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फिर लल्लू वहाँ जो कोई भी सोया हुआ था उसको पीछे से झप्पी डाल कर खुद भी आँखे बंद कर के सोने की कोसिस करने लगा.
सुबह 4 बजे लल्लू की नींद खुली.
वो उठ कर बाहर आ गया ओर चल दिया नदी की और वहाँ जा कर फ्रेश हुआ और वही नदी किनारे बैठ गया.
काफ़ी देर बैठे रहने के बाद लल्लू देखा की उधर लोग आने लगे है तो फिर लल्लू उठ कर घर की ओर चल दिया.
दालान पर आ कर नालका पर पहले हाथ पैर धोया और दालान पर आ जाइ.
दालान पर दादू और सुनील काका बैठे थे.
काका- कहा से आ रहा है लल्लू बेटा.
लल्लू- ऐसे ही सुबह बाहर घूमने गया था काका. कोई काम था क्या.
दादू- हा, आ यहाँ बैठ.
लल्लू जा कर अपने दादू के साथ उन क बेड पर बैठ गया.
दादू- हम कुंभ मेला में स्नान करने जा रहे है.
लल्लू- कब जा रहे है. और कौन कौन जा रहा है.
सुनील- तुम्हारे दादू, बड़े काका और काकी, और में. हम कल जा रहे है.
लल्लू- में भी चलूँगा.
काका- फिर यहाँ घर पर कौन रहेगा.
लल्लू- ये मुझे क्या पता. पापा रहेंगे और छोटे काका रहेगे.
सुनील अपने पिता की और देखने लगे.
दादू- तुम यही रहो बेटा. वहाँ से तुम जो बोलॉगे में ला दूँगा.
लल्लू- नही..नही..नही. में भी जाउन्गा तो जाउन्गा.
लल्लू कूद कर उठ खड़ा हुआ और तमतमाता हुआ वहाँ से आँगन में चला गया.
दादू- अब क्या करे. इसे नही ले जांगे तो ये जब तक याद रहेगा हंगामा खड़ा किए रहेगा.
सुनील- हा ये तो है. ऐसा करते है फिर. आप भैया भाभी और लल्लू चले जाइए.
दादू- ठीक है फिर उसे बोल दे अपना तैयारी कर ले आज ही क्यू की कल सुबह ही निकलना है हमें.
सुनील उठ कर आँगन में चला गया जहा लल्लू खटिया पर लेता था गुस्से में.
सुनील- लल्लू बेटा. ऐसे गुस्सा नही होते. अपना तैयारी कर ले. कल सुबह निकलना है. और अपने दादू और काका काकी का ख़याल रखना. वहाँ भीर बहुत होता है तो थोड़ा संभाल कर जहा.
ऋतु- कहा जाने की बात हो रही है. पता नही कहा से आया है. मूह फुलाए लेता है कब से.
सुनील- अरे भाभी, अभी हम बात कर रहे थे. कल पिता जी कुंभ स्नान करने जा रहे है आप और भैया के साथ तो वही पिताजी लल्लू बेटा से बोले की यहाँ सब का ख़याल रखना. बस फिर वहाँ से गुस्से में भाग आया है. ये भी जाना चाहता है.
ऋतु- ओो बेटा. तुम हमारे साथ चले जाओगे तो फिर यहाँ सब का ख़याल कौन रखेगा.
लल्लू- नही में तो दादू के साथ जाउन्गा. वहाँ उनका ख़याल रखूँगा.
सुनील- ठीक है ठीक है. तुम भी जाना. भाभी आप अपना तैयारी कर लीजिए साथ में भैया और लल्लू का भी कर दीजिएगा. सुबह सुबह ही निकलना पड़ेगा आप लोगो को.
ऋतु- ठीक है.
लल्लू खुशी से खटिया से उठ कर सुनील को गले से लगा लिया.
लल्लू- आप सब से बेस्ट काका हो.
सुनील- हा हा. पता है मुझे. वहाँ सब का ख़याल रखना. किसी को तंग मत करना और इधर उधर कही जाना नही. सब के साथ ही रहना.
लल्लू- बिल्कुल काका. में सब के साथ ही रहूँगा.
यू ही तैयारी में वो दिन बीत गई.
रात में लल्लू खाना खा कर खटिया आँगन में लगा कर सो गया.
सुबह उसे दादू और काका काकी के साथ कुंभ में जाना है तो वहाँ क्या क्या करेगा यही सब सोचते सोचते सो गया.
सुबह हर रोज की तरह 4 बजे उसे नींद खुल गया.
उठ कर नालका पर जा कर पानी पिया और नदी किनारे चला गया.
वहाँ फ्रेश हो कर बैठ गया.
नदी की और से ठंढी ठंढी हवा आ रहा था जो बहुत अच्छा लग रहा था.
आज नदी पर ज़्यादा देर नही रुका और जल्दी ही घर आ गया वहाँ आ कर नाल्ले पर हाथ पैर धोया. फिर दालान पर आ गया.
वहाँ सब बैठे थे. दादू और काका स्नान कर चुके थे और जाने की तैयारी कर रहे थे.
अनिल- जा भाई जल्दी तैयार हो जा. हम सब को निकलना भी है.
लल्लू जल्दी से आँगन गया और जा कर स्नान कर के नया कपड़ा पहन लिया.
मा- देख बेटा. वहाँ जा रहा है तो सब का ख़याल रखना और किसी को तंग मत करना. सब के साथ ही रहना. इधर उधर घूमना नही.
लल्लू- मुझे सब पता है. तुम चिंता मत करो.
कोमल- ओये गधा तू मत जा वहाँ. कही कोई उल्टी हरकत कर दिया तो सब परेशान हो जाएँगे. वो अपना गाँव नही है.
लल्लू- तू वापस क्यू आ गई. कविता के साथ ही चली जाती.( कविता जिस की अभी शादी हुई है.)
कोमल- आहा में चली जाती तो तुम्हारा कान कौन उखाड़ता. (मूह चिढ़ाती कोमल बोली)
मा- अब अभी तुम दोनो लड़ना मत सुरू कर दो.
सुनील- सब तैयर हो गये तो चलो. गाड़ी आ गई है.
फिर लल्लू और ऋतु आँगन से दालान पर आ गये जहा बाहर एक कार खड़ी थी.
लल्लू जा कर कार में आगे बैठ गया.
फिर दादू काका और काकी भी आ गये और कार में बैठ गये. सारा समान पहले ही ला कर सुनील गाड़ी में रख दिया था.
सुनील- ये ले कुछ पैसे रख ले. वहाँ काम आएँगे. सब का ख़याल रखना. अपने काकी का हुमसे हाथ पकड़े रहना.
फिर गाड़ी चल पड़ी.
स्टेशन आ कर सब उतर गये. लल्लू सारे बॅग्स ले कर चल दिया.
ट्रेन लगी हुई थी तो सब जल्दी से अपने डब्बे में बैठ गये जा कर.
थोड़ी देर में ट्रेन चल पड़ी.
सुबह 4 बजे लल्लू की नींद खुली.
वो उठ कर बाहर आ गया ओर चल दिया नदी की और वहाँ जा कर फ्रेश हुआ और वही नदी किनारे बैठ गया.
काफ़ी देर बैठे रहने के बाद लल्लू देखा की उधर लोग आने लगे है तो फिर लल्लू उठ कर घर की ओर चल दिया.
दालान पर आ कर नालका पर पहले हाथ पैर धोया और दालान पर आ जाइ.
दालान पर दादू और सुनील काका बैठे थे.
काका- कहा से आ रहा है लल्लू बेटा.
लल्लू- ऐसे ही सुबह बाहर घूमने गया था काका. कोई काम था क्या.
दादू- हा, आ यहाँ बैठ.
लल्लू जा कर अपने दादू के साथ उन क बेड पर बैठ गया.
दादू- हम कुंभ मेला में स्नान करने जा रहे है.
लल्लू- कब जा रहे है. और कौन कौन जा रहा है.
सुनील- तुम्हारे दादू, बड़े काका और काकी, और में. हम कल जा रहे है.
लल्लू- में भी चलूँगा.
काका- फिर यहाँ घर पर कौन रहेगा.
लल्लू- ये मुझे क्या पता. पापा रहेंगे और छोटे काका रहेगे.
सुनील अपने पिता की और देखने लगे.
दादू- तुम यही रहो बेटा. वहाँ से तुम जो बोलॉगे में ला दूँगा.
लल्लू- नही..नही..नही. में भी जाउन्गा तो जाउन्गा.
लल्लू कूद कर उठ खड़ा हुआ और तमतमाता हुआ वहाँ से आँगन में चला गया.
दादू- अब क्या करे. इसे नही ले जांगे तो ये जब तक याद रहेगा हंगामा खड़ा किए रहेगा.
सुनील- हा ये तो है. ऐसा करते है फिर. आप भैया भाभी और लल्लू चले जाइए.
दादू- ठीक है फिर उसे बोल दे अपना तैयारी कर ले आज ही क्यू की कल सुबह ही निकलना है हमें.
सुनील उठ कर आँगन में चला गया जहा लल्लू खटिया पर लेता था गुस्से में.
सुनील- लल्लू बेटा. ऐसे गुस्सा नही होते. अपना तैयारी कर ले. कल सुबह निकलना है. और अपने दादू और काका काकी का ख़याल रखना. वहाँ भीर बहुत होता है तो थोड़ा संभाल कर जहा.
ऋतु- कहा जाने की बात हो रही है. पता नही कहा से आया है. मूह फुलाए लेता है कब से.
सुनील- अरे भाभी, अभी हम बात कर रहे थे. कल पिता जी कुंभ स्नान करने जा रहे है आप और भैया के साथ तो वही पिताजी लल्लू बेटा से बोले की यहाँ सब का ख़याल रखना. बस फिर वहाँ से गुस्से में भाग आया है. ये भी जाना चाहता है.
ऋतु- ओो बेटा. तुम हमारे साथ चले जाओगे तो फिर यहाँ सब का ख़याल कौन रखेगा.
लल्लू- नही में तो दादू के साथ जाउन्गा. वहाँ उनका ख़याल रखूँगा.
सुनील- ठीक है ठीक है. तुम भी जाना. भाभी आप अपना तैयारी कर लीजिए साथ में भैया और लल्लू का भी कर दीजिएगा. सुबह सुबह ही निकलना पड़ेगा आप लोगो को.
ऋतु- ठीक है.
लल्लू खुशी से खटिया से उठ कर सुनील को गले से लगा लिया.
लल्लू- आप सब से बेस्ट काका हो.
सुनील- हा हा. पता है मुझे. वहाँ सब का ख़याल रखना. किसी को तंग मत करना और इधर उधर कही जाना नही. सब के साथ ही रहना.
लल्लू- बिल्कुल काका. में सब के साथ ही रहूँगा.
यू ही तैयारी में वो दिन बीत गई.
रात में लल्लू खाना खा कर खटिया आँगन में लगा कर सो गया.
सुबह उसे दादू और काका काकी के साथ कुंभ में जाना है तो वहाँ क्या क्या करेगा यही सब सोचते सोचते सो गया.
सुबह हर रोज की तरह 4 बजे उसे नींद खुल गया.
उठ कर नालका पर जा कर पानी पिया और नदी किनारे चला गया.
वहाँ फ्रेश हो कर बैठ गया.
नदी की और से ठंढी ठंढी हवा आ रहा था जो बहुत अच्छा लग रहा था.
आज नदी पर ज़्यादा देर नही रुका और जल्दी ही घर आ गया वहाँ आ कर नाल्ले पर हाथ पैर धोया. फिर दालान पर आ गया.
वहाँ सब बैठे थे. दादू और काका स्नान कर चुके थे और जाने की तैयारी कर रहे थे.
अनिल- जा भाई जल्दी तैयार हो जा. हम सब को निकलना भी है.
लल्लू जल्दी से आँगन गया और जा कर स्नान कर के नया कपड़ा पहन लिया.
मा- देख बेटा. वहाँ जा रहा है तो सब का ख़याल रखना और किसी को तंग मत करना. सब के साथ ही रहना. इधर उधर घूमना नही.
लल्लू- मुझे सब पता है. तुम चिंता मत करो.
कोमल- ओये गधा तू मत जा वहाँ. कही कोई उल्टी हरकत कर दिया तो सब परेशान हो जाएँगे. वो अपना गाँव नही है.
लल्लू- तू वापस क्यू आ गई. कविता के साथ ही चली जाती.( कविता जिस की अभी शादी हुई है.)
कोमल- आहा में चली जाती तो तुम्हारा कान कौन उखाड़ता. (मूह चिढ़ाती कोमल बोली)
मा- अब अभी तुम दोनो लड़ना मत सुरू कर दो.
सुनील- सब तैयर हो गये तो चलो. गाड़ी आ गई है.
फिर लल्लू और ऋतु आँगन से दालान पर आ गये जहा बाहर एक कार खड़ी थी.
लल्लू जा कर कार में आगे बैठ गया.
फिर दादू काका और काकी भी आ गये और कार में बैठ गये. सारा समान पहले ही ला कर सुनील गाड़ी में रख दिया था.
सुनील- ये ले कुछ पैसे रख ले. वहाँ काम आएँगे. सब का ख़याल रखना. अपने काकी का हुमसे हाथ पकड़े रहना.
फिर गाड़ी चल पड़ी.
स्टेशन आ कर सब उतर गये. लल्लू सारे बॅग्स ले कर चल दिया.
ट्रेन लगी हुई थी तो सब जल्दी से अपने डब्बे में बैठ गये जा कर.
थोड़ी देर में ट्रेन चल पड़ी.