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Incest खूनी रिश्तों में प्यार

मा थोड़ा सा छटपटा गयी. में थोड़ी देर वैसे ही रुक गया उनके उरोजो को मसलने लगा..

मा धीरे-धीरे नॉर्मल हो गयी. अब मेने धक्का लगाना चालू कर दिया. मा भी अपनी गान्ड हिल्ला-हिल्ला कर सहयोग करने लगी.. में उनके अमृत भरी उभारों को चूस्ते हुए जोरदार धक्के देने शुरू कर दिया....

..... माँ ज़ोर ज़ोर से सिसकारी भर रही थी अह्ह्ह्ह्ह्ह और ज़ोर से चोदो अह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह..आआआ................... ...हह....म्म्म्मम....सस्स

ऐसे ही में झड़ने वाली हूँ

अचानक मा का शरीर अकडा उसने अपना पानी छोड़ दिया ... उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ने लगी...

मुझको ऐसा लगा की मेरे सारे शरीर का खून लंड में जमा हो रहा है. फिर मेरा संयम टूट गया में मेने आँखरी धक्का लगाया लंड को बच्चेदानी में ठेलते हुए झड़ने लगा....मेरे वीर्य से मा के पूरी

चूत भर गयी...थी .. थोड़ी देर सुसताने के बाद में उठा अपना अंडरवेर पहना..मा के माथे पर एक किश किया..ओर मा के रूम से बाहर आ गया. अपना रूम खोलकर अंदर आ या अंदर से रूम को लॉक किया ओर पलंग पर लेट गया .तभी मेरी नज़र डॉली मौसी पे गयी वो बिल्कुल बच्चों की तरह सो रही थी.मेने डॉली को धीरे से अपने ऊपर खींचा ओर उसको अपनी बाहों में भरते हुए नींद के आगोश में चला गया..................

उस रात बहुत स्कून की नींद आई. कब सुबह हुई पता ही नही चला...

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जब नींद खुली तो सुबह के 8:00 बज रहे थे. तभी मेरी ध्यान आ या की डॉली तो है नही.. शायद उठ गयी है ..

राज लेटेलेटे ही रात को मा के साथ बिताए हुए पॅलो के बारे में सोच रहा था की..

तभी कोई रूम में एंटर हुआ मेने कनखियो से उसके ओर देखा.... वो डॉली थी ...

शायद स्नान करके आ ई थी... उसके बदन पे एक मटर तौली थी..... वो किसी परी से कम नही लग रही थी....

मे अपने आँखे बंद करके सोने का नाटक करने लगा.. धीरे-धीरे डॉली मेरे पास आकर मुझे जगाने लगी.. उसके रेस्मी बालो मे से पानी की छोटे-छोटे बूंदे टपक रहे थे... उसने मेरे होंठो को धीरे से चूमा..

मेने अपनी आँखे खोली किसी भोले बच्चे की तरह चुपचाप पड़ा रहा...डॉली सीसे के सामने अपने बालो,को सवारने लगी....

राज:- हाई जान नाना-नानी कहा है..

डॉली- मा बाबू जी ओर दीदी खेतो में गये है.....

पूजा स्कूल गयी है...

इतना कहकर वो फिर से अपने बालो को सवारने लगी....

में धीरे से नीचे उतरा डॉली को अपनी ओर घुमाते हुए ..एक ही झटके में उसके तौलियो को अलग कर दिया...

डॉली एक ब्लू कलर की पैंटी मे थी

में उसको खींचते हुए अपनी बाहों में भर लिया.

ओर डॉली के बालो में हाथ घुसाते हुए उसके ऊपर वालो होंठो को चूसने लगा , 'डॉली भी मुझे सहयोग करने लगी.... मेरे पीठ पे हाथ घुमाने लगी..

में डॉली को ओर चिप काते हुए अपने हाथों को उसके ब्रा के स्टारफ़ पे हाथ घुमाते हुए उसके ब्रा को खोल कर अलग कर दिया..

जब डॉली की नंगी चुचियाँ मेरे नंगे सीने में पड़ी.. तो मेरे सारे शरीर में बिजली दौड़ गयी...में अपना हाथ नीचे सर काते हुए डॉली के पैंटी को भी निकाल दिया....अपना अंडरवेर भी निकाल दिया........में डॉली के सिर को पकड़ते हुए ...कभी ऊपर वाले तो कभी नीचे वाले होंठो को चूसे जा रहा था....मेने डॉली

के हाथ पकड़ा ओर अपने लंड पेर रख दिया

डॉली के नंग चुतड़ों को धीरे -2 मसलने लगा..

मेने उसके रस भरी जिब को चूसने लगा.मुझ को मेरा मनपसंद ख़ज़ाना मिल गया................... था....

डॉली अभी मेरा लंड को सहलाए जा रही थी . में बुरी तरह से सिसक रहा था....

...................

राज-जान एक बार मेरे लंड को चूसो ना बड़ा मज़ा आएगा

डॉली - ची.... ची ये भी कोई चूसने वाली चीज़ है.. इस तो पेसाव किया जाता है.......

राज: -प्लीज़ एक बार तुम्हे अच्छा नही लगा तो निकाल देना..

डॉली नीचे झुकी मेरे सुपाडे को होंठो में भर लिया... उसके गरम गरम मूह में लंड जाते ही मेरे मूह से एक लुंबी सिसकारी फुट पड़ी................... डॉली ...मे .... .................................री..जान

हह.....ऊओ

डॉली को लगा की मुझे मज़ा आ रहा है... वो जितना हो सके उतना अपने मूह में मेरे लंड को आगे -पीछे करने लगी

अचानक मेरा शरीर अकडने लगा... में बुरी तरह सिसकते हुए झड़ने लगा... ..

मेने डॉली के बालो को मज़बूती से पकड़ते हुए उसके मूह ही झड़ गया...1/2 मिनट तक झड़ता रहा

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जब मेरा सारा पानी निकल गया तो मेने डॉली को छोड़ा ...

मस्ती में मेरी आँखे बंद हो गई थी.. ओर में धडाम से फर्श पर गिर गया...................

जब मेरी नज़र डॉली पे पड़ी तो मेरा काप गया....

डॉली के आँखो से अंशु की धारा बह रहे थे.....

डॉली को आँखो से अंशु बह रहे थे. राज ने डॉली को उठाया ओर बिस्तर पर लेटा दिया..वो अभी रोए जा रही थी.....

राज ने धीरे से डॉली के दोनो पैरो को फैलाया , राज ने जब डॉली की चूत के तरफ देखा तो पूरे शरीर में सनसनी दौड़ गयी.. डॉली की चूत के दोनो लब चिपके हुए थे.....

चूत के दोनो लब गुलाब के पंखुड़ीयो की तरह खिले हुए थे...

मेने धीरे से उसके जाँघो पर हाथ फिराया...

मुझसे रहा नही जा रहा था....

मेने डॉली की चूत को होंटो मे भर लिया. ओर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा...

अचानक डॉली के मूह से जोरदार सिसकारी फूटी.. ......आआआ................. हह....म्म्म्मम....सस्स

वो तो पहले ही काफ़ी गरम थी..चूत से पानी रिस रहा था.... हल्का नमकीन सा था....

डॉली:- ये क्या कर रहे हो... ओह्ह्ह लग रहा है की में जन्नत में सैर कर रही हू...................

ह.आआआ...................

मेने उसके दोनो कुल्हो अपने दोनो हाथों से मसलते हुए डॉली के गुलाबी चूत को चूसे जा रहा था. डॉली मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी...उसने अपने दोनो पैरों को मेरे गर्दन में लपेट लिया..

डॉली का जिस्म अकड़ने लगा... ... जान मेरा पेसाव निकलने वाला है... जल्दी से मूह हटाओ..

में उसके बातो का ध्यान नही दिया.. डॉली के चुतड़ों को मसलने लगा..साथ ही चूत के भज्नासे को हल्का सा काट लिया.... उसके भज्नासे को काट ते ही.. मेरे सर को अपनी चूत पे दबाते हुए................... झड़ने लगी..

डॉली को जबरदस्त ऑर्गॅज़म फील हुआ.. में उसकी चूत रस को चाट गया...................

डॉली के पानी से मेरा पूरा चेहरा भरा हुआ था..... ..

डॉली का ध्यान मुझ पर पड़ा तो उसने उसने मुझको अपने ऊपर खींच लिया ..

मेरे पूरे चेहरे को चूमने लगी....... (लग रहा था की में बरसो बाद मिला हुआ हू)....

.. राज:- जान 'उसकी चूत के दरारों में उंगलियो फेरते हुए' चुदाई नही करवाओगी.'

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मेरे मूह से

......चुदा शब्द सुनकर डॉली शरमा गई मुझको पलटाई और मेरे सीने में मुँह छीपाली

डॉली:-में ने सोचा है ... शादी के बाद ही अपना कुंआरा पन आपको सौपुंगी.

थोड़ी उसी तरह इधर-उधर की बाते करते रहे..

...राज:-मुझे आम नही खिलाई

डॉली :- आम कहाँ है... चलो फ्रेश हो जाओ खाना खाते है मुझको भी बहुत ज़ोर से भूख लगी......

राज:-नही मुझको आम खाना है...

डॉली :- कहाँ है आम ...

राज:- यही पे है... तुम्हारे पास ही है...

डॉली :-..मेरे पास कहाँ है.. शायद डॉली को अभी बात समझ नही आ रही थी... की में उसके उभारों को कह रहा हू......

डॉली :- अगर तुमको आम दिखाई दे रहा है... तो खा जाओ..

राज ने डॉली के दोनो कंधो को पकड़ते हुए उसके उरोजो के हल्का सा काट लिया..

... .डॉली जोर्से चिल्लाई आआआ...................

...उसने मेरे गले ज़ोर से काट लिया मेरे सीने से चिपक गयी..

... डॉली खाना नही बनाओगी.. डॉली एकदम नीचे उतर गयी.. ..

.........दोनॉ फ़िरसे नहाए फ़िर खाना खाए ....

... चूँकि खाना राज की माँ बना कर गई थी

राज ओर डॉली दोनो अपने रूम में पढ़ने बैठ गये ...................

उनका रिज़ल्ट भी आने वाला था.... ...

राज ओर डॉली अपने स्टडी रूम्स में चले.. पढ़ने के लिए क्योकि .... इन दोनो का 10+2 का रिज़ल्ट आने वाला है..... ...

राज ओर डॉली दोनो साइन्स (सब्जेक्ट ) लिए हुए थे...

थोड़ी देर में पूजा भी स्कूल से आ गयी... ..

पूजा ने जैसे ही मेरे गालो पर दाँतों के निशान देखी..

पूजा:- भैया आपके गाल पर निशान कैसा है.....

.....राज:- हाँ एक जंगली बिल्ली ने काट लिया है

.... मेरी बात सुनकर डॉली एकदम चिड गई

डॉली- में बिल्ली हू................... रुक जा अभी तुझे बताती हू...................

इतना कहकर डॉली मुझको मारने के लिए दौड़ी ...

राज गेट की ओर भागा.. ... .

राज जैसे ही गेट की ओर भागा उसकी मा खेतो से आ रही थी.... मुझको तो ख़ुसी का ठिकाना ना रहा ..

मे मा के पीछे जाकर छिप गया...................

डॉली जैसे ही मुझे पकड़ने आई..

...मा:- क्या कर रहे हो लड़ क्यों रहे हो

.....डॉली:-देखो न राज मुझे बिल्ली कह रहा है

राज;- नही मा ये झूट बोल रही है..... मेने इसको कुच्छ नही कहा है.....

हम दोनो का हरकत देख कर पूजा ज़ोर.... ज़ोर से हँसने लगी....

पूजा को हँसते हुए में भी हँसने लगा.. तो बस डॉली गुस्सा होकर .. जाओ में तुमसे नही बोलूँगी ओर...

मूह फूला कर दूसरी तरह घूम गयी..
 
में जैसे ही मा से अलग हुआ ..... ...तभी अचानक मेरे पैरो के पास एक छिपकली आ गयी

राज:- .... ...मा....आमा

में बहुत ही डर गया................... मे अचानक डरते हुए मा .......................सेचीपक गया

मा:-अरे क्या हुआ जो मेरा बेटा इतना डर गया.

...राज:-मा वो छिपकली

मा:- छिपकली से कोई भला डरता है..... का..

मा के मूह से छिपकली से डरने की बात सुनकर डॉली ओर पूजा ज़ोर.... ज़ोर से हँसने लगी.

असल बात यह थी में छिपकली से डरा नही था केवल डरने का नाटक किया था........ डॉली को हंसाने के लिए ...

रात को हम सब ने मिलकर खाना खाया ओर सो गये दो दिन तो कुछ नही हुआ

...उस दिन हमारा रिज़ल्ट आने वाला था मुझको शहर जाना था रिज़ल्ट निकलवाने..

नानाजी से पैसा लिए शहर की तरफ चल दिया साथ में डॉली भी थी.... जब हम दोनो अपने गाँव के चौराहे पे आए तो हम को बस मिल गयी क्योकि वहाँ से शहर 10 किलोमीटर था

बस में जब हम घुसे तो हमको सीट मिल गया................... शहर में आने पर हमलोग जब नेट से रिज़ल्ट निकलवाने गये तो पता चला रिज़ल्ट अभी नही लोड हुआ है...2 एक घंटे बाद पता चलेगा..तय हुआ शॉपिंग किया जाय..

शॉपिंग करते हुए कब 2अवर हो गया................... पता ही नही चला..हम जल्दी से शॉपिंग माल से बाहर

.....निकले रिज़ल्ट निकलवाने चल दीए

जब रिज़ल्ट निकल वाया तो पता चला ... डॉली के 80 %

ओर मेरा 85 % था प्रिनटाउट करवाकर जैसे ही बाहर आए....

तभी मेरी नज़र रोड पर गया................... एक लड़की रोड पार कर रही थी.... अचानक एक कार बहुत तेज़ी से आई ..

उस लड़की को ठोकर मारते हुए निकल गयी .. वो लड़की बहुत दूर जा गिरी... इतना जल्दी आक्सिडेंट्स हो की उसको

संभलने का मौका नही मिला.... वहाँ पर तुरंत बहुत सारे लोग जमा हो गये .. कोई उस लड़की नही उठा रहा था.... ....

मेने उसको बाहों से उठाया ओर पास में ही सिटी हॉस्पिटल था....

दौड़ते हुए हॉस्पिटल में घुस गया....................

डॉली भी मेरे पीछे ही थी....

हॉस्पिटल में पहुचते ही नर्स उस लड़की को अंदर ले गयी ...................

उसके कंधे पर लेडिस बेग था.. में उसको ले कर देखने लगा.. उसमे कुच्छ रुपया था.... एक आइडेंटी कार्ड भी था.. जो शायद कॉलेज का था ..

.... उसका नामे जब मेने पढ़ा तो में चौक पड़ा.

'डॉली ख़ान'...

जब मेरी नज़र आइडेंटी कार्ड के अंदर पड़ी तो उसमे एक छोटा सा कागज था जिस पर किसी का नाम ओर फोन नंबर था.... आसिफ़ ख़ान डी जी पी मॉब... 94...................

अभी में उसके बेग चेक ही कर रहा था की 'डॉक्टर आ गये '

डॉक्टर:- देखिए ये आक्सिडेंट्स का मामला है..... तो पोलीस को बुलाना पड़ेगा..

मेने पोलीस को इन्फर्मेशन दे दी है..... थोड़ी देर में पोलीस आ जाएगी..

डॉक्टर:- ओर हा मेने इलाज़ कर दिया है..... आपने बहुत अच्छा किया टाइम ले आए.
 
हॉस्पिटल में पहुचते ही नर्स उस लड़की को अंदर ले गयी ...................

उसके कंधे पर लेडिस बेग था.. में उसको ले कर देखने लगा.. उसमे कुच्छ रुपया था.... एक आइडेंटी कार्ड भी था.. जो शायद कॉलेज का था ..

.... उसका नामे जब मेने पढ़ा तो में चौक पड़ा.

'डॉली ख़ान'...

अरे ये तो कमाल हो गया इसका नाम भी डॉली है

जब मेरी नज़र आइडेंटी कार्ड के अंदर पड़ी तो उसमे एक छोटा सा कागज था जिस पर किसी का नाम ओर फोन नंबर था.... आसिफ़ ख़ान डी जी पी मॉब... 94...................

अभी में उसके बेग चेक ही कर रहा था की 'डॉक्टर आ गये '

डॉक्टर:- देखिए ये आक्सिडेंट्स का मामला है..... तो पोलीस को बुलाना पड़ेगा..

मेने पोलीस को इन्फर्मेशन दे दी है..... थोड़ी देर में पोलीस आ जाएगी..

डॉक्टर:- ओर हा मेने इलाज़ कर दिया है..... आपने बहुत अच्छा किया टाइम ले आए.

राज:- मन में ही तो ये है ... डी.जी.पी. साहब है..

हम सब जब अंदर गये तो... डी.जी.पी. साहब उस लड़की को देख कर ठिठक गये ...

उनके मूह से अनायास ही निकल गया... डॉली..

डी.जी.पी.-डॉली ये कैसे हुआ

डॉली ख़ान-पता नही में जब रोड पार कर रही थी.... तो एक कार मेरे तरफ आ रही थी.. उसके बाद पता नही चला ..

जब आँख खुली तो हॉस्पिटल में पाई..वैसे आसिफ़ ये दोनो कौन है.....

डी.जी.पी. आसिफ़ ख़ान :- इन्होने ही तुमको हॉस्पिटल पहुँचाया..’

डॉली ख़ान:-मेरा बॅग कहा है.....

राज:-मेरे पास है..... मेने उस बॅग को आसिफ़ सर को दे दिया...

फिर आसिफ़ सर ने डॉली के माथे पर हाथ फिराया...

डी.जी.पी.आसिफ़ ख़ान:- अच्छा डॉली तुम आराम करो में आता हू...................

हम बाहर निकल आए

राज:-तो सर में चलता हू.

आसिफ़ ख़ान:- चले जाना .. फिर हम बैठ कर बात करने लगे..

..आसिफखान:- माइ सेल्फ़ डी.जी.पी.आसिफखान तुमने डॉली की नही मेरी जान बचाई है.....

तुम नही जानते डॉली मेरी जान है..... ये मेरा कार्ड रख लो तुमको जब भी ज़रूरत पड़े तो मुझको कॉल करना.

में हमेशा तुम्हारी सेवा में हाज़िर रहूँगा.

राज:-थॅंक यू सर जो अपने इस नाचीज़ को इतना समझा..

में आपको ज़रूर याद करूँगा .. अब में चलता हू...................

राज ओर उसकी जान डॉली हॉस्पिटल से बाहर आ गये..

वहाँ से बस स्टॅंड की तरफ चल दिए .. जैसे ही हम बस स्टॅंड में पहूचे तो हमको बस मिल गया.............

थोड़ी देर हम अपने गाँव के चौराहे पे खड़े थे..वहाँ से हम दोनो मुस्कराते हुए घर की ओर निकल गये..आज हम दोनो बहुत ही खुस थे.. जब घर के अंदर दाखिल हुए तो.. सब कोई टीवी देख रहे थे.....

नानाजी:-कैसा रिज़ल्ट आया है..

राज:-आप देख लीजिए डॉली नानाजी को रिज़ल्ट दिखाओ..

डॉली ने नानाजी को रिज़ल्ट वाला पेपर दे दी ..

नानीजी:-इनको कहा पढ़ने आता है..... जो रिज़ल्ट चेक करेंगे..

नानाजी:-हिन्दी तो पढ़ लेता हू इंग्लीश नही आती है.....

तभी पूजा जो मा के गोदी सर रख के लेटी हुई थी वो बीच में टपक पड़ी..

पूजा:- लाइए नानाजी में पढ़ देती हू..

फिर पूजा ने नानाजी को हम दोनों के मार्क्स बता दी..

...... नानाजी एक खड़े होकर …..सुनो भाई इनका रिज़ल्ट बहुत ही बढ़िया आया है..... राज का 85% & डॉली का

80%...

आज तुम दोनो ने

मेरा सीना बहुत ही

.....चौड़ा कर दिया है
 
फिर हमको अपने पास बुलाए.. जब हम उनके पास गये तो उन्होने हमको ज़ोर से गले से लगा लिया....जब हम अलग हुए तो क्या देखते है..... की नानाजी के आँखो से आँसू बह रहे थे..

राज & डॉली :- आप क्यो रो रहे है हमसे कोई ग़लती तो नही हो गयी..

नानाजी:- अरे मेरे बच्चो तुमसे भला कोई ग़लती हो सकती है..... ये तो ख़ुसी के मारे मेरे आँखो से

आँसू निकल पड़े....

नानाजी:- मेने तुम्हारे लिए एक समान लाया हू जो तुम्हारे रूम रखा हुआ है.....

आज में सारे गाँव वाले को मिठाई खिलाउन्गा..

हम अपने रूम में

आए जैसे ही हमारी नज़र स्टडी टेबल पे पड़ी तो वहाँ पर एक गिफ्ट पॅकेट रखा हुआ था...

राज कपड़ा बदलते हुए:- डॉली जान देखो तो क्या है..

डॉली ने जैसे ही वो पॅकेट खोली तो उसमे एक नोकिया 1600 सेट मोबाइल था..

डॉली मौसी:- ख़ुसी से चहकते हुए जान जी

इसमे तो मोबाइल है..

में भी बहुत खुस हो गया ..मेने जल्दी से कपड़े बदले मोबाइल लेकर जैसे ओंन किया उसमे एक आरटेल का सिम कार्ड लगाया हुआ था..........

में ओर डॉली जैसे ही अपने रूम से बाहर निकल कर टीवी वाले रूम में गये तो वहाँ पर कोई नही था..

केवल पूजा बैठी हुई थी..

राज:- पूजा सब कोई कहाँ है.

पूजा:- भैया मा अपने रूम में आराम कर रही है..... नाना-नानी अपने रूम में है.....

ओर हा मा ने आपको बुलाया है..... शायद आपसे कोई काम है.....

राज:- ठीक है..... में मा के पास जाता हू तबतक आज तुम दोनो मिलकर खाना बनाओ..

उसके बाद डॉली ओर पूजा खाना बनाने चली गयी.. में मा के रूम के तरफ बढ़ गया..................

में मा के रूम के अंदर गया ओर गेट को अंदर से बंद कर दिया....मेरी नज़र जैसे ही बेड पर पड़ा तो मेरे पाँव के नीचे से ज़मीन ही खिसक गयी...

मा अपने दोनो पैरो को फैलाए एकदम नंगी अवस्था में लेटी हुई थी.

उनके शरीर पर एक कपड़ा का टुकड़ा भी नही था. उनकी चूत किसी पाव रोटी की भाँति फूली थी..

चूत के दोनो होंठ खुले हुए थे अंदर का भाग एकदम गुलाबी था..

चूत के दोनो होंठ गुलाब की फूल की तरह खिले हुए थे.

ये नज़ारा देखकर तो में तो अपना होश ही गँवा चुका मे अपने सारे कपड़े निकालने लगा. मा मेरे सारे हरकतों को देख रही थी..

मेने अपने सारे कपड़े निकाले ओर जाकर मा के दोनो टाँगों के बीच में बैठ गया.. मेरा लंड तो आज मा का ये रूप देखकर 8-9 इंच हो गया था..

में मा के चूत पे एक जोरदार चूमा लिया मा के मूह से सिसकारी फुट पड़ी.. आआआ...................

हह....म्म्म्मम....सस्स

लेकिन धीरे से ..
 
राज ने लंड को बिना गीला किए चूत के छेद में सेट किया ओर एक जोरदार धक्का लगाया..

धक्का इतना जब्बर्दस्त था की लंड एक ही बार में पूरा का पूरा अंदर चला गया ....

मुझको तो लगा की में जन्नत में पहूच गया हू.

उनकी चूत किसी आग की तरह दहक रही थी.

मा दर्द के मारे छटपटा गयी..

मार डाला रे.. सूकर है. की उसी समय जोरदार बारिस होने लगी नही तो सब कोई जान जाता.......

अचानक ही मेरा ध्यान मा के तरफ गया उनके आँखो से आँसुओ की धारा बह रही थी..

में एकदम से होश में आ गया..मा के दोनो उरोजो को मसलते हुए (जो किसी पके हुए आम की भाँति खड़े थे)

आँसुओ को पीने लगा ..

उसके बाद होंठो को अपने होंटो में भरते हुए चूसने लगा... मा मेरे बालो मे हाथ घुमा रही थी.. में नीचे खिसका पके हिए आम की भाँति एक छाती को अपने होंटो में भरते हुए धक्का लगांने लगा.

मा नीचे से गान्ड उठा के साथ दे रही थी..उनकी चूत रिस रही थी..जिसे पूरे कमरे में फॅक...फॅक..फ़च्छ..फॅक.. की मधुर संगीत गूँज हो रही थी.. में अब कभी एक कभी दूसरी उभारों को चूस्ते हुए धक्कों की बरसात किए जा रहा था..अचानक मा का शरीर अकड़ने लगा ओर वो सिसकते हुए झड़ने लगी.. उन्होने अपने दोनो पैरो का हार बनाकर मेरे पीठ पर लपेट ली. अपने हाथों से मेरे सिर को अपने उभारों पे दबाते हुए झड़ गयी..ऐसा लगा की मुझे अपने शरीर में घुसा लेना चाहती हो..

उनको जबरदस्त ओर्गसम हुआ ..उनके पानी से मेरा लंड बुरी तरह भीग गया.लेकिन में तक नही झड़ा था..

में मा के उभारों को मसलते ओर चूस्ते.....में अब धीरे -2 धक्के लगा रहा था..मेरा लंड फॅक..फ़च्छ..फॅक.. की आवाज़ करता हुआ अंदर बाहर होने लगा..

मा फिर से मेरे ताल में ताल मिलाकर भरपूर साथ दे रही थी..मेने उनके एक पैर को अपने अपने कंधे पे रखा ओर जोरदार धक्के लगाना चालू कर दिया..

मा अपने उभारों को मसलते हुए जोरदार सिसकारी भर रही थी...आआआ...................

हह....म्म्म्मम....सस्स ....आआआ................... .

मेरा सारा खून मेरे लंड में जमा होने लगे मेने एक आख़िरी धक्का लगाया मा को बाहों में कसते हुए उनके चूत में ही झड़ गया...................

मा मेरे वीर्य की गर्मी सह नही पाई वो भी एक लंबी सिसकारी के साथ झड़ गयी..

में उनके ऊपर ही ढेर हो गया.. मुझे तो ऐसा लगा की मेरे शरीर में खून ही नही बचा है..... में बुरी तरह से हाँफ रहा था.. मा मेरे पीठ को सहला रही थी..

जब में नॉर्मल हुआ तो मा के ऊपर से उतरा कपड़े पहना उनके माथे पर एक छोटा सा किश किया गेट खोलकर बाहर निकलगया..

ओर सीधा बाथरूम में फ्रेश होने चला गया.. जब बाथरूम से निकाला तो मा भी खड़ी थी में जाकर टीवी पे फिल्म देखने लगा ...

राज जाकर टी वी. देखने लगा.

थोड़ी देर में राज की मा भी आ गयी.. जब राज ने अपनी मा को देखा तो देखता ही रह गया.....

उसने बहुत मस्त सारी पहनी हुई थी. राज तो एकटक अपनी मा को देखा जा रहा था.. जैसे किसी ने करेंट का सॉर्ट लगा दिया हो ..

उसकी मम्मी ने उसको हिलाया तो राज की तंद्रा टूटी..

राज:- क्या हुआ मा

राज की माँ-ऐसे क्यो घूर रहे हो..
 
राज:- क्या हुआ मा

राज की माँ-ऐसे क्यो घूर रहे हो..

राज:- मा तुम बहुत सुंदर हो एकदम जवान लड़कियों की मात दे सकती हो.

राज की मा शर्माते हुए चल हट में सुंदर थोड़े हू में तो बूढ़ी हो गयी हू....

राज थोड़ा गुस्सा होते हुए ' खबरदार जो तुमने अपने आप को बूढ़ी कहा तो' तुम किसी परी से कम नही हो.. तुम्हारे ये घने बाल ऐसे लगते है..... जैसे बदल हो जो अभी बरस पड़ेंगे .तुम्हारे होंठ इतने रसदार है..... की मन करता है..... की में अभी इसका सारा रश पी जाउ.......

बस बहुत हो गया..मुझको एक ज़रूरी बात करनी है..

देखो राज बेटा में जानती हू की हमारे बीच जो संबंध बने है..... वो एक माँ-बेटा के बीच में नही बनता..

राज:-आप कहना क्या चाहती हो.

माँ- यही की ये जिस्मानी संबंध केवल पति-पत्नियो के बीच ही अच्छा है.....

राज:- मा मेरे पास इसका भी एक उपाय है.....

लेकिन इसमे बहुत रिस्क है.....

अच्छा एक बात बताओ क्या तुम मुझको अपना पति बनाओगी.... दिल से बताना ...

राज की मा के आँखो से आँसू टपक पड़े उसने राज को खींच कर अपने छाती से चिपका ली.. ''तुमने मेरे दिल की बात कह दिया बेटा लेकिन ये कैसे संभव हो सकता है..... '' फिर ये तुम डॉली से प्यार करते हो .. ये

दुनियावाले हमें जीने नही देंगे..

राज:-अपनी मा से ओर चिपकते हुए तुम चिंता ना करो मा मेरे पास इसका उपाय है..... रही डॉली की बात तुमसे ज़्यादा तो में किसी को भी प्यार नही करता..क्यो की तुम मेरी आत्मा हो...भला आत्मा के बिना शरीर का कोई फ़ायदा है.....

बस 1 यियर्ज़ की बात है.....

उतने दिन तक हमें बहुत ही सावधान रहेना पड़ेगा..

फिर मेने मा को वो उपाय बताया..जिसे सुनकर मा बहुत खुस हो गयी....

अचानक वहाँ पे पूजा आ गयी ..

पूजा:- मा भैया को तो बहुत प्यार कर रही हो.. मुझको तो कभी दुलार नही करती ..

मा पूजा को भी गले से लगातेहुए है..... मेरा बेटा ...

हम तीनो हस पड़े..

खाना तैयार हो गया था ..

सबने मिलकर खाना खाया सब कोई अपने-2 रूम में सोने चले गये..................

उसी तरह 5 दिन गुजर गये लेकिन राज ओर उसकी मा के बीच कोई खास बात नही हुआ.....

जब रिज़ल्ट आए हुए 5 दिन गुजर गये लेकिन अभी भी मार्क शीट का कोई था पता

नही था.. तभी उसे आइडेंटी कार्ड पे नंबर देखाई दिया जो उसके स्कूल का था ...

उसने जब वहाँ पे फोन लगाया तो पता चला की आज से ही मार्क शीट मिल रहा है..

राज ओर डॉली दोनो तैयार हुए ओर मार्क शीट लेने के लिए निकल पड़े.. ..

((क्योकि उनका स्कूल 10+2 था इसलिए में स्कूल लिख रहा नही तो कॉलेज से होते तो कॉलेज लिखता))

मार्क शीट लेकर निकले तो पता चला की पोलीस में इनस्पेक्टर के पद पे वेकेन्सी निकला हुआ है.....

राज ओर डॉली दोनो जल्दी से घर आ गये.....

घर आने पर पता चला की राज के नाना जी खेतो में घूमने गये है.....

दोनो अपने रूम गये कपड़े बदले सो गये, मुझे नींद में ही अहसास हुआ की कोई मेरे ऊपर चढ़कर मेरे होंठो को चूस रहा है..... मेने जैसे ही अपनी आँखे खोली तो पता चला की ये डॉली जान है.....

राज:- डॉली को बाहों में कसते हुए '''क्या हुआ जान क्यो इतना प्यार कर रही हो'''

डॉली:- सोते हुए तुम बहुत ही मासूम लग रहे थे 'एकदम छोटे बच्चे की तरह' . मुझसे रहा नही गया में एकाएक तुम्हारे इन अमृत भरे होंठो को चूसने लगी...

हा चलो बाबूजी बुला रहे है.....

राज:-हा चलो . .में ओर डॉली नानाजी के पास चले गये.....

नानाजी को जब पता चला की इनस्पेक्टर की वेकेन्सी आया है..... तो बहुत ही खुस हो गये ..

नानाजी:- ये तो बहुत ही बढ़िया बात है..... .

तू अपने करो खर्च की चिंता मत करो ..

दूसरे दिन में ओर डॉली दोनो ने मिलकर अप्लाई कर दिया..

उस दिन खूब मन लगाके तैयारी करने लगे..

नानाजी ने एक मोटरसाइकल भी खरीद दी थी..

कॉल लेटर आया एग्ज़ॅम हुआ..

रिज़ल्ट भी बहुत बढ़िया आया, लेकिन डॉली का रिज़ल्ट नही आया.. फिर भी वो खुस ही थी .......
 
पूरे गाँव में तहलका मच गया..

बस अब इंटरव्यू में चले जाना था.

राज के नानाजी ने एलान किया की राज यदि इंटरव्यू मे पास हो जाएगा तो सारे गाँव वालों मिठाई खिलाएँगे..

इंटरव्यू का दिन भी आ गया

राज ने अपने सारे डाक्युमेन्ट लिए.. नाना-नानी ओर मा के पाँव च्छुकर आशीर्वाद लिया..

अपनी छोटी बहन पूजा को प्यार दिया बाइक लेकर इंटरव्यू देने निकल पड़ा....

जब इंटरव्यूस सेंटरे पे गया तो पता चला की वो ऑलरेडी 2 अवर्स लेट है...

डर के मारे गान्ड ही फॅट गयी लगा की अबतक इंटरव्यू हो गया होगा..

लेकिन अंदर जाते ही जान में जान आई क्योकि बहुत लड़के बैठे हुए थे...

राज उन सभी लड़को से पूछते हुए :- आपलोग क्यो बैठे हुए है इंटरव्यू हो गया क्या..

उनमे से एक लड़का थोड़ा गुस्सा होते हुए:- इंटरव्यू हो जाता तो यहा बैठ के क्या करते .. 2 घंटो से बैठे हुए है..

राज ने उनके बातो ध्यान नही दिया

राज:- मे आई कम इन सर

सर :- एस कम इन

राज सामने रखे हुए एक चेयर पे बैठ गया..

डाक्युमेन्ट को टेबल के ऊपर रखते हुए '' सर हमलोग 2 अवर्स से बैठे हुए है आपलोग इंटरव्यू क्यो नही ले रहे है.'

उनमें से एक ऑफीसर '' सर इनका इंटरव्यू ले ही लीजिए ये थोड़ा जल्दी में है.''

हाँ तो इंटरव्यू देने आए है

राज:-जी

घर से निकले होंगे तो अपनी माँ को ज़रूर देखे होंगे ..

राज:-जी देखे ही नही बल्कि पाँव च्छुकर आशीर्वाद भी लिए थे..

ऑफीसर:-आपकी मा ने किस रंग की पैंटी... पहनी हुई..... थी

राज को तो मा के बारे में ये बात सुनकर खून खौल गया...जी लाल रंग की ...

ऑफीसर:-अपनी माँ बारे बहुत कुछ जानते है आप ..

राज:-जितना मा अपने बेटे के बारे में जानती है उतना बेटा भी अपनी माँ के बारे में जानता है..

ऑफीसर-कॉन्फिडेन्स अच्छा है..

आपके पिता जी का नाम

राज:- स्वर्गीय जगदीश वर्मा.. ..

ऑफिसर्स:-कॉन्सा प्रूफ है की आप अपने बाप के बेटे है....

इतना कहकर सब ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे...

राज को क्रोध के मारे खून खौल गया..

राज खड़ा हुआ जिसने ये सब पूछा था.. उसका गर्दन पकड़ा और पटक दिया..

एक दूसरा भी आया उसको तो राज ने एक जोरदार लात मारा..

वो कुछ दूर जाकर गिरा ..

दोनो कराहने लगे..

राज:- मेरे प्रूफ खुद मेरे माँ-बाप है जो में अपनी माँ बाप का बेटा हू.. ..अभी में कुच्छ ओर बोलता कि

तभी अचानक वहाँ पे डी.जी.पी. आसिफ़ ख़ान आ गये.. उन्हे देखते ही सब उन्हे सॅलुट मारने लगे...

डी.जी.पी. आसिफ़ ख़ान राज से हाथ मिलाते हुए यहा कैसे आना हुआ..

मेने उनको सारी बाते बताई..

डी.जी.पी.आसिफ़ सर ने तो एकदम गुस्सा होकर उन दोनो को खड़ा किया एक-एक झापड़ रसीद कर दिया.. फिर मेरे से

बात करते हुए यार इतना कुच्छ हो गया तुमने मुझको बताना ज़रूरी नही समझा.. कोई बात नही है तुम अपने डाक्युमेन्ट के सारे कॉपी दे दो.. अब समझो तुम इनस्पेक्टर बन गये...कल ही तुम ट्रैनिंग पे

जाने के लिए तैयार हो जाओ..

राज- थॅंक यू सर अब में चलता हू.

फिर राज वहाँ से निकल गया आज वो बहुत खुस था.... ..

राज जल्दी ही घर आ गया.

जैसे ही राज घर पहुचा तो घर में कोई नही था..

मा .... मा... कहके पुकारने लगा. फिर भी कोई नही बोला....

राज अपनी माँ के रूम में घुस गया...................

राज ने देखा की उसकी मा अपना बाल संवार रही थी ....

इस समय बहुत ही हसीन लग रही थी उनके जिस्म पे एक तौलिया लपेटा हुआ था....

राज ने किवाड़ को बंद किया मा के कंधे पे अपना तुड़ी टीका दिया अपनी बाहों को उनके पेट पेर कसते हुए उनके फूले हुए गालो पे थोड़ा सा चूम लिया.. मा के सॉफ्ट पेट पर अपना हाथ घूमने लगा... बहुत ही मुस्करा रहा था....
 
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