• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

मुझे ऐसा लगा जैसे हमारे बीच की दूरियां उस समय ख़त्म होने जा रहीथी। समीर मुझे अपनी समझ ने लगे थे। मुझे भी अब समीर पर एक तरह का ममत्व और अधिकार का अनुभव होने लगा था। मैंने समीर की प्यासी आँखों में झांका। अब मेरे लिए समीर कोई पराये नहीं रहे थे। मुझे उनकी प्यास बुझानी थी। समीर की प्यास बुझाने पर मेरी प्यास भी तो बुझनी ही थी। यही तो प्यार का दस्तूर है न?

मैंने समीर का हाथ मेरे हाथों में लिया और बड़े प्यार से मेरी गाउन की ज़िप पर रख दिया। मैंने समीर को अपनी दुविधा में से मुक्त किया। समीर ने धीरे से ज़िप का लीवर निचा किया तो मेरे दो पके बड़े फलों के समान स्तन युगल गाउन के आवरण से मुक्त हो कर समीर की आँखों के सामने लहराने लगे। समीर की लोलूप आँखें मेरे चुचियोंको लहराते देख अधिरी लग रही थी। अपने दोनों हाथों में मेरी चूचियों को पकड़ा और उन्हें अपने हाथों में जैसे उनका वजन भाँप रहें हो ऐसे उठा रहे थे।

मेरी लंबी निप्पले कपडे टांगने के हुक की तरह कड़क खड़ी हो गयी थीं। समीर की आँखें उन पर गड़ी हुई थीं। धीरे से समीर ने अपनी दो उँगलियों के बीच मेरी एक निप्पल को दबाना और खेलना शुरू किया। क्या उसे पता था की मेरे स्तनों के स्पर्श मात्र से मैं अपना आपा खो बैठती थी? समीर ने मेरे दोनों स्तनों को आपस में एकदूसरे से साथ जोर से दबाये और उनसे प्यार से खेलने लगे। मुझसे रहा नहीं जारहा था। मेरे स्तनों के स्पर्श से मेरे पुरे बदन में एक तरह का अनोखा अंतःर्स्राव बह रहा था, जिसकी प्रतीति मुझे मेरे पॉंवों के बीचमें हो रही थी। मेरी योनि में से जैसे झरना बह रहा हो ऐसे उत्तेजना के मारे श्राव होने लगा जिसे मुझे छुपाने के लिए परिश्रम करना पड़ रहा था।

समीर ने मुझे अपनी गोद में ऐसे बिठाया जिससे मेरी पीठ समीर की छाती पर हो। उसके दोनों हाथ मेरी बगल में से होते हुए मेर स्तनों को पकडे हुए थे। मैं अपने कूल्हें में समीर के लन्ड की ठोकर अनुभव कर रही थी। बेचारा समीर के पाजामें में से बाहर निकलने के लिए कूद रहा था।

समीर ने अपना सर मेरे कन्धों पर रखा। वह जैसे मेरे कन्धों को चूमने की कोशिश कर रहा था। उसने पूछा, “डॉली, सच बोलो, क्या तुम मुझको पसंद करती हो?”

मुझे समझ नहींआया क्या जवाब दूँ। एक मर्द की गोद में एक स्त्री अगर आधी नंगी बैठकर उससे अपने मम्मों को मसलवाती है तो फिर यह कैसा सवाल हुआ? साफ़ है की वह न सिर्फ उसे पसंद करती है पर उससे चुदवाने के लिए भी तैयार ही होगी न?

मेरा मन तो किया की मैं लपक कर बोलूं की, “नहीं, मैं तो तुमसे नफ़रत करती हूँ, पर बस मुझे ज़रा खुजली हो रही थी इस लिए मैंने तुमसे मेरी चूचियों को खुजलाने को कहा।” पर मैं जानती थी की उस नाजुक घडी में उसके मन में अजीबो गरीब उथल पुथल चल रही होगी। चूँकि मैं पहले समीर की बाहोँ में से एकबार निकल भागी थी इसी लिए शायद उसे डर था की कहीं मैं उठ कर बिस्तर से भाग न जाऊं। समीर को शायद पता नहीं था की इस नाजुक समय में वह क्या बोले।

मैंने अपना सर हिलाकर हाँ का इशारा किया और कहा, “समीर, तुम एक बहोत अच्छे और बहोत समझदार इंसान हो और मैं तुम्हें बहोत पसंद भी करती हूँ। पर शायद हम जो कर रहे हैं वह ठीक नहीं है। हमें यह सब नहीं करना चाहिए। यह गलत है।” यह कहते हुए मैं बिस्तर में से उठने की कोशिश करने लगी।

पर उस समय सच तो यह था की मैं अपने बोले हुए शब्दों पर पछता रही थी। मैं चाहती थी की समीर मुझे रोके और जकड कर जाने न दे। और हुआ भी कुछ ऐसा ही। जब मैं उठने लगी तब समीर ने उस रात पहली बार मुझे कस के अपनी बाहों में जकड लिया और मेरे मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा और बोला, “यह तुम क्या कह रही हो। यह गलत कैसे है? क्या तुम नहीं जानती की यही तुम्हारा पति राज चाहता है? मैंने कुछ दिन पहले तुम्हें इशारे इशारे में यह बताया था न की तुम्हारे पति राज की इच्छा है की हम दोनों पति तुम और रुखसार को अपनी बीबी जैसे समझें? वैसे ही राज ने क्या तुम्हे नहीं कहा की तुम और रुखसार हम दोनों को अपने पति समझो? क्या तुम नहीं जानती की राज और मैं मिलकर रुखसार के साथ सेक्स कर चुके हैं? क्या तुम जानती हो की तुम्हारा पति और मेरी बीबी एकदूसरे के शयन साथी हो चुके हैं? वह एक दूसरे के साथ सो चुके हैं?” समीर ने जो प्रश्नों की झड़ी लगा दी तो मैं तो बस सुनती ही गयी और वहां जैसे ठिठक गयी और उठ ही न सकी और समीर के बोलने का इन्तेजार करने लगी।

 
[मैं अपना नाम सुनके और जोश में आ गया और बुरी तरह से विदू की चूत चूसने लगा.विदू झड़ने लगी उसकी चूत का सारा पानी मेरे मुँह में चला गया.और मैं विदू के रस की एक एक बूँद पी गया.विदू निढाल होके हाँफने लगी

अब बारी थी विदू को चोदने की

विदू का पानी निकल चुका था.और उसकी चूत थोड़ी ढीली पड़ चुकी थी

मैने अपना लंड विदू की चूत पे सेट किया.और एक झटके में आधा लंड डाल दिया.विदू की आआह निकल गयी

दिलीप- बड़ा मुझे उकसाने आई थी.दो की तो फाड़ चुका हूँ

अब आपकी बारी है

विदू- तो फाडो ना बक बक क्यूँ कर रहे हैं[अगले ही पल विदू की चीख निकल गयी.क्यूंकी मैं अपना पूरा लंड विदू की चूत में पेल चुका था'विदू के आँसू निकल गये लेकिन वो रोई नही

दिलीप- सॉरी जान

[और मैं धीरे धीरे धक्के मारने लगा

विदू के बूब्स मसल्ते हुए विदू की चूत मार रहा था.हर धक्के के साथ विदू की चीख निकल रही थी

विदू की हर चीख के साथ मेरे धक्के मारने की स्पीड तेज़ होती जा रही थी

विदू की चूत मैं काफ़ी ज़ोर से मार रहा था

विदू- आआह आअज आपने तो फाड़ ही दी.मैं कभी नही सोची थी कि आप ऐसे मुझे प्यार करेंगे

[मैं बिना कोई जवाब दिए विदू की चूत मारने लगा

अब विदू की चीख उसकी सिसकी में बदल गयी थी

दिलीप- येस टेक इट बेबी यह लो और ज़ोर से और ज़ोर से लो मेरी जान

विदू- यस यस अया और ज़ोर से और ज़ोर्से मारिए.अपनी पहली बीवी की चूत यस फ़ास्टेर फ़ाआस्तेर

[विदू की बातें सुनके मैं कुछ ज़्यादा ही जोश में ताबड़तोड़ धक्के मारते हुए विदू को चोदने लगा.विदू वैसे ही मुझे उकसाती आआहए भरती रही

विदू- ऊवू दिलीप आप तो अया माआ आअज मेरी फट गई दिलीप मैं झड़ने वाली हूँ

और ज़ोर से कीजिए ऊवू यस फक मी फक मी फक येअह दिलीप आआह

[विदू की चूत मेरे लंड के वार से घायल हो रही थी.और मैं बड़ी बेदर्दी से विदू की चूत मार रहा था.मेरे धक्के विदू के पूरे जिस्म को झुंझोर रहे थे.विदू की चूत की दीवार मेरे लंड की आग को और भड़का रही थी

दिलीप- यस टेक इट बेबी एस एस एस

विदू- यस ओह ओह ओह दिलीप फक मी हार्डर हार्डर और ज़ोर से चोदिये मुझे उई माआ फाड़ दी[और विदू चीखते हुए झड़ने लगी.मैं फिर भी धक्के मारता रहा

जब विदू पूरी तरह से झड गयी.तो मैने अपना लंड विदू की चूत से निकाला

और विदू को घोड़ी बना दिया

घुटनो के बल बैठके अपना लंड विदू की चूत पे रगड़ने लगा

 
जब विदू पूरी तरह से झड गयी.तो मैने अपना लंड विदू की चूत से निकाला

और विदू को घोड़ी बना दिया

घुटनो के बल बैठके अपना लंड विदू की चूत पे रगड़ने लगा

विदू- अया साँस भी नही लेने देंगे

[विदू की गान्ड देखके मन किया अभी विदू की गान्ड में अपना लंड डाल दूं

पर मैं अपने आपको रोका.और विदू की गान्ड के छेद पे अपनी ज़ुबान रखके चाट लिया

विदू उछल गयी...

विदू- यह आअप ने क्या किया

दिलीप- अरे आप एंजाय कीजिए ना वरना

विदू- वरना क्या.उई माआअ माआअर डाअला

[मैने अपना पूरा लंड एक ही बार में विदू की चूत में डाल दिया.और धक्के मारने लगा.यह तो मनपसंद पोज़िशन था.विदू की चूत मारते हुए विदू की गान्ड का दीदार करने को मिल रहा था.मैं धक्के मारे जा रहा था.और विदू चीखे जा रही थी

पर वो आअहे भरी चीखें थी

दिलीप- यस यस यस जान कैसा लग रहा है अपनी पति देव जी का लौडा अपनी चूत में

विदू- अयाया आआहा बहुत अच्छा लग रहा है जी अया ऐसे अपनी विदू को चोदते रहिए उई माआ

[मैं काफ़ी ज़ोर से विदू की चूत मार रहा था.मैं विदू की कमर पकड़ के धक्के लगा रहा था.पर बार बार मेरी नज़र गान्ड के छेद पे चली जाती.

दिलीप- हां जान अब आपको ऐसे ही प्यार करूँगा

यस टेक इट बेबी टेक इट हार्डर

विदू- अयाया माआ ऊवू आआई

मैं गयी जी अयाया

[मैं समझ गया कि विदू झड़ने वाली है.मैने अपना पूरा लंड बाहर निकाला और एक ही बार डाल पूरी ताक़त से धक्के मारने लगा.विदू झड़ने लगी मेरे लंड को विदू की चूत नहला चुकी थी

विदू बेड पे बेसूध लेट गयी और हाँफने लगी

हम दोनो के जिस्म पसीने से भीग चुके थे

मैने विदू की चूत से अपना लंड निकाला और लेट गया

मेरे लेट ते ही विदू मेरे उपर आ गई और मुझे किस करने लगी

 
फिर वो अपनी चूत मेरे लंड पे सेट की और बैठने लगी.विदू की आँखो में मुझे ढेर सारा प्यार नज़र आरहा था

जब मेरा आधा लंड विदू की चूत में चला गया.तो मैने विदू की कमर को पकड़ा और नीचे से धक्का मार दिया

विदू- अयाया आाज क्या अयाया माआ

दिलीप- बस हो गया.[और मैं विदू की चूत में धक्के मारने लगा.विदू की गान्ड को सहलाते हुए विदू की चूत मार रहा था

विदू की चूत हर धक्के के साथ खुल रही थी

विदू भी अब अपनी गान्ड मेरी जाँघो पे पटक के अपनी चूत में मेरा लंड ले रही थी

मैं विदू के बूब्स पकड़के दबाने लगा.फिर मैने विदू को अपने उपर खींच लिया.विदू के निपल्स चूस्ते हुए.नीचे से धक्के मारने लगा

विदू की सिसकी पूरे रूम में गूँज रही थी.विदू का चेहरा बता रहा था.कि उसे कितना मज़ा आरहा है मैने विदू को छेड़ने का सोचा

दिलीप- वाआह आअज आअपकी चूत बहुत पानी बहा रही है

लगता है मुझसे ज़्यादा मन आपका है

विदू- देखिए जी यह ठीक नही है

[मैं पूरा लंड बाहर निकाला और एक ही बार में डालके धक्के मारने लगा

विदू- अयीई माआअ आआआः

दिलीप- क्या ठीक नही है जान

[ बेचारी मेरे धक्को से इस तरह घायल हो चुकी थी कुछ बोल भी नही पा रही थी

मैं विदू को अपने सीने से लगाया और धक्के मारने लगा.विदू मेरे गाल चूमने लगी

विदू- अया उम्म यआः येअह फक मी फक मी हार्देर ऊवू उईíई माआअ

[मैं भी पूरी शिद्दत से विदू की छूट मार रहा था.एक बार फिर विदू अपनी गान्ड मेरी जाँघो पे पटक ने लगी.मैं समझ गया और पूरी स्पीड से विदू की चूत मारने लगा.देखते ही देखते विदू एक बार फिर झड़ने लगी

मैं फिर भी धक्के मारता रहा

उसके बाद मैने अपना लंड विदू की चूत से बाहर निकाला

और विदू की तरफ देखने लगा.ऐसा लग रहा था.विदू में अब ताक़त नही बची है.यह मेरी सबसी लंबी चुदाई थी.उपर से मैं दो बार झड चुका था.तो यह और भी बुरा था

 
मैं फिर भी धक्के मारता रहा

उसके बाद मैने अपना लंड विदू की चूत से बाहर निकाला

और विदू की तरफ देखने लगा.ऐसा लग रहा था.विदू में अब ताक़त नही बची है.यह मेरी सबसी लंबी चुदाई थी.उपर से मैं दो बार झड चुका था.तो यह और भी बुरा था

फिर विदू उठी और मुझे लिटाके मेरे लंड को चूसने लगी.कुछ देर तक मेरे लंड को चूसने के बाद मुझे एक आइडिया आया.मैं विदू को लिटाया उसकी दोनो टाँग सटाके उपर कर दिया.और एक ही बार में अपना लंड विदू की चूत में डाल दिया

और विदू की चूत मारने लगा.विदू बस आआहए भर रही थी.ऐसे ही विदू की चूत मारता रहा फिर पता नही कितनी देर बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं भी झड़ने वाला हूँ

विदू भी झड़ने लगी.मैने झट से विदू की चूत से लंड निकाला और उसके मुँह में डालके चोदने लगा.कुछ ही देर में झड़ने लगा.विदू मेरा सारा रस पी गयी और मेरे लंड को चाटके सॉफ कर दी.जब मैं अपना लंड विदू के मुँह से निकाला तो वो बुरा सा मुँह बनाई

मैने विदू को अपने सीने से लगाया और उसके माथे को चूम लिया.कुछ देर बाद ही हम नींद की आगोश में चले गये

अब मुझे इस बात की खुशी थी की मैं अपनी तीनो बीवियो को एक जैसा प्यार किया.हां वँया के साथ उतना नही किया

पता नही मैं कितनी देर तक सोता रहा...

जब मेरी आँख खुली.तो सुबह के 11 बज चुके थे.मैं अभी भी नंगा सोया हुआ था.बाथरूम में जाके शवर लिया.और कपड़े पहेन लिया.मुझे पता था कि इस वक़्त मेरी तीनो बीविया किचन में खाने की तय्यारी कर रही होगी

तो मैं भी नीचे आ गया.और सबसे पहले बड़ी नानी के रूम में गया.बड़ी नानी मुझे देखके मुझे अपने पास आने का इशारा की.मैं उनके पास बैठ गया.बड़ी नानी मेरे सर पे हाथ फेरने लगी

बड़ी नानी- तेरी बड़ी नानी तुझे बहुत दुख देती है

दिलीप- यह आप क्या कह रही हैं

मैं समझता हूँ आपकी तकलीफ़

बड़ी नानी- बस हमेशा खुश रहा कर.तुझे खुश देखके मैं भी खुश रहूंगी

दिलीप- जी अब आप आराम कीजिए

[मैं बड़ी नानी के रूम से बाहर आया.और किचन में पहुँचा.मेरी तीनो बीवियो इस बात से बेख़बर कि मैं उनके पीछे हूँ.वो खाने बनाने में लगी हुई थी.वँया रोटी बेल रही थी.विदू सब्ज़ी बना रही थी.और एलीना दोनो को ध्यान से देख रही थी.मैं जाके वँया से पूरा सट गया.वँया सकपका गयी.और उसके हाथ से बेलन नीचे गिर गया.एलीना की नज़र मुझपे पड़ी.वो बेलन उठाके वँया को दी

दिलीप- विदू आप ठीक तो हैं

[मेरी तरफ देखके शरमा गयी

क्यूंकी मैं वँया के पीछे से सटा हुआ था

विदू- जी ठीक हूँ.आप बाहर बैठिए मैं आपके लिए नाश्ता लेके आती हूँ

[मैने वँया को पीछे से गले लगा लिया

दिलीप- वोही तो कर रहा हूँ

वँया- काम करने दो ना क्यूँ परेशान कर रहे हो

[मैं वँया की कमर में चींटी काट लिया

वँया- दीदी हटाओ ना इसे

[विदू मुझे देखी और वापस खाना बनाने लगी.उनको शायद पता चल गया था.कि अब उनकी बारी है

वँया- दीदी

एलीना- दिलीप यह क्या है

दिलीप- अपनी बीवी को गले लगाए हुआ हूँ.ओवर रिक्ट क्यूँ कर रही हो

ओह अब समझा तुम्हे भी मन है

एलीना- नो तुम लगे रहो

वँया- माआअ

[वँया बड़ी मामी को आवाज़ दी और मैं पतली गली से भागा.मेरी तीनो बीवी हँसने लगी.तभी मुझे बड़ी मामी और नई मामी एक साथ रूम से बाहर निकलती दिखी

 
नई मामी किचन में चली गयी.और बड़ी मामी मेरे पास आके बैठ गयी

दिलीप- बड़ी मामी आज मुझे बताइए.कि यह चमत्कार कब और कैसे हुआ

बड़ी मामी- कौन सा चमत्कार

दिलीप- अपनी सौत को अपनाने का

बड़ी मामी- अच्छा तो दामाद जी को जान ना है.मैं अपनी सौतेन को कैसे अपना ली

दिलीप- जी

बड़ी मामी- एक दिन मैं रश्मि के रूम के पास से गुज़र रही थी

तो मुझे उसके रोने की आवाज़ सुनाई दी

जब मैं रूम में झाँकी तो.मुझे वो रोती दिखाई दी

पता है वो क्या कह रही थी

रश्मि- पापा आप मुझे छोड़ कर क्यूँ चले गये अगर आप मुझे छोड़ कर नही जाते तो मैं भी खुश रहती.देखिए ना आपने मेरी इनसे शादी करवा दी.और इनकी पहली पत्नी इनसे भी गुस्सा हो गयी.और मुझसे भी

मैं तो मनहूस ही हूँ.पैदा होते ही अपनी माँ को खा गयी.अब इनसे शादी करके.इनकी खुशियो को भी ग्रहण लगा दिया.आप तो भगवान के पास हैं.उनसे कहिए ना कि इनको दीदी माफ़ कर्दे..इनकी दोनो बेटियो की शादी हो रही है.बस इनकी दोनो बेटियो को भगवान हमेशा खुश रखे.मेरा क्या है आप के जाने के बाद मेरा कोई अपना है नही.फिर भी मैं दीदी को मना कर रहूंगी.जानती हूँ मुझसे ज़्यादा तकलीफ़ उन्हे होती है.

बड़ी मामी- यह सब सुनके मैं अपने रूम में आ गई.और दिन भर रश्मि के बारे में सोचती रही

थी तो मेरी बेटी की उम्र की ही.इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी बातें

फिर मैं रश्मि के रूम में गयी.और उसको अपने सीने से लगा ली

वो मेरे सीने से लगते ही.रोने लगी

दिलीप- बड़ी मामी आप तो बहुत अच्छी हैं

बड़ी मामी- पता है जब वो कही कि.भगवान मेरी दोनो बच्चियो को हमेशा खुश रखे

यही बात मेरे दिल में बस गयी.किसी माँ को अगर यह पता चले कि कोई उसकी संतान के लिए इतना अच्छा सोचती है तो.वो माँ उससे ना नाराज़ रह सकती है.और ना ही गुस्सा...

[बड़ी मामी की बात सुनके मुझे बहुत अच्छा लगा मुझे खुशी थी कि अब नई मामी अकेली नही रहेंगी कुछ देर बाद विदू मेरे लिए नाश्ता ले आई मैं नाश्ता करने लगा नाश्ता करते वक़्त मेरी तीनो बीवी मुझे बड़े प्यार से देख रही थी मैने नाश्ता कर लिया

दिलीप- लगता है रात में मन नही भरा कोई बात नही अभी चलते हैं

[मेरे ऐसा कहते ही एलीना और वँया मेरे पास आई और मेरी पीठ पे मुक्का मारने लगी मैं बेचारा मार ख़ाता रहा कुछ देर बाद दोनो मुझे मारना बंद कर दी लेकिन मेरा दिल अभी कहाँ भरा था

एलीना जैसे ही मूडी आगे जाने के लिए मैने उसकी गान्ड पे एक चपत लगा दिया एलीना उछल पड़ी

बड़ी मामी और नई मामी अपने रूम में थी

फिर क्या था एलीना जैसे ही मेरी तरफ झपटी मैं भागने लगा विदू और वँया को कुछ समझ नही आया कि एलीना मुझे दौड़ा क्यूँ रही है जैसे ही एलीना मेरे पास आई मैने एक बार फिर उसकी गान्ड पे चपत लगा दिया इस बार विदू और वँया मुझे यह करते हुए देख ली फिर मैं रुक गया एलीना मुझे मारने लगी

दिलीप- अब रूको भी कितना गुदगुदी करोगी

एलीना- मैं गुदगुदी कर रही हूंबेशरम कही के

दिलीप- अच्छा अब नही करूँगा

विदू- आज कल आपको हो क्या गया है

वँया- मस्ती सूझती रहती है

[फिर हम सबने खाना खाया आज मैं ध्यान दिया कि बड़ी मामी मुझसे बात करते वक़्त नज़रे चुरा रही थी

ऐसे ही पूरा दिन बीत गया

 
Back
Top