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Guest
सुबह हुई माँ चाय लेकर मुझे जगा रही थी,
माँ-- राज उठ जा, चाय पि, और आज तेरी बुआ के पास जाने को बोल रहे है तेरे पापा,
आज तेरे दादा की पुण्यतिथि भी है तेरी दादी का भी ध्यान रखना है जल्दी चल,
मै-- जल्दबाजी के चक्कर मे तो रात को माया को पता चल जाता,
माँ-- क्या हुआ राज डरती हुई
मैने माँ को वीर्य वाली सारी बात बताई,
माँ-- माया को तो नही पता चला, आगे से ध्यान रखना होगा राज, जब कोई नही होगा तब ही करेंगे, वैसे रात को मुझे बहुत अच्छी नींद आई,
चल हम भी तैयार होते है तुम भी तैयार हो जाओ,
मै माँ और पापा तैयार होकर बुआ के पास चले गये,...
बुआ और दादी ने पापा को साथ देख खुश होती हुई
बुआ-- भैया आपको यहा देखकर दिल खुश हो गया,
पापा-- रमा सब राज का कमाल है, भगवान ने हमारी सहायता के लिए इसको यहा भेजा है,
मै बुआ और दादी को मस्त नजरो से देख रहा,
तभी माँ दादी से माँ जी आज ससुर जी की पुण्यतिथि है हम उनको याद करते है और हर दम आपके साथ है, इतना सुनते ही दादी ने माँ को जोर से रोती हुई माँ को गले लगा लिया,
दोनो की चुन्चिया आपस मे मिल गयी,
दादी ने पहली बार माँ को गले लगाया था आज
सब देख कर खुश थे की आज सास बहू एक जगह हो गयी,
माँ ने पापा के पास गयी और उनका हालचाल पूछा, तभी मेरे सामने दादी आई,,
दादी-- क्यु बेटा अपनी दादी को भूल गया क्या
मै-- नही दादी आपको कैसे भूल सकता हु, आप ही तो सब कुछ हो, कहते हुए दादी को गले लगा लिया,
बुआ-- चलो अंदर चलो खाना खाते है,
हम सब अंदर आ गये,, अंदर शाम तक बाते करते रहे तभी
माँ-- ठीक है रमा अब हम चलते है घर पर
बुआ-- नहीं भाभी, आज आज रुक जाओ कल चले जाना,
दादी-- नही रमा आज जाना है मुझे तेरे पापा की यादे है उस घर मे,
बुआ-- ठीक है माँ एक काम करो, आप और राज दोनो चले जाओ, भैया और भाभी कल आ जायेंगे,
दादी आज उदास सी थी,
दादी-- ठीक है बेटा चल हम चलते हैं
मै मन ही मन मे खुश हुआ, आज दादी और मै अकेले होंगे आज दादी की चूत का स्वाद लूंगा,
माँ-- मेरी तरफ देखती हुई, बेटा राज अपनी दादी का ख्याल रखना,
मै-- हा माँ मै दादी का अच्छे से ख्याल रखूँगा
मै और दादी गाड़ी मे बैठ घर आ जाते है, दादी गाड़ी मे भी उदास लग रही थी कुछ नही बोल रही थी,
दादी अपने कमरे मे चली गयी, माया आई भैया खाना तैयार है आप दोनो खा लो,
मै दादी के पास कमरे मे गया दादी आओ खाना खाते है,
दादी बेड पर उदास सी बैठी हुई, नही बेटा मुझे भूख नही है तुम खा लो,
मै दादी के पास गया, दादी क्या हुआ इतनी उदास क्यु हो,
दादी-- बेटा आज तेरे दादा की पुण्यतिथि है आज उनकी बहुत याद आ रही है,
मै-- दादी पहले खाना खाओ फिर हम बैठकर बात करते है
दादी-- तुम खा लो बेटा,
मै-- दादी का हाथ पकड़ कर, नही आपको मेरे साथ खाना है, अगर आप खाना नही खाओगी तो दादा जी को भी अच्छा नही लगेगा, चलो आओ
दादी मेरी तरफ देखती हुई चल बेटा तु नही मानेगा
मै-- मेरी दादी को भूखी कैसे रहने दु, बताओ,
दादी थोड़ी सी हस्ती हुई झूठा कही का, इतने दिन तो याद भी नही किया
मै-- दादी बहुत याद आई आपकी लेकिन पापा के ईलाज मे व्यस्त था,
मै दादी दोनो खा लेते है दादी अपने कमरे मे चली जाती है
माया-- भैया हुक्का लगा दु क्या,
मै-- नही दीदी आज दादी उदास है उनको खुश करता हु हसी मज़ाक से,
एक काम करो तुम जाओ आराम करो
माया चली जाती है मै दादी के पास कमरे मै आता हु,
दादी खड़ी हुई दीवार पर लगी दादा की फोटो को देख रही थी,
मैने अपनी पेंट निकाल लुंगी पहन ली,
मै-- दादी दादा को देख रही हो, दादी की नज़र फोटो पर थी
मैने आज सोच लिया था की आज दादी को चोद कर ही मानुगा,,
दादी-- बेटा तेरे दादा बहुत अच्छे थे, मुझे बहुत प्यार करते थे, लेकिन मुझे अकेला छोड़ कर चले गये, दादी की आवाज मे भारीपन आने लगा,
मैने दादी को पीछे से पकड़ अपने दोनो हाथ दादी के पेट से पकड़,
मै-- दादी ऐसा मत कहो, आप अकेली कैसे है, मै हु ना आपके साथ,
दादी-- हा मेरे लाल तु ही तो अब सहारा है मेरा, तु भी अपने दादा की तरह ही है जो मेरी इतनी परवाह करता है
मै दादी के पीछे एकदम चिपक गया,
दादी--- बेटा तेरे दादा मुझे बहुत प्यार करते थे, हमेशा मेरे साथ ही रहते,
मैने दादी का पेट सहलाना शुरु कर दिया, और अपना लंड को दादी के बड़े बड़े चुतडो की खाई मे लगा दिया,
मै-- दादी मै भी तो प्यार करता हु आपसे,
दादी-- हा मेरे लाल, लेकिन उनका प्यार अलग था तु तो बेटा है
मै-- तो क्या हुआ दादी, चलो आज से मै भी दादा वाला प्यार करूँगा,
मै दादी को चोदने की कह रहा था,
दादी के चुतडो मे लंड खडा हो गया पूरा,
और मै पूरा जोर से चिपक रहा, दादी भी मेरे लंड को खूब जानती थी, लेकिन दादी आराम से खड़ी थी,
दादी पीछे मुड़ी और मेरी तरफ देखती हुई बड़ा आया दादा का प्यार देने, चल सोते है, मेरा लंड लुंगी मै खडा तम्बू बना रखा था, मै और दादी बेड पर लेट गये और कंबल ओढ़ ली,
लेकिन मुझे कहा नींद आ रही थी, मैने तो दादी को चोदने का प्लान बना रखा था,
दादी ब्लाउस और पेटिकोट मे लेटी थी सीधी,
उनकी पहाड़ जैसी चुन्चिया ब्लाउस को उपर कर रही थी,
दादी-- बेटा तुझे मैने बहुत याद किया, तेरे बिना तो मै अकेली सी हो गयी थी,
और तो मुझ बुढी औरत से बात कोन करेगा, बस तु ही करता था,
वैसे बेटा तूने सीता को भी अच्छे से समझाया है, पूरी ही बदल गयी वो तो,
मै-- दादी किसने कहा आप बुढी हो, आप तो अभी बहुत जवान हो, आप तो पापा की माँ नही बहन जैसे दिखती हो,
दादी आपने अच्छा खान पान किया है
दादी-- हा बेटा तेरे दादा मेरा बहुत ध्यान रखते थे,
मै-- तभी तो अब तक जवान हो,
दादी-- तुझे बड़ी जवान लगी,
मै-- दादी मैने तो आपको देखा है इसलिए बता रहा हूँ
दादी-- अच्छा दादी को तभी जवान बता रहा है
चल सोजा अब, दादी अपना चेहरा मेरी तरफ कर लेट गयी
कुछ देर मै दादी की तरफ देखता रहा और एकदम पास आकर दादी की टांग पर मैने अपनी एक टांग रख रख दी और अपना मुंह दादी के ब्लाउस के पास ले जाके और हाथ दादी की कमर पर रख दिया,
दादी वैसे पहले कई बार मेरे साथ ऐसे सोई थी ,
मेरी आँखों के सामने दादी का ब्लाउस सांस के साथ उपर नीचे हो रहा था, और थोड़ी सी चुन्चि की घाटी भी दिख रही,
दादी -- बेटा आज सर्दी बहुत है शायद, मुझे तो बहुत ठण्ड लग रही हैं
मै-- हा दादी आज कुछ ज्यादा ही है दादी सरक कर पूरी मेरे से चिपक गयी, और अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया, मेरे चेहरे से ब्लाउस एक दम पास हो गया था, मेरी साँसे गर्म होने लगी जो सीधी चुन्चियो की घाटी पर लग रही थी,
मैने अपने हाथ से दादी की कमर पर जोर देकर मै और पास हो गया जिससे मेरा मुंह सीधा चुन्चियो की घाटी पर लगा, दादी की कोमल चुन्चियो को मैने होठों से छु लिया, और अपनी टांग को दादी की मासल जांघो पर चडा दिया, मेरा खड़ा लंड लुंगी मे फड़ फड़ा रहा था,
मैने दादी की कमर से हाथ हटा अपनी लुंगी को खोल लंड को आजाद कर दिया, लंड का टोपा सीधा दादी के पेट पर लगा,
दादी-- समझ गयी थी lakin,
दादी-- क्या हुआ बेटा नींद नही आ रही क्या,
मै-- दादी कई दिन हो गये ऐसे सोये हुए, आज कपड़े खोल कर सोना चाहता हु
दादी-- लुंगी खोल तो दी है तुमने
मै-- दादी आपको कैसे पता चला
दादी-- देख मेरे पेट से लग रहा है तेरा
कोई नही सोजा बेटा,
दादी ने करवट लेली और मेरी तरफ पीठ कर दी,
मैने फिर से दादी के चिपक अपना हाथ पेट पर डाल दिया, और लंड अब जो की दादी के चुतडो की खाई पर लगा पड़ा था, मेरी गर्म साँसे दादी की गर्दन से लग रही थी,
मैने धीरे धीरे अपना हाथ दादी के पेट पर घुमान शुरु कर दिया, दादी आँख बंद किये लेटी थी
तभी मैने अपनी एक उंगली दादी की नाभि मे लगा दी,
दादी अचानक से पीछे हुई और मेरे से पूरी तरह टच हो गयी,
मैने दादी की नाभि मै उंगली घुमाने लगा, दादी की साँसे तेज होने लगी, मै समझ गया दादी गर्म हो रही है
दादी-- बेटा नींद नही आ रही क्या, तु अभी तक ऐसे सोना भुला नही क्या,
मै-- दादी आपके साथ होता हु तो अपने आप ही नींद उड़ जाती है
कहते हुए मैने लंड पर जोर देकर चुतडो की खाई मे लगाने लगा,
दादी-- वो तो दिख रहा है तभी तूने अपना लंड खडा कर रखा है
मै-- दादी आपके साथ सोता हु तो खडा हो ही जाता है
दादी-- ठीक है खडा रख, मुझे तो सोने दे,
कहती हुई फिर आँखों को बंद कर लिया,
मै कुछ देर तक दादी की नाभि मे उंगली करता रहा
तभी मैने अपना हाथ नीचे कर धीरे से पेटिकोट के नाड़े की गांठ खोल दी,
दादी चुपचाप लेटी रही , मै एक हाथ से पेटिकोट को धीरे धीरे नीचे करने लगा,
उपर की कमर से तो हो रहा, मैने उपर से तो पेटिकोट नीचे कर एक चुतड को नंगा कर दिया था,लेकिन नीचे वाली कमर से पेटिकोट दबा पड़ा था तभी दादी ने मेरी तरफ करवट ली, मेरा काम आसान हो गया, नीचे वाली साइड अब उपर हो गयी थी, मैने पेटिकोट पकड़ नीचे किया और घुटनों तक लाकर छोड़ दिया, दादी पैंटी मे थी नीचे से, दादी की साँसे तेज थी, मेरा लंड सीधा दादी की पैंटी से लग रहा था, तभी मैने अपना एक हाथ दादी के बड़े चुतड पर रख दिया,
माँ-- राज उठ जा, चाय पि, और आज तेरी बुआ के पास जाने को बोल रहे है तेरे पापा,
आज तेरे दादा की पुण्यतिथि भी है तेरी दादी का भी ध्यान रखना है जल्दी चल,
मै-- जल्दबाजी के चक्कर मे तो रात को माया को पता चल जाता,
माँ-- क्या हुआ राज डरती हुई
मैने माँ को वीर्य वाली सारी बात बताई,
माँ-- माया को तो नही पता चला, आगे से ध्यान रखना होगा राज, जब कोई नही होगा तब ही करेंगे, वैसे रात को मुझे बहुत अच्छी नींद आई,
चल हम भी तैयार होते है तुम भी तैयार हो जाओ,
मै माँ और पापा तैयार होकर बुआ के पास चले गये,...
बुआ और दादी ने पापा को साथ देख खुश होती हुई
बुआ-- भैया आपको यहा देखकर दिल खुश हो गया,
पापा-- रमा सब राज का कमाल है, भगवान ने हमारी सहायता के लिए इसको यहा भेजा है,
मै बुआ और दादी को मस्त नजरो से देख रहा,
तभी माँ दादी से माँ जी आज ससुर जी की पुण्यतिथि है हम उनको याद करते है और हर दम आपके साथ है, इतना सुनते ही दादी ने माँ को जोर से रोती हुई माँ को गले लगा लिया,
दोनो की चुन्चिया आपस मे मिल गयी,
दादी ने पहली बार माँ को गले लगाया था आज
सब देख कर खुश थे की आज सास बहू एक जगह हो गयी,
माँ ने पापा के पास गयी और उनका हालचाल पूछा, तभी मेरे सामने दादी आई,,
दादी-- क्यु बेटा अपनी दादी को भूल गया क्या
मै-- नही दादी आपको कैसे भूल सकता हु, आप ही तो सब कुछ हो, कहते हुए दादी को गले लगा लिया,
बुआ-- चलो अंदर चलो खाना खाते है,
हम सब अंदर आ गये,, अंदर शाम तक बाते करते रहे तभी
माँ-- ठीक है रमा अब हम चलते है घर पर
बुआ-- नहीं भाभी, आज आज रुक जाओ कल चले जाना,
दादी-- नही रमा आज जाना है मुझे तेरे पापा की यादे है उस घर मे,
बुआ-- ठीक है माँ एक काम करो, आप और राज दोनो चले जाओ, भैया और भाभी कल आ जायेंगे,
दादी आज उदास सी थी,
दादी-- ठीक है बेटा चल हम चलते हैं
मै मन ही मन मे खुश हुआ, आज दादी और मै अकेले होंगे आज दादी की चूत का स्वाद लूंगा,
माँ-- मेरी तरफ देखती हुई, बेटा राज अपनी दादी का ख्याल रखना,
मै-- हा माँ मै दादी का अच्छे से ख्याल रखूँगा
मै और दादी गाड़ी मे बैठ घर आ जाते है, दादी गाड़ी मे भी उदास लग रही थी कुछ नही बोल रही थी,
दादी अपने कमरे मे चली गयी, माया आई भैया खाना तैयार है आप दोनो खा लो,
मै दादी के पास कमरे मे गया दादी आओ खाना खाते है,
दादी बेड पर उदास सी बैठी हुई, नही बेटा मुझे भूख नही है तुम खा लो,
मै दादी के पास गया, दादी क्या हुआ इतनी उदास क्यु हो,
दादी-- बेटा आज तेरे दादा की पुण्यतिथि है आज उनकी बहुत याद आ रही है,
मै-- दादी पहले खाना खाओ फिर हम बैठकर बात करते है
दादी-- तुम खा लो बेटा,
मै-- दादी का हाथ पकड़ कर, नही आपको मेरे साथ खाना है, अगर आप खाना नही खाओगी तो दादा जी को भी अच्छा नही लगेगा, चलो आओ
दादी मेरी तरफ देखती हुई चल बेटा तु नही मानेगा
मै-- मेरी दादी को भूखी कैसे रहने दु, बताओ,
दादी थोड़ी सी हस्ती हुई झूठा कही का, इतने दिन तो याद भी नही किया
मै-- दादी बहुत याद आई आपकी लेकिन पापा के ईलाज मे व्यस्त था,
मै दादी दोनो खा लेते है दादी अपने कमरे मे चली जाती है
माया-- भैया हुक्का लगा दु क्या,
मै-- नही दीदी आज दादी उदास है उनको खुश करता हु हसी मज़ाक से,
एक काम करो तुम जाओ आराम करो
माया चली जाती है मै दादी के पास कमरे मै आता हु,
दादी खड़ी हुई दीवार पर लगी दादा की फोटो को देख रही थी,
मैने अपनी पेंट निकाल लुंगी पहन ली,
मै-- दादी दादा को देख रही हो, दादी की नज़र फोटो पर थी
मैने आज सोच लिया था की आज दादी को चोद कर ही मानुगा,,
दादी-- बेटा तेरे दादा बहुत अच्छे थे, मुझे बहुत प्यार करते थे, लेकिन मुझे अकेला छोड़ कर चले गये, दादी की आवाज मे भारीपन आने लगा,
मैने दादी को पीछे से पकड़ अपने दोनो हाथ दादी के पेट से पकड़,
मै-- दादी ऐसा मत कहो, आप अकेली कैसे है, मै हु ना आपके साथ,
दादी-- हा मेरे लाल तु ही तो अब सहारा है मेरा, तु भी अपने दादा की तरह ही है जो मेरी इतनी परवाह करता है
मै दादी के पीछे एकदम चिपक गया,
दादी--- बेटा तेरे दादा मुझे बहुत प्यार करते थे, हमेशा मेरे साथ ही रहते,
मैने दादी का पेट सहलाना शुरु कर दिया, और अपना लंड को दादी के बड़े बड़े चुतडो की खाई मे लगा दिया,
मै-- दादी मै भी तो प्यार करता हु आपसे,
दादी-- हा मेरे लाल, लेकिन उनका प्यार अलग था तु तो बेटा है
मै-- तो क्या हुआ दादी, चलो आज से मै भी दादा वाला प्यार करूँगा,
मै दादी को चोदने की कह रहा था,
दादी के चुतडो मे लंड खडा हो गया पूरा,
और मै पूरा जोर से चिपक रहा, दादी भी मेरे लंड को खूब जानती थी, लेकिन दादी आराम से खड़ी थी,
दादी पीछे मुड़ी और मेरी तरफ देखती हुई बड़ा आया दादा का प्यार देने, चल सोते है, मेरा लंड लुंगी मै खडा तम्बू बना रखा था, मै और दादी बेड पर लेट गये और कंबल ओढ़ ली,
लेकिन मुझे कहा नींद आ रही थी, मैने तो दादी को चोदने का प्लान बना रखा था,
दादी ब्लाउस और पेटिकोट मे लेटी थी सीधी,
उनकी पहाड़ जैसी चुन्चिया ब्लाउस को उपर कर रही थी,
दादी-- बेटा तुझे मैने बहुत याद किया, तेरे बिना तो मै अकेली सी हो गयी थी,
और तो मुझ बुढी औरत से बात कोन करेगा, बस तु ही करता था,
वैसे बेटा तूने सीता को भी अच्छे से समझाया है, पूरी ही बदल गयी वो तो,
मै-- दादी किसने कहा आप बुढी हो, आप तो अभी बहुत जवान हो, आप तो पापा की माँ नही बहन जैसे दिखती हो,
दादी आपने अच्छा खान पान किया है
दादी-- हा बेटा तेरे दादा मेरा बहुत ध्यान रखते थे,
मै-- तभी तो अब तक जवान हो,
दादी-- तुझे बड़ी जवान लगी,
मै-- दादी मैने तो आपको देखा है इसलिए बता रहा हूँ
दादी-- अच्छा दादी को तभी जवान बता रहा है
चल सोजा अब, दादी अपना चेहरा मेरी तरफ कर लेट गयी
कुछ देर मै दादी की तरफ देखता रहा और एकदम पास आकर दादी की टांग पर मैने अपनी एक टांग रख रख दी और अपना मुंह दादी के ब्लाउस के पास ले जाके और हाथ दादी की कमर पर रख दिया,
दादी वैसे पहले कई बार मेरे साथ ऐसे सोई थी ,
मेरी आँखों के सामने दादी का ब्लाउस सांस के साथ उपर नीचे हो रहा था, और थोड़ी सी चुन्चि की घाटी भी दिख रही,
दादी -- बेटा आज सर्दी बहुत है शायद, मुझे तो बहुत ठण्ड लग रही हैं
मै-- हा दादी आज कुछ ज्यादा ही है दादी सरक कर पूरी मेरे से चिपक गयी, और अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया, मेरे चेहरे से ब्लाउस एक दम पास हो गया था, मेरी साँसे गर्म होने लगी जो सीधी चुन्चियो की घाटी पर लग रही थी,
मैने अपने हाथ से दादी की कमर पर जोर देकर मै और पास हो गया जिससे मेरा मुंह सीधा चुन्चियो की घाटी पर लगा, दादी की कोमल चुन्चियो को मैने होठों से छु लिया, और अपनी टांग को दादी की मासल जांघो पर चडा दिया, मेरा खड़ा लंड लुंगी मे फड़ फड़ा रहा था,
मैने दादी की कमर से हाथ हटा अपनी लुंगी को खोल लंड को आजाद कर दिया, लंड का टोपा सीधा दादी के पेट पर लगा,
दादी-- समझ गयी थी lakin,
दादी-- क्या हुआ बेटा नींद नही आ रही क्या,
मै-- दादी कई दिन हो गये ऐसे सोये हुए, आज कपड़े खोल कर सोना चाहता हु
दादी-- लुंगी खोल तो दी है तुमने
मै-- दादी आपको कैसे पता चला
दादी-- देख मेरे पेट से लग रहा है तेरा
कोई नही सोजा बेटा,
दादी ने करवट लेली और मेरी तरफ पीठ कर दी,
मैने फिर से दादी के चिपक अपना हाथ पेट पर डाल दिया, और लंड अब जो की दादी के चुतडो की खाई पर लगा पड़ा था, मेरी गर्म साँसे दादी की गर्दन से लग रही थी,
मैने धीरे धीरे अपना हाथ दादी के पेट पर घुमान शुरु कर दिया, दादी आँख बंद किये लेटी थी
तभी मैने अपनी एक उंगली दादी की नाभि मे लगा दी,
दादी अचानक से पीछे हुई और मेरे से पूरी तरह टच हो गयी,
मैने दादी की नाभि मै उंगली घुमाने लगा, दादी की साँसे तेज होने लगी, मै समझ गया दादी गर्म हो रही है
दादी-- बेटा नींद नही आ रही क्या, तु अभी तक ऐसे सोना भुला नही क्या,
मै-- दादी आपके साथ होता हु तो अपने आप ही नींद उड़ जाती है
कहते हुए मैने लंड पर जोर देकर चुतडो की खाई मे लगाने लगा,
दादी-- वो तो दिख रहा है तभी तूने अपना लंड खडा कर रखा है
मै-- दादी आपके साथ सोता हु तो खडा हो ही जाता है
दादी-- ठीक है खडा रख, मुझे तो सोने दे,
कहती हुई फिर आँखों को बंद कर लिया,
मै कुछ देर तक दादी की नाभि मे उंगली करता रहा
तभी मैने अपना हाथ नीचे कर धीरे से पेटिकोट के नाड़े की गांठ खोल दी,
दादी चुपचाप लेटी रही , मै एक हाथ से पेटिकोट को धीरे धीरे नीचे करने लगा,
उपर की कमर से तो हो रहा, मैने उपर से तो पेटिकोट नीचे कर एक चुतड को नंगा कर दिया था,लेकिन नीचे वाली कमर से पेटिकोट दबा पड़ा था तभी दादी ने मेरी तरफ करवट ली, मेरा काम आसान हो गया, नीचे वाली साइड अब उपर हो गयी थी, मैने पेटिकोट पकड़ नीचे किया और घुटनों तक लाकर छोड़ दिया, दादी पैंटी मे थी नीचे से, दादी की साँसे तेज थी, मेरा लंड सीधा दादी की पैंटी से लग रहा था, तभी मैने अपना एक हाथ दादी के बड़े चुतड पर रख दिया,