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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना
अपडेट 145
मैं सुबह में उठा तय्यार होके नीचे गया
बड़ी नानी बड़ी मामी किरण मासी छोटी मामी मौसी की बेटी सबका आशीर्वाद लिया
अब बारी थी मेरी बहनो की
विदू तो बड़ी मामी के साथ किचन में थी
मैं अरुणा दी के रूम में आ गया
अरुणा- बिल्कुल भी डरना मत सब सोच समझके लिखना
दिलीप- जी अब आप आशीर्वाद दीजिए
अरुणा- मारूँगी मैं क्या तुझसे 10 साल बड़ी हूँ
दिलीप- मैं तो आशीर्वाद लेके रहूँगा
अरुणा- लेके तो दिखा
[मेघा दी और सुनीता दी हंस रही थी अवनी दूसरी तरफ मुँह किए हुई थी]
अरुणा- समझ गयी बता क्या चाहिए
दिलीप- विदू को यहाँ पे लेके आओ
अरुणा- हॉल में चाचा जी बैठे हैं
दिलीप- आप जाती हो कि पैर छुऊ
अरुणा- आजा तुझे आशीर्वाद देती हूँ
दिलीप- [मेरा तो पोपट हो गया अब मेरी जुड़वा बहने]
मेघा दी सुनीता दी अगर अरुणा दी विदू को लेके यहाँ पे नही आई
तो मैं आप दोनो का आशीर्वाद ज़रूर लूँगा
मेघा- अरुणा दी चलो ना प्लीज़
अरुणा- तुम दोनो भी शुरू हो गयी
सुनीता- आप चलेंगी कि मैं बताऊ
अरुणा- चल रही हूँ ना और दिलीप के बच्चे तुझे तो देख लूँगी
[फिर सब रूम से बाहर चली गयी
थोड़ी देर बाद विदू रूम में आ गई अकेली
दिलीप- आज आप कल से ज़्यादा खूबसूरत लग रही हैं
विदू- आप को देर हो रही है
दिलीप- अभी बहुत टाइम है
विदू- मैं नाश्ते के बारे में कह रही हूँ
[मैं विदू को अपनी बाहो में ले लिया विदू मेरी बाहो में सिमट ती चली गयी]
मैं विदू के गले लगा हुआ था
विदू- आप फर्स्ट आयंगे ना
दिलीप- यह आप फर्स्ट आने के पीछे क्यूँ पड़ी हैं
विदू- वो इसलिए मेरे पति देवजी की अगर आप फर्स्ट नही आए
तो मैं हमेशा अपने आपको कोसुन्गि
कि आप मेरी वजह से पढ़ाई नही कर पाए
दिलीप- तो आप चाहती हैं कि मैं आपके लिए फर्स्ट आऊँ
विदू- हां
[विदू इतना ही बोली थी कि बड़ी मामी रूम में आ गई
विदू एक झटके में मुझसे अलग हो गयी
बड़ी मामी- दामाद जी अपनी भावनाओ को कंट्रोल में रखिए
आपके ससुरजी आपको याद कर रहे हैं
दिलीप- मामी आप बहुत अच्छी हैं
बड़ी मामी- हां मैं जानती हूँ कि मैं बहुत अच्छी हूँ लेकिन उससे भी अच्छे आप हैं अब जाइए नीचे
[मैं नीचे आ गया बड़े मामा वोही बोले कि सोच समझके लिखना
और 2 4 टिप्स भी दिए
जो मैं किसी को भी नही बताउन्गा
फिर मैं नाश्ता किया
और वँया के साथ स्कूल आ गया
वँया अपने क्लासरूम में चली गयी
और मैं अपने क्लासरूम में आ गया
दीपा मुझे देख कर अपना मुँह फेर ली
आज मेरे बगल में अदिति बैठी थी
मैं रवि के पास गया
दिलीप- तैयारी कैसी रही
रवि- ठीक ही थी पास तो हो ही जाउन्गा तू अपना सुना
दिलीप- देखते हैं क्या होता है
[फिर मैं अपनी जगह पे आके बैठ गया]
[सब लड़के आए तो थे एग्ज़ॅम देने लेकिन सबकी नज़र अदिति पे थी
मुझे अदिति के साथ बैठते देख सब की फॅट गयी
अदिति- हेलो मैं अदिति
[मेरी तरफ हाथ आगे बढ़ाई]
दिलीप- मैं दिलीप
[मैं अदिति से हाथ मिलके कहा]
अदिति- मैने सुना है आप हर साल सेकेंड आते हैं
दिलीप- जी आता हूँ
अदिति- आप मेरी मदद करेंगे
दिलीप- कैसी मदद
अदिति- जी वो मेरे घर में किसी की डेत हो गयी थी इसी लिए मैं पढ़ नही पाई
दिलीप- तो आप चाहती हैं कि मैं अपना पेपर आपको दिखाऊ और आप कॉपी करे
अदिति- मैं बस कह रही हूँ कि आप मुझे सिर्फ़ कुछ ही क्वेस्चन के आन्सर बता दे
दिलीप- [मैं अदिति को घूर्ने लगा
लेकिन मेरा क्या जाता है मदद करने में
वैसे भी वो कह रही है कि उसके घर में कोई मर गया था
लेकिन यह तो ग़लत होगा
आइडिया]
मैं आपको सिर्फ़ दस मिनट अपना पेपर दिखाउन्गा
अदिति कुछ सोचने लगी
अदिति- ठीक है
दिलीप- [पहला पेपर इंग्लीश का था
जो मेरा फॅवुरेट था
थोड़ी देर बाद पेपर शुरू हो गया
मेरे पास 2 घंटा था
1 घंटा 40 मिनट में ही मैं पूरा पेपर लिख डाला
फिर मैं अपना पेपर अदिति की तरफ कर दिया
10 मिनट में अदिति 3 आन्सर ही लिख पाई
फिर मैं अपने पेपर को देखने लगा
कही कुछ छूट तो नही गया
लेकिन सब कुछ सही था
वँया के साथ पढ़ाई करने का मुझे बहुत फ़ायदा हुआ
हर चॅप्टर को पूरी तरह से समझा
मैं तो अपनी तरफ से कोशिश ही कर सकता था
बाकी तो मेरी किस्मत की बात थी
मैं पेपर सब्मिट करके बाहर आ गया
वँया मेरा वेट कर रही थी
हम दोनो घर की तरफ आने लगे
वँया- कैसा गया पेपर
दिलीप- 99 मार्क्स मिलेंगे इंग्लीश में
वँया- 100 क्यूँ नही
दिलीप- एक हॅंडराइटिंग का कटेगा
हम हँसने लगे
फिर मैं और वँया घर पहुँचे
बड़ी मामी मुझसे कुछ कहना चाहती थी
मैं बिना ध्यान दिए जल्दी से अरुणा दी के रूम में गया
वहाँ कोई नही था
मैं उपर का सारा रूम में देखा कोई नही था
मैं दौड़के नीचे आया
सब किचन में थी
दिलीप- मामी सब लोग कहाँ हैं
बड़ी मामी- वापस शहेर चले गये
[इतना सुनना था कि मेरा दिमाग़ घूम गया
आज फिर से विदू मुझसे बिना मिले चली गयी]
बड़ी मामी- विद्या को भी तो पेपर देना है
दिलीप- मुझे पता है मामी आप चिंता मत करो
यह कहके मैं अपने रूम में आ गया
अब मुझे समझ में आया कि कल विदू क्यूँ कह रही थी रोना मत
मुझसे ज़्यादा तो विदू रो रही होगी
छोटा मैं हूँ उनसे
लेकिन बच्ची वो बन जाती हैं
मन किया कि एक बार फोन कर लूं
लेकिन मेरी आवाज़ सुनके पता नही कितना रोती
तीन पेपर्स लगातार थे
बाकी एक दिन बीच करके
मैं फिरसे पढ़ाई करने लगा
आँखो से आँसू तो निकल ही रहे थे
दोपहर का खाना ख़ाके फिर से पढ़ाई करने लगा
अच्छा हुआ आज वँया मेरे रूम में नही आई
ऐसे ही पढ़ाई करते हुए रात हो गई
फिर मैं सो गया..
अपडेट 145ए
दिलीप- सुबह में उठा जो करता हूँ वोही किया कसरत करके पहुँचा घर
थोड़ी देर पढ़ाई किया
फिर वँया के साथ स्कूल आ गया
आज भी अदिति मेरे साथ बैठी थी
अदिति- कल के लिए थॅंक यू
आपकी वजह से मैं फैल नही होंगी
दिलीप- कोई बात नही
वैसे आप किसके यहाँ आई हैं
अदिति- सरपंच जी मेरे मामा हैं
दिलीप- अच्छा तो आप सरपंच जी की भांजी हैं
[सरपंच के यहाँ कौन मर गया छोड़ो ना मुझे क्या
वैसे मेरी आदत तो नही है किसी बात को छोड़ने की लेकिन क्या करे
फर्स्ट जो आना है
दुनिया जाए माँ चुदाने]
[मैने ध्यान दिया कि दीपा मुझे घूर रही थी
कल भी मुझे घूर रही थी लेकिन मैं ध्यान नही दिया
थोड़ी देर बाद पेपर शुरू हो गया
पेपर भी कौनसा था हिन्दी का
फिर भी 15 मिनट पहले ही ख़तम कर दिया
और अपना पेपर अदिति को दे दिया
10 मिनट में ही अदिति
मुझे मेरा पेपर वापस कर दी
एक बात जिसपर मेरा ध्यान गया वो यह की अदिति मेरे तीन आन्सर के अलावा और कुछ लिखी ही नही थी
मैं अपना पेपर सब्मिट करके जैसे ही बाहर आया
दीपा मेरा हाथ पकड़ ली और मुझे कोने में ले गयी
जहाँ पे कोई नही था
मैं दीपा के हाथ से अपना हाथ छुड़ाया
दिलीप- क्या है
दीपा- तुम तो मेरी तरफ देखते भी नही हो
दिलीप- तुम्हारा मतलब क्या है
और देखो मैं अभी सिर्फ़ पढ़ाई पे ध्यान दे रहा हूँ
अगर कोई ऐसी बात है जिससे मेरा दिमाग़ खराब हो
तो एग्ज़ॅम के बाद बोलना
समझी अब हटो सामने से
फिर मैं स्कूल के बाहर आ गया
क्या करू कोई और मौका रहता तो कुछ कर भी लेता
लेकिन फर्स्ट आना है अपनी विदू के लिए
फिर मैं वँया के साथ घर की तरफ जाने लगा
वँया- आज तुम्हारे रूम में पढ़ने आसक्ती हूँ
दिलीप- पूछ क्यूँ रही हो
और वैसे तुम्हारा पेपर कैसा गया
वँया- एक दम बढ़िया
मेरी फॅवुरेट हिन्दी सबसे अच्छी
दिलीप- क्या लगता है परसो कुछ कर पाएँगे मैथ का पेपर है
वँया- हमने मेहनत की है और हमारा मैयत का पेपर भी बढ़िया ही जाएगा
तुम अपना दिमाग़ शांत रखो समझे
दिलीप- वो तो रखूँगा ही
वैसे तुम बड़े मामा से बात क्यूँ करने लगी
वँया- क्यूँ का क्या मतलब मेरे पिताजी हैं
[बेवकूफ़ जबसे तुम्हारा सपना देखी हूँ पागल सी हो गयी हूँ तुम्हे जब नही देखती हूँ तो डर लगने लगता है
अब तुमसे कभी नाराज़ नही होउंगी
तुम्हे हमेशा खुश रखूँगी
तुम्हे कुछ नही होने दूँगी]
दिलीप- वँया पता नही क्या सोच रही थी
हम घर पहुँच चुके थे और वो खोई हुई थी
वँया वँया वँया
मैने वँया को चींटी काट लिया
वँया- क्या कर रहे हो
दिलीप- हम घर पहुँच गये हैं और तुम खोई हुई हो
[वँया मुस्कुरा कर बड़ी मामी के रूम में चली गयी
मैं बड़ी नानी के रूम में आ गया
थोड़ी देर बड़ी नानी के साथ बात किया
फिर किरण मौसी के साथ बात किया
किरण मासी मेरे सामने खुश रहने का दिखावा करती हैं
मैं अपने रूम में आ गया
फ्रेश होके पढ़ाई करने लगा
कोई गेट नॉक करने लगा
मैने जाके गेट खोला सामने वँया और बड़ी मामी खड़ी थी
बड़ी मामी के हाथो में 2 ग्लास था
जिसमें दूध था
बड़ी मामी- तुम भी पियो और इसको भी पीलाओ
मेरी बात तो यह सुनती नही है
[मैं दूध पी लिया बड़ी मामी मेरा ग्लास लेके चली गयी
दिलीप- दूध पीयो
वँया- नही पीउँगी
[अपने हाथ से पीलाओ ना]
दिलीप- पीओ[मैं आँख दिखाया]
वँया- नही पीउँगी नही पीउँगी नही पीउँगी
दिलीप- मेरे हाथ से
वँया- नही
[एक बार और बोल दो]
दिलीप- मैने वँया के मुँह पे ग्लास लगा दिया
वँया दूध गाटा गट पीने लगी
[यह भी बच्ची ही है]
वँया पूरा दूध पे गयी
फिर हम पढ़ाई करने लगे
दोपहर का खाना ख़ाके मैं नई मामी के रूम में चला गया
1 घंटा पढ़ाई करके अपने रूम में आ गया
दिन ऐसे ही वँया के साथ पढ़ाई करने में बीत गया
फिर मैं सो गया.,
अपडेट 146
दिलीप- अगला दिन भी सिर्फ़ पढ़ाई में बीत गया
आज मैथ का पेपर था
कसरत करके मैं घर आ गया
थोड़ी देर बाद मैं और वँया स्कूल पहुँचे
वँया अपने क्लास में चली गयी
और मैं अपने क्लास में आ गया
मेरी बेंच पे अदिति नही थी
मैं रवि से बात करके बैठ गया
थोड़ी देर बाद अदिति भी आ गई
पसीने से तर बतर
थोड़ी देर बाद पेपर शुरू हो गया
मुश्किल था लेकिन मैने पूरा लिख डाला
ठीक 10 मिनट पहले
फिर मैने अपना पेपर अदिति की तरफ कर दिया
10 मिनट तक अदिति मेरे पेपर में देख कर लिखती रही
आज भी वो मेरे पेपर से ही लिखी अपना कुछ नही लिखी
मुझे शक होने लगा कि यह तो हद हो गयी
अगर अदिति मेरे पेपर में देख कर भी लिखले तब भी वो पास नही होगी
फिर वो ऐसा क्यूँ कर रही है
[एक तो मोबाइल भी नही है कम्से कम रेकॉर्ड तो कर लेता]
मैने अदिति से अपना पेपर लिया और टीचर को सब्मिट कर दिया
ना मैं अदिति का पीछा कर सकता था
और ना मैं अभी कुछ करना चाहता था
एक ही रास्ता था
रीना मेडम वोही मेरी मदद कर सकती थी
मैं बाहर आया वँया के पास
दिलीप- वँया तुम चलो मैं आता हूँ
वँया- तुम भी चलो ना
दिलीप- मेडम से मिलना है
वँया- कौन मेडम
दिलीप- मेरा मतलब है प्रिन्सिपल से
वँया- जल्दी आना
[फिर वँया चली गयी]
मैं पहुँचा रीमा मेडम के ऑफीस का गेट नॉक किया
र्म- आजाईए
दिलीप- मैं अंदर गया
[रीमा मेडम बिल्कुल बदल गयी थी
अब उनकी आँखो पे चश्मा लग गया था
लेकिन आज भी खूबसूरत दिखती हैं
मेडम एक नज़र मुझे देख कर पीसी पे हाथ चलाने लगी
मैं बैठ गया
र्म- दिलीप कैसे हो
दिलीप- ठीक हूँ मेडम
आप कैसी हैं
और आपके पति कैसे हैं
रीमा मेडम- मैं तो ठीक हूँ
पढ़ाई कर रहे हो कि नही
दिलीप- जी आपसे एक बात कहनी है
रीमा मेडम- कहो
दिलीप- मेरे साथ में एक लड़की बैठती है जब पेपर शुरू होता है तो वो कुछ नही लिखती है
जब मैं अपना पूरा पेपर लिख लेता हूँ तो वो सिर्फ़ 10 मिनट मेरे पेपर में देख कर कॉपी करती है
3 या 4 आन्सर लिखती है
रीमा मेडम- तुम कहना क्या चाहते हो
दिलीप- मैं सिर्फ़ यह कहना चाहता हूँ कि आप उसके पेपर को चेक कीजिए
रींमा मेडम- तुम्हारा मतलब यह है कि अगर उसके पेपर में 3 या 4 आन्सर से ज़्यादा लिखा मिला इसका मतलब
दिलीप- आप जो सोच रही हैं वोही सच होगा
रीमा मेडम- ठीक है मैं चेक कर लूँगी उस लड़की का नाम बता दो
दिलीप- अदिति है सरपंच जी की भांजी ठीक है अब मैं चलता हूँ आप अपना ख्याल रखिएगा
रीमा मेडम- तुम भी अपना ख्याल रखना
[फिर मैं स्कूल से घर पहुँचा
सबसे मिलके अपने रूम में आ गया
थोड़ी देर बाद वँया भी आ गई
हम मिलके पढ़ाई करने लगे
शाम में
वँया- प्रिन्सिपल से मिलने क्यूँ गये थे
दिलीप- कुछ काम था
वँया- क्या काम था
दिलीप- [मुझे तो पता था कि तुम मुझसे यह सवाल ज़रूर पुछोगी]
वो कुछ स्टूडेंट एग्ज़ॅम में चीटिंग कर रहे हैं
वोही बताने मेडम से मिलने गया था
वँया- क्या बोली मेडम
दिलीप- यही कि अब वो टीचर्स को बोलेंगी कि ज़्यादा स्ट्रिक्ट रहा कीजिए
वँया- वैसे आज कमाल हो गया तुम तो सुधर गये
दिलीप- चुप चुहिया सुधर गये का क्या मतलब मैं सबसे झगड़ा करता हूँ
वँया- तुम हो ही झगड़ालू बैल तुम्हारा बस चले तो तुम सारी दुनिया में झगड़ा फैला दो
दिलीप- और तुम हंसते हुए आदमी को भी रुला दो उसके कान में चुहिया के तरह चीखके
वँया- रूको अभी पिताजी को बोलती हूँ
दिलीप- बोल दो मैं भी बड़ी मामी को बोल दूँगा
वँया- मैं तो मज़ाक कर रही थी
दिलीप- तो मैं कौनसा सीरीयस था
[ऐसे ही वँया के साथ पढ़ाई के बीच लड़ते झगड़ते पूरा दिन बीत गया
फिर रात में मैं सबके साथ खाना ख़ाके सो गया..,
अपडेट 146अ
नेक्स्ट डे
दिलीप- सुबह में मैं कसरत करके घर पहुँचा
वँया के साथ स्कूल आ गया
वँया अपने क्लास में चली गयी
मैं जल्दी से प्रिन्सिपल ऑफीस में बिना नॉक किए चला गया
मेडम कही खोई हुई थी
मैं मेडम को हिलाया
रीमा मेडम- दिलीप तुम कब आए
दिलीप- जब आप खोई हुई थी कुछ पता चला
रीमा मेडम- बैठो
[मैं बैठ गया]
दिलीप मैं अदिति के पेपर चेक की हूँ और तुम्हारे पेपर्स भी
दिलीप- मैं कुछ समझा नही
रीमा मेडम- समझाती हूँ .....तुम्हारे कहने पे मैं अदिति के पेपर चेक की
हर क्वेस्चन का आन्सर लिखा हुआ है उसके पेपर्स पे
दिलीप- यह आप क्या बोल रही हैं ऐसा हो ही नही सकता
रीमा मेडम- मुझे भी यही शक हुआ इसी लिए मैं तुम्हारे पेपर्स भी चेक की
दोनो पेपर्स में सब आन्सर्स सेम थे
दिलीप- पर ऐसा कैसे हो गया वो 3 या 4 आन्सर ही लिखती थी
रीमा मेडम- मैं एग्ज़ॅम हेड को बोल चुकी हूँ सब आन्सर शीट एग्ज़ॅम ख़तम होने के 10 मिनट में मुझे मेरे ऑफीस में चाहिए
पहले तो वो बहाने बनाने लगा लेकिन मैं जब उसको बोली आशा देवी ने कहा है तब जाके वो माना
दिलीप- मैं जा रहा हूँ क्लास में मुसीबत मेरा पीछा छोड़ती ही नही है
[सब समझ रहा हूँ वो रंडी अदिति एग्ज़ॅम हेड भडवे से चुदवा के उसको खुश की होगी
एग्ज़ॅम हेड भडवा मेरा आन्सर शीट अदिति को देके उसको खुश किया होगा वो पूरा कॉपी कर ली होगी
कोई शक करेगा तो पता चलेगा कि दोनो एक साथ बैठते थे
दोनो में से कॉन कॉपी किया किसी को पता नही चलेगा
यहाँ मैं फर्स्ट आने के लिए दिन रात मेहनत कर रहा हूँ
मुझे अपनी विदू की आँखो में खुशी देखनी है
उस रंडी को कॉपी करना था
तो इतना करती जितने में वो पास हो जाए
एग्ज़ॅम ख़तम होने दे गान्ड मार लूँगा
और एग्ज़ॅम हेड को देख लूँगा
आज पहली बार किसी लड़की से बदला लेने का मन कर रहा था
वो भी घटिया बदला
उसको ब्लॅकमेल करके चोदने का
इतना गुस्सा आ रहा था
आँख बंद करके विदू को याद करने लगा
मैं अपने आपको समझाने लगा
मैं विदू से प्यार करता हूँ
मैं कुछ ग़लत नही करूँगा]
दिलीप- अब मैं चलता हूँ
रीमा मेडम- तुम फ़िक़र मत करो मैं अब पूरा ध्यान रखूँगी
[फिर मैं अपने क्लास में आ गया
अदिति मुझे देख कर मुस्कुराने लगी
मेरा तो खून खौल उठा
मैं रवि के पास गया
दिलीप- आज से मैं यहाँ पे बैठूँगा
तू जाके मेरी जगह पे बैठ
रवि- क्या बात कर रहा है कहीं मज़ाक तो नही कर रहा है
दिलीप- जा ना यार
[रवि बंदर की तेज़ी से मेरी जगह पे जाके बैठ गया
अदिति की शकल देखने लायक थी
मैं रवि की जगह पे बैठ गया
थोड़ी देर बाद पेपर शुरू हो गया
मैं अपना आराम से पूरे मज़े के साथ पेपर लिखने लगा
मेरे साथ जो लड़का बैठा हुआ था
वो मेरे लिखने की स्पीड देख कर दंग रह गया
सिर्फ़ 1घंटा 30 मिनट में मैं पूरा पेपर लिख डाला
एक बार चेक किया
टीचर वोही था 10थ का एग्ज़ॅम हेड
मैं पेपर सब्मिट कर दिया
ए- जाके अपनी जगह पे बैठो
टाइम ख़तम होने के बाद सारे स्टूडेंट बाहर जाएँगे
दिलीप- [घुरके] एक बार फिर से बोलिए
ए- जाओ
दिलीप- [मैं क्लास से बाहर आके एग्ज़ॅम हेड के ऑफीस में आ गया
और एक अच्छी सी जगह देख कर छुप गया
शायद आज मेरी किस्मत चमक जाए
इस के खिलाफ कोई सबूत मिल जाए
[इसी लिए मैं आज अपनी पूरी स्पीड के साथ अपना पेपर लिखा था
अब रीमा मेडम तो कह चुकी थी
एग्ज़ॅम हेड को
लेकिन इस एग्ज़ॅम हेड टाइप के लोगो के लिए चुदाई सबसे ज़रूरी है
हम स्टूडेंट्स के फ्यूचर से ज़्यादा ज़रूरी..,.
अपडेट 147
दिलीप- मैं आधे घंटे तक छुप्के इंतेज़ार करता रहा लेकिन नही अदिति आई
और ना एग्ज़ॅम हेड
मैं यहाँ पे ज़्यादा रुक भी नही सकता था
वँया मेरे बिना घर नही जाएगी
मैं ऑफीस से बाहर आ गया
वँया पेड़ के नीचे खड़ी होके मेरा इंतेज़ार कर रही थी
मैं वँया के पास गया
वँया- कल से लेट आए तो मैं अकेली चली जाउन्गी
दिलीप- कल से बिल्कुल भी लेट नही करूँगा अब चलो वैसे आज का पेपर कैसा गया
वँया- ठीक ही था तुम्हारा कैसा गया
दिलीप- मेरा भी ठीक ही गया
[फिर हम दोनो घर पहुँचे
हमारा अगला पेपर परसो था
मतलब तय्यरी करने के लिए दो दिन
दो दिन में मैने और वँया ने खूब पढ़ाई की
इतनी पढ़ाई हमने एक दिन में तो कभी नही किया था
मैं सुबह जल्दी स्कूल आ गया
वँया की वजह से
मैं ऐसे ही अपनी बेंच पे बैठ हुआ था
एक छोटा बच्चा 2 या 3क्लास का मेरे पास आया
वो मुझे एक कागज देके चला गया
मेरे साथ जो स्टूडेंट बैठता था
वो अभी तक नही आया था
मैं वो कागज खोलके देखा
लिखा था
मुझसे स्टोर रूम में आके मिलो
अदिति
मेरा तो खून जल गया
अदिति पढ़के
मैने वो कागज फाड़ कर फेंक दिया
5 मिनट बाद एक और लड़का मुझे कागज देके चला गया
प्लीज़ मुझसे आके मिलोतुमको तुम्हारी माँ की कसम]
मैं पैर पटकते हुए स्टोर रूम पे पहुँचा
गेट खोलके अंदर चला गया
गेट के पीछे से ही अदिति निकली मन किया मुँह तोड़ दूं
दिलीप- [दाँत पीसके] क्या है
अदिति- तुम मेरे साथ क्यूँ नही बैठ रहे हो
दिलीप- क्यूँ बैठू तुम्हारे साथ
अदिति- दिलीप मैं फैल हो जाउन्गी
दिलीप- रवि है ना
अदिति- वो तो खुद मुश्किल से अपना पेपर लिख पाता है मुझे तो देखने को भी नही मिलता
दिलीप- तो मैं क्या करूँ
अदिति- लेकिन तुम मेरे साथ क्यूँ नही बैठ रहे हो
दिलीप- तुम यह बताओ तुम गर्ल्स रूम में क्यूँ नही बैठती
अदिति- वहाँ मुझे कोई अपना पेपर नही दिखाएगी देखो अगर तुम मेरे साथ नही बैठे तो मैं फैल हो जाउन्गी
दिलीप- तो हो जाओ
[मेरी बात सुनके अदिति आँसू बहाने लगी लेकिन मैं इसके झाँसे में अब नही आने वाला था]
कितनी घटिया लड़की हो तुम मुझे ही धोखा दे रही हो
अदिति- क्या किया मैने
दिलीप- [बेशर्मी से बोल भी रही है क्या किया मैने]
एग्ज़ॅम हेड से चुदवा के मेरे आन्सर शीट की कॉपी करके मुझे धोखा नही दे रही हो
[मेरी बात सुनके अदिति को साँप सूंघ गया]
मुझे फरक नही पड़ता अगर तुम पास होने लायक कॉपी करती
लेकिन तुम इतनी घटिया निकली
कि बिना पढ़ाई किए तुम चीटिंग करके फर्स्ट आना चाहती हो
मैं क्यूँ करूँ तुम्हारी मदद
मैं 2 महीने से लगातार पढ़ रहा हूँ फर्स्ट आने के लिए
और तुम मुझे धोखा दे रही हो
[मेरी बात अदिति अपनी नज़रे झुकाके सुन रही थी]
तुम्हारे पास यह जो शरीर है ना जिससे तुम मर्दो को अपने जाल में फाँसती हो
अगर तुम मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी हो जाओ
तो मेरा लंड 1 इंच भी खड़ा नही होगा
यह सब करने से ज़्यादा अगर पढ़ाई करती तो कम से कम पास तो हो जाती
[अदिति नज़रे नीची करके मेरी बात सुनती रही
मैं अपने क्लास में आ गया
अभी भी टाइम था पेपर शुरू होने में
मुझे पता था अगर मैं अदिति को बोलता कि मैं तुम्हे चोदना चाहता हूँ
तो वो झट से मान जाती
लेकिन साला दिल है कि मानता नही
समाज सेवा करने का तो मुझे शौक हो गया है
पहले सरपंच की बेटी
फिर दीपा
अब अदिति मतलब तीनो मुझे मिल जाती
सॉरी तीनो की मिल जाती
अगर मैं इन तीनो की लेता
तो मुझमे और एग्ज़ॅम हेड में कोई फरक ही नही रहता
यह तो सौदा हुआ
जैसे सरला उसपे रंडी पना जचता है
यह मैं क्या सोच रहा हूँ
मुझे अभी सिर्फ़ पढ़ाई पे ध्यान देना है
थोड़ी देर बाद अदिति आ गई
और अपनी जगह पे जाके बैठ गये
फिर पेपर शुरू हो गया
मैं अपना मज़े से पेपर लिखने लगा
आज कल पेपर लिखने में बड़ा मज़ा आता है मुझे
मज़ा आएगा भी क्यूँ नही
जब आप इतनी शिद्दत से पढ़ाई करेंगे
और वँया जैसी लड़की आपके साथ पढ़ाई करे
और एक एक वर्ड को आपके दिमाग़ में ठूंस दे
तो पेपर लिखने में डबल मज़ा तो आएगा ही...
अपडेट 147
दिलीप- ऐसे ही मेरे सारे पेपर आते मैं लिखता गया
इसी बीच अदिति गर्ल्स क्लास में जाके अपना पेपर लिखने लगी
मेरी बहनो के एग्ज़ॅम भी शुरू हो गये थे
विदू की पढ़ाई का यह आखरी साल था
अरुणा दी को 1 और साल लगने वाला था
और मेरी जुड़वा बहने तो अभी बहुत पढ़ने वाली थी
जिस दिन मेरा पेपर होता उसी दिन विदू मुझसे बात करती
वँया अपनी पढ़ाई और मेरी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थी
रोज दिन स्कूल जाने से पहले मैं सबका आशीर्वाद ज़रूर लेता
मुझे तो पूरा यकीन था कि मैं फर्स्ट आउन्गा
और आज मैं अपना लास्ट पेपर देके बाहर आ गया
वँया के पास
15 दिन बाद रिज़ल्ट आने वाला था
[विदू को 1 और हफ़्ता लगने वाला था]
वँया- खुश तो बहुत होगे आज तुम
दिलीप- कोई शक
वँया- मूवी देखने ले चलो ना
दिलीप- मैं जानता था कि आज डायलॉग इसी लिए मार रही हो
लेकिन मैं पहले बोल देता हूँ
रोमॅंटिक और ड्रामा फिल्म नही देखूँगा
वँया- तुम जो फिल्म बोलॉगे वोही देखूँगी
[मुझे तो सिर्फ़ तुम्हे देखना है तुम अपना फिल्म देखना]
दिलीप- ठीक है मैं बड़ी नानी से पूछ लूँगा
वँया- मैं पिताजी को बोल चुकी हूँ
दिलीप- [हंसते हुए] वैसे तुम बड़े मामा के पास गयी होगी और क्या बोली होगी
[मैं अपने गाल पे एक उंगली रख लिया और अपने शरीर को हिलाते हुए]
पिताजी मैं फिल्म देखने जाउ
[यह सुनके वँया नीचे बैठ गयी और एक पत्थर उठा ली]
वँया- एक बार और बोलना ज़रा
दिलीप- तुम्हारे पिछे चूहा
[यह सुनके वँया मम्मी मम्मी करते हुए मेरे गले लग गयी
शूकर है रोड पे कोई नही था]
चूहा चला गया
[वँया झटके से मुझसे अलग हुई और तेज तेज चलने लगी
थोड़ी देर में हम घर पहुँच गये]
[बड़ी नानी किचन में थी]
मैं सीधा जाके बड़ी नानी के गले लग गया
दिलीप- मेरी प्यारी बड़ी नानी
बड़ी नानी- मेरा प्यारा बेटा जा मुँह हाथ धो ले आज मैं तुझे अपने हाथो से खिलाउन्गी
[मैं जैसे ही मुड़ा
बड़ी मामी- मैं तो कोई नही हूँ मुझसे तो बात भी नही करता है आपका बेटा
[यह सुनके मैं बड़ी मामी के गले लग गया]
बस बस इतना प्यार काफ़ी है वरना खाना जल जाएगा
[मैं अपने रूम में आ गया किरण मौसी कही दिख नही रही थी
शायद अपने रूम में होंगी
मैं नीचे आया और किरण मौसी के रूम में चला गया
किरण मौसी रूम में नही थी
शायद बाथरूम में थी
मैं रूम के बाहर आया ही था कि किरण मौसी का फोन बजने लगा
पहले सोचा रहने देता हूँ
फिर फोन मैं अपने कान में लगा लिया
लड़की- क्यूँ री रंडी और कितने दिन रहने का इरादा है वहाँ इतने दिन से बोल रही है
आजाउन्गी आजाउन्गी कही अपने भाई से गान्ड तो नही मरवा रही है
अगर तुझे चुदवाने का इतना ही शौक है तो यही आजा तुझे मैं एक से एक लंड दिलवाउंगी
या फिर तू बेल्ट की मार भूल गयी है
[मैने सोचा कि कोई रॉंग नंबर है जैसे मैं फोन कट करने वाला था
लड़की- सुन किरण भोसड़ी तेरे भोस्डे में इतनी खुजली हो रही है तो जल्दी से यहाँ आजा तेरी सारी खुजली मिटवा दूँगी
[किरण मौसी का नाम सुनते ही मेरी आँखो में खून उतर आया
एक तरफ आँसू बह रहे थे मेरी आँखो से दूसरी तरफ एक आग सी लग गयी थी दिल में
आज तक ऐसी गाली मैं नही सुना था
और आज कोई मेरी किरण मौसी ऐसी गाली दे रही थी
इसको तो नही छोड़ूँगा काश एग्ज़ॅम के पहले इसका पता चल गया होता
उसी दिन जाके इसको बताता कि मेरी मासी के साथ ऐसा करने का क्या अंजाम हो सकता है
रुक तू रुक मैं अपने आँसू पोछा
लड़की- रंडी कुछ बोल क्यूँ नही रही है
[मैने मोबाइल को दीवार में दे मारा मोबाइल टुकड़े टुकड़े हो गया]
तभी किरण मौसी बाथरूम से आ गई
मैने किरण मौसी का हाथ पकड़ा और अपने रूम की तरफ आने लगा
[किरण मौसी तो कुछ समझ ही नही पाई
बड़ी नानी- दिलीप कहाँ जा रहा है
दिलीप- मैं बिना पीछे देखे] बड़ी नानी बस दो मिनट में आता हूँ
फिर मैं अपने रूम में आ गया गेट लॉक किया
अपनी अलमारी से एक चाकू निकाला और अपनी गर्दन पे लगा लिया
[चाकू मेरी गर्दन पे देख कर किरण मौसी की चीख निकल गयी.,,
अपडेट 148
दिलीप- मासी अभी एक फोन आया था
उसमें एक लड़की इतनी गंदी गंदी गाली दे रही थी
और पता है वो गाली किसको दे रही थी
मेरी किरण मासी को
अब आप बताइए कि मैं अपनी गर्दन काट लूँ
किरण मौसी- नही दिलीप चाकू नीचे रक्खो लग जाएगा
अपनी मासी की बात नही मानोगे
दिलीप- आप मुझे अपनी कसम दे चुकी हैं कि मैं आपसे कुछ ना पुछु
अब आप बताइए मैं क्यूँ जिंदा रहूं मैं मर जाता हूँ
किरण मौसी- दिलीप प्लीज़ चाकू नीचे रक्खो कहीं लग गया तो भगवान के लिए चाकू छोड़ दो
दिलीप- अगर मेरी जगह आप रहती मेरी माँ को कोई ऐसी गाली देता तो क्या आप उनसे नही पूछती
आप मुझे तो बताएँगी नही मैं आपसे पूछ नही सकता इससे अच्छा क्या होगा कि मैं मर जाउ
आपकी कसम पूरी हो जाएगी
किरण मौसी- आग में झोंकती हूँ मैं ऐसी कसम को तुम चाकू छोड़ दो
मैं बताउन्गी तुमको सबकुछ बताउन्गी
[किरण मौसी घुटनो पे बैठके रोने लगी मुझसे भी अब बर्दाश्त नही हो रहा था किरण मौसी इतनी देर से रो रही थी
मैने चाकू अपने हाथ से छोड़ दिया और किरण मौसी के पास गया
किरण मौसी को उठाके बेड पे बिठा दिया
किरण मौसी थोड़ी देर तक रोती रही
फिर मेरे गाल पे एक थप्पड़ मार दी
किरण मौसी- क्या कर रहे थे अगर कुछ हो जाता तो मैं क्या मुँह दिखाती अपनी बहेन को
दिलीप- मैं अपनी माँ को क्या मुँह दिखाता एक घटिया लड़की आपको ऐसी गंदी गंदी गाली देती है
सामने आ जाए तो मार डालूँगा उसको
किरण मौसी- इसमें उसकी कोई ग़लती नही है
दिलीप- मुझे नही सुनना कि वो ग़लत है कि नही मुझे सिर्फ़ सच जानना है
किरण मौसी- बताती हूँ आज से 10 साल पहले मेरे पति इस दुनिया में नही रहे
मेरी जब शादी हुई थी तब मेरे पति की बहेन 5 साल की थी
यह मेरे पति की सौतेली बहेन थी
मेरे पति की सौतेली माँ मेरी ननद को जनम देते ही मर गयी थी
मेरी ननद के लिए मेरे पति ही उसके सबकुछ थे
मैं अपनी ननद को अपने सीने से लगाके पाली
मेरे पति मेरी ननद और मेरी दोनो बेटियाँ ही मेरी सबकुछ थी
आज से 10 साल पहले मेरे पति मज़ाक में ही कह बैठे
कि ठाकुर लोग तो शादी एक ही करते हैं
लेकिन उनकी बिन ब्याही बीविया सैकड़ों होती हैं
यह सुनके मैं हंस दी
लेकिन जब मुझे एहसास हुआ
कि मेरे पिताजी भी ठाकुर थे
तो मैं बहुत दुखी हो गयी
मैं अपने पति को बोली
मेरे पिताजी भी ठाकुर थे
लेकिन वो तो ऐसे नही थे
इस्पे मेरे पति बोले
तुम क्या अपने पिता को देखने गयी थी कि वो किसके साथ सोते हैं
इस बात पे मैं बहुत झगडी उनसेऔर आख़िर में मैं घर छोड़के जाने लगी
तभी मेरी ननद कामिनी स्कूल से वापस आ गई
मेरी दोनो बेटियाँ भी आ गई मेरे पति मुझे मनाने लगे
लेकिन मैं नही मानी और अपनी दोनो बेटियों को गाड़ी में बिठा कर गाड़ी अपने गाओं की तरफ बढ़ा दी
यह सब मेरी ननद देख रही थी
मुझे पता नही था कि मेरे पति मेरे पीछे दूसरी गाड़ी में आ रहे हैं
तबतक मैं आधे रास्ते ही पहुँची थी कि मुझे फोन आया कि मेरे पति का आक्सिडेंट हो गया
वो बोले कि घर आजाईए
मैं बोली कि उन्हे तो हॉस्पिटल में होना चाहिए
फिर फोन कट हो गया
मैं थोड़ी देर बाद अपने घर पहुँची
तब तक मैं विधवा हो चुकी थी
मेरी ननद कामिनी कमरे में अपने आप को बंद कर ली
मेरे बहुत मिन्नत करने के बाद वो गेट खोली
गेट खोलते ही वो मुझे थप्पड़ मार दी
और मुझे कहने लगी आपने मेरेभाई को मारा है
यह बात वो कयि बार कह गयी
मैं यह सोची भी नही कि मेरी दोनो बेटियाँ यह सब सुन रही हैं
मेरे पति का अंतिम संस्कार हो गया
मैने कामिनी को मनाने की बहुत कोशिश की
फिर मैं उसे अकेला छोड़ दी
5 साल तक वो मुझसे बात नही की
इसी बीच मेरी बेटियाँ मुझसे पूरी तरह से दूर हो गयी
कामिनी और अपनी दोनो बेटी की नफ़रत देख कर मैं भी सोचने लगी
कि मैं ही अपने पति के मौत की ज़िम्मेदार हूँ
दिलीप- और यह जो आपकी पीठ पे चोट के निशान हैं और वो गाली
किरण मौसी- यही मेरा प्रायश्चित है जब मुझसे बर्दाश्त नही हुआ मैने कामिनी से माफी माँगी
वो बोली अगर आप सच में चाहती हैं कि मैं आपको माफ़ कर दूं
तो आपके साथ मैं कुछ भी करूँ आप उफ़फ्फ़ तक नही करेंगी
और ना ही यह बात किसी को बताएँगी मैं अपनी दोनो बेटियो के लिए मान गई
दोनो नही तीनो कामिनी को भी मैं ही पाली थी
वो भी मेरी बेटी ही थी
उस दिन से कामिनी मुझे गाली देती है मुझे बेल्ट से मारती है
और मेरी दोनो बेटी मुझसे बात भी नही करती है आज 5 साल हो गये
किरण मौसी- यही है सच
दिलीप- मैं किरण मौसी के गले लग गया
[ मैं आपकी सब बात समझता हूँ लेकिन कामिनी जो आपके साथ कर रही है वो ग़लत है
अगर आपके पति के मौत की वजह आप हैं कामिनी आप को सज़ा देने के लिए
आपके साथ यह सब कर रही हैतो आप की इस हालत का ज़िम्मेदार मैं कामिनी को मानता हूँ
और इसकी सज़ा उसे मिलके रहेगी आप से सच्चे दिल से माफी माँगेगी
[कोई गेट नॉक करने लगा मैने चाकू छुपा दिया और किरण मौसी को बेड पे लिटा दिया और जाके गेट खोला
बड़ी नानी- 1 घंटा से खाना ला गए बैठी हूँ चल जल्दी खाना खा ले और किरण को भी बुला ले
दिलीप- बड़ी नानी वो मासी के सर में दर्द है हम यही खाना ले आते हैं
[फिर मैं और मासी खाना खा लिए
वँया भी मासी की तबीयत देख कर मूवी देखने का प्लान कॅन्सल कर दी
फिर किरण मौसी अपने रूम में चली गयी
मैं सोचने लगा कि आगे क्या करना है...