सुबह 7 बजे मेरी नींद खुली तो मैने देखा मेरे कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था, मुझे अच्छे से याद था क़ि मैने दरवाजा भले ही बोल्ट नही किया पर प्रॉपेरेली बंद किया था और बिना लोवर पहने ही सो गया था. मेने नीचे देखा तो लंड महाराज पूरे ज़ोर शोर से सलामी दे रहे थे. इसका मतलब मॉम या सिस कोई तो आया था रूम मे जिसने शायद मुझे नंगा देखा भी होगा. ये सोचते ही हाथ खुद ब खुद लंड को सहलाने लग गया. धीरे धीरे पूरे ज़ोरो से मूठ मारी और सारा माल वही बेड पे टपका दिया. फिर उठा और फ्रेश होके बाहर गया.
मॉम ऐज यूषुयल किचन मे बिज़ी थी, पापा न्यूसपेपर पढ़ते हुए नेहा दी के साथ चाय पी रहे थे.
मे- गूडमॉर्निंग.
मुझे देख कर वो स्माइल करते हुए बोले, “उठ गये साहबज़ादे गूडमॉर्निंग, और अब आगे क्या करना है, कुछ सोचा है”
मे-“पापा जैसा की मैने आपको पहले भी बोला है, मैं किसी नौकरी मे इंट्रेस्टेड नही हूँ. इसलिए अब एम बी ए कर के कोई छोटा मोटा बिज़्नेस स्टार्ट करूँगा. इसके लिए अपने ही शहर का एक कॉलेज सेलेक्ट भी कर लिया है बस रिज़ल्ट आ जाए.” कहकर मैं किचन मे घुस गया और जाकर मॉम को पीछे से हग कर लिया.
मॉम- “बिना कपड़ो क सोना हो तो कम से कम दरवाजा लॉक तो कर लिया कर” –.
मैं ये सोचकर खुश हो गया की वो मॉम है जिसने सुबह मेरे लौड़े के दर्शन किए हैं, मैने पीछे से ही मॉम के गॉल पर किस कर दिया.
मॉम ने मुझे बाहर की और धकेलते हुए कहा , “बाहर बैठो मैं चाय ला रही हूँ.”
चाय के बाद मैं टीवी देखने लग गया, डॅड ऑफीस और दी कॉलेज के लिए निकल गये. लगभग 8:30 बजे हमारी मैड झरना आई और काम मे लग गयी. लगभग 25 साल की थी वो, रीसेंट्ली मॅरीड, मुझे हमेशा बाबू या राजा कहकर बुलाती थी. बहुत सुंदर तो नही पर भरे पूरे शरीर की मालकिन थी, नैन नक्श तीखे, सिंप्ली ब्लॅक ब्यूटी.
नेहा के रूम की सफाई करवाने के बाद मॉम झरना को मेरे रूम मे भेज कर मुझे बोली - “अभी जाके अपना रूम सॉफ करवा लो.”
मैं उठ कर अपने रूम की और चल पड़ा. मैं घुसा ही था की बेड के पास खड़ी झरना मुझे देख कर बोली, “ राजा, ये क्या है? नया बेड शीट गंदा कर दिया!”
“मैने क्या किया..” मैं बोला.
उसके हाथ मे बेडशीट थी और उंगली सुबह मारी हुई मूठ के दाग पर. वो बोली “तुम अभी छोटे हो… किसको याद कर.. पानी गिराया… मा को या दीदी…को.” और हँस दी.
“चुप कुतिया… तुमको याद कर रहा था..” मैं बोला.
“हाय,.. फिर से बोलो…”
“क्या?”
“वोही जो तुमने अभी मुझे कहा..”
“ क्या… कुतिया!”
“हाँ, मुझे… कुतिया कहलाना बहुत अच्छा लगता है…”
“अपने घरवाले को बोलो वो तुझे कुतिया कहकर पुकारेगा, कुतिया …”
“साला कुतिया बनाता है लेकिन कुतिया बोलता नही. अब से तुम मुझे ‘कुतिया’ के नाम से पुकारो…लेकिन अकेले मे..”
शी कंटिन्यूड, “ लेकिन राजा अभी से ये पानी गिराओगे तो कमजोर हो जाओगे और फिर तुम्हारी घरवाली दूसरे के साथ मज़ा मारेगी.. अभी तुम बच्चे हो..”
मैने उसे घूरा. मेरी आँखे उसके लो कट कॉटन के ब्लाउस से झाँकते हुए चुचियो पर जम गयी, नीचे वो लहंगा पहने हुए थी. उसे देख कर मन खराब होने लगा, उसके मम्मो को पकड़ के चूसने का दिल किया.
“कुतिया, तेरा पति तेरे दूध चुसता है या नही..?” मैने पूछा.
जवाब ना देते हुए उसने चादर बदली की फिर बोली “अब इसे गंदा मत करना.. और … ?
“और क्या कुतिया…” आँख मारते हुए मैं बोला.
“ओह.. कुतिया सुनना बहुत अच्छा लग रहा है..”
“बोल ना कुतिया.. पति को अपना दूध पिलाती है?..”
“हा रे …. वो तो मुआ छोड़ता ही नही है”
मैने जाकर उसका हाथ पकड़ लिया और बोला, “ कुतिया, मुझे अपना चुचि चूसने दो,” मैने दूसरा हाथ उसकी चुचि की ओर बढ़ाया तो वो पीछे को हो गयी
“छी.. क्या गंदा बात करते हो” वो बोली “ ना तो तुम छोटे बच्चे ना ही मर्द बने हो…तुम्हे अभी इंतज़ार करना होगा”.
“ कुतिया, प्लीज़ कुतिया ,मैने अभी तक नंगी चुचि नही देखी..प्लीज़ एक बार दूध पिला दो…” मैं रिक्वेस्ट करने के अंदाज मे उसे बोला. पर वो मुस्करा के हाथ छुड़ा के रूम से निकल गयी
मैं अपना पीसी खोल कर उसपे बिज़ी हो गया. कुछ देर मे वो आके मेरे पास खड़ी हो गयी
“क्या हुआ झरना!.”
“झरना नही ‘कुतिया’ बुलाओ.. भाभी जी (मेरी मॉम) नहाने गयी है.. जल्दी से चूस लो..”
मेरा चेहरा 100 वाट के बल्ब की तरह रोशन हो गया. उसकी दोनो चुचि अपने हाथो मे लेता हुआ मैं बोला “ ओह्ह्ह कुतिया तुम बहुत अच्छी हो..”
मैने उसका ब्लाउस खोल दिया. उसने हाथ पीछे ले जाते हुए ब्रा के हुक खोल दिए. उसकी नंगी चुचिया मेरे सामने तनी हुई खड़ी थी, मैं एक के बाद एक दोनो को दबाने और चूसने लग गया. मैने एक हाथ से अपना लोवर नीचे खिसकाते हुए अपना लॉडा बाहर निकाल लिया, फिर लहंगे के उपर से ही उसकी चूत को हथेली मे भरकर भींच दिया. उसने पेंटी नही पहनी थी, मुझे उसका चूत से निकलते कामरस का आभास हो रहा था. मैने उसकी चूत मे कपड़े समेत ही उंगली घुसा दी
“ओह्ह्ह्ह्ह राजा… क्या कर रहे हो.. तुम तो खाली दूध पीना चाहते थे. आह… मत करो, उंगली बाहर निकालो…”
उसने हाथ नीचे किया तो मेरे लौड़े से टकरा गया. तो उसने मेरे लंड को मुट्ठी मे जकड़ लिया.
“राजा.. यह तो पूरा तैयार है…”
“ कुतिया, मुझसे चुदवाएगी….”
“हाँ.. राजा… लेकिन अभी नही”
मैने हाथ उसके लहंगे के अंदर डाल दिया. ममता की तरह उसकी चूत भी चिकनी (शेवन)थी. मैने उसमे उंगली डाल दी.
“बस राजा… मा आ जाएगी” उसने खुद को हटाते हुए अपने कपड़े ठीक किए.
मेरा लॉडा अभी भी बाहर था, वो उसे पकड़ते हुए बोली “ लगता है इसे कमरे के अंदर बंद करना पड़ेगा..” फिर उसने मेरा अंडरवेर और लोवर उपर चढ़ा दिया.
“कुतिया, आज रात को यहा रुक जा खूब जमकर चोदूगा..”
“जल्दी मौका दूँगी” बोलते हुए वो बाहर निकल गयी.