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Guest
आगे,,
मै-- सीता क्या तुम तैयार हो, अपने पति से चूत मराने के लिये
माँ-- हा राज, आज मेरी सुहागरात है आज मेरा पति मेरी चूत का उद्धघाटन करेगा,
माँ मस्ती मे बोल रही , मै लंड का टोपा को चूत की फांकों के बीच माँ की चूत के छेद पर रगड़ रहा,
माँ--सुनो जी, अब और मत तड़पाओ आपकी पत्नी को, जल्दी डालो ना,
मैने बिना देर किये लंड के टोपे को छेद पर रोक दिया, टोपा छेद से भी मोटा था, मै सोच रहा, आज ये माँ की चूत फाड़ कर रख देगा,
मैने एक हाथ से लंड पकड़ चूत के छेद पर थोड़ा सा जोर दिया, लंड का सुपाडा गिला होने से थोड़ा सा माँ की चूत मे घुसने की कोशिश करने लगा,
माँ भी दर्द से,, उई,, माँ,,, कहती हुई उछल पड़ी, राज. आह,, लेकिन मैने सोच लिया की रुक गया तो माँ काफी देर डर से चोदने नही देगी,
मै माँ के उपर आ गया और माँ को किस करने लगा,
माँ ने भी अपने पेर मेरी कमर पर डाल आपस मे बंद कर लिए,
माँ होठों के किस और मेरे गर्म बदन से मस्ती हो रही, मैने अपनी कमर उपर कर लंड के टोपे को चूत पर रख रखा था,
मुझे पता था माँ को दर्द होने वाला है इसलिए मैने माँ को दोनो हाथो से कसकर मेरी बाहों मे ले मेरे नीचे दबा लिया,
लंड और चूत गिले थे,
मैने धीरे से अपनी कमर नीचे की लंड माँ की चूत पर फस सा गया,,
माँ-- उई माँ,,, राज आराम से, पता नही इतना मोटा कैसे जायेगा,
अगले ही पल मैने अपनी कमर को झटके से थोड़ी नीचे की,
मेरा लंड का सुपाडा माँ की चूत मे फस गया,,
माँ-- उई माँ, मर गयी,, आ.... आ... मर गयी, माँ झटपटा रही लेकिन मेरी बाहों और नीचे दबी होने के कारण हिल नही सकी,
राज, मर गयी,, राज बाहर निकालो,,, आ,, दर्द से,, आ,, हे राम,,,,
माँ की आँखे बाहर सी आ गयी,, और लाल हो गयी,
तभी मैने अपनी कमर को आजाद कर जोर लगाने लगा,
माँ झटपटाने लगी, और मुझे खुद से हटाने लगी, राज बाहर निकालो, माँ की आवाज मे दर्द और रोना था,
माँ-- थोड़ी सी रोती हुई, राज एक बार बाहर निकालो, राज, आ.. आ.. आह..
राज बहुत तेज दर्द हो रहा है, निकालो ना,, आह,
माँ रोने लगी, माँ के आँसू निकलने लगे,
और मेरा लंड माँ की चूत को चिरता हुआ थोड़ा सा गया और वही फस सा गया,
मेरी भी हालत खराब हो रही थी, मुझे रुका नही जा रहा रहा, मैने एक हाथ माँ के मुह पर लगा एक झटका दिया लंड को, लंड माँ की चूत को चिरता हुआ आधा चूत मे घुस गया,
माँ की चूत से खुन की पिचकारी से निकल बेड पर गिरने लगी, माँ का मुंह बंद होने से दबी आवाज मे चीखी
माँ-- आ.............आ.....मर गयी,,
माँ बहुत जोर से रोने लगी और झटपटाने लगी, लेकिन मेरी ताकत के आगे उनकी कुछ भी नही चल रही, मैने भी बिना देर किये लंड पर जोर दिया, जो माँ की चूत को चिरता हुआ सीधा बच्चेदानी से लगा,
माँ की चीख निकल गयी, और माँ के पैर मेरी कमर से नीचे आ सीधे हो गये, माँ ने दर्द से मेरी पीठ पर नाखून से काट लिया, माँ के आँसू से बेड गिला हो रहा था,,
और माँ ने मेरे कंधे को दांतों मे जोर से दबा लिया,
माँ बच्चेदानी पर लंड को पाकर झड़ रही थी, मै भी माँ की चूत की गर्मी सहन नही कर सका, और मेरे लंड ने भी बच्चेदानी पर वीर्य फेकने लगा, मैने माँ की गर्दन को मुह मे लिया और झड़ने की मस्ती मे काट लिया,
आज पहली बार हम दोनो माँ बेटे की चुदाई हुई थी, मेरे वीर्य से पूरी बच्चेदानी भर गयी,
कुछ देर बाद जैसे ही लंड को आराम मिला मैने लंड को बाहर निकाल लिया,
निकलते वक़्त भी माँ दर्द से कराह उठी,
जैसे ही लंड बाहर आया, लंड के साथ खून और वीर्य बाहर आने लगा, मै भी थक गया था, मै माँ के बगल मे लेट गया, माँ की चूत से खून और वीर्य से बेड गिला हो रहा था,
माँ-- राज बहुत दर्द हुआ, तूने तो मुझे मार ही दिया, अब भी तेज दर्द हो रहा है राज,,
मै-- मेरी सीता, दर्द तो होना ही था, आज पहली बार लंड से कई सालों बाद चूत फटी है,
माँ-- हा राज, जब तु पैदा हुआ तब भी इतना ही दर्द हुआ था,
तु निकला तब भी इतना दर्द और आज डाला तब भी उतना ही दर्द है राज,
मै-- सीता मैने वीर्य डाल दिया है अब तु मेरे बच्चे को जन्म देगी,
माँ-- हा राज, तेरा लंड किसी आग के शोले की तरह था, जब चूत फाड़ घुसा मुझे लगा जैसे किसी ने गर्म लोहे का सरिया डाल दिया हो, और उतना गर्म तेरा पानी था, जैसे कोई अंदर लावा डाल दिया हो,
मै राज इस बच्चे को जन्म जरूर दूंगी,
मे-- हा सीता,
सीता बहुत दर्द हो रहा है क्या, एक बार और करे क्या,,
माँ-- नही राज,, अपनी पत्नी को माफ करना,
मै ये दर्द भी दूर नही कर पा रही हु
अब हम जब मे फिर से ठीक हो जाऊंगी तब देखूंगी,
वैसे भी परसो हमे तेरे पापा के साथ घर चलना है, तब तक ठीक हो जाऊ, नही तो घर पर लोग क्या सोचेंगे,
राज हमे समाज का भी ध्यान रखना होगा, नही तो हमारा रुतबा खराब हो जागेया,
राज मै घर पर तुझे बेटा कहूंगी, और तुम माँ कहना,
जब मोका मिलेगा तब हम पति पत्नी की तरह रहेंगे,
मै-- हा सीता,, सही कहा
सीता कोई पूछेगा की या पापा कहे की बच्चा कैसे लगा तब क्या सोचा है
मै आपका रुतबा और इस बच्चे को खोना नही चाहता,
माँ-- हा राज मै भी, तुम ही कोई उपाए बताओ,,
मै-- एक काम करना, परसो घर जाते ही आप पापा को झूठ बोलना की आपको बच्चा चाहिए, इसलिए आप पापा को प्यार का नाटक कर उनका वीर्य किसी डब्बी मे डाल लेना,
पापा पूछे तो बोल देना डॉक्टर से बात हुई ही, वो वीर्य को मशीन से अंदर डाल देंगे,
और आप उस वीर्य को फेंक देना, और हमारे बच्चे को जन्म देना,
कल मे बच्चा चेक करने की मशीन लाऊंगा,
माँ-- ठीक है राज, लेकिन मै उनका वीर्य कैसे निकाल पाऊँगी,
मै-- माँ आप उनकी मुठ मार निकालना,,
माँ-- राज मुझे नही आती मुठ मारनी,
मै-- सीता मै हु ना,... सब सिखा देता हु, एक काम करो मैने लंड को हाथ मे पकड़ लो,
माँ-- नही राज आज अब बिल्कुल हिम्मत नहीं है, कल बताना,,
माँ की चूत बहुत दर्द कर रही थी
मै-- ठीक है सीता, अब आप सो जाओ, हम दोनो के पास पूरा जीवन है, ये सब करने के लिए,,
मै-- सीता क्या तुम तैयार हो, अपने पति से चूत मराने के लिये
माँ-- हा राज, आज मेरी सुहागरात है आज मेरा पति मेरी चूत का उद्धघाटन करेगा,
माँ मस्ती मे बोल रही , मै लंड का टोपा को चूत की फांकों के बीच माँ की चूत के छेद पर रगड़ रहा,
माँ--सुनो जी, अब और मत तड़पाओ आपकी पत्नी को, जल्दी डालो ना,
मैने बिना देर किये लंड के टोपे को छेद पर रोक दिया, टोपा छेद से भी मोटा था, मै सोच रहा, आज ये माँ की चूत फाड़ कर रख देगा,
मैने एक हाथ से लंड पकड़ चूत के छेद पर थोड़ा सा जोर दिया, लंड का सुपाडा गिला होने से थोड़ा सा माँ की चूत मे घुसने की कोशिश करने लगा,
माँ भी दर्द से,, उई,, माँ,,, कहती हुई उछल पड़ी, राज. आह,, लेकिन मैने सोच लिया की रुक गया तो माँ काफी देर डर से चोदने नही देगी,
मै माँ के उपर आ गया और माँ को किस करने लगा,
माँ ने भी अपने पेर मेरी कमर पर डाल आपस मे बंद कर लिए,
माँ होठों के किस और मेरे गर्म बदन से मस्ती हो रही, मैने अपनी कमर उपर कर लंड के टोपे को चूत पर रख रखा था,
मुझे पता था माँ को दर्द होने वाला है इसलिए मैने माँ को दोनो हाथो से कसकर मेरी बाहों मे ले मेरे नीचे दबा लिया,
लंड और चूत गिले थे,
मैने धीरे से अपनी कमर नीचे की लंड माँ की चूत पर फस सा गया,,
माँ-- उई माँ,,, राज आराम से, पता नही इतना मोटा कैसे जायेगा,
अगले ही पल मैने अपनी कमर को झटके से थोड़ी नीचे की,
मेरा लंड का सुपाडा माँ की चूत मे फस गया,,
माँ-- उई माँ, मर गयी,, आ.... आ... मर गयी, माँ झटपटा रही लेकिन मेरी बाहों और नीचे दबी होने के कारण हिल नही सकी,
राज, मर गयी,, राज बाहर निकालो,,, आ,, दर्द से,, आ,, हे राम,,,,
माँ की आँखे बाहर सी आ गयी,, और लाल हो गयी,
तभी मैने अपनी कमर को आजाद कर जोर लगाने लगा,
माँ झटपटाने लगी, और मुझे खुद से हटाने लगी, राज बाहर निकालो, माँ की आवाज मे दर्द और रोना था,
माँ-- थोड़ी सी रोती हुई, राज एक बार बाहर निकालो, राज, आ.. आ.. आह..
राज बहुत तेज दर्द हो रहा है, निकालो ना,, आह,
माँ रोने लगी, माँ के आँसू निकलने लगे,
और मेरा लंड माँ की चूत को चिरता हुआ थोड़ा सा गया और वही फस सा गया,
मेरी भी हालत खराब हो रही थी, मुझे रुका नही जा रहा रहा, मैने एक हाथ माँ के मुह पर लगा एक झटका दिया लंड को, लंड माँ की चूत को चिरता हुआ आधा चूत मे घुस गया,
माँ की चूत से खुन की पिचकारी से निकल बेड पर गिरने लगी, माँ का मुंह बंद होने से दबी आवाज मे चीखी
माँ-- आ.............आ.....मर गयी,,
माँ बहुत जोर से रोने लगी और झटपटाने लगी, लेकिन मेरी ताकत के आगे उनकी कुछ भी नही चल रही, मैने भी बिना देर किये लंड पर जोर दिया, जो माँ की चूत को चिरता हुआ सीधा बच्चेदानी से लगा,
माँ की चीख निकल गयी, और माँ के पैर मेरी कमर से नीचे आ सीधे हो गये, माँ ने दर्द से मेरी पीठ पर नाखून से काट लिया, माँ के आँसू से बेड गिला हो रहा था,,
और माँ ने मेरे कंधे को दांतों मे जोर से दबा लिया,
माँ बच्चेदानी पर लंड को पाकर झड़ रही थी, मै भी माँ की चूत की गर्मी सहन नही कर सका, और मेरे लंड ने भी बच्चेदानी पर वीर्य फेकने लगा, मैने माँ की गर्दन को मुह मे लिया और झड़ने की मस्ती मे काट लिया,
आज पहली बार हम दोनो माँ बेटे की चुदाई हुई थी, मेरे वीर्य से पूरी बच्चेदानी भर गयी,
कुछ देर बाद जैसे ही लंड को आराम मिला मैने लंड को बाहर निकाल लिया,
निकलते वक़्त भी माँ दर्द से कराह उठी,
जैसे ही लंड बाहर आया, लंड के साथ खून और वीर्य बाहर आने लगा, मै भी थक गया था, मै माँ के बगल मे लेट गया, माँ की चूत से खून और वीर्य से बेड गिला हो रहा था,
माँ-- राज बहुत दर्द हुआ, तूने तो मुझे मार ही दिया, अब भी तेज दर्द हो रहा है राज,,
मै-- मेरी सीता, दर्द तो होना ही था, आज पहली बार लंड से कई सालों बाद चूत फटी है,
माँ-- हा राज, जब तु पैदा हुआ तब भी इतना ही दर्द हुआ था,
तु निकला तब भी इतना दर्द और आज डाला तब भी उतना ही दर्द है राज,
मै-- सीता मैने वीर्य डाल दिया है अब तु मेरे बच्चे को जन्म देगी,
माँ-- हा राज, तेरा लंड किसी आग के शोले की तरह था, जब चूत फाड़ घुसा मुझे लगा जैसे किसी ने गर्म लोहे का सरिया डाल दिया हो, और उतना गर्म तेरा पानी था, जैसे कोई अंदर लावा डाल दिया हो,
मै राज इस बच्चे को जन्म जरूर दूंगी,
मे-- हा सीता,
सीता बहुत दर्द हो रहा है क्या, एक बार और करे क्या,,
माँ-- नही राज,, अपनी पत्नी को माफ करना,
मै ये दर्द भी दूर नही कर पा रही हु
अब हम जब मे फिर से ठीक हो जाऊंगी तब देखूंगी,
वैसे भी परसो हमे तेरे पापा के साथ घर चलना है, तब तक ठीक हो जाऊ, नही तो घर पर लोग क्या सोचेंगे,
राज हमे समाज का भी ध्यान रखना होगा, नही तो हमारा रुतबा खराब हो जागेया,
राज मै घर पर तुझे बेटा कहूंगी, और तुम माँ कहना,
जब मोका मिलेगा तब हम पति पत्नी की तरह रहेंगे,
मै-- हा सीता,, सही कहा
सीता कोई पूछेगा की या पापा कहे की बच्चा कैसे लगा तब क्या सोचा है
मै आपका रुतबा और इस बच्चे को खोना नही चाहता,
माँ-- हा राज मै भी, तुम ही कोई उपाए बताओ,,
मै-- एक काम करना, परसो घर जाते ही आप पापा को झूठ बोलना की आपको बच्चा चाहिए, इसलिए आप पापा को प्यार का नाटक कर उनका वीर्य किसी डब्बी मे डाल लेना,
पापा पूछे तो बोल देना डॉक्टर से बात हुई ही, वो वीर्य को मशीन से अंदर डाल देंगे,
और आप उस वीर्य को फेंक देना, और हमारे बच्चे को जन्म देना,
कल मे बच्चा चेक करने की मशीन लाऊंगा,
माँ-- ठीक है राज, लेकिन मै उनका वीर्य कैसे निकाल पाऊँगी,
मै-- माँ आप उनकी मुठ मार निकालना,,
माँ-- राज मुझे नही आती मुठ मारनी,
मै-- सीता मै हु ना,... सब सिखा देता हु, एक काम करो मैने लंड को हाथ मे पकड़ लो,
माँ-- नही राज आज अब बिल्कुल हिम्मत नहीं है, कल बताना,,
माँ की चूत बहुत दर्द कर रही थी
मै-- ठीक है सीता, अब आप सो जाओ, हम दोनो के पास पूरा जीवन है, ये सब करने के लिए,,