै समझ गया पापा की बात

इतने मे सोनल किचन से बाहर आई और नहाने का बोल कर उपर चली गयी और मैने झट से मा को दबोच लिया

मा भी मेरे होठ चुसते हुए साथ देने लगी वही मेरे हाथ उनकी एक चुची को मिजने लगे थे कि तभी मेन गेट पर खट खट हुई और पापा जोकि बनियान और जान्घिये मे थे वैसे ही दरवाजे पर देखने चले गये , वही उनका भी लण्ड मेरे और मा के मस्ती से जांघिये मे खड़ा हो गया था ।

तभी थोडी देर मे शकुन्तला काकी की आवाज आई जो मा को आवाज देते हुए अन्दर आई ,,,और आज तो वो अस्मानी रंग की नायलान की मैकसी पहन के आई थी जिसमे उनकी ब्ड़ी चुचिया और गाड की गोलाई का पूरा शेप दिख रहा था ।

वही पापा उन्के पीछे खडे थे और उनकी उभरी हुई गाड को खा जाने वाले नजर से देख रहे थे , जिसे मै और मा बखुबी समझ रहे थे ।

शकुन्तला काकी मा के बगल ने बैठी जबकि पापा वही उसके बगल मे दीवाल से लग कर खडे होकर उसको अपने लण्ड का उभार दिखाने लगे जिसे शकुन्तला भी देख समझ कर मुस्कुरा रही थी

मा - अरे दीदी आप ,,,आओ आओ बैठो

शकुन्तला- अरे मुझे बिठा मत ,

फिर एक नजर पापा की ओर देखते हुए बोली - अरे वो मै कल बोली थी ना लाने के लिये

मा कुछ सोच कर ह्स्ते हुए - अरे हा ,,

मा - राज के पापा , वो जरा जो झोला टंगा है उसमे दीदी के कपडे होगे देना

फीर शकुन्तला एक नजर पापा की ओर देख्ती है तब उनदोनो की नजारे मिलती है और फिर उसकी नजर उस्के चेहरे के बराबर मे जांघिये मे खडे लण्ड के उभार पर जाती है । तब तक पापा बगल मे टंगी हुई खूटि से झोला खोलते है और नीचे फर्श पर रख कर देखते हुए

पापा जो की बखूबी जान रहे थे कि कल शकुन्तला ने अप्नी ब्रा और पैंटी लाने के लिए मा को बोला था फिर भी वो नाटक करते हुए - अरे रागिनी इसमे तो कोई कपडे नही है ,, इसमे तो बस ये है

तभी पापा झोले मे शकुन्तला के लिए मा द्वारा लाई पैंटी को झोले के अन्दर ही उसकी पैकेट से खुला ही बाहर निकाल कर फैला कर हम सब के सामने दिखाते हुए बोल्ते है - अरे ये तो 40 नं की कच्छी है रागिनी देखो

शकुन्तला पापा की इस हरकत से झेप कर हस दी और वही मा भी हसने लगी ।

मा - अरे यही कपडे है दीदी है

पापा थोडा असहज होने का नाटक करते हुए शकुन्तला को देखते हुए - ओह्ह माफ करियेगा भौजी , हमको जानकारी नही थी कि ये आपकी है ,, लिजीये

पैंटी देने से पहले पापा जानबुझ कर शकुन्तला को देखते हुए उसके सामने ही पैंटी को हाथ मे मिजकर उसकी मुलायमता की जांच करते है जिसका इशारा शकुन्तला समझ रही होती है और पापा की हरकत से थोडी असहज महसूस करती है ।

शकुन्तला - साइज़ तो ठीक होगी ना रागिनी

मा हस कर - हा क्यू नही , अगर छोटी हुई तो बदल लेना उसमे क्या है

शकुन्तला- ठीक है , और वो भी तो था ना

मा ह्स कर - अरे हा , राज के पापा जरा उसमे दीदी का

मा के बात खतम करने से पहले ही पापा ने ब्ड़ी बेशर्मी से उनकी 38c की ब्रा निकाली और शकुन्त्ला को देते हुए - लो भौजी

शकुन्तला थोडा शर्मा कर पापा के हाथ से ब्रा लेती है ।

फीर थोडी देर बाते चलती है और फिर शकुन्तला अपने घर को जाने को होती है तो मा खुद उनहे गेट तक छोड़ने जाती है औ फिर वापस आती है ।

मा पापा से - जरा खुद के जज्बात को शांत रखिये , सबको एक जैसे ही समझ लेते है ,,अभी गेट के पास दीदी मुझे आपको हिदायत देने को बोली की घर मे कोई बाहर का आये तो कम से कम तौलिया ही लपेट लेते है

पापा हस कर - अरे अब मुझे क्या पता की कौन आ रहा है ,,, और क्या बोल रही थी वो

मा -वो ज्यादा नहीं बोली , मै ही बात को मजाक मे घुमा दी की , अरे अपने भौजी को देख कर भूल गये होगे ,

फिर हम सब हसने लगे ।

फिर थोड़ी देर बाद मै भी नहाने गया और खाना खाने बैठ गया, इधर हम लोगो प्लान फिक्स था रात के लिए लेकिन मुझे डर था कि अनुज है नही घर मे तो रात मे सोनल कही नीचे ना आजाये या कोई गडब्ड़ ना हो जाये । क्योकि मेरे और सोनल की बाते मै मा और पापा को बताना नही चाहता था नही तो जो हाथ आने को था वो नही मिल पायेगा

लेकिन तभी मुझे ध्यान आया कि सोनल का तो अभी पीरियड चल रहा है तो मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आई और मै खाते हुए ही सोनल को मैसेज करता हू

मै - बरसात कब तक बंद होगी तुम्हारी

सोनल मेरी बात मतलब मेरे तरफ देख कर मेरे शरारती मुस्कान को देख कर समझ जाती है ।

सोनल - दो दिन और हो सकती है

मै जानबुझ कर मुह बनाने का नाटक किया मानो उसकी कितनी जरुरत हो मुझे

सोनल मुस्कराया कर एक मैसेज मुझे भेजती है - बस दो दिन और मेरे राजा , फिर जोत लेना जितना मन हो

मै मुस्करा कर - किस्स वाली एमोजी के साथ आई लव यू लिख दिया

बदले मे उससे भी किस्स वाली एमोजी के साथ आई लव यू टू मिला

खैर हम लोग खाना खा ही रहे थे कि पापा की नजर सोनल पर गयी और वो उसे छेड़ने के अंदाज मे - जानती हो रागिनी ,, आज मदनलाल जी का फोन आया था और वो अमन बाबू के बारे मे बता रहे थे कि उसका सेलेकशन गोवा के शिपयार्ड डिपार्टमेंट मे ऑफीसर की पोस्ट पर जॉब मिल गयी है ।

अमन की बात सुन कर सोनल शर्माने लगी लेकिन वही मा बहुत खुश हुई

मा - अरे वाह ये ती बहुत अच्छी बात है और क्या बात हूई ।

पापा - दरअसल , अमन बेटा का जुलाई से तीन महिने तक ट्रंनिंग होने वाला है तो मदनलाल जी चाहते है कि एन्गगेमेंट अगले महीने मे ही करा दिया जाये फिर ट्रेनिन्ग के बाद शादी भी हो जायेगी

मा थोडी परेशान होकर - अरे लेकिन एक महिने मे कैसे सब होगा जी , इतनी सारी तैयारीया करनी होगी क्या क्या करूंगी मै

पापा - अरे चिन्ता ना करो सब हो जायेगा

फिर ऐसे ही बाते हुई और फिर खाना खतम हुआ और सब अपने अपने कमरो मे चले गये ।

और रात मे थोडी सरोजा जी से बात हुई और फिर थ्रीसोम वाली मस्ती हुई दो राउंड और फिर मै वापस अपने कमरे मे सो गया

ऐसे ही दो दिन का समय बिता और मै दूकान पर था कि मा आई

और बोली कि मै आज घर जाकर ही खाना खा लू क्योकि कोई टिफ़िन था नही खाली जिसमे वो खाना लेके आती

मै बहुत खुश हुआ कि आज दीदी के साथ मस्ती करने का खुला मौका मिल गया और आज मै ये मौका छोडने वाला भी नही था तो मै झट से मा को बिठा कर निकल गया चौराहे वाले घर की ओर

जारी रहेगी

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मै खुशी से रास्ते भर आने वाले मौके को लेके काफी उत्तेजित होने लगा था और पुरे रास्ते भर मेरा लण्ड तना हुआ था । मै एक बाइक से लिफ्ट मागी और 2 मिंट मे चौराहे वाले घर पहुच गया और मेन गेट खोल कर अन्दर गया

जहा सोनल हाल मे सोफे पर बैठे मोबाईल चला रही थी । वो नहा चुकी थी और उसके बाल खुले थोडे गीले थे हालकी उसने अभी तक उनको सवारा नही था जिससे वो और भी खुबसूरत लग रही थी । उसने एक हल्के गुलाबी रंग का टीशर्ट और लोवर पहन रखा था । वही टीशर्ट पर गौर करने पर मुझे लगा की शायद उसने कुछ पहना नही है ।

मै झट से उसके पास बैठ कर एक बार उसके बदन से आती भीनी सी खुस्बु ली और एक गजब की कामोत्तेजना भरी मुस्कान मेरे चेहरे पर आई वही पैंट मे लण्ड भी अंगड़ाई लेने लगा ।

मै झट से उसके कन्धे पर हाथ रख कर उसके गालो को चूम्ते हुए उसके मोबाईल मे देखते हुए - कया कर रही हो जानू

सोनल कुछ बोलती उससे पहले ही मेरे नजर मोबाईल मे हो रही चैट पर गयी , सोनल इस वक़्त अमन से ही बात कर रही थी और मै उनकी रोमांटिक चैट पढने लगा ।

सोनल जहा मुझे खुल कर प्यार देती है वही अमन को एक एक चुम्मी के एमोजी तक के लिए तरसा कर परेशान करती है ।

मै - अरे क्या इतना परेशान कर रही हो बेचारे को , कुछ माग रहा है दे दो

सोनल हस कर - तू नही जानता भाई ,, पतियो को इतना तरसा कर रखो कि जब वो मिले तो बेसब्रे होकर ही प्यार करे हिहिहिही

मै सोनल के कान के पास जीभ घुमाते हुए - तो मुझे भी तरसाओगी क्या जानू

बदले मे सोनल मेरे होठ को एक बार चुसते हुए मेरे आंखो मे देखते हुए बोली - नही रे , तेरे लिए मै खुद बेसबरी हू मेरे भाई

और वापस से हम दोनो डीप किसिंग मे खो गये ।

करीब 10 मिंट कर एक दुसरे को चुस्ते रहने के बाद ,, अचानक से अमन का वीडियो कॉल आने ल्गता है तो हम दोनो अलग होते है और सोनल वीडियो कॉल उठा लेती है ।

जहा अमन इस वक़्त सिर्फ तौलिया लपेटे अपने कपडे पहनने जा रहा होता है और तरह तरह से कोसिस कर सोनल को अपने लण्ड के उभार की ओर रिझा रहा होता है । मै सोनल से थोडा दुर होकर मोबाईल पर अमन की हरकते देख रहा होता हू और वही सोनल को देखता हू की वो भी उसे परेशान करने के लिए शर्माने का नाटक और झूठ मूठ नोक झोक करती है ।

फिर जैसे ही अमन वापस मोबाईल रख देता है

मै - ओह्हो मतलब बात कपडे निकालने तक आ गयी है हा

सोनल हस कर - हा वो कुछ ज्यादा ही उतावला है और कोसिस करता है कि मै भी खुल जाऊ उसके साथ लेकिन मै मजे लेती हू

मै सोनल से चिपक कर टीशर्ट के उपर से उसके 34B के चुचो को मिजते हुए - अरे इनके दर्शन करवाये की नही

सोनल कसमसा कर - आह्ह नही भाई , ब्स एक दो बार ब्रा की स्ट्रिप दिखा दी हू और नही ।

मै सोनल के गोरे मुलायम और खुस्बु से भरे गरदन को चूमते हुए उसकी एक चुची को हाथ मे भर कर मिजने लगता हू तो वो भी मेरे सर पर हाथ फेरते हुए अपनी दुसरी चुची को उत्तेजना मे दबाने लगती है ।

एक तो कल ही उसका महीना खतम हुआ था और आज मैने उसके जिस्मो को नोच्ना शुरु कर दिया ।

जल्द ही हमारे होठ मिले और फिर से एक दूसरे के बदन को घिसना शुरु कर दिया हमने ।

वही वो प्यासी झट से अपना हाथ मेरे पैंट के उपर से उभरे हुए लण्ड को दबाने लगी और मै भी उसकी एक नरियल जैसी चुचि को भीचने लगा ।

मै बेसबरा होने लगा था और मैने सोनल को सोफे पर लिटा कर उसके उपर आ गया और झट से टीशर्ट उपर कर उसके दो मोटे नारियल जैसे लेकिन गोरे मुलायम चुचो को देख कर पागल हो गया । मानो कितने समय से मै इनके लिये तरस रहा था और मै उन हल्के भूरे वाले दानेदार निप्प्ल के बटन की मुह मे भर लिय और खुब जोर से चूस्ने लगा ।

वही सोनल - अह्ह्ह माआआ आराम से भाआईईईई ओह्ह्ह मा उफ्फ़

मै दुसरे हाथ से एक चुची को मिजते हुए एक को मुह मे भरे चुस रहा था और ज्यदा से ज्यादा मुह मे भर रहा था वही सोनल भी उत्तेजना मे मेरे सर को अपनी चुची पर दबा रही थी । फिर मैने साइड बदल कर दुसरी को मुह मे भर लिया

हम दोनो बड़ी उत्तेजना से एक दुसरे को दबा नोच रहे थे

मै - आह्ह दिदी कितनी मस्त चुचिया है ,,एक बार दिखा दो ना उसे भी ,, पागल हो जायेगा

सोनल - दिखा दूँगी मेरे राजा अह्ह्ह और चुस उम्म्म्ं बहुत दिन से नही मिज्वाया था अह्ह्ह निकाल दे आज सारी कसर

मै सोनल को छेड़ते हुए - दिदी क्या आप अमन का लण्ड देखी हो

सोनल कसमसा कर - हा भाई वो कहा मानने वला है वो तो जिद करके दिखा देता है जबरजसती

मै सोनल की चुचियॉ को मिजते हुए - फिर आपका मन नही होता की दिखा दू उसे भी अपना माल

सोनल - करता है भाई और उसका लण्ड सोच कर तो कई बार मैने ऊँगली भी किया है अह्ह्ह भाई

मै ऊँगली करने की बात से थोडा मुस्कुर कर खसक कर नीचे हुआ और सोनल की जांघ को फैलाते हुए उसके चुत के उपर हाथ घुमाते हुए - इसमे ऊँगली करती हो क्या दीदी

सोनल मेरे हाथ का स्पर्श अपने चुत पर पाते ही सिहर गयी और कापने लगी - अह्ह्ह अह हा हा भाई उम्म्ंम बहुत मोटा लण्ड है उस्का अह्ह्ह

मै उसके चुत को सहलाते हुए लोवर के उपर से ही - मेरे से भी मोटा है क्या

सोनल ना मे सर हिलाते हुए - ना ह नह अह्ह्ह भैया मै आउन्गी आह्ह मेरा निकलेगा और रगडो उसको आह्ह मा तेज्ज्ज्ज रगडो ना उम्म्म्म्म्मीई अह्ह्ह मुम्म्यीईईई उम्म्ंम अह्ह्ह हा ऐसे ही ऐसे ही

मै सोनल की बेताबी समझ गया और मै झट से उठ कर उस्का लोवर पैंटी के साथ ही एक झटके मे निकाल दिया और जांघो को कन्धे पर चढा कर झुक कर अपना मुह उसके चुत पर लगा दिया ।

मेरे तपते होठो का स्पर्श अपनी गर्म चुत के मुलायम सिराहने पर पाते ही सोनल अकड गयी और मैने उसकी जांघो को थाम कर अपनी जीभ को उसकी चुत मे उतार दिया और वो पागल होकर अपनी गाड को झटकने लगी और मेरे मुह मे उसके गर्म पानी का लावा बहने लगा मैने हर झटके पर उसके चुत पर अपने होठो से मजबूत पकड बनाता और एक एक बूंद को चुस्ते हुए सारा माल मुह मे निगल लिया और बचा खुचा चाट कर साफ किया

तब तक सोनल सोफे पर हाफ्ते हुए शांत थी लेकिन तेज सांसे उसकी चुचियॉ को और फुला रही थी ।

मै भी एक गहरी सास लेके थोडी देर खुद की बराबर किया और फिर एक एक करके सोनल के सामने ही अपने सारे कपडे निकाल दिये

और मेरा लण्ड सोनल की कसी गोरी छाती को देख कर बौराया खड़ा और सख्त हुए जा रहा था ,,, वही सोनल की नजर मेरे टमाटर से लाल सुपड़े पर गयी और उसकी मोटाई देख कर वो सहम गयी

मै उसको इशारा किया और वो धीरे से सोफे पर मेरे सामने बैठ गयी । मेरा लण्ड खड़ा तनमनाया सोनल की नाक को छुता हुआ उसके सामने ही हुकार ले रहा था । सामने आते ही एक बार फिर झुक कर उसकी नारियल सी मोटी और सख्त चुची को मसला और वो सिहर कर एक हाथ से मेरे लण्ड को पकड ली ।

लण्ड की तपन ने सोनल के जिस्म मे सरसारी दौड़ गयी और वो गनगनाई , एक गहरी सास और फिर ग्प्प्प्क से सुपाडा मुह मे ।

एक ठन्दक सी लगी मुझे लण्ड की उपरी सतह पर और फिर उसके मुलायम होठ रिंग बनाते हुए पिस्टन के जैसे चलने लगे ।

जहा तक उसके होठ मेरे लण्ड की सतह को घिसते वहा एक मुलायम बर्फ की ठन्डक सी मह्सूस होती ।

हालकी सोनल को उतना अच्छे से लण्ड चुसने नही आता था जितना मा और रज्जो मौसी को आता था ।

लेकिन सेक्स की कहानिया पढ कर और पोर्न वीडियो देख कर काफी कुछ सिख गयी थी वो

जैसे भी कर रही थी एक नया अह्सास होता था और उसका लण्ड को गले मे उतार कर काफी समय तक रोके रखने की कला का तो मै दीवाना था ।

उसके मुह मे वो लटकती घंटी जब सुपाडे को दबाती तो मानो लगता चुत मे बच्चेदानी को छू रहा हो मेरा लण्ड

जल्द ही उसे मैने थामा और खड़ा कर उसके होठ चूसने शुरु किया और उसे अपने बेडरूम मे ले आया

थोडी देर हमारी चूमा चाटी चली कुछ मैने उसको मसला कुछ उसने मुझे नोचा काटा नाखून गाड़े ।

मैने भी जोश मे खड़े खडे उसके जांघो के बीच लण्ड को घुसेड़ कर दो चार बार चुत के निचले हिस्सो पर हच्क कर रगड़ और उसके गाड के पाटो को सहलाते हुए मिजा ।

वो सिम्टी, मेरे बाहो मे चिपकी हुई सिस्कने लगी और मैने अपने होठ उसके होठो से जोड दिये एक गहरे चुंबन के बाद मैने वापस से उसे बिस्तर पर बिठा और उसके सामने खड़ा हुआ

मै उसकी आंखो मे एक नशा सा देखा और वो मुस्कराई

फिर शर्मा कर मेरे नंगे पेट पर चेहरा छिपा लिया । मै भी मुस्कुरा कर उसके सर मे हाथ फेरा कि तभी मेरे लण्ड मे कसाव बढ़ा और एक गिलापन सा मह्सुस हुआ और नजर गयी तो देखा सोनल मेरे लण्ड को उपर कर पेट से चिपके हुए ही सुपाडे को मुह मे भर ली और नीचे मेरे आड़ो को सहलाते हुए चूसने लगी ।

मै वापस से मदहोश होने लगा और उसका चेहरा पिछे कर उसे लिटा दिया

सोनल बिस्तर पर अपनी दोनो जांघो को खोल कर चित लेट गयी , वो हाफ रही थी और एक मुस्कान सी थी उसके चेहरे पर ।

मै उसकी आंखो मे नजरे जमाए उस्के मन के भावो को पढता हुआ वापस से उसकी घाटियो मे गया और जुबान से चुत के उपरी हिस्सों की साफ सफाई मे लग गया ।

थोडी ही देर मे उसकी सिसकिया आने लगी और उसकी चुत ने रोना सुरु कर दिया ।

वही शुरुवाती आसू जो चिपचिपे कम लेकिन महकते ज्यादा थे

मै भी बडे दुलार मे उसके आसुओ को चाट गया और वापस से खड़ा हो कर अपना सुपाडे को खोल से बाहर निकाला और तपता ही उसे सोनल के चुत के बटन पर धंसा दिया

वो हिचकी , अकडी लेकिन छाती वो तो और भी फुलने लगी ।

मैने उसके एक पैर को उठाया उसे अपने चेहरे के पास लाया उसकी पिंडलियों को सहलाते हुए हल्का सा लण्ड सोनल के चुत की होठो पर दरा

फिर से सिसकी और इस बार थोडा सा गरदन उठा कर नीचे भी देखा और वापस से चित लेट गयी

मै झुका और उसने अपनी आंखे भीचते हुए जांघो को फैलाया और मैने भी सुपाडा को उसके चुत के फलको को खोल कर छेद पर लगाते हुए एक पैर को थामा और कचकचा कर एक जोर का झटका दिया , सुपाडा अन्दर

सोनल - अह्ह्ह्ह मुम्मीईईईई

मै झुका और गाल को सह्लाया उसके होठो को चूमा और उसके आंखो से बहते आसू पर ही चूम के उससे इजाजत मागी और वो अपने होठ भिचते हुए थूक गटक कर बहते आसु से भरे चेहरे को हा मे हिला कर आगे बढ़ने को कहा

मै उसे एक फ्लाईन्ग किस्स दिया और उसने भी खुद को तैयार किया

फिर मै कुछ MM पीछे होकर लण्ड को जोर से अंदर घुसेडा आधे से ज्यादा सोनल के चुत मे चिरते हुए धस गया और कुछ लाल सी बुन्दे पच्च्च की आवाज से बाहर आई और

वही सोनल मुझे अपने सिने से लगा चुकी थी

ना मै हिल पा रहा था ना ही सोनल मुझे हिलने दे रही थी

मेरे होठ उसके होठ मे दबे थे वो अपने कुल्हे कड़े कर दी और जांघो को सिधा कर दर्द को कम करना चाह रही थी

मै उसे थपथपा कर थोडा उपर उठा तो उसके सीने से मेरा वजन कम हुआ और वो एक गहरी सास से हाफने लगी ।

चेहरे पर कोई भाव नही थे लेकिन आखो से झरना बह रहा था । वो जबरजसती अपने चेहरे पर मुस्कान ला रही थी लेकिन उसकी चुत मे अड़सा हुआ मेरा लण्ड शायद इसकी इजाजत नही दे रहा था

तो मैने उस्के गाल चुमे और वापस से उसे सीने से लगा कर - आई लव यू दीदी

वो फफक पड़ी और - लव यू सो मच भाई बहुत दर्द हो रहा है

मै थोड़ा छेडने के मुड़ मे थोडा सा उपर होकर ह्स्ते हुए - तो निकाल दू

वो शर्मा कर मुस्कुराते हुए ना मे इशारा की

मै उसकी नाचती आन्खो मे देखते हुए - तो फिर चालू करू इंजन

वो कुछ प्रतिकिया करती उससे पहले ही लण्ड को पीछे खिच कचकचा कर एक और जोर का झटका और करीब 3/4 से उपर लण्ड उसकी चुत मे घुस गया और हल्के हल्के मालिश वाले धक्के के जैसे अन्दर बाहर शुरु हुआ

धिरे धीरे उसका दर्द कम हुआ लेकिन इतना भी नही कि एकदम तुफान मेल पेलवा ही ले

लेकिन उसकी सिसकी बढी और हल्की सी आहट आई - सीईई उन्म्म्ंंं आह्ह थोडा तेज्ज्ज

मै सुना और झट से उसकी आंखो मे देखा वो शर्मा कर मुस्कुराते हुए मुह फेर ली और उसको अप्नी तरफ मुह कराने के लिए मैने धक्के की गति बढ़ा दी वो उसकी उम्मीद से कुछ ज्यादा ही जोर मे

वो ह्च्कने लगी और उसकी आवाज सिस्किया सब रुक रुक कर आने लगी एक मुस्कान थी जो उसकी सहमती का इशारा कर रही थी जल्द ही उसने अपने हाथ मेरे कमर हिल्ती कमर मे फेरा और थोडा दबाने को इशार किया और मैने धीरे धीरे उसकी चुत मे और नीचे जाने लगा और जल्द ही पूरा लण्ड उसकी चुत मे उतार दिया

अब लम्बे लम्बे धक्के लग रहे थे और जब भी लंड उस्के चुत की गहराई मे जाती वो गहरी सासे लेती और बाहर निकालते समय सास को छोड देती ।

फिर मैने खुद को थोडा खड़ा किया और दोनो पैर वापस कंधो पर , उसको इशारे से तकिया अपने नीचे रखने को कहा

वो लगाई और मैने वापस लण्ड को उतार दिया उसकी जड़ मे इस बार हर बार से गहरा गया और बच्चेदानी का सिरा मेरे सुपाड़े को छुआ

सोनल मे अपने पेड़ू मे हाथ लगा कर ह्स्ते हुए इशारे मे बताने लगी की कहा तक उसे लण्ड मह्सूस हो रहा है

मानो ऐसा कर उसने मेरा जोश बढ़ा दिया हो और मैने धक्के तेज कर दिये वही सोनल झड़ने के करीब थी और उसने अपने चुत के अन्दर का छ्ल्ल्ला मेरे लण्ड पर कसना शुरु कर दिया ।

मै भी ज्यादा देर तक खुद को रोक न सका और मै झडने को बाहर निकालने की कोसिस की तो सोनल आंख दिखाते मुझे रोकि

मै - मेरा होने वाला है दीदी

सोनल मुस्कुरा कर तकिये के नीचे रखी पिल की गोली मुझे दिखाई और बड़ी अदा से मेरे लण्ड की निचोडते हुए कमर को हचकाया

मै भी खुश हुआ और उसके चेहरे के बराबर मे आकर धक्के को बढ़ा दिया और चुत मे जड मे जाकर लण्ड को रोक दिया एक दो सेकंड रुका था की मेरे लण्ड का लावा फुटा और गरम पानी सोनल की चुत मे भरने लगा ।

वो वापस से गनगना गयी और मुझसे लिपट गयी । मै भी उससे चिपके अपनी कमर झटकते हुए आखिरी बूद तक झड़ता रहा

फिर थोडी देर मै उठा और वो हिली तो जांघो मे टीस सी हुई । अभी तक मेरा लण्ड चुत मे घुसा हुआ था और मेरा वीर्य उसके रस और खुन की बुन्दो से मिल कर हल्का गुलाबी सा हो गया था । जो मेरे लण्ड के जड के कुछ हिस्सो मे च्ख्टा था ।

मै धीरे धीरे उसके जांघो की मालिश की और हौले से अपना लण्ड बाहर निकाला । एक दम क्रीमी हल्की गुलाबी रंग लिये टपकती बुन्दे ,, सोनल ने एक कप्डे से मेरा लण्ड को लपेटा और मै उसको थामे खड़ा हुआ और साफ किया ।

फिर वापस वो कपडा सोनल को दिया वो भी उस कपडे को अपने वीर्य से भरे चुत के मुहाने पर लगा कर बैठी और मैने उस्का हाथ थाम का उसे खड़ा किया ।

उस्के पाव काप रहे थे शायद झुनझुनी थी या वो टीस ही हो

अभी उसके कुल्हे कड़े जान पर रहे थे मैने उसकी कमर को सहलया और उसके होठ चूमे फिर मै उसे बाथरूम लेके गया ।

हम दोनो ने खुद को साफ किया और फिर कपडे पहनने के लिये बाहर हाल मे आये ।

मैने हम दोनो के लिए खाना लगाया एक ही थाली मे फिर मैने उसे खुद से ही खिलाया ।

वो खुश थी उसके चेहरे पर एक चमक थी और खाने के बाद मैने उसके पानी दिया ।

फिर जब मेरे वापस दुकान जाने का समय हुआ तो उसने मुझे हग किया और देर तक चिपकी रही । हम दोनो पिघल रहे थे लेकिन उसकी आंखे भरी थी । मैने प्यार से उसकी आसू साफ कर उसके चेहरे का हर भाग चूमा वो वापस से मुस्करा कर मेरे सिने से लग गयी ।

सोनल - थैंक यू भाई लव यू सो मच

मै ह्स कर बोला - लव यू टू दीदी

मै - मै जाऊ फिर

दीदी उदास मन से - हा ठीक है

मै उस्के गाल चूम कर - शाम को आऊंगा ना मै

वो खुश हुई - हम्म्म ठीक है जाओ अब ,,,

तब तक सोफे पर पड़ी उसकी मोबाइल रिंग हुई अमन का ही फोन था

मै हसी मे उसे छेड़ने के अन्दाज मे - अच्छा तो जनाब के पति का फोन आ रहा है तो भेज रही हो मुझे

वो हस कर - धत्त , ठीक है मत जाओ

मै ह्स कर उसको अपना मोबाईल दिखाते हुए - जा रहा हू , देखो मा का दो बार फोन आ गया है ,,, वो दवा खा लेना और आराम करना और ज्यादा दर्द हो तो मालिश कर लेना

सोनल मुझे धकलेते हुए मेन गेट तक ले आई और बोली- तू जाओ और मेरी चिन्ता ना करो मै कर लूंगी सब हिहीही

मै जाने से पहले से एक बार उसके होठ को चूसा और निकल गया दुकान के लिए

दुकान पर गया तो मा ने थोडी पुछ ताछ की तो नहाने का बहाना मार दिया और फिर मा के साथ आने वाले महिने मे सोनल की शादी को लेके थोडा बात चित हुई और तय किया गया कि अनुज के आने के बाद ही पांडित जी को बुला कर एक मुहूर्त पर सोनल और अमन की सगाई हो जाये । उसी हिसाब से मेहमान भी आयेंगे फिर सब कुछ मैनेज किया जायेगा

शाम को 5 बजे तक मा घर के लिए निकल गयी और मै भी थोडा दुकान मे व्यस्त रहा

फिर समय से निकल गया घर के लिए जहा पापा आ गये थे नहाने गये थे ।

मैने मा किचन मे अकेले काम करते हुए देखा तो उससे दिदी के बारे मे पुछा

मा परेशान होकर - बेटा उसका बदन दर्द हो रहा था वो अपने कमरे मे आराम कर रही है

मै कुछ सोचा और बोला - दवा ली की नही उन्होने

मा मुस्कुरा कर - हा बेटा वो दवा ली है अभी आराम करने दे जा तू भी कपडे बदल ले और फ्रेश हो जा

फिर मै मा को एक किस्स कर अपने रूम मे गया जहा दीदी ने मेरी बेडसित चेंज की थी

फिर मै फ्रेश हुआ और बाहर आया तो देखा किचन खाली था और मा का कमरा बंद था । मै मुस्कुराया और उपर दीदी के कमरे मे गया ।

जहा दीदी सोयी हुई थी मै बडे आराम से अन्दर गया और दीदी के सिरहाने पहुच कर बैठ गया और फिर उसके मुस्कराते गालो को चूम लिया

वो थोडी कसमसाई और थोड़ी बूदबुदाइ फिर मेरे हाथ को थाम कर करवट लेली ।

मै मुस्करा कर उसके बालो को उस्के कान मे खोसा और हल्का हल्का मालिश किया सर पर और दोपहर मे हुए मस्ती को आने वाले समय से जोड कर वही बिस्तर की पाट से टेक लगा कर बैठे हुए ही सोचने लगा । एक अगल ही जुडाव सा था आज सोनल के साथ मेरा , एक अलग ही खिचाव , एक नये रिश्ते के जैसा जहा से मै बाहर नही आना चाहता था ।

मेरे हाथ दीदी के सर को थपकी दे रहे थे और धीरे धीरे 20 मिंट का समय बित गया यहा तक की मा और पापा दोनो छ्त पर हमारे कमरे मे आ गये फिर मै सोनल के सर को थप्की देता हूआ बन्द आन्खो से अपने सपने बुन रहा था एक मोह लेने वाली मुस्कान थी मेरे चेहरे पर

तभी मेरे बालो मेरे किसी का हाथ फिरा और मैने आंखे खोली तो देखा मा मेरे बगल मे खड़ी थी और मुझे बडे प्यार से देख रही थी उसके चेहरे के भाव मे ममता थी और एक खुशि भी जो उसकी छ्लकी हुई आखे बया कर रही थी ।

मै ह्स कर - अरे मम्मी पापा आप लोग

मा मेरे सर को चूम कर - तू यहा है , मै कबसे खोज रही हू , तेरे पापा ने फोन भी लगाया फिर ये हुआ की उपर देख लू

मै मा की बातो जवाब देता तब तक सोनल की निद खुल जाती है और वो आंखे उठाती है उसका चेहरा मेरी गोद मे था और सामने मम्मी पापा खडे थे ।

वो थोडा उत्सुकता से उलझन भरे भाव मे बोली - आप लोग यहा और तू ऐसे क्यू

बैठा है भाई

उसकी बाते सुन कर सब हसने लगे और मा भी मेरे सामने और दिदी के बगल मे बैठ कर उसके चेहरे को दुलारते हुए बोली - कैसी है तबियत बेटा

सोनल एक नजर मुझे मुस्कुराता हुए देखी और मेरी जांघ को चन्गोट कर बोली - अभी थोडा आराम है मा

पापा - तो चलो बेटा खाना खाने चलते है , हम तो तुम दोनो को बुलाने आये थे

सोनल अचरज के भाव मे - दोनो को

फिर सोनल मुझे देखते हुए उठ कर बैठ जाती है

मा ह्स कर - वो क्या है ना बेटा, राज दुकान से आया तो तुम्हारे बारे मे पुछा तो मैने बोला की तेरी तबियत नही ठीक है तू आराम कर रही है तो ये पागल फ्रेश होकर तेरे पास चला आया और तबसे तेरे पास ही बैठा था और नीचे हम लोग खोजते हुए यहा आये तो देखा कि ये तुझे आपनी गोद मे सुलाये हुए खुद सो गया था ।

सोनल एक मुस्कान के साथ मेरे तरफ देख्ती है और मै हस देता हू

पापा - चलो इसी बहाने पता तो चला ह्मारे साथ ह्मारे बेटा भी है जो हमारी बच्ची को बहुत प्यार करता है ।

फिर ऐसे ही कुछ भावनात्म्क बाते चली और रात में खाने के बाद मैने खुद से फ़रमयिश की मै दीदी के साथ सोने वाला हू तो पापा थोडा इशारे से हिचके लेकिन मा ने उन्हे रोका और मुझे इजाजत देदी ।

फिर हम दोनो छ्त पर दिदी के कमरे मे चले गये और मा पापा अपने कमरे मे

जारी रहेगी

.................
 
खाने के बाद मै मम्मी पापा को बोल कर उपर छत पर दीदी के साथ सोने चला गया ।

कमरे मे जाते ही

दीदी अपना स्टाल जो अक्सर टीशर्ट पर डाले रहती है जब पापा या कोई बाहर का आता है उसको निकाल कर सोफे पर रखते हुए मटकते हुए चुतड को लोवर मे और भी कामुक अदा से थिरका कर एक कातिल मुस्कान के साथ गरदन घुमा कर बोली - ओह्ह क्या बात है आज बड़ी फ़िकर हो रही है मेरी हम्म्म

मै अपनी तारिफ सुन कर थोडा शर्माया और फिर मुस्कुरा कर उसको पीछे से हग करते हुए उसके गाल से अपने गाल सटा कर बोला - आपका हक बनता है दीदी , आज जो कुछ भी आपने मुझे दिया उसके आगे ये सब कुछ नही है

सोनल थोडा जिज्ञासू भाव से ह्स कर - तुझे अच्छा लगा ना बस ,,तू खुश तो मै खुश

मै उसको अपने सामने कर उसकी आंखो मे देखते हुए बोला - दीदी , मै जानता हू आप अमन से कितना प्यार करती है फिर भी मेरे लिए क्यू

सोनल ह्स कर मेरे गाल दुलारते हुए - हम्म्म , तो तू ये जानता चाहता है कि मै अमन से प्यार करती हू फिर भी मैने तेरे साथ कैसे राजी हो गयी इनसब के लिए

मै हा मे सर हिलाया

सोनल - भाई मेरे दिल मे जो अमन के लिए प्यार है वो सच्चा है , मुझे उसके साथ एक आजादी एक सुकून सा मह्सूस होता है और वो बहुत ही केयरिंग है और दिल का बहुत ही अच्छा है । तो उस्के लिये जो भी फीलिंग है वो सब मेरे दिल से है

मै - और मेरे लिए

सोनल थोडा माप तोल कर बोलने के अंदाज मे - हम्म्म्म तु तो मेरी फैंटेसी है हिहिहिही

मै हस कर - मतलब

सोनल हस कर - मतलब की मै भले ही अमन से प्यार करू और उसके साथ फिजीकल हो जाऊ लेकिन अपने सगे भाई के साथ सेक्स करने का ख्याल आना ही एक अलग जोश है भाई तू नही समझेगा हिहिहिही और मेरी लाइफ का पहला सेक्स ही मेरे भाई से हुआ तो हुई ना फैंटेसी हाहाहा

मै थोड़ा उलझन मे था लेकिन थोड़ी देर तक सोच विचार कर बात समझ गया कि दीदी को वो सेक्स स्टोरी पढने का असर था और उन्के दिल मे कही ना कही मेरे लिए फैंटेसी तभी बनी होगी ,,,जैसे मेरे दिल मे हुई थी

मै सोचा क्यू ना दीदी से पुछ लू की कही उनको पापा के लिए भी तो कोई फैंटसी होगी

फिर सोचा ऐसे नही , शायद ऐसे सीधे पुछने पर वो बात घुमा दे या बात ही छुपा ले क्योकि बाते ब्नाने और लपेटने मे वो काफी माहिर थी और उसका उदाहरन अमन था ।

कैसे मेरे साथ चुदाई भी कर ली और वही अमन को एक एक किस्स के एमोजी तक के लिए भी तरसा रही थी ।

इसलिए मैने सोचा इसको अभी अपने रंग मे रंग जाने दो थोडा खोल लू फिर इसके दिल की भड़ास को बाहर लेके आना है ।

खैर जो भी हुआ हो आगे बहुत मजा आने वाला था ।

ऐसे कुछ देर बाते चली और उस रात एक बार और मैने दीदी को चोदा । इस बार खुले शब्दो मे जी भर उसने अपने दिल की बाते बाहर निकाली ।

रात बीती सुबह दीदी ने मुझे 5 बजे जगा दिया और बोली कपडे पहन और नीचे जा

मै भी उसको एक बार किस्स किया और अपने कमरे मे गया फ्रेश हुआ और निकल गया सुबह सुबह टहलने के लिए और उम्मीद लेके की काश आज सरोज मिल जाये

मै घर से निकला और बस स्टैंड की ओर गया वहा सुन सन्नाटा था और अभी 5.30 ही हो रहे थे ज्यादा लोग क्या मेरे अलावा कोई नही था ।

हा कुछ आवारा कुत्ते बस स्टैंड के बाथरूम के तरफ भौक रहे थे । उनका तो रोज का काम होता है साले सुबह सुबह शुरु हो जाते है ।

खैर मै वही शान्ति से बैठा और सरोजा के आने का इन्तेजार करने लगा लेकिन ये कुत्ते शान्ति से रहने दे तब ना

मै झिझक कर बस स्टैंड के कम्पाउंड मे गिरी एक आम के पेड़ की छोटी लड्की उठाई और उन कुत्तो को हाक दिया

वो सब भाग गये ।

फिर वापस आकर चेयर पर बैठ गया कि तभी पीछे से एक आवाज आई जिससे मै खुश हो गया

?? - थैंक यू यार आज तो तुमने बचा लिया

मै खुशी से पीछे घुमा तो देखा कि ये तो सरोजा जी है

मै थोडा उलझन भरे लहजे मे हस कर - अरे आप इधर से,, अच्छा तो बाथरूम ने आप ही थी क्या जिस पर ये ....

सरोजा हस कर - हा क्यू तुमने देखा नही

मै हस कर - अरे मुझे पता होता कि ये आप पर भौक रहे होते तो मा चो ....

इतना बोल के रुक गया और मुझे समझ मे आया और मैने खुद पर नियंत्रण किया

जिससे सरोजा हसने लगी

मै ह्स कर थोडा शर्म के भाव मे - सो सो सॉरी

सरोजा ह्स कर - इट्स ओके राज , होता है कभी कभी

सरोजा - वैसे आज बडे सवेरे आ गये क्यू , वो भी इतने दिन बाद मिले हा

मै - आज थोडा जल्दी उठ गया तो सोचा क्यू ना एक नजर सुबह सुबह चांद देख लू

सरोजा थोडा उत्सुक भाव से हस कर - अरे सुबह सुबह सूरज देखते है चान्द कहा

मैने एक नजर सरोजा के तरासे हुए जिस्म मे मारा और उनकी नशीली आंखो मे झाक कर बोला - सुबह सुबह सूरज की लाली मे इस चांद को देखने का म्जा आप नही समझ सकती हो मैडम

मेरी बात का मतलब समझ कर सरोजा पूरी तरह से शर्मा कर झेप सी गयी और मुह फेर कर हाथ रख कर हसने लगी

सरोजा - तुम नही सुधरोगे हा

मै ह्स कर - किसी को बिगडा हुआ ज्यादा पसंद हू मै , बस इसिलिए

सरोजा मुस्कुरा रही और वही मेरी नजर उसकी लोवर मे उभरी गाड की गोलाई माप रही थी जिससे मेरे लण्ड मे कसाव हो रहा था ।

सुबह का समय था और बस स्टैंड के कम्पाउंड मे हम दोनो की थे मौका मेरे हाथ मे था बस पहल की जरुरत थी और सरोजा मेरे बाहो मे होती

लेकिन सरोजा ऐसी रबड़ी थी जिसे मै बडे आराम से छोटे चम्मच के चिख चिख कर खाना चाहता था , हालकी वो काफी गरम औरत थी फिर भी अपने होश हवास मे खुद को बहुत ही अव्वल दर्जे की सहूलियत मे रखती थी और अपना स्तर कभी भी कम नही होने देती थी समाज मे ।

और मै भी उसके इस स्वभाव का सम्मान करता था इसिलिए मै खुले कोई रिस्क नही लेना चाहता था ।

सरोजा मुझे सोच मे डूबा देख कर और मेरी नजर अपनी उभरी हुई गाड पर पाता देख कर बोली - कुछ ज्यादा गहरे मे तो नही चले गये राज बाबू हिहिही

मै झेपा और उसके सवाल का दोहरा मतलब समझ गया और बोला - मेरा क्या है सरोजा जी मुझे गहरी चीजे बहुत पसंद है । अब वो बातो की गहराई हो या ,,,

सरोजा ह्स कर आगे चलते हुए -बस बस समझ गयी

मै भी उसके साथ चलते हुए - वैसे आपकी दिल्ली की ट्रिप कैसी गयी

सरोजा - अच्छी थी और थोडी बेकार भी

मै उत्सुकता से - बेकार थी मतलब ,,सब कुछ ठीक ठाक तो था ना

सरोजा हस कर - हा सब ठीक ठाक था ब्स फ्लाइट मे मेरे एक्स हस्बैंड मिल गये थे और मुझे देख कर थोडा शौक्ड हुए और फिर मुझसे बात करने के लिए उत्सुकता दिखाई लेकिन मैने इग्नोर किया

मै समझ गया कि सरोजा का एक्स हस्बैंड ने सरोजा को क्यू छोडा था और क्यू अब वो मिलने को बेकरार था

मै - तो फिर कुछ बात हुई की नही उनसे

सरोजा - नही यार मै उस घटिया इन्सान से बात करने वाली नही थी और ना ही मौका दिया उसे

मै थोडा सोच मे था तो मुझे देख कर सरोजा बोली- अरे उसकी चिन्ता ना करो मै बीते हुए बुरे वक़्त की याद नही रखती

मै थोडा खुश हुआ और बोला - सरोजा जी बुरा ना मानिये तो एक बात पूछू

सरोजा मुस्कुरा कर - हा हा क्यू, और तुम कबसे परवाह करने लगे कि मुझे कुछ बुरा लगेगा, इतने दिनो से मेरे साथ फलर्ट कर पाते क्या अगर मुझे बुरा लगता हिहिहिही

मै ह्स्ते हुए - हा जी ये बात है ,,लेकिन मै जो पुछने जा रहा हू वो आपने बीते जीवन से है

सरोजा थोडा शांत हुई और बोली - पुछ लो ना उसमे क्या है

मै थोडा हिचक कर - वैसे आपकी तलाख किस बात को लेके हुई थी ,

मेरी बात सुन कर हसती चहचहाती सरोजा थम सी गयी

मै थोडा नरम भाव से - माफ कीजिएगा, मै आपको कोई तकलीफ नही देना चाहता ,,बस आपकी मर्जी है अगर आप मेरे साथ शेयर करना चाहो तो

सरोजा एक गहरी सास लेते हुए - अरे नही राज तुम क्यू माफी माग रहे ,,,,वैसे भी ये सवाल मेरे लिए नया नही है मै काफी लोगो को जवाब दे चुकी हू तो कोई बात नहीं अगर तुमने भी पुछा तो

मै थोडा रिलैक्स हुआ और बोला - तो बताईये ना क्या हुआ था

इधर हम बाते करते हुए मेन सड़क पर आ गये थे और धीरे धीरे उजाला ज्यादा होने से बाकी के लोग भी आने जाने लगे थे ।

सरोजा मुस्कुरा कर - तुम कब फ्री इधर

मै उलझन भरे लहजे मे - मतलब

सरोजा हस कर - अरे यार ,,ये टॉपिक बहुत बड़ा है और ऐसे सड़क पर तो तुम्हारे साथ मै ये सब नही बाट सकती ना ,,कभी आओ ऑफ़िस मेरे वही बात करते है ठीक

मै - हा हा क्यू नही ,,बस 3 4 दिन मे मेरा भाई आ जायेगा तो मै आता हू मिलने आपसे

फिर सरोजा मुझे बाय बोल कर घर की ओर निकल गयी और मै अपने घर की ओर

जैसा की मैने बताया था सरोजा एक अव्वल दर्जे की सहूलियत के साथ समाज मे पेश आती थी ताकि उसके सम्मान पर कोई टिप्पणि ना करे ना सामने ना पीठ पीछे ही ।

मै समझ गया कि ये बात जो मैने पूछी उस्से शायद वो मुझे कुछ अलग ही बताने वाली जो आज तक बाकियो को पता होगा उसके गुजरे कल के बारे मे । ये काफी हद तक भावनात्मक रूप भी ले ले शायद या वो अपनी भावना को जग जाहिर ना करने के उद्देश्य से ही मुझे व्यक्तिगत रूप से मिलने को बोला हो ।

खैर जो भी होना था मै उसके लिए तैयार था क्योकि अब तो मेरे दिल मे उसके गुजरे कल का सही रूप जानने का तलब थी ।

मै घर आया और नहा कर नाशत किया और निकल गया दुकान पर

समय बीता और उस बात को चार दिन बीत गये ।

आज अनुज घर आने वाला था । उसके आने के पहले ही बीते रात को खाने पर सोनल की शादी को लेके चर्चा हुई कि अनुज के आने के बाद एक बार अमन के परिवार और हमारे परिवार की मिटिंग कर ली जाय ताकि आगे की तैयारियो मे कोई दिक्कत ना और इसी बहाने हम सब आपस मे मिल जुल लेंगे ।

वही इन चार दिन मे मै रोज दोपहर मे दीदी को जम कर चुदाई करता और रात मे मा और पापा के साथ मस्ती होती । सुबह मे एक बार और बीच मे सरोजा से मुलाकात हुई लेकिन उसने तय किया था कि वो ये सब बाते ऑफ़िस मे ही करेगी तो मैने कोई खास चर्चा नही की ।

आज सुबह मै तैयार होकर दुकान गया और 12 बजे तक अनुज दुकान पर आया

मै उस वक़्त काम मे लगा था और ग्राहक के जाते ही

मै मुस्कुरा कर - और भाई कैसी रही छुट्टी तेरी

अनुज हा मे सर हिला कर - अच्छा था भैया

मै -फिर कहा कहा घुमे

अनुज - भैया हम लोग किला देखने गये थे , फिर अगले दिन सिनेमा भी गये , फिर उसके अगले दिन वाटरपार्क ,,,,

मै खुशी से अनुज की बात काटते हुए - वाह भाई वाटरपार्क हां,,, मस्त माल देख के आया तू हिहिहिही

अनुज मेरी बात से शर्मा रहा था

मै हस कर - अरे अब बोल ना , वहा देखते हुए नही शर्माया तो यहा क्यू ,,, मुझसे शर्म आ रही है

अनुज हस कर - नही भैया वो हम लोग फुल फैमिली गये थे वाटरपार्क के एक प्राइवेट पूल मे ,,,वहा घर की लेडीज़ के अलावा कोई नही था बाहरी

मै समझ गया कि अनुज का दिल साफ है और वो रिश्तो को अहमियत देना बखूबी जानता है लेकिन घरेलू माल को खुला देखना तो मजेदार होगा ही ना , मन के कोने में छुआ हवस थोडा सा ही सही लेकिन घरेलू माल को पानी मे गोता लगाते देख लंड को जगा जरुर देता है ।

फिर मैने अनुज का मन टटोलेते हुए - वैसे कौन कौन था भाई साथ मे

अनुज - सब घर वाले भैया ,, राहुल के मौसी - मौसा और उनका बेटा आकाश , बेटी सौम्या , मै और राहुल , आकाश के चाचा चाची भी थे ।

मै - हम्म्म फिर कोई पटाया कि नही हिहिहिही

अनुज शर्मा कर लेकिन खुले दिल से बोला - कहा भैया , ज्यादा समय तक तो हम लोग फैमिली के साथ ही थे अकेले घूमने का मौका नही मिला ज्यादा

मै - चल कोई बात नही , मजा किया ना तुने

अनुज - हा भैया ,,लेकिन आपको पता है

मै अचरज से - क्या बता

अनुज बडे ध्यान से - वो आकाश है ना वो बहुत ही घटिया है

मै - मतलब

अनुज संकोच करते हुए - भैया वो गंदी गंदी कहानिया पढता है और ,

मै - और क्या

अनुज - वो अपने मम्मी और चाची का नाम लेके बाथरूम मे वो सब करता है

मै समझ गया कि अनुज क्या कहना चाहता था

मै जानबुझ कर चौकने का नाटक किया - नही नही भाई तुझे गलतफहमी हुई होगी ।

अनुज अब अपनी बातो पर जोर देते हुए कहा - नही भैया मैने देखा है उसे बाथरूम मे अपनी मा और चाची का नाम लेके बाथरूम मे हिलाते हुए

ये बोल कर अनुज चुप हो गया

मै - चल कोई बात नही ,,तूझे कोई परेशानी तो नही है उस बात से

अनुज उलझन मे - नही भैया ,बस मेरे दिमाग मे आ रहा है कि कोई अपनी मा या चाची के बारे मे कैसे सोच लेता है ऐसे ,,,कितना गन्दा है वो छीईई

मै हस कर - फिर तो किसी लडकी के बारे मे भी सोचना गन्दा होगा ना भाई

अनुज - वो कैसे

मै हस कर - अरे वो भी तो किसी की बहन या बेटी होगी ना

अनुज बेजवाब था

मै वाप्स उसे समझाते हुए - अरे पगलु ,, तु अपना मन साफ रख और समाज के बुरे प्रभाव से दुर रह और अगर किसी से तेरा लगाव हो तो उसे कबूल करके आगे बढ़ ,,,,

अनुज - जी भैया

मै ह्स कर -अब बता सही सही कोई पसंद आई है या नही

अनुज मुस्कुरा कर - नही भैया , वो आकाश को लेके इतना परेशान था कि किसी और पर फोकस ही नही कर पाया

मै हस के - तू उसकी चिन्ता छोड वो गलत नही है

अनुज चौक कर - ऐसा क्यू

मै उसे समझाते हुए - अब देख उसे पता है कि वो उसकी मा और चाची है लेकिन उसके हथियार को थोडी पता ,,,ये ह्यूमन केमिकल रियेक्शन का प्रभाव है कि कोई भी अच्छी और खुबसुरत चीज पर हमारा अवचेतन मन तत्काल प्रतिक्रिया दे देता और जब तक चेतन मन रिश्ते की अहमियत का अह्सास दिलाये तब तक हवस उस इन्सान पर भारी हो चुका होता है और चेतन मन बार बार उस गलत भावना को हटाने के प्रेरित करता है और ऐसे लोग जल्द जल्द हस्तमैथुन कर वो हवस भरी ऊर्जा को बाहर निकाल देते है और फिर धीरे धीरे सब सामान्य हो जाता है ।

अनुज मेरे जवाब से खुश होकर - ओह्ह्ह ये बात है ,, वैसे आपको इतनी जानकारी कैसे है भैया

मै हस कर - बेटा तुझसे 3 साल बड़ा हू ,, समय आने दे वक़्त और समाज सब सिखा देगा और रही सही कसर मै पूरी कर दूँगा

फिर हम हसने

फिर मैने खाना खाया और उसी समय को रात मे खाने के बाद हम सब हाल मे बैठे हुए थे और सोनल की शादी को लेके चर्चा हो रही थी ।

मा - आपने बात की जी अमन के पापा से की नही

पापा - हा रागिनी बात हो गयी है और वो लोग घर पर ही बुला रहे हैं

मै - उन्के घर क्यू पापा ,,, हमारे घर ही बुला लो ना

पापा - बेटा मैने बोला था लेकिन मुरारीलाल जी का कहना है कि अमन की मा चाहती है शादी से पहले एक बार सोनल घर बार देख लेगी और उसकी कोई फरमयिश होगी तो वो भी बता सकती है कि उसके रूम मे कैसा सुविधा चाहिये ।

मै दीदी को छेड़ते हुए -ओह्हो बडे दिलदार है तेरे ससुराल वाले हा

सोनल तुनक कर - हा तो किस्मत है मेरी ,, क्यू मा

मा बडे प्यार उसे हग करते हूए - हा बेटी , मै तो बहुत खुश हू इस रिश्ते से

फिर तय हुआ कि तीन दिन बाद अमन के यहा जाना है और कल ही नये कपडे शगुन के सामान ले लिये जाये ।

मा - मै शालिनी को बोल देती हू

सोनल चहक कर - मै भी निशा को

पापा - हा हा भाई ठीक है तो फिर तय रहा कल दुकान पर अनुज बैठ जायेगा और मै तो मेरी दुकान पर रहूंगा ही और राज बेटा तू अपनी मम्मी चाची और दोनो बहानो के साथ सरोजा कॉमप्लेक्स जायेगा खरीदारी के लिए

सबने हामी भरी वही अनुज ने नये जुते की फरमयिश भी की जो खुशी खुशी पापा मान गये ।

रात मे दीदी मुझे समान की लिस्ट बनाने के बहाने अपने कमरे मे लिवा गयी और मैने उसकी जबरदस्त चुदाई की और फिर सोने कमरे मे आया तो देखा सरोजा के 10 से भी ज्यादा मिसकाल थे और मैसेज भी

मै सोचा कल इस्से मिल ही रहा हू तो क्यू ना थोडा और परेशान किया जाये क्योकि मै जानता था सरोजा मेरे से बात करने के लिए बेताब रहती थी ।

मै बिना कोई रिप्लाई के फोन वैसे ही रख कर सो गया ।

जारी रहेगी

................................
 
अगली सुबह मै रात की चुदाई की थकान से देर से उठा । सुबह का नाशता कर अनुज और पापा दुकान पर चले गये ।

मै भी आराम से 10 बजे तक नहा धो कर तैयार होने की सोच रहा था क्योकि माल 10 बजे से पहले खुलता नही , इसिलिए सबके साथ नासता कर लिया और फिर अपने कमरे मे गया । नया पैंट और टीशर्ट , अंडरवियर निकाल कर बेड पर रखा और फिर तौलिया लेके निकल गया नहाने ।

जैसा मेरी आदत थी मै दरवाजा बंद नही रखता था और बाथरूम मे भी खुला ही नहाता था । क्योकि किसी से छिपाने जैसा कुछ था नही अब घर मे ना

तो मै नहा चुका था और गुनगुना हुआ तौलिया लपेटे कमरे मे आया तो देखा कि मेरा अंडरवियर गायब है मै वापस आलमारी चेक किया तभी मुझे आलमारी के सीसे मे किसी की झलक दिखाई दी जो मेरे पीछे कमरे के दरवाजे के पर्दे मे खड़ी थी ।

मै थोडा सावधान हुआ और एक मुस्कुराहट के साथ थोडा सीसा बराबर मे लाकर नीचे पैर पर नजर मारी तो एक हिल वाली सैंडल पहने खुबसूरत पैर थे और पटियाला सलवार से पाव ढका था ।

मै समझ गया ये निशा थी तो मै जानबुझ कर नाटक करते हुए बोला - ओफ्फो कहा गयी मेरी अंडरवियर,,,मम्मी से पुछता हू

फिर मै अन्जान बन्ते हुए धीरे धीरे बिना

उसकी तरफ देखे दरवाजे तक गया और वो सिमट कर और दीवाल की ओर हो गयी और मै मौका देख कर दरवाजा खोलने के बजाय उसकी चटकनी लगा कर झट से पर्दे के पीछे घुस कर निशा को पकड लिया

वो मुझे अचानक देख कर चहकना चाही लेकिन मैने उसके होठ अपने होठो से बान्ध लिये और उसके कूल्हो को मलना शुरु कर दिया ।

निशा के बदन के स्पर्श से ही मै उत्तेजित होने लगा और तौलिये मे लण्ड अपनी जगह बनाने लगा ,,वैसे भी तौलिया कुछ खास सही से नही लपेटा था मैने और हमारी कसमसाहट मे वो खुल कर गिर भी गया

तभी निशा की नजर मेरे तनमनाये लण्ड पर गयी और वो मुस्करा कर लपक लेती है मेरे लण्ड को और उसकी तपन का अह्सास अपनी मुठ्ठि मे पाते ही गनगना जाती है

मै उसके होठ चुस्ते हुए उसे अपनी तरफ खिचता हू और वो मेरे सुपाडे वाले हिस्से को मुठिया रही होती है ।

फिर मै आंखो से इशारे करता हू और वो मुस्कुरा कर वही कोने मे बैठ जाती है और हम दोनो की कामक्रीड़ा परदे के पीछे चल रही होती है

निशा पुरे जोश मे मेरे लण्ड को चुस्ती है और मेरे आड़ सख्त होने लगते है,,,नहाने के बाद तुरंत लण्ड चुस्वाने का मजा मेरे लिये पहला अनुभव था एक नया जोश भर गया था मेरे लण्ड मे ।

लेकिन अफसोस हमारी मस्ती को मेरी ही जान की नजर लगी

सोनल निशा को बुलाने आ गयी

और हम दोनो झट पट अलग हुए क्योकि हो सकता था कि सोनल के साथ कोई और भी हो साथ मे

मै फौरन अपने कपडे लेके बाथरूम मे गया और सोनल के दरवाजा खटखटाने से पहले ही निशा ने चटखनि खोल दी और बाहर चली गयी ।

थोडी देर बाद मै कपडे पहन कर बाहर आया और तब हाल ने निशा, मा, चाची और सोनल सब तैयार खडे थे

चाची ह्स कर - औरतो से ज्यादा तो इसे टाईम लग जाता है ,,पता नही शादी मे क्या करेगा

चाची की बात पर सब हसे और फिर हमने एक ई-रिक्शा किया और निकल गये ।

मै आगे बैठ गया और बाकी सब पीछे बैठ गये ।

मै एक नजर मोबाईल मे देखा तो सरोजा के आज ने मैसेज पडे थे जो काफी गुस्से और भड़ास भरे लहजे मे थे तो कुछ चिन्ता की आश मे की कही मुझे कोई दिक्कत तो नही ,,,जैसा भी हो मै उसे बता दू ।

मै बस मुस्कुरा कर मोबाईल जेब मे रख दिया और 5 मिंट मे ही हम सब सरोजा कॉमप्लेक्स आ गये ।

अभी सुबह के 10 :30 बज रहे थे

फिर सारे लोग शॉपिंग ने व्यस्त थे तो मै मा को बोला की अभी आता हू थोड़ी देर मे एक दोस्त से मिल कर और फिर निकल गया , सरोज जी के ऑफ़िस मे

अन्दर जाने से पहले मैने सरोजा को कॉल लगाया और दो रिंग जाते ही उन्होने कॉल पिक कर लिया और शुरु हो गया उनका सारे सवालो और भड़ास भरे लहजे और अन्त तक आते आते

सरोजा - बोलो राज , तुम कुछ बोल क्यू नही रहे ,मुझसे कोई गलती हुई क्या

मै हस कर - सब ब्ताऊगा पहले दरवाजा खोलिये हिहिहिही

सरोजा अचरज के भाव से - मतलब , तुम यहा

तभी अन्दर कुछ खटपट हुई और सरोजा भाग कर खुद से दरवाजा खोली और सामने मुझे हस्ता पाकर

सरोजा ने फोन काटा और ह्स्ते हुए मेरा हाथ पकड कर अन्दर खीचा और भडकते हुए बोली - तुमने समझ कर क्या रखा है मुझे हा

सरोजा इस वक़्त मरून सिल्क साड़ी मे एक प्रोफेशनल लूक मे थी और उसके मैट मरून लिपस्टिक से होठ बोलते हुए मुझे आकर्षित कर रहे थे और मै उनकी आंखो मे देख रहा था लगातार और फिर मेरा चेहरा सीरियस होने लगा और सरोजा भी मेरे मन की मन्शा को जैसे भाप लिया हो और वो पीछे की ओर झुकने लगी , मै उनकी ओर लपकने लगा और आखिरकर उनकी कमर मे हाथ डाल कर एक बार फिर से उनके बड़बड़ाते होठो को थाम लिया अपने होठो मे

वो आंखे ब्ड़ी किये मुझे घुर रही थी और उन्हे इत्मीनान कर उन्के होठ चुस्ते हुए आंखे बंद कर लिये वो सिहर गयी और मुझे अपनी ओर खींचने लगी ।

खैर हमारी होठो की बात चित लम्बी नही चली की डोर नॉक हुआ

फिर हम अलग हुआ और सरोजा ने मुझे सोफे पर बैठने का इशारा कर डोर खोला

सामने उनकी assistent थी जो बस फ़ॉरमैलिटी के लिए आई थी और उन्होने उसको किसी बॉय को भेजने को बोला और वापस मेरे पास गयी ।

हम दोनो के बीच कुछ सन्नाटा सा थ और तभी सरोजा और मै एक साथ बोले - वो कल रात

फिर हम दोनो हसे

सरोजा ह्स कर - हा बोलो कल मेरा फोन क्यू नही उठाया

मै - सॉरी वो कल दीदी के शादी को लेके बाते हो रही थी और आज उसी के शॉपिंग के लिए आये है मेरे फैमिली वाले यही पर ,,, और मेरा मोबाईल चार्ज मे था तो

सरोजा तुनक कर - तो सुबह नही फोन कर सकते थे , पता है मै कितनी परेशान थी

मै ह्स कर - वो मै सोच की आज जाना ही है मिलने तो क्यू ना सरप्राइज़ ही देदू

सरोजा - हा तुम्हारे सरप्राइज़ के चक्कर मे मुझे चक्कर आ रहे थे कल से

मै ह्स सरोजा को छेड़ते हुए - ओह्हो मेरे लिए इतनी फ़िकर क्यू जी

सरोजा थोडा संकोच दिखाते हुए - अब ब ब तुम दोस्त हो मेरे,, तो दोस्त की फ़िकर होगी न

मै उनकी बात को तब्ज्जो दते हुए -ओह्ह

मै उन्हे छेड़ने के अंदाज मे - सिर्फ दोस्त या और भी कुछ

सरोजा शर्मायायि और बोली - मै दोस्त ही समझती हू ,ब्स तुम्हारे लक्षण ठीक नही लग रहे हैं

मै हस कर उन्के पास हुआ और बोला -कैसे लक्षण

वो कुछ बोलती की बॉय अंदर आया और फिर सरोजा ने उसे दो काफी का ओर्डेर दिया

मै वापस से उन्हे इंसिस्ट करते हुए - बोलिए ना जी कैसे लक्षण

सरोजा हस कर - यही चिपकू होने के लक्षण ,,,हमेशा मेरे साथ फलिर्ट करने का लक्षण और क्या

मै - क्यू आपको मेरी शरारते पसन्द नही तो मै नही करूँगा आज से खुश

मेरे तेवर भरे जवाब से सरोजा सहमी और बोली - नही वो बात नही है राज ,, मुझे अच्छा लगता है लेकिन कभी कभी मै हमारे उम्र के दायरे को लेके बहुत सोच मे पड जाती हू कि लोगो जानेंगे हमारी दोस्ती के बारे मे तो क्या कहेंगे और एक बदनमी मै सह चुकी अब दुसरे की हिम्मत नही है

मै सरोजा के दिल के जज्बात समझ सकता था और मै उसके पास गया उसके हाथ पकड कर उसकी भरी हुई आंखो मे देखते हुए बोला - यार तुम फाल्तू का डर रही हो , मेरा ब्स चले तो मै हमारी दोस्ती के बैनर लगवा दू हिहिहिह

सरोजा मेरे बात पर खिलखिला कर हँस पड़ी और उसके आंख छलक गये

वो उन्हे साफ कर बोली - ब्स इसी जिन्दादिली और तुम्हारे बड़े दिल के कारण ही मै तुमसे बाते करती हू और तुम्हारा साथ नही छोड़ना चाहती

मै उदास होने नाटक मे - मुझे लगा कि आपको मेरा कुछ और बड़ा पसन्द आया था इसिलिए आप साथ हो

जैसे ही सरोजा मेरे बातो का मतलब समझी और उसकी आंखे ब्ड़ी हुई तो मै जोर से हसने लगा

सरोजा मेरे तरफ आके मेरे कान पकडने के लिए लपकते हुए बोली- बदमाश कही के तुम नही सुधर सकते ना

वो मेरी ओर लपकी तो मै सोचा क्यू ना एक किस्स और कर लू लेकिन उससे पहले ही डोर नॉक हुआ और एक बॉय काफी लेके आया ।

साला आज तीसरी मर्तबा था कि कोई हमे डिस्टर्ब कर रहा था सरोजा भी इस बात को समझ गयी थी तो उसने बॉय को बोल दिया की वो जाये और जब तक वो ना कहे कोई हमे डिस्टर्ब ना करे ।

उसके जाने के बाद सरोजा ने दरवाजा बन्द कर वपस मेरे बगल मे बैठी

सरोजा - लो कॉफी पीयो

मैने कॉफी ली और एक सिप लेते हुए बोला - और तब बताईए जी

सरोजा - हा पुछो

मै थोडा शांत रहा और बोला - अगर आपको ऐतराज ना हो तो आप उस दिन की बात आज पूरी कर सकती है

सरोजा मेरे कहने का मतलब समझ गयी और मुस्कुरा कर कॉफी टेबल पर रखते हुए बोली - देखो राज ,, वैसे मेरी बीती जिन्दगी के बारे मे काफी लोग जानते है , उनमे कुछ सच्चाई है और कुछ अफवाहे भी है ।

मै थोडा उत्सुकता और अचरज से - मतलब मै समझा नही

सरोजा मुस्कुरा कर - तो सुनो मै बताती हू

राज मै बचपन से घर की लाडली थी और शुरु से ही मेरा शरीर ऐसे ही भरा हुआ था या कहो की मै मोटी थी ।

संजीव भैया ने मुझे बहुत सहारा दिया यहा तक की मेरी जिद पर मुझे पढने के लिए घर मे बहस कर बाहर पढने के लिए भी भेजा ।

12वी के बाद मै दिल्ली मे अपने मौसी के यहा पढाई करने चली गयी और वही कामर्स से पढाई की । फिर MBA भी किया । MBA के दौरान ही मेरी मुलाकात मनीष से हुई , वो एक हाई प्रोफाइल और वेल एजुकेटेड इन्सान था और वहा कालेज मे मेरा सीनियर भी था ।

शुरु मे हम दोनो मे प्यार हुआ और फिर उसे एक मल्टीनेशनल कंपनी मे सीनियर पोस्ट की जॉब मिल गयी । समय आने पर हम दोनो ने अपनी बात शादी के लिए घर पर बताई और फिर उसकी अच्छी पर्सनैलिटी से प्रभावित होकर भैया ने घर मे सबको हमारी शादी के लिए मनाया ।

कुछ समय बाद हमारी शादी हो गयी और मै उसके साथ दिल्ली मे ही शिफ्ट हो गयी ।

समय आने उसने मुझे उसके ऑफ़िस मे एक सहायक के रूप मे जॉइनिग कराई ।

मेरी हैल्प से उसकी जॉब मे काफी तरक्की हुई लेकिन मै बदकिस्मती से एक अस्सीस्तेंट ही रही ।

समय के साथ मनीष मे घमंड होने लगा और धीरे धीरे वो मेरे साथ रूड बिहेव करने लगा । मुझे अह्सास होने लगा था कि उसको ये बात बहुत खल रही थी कि जिस कंपनी मे वो एक अच्छी रैंक पर काम कर रहा है उसी कंपनी मे उसकी वाइफ किसी छोटे कर्मचारी की अस्सीस्तेंट है । अब आये दिन मनीष मुझे नौकरी छोडने का दबाव देने लगा ।

मै उसकी खुशि और रेपोटेशन को देखते हुए नौकरी छोड दी और ऐसे ही 6 महीने बित गये । हमारी शादी को लगभग डेढ़ साल होने को थे और शादी के फिजिकल होने से और घर पर रहने से मेरी बॉडी मे फैट ज्यादा हो गया जिससे मै पहले से ज्यादा मोटी हो गयी । समय के साथ अब मनीष मेरे बॉडी को लेके ताने मारने लगा , उसे मुझे कम्पनी के किसी पार्टी या रेशप्सन मे लेके जाने मे हिचक होती थी । धीरे धीरे मै भी उसकी बातो से इरिटेट होने लगी । एक बोझ सा लगने लगा मेरे मन मे , मैने जिम जॉइन की थोडा वेट लॉस भी किया लेकिन अब मनीष को मुझे ताने देने की आदत सी हो गयी थी वो ऑफ़िस की भड़ास घर आकर मुझ पर निकालता था और मेरे लाख कोशिस के बावजूद भी हमारे रिश्ते मे कोई मिठास बाकी नही थी । महिनो हमारे बीच कोई फिजिक्ल रिलेशनशिप नही हुए वही मेरी सास मुझ पर बच्चे के लिए दबाव बनाने लगी थी

मै काफी समय दिया मनीष को लेकिन वो अब जुनुनी हो गया था और मै समझ गयी कि ये इंसान अब बदल गया ।

हार मान कर मैने ये बात अपने भैया को बताई और फिर उन्होने सलाह दी मै तलाख ले लू , और मुझे सही भी लगा ।

फिर मैने उसे तलाख दे दिया लेकिन फिर भी उसे कोई फर्क नही पडा ।

घर वापस आने के बाद भैया ने मेरे नाम से ये कॉमप्लेक्स खुलवा दिया और ब्स तबसे मै यही हू ।

मै एक गहरी सास ली और सरोजा को देखा तो उसकी आंखे नम थी

मैने जेब से रुमाल निकाला और उसे दिया । वो मुस्कुरा कर आंख साफ की

सरोजा ह्स कर - सुन ली मेरी दर्द भरी दास्ताँ

मै - हम्म्म वाकयी आप काफी हिम्मत वाली है ।

मै थोडा सोच कर - फिर आपने दुसरी शादी क्यू नही की

सरोजा मुस्कुरा कर - मुझसे शादी करेगा कौन राज , एक तो मेरी उम्र 34 की होने वाली है और मै तालाखशुदा औरत हू ,,वैसे भैया ने कोसिस की थी एक दो बार लेकिन मैने खुद मना कर दिया ।

मै - हा लेकिन आखिर कब तक ऐसे अकेले जीवन जियेंगी आप ,, आप कहो तो मै खोजू आपके लिये कोई लड़का

सरोजा खिलखिला कर - हिहिहिही तुम खोजोगे , वो भी मेरे लिये

मै - हा क्यू नही ,,बस आप बताओ कैसा लड़का चाहिये

सरोजा मुस्कुरा कर - तुम बहुत अच्छे हो राज ,, मेरा बस होता तो मै तुमसे ही शादी कर लेती हिहिहिही

मै अचरज से - मुझसे , लेकिन मुझसे ऐसा क्या है ,,, कही उसकी वजह से तो नही

मैने सरोजा की आंखो मे देखते हुए अपने लण्ड की ओर इशारा किया

सरोजा शर्मा कर - अब बस भी करो ,,क्यू बार बार उस रात वाली बात को लेके मुझे परेशान करते हो

मै ह्स कर - मै तो करूँगा हिहिहिही ,,,आप ने मेरा फायदा उठाया है

सरोजा अचरज से - कैसा फायदा राज

मै हस कर - आप मेरा वो देख कर खुद का काम कर ली और मेरे बारे मे सोचा तक नही हुउह

सरोजा मेरी बातो से झेप सी गयी - अब बस भी करो , तुम मुझे शर्मिंदा कर रहे हो

मै हस कर - अच्छा ठीक है , वैसे एक बात पूछू सच सच बताना

सरोजा - हा बोलो

मै शरारती भाव मे - क्या सच मे उस दिन से पहले और तलाक के बाद वो सब नही किया था

सरोजा मेरी बाते सुन कर आंखे ब्ड़ी कर ली और फिर थोडी मुसकुराते हुए झेप सी गयी - धत्त बदमाश , ये सब कोई पुछता है

मै - नही उस दिन आप कह रही थी कि तालाक के बाद आज पहली बार तुम्हारा मोटा ,,,

सरोजा मेरे मुह पर हाथ रखते हुए ह्स कर - छीई गन्दे चुप कर ,,,हो गया एक बार मुझसे तो क्या अब परेशान करोगे मुझे

मै उसके हाथ पकड कर उसकी आंखो मे एक टक देखा और बोला - क्या सच मे आपका फिर से देखने क मन नही कर रहा है

सरोजा मेरी आंखो देखते ही खोने सी लगी उसकी सासे भारी होने लगी और वो मुह फेर ली - ओह्ह राज प्लीज ऐसी बाते मत करो

मै पीछे से उसके कन्धे पर हाथ रखा और बोला - मै किसी से ये शेयर नही करूँगा

सरोजा मेरे हाथो का स्पर्श पाकर सिहर सी गयी और उस्की आंखे बंद हो गयी थी । वो तेज गति से सास ले रही थी ।

मैने सोचा यही मौका कि कुछ बात आगे बढ़ाया जाये

मै खड़ा हुआ और धीरे से अपना पैंट खोला और अपना तना हुआ लण्ड पूरा का पूरा बाहर सरोजा के सामने रख दिया

सरोजा को मेरे लण्ड की गरमी का आभास हो गया था और वो धीरे धीरे खुद को नोर्मल कर बहुत हल्का सा एक अन्ख को खोल कर तिरछी से मेरे फंफनाते लण्ड को देख कर वाप्स से आंखे भीच लेती है ।

सरोजा

छीईईईई राज ये कया कर रहे हो अंदर कर लो प्लीज उसे ,,, यीईई मम्मी प्लीज राज

मै ह्स कर धीरे से सरोजा का एक हाथ झुक कर पकड़ा और वो उसे बार बार नीचे खिच रही थी लेकिन मन उसका भी था कि वो उसे छू ले

वो आंखे भिचे बूदबुदाते हुए ना ना करती रही और मैने उसका हाथ पकड कर लण्ड पर रख दिया और लण्ड का स्पर्श पाते ही वो गनगना गयी ।वही मै भी सरोजा के मुलायम हाथ का स्पर्श पाकर पागल सा होने लगा ।

सरोजा अब चुप थी और धीरे धीरे उसने आंखे खोलनी शुरु की और तिरछी नज़र से मेरे लण्ड के टमाटर से लाल सुपाडे को देखा और अपनी थूक गटक ली ,,

मै धीरे से अपना हाथ सरोजा के सर पर रखा और वो मेरे लण्ड को थामे नजरे उपर कर मेरी आंखो मे देखी तो मै झुक कर उसके मोटे रसिले होठो को मुह मे भर लिया और सरोजा ने भी मेरा साथ दिया ।

मै वापस खड़ा हुआ और लण्ड को थोडा सरोजा के सामने लाया और सब सरोजा उसे अच्चे से निहार रही थी ।

मै हौले से सरोजा के गाल को सहलाया और लण्ड को उसके होठो के पास के ले गया ।

मेरे दिल की धडकनें तेज हो रही थी वही सरोजा मेरी आंखो मे देखते हुए धीरे से मुह खोला और सुपाड़े को मुह मे भर लिया ।

मेरी आंखे बन्द हो गयी । मेरे सुपाडे को एक ठन्दक सा अह्सास हुआ ,,, सरोजा के मुलायम होठो का स्पर्श मेरे लण्ड की नशो को फाडने लगा ।

मैने वापस आन्खे खोली तो सरोजा अपनी आंखे बंद किये बडे ही कामुक अदान्ज मे धीरे धीरे लण्ड को मुह मे ले रही थी और मेरा लण्ड और भी फौलादी हुए जा रहा था ।

मैने अपने हाथ सरोजा के बालो पर रखे और हौले से दबाया जिससे सरोजा ने लण्ड को और अन्दर लेके मेरी आंखो मे झाका

मेरे मुह से आह्ह्ह निकाली

मै - ओह्ह्ह सरोजा उम्म्ंम्ं थोडा जोर से चुसो ना

सरोजा अपनी मतवाली आंखे नचाते हुए लण्ड को धीरे धीरे मुह मे अन्दर बाहर करने लगी

मेरे हाथ उसके बदन पर सरकाने लगे और बालो से होकर गरदन और फिर कन्धे तक गये और फिर झुका तो हाथ उसकी मोटी चुचियॉ के उभार पर गये

मैने उसकी बाई चुची को अपने दाये हाथ से दबाया और सहलाने लगा और वही बाये हाथ से उसके सर को पकड कर अप्नी कमर को चलाते हुए मुह लण्ड पेलने लगा

फिर सरोजा रुकी और मुह से लण्ड निकाल कर खड़ी हूई और मैने झट से उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसके होठ चुसने शुरु कर दिये ।

वो भी एक हाथ से मेरे लण्ड को भीचते हुए मेरे होठ चुस रही थी और वही मेरे हाथ उसकी गाड पर घुम रहे थे ।

फिर सरोजा ने मेरे होठ छोडे और मेरा लण्ड पकड कर खिच्ते हुए ऑफ़िस मे ही बने एक इनडोर कमरे मे ले गयी और झट से दरवाजा बन्द किया ।

अन्दर एक फुल किंग साइज़ बेड था और सारे सुविधाये भी जो एक घर के bedroom मे होती है ।

मै झट से सरोजा को पीछे से पकड कर लण्ड को उसकी गाड मे धसाते हुए उसकी चुचियॉ को मिजने लगा ।

सरोजा क्समसा कर - ओफ्फ्फ राआआज्ज्ज्ज उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ज माआआ उम्म्ंम्म्ं

मै उसकी नंगी कमर मे हाथ डाल कर उसके गुदाज मुलायम पेट को मसलने लगा और नाभि मे ऊँगली करते हुए उसके गरदन को चूमने लगा ।

वही सरोजा मानो पागल सी होने लगी और अपनी गाड को मेरे लण्ड पर रगड़ते हुए सिस्किया ले रही थी ।

मै भो सरोजा के गाड का दीवाना था तो झट से सरोजा के बेड के पास झुका साडी को फटाक से उपर किया और अन्दर उसकी नंगी नंगी गोरी चमड़ी वाली मांसल जान्घो के उपर मरून पैंटी मे कैद फुटबाल कैसे गाड उफ्फ्फ

मैज झट से नीचे बैठ कर अपना मुह पैंटी के उपर से ही सरोजा के गाड के दरार पर लगा कर नाक घुसाने लगा और दोनो हाथो को उसकी मुलायम गोरी जांघो पर फेरने लगा ।

सरोजा के चुत और उसकी रिस्ते रस की महक मेरे नकुरो तक आ रही थी । मैने मेरे हाथ उपर लाकर उसके चुतडो को फैलाते हुए नीचे चुत के मुहाने से उपर तक होठ और नथुने को दरने लगा ।

सरोजा पागल सी होने लगी

मै झट से उसे घुमा कर बिस्तर पर धकेल दिया और साडी उठा कर उसकी पैंटी को एक झटके मे निकाल दिया ।

सरोजा आंखे बंद किये तेज सासे लेते हुए सिस्क रही थी

वही मेरी नजर उसकी झानटो से भरी चुत पर गयी जो चुत के रस से चिपक गयी गयी और काफी सारा माल फैला हुआ था

मैने एक बार थूक गटका और सरोजा की मोटी जांघो को खोला और एक बार अच्छे से नाक को चुत के करीब लाकर सूंघा और लपालप जीभ उसकी चुत पर चलाने लगा ।

सरोजा अकड सी गयी और अपनी जांघो से मेरे सर को जकड़ कर कमर झटक रही थी

सरोजा - ओह्ह्ह राज उम्म्ंम अह्ह्ह और चुसो उम्म्ंम अह्ह्ह मा

मै उसके चुत के झान्टो मे लगी उसकी रस को चुबला चुब्ला कर चाट रहा था और बीच बीच में उसकी गर्म तपती चुत मे जीभ घुसा कर चाट लेता जिससे सरोजा पागल सी हो जाती ।

आखिर कुछ ही पलो मे

सरोजा - आह्ह राज अब मत रुको प्लीज चोद दो मुझे अह्ह्ह प्लीज

मै झट से खड़ा हुआ और अपना मुह साफ कर एक नजर सरोजा की ओर देखा और पैंट निकाल दिया

फिर थोडा जगह बना कर लण्ड को उसकी चुत के मुहाने पर सेट किया ।

सरोजा इस वक़्त मेरे लण्ड को देख रही थी और वो बार बार मुझे हा मे इशारे कर लण्ड डालने को कह रही थी ।

मैने भी सुपाडे को एक बार अच्छे से उसकी पिचपिचाई चुत पर रगड़ा और गचाक से एक धक्के मे आधा लण्ड उसके चुत मे उतार दिया

सरोजा ने तुरंत मुह पर हाथ रख ली और चिख की दबा दिया और मैने वापस से धक्का मारा और इस बार आसानी से लण्ड उसकी चुत मे उतर गया ।

एक पल को मुझे थोडी उलझन सी हुई की अगर सरोजा काफी समय से चुदी नही है तो फिर इतनी आसानी से लण्ड कैसे चला गया

मैने उस बात को टाला और जोर जोर से धक्के उसकी चुत मे लगाने लगा

सरोजा कबसे से खुद को रोके हुए थी और मेरे शुरुवती धक्को से ही वो झड़ने लगी

उसने अपनी कमर को उचका कर अपनी चुत के दाने को सह्लाते हुए मेरे लण्ड को निचोडना शुरु कर दिया और झडने लगी ।

लेकिन मेरी तो अभी शुरुआत थी मैने बिस्तर पर जगह बना कर उपर चढा और पेल्ते हुए सरोजा के उपर झुका ,,, बदले मे सरोजा ने मुझे खिच कर अपने होठ से मेरे होठ को चूसने लगी और मैं भी उस्के होठ चुस्ते हुए उसकी साडी खोल कर ब्लाउज का एक एक बटन खोलने लगा ।

मै सारे बटन खोलने के बाद सरोजा के होठ छोड़ ब्रा के उपर से ही उसकी मोटी चुची को चाटने लगा ।

सरोज मेरे सर को अपनी चुचियॉ मे दबाने लगी और वही मै अपनी गति से उस्की चुत मे जगह बना रहा था ।

उसकी चुत भरने से लण्ड बहुत मजे से अन्दर बाहर हो रहा था

लेकिन अभी मै सरोजा की चुचियॉ के लिए पागल हो रहा था और मैने हाथ डाल कर ब्रा मे एक चुची के निप्प्ल को बाहर निकाला और सीधा मुह मे भर लिया

सरोजा सिस्क उठी और मेरे सर के बालो को नोचते हुए कमर पटकने लगी ।

वही मैं उसके निप्पल को मुह मे भरे अपनी जीभ से फ्लिक कर रहा था और उसकी घुंडी के चारो ओर जीभ को नचा कर सरोजा को और मस्त करने लगा ।

मुझसे फिर भी रहा नही जा रहा था मेरे धक्के थम गये थे और लण्ड सरोजा के चुत मे गहराई मे रुका हुआ अन्दर की फड़क रहा था

मै थोडा उपर हुआ और दुसरा चुची बाहर निकालना चाहा तो

सरोजा मदहोश आवाज मे बोली - आह्ह राज रुको ऐसे ,,,,आहहहह हा अब चुसो

चुकी सरोजा ने मॉर्डन ब्रा पहनी थी जिसका एक बड़ा हुक सामने ही लगा था जिसे खोलते ही उसकी चुचिया आजाद हो कर फैल गयी ।

मै ब्ड़ी ब्ड़ी आंखो से पागलो की तरह उसकी 38DD की मोटी काले घेरे वाली निप्प्ल वाली चुचिया बहुत ही कामुक लग रही थी ।

मै थूक गटक कर दोनो हाथो से उसकी चूचियो को समेटते हुए सामने लाया , उसके मूनन्के के दाने जैसे कड़े निप्प्ल सीधे तने थे ।

मैने बारी बारी से एक एक निप्प्ल को चुसना शुरु किया

मै बारी बारी से गार गार उसकी चूचिया चुस्ता

सरोजा - ओह्ह राज प्लीज चोदो ना रुक कयू गये

फिर मुझे ध्यान आया कि मेरा लण्ड तो रुका हुआ है ।

मैने वापस से अपने कमर को उसकी जांघो के बीच पटकना शुरु किया और कुछ ही ध्क्को मे मेरा लण्ड वापस से पूरा तन गया और मेरी स्पीड भी बढ़ गयी ।

मै थोडा खड़ा हुआ और सरोजा के एक पैर को अपने कन्धे पर रखा और सटासट लण्ड को उसकी चुत मे पेलता रहा

सरोजा - ओह्ह्ह राज बहुत मजा आ रहा है,,, सच मे जितना सोचा था उस्से कही ज्यादा मस्त हो तुम आह्ह मा और तेज उफ्फ्फ्फ

मै - हा सरोजा तुम भी बहुत मस्त हो बहुत मजा आ रहा है तुम्हे चोद्ने मे ,,,आज तक ऐसा माल नही मिला

सरोज इतरा कर - मै तुम्हे माल लगती हू हा अह्ह्ह इस्स्स्स्स उम्म्ंम्ं

मै जोर जोर के लम्बे शॉट लगाते हुए - तुम तो एक नं की चोदने लायाक माल ही तभी तो तुम्हारे लिए पागल था मै

सरोजा - अह्ह्ह हा मुझे पता था , और ना जाने तुम मे क्या था कि मै भी खीची चली आई

मै - ओह्ह्ह सरोजा अह्ह्ह बहुत मस्त चुत है ,, तुम्हारी चुचिया ,तुम्हारी गाड सब मस्त है जान ओह्ह्ह

सरोजा - तो पेलो ना पूरा जोर से अह्ह्ह हा और तेज्ज्ज अह्ह्ह अह्ह् मेरा फिर से होने वाला है अह्ह्ह माआआ

मै भी झडने के करीब था

मै - ओह्ह्व मै भी आऊंगा ,,,

आऊंगा क्या आ गया था मै ,,मै सरोजा से पहले ही उसकी चुत मे भल भला कर झड़ने लगा और सरोजा भी मेरे बाद झड़ने लगी

थोडी देर बाद मै निढ़ाल होकर उसका पैर छोड कर वैसे सी चुत मे लण्ड डाले सरोजा के उपर आ गया ।

हम दोनो की सांसे तेज थी और मै उसके दिल की तेज धडकनें सुन सकता था ।

मैने अपने हाथ से उसकी एक चूची को थामा और ऐसे ही लेता रहा

तभी मुझे मेरे मोबाईल की रिंग सुनाई दी और मुझे मम्मी का ध्यान आया

मै झट से उथा और फोन उठाया जो दीदी ने किया

मैने उसको 5मिंट मे आने का बोल कर वापस रख दिया

सरोजा भी उठ कर बैठ गयी थी ।

मेरे थोडे मुरझाए लण्ड से अभी भी हल्का हल्का मेरा और सरोजा का मिला जुला माल फर्श पर गिर रहा था ।

जिसे सरोजा से बेड पड़ी पैंटी से अच्छे से मसल कर साफ किया और एक किस्स किया

वो फिर से मुस्कुराई और खड़ी हुई

हम दोनो बिना कुछ बोले एक दुसरे को किस्स किये और मै कपडे पहनने लगा ।

सरोजा बेड पर वैसे ही बैठ गयी ,,,उसकी मोटी मोटी चुचिय वैसे ही खुली थी और साड़ी जांघो तक चढ़ी थी ,,,

मै ह्स कर - अरे कपडे नही पहनोगे क्या ,,,और सॉरी जल्दी मे मेरा अन्दर ही गिर गया

सरोजा मुस्कुराई और मुझे पकड कर मेरे पेट पर अपना सर रख कर हग कर ली

मै - अरे कुछ सोचा है क्या करोगी उसका

सरोजा - मेरे पास आई-पिल है राज मै ले लूंगी

मै चौका - है मतलब

सरोजा थोड़ी हड़बड़ाई और बोली - मतलब कॉमप्लेक्स मे मैडिकल है ना तो मै वहा से ले लूंगी

मै थोडा शांत हुआ लेकिन एक उलझन सी हुई सरोजा के जवाब से

इधर वापस सोनल मेरे पास फोन करने लगी ।

मै जल्दी से कपड़े पहने और बोला - मुझे जाना होगा ,,काफी समय हो गया है

सरोजा मेरा हाथ पकड कर खड़ी हुई - फिर कब आओगे

मै मुस्कुरा कर - जब तुम कहो मेरी जान

और उसके गाल चूम लेता हू

मै वापस जाने को हुआ तो बोली - ठीक है बिल अपने नाम से बनवाना

फिर मै उसको बाय बोलकर बाहर निकल गया ।

भाग कर मै मा के पास गया तो दीदी और निशा ने अपनी शॉपिंग कर ली थी और अनुज के लिए जुटे ले लिये थे। फिर मैने भी मेरे लिए एक सेट पैंट शर्त लिये ।

मै मा और चाची से - और आप लोग नही लोगे क्या कुछ

मा हस कर - अरे वो तेरे चाचा के यहा हम लोग लेंगे अपने लिये साड़िया

फिर मै

बिल करा कर पेमेंट दिया और फिर हम सब निकल गये चाचा के यहा

थोडी देर मे हम सब चाचा के यहा गये तो चाची हमे लिवा कर अंदर हाल मे ले गयी

फिर वही चाय नासता किया गया ।

वही थोडी देर के लिए मा और चाची दुकान मे साड़ियाँ देखने गयी और इधर मैं सोनल और निशा को लेके निशा के कमरे मे घुस गया और थोडा मुखमैथुन का आनंद लेने के बाद बाहर तो मा और चाची अभी भी दुकान मे ही थे।

मै - मा दोपहर के खाने का समय हो गया है और कितना समय लगेगा आपको ,, वहा पापा इन्तजार कर रहे होगे

मा मेरी बात का जवाब देती उससे पहले चाची बोली - बेटा चिन्ता ना कर , खाना यही बन जा रहा तुम सब खा लो और फिर मै तेरे पापा के लिए भी पैक कर दूँगी लेके चले जाना

मा को भी ये सुझाव सही लगा

फिर मै वही दुकान मे एक कुर्सी लेके बैठ गया

वही चाचा मा को साड़ियाँ दिखा रहे थे ।

मा - निशा की मा ,,ये सोनल की सास के लिए साडी अच्छी रहेगी ना

चाची - अब पता नही जीजी ,,मैने तो कभी देखा नही उनको

मा मेरे तरफ देख के - तू बता राज , ये साडी ठीक है अमन की मा के लिए

मै हस कर - अरे नही मा , वो साड़ी नही पहनती है

मा अचरज से - मतलब क्यू

मै चाचा के सामने थोडा झिझक रहा था - वो मा उनका शरीर कुछ ज्यादा ही लम्बा चौड़ा है तो वो सूट सलवार ही पहनती है

मा थोडा मुस्करा कर - ओह्ह्ह फिर भी एक ले लेती हू और देवर जी सुनिये

चाचा एक मुस्कान के साथ मा को देखते हुए बोले - हा भौजी बोलो ना

मा ह्स कर - जरा एक बढिया सूट का कपडा दिखा दिजीये वो भी दे देंगे ,,,क्यू निशा की मा

चाची - हा जीजी ये थिक रहेगा

फिर सारे समान की पैकिंग हुई और 2 बजे तक खाना तैयार हुआ तो राहुल अनुज को और मै पापा के लिए खाना लेके चले गये

फिर मै वापस आया और खाना खाने के बाद सारा समान लेके निकल गया सोनल और मा के साथ चौराहे पर

जारी रहेगी

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