वँया- करुणा और काव्या नाम से ही लगता है बहुत सुशील और संस्कारी लड़की होगी लेकिन हैं दोनो एक नंबर की बेवकूफ़ मुँहफट और बदतमीज़ बुआ को हमेशा परेशान करती हैं पिताजी के अलावा किसी से भी सही तरीक़े से बात नही करती है एक दिन माँ से बहस करने लगी पिताजी बहुत गुस्सा हुए उस दिन से वो दोनो यहाँ नही आती है
दिलीप- लेकिन वो दोनो ऐसी क्यूँ हैं
वँया- मुझे नही पता किसी को भी नही पता
दिलीप- तुमसे बड़ी हैं या छोटी
वँया- क्यूँ मुझे परेशान कर रहे हो मेहेरबानी करके पढ़ाई करो
दिलीप- नही करूँगा पहले बताओ
वँया- तो सुनो
विद्या दी
अरुणा दी
प्रिया दी
करुणा
काव्या
मैं
अवन्तिका
प्रीति
मेघा
सुनीता
[वँया को ऐसे बोलते देख मुझे इतनी ज़ोर से हँसी आने लगी कुछ देर तक मैं अपनी हँसी दबाता रहा फिर एक ठहाके के साथ मैं हँसने लगा वँया मेरी हँसी देखके लाल पीली हो गयी फिर पता नही वँया को क्या हुआ वँया भी हँसने लगी लेकिन उसकी आँखो में आँसू देखके मैने हँसना बंद कर दिया]
दिलीप- रो क्यूँ रही हो
मैं तो मज़ाक कर रहा था
वँया- नही वो विद्या दी की याद आरहि थी मैं तुम्हारी बात का बुरी कभी नही मान सकती
दिलीप- [फिर मैं और वँया पढ़ाई करने में लग गये लेकिन मेरे दिमाग़ में एक बात नही बैठ रही थी वो यह कि करुणा और काव्या अपनी माँ को इतना परेशान क्यूँ करती हैं पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी मैने सोचा गाओं घूम लेता हूँ लेकिन फिर सोचा किरण मौसी से बात भी कर लूँगा और माफी भी माँग लूँगा
मैं पहुँचा किरण मौसी के रूम पे
गेट नॉक किया
किरण मौसी गेट खोलके मुझे देखने लगी
दिलीप- आपसे कुछ बात करनी थी
[मैं रूम के अंदर आगया किरण मौसी अभी भी मुझे देखे जा रही थी]
मुझे माफ़ कर दीजिए उस वक़्त के लिए
किरण मौसी- कोई बात नही मैं जानती हूँ तुम्हारी कोई ग़लती नही थी आओ बैठो
[मैं बैठ गया]
किरण मौसी--तुम तो बहुत बड़े हो गये हो मैं जानती हूँ कि मैं आज तक तुमसे कभी नही मिली तुम मुझे माफ़ करदो
दिलीप- मैं भी जानता हूँ कि आप बड़े मामा की वजह से मुझसे मिलने नही आती थी
किरण मौसी- बड़ी माँ तुम्हे बहुत प्यार करती हैं
दिलीप- करुणा दी और काव्या दी नही आई
[मैं जानबूझके यह सवाल पुच्छ रहा था]
किरण मौसी- वो दोनो अभी पढ़ाई में बिज़ी हैं
दिलीप- ठीक है फिर मैं उनसे एग्ज़ॅम के बाद मिलूँगा
[किरण मौसी कुछ परेशान दिखने लगी]
दिलीप- अब आप आराम कीजिए मैं जाता हूँ
किरण मौसी- ऐसा नही बोलते अगली बार बोलना कि जाके आता हूँ
दिलीप- [मैं रूम से बाहर आगया बाहर आके गेट बंद नही किया हल्का सा गेट खोलके देखने लगा मैने देखा कि किरण मौसी बेड पे लेटी हुई थी)
मैं अपने रूम में आगया
थोड़ी देर बाद कोई गेट नॉक करने लगा मैने जाके गेट खोला सामने बड़ी मामी दूध का गिलास लिए खड़ी थी
मैने दूध पी लिया बड़ी मामी वापस चली गयी
[किरण मौसी का रूम]
किरण मौसी बड़ी नानी की गोद में सर रख के रो रही थी
किरण मौसी- बड़ी माँ मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ होता है ना मुझे पति का सुख मिल सका और अब तो मेरी बेटियाँ भी मुझसे दूर होने लगी हैं
बड़ी नानी- किरण तू चिंता मत कर सब ठीक हो जाएगा
किरण मौसी- यह सब उसकी वजह से हो रहा है वो मेरी खुशियो का काल बनी हुई है
बड़ी नानी- मैं जानती हूँ तू रो मत सब ठीक हो जाएगा
दिलीप- रात के खाने का टाइम हो गया मैं नीचे गया सब बैठके खाना खा रहे थे मैं भी खाना खाने लगा
तभी मेरे सर में दर्द होने लगा मैने जल्दी से खाना खाया और अपने रूम में आके गेट लॉक कर दिया
मेरे सर में और तेज़ दर्द होने लगा फिर मैं बेहोश हो गया....
दिलीप- मैं नई मामी को इग्नोर किया और पहुँचा किताब लेके वँया के रूम में
वँया के साथ पढ़ाई करते हुए शाम हो गयी
मैं किताब साइड में रख दिया
दिलीप- वँया तुमसे एक बात करनी थी
वँया- हाँ बोलो
दिलीप- पहले मेरे रूम में चलो
[वँया बिना कुछ बोले मेरे साथ मेरे रूम में आ गई मैने गेट लॉक कर दिया] वो वो [कैसे कहूँ की बड़े मामा से बात करो]
वँया- क्या वो वो कर रहे हो बोलो ना
दिलीप- तुम पहले वादा करो कि तुम मुझसे नाराज़ नही होगी
वँया- सॉफ सॉफ बोलो डरा क्यूँ रहे हो
दिलीप- तुम बड़े मामा के पास जाके उनसे बात करोगी वँया गुस्सा मत हो ना
वँया- तुम जाओ यहाँ से
दिलीप- वँया शांत हो जाओ
वँया- तुम जाओगे कि नही यहाँ से
दिलीप- वँया बात को समझो
वँया- [रोते हुए] क्या समझू मेरी माँ की जिंदगी के सबसे बड़े दुख का कारण जो इंसान है मैं उसके पास चली जाउ उससे हंस हँसके बाते करू सिर्फ़ इसलिए कि वो मेरे पिता हैं अगर तुम पिताजी को इतना ही चाहते हो तो उनसे पूछो जाके कि कोई उनके दामाद से कहे कि मैं मर रहा हूँ मेरी बेटी से शादी कर लो उनका दामाद दूसरी शादी कर ले तो उनकी बेटी को कितनी तकलीफ़ होगी
दिलीप- मेरी तो समझ में ही नही आया कि वँया क्या बोल रही है लेकिन जब समझा तो वँया पे बहुत गुस्सा आने लगा]
वँया यह क्या बकवास कर रही हो
वँया- तुम क्यूँ गुस्सा हो रहे हो अरे हां मैं तो भूल ही गयी पिताजी के होने वाले दामाद तो तुम ही हो
तुम ऐसा करोगे तो विद्या दी को तकलीफ़ होगी है ना
दिलीप- वँया बस करो
वँया- क्यूँ बस करू विद्या दी को अगर ऐसी तकलीफ़ हो यह सोचके तुम इतना गुस्सा हो रहे हो
मेरी माँ इस तकलीफ़ के साथ जी रही है
तुम जब मेरी माँ को देखते हो तो उनका दुख देख कर तकलीफ़ नही होती
होगी भी कैसे तुम सारे मर्द एक जैसे होते हो कुछ भी कर लो
यही चाहते हो कि औरत हमेशा तुम्हारे साथ तो रहे
लेकिन तुम्हारे अंगूठे के नीचे
दिलीप- वँया
वँया- और सुनो अगर मम्मी ऐसा करती तो तुम्हे पता है पिताजी क्या करते मेरे माँ को जान से मार देते
और मैं फिर भी अपने पिता के साथ रहती
दिलीप- [मैं कभी सोचा नही था कि वँया मुझसे ऐसे बात करेगी
और मुझसे ऐसी ऐसी बाते करेगी
मुझे लग रहा था कि वँया अब कुछ ग़लत ज़रूर बोलेगी
मुझे वँया को रोकना होगा]
वँया चुप रहो
वँया- क्यूँ चुप रहूं
दिलीप- वँया मैं जानता हूँ कि तुम अभी बहुत तकलीफ़ में हो लेकिन तुम अपने आपको सम्भालो
वँया- सम्भालो अपने आपको
अब मैं देखती हूँ कि तुम अपने आपको संभालते कैसे हो
तुम्हे पता है इस दुनिया में सबसे बड़ी चीज़ क्या है माँ
माँ से उपर कोई नही है
अब तुम सोचोगे कि मैं तुमसे वो बात कहूँगी जिससे तुम्हे बहुत ज़्यादा तकलीफ़ होगी
लेकिन मैं तुमसे वो बात कहूँगी
जिसके बाद मैं देखूँगी कि तुम अपने आपको कैसे संभालते हो
पिताजी का एक दोस्त अपनी आखरी साँसे गिन रहा हो
दिलीप- [मैं समझ गया कि वँया क्या बोलने वाली है]
वँया चुप हो जाओ
वँया- वो पिताजी से कहे कि मेरी अंतिम इच्छा पूरी कर दो
दिलीप- [चीख के] वँया
वँया- आप मेरे सामने मेरे बेटे का विवाह अपनी बड़ी बेटी से
दिलीप- वँया प्लीज़
वँया- कर दीजिए
और पिताजी अपने दोस्त की आखरी इच्छा पूरी करने के लिए
विद्या दी की शादी अपने दोस्त के बेटे से कर दे तो
दिलीप- यह सुनते ही मैने अपना आपा खो दिया
और वँया को एक थप्पड़ मार दिया
थप्पड़ लगते ही वँया नीचे गिर गयी
[इतना गुस्सा आ रहा था वँया पे और वँया से ज़्यादा खुदपे मन कर रहा था अपनी जान दे दूँ
तभी मेरा फोन बजने लगा
मन किया कि फोन तोड़ दूं
मैं फोन निकाल लिया
फोन स्क्रीन पे नज़र पड़ते ही मैं अपना गुस्सा कम करने की कोशिश करने लगा
मैं बाथरूम में आ गया
नल चालू कर दिया
फोन उठाया
विदू- कैसे हैं मेरे पतिदेव जी उम्म्म्मम्मूऊऊुुउउन्ह
दिलीप- [विदू की आवाज़ सुनके मुझे समझ नही आया कि मैं क्या बोलूं
उनसे माफी मांगू या फिर जी भरके रोऊँ
विदू- क्या हुआ आप कुछ बोल नही रहे हैं और यह आवाज़ कैसी
दिलीप- बाथरूम में हूँ नल से पानी गिर रहा है
विदू- मैं भी ना मैं थोड़ी देर बाद फोन करती हूँ
दिलीप- विदू फोन कट कर दी
मैं बाथरूम से बाहर आया तो देखा वँया रो रही थी
मैं गेट खोलके बाहर आया
बाहर कोई नही था
मैं फिर अंदर आया
वँया का हाथ पकड़ कर उठाने लगा
वँया नही उठी
कई बार कोशिश किया वँया नही उठी
मुझे और ज़्यादा गुस्सा आने लगा
मैं वँया को ज़बरदस्ती अपनी गोद में उठा लिया
मुझे इस वक़्त इतना गुस्सा आ रहा था
वँया को देख कर मुझे लग रहा था कि मैं वँया के साथ कुछ ग़लत ना कर दूं
वँया नीचे उतरने लगी
मैं जल्दी से चलते हुए वँया के रूम में आ गया
और वँया को बेड पे छोड़ दिया
जब मैं गेट के पास पहुँचा तो पता नही मुझे क्या हुआ
मैं वँया के पास गया
वँया अभी भी रो रही थी
दिलीप- वँया तुम्हे उसकी कसम जिससे तुम सबसे ज़्यादा प्यार करती हो
अगर तुम अपने आपको ज़रा सा भी नुकसान पहुँचाओगी तो वो इंसान जिससे तुम सबसे ज़्यादा प्यार करती हो
वो तड़प तड़प कर मरेगा सुन रही हो ना वो तड़प तड़प कर मरेगा
यह कहके मैं अपने रूम में आ गया
मेरे दिमाग़ में अभी भी यह बात घूम रही थी
कि मैं वँया को ऐसा क्यूँ बोला आख़िर क्यूँ
उपर से यह हरामखोर सर दर्द
वँया पहली बात बोल देती कि मेरे पास माँ नही है मैं बर्दाश्त करलेता