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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 76

दिलीप- लखन अपने सर्विस क्वॉर्टर में चला गया..

मैं हॉल में पहुँचा

और सोफे पे बैठ गया..

विद्या दी मुझे देखते ही मेरे लिए पानी लेके आई..

मैने पानी पी लिया..

दिलीप- बाकी सब कहाँ है..

विद्या- अपने अपने रूम में..

दिलीप- बड़ी नानी..

विद्या- वो स्कूल गयी हैं..

दिलीप- ठीक है मैं अपने रूम में जा रहा हूँ..

मैं सीढ़ियो से उपर पहुँचा.. अपने रूम में आके लेट गया..

और सोचने लगा कि शांति की रिपोर्ट सही आई तो फिर मैं क्या करूँगा

मैं सोचा अवनी के पास जाता हूँ..

कहीं अवनी यह ना समझे कि मैं सिर्फ़ चुदाई करने के लिए ही उसके पास जाता हूँ

मैं अवनी के रूम पे गया

2 3 बार नॉक किया

फिर वापस अपने रूम में आगया

तभी मुझे याद आया

मैं मोबाइल से उस साइट पे गया ( राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम )

बाप रे बाअप सेक्स करने के इतने तरीके थेऔर लड़के लड़कियो के बारे में

ऐसी ऐसी बाते लिखी थी

मैने तो सुना था लड़के ही सिर्फ़ उस टाइप के होते हैं

लेकिन आज एक लड़की को दूसरी लड़की की चूत चूस्ते हुए पढ़ कर मेरा तो पूरा लंड खरा हो गया

पूरे 4 घंटे तक मैने राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम को पढ़ा

तभी कोई गेट नॉक करने लगा मेरी फट गई

एक तो साला यह लंड

पैंट के उपर से ही सॉफ दिख रहा था

मैने डरते हुए जाके गेट खोला

सामने अरुणा दी खड़ी थी

[मर गया इतनी मुश्किल से तो मानी थी]

आआप

अरुणा- ऐसे एक्सप्रेशन क्यूँ दे रहा है..

आज वँया की तबीयत ठीक नही है..

तो मैं तुझे पढ़ाने आई हूँ..

[अरुणा दी अंदर आके बेड पे बैठ गयी..]

मैं डरते हुए अरुणा दी के पास पहुँचा

अरुणा- खड़ा खड़ा क्या देख रहा है

जा जल्दी से किताब लेके आ

[फिर मैं किताब लेके बैठ गया]

अब तू पढ़ अगर कहीं पे प्राब्लम हुई तो मैं बता दूँगी

2 घंटे तक पढ़ाई किया

फिर अरुणा दी चली गयी

मैं भी जल्दी से वँया के रूम पे पहुँचा

गेट नॉक किया

वँया ने गेट ही नही खोला

मैने सोचा गाओं में घूम लेता हूँ

अब बड़ी नानी तो घर में थी नही

कोटि मामी से बात करने का मतलब 3 4 गाली

अब बची बड़ी मामी

मैं पहुँचा बड़ी मामी के रूम पे

गेट नॉक किया

थोड़ी देर बाद बड़ी मामी ने गेट खोला

बड़ी मामी- दिलीप कुछ चाहिए तुम्हे

दिलीप- बड़ी मामी वो मैं बाहर जा रहा हूँ बड़ी नानी पूछे तो बता दीजिएगा

बड़ी मामी- ठीक है

दिलीप- फिर मैं हवेली से बाहर आया और गाओं में घूमने लगा मैदान में लड़के सब क्रिकेट खेल रहे थे मैं भी साथ में खेलने लगा अब शाम हो चुकी थी अंधेरा भी होने लगा था

1 घंटे तक खेलते रहने के बाद मैं जब घर की तरफ जा रहा था

तभी एक लड़की को मैने एक खाली घर में जाते हुए देखा

लड़की की पीठ मेरी तरफ थी

पहले तो मन नही किया लेकिन साला यह लंड माने तब ना

मैं भी खाली घर में खिड़की रास्ते घुस गया घर में पूरा अंधेरा था

तभी वो लड़की बोली

लड़की- आगये तुम चलो जल्दी से मेरी चुदाई करो हमारे पास सिर्फ़ एक घंटा है

दिलीप- मेरा तो दिमाग़ घूम गया एक तो यह लड़की कॉन है पता नही उपर से इस लड़की का वीडियो भी नही है कहीं शोर मचाने लगी तो फिर मैं धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का एक काम करता हूँ जो होता है होने देता हूँ

अगर इसे पता चल गया तो समझाउंगा अगर नही समझी तो यह अपने रास्ते और मैं अपने रास्ते

बस यही डर है कि इस बीच कहीं इसका यार ना आजाए.'..,

 
अपडेट 77

लड़की- क्या सोच रहे हो जल्दी करो ना अच्छा अब समझी देखो आज कपड़े पहें कर ही करते हैं

अगर कोई आ गया तो हमें भागने में आसानी होगी फिर वो लड़की मेरे पैंट पे अपने हाथ रखके मेरे लंड को सहलाने लगी

और मेरे हाथ पकड़के अपने दूध पे रख दी मैं समंझ गया मैं उस लड़की के दूध दबाने लगा

लड़की- पहले तुम मेरी चूत चूसो फिर मैं तुम्हारा लंड चुसुन्गि

दिलीप- मैं वही पे बैठ गया और उसके शलवार का नाडा खोल दिया एक झटके में शलवार नीचे गिर गयी

लड़की ने अपनी टाँगे चौड़ी कर ली मैं अपना हाथ उसकी चूत पे रख दिया

[इसने तो पैंटी भी नही पहनी है]

और इसकी चूत पे एक भी बाल नही था मैं अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दियाऔर आगे पीछे करने लगा फिर मैं अपना मुँह उसकी चूत पे रखके चूसने लगा

लड़की- अया आज तो बहुत अच्छे से चूस रहा है ऐसे ही चूस मेरी चूत को मैं अपनी ज़ुबान से उसकी छूट छोड़ रहा था

वो आआहए भर रही थी अब मैं उसकी चूत चूस्ते हुए अपनी दो उंगली उसकी चूत में डालके चोदने लगा

लड़की- अया अओर ज़ोर से चूस अया हाआँ ऐसे ही अया मैं झड़ने वाली हूँ

दिलीप- मैं उसकी चूत और ज़ोर से चूसने लगा थोड़ी देर बाद वो झड़ने लगी मैं उसका सारा पानी पी गया

फिर मैं खड़ा हो गया अब वो नीचे बैठ गयी और मेरा पॅंट खोलने लगी मेरा पैंट नीचे गिर गया जैसे ही उसने मेरा अंडरवेर नीचे किया मेरा लंड उसके चेहरे से टकरा गया उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया

थोड़ी देर बाद

लड़की- कौन हो तुम बोलते क्यूँ नही

दिलीप- तुम्हे क्या लगता है

लड़की- तुम वो नही हो

[फिर वो लड़की खड़ी हो गयी और अपनी शलवार पहनने लगी]

[मैने उसका हाथ पकड़ लिया]

लड़की- छोड़ो मुझे जाने दो मैं ऐसी वैसी लड़की नही हूँ मैं किसी और का इंतेज़ार कर रही थी

[वो रोने लगी]

दिलीप- रो मत मेरी बात सुनो अगर तुम कहोगी तो मैं तुम्हे जाने दूँगा पर ना तो मैने तुम्हारा चेहरा देखा है

और ना ही तुमने मेरा अगर तुम मेरे साथ चुदाई करोगी तो मैं तुम्हे कभी परेशान नही करूँगा

लड़की- नही तुम झूठ बोल रहे हो

दिलीप- साली मेरे साथ गेम खेलती है तेरे बोलने के अंदाज़ से पता चल रहा है कि तू नाटक कर रही है

चुदवाना है तो चुदवा वरना भाग यहाँ से एक तो लंड खड़ा करती है मन कर रहा है कि अभी तुझे पटक के चोद दूं

और तू किसी को कुछ नही बता पाएगी क्यूंकी तूने मेरा चेहरा ही नही देखा है

तीन तक गिनूंगा जाना है तो चली जाना

1

2

[इसके आगे मैं कुछ बोल ही नही पाया]

वो लड़की मेरे लंड को अपने मुँह में लेके चूसने लगी और एक हाथ से वो मेरे आंडो को सहला रही थी

मैने उसका सर पकड़ा और अपने लंड से उसके मुँह को चोदने लगा थोड़ी देर बाद मैने अपना लंड उसके मुँह से निकाल लिया

लड़की- कुत्ते

मैने फिर अपना लंड उसके मुँह में पेल दिया अब वो खुद अपना मुँह आगे पीछे करके मेरे लंड को चूस रही थी

मैने उसको खड़ा करके उसकी एक टाँग को हवा में उठा दिया

और उसकी चूत पे अपना लंड रगड़ने लगा

लड़की- कमिने डाल ना क्यूँ तडपा रहा है

मैने एक धक्का मारा उसकी चीख निकल गयी

मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया

लड़की- मार डाला कुत्ते ने

मैने एक और धक्का मारा एक बार फिर उसकी चीख निकल गयी

मैं उसके होंठ चूसने लगा और धीरे धीरे धक्के मारने लगा

जब वो अपनी गान्ड घुमाने लगी तो मैने अपने होंठो को अलग किया

लड़की- अया बस्त इतना ही दम है बोल तो ऐसे रहा था कि बहुत बड़ा मर्द है

दिलीप- सोचे ले अगर दम दिखा दिया तो रोने लगेगी

लड़की- जा जा तेरे जैसे बहुत देखे हैं

उसने इतना ही कहा था कि मैने अपना लंड उसकी चूत के मुँह तक निकाला और एक ही बार में डाल दिया

उसकी भयानक चीख निकल गयी वो रोने लगी

मैं रुका नही तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा पूरे घर में पच पच की आवाज़ आ रही थी

लड़की- ऐसे ही चोद मुझे फाड़ दे मेरी चूत को अया भोसड़ा बना दे मेरी चूत का हाआँ ऐसे ही और ज़ोर से चोद अयाया मैं झड़ने वाली हूँ

दिलीप- फिर वो झड़ने लगी अब मेरा लंड उसकी चूत में आराम से जा रहा था थोड़ी देर बाद वो फिर झड गयी मैने उसको गोद में उठा लिया और अपने लंड को उसकी चूत में पेलने लगा वो 3 बार झड चुकी थी

दिलीप- अब मैं भी झड़ने वाला था मैं पूरी ताक़त से धक्के लगा रहा था तभी मुझे याद आया

दिलीप- अंदर ही डालु या मुँह में

लड़की- अंदर मत डालना

मैने अपना लंड उसकी चूत से निकाला वो नीचे बैठ गयी और मेरे लंड को मुँह लेके चूसने लगी

थोड़ी देर बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ने लगा वो मेरा सारा कम पी गयी

दिलीप- बहुत मज़ा आया तुझे चोदने में वैसे तेरा नाम क्या है

लड़की- ऋतु

दिलीप- अभी तक कितने ले चुकी है

लड़की- तुम चौथे हो

दिलीप- इतना नाटक क्यूँ कर रही थी

ऋतु- अरे तो मैं कोई रंडी थोड़ी हूँ

दिलीप- अच्छा अब मैं चलता हूँ

ऋतु- फिर कब मिलोगे

दिलीप- किस लिए

ऋतु- मुझे चोदने के लिए

दिलीप- तुमने कभी गान्ड मरवाई है

ऋतु- नही

दिलीप- अगर गान्ड मारने देगी तो यही पे आ जाउन्गा

ऋतु- पहले अपना नाम तो बता दो

दिलीप- जिस दिन गान्ड मारने दोगि उसी दिन बता दूँगा

ऋतु- तुमको बुलाउन्गी कैसे

दिलीप- एक काम करना स्कूल में ब्लॅक बोर्ड पे खाली घर लिख देना

मैं यही पे आ जाउन्गा फिर मैं घर चल दिया'..'.,.

 
अपडेट 78

दिलीप- शाम के 7 बज रहे थे मैं तो बस यही दुआ कर रहा था कि बड़े मामा घर पे ना हो

थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा घर सब बहने हॉल में बैठी थी वँया को छोड़ के मैं जैसे ही अंदर गया

सब मुझे घूर्ने लगे

दिलीप- आप सब मुझे घूर क्यूँ रही हो

अरुणा- अपने कपड़े देख कितने गंदे हैं किसी से मार पीट करके आया है क्या

दिलीप- वो खेलते वक़्त गिर गया

[इतना कहा ही था कि सब बहनें मेरे पास आगयि]

विद्या- दिखा कहाँ पे चोट लगी है

अरुणा- चुप क्यूँ है बोल ना

दिलीप- कोई चोट नही लगी है आप सब ऐसे ही परेशान होने लगती हो

मेघा- [मुस्कुरा कर]जा जाके जल्दी से नहा कर आ तेरे लिए एक सर्प्राइज़ है

दिलीप- क्या सर्प्राइज़ है

अरुणा- मेघाअ

अवन्तिका- तेरे पेट में कोई बात पचती क्यूँ नही है

विद्या- तू खड़ा क्या कर रहा है जल्दी से नहा कर आ वरना सर्प्राइज़ कॅन्सल

[यह सुनके मैं भाग के अपने रूम में आया नहा कर तय्यार हुआ और दौड़के नीचे आया]

दिलीप- अब बताइए कॉन्सा सर्प्राइज़ है

विद्या- पहले अपनी आँखें बंद कर

[मैने अपनी आँखें बंद कर ली]

फिर विद्या दी मेरा हाथ पकड़के मुझे अपने साथ ले जाने लगी

अरुणा- अब तू अपनी आँख धीरे से खोल

[मैने अपनी आँखो को धीरे से खोला]

दिलीप- यह क्या है

विद्या- तेरा केक है

दिलीप- पर क्यूँ आज मेरा बर्तडे थोड़ी है

अरुणा- तू भूल गया आज मेरा बर्तडे है

दिलीप- आज आपका बर्तडे है और मुझे पता ही नही

अरुणा- नाराज़ तो मुझे होना चाहिए कि तू मेरा बर्तडे गिफ्ट मुझे नही दे रहा

दिलीप- [यार यह क्या एक तो मुझे बताया नही उपर से गिफ्ट माँग रही हैं]

क्या चाहिए आपको

अरुणा- मैं चाहती हूँ कि तू मेरी जगह मेरा बर्तडे मना

दिलीप- मैं कुछ समझा नही

विद्या- अरे मेरे भोले बाबू अरुणा चाहती है कि तू उसका बर्तडे केक काट के पहली बाइट उसे खिला

दिलीप- पर क्यूँ

अरुणा- क्यूँ कि मैं चाहती हूँ

अवन्तिका- सोच क्या रहा है

दिलीप- मैं सोच रहा हूँ कहीं मैं सपना तो नही देख रहा हूँ

अरुणा- तू मेरा मज़ाक उड़ा रहा है जा मैं तुझसे बात नही करती

दिलीप- [अरुणा दी के गले लगते हुए]

अरे मेरी प्यार दी आप तो गुस्सा हो गयी अच्छा आओ फिर मैं अरुणा दी को अपने साथ लेके गया

केक काटके पहली बाइट खिलाया सब बोलने लगे हॅपी बर्तडे टू यू हॅपी बर्तडे टू यू

हॅपी बर्तडे डियर अरुणा

[वैसे मुझे पता था कि आज अरुणा दी का बर्तडे नही हैशायद मेरी बहनो का मन हुआ होगा मेरे हाथ से केक खाने का]

अच्छा आप सब बैठ के बाते कीजिए मैं आता हूँ

विद्या- मुझे तो खिला

अवन्तिका- मुझे भी

मेघा- हमें भी

[फिर क्या था सब बहनों को केक खिलाया]

अब जाऊं

अरुणा- पहले हमारे हाथ से ख़ाके जा

[फिर सब बहनो ने मुझे खिलाया]

बड़ी नानी कहाँ हैं

विद्या- अपने रूम में

दिलीप- और दोनो मामा

विद्या- अपने रूम में

दिलीप- ठीक है

मैं भी अपने रूम में जा रहा हूँ फिर मैं अपने रूम में आके बेड पे बैठ गया

[अब तो कॉंडम हर वक़्त जेब में रखना पड़ेगा क्या पता कब काम आजाए]

और कल सुधा से भी मिल लेता हूँ अभी तो बहुत नींद आरहि है पहले वँया से बात कर लेता हूँ मैं मास्टर की अपनी जेब में रखके वँया के रूम पे पहुँचा रूम नॉक किया

वँया ने गेट खोला

वँया- क्या है

दिलीप- तुमसे बात करनी है

वँया साइड हो गयी

मैं अंदर जाके बेड पे बैठ गया

वँया- बोलो

दिलीप- वो मैं सोच रहा था कि कल हम कहीं पे घूमने जाए

[वँया मुस्कुराने लगी]

वँया- ठीक है

[मैं वँया के रूम से बाहर आके बड़ी नानी के रूम पे पहुँचा]

बड़ी नानी ने गेट खोला उसके बाद हम सब ने मिलके खाना खाया

फिर मैं अपने रूम में आके सो गया...

 
अपडेट 79

दिलीप- सुबह 6 बजे मैं उठा नहाया धोया तय्यार होके नीचे गया

आज तो पूरा परिवार डाइनिंग टेबल पे बैठा हुआ था मैं भी जाके बैठ गया

दोनो मामा कुंडली मारके बैठे हुए थे हम सब ने नाश्ता किया

छोटे मामा- चार दिन बाद हम सब वापस शहर जा रहे हैं

[यह सुनके मेरा दिमाग़ सुन्न हो गया]

अरुणा- इतनी जल्दी

अवन्तिका- हाँ

छोटे मामा- आप सबके एग्ज़ॅम्स नज़दीक आ रहे हैं

ख़ासकर अवन्तिका मेघा और सुनीता के लिए तो बहुत ही ज़रूरी है

विद्या- चाचा जी ठीक कह रहे हैं

[मन तो कर रहा था छोड़ यार]

दिलीप- खाने का मन ही नही हो रहा था इतने सालो बाद बहनें मिली खैर पढ़ाई भी तो ज़रूरी है मैं भी नाश्ता किया

और हॉल में ही बैठ गया दोनो मामा बाहर चले गये सब बहनों का चेहरा उदासी में डूबा हुआ था

विद्या दी छुपाने की कोशिश कर रही थी पर मुझसे नही छुपा पाई विदयादि अपने रूम में जाने लगी

मैं भी थोड़ी देर बाद विद्या दी के रूम पे पहुँचा मुझे पता था विद्या दी रो रही होंगी तो गेट खोलेंगी ही नही

मैं मास्टर की से लॉक खोलके अंदर गया और गेट लॉक किया विद्या पीठ के बल लेटके सिसक रही थी

मैं धीरे से विद्या के पास गया और विद्या के बगल में लेट गया विद्या का मुँह दूसरी तरफ था

मुझे तो रोने का वरदान मिला है तो तकिये में अपना मुँह छुपा कर लगा मैं रोने

और यह आँसू मेरी आँखो से सच में निकल रहे थे कोई नाटक नही था

विद्या ने जब सुना तो वो पीछे मूडी मुझे देखके विद्या अपने सारे गम भूल गयी

विद्या- दिलीप तू रो क्यूँ रहा है

[विद्या ने मुझे उठाने की कोशिश की मैं नही उठा]

दिलीप मेरा दिल बहुत घबरा रहा है

विद्या--उठना दिलीप

दिलीप- मैं उठके बैठ गया और विद्या को अपने गले लगा लिया

विद्या मेरे गले लगते ही फूट-2 के रोने लगी मैं विद्या की पीठ सहलाता रहा

थोड़ी देर बाद विद्या ने रोना बंद किया

दिलीप- अब बताइए क्यूँ रो रही थी

विद्या- क्यूँ ना रोउँ तुझे एक पल के लिए अपनी नज़रो से दूर नही कर सकती

और मैं इतनी मजबूर हूँ कि तुझसे दूर जाने का सोच भी नही सकती

दिलीप- अच्छा तो इस लिए मेरी विदू रो रही है लेकिन इसमें रोने वाली कोन्सि बात है

जब भी मौका मिलेगा मैं अपनी विदू से मिलने आता रहूँगा

विद्या- अभी जो बोला फिर से बोल

दिलीप- इसमें रोने वाली कोन्सि बात है

विद्या- यह नही लास्ट में जो बोला

दिलीप- मैं आपसे रोज़ मिलने आता रहूँगा

विद्या- प्लीज़

दिलीप- मैं अपनी विदू से मिलने आता रहूँगा

[यह सुनके विद्या का चेहरा पूरी तरह शरम से लाल हो गया]

दिलीप-हाए मर जाउ

[विद्या ने मेरे मुँह पे हाथ रख दिया]

विद्या- ऐसा कभी मत कहना

दिलीप- नही कहता अब रोना बंद करो

विद्या- अपना चेहरा देख मुझसे ज़्यादा तो तेरी आँखो से आँसू निकल रहे हैं

दिलीप- मैने विदू को खींचके अपनी गोद में बिठा लिया और विदू के गाल को सहलाने लगा

मेरी प्यारी विदू कितनी खूबसूरत है रात में चाँद भी देखले तो जल जाए

[विदू शरमाने लगी]

[विदू मुझसे कितना प्यार करती है और एक मैं हूँ जो किसी और के साथ सेक्स करता हूँ]

एक बात बोलता हूँ बुरा मत मानना

विद्या- मैं अपने दिलीप की बात का बुरा मान ही नही सकती

दिलीप- [सर झुकाके]मेरा दूसरी लड़कियो के साथ भी संबंध है आप चाहो तो मुझे मारलो पर मुझसे नाराज़ मत होना

विद्या- यह तू कैसी बात कर रहा है अगर तेरा संबंध अगर दूसरी लड़कियो के साथ है तो मैं क्या करूँ

दिलीप- इसका मतलब आप मुझसे नाराज़ हो

विद्या- बिकुल नही मैं तुझसे बहुत प्यार करती हूँ पर मैं यह कभी नही चाहूँगी क़ि मेरा प्यार तुझे बाँध के रक्खे

दिलीप- पर क्यूँ

विद्या- कितना बोलता है अब एक वर्ड भी नही बोलेगा तू

दिलीप- [मैं वादा करता हूँ जिस्दिन आपसे प्यार करूँगा उस दिन से आपके साइवा किसी और से प्यार नही करूँगा]

तो क्या करूँ

विद्या- मुझे क्या पता

दिलीप- मैं अपने होंठ विदू के होंठ पे रखके चूसने लगा कितने मुलायम होंठ है विदू के

मैं विदू के उपरी होंठ को चूस रहा था विदू मेरी निचले होंठ को चूसने लगी तभी कोई गेट नॉक करने लगा मैने किस तोड़ दिया और अपना रुमाल निकाल के विदू के होंठ पे से लिपस्टिक सॉफ किया फिर विदू ने मेरे होंठ से लिपस्टिक सॉफ किया

मैं आँख बंद करके लेट गया विदू ने गेट खोला

अरुणा- दी दिलीप यहाँ पे है क्या

विद्या- हाँ

अरुणा- वो लखन बाहर खड़ा है और वो दिलीप को बुला रहा है

[यह सुनके मैं उठके बैठ गया]

क्या हुआ अरुणा दी

अरुणा- लखन तुझे बाहर बुला रहा है

दिलीप- मेरा तो खून खौल गया मैं घर से बाहर आया कालिया मुँह बनाए खड़ा था

लखन- छोटे मालिक आप 30 मिनट लेट हैं आज आपको डबल कसरत करनी पड़ेगी

दिलीप- यह सुनके मेरी फट गई

फिर भी कालिए के साथ अखाड़े में जाना तो पड़ेगा ही मैं और लखन चल दिए अखाड़े की तरफ.,.'.,..

 
अपडेट 80

थोड़ी देर बाद मैं पहुँचा अखाड़े में वैसे अपनी एज का मैं ही एक नमूना था अखाड़े में

डबल कसरत करवाया कालिए ने फिर वही लस्सी टाइप गिलास चुप करके पी लिया

वहाँ से थोड़ी देर बाद पहुँचा घर और सीधा अवनी के रूम पे गया

गेट नॉक किया

अवनी ने गेट खोला और मैं अंदर गया और गेट लॉक कर दिया

मैं अवनी के गाल सहलाने लगा

दिलीप- मेरी प्यारी अवनी परेशान लग रही है

अवन्तिका- नही ऐसी कोई बात नही है

दिलीप- अच्छा मैने अवनी को गले लगा लिया -----------अब बताओ

नही पहले मेरी बात सुनो

अवन्तिका- क्या

दिलीप- आज रात को आपकी गान्ड मारु

अवन्तिका- छि कितना बेशरम है तू

दिलीप- अब गाओं में तो ऐसे ही बोला जाता है वैसे मुझे लगता है आप के यह बड़े हो रहे हैं

अवन्तिका- क्या यह

दिलीप- आपके दूध यह कहके मैं अवनी के दोनो दूध के निपल को पकड़के खींच दिया

अवन्तिका- अया

दिलीप- अब मैं जाता हूँ फिर मैं अवनी के रूम से बाहर आया और अपने रूम में जाके बेड पे लेट गया

तभी किसीने गेट नॉक किया

मैं जाके गेट खोला सामने वँया खड़ी थी वैसे तो जाने का मन नही था

दिलीप- वँया अंदर आओ

वँया बेड पे बैठ गयी

वँया- दिलीप मैं कह रही थी कि आज हमे नही जाना चाहिए

दिलीप- क्यूँ

वँया- देखो ना सनडे को सब वापस जाने वाले हैं और हम दोनो के पास आज का ही दिन है तो क्यूँ ना हम दोनो आज का दिन सब के साथ ही बिताए

दिलीप- तुम कहती हो तो ठीक है

[वैसे तो मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे]

वँया- एक काम करते हैं क्यूँ ना हम सब शहर जाए शॉपिंग भी कर लेंगे और कोई अच्छि सी मूवी भी देख लेंगे

दिलीप- बहुत अच्छा आइडिया है

वँया- लेकिन एक प्राब्लम है

दिलीप- क्या

वँया- पापा नही मानेंगे

दिलीप- अरे उनसे कॉन पूछने जाएगा मैं तो डाइरेक्ट बड़ी नानी से बात करूँगा तुम बहनों को तय्यार करो

मैं बड़ी नानी से बात करता हूँ फिर मैं नीचे किचन में गया

बड़ी नानी- कुछ चाहिए मेरे बेटे को

[मेरे सर पे हाथ फेरते हुए )

दिलीप- हाँ वो हम सब शहर जाना चाहते हैं शॉपिंग भी कर लेंगे और साथ में मूवी भी देखेंगे

बड़ी नानी- ठीक है

लखन को अपने साथ ले जा और बड़ी वाली गाड़ी ले जाना

दिलीप- मेरी प्यारी बड़ी नानी

[फिर बड़ी नानी अपने रूम में चली गयी )

मैं विद्या सॉरी विदू के रूम में गया जैसे ही अंदर गया मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी मुझे मेरी सब बहनें इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़कियाँ लग रही थी मैं अभी भी आँखें फाड़के सबको देख रहा था

तभी किसीने मुझे चींटी काटी

दिलीप- अया क्या कर रही हो

वँया- तुम तय्यार नही हुए

दिलीप- मैं कोई लड़की नही हूँ

अरुणा- तो क्या गाओं वाले कपड़े में जाएगा

सब तुझपे हसेन्गे

दिलीप- मुझे कोई फ़र्क़ नही पड़ता

विद्या- पर हमे पड़ता है तू रुक[फिर विद्या अपने अलमारी में से एक बॅग निकालके मेरे पास आई]

यह ले इसमें तेरे लिए कपड़े हैं जो अच्छा लगे पहेन लेना

दिलीप- आप सब गाड़ी में बैठो मैं आता हूँ वो बॅग लेके मैं अपने रूम में आया फिर उस बॅग में से एक टीशर्ट और एक जीन्स निकालके पहेन लिया पहली बार मैं यह कपड़े पहेन रहा था थोड़ा अजीब लग रहा था मैं अपने रूम से बाहर आया और नीचे पहुँचा बड़ी नानी अपने रूम से बाहर निकली

बड़ी नानी- तू तो पूरा हीरो लग रहा है

दिलीप- एक काम करो आप भी चलो मेरे साथ

बड़ी नानी- ना बाबा ना मैं बुढ़िया तेरे साथ जाके क्या करूँगी यह ले पैसे

दिलीप- यह कुछ ज़्यादा नही हैं

बड़ी नानी- नही तू पहली बार अपनी बहनो के साथ घूमने जा रहा है अगर कम पड़ गये तो

दिलीप- अच्छा ठीक है अब मैं जाता हूँ फिर मैं घर से बाहर आया

अवनी सीटी बजाने लगी

दिलीप- [मैं अवनी के पास पहुँचके बोला]

क्या जमाना आ गया है अब लड़किया लड़को को छेड़ने लगी हैं

यह सुनके सब हँसने लगे

विद्या- वैसे आज तू बहुत हॅंडसम लग रहा है

अरुणा- तू तो बिकुल हीरो लग रहा है

दिलीप- मेरी तारीफ़ बाद में करना पहले गाड़ी में बैठते हैं

फिर हम सब गाड़ी में बैठे

हमारा ड्राइवर और कोई नही लखन था लखन ने गाड़ी चला दी

दिलीप- आप ने यह कपड़े कब लिए

विद्या- कल जब तू बाहर गया था

दिलीप- और मुझे बताया भी नही

विद्या- मेरी मर्ज़ी

गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल रही थी हमें पहुँचने में अभी 45 मिनट लगने वाले थे तभी विदू ने वो बात कह दी मेरे कान में जो मुझपर किए गये किसी विस्फोट से कम नही था

हुआ यह कि विदू मेरे कान के पास अपना मुँह लेके आई

विद्या- मुझे अभी किस चाहिए

दिलीप- मैने विदू को घुरके देखा विदू मुस्कुरा रही थी

मैं विदू और अरुणा दी पीछे वाली सीट पे बैठे हुए थे मेरे एक साइड वो लड़की बैठी है जो मुझसे बेंतिहा प्यार करती है

और एक साइड वो लड़की जो बात बात पे मुझे थप्पड़ मार देती है

मैं अपनी आँख बंद कर ली तभी गाड़ी ज़ोर से हिली

दिलीप- क्या हुआ लखन

लखन- एक खड्डा था

मेरी नज़र विदू पे पड़ी मैने देखा विदू की आँखो से आँसू बह रहे थे मुझे अच्छा नही लगा मैने जानबूझके अपना मोबाइल नीचे गिरा के अपने पैरो के नीचे दबा दिया

दिलीप- विद्या दी मेरा मोबाइल उठाओ ना विदू झुक गई और मेरा मोबाइल ढूँढने लगी

मैं झट से नीचे झुका विदू मुझे देखने लगी मैने अपने होंठ विदू के होंठ पे रखके हल्का सा चूम लिया

और वापस बैठ गया विदू भी बैठ गयी फिर मैं अपना मोबाइल वापस अपनी जेब में रख लिया

अब मैं विदू को ही देखे जा रहा था फिर मैने अपने आप को कंट्रोल किया

थोड़ी देर बाद लखन ने एक बड़े से माल के सामने गाड़ी रोक दी,..,...

 
अपडेट 81

दिलीप- हम सब गाड़ी से नीचे उतरे

लखन आप भी घुमो फ़िरो

लखन बिना कुछ बोले गाड़ी लेके चला गया

वँया- पहले शॉपिंग करे या मूवी देखे

दिलीप- पहले मूवी देखते हैं आप लड़कियो की शॉपिंग मतलब 5 6 घंटे सब मुझे घूर्ने लगी विद्या दी आप मेरे साथ चलो

विद्या- कहाँ

दिलीप- अब मैं तो पहली बार यहाँ आया हूँ मुझे क्या पता कि आप सब कोन्सि मूवी देखेंगे

विद्या- चल फिर हम दोनो आगे की तरफ बढ़ गये

दिलीप- आप ने ऐसा क्यूँ किया

विद्या- मैने क्या किया

दिलीप- मैं आपसे बात नही कर रहा मैं अपनी विदू से बात कर रहा हूँ

विद्या- मैं भी अपने दिलीप से बात कर रही हूँ

दिलीप- तो फिर बताइए मेरी विदू की आँखों में आँसू क्यूँ आ गये

विद्या- क्यूंकी मैने तुझे दुख पहुँचाया

दिलीप- वो कैसे

विद्या- मैं इतनी बेवकूफ़ हूँ कि सबके सामने मैने तुझे किस करने की बात कह दी प्लीज़ मुझे माफ़ कर्दे

दिलीप- इसमें माफी माँगने की बात कहाँ से आ गई आपका मुझपे पूरा हक़ है अब रोना बंद भी करो वरना सब कहेंगे कि इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की को मैं रुला रहा हूँ विदू मुस्कुराने लगी फिर मैने विदू के कहने पे एक रोमॅंटिक फिल्म का टिकेट्स ले लिया वैसे मुझे ड्रामा या आक्षन फिल्म देखना अच्छा लगता है हम दोनो बाहर आए

वँया- कितना टाइम लगा दिया तुमने

दिलीप- मेरी कोई ग़लती नही है जल्दी चलो आप सब वरना मूवी शुरू हो जाएगी फिर हम थियेटर में जाके बैठ गये हम सब एक ही साथ बैठे हुए थे मैं एक बात पे ध्यान दिया कुछ लड़के मेरी बहनो को घूर रहे थे सुबह का शो आधा थियेटर तो खाली ही था थोड़ी देर में मूवी शुरू हो गयी

अब आज कल की रोमॅंटिक फिल्म में किस्सिंग सीन ना हो ऐसा तो हो ही नही सकता थोड़ी देर बाद मूवी में किस्सिंग सीन शुरू हो गया

मेरी सब बहने शरमाने लगी मैं अपनी आँख बंद करके लेट गया थोड़ी देर बाद नींद आ गई

मुझे कोई ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा मैने अपनी आँख खोलके देखा तो यह वँया थी

दिलीप- क्या हुआ

वँया- तुम यहाँ सोने आए थे

दिलीप- मैने पूछा क्या हुआ तभी मैने देखा की इंटेरवेल हुआ है मैं आप सब के लिए कुछ लेके आता हूँ फिर मैं बाहर आके कोल्ड्रींक्स और पॉपकॉर्न लिया जैसे मैं पीछे मुड़ा मैं किसी से टकरा गया मेरे सामने निम्मी खड़ी थी मुझे तो झटका लगा

भले ही मैने निम्मी को सबकुछ बता दिया था पर मैं उससे कभी नही मिलना चाहता था]

दिलीप- आइ म सॉरी मुझे माफ़ कर दीजिए

निम्मी- दिलीप तुम यहाँ कैसे हो

दिलीप- लेकिन आप हैं कौन

निम्मी- वेरी फन्नी

मैं बिना उसकी तरफ देखे हुए आगे बढ़ गया और थियेटर में अपनी बहनों के पास पहुँचा] यह रहे आपके पॉपकॉर्न और कोल्ड्रींक्स और कुछ लाऊँ

विद्या- नही अब तू आके बैठ जा

थोड़ी देर बाद फिर मूवी शुरू हो गयी मूवी में एक ऐसा सीन भी आया जिसे देखके हम सब की आँखो में आँसू आगये

सब बहने पॉपकॉर्न खाते हुए आँसू बहा रही थी मैने देखा कि वो लड़के अभी भी मेरी बहनों को घूर रहे हैं मैने अपना मोबाइल निकाला फोटो खींचके वापस अपनी जेब में रख लिया थोड़ी देर बाद फिल्म ख़तम हो गयी

हम सब थियेटर से बाहर आए

अरुणा- अब चलके शॉपिंग करते हैं सब बहने एक शॉप में चली गयी मैं शॉप के बाहर बोर होने लगा तभी मुझे सामने से निम्मी आती हुई दिखी इसको क्या हुआ मेरे पीछे क्यूँ पड़ी है मैं जल्दी से शॉप के अंदर जाके विदू के पास खड़ा हो गया

मैं देखा 5 6 ड्रेस सामने पड़ी है एक से बढ़कर एक तभी मुझे उसमें से एक ड्रेस पसंद आ गई

दिलीप- आप यह लो इसमें आप बहुत सुंदर लगोगी

विद्या- [सेल्स गर्ल से] आप यह पॅक कर दीजिए

सेल्स गर्ल- वाउ मिस आपके बॉयफ्रेंड की चाय्स बहुत अच्छी है

[विदू शरमाने लगी]

अरुणा- यह हमारा भाई है

सेल्स गर्ल- ओह सॉरी आप यह ट्राइ कर लीजिए

विद्या- उसकी कोई ज़रूरत नही है

[तभी सुनीता दी और मेघा दी हमारे पास आ गई]

सुनीता- हमारी शॉपिंग तो हो गयी

दिलीप- वाह

[अरुणा दी मुझे घूर्ने लगी]

[मैं वँया के पास गया]

दिलीप- क्या हुआ

वँया- कोई ड्रेस पसंद ही नही आरहि है

[मैने सेल्स गर्ल की तरफ देखा लग रहा था कि अभी अभी उसकी किसी ने मार ली हो]

तुम एक काम करो यह वाली ड्रेस ले लो

वँया- ठीक है

मैं वापस विदू के पास गया

आप सब की शॉपिंग हो गयी

सबेकसाथ- हाँ

दिलीप- दोनो मामी और बड़ी नानी के लिए भी कुछ ले लेते हैं

विद्या- ले लिया

दिलीप- ठीक है अब चलिए आप सब 4 घंटे से शॉपिंग कर रही हैं फिर मैने पेमेंट किया और बाहर आ गया

हम सब माल से बाहर निकले तभी मेरी नज़र निम्मी पे पड़ी

उसे कुछ लड़के परेशान कर रहे थे अब मैं तो जा नही सकता था

दिलीप- [चिल्लाके] लखन तभी लखन दौड़ता हुआ आया

लखन- जी छोटे मालिक

दिलीप- वो सामने उन लड़को को देख रहे हो उन सब की एक हड्डिया तोड़ दो एक ही तोड़ना

लखन बिना कुछ बोले चला गया

विद्या- दिलीप यह तूने क्या किया कहीं उसे कुछ हो ना जाए

दिलीप- उसको क्या होगा

अरुणा- वो 5 6 लड़के हैं

दिलीप- अभी अगर आप में किसीने अगर कुछ बोला तो मैं खुद चला जाउन्गा

वँया- आप सब को चिंता करने की ज़रूरत नही है लखन को कुछ नही होगा

उसके बाद उन लड़को की चीख सुनाई देने लगी थोड़ी देर बाद लखन और निम्मी हमारे पास पहुँचे

निम्मी कुछ बोलती उससे पहले ही कुछ लड़किया हमारे पास आगयि

लड़की- थॅंक्स गॉड निम्मी तू ठीक है हमारा ध्यान तो उन लड़को की चीख सुनके तेरी तरफ गया

दिलीप- फिर हम सब गाड़ी में बैठे

लखन गाड़ी चलाने लगा थोड़ी देर बाद हम पहुँचे घर,.,...,,

 
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