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Incest बदलते रिश्ते

बेला धीरे धीरे अपनी मतवाली बड़ी बड़ी गांड मटकाते हुए झोपड़ी की तरफ जाने लगी .. पेटीकोट पानी से भीगी होने की वजह से वह बेला के भरावदार नितंबों से पूरी तरह से चिपकी हुई थी। जिससे उसके गोलाकार नितंब वस्त्र के अंदर होने के बावजूद भी साफ-साफ उसकी रचना नजर आ रही थी...

और तो और बेला की बड़ी बड़ी गांड की फाकौ के बीच उसका पेटीकोट घुशने की वजह से बेला का खूबसूरत बदन और भी ज्यादा मादक लग रहा था। चलते समय बेला की गांड दाएं दाएं हिल रही थी जिसे देख कर रोहन का लंड पजामे के अंदर ऊपर नीचे हो रहा था रोहन अंदर ही अंदर बेहद प्रसन्न और रोमांचित नजर आ रहा था बेला मस्ती भरी चाल चल रही थी मैं जान बुझकर अपनी बड़ी बड़ी गांड को कुछ ज्यादा ही मटका कर चल रही थी। बेला ₹500 का कर बहुत खुश नजर आ रही थी और वह मुस्कुराते हुए झोपड़ी की तरफ बढ़ते चली जा रही थी।

थोड़ी ही देर में बेला झोपड़ी के करीब पहुंच गई धूप एकदम चिल चिला रही थी। ऐसे में घर के बाहर निकलना बेहद कष्टदायक होता है और गांव के सभी लोग इस समय घर के अंदर रहकर आराम ही करते हैं और जो कुछ भी काम होता है शाम के वक्त ही करते हैं लेकिन बेला के मन में तो कुछ और चल रहा था और अपनी उसी मनसा को अंजाम देने के लिए वह खड़ी दुपहरी में कपड़े धोने का नाटक कर रही थी जिस नाटक को देख कर.. और ज्यादातर बेला के अधखुले अंगों को देख कर बेला की जवानी पर मोह गया था.... और बेला की जवानी की मोहिनी में फंसकर उसके पीछे पीछे लार टपका ते हुए झोपड़ी तक पहुंच गया था बेला अनुभवी और खेली खाई औरत थी वह मर्द को चित करने का हुनर अच्छी तरह से जानती थी और इस काम में काफी एहतियात भी बरतना जानती थी इसलिए वह झोपड़ी के अंदर जाने से पहले चारों तरफ अपनी नजरें दौड़ाकर इस बात की तसल्ली कर रही थी कि कहीं कोई उन्हें देख तो नहीं रहा है लेकिन इतनी तेज धूप में भला कौन वहां उन्हें देखने वाला था ।पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद वह झोपड़ी के अंदर प्रवेश की ओर रोहन को भी अंदर आने के लिए बोली, झोपड़ी के अंदर ईंधन के लिए सूखी लकड़ियां और गाय भैंसों के लिए सुखी घास रखी हुई थी यहां पर बेला के सिवा कोई और नहीं आता था इसलिए बेला को पूरी तरह से निश्चित ता का अनुभव हो रहा था...

दिला के कपड़े पानी में पूरी तरह से भीगे होने की वजह से उसके खूबसूरत बदन से चिपके हुए थे अभी भी उसके ब्लाउज के तीन बटन खुले थे जिसकी वजह से उसकी दोनों रसभरी नारंगीया अपनी निप्पल के साथ नजर आ रही थी। इस तरह एकांत में झौपड़ी के अंदर बेला को अर्धनग्न स्थिति में देख कर रोहन के अरमान मचलने लगे थे मन में तो आ रहा था कि

वह उसकी दोनों नारंगी लोग को अपने हाथ से पकड़ कर मसल दे लेकिन यह सिर्फ वह सोच सकता था हकीकत में करने की उसकी बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हो रही थी..

अरमान तो बेला के भी मचल रहे थे लेकिन अपनी उम्र का लिहाज और अपनी कुटिल षड्यंत्र के चलते अपने आप को रोके हुए थी वरना एक प्यासी औरत एक जवान मर्द को अपने इतने करीब देखकर और वह भी खास करके जब उसका हजार को ज्यादा ही दमदार हो तो भला कैसे अपने आप को रोक पाए लेकिन बेला की मजबूरी थी जो अपनी मनमानी करने के लिए अपने आप को रोक रही थी... वरना बेला की नजर जब भी रोहन की टांगों के बीच जा रही थी तो उसके मजबूत तंबू को देख कर उसके मुंह में पानी आ जा रहा था... इसलिए तो बेला अपने अरमानों पर मजबूरी का पानी डालकर शांति से रोहन के सामने खड़ी होकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी और रोहन दिला को इस तरह से मुस्कुराते देखा कर और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था....

रौहन अपने पेंट में बने तंबू को छुपाने की भरपूर कोशिश कर रहा था लेकिन ना जाने क्यों वह छुपा नहीं पा रहा था साफ तौर पर वह अब अपने पेंट में बने तंबू को छुपाना भी नहीं चाहता था क्योंकि वैसे भी बेला के पेंट में तंबू के बारे में अच्छी तरह से जानती थी।

दिखाओ....( ना चाहते हुए भी रोहन के मुंह से यह शब्द निकल गया.. रोहन अपनी ही कही बात से एकदम आश्चर्यचकित हो गया क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह शब्द उसने कहै हे। यह रोहन के मन मस्तिष्क में छाया बेला के मादक बदन का ही नशा था जो खुद-ब-खुद उसके मुंह से बेला को अपने अंक प्रदर्शित करने का आह्वान करने लगा.. . रोहन की जिज्ञासा उत्सुकता से बेला भी हैरान थी क्योंकि उसे इस बात पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ कि वह खुद उसे दिखाने के लिए बोल रहा है। बेला रोहन की अधीरता को देखकर मुस्कुरा दी। और मुस्कुराते हुए बोली...)

धीरज धरो रोहन बाबू यहां पर लाई हूं तो जरूर दिखाऊंगी आखिरकार तुमने मुझे ₹500 देकर मौके पर मेरी मदद कीए हौ। ( इतना कहकर बेला अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रख कर उगलियोंके सहारे धीरे-धीरे अपनी पेटीकोट को ऊपर की तरफ उठाने लगी, यह देखकर रोहन का दिल जोरो से धड़कने लगा धीरे-धीरे करके बेला अपने पेटिकोट को घुटनों तक लाई ही थी कि एकाएक अपना पेटीकोट घुटने तक लाकर रुक गई और रोहन से बोली)

देखो रोहन बाबू यह मेरी इज्जत का सवाल है यह बात किसी को कानों कान खबर नहीं करनी चाहिए कि इस झोपड़ी में मेरे और तुम्हारे बीच क्या हुआ और ना ही इस बात की खबर लगनी चाहिए कि तुमने मुझे ₹500 दिए हैं अगर तुम वादा करो तो मैं आगे बढ़ो वरना तुम अपने ₹500 ले सकते हो मैं नहीं चाहती थी बाद में तुम मुकर जाओ और मेरी इज्जत खराब हो गांव में मेरी बदनामी हो और मैं अपनी नौकरी से भी हाथ धो बैठु।

( बेला की यह बात सुनकर रोहन को गुस्सा आने लगा लेकिन गुस्सा इस बात पर नहीं आया कि वह क्या कह रही है बल्कि उसे इस बात पर गुस्सा आ रहा था कि वह इतना खूबसूरत नजारा दिखाते दिखाते रुक गई थी वह अंदर ही अंदर बेला की इस हरकत की वजह से घुटन सी महसूस करने लगा... बेला अभी भी अपनी पेटीकोट को घुटनों तक लाकर वैसे की वैसी ही स्थिति में खड़ी होकर रोहन की तरफ देख रही थी रोहन समझ गया कि यह इतनी जल्दी .. मानने वाली नहीं है इसलिए वह बोला)

तुम यह कैसी बातें कर रही हो यह बात अगर किसी को भी पता चलेगी तो मेरी भी तो बदनामी होगी क्योंकि तुम्हारे साथ मैं भी तो हूं यहां पर इसलिए इत्मीनान रखो यह बात मेरे और तुम्हारे बीच में रहेगी किसी को कानों कान तक खबर नहीं पड़ेगी....

( रोहन की बातें सुनकर बेला को इत्मीनान हो गया इसलिए वह अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए बोली...)

मुझे तुमसे यही उम्मीद थी रोहन बाबू (और इसके साथ ही वह अपने पेटिकोट को घुटनों के ऊपर की तरफ उठाने लगी.... एक बार फिर से झोपड़ी के अंदर का तापमान गर्म होने लगा बेला अत्यधिक कामुक हरकतें करके रोहन को पूरी तरह से अपने वश में कर ली थी.... धीरे धीरे करके बेला ने अपनी पेटीकोट को एकदम जागो तक चढ़ा दी, रोहन तो बेला की मोटी मोटी चिकनी जांगे देखकर.. मस्त होने लगा उसकी जी में आ रहा था कि उसकी जांघों से लिपट जाए क्योंकि एकदम नंगी जांघों को आज वह पहली बार देख रहा था... रोहन अपने काबू में बिल्कुल भी नहीं था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि जिस अंग को दिखाने की बेला बात कर रही थी उस अंग को अनावृत होने में कुछ पल की ही देरी थी...

आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी रोहन के मन में वासना भरी भावनाएं जोर मार रही थी क्योंकि आज पहली बार... वह औरत के बेशकीमती खजाने सामान उसकी बुर को इतनी नजदीक से देखने वाला था इसलिए उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और बेला की सासे गहरी चल रही थी। क्योंकि वह भी आज पहली बार किसी मर्द के सामने अपने खूबसूरत अंग को दिखाने जा रहे थे जिसके चलते उसके बदन में भी उत्सुकता और उन्माद का असर देखने को मिल रहा था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था और आधी खुली चूचियां खुले हुए ब्लाउज के अंदर कबूतर की तरह छटपटा रहे थे।

 
झोपड़ी के अंदर दोनों आने वाले समय कुछ बेहतरीन पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे जिसमें अब कुछ ही सेकंड की देरी रह गई थी बेला रोहन कि बेसब्री और इंतजार को खत्म करते हुए अपनी पेटीकोट को अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर ऊपर की तरफ उठाने लगी जैसे ही जांघौ के ऊपरी छोर तक पहुंची हुई पेटीकोट आधा अंगुल ऊपर हुई बेला की सबसे खूबसूरत अंग का वह हिस्सा फूली हुई गरम रोटी की तरह नजर आने लगी अभी तो मात्र रोहन को बेला की बुर का हल्का सा उपसा हुआ हिस्सा ही नजर आया था कि, रोहन की सांसो की गति तेज हो गई उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी। बेला रोहन के चेहरे की चमक देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी..... रोहन के चेहरे की चमक साफ बता रही थी कि बेला के प्रति पूरी तरह से आकर्षित हो चुका था रोहन की आंखें बेला की पेटीकौट के अंदर टिकी हुई थी।

बेला अपने आप पर और अपनी सांसो पर काबू करने में बिल्कुल असमर्थ साबित हो रही थी.. बेला रोहन को एकाएक अपनी बुर ना दिखाकर धीरे-धीरे उस पर से पर्दा हटाते हुए उसे और ज्यादा तड़पा रही थी..... रोहन पसीने से तरबतर हो चुका था उसके पेंट में बना तंबू किसी भाले की तरह नुकीला नजर आ रहा था और उसके नुकीले पन को देख कर बेला की रसीली बुर पानी टपका रही थी।...

बेला और रोहन की नजरें एक ही स्थान पर स्थिर जमी हुई थी तभी बेला की उंगलियों में हरकत हुई.. और बेला अपनी पेटीकोट को एक अंगूल और ऊपर की तरफ उठा दी....

बेला की पेटिकोट एक अंगूल और ऊपर उठते ही। बेला की रसीली बुर पूरी तरह से नंगी हो गई।

आहहहहहहहहह,,,,,,,, अपनी आंखों के सामने बेला की नंगी बुर देखती ही रोहन के मुंह से गर्म सिसकारी निकल गई......

उसकी आंखों की चमक बता रही थी कि उसने जीवन में किसी अद्भुत चीज को देख लिया था... यह हकीकत था कि रोहन जैसे नए-नए जवान हो रहे मर्द के लिए औरत के इस अंदरूनी बेहद खूबसूरत अंग को देखना किसी अद्भुत नजारे से कम नहीं होता.. बेला के खूबसूरत बुर की बनावट देखकर रोहन पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो गया था... उसे यकीन नहीं हो रहा था कि औरत की दूर की बनावट इतनी खूबसूरत होती है उत्तेजना के मारे बेला की बुर गरम रोटी की तरह फूल गई थी... जिसकी वजह से बेला की बुर की खूबसूरती में चार चांद लग

रहे थे....

रोहन आंखें फाड़े बेला की खूबसूरत बुर के रस को अपनी आंखों से पी रहा था.. . बेला कभी रोहन की तरफ तो कभी

अपनी बुर की तरफ देख ले रही थी.. अच्छी तरह से समझ गई थी कि रोहन उसकी बुर के प्रति पूरी तरह से आकर्षित हो चुका है तभी तो हल्के हल्के बालों से भरी हुई गुलाबी बुर को देख ...कर पागल हो जा रहा था....

कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे उत्तेजना का असर दोनों के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। तभी दोनों के बीच की खामोशी को तोड़ते हुए बेला बोली...

देख लिए ना रोहन बाबू....

रोहन कुछ बोल नहीं पाया... बस हां में सिर हिला दिया...

लेकिन बेला धीरे से अपनी पेटीकोट नीचे की तरफ छोड़ दी... और जैसे ही बेला में अपनी पेटीकोट नीचे छोड़ी वैसे ही रोहन बोला. .

अरे अरे अरे यह क्या कर रही हो.... मुझे नजर भर कर देख तो लेने दो..

( रोहन की बात सुनकर बेला मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली..)

बस रोहन बाबू आज के लिए इतना काफी है अब कभी मौका मिलेगा तो फिर से दिखा दूंगी और इतना कहकर झोपड़ी से बाहर निकल गई

बेला वहां से चली गई थी लेकिन रोहन के मन में अपने लिए बहुत कुछ छोड़ गई थी जोकि एक आकर्षण मे बंधा हुआ था..

बेला अपना काम कर चुकी थी उसने अपने ब्लाउज में रोहन के दिए हुए ₹500 रखकर झोपड़ी से बाहर निकल गई थी वह बहुत खुश नजर आ रही थी पहली बार वह अपने बदन की ताकत और गर्मी दिखाकर पैसे कमाए थे ....जिससे उसकी खुशी दुगनी हो चुकी थी.. लेकिन अपने इस हथकंडे अपनाने में वह खुद ही रोहन के प्रति आकर्षित होने लगी थी.... खास करके उसके पेंट में बने तंबू के प्रति खेली खाई बेला अच्छी तरह से जान गई थी कि रोहन का हथियार किसी भी औरत की बुर की नसें ढीली कर सकता है...

बेला को जाते हुए देख कर रोहन अपने मन में बेला को लेकर ढेर सारे सपने संजोने लगा था ...जाती हुई बेला के बड़े बड़े गोल नितंबों पर ही रोहन की नजरें टिकी हुई थी... वैसे भी औरतों के नितंब हमेशा से मर्दों के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बना होता है... रोहन के तन बदन में बेला के बदन की खुशबू उत्तेजना का संचार कर थी उत्तेजित अवस्था में रोहन के पेंट का तंबू और ज्यादा नुकीला बना हुआ था बेला की मटकती गांड लंड को फटने की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया था रोहन का हाथ खुद-ब-खुद पेंट के ऊपर इस अदा पर आ गया था और वह बेला को जाते हुए देख कर... पैंट के ऊपर ऊपर से ही अपने लंड को मसल रहा था...

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए बेला की बुर देखने का मौका रोहन को दोबारा नहीं मिल पा रहा था वह अंदर ही अंदर एक बार फिर से बेला की बुर और उसके नंगे बदन को देखने के लिए तड़प रहा था लेकिन ना तो उसे मौका ही मिल रहा था और ना ही बेला उसे मौका दे रही थी जो कि यह बेला जानबूझकर कर रही थी.... क्योंकि बेला का उद्देश्य रोहन की तरफ को और ज्यादा बढ़ाना था वह चाहती थी कि रोहन खुद उसे अपनी बुर दिखाने के लिए कहे ...ताकि वह फिर से उससे पैसे एेंठ सके.... क्योंकि इस बात को बेला अच्छी तरह से जानती थी कि रोज रोज अगर वह रोहन को अपनी बुर के दर्शन कराएगी तो... बार बार केवल उसके अंग के दर्शन करके रोहन ऊब जाएगा और वह उसे पैसे देना भी बंद कर देगा इसलिए वह रोहन को तड़पाना और उकसाना चाहती थी वैसे भी लंबे समय के अंतराल के बाद मर्दों की भूख कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है और वह लोग अपनी भूख मिटाने के लिए औरतों की हर बात मानने को तैयार हो जाते हैं ...यहां तक कि औरतें चाहे तो उनकी भूख का फायदा उठाकर उन्हें अपना गुलाम बना सकती हैं और यही बेला भी करना चाहती थी........

और इसी चाह में बेला लगी हुई थी... इसलिए जब भी वह रोहन को अपने करीब उपस्थित पाती थी तो जानबूझकर उसके सामने झुक कर काम करने लगती थी ताकि रोहन उसके नितंबों का घेराव बड़ी आसानी से देख सके और तो और उसकी चुचियों की बीच की गहरी लकीर के साथ साथ उसकी चुचियों की गोलाई और निप्पल तक नजर आए इसलिए वह जानबूझकर कोई देख ना पाए इस तरह से अपने ब्लाउज के ऊपरी दो बटन खोल कर रखती थी और इसी वजह से रोहन को आते जाते बेला के अंगो का दर्शन हो जाता था लेकिन इतने दर्शन मात्र से उसकी प्यास नहीं बुझती थी बल्कि और ज्यादा भड़क जाती थी और यही बेला चाहती थी इसी तरह से धीरे-धीरे करके वक्त गुजर रहा था....

 
इसी तरह से धीरे-धीरे करके वक्त गुजर रहा था....

लेकिन इन सब के चक्कर में रोहन एक अजीब से मनोस्थिति और कशमकश में पड़ा हुआ था क्योंकि जब भी वह अपने कमरे में बिस्तर पर लेटा रहता था तो बार बार उसके मन में उसकी मां का ही ख्याल आ रहा था लाख समझाने के बावजूद भी उसके मन से उसकी मां के प्रति बढ़ रहा आकर्षण कम नहीं हो पा रहा था बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी मां की गीली ब्रा और पेंटी नजर आने लगती थी जिसे वह अपने हाथों से रस्सी पर सूखने के लिए डाला था और अपनी उंगली से अपनी मां की पेंटी को सहलाया था....

रोहन के सोचने समझने की शक्ति उसकी मां के प्रति बढ़ रहे आकर्षण को लेकर क्षीण होती जा रही थी.... सुगंधा की ब्रा और चड्डी को लेकर रोहन दिन-ब-दिन अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था अपनी मां की चड्डी और ब्रा के बारे में सोचते ही उसके लंड का तनाव अत्यधिक बढ़ जा रहा था... बार-बार वह अपने मन को समझाने की कोशिश करता लेकिन बार-बार वह अपने मन को समझाने में विफल हो जा रहा था उसकी उम्र और बदन के प्रति बढ़ रही आकर्षण को देख कर उसका मन उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं था आंखों के सामने हमेशा उसकी मां का झुका हुआ बदन नजर आ रहा था जिसकी वजह से उसे उसके मां की गोल-गोल नग्न नितंबों के दर्शन करने को मिले थे......

वह अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर यही सोच रहा था कि जब बेला जोकि हल्के सांवले रंग की औरत थी ....उसकी बुर इतनी खूबसूरत है तो उसकी मां तो एकदम गोरी चिकनी दूध जैसी है उसकी बुर कैसी होगी यह ख्याल मन में आते ही उसके मन मस्तिष्क में वासना का विस्फोट होने लगा... उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया जैसे कि लोहे का रोड हो.... रोहन का हाथ खुद ब खुद उसके पजामे पर चला गया जहां पर विशाल अवस्था में तंबू बना हुआ था... उत्तेजना के मारे उसका चेहरा लाल हो चुका था... अपनी मन की भावनाओं पर बिल्कुल भी काबू ना कर सकने के कारण वह पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसल रहा था जिससे उसकी वासना और ज्यादा भड़क रही थी बार बार उसकी आंखों के सामने कभी बेला तो कभी उसकी मां नजर आ रही थी और वैसे भी उसकी आंखों के सामने बेहद काम उत्तेजना से भरपूर नजारा बेला ने पेश किया था जिसकी वजह से उसकी रातों की नींद हराम हो चुकी थी और वैसे भी किसी मर्द के लिए वह नजारा बेहद खास और उत्तेजना से भरा होता है जब कोई औरत खुद ही अपने वस्त्र हटाकर अपने कोमल और गुप्त अंगो के दर्शन कराए और ऐसे ही मनमोहक अवसर से गुजरने के बाद रोहन की हालत खराब होने लगी थी दिन रात उसके दिमाग में अब औरतों के नग्न बदन ही दिखाई देता था.....

_ अब रोहन का यह रोज का क्रम हो गया था वह हमेशा बिस्तर पर लेट कर कभी अपनी मां के बारे में तो कभी बेला के बारे में सोचता रहता था..... और साथ ही पजामे के ऊपर से अपने लंड को मसलता रहता था..... हालांकि इतनी अत्यधिक उत्तेजना और वासना सर पर सवार होने के बावजूद भी अभी तक उसने हस्तमैथुन नहीं किया था यह बात अलग थी कि रात को नींद में सपनों की दुनिया में खो कर अपने आप उसका पानी निकल जाता था.....

अब रोहन किसी ना किसी बहाने अपनी मां के कमरे के चक्कर काटा करता था... लेकिन उसकी किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी कि दोबारा उसे वही दृश्य देखने का मौका मिल जाए वैसे भी सुगंधा खुद भी इस बात का ख्याल रखती थी कि उसके बेटे की उपस्थिति में कहीं उसे कपड़े बदलने ना पड़े....

ऐसे ही 1 दिन गर्मी का मौसम था दोपहर के समय वह अपनी मां के कमरे की तरफ गया अपनी मां के कमरे की सामने पहुंचकर वह इधर-उधर नजर दौड़ाने लगा... दरवाजा और खिड़की दोनों हल्की खुली हुई थी रोहन खिड़की के पास खड़ा हो गया और अंदर की तरफ नजर दौड़ाने लगा थोड़े से ही प्रयास में खिड़की के अंदर का दृश्य उसे नजर आने लगा उसे साफ-साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां बिस्तर पर लेटी हुई थी और कमरे में बेला भी थी जो कि गंदे कपड़ों को इकट्ठा कर रही थी अपने मन की और अपनी कल्पनाओं की दुनिया की दोनों हुस्न की मल्लिका ओं को देख कर रोहन प्रसन्नता के साथ-साथ उत्तेजना का भी अनुभव करने लगा अपने कान को चौकन्ना करने के साथ ही उसे अंदर की चल रही वार्तालाप भी साफ-साफ सुनाई देने लगी

उसे साफ सुनाई दे रहा था कि उसकी मां बेला से बोली...

बेला इन कपड़ों के साथ साथ कुछ पर्दे भी हैं उन्हें भी साफ कर देना ऐसे तो मैं तुम्हें अपने हाथ से ही सारे पर्दे निकाल कर देने वाली थी लेकिन अभी काम की थकान की वजह से मेरे बदन में दर्द हो रहा है इसलिए तुम खुद ही सारे पर्दे निकाल कर उसकी सफाई कर देना....

जी मालकिन आप बिल्कुल भी चिंता ना करें मैं ठीक से सफाई कर दूंगी ....( गंदे कपड़ों को इकट्ठा करते हुए बोली)

आहहहहहहह... ..( सुगंधा उठने की कोशिश करने में दर्द से कराह ने लगी...सुगंधा के कराहने की आवाज सुनकर बेला तुरंत उसके करीब आई और बोली...)

क्या हुआ मालकिन......

अरे तुझे बताई तो कुछ दिनों से बदन में बहुत दर्द हो रहा है खास करके मेरी कमर.....( धीरे से उठते हुए)

मैं तो पहले से ही कहती हूं माल की कितना दौड़ धूप मत किया करिए उसने सारे नौकर चाकर है किसलिए....( बेला वापस गंदे कपड़े समेट ते हुए बोली और खिड़की पर खड़ा रोहन कमरे के अंदर का यह सब नजारा देख रहा था औरतों के प्रति उसका आकर्षण इतने ज्यादा बढ़ गया था कि सामान्य तौर पर होने के बावजूद भी रोहन बेला और अपनी मां को देखकर बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था खास करके बिस्तर पर लेटी हुई अपनी मां को देखकर उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी क्योंकि इस समय उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे और उसकी साड़ी का आंचल नीचे ढल चुका था जिसकी वजह से उसकी ब्लाउज में कैद विशाल छातिया और चुचियों के बीच की गहरी लकीर साफ तौर पर नजर आ रहे थे जिसे देखकर रोहन अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रहा था... बेला की बात सुनकर सुगंधा बोली...)

क्या करूं बेला खाली बैठे बैठे सामने भी व्यतीत नहीं होता और वैसे भी गेहूं की कटाई के बाद उसे समय पर बाजार में भी तो ले जाना था जिससे मेरा वहां होना बहुत जरूरी था वरना पिछले साल की गेहूं की हालत तो तू जानती ही है......

( सुगंधा अपनी बात पूरी कर पाती इससे पहले ही बेला गंदे कपड़ों की गट्ठर बनाकर उसे उठा लिया और दरवाजे की तरफ जाने लगी लेकिन तभी उसे बीच में रोकते हुए सुगंधा बोली..)

बेला तू ऐसा कर की कपड़ों की धुलाई बाद में कर लेना पहले तू मेरी मालिश कर दे वरना यह दर्द मुझे चैन से उठने बैठने भी नहीं देगा....

_ मालकिन (बेला कपड़ों के गट्ठर को नीचे रखते हुए)... मैं आप की मालिश कर दो दो लेकिन यह बात तुम भी जानती हो कि बिना सारे कपड़े उतारे मालिश ना तो करने में मजा आता है ना तो मालिश करवाने में और इसीलिए आपको आराम भी नहीं मिल पाता....

तो क्या मैं अब तेरे सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाऊं...( सुगंधा बेला को तीखी नजरों से देखते हुए बोली... और अपनी मां के मुंह से यह बात सुनते ही रोहन का दिल जोरो से धड़कने लगा उसका लंड तुरंत टाइट होकर एकदम खड़ा हो गया... क्योंकि आज पहली बार उसने अपनी मां के मुंह से इस तरह के शब्द सुने थे और इन शब्दों को सुनकर उस की लालसा और ज्यादा बढ़ने लगी दूसरी तरफ सुगंधा की बात सुनकर बेला बोली)

तो क्या हुआ मालकिन कहां मर्दों के सामने कपड़े उतारना है मेरे सामने ही तो कपड़े उतार कर तुम्हें नंगी होना है और वैसे भी वेद और हकीम से कुछ भी नहीं छुपाया करते...

अच्छा तो तुम अब डॉक्टर हो गई हो...

मालकिन अभी तो आप मुझे डॉक्टर ही समझिए (इतना कहकर ओ मुस्कुराने लगी सुगंधा भी .यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि बिना कपड़े उतारे मालिश करवाने में मजा नहीं आता और आराम भी नहीं मिलता पहले भी वह बेला से मालिश करवा चुकी थी लेकिन कभी भी कपड़े नहीं उतारी थी केवल साड़ी को ऊपर तक चढ़ा देते हैं लेकिन आज उसके बदन में कुछ ज्यादा ही तकलीफ थी इसलिए आज बेला की बात मानने के लिए तैयार हो गई थी इसलिए वह बोली..)

चल आज मैं तेरी बात मानने को तैयार हूं लेकिन मुझे पूरा आराम मिलना चाहिए...

आप बिल्कुल भी चिंता मत करिए मालकिन मेरा हाथ लगते ही आपके बदन से दर्द गायब हो जाएगा....

तू जाकर पहले दरवाजा तो बंद कर दे...( इतना कहकर सुगंधा धीरे से बिस्तर से उठ कर बैठ गई और बेला तुरंत आगे बढ़ कर दरवाजा बंद करके सीटकनी लगा दी...._ लेकिन खिड़की बंद करना भूल गई जोकि रोहन के लिए यह एक वरदान सा लग रहा था रोहन को तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल रही थी जो वह कल्पना में सोच रहा था आज उसकी आंखों के सामने वास्तविकता में होने जा रहा था आज वह पहली बार अपनी मां को संपूर्ण रूप से नंगी देखने जा रहा था उसे बेहद बेसब्री से उस पल का इंतजार होने लगा जब उसकी मां अपने हाथों से अपने पूरे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होने वाली थी इसी आस में व धड़कते दिल के साथ खिड़की की ओट से कमरे के अंदर का नजारा देखने लगा.... देखते ही देखते बेला एक नरम चटाई कमरे के बीचो-बीच नीचे बिछा दी थी...

 
कमरे के बाहर खिड़की पर खड़ा रोहन धड़कते दिल के साथ खिड़की के अंदर का नजारा देख रहा था एक तो पहले से ही अपने सपनों कि दोनों रानियों को एक साथ देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी ...जिसकी वजह से उसके पेंट में तंबू सा बन गया था.. और जब उसने यह बात सोने की उसकी मां मालिश कराने के लिए अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होने वाली है तो इस बात से तो उसकी उत्तेजना का पारा एकदम से चढ़ गया वह बेसब्री और आतुरता के साथ खिड़की से अपनी नजरें टिकाए कमरे के अंदर के एक-एक पलके गुजरते दृश्य को अपने जेहन में कैद करने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि आज उसकी आंखों के सामने उसकी मां अपने कपड़े उतार कर नंगी होने वाली है हालांकि उसकी मां यह नहीं जानती थी कि कमरे के बाहर से भी दो आंखें उसे ही देख रही है इस बात से अंजान बेला की बात मानकर सुगंधा अपने कपड़े उतारने के लिए तैयार हो गई थी....

रोहन का लंड इस बात से और ज्यादा कड़क हो चुका था की बेला जैसी औरत की खूबसूरत बुर देखकर उसका जो बुरा हाल हुआ था तो अपनी मां जो कि बेहद खूबसूरत और एकदम गोरी औरत की रसीली बुर देख कर उसका क्या हाल होने वाला है इस बात की वह पहले से कल्पना भी करता आ रहा था और आज जैसे उसकी भगवान ने बात सुन ली थी उसकी मंशा पूरी होने वाली थी जिस औरत के वस्त्रों को वहां कल्पना करके बदन से दूर करता था आज हकीकत में उसकी आंखों के सामने वही औरत अपने कपड़े उतार कर नंगी होने जा रही थी इस बात से रोहन की उत्तेजना अत्यधिक बढ़ती जा रही थी रोहन की मनोदशा एकदम खराब हो चुकी थी क्योंकि अपनी मां के बारे में गंदी बातें सोचने पर... उसका दिल इस बात के लिए गवाही नहीं देता था कि वह अपनी मां के बारे में इस तरह की गंदी बातें सोचे क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानता था कि अपनी मां के बारे में गंदी बातें सोचना गलत है लेकिन लाख समझाने के बावजूद भी उसका मन नहीं मानता था और उसका ध्यान उसकी मां के प्रति बढ़ रहे आकर्षण को लेकर उसके बारे में गंदी बातें सोचने पर मजबूर हो जाता था और ऐसा करने में उसे बेहद आनंद की अनुभूति भी होती थी जो कि दूसरों के बारे में गंदी बातें सोचकर उस तरह का अनुभव नहीं होता था...

वैसे भी जब मर्द की आंखों पर वासना का पर्दा छोड़ जाता है तो हर रिश्ते के पहले उसमें उसे औरत ही नजर आती है और उसके बाद वह सब कुछ भूल जाता है और यही रोहन के साथ भी हो रहा था क्योंकि ऐसे में उसे चाहिए था कि वह वहां से हट जाए और अपनी मां के बारे में गंदी बातें ना सोचे लेकिन उसकी आंखों पर पर भी औरतों की आकर्षण और वासना का पर्दा चढ़ चुका था जिसकी वजह से वहां आज खिड़की पर खड़ा कमरे के अंदर अपनी मां को कपड़े उतारते हुए देखने जा रहा था उसके नंगे बदन को देख कर मस्ती के सागर में गोते लगाने जा रहा था और दूसरी औरतों के अंग की अपेक्षा उसकी खूबसूरत मां के अंग कितने ज्यादा खूबसूरत है इसकी भी तुलना करने जा रहा था....

कमरे के बीचो-बीच बेला ने नरम चटाई बिछा दी थी सुगंधा बेड पर से उठ कर दीवार की तरफ मुंह करके अपनी साड़ी उतार रही थी... धीरे-धीरे करके गुजरता हुआ यह पल रोहन के लिए बहुत खास हो रहा था क्योंकि आज उसकी आंखों के सामने उसकी मां अपनी साड़ी और कपड़े उतार कर एकदम नंगी होने वाली थी एक औरत की खूबसूरती कपड़ों से कहीं ज्यादा उसकी नग्नता में होती है वह भी खास करके जब औरत के अंग उपांग सही संरचना में उभार लिए और कटावदार हो तब.... और जैसा एक खूबसूरत स्त्री के रूप और अंग होने चाहिए वह सब कुछ सुगंधा में था सुगंधा धीरे-धीरे अपने साड़ी अपने बदन पर से हटा रही थी और ऐसा करते हुए सुगंधा की खूबसूरती में चार चांद लग रहे थे क्योंकि सुगंधा बेहद नजाकत और शर्मो हया के साथ अपने बदन पर से अपने वस्त्र हटा रही थी....

धीरे धीरे करके सुगंधा अपने बदन पर से अपने साड़ी उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दी अब उसके बदन पर मात्र उसका ब्लाउज और पेटीकोट ही रह गया था.... दूसरी तरफ बेला अलमारी में से सरसों के तेल की शीशी निकाल रही थी और सीसी निकाल कर अलमारी बंद कर दी तो देखी थी अभी भी सुगंधा साड़ी उतारने के बाद वैसे ही स्थिति में खड़ी थी उसकी कसी हुई पेटीकोट में उसके नितंबों का घेराव और आकार साफ साफ नजर आ रहा था अगर अनुभवी मर्द इस समय सुगंधाको इस स्थिति में देख ले तो वस्त्र के ऊपर से ही उसके बदन के नाप को जान जाए क्योंकि सुगंधा ब्लाउज और पेटीकोट में होने के बावजूद भी उसके बदन का आकार खासकर के नितंबों का पूरी तरह से साफ साफ झलक रहा था और तो और सुगंधा की पेटीकोट इतनी ज्यादा चुस्त थी कि पेटिकोट के अंदर पहनी हुई उसकी चड्डी की किनारी भी पेटीकोट के ऊपर झलक रही थी अगर यह नजारा कोई भी देख ले तो बिना कहे उसका पानी निकल जाए जोकि ना जाने कैसे रोहन अभी तक पैंट के ऊपर से ही अपने लैंड को मसल मसल कर अपना पानी रोके हुए था बेहद कामुक नजारा कमरे के अंदर बना हुआ था एक तरफ शर्मो हया की मूरत सुगंधा एक औरत के सामने भी अपने कपड़े उतारने में शर्म का अनुभव कर रही थी और उसी कमरे में उपस्थित बेला जो कि बार-बार सुगंधा को कपड़े उतार कर नंगी हो जाने के लिए उत्साहित कर रहे थे और कमरे से बाहर खड़ा उसका बेटा जो अपनी ही मां को कपड़े उतार कर एकदम नंगी होने का इंतजार कर रहा था....

बेला सरसों के तेल की शीशी जमीन पर रखते हुए सुगंधा की तरफ देख कर सारा माजरा समझ गई और आराम से चटाई पर बैठते हुए बोली....

क्या मालकिन अभी तक आप अपने कपड़े नहीं उतार पाई अगर ऐसे ही शर्म आती रहोगी तो मैं मालिश कैसे करूंगी और अगर मालिश नहीं कर पाऊंगी तो तुम्हारे बदन का दर्द कैसे दूर होगा......

बेला क्या करूं मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा है मुझे कपड़े उतारने में शर्म आ रही है .....(सुगंधा उसी तरह से अपने पेटिकोट की डोरी पर अपनी हथेली रखते हुए बोली)

क्या मालकिन आप कितनी शर्माती हो मुझसे कैसी शर्म मैं भी तो तुम्हारी तरह एक औरत हूं और मेरे सामने इस तरह से मत शरमाओ हां वह कुछ और बात थी अगर मेरी जगह कोई मर्द होता तो शायद मैं समझ सकती थी कि तुम्हें शर्म का अनुभव हो रहा है लेकिन मेरे सामने .........नहीं नहीं मालकिन ऐसा मत करो तुम तो अच्छी तरह से जानती हो कि वेद और हकीम से कुछ भी नहीं छुपाया जाता.....

अच्छा तो तुम अब डॉक्टर बन गई हो..( सुगंधा व्यंगात्मक स्वर में बोली..... .)

इस समय तो आपकुछ ऐसा ही समझिएे मालकिन....

चल चल अब ज्यादा बात बनाने को रहने दे दर्द से परेशान हूं वरना मैं कभी इस तरह से कपड़े नहीं उतारती (ऐसा कहते हुए सुगंधा अपने कपड़े उतारने के लिए तैयार हो गई अभी भी वह दीवार की तरह मुंह करके खड़ी थी.... बेला घुटने मोड़कर चटाई पर बैठी हुई थी और रोहन खिड़की पर खड़ा होकर यह दृश्य का आनंद लूट रहा था हालांकि अभी भी उसकी मां सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में ही सही लेकिन रोहन के लिए इतना भी बहुत था क्योंकि यहां से... भी जिस रुप वेश स्थिति में सुगंधा खड़ी थी यह नजारा भी रोहन के लिए मादकता से भरा हुआ था क्योंकि रोहन के उम्र के लड़के औरतों की बड़ी-बड़ी तरबूज की जैसी गोल गांड देख कर कामोत्तेजीत होकर_ अपना लंड हिला कर पानी निकाल देते हैं लेकिन अभी तक रोहन उन लड़कों में अपवाद था क्योंकि अभी तक उसने अपने लंड पर अपनी हस्तकला का प्रयोग नहीं किया था जो कि उसे आता भी नहीं था....

 
दुनिया के हर मर्द के लिए वह नजारा बेहद काम उत्तेजना से भरा हुआ होता है जब उसकी आंखों के सामने कोई खूबसूरत औरत धीरे-धीरे अपने वस्त्र उतार कर एकदम नंगी हो जाती है वह नजारा उस समय और भी ज्यादा कामोत्तेजना और मादकता से भर जाता है जब इस बात से औरत अंजान रहती है कि कोई उसे कपड़े उतारते हुए देख रहा है और इस समय यही रोहन के साथ भी हो रहा था इस बात से बिल्कुल भी अनजान होकर सुगंधा अपने ही बेटे की आंखों के सामने अपने वस्त्र उतारने जा रही थी और रोहन कुछ पल के लिए बेसब्री से इंतजार करते हुए खिड़की की ओट से अपनी दोनों आंखों को कमरे के अंदर स्थिर किए हुए था.....

शर्म का अनुभव करते हुए सुगंधा अपनी नाजुक नाजुक ऊंगलियों से अपनी पेटीकोट की डोरी पकड़ ली... रोहन के साथ साथ बेला की भी नजरें सुगंधा पर टिकी हुई थी एक औरत होने के बावजूद भी बेला के मन में भी सुगंधा की खूबसूरती को लेकर आकर्षण बंधा हुआ था... इसलिए वह भी बड़ी आतुरता से सुगंधा के गोरे गोरे खूबसूरत नंगे बदन को देखने के लिए तड़प रही थी....

और सुगंधा रोहन और बेला दोनों की आतुरता को दूर करते हुए अपने पेटिकोट की डोरी को अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर खोलने लगी... बेला और रोहन दोनों की दिल की धड़कन तेज होने लगी क्योंकि कुछ ही पल में सुगंधा के नितंब ऊपर से उसका पेटीकोट हटने वाला था और बेहद खूबसूरत कुदरती नजारा उन दोनों की आंखों के सामने प्रस्तुत होने वाला था ..... और अगले ही पल सुगंधा ने अपने पेटिकोट की डोरी खोल दी नितंबों पे कसी हुई पेटीकोट एकदम से ढीली हो गई..... लेकिन सुगंधा की ढीली हुई पेटीकोट को देख कर रोहन का लंड टाइट होने लगा......

और देखते ही देखते सुगंधा अपनी पेटीकोट नीचे की तरफ सरकाने लगी... और अगले ही पल रोहन और बेला की आंखों के सामने बेहद मनमोहक नजारा प्रदर्शित हो रहा था सुगंधा अपने पेटिकोट उतार चुकी थी अंतिम समय में वह अपने चिकने पैरो का सहारा लेकर अपनी पेटीकोट को निकाल कर एक तरफ कर दी जो कि शर्म के मारे अभी भी सुगंधा अपना मुंह दीवार की तरफ करके खड़ी थी और बेला और रोहन की नजरें सुगंधा के भराव दार तरबूज जैसे गोल गोल नितंबों पर टिकी हुई थी....

जोकि लाल रंग की पेंटी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी रोहन तो अपनी मां को इस अवस्था में देखकर काम उत्तेजना से भर गया अपनी मां की लाल रंग की पैंटी को देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह वही पेंटी है जिसे वह उस दिन बेला के हाथों से लेकर रस्सी पर सूखने के लिए डाल रहा था और जिसे वह अपनी उंगलियों से सहेला भी रहा था.....

उस पल के बारे में सोच कर और अपनी आंखों के सामने अपनी मां को ब्लाउज और पेंटी में खड़ी हुई देख कर रोहन की उत्तेजना का कोई ठिकाना ना था तेजा पजामें में उसका लंड गदर मचा रहा था..... बेला भी पहली बार इतनी खूबसूरत औरत को नंगी होते हुए देख रही थी..._ सुगंधा के गोरेपन से उसके दूधियां बदन को देख कर बेला अंदर ही अंदर जलन से व्याकुल होने लगी लेकिन अगले ही पल वह अपने आप को संभाल भी ली.... मालकिन और नौकरानी के फर्क को वह जल्दी समझ गई

सुगंधा उसी स्थिति में खड़ी होकर अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ लाकर अपने ब्लाउज की डोरी खोलने लगी.....

बेला के सामने शर्म महसूस करते हुए सुगंधा अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ लाकर अपने ब्लाउज की डोरी खोलने लगे और साथ ही पीछे की तरफ नजरें घुमा कर बेला को देखते हुए बोली...

बेला क्या कपड़े उतारे बिना मालिश नहीं हो सकती.....

मालिश तो हो सकती है मालकिन लेकिन जो मजा कपड़े उतार कर मालिश करवाने में है वह कपड़े पहन कर करवाने में बिल्कुल भी नहीं है और आराम का तो नाम भी मत लेना आप बदन का दर्द दूर नहीं होगा...

क्या बोला तू तू भी एकदम बच्चों की तरह जिद कर रही हो

( इतना कहते हुए सुगंधा अपने ब्लाउज की डोरी की एक छोर को पकड़ कर खींच दी जिससे ब्लाउज भी पीछे से ढीला पड़ गया...)

मालकिन में जिद नहीं कर रही हूं बल्कि आपकी भलाई के लिए कह रही हूं और वैसे भी आप कितना शर्माती है मालकिन. ........मैं जिंदगी में पहली बार किसी औरत को देख रही हूं जो औरत के सामने इतनी शर्मा रही है....

अच्छा तो औरत के सामने कहीं भी अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ यही सही है .... ( सुगंधा बेला की तरफ आंख तेरा्ते हुए बोली... जवाब में बेला मुस्कुरा भर दी....._ तब तक सुगंधा अपनी गुदाज बाहों में से ब्लाउज निकालने लगी... और देखते ही देखते सुगंधा ने अपना ब्लाउज भी निकाल कर नीचे जमीन पर फेंक दी इस समय वह केवल ब्रा और पेंटी में ही खड़ी थी जो कि शर्म के मारे वह अपने बदन को शंकुचा रही थी... लाल रंग की ब्रा पेंटी गोरे बदन पर बहुत ही खूबसूरत लग रही था... सुगंधा का खूबसूरत गोरा बदन ऐसा एहसास दिला रहा था कि जैसे रेगिस्तान की पीली रेत में मीठे पानी का तालाब फूट पड़ा हो अभी भी सुगंधा दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी थी और अपनी शर्म को दबाने के उद्देश्य से हल्के हल्के अपने बदन को दाएं बाएं कर रही थी जो कि अनजाने में ही उसकी यह हरकत बेहद ही मादक और कामुक लग रही थी क्योंकि उसके इस तरह से करने पर उसकी बड़ी बड़ी खरबूजे जैसी गांड दाय-बाय हिल रही थी जिसे देखकर रोहन तो बदहवास हो ही रहा था बेला की भी हालत पतली हुए जा रही थी क्योंकि बेला के खुद का बदन का रंग हल्का दबा हुआ था.... और अपनी आंखों के सामने एक औरत के दूधिया गोरे बदन को देख कर ..उसके भी मन में यह अभिलाषा हो रही थी कि काश उसका भी बदन सुगंधा मालकिन की तरह होता.....

मालकिन एक बात कहूं .....

कहो क्या बात है...( सुगंधा बेला की तरफ देखे बिना बोली..)

आप नाराज मत होना आपकी यह कच्छी मुझे बहुत अच्छी लगती है मेरे भी मन में बरसों से यह तमन्ना थी कि मैं भी आपकी तरह ब्रा और कच्छी पहनु... लेकिन मेरी ऐसी किस्मत कहां कि इस तरह के कपड़े पहने ने को मिले.....( सुगंधा बेला की बात को बड़े ध्यान से सुन रही थी और उसकी भोली बातें सुनकर मन ही मन मुस्कुरा रही थी बेला जो कि यह बात कहते हुए थोड़ा घबरा रही थी इसलिए वह अपनी बात के रुख को मोड़ते हुए बोली.......) मालकिन आप अपनी ब्रा और कच्छीे तो उतार दीजिए.... तभी ना मैं आपकी अच्छे से मालिश कर पाऊंगी.....

( बेला की बात सुनकर रोहन की आंखों के सामने वह नजारा घूमने लगा जब झोपड़ी के अंदर बेला अपनी पेटीकोट उठाकर अपनी बुर दिखा रही थी उस समय वाकई में वह पेंटी नहीं पहनी हुई थी इसलिए रोहन को भी उसकी बात से यह अंदाजा हो गया कि उसकी भी लालसा पेंटी पहनने को मचल रही है लेकिन उसकी यह बात और उसकी मां का अंदाज दोनों रोहन के बदन में कामोत्तेजना की चिंगारियां भड़का रहे थे दूसरी तरफ बेला की बात सुनकर सुगंधा बोली.....)

कोई बात नहीं बेला मेरे पास अलमारियों में बहुत से कच्छी और ब्रा पड़े हैं उनमें से मैं तुम्हें 2 जोड़ी दे दूंगी.....

सच मालकिन (सुगंधा की बात सुनते ही बेला चहकते हुए बोली)

 
हां बेला में सच कह रही हूं.......

मलकिन आप बहुत अच्छी हो (बेला खुश होते हुए बोली)...

मालकिन अब आप अपने बचे हुए भी कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो जाए ताकि मैं आपकी अच्छे से मालिश कर सकूं....

_ उतारती हूं तू तो एकदम से पीछे ही पड़ गई है इतना कहते हुए सुगंधा एक बार फिर से अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी पुरा के हुक को एक झटके से खोल दी लेकिन इस बार वह ब्रा को उतारने से पहले ही बेला की तरफ घूम गई जो कि इसी पल का इंतजार रोहण कर रहा था और देखते ही देखते रोहन की आंखों के सामने उसकी मां अपनी ब्रा को भी उतार फेंकी रोहन के लिए यह नजारा किसी मन्नत पूरा होने से कम नहीं था .. क्योंकि उसके मन में एक दबी हुई आकांक्षा थी कि वह अपनी मां को संपूर्ण रूप से नंगी देखें और उसकी यह आकांक्षा पूरी होते नजर आ रही थी.... क्योंकि इस समय उसकी मां जिस अवस्था में खड़ी थी उसके बदन पर केवल एक छोटी सी पेंटी ही रह गई थी..... बेहद मादकता से भरपूर नजारा था... जो कि ऐसा नजारा हर किसी की किस्मत में देखने के लिए नहीं होता और रोहन की किस्मत बहुत जोरों पर थी रोहन की प्यासी नजरो उसकी मां की वक्षस्थल पर टिकी हुई थी... जोकि एकदम गोल और खरबूजे की तरह नजर आ रही थी लेकिन इस उम्र में भी सुगंधा की चुचियों का कसाव बरकरार था... चूचियां युद्ध के किसी योद्धा के समान एकदम तनी हुई थी मानो की किसी को युद्ध के लिए ललकार रही हो ऊपर से चुचियों की चॉकलेटी रंग की निप्पल किसी जानलेवा बंदूक की गोली की तरह नजर आ रही थी गोरे बदन कर दूधिया चुचियों के बीच चॉकलेटी रंग की निप्पल हर मर्द की कामना की पूर्ति के लिए बेहतरीन शक्ल में सुगंधा की चूड़ियों की खूबसूरती को बढ़ा रही थी बेला तो देखती ही रह गई क्योंकि बेला की चुचियों का आकार सुगंधा की चूचियों के आकार से कम था और कसाव के मामले में भी बेला छीण ही नजर आ रही थी...... बेला चटाई पर बैठी हुई थी और सुगंधा उसके करीबी खड़ी थी जोकि ब्रा उतारने के बाद शर्म के मारे पानी पानी हुई जा रही थी और बेला से ठीक से नजरें भी नहीं मिला पा रही थी...........

रोहन से अपनी जवानी की गर्मी संभाले नहीं संभल रही थी उसका हाथ खुद ब खुद उसके पजामे पर आ गया था और वह हल्के हल्के से पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसल रहा था जिससे उसे काफी मस्ती चढ रही थी.....

वाकई में सुगंधा की चूचियां जबरदस्त लग रही थी खास करके उस की गो लाइयां ऐसा लग रहा था कि मानो दो बड़े बड़े एकदम स्वादिष्ट खरबूजे हो आकार को देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जैसे सुगंधा की चूचियां इस उम्र में भी कच्चे नींबू की तरह ही थी....बस उनका आकार बढ़ गया था .... रोहन मंत्रमुग्ध सा अपनी मां की खरबूजा नुमा चुचियों को देखता ही रह गया उसके पजामे मैं तो गदर मचा हुआ था..... और यही हाल बेला की पेटीकोट मैं भी हो रहा था.... एक खूबसूरत औरत के नंगे बदन को देखकर बेला भी अपने आप पर काबू नहीं रख पा रही थी और उत्तेजना बस उसकी भी बुर गीली हो रही थी....

सुगंधा मारे शर्म के अपने दोनों कबूतरों को हाथ से ढकने की कोशिश करने लगी और सुगंधा की हालत देखते हुए पहला समझ गई कि मालकिन को शर्म महसूस हो रही है इसलिए वह सुगंधा के शर्म को दूर करते हुए बोली......

क्या हुआ मालकिन अब इसे (उंगली से पेंटी की तरफ इशारा करते हुए) क्यों पहन रखी हो इसे भी उतार दो....

नहीं बेला तू ऐसे ही मालिश कर दे (अभी भी अपने दोनों हाथों से अपने दोनों चूचियों को ढंकते हुए बोली....)

मालकिन अब थोड़े के लिए क्यों अपना दर्द बढ़ाना चाहती हो... इसे भी उतार दो ...

बेला ने यह बात रोहन के मन की कही थी क्योंकि रोहन भी कब से यही चाह रहा था कि उसकी मां झट से अपनी पैंटी उतार कर नंगी हो जाए.... रोहन की लालसा अपनी ही मां को नंगी देखने के लिए बढ़ती जा रही थीा बेला की बात सुनकर कुछ देर तक सुगंधा उसी अवस्था में बेला की तरफ देखती हुई खड़ी रही वह भी जानती थी कि मालिश कराते समय नग्न अवस्था में रहना ही उचित रहता है इसलिए वह बेमन से अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ लाई और दोनों हाथों से अपने पेंटी की छोर पकड़ ली.... अपनी मां की ये हरकत देखते ही रोहन के तन बदन में वासना की चिंगारियां फुटने लगी.... रोहन का दिल और जोरो से धड़कने लगा जब उसकी मां अपनी नाजुक नाजुक उंगलियों से अपनी पेंटी पकड़कर हल्के से नीचे की तरफ सरकाई लेकिन ऐसा करते समय शर्म की वजह से सुगंधा फिर से दीवार की तरफ मुंह कर ली तब तक सुगंधा ने अपने हाथों से अपनी पेंटी को अपने नितंबों के नीचे सर का चुकी थी और कुछ देर तक वैसे ही रुकी रह गई..... शर्म के मारे सुगंधा समझ नहीं पा रही थी कि वह अपना कौन सा अंग छुपाए और कौन सा दिखाएं लेकिन सच पूछो तो वह अपना कोई भी अंग दिखाना नहीं चाहती थी लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसमें उसका बस बिल्कुल भी नहीं चल रहा था बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ कमरे का नजारा बनता जा रहा था जिस स्थिति में सुगंधा अपने हाथ रोके हुए थी तब तक सुगंधा के उन्नत उभार लिए हुए उसके नितंबों का आधा भाग दिख रहा था .... साथ ही उसके नितंबों के भागों के बीच की पतली और गहरी दरार साफ नजर आ रही थी जिसे देखते ही अपनी मां की मचलती हुई जवानी को सलाम भरते हुए रोहन का लंड अंगडाई लेते हुए पानी की दो बूंद टपका दिया.....

_ रोहन की सांसो की गति तेज हुए जा रही थी वह अपलक अपनी मां की खूबसूरती और उसके खूबसूरत बदन को देखता जा रहा था.... बेला भी आंखें फाड़े सुगंधा के खूबसूरत जिस्म का दीदार कर रही थी ... उसकी नजरें भी खास करके सुगंधा के उन्नत उभार लिए हुए गोल गोल नितंबों पर ही टिकी हुई थी एक औरत होने के बावजूद भी एक औरत के जिस्म को देखने की उत्सुकता उसके मन में भी बढ़ती जा रही थी जो कि सुगंधा के मखमली मक्खन जैसे चिकने दूधिया बदन को देखकर अंदर ही अंदर रह रहकर जलन सी महसूस हो रही थी सुगंधा अभी तक अपने हाथ उसी अवस्था में आधी नितंबों पर ही रॉकी हुई थी एक बार फिर से वह शरमाते हुए बेला की तरफ देखी तो बेला अपना सिर हिला कर उसे आगे बढ़ाने के लिए इशारा की तो वह बुरा सा मुंह बना कर धीरे धीरे अपनी पेंटी को नीचे की तरफ सरकार ने लगी और देखते ही देखते सुगंधा के गोल गोल गोल आज तरबूज की तरह मादक गांड निर्वस्त्र हो गई और बेहद ही कामुक अंदाज में सुगंधा अपनी पेंटी को उतारने के लिए नीचे की तरफ झुकी और अपने हाथों से ही अपने पैरों में से अपनी पैंटी उतार कर एक किनारे कर दी लेकिन उसके झुकने के दरमियान जो नजारा केवल कुछ सेकंड तक ही दिखा था उसे देख कर रोहन के तन बदन में आग लग गई उसका लंड एकदम से फूल गया था उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो उसके लंड की नसें फट जाएंगी..... क्योंकि झुकने की वजह से... सुगंधा के गोलाकार नितंब और भी ज्यादा उभार लेकर एकदम गोल गोल और कुछ ज्यादा ही बड़ी नजर आने लगी... सुगंधा के इस तरह से झुकने की वजह से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को देख कर रोहन अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा.... उसके जी में आ रहा था कि जिस तरह से उसके दोस्त ने उस भाभी को झुका कर पीछे से उसकी चुदाई किया था उसी तरह से ... वह भी कमरे में घुस जाए और पीछे से अपनी मां के बुर में लंड डालकर उसकी भी चुदाई कर डालें यह ख्याल मन में आते ही रोहन के तन बदन में चुदास की लहर दौड़ने लगी....

अपनी मालकिन की मक्खन जैसी गोरी चिकनी गांड देखकर बेला के तन बदन में भी उसे स्पर्श करने की चाहत जगने लगी सुगंधा अभी भी उसी स्थिति में खड़ी थी परंतु बेला और रोहन की तरफ अभी उसकी मक्खन जैसी गोल गोल गांड ही नजर आ रही थी... क्योंकि सुगंधा के मन में भी अजीब सी उथल-पुथल चल रही थी वह चाहती थी कि जितना हो सके उतना कम उसके अंगों का प्रदर्शन हो इसलिए वह अपनी सबसे अत्यधिक की मती और लाजवाब खजाने को दिखाने से कतरा रही थी यह कसक रोहन के मन में भी उत्पन्न हो रही थी कि वह इसमें अपनी मां की बेहद खूबसूरत हसीन बुर को नहीं देख पा रहा था लेकिन मर्दों के लिए एक खूबसूरत औरत के नितंब कुछ ज्यादा ही महत्व रखते हैं इसलिए रोहन अपनी मां की बेहद खूबसूरत नंगी गांड को देखकर संतुष्ट था लेकिन उसके मन में अपनी मां की बुर को देखने की चाहत बराबर बनी हुई थी लेकिन सुगंधा जो अपने आप को संभाले हुए थी और बेला की तरफ मुंह करके खड़ी होने में शर्म का अनुभव कर रही थी अपनी मालकिन को इस तरह से शरमाते हुए देखकर बेला बोली

वाह मालकिन आप तो स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा लग रही है कसम से मैंने अपनी जिंदगी में आप जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखी ....(बेला की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुरा दे और इस तरह से मुस्कुराने की वजह से उसकी खूबसूरती में चार चांद लग रहे थे जो कि रोहन की उत्तेजना का कारण बनता जा रहा था बेला की बात सुनकर सुगंधा बोली)

चल अब रहने दे बातें बनाने को अपनी मनमानी कर ही ली...

मनमानी कैसी मालकिन यह तो आपकी भलाई के लिए ही में कर रही हूं अब चलिए जल्दी से लेट जाइए ताकि मैं आपकी मालीस कर सकु.....

बेला की बात सुनते ही सुगंधा चटाई पर लेटने की तैयारी करने लगी और धीरे-धीरे वह वहीं चटाई पर बैठ गई सुगंधा चटाई पर तकिया भी रख दी थी ताकि सुगंधा आराम से लेट सके....

सुगंधा कितनी चरित्रवान थी वह इस बात से होता है कि वह अपनी टांगों के बीच बेहद कीमती खजाने को इस तरह से छिपाकर चटाई पर लेट गई कि ना तो उस अंग को बेलाही देख पाई और ना ही रोहन.....

वह पेट के बल लेट गई थी

 
सुगंधा पेट के बल लेट चुकी थी... बंद कमरे में बेहद रोमांचकारी और बदन में गर्माहट भरा नजारा देखने को मिल रहा था बेला और सुगंधा दोनों इस बात से अनजान थी कि रोहन के कि पर खड़ा होकर सब कुछ देख रहा है वह दोनों तो अपनी ही मस्ती में थे सुगंधा दोनों हाथ को तकिए पर टिका कर अपना सर उस पर आराम से टिका कर लेटी हुई थी बेला एकटक अपनी मालकिन की नंगी खूबसूरत जवानी को सर से पांव तक घूर रही थी बेला मन ही मन में मस्ती भरी आह भर रही थी बेला की नजर सर से पांव तक घूम रही थी लेकिन उसकी निगाह बार-बार सुगंधा की नितंबों पर टिक जा रही थी पेट के बल लेटे होने की वजह से नितंबों का उभार कुछ ज्यादा ही आकर्षण लिए हुए दिख रहा था.... बाहर खड़ा रोहन अपनी मां के नंगे बदन को देखकर मस्त हुए जा रहा था रोहन का मन तो कर रहा था कि इसी समय कमरे में घुस जाए और खुद नंगा होकर अपनी मां के ऊपर लेट जाए क्योंकि अपनी मां की नंगी गोरी गोरी भराव दार गांड देख कर उसका लंड उबाल मार रहा था वह अपने लंड को अपनी मां की गोरी गोरी नरम नरम गांड पर रगड़ना चाहता था... अपनी मां की कमसिन जवानी को महसूस करना चाहता था लेकिन इतनी हिम्मत दिखाने की हिम्मत उसके अंदर बिल्कुल भी नहीं थी बस वह अपनी मां के प्रति आकर्षित होकर अपनी कल्पनाओं का घोड़ा ही दौड़ा सकता था लेकिन इस समय अपनी मां को नंगी देखकर वापस आने के ऊपर से ही अपने लंड को मसल रहा था रोहन की सांसे गहरी चल रही थी....

दूसरी तरफ बेला सरसों की तेल की शीशी उठाकर .. उसका ढक्कन खोलने लगी और साथ ही तिरछी नजरों से सुगंधा के भराव दार नितंबों को घूरती भी जा रही थी सुगंधा आराम से लेटी हुई थी परंतु पहली बार किसी औरत के सामने लगना अवस्था में होने के कारण शर्म के मारे संकोचा भी रही थी....

सुगंधा पूरी तरह से तैयार थी मालिश करवाने के लिए....

देखते ही देखते बेला अपनी हथेली में सरसों के तेल को गिराने लगी और उसके बाद शीशी को बगल में रखकर सुगंधा की मखमली चिकनी गोरी पीठ पर लगाना शुरू कर दी नरम नरम चिकनी पीठ पर मालिश करते हुए बेला को उत्तेजना का अनुभव हो रहा था वह कंधों से लेकर कमर तक मालिश करना शुरू कर दी यह देखकर खिड़की पर खड़ा रोहन उत्तेजना के सागर में बहता चला जा रहा था एक पल के लिए तो उसे बेला से जलन होने लगी क्योंकि अपने से ज्यादा खुश किस्मत व बेला को समझने लगा जो कि इस समय उसकी नंगी मां के बिल्कुल करीब बैठ कर .उसके नंगे बदन को स्पर्श और मालिश करने का सुख भोग रही थी.....

बेला के द्वारा की जा रही मालिश से सुगंधा राहत महसूस करने लगी कुछ ही देर में उसे ऐसा महसूस होने लगा कि उसके बदन का दर्द कम होने लगा है और दूसरी तरफ बेला के मन में सुगंधा के गोल गोल नितंबों को स्पर्श करने की लालसा जन्म ले रही थी एक औरत होने के बावजूद भी एक औरत की गांड को छूना चाहती थी दबाना चाहती थी उसे बदलना चाहती थी एक अजीब सी कशमकश उसके तन बदन को उतेजना से भर रहा था इसलिए वह अपनी हथेलियों को बेला की नंगी पीठ पर ऊपर से नीचे की तरफ लाते हुए बोली.....

अब कैसा लग रहा है मालकिन....

तेरे हाथों में तो जादू लग रहा है मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मेरे बदन से दर्द दूर हो रहा है...

मालकिन हाथों के साथ साथ आपका कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर मालिश करवाने का भी असर आपके बदन में हो रहा है मैं कहती थी ना बिना सारे कपड़े उतारे मालीस का मजा नहीं आता...

( ऐसा कहते हुए बेला सुगंधा की मालिश करते हुए अपनी हथेलियों को एकाएक सुगंधा के नरम नरम गोल गोल नितंबों पर रख दी गांड की दोनों बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी फा़के बेला की हथेलियों में समा नहीं पा रही थे... जिसे बेला जोर-जोर से दबाना शुरू कर दी.... यु एकाएक अपने नितंबों पर बेला की हथेलियों का स्पर्श पाते ही सुगंधा के मुंह से गर्म सिसकारी निकल गई.....

ससससससहहहह...आहहहहहहह.. क्या कर रही है बेला....

कुछ नहीं मालकिन सोच रही हूं कि जब मालिश कर रही हूं तो ठीक से कर दूं आज तुम्हारे बदन से सारा दर्द खींच कर बाहर निकाल दूं....

लेकिन मालिश जहां करनी चाहिए वहां कर...मेरी गांड पर क्यो कर रही है..?

( अपने मां के मुंह से इस तरह के शब्द सुनकर रोहन एकदम उत्तेजना से भर गया उसे अपनी मां के मुंह से गांड शब्द सुनकर बहुत ही आनंददायक लगा था साथ ही वह अपनी मां के मुंह से इस तरह के शब्द सुनकर पजामे के ऊपर से वह अपने लंड को जोर से दबा दिया था.. सुगंधा के मुंह से इस तरह की बात सुनकर बेला हंसने लगी और हंसते हुए बोली...)

क्या मालकिन आप भी इतनी बड़ी जमीदारीन होकर बच्चों वाली बातें कह रही हैं... यह बात तुम भी तो अच्छी तरह से जानती हो कि कमर की नसे गांड से होकर ही नीचे की तरफ जाती है तो दर्द भी यहां होता ही है इसलिए तो मैं यहाँ मालिश कर रही हूं.....

( बेला की बात सुनकर सुगंधा कुछ बोल पाती इससे पहले ही बेला जानबूझकर सुगंधा की जांघों के अंदरूनी भाग पर अपनी हथेली धीरे धीरे सरकाते हुए ..अपनी ऊंगली का स्पर्श सुगंधा की बुर से करा दी बेला खुद अपने इस हरकत की वजह से उत्तेजना के मारे गन गना गई साथ ही सुगंधा अपने बुर पर बेला की उंगलियों का स्पर्श पाते पूरी तरह से गन गनाहट का अनुभव करने लगी. )

ससससहहहहह बेला .............( बेला की हरकत की वजह से सुगंधा गरम सिसकारी लेते हुए बोली)

कुछ नहीं मालकिन मैं आपको अपनी उंगलियों का जादू दिखा रही हूं देखना अब कैसे तुम्हारे बदन का सारा दर्द जाता रहेगा....

तेरे को अपनी उंगलियों का जादू वही दिखाना है.... किसी और भी जगह तो दिखा सकती है...( सुगंधा बेला को थोड़ा नाराज होते हुए बोली लेकिन सुगंधा के बोलने का तरीका कुछ इस तरह का था कि लगता ही नहीं था कि वह नाराज होकर बोल रही है बस एक औपचारिकता ही पूरी कर रही थी और दूसरी तरफ खिड़की पर खड़ा है रोहन अंदर के सारे दृश्य को अपने मन मस्तिष्क में कैद कर रहा था दोनों की बातें सुनकर और बेला के हाथों की हरकत को देख कर रोहन इतना तो समझ गया था कि दोनों किस बारे में बात कर रहे थे और बेला उसकी मां के कौन से अंग को छू ली थी इस बात का ज्ञात होते ही रोहन पूरी तरह से उत्तेजित हो गया... उसे यह समझते देर नहीं लगी कि बेला उसकी मां की बुर को छू रही थी_ इस बात से रोहन के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ ने लगी वह बेला की किस्मत से जलने लगा वह मन में सोचने लगा कि उसे से अच्छी किस्मत तो एक नौकरानी की है जो उसकी मां की खूबसूरत बुर को अपनी उंगलियों से छू ले रही है..... अजीब सी हलचल रोहन के तन बदन में होने लगी वह अपनी कल्पनाओं का घोड़ा तेज दौड़ आने लगा और मन में कल्पना करने लगा कि उसकी मां की बुर कैसी होगी जिस पर बेला की उंगलियां छुआ जा रही हैं...... उत्तेजना का असर उसके चेहरे और उसके पजामे पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा... रोहन से अपनी मां की गर्म सिसकारी और बेला की हरकत बर्दाश्त नहीं हुई और वह अपना हाथ पजामे के अंदर डाल दिया और अपने नंगे लंड को अपने हाथ से मसल ना शुरू कर दिया आज यह उसके लिए पहला मौका था जब वह अपने हाथ से अपने नंगे लंड को सहला भी रहा था और मसल रहा था और उसे इस कार्य में कुछ ज्यादा ही आनंद का अनुभव हो रहा था....

 
दूसरी तरफ बेला सुगंधा की बात को अनसुना करते हुए अपनी मस्ती में सुगंधा की बड़ी-बड़ी गोरी गांड खून दोनों हाथों से मसलते हुए मालिश का मजा लेने लगी सुगंधा भी कुछ कह ना सके क्योंकि उसे भी एक अजीब सी हलचल का असर अपने बदन में महसूस हो रहा था..... वह चाहकर भी बेला को रोक नहीं पा रही थी आज बरसों बाद ना जाने कैसे उसे अपने बदन में इस हलचल को महसूस करने का सुरूर चढ रहा था....

रोहन को भी अपनी मां के बदन में चढ़ रही मस्ती को देखने का दुर्लभ मौका मिल रहा था और रोहन इस मौके का भरपूर फायदा उठा रहा था...

बेला के हाथों के जादू में सुगंधा पूरी तरह से खोने लगी थी..... उसे इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि उसकी बुर में से तरल द्रव्य नमकीन पानी बहकर हल्के हल्के बहने लगा था...

सुगंधाको धीरे-धीरे इस बात का एहसास होने लगा कि अब तक जो वह अपने आप पर काबू करके अपने आप को संभाले हुए थे बेला की उंगलियां उस आग को भड़का रही थी और इसलिए वह इससे ज्यादा आगे बढ़ना नहीं चाहती थी लेकिन बेला यह चाहती थी कि सुगंधा पीठ के बल लेट जाए और उसे सुगंधा की रसीली चिकनी बुर देखने का मौका मिल जाए और खिड़की से बाहर खड़ा रोहन भी इसी पल का इंतजार कर रहा था कि कब उसे अपनी ही मां की रसीली बुर को देखने का मौका मिल जाए क्योंकि ना जाने कबसे वह खिड़की से अंदर का नजारा देखते हुए इसी आस में वहां खड़े होकर अपने लंड को मसल रहा था कि उसे आज अपनी मां की नंगी बुर देखने का मौका मिलेगा और जैसे उसी की इच्छा को बेला सुगंधा के सामने प्रस्तुत करते हुए बोली...

मालकिन अब आप पीठ के बल लेट जाइए था कि मैं आपकी आगे भी मालिश कर दो...

( बेला की इतनी सी बात सुनते ही रोहन के दिल की धड़कन तेज होने लगी क्योंकि उसे लगने लगा कि अब वह मौका वहां पर उसकी आंखों के सामने आने वाला है जिस पल के लिए वह न जाने कितने दिनों से तड़प रहा था लेकिन दोनों की इच्छाओं पर पानी फेरते हुए बेला चटाई पर से उठते हुए बोली...

नहीं नहीं मुझे अब बिल्कुल ठीक लग रहा है इससे ज्यादा अब मैं अपनी मालिश नहीं करवा सकती (इतना कहते हो पास में पड़ी अपनी पेंटी को उठाकर अपनी दोनों टांगों में डालकर पहनने लगी लेकिन पेंटी पहनते समय भी वह इस बात का पूरी तरह से एहतियात बरत रही थी कि .. उसकी बुर दिखाई ना दे और देखते ही देखते सुगंधा अपने कपड़े पहने ली बेला और रोहन दोनों अपना हाथ में चलते रह गए सुगंधा अपने कपड़े पहन कर तैयार हो चुकी थी रोहन जानता था कि अब वह बाहर आने वाली है इसलिए उसका खिड़की पर यूं खड़े रहना ठीक नहीं था इसलिए वह वहां से चलता बना....

मालकिन हाथों के साथ साथ आपका कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर मालिश करवाने का भी असर आपके बदन में हो रहा है मैं कहती थी ना बिना सारे कपड़े उतारे मालीस का मजा नहीं आता...

( ऐसा कहते हुए बेला सुगंधा की मालिश करते हुए अपनी हथेलियों को एकाएक सुगंधा के नरम नरम गोल गोल नितंबों पर रख दी गांड की दोनों बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी फा़के बेला की हथेलियों में समा नहीं पा रही थे... जिसे बेला जोर-जोर से दबाना शुरू कर दी.... यु एकाएक अपने नितंबों पर बेला की हथेलियों का स्पर्श पाते ही सुगंधा के मुंह से गर्म सिसकारी निकल गई.....

ससससससहहहह...आहहहहहहह.. क्या कर रही है बेला....

कुछ नहीं मालकिन सोच रही हूं कि जब मालिश कर रही हूं तो ठीक से कर दूं आज तुम्हारे बदन से सारा दर्द खींच कर बाहर निकाल दूं....

लेकिन मालिश जहां करनी चाहिए वहां कर...मेरी गांड पर क्यो कर रही है..?

( अपने मां के मुंह से इस तरह के शब्द सुनकर रोहन एकदम उत्तेजना से भर गया उसे अपनी मां के मुंह से गांड शब्द सुनकर बहुत ही आनंददायक लगा था साथ ही वह अपनी मां के मुंह से इस तरह के शब्द सुनकर पजामे के ऊपर से वह अपने लंड को जोर से दबा दिया था.. सुगंधा के मुंह से इस तरह की बात सुनकर बेला हंसने लगी और हंसते हुए बोली...)

क्या मालकिन आप भी इतनी बड़ी जमीदारीन होकर बच्चों वाली बातें कह रही हैं... यह बात तुम भी तो अच्छी तरह से जानती हो कि कमर की नसे गांड से होकर ही नीचे की तरफ जाती है तो दर्द भी यहां होता ही है इसलिए तो मैं यहाँ मालिश कर रही हूं.....

( बेला की बात सुनकर सुगंधा कुछ बोल पाती इससे पहले ही बेला जानबूझकर सुगंधा की जांघों के अंदरूनी भाग पर अपनी हथेली धीरे धीरे सरकाते हुए ..अपनी ऊंगली का स्पर्श सुगंधा की बुर से करा दी बेला खुद अपने इस हरकत की वजह से उत्तेजना के मारे गन गना गई साथ ही सुगंधा अपने बुर पर बेला की उंगलियों का स्पर्श पाते पूरी तरह से गन गनाहट का अनुभव करने लगी. )

ससससहहहहह बेला .............( बेला की हरकत की वजह से सुगंधा गरम सिसकारी लेते हुए बोली)

कुछ नहीं मालकिन मैं आपको अपनी उंगलियों का जादू दिखा रही

रोहन की आंखों ने आज बेहद अद्भुत और बहुत ही खूबसूरत नजारे का दर्शन किया था... कभी उसने यह सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे इस तरह के नजारे देखने का कभी मौका मिलेगा वास्तव में एक मर्द के लिए यह किसी अद्भुत नजारे से कम नहीं होता जब वह अपनी खुली आंखों से एक खूबसूरत औरत को अपने कपड़े उतारते हुए और अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी होता हुआ देखता है .... रुपया पैसा धन दौलत यह सब होने के बावजूद भी इंसान अधूरा रहता है जब तक उसे औरत सुख नहीं मिलता और ऐसे में मर्द की इच्छा यही होती है कि वह अपनी आंखों के सामने किसी औरत को अपने कपड़े उतारते हुए देखें और वह औरत अगर किसी अप्सरा जैसी खूबसूरत हो तो ऐसे में वह अपने आप को धन्य समझता है और ऐसा ही कुछ रोहन भी अपने आप को खुशकिस्मत समझ रहा था क्योंकि जिस औरत के बारे में सोच कर वह मस्त हो जाया करता था और यही सोचा करता था कि बिना कपड़ों की उसकी मां कैसी लगती होगी कैसी दिखती होगी उसके अंग कैसे होंगे और वही नजारा वह वास्तविकता में अपनी नंगी आंखों से देख चुका था यह पल उसके लिए बेहद खास और अतुल्य था.....

लेकिन एक कसक अभी भी उसके मन में रह गई थी जिसके लिए वह अपने आप को बदनसीब समझता था क्योंकि उसने अपनी मां को पूरी तरह से एकदम नग्न अवस्था में देख चुका था अपनी मां के गोल गोल पके हुए नारंगीयो के जैसे चुचियों को देख कर... अपने बदन मे हुई हलचल को अच्छी तरह से महसूस कर रहा था.... जहां पर वह अपनी मां की गोल गोल नंगी चूचियों को देखकर मस्त हुए जा रहा था वहीं अपनी मां की मदमस्त उन्नत भराव दार गांड को देख कर उत्तेजना का अनुभव कर रहा था एक पल के लिए तो अपनी मां की मस्त गोरी गोरी गांड को देखकर एकदम से चुद वासा हो चुका था अपनी मां की गोरी गांड को देखकर एक पल के लिए तो उसे लगा कि वह कमरे में घुस जाए और पीछे से अपनी मां को पकड़कर उस की रसीली बुर में अपना लंड पेल दे.....

अपनी मां के नंगे बदन और चूचियों और नितंबों को देख कर जहां रोहन पूरी तरह से बदहवास और अत्यधिक कामोत्तेजना का अनुभव कर रहा था वहीं दूसरी तरफ इस बात का अफसोस उसे अंदर ही अंदर तड़पाय जा रहा था कि उसने अपनी मां की टांगों के पीछे छिपी उसकी बेहद खूबसूरत खजाने सामान बुर को नहीं देख पाया था हालांकि उसने जिंदगी में पहली बार ही बेला की कमसिन बुर को देखकर मस्त होने का अनुभव ले चुका था लेकिन वह तुलनात्मक तरीके से अपनी मां की बुर देखना चाहता था वह देखना चाहता था की बेला बेला की बुर और उसकी मां की बुर में क्या अंतर है लेकिन वह यह बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि बेला की बुर को जब देख कर उसे इतनी उत्तेजना का अनुभव हुआ था तो उसकी मां तो बेला से कई गुना ज्यादा अत्यधिक खूबसूरत और एकदम गोरी चिट्टी थी तो जाहिर सी बात थी की उसकी मां की बुर बेहद खूबसूरत होगी और वह यही देखना भी चाहता था लेकिन उसकी मां एक औरत के सामने भी अपने अंग दिखाने में जिस तरह से शर्मा रही थी और शर्म की वजह से ही वह आगे मालिश कराने से इंकार कर दी और रोहन को ऐसा लगा की एक बेहद खूबसूरत अतुल्य नजारे पर पर्दा सा पड़ गया लेकिन फिर भी रोहन ने जो कुछ भी देखा जितना भी देखा उसके लिए उम्र के मुताबिक बहुत था.... क्योंकि ऊस नजारे के बारें मे सोच कर अभी भी उसके लंड का तनाव बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था वह ज्यों का त्यों अकड़ कर पजामे में खड़ा था.......

दूसरी तरफ देना अपनी मालकिन की खूबसूरती और उसकी सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध सी हो गई थी अभी तक कपड़ों में देख कर जिस तरह का आकर्षण था उससे कहीं ज्यादा आकर्षण सुगंधा को नग्न अवस्था में देखकर बेला के मन में सुगंधा के प्रति हो गया था वह तो कुछ समझ ही नहीं पा रही थी कि क्या करें क्योंकि उसके मन मस्तिष्क में केवल सुगंधा और सुगंधा का खूबसूरत बदन ही समाया हुआ था वह सुगंधा के बदन बारे कभी सुगंधा के बदन के बारे में सोचती तो कभी अपने बदन के ऊपर से नीचे की तरफ देखती.... वह इस बात से बेहद आश्चर्यचकित थी कि उम्र के इस पड़ाव में भी सुगंधा की खूबसूरती किसी न व युवती के बराबर थी.....

 
आज पहली बार सुगंधाको मालिश करवा कर बेहद राहत का अनुभव हो रहा था और एक अजीब सी हलचल अभी भी उसके तन बदन हो झकझोर रही थी क्योंकि जिस तरह से बेला ने उसके नितंबों को अपनी दोनों हथेलियों में भर भर कर मालिश की थी उससे ज्यादा कुछ तो नहीं लेकिन फिर भी सुगंधा की तन बदन में उत्तेजना का अनुभव होने लगा था इसका जीता जागता सबूत था कि उसकी बुर से नमकीन रस का स्राव हो रहा था जिसे वह चाहकर भी नहीं रोक पाई थी और इसीलिए अपने मन पर काबू करके वह बिना मालिश करवाएं वहां से उठ खड़ी हुई थी........ शाम ढल चुकी थी अपने कमरे में बैठे-बैठे वह अपने पति के बारे में सोच रही थी जब वह शादी करके इस घर में आई थी शुरू शुरू में सब कुछ ठीक था... अपने पति की तरफ से उसे बेशुमार प्यार मिल रहा था उसे अपनी किस्मत पर गर्म होने लगा था क्योंकि उसे ससुराल में किसी भी चीज की कमी नहीं थी मान सम्मान और शारीरिक सुख पाकर वह एकदम से धन्य हो चुकी थी उसे वह पल याद आने लगा जब बेला की तरह ही उसके पति ने उसकी मालिश की थी.....

एक दिन ऐसे ही उसकी कमर में दर्द हो रहा था और यह बात अपने पति से कहते ही उसके पति ने एक पल की भी देर किए बिना ही कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और अपने ही हाथों से देखते ही देखते सुगंधा के बदन पर से वस्त्रों को दूर करने लगा सुगंधा तो कुछ समझ ही नहीं पाए कि यह क्या कर रहा है देखते ही देखते वह कमरे में अपने पति के सामने संपूर्ण रूप से एक दम नंगी हो गई थी.... सुगंधाको तो एक पल के लिए अपने पति पर गुस्सा और चिढ आने लगा.... क्योंकि जिस तरह से वह सुगंधा के बदन पर से वस्त्र उतार रहा था उसे ऐसा ही लग रहा था कि अब वह उस से संभोग करेगा सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी ऐसी हालत होने के बावजूद भी उसका पति उसकी हालत पर बिल्कुल भी गोर किए बिना ही अपनी प्यास बुझाने को आतुर है..... कमरे में सुगंधा संपूर्ण नग्ना अवस्था में खड़ी थी उसके बदन पर कपड़े का रेशा भी नहीं था...

और उसका पति सुगंधाको नंगी अवस्था में एकदम प्यासी नजरों से खुल रहा था या देखकर सुगंधा क्रोधित हो गई और गुस्से में बोली.....

आप इंसान है या जानवर आपको बिल्कुल भी शर्म नहीं आती... मेरा सारा बदन दर्द से टूट रहा है और आपको मेरी बिल्कुल भी चिंता नहीं है बस आप मेरे बदन से आनंद लूटना चाहते हैं चाहे मैं जैसे भी हाल में हूं बस तुम्हें मुझ में एक प्यास बुझाने वाली कठपुतली नजर आती है जिसके साथ खेला खाया और हो गया मुझे आपसे यह बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी मुझे लगा था कि आप मेरी मदद करेंगे मुझे इस दर्द से राहत दिलाएंगे..लेकिन आप तो मेरे बदन के साथ साथ मेरे दिल पर भी घाव कर रहे हैं..

( सुगंधा का पति आश्चर्य से सुगंधा की तरफ देखे जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि सुगंधा उसके बारे में यह क्या सोच रही है वह तो जब की उसकी मदद करना चाह रहा था वह सुगंधा के नंगे बदन ऊपर से नीचे तक आश्चर्य से देखते जा रहा था और वह समझ गया कि उसकी हरकत की वजह से सुगंधा को बुरा लगा है इसलिए वह सुगंधा की गलतफहमी को दूर करते हुए बोला....)

यह क्या कह रही हो सुगंधा मेरी जान... मैं तो तुम्हारी मदद करना चाह रहा हूं....

इस तरह से करोगे मेरी मदद मेरे कपड़े उतार कर मुझे नंगी कर कर मेरे ऊपर चढ़कर मेरी मदद करोगे अगर इस तरह से मदद करना चाह रहे हो तो मुझे तुम्हारे मदद की आवश्यकता नहीं है....

कैसी बातें कर रही हो सुगंधा तू मेरे बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकती हो कि मेरी पत्नी दर्द से कराह रही हो और मैं उसके बदन के साथ खेलने की सोचूंगा..... मैं तो तुम्हारे बदन की मालिश करने जा रहा हूं....( इतना कहते हुए वह अलमारी की तरफ घुमा और अलमारी की तरफ कदम बढ़ाते हुए) हां शायद मेरा तरीका तुम्हें गलत लगा होगा इसलिए तुम इस तरह से कह रही हो ...( इतना कहते हो गए वह अलमारी के करीब पहुंच गया और अलमारी खोलकर उसमें से सरसों के तेल की शीशी निकालकर वापस सुगंधा की तरफ कदम बढ़ा दिया अपने पति की बातें सुनकर और उसके हाथ में सरसों के तेल की शीशी देखकर सुगंधा को अपनी गलती का एहसास होने लगा वह एकदम से शर्मिंदा हो गई अब उसके पास बोलने लायक कुछ भी नहीं बचा था सुगंधा का पति सुगंधा के करीब आया और उसे बिस्तर पर लेट जाने के लिए कहा सुगंधा बिना कोई जवाब दिए बिना अपने पति की बातें सुनकर शर्मिंदगी का एहसास लिए हुए उसकी बात मानते हुए बिस्तर पर पेट के बल लेट गई...... अपनी गलती का उसे इस हद तक पछतावा था कि वह इस समय इस बात को बिल्कुल भी भूल गई कि वह इस समय संपूर्ण रूप से नंगी है ... बिस्तर पर संपूर्ण रूप से नंगे पन का एहसास उसे तब हुआ जब उसने अपने पति के दोनों मजबूत हथेलियों का स्पर्श अपनी नंगी गाड़ पर महसूस कि.... अपने पति के मजबूत हाथों के गरम स्पर्श को अपने नंगे बदन पर महसूस करके वह पूरी तरह से रोमांचित हो गई.... सुगंधा के पति ने अपनी हथेलियों का ऐसा जादू चलाया कि कुछ ही देर में सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजना का अनुभव करने लगी.... उसके बदन से दर्द गायब हो गया और एक नए मीठे दर्द ने उसकी जगह ले ली जिसके असर में उसकी बुर से नमकीन पानी झरने लगा संभोग सुख के उन्माद से वाकिफ सुगंधा कुछ ही देर में गरम सिसकारी छोड़ने लगी और अपनी पत्नी की इस हालत को देखकर उसका पति पल भर में ही उत्तेजना का अनुभव करने लगा... बजाने के अंदर उसका लंड तन कर खड़ा हो गया अपनी बीवी की गोरी गोरी उन्नत ऊभारो वाली गांड को देख कर वह पूरी तरह से चुदवासा हो ..गया.... अगले ही पल उसने अपने पजैमे को उतार कर नंगा हो गया और अपने हाथों से उसी स्थिति में सुगंधा की मोटी मोटी चिकनी जांघों को अपने हाथों से फैला कर अपने लिए जगह बना लिया....

और देखते ही देखते सुगंधा का पति सुगंधा की बुर में अपना समूचा लंड उतार दिया कुछ ही देर में पूर

रोहन की आंखों ने आज बेहद अद्भुत और बहुत ही खूबसूरत नजारे का दर्शन किया था... कभी उसने यह सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे इस तरह के नजारे देखने का कभी मौका मिलेगा वास्तव में एक मर्द के लिए यह किसी अद्भुत नजारे से कम नहीं होता जब वह अपनी खुली आंखों से एक खूबसूरत औरत को अपने कपड़े उतारते हुए और अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी होता हुआ देखता है .... रुपया पैसा धन दौलत यह सब होने के बावजूद भी इंसान अधूरा रहता है जब तक उसे औरत सुख नहीं मिलता और ऐसे में मर्द की इच्छा यही होती है कि वह अपनी आंखों के सामने किसी औरत को अपने कपड़े उतारते हुए देखें और वह औरत अगर किसी अप्सरा जैसी खूबसूरत हो तो ऐसे में वह अपने आप को धन्य समझता है और ऐसा ही कुछ रोहन भी अपने आप को खुशकिस्मत समझ रहा था क्योंकि जिस औरत के बारे में सोच कर वह मस्त हो जाया करता था और यही सोचा करता था कि बिना कपड़ों की उसकी मां कैसी लगती होगी कैसी दिखती होगी उसके अंग कैसे होंगे और वही नजारा वह वास्तविकता में अपनी नंगी आंखों से देख चुका था यह पल उसके लिए बेहद खास और अतुल्य था.....

लेकिन एक कसक अभी भी उसके मन में रह गई थी जिसके लिए वह अपने आप को बदनसीब समझता था क्योंकि उसने अपनी मां को पूरी तरह से एकदम नग्न अवस्था में देख चुका था अपनी मां के गोल गोल पके हुए नारंगीयो के जैसे चुचियों को देख कर... अपने बदन मे हुई हलचल को अच्छी तरह से महसूस कर रहा था.... जहां पर वह अपनी मां की गोल गोल नंगी चूचियों को देखकर मस्त हुए जा रहा था वहीं अपनी मां की मदमस्त उन्नत भराव दार गांड को देख कर उत्तेजना का अनुभव कर रहा था एक पल के लिए तो अपनी मां की मस्त गोरी गोरी गांड को देखकर एकदम से चुद वासा हो चुका था अपनी मां की गोरी गांड को देखकर एक पल के लिए तो उसे लगा कि वह कमरे में घुस जाए और पीछे से अपनी मां को पकड़कर उस की रसीली बुर में अपना लंड पेल दे.....

अपनी मां के नंगे बदन और चूचियों और नितंबों को देख कर जहां रोहन पूरी तरह से बदहवास और अत्यधिक कामोत्तेजना का अनुभव कर रहा था वहीं दूसरी तरफ इस बात का अफसोस उसे अंदर ही अंदर तड़पाय जा रहा था कि उसने अपनी मां की टांगों के पीछे छिपी उसकी बेहद खूबसूरत खजाने सामान बुर को नहीं देख पाया था हालांकि उसने जिंदगी में पहली बार ही बेला की कमसिन बुर को देखकर मस्त होने का अनुभव ले चुका था लेकिन वह तुलनात्मक तरीके से अपनी मां की बुर देखना चाहता था वह देखना चाहता था की बेला बेला की बुर और उसकी मां की बुर में क्या अंतर है लेकिन वह यह बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि बेला की बुर को जब देख कर उसे इतनी उत्तेजना का अनुभव हुआ था तो उसकी मां तो बेला से कई गुना ज्यादा अत्यधिक खूबसूरत और एकदम गोरी चिट्टी थी तो जाहिर सी बात थी की उसकी मां की बुर बेहद खूबसूरत होगी और वह यही देखना भी चाहता था लेकिन उसकी मां एक औरत के सामने भी अपने अंग दिखाने में जिस तरह से शर्मा रही थी और शर्म की वजह से ही वह आगे मालिश कराने से इंकार कर दी और रोहन को ऐसा लगा की एक बेहद खूबसूरत अतुल्य नजारे पर पर्दा सा पड़ गया लेकिन फिर भी रोहन ने जो कुछ भी देखा जितना भी देखा उसके लिए उम्र के मुताबिक बहुत था.... क्योंकि ऊस नजारे के बारें मे सोच कर अभी भी उसके लंड का तनाव बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था वह ज्यों का त्यों अकड़ कर पजामे में खड़ा था.......

दूसरी तरफ देना अपनी मालकिन की खूबसूरती और उसकी सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध सी हो गई थी अभी तक कपड़ों में देख कर जिस तरह का आकर्षण था उससे कहीं ज्यादा आकर्षण सुगंधा को नग्न अवस्था में देखकर बेला के मन में सुगंधा के प्रति हो गया था वह तो कुछ समझ ही नहीं पा रही थी कि क्या करें क्योंकि उसके मन मस्तिष्क में केवल सुगंधा और सुगंधा का खूबसूरत बदन ही समाया हुआ था वह सुगंधा के बदन बारे कभी सुगंधा के बदन के बारे में सोचती तो कभी अपने बदन के ऊपर से नीचे की तरफ देखती.... वह इस बात से बेहद आश्चर्यचकित थी कि उम्र के इस पड़ाव में भी सुगंधा की खूबसूरती किसी न व युवती के बराबर थी.....

 
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