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Guest
तभी डोर पर नॉक हुआ, वेटर ऑर्डर के लिए आया था. मेने उन दोनो से पूछ कर चिकन सॅंडविच आंड आइस-क्रीम का ऑर्डर दिया.
उनकी बातो और हरकतों से मुझे आइडिया तो लग ही गया था की वो मस्ती के मूड मे हैं. तभी शीतल बोली, “अभी एक बात पुछु, तुमने मॉम पे क्या जादू किया है ? हमेशा तुम्हारी ही बाते करती हैं, कल रात भी बहुत तारीफ कर रही थी.”
आईशा ने फिर चुटकी ली … “और क्या किया होगा ? मॉम की खूब जमकर चुदाई की होगी.. जवान है, खूबसूरत है.. मॉम को खूब मज़ा आया होगा…”
इस बात पर शीतल उसे मारने मेरे उपर से होते हुए झपटी पर आईशा खिलखिलाते हुए तेज़ी से खिसक ली , और शीतल मेरी गोद मे गिर पड़ी
आईशा- “अभी तुम ही संभलो इन्हे वरना मैं तो गयी” और दोनो हँस ने लगी.
अभी- “तुम लोग बुरा मूत मान-ना. लेकिन सच तो यह है की तुम्हारी मा यानी ममता आंटी को देखकर हर कोई, छोटा बड़ा, सभी उनके साथ प्यार करना चाहेंगे , मुझे भी आंटी बहुत पसंद आई.. और मैं ये भी जानता हूँ की आंटी मुझे कितना पसंद करती हैं पर तुम दोनो भी कम खूबसूरत नही हो”
तभी डोर पर नॉक हुआ वेटर ऑर्डर ले आया था. उसे टिप देकर मैने कहा की अब हमे डिस्टर्ब ना करे. हमने आपस मे बाँट कर खाया. खाते खाते आईशा बोली “हाँ तुम कुछ कह रहे थे”
अभी- “पता है जब तुम्हारे घर पहली बार गया था तो उस रात घर आने के बाद से तीन राते बीत गई और मुझे नींद नही आई, मैं सोया नही…”
आईशा – “ऑरेंज ने ज़्यादा ट्रबल दिया की मॅंगो ने…”
मे – दोनो ने …कभी एक आँखों के सामने आती है तो कभी दूसरी..इस लिए आज मौका लगा तो हिम्मत कर यहाँ आ गया और किस्मत से तुम दोनो मुझे मिल गई…”
शीतल सब सुनते हुए नीचे देख रही थी पर आईशा ने नज़रे मिलाकर फिर पूछा.
आईशा – “भाई को मालूम है की तुम उनकी दोनो बहनो को चोदना चाहते हो…”
ऐसी ओपन लॅंग्वेज मे बाते करते हुए हम तीनो ही एग्ज़ाइटेड हो रहे थे,
मे – “उसे डाउट तो ज़रूर हुआ होगा ..”
आईशा – “तो…. ऑरेंज आंड मॅंगो मे कौन ज़्यादा पसंद है…”
मैने भी बोल्ड्ली जवाब दिया – “मुझे दोनो मॅंगो और ऑरेंज एक जैसा पसंद है..जितना मज़ा मॅंगो को काट कर खाने मे आता है उतना ही मज़ा ऑरेंज को चूसने मे आता है…”
आईशा – “तो फिर नमार्द जैसा बैठे क्यो हो, खाओ, चूसो…”
उसके ऐसे उकसाने पर और उसकी बात सुनकर मैने बगल मे बैठी शीतल को बाँहो मे दबोच लिया और ज़ोर से किस करने लगा. फिर शीतल भी मेरा साथ देने लगी और हमारी किस्सिंग एक पॅशनेट किस मे बदल गयी और मेरी हम एक दूसरे की टंग फाइट कर रहे थे. और साँस फूलने तक हम जुदा ना हुए. मेरा हाथ रेंगता हुआ उसके बूब्स को टटोलने लगा. अब तक जितने बूब्स से मैं खेला था(मॉम/ ममता/ झरना) ये उनमे सबसे छोटे, हल्के फुल्के पर ठोस थे. मेरा दूसरा हाथ उसकी पीठ पर रेंग रहा था.
मैने अलग होते हुए उसके और फिर अपने कपड़े उतार दिए, हम दोनो इनरवेर मे थे फिर मैने फिर से किस्सिंग करते हुए अपने दोनो हाथ उसके पीछे लेजाते हुए उसकी ब्रा के हुक खोल दिए. पीछे हटकर मैने उसे धीरे धीरे धकलते हुए बेड पर लिटा दिया. मेरी नज़र उसके छोटे छोटे संतरो से हट ही नही रही थी. धीरे धीरे उसपर झुकते हुए मैं उसकी एक चुचि को मूह मे और दूसरी को हाथ मे भर लिया और बारी बारी बदलते हुए उन्हे चूसने, चाटने और मसलने लगा, ओवर एक्सआइट होते हुए एक दो बार काट भी लिया.
उनकी बातो और हरकतों से मुझे आइडिया तो लग ही गया था की वो मस्ती के मूड मे हैं. तभी शीतल बोली, “अभी एक बात पुछु, तुमने मॉम पे क्या जादू किया है ? हमेशा तुम्हारी ही बाते करती हैं, कल रात भी बहुत तारीफ कर रही थी.”
आईशा ने फिर चुटकी ली … “और क्या किया होगा ? मॉम की खूब जमकर चुदाई की होगी.. जवान है, खूबसूरत है.. मॉम को खूब मज़ा आया होगा…”
इस बात पर शीतल उसे मारने मेरे उपर से होते हुए झपटी पर आईशा खिलखिलाते हुए तेज़ी से खिसक ली , और शीतल मेरी गोद मे गिर पड़ी
आईशा- “अभी तुम ही संभलो इन्हे वरना मैं तो गयी” और दोनो हँस ने लगी.
अभी- “तुम लोग बुरा मूत मान-ना. लेकिन सच तो यह है की तुम्हारी मा यानी ममता आंटी को देखकर हर कोई, छोटा बड़ा, सभी उनके साथ प्यार करना चाहेंगे , मुझे भी आंटी बहुत पसंद आई.. और मैं ये भी जानता हूँ की आंटी मुझे कितना पसंद करती हैं पर तुम दोनो भी कम खूबसूरत नही हो”
तभी डोर पर नॉक हुआ वेटर ऑर्डर ले आया था. उसे टिप देकर मैने कहा की अब हमे डिस्टर्ब ना करे. हमने आपस मे बाँट कर खाया. खाते खाते आईशा बोली “हाँ तुम कुछ कह रहे थे”
अभी- “पता है जब तुम्हारे घर पहली बार गया था तो उस रात घर आने के बाद से तीन राते बीत गई और मुझे नींद नही आई, मैं सोया नही…”
आईशा – “ऑरेंज ने ज़्यादा ट्रबल दिया की मॅंगो ने…”
मे – दोनो ने …कभी एक आँखों के सामने आती है तो कभी दूसरी..इस लिए आज मौका लगा तो हिम्मत कर यहाँ आ गया और किस्मत से तुम दोनो मुझे मिल गई…”
शीतल सब सुनते हुए नीचे देख रही थी पर आईशा ने नज़रे मिलाकर फिर पूछा.
आईशा – “भाई को मालूम है की तुम उनकी दोनो बहनो को चोदना चाहते हो…”
ऐसी ओपन लॅंग्वेज मे बाते करते हुए हम तीनो ही एग्ज़ाइटेड हो रहे थे,
मे – “उसे डाउट तो ज़रूर हुआ होगा ..”
आईशा – “तो…. ऑरेंज आंड मॅंगो मे कौन ज़्यादा पसंद है…”
मैने भी बोल्ड्ली जवाब दिया – “मुझे दोनो मॅंगो और ऑरेंज एक जैसा पसंद है..जितना मज़ा मॅंगो को काट कर खाने मे आता है उतना ही मज़ा ऑरेंज को चूसने मे आता है…”
आईशा – “तो फिर नमार्द जैसा बैठे क्यो हो, खाओ, चूसो…”
उसके ऐसे उकसाने पर और उसकी बात सुनकर मैने बगल मे बैठी शीतल को बाँहो मे दबोच लिया और ज़ोर से किस करने लगा. फिर शीतल भी मेरा साथ देने लगी और हमारी किस्सिंग एक पॅशनेट किस मे बदल गयी और मेरी हम एक दूसरे की टंग फाइट कर रहे थे. और साँस फूलने तक हम जुदा ना हुए. मेरा हाथ रेंगता हुआ उसके बूब्स को टटोलने लगा. अब तक जितने बूब्स से मैं खेला था(मॉम/ ममता/ झरना) ये उनमे सबसे छोटे, हल्के फुल्के पर ठोस थे. मेरा दूसरा हाथ उसकी पीठ पर रेंग रहा था.
मैने अलग होते हुए उसके और फिर अपने कपड़े उतार दिए, हम दोनो इनरवेर मे थे फिर मैने फिर से किस्सिंग करते हुए अपने दोनो हाथ उसके पीछे लेजाते हुए उसकी ब्रा के हुक खोल दिए. पीछे हटकर मैने उसे धीरे धीरे धकलते हुए बेड पर लिटा दिया. मेरी नज़र उसके छोटे छोटे संतरो से हट ही नही रही थी. धीरे धीरे उसपर झुकते हुए मैं उसकी एक चुचि को मूह मे और दूसरी को हाथ मे भर लिया और बारी बारी बदलते हुए उन्हे चूसने, चाटने और मसलने लगा, ओवर एक्सआइट होते हुए एक दो बार काट भी लिया.