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Incest मर्द का बच्चा

अपडेट 12.

लल्लू ऋतु को पीछे छोड़ कर चल दिया.

सीढ़ियो के पास आ कर गेट को लगा दिया. फिर पलट कर आ गया छत पर.

लल्लू इस बार ऋतु के पास आ कर उसके दोनो चुचे को हाथो में पकड़ कर मसलने लगा.

बड़े बड़े गोल गुब्बारे यू छत पर खुले में दबाता हुआ लल्लू ऋतु के होंठो को अपने होंठो में ले कर चूसने लगा.

ऋतु किसी बेल की तरह लल्लू से लिपटी हुई थी.

लल्लू ऋतु के होंठो को चूस्ता हुआ ऋतु के दूध को भी दबाता जा रहा था.

ऋतु- उहह, थोड़ा आराम से दबाओ दर्द करता है.

लल्लू- दिन में जो तड़पा हूँ उसका बदला लेना तो अभी बाकी है. अभी से दर्द करने लगा मेरी लुगाई को.

ऋतु- क्या करू मेरा सैया ज़रा अनाड़ी है.

लल्लू ऋतु के आँचल को हटा कर उसके ब्लाउस को खोल दिया.

ऋतु- यहाँ खुले में मत करो. नीचे रूम में चलते है ना.

लल्लू- कभी काका के साथ खुले आसमान के नीचे ठंढी ठंढी हवओ के बीच में यू कुछ की हो.

ऋतु- मुआअ, अब तू ही मेरा ख़सम है तो अब से कभी उसकी कोई बात मत करना नही तो फिर कभी च्छुने भी नही दूँगी.

लल्लू- गुस्सा क्यू करती हो. यहाँ खुले में प्यार करने का एक अलग मज़ा है.

लल्लू ऋतु के ब्लाउस को खोल कर अलग कर दिया. नीचे ऋतु ने बलक ब्रा पहनी थी.

लल्लू- क्या बात है आज तो चुचि कसनी भी पहनी है.

लल्लू पीछे हाथ ले जा कर उसका भी हुक खोल कर अलग रख दिया.

अब ऋतु ऊपर से बिल्कुल नंगी थी.

ऋतु के दो फूले हुए गुब्बारे हवा में खुल रहे थे.

लल्लू एक को अपने हाथ में थाम कर दूसरे को मूह खोल कर जितना आ पाया उतना डाल कर चुभलने लगा.

ऋतु मज़े से सस्सीई ससीई करती हुई लल्लू के बालो में उंगली घुमा रही थी.

लल्लू आज सुबह से ही परेशान था.

रात में पहली बार तो वो ये स्वाद चखा था तो अभी अब उस में सबर नही था.

कुछ देर दोनो दूध को गुठने चूसने के बाद लल्लू ऋतु को वहाँ रखी एक टूटी कुर्सी पर बैठा दिया दीवाल के सहारे और अपना लॉडा निकाल कर उसके मूह के पास कर दिया.

ऋतु लल्लू के मन की बात समझ कर लल्लू के लौड़े को ले कर मुठियाने लगी.

लल्लू ऋतु के सर को पकड़ कर अपने लौड़े पर झुकता चला गया.

लल्लू ऋतु के होंठो पर अपना लॉडा रगड़ने लगा.

ऋतु अपना मुँह खोल कर लौड़े को अपने मूह में ले कर चुप्पा लगाने लगी.

लल्लू अपना कमर हिला कर ऋतु के मूह को छोड़ रहा था.

लल्लू तो मज़े से सातवे आसमान में था.

लल्लू को बहुत मज़ा आ रहा था ऋतु के मूह को चोदते हुए.

लल्लू हाथ बढ़ा कर ऋतु के चुचे को हाथो में ले कर मसलने लगा और इधर कमर हिला कर मूह भी चोदे जा रहा था.

धीरे धीरे लल्लू का हिलना तेज होता चला गया.

अब लल्लू ने ऋतु के मूह को दोनो हाथों से पकड़ कर अंदर तक अपने लौड़े को ठोकता जा रहा था.

लल्लू का लॉडा ऋतु के गले में कंठ पर जा कर ठोकर मारता था.

लल्लू मज़े से अपने मूह से अजीब अजीब आवाज़े निकाल ता हुआ ऋतु के मूह को तूफ़ानी गति से चोदे जा रहा था. वो भूल गया था की ये ऋतु का चूत नही बल्कि उसका मूह है.

लल्लू झटके ख़ाता हुआ ऋतु के मूह में ही खाली हो गया.

ऋतु एक झटके से लल्लू को धकेल कर खाँसते हुए उल्टी करने लगी.

लल्लू तो देख कर दर गया की जोश जोश में ये क्या कर गया.

ऋतु जब थोड़ी देर बाद संभाली तो उठ कर एक थप्पड़ लगाई.

ऋतु- मुआअ में क्या मना की हूँ कुछ करने को. कम से कम आराम से तो कर. तू तो जान ही ले लेता मेरा.

लल्लू- सॉरी काकी. वो मुझे होश ही नही रहा. लेकिन आप तो बता सकती थी ना.

ऋतु- मुआअ बताती कहाँ से. मूह में तो लॉडा ठूँस रखा था तू ने और हाथ से मार रही हूँ इतनी देर से तो उसका तो तुम्हे कोई पता ही नही चला.

लल्लू- सो सॉरी काकी. आगे से में ध्यान रखूँगा. प्लीज़ आप नाराज़ ना हो.

ऋतु- ठीक है. चल अब नीचे चल.

लल्लू- क्या…. अभी तो सुरू ही हुआ है. अभी कहा नीचे जाएँगे.

ऋतु- तो आज सोच लिया है यही खुले में चोदेगा मुझे.

लल्लू- हा रानी. आज मेरा मन है की में तुम्हे नंगी कर के खूब हुमच हुमच कर इस छत पर खुले आसमान के नीचे चोदु.

ऋतु- ज़्यादा ज़ोर मत लगाना. नही तो में चिल्लाने लगी तो लोग आ कर हम दोनो को जान से मार देंगे.

लल्लू ऋतु को पकड़ कर खड़ा किया और उसके होंठो को चूसने लगा.

लल्लू को ऋतु के मूह से अपने कम की बदबू आ रही थी लेकिन ऋतु के मदमस्त जवानी को चूसने में उसे अपने कम का भी टेस्ट अच्छा ही लगने लगा.

लल्लू ऋतु को पकड़ कर अलग किया और उसकी साड़ी को खोल कर अलग कर दिया.

ऋतु- लल्लू ये सब मत खोल बेटा. अगर यहाँ कोई आ गया तो हम जल्दी से तैयार भी नही हो पाएँगे.

लल्लू- अब यहाँ कोई नही आ पाएगा मेरी जान. मैने गेट बंद कर रखा है.

लल्लू पेटिकोट का नाडा पकड़ कर खिच दिया.

पेटिकोट सरसरता हुआ ऋतु के पैरो में गिर गया

अब ऋतु मदरजात नंगी थी इस खुले आसमान के नीचे.

ऋतु को बड़ा शरम आ रहा था.

वो शरमा कर पीछे घूम गई जो लल्लू के जान पर बन आई.

ऋतु की भारी मटके जैसे गोल गान्ड अब लल्लू के आँखो के सामने था.

चाँद की रोशनी में ऋतु का संगमरमर जैसा बदन चमक रहा था. उस पर से ये कातिल गान्ड…

हाय्यी क्या कहना.

लल्लू जल्दी से अपना सारा कपड़ा खोल कर नंगा हो गया और पीछे से ही ऋतु से चिपक गया.

ऋतु का गान्ड देख कर लल्लू का लॉडा रोड की तरह खड़ा हो गया था जो चिपकने से बिल्कुल ऋतु के गान्ड के दोनो फाकॉ के बीच टेढ़ा वो कर नीचे निकल गया था.
 
ऋतु लल्लू के गरम रोड की तरह सखत लौड़े को फील कर के मज़े से गंगना गई.

पूरे बदन में ऋतु के चीटियाँ रेंगने लगी.

लल्लू आगे हाथ ले जा कर ऋतु के दोनो चुचे को थाम लिया और उसको अपने से चिपका कर हल्के हल्के घिस्ससा लगाने लगा.

ऋतु के पीछे चिपका लल्लू तो मज़े से आसमान में अर रहा था और यही हाल कुछ ऋतु का भी था वो नीचे से पानी बहाए जा रही थी.

अपने होंठो को दाँतों से काटते हुए मज़े से लल्लू से अपना चुचे मीस्वा रही थी और पीछे से घिस्से लगवा रही थी.

ये ऋतु का पहला अनुभब था ऐसा.

अनिल तो ढंग से कभी अपना लुल्ली भी नही डाला था उसके अंदर.

अब ऋतु से बर्दास्त करना मुस्किल हो रहा था.

लल्लू- रानी में तुम्हारी ये मटकी फोड़ना चाहता हूँ.

ऋतु- पहले मुझे पटक कर जम के चोद खूब हुमच हुमच कर ताकि कल में चालू तो लोग समझे की में खूब जम के चुदी हूँ अपने ख़सम से सारी रात.

लल्लू ऋतु की बाते सुन् कर जोश में आ गया और उसे घुमा कर रेलिंग पकड़ कर झुका दिया.

लल्लू ऋतु के पीछे आ कर ऋतु के कमर तक लहराते बालो को इकट्ठा कर अपने हाथ में ले कर लौड़े को ऋतु की चूत पर लगा कर रगड़ने लगा

ऋतु- अब और मत तडपा रे. अब मुझसे और बर्दास्त नही होगा. ये कैसा आग लगा दिया तूने. जल्दी से अपना लॉडा ठोक मारे निगोडी भोसरे में.

लल्लू ऋतु की चूत से निकलते पानी से अपने लौड़े को अच्छी तरह से चिकना कर लिया घिस घिस कर और फिर ऋतु की चूत क च्छेद पर अपने लौड़े को टीका कर ऋतु के मखमली गान्ड को दोनो हाथो में पकड़ लिया और हुम्मच कर धक्का मारा.

एक ही धक्के में जड़ तक लल्लू का लॉडा ऋतु की चूत को फर्टी हुई जा घुसा.

ऋतु बहुत ज़ोर से चीख पड़ी.

लल्लू जल्दी से अपने हाथ से ऋतु के मूह को बंद किया लेकिन फिर भी एक बार तो वो चिल्ला ही चुकी थी.

लल्लू का लॉडा चूत की गर्मी से अंदर और फुल रहा था जैसे.

इधर ऋतु का तो बुरा हाल था.

इतना दर्द की उसे लगा जैसे किसी ने पेट तक कोई गर्म सरिया घुसा दिया है.

वो लल्लू की बाहों में मछली की तरह फड्फडा रही थी छूटने को.

लल्लू ऋतु के मूह से हाथ हटा कर उसके चुचे को दोनो हाथो से पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से मिचने लगा.

ऋतु- अया माररर दीययया रीए.. क्यू आ गइइ मे यहाँ.. आअहह अच्च्छा था रूमम में ही सो जाती. फटत्त गइइ मेरि चूत

ऋतु के आँखो से टपटप आँसू बह रहे थे.

लल्लू कभी दोनो चुचे दबाता तो कभी उसके मटके जैसी गान्ड क फांको को मसलने लगता.

कुछ देर ऐसे ही मसलने के बाद ऋतु का रोना कम हुआ तब लल्लू हल्के हल्के अपना लॉडा निकल कर धीरे डालने लगा.

अभी थोड़ा ही बाहर निकालता और फिर पूरा घुसा देता था अपना लॉडा.

ऋतु को बार बार अपने पेट में बच्चे दानी पर ठोकर लगता महसूस होता.

ऋतु- कितना बड़ा है एक मुये का लॉडा. बिल्कुल गधे का है…

पता नही किस घड़ी पैदा किया था इस गधे क लौड़े को काजल.

लल्लू अब आधे से ज़्यादा लॉडा निकल कर पेलने लगा ऋतु को.

चुचे दबाता हुआ लल्लू अब हुमच हुमच कर धक्का मारने लगा.

ऋतु हर धक्के पर कराह उठती.

ऋतु के हाथ से रेलिंग छूट

जाता तो फिर उसे मजबूती से पकड़ लेती और अगले धक्के में फिर छूट जाता.

ऋतु की गान्ड लाल हो गई थी लल्लू के कमर से लग कर.

खुले आसमान के नीचे चाँदनी रात में ये दोनो दिन दुनिया से बेख़बर ठप ठप ठप की मधुर संगीत बजाए जा रहे थे.

ऋतु- आअहह मुआअ कैसी चोद रहा है.. जैसे इसीई किी माआ काजरिी की भोसरा हूँ. हाय्यी माआ रीि मे गइइ..

ऋतु चिल्लाते हुए झरने लगी.

लल्लू अपने मा का नाम ऋतु के मूह से सुन कर सुन्न्ं हो गया.

उसका लॉडा जैसे और सख़्त हो गया मोटाई जैसे और बढ़ गई.

लल्लू अब तूफ़ानी गति से ऋतु के गान्ड को मसलते हुए चोदे जा रहा था.

लल्लू- ली रनडिीई बड़ी गर्मी थी चुप कर रात को लॉडा चुस्टिीई है. ले अब मेरा लोडाअ आज भोसड़ाअ बनंाअ दूँगा. आहह मेरि रनडिीई रितुऊउ.

लल्लू पता नही क्या बके जा रहा था और ऋतु के चुचे और गान्ड को तो मसल मसल कर फूला दिया था.

ऋतु लल्लू के हैवानियत को सहन नही कर पा रही थी…

जैसे उसे लग रहा था की इस से अच्छा तो वो कुवारि रह लेती. कभी नही चुदती.

अभी वो दो बार झड़ चुकी थी और अब उसको जलन हो रहा था अंदर.

लल्लू अभी वाहसी पागल था और ऋतु भी अधेड़ उम्र की गदराई .

ऋतु में गर्मी बहुत थी लेकिन एक तो उम्र और दूसरा लल्लू ठहरा अर्ध पागल.

ऋतु लल्लू को अब झेल नही पा रही थी.

ऋतु- लल्लू तुम्हे मेरी कसम है अभी मुझे छोड़ दे. बहुत जलन हो रहा है और पैर भी दर्द कर रहा है. मुझे थोड़ा सास लेने दे फिर करना.

लल्लू ऋतु की बात सुना ही नही.

उसके कान में तो बस काजल नाम घूम रहा था जो ऋतु झरते हुए बोली थी.
 
ऋतु- लल्लू तुम्हे मेरी कसम है अभी मुझे छोड़ दे. बहुत जलन हो रहा है और पैर भी दर्द कर रहा है. मुझे थोड़ा साँस लेने दे फिर करना.

लल्लू ऋतु की बात सुना ही नही.

उसके कान में तो बस काजल नाम घूम रहा था जो ऋतु झरते हुए बोली थी.

लल्लू सटक से ऋतु की चूत से लंड निकल कर उस पर ढेर सारा थूक लगाया और ऋतु जो खुश हो कर बैठने जा रही थी साँस दुरुस्त करने को, उसे उठा कर अपने गोद में ले लिया और नीचे से ठोक दिया बुर में पूरा लॉडा.

ऋतु- आहह आज ये मेरि जान ले कर मानेगा.. हे भगवान्नन् बचाअ ले.. आगीए कभि नहिी चुदुन्गी इस पागल्ल्ल वाहसीईई गधे के लौडईए से..

लल्लू हुमच हच कर ऋतु को उछलता हुआ चोदे जा रहा था.

थोड़ी देर में उसे ले कर वही एक फटे कॅमपिंग क्लॉत पर लेटा कर ऋतु के दोनो पैर को कंधे पर डाल छोड़ दिया अपना मिशल

ऋतु इस धक्के से गंगना गई…

ऋतु- कोइ बचा लो रीए. मार देगा मुझीए.

लल्लू अब अपने मंज़िल के करीब था. अब उसे कुछ नही दिख रहा था. वो ऋतु के दोनो पैर को ऋतु के छाती से चिपका कर ऋतु के ऊपर सवार हो हचक हचक कर चोदे जा रहा था फुल स्पीड में.

लल्लू एक आखरी शॉट लगा कर ऋतु के अंदर ही भलभला कर झरने लगा.

लल्लू के हाथ से ऋतु का पैर छूट गये.

ऋतु अपने पैर को फ्री होते ही हाथ पैर फैलाए लल्लू के पानी को फील करती काँपति वो भी झड़ रही थी..

ऋतु और लल्लू पूरे पसीने से भींगे हुए थे.

काफ़ी देर तक वहाँ सोए रहे वो दोनो.

ऋतु के आँखो से टपटप आँसू बह रहे थे.

लल्लू कभी दोनो चुचे दबाता तो कभी उसके मटके जैसी गान्ड क फांको को मसलने लगता.

कुछ देर ऐसे ही मसलने के बाद ऋतु का रोना कम हुआ तब लल्लू हल्के हल्के अपना लॉडा निकाल कर धीरे डालने लगा.

अभी थोड़ा ही बाहर निकालता और फिर पूरा घुसा देता था अपना लॉडा.

ऋतु को बार बार अपने पेट में बच्चेदानी पर ठोकर लगता महसूस होता.

ऋतु- कितना बड़ा है एक मुई का लॉडा. बिल्कुल गधे का है…

पता नही किस घड़ी पैदा किया था इस गधे के लौड़े को काजल.

लल्लू अब आधे से ज़्यादा लॉडा निकाल कर पेलने लगा ऋतु को.

चुचे दबाता हुआ लल्लू अब हुमच हुमच कर धक्का मारने लगा.

ऋतु हर धक्के पर कराह उठती.

ऋतु के हाथ से रेलिंग छूट जाता तो फिर उसे मजबूती से पकड़ लेती और अगले धक्के में फिर छूट जाता.

ऋतु की गान्ड लाल हो गई थी लल्लू के कमर से लग कर.

खुले आसमान के नीचे चाँदनी रात में ये दोनो दिन दुनिया से बेख़बर ठप ठप ठप की मधुर संगीत बजाए जा रहे थे.

ऋतु- आअहह मुआअ कैसी चोद रहा है.. जैसे इसीई किी माआ काजरिी की भोसरा हूँ. हाय्यी माआ रीि मेनी गैइइ..

ऋतु चिल्लाते हुए झरने लगी.

लल्लू अपने मा का नाम ऋतु के मूह से सुन कर सुन्न्ं हो गया.

उसका लॉडा जैसे और सख़्त हो गया मोटाई जैसे और बढ़ गई.

लल्लू अब तूफ़ानी गति से ऋतु के गान्ड को मसलते हुए चोदे जा रहा था.

लल्लू- ली रनडिीई बादीई गर्मी त्ीी च्छुप्प्प कार रात को लॉडा चुस्टिीई है. ले अब मेरा लोडाअ आज भोसड़ाअ बनंाअ दूँगा. आहह मेरि रनडिीई रितुऊउ.

लल्लू पता नही क्या बके जा रहा था और ऋतु के चुचे और गान्ड को तो मसल मसल कर फूला दिया था.

ऋतु लल्लू के हैवानियत को सहन नही कर पा रही थी…

जैसे उसे लग रहा था की इस से अच्छा तो वो कुवारि रह लेती. कभी नही चुदती.

अभी वो दो बार झड़ चुकी थी और अब उसको जलन हो रहा था अंदर.

लल्लू अभी वाहसी पागल था और ऋतु भी आधेर उम्र की गदराई गाय.
 
ऋतु में गर्मी बहुत थी लेकिन एक तो उम्र और दूसरा लल्लू ठहरा अर्ध पागल.

ऋतु लल्लू को अब झेल नही पा रही थी.

ऋतु- लल्लू तुम्हे मेरी कसम है अभी मुझे छोड़ दे. बहुत जलन हो रहा है और पैर भी दर्द कर रहा है. मुझे थोड़ा साँस लेने दे फिर करना.

लल्लू ऋतु की बात सुना ही नही.

उसके कान में तो बस काजल नाम घूम रहा था जो ऋतु झड़ते हुए बोली थी.

लल्लू सटाक से ऋतु की चूत से लंड निकाल कर उस पर ढेर सारा थूक लगाया और ऋतु जो खुश हो कर बैठने जा रही थी साँस दुरुस्त करने को, उसे उठा कर अपने गोद में ले लिया और नीचे से ठोक दिया बुर में पूरा लॉडा.

ऋतु- आहह आज ये मेरि जान ले कर मानेगा.. हे भगवान्नन् बचाअ ले.. आगे कभी नहीं चुदुन्गी इस पागल्ल्ल वहशीईई गधे के लोंडे से..

लल्लू हुमच हच कर ऋतु को उछलता हुआ चोदे जा रहा था.

थोड़ी देर में उसे ले कर वही एक फटे कॅमपिंग क्लॉत पर लिटा कर ऋतु के दोनो पैर को कंधे पर डाल छोड़ दिया अपना मिसाइल

ऋतु इस धक्के से गंगना गई…

ऋतु- कोइ बचा लो रीए. मार देगा मुझे.

लल्लू अब अपने मंज़िल के करीब था. अब उसे कुछ नही दिख रहा था. वो ऋतु के दोनो पैर को ऋतु के छाती से चिपका कर ऋतु के ऊपर सवार हो हचक हचक कर चोदे जा रहा था फुल स्पीड में.

लल्लू एक आखरी शॉट लगा कर ऋतु के अंदर ही भलभला कर झड़ने लगा.

लल्लू के हाथ से ऋतु का पैर छूट गये.

ऋतु अपने पैर को फ्री होते ही हाथ पैर फैलाए लल्लू के पानी को फील करती काँपति वो भी झड़ रही थी..

ऋतु और लल्लू पूरे पसीने से भींगे हुए थे.

काफ़ी देर तक वहाँ सोए रहे वो दोनो.

ऋतु की आँखो से टपटप आँसू बह रहे थे.

लल्लू कभी दोनो चुचे दबाता तो कभी उसके मटके जैसी गान्ड की फांको को मसलने लगता.

कुछ देर ऐसे ही मसलने के बाद ऋतु का रोना कम हुआ तब लल्लू हल्के हल्के अपना लॉडा निकाल कर धीरे डालने लगा.

अभी थोड़ा ही बाहर निकालता और फिर पूरा घुसा देता था अपना लॉडा.

ऋतु को बार बार अपने पेट में बच्चेदानी पर ठोकर लगता महसूस होता.

ऋतु- कितना बड़ा है मुई का लॉडा. बिल्कुल गधे का है…

पता नही किस घड़ी पैदा किया था इस गधे के लौड़े को काजल.

लल्लू अब आधे से ज़्यादा लॉडा निकाल कर पेलने लगा ऋतु को.

चुचे दबाता हुआ लल्लू अब हुमच हुमच कर धक्का मारने लगा.

ऋतु हर धक्के पर कराह उठती.

ऋतु के हाथ से रेलिंग छूट जाता तो फिर उसे मजबूती से पकड़ लेती और अगले धक्के में फिर छूट जाता.

ऋतु की गान्ड लाल हो गई थी लल्लू के कमर से लग कर.

खुले आसमान के नीचे चाँदनी रात में ये दोनो दिन दुनिया से बेख़बर ठप ठप ठप की मधुर संगीत बजाए जा रहे थे.

ऋतु- आअहह मुआअ कैसी चोद रहा है.. जैसे इसीई किी माआ काजरिी की भोसरा हूँ. हाय्यी माआ रीि मेनी गैइइ..

ऋतु चिल्लाते हुए झड़ने लगी.

लल्लू अपने मा का नाम ऋतु के मूह से सुन कर सुन्न्ं हो गया.

उसका लॉडा जैसे और सख़्त हो गया मोटाई जैसे और बढ़ गई.

लल्लू अब तूफ़ानी गति से ऋतु के गान्ड को मसलते हुए चोदे जा रहा था.

लल्लू- ली रनडिीई बादीई गर्मी त्ीी च्छुप्प्प कार रात को लॉडा चुस्टिीई है. ले अब मेरा लोडाअ आज भोसड़ाअ बनंाअ दूँगा. आहह मेरि रनडिीई रितुऊउ.

लल्लू पता नही क्या बके जा रहा था और ऋतु के चुचे और गान्ड को तो मसल मसल कर फूला दिया था.

ऋतु लल्लू के हैवानियत को सहन नही कर पा रही थी…

जैसे उसे लग रहा था की इस से अच्छा तो वो कुवारि रह लेती. कभी नही चुदती.

अभी वो दो बार झड़ चुकी थी और अब उसको जलन हो रहा था अंदर.

लल्लू अभी वहशी पागल था और ऋतु भी अधेड उम्र की गदराई गाय.

ऋतु में गर्मी बहुत थी लेकिन एक तो उम्र और दूसरा लल्लू ठहरा अर्ध पागल.

ऋतु लल्लू को अब झेल नही पा रही थी.

ऋतु- लल्लू तुम्हे मेरी कसम है अभी मुझे छोड़ दे. बहुत जलन हो रहा है और पैर भी दर्द कर रहा है. मुझे थोड़ा साँस लेने दे फिर करना.

लल्लू ऋतु की बात सुना ही नही.

उसके कान में तो बस काजल नाम घूम रहा था जो ऋतु झड़ते हुए बोली थी.
 
ऋतु- लल्लू तुम्हे मेरी कसम है अभी मुझे छोड़ दे. बहुत जलन हो रहा है और पैर भी दर्द कर रहा है. मुझे थोड़ा साँस लेने दे फिर करना.

लल्लू ऋतु की बात सुना ही नही.

उसके कान में तो बस काजल नाम घूम रहा था जो ऋतु झड़ते हुए बोली थी.

लल्लू सटाक से ऋतु की चूत से लंड निकाल कर उस पर ढेर सारा थूक लगाया और ऋतु जो खुश हो कर बैठने जा रही थी साँस दुरुस्त करने को, उसे उठा कर अपने गोद में ले लिया और नीचे से ठोक दिया बुर में पूरा लॉडा.

ऋतु- आहह आज ये मेरि जान ले कर मानेगा.. हे भगवान्नन् बचाअ ले.. आगे कभी नहीं चुदुन्गी इस पागल्ल्ल वहशीईई गधे के लोंडे से..

लल्लू हुमच हच कर ऋतु को उछालता हुआ चोदे जा रहा था.

थोड़ी देर में उसे ले कर वही एक फटे कॅमपिंग क्लॉत पर लिटा कर ऋतु के दोनो पैर को कंधे पर डाल छोड़ दिया अपना मिसाइल

ऋतु इस धक्के से गंगना गई…

ऋतु- कोइ बचा लो रीए. मार देगा मुझे.

लल्लू अब अपने मंज़िल के करीब था. अब उसे कुछ नही दिख रहा था. वो ऋतु के दोनो पैर को ऋतु के छाती से चिपका कर ऋतु के ऊपर सवार हो हचक हचक कर चोदे जा रहा था फुल स्पीड में.

लल्लू एक आखरी शॉट लगा कर ऋतु के अंदर ही भलभला कर झड़ने लगा.

लल्लू के हाथ से ऋतु का पैर छूट गये.

ऋतु अपने पैर को फ्री होते ही हाथ पैर फैलाए लल्लू के पानी को फील करती काँपति वो भी झड़ रही थी..

ऋतु और लल्लू पूरे पसीने से भींगे हुए थे.

काफ़ी देर तक वहाँ सोए रहे वो दोनो.
 
सुबह दरवाजा खटकने से लल्लू का ध्यान टूटा.

एक नज़र ऋतु को देखा तो वो सोई हुई थी.

लल्लू आगे बढ़ कर दरवाजा खोल दिया.

दरवाजे पर काका खड़े थे.

अनिल- क्या बात है. आज नींद नही खुली क्या.

लल्लू- क्या करू. दिन में कोई काम नही था तो सो गया था. रात में नींद नही आई. अभी जा कर सोया था की आप आ कर उठा दिए.

अनिल- चलो कोई नही. फ्रेश हो जाओ. अपनी काकी को भी उठा देना. फिर चलते है संगम स्नान पर.

काका चले गये.

लल्लू दरवाजा लगा कर ( काकी को उठाऊ या अपनी लुगाई को) अपने आप से बड़बड़ाता ऋतु के पास आया और उसके चुचे को पकड़ कर सहलाने लगा.

ऋतु कुन्मूनाने लगी.

लल्लू ऋतु के होंठो को मूह में भर कर उसका रस चूसने लगा तो ऋतु की नींद खुल गई.

थोड़ी देर बाद ऋतु भी लल्लू का भरपूर साथ दे रही थी.

लल्लू अलग हो कर बैठ गया. मन तो नही था हटने का लेकिन अभी समय नही था ये सब करने का.

लल्लू- काका आए थे. जल्दी से जा कर फ्रेश हो जाओ फिर स्नान को चलना है.

ऋतु अंगड़ाई लेती हुई उठती है और एक चमत लगा देती है लल्लू को.

ऋतु- आअहह हरामी साले. पूरा बदन दर्द कर रहा है. मुझे पैर नही उठाया जा रहा जैसे लगता है की अभी भी लॉडा घुसा है मेरी बुर में.

लल्लू हँसता हुआ ऋतु की बुर को सहला दिया.

ऋतु सस्सिईई सस्सीई करती हुई पीछे हो गई हल्के से.

फिर ऋतु अपने कपड़े को सही कर के बाहर फ्रेश होने को चली गई.

ऋतु फ्रेश हो कर आ कर लल्लू को एक चमत फिर लगा दी.

ऋतु- कुत्ते, क्या हालत बना दिया है तू ने मेरे सोन परी का.

लल्लू- मैने क्या किया. तू ही तो बोल रही थी की ऐसे चोदना की बाहर निकलु तो लोग मेरा चाल देख कर बोले देख अपने ख़सम से सारी रात हुमच हुम्मच कर चुदवा कर आई है.

ऋतु लल्लू की बाते सुन् कर शरमा गई. शरम से उसके गाल बिल्कुल टमाटर की तरह लाल हो गये.

लल्लू बाहर निकल कर फ्रेश होने चला गया.

वहाँ से आ कर सारे कपड़े जो नहा कर पहनने थे वो एक बाग में डाल कर सभी चल दिए स्नान करने.
 
लल्लू बाहर निकल कर फ्रेश होने चला गया.

वहाँ से आ कर सारे कपड़े जो नहा कर पहनने थे वो एक बाग में डाल कर सभी चल दिए स्नान करने.

आज, कल इतनी भीड़ नही थी. कल कुंभ स्नान था. तो काफ़ी सारे लोग कल ही स्नान कर के चले गये थे. दूसरा कल भगदड़ भी मच गई थी तो कुछ दर से भी चले गये थे.

अनिल- क्या बात है ऐसे क्यू चल रही है. ( अनिल ऋतु की चाल देख कर बोला)

ऋतु शरमा गई. घबरा भी गई. अब क्या बोले अपने इस ख़सम को की वो उसको छोड़ कर अपने देवर के बेटे से, अपने बेटे से भी उम्र में छोटे लड़के से ब्याह कर के उसकी लुगाई बन गई है. उसकी रंडी बन गई है और रात भर उस से जम के चुदवाई है. इतनी चुदी है जितना तो इसने एक शाल में नही चोदा होगा. इतना इस नये ख़सम ने उसके फतार ने उसे एक रात में चोद दिया है.

ऋतु- वो रात अंधेरे में ठोकर लग गई थी. तो पैर में मोच आ गया था.

लल्लू ऋतु के की चाल को देख कर मूह दबा कर हिस्से जा रहा था. लल्लू से तो के बेटे ही नही रुक रही थी. और ऋतु बड़ी बड़ी आँख कर के लल्लू को धमकाया जा रही थी.

यू ही मज़े करते हुए चारो संगम पर पहुच गये.

चारो लोग नहा कर रोड पर आ गये.

अनिल काका ने एक ए-रिक्शा किराए पर किए कुंभ क सारे स्थल के दर्शन के लिए.

ये लोग उस में बैठ कर चल दिए भगवान के दर्शन को.

संगम में स्नान किए ही थे ये लोग तो वहाँ परतम नायक का पूजा कर ही लिए थे त्रिवेणी के

उस के बाद ये लोग चल दिए दूसरे नायक के दर्शन को. माधव मंदिर. जिन में सब से प्रमुख हैं बेनी माधव.

वैसे तो पूरे प्रयाग में कुल बारह माधव मंदिर है लेकिन सब में नही घूम सकते थे क्यू की आज ही जाना भी था घर तो ये लोग बेनी माधव मंदिर जा कर वहाँ पूजा अर्चना किए.

लल्लू ऋतु के साथ पति पत्नी के रूप में ही पूजा किया क्योंकि काका तो दादू के साथ थे.

लल्लू इन से थोड़ा आगे या पीछे हो जाता था इन समय में और दोनो पति पत्नी बन कर पूजा कर लेते है.

फिर वॉया से ये लोग तीसरे नायक को चल दिए.

तीसरे नायक है सोमेश्वर मंदिर.

यहाँ भगवान शिव की मंदिर है.

यहाँ आने पर बहुत भीड़ थी यहाँ.

दादू और काका एक लाइन में घुस गये लेकिन लल्लू और ऋतु जा ही नही पा रहे थे. तभी वहाँ एक साधु बाबा आए जो लल्लू का हाथ पकड़ कर एक और ले गये. लल्लू ऋतु का हाथ पकड़े हुए था तो दोनो साधु बाबा के पीछे खीछे चले गये.

थोड़ी दूर जाने पर साधी बाबा एक कुंड के पास आ कर रुक गये.

साधु बाबा- ये सीता कुंड है. यहाँ इस सोमेश्वर स्थान में श्व्यं चंद्रमा अमृत वर्षा किए है.

तुम दोनो एक कुंड में स्नान कर लो फिर प्रभु भोले सोमेश्वर की पूजा करना.

लल्लू और ऋतु एक दूसरे का मूह देख रहे थे.

साधु बाबा वहाँ से चले गये थे.

लल्लू ऋतु का हाथ पकड़ कर कुंड में उतर गये.

दोनो उस कुंड में नहा कर बाहर आ गये.

वही पास में एक बच्चा इनके लिए कपड़ा ले कर खड़ा था.
 
दोनो उस कुंड में नहा कर बाहर आ गये.

वही पास में एक बच्चा इनके लिए कपड़ा ले कर खड़ा था.

बच्चा- ये आप दोनो के लिए.

लल्लू और ऋतु फिर एक दूसरे को देखने लगे. उन्हे समझ ही नही आ रहा था की ये हो क्या रहा है.

खैर अभी उनके कपड़े तो भींग गये थे तो दोनो उस बच्चे से कपड़ा ले कर जल्दी से बदल लिए.

वहाँ से वो लोग मंदिर में पहुच गये.

मंदिर में जा कर फिर दोनो एक जोड़े की तरह पूजा अर्चना की प्रभु सोमेश्वर महादेव की.

वहाँ प्रभु सोमेश्वर को गंगा जल और फूल अर्पण कर जैसे ही प्रणाम करने को छुआ लल्लू ने उसे लगा जैसे उसके पूरे शरीर में चीटियाँ फेंग गई हो.

बदन के सारे रोए खड़े हो गये.

लल्लू पूरा पसीने से भीग गया.

उसकी धडकन बहुत तेज चलने लगा. आँखे मूंद गई.

चलो जल्दी पूजा कर निकलो यहाँ से. दूसरे भक्तो को पूजा करने दो. वहाँ खड़ा एक पंडा लल्लू के कंधे से पकड़ कर हिलाता बोला.

तब कही जा कर लल्लू को होश आया. फिर ऋतु को साथ ले कर लल्लू मंदिर से बाहर आ गया.

वहाँ से निकल कर फिर चारो पहुचे चौथे नायक भारद्वाज आश्रम.

यहाँ भारद्वाज आश्रम में महर्षि भारद्वाज ने एक शिव लिंग की स्थापना की है जिन्हे भारद्वाजेश्वेर शिव के नाम से जानते है.

ये सभी लोग वहाँ जा कर उनकी पूजा अर्चना करते है.

वहाँ से आगे पाँचवा नायक नाग वाशुकी का मंदिर.

यहाँ नाग वाशुकी के साथ उनके भाई सेशनाग की भी मूर्ति है इनकी भी पूजा की जाती है यहाँ.

लल्लू को यहाँ लग रहा था जैसे कोई उसे मंदिर में खिच रहा है. अपने आप को बहुत रोकने की कोसिस कर रहा था लेकिन उसके कदम रुक ही नही रहे थे.

मंदिर में वो सब से पहले जा पहुचा. कई बार तो दूसरे को धक्का भी लग गया.

सब से बचता बचाता वो मंदिर में पहुच गया और वहाँ सीधा प्रभु वाशुकी के पास चला गया.

ऐसा लग रहा था जैसे वो खुद लल्लू को अपने पास खिच लाए हो.

लल्लू उनको च्छू कर प्रणाम करने को जैसे ही हाथ बढ़ाया वैसे ही उस के पूरे शरीर में बड़ी तेज झटका लगा. जैसे लगा किसी ने उसके हाथ में काट लिया हो.

उसने गौर से देखा तो वहाँ दो निशान भी थे जिस से हल्का खून बह रहा था.

लल्लू के होश फाख्ता हो गये. उसे लगा की अब वो जिंदा नही बचेगा. उसके आँखो के आगे अंधेरा च्छा गया.

लल्लू भगवान वाशुकी की मूरत के आगे ही चकरा कर गिरने लगा की किसी ने उसे पीछे से पकड़ लिया.

उस के सिर पर पानी डाला. तब जा कर लल्लू को थोड़ा होश आया.

तब तक ऋतु भी पास आ गई थी.

फिर ऋतु लल्लू को ले कर नाग सेशनाग जी के मूरत के पास आ गई पूजा के लिए.

लल्लू वाशुकी की पूजा में जो हुआ उस से डर गया था.

फिर भी अभी यहाँ ऋतु भी साथ थी तो लल्लू डरता हुआ हाथ बढ़ा कर भगवान शेस्नाग पर गंगाजल और पुष्प अर्पण किया.

डरते डरते हाथ बढ़ाया ऋतु के हाथ को पकड़े हुए. लल्लू डर गये उसका पूरा शरीर कांप रहा था.

लल्लू जल्दी से हाथ बढ़ा कर उन्हे च्छू लिया. छूते ही एक बार फिर लल्लू को लगा जैसे उसके पूरे शरीर में शीतलता समा गई हो.

इस बार कुछ अलग हुआ था.

पहली बार उसे लगा जैसे बिजली का झटका लगा है और किसी ने हाथ में काट लिया है लेकिन इस बार उसके पूरे शरीर में शीतलता से भर गया. अब लल्लू को बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर वहाँ से निकल कर चारो चल दिए नायक की पूजा में.

नायक है अक्षय वट.

संगम के निकट ये अक्षय वट.

कहा गया है की ऐसे तीन वट और है भारत में जिन में से एक मथुरा के वृंदावन में है बंशिवट.

गया में है गया वट या बोधिवृक्ष.

तीसरा है उज्जैन में सिद्ध वट.

तो ये चारो लोग अक्षय वट की पूजा अर्चना की.

सातवा नायक नाग सेशनाग.

इनका और नाग वाशुकी का मंदिर दोनो एक ही है.

दोनो की पूजा साथ हो जाती है.

आठवा नायक तीर्थ राज प्रयाग . जिन्हे माधव राज भी कहा जाता है.

यहाँ इनकी पूजा की और फिर पराशद और घर वालो के लिए थोड़ा बहुत समान खरीद कर ये लोग धर्मशाला चले गये.

धर्मशाला पहुच कर फ्रेश हुए और जल्दी से खाना खा कर अपना सारा समान समेट रेलवे स्टेशन पहुच गये.

वहाँ ट्रेन खुलने वाली ही थी.

जल्दी जल्दी करते हुए जैसे तैसे ये लोग ट्रेन पकड़ लिए.

ट्रेन में अपने बर्थ पर बैठने के बाद इन्हे सुकून का साँस लेने को मिला.

घूमने पूजा करने में बहुत समय लग गया और आज ही निकलना भी था इन्हे. कल का दिन तो इनका वैसे ही खराब हो गया था.

फिर भी आज भी घूमे तो लेकिन कई महत्वपूर्ण मंदिर पूजा करने को रह गया जिसका मलाल इन लोगो को अभी भी हो रहा था.
 
अपडेट 14.

सुबह के 3 बजे ये लोग अपने स्टेशन पर पहुच गये थे.

स्टेशन से बाहर सुनील काका गाड़ी ले कर खड़े थे.

लल्लू सारा समान अपने कंधे पर लटकाए दादू काका काकी के साथ स्टेशन से बाहर आ गया.

सारा समान गाड़ी में रखने के बाद एक एक कर सब गाड़ी में बैठ गये.

थोड़ी देर में ही ये लोग घर पहुच गये.

घर पहुच कर सब समान निकाल लल्लू दालान पर रखा. काकी आँगन में चली गई. दादू और अनिल हाथ पैर धो अपने पाने बिस्तर पर लेट गये.

लल्लू दादू का समान वही दालान क कमरे में रख बाकी समान ले कर आँगन आ गया.

काजल- आ गया मेरा लाल. कितना सुना हो गया था ये घर तेरे बिना. ( काजल लल्लू के गाल को सहलाता बोला)

लल्लू- मा अभी बहुत जोरो की नींद आई है. मुझे कही सोने दो. बहुत थक भी गया हूँ.

काजल- आ मेरे लाल. पहले हाथ पैर धो आ. आज मेरे प्यारा बेटा अपनी मा के साथ सोएगा.

लल्लू नलका पर जा कर हाथ पैर धो आया.

वापस आ कर अपने मा क कमरे में चला गया.

काजल के कमरे में डबल बेड था.

लल्लू की मा लल्लू का लाया बॅग सही से रख रही थी.

लल्लू आ कर अपने कपड़े बदल एक धोती लपेट कर बेड पर आ गया.

लल्लू- मा मुझे आज कोई उठना मत जबतक में खुद ना उठ जाऊ.

मा- ठीक है बेटा सो जा अब तू.

लल्लू आँख बंद कर सोने की कोशिश करने लगा.

काजल भी समान रख कर बेड पर आ गई और लल्लू के ललाट पर एक चुम्मि दे कर सोने को लेट गई.

सुबह बाहर सब के शोर गुल से काजल की नींद खुल गई.

काजल उठने लगी तो देखती है की लल्लू पीछे से उसे अपने बाहों में ले कर सोया हुआ है.

काजल मुस्काती हुई आहिस्ते से लल्लू के हाथ को अपने ऊपर से हटा कर बेड से नीचे उतर गई.

काजल पलट कर जाने लगी की उसे कुछ दिखा जिसे देख कर काजल की आँखे बाहर को आने को हो गई.

काजल घूर घूर कर देख रही थी.

लल्लू जो धोती पहन कर सोया था वो खुल गया था और लल्लू का बाबूराव सुबह सुबह उठ खड़ा हुआ था.

बाबूराव का भायनक रूप देख कर काजल हैरान हो गई.

आज तक उसने एक ही लॉडा देखी थी वो भी अपने पति का मूँगफली जितना.

लल्लू का ये विकराल रूप काजल को पसीना छुड़ाने के लिए काफ़ी था.

काजल वापस लल्लू के बदन पर धोती डाल कर उसके ऊपर एक चादर डाल दी.

काजल अपने सीने पर हाथ रख कर खुद की बढ़ी सासो को संभालती दरवाजा खोल कर बाहर आ गई.

काजल- क्यू हल्ला कर रहे हो इतना. काकी और लल्लू सुबह आए है कुंभ से. अभी सो रहे है. हल्ला मत करो.

कोमल- मा, काकी क्या लाई है हमारे लिए दो ना.

कोमल के साथ बाकी बहने भी आ कर खड़ी हो गई.

काजल- अभी काकी सो रही है. जब सो कर उठेगी तब खुद देगी.

सोनम- काकी आप ही दे दो ना प्लीज़. आप तो मेरी प्यारी काकी हो ना.

काजल- ज़्यादा मस्का मत लगा तुम लोग चल घर की सफाई कर सब मिल कर. ( काजल सोनम क कान को पकड़ती बोली.)

सब लड़किया मूह टेढ़ा करती घर के कामों में लग गई.

रागिनी- कब तक सोए रहेंगे ये लोग. काजल जा कर दोनो को उठा दे अब. नहाए धोए फ्रेश हो कर खाना खाए. अब फिर रात में भी सोना है इन्हे नही तो फिर रात नींद नही आएगी.

काजल जा कर पहले ऋतु को उठा दी. फिर अपने कमरे में जा कर लल्लू को उठाने लगी.

लल्लू अंगड़ाई लेता उठ कर बैठ गया. सामने मा को देख कर उसे गले लगा लिया.

काजल- अब प्यार करना हो गया हो तो जा नहा कर कुछ खा पी ले.

लल्लू काजल के गाल को चूमता बाहर चला गया.

काजल अपने पागल बेटे क हरकत पर मुस्काती बेड साफ कर दूसरा चादर बिछा दी फिर गौरी को रूम में झारी लगाने को बोल कर बाहर आ गई.

लल्लू उठ कर दालान पर आ गया. यहाँ अब दादू और अनिल सो कर उठ गये थे और स्नान कर लिए थे.

दादू- लल्लू बेटा. तुम नहाए या नही.

लल्लू- दादू अभी अभी सो कर उठा हूँ.

अनिल- बेटा जा कर नहा ले फिर सब खाना खाते है.

लल्लू वही दालान पर बाथरूम में फ्रेश हुआ फिर नलका पर नहा कर आँगन में आ गया.

लल्लू- मा.. माआ..

रागिनी- क्यू चिल्ला रहा है. काजल रसोई में खाना बना रही है.

लल्लू- काकी कपड़ा चाहिए पहनने को.

इस समय लल्लू सिर्फ़ एक टवल कमर पर लपेटे आँगन में खड़ा था.

रागिनी- हाय्यी रामम्म ये टट्टू कहाँ से बनवा ली तू ने.

लल्लू- टट्टू…:

रागिनी- हा देख कितना करा रखा है. क्या पूरे बदन पर करवा लिया है.

लल्लू- अपने बदन को देखते हुए कहाँ है कुछ काकी.क्या टट्टू बोल रही हो.

रागिनी- बुद्धू पीठ पर देख. पूरे जगह टट्टू बना हुआ है अजीब सा.

लल्लू- काकी अपने पीठ को कैसे देख सकता हूँ में.

रीगिनी काकी एक दर्पण ला कर लल्लू की पीठ को दिखाती है.

लल्लू दर्पण में अपने पीठ देख कर चौक जाता है.

पूरी पीठ पर अजीब सा टॅटू बना हुआ था.

लल्लू- बहनचोद ये क्या है. ये कब हो गया.

रागिनी काकी- क्या मतलब. तुम्हारी पीठ पर इतना बड़ा पूरे पीठ में टट्टू बना है और तुम्हे ही पता नही.

लल्लू- नही मेरा मतलब. में बोला था छोटा बनाने को उस ने तो पूरे पीठ पर बना दिया है.
 
अपडेट 15.

लल्लू- काकी मेरा कपड़ा दो ना.आई कब तक टवल में खड़ा रहूँ.

रागिनी काकी- देती हूँ बाबा. वैसे लल्लू बेटा. बॉडी सॉफ्ट तो बड़ा जबरदस्त बना ली है तुम ने. मैने तो आज गौर किया है.

लल्लू- क्या हो गया है आज आप को काकी. ऐसा कुछ नही है. में जैसा पहले था वैसा ही अब भी हूँ.

लल्लू अपने आप को निहारता हुआ बोल रहा था तभी उसे भी अपने शरीर में कुछ बदलाव महसूस हुआ.

गाँव का गँवार जैसे बोलते है एक तरह से लल्लू वही था. ज़्यादा पढ़ नही पाया था.

बहने जब घर में पढ़ती है तो कभी कभी वही बैठ जाया करता था. बाकी गाँव में घूमना. काका लोगो के साथ खेत में मेहनत करना और समय बच गया तो सुबह शाम नदी किनारे बैठा रहना. यही तो उसकी दिनचर्या था.

आज उसे अपना शरीर पहले क मुक़ाबले थोड़ा मजबूत लग रहा था. छाती फूल गई थी. बाह की मछलिया निकल आई थी. पेट भी अंदर धश गया था. कही कोई चर्बी नही था.

लल्लू को तो कुछ समझ ही नही आ रहा था की आख़िर ये हुए क्या है और कैसे.

रागिनी कपड़ा निकाल कर दे दी.

लल्लू फटाफट धोरी लपेट लिया. ऊपर जब टीशर्ट पहनने लगा तो वो बिल्कुल टाइट हो गया.

लल्लू मा के पास चला गया जो रसोई में सब के लिए शालिनी और ऋतु के साथ खाना निकाल रही थी.

लल्लू-मा, ये देखो ना. कितना छोटा हो गया ये कपड़ा. जैसे लगता है मेरा सब शरीर इस में दब गया है.

सारे लॅडीस लल्लू की बात सुन कर उसकी और सर उठा कर देखने लगे की अब लल्लू कोई उल्टी सीधी बाते बोल कर सब को हसाएगा. लेकिन जब सब ने लल्लू की और देखा तो सही में ये टीशर्ट लल्लू के लिए छोटा हो गया था.

काजल- कोमल के पास चला जा और उसे बोलना दूसरा देगा.

लल्लू जैसे तैसे उस टीशर्ट को निकल कर लड़कियो क कमरे में चला गया.

सारी लड़किया दो कमरे ले रखी थी जो एक दूसरे से जॉइंट था. उसी में ये सभी एके साथ रहती थी.

लल्लू- दीदी दीदी कहाँ हो.

लल्लू बाहर से ही आवाज़ देता हुआ अंदर घुश गया.

अंदर सोनम कमरे में कपड़ा बदल रही थी.

अभी वो सिर्फ़ एक चड्डी में थी.

लल्लू के कमरे में घुसते ही चटाक़ से थप्पड़ लगा.

रोमा- हरामी, गधे, पागल. दरवाजा खटका कर नही आ सकता था.

लल्लू गाल पे हाथ रखे स्तब्ध खड़ा रह गया.

उसे समझ ही नही आया की उसे मारा क्यू गया है.

लल्लू- दीदी, मुझे क्यू मारा आप ने. ( अब लल्लू के आँखो से आँसू निकल रहे थे)

कोमल- कुत्ते दरवाजा बजा कर नही आ सकता था अंदर. घुसता हुआ आ गया. सोनम दी कपड़े बदल रही थी.

लल्लू- तो क्या हो गया. में भी तो कुछ नही पहना है. मैने तो किसी को नही मारा. ( अब लल्लू हिचकिया ले कर रोता हुआ बोला)

लल्लू- मा...में मा.आ.आ को बा..ता डू.न.गा की सब म.उजह.ए मा.रा है. और पा..गा.एल बोला है..

लल्लू वहाँ से निकल कर रोता हुआ रसोई में आ गया.

लल्लू- ( रोता हुआ) दी..दी गा..न्ड है..मु.झे मा.. रती है. में..नही जा.उँगा. उन लो.गो के पास . वो सब म.उजह.ए प.आ.ग.आ.ल कहते है.

ऋतु- किस ने मारा तुम्हे.

काजल ऋतु रागिनी शालिनी सब लल्लू की और देख रहे थे.

लल्लू- सब ने मुझे मारा है. रोमा दीदी कोमल दीदी.

सब गंदे है.

लल्लू टीशर्ट फेक कर दालान की और चला गया रोता हुआ.

दालान से सब आँगन में खाना खाने आ रहे थे.

दादू के साथ लल्लू के तीनो काका और उसके पापा सब साथ ही थे.

लल्लू को रोता देख कर सुनील आगे आ कर उसे पकड़ लिया.

सुनील- क्या हुआ मेरे बेटे को.
 
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