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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

दिलीप- एलीना का कहना यह है कि मेरा सेक्स पे कितना भी कंट्रोल हो,अगर मेरे दिल में किसी लड़की के लिए अपनापन है,और वो लड़की

मेरे साथ आगे बढ़ना चाहती है,तो मैं कुछ भी कर लूँ खुद को रोक नही पाउन्गा

[वँया हल्का हंसते हुए बोली,ऐसी भी कोई बीमारी होती है

मुझे तो पता ही नही था

दिलीप- यह कोई बीमारी नही है, मेरे भाई को बड़ी नानी और बड़े मामा के सिवा किसी का भी प्यार या अपनापन नही मिला

अब उसका दिल मेरे सीने में धड़क रहा है

तो यह समझ लो कि उसका दिल मेरे बस में नही है

वँया- इसका मतलब अगर अवन्तिका दोबारा तुम्हारे सेक्स करना चाहे तो तुम पीछे नही हटोगे,क्यूंकी तुम्हारे दिल में उसके लिए अपनापन है

[वँया ने मुझे इतना बड़ा झटका दे दिया था

कि मैं कुछ बोल भी नही पा रहा था

वँया- अवन्तिका शादी से पहले मुझे सब कुछ बता चुकी है

मेरे सवाल का जवाब दो

दिलीप- तुम्हे बता चुका हूँ मेरे बस में यह सब नही है,एक काम करो मुझे मार डालो यह सब ख़तम हो जाएगा

[वँया का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था,मैं ऐसा बोलूँगा शायद उसे उम्मीद नही थी

और चटाक़ चटाक़ चटाक़ तीन थप्पड़ मेरे गाल पे पड़ चुके थे

मैं इंतेज़ार कर रहा था अगला थप्पड़ पड़ने का

शायद वँया यह समझ गयी

मैने अपना गाल आगे कर दिया,वँया मेरे गाल को चूम ली,और मैं कुछ बोलता उससे पहले ही वो मेरे होंठो पे अपने होंठ रखके चूसने लगी...

मैं भी वँया के होंठो को बड़े प्यार से चूसने लगा

वँया कुछ देर तक मेरे होंठ चुस्ती रही,और फिर अपना मुँह खोल दी,मैने अपनी ज़ुबान को वँया के मुँह में डाल दिया,वँया मेरी ज़ुबान चूसने लगी

कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को किस करते रहे

वँया- सिर्फ़ किस करने का इरादा है

फिर मैं झट से उठा और गेट लॉक कर दिया

वँया मुझे बड़े गौर से देख रही थी
 
फिर मैं झट से उठा और गेट लॉक कर दिया

वँया मुझे बड़े गौर से देख रही थी

मैने अपनी शर्ट और पैंट और अंडरवेर उतार फेंका और पूरा नंगा हो गया

वँया मेरे लंड को देखके हल्का सा शर्मा दी

मैं वँया के होंठो पे अपने होन्ट रखके चूसने लगा,साथ वँया के कपड़े भी उतारने लगा

कुछ ही देर में मैं वँया के सारे कपड़े उतार फेंका

अब हम दोनो बिना कपड़ो के एक दूसरे की बाहो में एक दूसरे के होन्ट चूस रहे थे,फिर मैने वँया को लिटा दिया और उसके उपर आके उसके बूब्स दबाने लगा

वँया- अया तुम्हारे ही हैं आराम से दबाओ

[मैं और ज़ोर से दबाने लगा,वँया मुझे चींटी काटने लगी,फिर मैं वँया के बूब्स को चूसने लगा,कुछ देर तक वँया के दोनो बूब्स को चूस्ता रहा,फिर मैं बूब्स के निपल को अपनी दो उंगलियो में पकड़ के खींचने लगा

साथ ही निपल्स को चूसने भी लगा

फिर मैं खड़ा हो गया,और वँया घुटनो के बल बैठके मेरे लंड को अपने दोनो हाथो में पकड़के सहलाने लगी

जब वँया अपने नाज़ुक हाथो से मेरा लंड सहलाती तो मेरा लंड और हार्ड हो जाता

कुछ देर तक मेरे लंड को सहलाने के बाद वँया अपना मुँह खोलके धीरे से मेरा लंड अपने मुँह में लेने लगी

जब मेरा आधा लंड वँया के मुँह में चला गया तो वो मेरा लंड चूसने लगी

मैं वँया के चेहरे पे आए हुए बाल को हटा रहा था

कुछ ही देर में मेरा लंड वँया के थूक से चिकना हो गया

फिर मैने अपना लंड वँया के मुँह से निकाल लिया,और वँया को लिटा दिया

वँया के टाँगो के बीच आके उसके पैरो को पूरा फैला दिया

वँया की चूत रस से भीगी हुई थी
 
मैं अपना मुँह वँया की चूत पे रखके चूसने लगा

कुछ ही देर में वँया आहे भरने लगी

फिर मैने अपनी दो उंगलियो को वँया की चूत में डाल दिया

और आगे पीछे करने लगा

वँया पूरी तरह से गरम हो चुकी थी,और ज़ोर ज़ोर से आहे भर रही थी

अब मैं अपनी दोनो उंगली तेज़ी से वँया की चूत में आगे पीछे करने लगा

फिर मैं उठके बैठ गया,और कुछ ज़्यादा ही तेज़ वँया की चूत को अपनी उंगली से चोदने लगा

वँया मुझे रोकने की कोशिश करने लगी,पर मैं कहाँ रुकने वाला था,कुछ ही देर में वँया बहुत बुरी तरह से झड़ने लगी

वँया का जिस्म झटके खा रहा था

मेरा पूरा हाथ वँया की चूत के रस से भीग चुका था

वँया अपनी आँखें बंद किए ज़ोर ज़ोर से हाँफ रही थी

मैं अपना लंड वँया के होंठो पे रख दिया,वँया अपनी आँखें बंद किए ही अपना मुँह खोल दी

मैं वँया के निपल को मरोड़ दिया,वँया अपनी आँखें खोलके मुझे गुस्से से देखने लगी
 
मैं अपना लंड वँया के मुँह में डालके तेज़ी से आगे पीछे करने लगा,फिर मैं अपना लंड वँया के मुँह से निकाला और वँया को घोड़ी बना दिया

वँया के पीछे आके वँया की चूत पे अपना लंड सेट किया,और धीरे धीरे अंदर डालने लगा,कुछ ही देर में मैं अपना पूरा लंड वँया की चूत में डाल दिया

और वँया की कमर पकड़के हल्के से धक्के मारने लगा

थोड़ी देर बाद मैं अपना पूरा लंड चूत से बाहर निकाला और एक ही बार में अंदर डाल दिया

वँया की चीख निकल गयी,मैं बिना रुके धक्के मारने लगा

वँया आआहए भरने लगी

मेरा लंड वँया की चूत में कुछ ज़्यादा ही जोश में आ गया था,एक बार फिर मैं अपना पूरा लंड वँया की चूत से बाहर निकाला और जैसे ही

वँया पीछे मूडी मैं अपना पूरा लंड वँया की चूत में डाल दिया

दिलीप- मेरी प्यारी वानु वैसे तो बड़ा बोलती हो अब क्या हो गया

[वँया मुझे गुस्से से देखने लगी,मैं पूरी ताक़त से धक्के मारने लगा,हर धक्के के बाद वँया की चीख निकल जाती

फिर मैं आगे झुका और उसके होंठ चूस्ते हुए धक्के मारने लगा

वँया मेरे होंठो को बुरी तरह से चूसने लगी

और कुछ ही देर में झड़ने लगी

वँया के पैर काँपने लगे,मैने अपना लंड वँया की चूत से बाहर निकाला

और वँया को अपनी गोद में उठाके अपना लंड वँया की चूत पे सेट किया,और उसे किस करते हुए अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया

इस बार मैं आराम से धक्के मार रहा था

जब वँया पूरी तरह से मदहोश हो गयी

तो मैं वापस तेज़ धक्के मारने लगा

वँया मेरी गोद में थी,और मेरा लंड वँया की चूत में था,कुछ देर तक वँया को चोदने के बाद मैं वँया को बेड पे लिटाके धक्के मारने लगा

एक बार फिर वँया झड़ने लगी

फिर भी मैं धक्के मारता रहा

एक बात वँया में खास थी,जब मैं उसे प्यार करता हूँ,तो वो मुझे इतने प्यार से देखती है

जैसे वो मुझे अभी¨¬ देख रही थी

फिर मैने अपना लंड वँया की चूत से बाहर निकाला

और अपना लंड वँया के मुँह में डाल दिया

वँया मेरे लंड को चूसने लगी,फिर मैं वँया का सर पकड़के धक्के मारने लगा

कुछ ही देर में मैं भी झड़ने लगा,वँया मेरा सारा रस पी गयी...

वँया का सर पकड़के धक्के मारने लगा

कुछ ही देर में मैं भी झड़ने लगा,वँया मेरा सारा रस पी गयी

फिर मैं सीधा वँया के बगल में लेट गया

कुछ देर बाद मैं जाके नहाया और कपड़े पहेन लिया

फिर वँया नहाई और कपड़े पहेन ली

और मेरे पास आके बैठ गयी

इस बीच मैने ध्यान दिया कि वँया लंगड़ा रही है

दिलीप- लंगड़ा क्यूँ रही हो

वँया- क्यूँ तुम्हे नही पता

दिलीप- आराम से ही तो किया था

वँया- बड़ा आराम से किया था

दिलीप- यह क्या बात हुई,तुम इस लिए अब झगड़ा करोगी

वँया- झगड़ा थोड़े ही कर रही हूँ वैसे मुझे पता है तुमने आराम से किया है

मैं तो आक्टिंग कर रही थी

दिलीप- क्या आराम से किया है

वँया- हटो बेशरम

दिलीप- एक बार बोलो ना

वँया- नही

दिलीप- पति हूँ तुम्हारा

वँया- बाद में

दिलीप- अरे बोल

वँया- तुम प्यार वाली चुदाई करते हो

दिलीप- अरे तो शर्मा क्यूँ रही हो

अपने पति से ऐसी बातें करनी चाहिए

वँया- मुझसे नही होती

दिलीप- चलो अब विदू के पास जाते हैं

[फिर हम विदू के पास गये,विदू अब काफ़ी हद तक ठीक हो चुकी थी,और वैसे भी बड़ी मामी तो एक मिनिट के लिए उसको छोड़ के नही गयी

फिर ऐसे ही थोड़ी देर तक हम ने बात की

रात में हम सबने खाना खाया

और मैं विदू के रूम में आ गया

फिर हम दोनो एक दूसरे की बाहो में सो गये

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रात में हम सबने खाना खाया

और मैं विदू के रूम में आ गया

फिर हम दोनो एक दूसरे की बाहो में सो गये

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सुबह जब उठा तो विदू बेड पे नही थी

शायद नीचे गयी थी

मैं भी रेडी होके नीचे गया

मेरी तीनो बीवी किचन में थी

तो मैं भी किचन में गया

और पीछे से एलीना के गले लग गया

एलीना कुछ बोलती उससे पहले ही मैने उसके गाल पे दाँत काट लिया,धीरे से

वँया- यह क्या कर रहे हो

दिलीप- चुप चुहिया अपनी बीवी को प्यार कर रहा हूँ

वँया- देख बैल यह सब करना है तो अकेले में जाओ

[मैने वँया का चेहरा पकड़ा और उसके दोनो गाल में दांतो से काट लिया

दिलीप- अब बोलो क्या बोल रही थी

वँया- निशान आजाएगा

एलीना- आजाएगा नही आ गया है

वँया- दीदी देखो ना यह क्या कर रहा है

[विदू मुझे देखी भी नही,क्यूंकी उन्हे पता था आगे मैं क्या करूँगा

दिलीप- हां तो आप कुछ बोलेंगी नही

[यह कहके मैं आगे बढ़ा और विदू के गाल पे भी दाँत से काट लिया

वँया- देखो यह ठीक नही है

[फिर मैं बाहर आके वेट करने लगा,थोड़ी ही देर में नाश्ता बन गया

और हम सब नाश्ता करने लगे

फिर मैं वँया के साथ कॉलेज पहुँचा

वँया क्लास रूम में चली गयी,और मैं राहुल का वेट करने लगा

लेकिन जब राहुल नही आया

तो मैं भी क्लास रूम में आ गया

क्लास ऑफ होने के बाद मैं फिरसे राहुल को ढूँडने लगा

मैं केयी लड़को से भी पुच्छने लगा,तभी मुझे एक लड़के ने बोला कि राहुल को कल गुन्डो ने बहुत मारा

अब वो हॉस्पिटल में है

मैं तुरंत हॉस्पिटल भागा

हॉस्पिटल पहुँचके मैं उस वॉर्ड में गया,जहाँ राहुल था

राहुल के पास दो लड़किया बैठी हुई थी

काफ़ी खूबसूरत थी

राहुल- दिलीप तुम यहाँ

दिलीप- यह सब कैसे हुआ

राहुल- हमारी होने वाली साली ने हमारी यह हालत करवा दी

[तभी उनमें से एक लड़की बोली,राहुल तुझे मज़ाक सूझ रहा है

राहुल- क्या दीदी अब जो सच है वो सच है

[दूसरी लड़की रहलू के सर पे चपत मार के बोली,जब पापा को पता चलेगा तो सोच तेरा क्या होगा

राहुल- इससे ज़्यादा थोड़े ही मारेंगे

पहली लड़की बोली- तुझसे तो बात करना ही बेकार है

चल अनु[और दोनो लड़की बाहर चली जाती है

मैं राहुल के पास बैठ गया

दिलीप- यह सब हुआ कैसे

राहुल- कल मेरे सामने 4 या 5 गुन्डो के सामने खड़ी हो गयी,और कही कि यह सब तुम्हे 5 मिनिट तक मारेंगे,अगर उसके बाद तुम उठके खड़े हो गये,तो मैं खुद पापा से बात करूँगी,तुम्हारे और विन्नी के बारे में

मैं भी क्या करता अगर नही मानता तो फोकट में पिट जाता इसी लिए मैं मान गया,5 मिनिट तक सालो ने वो धोया,जब आँख खुली तो हॉस्पिटल में था

[इस वक़्त राहुल की आँखो में प्यार खोने का डर मैं सॉफ देख रहा था
 
तभी विन्नी की बड़ी बहेन अपने 4या5 पहेलवानों के साथ अंदर आई

मुझे देखके वो मुस्कुरा दी

और राहुल से बोली, गेट वेल सून एक मौका तुम्हे और दूँगी,फिर भी अगर तुम फैल हो गये तो विन्नी को भूलना पड़ेगा

[राहुल कुछ नही बोला

मैं देखा जिस प्लेट में एक फ्रूट्स रखे हुए थे,उसमें एक चाकू रखा हुआ था,मैने वो चाकू उठा लिया

और विन्नी के बहेन की तरफ बढ़ाया,वो मुझे अजीब नज़रो से देखने लगी

दिलीप- डर क्यूँ रही हो,बस देखना चाहता हूँ,जो लड़की इतनी बहादुर बनती है,वो चाकू पकड़ सकती है कि नही

[यह सुनते ही वो झट से मेरे हाथ से चाकू ले ली,और उसे एक दम टाइट पकड़ते हुए बोली,डर माइ फुट[उसने इतना ही कहा था,जिस हाथ में वो चाकू पकड़े हुए थी,मैने उस हाथ को मज़बूती से पकड़ा और उसके एक आदमी के पेट की तरफ घुमा दिया नतीजा यह हुआ,कि वो

चाकू सीधा उस आदमी के पेट में घुस गया,मैने झट से वो चाकू लेके अपनी जेब में रखा,और उसके आदमियो पर टूट पड़ा,कुछ ही देर में उसके आदमी धूल चाट रहे थे

तभी डॉक्टर्स आ गये,मैं उन्हे कहा कि इस लड़की इस आदमी को चाकू मार दिया है

आप इसका इलाज करो मैं पोलीस को फ़ोन करता हूँ

[जिस आदमी को चाकू लगा था,उस आदमी को ओट में ले गये,और मैं विनी की बहेन की तरफ देखा

और बोला,अब पोलीस आएगी,और मैं उन्हे यह चाकू दे दूँगा

फिर तुम्हारा सारा घमंड तुम्हारे साथ जैल में जाएगा

अगर ऐसा नही चाहती तो गेट लॉस्ट और दोबारा राहुल की तरफ आँख भी उठाके मत देखना...

फिर तुम्हारा सारा घमंड तुम्हारे साथ जैल में जाएगा

[मेरे इतना सब कुछ कहने का कोई असर नही पड़ा,वो एक दम बुत बनी खड़ी रही

कुछ देर में पोलीस आ गई

और सबसे पूछताच्छ करने लगी

मैने झट से चाकू सॉफ किया,और फिंगरप्रिंट मिटा दिया

और चाकू वापस फ्रूट्स वाली प्लेट में रख दिया

इनस्पेक्टर मेरे पास आया

इनस्पेक्टर- सब कह रहे हैं,की आपने इनको देखा है उस आदमी को चाकू मारते देखा है

दिलीप- जी हां मैने देखा है इस लड़की को चाकू मारते हुए

इनस्पेक्टर- चाकू कहाँ है

दिलीप- देखिए जब इस लड़की ने उस आदमी को चाकू मारा तो चाकू इसके हाथ में था,फिर मैं डॉक्टर्स से बात करने लगा,अब मुझे क्या पता की चाकू कहाँ है

इनस्पेक्टर- आपका नाम

[मैने अपना कार्ड निकालके इनस्पेक्टर को दे दिया

और उसे आँखो से इशारा किया

इनस्पेक्टर- इन मेडम का नाम क्या है

दिलीप- मुझे नही पता

अरे राहुल इसका नाम क्या है

राहुल- लावन्या

[फिर लावन्या को लेडी ऑफीसर अरेस्ट करके ले गयी

पोलीस के जाते ही राहुल ने एक ऐसा सवाल किया जिसे सुनके मैं मन में हंस दिया

राहुल- यह कैसा पोलीस वाला था,जिसने मुझसे पुछ्ताछ नही किया

दिलीप- मुझे क्या पता

वैसे यह दोनो कौन थी

राहुल- मेरी दीदी अनु दी और दिशा दी

दिशा दी मुझसे 4 साल बड़ी हैं

और अनु दी 2 साल

दिलीप- एक बात बता तेरे प्यार के बारे में इन्हे पता है

राहुल- हाँ

दिलीप- ओके अब मैं चलता हूँ

[फिर मैं हॉस्पिटल से बाहर आया

डी को फोन करके कुछ ज़रूरी बात किया

और उसे यह भी बताया कि आज मेरी किरण मौसी मेरे घर पे होनी चाहिए

और उन्हे लेके वो खुद आएगा

फिर मैं वापस कॉलेज पहुँचा
 
दिलीप- एक बात बता तेरे प्यार के बारे में इन्हे पता है

राहुल- हाँ

दिलीप- ओके अब मैं चलता हूँ

[फिर मैं हॉस्पिटल से बाहर आया

डी को फोन करके कुछ ज़रूरी बात किया

और उसे यह भी बताया कि आज मेरी किरण मौसी मेरे घर पे होनी चाहिए

और उन्हे लेके वो खुद आएगा

फिर मैं वापस कॉलेज पहुँचा

उधर लावन्या को ज़मानत भी मिल गयी

और वो गुम्सुम अपने घर पे पहुँची,लावन्या के पिता गुस्से से आगबबूला थे

किसकी वजह से उनकी बेटी को जैल जाना पड़ा

इनस्पेक्टर के पास फोन आ गया था,उसे क्या करना है आगे

वँया मुझे देखके बोली,तीन घंटे से तुम कहाँ थे,मुझे और दुख देना चाहते हो

या फिर कोई मिल गयी थी

दिलीप- प्यार करती हो ना आँखो में देखो जवाब मिल जाएगा

वँया- नाराज़ क्यूँ हो रहे हो

अब तुम्हारा कॅरक्टर ऐसा है,ना चाह के भी कुछ ना कुछ मुँह से निकल जाता है

[कॉलेज ऑफ होने के बाद मैं वँया के साथ घर आ गया

हम सबने साथ में खाना खाया

फिर मैं विनय से मिलने उसके घर की तरफ चल दिया

बिमला अपने घर के बाहर ही खड़ी थी

शायद मुझसे कुछ बात करना चाहती थी

मैं उसके साथ उसके घर में गया

वो मुझे पानी लाके दी मैं पानी पिया और बैठ गया

बिम्ला- तुम से कुछ बात करनी है

दिलीप- क्या

बिम्ला- उस दिन तुमने जो कहा उसके बाद मैं बहुत सोची

दिन भर यही ख्याल आता कही मेरी बेटी भी मेरे रास्ते पे ना चली जाए

तो मैने उस से बात की

और उसने जो कहा मुझे यकीन नही हुआ

दिलीप- क्या कहा उसने

बिंला- यही कि वो तुम्हे पसंद करती है

दिलीप- तुम्हारी बेटी का भी तुम्हारी तरह दिमाग़ खराब है

बिंला- वो कहती है कि एक दिन तुम्हे ऐसा मौका मिला कि तुम उसका सब कुछ ले सकते थे

लेकिन तुमने ऐसा नही किया

दिलीप- मुझे पसंद करती है ग़लत नही है,लेकिन तुमको उसे समझाना चाहिए

बिम्ला- समझा चुकी हूँ लेकिन

दिलीप- लेकिन क्या

बिंला- वो कहती है कि मैं किसी भी तरह तुम्हे मनाऊ कि तुम उसे एक बार प्यार करो

दिलीप- गला घोंट दो उसका

बिम्ला- किस मुँह से उसे कुछ कहूँ,मैं खुद कैसी हूँ तुम्हे तो पता है

और पता है वो क्या कहती है

आप की तरह इधर उधर नही जाउन्गी,एक बार वो मुझे प्यार करले फिर चाहोगी तो ज़िंदगी भर घर में बैठी रहूंगी

दिलीप- इतनी हिम्मत आई कहाँ से
 
बिम्ला- जब किसीसे प्यार हो जाता है तो हिम्मत भी आजाती है,और उसने एक धमकी भी दी है,अगर उसने मुझे प्यार नही किया तो जितना तुमने पूरी जिंदगी में नही किया है

उतना मैं कुछ दिन में कर लूँगी

दिलीप- सॉफ सॉफ कहो ना कि तुम्हारी बेटी ने कहा है,की अगर मैने उसे प्यार नही किया,तो वो कुछ दिन में इतनी बार चुदवायेगि जितना

तुमने पूरी जिंदगी में नही चुदवाया होगा

[मेरी बात सुनके बिम्ला रोने लगी

कुछ देर बाद रोने के बाद वो बोली,अगर उसने तुम्हारी जगह किसी और के बारे में कहा होता,तो उसका गला घोंट देती

लेकिन उसे एक ऐसा इंसान पसंद आया,जिसने मुझे और उसे बर्बाद होने से बचाया है

अब मेरी बेटी की जिंदगी तुम्हारे हाथ में है

दिलीप- तुम्हारी बेटी मेरा तलाक़ करवा के रहेगी

बिंला- मान जाओ तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ पैर पड़ती हूँ

[अगले ही पल बिम्ला मेरे पैर पकड़ ली

दिलीप- यह क्या कर रही हो

देखो पहले मुझे कुछ सोचने दो

[तभी मेरी नज़र रूम की तरफ गयी,जहाँ बिम्ला की बेटी खड़ी होके यह सब देख रही थी

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बिंला- मान जाओ तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ पैर पड़ती हूँ

[अगले ही पल बिम्ला मेरे पैर पकड़ ली

दिलीप- यह क्या कर रही हो

देखो पहले मुझे कुछ सोचने दो

[तभी मेरी नज़र रूम की तरफ गयी,जहाँ बिम्ला की बेटी खड़ी होके यह सब देख रही थी

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फिर मैं वापस घर आ गया,और अपने रूम में आके बैठ गया

तभी एलीना मेरे रूम में आई

वो कुछ बोलती उससे पहले ही मैं हर एक बात उसे बता दिया

एलीना मेरी बात सुनके मुझे गुस्से से देखने लगी

और चटाक़ मेरे गाल पे थप्पड़ पड़ा

आज एलीना ने भी चिपका दिया

तभी गेट खुला और वँया अंदर आई,वो भी गुस्से में दिख रही थी

और चटाक़ वँया एक थप्पड़ चिपका दी

मैं बिना कुछ बोले तकिये में अपना मुँह छिपाके लेट गया,ढोल बन गया हूँ,दोनो बजा रही हैं,वो भी बिना किसी ग़लती के...

वँया मेरे कंधे पे हाथ रखके मुझे उठाने लगी,लेकिन मैं नही उठा,फिर एलीना भी मुझे उठाने की कोशिश करने लगी

वँया- दिलीप नाराज़ क्यूँ हो रहे हो,प्लीज़ उठो ना

एलीना- उठो ना ऐसा क्यूँ कर रहे हो

[मैं वैसे तकिये में मुँह छिपाके लेटा रहा

फिर वँया रूम से बाहर चली गयी,और जब वो थोड़ी देर बाद आई

वँया- दिलीप दीदी यह सुनके बेहोश हो गयी

कि तुम उनसे नाराज़ हो

[बस इतना सुन ना था,कि मैं एक झटके में उठा,और भागा विदू की रूम की तरफ

लेकिन जब मैं विदू के रूम में पहुँचा तो चौंक गया

क्यूंकी विदू बेड पे बैठी हुई थी

मैं विदू के पास बैठ गया

विदू- क्या हुआ मेरे पतिदेव जी को

दिलीप- आपकी दोनो सौत ने धो दिया

विदू- क्यूँ

[फिर मैने विदू को बताया की बिम्ला की बेटी मुझसे कही कि वो मुझसे एक बार प्यार करना चाहती है,वरना वो अपने आप को बर्बाद कर देगी

\

विदू- क्या बात है मेरे पतिदेव से एक और लड़की प्यार करना चाहती है

दिलीप- उड़ा लीजिए आप भी मज़ाक

विदू- आपको पता है कि उन्दोनो ने आपको थप्पड़ क्यूँ मारा
 
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