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Incest मर्द का बच्चा

ऋतु का खाना उसके कमरे में ही पहुचा दिया. वो वही खाना खा ली.

सोनम बार बार लल्लू को ही देख रही थी

लल्लू से नज़र मिलती तो वो फिर शरमा कर पलके झुका लेती.

सब का खाना हो गया तो सब लड़किया बर्तन समेट कर धोने ले गई और काकी ओर मा रसोई समेट कर उसे सही से व्यवस्थित करने लगी.

सब फ्री हो कर अपने करे में चले गये.

आज लल्लू देखता ही रह गया उसे किसी ने पूछा ही नही.

लल्लू उदास हो कर खटिया पर ही लेट गया.
 
सुबह लल्लू की नींद खुली.

उठ कर अपने नियम के अनुसार नदी किनारे जा कर बैठ गया.’’

फिर सूर्य उदय के बाद लल्लू उधर से फ्रेश हो कर खेत की ओर चला गया जहा कल का फसल कटाई के बाद रखा गया था.

वहाँ कुछ देर काम देख कर वापस घर आ गया.

सुनील- क्या बात है बेटा. आज काफ़ी देर लगा दी आने में.

लल्लू- वो काका आज ज़रा खेत चला गया था. कल वो फसल कटाई हुई थी वो खलिहान में रखवा दिया था तो उसी को देखने गया था.

पापा- वाहह तुम ये सब काम भी करते हो. वेरी गुड. मुझे तो पता ही नही था मेरा बेटा अब बड़ा हो गया है.

दादू- लल्लू बेटा. आज कुछ मेहमान आने वाले है तो देख आँगन में कैसी तैयारी है. और अब कही जाना नही.

लल्लू- ठीक है दादू. वैसे कौन आ रहे है.

सुनील- तुम्हारे भैया को देखने लड़की वाले आ रहे हैं.

लल्लू- वाउ ये बात तो पहले बताना था ना. लल्लू भागता हुआ आँगन चला गया.

सब हँसने लगे.

आँगन में लड़किया राघव को बीच में बैठाए उसे छेड़ने में लगी हुई थी.

लल्लू- अरे मेरे भैया को तुम लोग क्यू तंग कर रहे हो.

रोमा- आ गया भैया का चमचा.

लल्लू- में उनका सिर्फ़ प्यारा भाई हूँ. आप लोगो को तो आज खुश होना चाहिए की आज भैया की शादी तैय हो गया तो कितना मज़ा आने वाला है.

ऋतु- शादी तय है बस वो डेट पक्की करने आ रहे हैं.

लल्लू ऋतु की आवाज़ सुन पीछे घूम कर देखा.

लल्लू- काकी अब कैसी तबीयत है आप की.

लल्लू ऋतु के पास आता बोला.

ऋतु- ठीक है अब. ( ऋतु बुरा सा मूह बनाती बोली.)

लल्लू का मूह लटक गया.

काजल दूर से ये सब देख रही थी.

थोड़ी देर में मेहमान आ गये.

फिर क्या था सब लग गये उनके आव भगत में.

लल्लू तो सिर्फ़ आँगन से दालान पर चाय पानी नाश्ता यही सब पहुँचाने में लगा हुआ था.

ऋतु जैसा पहले ही बताई थी की शादी पहले से तय था ये लोग सिर्फ़ डेट फिक्स करने आए थे.

पंडित को बुला कर डेट फिक्स किया गया.

डेट भी एक वीके बाद का निकाला. आगे सूभ मुहूँर्त नही था.

समय कम था और काम ज़्यादा.

मेहमान सब शाम तक रुके फिर अपने घर चले गये.

यहाँ सब बहुत खुस थे. एक वीक बाद ही शादी थी. घर में ख़ुसीयो का महॉल था. सब के चेहरे पर खुशिया देखते ही बनती थी.

शाम में सभी ख़ुसी से इसी बारे में बाते करते हुए खाना पीना कर सोने को चल दिए.

लल्लू अपने खटिया पर ही लेटा हुआ था.

सब अपने कमरे में चले गये सोने.

थोड़ी देर में रागिनी बाहर निकल कर नलका पर गई.

तभी लाइट चली गई.

रागिनी को अंधेरे में बहुत डर लगता था.

वो वहाँ से वापस आ कर लल्लू के पास पहुचि.

रागिनी- लल्लू बेटा सो गये क्या.

लल्लू- नही काकी क्या हुआ बताओ. कोई काम था.

रागिनी- लल्लू बेटा ये लाइट चली गई. मुझे अंधेरे से डर लगता है तुम्हे तो पता है. क्या तुम थोड़ा नलका पर चलोगे. मुझे बाथरूम जाना है.

लल्लू- ठीक है काकी चलो.

लल्लू आगे और उसके पीछे रागिनी नलका तक आ गये.

लल्लू- लो काकी हो आओ बाथरूम से.

रागिनी- बेटा तू जाना नही. यही रहना.

लल्लू- काकी में यही हूँ. आप हो कर आओ.
 
फिर रागिनी अपना सारी उठा कर कच्छि नीचे खिच मुतने को बैठ गई.

अंधेरे में भी रागिनी की गोरी बड़ी सी गान्ड चमक रही थी.

लल्लू को तो देख कर ही बाबूराव सलामी देने लगा.

लल्लू का मन कर रहा था की पीछे से जाये और काकी की इस बड़ी सी गान्ड को खा जाये मूह लगा कर.

रागिनी जब मूत रही थी तो बड़ी मधुर आवाज़ फ़िज़्जा में घुल रही थी.

लल्लू का बाबूराव जिसके मूह अब खून लग चुका था वो तो पागल हुआ पड़ा था. बार बार ठुमूक ठुमूक कर अपनी मनोदशा लल्लू को बता रहा था.

रागिनी मूत कर खड़ी हो गई. अपने मखमली गान्ड को फिर से साड़ी से धक ली.

लल्लू झट से पीछे घूम गया.

रागिनी हाथ पैर धो कर वहाँ से आँगन में आ गई.

रागिनी- लल्लू बेटा अब लाइट तो पता नही कब आएगा. क्या तुम मेरे साथ आज सो जाओगे.

लल्लू- ये भी कोई कहने की बात है. आप जब भी कहेंगे में आप के साथ सो जाउन्गा.

फिर दोनो रागिनी के कमरे में आ गये.

फिर दोनो बेड पर लेट गये.

लल्लू को तो नींद ही नही आ रहा था. एक तो नया बेड ऊपर से अभी जो रागिनी अपना मटका दिखा दी थी.

रागिनी थोड़ी देर में खर्राटे लेते हुए सो गई.

लल्लू वैसे ही लेटा हुआ आँखे बंद किए सोने की कोशिश कर रहा था.

पता नही कब तक वो यू ही जगा रहा.

आधी रात को अचानक लल्लू की नींद खुली.

लाइट आ गया था.

रागिनी की सारी उसके जाँघो तक ऊपर आ गया था और वो एक हाथ और एक पैर लल्लू के ऊपर रखे लल्लू को बाहों में भर कर मज़े से चिपकी सो रही थी.

लल्लू को ये देख कर नींद ही अर गई.

लल्लू का डंडा बिल्कुल सीधा खड़ा हो कर रागिनी की जाँघो के नीचे दबा हुआ था.

लल्लू बहुत बेचैन हो रहा था.

जब लल्लू से नही रहा गया तो वो रागिनी की जाँघो को पकड़ कर अपने ऊपर से हटा दिया और फिर उसके हाथ को हटाने लगा तो रागिनी और कस कर लल्लू से चिपक गई.

लल्लू के छाती में रागिनी की बड़ी बड़ी चुचिया दब कर पिस रहा था.

लल्लू घूम कर रागिनी को अपने बाहों में ले लिया और उसे अपने से चिपका लिया.
 
लल्लू से अब बर्दास्त नही हुआ तो वो रागिनी के चेहरे को देखता हुआ उसके माथे पर अपने तपते होंठ रख दिया.

रागिनी सोते हुए ही मुस्कुरा उठी.

लल्लू को बड़ा प्यार आया.

वो रागिनी के बालो को सहलाता उसे अपने बाहों में लिए आँख बंद कर सोने की कोशिश करने लगा.

सुबह जब रागिनी की नींद खुली तो वो लल्लू की बाहों में थी.

दोनो एक दूसरे से चिपके हुए थे.

रागिनी को बहुत शरम आया.

वो लल्लू के हाथो को हटा कर उठाने लगी तो देखती है की उसकी सारी उसके कमर से थोड़ा ही नीचे तक था और पीछे से तो बिल्कुल उठा हुआ था.

रागिनी एक नज़र लल्लू पर डालती अपनी सारी सही कर ली.

जब वो सारी सही कर के लल्लू के पास से थोड़ा हट कर दूर हुई तो जो देखती है वो देख कर तो एक पल के लिए उसे लगा की उसकी साँस ही रुक जाएँगी.

लल्लू का धोती उसके कमर से खुल गया था और अभी सुबह सुबह उसका डंडा अपने पूरे जाऊउबान पर खड़ा था.

रागिनी की साँसे तेज हो गई लल्लू के लौड़े को देख कर.

रागिनी को नीचे अपने कच्छी में गीलापन का अहसास हुआ तो वो और शरमा गई.

रागिनी- हाय राम ये जिस पर चढ़ जायगा वो तो मर ही जाएँगी. कैसे झेलेगी इसकी वाइफ इसे.

रागिनी बहुत आहिस्ता से उठ के लल्लू के ऊपर उसका धोती डाल दी.

फिर बेड से उतर कर अपने कमरे से बाहर आ गई.

बाहर काजल और ऋतु पहले से उठी हुई थी.
 
फिर रागिनी फ्रेश होने चली गई.

सुबह लल्लू थोड़ा देर से उठा.

बाहर आ कर आँगन में खाट पर बैठ गया.\

लल्लू- मा… चाय.

काजल- कहाँ था तू. अभी सो कर उठा है क्या.

लल्लू- हा मा. मझली काकी के रूम में सोया था. रात लाइट चली गई तो उन्हे डर लग रहा था.

काकी बोली साथ सोने को तो वही सो गया था जा कर.

ऋतु चाय ले कर लल्लू को दे दी.

शादी का एक वीक था तो अब सब के ज़ुबान पर सिर्फ़ शादी की ही बाते थी.

मा और काकी तो शादी की बातों में लगी थी.

शालिनी काकी ओर रागिनी काकी रसोई में थी.

भैया बाहर घूमने गये थे.

में भी चाय पी कर फ्रेश होने चला गया.

फ्रेश हो कर आया तो दादू सभी काका और पापा सभी लोग आँगन में बैठे चाय पी रहे थे.

दादू- लल्लू बेटा क्या बात है आज सुबह नही उठा था क्या.

लल्लू दादू के साथ बैठता हुआ.

लल्लू- कहाँ दादू. रात लेट से सोया था तो अभी अभी नींद खुली.

पापा- घर में अब काम है तो तुम्हे नींद आ रहा है.

सुनील- बेटा आज सब को ले कर बाज़ार जाना है.

समय कम है तो लॅडीस पार्टी को ले कर दोनो भाई बाज़ार से मार्केटिंग कर लो. वैसे भी एक बार में तो हो नही पाएगा.

क्या कहते हो.

लल्लू- जैसा आप कहे काका.

लल्लू- काका कब जाना है बाज़ार.

अनिल- बेटा खाना पीना हो जाये जल्दी से फिर चले जाना.

लल्लू- ठीक है काका. वैसे काका क्या सब लेना है और कहाँ से लेना है.

सुनील- कपड़े का तो दो दुकान तुम देख ही रखे हो.

लल्लू- दो कहाँ काका. एक ही दुकान तो गये थे उस दिन वो भी छोटा रेडीमेड का दुकान था.

सुनील- हाहाहा, में पहले दिन मेरे साथ गये थे उसका बात नही कर रहा. सोनम बेटा के साथ दूसरे दिन गये थे उसका बता रहा हूँ.

वो शोरुम तो बड़ा है ना.

लल्लू- ओह्ह तो वो अंकल आप को बता दिए.

सुनील- बताता कैसे नही. वो तो वो उसका बाप भी बताता.

लल्लू- अच्छा और दूसरा.

सुनील- दूसरा दुकान उसके भाई का है उस से कहना तो वो दिखा देगा.

बाकी तुम लोगो का जहा दिल करे और कपड़े अच्छा लगे वाला लेना.

लल्लू- ठीक है काका.

फिर ऐसे ही बाते होने लगी.
 
दादू- राम अपनी बहनों के यहाँ तुम ही चले जाओ. उन दोनो को साथ ही ले कर आना. अब समय नही रहा.

पापा- पापा मैने कॉल कर दिया है दोनो को की तैयारी कर के रहे. में आज ही चला जाउन्गा और कल आ जाउन्गा.

फिर सब दालान पर चले गये.

समय कम और काम ज़्यादा था. सभी रिश्तेदारों के यहाँ ये सूभ समाचार देना था. विवाह का मार्केटिंग करना था और खेती भी देखना था.

अनिल काका, सुनील काका और पापा को बाहर का काम मिला और छोटे काका को खेती का.

पापा को तो दो दिन बुआ को लाने में ही लगना था. वो अपना तैयारी में लग गये.

लल्लू ने आ कर सब को खाने की तैयारी जल्दी करने को बता दिया क्योंकि मार्केट जाना था.

लल्लू अपनी बहनों को भी जा कर बता दिया.

सभी बहने भी मा और काकी लोगो के साथ लग गई जल्दी से खाना तैयार करने में.

खाना हो जाने के बाद पापा तो चले गये दोनो बुआ को लाने. और दोनो बड़े चाचा भी रिश्तेदारों में न्योता देने चले गये.

लल्लू- काकी यहाँ घर पर कौन रहेगा. क्या सब का जाना सही है.

ऋतु- अभी दिन है तो हम सभी जा ही सकते है बेटा. हा अगर रात होता तो फिर यहाँ किसी को रहना पड़ता.

लल्लू- फिर सब तैयार हो जाइए.

…………………

बाज़ार जाने के नाम पर तो सभी लड़कियो में जैसे पंख लग गये थे. दौड़ दौड़ कर सही काम जल्दी जल्दी निपटा कर घुस गये तैयार होने में सभी.

लल्लू और राघव बाहर बैठे हुए थे.

राघव- यार भाई क्या तुम लड़की को देखे हो.

लल्लू- नही भैया. क्यू क्या हुआ.

राघव- नही हुआ कुछ नही. में ऐसे ही पूछ रहा हूँ.

लल्लू- मुझे तो कुछ पता ही नही था. कल मुझे पता चला है.

राघव- चल हम लोग भी तैयार हो जाते है.

लल्लू- अभी तो दो घंटा लगेगा इन लोगो को भैया. हमें तैयार हमें में 5 मिनिट्स लगेगा.

राघव हँसने लगा.

लल्लू- भैया आप खुश तो हो ना इस शादी से.

राघव- हा भाई. अब उम्र तो हो ही गया था. अब तुम्हारे जैसे सब से छोटा तो हूँ नही. घर में सब से बड़ा बेटा हूँ तो अगर में अभी शादी करने से मना भी करूँगा तो कोई नही मानेगे.

लल्लू- हा ये बात तो है भैया. सब से खुश तो मुझे दादू दिख रहे थे कल.

राघव- सही कह रहे हो. वैसे तो सब ही बहुत खुश है लेकिन दादू के चेहरे की ख़ुसी तो देखते ही बन रही थी कल.

लल्लू हँसने लगा.

ऋतु- तुम दोनो को नही जाना है क्या बाज़ार.

ऋतु जो बाहर निकली थी वो दोनो को हँसते देख कर बोली.

राघव- जा रहा हूँ मा. लल्लू कह रहा है की आप सब को 2 घंटा से पहले होगा नही तो इसी लिए हम यहाँ बैठे है.

लल्लू- ब..भ..भैया. म.म.मैने कब बोला. ये तो..आप ही कह रहे थे.

ऋतु गुस्से से लल्लू को देख रही थी.

लल्लू घबराता हुआ गर्दन झुका लिया.

ऋतु फिर कमरे में चली गई.

लल्लू- भैया आप क्यू मार खिलाना चाहते हो. मैने क्या बिगाड़ा है आप का. मुझ छोटे से मासूम बच्चे पर आप को थोड़ा सा भी तरस नही आता.

राघव- बहुत प्यार आता है भाई. अब चल जल्दी से हम भी तैयार हो जाते है. नही तो अभी अब किसी ने देख लिया ऐसे बैठे तो पक्का मार पड़ेगी.

फिर दोनो वहाँ से उठ कर कमरे में चले गये.

लल्लू का समान तो काजल के कमरे में था और राघव का ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर था अपना सेपरेट कमरा.

राघव ऊपर चला गया अपने कमरे में तैयार होने.

लल्लू काजल वाले रूम में चला गया.

जैसे ही रूम का दरवाजा खोला लल्लू वही जम गया.

काजल अभी सिर्फ़ एक कच्छी में खड़ी थी.

काजल दरवाजा खुलते ही घबरा गई और बेड पर रखे साड़ी से खुद को ढकने लगी.

लल्लू को देख कर उसे थोड़ा चैन मिला.

काजल- मुआ ऐसे कोई करता है क्या. डरा ही दिया था अभी.

लल्लू- मैने क्या किया है. सब मेरे पर ही गुस्सा रहते है.

लल्लू पैर पटकता हुआ कमरे से बाहर आ कर फिर से खाट पर बैठ गया.

पूरे 2 घंटे बाद सब बाहर निकल आने लगे.

कोमल- भाई तुम क्या ऐसे ही जाओगे.

लल्लू- गुस्से में; मा तैयार हो रही है. मेरा कपड़ा उसी रूम में है.

पीछे से आती रोमा- तो जा ना जल्दी तैयार हो जा. चाची का अब हो गया होगा.

लल्लू- दीदी आप ज़रा मेरा दो बेग होंगे वो ला दो ना.

रोमा- में क्यू लाउ. जाना है तो जा नही जाना तो मत जा.

लल्लू वही बैठा था तब तक राघव भी आ गया.

राघव- अरे तू अभी तक यही बैठा है.

लल्लू- क्या मेरा जाना ज़रूरी है भैया. यहाँ घर में भी तो कोई रहना चाहिए. आप सब को कार से ले कर चले जाओ ना. में यहाँ घर पर रहता हूँ. वैसे भी दादू भी यहाँ अकेले ही है.

राघव- क्या बात है. क्या हुआ. अभी तो तू बहुत खुश था. फिर तेरा चेहरा क्यू लटक गया है.

लल्लू- कौन कहता है में खुश नही हूँ. में बहुत खुश हूँ.

कोमल- हा तुम कितने खुश हो वो तो तुम्हरे चेहरे से ही पता चल रहा है. पूरे बारह बजे है.
 
सोनम पीछे से आती हुई.

सोनम- क्या हुआ. किस के चेहरे पर बारह बजे है. भैया के क्या.

राघव- नही मेरे भाई के.

सोनम नज़र घुमा कर लल्लू को देखी.

लल्लू गर्दन घुमा लिया उधर से.

अब लल्लू के लिए यहाँ बैठना मुश्किल हो रहा था.

क्या करे समझ नही आ रहा था. फिर कमरे में जाए तो कही फिर डाँट ना पड़ जाये और अगर नही जायगा तो तैयार कैसे होगा.

सोनम- क्या हुआ भाई.

सोनम लल्लू के पास आ कर उसके सर के बालो को हाथ से बिगाड़ति बोली.

लल्लू- दी मा के कमरे में कपड़े है मेरे. मा तैयार हो रही होगी. कैसे जाऊ.

सोनम- अरे तू उनका बेटा है. तू चला जायगा तो क्या हुआ. तुम ये सब कब से सोचने लगा.

किसी ने कुछ कहा है क्या तुम्हे फिर से.

लल्लू- नही दीदी. किसी ने कुछ नही कहा. मेरे कपड़े का बॅग ला दो ना कमरे से.

सोनम उठ कर खड़ी होती हुई.

सोनम- ठीक है में लाती हूँ.

लल्लू- दीदी दो बॅग है. दोनो ले आना.

तब तक सभी तैयार हो कर बाहर आ गई.

लग रहा था जैसे इंद्र की सभा से सारी अप्सराएँ यहाँ इस आँगन में उतर आई है.

सब एक से बढ़ कर एक लग रही थी.

लल्लू तो मूह खोले सोच रहा था की किस को देखे और किस को नही.

सोनम तब तक बॅग्स लाने चली गई.

रागिनी- बेटा मूह बंद कर ले. कोई मक्खी चली जाएगी.

आँगन में खड़ी सभी लॅडीस हँसने लगी.

सोनम दोनो बॅग ला कर लल्लू को दे दी.

सोनम- ये लो भाई. अब जल्दी से तैयार हो जाओ.

लल्लू दोनो बॅग ले कर लड़कियो के कमरे के बगल में उसके लिए जो कमरा तैयार था उस में चला गया.

वॉशरूम से फ्रेश हो कर लल्लू आया तो कमरे में सोनम खड़ी थी.

सोनम- कहाँ चले गये थे. कितना समय लगा रहा है. सब गुस्सा कर रहे है.

लल्लू- कौनकौन गुस्सा कर रहा है. लल्लू टवल से मूह हाथ साफ करता बोला.

सोनम- एक हो तो नाम बताऊं ना. सब ही खड़े है आँगन में.

लल्लू- आप सब कमरा बंद करो और चलो. में आ रहा हूँ.

सोनम- ये बोलूँगा तो सब और गुस्सा करेंगे और सब चले जाएँगे तो तु कैसे जायगा. में तेरे बगैर नही जाउन्गी.

लल्लू टी शर्ट जो पहना था वो खोल कर निकाल रहा था की सोनम की बात सुन कर रुक गया.

लल्लू- क्यू आप मेरे बगैर क्यू नही जाओगे.

सोनम- क्यू जब मेरा प्यारा भाई नही जायगा तो में कैसे जा सकती हूँ.

ऋतु- क्या कर रहे हो दोनो भाई बहन. जल्दी तैयार नही हुआ जा रहा तुम्हे. इतना से तो हम सब को भी नही लगता.

लल्लू- आप लोग चलो. में आता हूँ पीछे से.

ऋतु- तू यही बैठा रह. कोई ज़रूरत नही है जाने को.

ऋतु हाथ पकड़े सोनम के कमरे से बाहर निकल आई.

लल्लू अपना कपड़ा पहन कर पर्स ले कर जेब में रखा फिर रुमाल निकाल कर रखा.

बाहर आया तो सब चले गये थे.

लल्लू काजल के रूम की ओर गया तो वहाँ लॉक लगा था.

अब जूता तो उसी घर में बंद रह गया.

लल्लू पुराना स्लीपर ही पहन लिया.

कमरे को बंद कर लल्लू दालान पर आया तो वहाँ सोनम बैठी हुई थी दादू के पास .

लल्लू- आप गई नही दी.

सोनम- नही में तेरे साथ ही जाउन्गी.

लल्लू- घर का चाबी है क्या.

सोनम- क्यू क्या हुआ.

लल्लू- वो जूता मा के कमरे में रह गया है.

सोनम दादू के पास से चाबी ले कर आँगन में आई.

फिर कमरा खोल कर लल्लू वहाँ से अपना जूता निकाला.

लल्लू जब तक जूता पहना तब तक सोनम फिर से कमरे में लॉक लगा कर चाबी दादू को पकड़ा दी.

लल्लू जूता पहन कर दालान पर आया. वहाँ से बुलेट की चाबी ले कर बाहर आ गया.

दोनो बुलेट पर बैठ कर घर से चल दिए.
 
लल्लू- दीदी आप अभी भी गुस्सा हो क्या.

सोनम- तुम से किस ने कहा की में गुस्सा हूँ.

सोनम लल्लू के कंधे को पकड़ कर बोली.

लल्लू- नही मुझे लगा सब गुस्सा है तो आप भी होगे.

सोनम- और तुम्हे ऐसा क्यू लगा.

लल्लू- लेट हो गया ना आप को भी मेरे कारण से इस लिए मुझे लगा……

सोनम- इतना मत सोचा कर तू.

लल्लू बुलेट की स्पीड बढ़ाता हुआ बोला.

लल्लू- दीदी वो लोग कहा मिलेंगे हमें.

सोनम- मैने कोमल और रोमा को समझा दिया है. बाज़ार शुरू होने से पहले छोटी पुलिया है वही ये लोग रुकेंगे.

स्पीड बढ़ने से सोनम डर कर लल्लू से चिपक कर बैठ गई.

लल्लू को सोनम की कठोर उभार अपने पीठ पर रगड़ता हुआ बहुत अच्छा लग रहा था.

लल्लू- दीदी आज आप बहुत सुंदर लग रही हो.

लल्लू सोनम को बाइक क साइड मिरर मे देखता बोला.

सोनम उस में देखी तो दोनो की नज़रे मिल गई.

सोनम शरमा कर मुस्कुराती हुई लल्लू से और कस कर चिपकते हुए उसके कंधे पर पीछे अपना मूह छुपा ली.

थोड़ी देर में सोनम अपना चेहरा निकाल कर मिरर में फिर से देखी तो लल्लू वही देख रहा था.

लल्लू की तो आनंद की कोई सीमा नही थी.

सोनम मिरर में देखी तो लल्लू उसे ही देखता पाया.

सोनम का चेहरा शरम से लाल हो गया टमाटर की तरह.

लल्लू सोनम को देख कर मुस्कुरा पड़ा.

सोनम अब उधर देखी ही नही वो दूसरी साइड देखी तो लल्लू को उस तरफ के मिरर में खुद को देखता पाई.

सोनम एक मुक्का प्यार से लल्लू को मार दी पीठ पर और फिर उसकी पीठ में चेहरा छुपा कर दोनो हाथो से उसके सीने पर बाँध ली.

लल्लू को असीम आनंद का अहसास हो रहा था.

दोनो यू ही लूका च्छूपी का खेल खेलते हुए वहाँ पुलिया के पास आ गये.

वहाँ पर ये लोग थे ही नही.

लल्लू वहाँ रुक गया.

लल्लू- दी ये लोग तो है नही यहाँ. अब क्या आगे देखे.

सोनम- हा भाई आगे ही देखेंगे ना क्योंकि पीछे होने का तो कोई चान्स नही है उन लोगो का.

लल्लू फिर बाइक आगे बढ़ा दिया.

बाज़ार क्रे अंदर आ कर दोनो उन लोगो को देखने लगे.

लल्लू- दीदी आप इस ओर देखना में उस ओर देखता हूँ.

बाज़ार रोड के दोनो साइड था.

दोनो उन लोगो को ढूँढते हुए आगे बढ़ रहे थे.

तभी एक शोरुम के सामने इनका स्कॉर्पियो खड़ी दिखी.

दोनो शोरुम के सामने बाइक ले कर खड़ा कर दिए.

सभी लोग वही खड़े थे.

ऋतु- आ गये तुम. हो गया तुझे नाटक किए हुए. और सोनम तू भी इसके साथ रह कर इसके जैसा ही बनती जा रही है.

अब चल जल्दी से.. लेट हो रहा है.

लल्लू-( मन में.) बहनचोद ये हो क्या रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे में सब का पालतू कुत्ता बन गया हूँ. जब मन किया सब आ कर प्यार करते है फिर जब मन किया दुथकार देते है.

लल्लू सब के पीछे पीछे शोरुम में चला गया.

सब अपनी खरीदारी में लग गये.

वहाँ कुछ ज़्यादा उन लोगो को पसंद नही आया तो सब वहाँ से बाहर आ गये.

सोनम- मा में फॉर्म सॅब्मिट करने आई थी ना तो हम एक शोरुम में गये थे वहाँ सब कपड़े बहुत अच्छे है. वही चलते है.

ऋतु- तो इतनी देर से बताई क्यू नही. ऊपर से उस नाटक बाज के चक्कर में पड़ी थी. तुम्हे पता था तो हमारे साथ आना था ना.

लल्लू सब से पीछे खड़ा सब सुनता हुआ मुस्कुरा रहा था.

सोनम लल्लू के पास आ कर उसका हाथ पकड़ बाहर आ गई.

सोनम- भाई हमें उस दुकान ले चलो ना. यहाँ कुछ ख़ास कपड़े थे ही नही.

लल्लू चुप चाप बाइक स्टार्ट कर उस शोरुम की ओर चल पड़ा.

पीछे सभी कार से आ रहे थे.
 
उस शोरुम में पहुच कर लल्लू बाइक साइड में लगा अंदर चला गया सोनम के साथ.

लल्लू- नमस्ते अंकल.

दुकान वाला- अरे बेटा आप आ गये. आप का कपड़ा सिला हुआ रखा है.

लल्लू- अंकल मेरे साथ मेरा पूरा परिवार आया है. मेरे भैया की शादी तय हुआ है तो उसकी शॉपिंग के लिए.

दुकान वाला- अरे वाहह. अनिल भाई क लड़के की शादी तय हुआ है क्या.

लल्लू- जी अंकल.

दुकान वाला बाहर जा कर सभी का हाथ जोड़ कर नमस्कार करता हुआ दुकान में अंदर लाया.

सब को दुकान में बैठने को कहा.

सब को बैठा कर वो दुकान वाला एक लड़के को बुलाया और उसे काउंटर पर बैठने को बोला.

दुकान वाला- यहाँ भीड़ बहुत रहेगा तो आप लोग मेरे साथ पीछे गोदाम चलिए.

वहाँ में आप सब को सभी तरह के कपड़े तसल्ली से दिखा पाउन्गा.

फिर सभी उस दुकान वाले के साथ पीछे गोदाम चले गये. वहाँ लगभग 2 घंटे तक खरीदारी करने के बाद सभी वहाँ से उठे.

दुकान वाला - ये सारा में पॅक कड़वा कर गाड़ी में रखवा देता हूँ.

आप सब तब तक आइए चल कर शोरुम में बैठिए.

सोनम- मा यहाँ केपड़े का सिलाई भी होता है. अगर आप सब को सिलाई करवाना है तो अंकल वो भी करवा देंगे.

दुकान वाला - हा हा क्यू नही. जिन को भी अपने कपड़े सिलवाने हैं. वो नाप दे कर सिलने को दे दीजिए. दो दिन में सील कर तैयार करवा दूँगा.

सभी काकी वही ब्लाउस सिलने को दे दिए.

दीदी लोग भी अपने अपने लहंगा की फिटिंग करे तो कोई शाउट्स की सिलाई को भी दे दिए.

फिर सब वहाँ से शोरुम में आ गये.

फिर वहाँ सब के लिए वो दुकान वाला जूस मँगवाया.

सब जब तक जूस पी रहे थे तब तक सारा समान पॅक कर उनके गाड़ी में रखवा दिया गया.

लल्लू जा कर बिल बनवा लिया.

पैसे ऋतु जा कर पे कर दी.

लल्लू सोनम और रिधि वाला सौटस भी ले लिया.

लल्लू- (ऋतु से) अभी और लेना है क्या काकी. तो दूसरे दुकान का भी पता कर ले.

काजल- तुम्हे समझदार बनने की ज़रूरत नही है. हम सब को भी पता है यहाँ काफ़ी सारे शोरुम है.

लल्लू मा की बात सुन कर पीछे हो गया.

फिर सब गाड़ी में बैठ गये. लल्लू भी जा कर बाइक स्टार्ट कर गाड़ी के पीछे चल दिया.

फिर गाड़ी एक शोरुम पर रुका. लल्लू भी अपना बाइक पीछे रोक लिया.

सब गाड़ी से उतर कर अंदर दुकान में चले गये. लल्लू बाहर ही खड़ा रहा. उसे अंदर जाने का मन नही कर रहा था. लल्लू बाइक पर बैठा इधर उधर दुकाने देख रहा था.

तभी लल्लू देखता है की एक 2.5- 3 साल का बच्चा रोड पर अकेला रोड क्रॉस कर रहा है और उधर से एक कार बड़ी तेज दौड़ी चली आ रही है.

लल्लू बाइक को स्टॅंड पर खड़ा कर उस पर एक पैर मोड़ कर अपने जाँघ पर रखे बैठा हुआ था.

लल्लू जब ये देखा तो उसकी साँसे अटक गई.

ओह्ह्ह्ह्ह माइ गोड्ड़.. ये बच्चा…

लल्लू जल्दी से कूद कर बाइक से उतरा.

अब वो कार उस बच्चे से मुश्किल से चार कदम दूर था.

लल्लू तो कांप गया देख कर. उसे अब जल्दी ही कुछ करना था.

वो ऊपर वाले को याद कर दौड़ कर लौंग जंप लगाया तब तक कार भी बस बच्चे से टकराने ही वाला था.

लल्लू गुलाटी ख़ाता हुआ रोड पर बच्चे को गोद में लिए रोड के दूसरे साइड घिसटते हुए गिरा लेकिन कार फिर भी टक्कर मार ही दी थी.

लेकिन अच्छी बात ये थी की वो बच्चे के बदले लल्लू को लगा था.

बच्चा लल्लू के गोद में डर कर चिपका हुआ था.

लल्लू उस बच्चे को अपने सीने में छिपाए रोड पर गिरा था.

आस पास के दुकान पर जो लोग थे वो दौड़ कर आए.

राघव लल्लू को दुकान में नही देखा तो वो लल्लू को ढूँढते हुए बाहर देखने आया था.

बाहर सड़क पर भीड़ और सोर होता देख कर राघव वहाँ देखने चला आया.

तब तक वहाँ पर जमा भीड़ लल्लू को पकड़ कर उठाया.

लल्लू के कार से टक्कर होने से और फिर सड़क पर घिसट ने से उसका एक तरफ का कंधा और कमर छिल गया था. सर भी फुट गया था जहा से खून निकल रहा था.

कपड़े तो कई जगह से फट गया था.

सभी लोग लल्लू को पकड़ कर वही एक दुकान पर ले जा कर बैठाए. फिर उसे पानी पिलाया.

सभी तुरंत एक डॉक्टर को बुलाने को बोलने लगे एक दूसरे को.

तभी वहाँ एक मर्द और औरत आए. जिन का वो बच्चा था.

औरत तो बदस्तूर रोए जा रही थी.

वो दौड़ कर उस बच्चे को उठा कर अपने सीने से लगाए उसका शरीर सहलाती उसके छोटे मासूम चेहरे को चुम्मि से भर दी.

औरत- मेरा बच्चा. मेरे लाल. तुम्हे कही चोट तो नही लगा. मेरा सोना..वग़ैरह.. वग़ैरह…

मर्द भी अपने बचे को पकड़ कर उसे दुलार रहा था. उसका गाल च्छू कर सहला रहा था. कभी उस बचे को पीठ सहलाता कभी सर सहलाता.

अरे कोई पहले इसे डॉक्टर को दिखाओ. इसी के कारण ये बच्चा शकुशल है.

उस भीड़ में से किसी एक ने कहा.

एक मिनट एक मिनट में खुद एक डॉक्टर हूँ. वो औरत जिस का ये बच्चा था. उस ने बच्चे को अपने पति की गोद में दे कर लल्लू की ओर आती बोली.

लल्लू तो लोगो से घिरा हुआ था.

तब तक राघव भी भीड़ में आ कर देखा तो लल्लू….

राघव- ऊहह… गो...द….

भाई...ये कैसे.. हुआ.

लल्लू- वो….

तब तक वो औरत भी लल्लू के पास आ गई.

औरत- तूमम्म….

लल्लू सर उठा कर देखा… आप…

औरत- थैंक यु सूओ सूओ मच. अगर आअज…

अरे इसे थॅंक्स.. बाद में दे लेना पहले इसका इलाज तो करो. या किसी डॉक्टर के पास ही ले जाओ. कोई. उस भीड़ में से फिर किसी ने बोला.

वो लेडी डॉक्टर अपने पति से - आप अपना कार ले आओ ना इन्हे अपने क्लिनिक ही ले चलते है.

उसका पति दौड़ कर कार लाने चला गया.

दो मिनट में कार ले कर आ गया.

लल्लू को उस में बैठा कर वो डॉक्टर अपने क्लिनिक ले कर चली गई. साथ में राघव भी चला गया.

वो कार वाला तो टक्कर मार कर भाग गया था जब तक लोग लल्लू और बच्चे को संभालने में लगे थे.

लल्लू- सॉरी भैया. आप यहाँ क्यू आ गये. आप उन लोगो के पास जाओ नही तो वो सब हम दोनो को गायब देख कर बहुत चिंतित होंगे.

राघव- तुम्हे इस हालत में छोड़ कर में कैसे जा सकता हूँ भाई.

लल्लू- भैया मुझे कुछ नही हुआ है. बस थोड़ा सा खरॉच लगा है बस. आप बस काकी ओर बहनो के पास जाइए.

उन लोगो को मेरे बारे में मत बताईएगा. आप सब जिस काम से आए है वो काम कीजिए बिना मेरे चिंता करे. में बिल्कुल ठीक हूँ.

डॉक्टर- अरे बाबा कितना बोलते हो तुम. अभी बिल्कुल चुप रहो और इस बेड पर लेट जाओ. मुझे देखने दो कहा कहा चोट लगा है.

और हा आप इनका कोई फ़िकर मत कीजिए. आप अपना काम कर के आइए तब तक में इनको ज़रा देख लेती हूँ.

राघव परेशान सा वहाँ से उस शॉप पर आ गया जहा उसके घर की सभी महिलाए शॉपिंग कर रही थी.

ऋतु- कहा गया था तू. कब से ढूँढ रही हूँ. यहाँ हम तुम्हारे शादी की शॉपिंग में आए है और तुम इधर हम सब को छोड़ कर बाहर घूम रहा है.

राघव क्या कहे अभी लल्लू के बारे में बता कर सब को परेशान नही करना चाहता था. वो चुप चाप ऋतु के साथ चल दिया.
 
सब का शॉपिंग लगभग निपट ही गया था. और जो थोड़ा बहुत रह गया था वो अब अगले दिन आ कर दो चार लोग कर लेते.

वैसे समय भी काफ़ी हो गया था.

अभी अब शाम हो गया था और चारो और अंधेरा फैलने लगा था.

सोनम रह रह कर चारो और कुछ ढूँढ रही थी.

कोमल सोनम को इतना बेचैन देखा तो उस से रहा नही गया.

कोमल- क्या बात है दी. आप कुछ परेशान लग रही हो.

सोनम- नही कोमल. कोई बात नही है. आज तो बड़ा मज़ा आया शॉपिंग में.

कोमल- दी, अगर नही बताना चाहती तो कोई बात नही. यू बात तो मत बदलो.

सोनम- यार में काफ़ी देर से भाई को नही देखी हूँ. पता नही कहा है. आज सब उसके पीछे ही लग गये है. सब किसी ना किसी बात पर उसे डाँट देते है.

कोमल- हा दी. में भी देख रही हूँ. भाई आज बहुत उदास था. शायद बाहर होगा वो.

फिर सब समान पॅक करवा कर गाड़ी में रखवा दिया.

ऋतु काउंटर पर जा कर बिल पे कर दी.

फिर सब बाहर आ गये.

अब राघव भी परेशान था की क्या करे. कैसे इन लोगो को बताए.

लल्लू को देखना भी ज़रूरी था.

सोनम अलग परेशान थी जब देखी की बुलेट तो वहाँ खड़ी है लेकिन लल्लू नही है वहाँ.

तभी पास के दुकान वाला आ कर राघव से लल्लू के लिए पूछा.

दुकान वाला - भाई साहब अब आप के भाई कैसे है.

उस दुकान वाले की बात सुन्न कर सब चौक गये.

सोनम तो रोने ही लगी.

सोनम- भैया क्या हुआ भाई को.

दुकान वाला- क्या आप लोगो को पता नही है. वाहह क्या काम किया है उन्होने. बेचारे को थोड़ी चोट भी लग गई लेकिन ऐसा जज़्बा ऐसा कठिन काम सब नही कर सकता. इसके लिए कोई जिगर वाला ही चाहिए.

कैसे है अब वो भाई साहब.

कोमल, सोनम- एक साथ… क्या…..

कोमल को तो सुन्न कर ही हालत खराब होने लगा.. और वही हाल सोनम का भी था.

ऋतु काजल रागिनी शालिनी सब अब परेशान हो गये.

राघव- अब वो ठीक है. अभी हम वही जा रहे है.

फिर जल्दी से सब जैसे तैसे गाड़ी में बैठ कर क्लिनिक की ओर चल पड़े.

इधर वो डॉक्टर लल्लू के सारे कपड़े निकाल कर उसे एग्ज़ॅमिन कर रही थी.

लल्लू को एक साइड बगल में पैर में जंघा में कमर में हाथ पर और सर में चोट आया था. सभी जगह छिल गया था जहा से थोड़ा थोड़ा खून बहा था जो अब सुख गया था.

डॉक्टर डेटोल से उस सभी घोव को साफ कर उस पर दबाई लगा दी.

सर में जहा लगा था वहाँ सॉफ कर दबाई लगा कर पट्टी कर दी.

डॉक्टर - और कहा लगा है चोट.

लल्लू- अभी तो पता ही नही चल रहा है.

डॉक्टर दो तीन सुई भी लगा दी.

डॉक्टर - दर्द थोड़ी देर में ख़त्म हो जायगा. मैने नींद का भी इंजेक्षन लगा दिया है अभी थोड़ी देर सोने के बाद जब उठोगे तो दर्द ख़त्म हो जायगा आप का.

फिर बाते करते करते ही लल्लू सो गया.

डॉक्टर अपने पति से- आज हमारा तो पूरा संसार उजड़ने से इस लड़के ने बचा लिया.

डॉक्टर पति- सही कह रही हो. आज हम लोगो क ग़लती का ख़ाम्याजा ये बेचारा भुगत रहा है. काज़ में इस लड़के का कुछ दर्द बाँट पाता. आज अगर ये लड़का नही होता तो हम जीते जी मर जाते.

डॉक्टर- कितना भयॅबह था वो मंज़र. ये लड़का तो हमारे लिए भगवान बन कर ही आया था. पता नही कैसे हम इसका कर्ज़ उतारेंगे.

डॉक्टर पति- सही कह रही हो. बस तुम इसे जल्द से जल्द पहले जैसा स्वस्थ कर दो.

तब तक लल्लू के फॅमिली भी वहाँ क्लिनिक में आ गये.

राघव गाड़ी से निकलता तब तक कोमल और सोनम निकल कर क्लिनिक में घुस गई भाई भाई करती हुई.

डॉक्टर पति शोर सुन कर बाहर आया.

डॉक्टर पति- जी कहिए. क्यू शोर कर रही है.

सोनम- यहाँ मेरा भाई एडमिट है. हम उसे देखने आए है.

डॉक्टर पति- लेकिन आज क्लिनिक तो बंद है और यहाँ कोई पेसेंट नही है.

तभी पीछे से राघव के साथ बाकी लोग भी आ गये.

राघव को देख कर डॉक्टर का पति समझ गया की ये लोग लल्लू के फेमिली मंबर हैं.

फिर वो सब को वही सोफा और चेर्स पर बैठाया.

राघव- कैसा है अब मेरा भाई.

डॉक्टर पति- अब ठीक है. अभी सो रहा है वो.

फिर हाथ जोड़ कर सब को देखते हुए.

डॉक्टर पति-. आज ये नही होते तो हम अपने एकलौते बेटे को खो देते. ये बेटा हमें शादी के पूरे 10 साल बाद हुआ है. हमारा पूरा संसार आज आप के बेटे ने उजड़ने से बचा लिया.

कोमल- सिर.. क्या हम अपने भाई को देख सकते है.

डॉक्टर पति- में अभी आता हूँ.

फिर डॉक्टर का पति वहाँ से उठ कर अंदर आया.

अंदर डॉक्टर अपने चेयर पर बच्चे को ले कर बैठी हुई थी.

डॉक्टर का पति - इसके फॅमिली वाले आए है. वो इसे देखना चाहते है.

डॉक्टर - हा तो बुला लो ना. देखने दो उन लोगो को. पहले ज़रा एक चादर डाल दो इस पर.

डॉक्टर का पति एक चादर ले कर लल्लू के ऊपर डाल दिया.

चादर डालते ही लल्लू के बदन में पीछे जो टॅटू बना था वो सुनहरे रंग में चमकने लगा.

वो टॅटू जहा जहा चोट लगा था सर को छोड़ कर उन सभी जगह बनने लगा.

सभी जगह वैसे ही सुनहरे रंग में चमक रहा था. थोड़ी देर में ही सारे घाव भर गये.

जैसे लग रहा था की कही चोट ही नही लगा है.

यहाँ तक की सर में जो पट्टी के नीचे घाव था वो भी सही हो गया.

तब तक लल्लू के सभी घर वाले उसे देखने आए.

लल्लू तो अभी सो रहा था.
 
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