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Incest रुतबा या वारिस

आगे..

बस आती है जो फुल भरी हुई थी, मै और माँ भी घुस गये,, माँ मेरे सामने खड़ी थी, भीड़ बढ़ती ही गयी, मै माँ के सामने से पूरा टच हो गया, माँ और मै दोनो फिर से एक दूसरे को देखने लगे, दोनो चुपचाप एक दूसरे मे खो गये, बस चल पड़ी धक्के लगने से माँ एकदम से पास थी, तभी बस ने ब्रेक लगाए, माँ सीधी मुझसे लगी, माँ की दोनो चुन्चिया मेरे सीने से लग गयी , मेरा और माँ का चेहरा एकदम पास था, मेरी गर्म साँसे माँ के चेहरे पर लग रही थी, दोनो चुपचाप एक दूसरे मे खोये हुए थे, माँ की साँसे भी गर्म होने लगी, मेरे सीने पर उनकी चुन्चिया लगी हुई थी जो भीड़ मे दब रही थी, मैने एक हाथ माँ की कमर से डाल पीछे लगा दिया, बस ने फिर से ब्रेक लगाये, और मैने हाथ से थोड़ा जोर लगाया, माँ के पेर मेरे पेरो पर आ गये, और माँ सीधी मेरे से नीचे से भी चिपक गयी,

माँ को जैसे ही लंड का अहसास हुआ, माँ की जोर से सांस निकली और आँखे बंद हो गयी, बस चलने से बस हम सब थोड़े हिल रहे थे, जिससे लंड माँ की चूत पर उपर नीचे हो रहा था, तभी माँ ने मेरी कमर को पकड़ लिया, और अपना सिर मेरे कंधे पर लगा कर झटके खाती हुई झरने लगी,रात का समय था, भीड़ होने से हम किसी को भी दिख नही रहे थे, मै समझ गया माँ झर चुकी है, तभी हमारा बस स्टैंड आ गया, मै और माँ नीचे उतर घर की तरफ चुपचाप चल पड़े,,

माँ ने अपने हाथ मे मेरा हाथ ले लिया, और मुझसे चिपक कर चलने लगी, सर्दी जोरों पर थी, हम दोनो जल्दी से घर पर आ गये,

जल्दी से कंबल मे घुस गयी, मै भी घुस गया

माँ-- राज तु जब मेरे पास होता है तो मुझे होश ही नही रहता,.मै तुझमे खो जाती हूँ, ये मुझे क्या हो रहा है

मै-- माँ मेरा भी यही हाल है

दिल करता है आपसे चिपका रहू, दूर करने को दिल नही करता है,

माँ-- हा बेटा मेरा भी यही हाल है,

बेटा कितना बदल दिया है तुमने,

राज हम हमेशा ऐसे ही रहेंगे,,

माँ को तभी पैंटी गीली सी लगी, माँ सोचने लगी, जब जब मै राज के पास जाती हु, मेरी चूत गीली क्यु हो जाती है,

तभी माँ उठती गई दूसरे कमरे मे जाकर स्कर्ट खोल ब्लाउस और पेटिकोट पहन वापिस लेट जाती हैं, सुबह होती है

मै और माँ दोनो शहर मे घुमने लगते है

माँ को रोज़ नई नई ड्रेस पहनाता, कुछ ही दिन मे माँ अपने पुराने दिनों को भूल सी गयी, वो बस हर वक़्त मेरे साथ रहती, जैसे मै ही उसका सब कुछ हु,

वैसे मै सबके नाम बताना चाहता हूँ,

माँ-- सीता

मौसी- गीता

बुआ-- रमा

दादी- मोहिनी

और एक माया थी,

एक दिन माँ नहा कर निकली ही थी की, राज मुझे गाड़ी चलाना सिखा दो ना, सब सिखा दिया गाड़ी बाकी है अभी,

मै-- हा , जरूर सिखा दूंगा माँ

माँ-- राज ये क्या बात हुई, मै तो राज कहती हूँ और तुम मुझे माँ कहते हो,

मुझे अच्छा नही लगता, जब तक ऐसे साथ हु, मुझे तु भी माँ नही कहना, बताओ कहा से माँ लगती हु, कोई बता सकता हैं क्या

मै-- नही माँ, ठीक है, जो कहोगी वो करूँगा,

माँ-- हा राज, माँ ब्लाउस और पेटिकोट मे खड़ी अपने बाल सुखा रही थी,

माँ एकदम बदल गयी थी, कोई पहचान नही सकता था,

मै भी माँ का पूरी तरह दीवाना हो चुका था, मुझे माँ को छेड़ना था, --

माँ-- यार, पापा को मिले हुए कई दिन हो गये, आज उनसे भी मिलने चले,

माँ-- अरे, अभी उनका ईलाज चल रहा है बाद मे मिल लेंगे, अभी जीना है वो जीने दो ना, वैसे भी वो ठीक ही है,

मै-- हमे चल कर डॉक्टर से बात करनी चाहिए,

माँ-- ठीक है पहले पार्लर सी तैयार होकर चलती हु,

मै और माँ पार्लर आये माँ को तैयार कर दिया, जिसकी फोटो आपको दिखा रहा हु
 
 
आगे..

अब आप ही बताओ मेरी माँ किसी हेरोइन से कम नही है ना, इसको देख सबका दिल करता होगा चोदने का,

तो सोचो मै तो इसके हरदम साथ हु मेरी क्या हालत होगी,

खेर..

माँ को देख मेरी जान ही निकल जाती थी, दिल तो करता था यही चोद दु, लेकिन सही समय का इंतज़ार था, मै और माँ पापा के पास गये, पापा तो माँ को देख चोंक गये, बिल्कुल बदल गयी थी और खूबसूरत भी हो गयी थी,

पापा-- सीता तुम तो बहुत खूबसूरत लग रही हो, बहुत बदलाव कर लिया तुमने,

माँ-- सब अपने बेटे ने किया है, इसी ने सही रास्ता दिखाया है,

कुछ देर बात करने के बाद मै और माँ डॉक्टर के पास गये

मै-- सर पापा को काफी समय हो गया है, क्या हालात है

डॉक्टर-- देखो वैसे सब ठीक है बस एक सप्ताह और रुकना है, और ठीक है पहले से,

माँ का चेहरा उड़ सा गया ये सुनकर,,,

मै-- सर क्या पापा अब फिर से पापा बन सकते है क्या,, मतलब मुझे और भाई दे सकते है क्या

डॉक्टर-- कह नही सकते, उनका वो अंग काम नही कर सकता, उसमे उतेजना नही आ सकती, लेकिन हा, वो वीर्य दे सकते है, जिसको मशीनों से अंदर डाल सकते है या आप हाथो से भी डाल सकते है

लेकिन जरूरी नही की माँ की तरफ देखते हुए आप माँ बन सको,

क्यु की बिना उतेजना के वीर्य बहुत कम काम करता है,

मै और माँ दोनो डॉक्टर से चले और बाहर आ गये,

माँ उदास सी थी बहुत,

मै-- क्या हुआ यार, हम किसी अच्छे डॉक्टर को और दिखा देंगे, शायद आप माँ बन पाओ,,

माँ चुपचाप रही, राज घर चल,,

मै और माँ दोनो ही उदास थे, दोनो एक दूसरे से जुदा नही होना चाहते थे,

जैसे ही घर पहुंचे, माँ एकदम से मेरे गले मिल जोर से रोने लगी, मै भी माँ को दोनो हाथो से पीछे से पकड़ लिया, और थोड़ा उदास सा

मै-- माँ क्या हुआ, बस एक सप्ताह की बात है फिर नई ज़िंदगी शुरू होगी आपकी, और आप हो की रो रही हो,,

माँ-- चुप कर, नही चाहिए मूझे नही ज़िंदगी,

मुझे ऐसे ही रहना है, राज,

मुझे तेरे साथ ही रहना है,

मै-- यार मै साथ ही तो हु, वैसे भी,

माँ-- राज, मुझे किसी और के साथ नही रहना, मै तुझसे दूर नही रह सकती, मुझे तेरे बिना कुछ अच्छा नही लगता, जब तु पास होता है तो लगता है सब है मेरे पास,

मै-- माँ कुछ दिन की बात है आपकी शादी भी है, पापा से,,

माँ-- राज चुप हो जा, मै नही करूँगी शादी वादी, मेरे लिए तु ही सब है, मेरा बेटा, दोस्त, और पति से बढ़कर है राज तु, तूने मेरी ज़िंदगी बदल दी है,

राज तुझे मेरी कसम है तु सिर्फ हम दोनो की बात करेगा, किसी और की नही,

राज तेरे पापा से ज्यादा तु मुझे अच्छा लगता है, मुझे तेरे साथ रहना है,

मानती हूँ वो मेरे पति है लेकिन वो बस नाम के है, बीमार है, ना मुझे कोई खुशी दे सकते है,

राज तु कुछ भी हो, लेकिन मै खुश बस तेरे साथ ही रहूँगी, अगर तु मुझे नही चाहता तो मुझे छोड़ सकता है,

माँ फिर से रोने लगी,,

मैने माँ के गालो से आँसू पूंछे, माँ की आँखे बन्द थी, रो रही थी

मैने माँ के दोनो गालो को दोनो हाथो मे ले अपना चेहरा माँ के चेहरे के पास ले गया,

मै-- नही, मै भी आपसे दूर नही रह सकता,, मै भी चाहता हु आपका हाथ हमेशा मेरे हाथ मे रहे,

माँ क्या हम दुनिया से छुपकर अपनी ऐसी ज़िंदगी जी पाएंगे,

माँ -- हा राज, हमे ऐसे ही जीना होगा, हम दुनिया के लिए माँ बेटे रहेंगे, लेकिन अपनी ज़िंदगी मे ऐसे ही दोस्त बने रहेंगे,

मै-- हा सीता,, हम जब भी अकेले होंगे तब दोस्त जैसे रहेंगे,

मैने अपना चेहरा बिल्कुल माँ के चेहरे के पास ले गया, मेरी गर्म साँसे माँ के होठ और गालो पर लग रही रही,

मै-- सीता i love You...

कहता हुआ, माँ के होठो पर अपने होठ रख हल्का सा किस ले लिया,

माँ हिचक पड़ी, और साँसे गर्म और तेज हो गयी

दोनो के दिलो की धड़कन तेज हो गयी थी,

माँ चाहती की मै फिर से माँ के होठो को चूम लू,, माँ मेरे सामने मूर्ति बन खड़ी थी आँखे बन्द कर,

मैने अपने हाथ गालो से हटा माँ की नंगी कमर पर रख दिये, और माँ को खिच मुझसे चिपका लिया,

माँ के साथ ऐसा पहली बार हो रहा था, दोनो प्यार की आग मे जल रहे थे, माँ की चुन्चिया मेरे सीने से लग गयी, मैने फिर से अपने होठों से माँ के होठ चूम लिए, माँ जैसे आग उगल रही हो, गर्म हो गयी, हम दोनो की गर्म साँसे एक दूसरे के होठो पर लग रही, माँ का मुह खुल गया, दोनो होठ सुख गये,

, मैने फिर से अपने होठ माँ के होठों पर रख दिये, माँ की साँसे बहुत तेज हो गयी, उनकी चुन्चिया मेरे सीने से लगी थी, उनकी धड़कन बहुत तेज हो गयी,

माँ अपने हाथ मेरी पीठ पर लगा ली, और मेरे से जोर से चिपक गयी,,

मैने माँ के होठों को किस करना शुरू कर दिया,, माँ के रस से मेरा लंड भी पैंट मे खडा हो गया,, मैने एक हाथ माँ को गर्दन से पकड़ लिया, और उनके होठ को खाने लगा माँ और मै दोनो एक दूसरे को कसकर पकड़ रखे थे, माँ को मेरे लंड अपनी जांघो के बीच महसूस हो रहा था,, माँ भी किस करने मे मेरा साथ दे रही थी, मेरा दूसरा हाथ माँ की कमर पर आ गया और माँ को अपनी तरफ खीच कर लंड उनकी टांगो मै दाबने लगा, माँ मेरे मोटे लंड को महसूस कर रही थी, हम दोनो एक दूसरे के होठो को कसकर चूम रहे थे, माँ के लाल होठ मस्त थे, तभी माँ मेरे लंड पर झटके खा कर, झड़ने लगी, मैने माँ के होठ को अपने दांतों मे दबा दिया, माँ ने अपने होठ अलग कर आँखे खोली,

माँ-- राज ये प्यार मुझे मार डालेगा, मै तुझे बता नही सकती मुझे कितनी खुशी मिली है,

मै-- सीता ये माँ बेटे का प्यार नही है एक दोस्त का प्यार है, एक लड़का लड़की का प्यार है

माँ-- राज मुझे यही प्यार चाहिए, तुझसे, बेटे का नही, एक दोस्त का प्यार चाहिए, क्या तुम रोज़ मुझे ऐसे प्यार करोगे,

मै- हा सीता, ये प्यार तुझे ज़िंदगी भर दूंगा,

राज जब जब तेरे पास आती हु, मेरे बदन मे आग लग जाती है, पता नही मुझे क्या हो जाता है एक अलग ही मज़ा सा आता है, और राज पता नही मेरे नीचे पानी सा आता है, ऐसा क्यु राज,

मै-- सीता, ये जवानी है इसको झड़ना बोलते है, एक लड़का लड़की जब पास आते है तब ऐसा ही होता है,

राज मै खाना बना देती हु, अब हम जब तक गाँव नही जायेंगे इसी कमरे मे रहेंगे, बाहर नही जायेंगे,,,
 
आगे..

मै और माँ एक दूसरे के प्यार मे तो हो गये थे, लेकिन अभी माँ की चुदाई बाकी थी,,,

माँ रसोई मे जाकर काम करने लगी,

मुझे माँ को और आग लगानी बाकी थी,

मै माँ के पीछे जाकर चिपक गया, और माँ के पेट को दोनो हाथ से पकड़ लिया,

माँ-- राज खाना तो बनाने दे,

मै-- खाना बना लो, मैने कोनसे आपके हाथ पकड़े है

बस कुछ दिन की बात है फिर आप पापा की दुल्हन भी तो बनोगी, मानता हु आप मुझे भाई नही दे सकते, लेकिन शादी तक तो ज़िंदगी जीना है,

माँ दुल्हन की बात सुन

माँ-- नही राज, मै नही करूँगी शादी, मुझे नही बनना दुल्हन, मै तेरे सिवा किसी और के साथ ऐसे नही कर सकती, मुझे बस तेरे साथ ही रहना है, नही बननी दुल्हन, तेरे पापा की,,

मै-- ठीक है माँ,, चलो मै कमरे मे हु, आप खाना वही ले आना, मै कमरे मे आकर लेट गया, सोचने लगा की मेरे पास एक हफ्ता है माँ को चोदने का, कैसे करू सब,, तभी मुझे विचार आया, माँ को फिल्म कहानी दिखा कर माँ तो तैयार कर सकता हु, लेकिन माँ ने तो बाहर जाने के लिए मना कर दिया है,

क्यु ना माँ को यही घर पर फिल्म दिखा दु,

टीवी तो है बस फिल्म लेकर आनी है, लेकिन कैसे यहाँ तो, सीडी प्लेयर भी नही है, तभी देखा तो टीवी मे USB की जगह है, बस हो गया काम,,

मैने कपड़े पहने, माँ मै अभी आता हु तब तक आप खाना लगाना, थोड़ा सा कोई काम है

माँ-- जल्दी आना राज,

मै जल्दी से एक दुकान पर गया, सर एक पेन ड्राइव देना और उसमे रोमांटिक फिल्म, और कुछ B ग्रेड की फिल्म डाल दो,

दुकान दार ने बहुत सारी फिल्म डाल मुझे दे दिया,

मै जल्दी से घर आया, माँ ने खाना लगा दिया, मैने और माँ खाना खाया, रात होने को थी,

मै- सीता आज मै फिल्म लेकर आया हु, उसमे तुम्हे सब पता चल जायेगा की औरत की ज़िंदगी मे क्या क्या होता है

मैने टीवी मे फिल्म लगा, माँ के साथ कंबल मे घुस माँ के पास बैठ गया,

फिल्म शुरू होती है एक लड़का लड़की प्यार करते है दोनो भागकर शादी करते है एक छोटा सा सुहागरात का सीन था, फिर उनके बच्चे हो जाते है, लड़का मर जाता है, फिर लड़की को किसी और से प्यार हो जाता है दोनो के एक और बच्चा होता है सब फिर साथ मे रहते है, फिल्म पूरी हो जाती है,

माँ फिल्म देखने के बाद अच्छा राज ऐसे होती है शादी, और शादी के बाद वो लोग ऐसे क्या कर रहे थे,

मै-- सीता,उसको सुहागरात कहते है,

माँ-- मतलब राज

मै-- मतलब सुहाग की रात होती है, वो दुल्हन को पूरा प्यार करता है दोनो एक हो जाते है, जिससे उनको बच्चा होता है,

माँ-- राज मैं ये ज़िंदगी शायद कभी नही जी पाऊँगी,

मैने माँ का हाथ अपने हाथ मे ले लिया,

जब तक आपका राज है, इस सीता को कोई कमी नही होगी, सीता आप पापा से शादी नही कर सकती और ऐसी ज़िंदगी भी जीना चाहती है क्या मै आपकी मदद करू,,

माँ-- हा राज लेकिन कैसे

मै-- सीता मै करूँगा तुमसे शादी,

माँ-- खुश होती हुई सच मे राज, तुम मुझसे शादी करोगे,

मै-- हा सीता, तुझे जीवन का हर सुख देना है मुझे

माँ इतना सुनते ही मेरे गले लग गयी,

राज तुम ना होते तो मै ऐसे ही रह जाती, लेकिन राज हम माँ बेटे भी है क्या ये गलत नही होगा,

मै-- नही सीता गलत कैसे, एक बेटा अपनी माँ की खुशी के लिए ये सब करेगा, और वैसे भी हम माँ बेटे दुनिया के लिए है, वैसे हम प्रेमी प्रेमिका है, और शादी सिर्फ हम दोनो तक ही है,

क्या सीता तुम मेरे साथ जीना चाहोगी,

माँ-- हा राज, जीना है मुझे

मै-- क्या तुम मुझे अपनी प्यार की निशानी दोगी,

माँ- निशानी मतलब राज,

मै-- अरे यार, उस फिल्म की तरफ, उनके भी तो सुहागरात बाद बच्चा हुआ था ना,

माँ-- राज क्या कह रहे हो,

नही राज ये गलत है मै ये नही कर पाऊँगी, मानती हु तुमने मुझे बहुत प्यार दिया है लेकिन मै कैसे तुम्हारे साथ ऐसे कर सकती हु,

मै-- क्या यार, मुझसे प्यार नही करती हो,

माँ-- हा राज, लेकिन ये सब गलत होगा,

मै -- कुछ गलत नही होगा, जब शादी कर सकते है तो इसमे क्या परेशानी है,

माँ-- राज मै ऐसा सोच भी नही सकती,

मै-- रहने दो झूठी,

माँ-- राज झूठी कैसे,

मै-- सीता उस दिन आपके होठों को चूम रहा था, तब आपकी जांघो पर जो महसूस हो रहा था, क्या आपको अच्छा नही लग रहा था,

माँ-- हा अच्छा लग रहा था,

मै-- जब आपको झटके खाकर जो मज़ा आया वो अच्छा नही लगा,

माँ-- हा राज अच्छा लगा,

मै-- क्या मजे के बाद आपको नीचे गिलापन हुआ,

माँ-- हा राज हुआ, लकिन उनका इन सबसे क्या मतलब

मै-- मतलब है सीता, वो गिलापन हमारे मिलन का संकेत दे रहा था,

जब जब हम पास आते है दोनो को एक दूसरे मे खोने को दिल नही करता है क्या

माँ-- हा राज करता है, लेकिन इन सब से बच्चा हो गया तो,

मै-- मै चाहता हु हम दोनो की निशानी हो,

माँ--- पागल दुनिया को क्या कहूंगी, तेरे पापा तो बीमार है, कोई क्या सोचेगा की बच्चा किसका है,

तेरी माँ गाँव मे न्याय करती है, मै खुद कैसे गलत काम कर सकती हु,

मै-- तुम वो सब मुझ पर छोड़ दो, मै सब बता दूंगा आपको क्या करना है

अब बताओ क्या तुम तैयार हो

माँ-- राज मुझे तुम पर पूरा भरोसा है, तुम सब ठीक कर दोगे,

ठीक है राज जैसा तुम कहोगे मै वैसा करूँगी,,

मै--ठीक है फिर हम कल ही शादी करेंगे,, दोनो कल बाजार चलेंगे और वही से तैयार होकर आयेंगे,

माँ-- कल लेकिन कहा पर राज,

मै- यही घर पर,, और कल ही हमारी सुहागरात होगी,

माँ-- ठीक है राज, मै उस रात को जीना चाहती हु, मै तेरी दुल्हन बनुगी, राज

इतना कह मैने माँ को पकड़ उनके होठो को चूमने लगा, थोड़ी देर बाद छोड़ ये सब कल सुहागरात पर होगा सब

माँ -- ठीक है राज

मै-- कल पार्लर से आप खुद तैयार होना, और मै वहा सबको बता दूंगा, आपको अच्छे से तैयार कर देंगे, मै और माँ दोनो सो गए, सुबह जल्दी उठ सीता आज आप मेरी हो जाओगी, चलो जल्दी करो बाजार चलते है

मै और माँ दोनो खुशी खुशी पार्लर पहुंचे, मैने उनको बता दिया की एक दुल्हन की तरह सजा दो इसको,
 
आगे..

मां सजकर बाहर आई बिल्कुल परी लग रही थी मैने भी नये कपड़े लिए, हम घर को आ गये

माँ-- राज अब क्या करे, मै बहुत उत्सुक हो रही हूँ

मै-- सीता मै भी बहुत उत्सुक हु, रुको मै तयारी करता हु,

मैने हाल मे थोड़ी सी आग जलाई,

और माँ का हाथ पकड़ लिया और आग के चारो तरफ फेरे लेने लगे, साथ फेरे लेकर हम रुक गये,

तभी मैने सिंदूर लिया चुटकी मे,

मै-- सीता मै तुम्हारी माँग भर रहा हु, क्या तुम तैयार हो.

माँ-- हा राज मै तैयार हु,

मैने चुटकी से माँ की माँग मे सिंदूर भर दिया, माँ की आँखे बंद हो गयी,

तभी मैने मंगलसूत्र निकाला और माँ के गले मे डाल दिया,

सीता इस अग्नि के सामने मै तुम्हे अपनी पत्नी मानता हु,

माँ-- मै भी आपको आज से अपना पति मानती हु, राज,

और माँ मेरे पेर छूने लगी,

मै-- माँ को पकड़ता हुआ सीता ये नही, तुम्हारी जगह मेरे दिल मे है, पैरो मे नही

माँ रोने लगी..

मै-- क्या हुआ सीता

माँ-- राज, आज आप मेरे पति हो चुके हो, आपने मेरे लिए सब कुछ किया,

ये देख मुझे रोना आ गया, राज ये खुशी के आँसू है,

मै-- सीता, आज से खुशिया दुगुनी हो जायेगी, देखना आप,

मै और माँ पति पत्नी बन चुके थे,

और एक दूसरे के गले लग गये..
 
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