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Incest खूनी रिश्तों में प्यार

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खूनी रिश्तों में प्यार

राज

उमर 21 साल.

उसकी विधवा मा 49 साल खेती करती है,

उसकी छोटी बहन : पूजा उमर 18 साल.

उसकी मौसी डॉली 20 साल.

ये परिवार बिहार का रहने वाला है. यह एक मिड्ल क्लास की फॅमिली है. (राज के पापा बचपन में ही गुज़र गये थे तब राज और उसकी बहन पूजा दोनो छोटे थे. ये कहानी बचपन से ही शुरू होती है.राज के पापा बहुत ग़रीब थे इसलिए उनके मर जाने के बाद उसकी मम्मी दूसरो के खेतो में मज़दूरी करके दो वक्त का खाना जुटा पाती थी. दीवाली के दिन थे लेकिन उसके मा के पास इतना पैसा भी नहीं था की थोड़ा मिठाई भी खरीद कर लाए राज थोड़ा बड़ा था लेकिन उसकी बहन बहुत छोटी थी वो मिठाई मिठाई कहकर रो रही थी. जब उसकी मा के चुप करने से नही चुप हुई तो राज अपनी गोदी मे लेकर चुप कराने लगा .. तभी उनके घर मे उनका पड़ोसी रमनलाल आया और राज को रुपया निकाल कर देते हुए, कहा जाओ बेटा मिठाई खरीद लाओ.

राज दौड़ता हुआ मिठाई खरीदने चला गया. उसकी मा बहुत सुंदर थी अभी 25 साल के उमर मे ही विधवा हो गयी थी.

राज की माँ--भैया आपका एहसान में जिंदगी भर नही भूलूंगी ..

रमनलाल -अरे भाभी जी इसमे एहसान की क्या बात है में आपका मदद नही करूँगा तो किसका करूँगा इतना कहते ही रमनलाल राज की मम्मी की साड़ी का पल्लू खिचने लगा तो उसकी मम्मी चिल्लाने लगी

तबतक राज घर मे आ गया.. राज ने जब देखा की उसकी मम्मी रो रही है और रमनलाल उसकी मम्मी की साड़ी खींच रहा है तो वो जाकर रमनलाल से अपनी मम्मी की साड़ी छुड़ाने लगा..

राज- नही मेरी मम्मी को छोड़ दो.

रमनलाल ने राज को बहुत ज़ोर से धकेल दिया 'चल हट'

राज जाकर कोने मे गिर पड़ा और बेहोस हो गया . इधर उसकी मम्मी ने जब साड़ी नही छोड़ी तो रमनलाल उसको थप्पड़ों से मारने लगा... तो राज की मम्मी ज़ोर ज़ोर से रोने लगी लेकिन दीवाली के पटाको के शोर में उनकी आवाज़ दब जा रही थी इसलिए गाव वाले नही आ रहे थे''''

तभी अचानक राज की बेहोसी टूट गयी तो उसकी नज़र सामने रखी हुई कुल्हाड़ी पर पड़ी..तो ना जाने उसके सरीर मे कहा से हिम्मत आ गयी उसने कुल्हाड़ी को बहुत फुर्ती से उठा लिया तभी रमनलाल उसकी मम्मी की साड़ी खींच कर जैसे ही अपना दाहिना हाथ दूसरी तरफ बढ़ाया तभी राज ने उसके हाथ पर जोरदार बार किया 'रमनलाल का हाथ कटकर कुछ दूर जा गिरा वो बेहोस हो गया. और उसकी मम्मी देखती ही रह गयी ..

अरे बेटा अब तो हम लोगो को गाँव वाले जिंदा नही छोड़ेंगे... अब तो यहा से भागना पड़ेगा..

राज -चलो मम्मी हमलोग नानाजी के यहा रहेंगे

उसकी मम्मी ने पूजा को गोदी मे उठाई और घर से निकल पड़े..राज के कोई मामा नही थे लेकिन उसकी एक मौसी थी जो उसी की उमर की थी ... जंगलो के रास्ते भागते भागते करीब 3 बज़े रात को राज अपनी माँ के साथ सायमपुर पहुच गया..
 
वहाँ जाने पर उसके नाना-नानी ने पूछा क्या हुआ बेटा तुम इतनी जल्दी कैसे आ गयी वो भी इतनी रात को तब राज की मा ने रमनलाल दवारा किए गये सारे करतूत सुनाया जब राज के नाना जी ने सुना की राज ने किस तरह रमनलाल का हाथ काट दिया तो उन्होने राज को गले लगा लिया ...

नानाजी: राज बेटा ये बात किसिको भी मत कहना नही तो हमलोग को पोलीस पकड़ ले जाएगी .

राज -नानाजी में इस बात को भुल कर भी नही कहूँगा..

फिर राज और उसकी मम्मी ने खाना खाया और सो गये.. उनलोगो को नींद बहुत जल्दी ही आ गयी सुबह जब मेरी नींद खुली तो मा मेरे सिर पर हाथ फेर रही थी जैसे ही मेने आख खोला तो मेने देखा की मा के बगल मे एक मेरे ही उमर की लड़की बैठी हुई है. मेने मा से पूछा मा ये कौन है..

मा -बेटा ये तुम्हारी मौसी है.. जल्दी से तैयार हो जाओ तुम्हारे नाना जी तुम्हारा और डॉली का एडमिशन स्कूल मे करवा देंगे इतना कहकर मा चली गयी .

राज -डॉली मौसी तुम भी तैयार हो जाओ में अभी तैयार होकर आता हू..में नाश्ता किया क्योकि सबलॉग सुबह ही नाश्ता कर चुके थे ?

में और मौसी नानाजी के साथ स्कूल में चले गये.. हमारा अड्मिशन 12 क्लास मे हो गया हम लोग घर पर आ गये ..कल से पढ़ने के लिए बोलकर ..

नाना जी खेती बाड़ी करते थे.. नाना जी के मकान मे 5 कमरे थे एक मुझे और मौसी को दिया गया उसमे हमलोग की किताबें कॉपी थी . दूसरा रूम मम्मी और पूजा के लिए तीसरे रूम मे नाना - नानी सोते थे एक रूम में किचन था दूसरा गेस्ट के लिए ..

नानाजी: राज तुम्हें और डॉली इस रूम मे सोना है पढ़ना है.

मैं -नही में इसके साथ नही सो उंगा .

मा: नही बेटा ऐसा नही बोलते वो तुम्हारी मौसी है ..

मैं -ठीक है तुम कहती हो तो सोने देता हू ..फिर हमलोग सोने के लिए चले गये .. में दूसरी तरफ मूह घुमा कर सो गया डॉली मौसी दूसरी तरफ ... आधी रात को मेरे सरीर मे कुच्छ गरम महसूस हुआ तो मेरी नींद अचानक खुल गयी तो पता लगा की डॉली मुझसे चिपकी हुई है .. मेने उसको धकेल दिया ..तो वो नीचे गिर गयी ..और वो अपना मुँह दूसरी साइट में करके रोने लगी. अभी हम दोनों काफ़ी छोटे थे ..

जब मेने उसकी तरफ देखा तो वो अपना हाथ पकड़ कर रो रही थी में तो काफ़ी डर गया उसके पास चला गया और अपने हाथ से उसका आसू पोछने लगा डॉली मौसी मुझे माफ़ करदो .. और उसको चुप कराने लगा .. वो चुप नही हुई और खड़ी होकर दूसरी तरफ मूह घुमा कर रोने लगी मेने उसको अपनी तरफ घुमाया ,"एक हाथ से उसका चेहरा पकड़ कर दूसरा हाथ उसके सर पे रख कर में तुम्हारी सर की कसम खा कर कहता हू तुम्हे कभी नही अलग करूँगा इतना सुनकर डॉली मेरी बाहों मे समा गयी.

मेने भी उसको अपनी बाहों मे कस लिया फिर वो मेरी बाहों मे समाए समाए सो गयी सुबह हम दोनो ने खाना खाया पढ़ने चल दिए. चुकी हम दोनों का पहला दिन था. रास्ते मे ही डॉली बोली 'देखो राज तुम मुझे मौसी नही कहोगे, एक तुम मेरे ही उमर के हो, दूसरे हम दोनो एक ही क्लास पढ़ रहे है .

जैसी आपकी हुकुम सरकार इतना कहकर दोनो हँसने लगे...

उस दिन से तो दोनो की जिंदगी में बहार आ गयी.संग मे पढ़ना, खेतो की ओर जाना, खाना, सब शुरू हो गया, इसी तरह खेलते, पढ़ते दोनो क्लास 10+2 मे चले आ ये. ...

चुकी हम दोनो अब बड़े हो गये थे लेकिन अ भी भी दोनो एक ही साथ सोते थे . एक दिन रात के समय दोनो बैठ कर टीवी देख रहे थे इनके साथ राज की बहन पूजा भी बैठी हुई थी. राज फिल्म चल रहा था.. बैठे बैठे पूजा को नींद आने लगा वो राज की गोदी मे सो गयी .. राज ने उसको उठाया और मा के कमरे मे सुला दिया, फिर आकर डॉली के साथ टीवी देखने लगा.. फिल्म देखते देखते डॉली राज की गोद मे सर रखकर टीवी देखने लगी. राज उसके रेशमी बालो मे हाथ फिराने लगा .बालो मे हाथ फिराते - फिराते अचानक मेरा हाथ डॉली के छाती पहुच गया .चुकी डॉली 23 और राज 23 यियर्ज़ के हो गये थे.

राज को डॉली की छाती सहलाना बहुत अच्छा लग रहा था. डॉली अब निखर चुकी थी उसके लंबे लंबे बाल सुंदर और एकदम भोली भाली चेहरा किसी का मोह सकता .अचानक राज ने डॉली की छाती मसल दिया. तो डॉली एकदम उठकर बैठ गयी . राज के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया. रोते हुए अंदर भाग गयी .. राज उसको देखता रह गया. राज ने टीवी बंद किया और वो भी अंदर चला गया

'अंदर से दरवाजा बंद करके डॉली के पास पहुचा तो 'डॉली तकिये मे मूह छुपाए रो रही थी'

अरे तुम क्यो रो रही हो 'थप्पड़ मुझको मारी थी रो तुम रही हो' इतना कहकर राज डॉली के पास बैठ गया ..
 
तुमने मेरा छाती क्यो दबाया था तुम बहुत गंदे हो..

ओह्ह्ह्ह्ह ये बात है देखो डॉली में तुमको बचपन से ही बहुत चाहता हू. मेरे मन मे तुम्हारे प्रति कोई गंदा बिचार नही है तुम्हारे सिवा मुझे कोई अच्छा नही लगता है

..देखो फिर से में तुम्हारा छाती मसल रहा हू .. इतना कहकर डॉली को गोदी मे खींच कर उसके पूरे चेहरे को चूमने लगा डॉली मुझको चूमने लगी .चूमते हुए मैं उसके दोनो खरबूज़े को दबाने लगा तो मेरे पूरे सरीर मे सुरसुरी दौड़ गयी मेरा लंड खड़ा हो गया में और ज़ोर ज़ोर से उसकी छाती दबाने लगा .

में जैसे ही उसके सलवार के अंदर हाथ घुसाया तो डॉली ने मेरा हाथ पकड़ लिया ….नही राज वहाँ नही अभी हमलोगो का उमर नही है 2 साल और बर्दास्त करो .उपर जितना मर्ज़ी कुच्छ भी कर लो.

इधर राज की मम्मी भी 38 साल की हो गयी थी उसका बदन गदराया हुया था.

अब तो राज और डॉली की ऐसी स्थिति हो गयी थी की दोनो को कोई अलग करने की कोसिस भी करता दोनो मर जाते .. पढ़ने मे दोनो बहुत तेज दोनो एक दूसरे का हेल्प किया करते थे . दोनो ने 10 का एग्ज़ॅम दिए . रिज़ल्ट 3 माह के बाद आने वाला था इसलिए दोनो घर पे रहने लगे ..

एक दिन पूजा स्कूल चली गयी डॉली पड़ोस मे ही चली गयी. राज अपने नाना नानी के साथ खेतो मे घूमने चला गया लेकिन डॉली के बिना उसे अच्छा नही लग रहा था . वो घर पर आ गया . घर देखा की उसकी मा लेटी हुई वो उनके पास चला गया

अरे मा तुमको क्या हुआ है , इतना कहकर उसने मा के सर पे हाथ रखा तो उसको एक झटका लगा उसकी मा का पूरा सरीर बरफ के समान ठंडा हो गया था .उसने जल्दी से कंबल उठाया उनको ऊढा दिया , जाकर डॉली को खोजने लगा लेकिन डॉली कही नही मिली तो उसने सारे दरवाजे बंद कर दिए अपनी माँ के रूम मे चला आया उसने फिर अपनी माँ को हिलाया लेकिन वो तो बेहोस हो चुकी थी . राज कही पढ़ा था की औरत का सरीर यदि ठंडा पड़ जाए तो मरद अपने सरीर से गर्मी दे तो वो ठीक हो सकती है. राज ने अपने सारे कपड़े निकाल दिया फिर जल्दी से अपनी माँ की सारी निकाल दिया , ब्लाउज का भी एक-एक बटन खोलने लगा उसको भी सरीर से अलग कर दिया .बड़ी-बड़ी चुचियाँ देखकर इसका पूरा सरीर काँपने लगा.

काँपते हुए हाथो से साया का नाडा खोला और उसको भी निकाल दिया .राज ने आज तक किसी को नंगा नही देखा था लेकिन अपनी ही मा को नंगा देखकर इसका पूरा बदन काँप रहा था. सेक्स के बारे मे किताबो मे पढ़ा था लेकिन किया नही था, देरी नही करते हुए राज अपनी माँ को सीधा लिटाया और उनके उपर चढ़ गया. 'हे भगवान मुझको माफ़ करना' इतना कहकर अपनी माँ के उपर चढ़ गया 'अपने उपर कंबल खिच लिया 'उनके होंठो को चूसने लगा.

मुझे तो उनके होंठ बरफ के टुकड़ो के समान लग रहा था . लेकिन लगातार होंठो को चूसने से उनका सरीर थोड़ा हिला , बस में उनके उपेर से हटकर उनका सारा कपड़ा किसी तरह पहना दिया 'मेने भी अपना शर्ट पैंट पहन लिया ' क्योकि पूजा के पढ़ के आ ने का समय हो गया था, मेरे मन तो मचल रहा था की ' मा को और चुमू उनके पूरे सरीर से खेलु लेकिन में 'कोई रिक्स नही लेना चाहता था ' इसीलिए में अब में मा के पास बैठ गया

तबतक किसीने दरवाजा खटखटाया ' मुझे लगा की डॉली होगी ' और मेने जाकर दरवाजा खोला मेरा शक सही निकला डॉली ही खड़ी थी .

राज :- इतनी देर से कहाँ थी तुझको मालूम है मम्मी को क्या हुआ है ,"

क्या हुआ दीदी को तुम साफ - साफ क्यो नही बता रहे हो ,

क्या हुआ कह रही हो उनका पूरा सरीर बरफ के समान हो गया है. इतना कहते ही मेरे आँखो से अंशु टपकने लगे..

बच्चों के जैसे क्यो रो रहे हो. चलो देखते है.. फिर दोनो अंदर आते है ,

डॉली:-राज तुम दीदी के पैर ज़ोर ज़ोर से रगडो में हाथ रगड़ती हू. फिर दोनो मिलकर हाथ पैर की तलहटी रगड़ने लगे . करीब 10 मिनट के बाद राज की मा धीरे धीरे आँख खोलने लगी..

जब उन्होने इधर उधर देखा तो आस-पास ' डॉली राज ' दिखाई दिए . अरे डॉली तुम दोनों मेरे हाथ पैर क्यो रगड़ रहे हो..

राज देखो दीदी होश मे आ गई है राज .. दीदी तुम्हारा पूरा सरीर बरफ के समान ठंडा हो गया था.और तुम बेहोस हो गयी थी, ये बतलाओ तुम्हारा सरीर ठंडा क्यो हुआ था ; तुम अभी होश मे आई हो..

मुझे सुबह मे ही सर मे दर्द था में जैसे ही राज से बोलने वाली थी तभी मेरी नज़र टेबलेट पे पड़ी जो अलग रखी हुई थी लेकिन मुझे क्या मालूम था की ' की दोनो टेबलेट बुखार के ही है , बस मेने दोनो ही टेबलेटो को बुखार के ही टॅबलेट ही समझ कर खा लिया बस फिर क्या था 'मुझे चक्कर आने लगा और में बिच्छवान पे गिर गई ' '

कोई बात नही राज तुम जाकर दवाई ले आओ (चुकी उस टाइम हमारे गाँव मे डॉक्टर नही थे ) राज दवाई लाने के लिया चला गया तबतक पूजा भी पढ़कर आ गई. पूजा ने आते ही पूछा 'मम्मी तुमको क्या हुआ है'

कुच्छ नही थोड़ा सा ठंड लग रहा है '

पूजा भी आकर बैठ गई ' फिर पूजा और डॉली दोनो ने मिलकर हाथ पैर रगड़ने लगे' जिससे कि थोड़ा सा और गर्मी आ जाए' . कुच्छ ही देर के बाद राज दवाई लेकर आ गया .

राज:-मम्मी दवाई खा कर तुम सो जाओ

खाना आज डॉली और पूजा बनाएगी.

ठीक है जैसे तुमलोगो की मर्ज़ी लेकिन पहले थोड़ा सा पढ़ लो ,

फिर हम तीनो ने कुच्छ देर तक पढ़ाई की . उसके बाद डॉली और पूजा खाना बनाने चली गयी
 
हम तीनो ने कुच्छ देर तक पढ़ाई की . उसके बाद डॉली और पूजा खाना बनाने चली गयी

में टीवी देखने लगा . तभी नाना - नानी भी आ गये . नानाजी मेरे पास ही बैठ गये . और नानी किचन मे चली गयी थोड़ी देर बाद नानी किचन मे से आई ' बेटा डॉली बोल रही थी की दीदी की तबीयत खराब है,

हा मम्मी का तबीयत खराब है लेकिन घबराने की कोई बात नही मेने दवाई खिला दी है वो सोई हुई है ' जाइए आप भी देख लीजिए "

नानी मा के पास चली गयी. तब नानाजी बोले राज तुमको एक बात बताना चाहूँगा लेकिन अभी नही खाना खाने के समय. तुम टीवी देखो अभी फ्रेश हो कर आता हू.

थोड़ी देर बाद डॉली किचन मे से आई ' राज मेने तुम्हारा मनपसंद खाना तैयार किया है ' लेकिन में तुमको अपने हाथ से खिलाउन्गी.

में तुम्हारे हाथ से नही खा उँगा तुम्हारे हाथ बहुत गंदे है .

जाओ में तुझसे नही बोलूँगी और दूसरे तरफ खड़ी हो गई .

मेने टीवी बंद किया और डॉली को अपनी तरफ घुमा लिया..

मेने देखा की डॉली एकदम बच्चों के जैसे रो रही थी . मेने उसके आँसू पोच्छा और गोदी मे उठा लिया . तुम भी ना बात - बात पे रो देती हो . अरे तुम ने सोच भी कैसे लिया, ' की तुम खिलओगी और में नही खाउन्गा , में तुमको चिढ़ा रहा था.

अगर तुम अपने हाथो से जहर भी खिलओगी तो में हँसते हँसते खा लूँगा.

इतना सुनते ही डॉली ने मेरे होंठो पे अंगुली रख दिया . आज के बाद तुम्हारे ज़ुबान पे भी ऐसी बात नही आना चाहिए नही तो में अपना जान दे दूँगी. इतना कहकर डॉली मेरे गले मे दोनो बाहें डालकर बिल्कुल मेरे सीने से लग गयी.

कबतक मेरे गोदी मे बच्चों की तरह दुबकी रहोगी जल्दी नीचे उतरो मुझे वजन लग रहा है. डॉली इतना सुनते ही मेरे सीने पे मुक्का मारने लगी.

में उसको लेकर मा के रूम मे चला आया.. डॉली बिल्कुल मेरे सीने से लिपट गयी. उसको पता ही नही चला .

नानी ' डॉली को बच्चो की तरह गोदी मे चढ़ने का शौक हो गया है, हा ,हा इतनी बड़ी हो गयी है गोदी मे घूमे गी.

मेरी और नानी की बात सुनकर डॉली ने जब देखा तो : वो बिल्कुल शर्मा गयी; क्योकि वो मा के रूम मे थी नानी और मा उसको देख के मुस्कुरा रही थी .....

थोड़ी देर बाद पूजा भी आ गई. भैया बाते बंद' '' खाना बन गया है.

तुम लोग खाओ. में अपने रूम में खाउन्गा.

सब लोग खाना खाने लगे और में अपने रूम जाकर बिस्तर पे लेट गया. और सोचने लगा डॉली भी इतनी बड़ी हो गयी है ओर बच्चों जैसी रोने लगती है. कितना भोला- भाला चेहरा है कितनी मासूमियत उसके चेहरे पर झलकती है.

कितना सुंदर चेहरा है, उसके होंठ तो एकदम गुलाब के पखुंदियो जैसी है. कितने सुनहरे बाल है ओर कितने लंबे है.

में डॉली के बारे मे ही सोच रहा था की एकदम

डॉली: ये राज महाराज क्या सोच रहे है. उठिए खाना नही खाना है क्या.

राज : तुमने खा लिया.

डॉली नही .जल्दी उठो,

में एकदम से उठ के बैठ गया. चलो खाना लाओ .

ओये मिसटर चलो मूह खोलके चुपचाप बैठे रहो खाना में खिलाउन्गी .

डॉली ने पहला कॉर खिलाया और पूछी कैसा है.

में -नमक ज़यादा है पूछ रही हो कैसा है में नही खाउन्गा.

ये सुनकर डॉली ने दूसरी तरफ मूह घुमा लिया, अरे मेरी जान में तो केवल मज़ाक कर रहा था. तुम भी ना चलो इधर मूह घुमाओ.

सच मे तुम मज़ाक कर रहे थे ओर डॉली मेरी तरफ घूम गयी.

चलो मूह खोलो में भी तुमको खिलाउन्गा,

डॉली ने जैसे ही मूह खोला मेने उसके मूह के पास से लेजाकर अपने मूह मे डाल लिया. वो फिर मूह फूला कर बैठ गयी .

जाने दो अबकी बार पका खिलाउन्गा फिर उसके मूह के पास एक कौर ले गया जल्दी से मूह खोलो, नही तो फिर खा जा उँगा . जैसे ही डॉली ने मूह खोला तो अबकी बार मेने खिला दिया.

डॉली खुस हो कर खाने लगी . डॉली तुम तो ऐसे खुस हो रही हो जैसे पहले बरसात मे मेढक और कच्चुआ खुस होते है. अबकी बार डॉली ने मूह नही फुलाया बल्कि मेरे जाँघ पे एक जोरदार मुक्का जमा दिया. मुझे उतना तो नही लगा लेकिन मेने हँसते हँसते कहा अब खाना खा लेते है .फिर हम दोनो ने खाना निपटाया और डॉली बर्तन रखने चली गयी. जब वो बर्तन रख कर आई तो मेने उसे पीछे से पकड़ लिया.अरे ये क्या कर रहे हो . लेकिन में तो बेहरा हो गया था में उसको बिस्तर पे लिटाया उसके ऊपर चढ़ गया

तुमने खाते समय मुझे मारा था इसका बदला ज़रूर लूँगा. इतना कहते ही मेने उसके गालो को मूह मे भर लिया और उसकी छाती को मसल दिया. फिर डॉली बहुत ज़ोर से दी...दी ?

इतना बोलना था की मेने उसके मूह पे हाथ रख दिया , ऐसे क्यो चिल्ला रही हो अगर कोई आ जाएगा तो. तभी अचानक कोई अंदर आ गया.

जब मेने पीछे मूड कर देखा तो मेरी गान्ड ही फॅट गयी

"सामने मा खड़ी थी में एकटक मा की ओर देखने लगा ' सबसे बड़ी बात ये थी की में इतना घबरा गया की में डॉली के ऊपर ही चढ़ा हुआ था डॉली की भी बोलती बंद हो गई थी वो भी चुपचाप मा की ओर देख रहा था . तभी बिल्ली ने कुछ गिराया तो में तुरंत उसके ऊपर से हट गया.

मा कुछ देर हम दोनो को घुरती रही और बिना कुच्छ बोले ही वहाँ से चल गयी.

हम दोनों एक दूसरे के मूह देखने लगे की अब क्या होगा.

तभी डॉली बोली ' सब तुम्हारी ग़लती से हुआ है तुम बिना दरवाजा बंद किए ही मुझपर टूट पड़े. अब दीदी हम दोनों को घर से निकाल देगी इतना कहके डॉली दूसरी तरफ मूह घुमा कर बैठ गयी.
 
लो अब चिल्लाया इसने मुझे ही दोष दे रही है ' चिल्ला तो ऐसे रही थी की जैसे मेने इनका रेप कर रहा था. अब मूह घूमने से कुच्छ नही होगा

'बात बिगड़े उससे पहले चलो मा की पैर पकड़ कर माफी माँग लेते है.

मेरे बात से डॉली तुरंत राज़ी हो गयी. हम दोनों रूम से बाहर निकल गये.

हम दोनो मा के रूम मे गये तो मा अपने रूम मे नही थी केवल पूजा ही वहाँ सो रही थी. उसके चेहरे पे मासूमियत झलक रही थी. में उसके माथे को धीरे से एक चुंबन लिया

वहाँ से में और मेरी जान डॉली दोनो मा से माफी माँगने के लिए निकले और टीवी वाले रूम मे चल दिए वहाँ जाने पर ' मा दोनो पैर नीचे लटकाए ऊपर देख रही थी.

डॉली ने मेरी ओर इशारा किया. में और डॉली दोनो ने मा के पैर पकड़ लिए.

हम दोनो '' मा आ, दीदी दी दी " हमको माफ़ कर दो हम फिर ऐसा नही करेंगे.

हम दोनो बहुत धीरे धीरे बोल रहे थे की कोई दूसरा ना जाग जाए.

हम दोनों को देख कर मा भी एकदम चौंक गयी.

अरे मेरा पैर तो छोड़ो & बताओ तुम दोनों क्या कर रहे थे.

अरे कुछ नही डॉली मुझे गुदगुदा रही थी तो मे अपना बदला लेने के लिए उसको गुदगुदा रहा था .

अच्छा कोई बात नही है डॉली तुम जाओ तबतक ये आ रहा है.

डॉली सोने के लिए चली गयी.

मेरी तो फिर से गान्ड फॅट गयी .

में मा की ओर देखने लगा '

मा - हा तो महराज तुम सच मुच डॉली को गुदगुदी कर रहे थे. तुम्हे मेरी कसम

इतना कहते ही मा ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने सर पे रख दिया. अब तो मेरी सीटीपिटी गुम हो गयी, में एकदम चुप हो गया.

मा - बोलता क्यो नही .

राज - मा तुम क्रोधित हो जाओगी.

मा-अगर नही बताया तो में ज़रूर क्रोधित हो जाऊंगी.

राज-ठीक है बता देता हू में डॉली मौसी से

बहुत प्यार करता हू अगर वो भी मुझे बहुत प्यार करती है ' और हम दोनो का प्यार एकदम सच्चा है '.अगर मेरी डॉली को कोई भी छीनने की कोसिस किया तो में उसे जान मार दूँगा लेकिन डॉली की अगर कही शादी होई तो उसकी शादी मेरी मौत एक ही दिन होगी.

अचानक ना जाने मा को क्या सूझा उसने मुझे खिच अपने गले लगा लिया.

नही बेटा मरे तुम्हारे दुश्मन तुम तो मेरे जिगर का टुकड़ा हो, अरे तुमने सोच भी कैसे लिया की में डॉली को तुमसे छीन लूँगी. लेकिन बेटा ये दुनिया कभी नही मिलने देगी.

वो बात है ये मुझ पे छोड़ दो में सब संभाल लूँगा . इतना कहते ही मेने अपना चेहरा मा के सीने मे छुपा लिया .

मा ने भी मुझको अपने से चिपका लिया 'शायद मा को मेरे ऊपर ममता का सागर उमड़ रहा था.
 
कुछ देर हम ऐसे ही खड़े रहे.

मा के शरीर की गर्मी से मेरा लंड खड़ा हो गया.

शायद मा को इस बात का पता चल गया उसने मुझको धीरे छुड़ाया.

मेरे बालो को सहलाते हुए जाओ बेटा सो जाओ.

मा अपने रूम चली गयी और में अपने रूम मे ख़ुसी से झूमता हुआ चल गया. पहले दरवाजा बंद किया.

फिर शॉर्ट पैंट निकालकर केवल अंडरवेर मे ही डॉली के बगल मे लेट गया.

वो नाइटी पहनी सो रही थी. मेरा तो लंड एकदम खड़ा हो गया था. मेने डॉली को जगाया लेकिन वो नही जागी. उसका नाइटी धीरे से निकाल दिया तो मेरी आँखे चौधिया गयी डॉली ने केवल पैंटी पहनी हुई थी. उसके चुचक इतने बड़े हो गये थे की हाथ मे पकड़ने पर आराम से पूरा आ जाते लेकिन मेने डॉली की छाती को मेने नही छुआ. लेकिन साला मेरा लंड अंडरवेर फाड़ कर बाहर आना चाहता था. इधर डॉली बेसूध सो रही थी.

उसके होंठ एकदम गुलाब के पखुंडियो के तरह चमक रहे थे.

अब मेरी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी. मुझे रहा नही गया मेने डॉली को खींच कर अपने सीने से लगा लिया.

उसको नगी छातिया जैसी मेरे सीने पे पड़ी मेरे सारे शरीर मे करेंट की लहर दौड़ गयी.

मेरे होंठ एकदम उसके होंठ से मिल गये....

में डॉली के होंठो को पागलो को तरह चूमने लगा. मुझे तो ऐसा लगा की जैसे में , स्वर्ग में ही हू. मेरे बेतहाशा होंठ चूसने से डॉली एकदम हड़बड़ा कर आँख खोली, मुझे देखकर वो भी मुझे चूमने लगी. डॉली को चूमते देख मेने उसको अपने नीचे किया और बुरी तरह चूमने लगा.

अब धीरे धीरे मेरे हाथ उसके उभारों पर सरकने लगे. जैसे ही मेरे हाथ डॉली के नंगी उभारों पर पहुचे तो

उत्तेजना के कारण मेने थोड़े ज़ोर से उसके उभारों को मसल दिया. मेरा मसलना था की डॉली बहुत ज़ोर से चीखी. वो तो मेरे होंठ उसके होंठ से मिले हुए थे जो उसके सारे चीख मेरे मूह में ही दब कर रह गयी.

में थोड़ी देर वैसे ही उसके होंठो को चूस्ता रहा, फिर उसके ऊपर से हट कर सीधा लेट गया.

मेरे सीधा लेट ते ही डॉली ने मेरे सीने पर मुक्को की बरसात कर दी मेने उसके हाथ नही पकड़ा. ना जाने उसको क्या हुआ वो मारते मारते मेरे सीने में सर कर रोने लगी.

मेने तुरंत ही उसको बहते हुए आँसुओ को जीभ चाटा.

राज-मारी मुझको रो रही हो तुम जैसे तुमको ही चोट लगा हो.

डॉली-तुमने मेरा छाती इतने ज़ोर से क्यो मसला इसलिए मेने तुमको मारा.

राज-वो तो उतेजना के मारे रहा ना गया.

फिर तुम हो इतनी सुंदर की कोई बूढ़ा भी कपड़ो की ऊपर से देख ले तो उसका भी खड़ा हो जाए लेकिन इस समय तो तुम बिल्कुल नगी हो.

मेने फिर डॉली को अपने ऊपर खींच कर उसके रसीले होंठो को चूसने लगा.

डॉली मेरे नंगे सीने पर अपने कोमल-कोमल हाथ घुमाने लगी.

में अब उसके होंठो को चूस्ते हुए अपने दोनो हाथों को उसके पैंटी के अंदर घुसा कर उसके नंगे चुतड़ों को मसलने लगा. उसके चुतड़ों को मसलने से डॉली और ही उत्तेजित हो गयी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी.

अब डॉली की साँसे एकदम भारी हो गयी उसने मेरे मूह में अपना जीभ डाल दिया.में उसके जीभ को चूस्ते हुए उसके नंगी उभारों को मसलते हुए डॉली को अपने से एकदम चिपकाने लगा क्योकि मेरा लंड एकदम फटने के कगार पर था.

अचानक डॉली का शरीर अकड़ गया और उसने मेरे होंठ को काट लिया.

मेरा भी संयम टूट गया जैसे में भी झड गया, मुझे तो ऐसे लगा की जैसे शरीर से सारा खून निकल गया हो. शायद डॉली का भी यही हाल था. वो मेरे ऊपर एकदम सुस्त पड़ी हुई थी और हाँफ रही थी .
 
डॉली ने एकदम से मेरे माथे पर एक किश किया फिर मेरे सीने पर अपना सर रख कर " लव यू राज" '

लव यू टू मेरी जान' कहकर में ने डॉली को अपनी बाहों मे समेट लिया. फिर ना जाने कब हम दोनो की आँखे लग गयी. फिर हम दोनो नंगे ही एक दूसरे के बाहों में बाहें डाले सो गये.

सुबह हम दोनों की बहुत ही देर से नींद खुली लगभग 10:00 बज रहे थे . हमने जल्दी से कपड़े पहने और रूम से बाहर निकल गये.

मा आँगन मे कुर्सी पे बैठी हुई थी.

मा की नज़र जैसे ही हम दोनो पर पड़ी

बहुत जल्दी उठ गये लगता है सुबह हो गयी है'.

डॉली- दीदी पता ही नही चला कब सुबह हो गयी .

माँ-अब तुम दोनो छोटे बच्चे नही हो 'बड़े हो गये हो'. अच्छा कोई बात नही जाओ जल्दी फ्रेश होकर

नाश्ता कर लो.

हम दोनो ने फ्रेश होकर नाश्ता किया .

राज-मा ,में और डॉली मौसी घूमने जा रहे है.

माँ-तुम दोनों आज घूमने नही बल्कि खेतो में जाओ फसल की रख वाली करने.

राज- नाना नानी कहाँ गये है .

माँ -तुम्हारे नाना नानी सहर गये है.

हा एकबात और दोपहर का खाना लेते जाओ वही खा लेना.

में और डॉली खेतो मे चल दिए. फिर दोपहर में खाना खाए .फिर हमने जंगलो में घूमने का प्लान बनाया

(चुकी हमारे खेतो से थोड़े ही दूरी पर जंगल था)

घूमते घूमते काफ़ी देर हो गयी थोड़ा अंधेरा भी हो गया. तभी डॉली बोली राज थोड़ा उधर से आती हू तुम यही रहो. में वही नीचे बैठ गया शायद डॉली पेसाव करने गयी होगी.

तभी मेरी नज़र एक सुंदर सी डाली पड़ी जो नीचे टूटी हुई थी वो लगभग 3फीट लंबा और 1फीट मोटा था.

मेने उसको जैसे ही उठाया "तभी मेरे कानो में डॉली की जोरदार चीख सुनाई दी 'राज र आ ज.

में एकदम हड़बड़ा कर खड़ा हो गया डॉली जिस तरफ़ गयी थी उसी तरफ दौड़ा लेकिन वो डंडा मेरे हाथों मे ही था , में जैसे ही डॉली के पास पहुँचा तो देखा की दो लड़के उसके दोनो हाथ पकड़े हुए थे एक लड़का सलवार को फाड़ दिया डॉली के माथे से खून बह रह था. वो बेहोश हो गयी थी. जो लड़के हाथ पकड़े हुए थे उनके सिर पे मेने एक जोरदार बार किया दोनो धडाम से नीचे गिर गये.

दोनो के गिरते ही जो लड़का डॉली को पकड़ा हुआ था वो डॉली को छोड़ मेरे ऊपर झपटा . मेने डॉली को एक हाथ से संभाला.

वो लड़का एक चाकू से मुझपे बार किया में डॉली को संभालते हुए एक जोरदार लात उसके पेट मे मारा .

वो लड़का उच्छलता हुआ एक पेड़ से टकराया और बेहोश हो गया.

मेने डॉली की ओर देखा वो बुरी तरह से खून से लथपथ हो चुकी थी ऊपर से एकदम नगी थी. में तुरंत अपने रुमाल से उसके सर पर बाँधा और अपना शर्ट निकाल कर उसे पहना दिया.

अब एकदम अंधेरा हो गया था मेने डॉली को अपनी गोदी मे उठाया घर की ओर चल दिया..

घर पहुचते-पहुचते काफ़ी अंधेरा हो गया. डॉली का खून रुक गया था. वो अभी तक होश में नही आ ई थी. मेरा दिल बहुत घबरा रहा था. जब में घर पहुँचा तो मा मेरा इंतज़ार कर रही थी. में जब घर में एंटर हुआ तो

माँ- (डॉली को देखते हुए) इसको क्या हुआ में कुच्छ नही बोला डॉली को मा वाले रूम में बेड पे लाकर सुला दिया.

मा ने जब डॉली को खून से लथपथ देखा तो एकदम से चिल्लाई पू... पूजा...आ....

मा की आवाज़ सुनकर नाना-नानी ओर पूजा दोनो आ गये. पूजा तो मेरे गले लग कर रोने लगी.

राज-अरे चुप करो कुच्छ नही हुआ हल्का सा चोट लग गया है. तुम दोनो चुप रहो तब तक मेने नानीजी पानी लाई मेने डॉली के मूह पे छींटे मारे. मूह पे पानी मारते ही कमाल हो गया. डॉली ने एकदम से आँखे खोल दी.

डॉली आँखे खोलते ही ज़ोर से चिल्लाई ओर एकदम से मेरे सीने से लिपट गयी.मुझे लगा की शायद डर गयी हो.

राज-नाना जी आप जाके वैद्य जी को बुला लाइए में तबतक डॉली का सॉफ कर देता हू.

नानाजी वैद्य जी को बुलाने चले गये.

राज-मा तुम पानी थोड़ा गरम करके लाओ.

माँ-हा बेटा अभी लाती हू

अभी तक डॉली मेरे से चिपकी हुई थी.मेने डॉली मौसी को धीरे से अलग किया ओर गोदी में बैठा लिया.पूजा मुझ को ओर डॉली को एकटक देख रही थी.

पूजा की मासूम आँखो में से लग रहा था की अभी रो देगी.

तभी मा गरम पानी लेकर आ गयी, मेने रुमाल को खोलकर नीचे फेंक दिया. मा धीरे धीरे खून जो सुख गया था. उसको सॉफ करने लगी.

थोड़ी देर में नाना जी वैद्य जी को लेकर चले आ ये. वैद्य जी ने डॉली को देखा तो कहा "घबराने की कोई बात नही है हल्का सा सिर पे कट हो गया है 2 / 4 दिन में ठीक हो जाएगा" में पट्टी बाँध देता हू. बस आराम कीजिए. दवाई टाइम पे खिला दीजिएगा.
 
वैद्य जी के जाने के बाद सब लोग पूछने लगे तो मेने सारी बाते बता दिया. तभी मुझको मेरी पूजा बहन का ध्यान आया लग रहा था की वो अब रो देगी,

मेने डॉली को अपनी गोदी मे से उतारा पूजा को अपने पास खींच लिया पूजा मेरे पास आते ही अचानक सीने से लग कर बच्चो जैसे रोने लगी.

राज - पूजा बेटा तुम क्यो रो रही हो.

मेने पूजा के दोनो कंधो को पकड़के अलग किया

राज:- पूजा मेरी आँखो में देख के बताओ की तुम क्यो रो रही हो. ओर उसके सारे आँसुओ को अपने होंठो पीकर सॉफ किया. धीरे धीरे उसका रोना बंद हो गया वो फिर् मेरे गले से लग गयी.

अब में उसके बालो में हाथ फेरने लगा.

राज - अब बताओ की तुम क्यो रो रही थी.

पूजा-भैया में मौसी को देख कर डर गयी हू देखो ना उनका सिर फॅट गया है.

राज-अरे मेरी नटखट बहना कुच्छ नही हुआ हल्का सा कट लग गया है. ठीक हो जाएगी बस.

मा ओर नानाजी-नानीजी हमारा प्यार देख कर बहुत खुश हुए. लेकिन पूजा मेरे पास में रह गयी.

उधर डॉली भी सो गयी ओर पूजा भी मेरे गले से लगे सो गयी.

मा ओर नानीजी ने मिलके खाना बनाया.

माँ- राज बेटा आओ खाना खा लो.

मेने डॉली की ओर देखा वो सोते हुए उसका चेहरा बहुत ही प्यारा लग रहा था.

मेने धीरे से उसके माथे को चूम लिया.

में जैसे ही डॉली के माथे को चूमा उसने अपनी आँखे खोल दी.

राज- जान चलो खाना खा लो मा बुला रही है

डॉली-हा चलो खा लेते है

फिर मेने पूजा चुपचाप उठाया ओर खाना खाने वाले रूम में आया, पूजा को जैसे ही कुर्सी पे बैठाया वो हड़बड़ा के आँखे खोल दी. मेने उसके को चूमा 'पूजा खाना खा लो.

राज-मा तुम जानती हो ना की में ओर डॉली साथ में खाना खाते है. ...

माँ-चलो आज मेरे हाथ से खा लो.

मा ने मुझको खाना खिलाया फिर हम सब सोने चल दिए. मेने अपना बनियान निकाला, पैंट निकाला ओर बेड लेट गया. तभी डॉली आई वो अभी मेरा शॉर्ट ही पहनी हुई थी. डॉली ने रूम अंदर से बंद किया शॉर्ट

निकाल के मेरे सीने पे सर रख कर सो गयी.

मेने उसको बाहों में जकड़ लिया.

डॉली मेरे होंठो को अपने होंठो में भरते हुए चूसने लगी. गुलाब के पंखुड़ीयो जैसे होंठो का अहसास पाते ही में भी उसके होंठो को चूसने लगा.

में धीरे-धीरे उसकी नंगी पीठ को सहला रहा था. मेने धीरे से डॉली के ब्रा को खोलकर निकाल दिया. मेने धीरे से डॉली को नीचे पलटा उसके उपर आ गया मेरा लंड एकदम लोहे के छड की तरह खड़ा हो गया था जो डॉली के पेट से रगड़ खा रहा था. में डॉली के होंटो को चूस्ते हुए गाल, गरदन को चूमते हुए उभारों पे आ गया डॉली के दोनो उभारों के निप्पल भूरे रंग के थे.

उन्को देखते ही मेरे मूह में पानी आ गया. में एक निप्पल को जितना हो सके उतना अपने होंठो में लेकर चूसने लगा . में जैसे ही डॉली के उभारों को मूह में भरा वैसे ही डॉली सिसकारी भरने लगी आ......... ,' आस....म्म्म्ममम..एयेए
 
उन्को देखते ही मेरे मूह में पानी आ गया. में एक निप्पल को जितना हो सके उतना अपने होंठो में लेकर चूसने लगा . में जैसे ही डॉली के उभारों को मूह में भरा वैसे ही डॉली सिसकारी भरने लगी आ......... ,' आस....म्म्म्ममम..एयेए

में कभी एक को कभी दूसरे को चूसने लगा. में एक हाथ नीचे लेजाकर उसकी चूत पे हाथ फेरने लगा. अचानक डॉली का शरीर अकड़ने लगा ओर वो मेरे सर को अपने उभारों पर दबाते हुए झड़ गयी. डॉली ने झड़ते ही मुझको उपर खीची ओर मेरे होंठो को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी.

'में भी डॉली के शहद भरे होंठो को चूस्ते हुए उसके उभारों को मसलने लगा. अचानक मुझे ऐसा लगा की मेरे सारे शरीर का खून लंड पे जमा हो रहा है.

फिर में चीखते हुए झड़ गया. में झड़ते ही डॉली के उपर ढेर हो गया.

फिर में डॉली के नंगे उभारों के ऊपर सर रख कर लेट गया हम दोनो बुरी तरह हाँफ रहे थे. थोड़ी देर बाद डॉली को बाहों में कसते हुए पलट गया. अभी डॉली मेरे ऊपर थी मेरे से बुरी तरह लिपटी हुई थी . हम दोनों उसी तरह बाहों में बाहें डाले कब सो गये पता ही नही चला. मुझको अचानक आधी रात में जोरदार सूसू लगी.\

में जब पेशाब करके अपने रूम में लौटा तो मुझको मा के रूम से हल्की सिसकारी की आवाज़ सुनाई दी .

मेंने डॉली की ओर देखा बेपर वाह सो ई हुई थी. में धीरे से अपने रूम से निकला बाहर कुण्डी लगाई.

मा के रूम के की ओर बढ़ा. मा के रूम के पास पहुचते ही वो आवाज़ ज़ोर से सुनने लगी.

में जैसे ही मा के रूम के दरवाजे पर हाथ रखा "दरवाजा अपने आप खुल गया जैसे ही दरवाजा खुला मेरी नज़र मा पे पड़ते ही पैरो तले ज़मीन खिसक गयी.".

मा मदरजात अवस्था नंगी लेटी हुई थी

वो अपने एक हाथ से अपने उभारों को मसल रही थी, एक हाथ से अपनी चूत को रगड़ रही थी.

मेरी नज़र जैसे ही उन पर पड़ी मेरी साँसे ही रुक गई 'क्या गदराया हुआ जिस्म था बड़ी 2 छातिया. चूत तो पाव रोटी की तरह फूली हुई थी. अचानक मेरी नज़र जैसे ही उनके चेहरे पे पड़ी मेरा सारा नशा दूर हो गया.

मा बहुत बेचैन दिखाई दे रही थी. में धीरे से दरवाजा अंदर से बंद किया ओर मा के पास में चल गया. मेने जाकर मा के सिर पे हाथ फेरा . उनके सिर पे हाथ फेरते ही मेरी गान्ड फॅट गयी. उनका सिर आग की तरह जल रहा था. तभी मा ने हड़बड़ा कर आँखे खोली.

माँ-तू....म..यहा कर रहे हो ?

राज - मा वो आपको क्या हुआ है.. आपका सिर क्यो जल् रहा है....

मा अपने शरीर को एक चादर से ढँक ली...

माँ-मेरा सोना बेटा कुच्छ नही हुआ है.

राज - नही मा तुम्हे मेरी कसम सच बताओ.

मा ने मुझको अपनी बाहों में भर लिया.

मा का पूरा शरीर भट्टी की तरह तप रहा था. में डरे के मारे काँपने लगा...मा मेरे बालो में उंगलिया फेर रही थी.

माँ-.....बेटा तुम तो जानते हो की तुम्हारी पिता जी नही है..शरीर की गर्मी बर्दास्त नही होता.. तो कभी कभी उंगली से ही कर लेती हू...लेकिन फिर भी मुझे शांति नही मिलती.

अब तो लगता है की ये गर्मी मुझको मार कर ही दम लेगी.. मा की बात सुनकर मेरा सबर का बाँध टूट गया. में फफक-फफक कर रोने लगा. मा मुझको चुप कराने के प्रयास करने लगी लेकिन में चुप नही हो रहा था.

मुझको लग रहा था की मा अब मर जाएँगी.

में जब चुप नही हुआ तो मा मेरे दोनो गालो पे अपने हाथ रख कर मेरा चेहरा ऊपर उठाई.. में जब चुप नही हुआ तो मा ने वो किया जिसका मेने सपने में भी कल्पना नही किया था.

मा मेरे होंटो को अचानक अपने होंठो मे भरकर चूसने लगी... मेरे सारे शरीर में करेंट दौड़ गया. मुझे तो ऐसा लगा की में जन्नत में पहूच गया हू.
 
में अपने दोनो हाथों से मा को अपने बाँहो में भरते हुए पागलो की तरह चूसने लगा. मुझे तो मेरी रूह मिल गयी थी ,( उसको प्यार करने के लिए भगवान को भी ठुकरा सकता था.)

में तो मा के होंटो को ऐसे चूस रहा था. जैसे कोई छोटा सा बच्चा अपनी मा के उभारों से दूध पीता है.

मा र्जोरर्जोर से सिसकारिया भर रही थी... राज......र..आज...आसस्सस्स.....ईईई

.....वववववव..असशह...

मा की सिसकारियो की आवाज़ सुनकर में ओर ज़ोर-शोर से कभी उपर वाला कभी नीचे वाले होंट को चूसने लगा.

मा मुझको बुरी तरह सेजकड़ी हुई थी.

अचानक मा का शरीर अकडने लगा वो मेरे होंटो को चूस्ते हुए झड़ गयी.....

लेकिन में अभी नही झड़ा था.

हम दोनों थोड़ी देर उसी तरह पड़े रहे.

जब मा की साँसे नॉर्मल हो गयी तो उसने मुझको थोड़ा ऊपर उठने को कहा , ' में अपने कहुनिओ के बल ऊपर उठ गया. में जैसे ही ऊपर उठा तो मा ने अपने शरीर के ऊपर से चादर उठा कर नीचे फेंक दी.

अब मा पूरी तरह से नंगी थी. मेने अपना अंडरवेर निकालकर नीचे फेंक दिया.

मा जैसे ही मुझको ऊपर खीची.

राज-मा में आपको प्यार करूँगा बस तुम कोई हलचल मत करो..

मा को बहुत शरम आ रही वो उलटी लेट गयी.

मेने अब मा के पीठ पर किश पे किश करना शुरू कर दिया. मा फिर से सिसकारी भरने लगी.

आसस्स................... अजहह..सद्द्द्द्दद्ड.................. सस्स्स्स्स्स्स्सस्स...

में नंगी पीठ पर किश करते हुए .. धीरे-2 गर्दन पर किश करने लगा.. मेने अचानक से कान की लौ को होंटो मे भरते हुए ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा..................... मेने एक हाथ नीचे सर काते हुए मा के मखमल से भी ज़्यादा मुलायम उरोजो को बहुत ही प्यार से सहलाने लगा.

जैसे वो कोई काँच हो ज़्यादा ज़ोर से दबाने पेर टूट जाएँगे.

मा: बहुत ज़ोर 2 से सिसकारी भर रही थी.....आआआअ............हह....म्म्म्मम....सस्स.....

में कभी कानो को कभी गर्दन को किसी आम की भाँति चूस रहा था....

मा का शरीर फिर से आकड़ा वो दूसरी बार झड़ गयी.

मेने मा को सीधा किया ओर उनके एक शहद भरे निप्पल को होंठो में भरते हुए चूसने लगा. दूसरे को धीरे-धीरे मसलने लगा..थोड़ी देर के बाद मा फिर से गरम होने लगी,

मैं माँ की चुचियों को बारी बारी से चूसने लगा मा फिर से सिसकारिया भरने लगी

...................आआआ ...ब्ब्ब्बबब....हह....म्म्म्मम....सस्स

राज मेरे लाल जल्दी से अपने हथियार को अंदर डाल दे..

मेरा बुरा हाल था मेरा (लंड 8" लबा ओर 3" मोटा है).. बुरी तरह से अकड़ गया था.

में मा के होंठो को अपने होंठो में भरते हुए लंड को चूत की फांको में रगड़ने लगा.

मेने ने अपने हाथों से लंड को सेट किया...ओर .. धीरे-धीरे लंड को चूत में अंदर करने लगा.

अभी सूपड़ा ही अंदर गया ... की मुझको ऐसा लगा जैसे मेरा लंड किसी आग की भट्टी में जा रहा हो.

मेरे रोम रोम में मस्ती की लहर दौड़ गयी..

मेने मा के गुलाबी होंटो को अपने होंठो में भरा.

फिर अपनी बाहों में जकड़ते हुए एक बहुत ही जोरदार धक्का लगाया

एक ही बार में मेरा पूरा लंड मा की सभी दीवारो को तोड़ते हुए अंदर चला गया..

......................
 
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