• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest मर्द का बच्चा

लल्लू तो अभी सो रहा था.

डॉक्टर - ये अभी सो रहे है. थोड़ी देर में नींद खुल जाएँगी. फिर इन्हे काफ़ी आराम मिलेगा.

सोनम- कैसा है मेरा भाई.

डॉक्टर - कुछ मामूली चोट लगी थी जिसे सॉफ कर मैने ड्रेसिंग कर दी है. दो तीन दिन में सब ठीक हो जायगा. आप के इस बहादुर भाई ने आज मेरा कोख उजड़ने से बचा लिया.

आज अगर ये नही होते तो हम दोनो तो जीते जी मर जाते. मेरे लिए तो आप का भाई किसी भगवान से कम नही है.

आप सब बैठिए. में चाय का बोल कर आती हूँ.

कोमल- नही नही आप रहने दीजिए. कष्ट करने की कोई ज़रूरत नही है.

डॉक्टर - कष्ट कैसा. आज मेरे लिए भगवान ये इन खुदाई मददगार को भेजा है. कम से कम में उनके फॅमिली को चाय तो पिला ही सकती हूँ. आप लोग बाहर चल कर बैठिए

सब एक बार फिर से बाहर आ कर बैठ गये.

डॉक्टर - वही ऊपर के माले पर रहती थी.

वो अपने सर्वेंट को चाय का बोल कर आ गई.

थोड़ी देर में डॉक्टर का सर्वेंट चाय बिस्किट्स ले कर आ गया.

सब को चाय बिस्किट्स दिया.

सब चाय बिस्किट्स खाते हुए बात कर रहे थे.

ऋतु राघव के शादी का इन्हे न्योता भी दे दिए.

थोड़ी देर बाद लल्लू जाग गया. अब कही भी बदन में उसे दर्द नही था.

उसे तो लग ही नही रहा था की उसे अभी थोड़ी देर पहले कही चोट भी लगा है.
 
लल्लू जैसे ही जगा तो अपने उपर की चादर को हटा कर बेड से उतार कर खड़ा हो गया.

उसके शरीर के घाव अब च्छू मंत्र हो गये थे.

तभी वहाँ डॉक्टर आ गयी.

डॉक्टर - अरे अभी लेटे रहो. खड़े क्यू हो गये.

लल्लू- डॉक्टर में बिल्कुल ठीक हूँ. अब घबराने की कोई बात नही है.

लल्लू की आवाज़ सुन कर उसकी सारी बहने वहाँ अंदर आ गई.

सोनम- लल्लू को कस कर गले लगाते हुए. कैसा है भाई. क्यू करता रहता है ऐसा. तुम्हे हमारी ज़रा भी फ़िकर नही है क्या.

लल्लू- दी. दी.. बस करो. मुझे कुछ नही हुआ है. में तो बिल्कुल भला चंगा आप सब के सामने खड़ा हूँ. आप सब ये बताओ की शॉपिंग किया या नही.

कुछ रह गया हो तो अभी चलो चलते है.

कोमल- सब हो गया शॉपिंग हमारा. तुम ये बताओ की अब कैसे हो तुम. ज़्यादा दर्द तो नही है. दर्द ज़्यादा हो तो डॉक्टर यही है वो अभी दबाई दे देंगी.

लल्लू- दीदी आप सब बहुत अच्छी है. मेरे लिए बहुत परेशान रहती है आप सब. लेकिन मेरा यकीन मानिए. में अब बिल्कुल ठीक हूँ.

डॉक्टर - हाथ जोड़ कर लल्लू से.- आप मेरे लिए भगवान बन कर आए है. अगर आप नही होते तो पता नही हमारा क्या होता. हम तो जीते जी मर जाते.

लल्लू- अरे अरे क्या कर रही है आप. क्यू मुझे पाप चड़ा रही है. पता है आप को घर में सब मुझे गधा कहते है. में तो गधे से इंसान बनने की कोशिश कर रहा हूँ और एक आप है की मुझे भगवान बनाए जा रही है.

लल्लू की बात सुन कर सब हस पड़े.

डॉक्टर- सच में आप बहुत अच्छे है. आज आप के कारण मेरे बेटे की जान बच गई है. में तो आप का पैर धो कर भी…..

लल्लू- प्लीज़… डॉक्टर . ऐसे मत करिए. में तो बस अपना फर्ज़ निभाया है. अच्छा देखिए आप भी मरीजों का इलाज करते हैं ना तो बस वैसे ही मैने भी इस मासूम प्यारे बच्चे को बचाया है.

डॉक्टर - में मरीज़ो को देखने उनका इलाज करने के बदले उन से पैसा लेती हूँ. कोई फ्री में नही करती और मुझे उस काम में कोई चोट नही लगता. कही से खून नही बहता.

लल्लू- में भी फ्री में कहा बचाया है आप के बच्चे को. में भी तो आप से लिया है ना.

डॉक्टर - क्या..

लल्लू- आप का प्यार. आप का सम्मान. आप की नज़रो में इज़्ज़त.

डॉके आगे बढ़ कर लल्लू को गले लगाती हुई.

डॉक्टर - आप सच में बहुत अच्छे है और आप की बाते भी.

लल्लू- इस वीक हमारे भैया की शादी है तो आप लोग उस शादी मैं ज़रूर आएगा. में आ कर आप को कार्ड दे जाउन्गा.

अब हम लोगो को इजाज़त दे. बस ज़रा मेरा कपड़ा दे दीजिए नही तो बाहर मुझे इस तरह देख कर कुत्ते भौकने लगेंगे.

सब हँसने लगे.

तभी डॉक्टर का पति भी आ गया.

डॉक्टर अपने पति से - इनके लिए जो कपड़ा लाए थे वो कहा है.

डॉक्टर का पति --वही टेबल पर रखे एक पॅकेट को उठा कर लल्लू को दे दिए.

लल्लू- ये क्या है.

डॉक्टर - आप का कपड़ा खराब हो गया था तो ये आप के कपड़े के नाप से दूसरा ला दिए है ये.

लल्लू- तो नया लाने को क्या ज़रूरत था में वही पहन लेता.

डॉक्टर का पति- वही पहन कर आप कैसे जाते घर. इसी लिए में ले आया था.

फिर लल्लू जल्दी से वो कपड़ा पहन लिया और अपने फटे कपड़ो से पर्स के मोबाइल सब निकाल कर नया कपड़ा जो पहना था उस में रख लिया. रुमाल तो पहले खराब हो गया था सर के खून को रोकने के चक्कर में.
 
फिर डॉक्टर का पति आगे बढ़ कर लल्लू के पास आया.

डॉक्टर का पति - हे माइ सेल्फ़ अमित कुमार. मेजर हूँ आर्मी में.

लल्लू- अमित से हाथ मिलाता हुआ. अमित जी में ललित कुमार और ये सभी मेरी दीदी है. मेरे भैया राघव वो भी आर्मी में है. उनका शादी है नेक्स्ट वीक. आप सब ज़रूर आएगा.

अमित- ज़रूर ज़रूर. में आप के भैया से मिला लेकिन उस बारे में बात ही नही हुई. में अभी आया उन से मिल कर.

फिर अमित राघव के पास उस से अपना आर्मी की बाते करने चला गया.

लल्लू- तो डॉक्टर अब इजाज़त है.

डॉक्टर - मेरा नाम रैना है. तुम मुझे रैना कह कर ही बुलाना.

लल्लू- नही नही. आप मेरे से उमर में बड़ी है. नाम ले कर कैसे बुला सकता हूँ.

रैना- क्यू की में कह रही हूँ.

लल्लू- ओके रैना. अब हम सब को इजाज़त दे.

फिर सभी बहनो के साथ लल्लू बाहर आ गया.

बाहर सभी काकी ओर मा राघव के साथ बैठे थे. वही अमित भी राघव से बात कर रहा था.

लल्लू को देख कर सब खड़े हो गये.

ऋतु- कैसा है तू. क्यू उत्पाटांग हरकते करता रहता है. अभी शादी का टाइम है. घर में कितने काम पड़े है और तुम हाथ पैर तुड़वाने में लगे हो.

काजल- क्या ज़रूरत थी हेरोगीरि दिखाने की. और दिखाया भी तो कम से कम अपना भी तो ख़याल रखो.

लल्लू- भैया चले क्या अब. रात बहुत हो गई है और दादू अकेले है घर पर.

राघव- हा भाई चल.

सब उठ खड़ा हुए.

राघव और लल्लू, अमित से विदा ले कर गाड़ी के पास आ गये.

राघव- भाई तुम्हारी बाइक तो वही खड़ी है.

लल्लू- कोई बात नही भैया. आप लोग चलिए. मैं बाइक ले कर आता हूँ.

तभी अमित बोला की में छोड़ देता हूँ वहाँ तक ललित को.

फिर अमित और ललित वहाँ चले गये जहा बाइक खड़ी थी साथ में सोनम भी आ गई.

राघव सब को ले कर घर की ओर चला गया.

बाइक के पास आ कर लल्लू और सोनम अमित से हाथ मिला कर विदा लिया फिर अपने बाइक पर बैठ चल दिए घर.

दोनो गाड़ी साथ ही घर पहुचे.

सभी मिल कर गाड़ी से समान निकाल कर घर में रखने लगे.

सोनम- भाई तुम आँगन में जा कर आराम करो. तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नही है.

लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी सोना दी. आप का भाई इतना भी कमजोर नही है.जितना आप सब मुझे समझ रखे हो.

सोनम- क्या कहा अभी…..

लल्लू- मैने कहा की आप का भाई अभ..

सोनम- इस से पहले क्या कहा.

लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी दी.

सोनम- नही नही.. तुम ने कुछ और कहा है.

लल्लू- मेरी प्यारी प्यारी सोना दी..

सोनम दौड़ कर लल्लू को कस कर गले लगा ली.

रागिनी- अब तुम भाई बहनो का भरत मिलाप हो गया हो तो ज़रा इन सामान को घर में पहुचाओ.

फिर सब मिल कर समान उठा कर आँगन में ले जा कर रख दिए फर्स्ट फ्लोर के एक खाली रूम में.

ऋतु- चलो अब सभी जल्दी से फ्रेश हो जाओ और खाने की तैयारी करो.

सभी लोग फ्रेश होने चले गये.

लल्लू लड़कियो के बगल वाले रूम में अब रहने का सोचा था तो वो वही जा कर अपना सारा कपड़ा खोल कर सिर्फ़ चड्डी में खड़ा था की सोनम अंदर का दरवाजा खोल दी…

लल्लू जल्दी से अपने पेंट से अपने आप को ढकने की कोशिश करने लगा. लेकिन तब तक सोनम तो लल्लू के सजीले गठीले बदन और उस पर से अब टॅटू जो पहले सिर्फ़ पीठ पर था. वो अब बढ़ कर कमर और हाथ पर भी फैल गया था.

सोनम- सो.. सॉरी भाई. वो में देखने आई थी की तुम रेस्ट कर रहे हो या नही.

लल्लू- हा दी. अभी कपड़े बदल कर रेस्ट ही तो करूँगा.

सोनम- हा ठीक है. ये दरवाजा खुला है. किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो आवाज़ दे देना. में आ जाउन्गी.

फिर सोनम वहाँ का परदा गिरा कर चली जाती है अंदर.

लल्लू अब दर्पण के आगे खड़ा हो कर अपने बदन और उस पर बने टेटु को देख रहा था. उसे समझ नही आ रहा था की आख़िर ये टॅटू है क्या बला. अभी तक जहा सिर्फ़ पीठ पर था वो फैल कर इतना कैसे हुआ.

और उसके सारे जखम कहाँ गये.

लल्लू सब के सामने तो नॉर्मल था लेकिन ये उसे परेशान कर रहा था.

फिर वो धोती और ऊपर एक टीशर्ट पहन कर बेड पर लेट गया.

लेट कर कुछ देर टॅटू ही लल्लू के दिमाग़ में घूम रहा था फिर कब उसकी आँख लग गई उसे पता ही नही चला.

लल्लू गहरी नींद में था तभी ऐसा लगा जैसे कोई उस से कह रहा है. " सब मंगल है. सब मंगल है. ध्यान लगा. योगा कर. सब मंगल है."

लल्लू का नींद खुल गया.

थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा फिर उठ कर नदी किनारे चला गया.

रह रह कर उसे वही याद आ रहा था. सब मंगल है. ध्यान लगा. योगा कर.

लल्लू समझ नही पा रहा था की आख़िर क्या है ये. ये कैसे सुना. आवाज़ तो पहचानता भी नही था वो. कोई अंजान आवाज़ था.

लल्लू नदी किनारे बैठा यही सब सोच रहा था तभी उसे ख़याल आया की आवाज़ आया था ध्यान लगा योगा कर.

तो लल्लू वही ध्यान लगाने को बैठ गया योग मुद्रा में.

काफ़ी देर बैठा रहा लेकिन कुछ समझ नही आया.

मन में कई तरह की बाते आ कर उसे ध्यान से भटका रहा था.

फिर लल्लू वहाँ से घर को चल दिया.

…………..

दालान पर आ कर नलका पर हाथ पैर धो कर दालान पर आ कर बैठ गया.

दालान पर दादू और छोटे काका बैठे थे.

लल्लू वही इन लोगो के साथ बैठ शादी के विषय पर बात करता हुआ चाय पी रहा था.

गुड़िया बीच में इनको चाय दे गई थी.

थोड़ी देर वहाँ बैठ कर लल्लू आँगन में आ गया.

वहाँ राघव बैठा हुआ था. लल्लू भी जा कर राघव के साथ बैठ गया.

राघव- कैसा है भाई. सब ठीक है ना.

लल्लू - बिल्कुल भैया. सब चकाचक है.

राघव- फिर आज का क्या प्रोग्राम है.

लल्लू- फिलहाल तो कोई नही है. आगे का पता नही. वैसे एक बार बाज़ार जाना है.

राघव- कुछ लेना है.

लल्लू- हा भाई. एक सिम लेना है. मोबाइल तो आप ले आए. सिम नही था तो कल सोचा था वो लेने का लेकिन कल मौका ही नही मिला.

तभी वहाँ सोनम दो जगह प्लेट में नाश्ता ले कर आ गई.

सोनम- पहले नाश्ता कर लो. रात भी ऐसे ही सो गये थे. कुछ खाए भी नही.

लल्लू- ऐसे ही कैसे सो गया. आप सब के प्यार से ही मेरा पेट भर गया.

लल्लू वही पास में बैठी ऋतु और काजल को देख कर बोला.

सोनम- बाते बनाना भी सिख गया है अब तो भाई.

राघव और लल्लू फिर नाश्ता करने लगे.

नाश्ता करने के बाद लल्लू फिर दालान पर आ गया.

लल्लू- छोटे काका खेत में मेरे लिए कोई काम हो तो बता देना.

काका- नही बेटा. ज़्यादा कुछ नही है वहाँ करने को. बाकी मजदूर तो कर ही रहे है.

फिर लल्लू वहाँ से आँगन में आ कर अपने कमरे में जा कर बेड पर लेट गया.

भाई खाना खाने आ जाओ. दरवाजे से आवाज़ आई.

लल्लू मूह घुमा कर देखा तो मीनू दी खड़ी थी.

लल्लू- अभी आया दी.

फिर लल्लू उठ कर फ्रेश हुआ और आँगन में आ गया.

वहाँ दोनो काका भी आज आ गये थे.

लल्लू भी सब के साथ खाना खाने बैठ गया.
 
लल्लू भी सब के साथ खाना खाने बैठ गया.

सुनील- लल्लू बेटा कहाँ थे सुबह से. दिखे नही.

लल्लू- कमरे में ही बोर हो रहा था काका.

सुनील- कल क्या किया है.

लल्लू- क्यू उस ने नही बताया क्या जिस ने ये बताया की कल में कुछ किया हूँ.

सब सर उठा कर लल्लू को देखने लगे.

आज से पहले लल्लू सुनील से ऐसे कभी बात नही किया था.

काजल- नालायक. अपने से बड़े से कैसे बात किया जाता है भूल गया क्या.

लल्लू तो सर झुकाए खाने में लगा हुआ था.

सुनील- लल्लू बेटा में तुम्हारे मूह से सुनना चाहता हूँ.

लल्लू- खाना खा लीजिए फिर बताता हूँ दालान पर.

ऋतु- दालान पर क्यू यही अभी कह दे. हमें भी पता चले की आख़िर कल क्या हुआ था.

लल्लू चुप चाप खाना ख़ाता रहा.

फिर सब खाना खाने लगे. खाना हो जाने के बाद सब मर्द उठ कर दालान पर आ गये.

लल्लू भी सब के पीछे दालान पर चला गया.

साथ में राघव भी.

दादू- हा तो बेटा अब बताओ क्या हुआ था.

लल्लू- वहाँ शोरुम में सब चले गये…

सुनील- ना..ना.. बेटा. यहाँ से बताओ. शुरू से..

लल्लू मुस्कुरा उठा.

कल सब तैयार हो रहे थे तो मुझे तैयार होने में लेट हो गया किसी कारण से.

फिर में पीछे से सोनम दीदी के साथ गया तब ये सभी एक शोरुम में पहले से ही पार्किंग में खड़े थे.

फिर में भी जा कर बाइक पार्क की फिर सब वहाँ खरीदारी करने चले गये.

वहाँ कुछ पसंद नही आया तो फिर सोनम दी दूसरे दिन वाले शोरुम में चलने को बोले फिर हम वहाँ गये. वहाँ से सब समान ले कर दूसरे शो रूम आए यहाँ में बाहर बाइक पर खड़ा था…… फिर सारा लल्लू ने बता दिया जो कहानी हुई.

दादू- तुम्हे कहाँ कहाँ चोट आई थी.

लल्लू- कही नही बस सर में थोड़ा सा फुट गया था.

सुनील- काम तो बहुत अच्छा किया बेटा लेकिन मुझे लगता है की तुम ने काट छांट कर बाते बताई है. खैर आगे से ध्यान रखना की दूसरे के जान के साथ अपना भी जान सलामत रहे.

लल्लू- जी काका.

फिर लल्लू वहाँ से उठ कर जाने लगा की…

अनिल- अभी कहाँ जा रहा है. अभी बात पूरी नही हुई है.

लल्लू एक बार फिर बैठ गया वही.

अनिल- कल सुबह तुम्हे राघव के ननिहाल जाना है. फिर निमंत्रण दे कर कल ही वापस आ जाना. कई बार बोल चुके है की ललित को भेज देना.

लल्लू- कल ही जा कर कल ही वापस आना. आप को लगता है वो कल ही आने देंगे मुझे.

सुनील- सही बात है. कल ही नही आने देंगे वो लोग. ऐसा करना कल रात रुक जाना और सुबह सुबह वहाँ से चल देना.

लल्लू- ठीक है काका.

फिर लल्लू वहाँ से आ कर अपने कमरे में बेड पर लेट गया.

तभी वहाँ सभी बहने आ गई.

मीनू- भाई क्या बात हुआ है दालान पर.

आप को किसी ने डांटा या गुस्सा तो नही हुए.

लल्लू- नही बहनो. मैने ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया था जो कोई मुझे से गुस्सा होते या मुझे डांटते.

रोमा- भाई फिर वहाँ क्या बात हुई.

लल्लू- वही कल क्या हुआ ये पूछे थे फिर कल सुबह मुझे एक दिन के लिए कही जाना है. ये बता रहे थे.

सोनम- कहाँ जा रहे हो तुम भाई.

लल्लू मुस्कुराता हुआ सोनम के पास आ कर.

लल्लू- कल में गजजु मामा के यहाँ जा रहा हूँ.

सोनम- फिर आओगे कब.

लल्लू- कल वही रुकुंगा फिर परसो सुबह वहाँ से चलूँगा तो दोपहर तक आ जाउन्गा.

सोनम- (थोड़ा उदास हो कर.) ठीक है भाई.

फिर सब बैठे बैठे बाते करते रहे शाम तक.

लल्लू- दीदी कल सुबह सुबह में निकलूँगा गजजु मामा के पास . क्या आप सुबह मुझे एक कप चाय दे देंगी बना कर.

सोनम- भाई. तु कहे तो जान दे दूं. ये चाय क्या चीज़ है. कितने बजे चाय चाहिए तुम्हे बस ये बता दो.

लल्लू- जान क्यू माँगूंगा. वो तो पहले से ही मेरा है. और जो मेरा है वो फिर माँगना कैसा. रही समय की बात तो 5 बजे सुबह आप चाय दे देना मुझे.

सुन कर तो सोनम दीदी ख़ुसी से मन में नाचना चालू कर दी लेकिन हक़ीकत में कैसे नाचने लगती. सब पूछने लगेंगे तो क्या बताइगी.

सोनम- बस.. मिल जाएगी.

दीदी मा बुला रही है. गौरी आ कर बोली तो सोनम उठ कर चली गई.

लल्लू यू ही बेड पर लेटा था. करने को कुछ था ही नही. बेड पर लेटे लेटे बोर हो रहा था.

रात सब खाना खा रहे थे साथ में आँगन में.

लल्लू- काका कल सुबह मुझे 5 बजे निकलना है तो क्या में बाइक ले जाऊ.

सुनील- अब वो बाइक तेरी ही है. एक कार तो है ही अपने पास फिर एक राघव के ससुर भी दे रहे है तो यहाँ दो कार हो जायगा.

फिर सब खाना खाने लगे.

लल्लू- काका वहाँ कुछ ले कर तो नही जाना. और आज बुआ लोग आने वाले थे पापा के साथ वो भी नही आए.

अनिल- सोनम बेटा कुछ भेजना है मामा के यहाँ तो दे देना लल्लू बेटा को.

लल्लू- वो भी अभी क्योंकि में सुबह अंधेरे निकलूँगा.

दादू- तेरे बुआ लोग कल सुबह आएँगे. तेरे पापा का फोन आया था.

फिर सब खाना खा कर चले गये.

लल्लू भी अपने कमरे में चला गया.

सारी लॅडीस खाना खाने के बाद सब काम निपटा कर वो सभी भी अपने कमरे में सोने चले गये.

सब के सोने के बाद सोनम लल्लू के कमरे में आ गई

लल्लू खिड़की खोल कर वही सामने बेड पर बैठा बाहर चाँद को देख रहा था.

सोनम- भाई अभी तक सोया नही.

लल्लू- नही. चाँद की चाँदनी का इंतजार कर रहा था.

सोनम- क्या मतलब.

लल्लू- देखो ना बाहर आसमान में चाँद अपने चकोर का इंतजार कर रहा है.

सोनम- अभी तुम कुछ और कह रहे थे.

लल्लू- मेरी प्यारी सोना दी. आज कल आप कुछ ज़्यादा नही सुनने लगी है.

सोनम- क्या करे मेरा प्यारा भाई भी तो कुछ ज़्यादा ही बोलने लगा है.

लल्लू- आप को पसंद नही तो फिर नही बोलता. बस..

सोनम- मुझे पसंद नही है.... बहुत पसंद है.

लल्लू- आइए फिर बैठ जाइए.

सोनम- तुम सो जाते ना. कल तुम्हे सुबह जाना है.

लल्लू- सो जाउन्गा. वैसे भी पूरा दिन तो सोता ही रहा हूँ. इतनी जल्दी नींद भी तो नही आती.

अरे हा एक चीज़ तो में भूल ही गया था.

सोनम- क्या.. क्या भूल गये थे.

लल्लू- दी आप ने वो सूट पहन कर देखा था क्या.

सोनम- नही क्यू.

लल्लू- प्लीज़ प्लीज़ पहन कर दिखा दो ना.

सोनम- अभिइ..

लल्लू- हा दी. फिर में सुबह चला जाउन्गा और कल तो आउन्गा नही फिर परसो ही आ पाउन्गा. प्लीज़ दिखा दो ना.

सोनम- लेकिन भाई ऐसा क्या है उस में.

लल्लू- ऐसा तो कुछ नही है. बस में देखना चाहता था. लेकिन आप को पसंद नही तो रहने दीजिए.

सोनम उठ कर अंदर चली गई.

लल्लू को लगा की सोनम शायद बुरा मान गई है.

लेकिन थोड़ी देर में ही सोनम वो सूट पहन कर लल्लू के सामने आ खड़ी हुई.
 
लल्लू जब सोनम को देखा तो उसके तो होश ही उड़ गये.

सोनम इस समय एक अनारकली ड्रेस में कयामत लग रही थी.

सोनम अपने सुनहरे बालो का जुड़ा बनाए हुए थी माथे पर सुनहरी बिंदी

गले में सोने का हार.

उस पर वो कजरी कलर का अनारकली ड्रेस जिस में सुनहरे रंग का एमब्राय्डरी किया हुआ था.

किसी रशिक कवि की कविता थी वो.

लल्लू तो मूह खोले सोनम को घुरे जा रहा था.

सोनम हँसते हुए बोली- भाई मूह बंद कर लो नही तो मक्खी चली जाएँगी मूह में.

लल्लू हड़बड़ा कर मूह तो बंद कर लिया लेकिन पलके झपकाना भूल गया.

लल्लू बेड से उतर कर सोनम के कदमो में बैठ गया और अपने दोनो हाथ फैला दिया जैसे हमारे देवानद साहब अपने हेरोयिन के आगे फेलाते है.

वैसे ही हमारा लल्लू अपने हेरोयिन के आगे हाथ फैला दिया.

तुमको देखा तो यह ख़याल आया

ज़िंदगी धूप तुम घना साया

तुमको देखा तो यह ख़याल आया--2

ज़िंदगी धूप तुम घना साया.

तुमको देखा तो यह ख़याल आया.

आज फिर दिलने इक तमन्ना की--2

आज फिर दिल को हमने समझाया--2

ज़िंदगी धूप तुम घना साया

तुमको देखा तो यह ख़याल आया.

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे--2

हमने क्या खोया हमने क्या पाया--2

ज़िंदगी धूप तुम घना साया

तुमको देखा तो यह ख़याल आया.

हम जिसे गुनगुना नही सकते--2

वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया--2

ज़िंदगी धूप तुम घाना साया

तुमको देखा तो यह ख़याल आया--2

लल्लू सोनम को देखते गा रहा था और सोनम भी मुस्कुराती तो कभी शरमाती, कभी नज़रे झुका कर अपने दाँतों से होंठ काटने लगती तो कभी हस देती.

लल्लू का यू सोनम के लिए गाना गाना सोनम बहुत खुश थी.

सोनम आगे बढ़ कर लल्लू को हाथ से पकड़ कर उसे खड़ा की ओर उसे प्यार से देखने लगी.

सोनम- ये क्या था.

लल्लू- क्या..

सोनम- ये जो अभी अभी किए हो

लल्लू- मैने क्या किया है.

सोनम- अच्छा ये बताओ की ये गाना किस के लिए गा रहे थे.

लल्लू- डब्ल्यू..ओ...वो...वो तो बस ऐसे ही…

सोनम- भाई सच बता प्लीज़ ये गाना किस के लिए था.

लल्लू- ये कैसा सवाल है दी. यहाँ हम दो लोग ही तो है. अब में गाना गा रहा था तो फिर यहाँ और कौन रह गया आप. तो फिर आप के लिए ही तो गाउन्गा ना..

सोनम कस कर लल्लू को अपने बाहों में भर ली.

सोनम- भाई आई एम सूओ.. हॅपी…

आई लव यू भाई. आई लव यू सो मच.. फिर उसके होंठो पर एक छोटी चुम्मि चिपका दी.

लल्लू तो हवा में उड़ रहा था.

उसकी ड्रीम गर्ल उसका बचपन का क्रश आज उसे अपने प्यार का इज़हार कर दिया था.

लल्लू को तो समझ ही नही आ रहा था की वो क्या करे.

लल्लू सोनम के दोनो गालो को अपने हाथो में थाम कर सोनम के आँखो में प्यार से निहारते हुए अपने होंठो को बढ़ा ने लगा…

सोनम ये देख कर अपनी आँखे बंद कर ली..

लल्लू अपने बढ़े हुए होंठो को सोनम के माथे पर चिपका दिया.

सोनम को अपने माथे पर लल्लू के होंठो का अहसास होते ही पूरे शरीर में कंपन हो गई और रोए खड़े हो गये.

लल्लू सोनम को अपने आगोश में लिए उसे अपने सीने से लगाए अपने पहले प्यार को फील कर रहा था.

लल्लू- आई लव यू टू दी. में भी आप को बहुत बहुत चाहता हूँ.

सोनम लल्लू की बाहों में सिमटी उसके प्यार को महसूस कर रही थी.

दोनो दीन दुनिया से बेख़बर एक दूसरे में खोए हुए थे.

सोनम लल्लू के चौड़े सीने पर सर टिकाए उसके कंधे को पकड़ कर उसके धड़कनो को सुन रही थी जहा सिर्फ़ एक ही नाम बार बार धड़क रहा था. सोनम सोनम.

दोनो यू ही काफ़ी देर तक खड़े रहे.
 
लल्लू सोनम को बाहों में लिए कभी उसकी पीठ को सहलाता तो कभी सर को.

लल्लू को यकीन ही नही हो रहा था की अभी जो पल वो जी रहा है वो हक़ीकत है.

लल्लू- दी…

सोनम- कुछ मत कह अभी.

लल्लू- क्या ये सच है या में कोई ख्वाब देख रहा हूँ.

सोनम- तो क्या ऐसा ख्वाब भी देखते थे.

लल्लू- ये भी कोई पूछने की बात है. कौन अपने प्यार का ख्वाब नही देखता है. मुझे तो ये पूछो की क्या कभी ऐसा हुआ की अपने प्यार का ख्वाब ना देखा हो.

सोनम- शरमा कर… कब से मुझ से ये प्यार करता है तू.

लल्लू- जब मुझे प्यार क्या होता है ये भी नही पता था. मुझे तो, प्यार क्या है, क्यू है और प्यार भी कुछ होता है, ये सब आप को देख कर ही पता चला.

सोनम- ऐसा क्या है मुझ में.

लल्लू-

तू ही तो जन्नत मेरी

तू ही मेरा जुनून

तू ही तो मन्नत मेरी

तू ही रूह का सुकून..

तू ही अँखियों की ठंडक

तू ही दिल की है दस्तक

और कुच्छ ना जानूँ

मैं बस इतना ही जानूँ..

तुझ में रब दिखता है

यारा मैं क्या करूँ

तुझ में रब दिखता है..

यारा मैं क्या करूँ

सजदे सर झुकता है

यारा मैं क्या करूँ

तुझ में रब दिखता है

यारा मैं क्या करूँ..

सोनम लल्लू के पूरे चेहरे को चूम का गीला कर दी.

लल्लू सोनम को गोद में उठा कर बेड पर ले आया.

फिर खिड़की के पास दोनो चाँद की चाँदनी में एक दूसरे के बाहों में ले कर बैठ गये.

सोनम लल्लू के एक हाथ को अपने हाथ से पकड़े उसके गाल को प्यार से सहला रही थी.

तो लल्लू सोनम के प्यार में डूबा हुआ उसके हाथ में हाथ डाले उसके बालो को सहला रहा था.

दोनो एक दूसरे के प्यार को महसूस करते हुए एक दूसरे में खोए हुए थे.

रात यू ही सरकती जा रही थी.

दो प्रेमी प्रेम में दूंब कर वैसे ही एक दूसरे को बाहों में लिए सो गये.
 
सुबह 4 बजे लल्लू की नींद खुली. आँख खोला तो उसे दीदार ए इश्क़ हुआ.

सोनम लल्लू की बाहों में ऐसे ही सो गई थी. अभी भी सोनम एक हाथ में लल्लू का हाथ पकड़ रखी थी और दूसरे हाथ से लल्लू के छाती के ऊपर उसके टी शर्ट को पकड़ रखी थी.

लल्लू सोनम के सलोने मुखड़े को निहारता बिना पलके झपकाए देखे जा रहा था.

फिर झुक कर उसके होंठो पर एक चुम्मि ले लिया.

सोनम सोई हुई मुस्कुराती रही.

लल्लू को अभी गजजु मामा के यहाँ भी जाना था तो वो सोनम को गाल सहलाता उस के पूरे चेहरे पर हल्के हल्के चूमने लगा.

कभी माथे पर तो कभी आँखो पर कभी गालो पर.

सोनम सोने का नाटक करती हुई लेटी हुई थी.

लल्लू- मेरी प्यारी जानू दी. अब उठ जाओ. मुझे मामा के यहाँ जाना भी है.

सोनम लल्लू को बाहों में ले कर उसको ज़ोर से पकड़ दूसरे करवट ले कर सो गई.

लल्लू सोनम की ये सभी प्यारी हरकते हँसता हुआ देख रहा था.

लल्लू हाथ बढ़ा कर सोनम के बगल में ले गया और हल्के से सहला दिया.

सोनम के बदन के सारे रोए खड़े हो गये.

सोनम कांप कर रह गई.

लल्लू फिर से सोनम के बगल में हाथ रख दिया कि सोनम लल्लू के हाथ को पकड़ कर उसे खिच कर अपने गले में चिपका कर पकड़े हुए लेटी रही.

लल्लू झुक कर सोनम के गले में चूम लिया.

सोनम होंठो को दबाए अपने आप को रोकने की कोशिश कर रही थी फिर भी उसे होंठो से एक आ निकल गई.

लल्लू फिर एक बार झुकता चला गया सोनम के गले पर तभी सोनम पलट कर सीधी हो गई और लल्लू के होंठ सोनम के होंठो से जा मिला.

लल्लू सोनम के चेहरे को सहलाता सोनम के सहद से मीठे होंठो को चूस लिया.

लल्लू- दी अब उठ जाइए. मुझे फ्रेश होने जाना है. आप भी फ्रेश हो कर ज़रा चाय बना दीजिए.

सोनम लल्लू को पकड़ कर अपने ऊपर खिच ली.

लल्लू सोनम पर गिर गया.

लल्लू को अपने सीने पर सोनम के गोल कठोर उभार का अहसास रोमांचित कर रहा था.

लल्लू चेहरा झुका कर सोनम के गले में रगड़ते हुए उसके बदन के महक को अपने में समा रहा था.

सोनम आँख बंद किए हुए दाँतों से होंठ दबाए लल्लू के सर के बालो को सहलाती हुई उसे अपने सीने पर दबा रही थी.

लल्लू सोनम के गले से नीचे जहा सूट का शुरुआत था वहाँ चूम लिया.

सोनम लल्लू के बालो को नोचती हुई अपने पहले चरम सुख को अनुभव कर रही थी.

लल्लू को इसका अहसास होते ही वो सोनम पर से उठ कर बैठ गया.
 
सोनम लंबी लंबी साँसे ले रही थी जिस से उसके पुस्त उन्नत उभार ऊपर नीचे हो रहा था जो लल्लू को और उत्तेजित कर रहा था.

फिर लल्लू सब इग्नोर कर बेड से उठ कर फ्रेश होने चला गया.

वहाँ से आया तो सोनम कमरे में नही थी.

लल्लू अपने बाग से कपड़े निकाल कर पहनने लगा.

तैयार हो कर वो बाहर आ गया आँगन में

आँगन में काजल झाड़ू लगा रही थी.

लल्लू रसोई में देखा तो सोनम चाय कप में डाल रही थी.

लल्लू फिर बाहर आ कर आँगन में खाट पर बैठ गया.

सोनम चाय के साथ पराठा ला कर लल्लू के आगे रख दी.

लल्लू- दी, ये क्या आप ने पराठा क्यू बना लिया. आप मेरे लिए इतना लास्ट की. इतनी सुबह कौन ख़ाता है.

सोनम- चुप चाप खा ले.

लल्लू फिर चाय के साथ पराठा खा कर उठ गया.

लल्लू- दी कुछ ले भी जाना है क्या.

सोनम- भाई मा ने तो रात कुछ बताया ही नही था. रुक अभी पूछती हूँ.

लल्लू- रहने दो दी. अब इतना समय नही है. में चलता हूँ. कोशिश करूँगा की मामा आज ही आ जाने दे वैसे लगता तो है नही की वो मानेंगे.

सोनम- ठीक है भाई. आराम से जाना.

फिर लल्लू वहाँ से दालान पर आ गया.

दालान पर सब उठ गये थे.

लल्लू सब से मिल कर वहाँ से बुलेट ले निकल गया गजजु मामा के गाँव की ओर.

मामा के फॅमिली का छोटा सा परिचय.

नाना और नानी अब नही रहे.

गजेंद्र सिंग. - (गजजु) सब से बड़े मामा. ये आस पास के 52 गाँव के सरपंच है.

बड़ा नाम है इनका. बहुत अच्छे इंसान है. लल्लू में तो इनका जान बस्ता है.

सुमीता सिंग- मामी. ये भी मामा की तरह लल्लू को बहुत चाहती है.

इनको कोई संतान नही है.

बलदेव सिंग- छोटे मामा. इनका अपना बिज़्नेस है. गाँव में रह कर ही ये बिज़्नेस संभालते है.

करुणा सिंग- मामी.

इनको एक लड़की है.

सुशीला - इनकी शादी हो गयी है. ये अब अपने ससुराल में है.

लल्लू रास्ते में एक जगह रुक कर पेट्रोल पंप पर पहले बाइक का टांक फुल करवाया फिर वहाँ एक चाय पी कर एक मोबाइल शॉप में से एक सिम लिया फिर आगे बढ़ गया.

लल्लू का गाँव दूसरे डिस्ट्रिक्ट में है और इनका दूसरे डिस्ट्रिक्ट में.

लल्लू 12 बजे करीब मामा के यहाँ पहुचा.

बाइक ले जा कर गेट पर रोका फिर हॉर्न बजाया.

बाहर चारदीवारी के साथ एक लोहे का बड़ा सा गेट लगा है.

बड़े गेट में एक छोटा गेट भी बना था जिस को खोल कर एक दरवान देखा की कौन आया है.

लल्लू हेल्मेट खोल कर अपना चेहरा दिखा दिया.

दरवान चेहरा देख कर दौड़ते हुए जा कर गेट खोल दिया.

लल्लू बाइक्र अंदर ला कर दरवान के पास बाइक रोक दिया.

लल्लू- कैसे हो काका सब बढ़िया.

दरवान- सब बढ़िया है बचुवा. कितने दिन बाद इधर आए हो. हम सब को तो तोहे भूल ही गये.

लल्लू- नही काका किसी को नही भुला है मैने. बस फुरसत नही मिल रहा था.

अच्छा मिलता हूँ काका.

दरवान- ठीक है बचुवा. जाओ पहले मालक और मालकिन से मिल लो. वो बहुत खुश होंगे

लल्लू- ठीक है काका.

फिर लल्लू वहाँ से आगे बढ़ गया.

आगे गजजु मामा का बैठक था जो उनके बंगले से अलग वही एक बड़ा सा खुले में बना था.

काफ़ी सारी गाड़ियाँ अभी वहाँ खड़ी थी.

जैसे कोई मीटिंग चल रहा हो.

लल्लू उधर ना जा कर सीधा घर की ओर ही गाड़ी मोड़ लिया.
 
आगे 200 मीटर पर मामा का बड़ा सा भव्य बंगला बना हुआ था जो तीन मंज़िल का था.

लल्लू गाड़ी पार्क कर गेट पर जा कर बेल दबा दिया

थोड़ी देर में एक घर में काम करने वाली महिला गेट खोली.

महिला- जी किस से मिलना है.

लल्लू- मेरा नाम ललित है. ये मेरे मामा जी का घर है. कृपया आप मुझे अंदर आने देंगी.

महिला साइड हो कर लल्लू को अंदर आने दी.

लल्लू एक छोटा कॅरी बग लिए अंदर ड्रॉयिंग रूम में आ कर सोफे पर बैठ गया.

लल्लू इधर उधर देखा तो कोई और दिख ही नही रहा था.

महिला तब तक पानी ला कर लल्लू को दी.

लल्लू- कोई दिख नही रहा. बड़ी और छोटी मामी कहा है.

महिला- बड़ी मालकिन मंदिर गई है और छोटी मालकिन ऊपर कमरे में है.

लल्लू- अच्छी बात है. में मिल आता हूँ.

फिर लल्लू उठ कर छोटी मामी के कमरों की ओर फर्स्ट फ्लोर पर चल दिया.

कमरे के सामने पहुच कर लल्लू दरवाजा धकेल कर देखा हल्के से तो दरवाजा थोड़ा सा खुल गया.

मामी बेड पर बैठी कपड़े को तह लगा रही थी.

दरवाजे की तरफ उनका पीठ था.

लल्लू चुपके से आगे बड़ा और छोटी मामी की आँखो को अपने दोनो हाथो से बंद कर दिया

मामी चौक गई.

वो सीधी हो कर बैठ गई.

अपने हाथ से लल्लू के हाथ को टटोल कर छू कर देखने गई.

मामी- बलदेव आप आ गये. जानू आप तो शाम में आने का बोले थे ना.

लल्लू- ….. खड़ा हँसता रहा. मामी का आज एक सीक्रेट पता चल गया. मामी छोटे मामा को जानू भी कहती है.

मामी- अब छोड़ भी दो ना.

लल्लू- …..

मामी- अच्छा एक क़िस्सी दूँगी.

लल्लू से अब रहा नही गया.

लल्लू- तो पहले क़िस्सी दो. फिर छोड़ूँगा.

मामी- क..क..कौन हो तुम. मामी घबराते हुई बोली.

लल्लू- पहले क़िस्सी चाहिए. हाय्यी कितना मीठा होगा.

मामी- में कहती हूँ छोड़ दो मुझे. नही तो बहुत पछताओगे बाद में.

लल्लू- कोई बात नही. कम से कम एक मीठी क़िस्सी तो मिल जाएगी.

हे हे में तो सोच कर ही रोमांचित हो रहा हूँ.

तभी पीछे से बड़ी मामी आ कर लल्लू का कान पकड़ ली.

बड़ी मामी- क्यू रे नालयक. अपने मामी को छेड़ रहा है.

लल्लू- क्या मामी कितनी खराब वक्त पर एंट्री ली हो आप. अभी थोड़ी देर बाद आती तो मुझे एक क़िस्सी मिल गई थी.

लल्लू छोटी मामी की आँखो से हाथ हटाता बोला.

फिर झुक कर पहले बड़ी मामी का पैर च्छू कर छोटी मामी के पैरो में झुक गया.

छोटी मामी भी कान से पकड़ कर उठाई.

छोटी मामी- एक तो इतने दिन बाद आया है और आते ही शरारत शुरू . अपने मामी से फिरकी ले रहा था.

लल्लू- दे दो ना जानू. बस एक क़िस्सी.

बोल कर लल्लू हँसता हुआ भाग कर बड़ी मामी के पीछे छिप गया.

छोटी मामी- रुक नालयक. मुझ से मज़ाक करता है.

ऐसे ही सब हसी मज़ाक करते हुए नीचे आ गये.

बड़ी मामी आगे बढ़ कर लल्लू को गले से लगा कर रोने लगी.

बड़ी मामी- क्यू रे अपने इस मा की याद नही आती थी क्या.

लल्लू बड़ी मामी की आँखो से बहते आँसूओ को साफ कर के उनके गाल को चूम लिया.

लल्लू- मेरी प्यारी मा. आप मेरे लिए मेरी यशोदा मा हो. आप को कैसे भूल सकता हूँ.

अपने नंद बाबा से भी मिल ले मेरे लाल.

लल्लू के पीछे से आवाज़ आई.

लल्लू सर घुमा के देखा तो पीछे गेट पर गजजु मामा बाहें फैलाए खड़े थे.

लल्लू भाग कर अपने मामा को जा कर गले लगा लिया.

मामा- कैसा है मेरा सेर.

लल्लू- आप के सामने ही हूँ. देख लीजिए.

मामा- ये तेरे सर पर क्या हुआ. कैसे चोट लगी.

फिर लल्लू कल क्या हुआ था सब मामा और मामी को बता दिया.

मामा- मुझे गर्व है मेरे लाल. आज मेरा सीना चौड़ा कर दिया तूने. शाबाश…

मामी आगे बढ़ कर लल्लू के चेहरे को पकड़ कर उसे चूम ली माथे पर.

मामी- शाबाश बेटा. आज तू इस मा को खुश कर दिया. एक मा को उसके बच्चे से मिला कर बहुत अच्छा काम किया. भगवान तुम्हे सारी खुशियाँ दे.

छोटी मामी भी आ कर मुझे गले लगा ली एक ओर से.

छोटी मामी- में तुम से बहुत नाराज़ थी. लेकिन तुम ने कल जो किया है इस से खुश हो कर तुम्हे माफ़ करती हूँ.

लल्लू छोटी मामी के कान में.

लल्लू- जानू एक क़िस्सी….

छोटी मामी- बहुत मार खाएगा. अब अगर छेड़ेगा तो.

मामा- इसे खाना खिलाया.

लल्लू- कहाँ मामा. अभी तक किसी ने पानी के लिए भी नही पूछा है.
 
मामा गुस्से से.

सुम्मी.. ये क्या तरीका है. बेटा सुबह सुबह चला होगा वहाँ से. अभी तके कुछ खाया भी नही है और तुम इसे अभी तक पानी का भी नही पूछी ….ऐसे कैसे कर सकती हो तुम.

लल्लू- मामा.मामा..प्लीज़..मेरे मा को कुछ मत कहिए. में अभी अभी तो आया ही हूँ. और पानी पी लिया है मैने. फिर पहले.आप सब से मिल लेने दीजिए.

खाना कहा भगा जा रहा है.

बड़ी मामी- नही बेटा तेरे मामा सही कह रहे है. में अपने ख़ुसी में ये भूल ही गई की मेरा बेटा सुबह ही चला होगा. में अभी खाना लगाती हूँ तब तक तू फ्रेश हो ले अपने कमरे में.

लल्लू वहाँ से अपने कमरे में चला गया.

लल्लू- आ ह. कितना अच्छा लग रहा है आ कर इस कमरे में. ये आज भी ऐसे ही है जैसे 4 साल पहले छोड़ कर गया था.

सब समान वैसे ही रखा है.

लल्लू बेड पर जा कर लेट गया पैर को नीचे लटकाए हुए.

थोड़ी देर वहाँ लेटे रहने के बाद बाथरूम जा कर फ्रेश हुआ.

फिर नीचे आ गया.

नीचे डाइनिंग टेबल पर बैठ गया.

तब तक दोनो मामी केई तरह के डिशस बना कर लल्लू के आगे रखने लगी.

लल्लू- मामा आप नही खाएँगे.

मामा- बेटा कुछ लोग आए थे आज. तो उनके साथ मैने कई चाय और थोड़ा नाश्ता भी कर लिया है अभी तो अब जगह नही बचा.

लल्लू- मेरा पेट फट जायगा इतना खा खा कर. थोड़ा सा हेल्प कर दीजिए ना.

मामा- ना भाई, बहुत दिन का बाकी था तो ये तेरे लिए है. मुझे तो उस में से छूने को भी नही देगी. खाने की तो बात ही छोड़.

छोटी मामी- सही कहा भाई जी आप ने. ये सब तो मेरे लाल के लिए ही है. इस में से और किसी को नही मिलने वाला.

मामा- देख लिया बेटा. कहा था ना मैने

लल्लू- मुस्कुराता हुआ हाथ बढ़ाया ही था खाने को की बड़ी मामी आ कर हाथ पकड़ ली.

बड़ी मामी- ना ना. आज अपने बेटे को में अपने हाथ से ही खिलाउन्गी.

लल्लू- मन में,. मर गया. बड़ी मामी तो ठूंस ठूंस कर खिलाएगी.

छोटी मामी किचन से बना बना कर लाती गई और बड़ी मामी लल्लू को कभी प्यार से तो कभी डाँट कर खिलाती गई.

फिर लल्लू को बचने का एक तरकीब दिमाग़ में आया.

लल्लू- ओह्ह्ह्ह ये पहले क्यू नही सोचा में ने.

बस फिर लल्लू अपने हाथ में भी खाना उठा लिया.

बड़ी मामी- क्या हुआ बेटा. तू क्यू हाथ में खाना उठाया. क्या तुम्हे मेरे हाथ से नही खाना. तुम्हे अच्छा नही लगा मेरे हाथ का.

लल्लू- बहुत अच्छा लग रहा है और में आप के हाथ से ही खाउन्गा. ये तो में आप को खिलाने को उठाया है.

फिर लल्लू अपना हाथ बड़ी मामी के

मूह की ओर बढ़ाया.

बड़ी मामी की आँखो में आँसू आ गया.

लल्लू- आप फिर से रोने लगी. क्या है मामी कितना पानी है आप की आँखो में. जब देखो तब नलका खोल लेती हो.

लल्लू दूसरे हाथ से मामी के आँखो के आँसू को पोंच्छ कर साफ कर दिया.

तभी छोटी मामी किचन से पकौड़ी ले कर आई.

लल्लू उनको भी हाथ पकड़ कर बैठा लिया.

फिर क्या था.

लल्लू दोनो मामी को एक एक कर खिलाता गया और दोनो मामी लल्लू.

लल्लू- बस मामी अब आज के लिए हो गया मेरा कोटा पूरा. अब मेरा पेट फट जायगा.

बड़े मामा वही पास बैठे हुए देखते हँसते रहे.

लल्लू बड़ी मुश्किल से उठ खड़ा हुआ वहाँ से और कराहता चलता हुआ मामा के पास आ कर बैठ गया.

मामा- और बता बेटा घर में सब कैसे है. दादू, तुम्हारे काका पापा और काकी सब बहने कैसे है.

लल्लू- सब बहुत अच्छे है मामा. भैया की शादी है सनडे को.

मामा- क्या राघव की शादी है. आया है वो. बहुत साल हो गये उसे भी देखे हुए.

लल्लू- हा मामा आए है भैया.

मामा- अब ये बता की तू यहाँ से गया तो हम सब को भूल कैसे गया.

लल्लू- आप सब तो मेरे दिल में हमेशा रहते हो मामा. आप लोगो को कैसे भूल सकता हूँ. अपने भगवान को भक्त कैसे भूल सकता है. आप सब मेरे लिए भगवान से कम थोड़े हो.

मामा- बस बस. वहाँ जा कर और कुछ सीखा या नही लेकिन बाते अच्छी करने लगा है.

लल्लू- में सच ही तो कह रहा हूँ मामा. आप सब मेरे लिए मेरे आगे मा बाप से बढ़ कर हो. आप सब के प्यार के आगे उनका प्यार कुछ भी नही है.

मामा- चल झूठा और बता कैसे आया है. आने कैसे दिए वो लोग तुम्हे बाइक से.

लल्लू- अब क्या कहूं मामा. सुनील काका को मैने थोड़ा बहुत बता दिया है यहाँ के बारे में तब जा कर वो कुछ मुझ पर मेहरबान रहते है नही तो बाकी लोग तो मुझे सच में लल्लू ही समझते है.

मामा हँसने लगे.

साथ में मामी लोग भी.

लल्लू- अच्छा मामा ये बताइए की आप लोग किस दिन आएगे वहाँ.

मामा- बेटा सनडे को शादी है लेकिन मुझे सनडे को तो बाहर जाना था एक ज़रूरी काम से. अब बड़ा भांजा है तो जाना भी ज़रूरी है. तो में शनिवार को ही अपना काम ख़तम कर के उधर से उधर ही आ जाउन्गा.

लल्लू- और मेरी दोनो मामी. उनका क्या.

मामा- ये तुम और तुम्हारी मामी समझे.

लल्लू मामी की ओर देखने लगा.

बड़ी मामी- बेटा आज तेरे छोटे मामा भी आ जायगे. वो भी बाहर गये है. फिर उन से बात कर के बताती हूँ. वैसे भी अब शादी में दिन ही 5 बचे है.

लल्लू- ठीक है मामी. आने दो छोटे मामा को भी.

मामा- अच्छा बेटा में अभी थोड़ी देर में आता हूँ.

लल्लू- ठीक है मामा. में भी ज़रा सब से मिल लेता हूँ.

मामी की ओर देख कर बोला.

मामी मुस्कुरा कर इजाज़त दे दी.

लल्लू वहाँ से बाहर आ गया और बैठक की ओर चल दिया.
 
Back
Top