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Incest मेरी आत्मा मेरे पिता के शरीर में घुसी

तभी साक्षी वीर के पास आ कर बैठ जाती है और दूर से उनको तनु भी झाँक रही थी

साक्षी - क्या हुआ उदास हो क्यो

तनु - अरे उसी के लिया होगा अंजली के लिए बुला दूं उसको

साक्षी - रुको करती हूं कॉल

वीर बहुत धीरे से कहता है मेरे पास जब 3 वाइफ है तो मुझे उसकी क्या जरूरत

साक्षी - तो क्या बात है

वीर - मैं क्या करूंगा 28 साल का हूं मेरे पास पैसा कमाने का क्या जरिया है मेरा घर सब कुछ तो चला गया

साक्षी - अच्छा ये बात है चलो एक गुड न्यूज़ देती हूं ये जो घर का ये हिस्सा देख रहे हो ये हमारा छोटा सा घर है और उस साइड भी एक रूम बनवा देंगे बाकी रही बात तो पैसे कमा कर फिर आ जाएगा सब

साक्षी - और वैसे तुम्हारी वाइफ भी तो है तुम्हारे पास मैं और तनु भी, नही छोड़ कर जा रहे कही ही ही ही

तनु - नई शुरुआत करो हम भी पुरानी बात छोड़ कर तुमको एक मौका दिए ना क्या ये तुम्हारा घर नही है

वीर अब बहुत खुश हो गया था उसको पहली बार तनु कुछ बोली फिर उसने पता नही क्या सोचा उसने जल्दी से तनु और साक्षी को गले लगा लिया

इससे पहले की साक्षी अलग होती 1 सेकंड बाद एक आवाज आई

• चाटाअक *

वीर के गाल लाल हो गए

साक्षी ये देख कर हँसने लगती हैं और हँसते हँसते गिर पड़ती है वही छत पर बेचारी लेट जाती है और उसका पेट दुखने लगता है

वही ये हँसी की आवाज नीचे तक आती है जो रूम में उदास बैठी निधि सुनती है तो वो भी स्माइल करती है राज और राखी ,उदय और सूर्य, मधु पूरा परिवार वही बैठा था

वही ये सुन कर निधि कहती है चलो अच्छा है ऊपर खुशी का माहौल है

तभी नीचे हँसते हुए भागते हुए अनु आतीं है और वो किसी तरह हँसी को रोकती है और देखती है सामने काव्या अकेली बैठी हैं

अनु को देख कर राज कहता है दीदी आप नीचे आओ बैठो ना

तभी उदय भान बोलता है ……..बिटिया

अनु - चलो काव्या ऊपर चलो अपने घर

निधि - ये भी तो तुम्हारा घर है

अनु - मेरा घर ऊपर है चले बेटा

काव्या आ जाती है और ऊपर चली जाते है दोनो

जैसे ही काव्या ऊपर आती हैं वैसे वो देखती है साक्षी ऊपर छत पर खड़ी हँस रही थी और रूम में तनु काम कर रही थी लेकिन एक खुश नुमा माहौल था

तनु मन मैं सोचती है चलो कम से कम ठीक तो हुआ सुबह से नाटक हो रहा था मैं अपनी बेटी को क्या बोलती अगर वीर की शादी हो जाती तो वैसे भी बड़ा आया हम दोनो की ही डाट खाएं मार खाए तभी तनु कहती है मैं क्यों सोचूं रही उसके बारे में

तभी उसको हँसी की आवाज़ आती है जिससे वो समझ जाती है की काव्या आ गई
 
जैसे ही काव्या ऊपर आती हैं वैसे वो देखती है साक्षी ऊपर छत पर खड़ी हँस रही थी और रूम में तनु काम कर रही थी लेकिन एक खुश नुमा माहौल था

तनु मन में सोचती है चलो कम से कम ठीक तो हुआ सुबह से नाटक हो रहा था मैं अपनी बेटी को क्या बोलती अगर वीर की शादी हो जाती तो वैसे भी बड़ा आया हम दोनो की ही डाट खाएं मार खाए तभी तनु कहती है मैं क्यों सोचूं रही उसके बारे में

तभी उसको हँसी की आवाज़ आती है जिससे वो समझ जाती है की काव्या आ गई

तभी तनु बाहर आतीं है और उसके पीछे पीछे निधि भी आती है

मम्मी ये मौसी ऊपर क्या कर रही है इतनी देर से हमारे घर

साक्षी - बेटा वो ये वो ये ! वो वाली मम्मी से पूछो

तभी निधि हँस देती है और तनु से कहती है बताओ

तनु - ये भी तुम्हारी मम्मी है

काव्या - मेरी और कितनी मम्मी है

तनु - बस लास्ट है और कोई नही आएगी पक्का

काव्या - अब कोई नही आएगी ना मुझे नही चाहिए और

तनु - प्रोमिस अब कोई और नही आएगी अब आई तो किसी की जान जाएगी

ये सुन कर वीर डर जाता है और थोड़ा पीछे हो जाता है तभी तनु ये हरकत देख कर थोड़ा स्माइल कर देती है

और साक्षी फिर हँसने लगती है और अनु भी हँसने लगती है

फिर वीर अनु को देखता है तो वो नोटिस करता है अनु भी बहुत कसा हुआ माल है 27 साल की ये भी है कतई चोदने लायक

तभी तनु अनु को घूरती है तो अनु डर जाती है तभी अनु साक्षी को आखों में देखती है तो पाती है वो कुछ समझ रही थी

अनु भी लड़की थी उसको समझते देर नहीं लगी की वो दोनो उसको क्या कहना चाहती है तभी अनु देखती है वीर उसके जिस्म को घूर रहा है

तभी वो गुस्से मे वीर को देखती है तो वो फिर साइड हो जाता है

तभी काव्या कहती है मम्मी

तनु - क्या है

काव्या - मतलब अब पापा इनको भी घूरेंगे, पापा इनको भी सोते टाइम चादर डालेंगे और ठंड लगने पर माथा टच करेंगे जैसे आपको किए थे कल और फिर मुझे उनके पास लिटा देंगे

वही ये बात सुन कर साक्षी और तनु के गाल थोड़ा लाल हो जाते है ये उनके साथ पहली बार था जब कोई उनको प्यार जता रहा था

वही अनु ये सुन कर अजीब नज़रों से वीर को देखती है जो मन में कहता है पोल खुल गई

तभी तनु काव्या के कान नोचते हुए कहती है बहुत बोलने लगी है तू मार भूल गई है क्या चल कमरे में बड़ी आई तू रात को सोती है या यही सब करती है

तभी काव्या की नज़र निधि पर पड़ जाती है और कहती है अरे मैं तो आपको देखा ही नहीं मामी ।

काव्या - सोरी मम्मी मामी के सामने ये बात नही पूछनी थी ना

तभी ये सुन कर वीर जल्दी से उसको उठा लेता है और कहता है चलो रूम में टीवी देखते है

काव्या - नही है पापा आपको पता है मेरी सभी सहेली के पास है टीवी

तभी वो दोनो बात करते है रूम में चले जाते है

और इधर बच गए अनु और साक्षी और तनु

वही ये तीनों अच्छी तरह से समझ गए की अब इनकी अच्छी वाली खिंचाई होगी

निधि - तो साक्षी वो एक हेल्प करेगी मेरी

साक्षी - हाँ बोलो ना निधि

निधि - वो मेरा कंडोम खतम हो गया है तुम दोनो के पास एक्स्ट्रा है क्या

वही ये सुन कर तनु को खासी आ जाती है और वो कहती है आप बैठो मैं चाय बना देती हूं

साक्षी - म म म बर्तन धूल कर आती हूं

निधि - अरे चाय और बर्तन छोड़ो और इधर बैठो तो

अनु - वो भाभी मेरी सहेली आ रही है मैं उसको बुला कर आती है

निधि - अरे रुक तो

वही फिर निधि कहती है इतने सालो बाद तुम्हारी हँसी से घर गुलजार हो गया साक्षी बस ऐसे ही हँसती रहो तुम उम्मीद है तनु भी हँसेगी जल्दी क्यों

तनु कुछ नही कहती लेकिन निधि जानती थी तनु ने बहुत कुछ फेस किया है उसका दर्द उसकी पीड़ा गांव वालो के ताने और वही साक्षी जिससे हर दिन मार खाते हुए सुनना

और इन दोनो की वजह से बेचारी अनु को घर में कैद कर दिया गया

तनु कुछ कहती लेकिन उसकी नजर तभी काव्या पर पड़ती है जो तकिया फेक रही थी वीर पर

काव्या - ही ही ही ही पापा ये लो ये मेरी प्यारी तकिया है

तभी वो तकिया वीर को लग जाती है और वीर गिर जाता है

तभी काव्या उछलने लगती है और दोनो हाथ से नेता की तरह हिला कर कहती है थैंक्यू

वही ये देख कर तनु को हँसी आ जाती है फिर उसकी आंखों में आँसू आ जाते है

एक साल पहले उसकी बेटी बस घर पर अकेले रहती ना बोलती है ना हँसती है।

तभी उसके कंधे पर किसी का हाथ फील होता है और वो देखती है उसके एक तरफ साक्षी और दूसरी तरफ अनु लटकी है

फिर दोनो अलग होती है और साक्षी कहती है आदत डाल लो ऐसे

तभी वो दोनो अलग होते है और निधि वापिस से काव्या को बुलाती है लेकिन तभी काव्या चुपके से बाहर जाकर रूम का गेट बंद कर देती है

ये देख कर अनु को हँसी आ जाती है और कहती है कुछ कांड किया इसने तभी तनु अंदर आती है देखती है रूम अब कबाड़ हो चुका था
 
और तनु को देख कर काव्या डर जाती है और चुप हो जाती है और वीर उसको इशारे से मना करता है

तभी तनु कहती है बिल्ली कही की ये रूम को क्या किया

काव्या - मम्मी ही ही ही

काव्या तनु के गले लग जाती है और फिर तनु खाना निकाल देती है जिसमें खाना कम था और खाने वाले ज्यादा

तभी अनु कहती है मुझे भूख नही है तभी साक्षी अंदर आती है और अपनी सैंडल उठा लेती है जिसको देख कर अनु कहती है अब भूख लग गई।

तभी वीर ये सीन देख कर उदास हो जाता है क्युकी ये अब उसकी ज़िम्मेदारी थी की वो घर पर किसी चीज की कमी ना रहने दे और उसके घर पर खाने का भी समान नही था।

वही तनु गांव के बच्चो को ट्यूशन देती थी जिससे उसको कुछ पैसे मिल जाते थे क्युकी उदय भान उसको पैसे देता नही था

और अब साक्षी और अनु उसके पैसे लेंगी भी नही

तभी साक्षी वीर को देखती है और उसके हाथ पकड़ लेती है उसको अच्छे से पता था वीर क्या सोच रहा था उसकी हरकते किसी नए नए पति के जैसे थी।

अनु और तनु ये नोटिस करती है

तभी साक्षी कहती है खाना खाओ फिर हम भी खाए भूख लगी है

वीर खाना खा लेता है और फिर सब खा लेते है थोड़ा थोड़ा।

तभी वीर काव्या के पास जाता है और कहता है चॉकलेट खाओगे बेटू

काव्या कुछ सोचती है फिर कहती है नही मुझे नही चहिए उसके बदले मेरी मम्मी के लिए साड़ी ला दोगे सब मेरी मम्मी को चिड़ाती है की मेरी मम्मी के पास साड़ी नही है

तभी वीर कहता है आपके पापा का प्रोमिस है आज आपके लिए बहुत सारी चॉकलेट लाऊंगा और बहुत साड़ी लाऊंगा आपके लिए

काव्या - प्रोमिस

वीर - हाँ प्रोमिस

काव्या - नही पिंकी प्रोमिस करो

वीर- अरे ये कैसे करते है

काव्या - अरे बुधु अपनी उंगली बड़ी उगली के पीछे रखो फिर कहो

वीर हँसते हुआ कहता है ओके पिंकी प्रोमिस

तभी वीर को याद आता है दुकान से तो रेडिमेट ब्लाउज भी आता है फिर वीर चुप चाप साक्षी के पास जाता है लेकिन वो और अनु सहेली के घर चली गई थी साथ मैं काव्या को भी ले कर चली गई।

तभी वीर तनु के रूम में जाता है जहा वो अपना पेटीकोट और साड़ी फट गई थी वो सिल रही थी वीर को देखते ही वो कहती है चिल्ला कर क्या है झाँक क्या रहे हो

वीर कुछ नही कहता बस अलमारी ओपन कर के देखता है कोने में तनु की ब्रा रखी हुई थी फिर वो उसको टच करता है ये देख कर तनु गुस्सा हो जाती है और उसकी आंखे लाल हो जाती है और बहुत तेज थप्पड़ मारती है वीर को कहती है ये क्या बदतमीजी है

तनु - इसी लिए मेरी बेटी के पास आ कर अपना रहे हो हवस में अंधे हो गया हो याद रहे मैने साथ रहने का फैसला किया है बेटी के लिया तुमसे प्यार नहीं है तुम एक गिरे हुआ हवस से भरे इंसान हो जो तुमने मेरे साथ किया ना वो याद है

तनु - निकल जाओ वर्ना अच्छा नही होगा

वीर ये सब सुन कर बस अपनी नम आंखों से आँसू पोछते हुए कार ले कर चला जाता है

वीर - तुम मुझे मत अपनाओ लेकिन तुमको मैं जीना फिर से सीखा दूंगा साक्षी और तनु ये मेरा वादा है तुम्हारी नजरो में चाहे जितना गिर जाऊ लेकिन अपनी बेटी की नजरो मैं नही गिरना चाहता अब चाहे मर जाऊ लेकिन किसी को भी तुमको ताने नही मारने दूंगा।

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वीर ये सब सुन कर बस अपनी नम आंखों से आँसू पोछते हुए कार ले कर अपनी चला जाता है

वीर - तुम मुझे मत अपनाओ लेकिन तुमको मैं जीना फिर से सीखा दूंगा साक्षी और तनु ये मेरा वादा है तुम्हारी नजरो में चाहे जितना गिर जाऊ लेकिन अपनी बेटी की नजरो मैं नही गिरना चाहता अब चाहे मर जाऊ लेकिन किसी को भी तुमको ताने नही मारने दूंगा।

अब आगे -

वीर ऐसा कह कर चुप चाप कार की चाबी ले कर निकल गया को शायद काम ही मिल जाए कुछ।

लेकिन वीर अच्छे से जानता था, ये गांव है यहां पर उसको काम मिलेगा,तो भी मेहनत वाला और वो उससे होगा नही हा! भोसड़ा मारने को मिल जाए तो कह नही सकता।

तभी वीर कार ले कर चुप चाप गांव में जा रहा था लेकिन शाम का टाइम था तो ज्यादा भीड़ थी लेकिन वो किसी तरह कार ले कर जा रहा था

वीर कही भी काम मागता लेकिन काम उसको मिल नही रहा था तभी वीर को याद आता है वो टूर का काम करता था वहाँ कार का काम शायद मिल जाए फिर तो उसकी खुद की भी कार भी थी।

तभी गांव के एक टूर का काम करने वाले जमीदार के पास गया

जमीदार - का हो बबुआ! का हाल चाल बा।

जमीदार को लगा कि वीर कोई कार बुक करने वाला कस्टमर है

तभी जमीदार कहता है वीर के बोलने से पहले " देखो बबुआ अभी कोई कार खाली ना बा"

तभी वीर कहता है " अरे नही चाचा मैं खुद काम मागने आया हूं "

वीर की बात सुन जमीदार हँसते हुआ कहता है " का काम कर लेवा हो"

वीर उससे कहता है " चाचा कुछ भी लेकिन नौकर छोड़ कर "

उसकी बात सुन कर जमीदार कहता है तो ससुरा ये का कंपनी है का जाऊंन तोहका रख देई।

वही वीर जमीदार की बात सुन कर कहता है नहीं चाहिए तुम्हारी नौकरी रखो अपने पास लेकिन मेरे सामने आवाज़ ऊंची मत करना कोई मेरी पत्नी नहीं हो जो तुमसे डरूंगा।

तभी वीर अपनी कार की चाबी निकाल लेता है

तभी जमीदार ये देख कर उसको रोक लेता है और कहता है " एक काम है तुम्हारी कार खुद की है "

वीर - हा

जमीदार - तब अच्छा है घरवाली है तुम्हारी

वीर - हाँ है घरवाली मेरी 3 ठौ काहे तू भी एक दोगे का

जमीदार - बबुआ अच्छा मजाक करता है, हम तोहका टूर के काम पर रख देता हूं, लेकिन रोज के 2500 देब और पेट्रोल के अलग से लेकिन हमार हर बात माननी पड़ेगी।

वीर - ठीक है

तभी जमीदार कहता है हम रमाकांत है हमका यही कहा करा अब से

वीर उसकी बात मान लेता है तभी वो जोर से आवाज लगाता है अरे बिट्टू बाहर आओ

तभी एक औरत चाय ले कर बाहर आती है

रमाकांत - ये अब काम करेगा टूर का और रोज तुमको पैसा दे देगा ला कर

रज्जो - ठीक है जी

फिर रज्जो अंदर चली जाती है और जमीदार कहता है देखो यहां पर कार के अच्छा खासे पैसे मिलते है तभी रमाकांत वीर को दूसरे शहर भेज देता है और कहता है " दूसरे शहर में एक ई जगह पर जा कर इनको ले कर आना है

तभी वीर कार ले कर चला जाता है और कहता है मादरचोद साला इतनी दूर भेज रहा है

तभी वीर कार चुप चाप चलाने लगता है

…………………………………………….
 
इधर घर पर काव्या और साक्षी नीचे से ऊपर आती है खेल कर

तभी काव्या कहती है चलो ना जल्दी मम्मी पापा को परेशान करना है

तभी काव्या ऊपर आ जाती है और कहती पापा…………..

तभी तनु ऊपर उसको कपड़े सिलते हुआ दिख जाती है जो उसको कहती है पापा कही बाहर गए है

तभी काव्या उदास हो जाती है और उसको ऐसे देख कर तनु का मन बैठ जाता है।

तभी साक्षी कहती है थोड़ी देर में आ जाएंगे पापा बेटू

तभी साक्षी अंदर आती है और कहती है खाने का क्या होगा

तभी तनु कहती है क्या होगा क्या थोड़ा चावल है बस वही फ्राई कर दूंगी सब खा लेंगे और कुछ लाने के पैसे नही है

तभी साक्षी कहती है उस रांड़ ने तो फकीर बना दिया कुछ करना पड़ेगा वर्ना इतना लोगो के खर्चा कैसे चलेगा।

तभी साक्षी कहती है तूने कुछ कांड किया क्या ये अचानक से वीर क्यो चला गया

तभी तनु कहती है मुझे नहीं पता और मैं जानती भी नही हट सामने से साड़ी सिलने दे

तभी अनु ये सुन लेती है जो अभी अभी आई थी वो ये सुन कर कहती है लगता है पिट कर गया है ही ही ही ही

तभी साक्षी उसको चुप कराती है कहती है जा कर काव्या के साथ खेल समझी

इधर वीर भी शहर आ गया था तभी वो जिस जगह रुकता है वहाँ एक औरत आती है

"ए ड्राइवर चल बैग रख कार में"

जिसको सुन कर वीर कहता है " मैं कार चलाने के पैसा लेता हूं समान रखने के नही"

तभी वो औरत वीर को घूरती है और सामन रख देती है और

चुप चाप बैठ जाती है

तभी कार चाल पड़ती है जिसको देख कर वो औरत कहती है देखो अगर मेरी तरफ देखा ना तो आंखो को नोच लुंगी

ये सुन कर वीर हँसता है मैं भी तुमको देखने के लिए मरा नही जा रहा समझी शौक नही पड़ा मुझे तुमको देखने का

तभी वीर कहता है इतनी अकड़ ले कर कहाँ जा रही हो गांव में

औरत - वहाँ स्कूल में मेरी नौकरी लग गई है टीचर की वही रहूंगी अब बेटी के साथ

तभी वीर देखता है उसका बेटी भी इधर है तभी वीर कार चलाते हुए आने लगता है तभी वो एक सुन सान रोड पर गाड़ी रोक देता है

जिससे वो औरत डर जाती है और कहती है -- नहीं मुझे कुछ मत करो तुम मुझसे पैसे ले लो मुझे मत करो

वीर - अबे चुप करो यार कितना बोलती तुम्हारे पास क्या है लेने को मोटी

तभी वीर कहता है उससे की कार पंचर हो गई है रुक जा कुछ मिनट बना लूं।

………………………………………………………..

इधर घर में अब काव्या परेशान हो गई और कहती है मम्मी आप ने ही कुछ किया जो पापा चले गए।

तभी तनु कहती है तुम्हारे पापा कहाँ जाएंगे हम सब को छोड़ कर आगे पीछे ही घूमेंगे हम सब के परेशान मत हो ना बेटू थोड़ी देर में वो आ जाएंगे।

काव्या - नहीं मम्मी कॉल करो ना पापा को, मुझे नहीं चहिए चॉकलेट बस पापा को बुला दो।

साक्षी - क्या मतलब बेटा

काव्या - वो कुछ नहीं आप कॉल करो ना पापा को

फिर उसकी बात मान कर साक्षी ने कॉल किया उसको लेकिन फोन तो कार में था जिसकी वजह से वीर उठा नही सकता था।

वीर भी पंचर बना कर उस लड़की को सीधा जमीदार के घर उतार देता है क्युकी अब वो वही रहेगी।

तभी जमीदार आता है बाहर और कहता है आओ आओ चमेली , कोई तकलीफ तो नही हुई आने मैं

तभी चमेली कहती है नही कोई दिक्कत नही हुई वीर ने सब अच्छे से संभाल लिया।

तभी वीर कहता है अब रात काफी हो गई है मेरे पैसे दे दे मैं चलूं।

ये सुन कर चमेली वीर को 3000 दे देती है जिसे वीर स्माइल कर के चला जाता है

वीर वहाँ से निकलते टाइम देखता है रज्जो जमीदार की बेटी ऊपर खड़ी चमेली को घूर रही थी और उसकी आंखो में नमी थी।

लेकिन वीर वहाँ से निकलने लगता था तभी उसको जमीदार रोकता है और कहता है वीर कल 1 बजे आ जाना मैं कॉल करूंगा, दोपहर को कही चलना है।

वीर उसकी बात मान कर मुंडी हिला देता है

………………………………………………….

इधर साक्षी वीर का फोन नहीं उठाने से परेशान हो जाती है और तनु को देखती हैं।

तभी तनु कहती है पता नहीं किस लन्ड से मेरी किस्मत लिखी गई थी।

तनु की ये बात सुन कर साक्षी और अनु हँस हँस के गिरी जा रही थी।

तभी साक्षी कहती है ध्यान से काव्या के पास रहना हम पापा को ले कर आते है।

तभी तनु और साक्षी गुस्से मे नीचे आते है और तभी नीचे आने पर मधु चाची और भाभी किसी बात को लेकर बात कर रहे थे।

वही तभी तनु गुस्से मे नीचे आती है तभी मधु उसको कहती है अरे बेटा तनु और साक्षी तुम दोनो का पति क्या करता है 3 पत्नियां है अब।

इतना सुन कर तनु का दिमाग तो पहले भी हिला हुआ था लेकिन ये सुन कर और हिल जाता है, लेकिन तभी तनु कहती है कुछ भी नहीं करते चाची हम तीनो को बारी बारी चोदते है क्यों,आपको भी चुदवाना है क्या?

उसकी ये बात ऊपर खड़ी अनु और भाभी सुन लेती है जो फिर हँसने लगती है तभी साक्षी कहती है माफ करना चाची ये तो है ही पागल।

इतना कह कर साक्षी तनु को ले कर बाहर निकल जाती है।

तभी तनु से साक्षी कहती है और बता सच्ची सच्ची वीर के आने से अब अच्छा लगता है ना।

वही ये बात सुन तनु रुक जाती है क्युकी वो खुद जानती थी लेकिन फिर तनु आगे बढ़ जाती है और जब दोनो गेट पर आते है तो एक कार आ कर रुकती है।

साक्षी और तनु देखते है तो ये वीर था साथ मैं कई चीज भी थी उसके पास जो वो साक्षी को पकड़ा देता हैं।

तभी साक्षी वो सब पकड़ लेती है आगे जाने लगती है तभी रुक जाती है और पीछे देखती है तो वीर वापिस से उन्हे ताड़ रहा था।

साक्षी - ऊपर चल कर घूर लोगे तो कोई दिक्कत होगी क्या?

वीर ये सुन झेप जाता है और आगे चलने लगता है ऊपर आते ही वीर के ऊपर काव्या कुद पड़ती है और कहती ही ही ही पापा कहा चलें गए थे मुझे लगा आप फिर हम छोड़ कर चले गया मुझे और मम्मी को छोड़ कर।

वही उसकी ये बात तनु सुन लेती हैं और वो काव्या देखती है तो उसकी खुशी देख कर के हँस देती है।

इधर वीर काव्या को उतार के नीचे रूम में लाता है और खूब सारी चॉकलेट उसके सामने रख देता है जिसको देख कर तनु की आंखे चोड़ी हो जाती हैं।

तभी ये देख कर के अनु आती है और कहती है रुको मैं खत्म करने में मदद करती हूं काव्या।

काव्या अपनी टूटी आवाज़ में कहती है नही छोटी मम्मी, मम्मी देखो ना ये मेरी चॉकलेट

लेकिन तभी काव्या को कुछ और याद आ जाता है वो सभी झोले में चेक करती है और देखती है 4 साड़ी पड़ी हुई थी।
 
ये देख कर साक्षी आगे आती हैं और देखती है एक बैग मैं ब्रा और पँटी पड़ी हुई थीं जिसको देख कर वो नोटिस करती है ये किसके लिए है और हँसते हुए तनु की ओर देखती है।

तनु - कमीनी भाग इधर से रुक तू जरा।

साक्षी - मेरे पर क्यो गुस्सा हो रही हैं, मैने थोड़ी लाया है ये सब

तभी साक्षी आगे आती है और कहती है बाकी की बैग चेक करने दे हट।

साक्षी और तनु चेक करते हैं तो देखती है एक बैग मैं सब्जी पड़ी हुई थी और सेंटरी पॅड पड़ी हुई थी।

ये देख कर साक्षी और अनु फिर हँसने लगते है और इस बार तनु के गाल ही लाल हो हुए थे वो समझ नही पा रही थी क्या रिएक्शन दे।

क्युकी अब वीर की हरकतें जैसी भी हो वो खुश तो रख रहा था सभी को।

तभी अनु एक लास्ट बैग चेक करती है और कहती है मेरे लिए क्या लाया है वो देखती है तो जींस और टॉप दो सेट थे उसके लिए।

ये देख कर वो कहती है "ये मेरे लिए है क्या "।

तभी तनु कहती है अब हम दोनो को तो ये साइज होता नही और काव्या छोटी सी है।

तभी तनु फिर उदास होती है क्युकी उसको लगा था वीर काव्या के लिए कुछ नहीं लाया तभी वो कुछ और कहती तभी एक थप्पड़ उसके सर में पड़ता है जो बहुत ज़ोर से पड़ा था।

साक्षी - किसकी याद मे खोई है रात को खोना यादों में इतनी देर से चिल्ला रही हूँ बैग मैं काव्या के कपड़े हैं निकाल हाथ मे पकड़ कर बैठी है छोड़ हट।

तभी तनु का ध्यान आता है और उसकी आंखे नम हो जाती है ये पहली बार था जब उसकी बेटी के लिए नए नए कपड़े आए थे और ऊपर से वीर ने थप्पड़ के बाद भी ऐसा किया।

वो एक टक वीर को देखती है जो बाहर बैठा हुआ था।

तभी अनु कपड़े साइड कर देती है और कहती है " मुझे नहीं चाहिए किसी ऐसे इंसान से कपड़े''

उसकी ये बात साक्षी और तनु सुनती हैं और बाहर आती है वीर के पास जो मुंह धुलने जा रहा था।

साक्षी - तुम वीर को मुंह धुलवा कर लाओ मैं चाय बनाती हूं और अच्छे से पूछ लेना सब सारी बात

तभी साक्षी वापिस रूम में आती है और चॉकलेट खाने लगती है क्युकी अभी तक काव्या अकेली खा रही थी।

ये देख कर अनु की आंख बड़ी हो जाती है दीदी आप उसकी लाई हुई चॉकलेट क्यो खा रही हो।

साक्षी - तो तू मत खा ना, वैसे भी ऐसे इंसान के हाथ से नही खाना चहिए।

ऐसा कह कर साक्षी काव्या से कहती है बेटू ये वाली चॉकलेट अच्छी है वो कोने से समोसा निकाल ना, दोनो मां बेटी खाते है।

ये सब आंखे फाड़े अनु देख रही थी उसको अपनी बहन पर यकीन नही हो रहा था।

तभी वीर मुंह धुलने के लिए बाथरूम में आता है जहा पर उसके साथ तनु होती है, वीर को देख रही थी।

तनु - काव्या के कपड़े लाने के लिए थॅंक यू

वीर - बेटी है, वो मेरी उसकी खुशी के लिए मैं कुछ भी करूंगा।

वीर - तुमको साड़ी पसंद आई

तनु कुछ नही बोलती तभी वीर कहता है वो पर्पल वाली पहन लेना ना मैने बड़े प्यार से ली है एक साथ बहुत साड़ी लाने के पैसे नहीं थे क्युकी घर के सामान भी लाने थे।

वीर - बस मेरी बेटी को फटे पुराने कपड़े मत पहनाया करो और मैं हूं हवसि क्या करू नही बदल सकता खुद को ना, तुमसे प्यार करता हूं जो सही लगता है वो करता हूं।

वीर - वैसे एक बात बताऊं

तनु - हाँ

वीर - इमोशन करवा कर तुमको साक्षी रूम से बाहर भेजना चाहती थी क्युकी समोसा और टिकिया अंदर है।

तनु - अरे! खाने के बाद बात करती हूं हा।

ऐसा कह कर तनु भाग जाती है और साक्षी को देख कर कहती है डायन

साक्षी - गुस्सा क्यो होती है तू भी बैठ के खा ना।

तभी तनु भी बैठ कर खाने लगती है जिसे देख कर अनु अब हिल जाती है।

अनु - दीदी

साक्षी - दीदी दीदी क्या कर रही है चल खाना बना, तू हम खा कर बनाते है।

तनु - तुझे खाना है या नही

साक्षी - जल्दी बता फिर हम खा ले

तनु - चल मत खा मैं खा लेती हूं।

अनु - दीदी

साक्षी - क्या है

अनु - मुझे समझ नही आ रहा

तनु उठती है और कहती है ज्यादा समझ मत ये समोसा ठूस बैठ कर और फिर तनु साड़ी अलमारी में रखने लगती है और पुरानी वाली फटी हुई फेक देती है।

तभी साक्षी कहती है रेड वाली साड़ी मेरी तनु ठीक है पर्पल वाली मेरी।

तनु- अनु जरा गारमेंट्स देना

साक्षी - रुक मैं देती हूं ये सटक है, अब तो खाना बना दे मेरी मां

तनु - हाँ चावल सब्जी बना देती हूं वैसे भी खाया तो सब ने

साक्षी - ठीक है मैं वीर के पास हूं तब तक तुमने पूछा था उससे

तनु - में गई थी बट पूछी नही तुम कर लो मैं खाना बना देती हूं।

तभी साक्षी बाहर निकल जाती है और वीर के बगल आ कर बैठ जाती है।

वीर - हल्लो

साक्षी - ही ही ही हेलो, अब बताओ कहाँ से लाए इतने पैसे

वीर - जमीदार के यहाँ कार टूर का काम किया 3000 मिले और कुछ पैसे मेरे पास थे पहले।

वीर - तुम मुझसे गुस्सा हो क्या।

साक्षी - क्यो मैं क्यों होने लगी गुस्सा।

वीर - तुम्हारे अलावा तो कोई है भी नही जो मुझसे सही से बात करे, लेकिन तुम भी तो बात नही करती तो अकेले फील होता है,

साक्षी - अरे इतना सब अकेला सोच लिया जरा मेरी तरफ देखा, तनु की तरफ देखो काव्या को देखो जो अपनी मम्मी के पास बैठी खाने में मस्त है, हाँ थोड़ा गुस्सा है हम सब लेकिन मानलो तुम ना तुम्हारे ही है।

साक्षी - चाहे तुम हो या कोई और लेकिन इसी शरीर ने हमारे साथ खिलवाड़ किया था इतनी आसानी से कैसे भूल जाए सब हा।

वीर- आइ लव यू अब तो मैने साबित किया ना की मैं तुमसे प्यार करता हूं, अब तो मेरे साथ रहने में तुमको दिक्कत नही है।

साक्षी - आइ लव यू टू इतना सोचने की जरूरत नही है हम सब तुम्हारे है।

तभी तनु कहती है चलो अब खाना खा लो फिर फुसलाना हम सब को

तभी वीर अंदर रूम में आता है और उसको तनु हँसते हुए दिखती है वो ये देख कर खुश हो जाता है।

तनु - अभी भी नहीं है मेरी समझे दात मत दिखाओ।

ये सुन कर वीर तनु और साक्षी को देखता है जो भले ही पहले ही टूट चुके थे लेकिन अब वीर ने उनको जोड़ने का काम शुरू कर दिया था।
 
तभी वीर की नजर अनु पर पड़ती है

वीर सोचता है ये लड़की तो पूरा का पूरा साक्षी की फोटो कॉपी है //cdn.jsdelivr.net/gh/twitter/twemoji@latest/assets/svg/1f602.svg बस थोड़ी पतली है।

तभी काव्या कहती है छोटी मम्मी देखो पापा आप को देख रहे है अब।

वही ये सुन कर वीर अब खाने पर ध्यान देता है और तनु उसकी प्लेट में और डाल देती है।

फिर खाने के बाद वीर चुप चाप बाहर आ जाता है और साक्षी बाहर बिस्तर लगाने लगती है और तनु भी काम कर के आने लगती है।

अनु - सोना कहा है दीदी

साक्षी - देखो मैं और तनु और ये बाहर सोते है।

अनु - मैं कहा लेटू

साक्षी- अनु तू भी वाइफ है समझी साथ मैं चल कर सो और तू भी जानती है वो तेरे हसबैंड है नई शुरुआत हुई है वैसे भी तू खुश है या नहीं ये तेरा दिल जानता है।

तनु - बस कर वो समझ गई।

इधर बेड पर वीर काव्या को जकड़ कर सुला रहा था, और साक्षी को ताड़ रहा था जो बहुत खिली खिली लग रही थी।

वही रात का टाइम था और अब काव्या सो गई थी और वीर उसको प्यार से सुला दिया और काव्या के बगल तनु आ कर लेट गई और वहीं वीर के बगल साक्षी और फिर अनु।

वीर लेटा हुआ था उसको नींद नही आ रही थी तो वो बाथरूम करने के लिए उठा हुआ था।

वो जब सीढ़ी के पास पहुंचा तो उसको शोर सुनाई पड़ा तो वो शोर की तरफ बढ़ा।

गांव के दरवाजा तो होता ही है खतरनाक तो उसने चुपके से झांकना सही समझा और जैसे ही वीर ने नज़र अंदर की ओर की उसकी आंखे ही जम गई गेट पर।

सामने साक्षी का भाई राज अपनी पत्नी को चोद रहा था

राज निधि को पेट के बल लिटा कर पीछे से चोद रहा था और उसकी ही आवाज आ रही थी

निधि - आह आह.. आ थोडा रुक रुक आआआ आ आराम से करिए ना देर तक चलेगा मजा आएगा आ हाए ओह यारर समझा करो ना उह उह मां यार समझ नही आती क्या

राज - चुप करो आने वाला आआआआआआआ मेरी जान धीरे मजा नही आता

निधि - अरे आआआह उह उह उह नही रुको

लेकिन तब तक निधि के अंदर झड़ चुका था।

निधि - जब कर नही पाते तो दवा ले लो ना हद है ।

इधर वीर ये देख कर जल्दी से भाग गया ऊपर और निधि वापिस गेट पर आती है तो उसको पता चल गया था की कोई था गेट पर तभी उसको ऊपर का गेट बंद होने की आवाज आई।

इधर वीर ने पहली बार सामने से चूदाई देखी थी उसकी साँस बस ऊपर नीचे हो रही थी।

तभी वो वापिस लेट जाता है जहा उसके जस्ट बगल साक्षी लेटी हुई थी वो आपने कापते हुआ हाथो से साक्षी के कमर को सहलाता है।

वही ऐसा करते ही उसकी साँस जम गई आज अपनी खुद की मां को ऐसे इतने करीब देख उसकी साँस अटक रही थी लेकिन फिर वो हिम्मत कर के उसके और करीब आ जाता है।

फिर वो अपनी एक टांग साक्षी के ऊपर रख देता है और उसके बाद उसकी नजर साक्षी के चूचो पर पड़ती है जो देख कर उसकी साँस और तेज हो रही थी।

फिर कोई भी लड़का अपना कंट्रोल खो दे तो वीर तो फिर भी पहली बार किसी लड़की के साथ था वो जल्दी से साक्षी के ऊपर आ जाता है और उसको दबोच लेता है।

तभी साक्षी की नींद खुल जाती है और वो चीखती उसके पहले वीर ने उसका मुंह दबा दिया।

वीर - प्लीज चीखना मत प्लीज मैं तो बस तुम्हारे साथ मैं बहक गया था माफ कर दो।

साक्षी बस हाँ मैं मुंडी हिला देती है, और ऊपर से हट जाता है वीर।

वही वीर अब बहुत ज्यादा डर रहा था जिसकी वजह से साक्षी हँस देती है और उसके सीने में घुस जाती है और धीरे से कहती है मैने तो कुछ कहा भी नही फिर भी डर रहे हो।

वीर - ए एक किस कर सकता हूं।

साक्षी - चुप चाप सो जाओ हग करने दे रही हूँ ना

वही साक्षी, वीर को ऐसे तड़पते देख बहुत हँसी भी आ रही थी आज उसको पाने लिए कोई तड़प रहा था।

थोड़ी देर बाद साक्षी सो जाती है और फिर वो करवट ले लेती है।

तभी उसकी नजर तनु पर पड़ती हैं जो सोई हुई थी करवट ले कर
 
पहले तो वीर उसको देख कर आंखे बंद कर लेता हैं लेकिन फिर उसको बाहों में जकड़ लेता है।

और उसकी कमर कस लेता है और उसका पल्लू हटा कर उसकी पीठ पर सर रख देता है।

थोड़े टाइम बाद तनु की नींद खुल जाती है और वो देखती है वीर उसको जकड़ कर के सोया हुआ है

पहले तो तनु उसको मारने के लिए आगे बढ़ती है लेकिन फिर उसको वीर की बात याद आती है जो उसको कह रहा था मैं तुमको प्यार करता हूं।

तनु - अगर बात मेरी बेटी की खुशी की है तो मैं ये माफ कर सकती हूं और ऐसा कहते हुए वो वीर के हाथ को हटा देती है और कहती है अब सब खत्म हो चुका है वीर,अब तो मैं टूट चुकी हूं। शायद तुम मेरी खुशियां वापिस ला पाओ।

तभी वीर नींद में था और उसने तनु की कमर को लॉक किया और उसके ऊपर लेट गया और उसके चूचों पर सर सर रख कर लेट गया।

तनु वीर को धकेलने वाली थी तभी उसको आवाज आती है वीर के बड़बड़ाने की

वीर - तनु मत जाओ, तनु , रुक जाओ प्लीज। मुझे मत छोड़ो।

अचानक वीर कांपने लगता है और उसको कापते हुआ देख कर तनु एक तरफ देखती है जहा उसकी बेटी सोई हुई थी और उसके ऊपर उसका पति।

लेकिन तनु धीरे से वीर को अपने ऊपर से हटा देती है और उससे थोड़ा दूर हो कर लेट जाती है।

थोड़ी देर बाद तनु पलट कर देखती है तो वीर हाथ चला कर उसको ढूंढ रहा था।

फिर तनु स्माइल कर देती है उसको ये खेल अच्छा लग रहा था।

ऐसे ही रात गुजर जाती है।

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फिर तनु स्माइल कर देती है उसको ये खेल अच्छा लग रहा था।

ऐसे ही रात गुजर जाती है।

अब आगे

सुबह सुबह चिड़ियों की चह चहाने से साक्षी और तनु की एक साथ ही नींद खुल जाती है जिससे वो देखती है की उन दोनो ने ही वीर को अपने अपने साइड जकड़ रखा है और दोनो ने अपनी टांग वीर के ऊपर लाद रखी है।

तभी उन दोनो की नज़र आपस में पड़ी तो दोनो झेप जाती है और दोनो ने जल्दी से वीर को देखा।

साक्षी - सो रहा है।

तनु - अनु

साक्षी जल्दी से अनु को देखती है जो सो रही थी।

साक्षी - वो भी सो रही।

तभी अनु खासती है और दोनो जल्दी से आंखों को बंद कर लेती है।

जैसे ही उन दोनो को कन्फर्म हुआ की अनु सो चुकी है दोनो जल्दी से उठ जाती है और रूम में भाग लेती है।

साक्षी - ओए सेक्सी सुनो जरा

तनु - क्या है

साक्षी - रात को मेने देखा कुछ

तनु - क्या

साक्षी - मैने देखा एक लड़की रात को खेल रही थी

तनु कुछ नही बोलती और साक्षी फिर हँसते हुआ जाने लगती है तभी तनु कहती है उसको

मैने भी कुछ देखा वैसे

साक्षी - क्या देखा

तनु - मैने देखा एक लड़की रात को चुप चाप हँस रही थी और सीने में घुसी हुई थी

अब साक्षी कहती है सच्ची बताऊं तो उसके साथ रहने में अच्छा लगता है।

तनु - हाँ दिन भर गांड़ के नशे में चूर रहता है घूरता रहता है।

साक्षी हँसते हुआ कहती है बेचारा अब क्या करे हम दोनो को देख कर ही काम चला लेता है।

तनु - लेट हो रही है खाना बना कितनी देर तक सो रही थी हम दोनों।

साक्षी - कुत्ते ने ऐसे चिपका रखा था की बहुत प्यारी नींद आई पता ही नही चला कब सुबह हो गई यार

तनु - मेरी बेटी अब खुश रहने लगी है।

साक्षी - और तू

तनु - काम कर मैं नहा कर आती हूं

साक्षी उसका हाथ पकड़ लेती है और कहती है मुझे जवाब चहिए।

तनु - मुझे कोई जवाब नही देना और अगर मेरी बेटी की खुशी जरूरी है तो उसके लिए सब करूंगी

साक्षी - अच्छा और अगर तुझे उसने खुश रहना जीना सीखा दिया तो

तनु - तब तू जो कहेगी।

साक्षी - फिर वादा कर खुद प्यार से साड़ी उतारेगी

तनु - ठरकी कही की चल वादा लेकिन दिल्ली बहुत दूर है समझी।

तनु वहाँ से निकल जाती है और साक्षी दूर खड़ी हो कर उसे देख रही थी और कहती है एक बार हम दोनो को जीना सिखा दो ना वीर तुमने जो गलती करी है वो तुमको ही सही करनी पड़ेगी एक बार सब ठीक कर दो फिर वादा करती हूं खुद साडी उतारूंगी।

तनु - चल हट लंबी लंबी सोचती है,खाना तुझे बनाना है।

साक्षी - सोच ही सही लेकिन अब एक आस तो है

तभी वो दोनो बाहर आती है तो दोनो की नज़र ही जम गई थी।

सामने अनु वीर को बाहों में भर कर के लेटी है और वीर उसके ऊपर लेटा है।
 
साक्षी - बड़े ही सेक्सी अंदाज में लेटी है देखो, और दिन भर हम दोनो को बोलती फिरती है की मैं वीर से नफ़रत करती हूं, ये बोल बोल कर मेरा दिमाग खा गई और सोई देखो कैसी है।

तनु - उसकी कोई गलती नही है चल अब

साक्षी - नही चलूंगी तू चल मैं अपनी बेटी के साथ नहाउन्गी आज

तनु - मुझे पता है तू कितनी संस्कारी है चल अब

तभी साक्षी कुछ बोलने वाली थी लेकिन तनु उसका मुंह दबा देती है।

साक्षी - नही उठाऊंगी पक्का

तभी तनु उसका मुंह छोड़ देती है और साक्षी चिल्लाती है "ओए ठरकी उठ जा"

………………………………………………………

इधर राज अपने पापा उदय के साथ बैठा था जो खेत के सिलसिले से बात कर रहा था।

राज - पापा जमीदार हमारी जमीन पर पानी नहीं आने देता कुछ करना पड़ेगा वर्ना इस साल की फसल खराब हो जाएगी।

तभी उसके चाचा कहते है बेटा राज वो जमीदार से हमारी बनती कम है हमीं ने उसके स्कूल को खुलवाने से रोका था वही बदला ले रहा है वो साला

उदय - तुम कुछ मत करो वर्ना वो इंसान बहुत बुरा है मारने से पहले सोचेगा नही।

राज - लेकिन उसका दिल जीत लिया तो, जन्नत का मजा है फिर

तभी रसोई में चाय बना रही निधि ये सुन कर कहती है जन्नत का मजा बहन चोद साला रात को बिस्तर पर चोदता नही बड़ा आया जन्नत।

निधि - साला कहती हूं धीरे धीरे चोद ना, चूस तब मजा भी आया बीवी को खुश रख नही पाता ।

तभी उसको राखी कहती है अरे बिट्टू कब क्या सोच रही हो बेटा

निधि - कुछ नही बुआ

राखी - बीवी को खुश रहने के लिए पति का साथ जरूरी है।

निधि कुछ बोलती तभी उसको आवाज आती

"रुक जा डायन, आज तेरा सर फोड़ दूंगी"

"ही ही ही ही ही ही"

"तू तो पिशाचिनी है पता है"

तभी ये सुन कर निधि कहती है बुआ बीवी के खुश रहने के लिए पति का पास होना जरूरी है साथ जरूरी है।

राखी कुछ कहती तभी उसको निधि कहती है कभी तनु और साक्षी को इतना खुश देखा है पहले दोनो जो हमेशा खोई रहती है अब एक सा तेज आ गया है उनकी आंखों में।

राखी - अब सब ठीक हो जाएगा

निधि - हाँ वीर के पास होने से वैसे हमारी बिल्लो अब अच्छे से लाइफ जीयेगि।

राखी - मैं हैरान हूं ये घर की खिसयाई बिल्ली से शादी होने के लिए कैसे मान गई तनु और साक्षी।

निधि - दोनो की लाडली है और ऊपर से डिट्टो साक्षी की तरह दिखती है।

इधर इतना हल्ला सुन कर अनु की नींद खुल जाती है वो जब आंखों को खोलती है तो देखती है आजू बाजू उसकी बहने जा चुकी थी।

अनु- फिर देखती है की वो वीर के नीचे सोई है

तभी अगले ही पल वो वीर को धकेल देती है और उसकी साँस पूरी ऊपर नीचे हो रही थी।

पहली बार किसी ने अनु के जिस्म को छूआ था बेचारी कप कापा गई इस बात से।

तभी ये झटके से वीर उठ जाता है।

तब तक अनु जा चुकी थी।

वीर- ये सुबह सुबह बहन चोद पेल गया, मेरी भी जिंदगी मेंटोस खा कर लिखी गई थी एक से एक सुंदर लड़की मेरी वाइफ जिसके ख्वाब सब देखते है वो वो मेरी है।

वीर - लेकिन मजाल है किसी को हाथ भी लगा दूं मां चोद देंगी मेरी।

वीर - लेकिन कोई नही सब खुश रहे बाकी सबके लिए प्यार खुद जाग जाएगा सबसे पहले मैं अपनी परी को उठा दूं।

वीर काव्या के पास आता है और उसके माथे पर हाथ फेरता है अरे मेरा बेटू उठ जाओ, जाओ।

काव्या - उफ्फ पापा सोने दो ना।

वीर - धत चलो उठो जल्दी से फिर,जलेबी खिलाऊंगा पक्का।

काव्या - साथ मैं पकोड़ा भी गरम गरम

वीर को काव्या की ये तुतराती हुई आवाज बहुत प्यारी लगती है।

काव्या अब उठ कर वीर की गोद में बैठ कर लिपटी हुई थी।

तभी वीर के दिमाग में एक आइडिया आता है और वो काव्या से कहता है बेटू आपको पकोड़ा खाना है ना।

काव्या - हा

वीर - तब आपको पापा की एक बात माननी पड़ेगी।

काव्या - मैं तो आपकी सारी बात मानती हूं ना

वीर - ये हम दोनो की सीक्रेट बात है ओके।

काव्या भी वीर से धीरे से फुस फुसाती हुई कहती है पक्का छोटा भीम वाला प्रोमिस।

वीर - मैं जब पकोड़ा लाऊंगा ना तो आप वो आप खाने से पहले कहना मम्मी आप पापा को अपने हाथो से खिलाओ ना।

काव्या - ठीक है तीनो मम्मी को कह दूंगी लेकिन शाम को चाकलेट लुंगी एक।

वीर - पक्का

काव्या - ही ही ही आप बेस्ट पापा हो, हमेशा ऐसे ही हँसते रहा करो आप नही थे, तो मम्मी बहुत रोती थी।

वीर- पक्का अब नही जाऊंगा कभी अब तो हर दम तुम्हारे पास रहूंगा।

तभी वीर जल्दी से बाहर आता है और तुरंत पकोड़ा और जलेबी वैगर ले कर आता है

वीर - हाय अब मजा आएगा अब तीनो को मुझे खिलाना पड़ेगा ।

वीर अंदर आता है तो सामने उसको अनु दिख जाती है ।

वीर - ये तो पूरा साक्षी की फोटो कॉपी।

तभी अनु देखती है की वीर उसको देख रहा है और वो कुछ नही कहती।

वीर अंदर आ कर खाने का समान काव्या को दे देता है जिसको तनु और साक्षी देख लेती है।

काव्या तो समान ले कर अंदर आ जाती है अनु और साक्षी के पास, तभी तनु बाहर आती है और कहती ये क्या है ये सब

वीर - क्या क्या है

तनु - ये सब क्या लाए हो, क्यो इतने पैसे वेस्ट कर रहे हो फालतू चीज के लिए कल भी मुझे ,2000 दिए थे ।

वीर - फालतू चीज के लिए नही है कुछ भी, मेरी वाइफ हो तुम समझी, तुम्हारे चहरे पर खुशी देखना चाहता हूं अब आदत डाल लो इन सब की।

तनु - क्यो कर रहे हो ये सब

वीर - तुम्हारे हँसी के लिए।

तनु कुछ नही बोलती बस वीर को देखती है एक टक।

वीर- वैसे बहुत सुंदर लग रही हो अभी ऐसे सजी रहा करो ना हम बाप, बेटी के लिए।
 
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