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Incest बदलते रिश्ते

उसे अपनी किस्मत पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि अब तक तो अपनी मां को नंगी देख चुका था लेकिन उसे बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि वह अपनी मां को अपनी आंखों से पेशाब करता हुआ देख रहा है। रोहन के मुंह में पानी आने लगा उसकी लार टपकने लगी खुशी अपनी किस्मत पर नाज होने लगा क्योंकि कुछ दिनों से उसकी किस्मत उसके पक्ष में चल रही थी जो वह सोचता था उसकी आंखों के सामने वैसा ही होता जा रहा था इस समय रोहन की आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी गोरी गांड थी। जिसे सुगंधा हल्के से उठाए हुए थे और सुगंधा की इस हरकत का उसके बेटे पर बुरा असर पड़ रहा था पलभर में ही उसका लंड पजामे के अंदर तन कर लोहे के रोड की तरह हो गया था। जिसे रोहन अपने हाथों से मसलने लगा था सुगंधा की गुलाबी पुर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी जिसकी वजह से उसमें से एक सीटी सी बजने लगी थी और इस समय सुगंधा की बुर से निकल रही सीटी की आवाज रोहन के लिए किसी बांसुरी के मधुर धुन से कम नहीं थी रोहन उस मादकता से भरे नजारे और बुर से आ रही है मधुर धुन में खोने लगा सुगंधा अपनी तरफ से पूरी एहतियात बरतते हुए अपनी चारों तरफ देख ले रही थी लेकिन अपने पीछे नजर नहीं बढ़ा पा रही थी वह इस बात से पूरी तरह से निश्चिंत थी कि उसे इस समय पेशाब करते हुए कोई नहीं देख रहा है लेकिन इस बात से अनजान थी कि उसका ही बेटा झाड़ियों के पीछे से चुपके से खड़ा होकर उसे पेशाब करते हुए देख रहा था। थोड़ी देर में सुगंधा पेशाब कर ली लेकिन उठते उठते वह अपनी गुलाबी पुर की गुलाबी पतियों में से पेशाब की बूंद को गिराते हुए हल्के हल्के अपने नितंबों को झटकने लगी।

लेकिन सुगंधा की यह हरकत बेहद ही कामुकता से भरी हुई थी क्योंकि रोहन खुद अपनी मां की इस हरकत को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया था और जोर से अपने लंड को मसलने लगा था।

सुगंधा पेशाब करके खड़ी हो गई और एक हाथ से अपनी पीली रंग की पैंटी को ऊपर चढ़ाने लगी रोहन तो यह नजारा देखकर एकदम कामुकता से भर गया थोड़ी ही देर में सुगंधा अपनी साड़ी को नीचे गिरा दी और अपने कपड़े ठीक कर के जाने को हुई ही थी कि झुग्गी मैं से आ रही खिलखिला ने की आवाज सुनकर उसके कदम रुक गए वह एक पल के लिए झुग्गी की तरफ देखने लगी। तुरंत उसकी आंखों में चमक आ गई उसे वह दिन याद आ गया जब वह गेहूं की कटाई वाले दिन खेतों में आई थी और इसी तरह से झुग्गी मैं से आ रही हसने की आवाज सुनकर उत्सुकतावस अंदर झांकने की कोशिश की थी और अंदर का नजारा देखकर एकदम से सन में रह गई थी। उसे उस समय इस बात का बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि झुग्गी के अंदर उनके खेतों में काम कर रहा मजदूर किसी औरत के साथ चुदाई का खेल खेल रहा है और आज ठीक उसी तरह की आवाज सुनकर एक बार फिर से सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा।

दूसरी तरफ रोहन अपनी मां को देखते हुए अपने लंड को मसल रहा था लेकिन उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां आखिर वापस जाते जाते वहीं रुक क्यों गई उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वह उन्हीं झाड़ियों के पीछे छुप कर देखने लगा

एक अजीब सा अहसास सुगंधा के तनबदन को झकझोर रहा था। सुगंधा की आंखों के सामने वही दृश्य नजर आने लगा जो उस दिन खेतों में हुआ था उसे लगने लगा कि जरूर झुकी में आज भी वही दृश्य हो रहा होगा इसलिए वह धीरे-धीरे उस छोटी सी झोपड़ी की तरफ जाने लगी और पीछे झाड़ियों में छिपा हुआ रोहन अपनी मां के इस हरकत को देख रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां कर क्या रही है।

एक तो पहले से ही अपनी मां की नंगी गांड उस और उसे पेशाब करता हुआ देखकर उसकी हालत खराब थी अजीब लंड था कि बैठने का नाम नहीं ले रहा था और उसकी इस तरह की शंका स्पद हरकत रोहन के तनबदन को अजीब सी उत्तेजना प्रदान कर रही थी धीरे धीरे सुगंधा उस झोपड़ी की तरफ आगे बढ़ रही थी और जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे अंदर से आ रही आवाज उसके कानों में साफ-साफ सुनाई दे रही थी।

आहहहहह आहहहहहहह करमुआ आहहहहहह और जोर जोर से धक्के लगा।

( जैसे ही उस झोपड़ी में से आ रही एक औरत के मुंह से इस तरह की आवाज सुगंधा के कानों में पड़ी सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई उसे समझते देर नहीं लगी की झोपड़ी के अंदर क्या चल रहा है और अंगूर के बागानों की रखवाली करने वाला करण सिंह झोपड़ी के अंदर ही किसी औरत की चुदाई कर रहा था अब तो सुगंधा से रहा नहीं जा रहा था वह दबे कदमों से झोपड़ी के बिल्कुल करीब पहुंच गई और अंदर झांकने की कोशिश करने लगी दूर खड़ा रोहन अपनी मां की इस हरकत से बेहाल हुए जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां करके आ रही है लेकिन इतना तो समझ में आ गया था कि जरूर कुछ ना कुछ झोपड़ी के अंदर चल रहा है जिसे देखने के लिए उसकी मां उत्सुक है।

इधर उधर नजर दौड़ाने पर उसे एक छोटी सी जगह दिख गई जहां से थोड़ी सी दरार बनी हुई थी और सुगंधा तुरंत उस दरार से अपनी आंख लगाकर अंदर के नजारे को देखने लगी और अंदर के नजारे को जैसे ही देखी उसका दिमाग सन्न रह गया उसकी टांगों के बीच हलचल होने लगी। उसे साफ साफ नजर आ रहा था कि झोपड़ी के अंदर एक चारपाई पर एक औरत लेटी हुई थी जिसके बदन पर मात्र एक ब्लाउज था जो कि उसके सारे बटन खुले हुए थे और करम सिंह उस पर लेटा हुआ था और जोर जोर से उसके दोनों खरबूजे को दबाता हुआ उनका रस मुंह लगाकर निचोड़ रहा था। और वह औरत गरम-गरम सिसकारियां लेते हुए उसका जोश और बढ़ा रही थी और करम सिंह अपनी पूरी ताकत लगाते हुए अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था।

यह नजारा देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी। पलभर में ही सुगंधा के बदन में गर्माहट फैलने लगी उसकी सांसों की गति तेज होने लगी कर्म सिंह की हिलती हुई कमर को देखकर सुगंधा का अंदाजा गलत नहीं था कि उस औरत को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही है वह जानती थी कि जिस तेजी से कर्म सिंह अपनी कमर हिला रहा है उतनी ही रफ्तार से उसका लंड उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा होगा और उसकी रगड़ से वह औरत मस्त हो रही है तभी तो उसके मुंह से गरम गरम सिसकारियां निकल रही थी।

कसम से कमली जो मजा तेरी बुरी में है वह किसी और बुर में नहीं जब जब मैं तेरी बुर में अपना लंड डालता हूं तो मुझे लगता है मुझे स्वर्ग का मजा मिल रहा है।।

आहहहहहब आहहहहहह और जोर से रे सच करमुवा मुझे भी तेरे साथ में मजा आता है मेरा मरद तो बस दिन-रात दारू और जुआ में ही लगा हुआ है उसका तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता तभी तो मुझे तेरे पास आना पड़ता है और तू तो मुझे मस्त कर देता है देखना तेरे लिए एकदम नंगी तेरे नीचे लेटी हूं और बहुत जोर जोर से धक्के लगा मेरा होने वाला है ।

मेरा भी होने वाला है

( और इतना कहने के साथ ही कर्म ने अपने कमर को और जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया इतने में तो सुगंधा पसीने से तरबतर हो गए उससे यह नजारा बहुत ही मनमोहक लग रहा था उसका गला सूखा जा रहा था और जिस तरह से कर्म सिंह अपनी कमर हिला रहा था वह समझ गई थी कि दोनों का काम होने वाला है इसीलिए उसका वहां खड़े रहना ठीक नहीं था और वह दबे पांव वापस लौट गई लेकिन वहां से पीछे हटते समय वह आश्चर्य से अपने मुंह पर हाथ लगा दी जिसे देख कर रोहन समझ गया की झोपड़ी के अंदर जरूर कुछ ना कुछ ऐसा हो रहा है जो कि उसकी मां के लिए आश्चर्य से कम नहीं था सुगंधा वापस लौट चुकी थी रोहन कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा उसके मन में हो रहा था कि वह भी झोपड़ी तक जाए और देखें कि अंदर क्या हो रहा है और ऐसा सोचकर वह झाड़ियों से बाहर निकलने वाला था कि तभी अंदर से एक औरत निकली जो कि अपने कपड़ों को व्यवस्थित कर रही थी और साथ ही उसके पीछे पीछे एक लंबा तगड़ा आदमी निकला जो कि अपने पर जाने की डोरी बाद रहा था इतना देखकर रोहन को समझते देर नहीं लगी की झोपड़ी के अंदर दोनों की चुदाई चल रही थी।

यह रोहन के लिए बेहद आश्चर्यजनक तो था ही उससे भी ज्यादा उत्तेजित कर देने वाली बात यह थी कि उसकी मां चोरी-छिपे झोपड़ी के अंदर के नजारे को देख रही थी और यह तय था कि उसकी मां कुछ देर तक वहां खड़े होकर उन दोनों की चुदाई देख रही थी। यह ख्याल मन में आते ही रोहन का लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा।

थोड़ी देर बाद रोहन पानी लेकर उस जगह पर गया वहां देखा तो उसकी मां चारपाई पर बैठी हुई थी और करम सिंह वहीं नीचे बैठा हुआ था और उससे सुगंधा बोल रही थी।

कहां चले गए थे करम सिंह मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं।

कहीं नहीं मालकिन रात को जंगली जानवर परेशान करते हैं इसलिए अपने बगीचे के किनारे किनारे कटीली झाड़ियां लगाने गया था।

( हरामखोर कटीली झाड़ियां लगाने गया था कमली के मैदान पर हल चलाने गया था हरामखोर चुदाई करके आ रहा है और यह झूठ बोल रहा है सुगंधा मन ही मन में बोली। और यही बात रोहन भी मन ही मन में कह रहा था । सुगंधा उसकी बात सुनकर बोली।)

अब तुम्हें अंगूरों के बाद का ज्यादा देखभाल करना होगा क्योंकि अंगूर तैयार होने वाले हैं अगर जरा सा भी चूक हुई तो गांव वाले सब तोड़ ले जायेंगे इसलिए यहां वहां मैं जाकर तुम बगीचे की देखभाल करो ।

जी मालकिन ऐसा ही होगा।

और तुम कहां चले गए थे बेटा मैं तुम्हारा यहां बैठकर कब से इंतजार कर रही हूं तुम्हें पता है कितनी जोरों की प्यास लगी है अगर इंसान तुम्हारे भरोसे रहे तो वह प्यासा ही मर जाए।

( अपनी मां की बात सुनकर रोहन मन ही मन में बोला कितना झूठ बोल रही है साली वहां अपनी बड़ी बड़ी नंगी गांड दिखाते हुए कैसे मूत रही थी और झोपड़ी में चल रही चुदाई देख कर मस्त हो रही थी और मुझे कह रही है कि मैं यहां बैठकर कब से इंतजार कर रही हूं। )

मम्मी में आने ही वाला था कि( करम सिंह को नमस्ते करते हुए) मुझे खरगोश नजर आ गया और उसे पकड़ने के चक्कर में देर हो गया ।

रोहन की बात सुनकर सुगंधा हसदी और हंसते हुए करम सिंह को देखने लगी और मन ही मन में बोली साला कितना हरामी है इसकी बीवी घर में इसका इंतजार करती होगी और मम्मी सोचती होगी कि उसका पति खेतों में काम कर रहा है लेकिन उस बेचारी को क्या माल है कि यहां पर किसी और औरत के साथ रंगरेलियां मना रहा है क्या किस्मत है।

एक तरफ सुगंधा कर्म सिंह की करतूत से क्रोधित होकर उसे मन ही मन में कोर्स भी रही थी तो दूसरी तरफ उसकी किस्मत पर जल भी रही थी क्योंकि एक यह मर्द था जो कि घर में पत्नी होने के बावजूद भी दूसरी औरतों को मौका मिलते ही अपने नीचे लाने में जरा भी कसर बाकी नहीं रखता था और जिस पागलपन से वह औरत की चुदाई करता था उसे देखकर सुगंधा की टांगों के बीच अभी भी सुरसुरा हाट महसूस हो रही थी कुछ देर तक सुगंधा वहीं बैठी रही काफी समय बीत गया था रोहन भी काफी मस्त नजर आ रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां ने जबरदस्त नजारा पेश की थी जिसे देख कर रह रह कर उसका लंड अभी भी अंगड़ाई ले रहा था।

थोड़ी देर बाद दोनों घर वापस लौट आए।
 
सुगंधा जो कि अभी तक अपने आप को वासना में हवा से से बचाए हुए थी वह मादकता भरी हवा अब उसके जेहन को झकझोर ने लगी थी ना चाहते हुए भी सुगंधा उस खुशबू की तरह आकर्षित हुए जा रही थी जिस खुशबू को वह बिस्तर पर बरसों पहले छोड़ चुकी थी और वैसे भी किसी भी महिला के सामने अगर बार-बार इस तरह के कामोत्तेजक नजारे देखने को मिल जाए तो वह कितनी भी संस्कारी और मर्यादामई क्यों ना हो उसके पांव फिसल ना लाजमी हैं।

खेत में पहले ही वह चुदाई के दृश्य को देख चुकी थी जैसे बड़ी मुश्किल से वह भुला पाई थी कि तभी अनजाने में ही उसकी आंखों के सामने उसके ही बेटे के खड़े मोटे तगड़े और लंबे लंड को देखकर टांगों के बीच सुरसुराहट महसूस करने लगी थी। और उस पर से आज जो अंगूर के बगीचे में झोपड़ी में उस औरत की करम सिंह के द्वारा ताबड़तोड़ कमर हिलाते हुए जबरदस्त चुदाई देखकर उस पल का एहसास अभी तक उसकी जांघों के बीच महसूस हो रहा था घर पर आकर सुगंधा को इस बात का अहसास हो गया था कि उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी एक पल के लिए तो उसे अपने आप पर ही गुस्सा आने लगा था कि ऐसा क्यों हो रहा है लेकिन अगले ही पल उसे अपनी किस्मत सबसे बेकार नजर आने लगती क्योंकि वह इतनी अत्यधिक खूबसूरत होने के बावजूद भी शरीर सुख का आनंद बरसों से धरा का धरा रह गया था और गांव की ऐसी वैसी जो की खूबसूरत भी नहीं थी उस तरह की औरतों को खूब मजे लेकर चुदवाते हुए देखकर उनकी किस्मत से सुगंधाको जलन सी महसूस होने लगी थी और अपने पति पर उसे गुस्सा भी आने लगा था वह यही सब सोच रही थी कि तभी बाहर दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनाई दी बाहर रोहन खड़ा था और बार-बार वह अपनी मां को आवाज दे रहा था दरवाजे पर हो रही खटखट की आवाज सुनकर उसका ध्यान टूटा। तो वह बिस्तर पर से उठकर दरवाजे की करीब गई और दरवाजे की कुंडी खोल दी लेकिन इस हड़बड़ाहट में वह वह साड़ी का पल्लू ठीक करना भूल गई जो कि उसके कंधे से नीचे गिरी हुई थी। दरवाजा खुलते ही रोहन कुछ बोलने वाला था कि उसके शब्द मुंह में अटक गए आंखें खुली की खुली रह गई ऐसा लग रहा था कि मानो उसकी आंखें पलक झपकाना ही भूल गई हो। लेकिन जिस तरह के हालात उसकी आंखों के सामने थे ऐसे हालात में रोहन करता भी तो क्या करता दरवाजा खोल दे उसकी आंखों के सामने जो बड़े बड़े खरबूजे दिखाई दिए उसको देखते ही उसकी आंखों की चमक बढ़ गई थी उसके मुंह में पानी आने लगा था इसमें सारा दोष सुगंधा का ही था वह ख्यालातो मैं इस कदर डूब गई थी कि वह अपने ब्लाउज के दो बटन बंद करना ही भूल गई थी और तो और वह अपने साड़ी के पल्लू को कंधे पर रखना भूल गई थी रोहन की प्यासी नजरें तो वैसे ही इस तरह के मालिक ने चारों की प्यासी थी और आंखों के सामने प्यास बुझाने का कुआं नजर आते ही वह सब कुछ भूल कर बस उसी तरफ देखने लगा एक तो पहले से ही सुगंधा के दोनों खरबूजे एकदम पके हुए थे और गोलाई में भी काफी कसे हुए नजर आते थे और ऊपर से उन दोनों खरबूजे को कैद में रखने वाले वस्त्र के ऊपर के दो बटन खुले होने की वजह से आधे से ज्यादा चुचियां ब्लाउज के बाहर झलक रही थी । यह देखकर तो रोहन के मुंह से लार टपकने लगी जी मैं आ रहा था कि दोनों हाथों से अपनी मां के खरबूजे को दबाकर उनका रस निचोड़ डाले।

गजब का नजारा बना हुआ था एक तरफ कमरे के बाहर दरवाजे पर रोहन खड़ा था तो दूसरी तरफ कमरे के अंदर दरवाजे पर उसकी मां खड़ी थी जिसके अस्तव्यस्त वस्त्रों की वजह से रोहन की मां बेहद कामुक लग रही थी इस अवस्था में कोई भी मर्द अगर औरत को अपनी आंखों के सामने देख ले तो वह उसे अपनी बाहों में भर कर उनके दोनों खरबूजो को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दे लेकिन रोहन में अभी इतनी हिम्मत नहीं थी दरवाजा खुलते ही सामने रोहन को देखकर सुगंधा बोली

क्या बात है बेटा?

( इतना सुनकर भी जैसे सुगंधा की बातों का रोहन पर बिल्कुल भी असर नहीं हुआ वह तो आंखें फाड़े अपनी मां की दोनों गोलाईयो को देखे जा रहा था इस बात का एहसास है जब सुगंधाको हुआ कि उसका बेटा आंखें फाड़े ब्लाउज में से जांच की उसकी दोनों चूचियों को देखे जा रहा है तो वो एकदम से सकपका गई। वह तुरंत अपनी साड़ी से अपने स्तनों को ढकते हुए कंधे पर रख ली और जैसे ही एक खूबसूरत मादक नजारे पर पर्दा पड़ते ही जैसे रोहन को होश आया हो इस तरह से हड़ बढ़ाते हुए बोला। )

ममममम मम्मी मुझे कुछ पैसे चाहिए।

पैसे चाहिए क्यों पैसे चाहिए और इतनी जल्दी जल्दी तुम पैसे लेते हो पैसों का करते क्या हो( रोहन को आंखें फाड़े अपनी चूचियों को देखता हुआ पाकर सुगंधा थोड़ा गुस्से में थी )

मम्मी मुझे जरूरत है इसलिए चाहिए।

हां मुझे मालूम है तेरी जरूरतों के बारे में उन आवारा लड़कों के पीछे खर्चा करना ही तेरी जरूरत है ना । (इतना कहते हुए सुगंधा कमरे के अंदर अलमारी की तरफ जाने लगी रोहन अभी भी दरवाजे पर खड़ा था और अपनी मां को जाते हुए देखा तो उसकी नजर अपनी मां की कमर के नीचे भराव दार नितंबों पर चली गई जो कि मटकते हुए और भी ज्यादा मादक लग रही थी रोहन थोड़ा हिम्मत जुटा ते हुए कमरे के अंदर गया और अपनी मां को पीछे से उसके गले में अपनी दोनों बाहें डालकर दुलार करते हुए बोला ।)

मेरी प्यारी मम्मी आप खर्चा करने वाला दूसरा कोई है क्या अब मैं ही हूं तो मुझे दे दिया करो।

( सुगंधा अपने बेटे को इस तरह से दुलार करते हुए देखकर पिघल गई कुछ देर पहले जो कि उसकी हरकत की वजह से क्रोधित थी पल भर में उसका गुस्सा फुर्र हो गया और अपने बेटे की हरकत की वजह से सुगंधा मुस्कुरा दी और अलमारी खोलने लगी लेकिन रोहन के तन बदन में उत्तेजना का सैलाब उठने लगा क्योंकि जिस तरह से वह अपनी मम्मी को पीछे से पकड़ कर उसके गले में बाहें डाल कर खड़ा था इस अवस्था में अपनी मां के नरम नरम और बड़े-बड़े गांड का स्पर्श ठीक उसके मोटे तगड़े लंड पर हो रहा था जो कि पलभर में ही तन कर लोहे का रोड हो गया रूम की हालत खराब हो रही थी उसे अपनी मां की तरफ से डर भी लग रहा था लेकिन जिस तरह का आनंद उसे मिल रहा था वह अपने आप को रोक नहीं पा रहा था सुगंधा की बड़ी बड़ी गांड उसके लंड से स्पर्श हो रही थी इस बात से अनजान सुगंधा अलमारी खोलकर डा्ॉअर में से अपना पर्स निकाली और उसमें से सो सो के नोट निकालने लगी लेकिन इतने में उसे इस बात का अहसास हो गया कि उसके नितंबों के बीचो बीच कुछ चुभ रहा है लेकिन इस बात पर उसने ज्यादा ध्यान ना देकर बटुए के पैसे को गिनने लगे और दूसरी तरफ रोहन थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए अपनी कमर के नीचे वाले भाग को हल्के से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर दबाया ।

और इस बार अपनी गांड पर हो रहे कुछ ज्यादा चुभन की वजह से सुगंधा को समझते देर नहीं लगी कि जो चीज उसकी गांड के बीच भी चुभ रही है वह कुछ और नहीं बल्कि रोहन का लंड है और इस बात का अहसास होते ही उसका पूरा बदन उत्तेजना से गन गना गया। उसे समझ में नहीं आया कि क्या करें रोहन अभी भी उसे उसी अवस्था में पकड़े हुए था बल्कि उसके नथुनों से निकल रही उसकी गर्म गर्म सांसे सुगंधा के गर्दन पर महसूस हो रही थी जिसकी वजह से उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी। पल भर में सुगंधा की सांसे तेज चलने लगी उसे अब यह समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे की इस हरकत पर वह गुस्सा करें या इसका आनंद लें लेकिन उसका दिमाग उसे कुछ कहता इससे पहले ही उसके बदन की जरूरत रोहन की इस हरकत को अपनाने लगी जिस तरह से रोहन अपनी मां को बाहों में भर कर अपने लंड के कठोर बन का एहसास उसकी मदमस्त गांड पर करा रहा था उस हरकत को महसूस करके सुगंधा को अपने जवानी के दिन याद आने लगे थे सुगंधा जानबूझकर अब धीरे-धीरे नोट को गिनने लगी। सुगंधा को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि रोहन बार बार अपनी कमर के नीचे वाले भाग को उसके नितंबों पर दबा दे रहा था । रोहन की पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने को तैयार था रोहन अपनी मां के रुई से भी नरम बदन और गुदाज नशीले नितंबों का अनुभव बहुत अच्छी तरह से कर रहा था। उसके जी में तो आ रहा था कि वह अपने दोनों हाथों में अपनी मां की दोनों चुचियों को दबाता हुआ उसकी साड़ी ऊपर उठाकर पूरा लंड उसकी बुर में पेल दे। जिस तरह से उसकी मां बटुए में से ने नोट गिनने में देरी कर रही थी रोहन को समझ में आ रहा था कि उसकी मां को भी उसकी हरकत अच्छी लग रही थी। इसलिए वह अपने मन में ही बोला।

अगर यह सब तुम्हें अच्छा लग रहा है मम्मी तो अपने मुंह से हां क्यों नहीं बोल देती बस एक बार मुझे इशारा तो कर दो मैं तुम्हारी प्यासी बुर को अपने लंड से चोद कर एकदम तृप्त कर दूंगा तुम मस्त हो जाओगी मम्मी बस एक बार हल्का सा इशारा कर दो।

रोहन अपने आप से ही अपने मन में यह सब बातें करके अपने अंदर की भावना को प्रकट कर रहा था लेकिन उसकी मां को क्या मालूम था कि वह क्या चाहता है लेकिन जिस तरह की हरकत वा कर रहा था इतना तो सुगंधा समझ गई थी कि रोहन अब जवान हो गया था कुछ देर तक सुगंधा भी अपने बेटे की इस हरकत का पूरी तरह से आनंद उठाते हुए खड़ी रही लेकिन उसके मन में यह ख्याल आया कि कहीं उसका बेटा उसके बारे में गलत धारणा ना बांध ले इसलिए वह रोहन को अलग करते हुए बोली।

बस बस इतना मस्का लगाने की जरूरत नहीं है मैं तुझे दे रही हूं कैसे अगर तुझे नहीं दूंगी तो किसे दूंगी ।

(इतना कहकर सुगंधा खुद ही रोहन से अलग हो गई और रोहन को सांसों की 5 नोट थमाते हुए चोर नजरों से उसके पजामे की तरफ देखी तो सन्न रह गई पजामे के अंदर रोहन का लंड बुरी तरह से खडा था जो कि पजामे के अंदर तंबू सा बनाया हुआ था यह देखकर सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी सुगंधा अपने बेटे को इस बात का एहसास बिल्कुल नहीं होने दी की जो हरकत उसने किया था उसका अहसास उसे जरा सा भी हुआ है वह एकदम सामान्य तरीके से उससे बातचीत कर रही थी और जानबूझकर अपना ध्यान घर के काम में लगा रह

सुगंधा अपने बेटे को इस बात का एहसास बिल्कुल नहीं होने दी की जो हरकत उसने किया था उसका अहसास उसे जरा सा भी हुआ है वह एकदम सामान्य तरीके से उससे बातचीत कर रही थी और जानबूझकर अपना ध्यान घर के काम में लगा रही थी ताकि वह कमरे से बाहर चला जाए और ऐसा ही हुआ रोहन अपनी मां के हाथों से पैसा लेकर कमरे से बाहर चला गया रोहन को जाते हुए सुगंधा देखती रह गई और उसके बारे में सोचने लगी कि क्या सच में वह खुद की मां को देखकर इस तरह से उत्तेजित हो जाता है क्योंकि जिस तरह से वह हरकत किया था अगर उसके बदन में उत्तेजना बिल्कुल भी नहीं होती तो उसका लंड खड़ा नहीं होता इतना तोड़ सुगंधा समझ गई थी कि वह जानबूझकर अपने लंड का दवा उसकी गांड पर बढ़ा रहा था क्योंकि अगर अनजाने में ऐसा होता तो बार-बार रह-रहकर उसके कमर के नीचे वाला भाग उसके गांड पर दबाव ना बना रहा होता कुछ देर तक सुगंधा अपने बेटे के बारे में सोचते हुए बिस्तर पर बैठी रही लेकिन इस बात से वह इंकार भी नहीं कर सकती थी कि जिस तरह का एहसास उसने करा दिया था उसकी सोई हुई उन्माद उसकी वासना कुछ कुछ जागरूक हो रही थी एक तरफ उसे अपने बेटे की हरकत से प्रसन्नता भी हो रही थी तो किस बात की ग्लानि भी हो रही थी कि एक बेटा अपनी मां के साथ ऐसा कैसे कर सकता है वह इस बारे में सोचती हुई वहीं बैठी रह गई इस बात का एहसास सुगंधा को बिल्कुल भी नहीं था कि रिश्तो में भी आकर्षण बराबर बना रहता है भले वह रिश्ता मां बेटे भाई बहन का हो क्योंकि मर्द को हर रिश्ते में सबसे पहले एक औरत ही नजर आती है रोहन के साथ भी ऐसा ही हो रहा था सुगंधा उसकी मां होने के बावजूद भी रोहन उसे एक औरत के रूप में देखने लगा था क्योंकि उसके नजरिए में आकर्षण ने जन्म ले लिया था और सुगंधा तो वैसे भी खूबसूरती की मिसाल थी

 
सुगंधा अपने बेटे की हरकत से आश्चर्य की थी। क्योंकि जिस तरह की हरकत उसने कर दिया था उस बारे में सुगंधा कभी सोच भी नहीं सकती थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे ने उसे अपनी बाहों में भर कर अपने लंड का दबाव उसकी गांड पर बढ़ा रहा था इसका मतलब साफ था कि उसका बेटा उसके प्रति पूरी तरह से आकर्षित था और जिस तरह की हरकत करते हुए अपनी कमर का दबाव उसकी गांड पर बनाया था साफ साफ शब्दों में कहा जाए तो वह उसे चोदना चाहता था सुगंधा इस बात से हैरान थी कि एक बेटा अपनी मां को कैसे इस नजर से दे सकता है कैसे हो अपनी मां को चोदने के बारे में सोच सकता है लेकिन इसका कोई भी जवाब दूर-दूर तक सुगंधा को नजर नहीं आ रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि रोहन जिस तरह की हरकत कर रहा था वह उसे चोदना ही चाहता था तो क्या सच में रोहन उसे चोदना चाहता है। क्या रोहन उसे एक औरत की तरह देखने लगा है अगर सच में ऐसा है तो यह कैसे हो गया रोहन बिल्कुल भी ऐसा नहीं था सुगंधा को इस बात का डर सताने लगा कि उसके आवारा दोस्तों के साथ रहकर रोहन पूरी तरह से बदल गया था क्योंकि आज से पहले उसने कभी भी इस तरह की हरकत बिल्कुल भी नहीं किया था।

सुगंधा अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे यही सब सोच रही थी उसे पुरानी बातें याद आने लगी उसे वह पल याद आने लगा जिस दिन वह अपने कपड़े बदल रही थी और वह पूरी तरह से नंगी होकर अलमारी में अपने कपड़े ढूंढ रही थी। और जल्दबाजी में उसने दरवाजे की खड़ी लगाना भूल गई थी और तभी रोहन ना जाने कबसे दरवाजे पर खड़े होकर उसकी देख रहा था सुगंधा को पूरा यकीन था कि वह उसके नंगे बदन को उसकी नंगी गांड को देख चुका था हो सकता है उस दिन से उसके देखने का रवैया बदल गया हो क्योंकि मर्दों का भरोसा नहीं होता औरत के नंगे बदन के साथ जुड़े सारे रिश्ते नाते धरे के धरे रह जाते हैं उस समय एक मर्दों को उन रिश्तो में केवल एक औरत ही नजर आती है बाकी कोई भी रिश्ता उन्हें याद नहीं रहता हो सकता है उसके नंगे बदन को देख कर रोहन का दिमाग बदल रहा हो और सुगंधा को वह पल भी याद आने लगा जब वह नहाने के लिए गुसल खाने की तरफ गई थी और चोरी से अंदर झांकने पर उसे वह नजारा नजर आया था जिसके बारे में वह कभी कल्पना भी नहीं कर सकती थी रोहन पूरी तरह से महंगा था और उसका नंबर पूरी तरह से खड़ा था यह देखो कर दो उसके होश ही उड़ गए थे सुगंधाको को यह लगने लगा कि हो सकता है की उसके नंगे बदन के बारे में सोच कर ही उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया हो। इस बात को झूठ लाया भी नहीं जा सकता था लेकिन जहां एक तरफ सुगंधाको इन सब बातों को सोच कर और अपने बेटे की हरकत को देखते हुए गुस्सा आ रहा था वहीं दूसरी तरफ उसके मन का एक कोना कुछ ज्यादा ही चाहा करा था उसके मन में कहीं न कहीं प्रसन्नता भी हो रही थी क्योंकि जिस तरह की चुभन उसने आज अपने नितंबों के बीचो बीच की थी उस लंड की चुभन से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई थी और पल भर में उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो गई थी सुगंधा को इस बात से अपने बदन में उत्तेजना का असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा था क्योंकि उसे अपनी बाहों में भर कर लंड उसकी गांड पर रगड़ने वाला दूसरा कोई नहीं उसका ही बैठा था इस बात को लेकर ना जाने क्यों उसकी उत्तेजना कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी। ना जाने क्यों अपने बेटे के गंदी हरकत के बावजूद भी सुगंधाको उसकी यह हरकत अच्छी लग रही थी उस पल को याद करके सुगंधा की सांसे भारी हो चली थी एक अजीब से मादकता का अहसास उसके तन बदन को झकझोर रहा था।

कुछ देर तक सुगंधा ऐसे ही अपने कमरे में इसी तरह से बैठी रही उसकी आंखों के सामने बीते हुए कुछ दिनों के सारे चित्र किसी फिल्म की तरह चलने लगे वह समझ नहीं पा रही थी कि रिश्तो के बीच इस तरह के आकर्षण को कैसे दूर करें क्योंकि कहीं ना कहीं उसे यह सब गलत लग रहा था जो कि गलत भी था लेकिन बदन की जरूरत और आकर्षण को मैं तो दिमाग रोक सकता है ना ही मन यह तो पानी की तरह होता है जहां रास्ता मिलता है चलता चला जाता है फिर यह नहीं देखता कि रास्ते में क्या आ रहा है यही सुगंधा के साथ भी हो रहा था । लेकीन सुगंधा अपने दिलो दिमाग से काफी मशक्कत करने के बाद मन में ठान ली की इस तरह क्या कर सकते वह अपने आप को दूर रखेगी और अपने बेटे को भी वह अच्छी तरह से जानते थे कि उसका जो रुतबा पूरे गांव में जमीदारी के तौर पर है वह उस पर कभी भी धक्का लगने नहीं देगी और ना ही अपने और अपने बेटे के पवित्र रिश्ते के बीच में किसी तरह की आंच आने देगी ऐसा सोचकर वह बीते हुए पल को भुलाने की कोशिश करते हुए अपना सारा ध्यान काम में लगा दी।

पर वहीं दूसरी तरफ रोहन अपनी मां से दिए हुए पैसे को दोनों हाथों से खर्च करने लगा। उसके आवारा दोस्त तो उसके पीछे इसीलिए पिछलग्गु बन कर घूमते रहते थे कि उन्हें खाने पीने को जो मिलता था। यह बात बेला को खबर पड़ गई थी कि रोहन ने फिर से जेब खर्च के लिए अपनी मां से पैसे लिए हैं इसलिए बेला के हाथ के साथ साथ उसकी बुर में भी खुजली आने लगी थी बेला रोहन का इंतजार करने लगी लेकिन रोहन उसे घर में नजर नहीं आया उसे इस बात का डर था कि कहीं ऐसा ना हो जाए कि उसके हाथ में पैसे आने से पहले ही रोहन उसे अपने दोस्तों पर लुटा दे और वैसे भी पैसे के साथ साथ बेला का मन ललच रहा था रोहन के मोटे तगड़े लंड को देखने के लिए।

उस से इंतजार करना मुश्किल हुए जा रहा था इसलिए उसे ढूंढते ढूंढते खेतों की तरफ निकल गई लेकिन उसे रोहन कहीं भी नजर नहीं आया तो वह चलते चलते खेतों के उस पार जहां से एक छोटी सी नदी बहती थी वहां की तरफ चल दी सोची कुछ देर तक वही आराम करके नहा कर वापस लौट आएगी और वह नदी के किनारे पहुंच गई यह गांव की एक छोटी सी नदी थी जिसके चारों तरफ घने वृक्ष लगे हुए थे जिसकी वजह से यहां पर अक्सर कोई आता जाता नहीं था और चारों तरफ घने पेड़ होने की वजह से धूप की हल्की सी रोशनी भी अंदर तक नहीं आ पाती रे और इसीलिए अंधेरा महसूस होता था अक्सर बेला यहां आया करती थी लेकिन यह उस समय की बात है जब उसका चक्कर गांव के एक आवारा लड़के के साथ था अक्सर वह उसे यही बुलाया करता था और बेला के साथ जी भर के खेलने के बाद वापस गांव की तरफ चले जाया करते थे बेला इस नदी के किनारे खूब एस की है और वो जानती थी कि यहां पर उसे सुकून मिलेगा इसलिए वह नदी के किनारे पहुंच गई कुछ देर पेड़ के किनारे बैठे रहने के बाद और रोहन का इंतजार करने के बाद वैसे तो वो जानती थी कि रोहन इधर आने वाला नहीं है फिर भी मन में एक आस बंधी हुई थी कि काश रोहन इधर उसे मिल जाता तो उसकी बात बन जाती। लेकिन ऐसा होना मुमकिन नहीं था यह बात बेला भी अच्छी तरह से जानती थी इसलिए कुछ देर तक वहीं पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने के बाद वह नहाने के बारे में सोचने लगी वैसे भी गर्मी इतनी थी और नदी का पानी बहुत ठंडा था इसलिए नहाने का लालच वह रोक नहीं पाई और धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगी वह जानती थी कि यहां कोई आने वाला नहीं है इसलिए वह पूरी तरह से आश्वस्त थी इसलिए वह धीरे-धीरे करके अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर पेड़ के नीचे रख दी बेला के बदन पर इस समय कपड़े का रेशा भी नहीं था वह पूरी तरह से नंगी थी एक नौकरानी होने के बावजूद भी उसका बदन इतना गठीला था कि कोई उसके खूबसूरत बदन के रखरखाव को देख कर बता नहीं सकता था कि यह एक नौकरानी है।

अपने सारे कपड़े उतार कर बेला एकदम नंगी होकर धीरे-धीरे नदी के पानी में पैर डालते हुए रखने लगी। दो चार कदम आगे बढ़ी ही थी कि नदी का पानी बेला की कमर तक आ गया। चारों तरफ से घने पेड़ों से घिरा होने के कारण नदी का पानी बहुत ही ठंडा था जो कि गर्मी में बेला के बदन को राहत प्रदान कर रहा था। बेला को बहुत ही मजा आ रहा था बेला धीरे-धीरे अपने कदम आगे बढ़ाने लगी और जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती पानी का स्तर ऊपर की तरफ बढ़ता जाता और इस तरह से धीरे-धीरे बेला की नंगी गांड पानी के अंदर डूबने लगी धीरे धीरे करके पानी कमर से ऊपर आने लगा और जैसे ही पानी उसकी दोनों चूचियों की निचली सतह पर आया बेला वहीं रुक गई उसे मज़ा आने लगा और वह अपने हथेली से पानी ले ले कर अपने ऊपर डालने लगी पानी ठंडा होने की वजह से बेला को गुदगुदी महसूस हो रही थी । बेला छप्प छप्प करके नदी के पानी में बच्चों की तरह खेलते हुए नहाने का मजा लेने लगी।

वैसे एक बेहद ही मादकता से भरा हुआ नजारा नदी में नजर आ रहा था लेकिन इसे देखने वाला वहां कोई नहीं था कितना खूबसूरत और काम होते दिनों से भरपूर नजारा होता है जब एक औरत अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर इस तरह से खुले में नदी में नहाती हो तो इस तरह का नजारा देखने वाले का तो देखते ही देखते पानी निकल जाना लाजिमी है बेला यही बात नदी के अंदर एकदम नंगी होकर नहाते नहाते सोच रही थी कि काश इधर रोहन आ जाता तो उसके लंड के दर्शन हो जाते।

शायद उसके मन की यह बात भगवान भी सुन रहा था इसलिए बेला पर प्रसन्न होते हुए वहां पर सोहन को भेज दिया बात ऐसी थी कि रोहन आज अपने दोस्तों के साथ कुछ ज्यादा दूर तक निकल गया था और आते समय अकेला ही इस रास्ते से जल्दी घर पहुंचने की उम्मीद लिए आने लगा वह नदी के किनारे पहुंचा ही था कि उसे नदी के अंदर छपाक छपाक की आवाज आने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आया और यह देखने के लिए कि वह आवाज कैसी है वह उस आवाज की दिशा में जाने लगा धीरे-धीरे पांव बढ़ाते हुए जब वह नदी के बिल्कुल करीब पहुंच गया तो नदी के अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए।

नदी के अंदर का नजारा देखकर रोहन का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था ।नदी में बेला को इस अवस्था में देखकर रोहन का दिल गदगद हुए जा रहा था। उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था बेला का संपूर्ण बदन पानी के अंदर था केवल उसके दोनों कबूतर पानी के ऊपर फड़फड़ा रहे थे। तभी रोहन की नजर पैरों के नीचे पड़ी तो उसके होश उड़ गए पैरों के नीचे बेला के बदन के सारे वस्त्र पड़े हुए थे जिसे देखकर रोहन को समझते देर नहीं लगी कि पानी के अंदर बेला पूरी तरह से नंगी है।

यह ख्याल रोहन के मन में आते ही उसके पजामे का तंबू तानने लगा। खुशी के मारा रोहन का दिल उछलने लगा कामोत्तेजना की लहर तन बदन को झकझोर ने लगी। रोहन से अब बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था वह अपने कदम नदी के पानी की तरह बढ़ाने लगा। उसके हाथ में समोसे और जलेबी की थैली थी।

बेला अपनी ही धुन में नदी के अंदर जल क्रीडा कर रही थी वह बार-बार अपनी हथेली में पानी भरकर अपने ऊपर डाल रही थी ऐसा करने से उसकी भारी भरकम चूचियां ऐसा लग रहा था मानो किसी पानी भरे गुब्बारे की तरह नदी में तैर रहे हो यह नजारा देखकर तो रोहन के मुंह में पानी आ रहा था ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आंखों के सामने स्वादिष्ट व्यंजन से भरी हुई थाली पड़ी हो। उसके पजामे में उसका लंड खड़ा होकर पूरी तरह से गदर मचा रहा था ।

रोहन धीरे धीरे नदी की तरफ कदम बढ़ा रहा था बेला अपने में मस्त नदी के शीतल जल में मजे ले रही थी उसे इस बात का आभास तक नहीं हुआ कि रोहन उसके खूबसूरत नंगे बदन को देखकर मस्त हुए जा रहा है तभी रोहन के कदमों की आहट सुनकर नजर घुमाई तो सामने ही उसे रोहन नजर आ गया बेला तो रोहन को देखते ही एकदम से प्रसन्ना हो गई साथ ही सीधे उसकी नजर रोहन के पजामे पर गई तो उसके होश उड़ गए उसे सारा माजरा समझ में आ गया वह समझ गई कि उसे इस तरह से नदी में नंगी होकर नहाते देख कर रोहन का लंड खड़ा हो गया है

 
तभी बेला रोहन से बोली।

सुनी हूं कि तुम बहुत पैसे उड़ा रहे हो अरे कुछ हमारे लिए भी बचाए हो कि सब खर्च कर दिए (बेला जानबूझकर रोहन की आंखों के सामने ही अपनी चूची पर पानी डालते हुए बोली बेला किया मस्ताना देखकर रोहन का दिल बाग-बाग हो गया उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों के सामने ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग से उतरी हुई कोई परी नदी में नहा रही हो। रोहन अब तक इतना तो समझ गया था कि बेला को पैसे से ही मतलब था और यह अच्छा भी था रोड के पास पैसों की कमी नहीं थी पैसा खर्च करने पर उसे कोई भी आपत्ति नहीं थी क्योंकि वह जानता था कि पैसे खर्च करके उसे औरतों के अंगों को देखने सुनने और उन्हें स्पर्श करने का मौका मिल रहा था पूरी तरह से बेला पर खर्च किए गए पैसे वसूल हो रहे थे इसलिए बेला की बात सुनते ही रोहन बोला।)

अरे नहीं नहीं तुम्हारे लिए तो मैंने पैसे बचा के रखा हूं (और इतना कहकर वह अपने पहचाने की जेब में से 100 100 की तीन नोट निकालकर बेला को दिखाते हुए बोला)

यह देखो।

( बेला की नजर 100 100 कि 3 नोटों पर पढ़ते हैं उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और जांघों के बीच की पतली सी दरार में चिंगारी उठने लगी उसकी खुशी का ठिकाना ना था वह बात को बदलते हुए बड़े ही कातिल अंदाज में अपने दोनों हाथों से अपनी दोनों चुचियों को कस के पकड़ ते हुए बोली)

रोहन बाबू तुम तो मेरा बहुत ख्याल रखते हो मुझे यहां अकेले में नहाने में मजा नहीं आ रहा है तुम भी अंदर आ जाओ।

सच बेला क्या मैं तुम्हारे साथ नहा सकता हूं।

हां क्यों नहीं बिल्कुल नहा सकते हो।

लेकिन तुम तो पानी के अंदर एकदम नंगी हो ।

तो क्या हुआ तुम भी अपने सारे कपड़े उतार कर अंदर आ जाओ और वैसे भी यहां कोई देखने वाला नहीं है इतनी गर्मी में नदी के ठंडे ठंडे पानी मैं नहाने का मजा ही कुछ और है।। आ जाओ अपने कपड़े उतार कर मे जेसे नंगी हूं तुम भी नंगे हो जाओ (बेला जानबूझ कर उसे खुले शब्दों में आमंत्रित कर रही थी इन शब्दों का रोहन पर बहुत ही बुरा और कामुक असर हो रहा था उसका लंड था की शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। इस तरह का खुला आमंत्रण भला कौन बेवकूफ था जो मना कर देता बेला की बात सुनकर रो हम तो अपने कपड़े उतारने का गम तैयार हुआ ही था कि बेला बोल पड़ी।)

रोहन पहले सारे पैसे पेड़ के नीचे पड़े मेरे ब्लाउज में रख दो और जल्दी से अपने कपड़े उतार कर आ जाओ।

रोहन तो बेला की नंगी जवानी देखकर पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गया था इसलिए तुरंत रुपए बेला के ब्लाउज में रख दिया लेकिन ब्लाउज को अपने हाथों में लेकर एक अजीब तरह की उत्तेजना रोहन के तन बदन मे जागरूक हो रही थी वह जल्दी से ब्लाउज में पैसे रखकर अपने कपड़े उतारने लगा लेकिन अंत में अपने अंडर वियर उतारने से कतरा रहा था उसको इस तरह से शर्म आता हुआ देखकर बेटा जानबूझकर अपने कदम आगे बढ़ाकर अपने चुचियों के नीचे के नंगे बदन को दिखाने की कोशिश करते हुए आगे बढ़ने लगी और जैसे ही पानी के बाहर उसके कमर के नीचे वाले अंग नजर आया तो रोहन बेला की रसीली बुर के ऊपर हल्के हल्के बाल को देखकर पूरी तरह से चुदवासा हो गया। अब तो रोहन से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह तुरंत बेला की आंखों के सामने ही अपने अंडरवियर को उतारकर एकदम नंगा हो गया बेला तो रोहन कीमत मस्त जवानी और उसके गठीला बदन को देख कर पानी पानी होने लगी उसका लंड पूरी तरह से ऊपर आसमान की तरफ देख रहा था जिसे देखकर बेला के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आने लगा था रोहन बी अब एकदम नंगा हो चुका था इस तरह के एकांत मे जवान औरत और एक जवानी के दहलीज पर कदम रख रहा नौजवान मर्द अपनी जवानी की गर्मी निकालने को बेताब थे।

रोहन अपने सारे कपड़े उतार कर नदी के पानी में उतरने लगा यह देखकर बेला का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा बेला अच्छी तरह से जानती थी कि अभी रोहन के साथ मर्यादा की दीवार लांघना नहीं है क्योंकि वह रोहन को पूरी तरह से एकदम से अपना दीवाना बना देना चाहती थी जिसमें काफी हद तक वह कामयाब भी हो चुकी थी धीरे-धीरे करके वह रोहन से पैसे ऐंठ रही थी। जिसमें बेला को मज़ा भी आ रहा था और उसकी जरूरत भी पूरी हो रही थी मन तो उसका भी कर रहा था कि रोहन के लंड को अपने हाथों से अपनी चूत पर रख कर पूरा का पूरा अंदर जाने वाले लेकिन इस तरह की जल्दबाजी करना वह मुनासिब नहीं समझ रही थी।

रोहन धीरे धीरे चलता हुआ उसके करीब आ गया था उसका लंड चलते समय ऊपर नीचे बड़े ही भयानक रूप से हिल रहा था जो कि एक औरत के लिए बेहद कामोत्तेजना से भरपूर नजारा होता है और कुछ हद तक दर्द के अहसास से डरावना भी लेकिन एक औरत अच्छी तरह से जानती है कि मर्द का हथियार जितना दमदार होता है युद्ध करने में उतना ही मजा आता है। लेकिन इस समय बेला का युद्ध करने का विचार बिल्कुल भी नहीं था वह सिर्फ अपने पासे बिछा रही थी ताकि रोहन को पूरी तरह से घेर सके ।

बेला को ऐसा लग रहा था कि वह रोहन को अपने जाल में फंसा रही है जबकि हकीकत यह था कि बेला खुद-ब-खुद रोहन के फौलादी अंग के जाल में उसके आकर्षण में फंसती चली जा रही थी वह भले ही अपने आप को कितना भी मर्यादा की दीवार लगने से अभी रोक रही हो एक न एक दिन वह खुद ही रोहन से गिड़गिड़ाते हुए अपनी बुर में उसका लंड डालने के लिए कहेगी।

और वैसे भी यह युद्ध औरत और मर्द के बीच ऐसा युद्ध था जिसमें हार कर भी मर्द की ही जीत होती है। क्योंकि दोनों ही रूप में चाहे वह हारे या चाहे जीते आखिरकार मर्द को तो औरत की सबसे खूबसूरत हसीन बुर चोदने का मौका जो मिलता है और इसी मौके की तलाश में मर्द हमेशा इधर-उधर मुंह मारता फिरता है वेदा को भी ऐसा लग रहा था कि रोहन से पैसे ऐड कर वह रोहन को अपना दीवाना बना रही है यह हकीकत भी था कि रोहन उसके रूप जान उसके खूबसूरत नंगे बदन के आकर्षण में बंदर चला जा रहा था लेकिन यह रोहन की हार नहीं बल्कि उसकी जीत थी क्योंकि पैसों की कमी रोशनी को बिल्कुल भी नहीं थी पैसे खर्च करने के बाद उसे औरत के उन अंगों को देखने और समझने उन्हें स्पर्श करने का मौका मिल रहा था जिसे वह शायद अपनी प्रेमिका और अपनी पत्नी के द्वारा ही सीख पाता है । औरत के बेशकीमती और खूबसूरत अंगों को जानने समझने का मौका रोहन को बेला के द्वारा प्राप्त हो रहा था भले ही इसके लिए उसे पैसे खर्च करने पड़ रहे थे वैसे भी तो किसी भी प्रकार की शिक्षा प्राप्त करने के लिए पैसे तो खर्च कर नहीं पढ़ते हैं भले ही वह किताबी ज्ञान हो या अंगों का ज्ञान दोनों ही रूप में फायदा तो विद्यार्थियों का ही होता है और इस तरह के कामोत्तेजना से भरपूर अंगों का ज्ञान बेला 1 अनजाने में ही शिक्षिका बनकर अपने विद्यार्थी रोहन को दे रही थी।

नदी के पानी के अंदर बेला और रोहन के बीच की दूरी खत्म होकर केवल 1 फीट जितनी ही रह गई थी। और बेला जानबूझकर पानी की सतह के ईतने स्तर पर खड़ी थी कि जहां से रोहन को साफ तौर पर उसकी रसीली बुर के दर्शन हो रहे थे।

और यही तो बेला का ब्रह्मास्त्र था जिसे दीखाकर वह रोहन के चारों खाने चित कर चुकी थी। रोहन को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या देखें नजर को ऊपर उठा रहा था तो उसकी आंखों के सामने मौसमी दशहरी आम था और नीचे नजर कर रहा था तो मसालेदार लहसुन की कली नजर आ रही थी जिसके बिना सारे पकवान बे स्वाद लगते थे। मन तो रोहन का लालच रहा था कि दोनों को अपने हाथ में भर कर उनके स्पर्श से उनके बदन के अंगों के गर्माहट का आनंद ले लेकिन अभी तक बेला ने रोहन को इस तरह की छूट बिल्कुल भी नहीं दे रखी थी यह बात रोहन जानता था लेकिन अगर उनकी जगह कोई और होता तो अपने मन की ना जाने कबसे कर देता क्योंकि अंदर ही अंदर बेला भी यही चाहती थी।
 
रोहन की आंखों के सामने जन्नत का नजारा था रोहन कोई समय ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे कोई स्वर्ग की अप्सरा नीचे धरती पर आकर उसके सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नदी के पानी में जब कीड़ा कर रही है जिसे देखकर रोहन का मन मचल जा रहा है। बेला बहुत ही चालाक औरत थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों को किस चीज की जरूरत पड़ती है। और वह उसी चीज को रोहन के ठीक आंखों के सामने पानी के ऊपरी सतह पर स्थिर की हुई थी वह चाहती है तो शर्म के मारे पानी के अंदर जा सकती थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही थी वह जानबूझकर अपनी बुर रोहन को दिखा रही थी क्योंकि रोहन भी बेला के उसी अंग का दीवाना था जिसे देखकर इस समय रोहन का लंड पूरी तरह से किसी लोहे के रोड की तरह टाइट हो गया था जिसे देख कर बेला के मुंह में भी पानी आ रहा था मन तो उसका कर रहा था कि रोहन के लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूस डाले लेकिन इस समय ऐसा करना उसकी नजर में वर्जित नहीं था वह रोहन को और ज्यादा तड़पाना चाहती थी इसलिए जानबूझकर रोहन की तरफ देखकर अपने एक हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी पूरी हुई बुर पर रखकर उसे हल्के हल्के से रगड़ते हुए खुजलाने का नाटक करने लगी। और बेला का यह नाटक रोहन के तन बदन पर छुरिया चलाने लगा खास करके उसके लंबे तगड़े लंड पर।

रोहन की हालत पानी बिन मछली की तरह हो रही थी वह ललचाए आंखों से विला की बुर की तरफ देख रहा था और यह देखकर बेला मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और इसीलिए अभी भी वह लगातार अपनी बुर को अपनी हथेली से रगड़ दी जा रही थी जिससे उसके तन बदन में भी उत्तेजना की चीटियां चिकोटी काट रही थी। जिस तरह की हालत रोहन की थी ठीक उसी तरह की हालत बेला की भी थी आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी बस फर्क इतना था कि बेला अपने आप को संभाले हुए थी और रोहन था की बेला के इशारे का इंतजार कर रहा था। बेला पल पल रोहन को तड़पाए जा रही थी एक हाथ से अपनी बुर तो दूसरे हाथ से अपनी चूची को मसलते हुए बोली।

काफी दिनों से अच्छी तरह से नहाई नहीं हूं आज पूरे बदन को मलमल कर नहाउंगी।( ऐसा करते हुए वह रोहन की तरफ देखते हुए अपने कदम पीछे की तरफ हटाते हुए वह धीरे-धीरे कातिल मुस्कान बिखेरते हुए धीरे-धीरे अपने कदमों कों पीछे की तरफ ले रही थी। रोहन बेला के मादक अंगों के थीरकन को देखकर नशे में डूबता चला जा रहा था। और वह भी उन अंगों को देखकर अपने कदम आगे बढ़ा रहा था पानी के ऊपरी सतह पर रोहन का मोटा तगड़ा लंड ऊपर नीचे हिलता हुआ टन टना रहा था जिसे देखकर उत्तेजना के मारे बेला की बुर फुल पचक रही थी। बहुत ही गजब का मादकता से भरा हुआ नजारा नदी के अंदर बना हुआ था जिसके गवाह केवल बेला और रोहन के अलावा शीतल बह रही हवा और प्रकृति थी। और दूसरा कोई भी इस नजारे को प्रत्यक्ष दर्शन करने वाला वहां कोई नहीं था इसीलिए तो दोनों बेझिझक बिना कपड़ों के नदी के अंदर उतर गए थे बेला के चेहरे पर कामुक मुस्कान तैर रही थी। पीछे कदम रखते हुए वह थोड़ा सा डगमगाए और गिरने को हुई लेकिन वह पानी में गिर पाती इससे पहले ही रोहन उसके करीब पहुंचकर एक हाथ उसकी कमर में डाल कर उसे पकड़ लिया लेकीन बेला को गिरने से बचाने के लिए रोहन की तरफ से जो अफरा-तफरी हुई कुछ पल में ही बेला पूरी तरह से रोहन की बाहों में थी बेला का बदन रोहन के गठीला बदन से से एकदम सट गया था।

हालात कुछ इस तरह से हो गए थे की बेला की गोल-गोल चूचियां रोहन की छातियों से बिल्कुल चिपक से गए थे रोहन के तन बदन में एकाएक उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी बेला के नंगे बदन से चटनी से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी बिजली के तार को छू लिया हो और वैसे भी उसका मेन पावर बेला को इस तरह से पकड़ने की वजह से सीधे बेला के ट्रांसफार्मर पर इस पर सो रहा था जिसकी वजह से रोहन के साथ साथ बेला के तन बदन में भी कामोत्तेजना की चिंगारी भड़कने लगी थी दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगे । पल भर में ही दोनों के सांसो की गति तेज होने लगी गांव के बीच से बहती इस नदी के किनारे खेली असीम शांति को केवल इन दोनों की तेज चल रही सांसो की गति की आवाज ही भंग कर रही थी रोहन का लंड बराबर बेला की रसीली बुर पर ठोकर मार रहा था जिसकी वजह से। बेला अपना आपा खोते जा रही थी ।रोहन पूरी तरह से मदहोश हो चुका था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है उसके तन बदन में उत्तेजना के साथ-साथ आनंददायक एहसास महसूस हो रहा था । रोहन और बेला के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव कम उत्तेजना का असर ज्यादा दिख रहा था पलभर में ही बेला का चेहरा लाल हो गया बार-बार उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि कोई उसकी बुर की दीवार पर हथोड़ा मार रहा है क्योंकि बार-बार रोहन के लंड का मोटा सुपाड़ा बेला की बुर की दीवार पर रगड़ खा जा रहा था। बेला के मन में तो हो रहा था कि वह रोहन के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी बुर की दीवार से हटाकर उसके छेद पर रख दे और उसे डालने के लिए बोले।

पर पैसे के लालच ने उसे ऐसा करने से रोक रखा था फिर भी पूरी तरह से चुदवाती हो चुकी बेला अपने चेहरे के इतने करीब रोहन के चेहरे को पाकर अपने आप को रोक नहीं पाई और खुद ही अपने होंठ को उसके होंठ पर रखकर चूसने शुरू कर दी रोहन तो बेला की इस हरकत से पूरी तरह से गनगना गया उसे समझ में नहीं आया कि क्या करें कुछ से कह देता को वह वैसे ही बेला की हरकत का आनंद उठाता रहा लेकिन एक मर्द होने के नाते सुबह अपने आपको ज्यादा देर तक रोक नहीं पाया और बेला को कसकर अपनी बाहों में भर कर उसके होठों को उसी प्रकार से चूसना शुरू कर दिया।

बेला की दोनों चूचियां रोहन की चौड़ी छाती पर पीस रही थी बेला के तनबदन में काम ज्वर फैल रहा था वह ना जाने कैसे अपने आप को संयम में रखे हुए थी वरना उसकी जगह कोई और औरत होती तो कब का रोहन लंड को अपनी बुर के अंदर उतार ली होती। रोहन के होठों को चूसते चूसते बेला को ना जाने क्या सूझी हुआ उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख कर उसे दबाने का इशारा की रोहन तो जिंदगी में पहली बार किसी औरत की चूची पर हाथ रख रहा था औरत के गोल गोल स्तनों का नरम नरम स्पर्श हथेली पर पड़ते ही रोहन का तन बदन उत्तेजना से गदगद होने लगा। ऐसा लग रहा था कि जैसे एक छोटे से बच्चे को खेलने के लिए गेंद पकड़ा दी गई हो और बच्चा उसमें पूरी तरह से अपना मन लगाकर गेंद को पकड़ रहा हो इसी तरह से रोहन के साथ भी हो रहा था वह देला की चूची को कभी दबाता कभी खींचता तो कभी उसे सहला रहा था लेकिन बेला में एक हाथ ऊंची पर रखी थी और रोहन उत्तेजना के चलते अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को दबा रहा था साथ ही बेला के नरम नरम होंठों को चूसने का आनंद भी ले रहा था। बेला के बदन में काम उत्तेजना का नशा छा रहा था वह पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी अभी भी दोनों के गुप्तांग पानी की सतह से ऊपर ही थे जिस पर रोहन का मोटा तगड़ा लैंड बार बार ठोकर मार रहा था या यूं समझ लो कि जबरदस्ती दरवाजे को खोलकर घुसना चाहता था रोहन पागलों की तरह बेला की चूचियों से खेल रहा था।

सससहहहहह आहहहहहहहहह यह क्या कर रहे हो रोहन बाबू कोई देख लेगा तो क्या होगा मेरी तो इज्जत चली जाएगी साथ ही नौकरी भी चली जाएगी ।सससहहहहह आहहहहहहहह

(जोर से चुची दबाने पर )

 
यहां हम दोनों को देखने वाला कोई भी नहीं है।

( रोहन जोर जोर से बेला की चुचीयो को दबाते हुए बोला। )

जिस तरह से रोहन बेला की चूचियों को दबा रहा था उससे बेला को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह एकदम मस्त हुए जा रही थी उससे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर रोहन के मोटे तगड़े लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी खुली हुई पूर्व पर रगड़ना शुरू कर दी जिससे उसकी उत्तेजना और आनंद में निरंतर वृद्धि होती जा रही थी और उसके मुख से तो गरम गरम सिसकारी की आवाज भी आना शुरू हो गई थी जिसे वहां सुनने वाला कोई भी नहीं था इसलिए वह बेफिक्र होकर जोर जोर से सिसकारी ले रही थी रोहन बेला की इस हरकत से एकदम कामातुर हो गया वह पानी बिन मछली की तरह तड़प रहा था उसके मन में बस यह़ हो रहा था कि कैसे भी करके ऊसका लंड बेला की जवानी का दरवाजा खोल के उसके अंदर घुस जाए लेकिन ऐसा करने से पैदा रोक दे रही थी हालांकि उसकी भी हालत खराब थी वह खुद रोहन के मोटे तगड़े लंड को गपक जाना चाहती थी।

रोहन जिस तरह से बेला के होंठों को चूस रहा था और उसकी दोनों चूचियों को दबा दबा कर मजे ले रहा था साथ ही अपने लंड की ठोकर उसकी बुर के द्वार पर दे रहा था उसी से वह थोड़ा-थोड़ा खुलने लगा था इसलिए वह हिम्मत जुटा कर अपने मन की बात बेला के दोनों स्तनों का आनंद लेते हुए बोला।

बेला मैं चाहता हूं कि तुम मेरे लंड को अपने इसके अंदर घुसा लो।

( बेला को ईस बात की ऊम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि रोहन इतनी हिम्मत दिखाते हुए यह बात कह देगा लेकिन रोहन की बात सुनकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी। लेकिन वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि अब भी रोहन के लंड को बुर का द्वार खोल कर अंदर लेने का समय नहीं आया है अभी तो वह रोहन से और अधिक पैसे ऐठने के चक्कर में थी। ा इसलिए वह अपने आप को सैया में रखते हुए और रोहन की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाने के उद्देश्य से एक हाथ आगे की तरफ घुमा कर रोहन की कमर पर रख कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए और दूसरे हाथ से रोहन के मोटे तगड़े लंड को पकड़ कर अपनी बुर पर जोर जोर से रगड़ते हुए पीछे की तरफ पानी की गहराई मैं बढ़ने लगी। रोहन को समझ नहीं पा रहा था कि बेला क्या कर रही है और देखते ही देखते हैं वह दोनों के गुप्तांग पानी के अंदर डूबने लगे दोनों के छाती जितना पानी आ गया तो बेला वहीं रुक गई लेकिन अभी भी अपने कार्य को वह जारी रखी थी वो जोर जोर से रोहन के लंड को अपनी बुर के ऊपर रगड़ रही थी जिसकी वजह से उत्तेजना के मारे बेला की बुर फुल कर कचोरी की तरह हो गई थी।

बेला गरम गरम सिसकारी छोड़ रही थी जिसकी मदहोश भरी आवाजें सुनकर रोहन की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह जोर-जोर से बेला की चूचियों को दबा ते हुए मसल रहा था जिसकी वजह से उसकी दोनों गो लाइयां लाल टमाटर की तरह हो गई थी।

डालने दो ना बेला एक बार। सिर्फ एक बार मुझसे रहा नहीं जा रहा है।

मैं जानती हूं रोहन बाबू तुमसे क्या किसी से भी रहा नहीं जाता क्योंकि औरत की बुर चीज ही ऐसी होती है कि अच्छे-अच्छे इसमें डूब जाते हैं जैसे कि तुम इतने बड़े जमीदार के लड़के होकर भी अपनी ही नौकरानी के पीछे लट्टू बनकर घूम रहे हो।

बेला यह तुम क्या कह रही हो मैं तुम्हे कभी भी अपने घर की नौकरानी नहीं समझता मैं तुम्हें अपने घर का सदस्य समझता हूं और सच कहूं तो तुमसे मुझे ना जाने कैसा लगावहो गया है।

बेला रोहन की बातें सुनकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी दोनों नदी के बीचों-बीच खड़े थे लेकिन नदी की चौड़ाई कुछ ज्यादा नहीं थी जिसकी वजह से दोनों की तरफ लगे हुए पेड़ आपस में मिले हुए थे और नदी के अंदर धूप का नामोनिशान नहीं था हल्का हल्का अंधेरा ही नजर आता था । बेला के चेहरे का हाव भाव पूरी तरह से कामोत्तेजना के ज्वर में ढलता चला जा रहा था।

और सच कहूं तो मैं तुम्हारा पूरी तरह से दीवाना हो चुका है बस एक बार मेला एक बार मुझे अपने लंड को तुम्हारी बुर में डाल लेने दो।

( अपने दोस्तों की संगत और बेला के खुले रवैया के वजह से रोहन में काफी हिम्मत आ गई थी .. इसलिए वह यह बात बेला को बोल गया बेला उसके मुंह से इतनी गंदी बात सुनकर एकदम से चुदवासी हो गई मन तो कर रहा था कि उसकी यही बात पर से कह दे कि ले जी भर के चोद ले । लेकिन बेला ना जाने कौन सी मिट्टी की बनी थी कि अपनी वासना और चुदासपन के असर को दबा ले गई। लेकिन फिर भी उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी फुली हुई कचोरी जैसी बुर पर जोर जोर से रगड़ ती रही।

तुम बहुत शरारती हो गए और रोहन बाबू मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इतने बड़े हो गए हो । हां लेकिन तुम्हारे इस मोटे तगड़े लंड को देखकर लगता है कि तुम अब बड़े हो गए हो (पानी के अंदर अपने हाथ में पकड़े हुए लंड की तरफ इशारा करते हुए बेला बोली। बेला के मुंह से लंड शब्द सुनकर रोहन पूरी तरह से उत्साहित और उत्तेजित हो गया। बेला अब रोहन के जोश को बढ़ाने के उद्देश्य से उसकी बढ़ाई करते हुए बोली)

रोहन शायद तुम यह बात नहीं जानते कि तुम्हारा लंड औरों के मुकाबले कुछ ज्यादा बड़ा और मोटा तगड़ा है। सच कहूं तो इसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए मेरा मन भी तड़प रहा है।

तो लेती क्यों नहीं बेला ले लो ना मैं भी बहुत तड़प रहा हूं।

अभी नहीं मेरे रोहन बाबू सही समय आएगा तो मैं जरूर तुम्हारा लंड अपनी बुर के अंदर लेकर तुमसे चुदवाऊंगी ।

(बेला जानबूझकर इतने खुले शब्दों में रोहन से कह रही थी ताकि वह अंदर ही अंदर तड़पता रहे और एक दम से उसका दीवाना हो जाए। और ऐसा हो भी रहा था बेला की बात सुनकर । रोहन अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और साथ ही उसकी सांसों की गति तीव्र होते जा रही थी उसकी हथेलियों का दबाव मेला की चुचियों पर कसता चला जा रहा था साथ ही वह हल्के हल्के अपनी कमर को आगे की तरफ खेल रहा था जिससे बेला को भी अपनी बुर पर हो रहे कठोर दस्तक का अनुभव एकदम से दीवाना बना रहा था। बेला और रोहन दोनों पूरी तरह से उत्तेजना के पानी में उतर गए थे जहां से वापस लौट आना नामुमकिन था लेकिन बेला अपने आप को संभाले हुए थी रोहन को जरा भी ईसारा मिलता तो अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में डालकर भोसड़ा बना दिया होता। उसने भी अपनी जवानी के उबाल को संयम में रखे हुए था वरना एकांत में ऐसी नंगी औरत पाकर कौन मस्त ना हो जाता। ।

बेला कब आएगा वह समय जब मैं तुम्हारी बुर के अंदर अपना लंड डालकर तुम्हें चोदूंगा।

चिंता मत करो मेरे राजा वह समय बहुत ही जल्दी आएगा मैं जानती हूं कि तुम्हारी जवानी गरम पानी छोड़ने के लिए तड़प रही है। जब तक तुम्हारा लंड पानी नहीं छोड़ देता तब तक तुम ऐसे ही तड़पते रहोगे लाओ में हाथ से हिला तुम्हारा पानी निकाल दूं। ( रोहन को समझ में नहीं आ रहा था कि बेला क्या कह रही है और इससे पहले वह कुछ समझ पाता बेला अपना हाथ पानी के डालकर रोहन के मोटे तगड़े लंड को पकड़ लिया और जोर-जोर से हिलाते हुए मुट्ठी आने लगी रोहन को मजा आने लगा वह जोर-जोर से बेला की चूची को मसलने लगा उसके चेहरे पर छाई वासना की लाली को देखकर बेला बोली)

 
सिर्फ दबाने और मसलने से काम नहीं चलेगा इसे अपने मुंह में भर कर जैसे छोटे बच्चे पीते हैं वैसे ही तुम भी चूसो ( रोहन को समझ पाता इससे पहले ही बेला अपना हाथ रोहन के सर के पीछे की तरफ ले जाकर खुद ही उसके मुंह को अपनी चूची से सटा दी बेला की हरकत से रोहन एकदम मदमस्त हो गया और खुद ही उसकी चॉकलेटी रंग की निप्पल को मुंह में भर भर कर चूसने शुरू कर दिया दोनों को बहुत ही ज्यादा आनंद की प्राप्ति हो रही थी। बेला का हाथ रोहन के लंड पर बड़ी तेजी से चल रहा था साथ ही उसके मुंह से गर्म सिसकारी बाहर आ रही थी जिससे वातावरण और भी ज्यादा कामुक बन गया था और कुछ ही देर में रोहन के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आई और एक झटके में रोहन के लंड में गर्म पानी की पिचकारी पानी के अंदर फेंकना शुरू कर दिया रोहन के साथ साथ बेला भी झड़ चुकी थी क्योंकि एक हाथ से वह रोहन के लंड को हिला रही थी तो दूसरे हाथ से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को जोर जोर से मसल रही थी जिससे उसका भी पानी निकल चुका था। दोनों शांत हो चुके थे बेला और जो हम दोनों पानी से बाहर आ गए और अपने अपने कपड़े पहनने लगे बेला जैसे ही अपने पेटीकोट के अंदर अपने पांव डालने के लिए नीचे की तरफ झुकी तो उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर रोहन मदहोश होने लगा और ना चाहते हुए भी एक चपत जोर से बेला की मदमस्त गांड पर लगा दिया जिसके कारण वो एकदम से चौंक गई।

आहहहहहहहहह क्या कर रहे हैं रोहित बाबू अब तुम बहुत शरारती हो गए हो ऐसा भी कोई करता है क्या कितनी जोर से लगी दर्द करने लगा। ( बेला अपनी गांड सहलाते हुए बोली यह देख कर लो हम मंद मंद मुस्कुरा रहा था और अपनी पेंट पहनते हुए बोला।)

क्या करूं बेला तुम्हारी गांड इतनी बड़ी बड़ी है कि उनको देखते ही मुझे ना जाने क्या होने लगता है।

तो तुम्हारी मां की भी गांड देख लिया करो उनकी गांड भी तो मुझसे ज्यादा बड़ी बड़ी और गोल गोल है । (बेला पेटीकोट की डोरी बांधते हुए बोली रोहन कुछ बोला नहीं बस मुस्कुरा दिया क्योंकि वह भी जानता था कि उसकी मां की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी और गोल-गोल एकदम मक्खन जैसी गोरी है। दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर तैयार हो चुके थे रोहन बेला को समोसे और जलेबी के हथेली थमाते हुए बोला।)

एलो बेला अपने घर ले जाकर खा लेना और हां अपना वादा भूलना नहीं।

कौनसा वादा ? ( रोहन के हाथों से हथेली पकड़ते हुए बोली)

अरे इतनी जल्दी भूल गई तुम्हारी बुर में मेरा लंड डालने का वादा।

( रोहन के मुंह से गंदी बात सुनकर बेला प्रसन्न हो गई और मुस्तुरातो हुए बोली।)

मैं भूली नहीं हूं मुझे सब कुछ याद है समय आने पर मैं अपना वादा जरुर पूरा करूंगी ( इतना कहकर दोनों गांव की तरफ चल दिए)

 
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